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                <title>Abhishek joshi - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Abhishek joshi RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>ISRO GSLV-F17 मिशन से पहले तिरुमला पहुंचे चेयरमैन वी. नारायणन, भगवान वेंकटेश्वर से मांगा आशीर्वाद</title>
                                    <description><![CDATA[4 सितंबर को श्रीहरिकोटा से GSLV-F17/EOS-05 मिशन का प्रस्तावित प्रक्षेपण होगा। इससे पहले ISRO चेयरमैन डॉ. वी. नारायणन ने तिरुमला मंदिर में दर्शन कर मिशन की सफलता के लिए प्रार्थना की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/isro-gslv-f17-%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%B6%E0%A4%A8-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A4%B9%E0%A4%B2%E0%A5%87-%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A5%81%E0%A4%AE%E0%A4%B2%E0%A4%BE-%E0%A4%AA%E0%A4%B9%E0%A5%81%E0%A4%82%E0%A4%9A%E0%A5%87-%E0%A4%9A%E0%A5%87%E0%A4%AF%E0%A4%B0%E0%A4%AE%E0%A5%88%E0%A4%A8-%E0%A4%B5%E0%A5%80--%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A3%E0%A4%A8--%E0%A4%AD%E0%A4%97%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%B5%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A4%9F%E0%A5%87%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A4%BE-%E0%A4%86%E0%A4%B6%E0%A5%80%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%A6/article-62909"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-09/cm-(1).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के चेयरमैन डॉ. वी. नारायणन ने बुधवार को तिरुमला स्थित भगवान वेंकटेश्वर मंदिर में दर्शन किए। यह यात्रा ऐसे समय हुई है जब ISRO अपने महत्वपूर्ण <strong>GSLV-F17/EOS-05 मिशन</strong> के प्रक्षेपण की अंतिम तैयारियों में जुटा है। मिशन को 4 सितंबर 2026 को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्च किया जाना है। </p>
<p style="text-align:justify;">डॉ. नारायणन अपने साथ GSLV-F17 रॉकेट का मॉडल भी लेकर मंदिर पहुंचे। मंदिर में उन्होंने भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन कर आगामी मिशन की सफलता के लिए आशीर्वाद मांगा। दर्शन के बाद वैदिक विद्वानों ने रंगनायकुला मंडपम में वेद आशीर्वचन किया। मंदिर प्रशासन की ओर से ISRO चेयरमैन को मंदिर का पवित्र वस्त्र और श्रीवारी तीर्थ प्रसाद भी भेंट किया गया। </p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>4 सितंबर को होगा GSLV-F17 का प्रक्षेपण</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">ISRO के आधिकारिक मिशन विवरण के मुताबिक, <strong>GSLV-F17</strong> भारत के जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (GSLV) की 19वीं उड़ान होगी। रॉकेट EOS-05 उपग्रह को सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में स्थापित करेगा। प्रक्षेपण श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे लॉन्च पैड से किया जाएगा। </p>
<p style="text-align:justify;">ISRO ने मिशन के लिए <strong>4 सितंबर को सुबह 2:55 बजे IST</strong> का समय निर्धारित किया है। यानी यह प्रक्षेपण रात के अंतिम पहर में होगा, जब देश के अधिकांश हिस्सों में लोग सो रहे होंगे।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>EOS-05 क्यों है महत्वपूर्ण?</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">EOS-05 एक अत्याधुनिक पृथ्वी अवलोकन उपग्रह है और ISRO के अनुसार यह <strong>भारत का पहला इमेजिंग सैटेलाइट होगा जिसे जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से संचालित किया जाएगा।</strong> इसका उद्देश्य पृथ्वी की निगरानी से जुड़ी क्षमताओं को मजबूत करना है। </p>
<p style="text-align:justify;">जियोसिंक्रोनस कक्षा में उपग्रह की तैनाती से भारत को बड़े क्षेत्र की लगातार निगरानी और पृथ्वी से जुड़े आंकड़े जुटाने की क्षमता बढ़ाने में मदद मिल सकती है। EOS-05 से मिलने वाली इमेजिंग क्षमता का उपयोग पृथ्वी अवलोकन से जुड़े विभिन्न अनुप्रयोगों में किया जा सकेगा। </p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>मिशन पर ISRO की नजर</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">GSLV-F17/EOS-05 मिशन ISRO के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह पृथ्वी अवलोकन क्षमता को एक नए कक्षीय स्तर तक ले जाने का प्रयास है। ISRO की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक GSLV-F17 मिशन के जरिए EOS-05 को सब-GTO में पहुंचाया जाएगा, जिसके बाद उपग्रह को उसकी निर्धारित कक्षा में स्थापित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। </p>
<p style="text-align:justify;">4 सितंबर की लॉन्चिंग से पहले ISRO की टीम रॉकेट और पेलोड से जुड़ी अंतिम तैयारियों और जांच को पूरा कर रही है। मिशन की सफलता के बाद EOS-05 भारत की अंतरिक्ष आधारित पृथ्वी अवलोकन क्षमताओं में एक महत्वपूर्ण नया अध्याय जोड़ सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 02 Sep 2026 13:36:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhishek joshi]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>तमिलनाडु में CM विजय का बड़ा ऐलान: ₹4,800 करोड़ की पेयजल योजनाएं, किसानों-शिक्षकों के केस वापस लेने की घोषणा</title>
                                    <description><![CDATA[तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने विधानसभा में पेयजल सुविधाओं को मजबूत करने के लिए ₹4,800 करोड़ की परियोजनाओं की घोषणा की। साथ ही मई 2021 से अप्रैल 2026 के बीच शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले किसानों और शिक्षकों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने का ऐलान किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/%E0%A4%A4%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A1%E0%A5%81-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-cm-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%9C%E0%A4%AF-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%AC%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A4%BE-%E0%A4%90%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%A8--%E2%82%B94-800-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%A1%E0%A4%BC-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AA%E0%A5%87%E0%A4%AF%E0%A4%9C%E0%A4%B2-%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%8F%E0%A4%82--%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%B6%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%87%E0%A4%B8-%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%AA%E0%A4%B8-%E0%A4%B2%E0%A5%87%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%98%E0%A5%8B%E0%A4%B7%E0%A4%A3%E0%A4%BE/article-62908"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-09/cm.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">तमिलनाडु के मुख्यमंत्री <strong>सी. जोसेफ विजय</strong> ने बुधवार को विधानसभा में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। सरकार ने राज्य में पेयजल सुविधाओं को मजबूत करने के लिए कुल <strong>₹4,800 करोड़ की योजनाओं</strong> का ऐलान किया है। इसके साथ ही मई 2021 से अप्रैल 2026 के बीच अपने अधिकारों, आजीविका और मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले किसानों और शिक्षकों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की घोषणा भी की गई। </p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री ने ये घोषणाएं विधानसभा में <strong>नियम 110</strong> के तहत कीं। सरकार के मुताबिक फैसलों का उद्देश्य बुनियादी सेवाओं को बेहतर बनाना, जनकल्याण को बढ़ावा देना और शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध में शामिल लोगों को राहत देना है। </p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>चेन्नई क्षेत्र के लिए 400 MLD का विलवणीकरण संयंत्र</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">पेयजल योजना के तहत <strong>मिंजूर में 400 MLD क्षमता का विलवणीकरण संयंत्र</strong> स्थापित किया जाएगा। इससे उत्तर चेन्नई, अवाडी, पोन्नेरी और मिंजूर क्षेत्र की पेयजल जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलने की उम्मीद है। अवाडी नगर निगम क्षेत्र के लिए <strong>₹500 करोड़ की नई योजना</strong> भी घोषित की गई है। इसका उद्देश्य सभी घरों में 24 घंटे पेयजल आपूर्ति उपलब्ध कराना है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा मदुरै और कुड्डालोर नगर निगमों, नौ नगरपालिकाओं और 20 टाउन पंचायतों में पेयजल सुविधाओं को बेहतर करने के लिए <strong>₹1,000 करोड़</strong> आवंटित किए गए हैं। 33 पुरानी संयुक्त पेयजल योजनाओं के नवीनीकरण के लिए पहले चरण में <strong>₹300 करोड़</strong> खर्च किए जाएंगे।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>किलपॉक जल संयंत्र की क्षमता बढ़ेगी</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">चेन्नई के <strong>किलपॉक जल शोधन संयंत्र</strong> की क्षमता बढ़ाने के लिए ₹410 करोड़ की परियोजना भी घोषित की गई है। सरकार का कहना है कि इससे चेन्नई क्षेत्र की जलापूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलेगी। </p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>किसानों और शिक्षकों के खिलाफ केस वापस होंगे</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री विजय ने <strong>मई 2021 से अप्रैल 2026</strong> के बीच किसानों और शिक्षकों द्वारा आजीविका, अधिकारों और वैध मांगों को लेकर किए गए शांतिपूर्ण प्रदर्शनों से जुड़े सभी मामलों को वापस लेने की घोषणा की।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार ने इस फैसले को मानवीय आधार और लोकतांत्रिक सिद्धांतों के अनुरूप बताया है। विजय ने कहा कि सरकार किसानों और शिक्षकों की जायज मांगों के साथ खड़ी रहेगी। </p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री ने तिरुवन्नामलाई जिले में SIPCOT औद्योगिक क्षेत्र के खिलाफ किसानों के आंदोलन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कुछ किसानों पर कड़े कानूनों के तहत भी मामले दर्ज किए गए थे। परंदूर में प्रस्तावित हवाई अड्डे के खिलाफ किसानों के प्रदर्शन से जुड़े मामलों को भी वापस लेने की बात कही गई है। (<a title="Tamil Nadu: CM Vijay announces Rs 4,800 crore drinking water schemes; withdrawal of cases against farmers, teachers" href="https://www.babushahi.com/view-news.php?id=226190&amp;utm_source=chatgpt.com">Babushahi.com</a>)</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>कचरे से बिजली बनाने की दो परियोजनाएं</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">विजय सरकार ने तिरुनेलवेली और सेलम नगर निगमों के लिए <strong>Waste-to-Energy</strong> परियोजनाओं की भी घोषणा की। तिरुनेलवेली में ₹256 करोड़ की लागत से 9 मेगावाट और सेलम में ₹291 करोड़ की लागत से 10 मेगावाट बिजली उत्पादन की परियोजना प्रस्तावित है। दोनों परियोजनाओं का कुल निवेश ₹547 करोड़ होगा। </p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>ड्राइविंग लाइसेंस और RC होंगे डिजिटल</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">सरकार ने वाहन पंजीकरण प्रमाणपत्र और ड्राइविंग लाइसेंस को डिजिटल बनाने की दिशा में भी कदम उठाया है। <strong>15 सितंबर 2026</strong> से नए वाहनों के डिजिटल RC और ड्राइविंग टेस्ट पास करने वालों के डिजिटल लाइसेंस उसी दिन उपलब्ध कराने की योजना है। इन दस्तावेजों में QR कोड होगा, जिससे इलेक्ट्रॉनिक सत्यापन किया जा सकेगा।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>सफाई कर्मचारियों का मुद्दा भी विधानसभा में उठा</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">इस बीच विधानसभा में ग्रेटर चेन्नई कॉरपोरेशन के सफाई कर्मचारियों के प्रदर्शन का मुद्दा भी उठा। विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने 2,000 से अधिक कर्मचारियों के 15 दिनों से जारी प्रदर्शन का मुद्दा उठाया। कर्मचारी स्थायी रोजगार, वेतन बढ़ोतरी, ESI-PF लाभ और संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण की मांग कर रहे हैं। सरकार की ओर से कहा गया कि समाधान के लिए बातचीत जारी है। </p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>एक नजर में प्रमुख घोषणाएं</strong></h5>
<p style="text-align:justify;"><strong>₹4,800 करोड़</strong> — पेयजल परियोजनाओं के लिए<br /><strong>400 MLD</strong> — मिंजूर विलवणीकरण संयंत्र<br /><strong>₹500 करोड़</strong> — अवाडी 24 घंटे पेयजल योजना<br /><strong>₹1,000 करोड़</strong> — मदुरै, कुड्डालोर और अन्य स्थानीय निकायों में जल सुविधाएं<br /><strong>₹410 करोड़</strong> — किलपॉक जल शोधन संयंत्र की क्षमता बढ़ाने के लिए<br /><strong>₹547 करोड़</strong> — तिरुनेलवेली और सेलम Waste-to-Energy परियोजनाएं</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Wed, 02 Sep 2026 13:32:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhishek joshi]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>रूस की गुप्त मदद से ईरान बना रहा सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल? C430L प्रोजेक्ट से बढ़ी अमेरिकी युद्धपोतों की चिंता</title>
                                    <description><![CDATA[Financial Times की जांच के अनुसार रूस 2023 से ईरान को सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल विकसित करने में गुप्त तकनीकी मदद दे रहा है। C430L नाम के इस कार्यक्रम में रूसी विशेषज्ञों की भागीदारी सामने आई है, हालांकि ईरान द्वारा पूरी तरह विकसित और तैनात मिसाइल का अब तक कोई प्रमाण नहीं मिला है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/6a97d18b21e46/article-62906"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-09/bus-(1).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">रूस और ईरान के बीच सैन्य सहयोग को लेकर एक नई रिपोर्ट ने पश्चिम एशिया के मौजूदा संघर्ष के बीच चिंता बढ़ा दी है। <strong>Financial Times (FT)</strong> की जांच के मुताबिक रूस 2023 से ईरान को सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल विकसित करने में गुप्त रूप से मदद कर रहा है। यह सहयोग <strong>C430L</strong> नाम के एक बहुवर्षीय कार्यक्रम के तहत चलने की बात सामने आई है और इसके 2026 तक जारी रहने के संकेत मिले हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">रिपोर्ट के अनुसार, कार्यक्रम में रूस के अनुभवी मिसाइल विशेषज्ञ शामिल रहे हैं। उनका काम ईरान की एक उन्नत प्रणोदन प्रणाली के विकास में तकनीकी सहयोग देना था। FT ने अपनी जांच के लिए लीक हुए रूसी पत्राचार, यात्रा रिकॉर्ड और सैन्य पेटेंट से जुड़ी जानकारी का विश्लेषण किया है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>क्या है C430L प्रोजेक्ट?</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">C430L का मुख्य उद्देश्य ईरान की सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल क्षमता विकसित करने में मदद करना बताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक रूस की सरकारी हथियार निर्यात कंपनी <strong>Rosoboronexport</strong> ने इस कार्यक्रम को रूस की मिसाइल डिजाइन कंपनी <strong>NPO Mashinostroyenia</strong> के साथ समन्वित किया।</p>
<p style="text-align:justify;">FT के अनुसार, रूसी अधिकारियों और इंजीनियरों ने औपचारिक समझौते से पहले कई बार ईरान की यात्रा की। नवंबर 2023 में ईरान के रक्षा मंत्रालय के साथ कार्यक्रम से जुड़ा अनुबंध किए जाने की बात सामने आई है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>ईरान ने परीक्षण किया, लेकिन मिसाइल तैनात होने का सबूत नहीं</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">इस रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि <strong>ईरान ने संबंधित रैमजेट प्रणोदन प्रणाली का निर्माण और उड़ान परीक्षण किया है</strong>, लेकिन अभी तक ऐसा कोई प्रमाण नहीं है कि रूस की सहायता से तैयार पूरी सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल को सेना में शामिल या तैनात कर दिया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">यानी मौजूदा जानकारी के आधार पर इसे ईरान के पास पहले से मौजूद एक ऑपरेशनल नई मिसाइल प्रणाली के रूप में पेश करना सही नहीं होगा। कार्यक्रम अभी विकास के स्तर से जुड़ा दिखाई देता है और इसके अगले चरण की स्थिति भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>रूस-ईरान सहयोग कितना आगे बढ़ा?</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">FT के मुताबिक 2025 तक रूसी इंजीनियरों को ईरान के परीक्षणों से जुड़ी तकनीकी जानकारी मिली थी। रूसी विशेषज्ञों ने परीक्षण से जुड़े आंकड़ों का अध्ययन किया और ईरानी पक्ष से सिस्टम के प्रदर्शन को लेकर तकनीकी सवाल पूछे।</p>
<p style="text-align:justify;">रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2026 में दोनों देशों के बीच कार्यक्रम के अगले चरण और रूसी तकनीकी रिपोर्टों पर चर्चा जारी थी। जून 2026 के एक पत्र से अगले चरण के कुछ हिस्सों पर बातचीत जारी रहने के संकेत मिले, हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि वह चरण वास्तव में शुरू हुआ या नहीं।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>अमेरिका के लिए क्यों महत्वपूर्ण?</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों की तेज गति और कम ऊंचाई पर उड़ान भरने की क्षमता उन्हें पारंपरिक मिसाइलों की तुलना में अलग तरह की चुनौती बना सकती है। विशेषज्ञों ने FT से बातचीत में अनुमान जताया कि विकसित की जा रही तकनीक का इस्तेमाल भविष्य में <strong>जहाज-रोधी और जमीन पर हमला करने वाली क्रूज मिसाइलों</strong> में किया जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">पूर्व CIA ईरान विश्लेषक जिम लैमसन ने FT से कहा कि ऐसी क्षमता ईरान को अमेरिकी नौसैनिक जहाजों के लिए एक नई रणनीतिक चुनौती दे सकती है। हालांकि, यह आकलन भविष्य की क्षमता को लेकर है, न कि ईरान के पास वर्तमान में ऐसी तैनात मिसाइल होने की पुष्टि।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>रूस के लिए भी बड़ा रणनीतिक कदम</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">यदि FT की रिपोर्ट सही है, तो यह रूस-ईरान रक्षा सहयोग के बढ़ते स्तर का संकेत है। दोनों देशों के बीच पहले से ही व्यापक रणनीतिक और सैन्य संबंध हैं। ऐसे समय में जब अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष फिर तेज हुआ है, रूस की ओर से ईरान की मिसाइल तकनीक को लेकर सहयोग की खबर इस क्षेत्रीय समीकरण को और जटिल बना सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि, रिपोर्ट में सामने आई जानकारी को लेकर एक महत्वपूर्ण सावधानी जरूरी है। यह निष्कर्ष मुख्य रूप से FT की जांच, लीक दस्तावेजों और विशेषज्ञों के आकलन पर आधारित हैं। रूस या ईरान की ओर से इस रिपोर्ट में बताए गए पूरे कार्यक्रम की सार्वजनिक पुष्टि सामने नहीं आई है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>पश्चिम एशिया के संघर्ष पर संभावित असर</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">अमेरिका और ईरान के बीच मौजूदा सैन्य तनाव के बीच सामने आई यह जानकारी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे संघर्ष का प्रभाव केवल मौजूदा हथियारों तक सीमित रहने की चिंता बढ़ती है। यदि भविष्य में ईरान ऐसी उन्नत मिसाइल क्षमता को पूरी तरह विकसित कर लेता है, तो इससे फारस की खाड़ी और व्यापक पश्चिम एशिया में सैन्य संतुलन पर असर पड़ सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">फिलहाल हालांकि सबसे अहम तथ्य यही है कि <strong>C430L कार्यक्रम के तहत तकनीकी सहयोग और परीक्षणों के संकेत मिले हैं, लेकिन पूरी तरह विकसित और ऑपरेशनल सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की तैनाती की पुष्टि नहीं हुई है।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 02 Sep 2026 13:32:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhishek joshi]]></dc:creator>
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                <title>दिल्ली में बस सुरक्षा के नए नियम: पैनिक बटन और GPS ट्रैकिंग अनिवार्य, बसों में पर्दे-टिंटेड शीशों पर रोक</title>
                                    <description><![CDATA[नाबालिग से बस में कथित यौन अपराध के मामले के बाद दिल्ली सरकार ने बसों की सुरक्षा व्यवस्था सख्त कर दी है। अब दिल्ली में चलने वाली सभी बसों में पैनिक बटन और Vehicle Location Tracking Device चालू रखना अनिवार्य होगा, जबकि पर्दे और अनधिकृत विंडो फिल्म पर रोक रहेगी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A5%8D%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AC%E0%A4%B8-%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%A8%E0%A4%8F-%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%AE--%E0%A4%AA%E0%A5%88%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%95-%E0%A4%AC%E0%A4%9F%E0%A4%A8-%E0%A4%94%E0%A4%B0-gps-%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%88%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%97-%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AF--%E0%A4%AC%E0%A4%B8%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A5%87-%E0%A4%9F%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%9F%E0%A5%87%E0%A4%A1-%E0%A4%B6%E0%A5%80%E0%A4%B6%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%95/article-62901"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-09/bus.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">दिल्ली में सार्वजनिक परिवहन में यात्रियों, खासकर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर सरकार ने बस ऑपरेटरों के लिए नए निर्देश जारी किए हैं। परिवहन विभाग के आदेश के मुताबिक <strong>दिल्ली में चलने वाली सभी बसों में पैनिक बटन और Vehicle Location Tracking Device (VLTD) हर समय काम करने की स्थिति में होने चाहिए।</strong> बसों की खिड़कियों पर पर्दे लगाने और अनधिकृत फिल्म लगाने पर भी रोक लगाई गई है। </p>
<p style="text-align:justify;">ये निर्देश हाल में दिल्ली-एनसीआर में एक नाबालिग से चलती बस में कथित सामूहिक दुष्कर्म के मामले के बाद सामने आए हैं। पुलिस के अनुसार मामले में बस के चालक और परिचालक पर आरोप हैं और दोनों को गिरफ्तार किया गया है। घटना के बाद निजी बसों में सुरक्षा उपकरणों की वास्तविक स्थिति और नियमों के पालन को लेकर सवाल उठे थे। </p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>पैनिक बटन और GPS अब सिर्फ लगाना काफी नहीं</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">परिवहन विभाग ने स्पष्ट किया है कि बस में सुरक्षा उपकरण मौजूद होना ही पर्याप्त नहीं है। <strong>पैनिक बटन यात्रियों की पहुंच में होना चाहिए और हर समय काम करना चाहिए।</strong> इसी तरह VLTD भी सक्रिय रहना जरूरी है, ताकि जरूरत पड़ने पर बस की लोकेशन का पता लगाया जा सके। बसों में काम करने योग्य अग्निशामक यंत्र और प्राथमिक उपचार किट रखना भी अनिवार्य किया गया है। </p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>बसों में पर्दे और अनधिकृत फिल्म पर रोक</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">नए निर्देशों में बसों की खिड़कियों पर पर्दे लगाने और अनधिकृत फिल्म लगाने पर रोक दोहराई गई है। इसका उद्देश्य बस के भीतर दृश्यता बनाए रखना है, ताकि यात्रियों और सुरक्षा व्यवस्था के बीच निगरानी बेहतर हो सके। विंडशील्ड, पीछे और साइड की खिड़कियों में निर्धारित पारदर्शिता मानकों का पालन करना होगा। </p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>बसें कहीं भी नहीं रोक सकेंगे चालक</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">परिवहन विभाग ने बसों को असुरक्षित या अनधिकृत स्थानों पर रोकने पर भी रोक लगाई है। खास तौर पर सड़क के बीच या चौराहों पर बस रोकने की अनुमति नहीं होगी। रात या लंबे समय तक बस खड़ी रखने के लिए भी अधिकृत, सुरक्षित और पर्याप्त रोशनी वाले स्थान का इस्तेमाल करना होगा। </p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>ड्राइवर-कंडक्टर का सत्यापन भी जरूरी</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">बस संचालकों को ड्राइवर, कंडक्टर, अटेंडेंट और दूसरे कर्मचारियों की तैनाती से पहले उनका सत्यापन सुनिश्चित करने को कहा गया है। ड्राइवर के पास वैध लाइसेंस और निर्धारित वर्दी होनी चाहिए। नशे की हालत में वाहन चलाने पर सख्त रोक रहेगी। बस कर्मचारियों को महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार और उत्पीड़न रोकने के लिए संवेदनशील बनाने का भी निर्देश दिया गया है। किसी महिला यात्री के साथ छेड़छाड़ या अन्य अपराध की स्थिति में चालक-परिचालक को तुरंत पुलिस को सूचना देने और बस को निकटतम पुलिस स्टेशन, पुलिस चौकी या PCR वाहन तक ले जाने के निर्देश दिए गए हैं। </p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>स्कूल बसों के लिए भी सुरक्षा निर्देश</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">नए आदेश में स्कूल बसों के संचालन से जुड़े नियमों पर भी जोर दिया गया है। जहां आवश्यक हो वहां अधिकृत अटेंडेंट की मौजूदगी सुनिश्चित करनी होगी और वाहन चलने के दौरान बस के दरवाजे सुरक्षित रूप से बंद रखने होंगे। प्रदूषण संबंधी नियमों और वैध PUC प्रमाणपत्र का पालन भी जरूरी होगा। </p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>नियम तोड़ने पर कार्रवाई</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">दिल्ली सरकार ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा और परिचालन मानकों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नियमों का पालन नहीं करने वाले ऑपरेटरों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें जुर्माना, वाहन जब्त करना और परमिट के निलंबन या रद्दीकरण जैसी कार्रवाई शामिल हो सकती है। </p>
<p style="text-align:justify;">इन नए निर्देशों का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि हालिया मामले के बाद एक बार फिर यह सवाल सामने आया कि बसों में पहले से मौजूद सुरक्षा नियम जमीन पर कितनी प्रभावी तरह से लागू हो रहे हैं। अब चुनौती केवल पैनिक बटन, GPS या CCTV लगाने की नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने की है कि ये व्यवस्थाएं <strong>हर यात्रा के दौरान वास्तव में काम भी करें।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 02 Sep 2026 13:31:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhishek joshi]]></dc:creator>
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                <title>राम मंदिर ट्रस्ट आज तय कर सकता है पहला CEO, 5,585 आवेदनों के बाद तीन नामों पर फैसला</title>
                                    <description><![CDATA[अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पहले पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी की नियुक्ति पर आज फैसला हो सकता है। चयन समिति ने 5,585 आवेदनों की छंटनी के बाद तीन नामों का पैनल ट्रस्ट को सौंप दिया है, हालांकि उम्मीदवारों के नाम अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AE-%E0%A4%AE%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B0-%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%9F-%E0%A4%86%E0%A4%9C-%E0%A4%A4%E0%A4%AF-%E0%A4%95%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A4%95%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A5%88-%E0%A4%AA%E0%A4%B9%E0%A4%B2%E0%A4%BE-ceo--5-585-%E0%A4%86%E0%A4%B5%E0%A5%87%E0%A4%A6%E0%A4%A8%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%A6-%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%A8-%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%AB%E0%A5%88%E0%A4%B8%E0%A4%B2%E0%A4%BE/article-62897"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-09/राम-.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">अयोध्या में राम मंदिर के प्रशासनिक ढांचे को लेकर बुधवार, 2 सितंबर को अहम फैसला हो सकता है। <strong>श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट</strong> की बैठक में मंदिर ट्रस्ट के पहले पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के चयन पर विचार किया जाएगा। तीन सदस्यीय चयन समिति ने मंगलवार को अपनी अंतिम रिपोर्ट ट्रस्ट को सौंपते हुए तीन उम्मीदवारों का पैनल सुझाया है।</p>
<p style="text-align:justify;">ट्रस्ट की बैठक दो चरणों में होने की जानकारी है। पहला सत्र दोपहर 2 बजे से 3 बजे तक और दूसरा शाम 4 बजे से 6 बजे तक प्रस्तावित है। बैठक के एजेंडे में CEO की नियुक्ति के अलावा ट्रस्ट डीड में संशोधन और प्रशासन से जुड़े अन्य मुद्दे भी शामिल हैं।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>5,585 आवेदनों में से तीन नाम तक पहुंचा चयन</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">पहले CEO की नियुक्ति के लिए चयन प्रक्रिया में बड़ी संख्या में आवेदन आए थे। चयन समिति को कुल <strong>5,585 आवेदन</strong> मिले। इनमें से 3,577 आवेदकों ने 600 अंकों वाले प्रारंभिक मूल्यांकन फॉर्म का जवाब दिया। मूल्यांकन के बाद 108 उम्मीदवार आगे की प्रक्रिया के लिए चुने गए और उनसे ऑनलाइन बातचीत की गई। इसके बाद 17 उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया गया, जिनमें से 16 अभ्यर्थी अयोध्या में व्यक्तिगत साक्षात्कार के लिए पहुंचे। अंततः तीन नामों का पैनल तैयार किया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">चयन समिति की अध्यक्षता सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति प्रमोद कोहली ने की। समिति में सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल वीके चतुर्वेदी और वैज्ञानिक-उद्योगपति सुरेश हवारे भी शामिल थे। समिति ने उम्मीदवारों का आकलन नेतृत्व क्षमता, काम के प्रति प्रतिबद्धता, दृष्टिकोण और संबंधित मुद्दों की समझ जैसे मानकों पर किया।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>तीनों उम्मीदवारों के नाम अभी गोपनीय</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">ट्रस्ट को सौंपे गए तीन नामों को अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। रिपोर्टों में सेवानिवृत्त नौकरशाहों को संभावित दावेदारों में शामिल बताया गया है, हालांकि आधिकारिक तौर पर किसी उम्मीदवार का नाम घोषित नहीं किया गया है। इसलिए सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों में सामने आ रहे नामों को ट्रस्ट की अंतिम घोषणा से पहले पुष्ट उम्मीदवार मानना उचित नहीं होगा।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>CEO के पास क्या होगी जिम्मेदारी?</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">प्रस्तावित CEO की भूमिका केवल रोजमर्रा के मंदिर संचालन तक सीमित नहीं होगी। ट्रस्ट के अनुसार, CEO पर वैधानिक, प्रशासनिक और वित्तीय जिम्मेदारियां होंगी। उन्हें संगठन के लिए प्रक्रियाएं और कार्यप्रणाली विकसित करने, प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने और ट्रस्ट डीड तथा लागू नियमों के अनुरूप कामकाज सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">CEO को ट्रस्ट के सर्वोच्च कार्यकारी प्राधिकारी के रूप में काम करना होगा। ऐसे में यह नियुक्ति मंदिर के बढ़ते प्रशासनिक और संचालन संबंधी दायरे को देखते हुए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>ट्रस्ट डीड में भी हो सकता है बदलाव</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">CEO की नियुक्ति के साथ ट्रस्ट की स्थापना के बाद पहली बार उसके डीड में संशोधन का प्रस्ताव भी चर्चा में है। इन बदलावों के जरिए CEO की शक्तियों, जिम्मेदारियों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक स्पष्ट रूप दिया जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">ट्रस्ट की ओर से अंतिम निर्णय होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि तीनों उम्मीदवारों में से किसे राम मंदिर के पहले पूर्णकालिक CEO की जिम्मेदारी मिलती है। फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि लंबी चयन प्रक्रिया के बाद मामला अब अंतिम निर्णय के चरण में पहुंच चुका है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 02 Sep 2026 12:55:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhishek joshi]]></dc:creator>
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                <title>SCO शिखर सम्मेलन: मोदी, शी और पुतिन एक मंच पर, आतंकवाद से निपटने के लिए सुरक्षा केंद्र को मंजूरी</title>
                                    <description><![CDATA[किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में SCO शिखर सम्मेलन में भारत, चीन और रूस समेत सदस्य देशों के नेताओं ने क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद और आर्थिक सहयोग पर चर्चा की। सम्मेलन में आतंकवाद, उग्रवाद, संगठित अपराध और अन्य सीमा-पार खतरों से निपटने के लिए सुरक्षा सहयोग बढ़ाने वाले प्रावधानों को मंजूरी दी गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/sco-%E0%A4%B6%E0%A4%BF%E0%A4%96%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%B2%E0%A4%A8--%E0%A4%AE%E0%A5%8B%E0%A4%A6%E0%A5%80--%E0%A4%B6%E0%A5%80-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%A8-%E0%A4%8F%E0%A4%95-%E0%A4%AE%E0%A4%82%E0%A4%9A-%E0%A4%AA%E0%A4%B0--%E0%A4%86%E0%A4%A4%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%A6-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%AA%E0%A4%9F%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%8F-%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%AE%E0%A4%82%E0%A4%9C%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A5%80/article-62896"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-09/sco-.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित <strong>शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के 26वें शिखर सम्मेलन</strong> में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन एक ही मंच पर नजर आए। सम्मेलन में सदस्य देशों ने क्षेत्रीय सुरक्षा और आतंकवाद से मुकाबले के साथ व्यापार, कनेक्टिविटी और तकनीकी सहयोग को आगे बढ़ाने पर जोर दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">शिखर सम्मेलन का एक प्रमुख परिणाम SCO सदस्य देशों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने से जुड़ा रहा। नेताओं ने <strong>SCO सदस्य देशों की सुरक्षा के सामने आने वाली चुनौतियों और खतरों से निपटने के लिए यूनिवर्सल सेंटर</strong> से जुड़े नियमों को मंजूरी दी। यह तंत्र आतंकवाद, उग्रवाद, संगठित अपराध और अन्य सीमा-पार सुरक्षा चुनौतियों पर सहयोग और सूचनाओं के आदान-प्रदान को मजबूत करने के उद्देश्य से बनाया गया है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>आतंकवाद पर मोदी का कड़ा संदेश</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने SCO मंच से आतंकवाद के खिलाफ सामूहिक और निर्णायक कार्रवाई की जरूरत बताई। उन्होंने आतंकवाद के पूरे नेटवर्क और उसके समर्थन तंत्र को खत्म करने पर जोर दिया। भारत लंबे समय से SCO के भीतर आतंकवाद और सीमा-पार आतंकवाद के खिलाफ मजबूत सहयोग की मांग करता रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">मोदी ने सुरक्षा के साथ-साथ कनेक्टिविटी और आर्थिक अवसरों को भी SCO सहयोग के महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में सामने रखा। उनका संदेश था कि क्षेत्र में शांति और स्थिरता के बिना दीर्घकालिक विकास और आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाना मुश्किल होगा।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>मोदी-शी-पुतिन की मुलाकात ने खींचा ध्यान</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">SCO सम्मेलन के दौरान मोदी, शी जिनपिंग और पुतिन की मौजूदगी ने भी कूटनीतिक स्तर पर ध्यान आकर्षित किया। तीनों नेताओं के बीच संक्षिप्त बातचीत और अभिवादन हुआ। भारत, रूस और चीन के बीच इस तरह की बातचीत को क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर संवाद के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि, इन मुलाकातों को किसी नए औपचारिक गठबंधन के रूप में देखना जल्दबाजी होगी। भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति और रणनीतिक संतुलन को बनाए रखते हुए विभिन्न शक्तियों के साथ संवाद करता रहा है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>सुरक्षा से आगे आर्थिक एजेंडा</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">बिश्केक सम्मेलन में SCO के एजेंडे में केवल सुरक्षा ही नहीं, बल्कि व्यापार, डिजिटल तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी भी शामिल रहे। सम्मेलन से जुड़े दस्तावेजों में संगठन के भीतर सहयोग को इन क्षेत्रों में आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">SCO के मौजूदा सदस्य देशों में भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान, ईरान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान और बेलारूस शामिल हैं। संगठन ऐसे समय में बैठक कर रहा है जब पश्चिम एशिया में संघर्ष और रूस-यूक्रेन युद्ध समेत कई बड़े भू-राजनीतिक संकट जारी हैं।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>भारत के लिए क्यों अहम?</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">भारत के लिए SCO मध्य एशिया और व्यापक यूरेशियाई क्षेत्र के साथ सुरक्षा, आर्थिक और कूटनीतिक संबंध मजबूत करने का महत्वपूर्ण मंच है। आतंकवाद के खिलाफ सहयोग को संस्थागत रूप देने का प्रयास भारत की सुरक्षा प्राथमिकताओं से सीधे जुड़ता है। बिश्केक सम्मेलन में भारत ने एक तरफ आतंकवाद पर अपना कड़ा रुख दोहराया, वहीं चीन और रूस जैसे प्रमुख साझेदारों के साथ संवाद भी बनाए रखा। यही संतुलन SCO में भारत की रणनीतिक भूमिका को महत्वपूर्ण बनाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 02 Sep 2026 12:55:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhishek joshi]]></dc:creator>
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                <title>NEET Protest FIR: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, देशभर में छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR बंद; गंभीर आपराधिक मामलों वालों को राहत नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने 20 से 25 जुलाई के दौरान NEET-UG विवाद को लेकर हुए छात्र प्रदर्शनों से जुड़े FIR को देशभर में बंद करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखने वाले छात्रों के भविष्य को आपराधिक मामलों से नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए, जबकि गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई का रास्ता खुला रहेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/neet-protest-fir--%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AE-%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%9F-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%AC%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A4%BE-%E0%A4%AB%E0%A5%88%E0%A4%B8%E0%A4%B2%E0%A4%BE--%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B6%E0%A4%AD%E0%A4%B0-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%9B%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%96%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%AB-%E0%A4%A6%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%9C-fir-%E0%A4%AC%E0%A4%82%E0%A4%A6--%E0%A4%97%E0%A4%82%E0%A4%AD%E0%A5%80%E0%A4%B0-%E0%A4%86%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A7%E0%A4%BF%E0%A4%95-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B9%E0%A4%A4-%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82/article-62895"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-09/neet.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट ने NEET-UG विवाद को लेकर जुलाई में हुए छात्र प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में बड़ा आदेश दिया है। अदालत ने 20 से 25 जुलाई के बीच हुए प्रदर्शनों के संबंध में देश के किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में दर्ज FIR को आगे नहीं बढ़ाने और उन्हें बंद मानने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने यह राहत उन छात्रों और प्रदर्शनकारियों के लिए दी है, जो अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन में शामिल हुए थे। </p>
<p style="text-align:justify;">मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल किया। पीठ ने कहा कि इस आदेश का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रदर्शन में bona fide तरीके से शामिल हुए छात्रों के भविष्य को आपराधिक मामलों की वजह से नुकसान न हो। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि उसी घटना के संबंध में आगे कोई नया FIR दर्ज नहीं किया जाएगा। </p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>किन लोगों को राहत मिलेगी?</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट का आदेश देशभर में लागू होगा। यानी केवल दिल्ली, बिहार, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और असम में दर्ज मामलों तक यह राहत सीमित नहीं रहेगी। अदालत ने कहा कि यदि दूसरे राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों में भी 20 से 25 जुलाई के इन्हीं प्रदर्शनों से जुड़े FIR दर्ज हैं, तो उन्हें भी आगे नहीं बढ़ाया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">अदालत ने हालांकि गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को इस व्यापक राहत से अलग रखा है। दिल्ली पुलिस को ऐसे लोगों की भूमिका की जांच करने की अनुमति दी गई है। रिपोर्टों के अनुसार, करीब 2,873 लोगों की पहचान इस श्रेणी में की गई है। इन लोगों के खिलाफ हिंसा, शारीरिक नुकसान या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसे आरोपों की जांच अलग से हो सकती है। </p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>कोर्ट ने क्यों लिया यह फैसला?</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने भी छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग की थी। सरकार ने अदालत को बताया कि वह प्रदर्शन के दौरान शांतिपूर्ण तरीके से शामिल हुए छात्रों को निशाना नहीं बनाएगी। हालांकि सरकार ने गंभीर आपराधिक मामलों वाले व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई जारी रखने की अनुमति मांगी थी। </p>
<p style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रदर्शन में वास्तविक मांगों को लेकर शामिल हुए छात्रों और कथित तौर पर हिंसा या गंभीर अपराध में शामिल लोगों के बीच अंतर किया जाना जरूरी है। अदालत ने अपने आदेश को मौजूदा परिस्थितियों के लिए विशेष राहत बताते हुए यह भी स्पष्ट किया कि इसे सामान्य मामलों के लिए मिसाल नहीं माना जाएगा। </p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>5 सितंबर का प्रस्तावित मार्च वापस</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद प्रदर्शन से जुड़े संगठन CJP ने 5 सितंबर को दिल्ली में प्रस्तावित मार्च वापस लेने की घोषणा की। संगठन के सह-संयोजक सौरव दास ने अदालत में कहा कि केंद्र की ओर से दिए गए आश्वासन और सुप्रीम कोर्ट के आदेश को देखते हुए मार्च वापस लिया जा रहा है। </p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>छात्रों के परिवारों के लिए मुआवजे पर भी निर्देश</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">सुनवाई के दौरान केंद्र ने NEET-UG 2026 परीक्षा विवाद से जुड़े मामलों में जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों के लिए मुआवजे की नीति बनाने की प्रतिबद्धता जताई। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को राज्यों से परामर्श कर देशभर के लिए नीति तैयार करने और इसे तीन महीने के भीतर लागू करने की दिशा में कदम उठाने को कहा है। </p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>क्या है पूरा मामला?</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">NEET-UG से जुड़े कथित पेपर लीक और परीक्षा विवाद को लेकर छात्रों ने जुलाई में देशभर में प्रदर्शन किए थे। 20 जुलाई को दिल्ली में प्रस्तावित मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़प की स्थिति भी बनी थी। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए, जबकि अधिकारियों की ओर से प्रदर्शन के दौरान हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगाए गए थे। इन परस्पर आरोपों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही एक पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति गठित की थी। </p>
<p style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट का ताजा आदेश फिलहाल शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को बंद करने की दिशा में बड़ी राहत है, लेकिन गंभीर आपराधिक आरोपों वाले लोगों के मामले अलग रहेंगे। इसलिए इस फैसले को सभी आरोपों से पूर्ण मुक्ति के बजाय <strong>शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को आपराधिक कार्रवाई से राहत</strong> के रूप में समझना अधिक सटीक है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 02 Sep 2026 12:54:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhishek joshi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शेयर बाजार में बड़ी गिरावट: अमेरिका-ईरान तनाव और महंगे कच्चे तेल से सहमा बाजार, सेंसेक्स 700 अंक से ज्यादा टूटा; निफ्टी 23,830 के नीचे</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका-ईरान संघर्ष के फिर तेज होने से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है। इसका असर बुधवार को भारतीय शेयर बाजार पर दिखा और शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 700 अंक से ज्यादा गिर गया, जबकि निफ्टी भी 23,830 के आसपास फिसल गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/%E0%A4%B6%E0%A5%87%E0%A4%AF%E0%A4%B0-%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AC%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A5%80-%E0%A4%97%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A4%9F--%E0%A4%85%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%88%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%A4%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B5-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A4%9A%E0%A5%8D%E0%A4%9A%E0%A5%87-%E0%A4%A4%E0%A5%87%E0%A4%B2-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%B8%E0%A4%B9%E0%A4%AE%E0%A4%BE-%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%B0--%E0%A4%B8%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%B8%E0%A5%87%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B8-700-%E0%A4%85%E0%A4%82%E0%A4%95-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%9C%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A4%BE-%E0%A4%9F%E0%A5%82%E0%A4%9F%E0%A4%BE--%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%AB%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%80-23-830-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%A8%E0%A5%80%E0%A4%9A%E0%A5%87/article-62894"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-09/शेयर-बाजार.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भारतीय शेयर बाजार में बुधवार, 2 सितंबर 2026 को कारोबार की शुरुआत तेज गिरावट के साथ हुई। अमेरिका और ईरान के बीच फिर बढ़े सैन्य तनाव ने वैश्विक बाजारों में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति बढ़ा दी। इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के शेयर बाजार पर दबाव बढ़ा दिया। शुरुआती कारोबार में <strong>सेंसेक्स 700 अंक से ज्यादा नीचे</strong> चला गया, जबकि निफ्टी भी 23,830 के स्तर के आसपास फिसल गया। </p>
<p style="text-align:justify;">बाजार की शुरुआती कमजोरी आगे बढ़कर व्यापक बिकवाली में बदल गई। सुबह 9:46 बजे तक निफ्टी 50 करीब 0.89 प्रतिशत गिरकर 23,841.40 पर और बीएसई सेंसेक्स 0.79 प्रतिशत की गिरावट के साथ 76,333.20 पर कारोबार कर रहा था। इस दौरान सभी 16 प्रमुख सेक्टरों में कमजोरी दर्ज की गई। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी क्रमशः करीब 1.1 प्रतिशत और 0.8 प्रतिशत की गिरावट रही। </p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>अमेरिका-ईरान तनाव का बाजार पर सीधा असर</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">बाजार की चिंता का सबसे बड़ा कारण पश्चिम एशिया में संघर्ष का फिर तेज होना है। अमेरिका ने ईरान में सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर हमले किए, जिसके बाद ईरान की ओर से भी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की खबरें सामने आईं। इस घटनाक्रम ने निवेशकों में यह आशंका बढ़ाई है कि संघर्ष लंबा खिंचने पर तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। </p>
<p style="text-align:justify;">यही आशंका कच्चे तेल की कीमतों में दिखाई दी। बुधवार को ब्रेंट क्रूड करीब 1 प्रतिशत बढ़कर 95.4 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में इसकी कीमत इससे भी ऊपर गई थी। तेल महंगा होने से भारत का आयात बिल बढ़ने और महंगाई पर दबाव आने की चिंता निवेशकों को परेशान कर रही है। </p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>किन शेयरों पर ज्यादा दबाव?</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">तेल की कीमतों में तेजी का असर उन कंपनियों पर खास तौर पर पड़ रहा है जिनकी लागत या कारोबार सीधे ऊर्जा कीमतों से प्रभावित होता है। शुरुआती कारोबार में ऑयल मार्केटिंग कंपनियों, टायर और पेंट कंपनियों तथा विमानन क्षेत्र के शेयरों पर दबाव देखा गया। दूसरी ओर, कुछ चुनिंदा शेयरों में कंपनी-विशेष खबरों के चलते खरीदारी भी देखने को मिली। </p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>महंगे तेल से भारत की चिंता क्यों बढ़ी?</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत बढ़ने का असर देश के आयात बिल, चालू खाते, मुद्रास्फीति और कंपनियों की लागत पर पड़ सकता है। यदि तेल लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बना रहता है, तो निवेशकों की चिंता केवल शेयर बाजार तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि ब्याज दरों और आर्थिक वृद्धि के अनुमान पर भी असर पड़ सकता है। </p>
<p style="text-align:justify;">वैश्विक स्तर पर भी निवेशकों का रुख सतर्क है। तेल की तेजी के साथ बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी ने इस आशंका को मजबूत किया है कि महंगाई का दबाव बढ़ने पर केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में जल्द कटौती के बजाय सख्त रुख बनाए रख सकते हैं। इससे उभरते बाजारों में विदेशी निवेश के लिए परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण हो सकती हैं। </p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>आगे बाजार की नजर किन संकेतों पर?</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">भारतीय शेयर बाजार की अगली दिशा मुख्य रूप से पश्चिम एशिया में संघर्ष की स्थिति, कच्चे तेल की कीमत और वैश्विक बॉन्ड यील्ड पर निर्भर करेगी। यदि तेल की कीमतें लगातार ऊंची रहती हैं और भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है, तो बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। इसके विपरीत तनाव कम होने और तेल कीमतों में नरमी आने पर निवेशकों का ध्यान फिर घरेलू आर्थिक आंकड़ों और कंपनियों के प्रदर्शन पर लौट सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>नोट:</strong> शुरुआती कारोबार के आंकड़े तेजी से बदलते हैं। इसलिए बाजार बंद होने के बाद सेंसेक्स-निफ्टी के अंतिम स्तर शुरुआती आंकड़ों से अलग हो सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 02 Sep 2026 12:54:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhishek joshi]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>नेपाल में बाढ़ से तबाही: मृतकों की संख्या 1,127 पहुंची, 4,858 लोग अब भी लापता; आठवें दिन भी तलाश जारी</title>
                                    <description><![CDATA[26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ के एक सप्ताह बाद नेपाल में मृतकों का आंकड़ा 1,127 हो गया है। नेपाल पुलिस के मुताबिक 4,858 लोग अब भी लापता हैं, जबकि सुरक्षा बलों ने 6,541 लोगों को सुरक्षित निकाला है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%B2-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%A2%E0%A4%BC-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%A4%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%B9%E0%A5%80--%E0%A4%AE%E0%A5%83%E0%A4%A4%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%96%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE-1-127-%E0%A4%AA%E0%A4%B9%E0%A5%81%E0%A4%82%E0%A4%9A%E0%A5%80--4-858-%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%97-%E0%A4%85%E0%A4%AC-%E0%A4%AD%E0%A5%80-%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A4%BE--%E0%A4%86%E0%A4%A0%E0%A4%B5%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A8-%E0%A4%AD%E0%A5%80-%E0%A4%A4%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%B6-%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%80/article-62893"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-09/नेपाल.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड के आठवें दिन भी राहत और खोज अभियान जारी है। नेपाल पुलिस के अनुसार बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर <strong>1,127</strong> हो गई है, जबकि <strong>4,858 लोग अब भी लापता</strong> हैं। सुरक्षा बलों ने अब तक बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से 6,541 लोगों को सुरक्षित निकाला है। </p>
<p style="text-align:justify;">नेपाल पुलिस के मुताबिक सबसे ज्यादा शव चितवन, नवलपरासी पूर्व, नवलपरासी पश्चिम और नुवाकोट से बरामद हुए हैं। चितवन से 348, नवलपरासी पूर्व से 217, नवलपरासी पश्चिम से 190 और नुवाकोट से 155 शव मिले हैं। इसके अलावा गोरखा से 66, धादिंग से 59, रसुवा से 45 और तनहूं से 38 शव बरामद किए गए हैं।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>911 अज्ञात शवों की पहचान की कोशिश</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">आपदा के बाद बड़ी चुनौती मृतकों की पहचान और उनके परिवारों तक शव पहुंचाना है। नेपाल पुलिस के अनुसार <strong>911 अज्ञात शवों</strong> का विवरण वेबसाइट पर अपलोड किया गया है, ताकि लापता लोगों के परिवार उनकी पहचान में मदद कर सकें।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस ने बताया कि 1,113 शवों का पोस्टमार्टम और कानूनी पहचान संबंधी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन अभी तक केवल 95 शव उनके परिजनों को सौंपे जा सके हैं। प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने कहा है कि अज्ञात शवों से DNA नमूने और अन्य पहचान संबंधी साक्ष्य सुरक्षित रखे जा रहे हैं। </p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>7,912 पुलिसकर्मी राहत और बचाव में तैनात</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">नेपाल सरकार ने खोज, बचाव और राहत अभियान के लिए बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों को प्रभावित इलाकों में लगाया है। नेपाल पुलिस के अनुसार <strong>7,912 पुलिसकर्मी</strong> बचाव, राहत वितरण और बरामद शवों के प्रबंधन में लगे हैं। टीमें जोखिम वाले इलाकों से परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने, मलबे से बंद सड़कों को खोलने और स्थानीय प्रशासन तथा नागरिकों के साथ मिलकर तलाशी अभियान चला रही हैं। </p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>हाइड्रोपावर सुरंगों में भी तलाश अभियान</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">बाढ़ से नेपाल के कई जलविद्युत प्रोजेक्ट और उनके आसपास के क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। सुरंगों में मलबा और पानी भरने के कारण वहां फंसे या लापता लोगों की तलाश सबसे कठिन अभियानों में शामिल है। नेपाल के विदेश मंत्रालय के अनुसार भारत और चीन की विशेष सुरंग-बचाव टीमें नेपाल सेना के साथ महत्वपूर्ण हाइड्रोपावर साइटों पर अभियान में जुटी हैं। इन अभियानों का उद्देश्य सुरंगों में फंसे लोगों का पता लगाना और उन्हें सुरक्षित निकालना है। </p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>भारत में भी मिले नौ शव</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">बाढ़ के पानी के साथ बहकर भारत की नदियों तक पहुंचे कुछ शव भी बरामद किए गए हैं। नेपाल पुलिस के अनुसार भारत में <strong>नौ शव</strong> मिले हैं। इन शवों को नेपाल के आधिकारिक मृतक आंकड़े में शामिल किए जाने के बजाय अलग प्रक्रिया के तहत पहचानने की कोशिश की जा रही है। </p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>कैसे आई इतनी बड़ी आपदा?</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बर्फ और चट्टानों के ढहने/हिमस्खलन से जुड़े घटनाक्रम के बाद भोटेकोशी नदी में अचानक भीषण बाढ़ आई। उत्तरी और मध्य नेपाल के कई कस्बे और गांव इसकी चपेट में आए। आपदा के कारण सड़कें, पुल और अन्य बुनियादी ढांचे क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिससे कई प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंच अब भी मुश्किल है। बचाव अभियान आगे बढ़ने के साथ प्रशासन के सामने मृतकों की पहचान, लापता लोगों की तलाश और विस्थापित परिवारों के पुनर्वास की चुनौती बढ़ती जा रही है। </p>
<p style="text-align:justify;">फिलहाल राहत एजेंसियों का सबसे बड़ा लक्ष्य लापता लोगों की तलाश, बचे लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना और प्रभावित इलाकों में जरूरी सहायता पहुंचाना है। एक सप्ताह से अधिक समय बीतने के बावजूद हजारों लोगों के लापता होने के कारण अभियान का मानवीय महत्व बेहद बड़ा बना हुआ है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 02 Sep 2026 12:53:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhishek joshi]]></dc:creator>
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                <title>अमेरिका के हवाई हमलों के बाद ईरान का पलटवार, पूरे क्षेत्र में मिसाइल-ड्रोन हमले: ट्रंप ने दी कड़े परिणामों की चेतावनी</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान पर अमेरिकी हमलों के बाद संघर्ष एक बार फिर तेज हो गया है। तेहरान ने अमेरिका के क्षेत्रीय ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमलों का जवाब दिया, जबकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को आगे की कार्रवाई के गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/iran-retaliates-after-us-air-strikes-with-missile-drone-attacks-across/article-62890"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-09/अमेरिका-ईरान--(1).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">अमेरिका और ईरान के बीच एक महीने से जारी अपेक्षाकृत शांति के बाद संघर्ष फिर से तेज हो गया है। अमेरिकी सेना ने ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े वायु रक्षा ठिकानों, रडार प्रणालियों, समुद्री परिसंपत्तियों, संचार सुविधाओं और कथित माइन बिछाने की क्षमताओं को निशाना बनाकर नए हमले किए। इसके जवाब में ईरान ने क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और हितों को निशाना बनाते हुए मिसाइल और ड्रोन हमले किए।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा कि हमलों का उद्देश्य अमेरिकी सैनिकों और वाणिज्यिक जहाजों के खिलाफ IRGC की कथित गतिविधियों का जवाब देना था। कमांड के अनुसार, हमलों का ताजा दौर पूरा हो चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी ईरानी रडार को निशाना बनाए जाने की पुष्टि की है। </p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>ईरान ने जॉर्डन और अन्य ठिकानों को बनाया निशाना</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी वाले इलाकों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। जॉर्डन की सेना के अनुसार, उसके वायु रक्षा तंत्र ने देश के हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने वाली 13 में से 10 मिसाइलों को रोक दिया, जबकि तीन मिसाइलें आबादी से दूर इलाकों में गिरीं। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार जॉर्डन में हमले के बाद अमेरिकी सैनिकों के हताहत होने की कोई पुष्टि नहीं हुई है। </p>
<p style="text-align:justify;">ईरान की ओर से बहरीन में अमेरिकी ठिकाने पर ड्रोन हमले का भी दावा किया गया है। कुवैत ने भी अपने क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन खतरे के खिलाफ वायु रक्षा कार्रवाई की जानकारी दी। इराक के एरबिल में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाए जाने का दावा भी IRGC ने किया है, हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। </p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>ट्रंप की चेतावनी से बढ़ी चिंता</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की जवाबी कार्रवाई के बाद कड़े रुख का संकेत दिया है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि ईरान की ओर से अमेरिकी सैनिकों या वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाने की कोशिशों का जवाब दिया जाएगा। इससे दोनों देशों के बीच संघर्ष के और फैलने की आशंका बढ़ गई है। ईरान ने भी अमेरिकी हमलों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई जारी रखने की चेतावनी दी है। ईरानी अधिकारियों के बयानों से संकेत मिलता है कि तेहरान अमेरिकी हमलों को बिना जवाब छोड़े जाने के पक्ष में नहीं है। इस तरह दोनों पक्षों की कठोर बयानबाजी के बीच तनाव कम करने की कूटनीतिक गुंजाइश फिलहाल कमजोर दिखाई दे रही है। </p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>होर्मुज जलडमरूमध्य पर भी बढ़ा दबाव</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">इस संघर्ष का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय असर <strong>होर्मुज जलडमरूमध्य</strong> पर पड़ रहा है। यह दुनिया के महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में शामिल है। क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां बढ़ने से जहाजरानी और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी है।</p>
<p style="text-align:justify;">नए हमलों के बाद Brent crude करीब 5 प्रतिशत से ज्यादा उछलकर 95 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया। तेल की कीमतों में यह तेजी भारत समेत तेल आयात पर निर्भर देशों के लिए महंगाई और आयात बिल बढ़ने का जोखिम पैदा करती है। </p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>संयुक्त राष्ट्र ने संयम बरतने को कहा</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">संघर्ष के फिर से तेज होने के बीच संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेस ने दोनों पक्षों से अधिकतम संयम बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में बातचीत के जरिए न्यायपूर्ण और टिकाऊ शांति की दिशा में आगे बढ़ने की जरूरत पहले से ज्यादा है। </p>
<p style="text-align:justify;">फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि अमेरिका और ईरान के बीच यह जवाबी कार्रवाई सीमित सैन्य टकराव तक रहती है या फिर व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष का रूप लेती है। आने वाले दिनों में अमेरिकी प्रतिक्रिया, ईरान के अगले कदम और होर्मुज में समुद्री आवाजाही इस संकट की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 02 Sep 2026 12:53:13 +0530</pubDate>
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