उज्ज्वला योजना में बड़ा बदलाव: अब सिर्फ 4 सिलेंडर पर मिलेगी ₹300 सब्सिडी

बिजनेस डेस्क

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अंतरराष्ट्रीय गैस कीमतों में भारी बढ़ोतरी के बीच सरकार का फैसला, उज्ज्वला लाभार्थियों को साल में केवल चार रिफिल पर अतिरिक्त राहत

देश की करोड़ों महिलाओं से जुड़ी प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) में बड़ा बदलाव किया गया है। अब योजना के लाभार्थियों को सालभर में केवल पहले चार एलपीजी सिलेंडरों पर ही 300 रुपये की अतिरिक्त सब्सिडी मिलेगी। इससे पहले यह लाभ नौ सिलेंडरों तक उपलब्ध था। पेट्रोलियम मंत्रालय ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की कीमतों में तेज उछाल और पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव के कारण यह फैसला लिया गया है। सरकार का कहना है कि बढ़ती लागत के बावजूद भारत में घरेलू उपभोक्ताओं को दुनिया का सबसे सस्ता रसोई गैस सिलेंडर उपलब्ध कराया जा रहा है।

सोमवार को हुई एक आधिकारिक ब्रीफिंग में पेट्रोलियम मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव प्रवीण खनूजा ने कहा कि अमेरिका-ईरान संघर्ष और पश्चिम एशिया में बने हालात का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ा है। खास तौर पर एलपीजी की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में करीब 46 फीसदी तक की वृद्धि दर्ज की गई है। इसका असर भारत पर भी पड़ा क्योंकि देश अपनी जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत एलपीजी आयात करता है। वर्तमान में दिल्ली में 14.2 किलोग्राम घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत 942 रुपये है, जबकि उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को सब्सिडी के बाद यह सिलेंडर 642 रुपये में मिल रहा है। हालांकि अब यह अतिरिक्त राहत केवल चार सिलेंडरों तक सीमित रहेगी।

सरकार का कहना है कि घरेलू गैस सिलेंडर की वास्तविक लागत अब 1600 रुपये से भी अधिक पहुंच चुकी है। इसके बावजूद उपभोक्ताओं से कम कीमत वसूली जा रही है, जिससे सरकारी तेल कंपनियों पर भारी वित्तीय दबाव बढ़ रहा है। अधिकारियों के अनुसार हर घरेलू सिलेंडर पर लगभग 700 रुपये की अंडर-रिकवरी हो रही है। पिछले वित्त वर्ष के अंत तक घरेलू एलपीजी पर कुल अंडर-रिकवरी बढ़कर 60 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गई, जबकि एक साल पहले यह आंकड़ा करीब 41 हजार करोड़ रुपये था। इस स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने तेल कंपनियों को 30 हजार करोड़ रुपये की सहायता देने की मंजूरी दी है।

अधिकारियों ने यह भी बताया कि सिर्फ एलपीजी ही नहीं बल्कि पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर भी कंपनियों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। मौजूदा हालात में डीजल पर लगभग 30 रुपये प्रति लीटर और पेट्रोल पर करीब 6 रुपये प्रति लीटर तक का घाटा बताया जा रहा है। इससे तेल विपणन कंपनियों को प्रतिदिन 600 से 700 करोड़ रुपये तक का नुकसान हो रहा है। हालांकि सरकार ने अभी तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में आई पूरी बढ़ोतरी का बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डाला है।

पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई। फरवरी में एलपीजी का सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस लगभग 543 डॉलर प्रति टन था, जो जून तक बढ़कर 790 डॉलर प्रति टन पहुंच गया। इससे प्रोपेन और ब्यूटेन दोनों की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई। यही वजह है कि भारत सहित कई देशों में गैस की लागत बढ़ी है। फिर भी सरकार दावा कर रही है कि अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और कई पड़ोसी देशों की तुलना में भारतीय उपभोक्ताओं को काफी कम कीमत पर रसोई गैस उपलब्ध कराई जा रही है।

दिलचस्प बात यह है कि जहां घरेलू उपभोक्ता लगभग 66 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से गैस प्राप्त कर रहे हैं, वहीं होटल, रेस्टोरेंट और अन्य व्यावसायिक संस्थानों को 19 किलोग्राम का कमर्शियल सिलेंडर दिल्ली में 3113.50 रुपये में मिल रहा है। यानी उनकी लागत करीब 164 रुपये प्रति किलोग्राम बैठ रही है। कमर्शियल गैस की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार के अनुसार हर महीने स्वतः तय होती हैं और हाल के महीनों में इनमें लगातार बढ़ोतरी देखी गई है।

ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने के लिए भारत ने कई कदम उठाए हैं। सरकार के अनुसार स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर तनाव के बावजूद भारतीय जहाजों की आवाजाही जारी रखी गई और देश में किसी भी पेट्रोलियम उत्पाद की कमी नहीं होने दी गई। साथ ही घरेलू एलपीजी उत्पादन में 60 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी की गई। गैस की खरीद अमेरिका, कनाडा और अल्जीरिया जैसे देशों से भी शुरू की गई ताकि किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम हो सके। उपलब्ध गैस आपूर्ति में घरों, अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों को प्राथमिकता दी गई।

उधर गैस की चोरी और घरेलू सिलेंडरों के व्यावसायिक उपयोग पर रोक लगाने के लिए भी निगरानी बढ़ाई गई है। सरकार ने ओटीपी आधारित डिलीवरी सत्यापन को 90 प्रतिशत तक बढ़ा दिया है। इसके अलावा लोगों को पाइप्ड नेचुरल गैस यानी पीएनजी के उपयोग के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है ताकि एलपीजी पर दबाव कम किया जा सके। अंतरराष्ट्रीय हालात सामान्य होने तक ऊर्जा कीमतों पर दबाव बना रह सकता है। ऐसे में सरकार और तेल कंपनियों के सामने उपभोक्ताओं को राहत देने और बढ़ती लागत के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती बनी रहेगी। 

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09 Jun 2026 By Vaishnavi.J

उज्ज्वला योजना में बड़ा बदलाव: अब सिर्फ 4 सिलेंडर पर मिलेगी ₹300 सब्सिडी

बिजनेस डेस्क

देश की करोड़ों महिलाओं से जुड़ी प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) में बड़ा बदलाव किया गया है। अब योजना के लाभार्थियों को सालभर में केवल पहले चार एलपीजी सिलेंडरों पर ही 300 रुपये की अतिरिक्त सब्सिडी मिलेगी। इससे पहले यह लाभ नौ सिलेंडरों तक उपलब्ध था। पेट्रोलियम मंत्रालय ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की कीमतों में तेज उछाल और पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव के कारण यह फैसला लिया गया है। सरकार का कहना है कि बढ़ती लागत के बावजूद भारत में घरेलू उपभोक्ताओं को दुनिया का सबसे सस्ता रसोई गैस सिलेंडर उपलब्ध कराया जा रहा है।

सोमवार को हुई एक आधिकारिक ब्रीफिंग में पेट्रोलियम मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव प्रवीण खनूजा ने कहा कि अमेरिका-ईरान संघर्ष और पश्चिम एशिया में बने हालात का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ा है। खास तौर पर एलपीजी की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में करीब 46 फीसदी तक की वृद्धि दर्ज की गई है। इसका असर भारत पर भी पड़ा क्योंकि देश अपनी जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत एलपीजी आयात करता है। वर्तमान में दिल्ली में 14.2 किलोग्राम घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत 942 रुपये है, जबकि उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को सब्सिडी के बाद यह सिलेंडर 642 रुपये में मिल रहा है। हालांकि अब यह अतिरिक्त राहत केवल चार सिलेंडरों तक सीमित रहेगी।

सरकार का कहना है कि घरेलू गैस सिलेंडर की वास्तविक लागत अब 1600 रुपये से भी अधिक पहुंच चुकी है। इसके बावजूद उपभोक्ताओं से कम कीमत वसूली जा रही है, जिससे सरकारी तेल कंपनियों पर भारी वित्तीय दबाव बढ़ रहा है। अधिकारियों के अनुसार हर घरेलू सिलेंडर पर लगभग 700 रुपये की अंडर-रिकवरी हो रही है। पिछले वित्त वर्ष के अंत तक घरेलू एलपीजी पर कुल अंडर-रिकवरी बढ़कर 60 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गई, जबकि एक साल पहले यह आंकड़ा करीब 41 हजार करोड़ रुपये था। इस स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने तेल कंपनियों को 30 हजार करोड़ रुपये की सहायता देने की मंजूरी दी है।

अधिकारियों ने यह भी बताया कि सिर्फ एलपीजी ही नहीं बल्कि पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर भी कंपनियों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। मौजूदा हालात में डीजल पर लगभग 30 रुपये प्रति लीटर और पेट्रोल पर करीब 6 रुपये प्रति लीटर तक का घाटा बताया जा रहा है। इससे तेल विपणन कंपनियों को प्रतिदिन 600 से 700 करोड़ रुपये तक का नुकसान हो रहा है। हालांकि सरकार ने अभी तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में आई पूरी बढ़ोतरी का बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डाला है।

पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई। फरवरी में एलपीजी का सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस लगभग 543 डॉलर प्रति टन था, जो जून तक बढ़कर 790 डॉलर प्रति टन पहुंच गया। इससे प्रोपेन और ब्यूटेन दोनों की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई। यही वजह है कि भारत सहित कई देशों में गैस की लागत बढ़ी है। फिर भी सरकार दावा कर रही है कि अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और कई पड़ोसी देशों की तुलना में भारतीय उपभोक्ताओं को काफी कम कीमत पर रसोई गैस उपलब्ध कराई जा रही है।

दिलचस्प बात यह है कि जहां घरेलू उपभोक्ता लगभग 66 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से गैस प्राप्त कर रहे हैं, वहीं होटल, रेस्टोरेंट और अन्य व्यावसायिक संस्थानों को 19 किलोग्राम का कमर्शियल सिलेंडर दिल्ली में 3113.50 रुपये में मिल रहा है। यानी उनकी लागत करीब 164 रुपये प्रति किलोग्राम बैठ रही है। कमर्शियल गैस की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार के अनुसार हर महीने स्वतः तय होती हैं और हाल के महीनों में इनमें लगातार बढ़ोतरी देखी गई है।

ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने के लिए भारत ने कई कदम उठाए हैं। सरकार के अनुसार स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर तनाव के बावजूद भारतीय जहाजों की आवाजाही जारी रखी गई और देश में किसी भी पेट्रोलियम उत्पाद की कमी नहीं होने दी गई। साथ ही घरेलू एलपीजी उत्पादन में 60 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी की गई। गैस की खरीद अमेरिका, कनाडा और अल्जीरिया जैसे देशों से भी शुरू की गई ताकि किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम हो सके। उपलब्ध गैस आपूर्ति में घरों, अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों को प्राथमिकता दी गई।

उधर गैस की चोरी और घरेलू सिलेंडरों के व्यावसायिक उपयोग पर रोक लगाने के लिए भी निगरानी बढ़ाई गई है। सरकार ने ओटीपी आधारित डिलीवरी सत्यापन को 90 प्रतिशत तक बढ़ा दिया है। इसके अलावा लोगों को पाइप्ड नेचुरल गैस यानी पीएनजी के उपयोग के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है ताकि एलपीजी पर दबाव कम किया जा सके। अंतरराष्ट्रीय हालात सामान्य होने तक ऊर्जा कीमतों पर दबाव बना रह सकता है। ऐसे में सरकार और तेल कंपनियों के सामने उपभोक्ताओं को राहत देने और बढ़ती लागत के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती बनी रहेगी। 

https://www.dainikjagranmpcg.com/business/big-change-in-ujjwala-scheme-now-only-4-cylinders-will/article-55370

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