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                <title>देश विदेश - दैनिक जागरण</title>
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                <title>फर्जी पिज्जा ऑर्डर के बहाने भारतीय युवक की हत्या, अमेरिका में सनसनी</title>
                                    <description><![CDATA[फिलाडेल्फिया में तेलंगाना के अंशुल कुंचा को डिलीवरी के लिए बुलाया गया, परिवार ने सुनियोजित साजिश का लगाया आरोप]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/murder-of-indian-youth-on-the-pretext-of-fake-pizza/article-55215"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/anshul-kuncha.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अमेरिका के फिलाडेल्फिया शहर में भारतीय मूल के एक युवक की गोली मारकर हत्या किए जाने का मामला सामने आने के बाद प्रवासी भारतीय समुदाय में चिंता बढ़ गई है। मृतक की पहचान तेलंगाना के रहने वाले 28 वर्षीय अंशुल कुंचा के रूप में हुई है। परिवार का आरोप है कि अंशुल को फर्जी पिज्जा ऑर्डर के जरिए एक सुनसान इलाके में बुलाया गया और वहां पहले से घात लगाए बैठे हमलावरों ने उन पर हमला कर दिया। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई है और पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जानकारी के मुताबिक अंशुल कुंचा फिलाडेल्फिया में एक मल्टीनेशनल कंपनी में कार्यरत थे। नौकरी के साथ-साथ अतिरिक्त आय के लिए वे सप्ताहांत में पिज्जा डिलीवरी का पार्ट-टाइम काम भी करते थे। शनिवार रात उन्हें एक डिलीवरी ऑर्डर मिला था। बताया जा रहा है कि यह ऑर्डर फिलाडेल्फिया के एक अपेक्षाकृत सुनसान इलाके का था। अंशुल तय पते पर पिज्जा पहुंचाने पहुंचे, लेकिन वहां पहुंचते ही उन पर हमला कर दिया गया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार हमलावर ने बेहद करीब से उनके सिर पर कई गोलियां चलाईं, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस और आपातकालीन सेवाओं की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। पुलिस ने घटनास्थल को घेरकर जांच शुरू की। मौके से तीन खाली कारतूस बरामद किए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि कारतूसों की स्थिति से संकेत मिलता है कि हमलावर और पीड़ित के बीच बहुत कम दूरी थी। जांच दल ने आसपास के इलाके से सबूत जुटाने का काम भी शुरू कर दिया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अंशुल के परिवार ने इस घटना को सामान्य आपराधिक वारदात मानने से इनकार किया है। उनकी बहन तन्वी कुंचा का कहना है कि यह डिलीवरी ऑर्डर एक जाल था। उनके मुताबिक जिस स्थान पर अंशुल को बुलाया गया, वहां कोई ग्राहक मौजूद नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि हमलावरों ने पहले से योजना बनाकर अंशुल को निशाना बनाया। परिवार का यह भी कहना है कि घटना के बाद अंशुल का कोई सामान नहीं लूटा गया। ऐसे में हत्या के पीछे की वजह और भी रहस्यमय हो जाती है। परिवार के अनुसार यदि यह लूटपाट की घटना होती तो हमलावर उनका मोबाइल फोन, नकदी या अन्य सामान लेकर जाते। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। यही कारण है कि परिवार इसे सुनियोजित हमला मान रहा है। हालांकि पुलिस ने अभी तक किसी भी संभावित कारण पर आधिकारिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं की है और जांच जारी होने की बात कही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">फिलाडेल्फिया पुलिस को जांच के दौरान कुछ महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं। अधिकारियों ने बताया कि जिस फोन नंबर से पिज्जा का ऑर्डर दिया गया था, उसकी जानकारी हासिल कर ली गई है। जांचकर्ता अब उस नंबर की कॉल डिटेल और अन्य तकनीकी जानकारियों के आधार पर संदिग्धों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। माना जा रहा है कि यही नंबर मामले की गुत्थी सुलझाने में अहम भूमिका निभा सकता है। घटनास्थल के आसपास लगे निगरानी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है। फिलाडेल्फिया हाउसिंग अथॉरिटी के कैमरों में घटना से पहले की कुछ गतिविधियां रिकॉर्ड हुई हैं। हालांकि गोली चलाने की पूरी घटना कैमरे में कैद नहीं हो सकी। फुटेज में अंशुल के पीछे दो संदिग्ध लोगों को चलते हुए देखा गया है। दोनों ने गहरे रंग के कपड़े पहन रखे थे और उनमें से एक व्यक्ति के पास बैकपैक भी दिखाई दे रहा था। पुलिस अब इन दोनों लोगों की पहचान करने का प्रयास कर रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अंशुल कुंचा का जीवन संघर्ष और मेहनत की मिसाल माना जाता है। परिवार के अनुसार उन्होंने हैदराबाद से बीटेक की पढ़ाई पूरी की थी। इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका गए, जहां उन्होंने मास्टर्स की डिग्री हासिल की। पढ़ाई पूरी होने के बाद उन्हें KWC कंपनी में नौकरी मिली और वे अपने करियर को आगे बढ़ाने में जुटे हुए थे। अतिरिक्त खर्चों और बचत के लिए उन्होंने सप्ताहांत में डिलीवरी का काम भी शुरू किया था। परिवार ने यह भी बताया कि अंशुल पहले भी अमेरिका में एक आपराधिक घटना का शिकार हो चुके थे। कुछ समय पहले उनसे लूटपाट की गई थी, जिसमें उनकी चेन, मोबाइल फोन और नकदी छीन ली गई थी। हालांकि उस दौरान उन्हें शारीरिक नुकसान नहीं पहुंचाया गया था। इस बार हुई घटना ने परिवार को पूरी तरह तोड़ दिया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">घटना के बाद भारत और अमेरिका दोनों जगह रहने वाले रिश्तेदारों और दोस्तों में शोक की लहर है। परिवार ने भारतीय और अमेरिकी अधिकारियों से अनुरोध किया है कि अंशुल का पार्थिव शरीर जल्द भारत भेजा जाए ताकि अंतिम संस्कार समय पर किया जा सके। वहीं न्यूयॉर्क स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास ने भी घटना पर दुख व्यक्त किया है और कहा है कि वह स्थानीय प्रशासन तथा परिवार के संपर्क में है। पुलिस हत्या के पीछे की वास्तविक वजह का पता लगाने की कोशिश कर रही है। अभी तक किसी संदिग्ध की गिरफ्तारी नहीं हुई है। परिवार को उम्मीद है कि जांच जल्द पूरी होगी और अंशुल की हत्या के जिम्मेदार लोगों को कानून के दायरे में लाया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 17:38:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>ट्रम्प ने शेयर किया AI वीडियो, भारत में बाइक और शेर की सवारी करते दिखे</title>
                                    <description><![CDATA[ट्रुथ सोशल पर पोस्ट किए गए वीडियो में डोनाल्ड ट्रम्प के कई अनोखे अवतार नजर आए, सोशल मीडिया पर शुरू हुई बहस]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/trump-shared-ai-video-in-which-he-was-seen-riding/article-55212"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/donald-trump-ai-video.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प एक बार फिर अपने सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर चर्चा में हैं। इस बार वजह एक AI-जनरेटेड वीडियो है, जिसे उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर शेयर किया है। करीब एक मिनट लंबे इस वीडियो में ट्रम्प को अलग-अलग देशों और परिस्थितियों में दिखाया गया है। कहीं वह भारत की सड़कों पर बाइक चलाते नजर आते हैं तो कहीं शेर की सवारी करते दिखाई देते हैं। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर बहस शुरू हो गई है। कुछ लोग इसे मनोरंजक और रचनात्मक बता रहे हैं, जबकि कई यूजर्स इसे राजनीतिक प्रचार का नया तरीका मान रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वीडियो में ट्रम्प को कई काल्पनिक और असाधारण दृश्यों में दिखाया गया है। एक दृश्य में वह रेगिस्तान में ऊंट पर बैठे दिखाई देते हैं, जबकि दूसरे दृश्य में पैराग्लाइडिंग करते नजर आते हैं। वीडियो में उन्हें अंतरिक्ष यात्री की तरह स्पेससूट पहनकर चांद पर अमेरिकी झंडा लगाते हुए भी दिखाया गया है। इसके अलावा ट्रम्प का चेहरा पिज्जा, बस, विशाल होर्डिंग, माउंट रशमोर और नॉर्दर्न लाइट्स जैसी जगहों पर भी दिखाई देता है। पूरा वीडियो इस तरह तैयार किया गया है कि ट्रम्प को दुनिया भर में लोकप्रिय और प्रभावशाली नेता के रूप में पेश किया जा सके।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वीडियो के बैकग्राउंड में एक गाना भी चलता है, जिसमें लगातार ट्रम्प की लोकप्रियता का जिक्र किया गया है। गीत के बोलों में दावा किया गया है कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों के लोग ट्रम्प को पसंद करते हैं और उनका समर्थन करते हैं। वीडियो में मेक्सिको, चीन, मिडिल ईस्ट और भारत का नाम भी लिया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार वीडियो में एक मिनट के भीतर ट्रम्प का नाम दर्जनों बार दोहराया जाता है, जिससे यह पूरी तरह उनके व्यक्तित्व और लोकप्रियता को केंद्र में रखकर तैयार किया गया कंटेंट नजर आता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बताया जा रहा है कि यह वीडियो ट्रुथ सोशल पर एक यूजर द्वारा तैयार किया गया था। बाद में ट्रम्प ने इसे अपनी आधिकारिक प्रोफाइल से शेयर किया। वीडियो के अंत में न्यूयॉर्क के रिपब्लिकन नेता और ट्रम्प समर्थक एंथनी कॉन्स्टैंटिनो को इसका श्रेय दिया गया है। ट्रम्प द्वारा वीडियो साझा किए जाने के बाद कॉन्स्टैंटिनो ने इसे अपने लिए सम्मान की बात बताया। उनका कहना था कि राष्ट्रपति द्वारा उनके बनाए कंटेंट को साझा करना उनके लिए गर्व का विषय है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। कई यूजर्स ने इसे मजेदार और मनोरंजक बताया। कुछ लोगों ने कहा कि वीडियो में ट्रम्प किसी हॉलीवुड फिल्म या कॉमिक बुक के सुपरहीरो की तरह दिखाई दे रहे हैं। वहीं आलोचकों ने सवाल उठाया कि क्या राजनीतिक नेताओं द्वारा इस तरह के AI कंटेंट का इस्तेमाल जनता को प्रभावित करने की कोशिश नहीं है। कुछ यूजर्स का कहना था कि जब AI तकनीक इतनी तेजी से विकसित हो रही है, तब वास्तविकता और काल्पनिक प्रस्तुति के बीच फर्क करना आम लोगों के लिए मुश्किल होता जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यह पहला मौका नहीं है जब ट्रम्प ने AI से तैयार कंटेंट साझा किया हो। पिछले कुछ महीनों में उन्होंने कई ऐसी तस्वीरें और वीडियो पोस्ट किए हैं, जिनमें उन्हें अलग-अलग रूपों में दिखाया गया। कुछ समय पहले उन्होंने खुद को जेम्स बॉन्ड के अंदाज में पेश करते हुए एक तस्वीर शेयर की थी। इसके अलावा उन्होंने एक अन्य पोस्ट में खुद को दुनिया का सबसे बड़ा आकर्षण बताया था। इन पोस्टों को भी सोशल मीडिया पर काफी चर्चा मिली थी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अप्रैल में ट्रम्प द्वारा साझा की गई एक AI-जनरेटेड तस्वीर ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया था। उस तस्वीर में उन्हें यीशु मसीह जैसे रूप में दिखाया गया था। तस्वीर सामने आने के बाद कई धार्मिक और सामाजिक संगठनों ने आपत्ति जताई थी। विवाद बढ़ने के बाद पोस्ट हटा ली गई, लेकिन ट्रम्प ने इसके लिए माफी नहीं मांगी। बाद में उन्होंने कहा था कि उन्हें लगा था कि तस्वीर में वह किसी डॉक्टर की तरह दिखाई दे रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ईरान के साथ बढ़ते तनाव के दौरान भी ट्रम्प ने AI तकनीक से बनी कई तस्वीरें साझा की थीं। इन तस्वीरों में अमेरिकी सैन्य शक्ति को बेहद प्रभावशाली तरीके से दिखाया गया था, जबकि ईरानी सेना को कमजोर और नुकसान झेलती हुई दिखाया गया था। हालांकि इन तस्वीरों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई थी और इन्हें केवल AI आधारित विजुअल कंटेंट माना गया। इसके बावजूद तस्वीरों ने सोशल मीडिया पर काफी चर्चा बटोरी थी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ट्रम्प AI तकनीक का उपयोग केवल मनोरंजन के लिए नहीं कर रहे हैं।  सोशल मीडिया के दौर में वायरल वीडियो और AI विजुअल्स नेताओं को लगातार चर्चा में बनाए रखने का प्रभावी माध्यम बन चुके हैं। कुछ विशेषज्ञ इसे "डिजिटल पर्सनैलिटी कल्ट" बनाने की कोशिश बताते हैं, जहां किसी नेता को असाधारण, सर्वशक्तिमान या लगभग काल्पनिक नायक के रूप में प्रस्तुत किया जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;"> इस तरह के कंटेंट से गलतफहमियां भी पैदा हो सकती हैं। उनका तर्क है कि AI तकनीक के जरिए तैयार की गई तस्वीरें और वीडियो लोगों के लिए सच और कल्पना के बीच की दूरी को कम कर देती हैं। इससे भ्रम फैलने और गलत नैरेटिव बनने का खतरा बढ़ जाता है। बावजूद इसके, ट्रम्प लगातार सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 17:37:49 +0530</pubDate>
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                <title>बंगाल में TMC नेताओं के खिलाफ बढ़ा जनाक्रोश, कई जगह विरोध प्रदर्शन और हंगामा</title>
                                    <description><![CDATA[रिश्वतखोरी, रंगदारी और भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच नेताओं को जनता के गुस्से का सामना करना पड़ा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/public-anger-against-tmc-leaders-increased-in-bengal-protests-and/article-55211"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/west-bengal-politics.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल में राजनीतिक माहौल इन दिनों काफी गर्म दिखाई दे रहा है। राज्य के विभिन्न इलाकों से तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेताओं के खिलाफ विरोध प्रदर्शन और जनाक्रोश की घटनाएं सामने आ रही हैं। हाल के दिनों में कई ऐसे वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए हैं, जिनमें स्थानीय लोग नेताओं के खिलाफ नाराजगी जाहिर करते नजर आ रहे हैं। कहीं नेताओं को भीड़ के गुस्से का सामना करना पड़ा तो कहीं पुलिस को हस्तक्षेप कर स्थिति संभालनी पड़ी। इन घटनाओं ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कोलकाता में रविवार को एक ऐसी ही घटना सामने आई, जब गिरफ्तार TMC पार्षद बप्पादित्य दासगुप्ता को अदालत ले जाया जा रहा था। इस दौरान उनकी गाड़ी पर लोगों ने अंडे फेंके और विरोध प्रदर्शन किया। पाटुली थाना क्षेत्र के बाहर भी बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए और उनके खिलाफ नारेबाजी की। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पार्षद और उनके सहयोगियों के खिलाफ लंबे समय से शिकायतें सामने आ रही थीं। गिरफ्तारी के बाद लोगों का गुस्सा खुलकर सामने आया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कोलकाता नगर निगम के वार्ड-101 के पार्षद बप्पादित्य दासगुप्ता को उनके सहयोगी सौरव घोष के साथ गिरफ्तार किया गया था। दोनों पर रंगदारी, धमकी देने, जबरन घुसपैठ और आग लगाने की कोशिश जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। एक स्थानीय वकील ने शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि उनसे घर में लीगल चैंबर खोलने की अनुमति के बदले 20 लाख रुपये की मांग की गई थी। पुलिस मामले की जांच कर रही है और कई बिंदुओं पर पूछताछ जारी है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसी बीच सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक अन्य वीडियो ने भी लोगों का ध्यान खींचा। हावड़ा जिले में एक TMC नेता ब्रह्मानंद चक्रवर्ती कथित रूप से पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए साड़ियों के ढेर के नीचे छिपे हुए दिखाई दिए। वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में इसकी काफी चर्चा हो रही है। हालांकि पुलिस और प्रशासन की ओर से इस मामले पर विस्तृत टिप्पणी नहीं की गई है, लेकिन वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से साझा किया जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सबसे ज्यादा चर्चा हावड़ा के अमरदाहा गांव की घटना को लेकर हो रही है। यहां ग्रामीणों ने TMC नेता सन्यासी मन्ना पर सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर रिश्वत लेने का आरोप लगाया। ग्रामीणों का कहना था कि विभिन्न सरकारी योजनाओं में नाम जोड़ने और लाभ दिलाने के बदले लोगों से पैसे लिए जाते थे। आरोपों से नाराज ग्रामीणों ने उन्हें पकड़ लिया और कथित तौर पर उनका सिर मुंडवा दिया। इसके बाद उन्हें जूते-चप्पलों की माला पहनाकर गांव में घुमाया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और किसी तरह नेता को भीड़ से बाहर निकाला। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि पूरे मामले की जांच की जाएगी। फिलहाल इस मामले में कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं हुई है, लेकिन वायरल वीडियो और स्थानीय लोगों के आरोपों को गंभीरता से लिया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि कानून को हाथ में लेने की अनुमति किसी को नहीं दी जा सकती और सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राज्य में पिछले कुछ दिनों के दौरान ऐसी कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। 5 जून को साल्ट लेक में गिरफ्तार TMC उपाध्यक्ष जय प्रकाश मजूमदार को जब पुलिस जांच के लिए एक फ्लैट पर लेकर गई, तब स्थानीय लोगों ने उनके खिलाफ नारेबाजी की थी। इस दौरान उन पर अंडे भी फेंके गए। उसी दिन दमदम इलाके में TMC पार्षद शंकर दास को कथित राहत सामग्री घोटाले के आरोपों को लेकर लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा। आरोप है कि नाराज भीड़ ने उन्हें घेर लिया और उनके घर के बाहर भी हंगामा किया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">3 जून को कूचबिहार जिले में भी एक ऐसी घटना सामने आई थी, जब TMC नेता शाहिदुल मियां को भीड़ के गुस्से से बचने के लिए कथित तौर पर एक घर में बिस्तर के नीचे छिपना पड़ा। बाद में पुलिस ने मौके पर पहुंचकर उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला और थाने ले गई। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वहीं 30 मई को सोनारपुर दक्षिण इलाके में TMC सांसद अभिषेक बनर्जी के साथ कथित मारपीट की घटना भी चर्चा में रही। आरोप है कि कुछ लोगों ने उनके खिलाफ प्रदर्शन किया और उन पर अंडे, जूते तथा अन्य वस्तुएं फेंकीं। स्थिति बिगड़ने पर सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें घेर लिया और सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"> हाल के दिनों में सामने आई इन घटनाओं ने राज्य की राजनीति में तनाव बढ़ा दिया है। विपक्षी दल इन मामलों को लेकर सरकार और सत्तारूढ़ दल पर लगातार हमले कर रहे हैं, जबकि TMC नेताओं का कहना है कि कई मामलों को राजनीतिक रूप से बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है। दूसरी ओर प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने और आरोपों की जांच करने की बात कह रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 17:37:43 +0530</pubDate>
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                <title>जंतर-मंतर प्रदर्शन के बाद घर लौटे अभिजीत दीपके, बोले- आंदोलन अभी खत्म नहीं हुआ</title>
                                    <description><![CDATA[NEET पेपर लीक मामले में शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग तेज, CJP ने देशभर में आंदोलन बढ़ाने के दिए संकेत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/abhijeet-deepke-who-returned-home-after-jantar-mantar-protest-said/article-55210"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/abhijeet-deepke.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">NEET पेपर लीक और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ शुरू हुआ आंदोलन अब और व्यापक रूप लेता दिखाई दे रहा है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के एक दिन बाद कहा है कि उनका अभियान अभी समाप्त नहीं हुआ है और जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। शनिवार को राजधानी में आयोजित प्रदर्शन के बाद रविवार सुबह अभिजीत अपने गृह नगर छत्रपति संभाजीनगर के वालुज क्षेत्र स्थित घर पहुंचे, जहां परिवार और समर्थकों ने उनका स्वागत किया।</p>
<p class="isSelectedEnd">घर पहुंचने के बाद अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया के जरिए अपने समर्थकों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर हुआ प्रदर्शन केवल शुरुआत है और सरकार को यह दिखाने का प्रयास था कि छात्र और युवा अपनी बात शांतिपूर्ण तरीके से भी मजबूती से रख सकते हैं। उनके अनुसार प्रदर्शन में हजारों लोगों ने भाग लिया और यह संख्या इस बात का संकेत है कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर युवाओं में असंतोष बढ़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि आंदोलन को देश के अलग-अलग राज्यों तक ले जाने की तैयारी की जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd">अभिजीत ने अपने संदेश में कहा कि परिवर्तन तभी संभव है जब लोग अपनी आवाज उठाएं। उनका आरोप है कि परीक्षा प्रणाली में हुई गड़बड़ियों से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है और जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले दिनों में फिर से प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे। हालांकि उन्होंने दोहराया कि उनका आंदोलन शांतिपूर्ण रहेगा और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखी जाएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन को लेकर सोशल मीडिया पर भी व्यापक चर्चा देखने को मिली। प्रदर्शन के बाद कॉकरोच जनता पार्टी के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर फॉलोअर्स की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। पार्टी से जुड़े आंकड़ों के अनुसार 24 घंटे के भीतर लाखों नए लोग उनके सोशल मीडिया नेटवर्क से जुड़े। इससे यह संकेत मिला कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पार्टी की पहुंच तेजी से बढ़ रही है और युवा वर्ग के बीच उसकी चर्चा हो रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd">सोशल मीडिया पर लोकप्रियता और वास्तविक जनसमर्थन में बड़ा अंतर होता है। यही वजह है कि अभिजीत दीपके और उनकी टीम के सामने कई चुनौतियां भी मौजूद हैं। पहली और सबसे बड़ी चुनौती अपने ऑनलाइन समर्थकों को जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं और संभावित मतदाताओं में बदलने की होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी संगठन को लंबे समय तक प्रभावी बने रहने के लिए मजबूत स्थानीय नेटवर्क और संगठनात्मक ढांचे की जरूरत होती है।</p>
<p class="isSelectedEnd">दूसरी चुनौती संगठनात्मक कैडर को लेकर है। कई बड़े आंदोलनों को विभिन्न सामाजिक संगठनों और स्वयंसेवकों का समर्थन मिला था, जिससे वे व्यापक स्तर पर फैल सके। कॉकरोच जनता पार्टी अभी मुख्य रूप से डिजिटल माध्यमों पर आधारित आंदोलन के रूप में देखी जा रही है। ऐसे में जिला, ब्लॉक और बूथ स्तर पर संगठन खड़ा करना उसके लिए महत्वपूर्ण होगा। राजनीतिक अनुभव की कमी भी एक बड़ी चुनौती मानी जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd">तीसरी चुनौती स्पष्ट एजेंडा तैयार करने की है। आंदोलन में शामिल अलग-अलग लोगों की प्राथमिकताएं अलग दिखाई दीं। कोई शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठा रहा था तो कोई बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, टैक्स व्यवस्था या बुनियादी सुविधाओं की बात कर रहा था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि किसी आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी बनाना है तो उसके पास स्पष्ट और केंद्रित एजेंडा होना चाहिए, जिससे लोग आसानी से जुड़ सकें।</p>
<p class="isSelectedEnd">कॉकरोच जनता पार्टी की शुरुआत भी एक चर्चित बयान के बाद हुई थी। दरअसल, मई महीने में न्यायपालिका से जुड़ी एक सुनवाई के दौरान बेरोजगार युवाओं को लेकर की गई टिप्पणी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई थी। इसके बाद अभिजीत दीपके ने इस शब्द को प्रतीक के रूप में अपनाते हुए कॉकरोच जनता पार्टी की स्थापना की घोषणा की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अभियान शुरू किया और शिक्षा व्यवस्था तथा परीक्षा प्रणाली से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाना शुरू किया।</p>
<p class="isSelectedEnd">इसके बाद ऑनलाइन याचिकाओं और सोशल मीडिया अभियानों के जरिए पार्टी ने अपनी पहचान बनाने की कोशिश की। धीरे-धीरे बड़ी संख्या में युवाओं ने इस अभियान का समर्थन करना शुरू किया। NEET परीक्षा से जुड़े विवादों और अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर भी संगठन लगातार सक्रिय रहा। जंतर-मंतर पर आयोजित हालिया प्रदर्शन को इसी अभियान का विस्तार माना जा रहा है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह आंदोलन आने वाले दिनों में किस दिशा में आगे बढ़ता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 17:37:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>ईरान ने अमेरिका पर लगाया युद्धविराम तोड़ने का आरोप, बढ़ा पश्चिम एशिया में तनाव</title>
                                    <description><![CDATA[तटीय रडार केंद्रों पर हमले का दावा, तेहरान बोला- अब जो हालात बनेंगे उसकी जिम्मेदारी वॉशिंगटन की होगी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/iran-accuses-america-of-breaking-ceasefire-tension-increases-in-west/article-55209"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/iran-us-conflict-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान और अमेरिका के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर एक बार फिर तेज हो गया है। ईरान ने अमेरिका पर युद्धविराम यानी सीजफायर का उल्लंघन करने का गंभीर आरोप लगाया है। तेहरान का कहना है कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई ने क्षेत्र में शांति और स्थिरता की कोशिशों को नुकसान पहुंचाया है और इससे पूरे इलाके की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। ईरानी विदेश मंत्रालय ने साफ शब्दों में कहा है कि हाल के हमलों के बाद यदि क्षेत्र में हालात और बिगड़ते हैं तो उसकी पूरी जिम्मेदारी अमेरिका की होगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">शनिवार को जारी आधिकारिक बयान में ईरान के विदेश मंत्रालय ने दावा किया कि अमेरिकी सेना ने सीरिक क्षेत्र और केश्म द्वीप स्थित तटीय रडार तथा निगरानी केंद्रों को निशाना बनाया। ईरान के मुताबिक ये हमले ऐसे समय किए गए जब तनाव कम करने और संघर्ष रोकने की कोशिशें चल रही थीं। तेहरान ने इसे युद्धविराम की शर्तों का सीधा उल्लंघन बताया और कहा कि इस तरह की कार्रवाई केवल हालात को और अधिक विस्फोटक बना सकती है। ईरानी विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में कहा कि अमेरिका लगातार ऐसे कदम उठा रहा है जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था कमजोर हो रही है। बयान में कहा गया कि यदि कोई पक्ष शांति और स्थिरता की बात करता है तो उसे अपने सैन्य कदमों में भी संयम दिखाना चाहिए। ईरान का आरोप है कि अमेरिका की हालिया कार्रवाई ने संघर्ष को फिर से भड़काने का काम किया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूसरी ओर अमेरिकी पक्ष का कहना है कि उसकी कार्रवाई सुरक्षा हितों को ध्यान में रखकर की गई। अमेरिकी अधिकारियों ने दावा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य की दिशा में बढ़ रहे ईरानी ड्रोन को रोकने के लिए कदम उठाए गए। अमेरिका का यह भी दावा है कि उसने चार ईरानी ड्रोन मार गिराए और कुछ सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। हालांकि इन दावों पर ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है और उन्हें आक्रामक कार्रवाई करार दिया है। स्थिति उस समय और गंभीर हो गई जब ईरान की ओर से कुवैत और बहरीन की दिशा में बैलिस्टिक मिसाइलें दागे जाने की खबरें सामने आईं। अमेरिकी और क्षेत्रीय सुरक्षा सूत्रों ने दावा किया कि इन मिसाइलों को रास्ते में ही इंटरसेप्ट कर लिया गया। हालांकि ईरान ने इन घटनाओं को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। फिर भी घटनाक्रम ने पूरे खाड़ी क्षेत्र में चिंता बढ़ा दी है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस बीच लेबनान में भी हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। इजराइल और विभिन्न सशस्त्र समूहों के बीच जारी संघर्ष का असर अब व्यापक रूप से दिखाई देने लगा है। हालिया आंकड़ों के अनुसार संघर्ष में हजारों लोगों की जान जा चुकी है जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं। पिछले 24 घंटों में भी कई मौतों और घायलों की सूचना मिली है। दक्षिणी लेबनान में इजराइली हमलों के बाद कई इलाकों में लोगों को अपने घर छोड़ने के निर्देश दिए गए हैं। ईरान, अमेरिका और इजराइल से जुड़े मौजूदा घटनाक्रम एक-दूसरे से अलग नहीं हैं। पश्चिम एशिया में कई मोर्चों पर एक साथ बढ़ता तनाव क्षेत्रीय स्थिरता के लिए चुनौती बनता जा रहा है। विशेष रूप से खाड़ी क्षेत्र, लेबनान और समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ी है। दुनिया के कई देश लगातार संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान तलाशने की अपील कर रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस पूरे विवाद के बीच एक संभावित ईरान-अमेरिका समझौते की चर्चाएं भी जारी हैं। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार दोनों पक्षों के बीच अरबों डॉलर की ईरानी संपत्तियों को लेकर बातचीत अटकी हुई है। बताया जा रहा है कि ईरान चाहता है कि उसकी फ्रीज की गई संपत्तियों का एक बड़ा हिस्सा तुरंत जारी किया जाए, जबकि अमेरिका इस मुद्दे पर अभी अंतिम सहमति देने को तैयार नहीं है। यही वजह है कि संभावित शांति समझौते की राह आसान नहीं दिखाई दे रही। यदि दोनों देशों के बीच संवाद आगे नहीं बढ़ता और सैन्य गतिविधियां इसी तरह जारी रहती हैं तो क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ सकती है। ऐसे समय में किसी भी छोटी घटना का बड़ा असर पड़ सकता है। यही कारण है कि संयुक्त राष्ट्र समेत कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं दोनों पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील कर रही हैं। ईरान के आरोपों और अमेरिका की सैन्य गतिविधियों ने पश्चिम एशिया की स्थिति को और जटिल बना दिया है। आने वाले दिनों में दोनों देशों की ओर से उठाए जाने वाले कदम यह तय करेंगे कि तनाव कम होगा या क्षेत्र एक नए संकट की ओर बढ़ेगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 17:37:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>NEET पेपर लीक के बाद NTA की बड़ी तैयारी, बदलेगा परीक्षा प्रणाली का पूरा ढांचा</title>
                                    <description><![CDATA[नए सिस्टम में सवाल बनाने वाले विशेषज्ञों को भी नहीं होगी परीक्षा की जानकारी, AI आधारित ट्रांसलेशन और डिजिटल प्रश्न बैंक पर फोकस]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/after-neet-paper-leak-big-preparation-of-nta-the-entire/article-55208"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/neet-ug-2026-(3).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">देश की सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षाओं में शामिल NEET-UG 2026 में सामने आए पेपर लीक विवाद के बाद राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) परीक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है। सरकार और एजेंसी दोनों ही इस बात को लेकर गंभीर हैं कि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों। इसी दिशा में एक नए मॉडल पर काम किया जा रहा है, जिसमें प्रश्न तैयार करने वाले विशेषज्ञों को भी यह जानकारी नहीं होगी कि वे किस परीक्षा के लिए सवाल बना रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">NTA एक ऐसी डिजिटल व्यवस्था विकसित करने की योजना बना रही है, जिसमें विभिन्न विषयों के विशेषज्ञ केवल प्रश्न तैयार करेंगे। इन प्रश्नों को सीधे किसी परीक्षा से नहीं जोड़ा जाएगा। बाद में इन सवालों को एक बड़े डिजिटल प्रश्न बैंक में सुरक्षित रखा जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि यदि यह व्यवस्था लागू होती है तो प्रश्नपत्र लीक होने की संभावनाएं काफी हद तक कम हो सकती हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">जानकारी के मुताबिक इस डिजिटल बैंक में हजारों प्रश्न शामिल किए जाएंगे। बताया जा रहा है कि शुरुआती चरण में करीब 10 हजार या उससे अधिक प्रश्नों का संग्रह तैयार किया जा सकता है। परीक्षा से पहले तकनीकी माध्यमों और निर्धारित मानकों के आधार पर इन्हीं प्रश्नों में से अंतिम प्रश्नपत्र तैयार किया जाएगा। इससे किसी एक व्यक्ति या समूह के पास पूरे प्रश्नपत्र की जानकारी होने की संभावना लगभग समाप्त हो जाएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था में प्रश्नपत्र निर्माण की प्रक्रिया के दौरान कई स्तरों पर मानवीय हस्तक्षेप होता है। यही वजह है कि सुरक्षा से जुड़े जोखिम बने रहते हैं। नई प्रणाली का उद्देश्य प्रक्रिया को व्यक्ति-आधारित बनाने के बजाय सिस्टम आधारित बनाना है। परीक्षा प्रबंधन से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक के अधिक इस्तेमाल से गोपनीयता और सुरक्षा दोनों को मजबूत किया जा सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">पेपर लीक मामले की जांच के दौरान अनुवाद प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठे थे। कुछ मामलों में अनुवाद से जुड़े लोगों की भूमिका सामने आने के बाद NTA इस क्षेत्र में भी बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है। एजेंसी पहले ही संकेत दे चुकी है कि आने वाले समय में अधिकांश अनुवाद कार्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के माध्यम से कराया जा सकता है। इसके बाद विशेषज्ञ केवल गुणवत्ता और शुद्धता की जांच करेंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd">अधिकारियों का कहना है कि कोशिश यह भी होगी कि अनुवाद की प्रक्रिया में शामिल लोगों को यह जानकारी न हो कि वे किस परीक्षा से संबंधित प्रश्नों पर काम कर रहे हैं। इससे संवेदनशील जानकारी के बाहर जाने की संभावना कम होगी। NTA का मानना है कि AI आधारित अनुवाद से न केवल सुरक्षा बढ़ेगी बल्कि समय और संसाधनों की भी बचत होगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस बीच एजेंसी 21 जून को प्रस्तावित NEET-UG री-एग्जाम की तैयारियों में भी जुटी हुई है। परीक्षा को लेकर सुरक्षा व्यवस्था पहले से ज्यादा मजबूत करने का दावा किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार नए विषय विशेषज्ञों को जोड़ा गया है और प्रश्नपत्र के प्रिंटिंग, ट्रांसपोर्टेशन तथा स्टोरेज सिस्टम में भी अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू किए गए हैं। उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि परीक्षा निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न हो सके।</p>
<p class="isSelectedEnd">शनिवार को आयोजित एक कार्यक्रम में केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़े मामलों में सरकार पूरी जिम्मेदारी के साथ काम कर रही है। उनके अनुसार शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस पूरे मामले में नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार की है और व्यवस्था सुधारने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">रिजिजू ने यह भी कहा कि किसी मंत्री पर सीधे भ्रष्टाचार या किसी गलत गतिविधि का आरोप हो तो इस्तीफे की मांग उचित हो सकती है, लेकिन NEET पेपर लीक मामले में शिक्षा मंत्री पर ऐसा कोई प्रत्यक्ष आरोप नहीं है। उन्होंने भरोसा जताया कि सरकार द्वारा किए जा रहे सुधार भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने में मदद करेंगे। NEET री-एग्जाम को लेकर भी कई तरह की अफवाहें फैल रही हैं। कुछ पोस्ट और मैसेज में पेपर लीक होने या प्रश्न पहले से उपलब्ध होने के दावे किए गए हैं। NTA ने इन सभी दावों को पूरी तरह भ्रामक और फर्जी बताया है। एजेंसी का कहना है कि कुछ असामाजिक तत्व और ठग छात्रों तथा अभिभावकों को गुमराह कर आर्थिक लाभ कमाने की कोशिश कर रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">NTA ने छात्रों से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर भरोसा करें और सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों से दूर रहें। एजेंसी ने यह भी बताया कि फर्जी सूचनाएं फैलाने वाले अकाउंट्स और चैनलों की पहचान की जा रही है। संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और साइबर एजेंसियों को जानकारी भेजी जा रही है ताकि ऐसे कंटेंट को हटाया जा सके। गौरतलब है कि NEET-UG देश की सबसे महत्वपूर्ण मेडिकल प्रवेश परीक्षा मानी जाती है। इसी परीक्षा के जरिए देशभर के सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में MBBS, BDS, आयुष और अन्य मेडिकल कोर्सों में प्रवेश मिलता है। हर साल लाखों छात्र इस परीक्षा में शामिल होते हैं। ऐसे में परीक्षा की विश्वसनीयता बनाए रखना सरकार और परीक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 17:37:23 +0530</pubDate>
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                <title>राहुल गांधी ने CBSE छात्र सार्थक से की मुलाकात, बोले- 18 साल का युवा सिस्टम से तेज निकला</title>
                                    <description><![CDATA[OSM पोर्टल और टेंडर प्रक्रिया पर उठाए सवाल, छात्र की पहल को बताया पारदर्शिता और जवाबदेही की मिसाल]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/rahul-gandhi-met-cbse-student-sarthak-and-said-18/article-55207"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/rahul-gandhi.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने रविवार को झारखंड के रांची निवासी 18 वर्षीय छात्र सार्थक सिद्धांत से मुलाकात का वीडियो साझा करते हुए शिक्षा व्यवस्था और पारदर्शिता को लेकर केंद्र सरकार तथा सीबीएसई पर सवाल उठाए। करीब आठ मिनट के इस वीडियो में राहुल गांधी और सार्थक के बीच हुई बातचीत दिखाई गई है, जिसमें सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली, मूल्यांकन प्रक्रिया और उससे जुड़े टेंडर को लेकर कई मुद्दों पर चर्चा हुई। राहुल गांधी ने छात्र की पहल की सराहना करते हुए कहा कि एक 18 वर्षीय युवा ने उन खामियों को सामने लाया, जिन्हें जांच एजेंसियां और बड़े संस्थागत तंत्र नहीं देख सके।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सार्थक सिद्धांत ने इसी वर्ष 12वीं कक्षा की परीक्षा दी थी। परिणाम घोषित होने के बाद उन्होंने अपने अंकों को लेकर पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया अपनाई। इसी दौरान उन्होंने अपनी स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाओं का अध्ययन किया और कथित तौर पर कई तकनीकी तथा प्रक्रियागत गड़बड़ियों की ओर ध्यान आकर्षित किया। छात्र का दावा है कि उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग, मूल्यांकन और उससे संबंधित डिजिटल व्यवस्था में कई ऐसे पहलू हैं जिनकी गंभीर जांच की आवश्यकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राहुल गांधी द्वारा साझा किए गए वीडियो में सार्थक ने बताया कि उन्होंने एक नागरिक के रूप में केवल वही किया जो किसी भी जिम्मेदार व्यक्ति को करना चाहिए। उनके अनुसार यदि किसी व्यवस्था में खामियां दिखाई दें तो उन्हें समझना और सुधार के लिए आवाज उठाना लोकतांत्रिक जिम्मेदारी का हिस्सा है। सार्थक ने कहा कि पारदर्शिता और जवाबदेही किसी भी सार्वजनिक संस्थान की विश्वसनीयता का आधार होती है और छात्रों के भविष्य से जुड़े मामलों में यह और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बातचीत के दौरान सार्थक ने बताया कि उन्हें OSM पोर्टल से जुड़ी कुछ जानकारियां एक एथिकल हैकर के माध्यम से मिली थीं। इसके बाद उन्होंने विभिन्न दस्तावेजों, टेंडर रिकॉर्ड और उपलब्ध सार्वजनिक जानकारियों का अध्ययन किया। छात्र का कहना है कि उन्होंने सीबीएसई से जुड़े सैकड़ों टेंडर दस्तावेजों की समीक्षा की और यह समझने की कोशिश की कि मूल्यांकन प्रणाली को संचालित करने वाली कंपनी को किस प्रक्रिया के तहत चयनित किया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि टेंडर प्रक्रिया के दौरान कुछ शर्तों में बदलाव किए गए, जिन्हें लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राहुल गांधी ने बातचीत के दौरान यह सवाल भी उठाया कि यदि एक 18 वर्षीय छात्र किसी व्यवस्था में संभावित खामियां पहचान सकता है, तो बड़े संस्थागत तंत्र और निगरानी एजेंसियां ऐसा क्यों नहीं कर पातीं। उन्होंने कहा कि यह केवल एक छात्र की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस जिज्ञासा और जागरूकता का उदाहरण है जो देश के युवाओं में मौजूद है। राहुल ने कहा कि लोकतंत्र में सवाल पूछना और व्यवस्था से जवाब मांगना किसी भी नागरिक का अधिकार है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सार्थक ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी अपनी राय रखी। उनका कहना था कि मौजूदा शिक्षा प्रणाली कई बार छात्रों की जिज्ञासा और खोजी सोच को प्रोत्साहित करने के बजाय सीमित कर देती है। उन्होंने बताया कि तकनीकी विषयों में रुचि और परिवार से मिले सहयोग के कारण उन्होंने इस विषय को गहराई से समझने का प्रयास किया। उनके अनुसार छात्रों को केवल परीक्षा तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें व्यवस्थाओं को समझने और उनमें सुधार के लिए भी सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस पूरे विवाद के केंद्र में OSM प्रणाली और उससे जुड़ी कंपनी COEMPT एडूटेक है, जिसे सीबीएसई के डिजिटल मूल्यांकन कार्य का ठेका मिला हुआ है। राहुल गांधी पहले भी इस कंपनी और टेंडर प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया था कि कंपनी को ठेका देने की प्रक्रिया में कई महत्वपूर्ण नियमों और मानकों को बदला गया। हालांकि सीबीएसई ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि सभी प्रक्रियाएं निर्धारित नियमों और सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप पूरी की गई हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सीबीएसई का कहना है कि ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली का उद्देश्य मूल्यांकन को अधिक तेज, पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाना है। बोर्ड के अनुसार डिजिटल मूल्यांकन से अंकों के जोड़, डेटा एंट्री और अन्य मानवीय त्रुटियों की संभावना कम होती है। हालांकि परिणाम घोषित होने के बाद कई छात्रों ने सर्वर संबंधी समस्याओं, भुगतान में कठिनाई और उत्तर पुस्तिकाओं की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें दर्ज कराई थीं। इससे पहले भी राहुल गांधी ने कुछ छात्रों के साथ बैठक कर उनकी शिकायतें सुनी थीं। उन छात्रों ने दावा किया था कि उत्तर पुस्तिकाओं और पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया में कई तरह की तकनीकी समस्याएं सामने आईं। इन घटनाओं के बाद शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, डिजिटल मूल्यांकन की गुणवत्ता और छात्रों के अधिकारों को लेकर बहस तेज हो गई है। सार्थक सिद्धांत की पहल चर्चा का विषय बनी हुई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 17:37:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>देश के कई हिस्सों में मानसून ने बढ़ाई रफ्तार, अगले 7 दिन भारी बारिश का अलर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[IMD ने दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की, कई राज्यों में तेज हवाओं और आंधी का भी अनुमान]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/monsoon-increased-speed-in-many-parts-of-the-country-alert/article-55165"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/monsoon-2026.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">नई दिल्ली। दक्षिण-पश्चिम मानसून ने देश के कई हिस्सों में अपनी रफ्तार और बढ़ा दी है। मानसून ने महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, गोवा, कर्नाटक, तमिलनाडु और पूर्वोत्तर भारत के कुछ और इलाकों में आगे बढ़त दर्ज की है। मौसम विभाग का कहना है कि अगले कुछ दिनों में मानसून और तेजी से आगे बढ़ सकता है, जिससे कई राज्यों में बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है।</p>
<p class="isSelectedEnd">मौसम विभाग की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक 6 जून को मानसून ने पूरे गोवा, कर्नाटक के बड़े हिस्से, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश के कुछ क्षेत्रों तथा तमिलनाडु के अधिकांश इलाकों को कवर कर लिया। साथ ही पूर्वोत्तर राज्यों में भी मानसून की सक्रियता बढ़ी है। विभाग का अनुमान है कि अगले दो से पांच दिनों के भीतर तेलंगाना, छत्तीसगढ़, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर के अन्य क्षेत्रों में भी मानसून आगे बढ़ सकता है। इस बीच दक्षिण भारत के कई राज्यों के लिए भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु और लक्षद्वीप में अगले सात दिनों तक कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। तटीय कर्नाटक और केरल में लगातार वर्षा के चलते निचले इलाकों में जलभराव की आशंका जताई गई है। स्थानीय प्रशासन को भी सतर्क रहने के लिए कहा गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">पूर्वोत्तर भारत में भी मौसम काफी सक्रिय रहने वाला है। अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में व्यापक वर्षा का अनुमान है। कुछ स्थानों पर बहुत भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग के अनुसार पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और सड़क अवरोध जैसी स्थितियां भी बन सकती हैं। ऐसे क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd">पूर्वी भारत में ओडिशा, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के कई हिस्सों में भी बारिश का दौर जारी रह सकता है। कुछ जिलों में तेज हवाओं के साथ गरज-चमक की संभावना है। बिहार और ओडिशा के कुछ इलाकों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। बताया जा रहा है कि बंगाल की खाड़ी में सक्रिय मौसम प्रणालियों के कारण यह स्थिति बनी हुई है। मध्य भारत भी मौसम के असर से अछूता नहीं है। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और विदर्भ क्षेत्र में अगले कुछ दिनों तक गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग ने कई स्थानों पर 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान जताया है। शुक्रवार को मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में तेज हवा दर्ज की गई थी। भोपाल, सीहोर, सतना और सागर समेत कई जिलों में हवा की गति सामान्य से अधिक रिकॉर्ड की गई।</p>
<p class="isSelectedEnd">उत्तर-पश्चिम भारत में फिलहाल बारिश की गतिविधियां सीमित हैं, लेकिन जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। वहीं दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के कुछ हिस्सों में अगले दिनों में तापमान बढ़ने का अनुमान है। मौसम विभाग ने 8 जून से 11 जून के बीच दिल्ली, पंजाब और हरियाणा में लू चलने की संभावना जताई है। पश्चिमी राजस्थान में भी गर्मी का असर तेज हो सकता है। इस समय देश के विभिन्न हिस्सों में कई ऊपरी हवा के चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय हैं। इसके अलावा एक पश्चिमी विक्षोभ भी उत्तर भारत को प्रभावित कर रहा है। यही कारण है कि कई राज्यों में अलग-अलग तरह की मौसम गतिविधियां देखने को मिल रही हैं। दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत में जहां बारिश का दबदबा है, वहीं उत्तर-पश्चिमी हिस्सों में गर्मी बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">मछुआरों के लिए भी विशेष चेतावनी जारी की गई है। बंगाल की खाड़ी और अरब सागर के कई हिस्सों में समुद्र की स्थिति खराब रहने की संभावना है। मौसम विभाग ने 11 जून तक कई समुद्री क्षेत्रों में मछुआरों को न जाने की सलाह दी है। तेज हवाओं और ऊंची लहरों के कारण समुद्री गतिविधियों पर असर पड़ सकता है। भारी बारिश वाले इलाकों में स्थानीय बाढ़, जलभराव और यातायात प्रभावित होने जैसी स्थितियां बन सकती हैं। वहीं तेज आंधी और तूफानी हवाओं से पेड़ों, बिजली लाइनों और फसलों को नुकसान पहुंचने का भी खतरा है। लोगों को मौसम से जुड़ी ताजा जानकारी पर नजर रखने और प्रशासन की सलाह का पालन करने की अपील की गई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 12:00:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>घरेलू LPG सिलेंडर ₹29 महंगा, तीन महीने में ₹89 बढ़े दाम</title>
                                    <description><![CDATA[नई दरें आधी रात से लागू, दिल्ली में 14.2 किलो का सिलेंडर अब ₹942 में मिलेगा; बढ़ती ऊर्जा लागत और कंपनियों के नुकसान को बताया गया वजह।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/6a25074f61360/article-55164"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/घरेलू-lpg-सिलेंडर-₹29-महंगा,-उपभोक्ताओं-को-झटका.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">घरेलू रसोई गैस का इस्तेमाल करने वाले करोड़ों उपभोक्ताओं को एक बार फिर महंगाई का झटका लगा है। घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत में ₹29 की बढ़ोतरी कर दी गई है। नई दरें आधी रात से लागू हो गई हैं, जिसके बाद राजधानी दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाला घरेलू गैस सिलेंडर ₹913 से बढ़कर ₹942 का हो गया है। यह पिछले तीन महीनों के भीतर दूसरी बार है जब घरेलू LPG की कीमतों में इजाफा किया गया है। इससे पहले मार्च में भी सिलेंडर के दाम ₹60 बढ़ाए गए थे। ऐसे में मार्च से जून के बीच घरेलू गैस सिलेंडर कुल ₹89 महंगा हो चुका है। कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी का असर सीधे आम परिवारों के मासिक बजट पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">तेल कंपनियों और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े सूत्रों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा उत्पादों की बढ़ती कीमतों का दबाव लगातार बना हुआ है। इसके अलावा आयात लागत, परिवहन खर्च और वितरण से जुड़े खर्चों में भी बढ़ोतरी हुई है। बताया जा रहा है कि इन्हीं कारणों को देखते हुए घरेलू LPG की कीमतों में संशोधन किया गया है। कंपनियों का दावा है कि घरेलू सिलेंडर की बिक्री पर उन्हें लंबे समय से नुकसान उठाना पड़ रहा था। ऐसे में बढ़े हुए दाम केवल आंशिक राहत देने वाले हैं और पूरी लागत की भरपाई अभी भी नहीं हो पा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सरकारी तेल कंपनियों को प्रत्येक घरेलू LPG सिलेंडर पर करीब ₹703 का नुकसान हो रहा था। कंपनियों का कहना है कि वर्तमान मूल्य वृद्धि के बाद भी यह अंतर पूरी तरह खत्म नहीं होगा। ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतों में नरमी नहीं आती है तो आने वाले समय में मूल्य निर्धारण को लेकर फिर समीक्षा की जा सकती है। हालांकि इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक संकेत नहीं दिया गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">घरेलू सिलेंडर के साथ-साथ छोटे 5 किलोग्राम वाले LPG सिलेंडर की कीमतों में भी बढ़ोतरी की गई है। इस श्रेणी के सिलेंडर पर ₹11 का इजाफा किया गया है, जिसके बाद इसकी कीमत ₹821.50 तक पहुंच गई है। छोटे सिलेंडर आमतौर पर अस्थायी उपयोग, छोटे परिवारों और कुछ व्यावसायिक जरूरतों के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। ऐसे में इस वर्ग के उपभोक्ताओं पर भी अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रसोई गैस की कीमतों में बढ़ोतरी ऐसे समय हुई है जब पेट्रोल, डीजल और CNG के दाम भी पिछले कुछ सप्ताहों में ऊपर गए हैं। मई के दौरान पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कुल मिलाकर करीब ₹7.50 प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि CNG भी लगभग ₹6 प्रति किलोग्राम महंगी हुई है। लगातार बढ़ती ईंधन लागत का असर परिवहन, लॉजिस्टिक्स और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईंधन महंगा होता है तो इसका प्रभाव धीरे-धीरे कई अन्य क्षेत्रों में भी दिखाई देने लगता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">तेल कंपनियों का कहना है कि पेट्रोल और डीजल की बिक्री में भी उन्हें पूरी लागत के मुकाबले कम मूल्य मिल रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार कंपनियों को पेट्रोल पर लगभग ₹11 प्रति लीटर और डीजल पर ₹33.6 प्रति लीटर तक का नुकसान होने का दावा किया गया है। हालांकि सरकार का कहना है कि वैश्विक बाजार में आई पूरी मूल्य वृद्धि का बोझ सीधे उपभोक्ताओं पर नहीं डाला गया है। कुछ हिस्से का भार तेल विपणन कंपनियां स्वयं वहन कर रही हैं ताकि आम लोगों पर असर सीमित रखा जा सके।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">LPG सिलेंडर की कीमत तय करने की प्रक्रिया कई कारकों पर निर्भर करती है। सबसे पहले अंतरराष्ट्रीय बाजार में LPG की कीमतों का आकलन किया जाता है। भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए वैश्विक दरों में बदलाव का सीधा असर घरेलू कीमतों पर पड़ता है। इसके अलावा डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यदि रुपया कमजोर होता है तो आयात महंगा पड़ता है और इसका प्रभाव कीमतों में दिखाई देता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसके साथ ही गैस आयात करने, उसे देश के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचाने, बॉटलिंग प्लांट में भरने और वितरण नेटवर्क के संचालन पर होने वाला खर्च भी जोड़ा जाता है। तेल कंपनियां इन सभी लागतों का आकलन करने के बाद बाजार की परिस्थितियों के अनुरूप मूल्य तय करती हैं। सरकार की कर नीति, सब्सिडी व्यवस्था और अन्य प्रशासनिक निर्णय भी अंतिम कीमत को प्रभावित करते हैं। घरेलू LPG की कीमतों में ताजा बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब महंगाई पहले से ही आम परिवारों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। रसोई गैस हर घर की जरूरत है और इसकी कीमत बढ़ने से मासिक घरेलू खर्च पर सीधा असर पड़ता है। विशेष रूप से मध्यम वर्ग और सीमित आय वाले परिवारों को अपने बजट में अतिरिक्त प्रबंधन करना पड़ सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 11:45:00 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>अमेरिका-इजराइल जासूसी विवाद से बढ़ा तनाव, DIA का अलर्ट ‘क्रिटिकल’ स्तर पर</title>
                                    <description><![CDATA[ट्रम्प सरकार और नेतन्याहू के बीच मतभेद गहराए, खुफिया एजेंसियों में असाधारण चेतावनी जारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/tension-increases-due-to-us-israel-spying-dispute-dias-alert-at/article-55143"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/us-israel-spy-controversy.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">अमेरिका और इजराइल के बीच रिश्तों में एक बार फिर तनाव की स्थिति बनती दिखाई दे रही है। इस बार मामला सीधे जासूसी और खुफिया जानकारी से जुड़ा हुआ है, जिसने वॉशिंगटन और तेल अवीव दोनों में हलचल बढ़ा दी है। अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) के भीतर यह चिंता जताई जा रही है कि इजराइल अमेरिकी अधिकारियों और ट्रम्प सरकार की अंदरूनी जानकारियों तक पहुंच बनाने की कोशिश कर सकता है। यह दावा एक अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट में सामने आया है, जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने अपनी निगरानी और सतर्कता बढ़ा दी है। हालांकि इजराइल ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है और इसे पूरी तरह झूठा बताया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">NBC न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी (DIA) ने हाल ही में इजराइल से जुड़े काउंटर-इंटेलिजेंस खतरे के स्तर को बढ़ाकर ‘क्रिटिकल’ कर दिया है। यह एजेंसी का सबसे गंभीर अलर्ट माना जाता है और आमतौर पर बेहद असाधारण परिस्थितियों में ही जारी किया जाता है। रिपोर्ट में दो मौजूदा और एक पूर्व अमेरिकी अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि यह फैसला अचानक नहीं बल्कि कई घटनाओं और आकलनों के आधार पर लिया गया है। हालांकि किसी एक बड़े सुरक्षा उल्लंघन की पुष्टि अब तक नहीं हुई है, लेकिन लगातार मिल रही सूचनाओं ने अमेरिकी एजेंसियों को सतर्क कर दिया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">सूत्रों के अनुसार, इस अलर्ट का सीधा असर उन अमेरिकी अधिकारियों पर पड़ सकता है जो इजराइल की यात्रा करते हैं या वहां के अधिकारियों से नियमित संपर्क में रहते हैं। ऐसे मामलों में सुरक्षा प्रोटोकॉल को और कड़ा किया गया है। बताया जा रहा है कि अमेरिकी अधिकारी विदेश यात्राओं के दौरान अपने निजी फोन और लैपटॉप का इस्तेमाल करने से बचते हैं और उनकी जगह अस्थायी डिवाइस का उपयोग किया जाता है। कई बार संवेदनशील बैठकों को भी ऐसे स्थानों पर रखा जाता है जहां निगरानी का जोखिम कम हो। यह स्थिति इस बात की ओर इशारा करती है कि अमेरिका इजराइल की खुफिया क्षमता को लेकर सतर्क रुख अपना रहा है, भले ही दोनों देश लंबे समय से रणनीतिक साझेदार रहे हों।</p>
<p class="isSelectedEnd">इजराइली दूतावास ने इन सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उनका देश किसी भी सहयोगी देश की जासूसी नहीं करता। दूतावास का कहना है कि इजराइल की खुफिया एजेंसियां केवल उन देशों और समूहों पर नजर रखती हैं जिन्हें वह सुरक्षा खतरा मानता है। दूसरी तरफ अमेरिकी अधिकारी भी यह स्वीकार कर रहे हैं कि किसी एक घटना के कारण यह कदम नहीं उठाया गया, बल्कि कई सूचनाओं के आधार पर जोखिम का आकलन किया गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">यह पूरा विवाद ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका और इजराइल के बीच ईरान को लेकर पहले से ही मतभेद बढ़े हुए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, ट्रम्प प्रशासन ईरान के साथ नए समझौते की कोशिश कर रहा है, जबकि इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू इस पर सख्त रुख अपनाए हुए हैं। लेबनान में हिजबुल्लाह को लेकर भी दोनों देशों की रणनीति अलग-अलग मानी जा रही है। इसी बीच ट्रम्प और नेतन्याहू के बीच फोन पर हुई कथित तीखी बातचीत ने भी राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है। इस विवाद में एक और परत तब जुड़ी जब यह जानकारी सामने आई कि ट्रम्प ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया था कि उन्होंने नेतन्याहू के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल किया था। इससे दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत और राजनीतिक तनाव की अटकलें और तेज हो गई हैं। यह स्थिति सिर्फ कूटनीतिक मतभेद नहीं बल्कि रणनीतिक असहमति का संकेत भी हो सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd">अमेरिका और इजराइल के बीच जासूसी के आरोप नए नहीं हैं। इतिहास में कई ऐसे मामले सामने आए हैं जिन्होंने दोनों देशों के रिश्तों को प्रभावित किया है। 1985 का जोनाथन पोलार्ड केस सबसे चर्चित उदाहरणों में से एक है, जिसमें एक अमेरिकी नौसेना अधिकारी पर इजराइल को गोपनीय जानकारी देने का आरोप लगा था। इस मामले ने दोनों देशों के बीच लंबे समय तक तनाव बनाए रखा था। इसी तरह 2008 में बेन-अमी कादिश केस में भी संवेदनशील रक्षा दस्तावेज लीक करने के आरोप लगे थे।</p>
<p class="isSelectedEnd">इसके अलावा 2019 में ‘स्टिंगरे डिवाइस’ को लेकर भी विवाद सामने आया था, जिसमें आशंका जताई गई थी कि व्हाइट हाउस के आसपास मोबाइल डेटा की निगरानी की गई। हालांकि उस समय भी इजराइल ने सभी आरोपों से इनकार किया था और किसी भी तरह की संलिप्तता से साफ इनकार किया गया था। मौजूदा विवाद ने एक बार फिर अमेरिका-इजराइल संबंधों की जटिलता को सामने ला दिया है। भले ही दोनों देश रणनीतिक साझेदार हों, लेकिन खुफिया और सुरक्षा मामलों में अविश्वास की परतें समय-समय पर उभरती रही हैं। DIA का यह नया अलर्ट आने वाले समय में दोनों देशों के बीच सहयोग और निगरानी दोनों को प्रभावित कर सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 17:38:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>चीन-उत्तर कोरिया रिश्तों में नया मोड़, पुतिन-किम नजदीकी से जिनपिंग चिंतित</title>
                                    <description><![CDATA[शी जिनपिंग 7 साल बाद प्योंगयांग दौरे पर, रूस-उत्तर कोरिया की बढ़ती साझेदारी से एशिया की भू-राजनीति में बदलाव के संकेत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/new-turn-in-china-north-korea-relations-jinping-worried-about-putin-kim/article-55142"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/xi-jinping-north-korea-visit.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">एशिया की भू-राजनीति में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग अगले हफ्ते उत्तर कोरिया के दौरे पर जा रहे हैं, जहां उनकी मुलाकात किम जोंग उन से होगी। यह यात्रा 8 से 9 जून के बीच प्रस्तावित है और करीब 7 साल बाद शी जिनपिंग प्योंगयांग पहुंचेंगे। यह दौरा ऐसे समय पर हो रहा है जब रूस, चीन और उत्तर कोरिया के बीच बदलते रिश्तों ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। कुछ साल पहले तक उत्तर कोरिया पर चीन का लगभग पूर्ण प्रभाव माना जाता था, लेकिन हाल के वर्षों में स्थिति तेजी से बदली है। यूक्रेन युद्ध के बाद रूस और उत्तर कोरिया के बीच सैन्य और आर्थिक सहयोग काफी बढ़ गया है। हथियारों की आपूर्ति, ऊर्जा सहायता और रणनीतिक समर्थन ने किम जोंग उन की स्थिति को पहले से कहीं मजबूत कर दिया है। अब उत्तर कोरिया केवल चीन पर निर्भर नहीं रहा, बल्कि रूस एक नए और प्रभावशाली साझेदार के रूप में उभरा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">चीन लंबे समय से उत्तर कोरिया का सबसे बड़ा आर्थिक और राजनीतिक सहयोगी रहा है। दोनों देशों के बीच 1400 किलोमीटर लंबी सीमा और एक विशेष रक्षा संधि भी है, जिसे बीजिंग की एकमात्र सक्रिय सैन्य संधि माना जाता है। इस समझौते के अनुसार यदि किसी एक देश पर हमला होता है तो दूसरा उसकी मदद करेगा। इस साल इस संधि के 65 वर्ष पूरे हो रहे हैं, जिससे इस दौरे का महत्व और बढ़ जाता है। हालांकि हालिया घटनाक्रम चीन के लिए चिंता का विषय बन गए हैं। रूस और उत्तर कोरिया के बीच बढ़ती नजदीकी ने बीजिंग की रणनीतिक स्थिति को चुनौती दी है। किम जोंग उन अब खुद को सिर्फ चीन पर निर्भर नेता के रूप में नहीं देखना चाहते। उनका झुकाव रूस की ओर बढ़ा है, जिससे उन्हें आर्थिक और सैन्य दोनों स्तरों पर अतिरिक्त लाभ मिला है। वहीं चीन इस स्थिति को अपने प्रभाव में कमी के रूप में देख रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">शी जिनपिंग का यह दौरा इसी संतुलन को दोबारा स्थापित करने की कोशिश माना जा रहा है। चीन चाहता है कि उत्तर कोरिया पर उसका प्रभाव बना रहे और वह क्षेत्रीय राजनीति में प्रमुख भूमिका में बना रहे। दूसरी ओर किम जोंग उन इस स्थिति का लाभ उठाकर चीन और रूस दोनों से अधिक रियायतें हासिल करने की कोशिश कर सकते हैं। यूक्रेन युद्ध ने उत्तर कोरिया की अंतरराष्ट्रीय स्थिति को भी बदल दिया है। रूस को हथियार और सैन्य सहयोग देने के बदले में उत्तर कोरिया को तेल, खाद्य सामग्री और तकनीकी सहायता मिल रही है। इस सहयोग ने किम जोंग उन को आर्थिक रूप से काफी राहत दी है। वहीं चीन इस बढ़ती साझेदारी को अपने प्रभाव के लिए चुनौती के रूप में देख रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">पिछले कुछ वर्षों में उत्तर कोरिया की परमाणु नीति पर भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है। रूस ने न केवल उत्तर कोरिया के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंधों पर नरम रुख अपनाया है, बल्कि कुछ मामलों में इन प्रतिबंधों को कमजोर भी किया है। चीन का रुख भी पहले की तुलना में अपेक्षाकृत नरम हुआ है और वह अब खुले तौर पर निंदा करने से बचता दिखाई देता है। इस पूरे घटनाक्रम में किम जोंग उन की स्थिति पहले से अधिक मजबूत नजर आती है। कोविड महामारी के बाद उत्तर कोरिया ने खुद को अलग-थलग रखा, लेकिन बाद में रूस के साथ साझेदारी ने उसकी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया। पर्यटन और सीमित व्यापार के माध्यम से भी उत्तर कोरिया नए राजस्व स्रोत तलाशने की कोशिश कर रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">दूसरी तरफ अमेरिका भी इस पूरे क्षेत्र पर नजर बनाए हुए है। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प कई बार किम जोंग उन से बातचीत की इच्छा जता चुके हैं, लेकिन परमाणु कार्यक्रम पर गतिरोध अभी भी बना हुआ है। किम जोंग उन स्पष्ट कर चुके हैं कि वे अपने परमाणु हथियारों को सुरक्षा की गारंटी मानते हैं और किसी भी बातचीत में उन्हें छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं। इस पूरी स्थिति ने एशिया में शक्ति संतुलन को बदल दिया है। चीन, रूस और उत्तर कोरिया के बीच बनते-बिगड़ते समीकरण आने वाले समय में वैश्विक राजनीति पर गहरा असर डाल सकते हैं। शी जिनपिंग का यह दौरा न केवल एक कूटनीतिक मुलाकात है, बल्कि यह चीन की रणनीतिक स्थिति को फिर से मजबूत करने की कोशिश भी मानी जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 17:14:15 +0530</pubDate>
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                <title>अमेरिका-ईरान में तनाव चरम पर, रडार साइट्स पर हमला और मिसाइल जवाबी कार्रवाई</title>
                                    <description><![CDATA[होर्मुज स्ट्रेट में सैन्य टकराव बढ़ा, खाड़ी देशों में अलर्ट, वैश्विक चिंता गहरी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/us-iran-tension-at-its-peak-attack-on-radar-sites-and/article-55141"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/us-iran-conflict-(1).jpg" alt=""></a><br /><p>पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने खाड़ी क्षेत्र को अस्थिर कर दिया है। ताजा घटनाक्रम में अमेरिका ने ईरान की कई रडार साइट्स को निशाना बनाने का दावा किया है, जबकि जवाबी कार्रवाई में ईरान ने कुवैत और बहरीन की ओर बैलिस्टिक मिसाइलें दागने की बात कही है अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, अमेरिकी सेना ने ईरान के गोरुक और केश्म आइलैंड पर स्थित रडार साइट्स पर सटीक हमले किए। इससे पहले होर्मुज स्ट्रेट क्षेत्र में ईरान के चार ड्रोन हमलों को हवा में ही मार गिराया गया। अमेरिकी सेना का दावा है कि यह कार्रवाई संभावित बड़े हमलों को रोकने के लिए की गई।</p>
<p>इसी बीच ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने बयान जारी कर कहा कि उसने होर्मुज स्ट्रेट के पास अमेरिकी और उसके सहयोगी ठिकानों पर जवाबी मिसाइल हमला किया है। इसके कुछ घंटों बाद CENTCOM ने दावा किया कि ईरान ने कुवैत और बहरीन की दिशा में कुल सात बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जिनमें से छह को एयर डिफेंस सिस्टम ने हवा में ही नष्ट कर दिया, जबकि एक मिसाइल अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच सकी। इस पूरे घटनाक्रम ने खाड़ी देशों की सुरक्षा व्यवस्था को हाई अलर्ट पर ला दिया है। कुवैत और बहरीन में सैन्य ठिकानों के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई है और एयरस्पेस मॉनिटरिंग सिस्टम को सक्रिय कर दिया गया है। क्षेत्रीय स्तर पर किसी बड़े युद्ध की आशंका को लेकर चिंता गहराती जा रही है।</p>
<p>इस बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बयान दिया है कि अमेरिकी हमलों के बाद ईरान की मिसाइल क्षमता काफी कमजोर हो गई है। ट्रम्प के अनुसार, ईरान के पास अब उसकी कुल मिसाइल ताकत का केवल 21 से 22 प्रतिशत हिस्सा ही बचा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिकी कार्रवाई ने ईरान की सैन्य क्षमता को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। हालांकि, अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट इस दावे से अलग तस्वीर पेश करती है। न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का मानना है कि ईरान ने अपनी 33 में से 30 मिसाइल साइट्स को फिर से सक्रिय कर लिया है और उसके पास अभी भी लगभग 70 प्रतिशत मिसाइल भंडार मौजूद है। इस रिपोर्ट ने ट्रम्प के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं और सैन्य विश्लेषकों के बीच बहस को और बढ़ा दिया है।</p>
<p>पिछले 24 घंटों में क्षेत्र में कई अन्य महत्वपूर्ण घटनाएं भी सामने आई हैं। ट्रम्प ने संकेत दिया है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच कोई कूटनीतिक समझौता होता है, तो वे ईरान के सुप्रीम लीडर से मिलने के लिए तैयार हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि यूरेनियम एनरिचमेंट से जुड़े मुद्दों पर पहले गंभीर बातचीत जरूरी है। दूसरी ओर ईरान में मानवीय कदम उठाते हुए 2000 से अधिक कैदियों की सजा माफ या कम कर दी गई है। इसमें वे कैदी शामिल नहीं हैं जिन पर जासूसी या राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े गंभीर आरोप हैं। यह फैसला ईरान के सुप्रीम नेतृत्व की मंजूरी के बाद लिया गया है।</p>
<p>लेबनान में भी स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। दक्षिणी इलाकों में इजराइली हवाई हमलों की रिपोर्ट सामने आई है, जिनमें कम से कम चार लोगों की मौत और कई अन्य घायल हुए हैं। सीजफायर बातचीत के बावजूद क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई जारी रहने से हालात और बिगड़ रहे हैं। ऊर्जा क्षेत्र में भी बड़ा असर देखा गया है। अमेरिकी नाकेबंदी के कारण ईरान का तेल निर्यात मई महीने में 84 प्रतिशत तक गिर गया है। अब ईरान बड़े टैंकरों की जगह छोटे जहाजों के माध्यम से तेल निर्यात कर रहा है ताकि प्रतिबंधों से बचा जा सके।</p>
<p>इसी बीच यूरोप में भी राजनीतिक प्रतिक्रिया देखने को मिली है। आयरलैंड ने इजराइल के दो वरिष्ठ मंत्रियों—इतामार बेन-ग्वीर और बेजालेल स्मोट्रिच—के देश में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया है। आयरिश सरकार ने कहा कि इन नेताओं के बयान और नीतियां फिलिस्तीनियों के खिलाफ नफरत और हिंसा को बढ़ावा देती हैं।  अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव केवल दो देशों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसका असर पूरे पश्चिम एशिया और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द कूटनीतिक समाधान नहीं निकला तो स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 17:13:40 +0530</pubDate>
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