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                <title>बिजनेस - दैनिक जागरण</title>
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                <title>गौतम अडाणी फिर बने एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति, एक महीने बाद हासिल की शीर्ष जगह</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी जांच में राहत के बाद बढ़ी दौलत, शेयरों में तेजी से अंबानी और मसायोशी सन को छोड़ा पीछे]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/gautam-adani-again-becomes-asias-richest-person-regains-the-top/article-55172"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/gautam-adani.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अडाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडाणी ने एक बार फिर एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति का स्थान हासिल कर लिया है। करीब एक महीने पहले तक इस सूची में पीछे खिसक चुके अडाणी ने अब जोरदार वापसी करते हुए रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी और जापान की सॉफ्टबैंक के प्रमुख मसायोशी सन को पीछे छोड़ दिया है। फोर्ब्स की रियल टाइम बिलेनियर सूची के अनुसार उनकी कुल संपत्ति बढ़कर 90 अरब डॉलर यानी लगभग 8.55 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई है। बाजार में अडाणी समूह की कंपनियों के शेयरों में लगातार आई तेजी को इस उछाल की सबसे बड़ी वजह माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जानकारी के मुताबिक अप्रैल 2026 तक गौतम अडाणी एशिया के सबसे अमीर कारोबारी बने हुए थे, लेकिन बाद में शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव और कुछ निवेशकों की सतर्कता के कारण उनकी रैंकिंग नीचे चली गई थी। मई के दौरान वह तीसरे स्थान पर पहुंच गए थे। हालांकि बीते कुछ हफ्तों में समूह की कंपनियों में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी और शेयरों में जबरदस्त खरीदारी देखने को मिली। इसी का असर उनकी कुल संपत्ति पर भी दिखाई दिया और वह फिर से शीर्ष स्थान पर पहुंच गए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">फोर्ब्स के आंकड़ों के अनुसार अडाणी के बाद दूसरे स्थान पर मुकेश अंबानी हैं जिनकी अनुमानित संपत्ति करीब 8.43 लाख करोड़ रुपये बताई जा रही है। वहीं तीसरे स्थान पर सॉफ्टबैंक के सीईओ मसायोशी सन हैं जिनकी कुल नेटवर्थ लगभग 87 अरब डॉलर आंकी गई है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के दिनों में अडाणी समूह के शेयरों में आई मजबूती ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है और इसका सीधा फायदा समूह के चेयरमैन की संपत्ति में देखने को मिला है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस साल 2026 में अडाणी समूह की विभिन्न कंपनियों के शेयरों में 23 प्रतिशत से लेकर 56 प्रतिशत तक की तेजी दर्ज की गई है। शुक्रवार के कारोबारी सत्र में भी समूह की कई कंपनियों के शेयर मजबूत बढ़त के साथ बंद हुए। अडाणी ग्रीन एनर्जी के शेयरों में करीब 7 प्रतिशत की उछाल देखने को मिली। वहीं अडाणी एनर्जी के शेयर लगभग 4 प्रतिशत मजबूत हुए। अडाणी एंटरप्राइजेज और अडाणी पोर्ट्स में भी करीब 2-2 प्रतिशत की तेजी रही, जबकि अडाणी पावर के शेयरों में 1 प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की गई। बाजार में इस तेजी को निवेशकों के बढ़ते भरोसे का संकेत माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बताया जा रहा है कि पिछले महीने अमेरिकी न्याय विभाग की ओर से अडाणी समूह के खिलाफ लगाए गए कुछ प्रमुख आरोपों को खारिज किए जाने के बाद निवेशकों का रुख तेजी से बदला। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक समूह पर सोलर एनर्जी आपूर्ति से जुड़े अनुबंधों में कथित रिश्वतखोरी के आरोप लगाए गए थे। इन आरोपों के सामने आने के बाद कई निवेशक सतर्क हो गए थे और बाजार में दबाव देखने को मिला था। लेकिन जांच में राहत मिलने के बाद हालात बदले और समूह की कंपनियों में फिर से खरीदारी बढ़ गई। इसी घटनाक्रम के बाद गौतम अडाणी की संपत्ति में लगभग 10 अरब डॉलर यानी करीब 95 हजार करोड़ रुपये का इजाफा हुआ है। बाजार में सकारात्मक संकेत मिलने के साथ विदेशी और घरेलू निवेशकों की दिलचस्पी भी बढ़ी। शेयरों में लगातार आई तेजी ने अडाणी को एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति के रूप में फिर से स्थापित कर दिया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">गौरतलब है कि वर्ष 2023 में अमेरिकी शॉर्ट सेलर फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट के बाद अडाणी समूह को बड़ा झटका लगा था। रिपोर्ट में समूह पर शेयरों में हेरफेर और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए गए थे। उस समय अडाणी समूह की कई सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट आई थी और समूह के बाजार पूंजीकरण में भी बड़ी कमी देखी गई थी। हालांकि बाद में विभिन्न जांचों और नियामकीय प्रक्रियाओं के दौरान कई आरोप साबित नहीं हो सके और धीरे-धीरे निवेशकों का भरोसा लौटता गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दुनिया के सबसे अमीर लोगों की सूची में भी गौतम अडाणी की स्थिति मजबूत हुई है। फोर्ब्स के अनुसार वह फिलहाल दुनिया के 23वें सबसे अमीर व्यक्ति हैं। उनके ठीक बाद मुकेश अंबानी और मसायोशी सन का स्थान है। शुक्रवार को अडाणी दुनिया के उन चुनिंदा अरबपतियों में शामिल रहे जिनकी संपत्ति में एक ही दिन में सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की गई। उनकी कुल संपत्ति में करीब 23.74 हजार करोड़ रुपये का इजाफा हुआ। इस मामले में उनसे आगे केवल दिग्गज निवेशक वॉरेन बफेट रहे, जिनकी संपत्ति में एक दिन के दौरान लगभग 28.49 हजार करोड़ रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई।</p>
<p style="text-align:justify;">वैश्विक स्तर पर हालांकि एलन मस्क अब भी सबसे अमीर व्यक्ति बने हुए हैं। उनकी कुल संपत्ति 77 लाख करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है। मस्क की संपत्ति दुनिया के कई बड़े उद्योगपतियों से काफी आगे है। वहीं गूगल के सह-संस्थापक लैरी पेज और ओरेकल के संस्थापक लैरी एलिसन भी शीर्ष अरबपतियों की सूची में शामिल हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 13:05:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>मौसम की मार से एशियाई चावल बाजार में हलचल, भारत में कीमतें फिलहाल स्थिर</title>
                                    <description><![CDATA[अल नीनो और खराब मौसम से वियतनाम-बांग्लादेश प्रभावित, भारत के मजबूत भंडार ने दी राहत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/asian-rice-market-disrupted-due-to-weather-prices-in-india/article-55170"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/india-rice-price.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">एशिया के कई देशों में मौसम की अनिश्चितता और अल नीनो के संभावित असर ने चावल बाजार को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। वियतनाम में चावल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है, जबकि बांग्लादेश में भारी बारिश, बाढ़ और हीटवेव के कारण फसल को बड़ा नुकसान पहुंचा है। इसके विपरीत भारत में स्थिति फिलहाल नियंत्रण में दिखाई दे रही है। पर्याप्त उत्पादन, सरकारी भंडार और घरेलू आपूर्ति मजबूत रहने के कारण चावल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती मांग के बावजूद भारतीय बाजार पर फिलहाल किसी बड़े दबाव के संकेत नहीं मिले हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">चावल दुनिया की आधी से ज्यादा आबादी का प्रमुख खाद्यान्न है और एशिया इसके उत्पादन और खपत का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है। ऐसे में जब किसी बड़े उत्पादक देश में मौसम संबंधी संकट पैदा होता है तो उसका असर वैश्विक बाजार पर भी देखने को मिलता है। इस समय वियतनाम और बांग्लादेश में सामने आई चुनौतियों ने एक बार फिर खाद्य सुरक्षा और कृषि पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को लेकर चिंता बढ़ा दी है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वियतनाम, जो दुनिया के सबसे बड़े चावल निर्यातकों में शामिल है, वहां चावल की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। बाजार से जुड़े सूत्रों के अनुसार वियतनाम के 5 प्रतिशत ब्रोकन चावल की निर्यात कीमत बढ़कर 415 से 420 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गई है। एक सप्ताह पहले यही कीमत 405 से 410 डॉलर प्रति टन के बीच थी। व्यापारियों का कहना है कि अल नीनो के संभावित प्रभाव और भविष्य में उत्पादन घटने की आशंकाओं ने बाजार को प्रभावित किया है। निर्यातकों और खरीदारों दोनों के बीच सतर्कता बढ़ी है, जिससे कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सरकारी आंकड़ों के मुताबिक वियतनाम ने मई महीने में करीब 9.25 लाख टन चावल का निर्यात किया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में लगभग 19 प्रतिशत अधिक है। वहीं इस साल जनवरी से मई के बीच कुल निर्यात 43 लाख टन तक पहुंच गया। निर्यात में बढ़ोतरी के बावजूद भविष्य की फसल को लेकर चिंता बनी हुई है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौसम की स्थिति सामान्य नहीं रही तो आने वाले महीनों में उत्पादन प्रभावित हो सकता है, जिसका असर कीमतों पर और अधिक दिखाई दे सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूसरी ओर बांग्लादेश की स्थिति अधिक चुनौतीपूर्ण नजर आ रही है। दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा चावल उत्पादक और उपभोक्ता देश होने के बावजूद बांग्लादेश इस समय मौसम की मार झेल रहा है। वहां प्री-मानसून की भारी बारिश, अचानक आई बाढ़ और लगातार बढ़ते तापमान ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक 2 लाख टन से अधिक चावल की फसल को नुकसान पहुंचा है। कई इलाकों में खेतों में पानी भर गया, जिससे तैयार फसल बर्बाद हो गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बांग्लादेश के किसानों का कहना है कि इस बार हीटवेव ने भी उत्पादन पर असर डाला है। अधिक तापमान के कारण धान के पौधों में नमी तेजी से कम हुई और कई क्षेत्रों में पैदावार प्रभावित हुई। धान कटाई का काम भी धीमा पड़ गया है। कृषि क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि यदि मौसम की ऐसी स्थिति बनी रहती है तो घरेलू आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है। यही वजह है कि बांग्लादेश को आने वाले समय में अतिरिक्त आयात की जरूरत पड़ सकती है। पहले भी कई मौकों पर बांग्लादेश अपनी घरेलू मांग पूरी करने के लिए भारत से चावल आयात करता रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इन परिस्थितियों के बीच भारत की स्थिति अपेक्षाकृत मजबूत दिखाई दे रही है। दुनिया के सबसे बड़े चावल निर्यातक देशों में शामिल भारत के पास इस समय पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। बाजार में भारतीय 5 प्रतिशत ब्रोकन परबॉयल्ड चावल की कीमत 337 से 345 डॉलर प्रति टन के बीच स्थिर बनी हुई है। वहीं 5 प्रतिशत ब्रोकन व्हाइट राइस का भाव 338 से 344 डॉलर प्रति टन दर्ज किया गया है। व्यापारिक हलकों का कहना है कि भारत में अच्छी पैदावार और पर्याप्त उपलब्धता के कारण कीमतों में किसी बड़ी उथल-पुथल की संभावना फिलहाल नहीं दिख रही।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नई दिल्ली के निर्यात क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि अन्य प्रमुख निर्यातक देशों के पास अतिरिक्त स्टॉक सीमित है और वे भविष्य में उत्पादन घटने की आशंका को देखते हुए कीमतें बढ़ा रहे हैं। इसके उलट भारत में मजबूत उत्पादन और सरकारी खरीद व्यवस्था बाजार को संतुलित बनाए हुए है। यह भी कह रहे हैं कि वैश्विक मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखने की जरूरत है, क्योंकि जलवायु से जुड़ी घटनाएं तेजी से बदल रही हैं और उनका असर कृषि क्षेत्र पर सीधे पड़ता है।</p>
<p style="text-align:justify;">एशियाई चावल बाजार में भारत राहत की स्थिति में नजर आ रहा है, लेकिन वियतनाम और बांग्लादेश में सामने आई चुनौतियां इस बात का संकेत हैं कि मौसम की अनिश्चितता आने वाले समय में खाद्यान्न बाजार के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है। यदि अल नीनो का प्रभाव बढ़ता है और प्रमुख उत्पादक देशों में उत्पादन प्रभावित होता है तो वैश्विक स्तर पर कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। ऐसे में किसानों, व्यापारियों और नीति निर्माताओं की नजर अब आने वाले मानसून और मौसम के रुख पर टिकी हुई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 13:05:45 +0530</pubDate>
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                <title>केनरा बैंक पर RBI की बड़ी कार्रवाई, KYC नियमों में चूक पर लगा 41.8 लाख रुपए का जुर्माना</title>
                                    <description><![CDATA[ग्राहकों के KYC रिकॉर्ड समय पर अपलोड नहीं करने और सक्रिय खातों को निष्क्रिय श्रेणी में डालने के मामले में रिजर्व बैंक ने केनरा बैंक पर पेनल्टी लगाई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/big-action-by-rbi-on-canara-bank-fine-of-rs/article-55076"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/canara-bank.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">भारतीय रिजर्व बैंक ने सार्वजनिक क्षेत्र के प्रमुख बैंकों में शामिल केनरा बैंक के खिलाफ नियामकीय कार्रवाई करते हुए उस पर 41.8 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। केंद्रीय बैंक की ओर से की गई जांच में बैंक द्वारा कुछ महत्वपूर्ण बैंकिंग नियमों और दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किए जाने की बात सामने आई है। यह कार्रवाई मुख्य रूप से नो योर कस्टमर यानी KYC नियमों के अनुपालन में कमी और खातों के संचालन से जुड़े दिशा-निर्देशों के उल्लंघन को लेकर की गई है। रिजर्व बैंक ने स्पष्ट किया है कि यह जुर्माना बैंक की नियामकीय चूक के कारण लगाया गया है और इसका ग्राहकों की जमा राशि या बैंकिंग सेवाओं पर कोई प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं पड़ेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">मामले की जानकारी सामने आने के बाद बैंकिंग क्षेत्र में इस कार्रवाई की चर्चा शुरू हो गई है। RBI के अनुसार केनरा बैंक कई ग्राहकों के KYC रिकॉर्ड निर्धारित समय सीमा के भीतर सेंट्रल केवाईसी रिकॉर्ड्स रजिस्ट्री यानी CKYCR पर अपलोड नहीं कर पाया। बैंकिंग प्रणाली में KYC प्रक्रिया को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इसके जरिए ग्राहकों की पहचान सत्यापित की जाती है और वित्तीय धोखाधड़ी, मनी लॉन्ड्रिंग तथा अन्य अवैध गतिविधियों पर निगरानी रखने में मदद मिलती है। इसी उद्देश्य से सभी बैंकों को अपने नए और मौजूदा ग्राहकों का KYC डेटा निर्धारित समय के भीतर केंद्रीय रजिस्ट्री में अपडेट करना अनिवार्य होता है। जांच में पाया गया कि केनरा बैंक इस प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा करने में विफल रहा।</p>
<p class="isSelectedEnd">RBI की कार्रवाई का दूसरा आधार खातों की संचालन स्थिति से जुड़ा है। केंद्रीय बैंक के नियमों के अनुसार यदि किसी बैंक खाते में पिछले एक वर्ष के भीतर ग्राहक की ओर से कोई लेनदेन किया गया है तो उस खाते को सक्रिय माना जाता है। हालांकि जांच में यह पाया गया कि केनरा बैंक ने कुछ ऐसे खातों को भी इनऑपरेटिव या निष्क्रिय श्रेणी में डाल दिया था जिनमें एक वर्ष की अवधि पूरी होने से पहले ही ग्राहक की ओर से लेनदेन दर्ज किया गया था। इस तरह की प्रक्रिया ग्राहकों के लिए असुविधा का कारण बन सकती है और बैंकिंग संचालन में पारदर्शिता से जुड़े सवाल भी खड़े कर सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd">बताया जा रहा है कि यह मामला RBI द्वारा किए गए सुपरवाइजरी मूल्यांकन के दौरान सामने आया। केंद्रीय बैंक ने 31 मार्च 2025 तक की वित्तीय स्थिति और बैंक के संचालन की समीक्षा की थी। इसी समीक्षा प्रक्रिया में कुछ ऐसे बिंदु सामने आए जिन पर नियामकीय मानकों का पूर्ण रूप से पालन नहीं किया गया था। इसके बाद रिजर्व बैंक ने केनरा बैंक को कारण बताओ नोटिस जारी किया और बैंक से विस्तृत जवाब मांगा। बैंक द्वारा दिए गए लिखित उत्तर और अधिकारियों की मौखिक दलीलों पर विचार करने के बाद RBI ने यह निष्कर्ष निकाला कि नियमों के उल्लंघन के पर्याप्त आधार मौजूद हैं और पेनल्टी लगाना आवश्यक है।</p>
<p class="isSelectedEnd">हाल के वर्षों में RBI ने नियामकीय अनुपालन को लेकर अपनी निगरानी और सख्त की है। केंद्रीय बैंक लगातार इस बात पर जोर देता रहा है कि बैंक केवल वित्तीय प्रदर्शन पर ही ध्यान न दें, बल्कि ग्राहकों के डेटा प्रबंधन, जोखिम नियंत्रण और नियामकीय दिशा-निर्देशों के पालन को भी प्राथमिकता दें। KYC नियमों को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है क्योंकि डिजिटल बैंकिंग और ऑनलाइन वित्तीय सेवाओं के विस्तार के साथ धोखाधड़ी के मामलों की संभावना भी बढ़ी है। ऐसे में ग्राहकों के रिकॉर्ड का सही और समय पर अद्यतन होना बेहद आवश्यक माना जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">हालांकि RBI ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि जुर्माना लगाए जाने का अर्थ यह नहीं है कि बैंक और उसके ग्राहकों के बीच हुए लेनदेन या अनुबंधों की वैधता पर कोई सवाल खड़ा हो गया है। केंद्रीय बैंक ने कहा है कि यह कार्रवाई केवल नियामकीय कमियों को ध्यान में रखकर की गई है। बैंक के सामान्य संचालन, खाताधारकों की जमा पूंजी और ग्राहकों की बैंकिंग सेवाओं पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। ग्राहक पहले की तरह बैंक की सेवाओं का उपयोग कर सकेंगे। इस तरह की कार्रवाई बैंकिंग प्रणाली में जवाबदेही और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए जरूरी होती है। इससे अन्य वित्तीय संस्थानों को भी नियमों का कड़ाई से पालन करने का संदेश मिलता है। नियामकीय संस्थाएं समय-समय पर ऐसी जांच करती रहती हैं ताकि बैंकिंग क्षेत्र में ग्राहकों का विश्वास बना रहे और वित्तीय प्रणाली सुरक्षित बनी रहे।</p>
<p>केनरा बैंक की ओर से इस मामले पर विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन माना जा रहा है कि बैंक भविष्य में ऐसी कमियों को दूर करने के लिए अपनी आंतरिक प्रक्रियाओं की समीक्षा कर सकता है। RBI की यह कार्रवाई एक बार फिर यह संकेत देती है कि नियामकीय अनुपालन में छोटी दिखने वाली चूक भी बैंकों के लिए वित्तीय और प्रतिष्ठागत दोनों स्तरों पर महंगी साबित हो सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 12:44:09 +0530</pubDate>
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                <title>इस हफ्ते सोना-चांदी हुआ सस्ता, निवेशकों की नजर बाजार की अगली चाल पर</title>
                                    <description><![CDATA[एक सप्ताह में सोने के दाम 2,225 रुपए और चांदी 6,442 रुपए तक फिसली, हालांकि सालभर के आंकड़े अब भी मजबूत तेजी की ओर इशारा कर रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/gold-and-silver-became-cheaper-this-week-investors-are-eyeing/article-55066"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/gold-price-today-(4).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">सोने और चांदी की कीमतों में इस सप्ताह गिरावट दर्ज की गई है, जिससे सर्राफा बाजार में हलचल देखने को मिल रही है। लगातार ऊंचे स्तर पर कारोबार करने के बाद दोनों कीमती धातुओं में आई इस नरमी ने निवेशकों और खरीदारी की योजना बना रहे ग्राहकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के ताजा आंकड़ों के अनुसार 24 कैरेट सोने की कीमत में पिछले एक सप्ताह के दौरान 2,225 रुपए प्रति 10 ग्राम की कमी आई है। वहीं चांदी के दाम में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है और इसकी कीमत 6,442 रुपए प्रति किलोग्राम तक घट गई है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि हालिया गिरावट के बावजूद सोना और चांदी अभी भी लंबे समय के निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">आंकड़ों के मुताबिक 30 मई को 24 कैरेट सोना 1,56,463 रुपए प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा था, जो अब घटकर 1,54,238 रुपए पर पहुंच गया है। इसी तरह चांदी की कीमत 2,63,350 रुपए प्रति किलोग्राम से घटकर 2,56,908 रुपए रह गई है। हालांकि यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब पिछले कुछ महीनों में सोना और चांदी दोनों ने रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचकर निवेशकों को चौंका दिया था। सर्राफा कारोबारियों का कहना है कि ऊंचे स्तर पर मुनाफावसूली और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उतार-चढ़ाव का असर घरेलू बाजार पर भी देखने को मिला है। कैरेट के हिसाब से देखें तो 24 कैरेट सोना 1,54,238 रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है, जबकि 22 कैरेट सोना 1,41,282 रुपए और 18 कैरेट सोना 1,15,679 रुपए प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा है। वहीं 14 कैरेट सोने का भाव 90,229 रुपए प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया है। अलग-अलग शहरों में टैक्स और अन्य स्थानीय शुल्कों के कारण कीमतों में थोड़ा अंतर देखने को मिल रहा है। दिल्ली और जयपुर में 24 कैरेट सोना 1,55,910 रुपए प्रति 10 ग्राम के स्तर पर है, जबकि भोपाल, पटना और अहमदाबाद में इसका भाव 1,55,810 रुपए के आसपास दर्ज किया गया। मुंबई, कोलकाता और रायपुर जैसे शहरों में सोना अपेक्षाकृत कम कीमत पर उपलब्ध है।</p>
<p class="isSelectedEnd">हालांकि एक सप्ताह की गिरावट के बावजूद यदि पूरे साल का आंकड़ा देखा जाए तो सोना और चांदी दोनों ने निवेशकों को मजबूत रिटर्न दिया है। वर्ष 2026 की शुरुआत में 31 दिसंबर 2025 को सोने की कीमत 1,33,195 रुपए प्रति 10 ग्राम थी। वर्तमान स्तर की तुलना करें तो सोना अब भी करीब 21 हजार रुपए से अधिक महंगा है। इसी तरह चांदी भी 2,30,420 रुपए प्रति किलोग्राम से बढ़कर 2,56,908 रुपए तक पहुंच चुकी है। यानी साल की शुरुआत की तुलना में चांदी अब भी करीब 27 हजार रुपए महंगी बनी हुई है। इस साल सर्राफा बाजार ने कई बड़े उतार-चढ़ाव देखे हैं। जनवरी महीने में सोने ने 1.76 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम और चांदी ने 3.86 लाख रुपए प्रति किलोग्राम का रिकॉर्ड स्तर छुआ था। इसके बाद बाजार में सुधार और गिरावट का दौर भी देखने को मिला। फरवरी और मार्च में कीमतों में नरमी आई, लेकिन अप्रैल और मई में फिर तेजी लौटती नजर आई। अब जून के पहले सप्ताह में आई गिरावट को बाजार सामान्य करेक्शन के रूप में देख रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">आर्थिक परिस्थितियां, डॉलर की चाल, केंद्रीय बैंकों की नीतियां और अंतरराष्ट्रीय मांग सोने-चांदी की कीमतों को प्रभावित करती हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में कीमतों में फिर बदलाव देखने को मिल सकता है। कई निवेशक मौजूदा गिरावट को खरीदारी के अवसर के रूप में भी देख रहे हैं, जबकि कुछ लोग आगे की दिशा स्पष्ट होने का इंतजार कर रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">सोना खरीदने की योजना बना रहे ग्राहकों को कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखने की सलाह दी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार हमेशा बीआईएस हॉलमार्क वाला प्रमाणित सोना ही खरीदना चाहिए। हॉलमार्क सोने की शुद्धता की गारंटी देता है और ग्राहकों को गुणवत्ता को लेकर भरोसा प्रदान करता है। इसके अलावा खरीदारी से पहले अलग-अलग स्रोतों से सोने का ताजा भाव जांच लेना भी जरूरी माना जाता है। इससे ग्राहकों को सही कीमत पर खरीदारी करने में मदद मिलती है। बाजार में आई ताजा गिरावट ने ग्राहकों को थोड़ी राहत जरूर दी है। शादी-ब्याह और त्योहारों के सीजन से पहले कीमतों में नरमी को खरीदारी के लिहाज से सकारात्मक माना जा रहा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 12:43:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>RBI के फैसले के बाद भी बाजार में बिकवाली, सेंसेक्स-निफ्टी लाल निशान में बंद</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बाद गिरावट देखने को मिली। निवेशकों की नजरें पूरे दिन भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति और रेपो रेट फैसले पर टिकी रहीं, लेकिन RBI द्वारा रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखने के बावजूद बाजार में मजबूती कायम नहीं रह सकी। कारोबार खत्म होने तक सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में बंद हुए। शुरुआती बढ़त के बावजूद दिन के दूसरे हिस्से में बिकवाली बढ़ी और बाजार दबाव में आ गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कारोबार समाप्त होने पर बीएसई सेंसेक्स 116.67 अंक टूटकर 74,243.34 पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/even-after-rbis-decision-there-is-selling-in-the-market/article-55047"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/sensex.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बाद गिरावट देखने को मिली। निवेशकों की नजरें पूरे दिन भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति और रेपो रेट फैसले पर टिकी रहीं, लेकिन RBI द्वारा रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखने के बावजूद बाजार में मजबूती कायम नहीं रह सकी। कारोबार खत्म होने तक सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में बंद हुए। शुरुआती बढ़त के बावजूद दिन के दूसरे हिस्से में बिकवाली बढ़ी और बाजार दबाव में आ गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कारोबार समाप्त होने पर बीएसई सेंसेक्स 116.67 अंक टूटकर 74,243.34 पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी भी 49.85 अंक की गिरावट के साथ 23,366.70 के स्तर पर पहुंच गया। दिन की शुरुआत हालांकि सकारात्मक रही थी और शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 300 अंकों से ज्यादा ऊपर चला गया था। निफ्टी भी 23,500 के स्तर को पार करता दिखाई दिया, लेकिन यह बढ़त ज्यादा देर टिक नहीं सकी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विश्लेषकों का कहना है कि बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह मुनाफावसूली रही। जैसे-जैसे शेयरों के दाम ऊपर गए, कई निवेशकों ने मुनाफा निकालना शुरू कर दिया। इसका असर सबसे पहले बड़े शेयरों पर दिखाई दिया और धीरे-धीरे व्यापक बाजार पर दबाव बढ़ता गया। दिनभर बाजार में अस्थिरता बनी रही और निवेशकों के बीच सतर्कता का माहौल दिखाई दिया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो आईटी और मेटल शेयरों में सबसे ज्यादा कमजोरी देखने को मिली। हिंदाल्को, विप्रो, ट्रेंट, कोल इंडिया और TCS जैसे शेयरों में बिकवाली का असर प्रमुख सूचकांकों पर पड़ा। दूसरी ओर कुछ बैंकिंग और वित्तीय शेयरों ने गिरावट को सीमित करने की कोशिश की। अडानी एंटरप्राइजेज, हिंदुस्तान यूनिलीवर, अडानी पोर्ट्स, बजाज फाइनेंस और एक्सिस बैंक जैसे शेयरों में खरीदारी देखने को मिली, जिससे बाजार में बड़ी गिरावट नहीं आई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बाजार पर दबाव बढ़ने की दूसरी बड़ी वजह RBI द्वारा महंगाई अनुमान बढ़ाना भी माना जा रहा है। केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए महंगाई का अनुमान पहले के मुकाबले बढ़ाया है। बढ़ती ऊर्जा कीमतों और ईंधन लागत को लेकर जताई गई चिंताओं ने निवेशकों की सोच को प्रभावित किया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अगर महंगाई उम्मीद से ज्यादा रहती है तो आगे ब्याज दरों और आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा आर्थिक विकास दर के अनुमान में कटौती ने भी निवेशकों का भरोसा कुछ कमजोर किया। RBI ने GDP वृद्धि अनुमान को पहले की तुलना में कम किया है, जिसके बाद बाजार में यह चिंता बढ़ी कि आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार आने वाले समय में कुछ धीमी पड़ सकती है। यही वजह रही कि रेपो रेट स्थिर रहने जैसी सकारात्मक खबर भी निवेशकों में उत्साह पैदा नहीं कर सकी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 19:23:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[दैनिक जागरण]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>RBI ने दी राहत, रेपो रेट 5.25% पर बरकरार; फिलहाल नहीं बढ़ेगी आपकी EMI</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने शुक्रवार को अपनी नई मौद्रिक नीति का ऐलान करते हुए एक बार फिर ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया। RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) ने रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखने का फैसला लिया है। लगातार एक और बैठक में दरें स्थिर रखने के फैसले के बाद होम लोन, कार लोन और अन्य कर्ज लेने वाले लोगों को फिलहाल राहत मिली है, क्योंकि EMI में तत्काल किसी बदलाव की संभावना नहीं दिखाई दे रही।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति पेश करते हुए कहा कि वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितताएं</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/rbi-gave-relief-repo-rate-remains-at-525-your-emi/article-55045"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/reporate.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने शुक्रवार को अपनी नई मौद्रिक नीति का ऐलान करते हुए एक बार फिर ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया। RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) ने रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखने का फैसला लिया है। लगातार एक और बैठक में दरें स्थिर रखने के फैसले के बाद होम लोन, कार लोन और अन्य कर्ज लेने वाले लोगों को फिलहाल राहत मिली है, क्योंकि EMI में तत्काल किसी बदलाव की संभावना नहीं दिखाई दे रही।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति पेश करते हुए कहा कि वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितताएं लगातार बनी हुई हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में सप्लाई चेन पर दबाव, व्यापारिक मार्गों में बाधाएं और बाजारों में बढ़ती अस्थिरता जैसी परिस्थितियां अभी भी चिंता का विषय बनी हुई हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इन चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियादी स्थिति पहले की तुलना में मजबूत दिखाई दे रही है और बाहरी दबावों का सामना करने की क्षमता बेहतर हुई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मौद्रिक नीति की घोषणा के दौरान पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव का भी उल्लेख किया गया। RBI के अनुसार बढ़ती ऊर्जा कीमतें, ईंधन लागत और वैश्विक सप्लाई चेन पर असर आने वाले समय में आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकते हैं। इसी वजह से कई केंद्रीय बैंक दुनिया भर में सख्त रुख अपना सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे माहौल में RBI ने फिलहाल सतर्कता दिखाते हुए ब्याज दरों को स्थिर रखने का रास्ता चुना है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">RBI गवर्नर ने यह भी कहा कि दुनिया भर के शेयर बाजारों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नई तकनीकों को लेकर उत्साह दिखाई दे रहा है, लेकिन दूसरी तरफ महंगाई और बढ़ते कर्ज को लेकर चिंता भी बनी हुई है। उन्होंने संकेत दिए कि वैश्विक वित्तीय बाजारों में उतार-चढ़ाव अभी कुछ समय तक जारी रह सकता है। सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर बढ़ते रुझान का असर करेंसी बाजारों और उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर भी पड़ रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">अगर पिछले फैसलों पर नजर डालें तो RBI ने वर्ष 2025 के दौरान कुल 125 बेसिस पॉइंट की कटौती कर आम लोगों को राहत दी थी। हालांकि 2026 में परिस्थितियां अलग दिखाई दे रही हैं। फरवरी और अप्रैल की बैठकों में भी केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों को स्थिर रखा था और अब जून की बैठक में भी यही फैसला दोहराया गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 16:31:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[दैनिक जागरण]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>RBI Monetary Policy Today: EMI घटेगी या बढ़ेगा बोझ? आज आएगा बड़ा फैसला</title>
                                    <description><![CDATA[देशभर के करोड़ों होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन लेने वालों की नजर आज भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति यानी MPC के फैसले पर टिकी हुई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/rbi-monetary-policy-today-emi-will-reduce-or-increase-the/article-55023"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/rbi.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">शुक्रवार को RBI ब्याज दरों पर अपना फैसला सुनाएगा और इसी के साथ यह साफ हो जाएगा कि आने वाले महीनों में EMI का बोझ कम होगा, बढ़ेगा या फिलहाल राहत बनी रहेगी। यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि एक तरफ महंगाई का दबाव है, दूसरी तरफ आर्थिक विकास को लेकर चिंता लगातार बढ़ रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पिछले कुछ महीनों में वैश्विक हालात तेजी से बदले हैं। पश्चिम एशिया में तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, कमजोर होता रुपया और घरेलू मांग को लेकर उठ रहे सवालों ने RBI के सामने मुश्किल स्थिति पैदा कर दी है। अर्थशास्त्रियों के बीच इस बार सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को स्थिर रखेगा या फिर महंगाई के जोखिम को देखते हुए रेपो रेट बढ़ाने का रास्ता अपनाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दरअसल, 2026 में रुपया डॉलर के मुकाबले लगातार दबाव में दिखाई दिया है। मुद्रा बाजार में कमजोरी का असर आयात लागत पर पड़ता है और इसका सीधा असर महंगाई पर देखने को मिलता है। इसके साथ हाल के समय में ईंधन कीमतों में आई तेजी ने भी चिंता बढ़ा दी है। यही वजह है कि कुछ बाजार विशेषज्ञ मानते हैं कि RBI को भविष्य के जोखिमों को देखते हुए थोड़ा सख्त रुख अपनाना पड़ सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">हालांकि दूसरी तरफ एक बड़ा वर्ग ऐसा भी है जो मानता है कि फिलहाल ब्याज दर बढ़ाना आर्थिक गतिविधियों के लिए नुकसानदायक हो सकता है। उनका तर्क है कि अगर उधार महंगा होता है तो निवेश, खपत और मांग पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसे समय में जब कई रिपोर्ट्स घरेलू मांग में नरमी की ओर संकेत कर रही हैं, ब्याज दर बढ़ाना विकास की रफ्तार को प्रभावित कर सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">आर्थिक वृद्धि को लेकर चिंता इसलिए भी बढ़ी हुई है क्योंकि कई एजेंसियों ने FY27 के लिए विकास अनुमान घटाए हैं। कई रिपोर्ट्स में सामान्य से कमजोर मानसून, संभावित एल नीनो और वैश्विक अनिश्चितताओं को जोखिम माना जा रहा है। अगर ग्रामीण मांग प्रभावित होती है तो इसका असर खपत, रोजगार और उद्योगों तक दिखाई दे सकता है। ऐसे में RBI के सामने सिर्फ महंगाई को नियंत्रित करना ही नहीं बल्कि विकास की गति बनाए रखना भी चुनौती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">फिलहाल महंगाई को लेकर तस्वीर पूरी तरह नकारात्मक नहीं मानी जा रही। विशेषज्ञों का कहना है कि उपभोक्ता महंगाई अभी केंद्रीय बैंक के लक्ष्य दायरे से बहुत बाहर नहीं गई है। यही वजह है कि बाजार का एक बड़ा हिस्सा इस संभावना को भी देख रहा है कि RBI इस बैठक में दरें स्थिर रख सकता है और आने वाले महीनों के आंकड़ों का इंतजार कर सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">EMI पर असर की बात करें तो अगर RBI रेपो रेट बढ़ाता है तो फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन, कार लोन और दूसरे कर्ज महंगे हो सकते हैं। इससे मासिक किस्तों पर दबाव बढ़ सकता है। वहीं अगर दरें स्थिर रहती हैं तो फिलहाल मौजूदा EMI संरचना में बड़े बदलाव की संभावना कम रहेगी। कुछ लोग कटौती की उम्मीद भी कर रहे हैं, लेकिन फिलहाल विशेषज्ञ इसे कम संभावना वाला परिदृश्य मान रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बाजार की नजर सिर्फ रेपो रेट पर नहीं बल्कि RBI के बयान, ग्रोथ अनुमान, महंगाई अनुमान और भविष्य के संकेतों पर भी रहेगी। निवेशक यह समझने की कोशिश करेंगे कि केंद्रीय बैंक आने वाले महीनों में किस दिशा में सोच रहा है। खास तौर पर घरेलू महंगाई उम्मीदों से जुड़े सर्वे पर भी फोकस रहेगा क्योंकि अगर लोगों को भविष्य में ज्यादा महंगाई की उम्मीद होती है तो इसका असर नीति निर्माण पर पड़ सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">आज दोपहर बाद आने वाला RBI का फैसला सिर्फ ब्याज दरों तक सीमित नहीं रहेगा। इसका असर शेयर बाजार, बॉन्ड मार्केट, बैंकिंग सेक्टर और आम लोगों की जेब तक महसूस किया जा सकता है। इसलिए लाखों परिवार, निवेशक और कारोबारी इस फैसले का इंतजार कर रहे हैं कि आखिर RBI राहत देगा या सख्ती का संकेत।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 09:04:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[दैनिक जागरण]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>FY26 GDP आंकड़े आज होंगे जारी, नए बेस ईयर के साथ इन 6 संकेतकों पर रहेगी बाजार की नजर</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">देश की अर्थव्यवस्था की दिशा और आने वाले महीनों में बाजार की चाल को लेकर आज का दिन अहम माना जा रहा है। केंद्र सरकार शुक्रवार शाम 4 बजे FY26 की जनवरी-मार्च तिमाही के GDP आंकड़े जारी करेगी। इसके साथ पूरे वित्त वर्ष के विकास दर के आंकड़े भी सामने आएंगे। इस बार सबसे बड़ा बदलाव यह है कि आंकड़े नए बेस ईयर 2022-23 के साथ जारी किए जाएंगे, इसलिए सिर्फ ग्रोथ नंबर ही नहीं बल्कि उनकी व्याख्या भी काफी महत्वपूर्ण रहने वाली है। शेयर बाजार से लेकर निवेशकों, कंपनियों और नीति निर्माताओं तक सभी की नजर इन आंकड़ों पर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/fy26-gdp-figures-will-be-released-today-with-the-new/article-55021"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/fy26-gdp.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">देश की अर्थव्यवस्था की दिशा और आने वाले महीनों में बाजार की चाल को लेकर आज का दिन अहम माना जा रहा है। केंद्र सरकार शुक्रवार शाम 4 बजे FY26 की जनवरी-मार्च तिमाही के GDP आंकड़े जारी करेगी। इसके साथ पूरे वित्त वर्ष के विकास दर के आंकड़े भी सामने आएंगे। इस बार सबसे बड़ा बदलाव यह है कि आंकड़े नए बेस ईयर 2022-23 के साथ जारी किए जाएंगे, इसलिए सिर्फ ग्रोथ नंबर ही नहीं बल्कि उनकी व्याख्या भी काफी महत्वपूर्ण रहने वाली है। शेयर बाजार से लेकर निवेशकों, कंपनियों और नीति निर्माताओं तक सभी की नजर इन आंकड़ों पर बनी हुई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इकोनॉमिस्ट्स का अनुमान है कि FY26 में भारत की आर्थिक वृद्धि करीब 7.4 फीसदी रह सकती है। हालांकि यह अनुमान पहले जारी दूसरे एडवांस एस्टिमेट्स से थोड़ा कम माना जा रहा है। बाजार के जानकार मानते हैं कि केवल GDP ग्रोथ नंबर देखना पर्याप्त नहीं होगा क्योंकि उसके पीछे छिपे कई इंडिकेटर्स आने वाले समय की असली तस्वीर दिखा सकते हैं। यही वजह है कि आज जारी होने वाले आंकड़ों में छह प्रमुख संकेतकों पर सबसे ज्यादा फोकस रहने वाला है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सबसे पहले बात GDP यानी सकल घरेलू उत्पाद की करें तो यही वह आंकड़ा होता है जिससे पता चलता है कि देश की अर्थव्यवस्था कितनी तेजी से आगे बढ़ रही है। GDP देश के भीतर तय समय में तैयार हुई सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं की कुल वैल्यू को दर्शाता है। अगर ग्रोथ उम्मीद से ज्यादा आती है तो इसका असर बाजार और निवेश माहौल पर सकारात्मक दिख सकता है, जबकि कमजोर आंकड़े निवेशकों की चिंता बढ़ा सकते हैं। विशेषज्ञ इस बार रियल और नॉमिनल दोनों तरह के GDP आंकड़ों पर नजर बनाए हुए हैं क्योंकि इनसे महंगाई और वास्तविक आर्थिक गतिविधियों दोनों की तस्वीर साफ होगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूसरा महत्वपूर्ण संकेतक GVA यानी सकल मूल्य वर्धित माना जा रहा है। कई अर्थशास्त्री GDP से ज्यादा GVA को अर्थव्यवस्था की असली स्थिति समझने का पैमाना मानते हैं क्योंकि यह सीधे उत्पादन गतिविधियों से जुड़ा होता है। इसमें कृषि, मैन्युफैक्चरिंग, सर्विस और इंडस्ट्री सेक्टर का प्रदर्शन साफ दिखाई देता है। अनुमान है कि FY26 में GVA ग्रोथ करीब 7.7 फीसदी रह सकती है। अगर यह अनुमान सही साबित होता है तो यह संकेत माना जाएगा कि उत्पादन गतिविधियां अभी भी मजबूत बनी हुई हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">तीसरा इंडिकेटर PFCE यानी निजी अंतिम उपभोग व्यय है। आसान भाषा में कहें तो लोग कितना खर्च कर रहे हैं, यह इसी आंकड़े से पता चलता है। भारत जैसी खपत आधारित अर्थव्यवस्था में इसका महत्व काफी ज्यादा है क्योंकि GDP में इसका योगदान आधे से भी ज्यादा माना जाता है। रोजमर्रा की खरीदारी, सेवाओं पर खर्च और उपभोक्ता मांग की रफ्तार इसी से मापी जाती है। हालांकि इस बार इसके थोड़ा कमजोर रहने की संभावना जताई जा रही है। अगर उपभोग की रफ्तार धीमी दिखती है तो यह संकेत हो सकता है कि लोग खर्च करने में सावधानी बरत रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सरकारी खर्च यानी GFCE भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण रहेगा। सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर, योजनाओं, सार्वजनिक सेवाओं और विकास कार्यों पर कितना खर्च कर रही है, इसका असर सीधे आर्थिक गतिविधियों पर पड़ता है। पिछले कुछ वर्षों में सरकारी पूंजीगत खर्च को आर्थिक ग्रोथ का बड़ा इंजन माना गया है। ऐसे में अगर सरकारी खर्च उम्मीद से कम दिखाई देता है तो इससे विकास दर को लेकर सवाल खड़े हो सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा GFCF यानी सकल स्थिर पूंजी निर्माण पर भी निवेशकों की नजर रहेगी। यह बताता है कि कंपनियां और सरकार भविष्य के लिए कितना निवेश कर रही हैं। नई फैक्ट्रियां, मशीनें, सड़कें, रेलवे, टेक्नोलॉजी और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट इसी श्रेणी में आते हैं। अगर निवेश बढ़ता दिखाई देता है तो यह संकेत माना जाता है कि आने वाले वर्षों में आर्थिक गतिविधियां मजबूत रह सकती हैं। अनुमान है कि इस बार निवेश से जुड़े आंकड़े बेहतर दिख सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 08:58:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[दैनिक जागरण]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>SBS University के छात्रों ने बनाई बड़ी पहचान: देश की दिग्गज फार्मा कंपनियों में मिला मौका, प्लेसमेंट सीजन बना सफलता की मिसाल</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">किसी भी छात्र के लिए विश्वविद्यालय में दाखिला केवल पढ़ाई शुरू करने का फैसला नहीं होता, बल्कि यह उसके भविष्य की दिशा तय करने वाला कदम होता है। हर छात्र यह जानना चाहता है कि जिस संस्थान को उसने चुना है, क्या वह उसे करियर की सही मंजिल तक पहुंचा पाएगा। इस साल SBS University का प्लेसमेंट सीजन इसी सवाल का मजबूत जवाब बनकर सामने आया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">फार्मेसी, माइक्रोबायोलॉजी, बायोटेक्नोलॉजी और मैनेजमेंट से जुड़े विभिन्न कोर्सों के छात्रों ने इस बार देश की प्रमुख फार्मास्यूटिकल और हेल्थकेयर कंपनियों में अपनी जगह बनाई है। B.Pharm, M.Pharm, M.Sc. Microbiology, M.Sc. Pharmaceutical Chemistry,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/students-of-sbs-university-made-a-big-mark-got-opportunity/article-54961"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/sbs.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">किसी भी छात्र के लिए विश्वविद्यालय में दाखिला केवल पढ़ाई शुरू करने का फैसला नहीं होता, बल्कि यह उसके भविष्य की दिशा तय करने वाला कदम होता है। हर छात्र यह जानना चाहता है कि जिस संस्थान को उसने चुना है, क्या वह उसे करियर की सही मंजिल तक पहुंचा पाएगा। इस साल SBS University का प्लेसमेंट सीजन इसी सवाल का मजबूत जवाब बनकर सामने आया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">फार्मेसी, माइक्रोबायोलॉजी, बायोटेक्नोलॉजी और मैनेजमेंट से जुड़े विभिन्न कोर्सों के छात्रों ने इस बार देश की प्रमुख फार्मास्यूटिकल और हेल्थकेयर कंपनियों में अपनी जगह बनाई है। B.Pharm, M.Pharm, M.Sc. Microbiology, M.Sc. Pharmaceutical Chemistry, M.Sc. Biochemistry, B.Sc. Biotechnology और BBA जैसे कोर्सों से जुड़े छात्रों को विभिन्न इंडस्ट्री रोल्स में चयनित किया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस उपलब्धि के बीच एक और महत्वपूर्ण सफलता सामने आई जब B.Pharm बैच 2022-26 के छात्र मोहम्मद फराज ने GPAT जैसी प्रतिष्ठित और प्रतिस्पर्धी परीक्षा क्वालिफाई कर विश्वविद्यालय की अकादमिक क्षमता को मजबूत किया। फार्मास्यूटिकल क्षेत्र में GPAT केवल एक परीक्षा नहीं बल्कि क्षमता और प्रतिस्पर्धा का बड़ा पैमाना माना जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस प्लेसमेंट सीजन में कई बड़ी कंपनियों ने SBS University के छात्रों को अवसर दिए। Copmed Pharmaceuticals में छात्रों को क्वालिटी ऑपरेशन, प्रोडक्शन सपोर्ट और ट्रेनी प्रोफाइल में जगह मिली, जबकि Macleods Pharmaceuticals ने प्रोडक्शन, क्वालिटी कंट्रोल और ग्रेजुएट ट्रेनी पदों के लिए छात्रों का चयन किया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">Intas Pharmaceuticals के Apprenticeship Program में माइक्रोबायोलॉजी छात्रों को इंडस्ट्रियल माइक्रोबायोलॉजी, लैब ऑपरेशन और QA-QC एक्सपोजर जैसे क्षेत्रों में अवसर मिला। वहीं हेल्थकेयर सेक्टर की भर्ती प्रक्रिया में भी कई छात्रों को ऑपरेशनल और एनालिटिकल भूमिकाओं में शामिल किया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">Enzene Biosciences, Sceptre Medical, Akums Drugs एवं Lucent Biotech जैसी कंपनियों ने भी बड़ी संख्या में छात्रों को रिसर्च, लैब सपोर्ट, प्रोडक्शन, क्वालिटी ऑपरेशन और इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग जैसी भूमिकाओं के लिए चुना। खास बात यह रही कि कई कंपनियों ने एक साथ अनेक छात्रों को चयनित कर विश्वविद्यालय के टैलेंट पूल पर भरोसा जताया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यह सफलता केवल नौकरी पाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक ऐसे सिस्टम की कहानी है जो छात्रों को इंडस्ट्री की जरूरतों के अनुसार तैयार करता है। SBS University का Corporate Resource Centre हर वर्ष सैकड़ों कंपनियों के साथ छात्रों को जोड़ने का काम करता है और बड़ी संख्या में करियर अवसर उपलब्ध कराता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विश्वविद्यालय का दावा है कि उसका 90 प्रतिशत से अधिक प्लेसमेंट रिकॉर्ड, 500 से अधिक भर्ती करने वाली कंपनियां और करोड़ों रुपये के रिसर्च प्रोजेक्ट्स केवल आंकड़े नहीं बल्कि लंबे समय से बने एक शैक्षणिक ढांचे का परिणाम हैं। 70 से अधिक विशेषज्ञ फैकल्टी, जिनमें बड़ी संख्या में PhD धारक शामिल हैं, छात्रों को अकादमिक और व्यावसायिक दोनों स्तरों पर तैयार करते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">32 वर्षों की अकादमिक विरासत रखने वाली SBS University के 11 हजार से अधिक पूर्व छात्र देश और दुनिया की प्रमुख संस्थाओं, अस्पतालों, उद्योगों और विश्वविद्यालयों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इस बार चयनित हुए छात्र भी अब उसी यात्रा का हिस्सा बन गए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विश्वविद्यालय प्रबंधन का मानना है कि उनकी जिम्मेदारी केवल डिग्री देने तक सीमित नहीं बल्कि छात्रों को करियर, रिसर्च, उद्योग और नवाचार के लिए तैयार करना है। यही कारण है कि हर प्लेसमेंट, हर प्रतियोगी परीक्षा में सफलता और हर इंडस्ट्री चयन को संस्थान अपनी निरंतर शैक्षणिक प्रतिबद्धता का हिस्सा मानता है।</p>
<p style="text-align:justify;">देहरादून स्थित SBS University आज केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं बल्कि एक ऐसा मंच बनने का प्रयास कर रही है जहां से छात्र सीधे उद्योग जगत तक पहुंच सकें और अपने करियर को नई दिशा दे सकें। </p>
<p><strong>SBS University </strong><strong><span style="font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">के</span> </strong><strong><span style="font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">बारे</span> </strong><strong><span style="font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">में</span></strong></p>
<p><strong><a href="https://admissions.sbsuniversity.edu.in/">Sardar Bhagwan Singh University (SBS University), <span style="font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">देहरादून</span></a></strong>, <span style="font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">उत्तर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">भारत</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">की</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">सबसे</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">पुरानी</span> university <span style="font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">है</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">जिसकी</span> 32+ <span style="font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">साल</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">की</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">शैक्षणिक</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">विरासत</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">है।</span> AICTE, PCI <span style="font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">और</span> IAP <span style="font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">से</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">मान्यता</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">प्राप्त</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">इस</span> university <span style="font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">में</span> <strong>25 </strong><strong><span style="font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">एकड़</span> </strong><strong><span style="font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">का</span> </strong><strong><span style="font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">आधुनिक</span> campus</strong>, 70+ <span style="font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">विशेषज्ञ</span> faculty (60+ Ph.D. holders), 15:1 student-faculty ratio, 90% + placement rate, 500+ recruiting companies, ₹15 LPA+ <span style="font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">का</span> highest package, ₹2 <span style="font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">करोड़</span> + <span style="font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">के</span> government research grants, 50 + patents, 1,000+ research publications, 30,000+ library volumes, 750+ hostel capacity <span style="font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">और</span> 11,000+ alumni <span style="font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">हैं</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">जो</span> AIIMS, Apollo, Fortis, PSUs <span style="font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">और</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">अंतर्राष्ट्रीय</span> universities <span style="font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">में</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">हैं।</span> <strong><span style="font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">देहरादून</span> </strong><strong><span style="font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">में</span> NCC </strong><strong><span style="font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">की</span> </strong><strong><span style="font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">अग्रणी</span> </strong><strong><span style="font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">संस्था</span> </strong><strong><span style="font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">और</span> Institution's Innovation Cell </strong><span style="font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">साथ</span>, SBS University <span style="font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">हर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">छात्र</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">सम्पूर्ण</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">विकास</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">लिए</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">प्रतिबद्ध</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">है</span>, <span style="font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">शैक्षणिक</span>, <span style="font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">पेशेवर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">और</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">खेल</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">मैदान</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">पर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">भी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 14:06:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[दैनिक जागरण]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नाइजीरिया से BHEL को 2,500 करोड़ तक का बड़ा ऑर्डर, बढ़ेगी वैश्विक पकड़</title>
                                    <description><![CDATA[सरकारी इंजीनियरिंग कंपनी BHEL को नाइजीरिया से मिला नया अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर ऐसे समय आया है, जब कंपनी लगातार अपने कारोबार को घरेलू बाजार से आगे बढ़ाकर वैश्विक स्तर पर मजबूत करने की कोशिश कर रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/big-order-from-nigeria-to-bhel-worth-rs-2500-crore/article-54931"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/bhel.png" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड यानी BHEL ने नाइजीरिया की डांगोटे पेट्रोलियम रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स फ्री जोन एंटरप्राइज के साथ बड़ा कॉन्ट्रैक्ट साइन किया है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक इस डील की कीमत 2,000 करोड़ रुपये से लेकर करीब 2,500 करोड़ रुपये तक बताई जा रही है। यह ऑर्डर सिर्फ कारोबारी नजरिए से बड़ा नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे भारतीय इंजीनियरिंग कंपनियों की अंतरराष्ट्रीय मौजूदगी के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कंपनी की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, BHEL इस प्रोजेक्ट के तहत आठ गैस टर्बाइन जनरेटर पैकेज तैयार करेगी। इसमें डिजाइनिंग से लेकर निर्माण, सप्लाई, इंस्टॉलेशन सुपरविजन, कमीशनिंग और परफॉर्मेंस गारंटी टेस्टिंग जैसे काम शामिल रहेंगे। हालांकि इस प्रोजेक्ट में सिविल कंस्ट्रक्शन का हिस्सा शामिल नहीं किया गया है। बताया जा रहा है कि उपकरणों की सप्लाई मुंबई पोर्ट तक की जाएगी और उसके बाद इन्हें नाइजीरिया में प्रोजेक्ट साइट तक पहुंचाया जाएगा। कंपनी को यह काम लगभग 26 महीने के भीतर पूरा करना है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यह प्रोजेक्ट नाइजीरिया के डांगोटे इंडस्ट्रीज फ्री जोन में विकसित हो रहे बड़े औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ा है। वहां पेट्रोलियम रिफाइनरी और पॉलीप्रोपाइलीन प्लांट विकसित किया जा रहा है, जिसे अफ्रीका की बड़ी औद्योगिक परियोजनाओं में गिना जाता है। ऐसे में BHEL की भागीदारी कंपनी के लिए सिर्फ एक सप्लाई ऑर्डर नहीं बल्कि लंबे समय की रणनीतिक मौजूदगी के तौर पर भी देखी जा रही है। उद्योग से जुड़े जानकार मानते हैं कि इससे आने वाले समय में कंपनी को अफ्रीकी बाजार में और अवसर मिल सकते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस ऑर्डर के बीच कंपनी के हालिया वित्तीय नतीजों ने भी निवेशकों का ध्यान खींचा है। मार्च 2026 तिमाही में कंपनी का प्रदर्शन काफी मजबूत दिखाई दिया। कंपनी का EBITDA बढ़कर 1,754 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह करीब 832 करोड़ रुपये था। मार्जिन में भी बड़ा सुधार देखने को मिला और यह बढ़कर 14.2 प्रतिशत तक पहुंच गया। कंपनी का कुल राजस्व भी तेजी से बढ़ा और करीब 12,310 करोड़ रुपये दर्ज किया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रारंभिक वित्तीय आंकड़ों के मुताबिक BHEL का शुद्ध लाभ भी मजबूत उछाल के साथ सामने आया। पिछले साल मार्च तिमाही में जहां कंपनी का मुनाफा करीब 504 करोड़ रुपये था, वहीं इस बार यह बढ़कर 1,283 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इसमें सबसे बड़ा योगदान कंपनी के पावर कारोबार का माना जा रहा है। पावर सेगमेंट का राजस्व 53 प्रतिशत तक बढ़ा और इस हिस्से का मार्जिन भी तेज़ी से ऊपर गया। हालांकि इंडस्ट्री सेगमेंट में कुछ दबाव जरूर दिखाई दिया, जहां मार्जिन में गिरावट दर्ज की गई।</p>
<p style="text-align:justify;">बाजार में भी इस खबर को लेकर चर्चा बनी रही। हालांकि कारोबारी सत्र के दौरान BHEL के शेयर में हल्की कमजोरी दिखाई दी और यह गिरावट के साथ बंद हुआ, लेकिन लंबे समय के निवेशकों के लिए तस्वीर अलग नजर आ रही है। पिछले कुछ महीनों में कंपनी के शेयरों ने मजबूत रिटर्न दिया है। बाजार विशेषज्ञ मानते हैं कि बड़े अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर, मजबूत ऑर्डर बुक और ऊर्जा सेक्टर में बढ़ती मांग आने वाले समय में कंपनी के लिए सकारात्मक संकेत हो सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 09:30:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[दैनिक जागरण]]></dc:creator>
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                <title>5 जून को ब्याज दरों पर फैसला; महंगाई और वैश्विक हालात पर नजर</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भारतीय रिजर्व बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की तीन दिवसीय बैठक बुधवार से शुरू हो गई है और अब बाजार से लेकर आम लोन लेने वालों तक की नजर 5 जून पर टिक गई है, जब रेपो रेट और ब्याज दरों को लेकर बड़ा ऐलान सामने आएगा। ऐसे समय में यह बैठक हो रही है जब वैश्विक हालात अब भी पूरी तरह सामान्य नहीं माने जा रहे और महंगाई को लेकर कई तरह की चिंताएं बनी हुई हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में हो रही इस बैठक में छह सदस्य अगले तीन दिनों तक आर्थिक हालात, महंगाई,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/decision-on-interest-rates-on-june-5-keeping-an-eye/article-54928"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/rbi.png" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भारतीय रिजर्व बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की तीन दिवसीय बैठक बुधवार से शुरू हो गई है और अब बाजार से लेकर आम लोन लेने वालों तक की नजर 5 जून पर टिक गई है, जब रेपो रेट और ब्याज दरों को लेकर बड़ा ऐलान सामने आएगा। ऐसे समय में यह बैठक हो रही है जब वैश्विक हालात अब भी पूरी तरह सामान्य नहीं माने जा रहे और महंगाई को लेकर कई तरह की चिंताएं बनी हुई हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में हो रही इस बैठक में छह सदस्य अगले तीन दिनों तक आर्थिक हालात, महंगाई, विकास दर, वैश्विक जोखिम और घरेलू मांग जैसे कई पहलुओं पर चर्चा करेंगे। शुरुआती संकेत यही बता रहे हैं कि फिलहाल केंद्रीय बैंक रेपो रेट में कोई बड़ा बदलाव करने से बच सकता है, हालांकि बाजार की नजर सिर्फ फैसले पर नहीं बल्कि उसके साथ आने वाले संकेतों पर भी है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पिछली मॉनेटरी पॉलिसी में आरबीआई ने सतर्क रुख अपनाया था और कहा था कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव, ऊर्जा कीमतों और सप्लाई चेन पर पड़ने वाले असर को ध्यान से देखा जा रहा है। अब जबकि कई देशों के बीच तनाव में कुछ नरमी की बात कही जा रही है, उसके बावजूद कच्चे तेल और ईंधन कीमतों को लेकर अस्थिरता खत्म नहीं हुई है। यही वजह है कि इस बार की MPC बैठक को सामान्य बैठक से ज्यादा महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">आर्थिक जानकारों का कहना है कि महंगाई अभी आरबीआई के तय दायरे में जरूर बनी हुई है लेकिन कीमतों का दबाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। खासकर ईंधन और परिवहन लागत बढ़ने का असर धीरे-धीरे बाकी सेक्टरों में भी दिखाई देने लगा है। कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि केंद्रीय बैंक इस बार अपने महंगाई अनुमान में कुछ बदलाव कर सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इधर निजी क्षेत्र के कई बैंक और रिसर्च एजेंसियां भी मान रही हैं कि नीतिगत चुनौतियां अभी खत्म नहीं हुई हैं। बताया जा रहा है कि पेट्रोल, डीजल और कमर्शियल एलपीजी की बढ़ती कीमतों ने लागत का दबाव बढ़ाया है। इसका असर कंपनियों के खर्च, लॉजिस्टिक्स और उपभोक्ता कीमतों पर धीरे-धीरे दिख सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बाजार में एक बड़ा सवाल यह भी बना हुआ है कि क्या आरबीआई विकास दर के अनुमान में कोई बदलाव करेगा। पिछले कुछ महीनों में कई सेक्टरों में मांग बनी रहने के बावजूद उत्पादन लागत और वैश्विक अनिश्चितता चिंता का विषय बनी हुई है। ऐसे में अगर विकास दर के अनुमान में हल्की कटौती होती है तो यह बाजार के लिए बड़ा संकेत माना जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बैंकिंग सेक्टर और होम लोन लेने वाले लोगों के लिए भी यह बैठक महत्वपूर्ण है। अगर रेपो रेट स्थिर रहता है तो फिलहाल EMI में तत्काल कोई बदलाव देखने को नहीं मिलेगा। हालांकि, बैंक आगे चलकर अपनी लेंडिंग रणनीति में बदलाव कर सकते हैं, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि आरबीआई अपने बयान में आगे की दिशा को लेकर क्या संकेत देता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक केंद्रीय बैंक अभी जल्दबाजी में कोई बड़ा कदम उठाने से बच सकता है। कई अर्थशास्त्रियों का मानना है कि आरबीआई फिलहाल बढ़ती कीमतों के असर को थोड़ा और समय देकर देखना चाहेगा। यही कारण है कि बाजार में ब्याज दरों को लेकर स्थिरता की संभावना ज्यादा मानी जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">अब नजर 5 जून की सुबह पर है, जब आरबीआई मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी का फैसला सामने आएगा। सिर्फ रेपो रेट नहीं, बल्कि केंद्रीय बैंक की भाषा, महंगाई को लेकर चिंता और आगे की रणनीति भी बाजार की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभाएगी। फिलहाल निवेशक, उद्योग जगत और आम उपभोक्ता सभी इंतजार की स्थिति में हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 09:23:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[दैनिक जागरण]]></dc:creator>
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                <title>वैश्विक संकटों के बीच भारत की अर्थव्यवस्था: रुपये पर दबाव, इंफ्रास्ट्रक्चर वित्तपोषण और खाड़ी तनाव की चुनौती</title>
                                    <description><![CDATA[वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, भू-राजनीतिक तनावों और बढ़ती ऊर्जा कीमतों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था कई मोर्चों पर चुनौतियों का सामना कर रही है। एक ओर भारतीय रुपये पर लगातार दबाव बना हुआ है, वहीं दूसरी ओर देश के महत्वाकांक्षी इंफ्रास्ट्रक्चर विकास कार्यक्रमों के लिए पर्याप्त वित्त जुटाना भी बड़ी चुनौती बन गया है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और तेल आपूर्ति से जुड़े जोखिमों ने इन चिंताओं को और गहरा कर दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/indias-economy-amid-global-crises-pressure-on-rupee-challenge-of/article-54908"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/india-economy.jpg" alt=""></a><br /><p>भारत की अर्थव्यवस्था कच्चे तेल के आयात पर काफी हद तक निर्भर है। तेल की कीमतों में वृद्धि से आयात बिल बढ़ता है, जिससे डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपये पर दबाव पड़ता है। रुपये की कमजोरी का सीधा असर महंगाई, परिवहन लागत और औद्योगिक उत्पादन पर दिखाई देता है। इसके साथ ही उच्च व्यापार घाटा और वैश्विक निवेशकों की बदलती धारणा भी मुद्रा की स्थिरता को प्रभावित करती है।</p>
<p>ऐसे समय में देश के इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र को मजबूत बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। सड़क, रेल, ऊर्जा और शहरी विकास जैसी परियोजनाओं के लिए बड़े निवेश की आवश्यकता होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि “क्रेडिट एन्हांसमेंट” जैसी वित्तीय व्यवस्था निवेशकों और बैंकों का जोखिम कम कर सकती है। इससे परियोजनाओं को कम लागत पर वित्त उपलब्ध होगा, निजी निवेश आकर्षित होगा और रोजगार सृजन को भी बढ़ावा मिलेगा।</p>
<p>खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते संघर्षों ने भारत के लिए अतिरिक्त चुनौतियां पैदा की हैं। तेल आपूर्ति मार्गों में व्यवधान की आशंका से ऊर्जा कीमतों में तेजी आ सकती है, जिससे महंगाई और चालू खाते के घाटे पर दबाव बढ़ेगा। हालांकि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि कमजोर रुपया भारतीय निर्यातकों और विदेशी परियोजनाओं में भागीदारी करने वाली भारतीय कंपनियों को प्रतिस्पर्धात्मक लाभ भी प्रदान कर सकता है।</p>
<p>विशेषज्ञों के अनुसार, भारत को दीर्घकालिक समाधान के रूप में विनिर्माण क्षमता बढ़ाने, उच्च तकनीक निर्यात को प्रोत्साहित करने, नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश बढ़ाने तथा दीर्घकालिक विदेशी निवेश आकर्षित करने पर ध्यान देना चाहिए। साथ ही सरकार को इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश को सुरक्षित रखते हुए वित्तीय अनुशासन बनाए रखना होगा। यही रणनीति भारत को वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच आर्थिक मजबूती और सतत विकास की दिशा में आगे बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 17:56:32 +0530</pubDate>
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