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                <title>बिजनेस - दैनिक जागरण</title>
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                <title>शेयर बाजार में दबाव: सेंसेक्स 76,500 के करीब, निफ्टी 23,950 से नीचे फिसला</title>
                                    <description><![CDATA[कच्चे तेल में तेज उछाल और पश्चिम एशिया के बढ़ते तनाव से निवेशकों में सतर्कता; बैंकिंग-फार्मा शेयरों पर दबाव, ऊंची तेल कीमतें भारतीय बाजार के लिए बनी बड़ी चिंता]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/pressure-in-the-stock-market-sensex-near-76500-nifty-slipped/article-59541"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/sensex-today.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार, 23 जुलाई को कारोबार की शुरुआत सतर्क रुख के साथ हुई। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी में सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव दिखाई दिया, लेकिन बाद में बिकवाली का दबाव बढ़ा। सुबह करीब 10 बजे सेंसेक्स 76,536 के आसपास और निफ्टी 23,934 के स्तर पर आ गया था। दोनों प्रमुख सूचकांक करीब 0.3 प्रतिशत तक नीचे थे और लगातार चौथे कारोबारी सत्र में कमजोरी की तरफ बढ़ रहे थे।</p>
<p>आज का शेयर बाज़ार 23 जुलाई 2026 में निवेशकों की सबसे बड़ी चिंता कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल रही। ब्रेंट क्रूड एशियाई कारोबार के दौरान 2 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर करीब 96.3 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और प्रमुख समुद्री तेल मार्गों पर जोखिम ने ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ाई है। भारत बड़े कच्चा तेल आयातक देशों में शामिल है, इसलिए महंगा क्रूड घरेलू अर्थव्यवस्था और बाजार दोनों के लिए दबाव बढ़ा सकता है।</p>
<p>बाजार में कमजोरी केवल चुनिंदा शेयरों तक सीमित नहीं रही। शुरुआती कारोबार में 16 प्रमुख सेक्टोरल इंडेक्स में से 15 गिरावट में थे। मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांक भी करीब आधा प्रतिशत नीचे कारोबार कर रहे थे। इससे संकेत मिला कि निवेशकों की सतर्कता व्यापक बाजार में भी दिखाई दे रही है। तेल की तेजी के साथ कंपनियों के तिमाही नतीजों पर भी बाजार की नजर बनी हुई है।</p>
<p>फार्मा सेक्टर में कमजोरी के बीच डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज के शेयर में करीब 3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। कंपनी के तिमाही प्रदर्शन ने बाजार की उम्मीदों को पूरी तरह उत्साहित नहीं किया। तेल विपणन कंपनी HPCL के शेयर पर भी दबाव रहा और इसमें करीब 3 प्रतिशत की कमजोरी दिखाई दी। ऊंची कच्चे तेल की कीमतें तेल विपणन कंपनियों के लिए अतिरिक्त चिंता पैदा कर सकती हैं।</p>
<p>बैंकिंग शेयरों में भी चुनिंदा कंपनियों पर तेज बिकवाली देखने को मिली। इंडसइंड बैंक का शेयर करीब 6 प्रतिशत गिर गया। बैंक के जून तिमाही मुनाफे में सुधार के बावजूद निवेशकों ने हाल की तेजी के बाद मुनाफावसूली की। पिछले छह सत्रों में शेयर करीब 7.2 प्रतिशत चढ़ चुका था और 17 महीने के ऊंचे स्तर तक पहुंचा था।</p>
<p>आईटी सेक्टर में इंफोसिस के शेयर में करीब 1 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज हुई। सिप्ला और इंडिगो के शेयर भी नीचे रहे, जबकि निवेशक इनके तिमाही नतीजों का इंतजार कर रहे थे। बाजार में इस समय घरेलू कॉरपोरेट नतीजों के साथ वैश्विक घटनाक्रम भी शेयरों की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।</p>
<p>कमजोर बाजार के बीच कुछ शेयरों ने उलटी चाल भी दिखाई। NTPC Green Energy के शेयर में बेहतर तिमाही प्रदर्शन के बाद करीब 7.4 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। दूसरी तरफ कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का फायदा अपस्ट्रीम ऑयल कंपनियों को मिला। ONGC और Oil India के शेयरों में बढ़त दिखाई दी, क्योंकि ऊंची क्रूड कीमतें इन कंपनियों की प्राप्तियों के लिए सकारात्मक मानी जाती हैं।</p>
<p>कच्चे तेल का 96 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंचना भारतीय बाजार के लिए इस समय सबसे अहम जोखिमों में शामिल हो गया है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। ऐसे में लंबे समय तक तेल महंगा रहने पर आयात बिल बढ़ सकता है, महंगाई पर दबाव बन सकता है और चालू खाते पर भी असर पड़ने की आशंका रहती है। कंपनियों की लागत बढ़ने से उनके मार्जिन पर भी दबाव आ सकता है।</p>
<p>तेल की तेजी का असर रुपये पर भी दिखाई दे रहा है। गुरुवार सुबह रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले करीब 96.5350 के स्तर पर था। बाजार में यह धारणा रही कि भारतीय रिजर्व बैंक की संभावित दखल से रुपये को बड़ी गिरावट से कुछ सहारा मिला। महंगा कच्चा तेल डॉलर की मांग बढ़ा सकता है और इससे भारतीय मुद्रा पर अतिरिक्त दबाव बनने की आशंका रहती है।</p>
<p>वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ने की वजह पश्चिम एशिया का तनाव है। लाल सागर में तेल टैंकरों को निशाना बनाए जाने और ईरान पर नए अमेरिकी हमलों के बाद जोखिम की धारणा और मजबूत हुई। प्रमुख समुद्री व्यापार मार्गों पर किसी तरह की लंबी बाधा तेल की सप्लाई को प्रभावित कर सकती है, इसी आशंका से क्रूड की कीमतों में तेजी बनी हुई है।</p>
<p>एक दिन पहले यानी 22 जुलाई को भी भारतीय बाजार में तेज गिरावट दर्ज की गई थी। निफ्टी 0.79 प्रतिशत टूटकर 23,996.25 पर बंद हुआ था, जबकि सेंसेक्स 0.92 प्रतिशत की गिरावट के साथ 76,755.05 पर बंद हुआ। यह दोनों प्रमुख सूचकांकों में लगातार तीसरे कारोबारी दिन की गिरावट थी। बुधवार का नुकसान करीब दो सप्ताह में सबसे बड़ा एकदिनी नुकसान रहा था।</p>
<p>22 जुलाई के कारोबार में वित्तीय, आईटी और फार्मा शेयरों पर खास दबाव रहा था। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर भी बिकवाली से नहीं बच सके। फार्मा इंडेक्स में 1 प्रतिशत से ज्यादा की कमजोरी आई थी, जबकि वित्तीय और आईटी सेक्टर ने भी प्रमुख सूचकांकों को नीचे खींचा। हालांकि ऑटो सेक्टर में चुनिंदा कंपनियों के बेहतर नतीजों से कुछ खरीदारी देखने को मिली थी।</p>
<p>बुधवार को बजाज ऑटो और TVS Motor के शेयर बेहतर तिमाही मुनाफे के बाद मजबूत हुए थे। इससे ऑटो इंडेक्स को गिरते बाजार में कुछ सहारा मिला। Nestle India के शेयर में भी तेजी रही थी। इसके बावजूद पश्चिम एशिया का तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर व्यापक बाजार धारणा पर भारी पड़ा।</p>
<p>हाल के दिनों में विदेशी निवेशकों के रुख पर भी बाजार की नजर बनी हुई है। जुलाई के शुरुआती हिस्से में विदेशी निवेश भारतीय शेयरों में वापस लौटता दिखाई दिया था। 16 जुलाई तक के आंकड़ों के मुताबिक विदेशी निवेशकों ने जुलाई में करीब 1.6 अरब डॉलर के भारतीय शेयर खरीदे थे, हालांकि पूरे 2026 में विदेशी निवेशकों की कुल बिकवाली अभी भी काफी बड़ी बनी हुई थी।</p>
<p>कच्चे तेल की चाल ने पिछले कुछ दिनों में बाजार की धारणा तेजी से बदली है। 20 जुलाई को क्रूड करीब 88 डॉलर प्रति बैरल के आसपास था और कुछ ही दिनों में यह 96 डॉलर के ऊपर पहुंच गया। इस तेज उछाल ने महंगाई, रुपये और कॉरपोरेट लागत को लेकर बाजार की चिंता फिर बढ़ा दी है। खासकर तेल आयात पर निर्भर अर्थव्यवस्था होने के कारण भारत पर इसका असर दूसरे कई बाजारों के मुकाबले अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।</p>
<p>बाजार में निवेशक अब कच्चे तेल की अगली चाल, पश्चिम एशिया के घटनाक्रम और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर नजर रखे हुए हैं। ऊंचे तेल भाव बने रहने पर ऑयल मार्केटिंग, एविएशन और दूसरे ऊर्जा-निर्भर क्षेत्रों की लागत पर दबाव बढ़ सकता है। वहीं तेल उत्पादक कंपनियों को ऊंची कीमतों से फायदा मिलने की संभावना रहती है, जिसकी झलक गुरुवार के कारोबार में ONGC और Oil India में दिखाई दी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 12:03:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Priyanka ]]></dc:creator>
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                <title>अडाणी एनर्जी का मुनाफा 124% बढ़ा, पहली तिमाही में ₹1,149 करोड़ पहुंचा</title>
                                    <description><![CDATA[अप्रैल-जून में कंपनी का रेवेन्यू 42.4% बढ़कर ₹9,711 करोड़; ट्रांसमिशन, स्मार्ट मीटरिंग और एनर्जी सॉल्यूशंस कारोबार में मजबूत बढ़त]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/adani-energys-profit-increased-by-124-to-reach-%E2%82%B91149-crore/article-59410"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/adani-group.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">अडाणी ग्रुप की कंपनी अडाणी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में मजबूत नतीजे दर्ज किए हैं। अप्रैल से जून के दौरान कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 124% बढ़कर 1,149 करोड़ रुपए पहुंच गया। यानी एक साल में कंपनी का मुनाफा दोगुने से भी ज्यादा हो गया है। कंपनी की कुल कमाई बढ़ने के साथ रेगुलेटरी डेफरल इनकम में आए सकारात्मक बदलाव का भी मुनाफे पर असर पड़ा। नतीजे सामने आने के बाद शेयर बाजार में कंपनी के स्टॉक में तेजी देखने को मिली।</p>
<p class="isSelectedEnd">पहली तिमाही में अडाणी एनर्जी सॉल्यूशंस का ऑपरेशनल रेवेन्यू 9,711 करोड़ रुपए रहा। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में कंपनी ने 6,819 करोड़ रुपए का ऑपरेशनल रेवेन्यू दर्ज किया था। इस हिसाब से सालाना आधार पर इसमें करीब 42.4% की बढ़ोतरी हुई है। ट्रांसमिशन नेटवर्क के विस्तार, बिजली वितरण कारोबार और नए एनर्जी प्रोजेक्ट्स से कंपनी की आय को मजबूती मिली। अलग-अलग बिजनेस सेगमेंट में भी इस दौरान ग्रोथ दर्ज की गई।</p>
<p class="isSelectedEnd">ऑपरेशनल स्तर पर कंपनी का EBITDA भी बढ़ा है। अप्रैल-जून तिमाही में EBITDA करीब 30% की बढ़ोतरी के साथ 3,008 करोड़ रुपए पर पहुंच गया। हालांकि कंपनी के EBITDA मार्जिन में कुछ गिरावट देखने को मिली है। पिछले साल इसी तिमाही में मार्जिन 33.9% था, जो इस बार घटकर करीब 31% रह गया। यानी कंपनी का ऑपरेशनल मुनाफा बढ़ा, लेकिन रेवेन्यू के मुकाबले इसकी हिस्सेदारी थोड़ी कम हुई है।</p>
<p class="isSelectedEnd">कंपनी के नेट प्रॉफिट में आई तेज बढ़ोतरी के पीछे रेगुलेटरी डेफरल इनकम में हुआ बदलाव भी अहम रहा। पहली तिमाही में कंपनी ने 29 करोड़ रुपए की रेगुलेटरी डेफरल इनकम दर्ज की है। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में कंपनी को 504 करोड़ रुपए का रेगुलेटरी डेफरल खर्च उठाना पड़ा था। एक साल में खर्च की स्थिति से आय की तरफ आए इस बड़े बदलाव ने कंपनी के मुनाफे को सहारा दिया। यही वजह है कि नेट प्रॉफिट की ग्रोथ रेवेन्यू की तुलना में काफी ज्यादा रही।</p>
<p class="isSelectedEnd">पावर और यूटिलिटी सेक्टर में रेगुलेटरी डेफरल का सीधा संबंध बिजली दरों और नियामकीय व्यवस्था से होता है। कई बार कंपनियों की लागत बढ़ जाती है, लेकिन उसका पूरा असर तुरंत टैरिफ में शामिल नहीं हो पाता। ऐसी स्थिति में नियामक भविष्य में उस रकम को टैरिफ के जरिए वसूलने की अनुमति दे सकता है। इसे कंपनी अपने खातों में रेगुलेटरी डेफरल आय या खर्च के रूप में दर्ज करती है। इस आंकड़े में बड़ा बदलाव कंपनी के नेट प्रॉफिट को सीधे प्रभावित कर सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">अडाणी एनर्जी के ट्रांसमिशन कारोबार ने पहली तिमाही में मजबूत प्रदर्शन किया। इस सेगमेंट का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू सालाना आधार पर करीब 52.4% बढ़कर 3,335.3 करोड़ रुपए पहुंच गया। भारत में बिजली की बढ़ती मांग और नए पावर प्रोजेक्ट्स के कारण ट्रांसमिशन नेटवर्क का विस्तार तेजी से हो रहा है। रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स को राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय ग्रिड से जोड़ने के लिए भी नई लाइनों की जरूरत बढ़ी है। कंपनी इसी क्षेत्र में कई परियोजनाओं पर काम कर रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd">डिस्ट्रीब्यूशन बिजनेस में भी कंपनी की आय बढ़ी, हालांकि इसकी रफ्तार ट्रांसमिशन कारोबार की तुलना में कम रही। इस सेगमेंट का रेवेन्यू करीब 5% बढ़कर 3,520.4 करोड़ रुपए हो गया। बिजली वितरण कंपनी के प्रमुख और स्थिर कारोबारों में शामिल है। इसमें उपभोक्ताओं तक बिजली पहुंचाने, नेटवर्क मेंटेनेंस, बिलिंग और दूसरी सेवाएं शामिल होती हैं। बिजली की घरेलू और औद्योगिक मांग में बदलाव का सीधा असर इस कारोबार की आय पर पड़ता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">स्मार्ट मीटरिंग कारोबार में कंपनी ने सबसे तेज ग्रोथ में से एक दर्ज की है। इस सेगमेंट का रेवेन्यू सालाना आधार पर 200% से ज्यादा बढ़कर करीब 346.9 करोड़ रुपए पहुंच गया। देशभर में पारंपरिक बिजली मीटरों को स्मार्ट मीटर से बदलने का काम तेजी से चल रहा है। स्मार्ट मीटर से बिजली की खपत का डिजिटल डेटा उपलब्ध होता है और बिलिंग प्रक्रिया ज्यादा ऑटोमेटेड हो सकती है। अडाणी एनर्जी इस तेजी से बढ़ते बाजार में अपनी मौजूदगी लगातार बढ़ा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd">कंपनी के एनर्जी सॉल्यूशंस प्लेटफॉर्म ने भी पहली तिमाही में बड़ी छलांग लगाई है। इस कारोबार से मिलने वाला रेवेन्यू नौ गुना से ज्यादा बढ़कर करीब 1,906.8 करोड़ रुपए हो गया। यह बढ़ोतरी कंपनी की कुल रेवेन्यू ग्रोथ में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती दिखाई दे रही है। पारंपरिक ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन कारोबार के अलावा कंपनी नए एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर सेगमेंट पर भी फोकस बढ़ा रही है। आने वाले समय में यह बिजनेस कंपनी की आय में बड़ी हिस्सेदारी जोड़ सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">भारत में बिजली की मांग लगातार बढ़ने के कारण पावर इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में बड़े निवेश की जरूरत बन रही है। शहरीकरण, औद्योगिक विस्तार, डेटा सेंटर, इलेक्ट्रिक व्हीकल और बढ़ती घरेलू खपत इसके प्रमुख कारण हैं। इसके साथ सौर और पवन ऊर्जा की उत्पादन क्षमता भी तेजी से बढ़ाई जा रही है। नई रिन्यूएबल एनर्जी परियोजनाओं से पैदा बिजली को मांग वाले इलाकों तक पहुंचाने के लिए मजबूत ट्रांसमिशन नेटवर्क जरूरी है। इससे इस सेक्टर में काम करने वाली कंपनियों के लिए नए अवसर बन रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">तिमाही नतीजों के बाद अडाणी एनर्जी सॉल्यूशंस के शेयर में भी हलचल देखने को मिली। कारोबार के दौरान कंपनी का शेयर करीब 3% की तेजी के साथ 1,781.2 रुपए के स्तर तक पहुंच गया था। हालांकि ऊपरी स्तर पर यह तेजी पूरी तरह कायम नहीं रह सकी। दिन का कारोबार समाप्त होने तक शेयर करीब 1,737 रुपए पर बंद हुआ। निवेशकों की नजर अब कंपनी की आने वाली तिमाहियों की कमाई और नए प्रोजेक्ट्स की प्रगति पर रहेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">कंपनी के नतीजों में नेट प्रॉफिट की 124% बढ़ोतरी बड़ा आंकड़ा है, लेकिन इसके साथ रेगुलेटरी डेफरल में हुए बदलाव को भी समझना जरूरी है। कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू 42.4% बढ़ा, जबकि EBITDA में करीब 30% की वृद्धि दर्ज की गई। पिछले साल 504 करोड़ रुपए के रेगुलेटरी डेफरल खर्च की तुलना में इस बार 29 करोड़ रुपए की आय रही। यानी इस मद में सालाना आधार पर करीब 533 करोड़ रुपए का सकारात्मक अंतर आया। इसका असर सीधे कंपनी के अंतिम मुनाफे पर दिखाई दिया।</p>
<p class="isSelectedEnd">आने वाली तिमाहियों में स्मार्ट मीटरिंग कंपनी के लिए महत्वपूर्ण ग्रोथ बिजनेस बना रह सकता है। देश में करोड़ों पुराने बिजली मीटरों को स्मार्ट मीटर से बदलने की प्रक्रिया चल रही है। इस कारोबार में केवल मीटर लगाने का काम नहीं होता, बल्कि डेटा मैनेजमेंट, डिजिटल बिलिंग, कम्युनिकेशन सिस्टम और लंबे समय तक नेटवर्क संचालन भी शामिल है। बड़े कॉन्ट्रैक्ट मिलने से कंपनियों को कई वर्षों तक आय का स्रोत मिल सकता है। अडाणी एनर्जी ने इसी सेगमेंट में पहली तिमाही में 200% से ज्यादा ग्रोथ दर्ज की है।</p>
<p>30 जून को समाप्त तिमाही में कंपनी के अलग-अलग कारोबारों की रफ्तार अलग-अलग रही। ट्रांसमिशन सेगमेंट 52.4% बढ़ा, जबकि डिस्ट्रीब्यूशन में करीब 5% की वृद्धि दर्ज हुई। स्मार्ट मीटरिंग कारोबार में 200% से ज्यादा की छलांग लगी और एनर्जी सॉल्यूशंस प्लेटफॉर्म का रेवेन्यू नौ गुना से ज्यादा बढ़ गया। कुल ऑपरेशनल रेवेन्यू पिछले साल के 6,819 करोड़ रुपए से बढ़कर 9,711 करोड़ रुपए हो गया। कंपनी अब पावर ट्रांसमिशन के साथ डिजिटल और स्मार्ट एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी तेजी से अपना कारोबार बढ़ा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Jul 2026 10:45:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Priyanka ]]></dc:creator>
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                <title>मारुति की कारें अगस्त से होंगी महंगी, ₹30,000 तक बढ़ेंगे दाम: इंडिगो ने बनाया नया रिकॉर्ड, सिट्रोएन ने लॉन्च किया बेसाल्ट X कम्फर्ट एडिशन</title>
                                    <description><![CDATA[ऑटो और एविएशन सेक्टर से आई बड़ी खबरें, नई कीमतों, रिकॉर्ड बाजार हिस्सेदारी और नए वाहन लॉन्च ने ग्राहकों का ध्यान खींचा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/maruti-cars-will-become-expensive-from-august-prices-will-increase/article-59443"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/maruti-suzuki.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">भारत के ऑटोमोबाइल और एविएशन सेक्टर में एक साथ कई बड़े बदलाव सामने आए हैं। देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी ने अगस्त 2026 से अपनी सभी कारों की कीमतों में बढ़ोतरी करने का फैसला किया है। कंपनी के मुताबिक अलग-अलग मॉडल के अनुसार कीमतों में अधिकतम 30 हजार रुपये तक की वृद्धि होगी। दूसरी ओर देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो ने जून 2026 में घरेलू विमानन बाजार में 66.3 प्रतिशत की रिकॉर्ड हिस्सेदारी हासिल कर नया इतिहास बनाया है। वहीं फ्रांसीसी ऑटोमोबाइल कंपनी सिट्रोएन ने अपनी लोकप्रिय एसयूवी कूपे बेसाल्ट का नया X कम्फर्ट एडिशन भी लॉन्च किया है।</p>
<p>ऑटो सेक्टर में बढ़ती लागत, कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और तकनीकी अपग्रेडेशन के कारण वाहन कंपनियां लगातार कीमतों में संशोधन कर रही हैं। इसी क्रम में मारुति सुजुकी ने भी अपने सभी मॉडल्स की कीमतें बढ़ाने का निर्णय लिया है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि उत्पादन लागत, लॉजिस्टिक खर्च और अन्य इनपुट कॉस्ट में बढ़ोतरी के कारण यह फैसला लेना आवश्यक हो गया है। नई कीमतें अगस्त 2026 से प्रभावी होंगी और सभी मॉडल्स पर अलग-अलग दर से लागू होंगी।</p>
<p>मारुति सुजुकी के इस फैसले का असर उन ग्राहकों पर पड़ेगा जो आने वाले दिनों में नई कार खरीदने की योजना बना रहे हैं। यदि कोई ग्राहक जुलाई महीने में बुकिंग और डिलीवरी पूरी कर लेता है तो उसे पुरानी कीमतों का लाभ मिल सकता है, जबकि अगस्त से खरीदने वालों को बढ़ी हुई कीमत चुकानी होगी। कंपनी के लोकप्रिय मॉडल जैसे ऑल्टो, वैगनआर, स्विफ्ट, बलेनो, ब्रेज़ा, डिजायर, फ्रॉन्क्स, अर्टिगा और ग्रैंड विटारा की कीमतों में भी संशोधन किया जाएगा।</p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय ऑटो उद्योग इस समय लागत बढ़ने की चुनौती से गुजर रहा है। स्टील, एल्युमिनियम, इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स और परिवहन खर्च में बढ़ोतरी का सीधा असर वाहन निर्माण पर पड़ रहा है। ऐसे में कंपनियां अपने मुनाफे और संचालन को संतुलित रखने के लिए समय-समय पर कीमतों में बदलाव कर रही हैं।</p>
<p>इसी बीच भारतीय एविएशन सेक्टर से भी सकारात्मक खबर सामने आई है। देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो ने जून 2026 में घरेलू विमानन बाजार में 66.3 प्रतिशत की हिस्सेदारी दर्ज की है। यह कंपनी के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा मार्केट शेयर माना जा रहा है। लगातार नए विमानों की खरीद, बेहतर नेटवर्क, समय पर उड़ानों का संचालन और यात्रियों का भरोसा कंपनी की इस उपलब्धि की प्रमुख वजह मानी जा रही है।</p>
<p>इंडिगो ने पिछले कुछ वर्षों में अपने नेटवर्क का तेजी से विस्तार किया है। कंपनी ने छोटे शहरों को भी हवाई सेवा से जोड़ने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की संख्या में भी लगातार वृद्धि की है। यात्रियों को बेहतर सेवा, अधिक उड़ान विकल्प और प्रतिस्पर्धी किराया मिलने से कंपनी की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है।</p>
<p>घरेलू हवाई यात्रा की मांग में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। पर्यटन, व्यापारिक यात्राओं और बेहतर कनेक्टिविटी के कारण एयर ट्रैफिक तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे माहौल में इंडिगो ने अपने मजबूत परिचालन और बेहतर प्रबंधन के दम पर बाजार में अपनी स्थिति और मजबूत कर ली है।</p>
<p>दूसरी ओर ऑटो बाजार में ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए नई-नई गाड़ियां और विशेष एडिशन भी पेश किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में सिट्रोएन इंडिया ने अपनी एसयूवी कूपे बेसाल्ट का नया <strong>X कम्फर्ट एडिशन</strong> लॉन्च किया है। इस नए एडिशन में ग्राहकों को पहले की तुलना में अतिरिक्त फीचर्स और बेहतर आरामदायक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।</p>
<p>कंपनी के अनुसार नए कम्फर्ट एडिशन में सीट कंफर्ट, इंटीरियर डिजाइन, प्रीमियम एक्सेसरीज और उपयोगी फीचर्स को विशेष रूप से शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य उन ग्राहकों को आकर्षित करना है जो स्टाइल के साथ आरामदायक ड्राइविंग अनुभव चाहते हैं। भारतीय बाजार में एसयूवी सेगमेंट की बढ़ती मांग को देखते हुए कंपनियां लगातार नए मॉडल और स्पेशल एडिशन पेश कर रही हैं।</p>
<p>ऑटो उद्योग के जानकारों का मानना है कि आने वाले महीनों में कई अन्य कंपनियां भी कीमतों में संशोधन कर सकती हैं। त्योहारी सीजन से पहले नई लॉन्चिंग और विशेष ऑफर्स की भी संभावना है। ऐसे में ग्राहकों के पास एक ओर नई तकनीक और बेहतर फीचर्स वाले वाहन खरीदने का अवसर होगा, वहीं दूसरी ओर बढ़ती कीमतों का असर उनके बजट पर भी दिखाई देगा।</p>
<p>उधर विमानन उद्योग में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बावजूद इंडिगो की मजबूत स्थिति यह संकेत देती है कि कंपनी आने वाले समय में भी अपने नेटवर्क और सेवाओं का विस्तार जारी रख सकती है। यात्रियों की संख्या बढ़ने के साथ एयरलाइंस के बीच प्रतिस्पर्धा और तेज होने की उम्मीद है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Jul 2026 09:27:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शेयर बाजार की सपाट शुरुआत, सेंसेक्स-निफ्टी पर वैश्विक तनाव का असर; कच्चे तेल और बिटकॉइन पर भी नजर</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका-ईरान तनाव के बीच बाजार में सतर्क कारोबार, ब्रेंट क्रूड में नरमी; बिटकॉइन 65 हजार डॉलर के ऊपर पहुंचा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/flat-start-of-stock-market-impact-of-global-tension-on/article-59331"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/sensex-today-(9).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">भारतीय शेयर बाजार ने मंगलवार को लगभग सपाट शुरुआत की। कारोबार के शुरुआती मिनटों में निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया, जिसका असर प्रमुख सूचकांकों पर भी देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स करीब 90 अंक की गिरावट के साथ खुला, जबकि एनएसई निफ्टी लगभग 20 अंक नीचे कारोबार करता दिखाई दिया। वैश्विक बाजारों से मिले मिले-जुले संकेत, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ा भू-राजनीतिक तनाव तथा अंतरराष्ट्रीय आर्थिक घटनाक्रम निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर रहे हैं। </p>
<p>अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव का असर केवल शेयर बाजार तक सीमित नहीं है, बल्कि ऊर्जा बाजार भी इससे प्रभावित हुआ है। हालांकि पिछले सत्र में कच्चे तेल की कीमतें एक महीने के उच्च स्तर तक पहुंचने के बाद मंगलवार को कुछ नरम होती दिखाई दीं। ब्रेंट क्रूड करीब 83 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता नजर आया। विश्लेषकों का मानना है कि भू-राजनीतिक तनाव के कारण तेल बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। यदि पश्चिम एशिया की स्थिति और गंभीर होती है तो कच्चे तेल की कीमतों में फिर तेजी देखने को मिल सकती है, जिसका असर वैश्विक महंगाई और विभिन्न देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।</p>
<p>भारतीय बाजार में शुरुआती कारोबार के दौरान बैंकिंग, आईटी और ऑटो शेयरों में सीमित उतार-चढ़ाव देखा गया। अधिकांश निवेशक फिलहाल वैश्विक संकेतों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और कंपनियों के तिमाही नतीजों का इंतजार कर रहे हैं। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक कोई बड़ा सकारात्मक या नकारात्मक संकेत नहीं मिलता, तब तक बाजार सीमित दायरे में कारोबार कर सकता है। हाल के दिनों में विदेशी संस्थागत निवेशकों की रणनीति और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां भी भारतीय शेयर बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।</p>
<p>दूसरी ओर क्रिप्टोकरेंसी बाजार में बिटकॉइन ने मजबूती दिखाई है। दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल मुद्रा बिटकॉइन फिर से 65 हजार डॉलर के स्तर के ऊपर पहुंच गई है। बाजार विश्लेषकों के अनुसार स्पॉट बिटकॉइन ईटीएफ (ETF) में निवेश बढ़ने और डेरिवेटिव बाजार में गतिविधियां तेज होने से निवेशकों का भरोसा कुछ मजबूत हुआ है। अमेरिकी स्पॉट बिटकॉइन ईटीएफ में लगातार निवेश आने के संकेत यह बताते हैं कि संस्थागत निवेशकों की रुचि धीरे-धीरे स्थिर हो रही है। इससे क्रिप्टो बाजार में सकारात्मक माहौल बना है।</p>
<p>डेरिवेटिव बाजार के आंकड़ों के अनुसार बिटकॉइन फ्यूचर्स में ओपन इंटरेस्ट बढ़कर लगभग 32 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। वहीं ऑप्शंस बाजार में भी गिरावट से बचाव के लिए किए जाने वाले सौदों की मांग पहले की तुलना में कुछ कम हुई है। इसे निवेशकों के भरोसे में सुधार का संकेत माना जा रहा है। हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि स्पॉट मार्केट में ट्रेडिंग वॉल्यूम अभी भी सीमित है। इसका मतलब यह है कि निवेशकों में पूरी तरह मजबूत खरीदारी का माहौल अभी नहीं बना है और बाजार कुछ समय तक सीमित दायरे में ही रह सकता है।</p>
<p>अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर अपनाई जा रही सख्त नीति भी वित्तीय बाजारों पर असर डाल रही है। ऊंची ब्याज दरों की संभावना के कारण वैश्विक निवेशक जोखिम वाले निवेश में फिलहाल सावधानी बरत रहे हैं। यही वजह है कि शेयर बाजार और क्रिप्टोकरेंसी दोनों में तेज तेजी देखने को नहीं मिल रही। फेडरल रिजर्व के अगले कदम और वैश्विक आर्थिक आंकड़े आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Jul 2026 09:35:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सरकार का बड़ा बयान: E20 पेट्रोल से इंजन पर असर नहीं, LTCG टैक्स में राहत का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[संसद में सरकार ने E20 ईंधन को सुरक्षित बताया, कहा- 23 करोड़ से अधिक वाहन बिना दिक्कत चल रहे; शेयर बाजार के निवेशकों को LTCG टैक्स में छूट पर भी स्थिति स्पष्ट की]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/governments-big-statement-e20-petrol-has-no-effect-on-engine/article-59330"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/e20-petrol.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">देश में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल यानी E20 फ्यूल को लेकर लंबे समय से चल रही चर्चाओं के बीच केंद्र सरकार ने संसद में स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि इस ईंधन से वाहनों के इंजन खराब होने या अचानक बंद होने जैसी समस्याओं की कोई प्रमाणित रिपोर्ट सरकार के पास उपलब्ध नहीं है। सरकार ने बताया कि देशभर में बड़ी संख्या में वाहन E20 पेट्रोल का उपयोग कर रहे हैं और अब तक ऐसी कोई व्यापक तकनीकी समस्या सामने नहीं आई है, जिससे यह कहा जा सके कि इस ईंधन का इंजन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। इसके साथ ही सरकार ने शेयर बाजार में निवेश करने वाले घरेलू और खुदरा निवेशकों के लिए भी बड़ा संकेत देते हुए स्पष्ट किया कि फिलहाल लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स को समाप्त करने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">संसद में पूछे गए एक सवाल के जवाब में सरकार ने कहा कि भारत में चरणबद्ध तरीके से एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य पेट्रोलियम ईंधन पर निर्भरता कम करना, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना और किसानों को एथेनॉल उत्पादन के माध्यम से अतिरिक्त आय के अवसर उपलब्ध कराना है। सरकार के अनुसार वर्तमान में देश में लगभग 23 करोड़ से अधिक वाहन ऐसे हैं जो बिना किसी बड़ी तकनीकी परेशानी के E20 ईंधन का उपयोग कर रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के आधार पर इंजन खराब होने या ईंधन की वजह से वाहन बंद पड़ने की कोई प्रमाणित शिकायत दर्ज नहीं हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि वाहन निर्माता कंपनियां भी समय-समय पर अपने मॉडलों को नए ईंधन मानकों के अनुरूप विकसित कर रही हैं। हाल के वर्षों में बाजार में आने वाले कई नए वाहन E20 ईंधन के अनुकूल बनाए जा रहे हैं। इसके साथ ही तेल विपणन कंपनियां भी देशभर में चरणबद्ध तरीके से E20 पेट्रोल की उपलब्धता बढ़ा रही हैं, ताकि उपभोक्ताओं को भविष्य की ईंधन व्यवस्था के अनुरूप सुविधाएं मिल सकें। विशेषज्ञों का भी मानना है कि निर्धारित मानकों के अनुरूप तैयार ईंधन और निर्माता कंपनी के दिशा-निर्देशों का पालन करने पर वाहन के प्रदर्शन पर प्रतिकूल प्रभाव की संभावना काफी कम रहती है।</p>
<p style="text-align:justify;">E20 पेट्रोल को लेकर समय-समय पर सोशल मीडिया और विभिन्न माध्यमों पर कई तरह की चर्चाएं सामने आती रही हैं। कुछ उपभोक्ताओं ने इंजन की कार्यक्षमता को लेकर सवाल भी उठाए थे। हालांकि सरकार ने संसद में दिए गए अपने जवाब में कहा कि उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों और रिपोर्टों के आधार पर ऐसे दावों की पुष्टि नहीं होती। सरकार ने यह भी कहा कि यदि भविष्य में किसी प्रकार की तकनीकी समस्या सामने आती है तो संबंधित एजेंसियां और वाहन निर्माता कंपनियां उसका परीक्षण करेंगी और आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी ओर शेयर बाजार में निवेश करने वाले लाखों निवेशकों के लिए भी सरकार ने लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स को लेकर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। संसद में पूछे गए प्रश्न के उत्तर में सरकार ने कहा कि फिलहाल इक्विटी निवेश पर लगने वाले LTCG टैक्स को समाप्त करने का कोई प्रस्ताव नहीं है। सरकार ने संकेत दिया कि वर्तमान कर व्यवस्था लागू रहेगी और इस संबंध में किसी बदलाव पर विचार नहीं किया जा रहा है। इससे यह स्पष्ट हो गया है कि फिलहाल शेयर बाजार में लंबी अवधि के निवेश से होने वाले लाभ पर लागू कर नियमों में कोई बदलाव नहीं होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">LTCG टैक्स शेयर बाजार के उन निवेशकों पर लागू होता है, जो निर्धारित अवधि तक निवेश रखने के बाद लाभ कमाते हैं। पिछले कुछ समय से बाजार के कुछ वर्गों द्वारा इस टैक्स में राहत या इसे समाप्त करने की मांग उठाई जा रही थी। हालांकि सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि फिलहाल ऐसा कोई प्रस्ताव उसके विचाराधीन नहीं है। कर नीति से जुड़े निर्णय समय-समय पर आर्थिक परिस्थितियों, राजस्व आवश्यकताओं और व्यापक वित्तीय नीतियों को ध्यान में रखकर लिए जाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार का कहना है कि एक ओर देश स्वच्छ ऊर्जा और हरित ईंधन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर आर्थिक और कर व्यवस्था में स्थिरता बनाए रखना भी आवश्यक है। E20 ईंधन को बढ़ावा देने की नीति ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और कृषि क्षेत्र को प्रोत्साहन देने जैसे कई उद्देश्यों से जुड़ी हुई है। इसी तरह कर प्रणाली को लेकर भी सरकार का प्रयास संतुलित और स्थिर व्यवस्था बनाए रखना है, ताकि निवेश और राजस्व दोनों के बीच संतुलन बना रहे।</p>
<p style="text-align:justify;">संसद में दिए गए इन दोनों महत्वपूर्ण जवाबों के बाद E20 पेट्रोल और LTCG टैक्स से जुड़े कई सवालों पर स्थिति काफी हद तक स्पष्ट हो गई है। आने वाले समय में एथेनॉल मिश्रित ईंधन का उपयोग और अधिक बढ़ने की संभावना है, वहीं निवेशकों की निगाहें भविष्य के बजट और कर संबंधी घोषणाओं पर बनी रहेंगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Jul 2026 09:35:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सर्राफा बाजार में फिर चमका सोना-चांदी, गोल्ड ₹1.42 लाख के करीब; चांदी ₹2.19 लाख प्रति किलो</title>
                                    <description><![CDATA[एक दिन में सोना ₹756 और चांदी ₹3,493 महंगी, जुलाई में गोल्ड ने दिखाई मजबूती लेकिन सिल्वर अब भी महीने की शुरुआत के मुकाबले नीचे]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/gold-and-silver-shine-again-in-the-bullion-market-gold/article-59287"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/gold-price-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">भारतीय सर्राफा बाजार में सप्ताह की शुरुआत सोने और चांदी की कीमतों में तेजी के साथ हुई है। सोने के भाव में 756 रुपए प्रति 10 ग्राम का उछाल दर्ज किया गया, जबकि चांदी एक ही दिन में 3,493 रुपए प्रति किलो महंगी हो गई। इस बढ़ोतरी के बाद दोनों कीमती धातुओं के भाव एक बार फिर ऊंचे स्तर पर पहुंच गए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के आंकड़ों के अनुसार, 24 कैरेट सोने का भाव बढ़कर 1,41,915 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया है। इससे पहले 17 जुलाई को इसकी कीमत 1,41,159 रुपए प्रति 10 ग्राम थी। यानी पिछले कारोबारी स्तर के मुकाबले सोने में 756 रुपए की बढ़ोतरी हुई है।</p>
<p class="isSelectedEnd">चांदी की कीमतों में सोने के मुकाबले ज्यादा तेज उछाल देखने को मिला है। एक किलो चांदी का भाव 2,18,967 रुपए तक पहुंच गया है। इससे पहले शुक्रवार को चांदी 2,15,474 रुपए प्रति किलो के स्तर पर थी। इस तरह एक कारोबारी सत्र में इसकी कीमत 3,493 रुपए बढ़ गई।</p>
<p class="isSelectedEnd">सोने की कीमत जुलाई के दौरान सीमित बढ़त के साथ ऊंचे स्तर पर बनी हुई है। एक जुलाई को 24 कैरेट सोने का भाव 1,41,632 रुपए प्रति 10 ग्राम था। मौजूदा भाव से तुलना करें तो इस महीने अब तक सोना करीब 283 रुपए महंगा हुआ है।</p>
<p class="isSelectedEnd">चांदी की तस्वीर इससे अलग दिखाई दे रही है। सोमवार को बड़ी तेजी के बावजूद चांदी अभी भी जुलाई की शुरुआत के स्तर से नीचे कारोबार कर रही है। एक जुलाई को एक किलो चांदी की कीमत 2,25,430 रुपए थी, जो अब 2,18,967 रुपए पर है।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस हिसाब से जुलाई में अब तक चांदी करीब 6,463 रुपए प्रति किलो सस्ती है। हालांकि एक दिन में 3,493 रुपए की तेजी ने इसकी गिरावट का बड़ा हिस्सा कम कर दिया है। चांदी में इस तरह के तेज उतार-चढ़ाव के कारण निवेशकों और सर्राफा कारोबारियों की नजर इसकी अगली चाल पर बनी हुई है।</p>
<p class="isSelectedEnd">सोने और चांदी की कीमतों में बदलाव के पीछे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर के कई कारण काम करते हैं। वैश्विक बाजार में सोने-चांदी के भाव, डॉलर की चाल, ब्याज दरों से जुड़ी उम्मीदें और भू-राजनीतिक परिस्थितियां भारतीय बाजार में इनकी कीमतों को प्रभावित कर सकती हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में बढ़ती अनिश्चितता के दौरान निवेशकों का रुझान सुरक्षित माने जाने वाले निवेश विकल्पों की ओर बढ़ सकता है। सोने को आमतौर पर ऐसे समय में सुरक्षित निवेश के विकल्प के रूप में देखा जाता है। इसी वजह से वैश्विक जोखिम बढ़ने पर इसकी मांग में बदलाव देखने को मिल सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">भारत में सोने की कीमत पर रुपए और डॉलर की विनिमय दर का भी असर पड़ता है। देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा सोने के आयात से पूरा करता है। ऐसे में डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होने पर आयात महंगा पड़ सकता है और घरेलू बाजार में सोने की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">सोने के मुकाबले चांदी की कीमतों में अक्सर ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है। इसकी एक वजह यह है कि चांदी का इस्तेमाल आभूषण और निवेश के अलावा औद्योगिक क्षेत्रों में भी बड़े पैमाने पर किया जाता है। इसलिए इसकी कीमत निवेश मांग के साथ औद्योगिक मांग से भी प्रभावित होती है।</p>
<p class="isSelectedEnd">इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर एनर्जी और कई मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में चांदी का इस्तेमाल होता है। वैश्विक औद्योगिक गतिविधियों में बदलाव से इसकी मांग प्रभावित हो सकती है। यही वजह है कि चांदी के भाव कभी-कभी बहुत कम समय में तेजी से ऊपर या नीचे जाते दिखाई देते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">मौजूदा तेजी के बाद सोना एक बार फिर 1.42 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के बेहद करीब पहुंच गया है। ऊंची कीमतों के कारण ज्वेलरी खरीदने वाले ग्राहकों के बजट पर असर पड़ सकता है। खासकर ज्यादा वजन वाले आभूषण खरीदने पर कीमतों में मामूली बदलाव भी कुल बिल में बड़ा अंतर पैदा कर सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">आभूषण खरीदते समय बाजार भाव के अलावा मेकिंग चार्ज और लागू टैक्स भी अंतिम कीमत को प्रभावित करते हैं। अलग-अलग शहरों और ज्वेलर्स के यहां रिटेल कीमतों में अंतर हो सकता है। इसलिए IBJA की दर और किसी ज्वेलरी स्टोर पर ग्राहक द्वारा चुकाई जाने वाली अंतिम कीमत समान होना जरूरी नहीं है।</p>
<p class="isSelectedEnd">सोने की शुद्धता भी कीमत तय करने का महत्वपूर्ण आधार है। 24 कैरेट सोना सबसे अधिक शुद्धता वाला माना जाता है, जबकि आभूषण बनाने में आमतौर पर 22 कैरेट या अन्य मिश्रित शुद्धता वाले सोने का इस्तेमाल किया जाता है। इसी कारण अलग-अलग कैरेट के सोने की कीमतें अलग होती हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">सोने की खरीदारी करते समय हॉलमार्क और शुद्धता की जानकारी देखना जरूरी माना जाता है। ग्राहक को ज्वेलरी का वजन, कैरेट, मेकिंग चार्ज और अन्य शुल्क भी बिल में जांचने चाहिए। ऊंची कीमतों के दौर में खरीदारी से पहले इन सभी लागतों की तुलना और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।</p>
<p class="isSelectedEnd">निवेश के नजरिए से भी सोना और चांदी लगातार चर्चा में बने हुए हैं। कुछ निवेशक कीमती धातुओं को पोर्टफोलियो में जोखिम संतुलित करने के लिए रखते हैं, जबकि कई लोग फिजिकल गोल्ड, सिक्के या दूसरे विकल्पों के जरिए इनमें निवेश करते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">हालांकि सोने और चांदी की कीमतें लगातार एक दिशा में नहीं चलतीं। अंतरराष्ट्रीय बाजार, करेंसी, ब्याज दरों और निवेशकों के रुझान में बदलाव से इनमें तेज उतार-चढ़ाव हो सकता है। चांदी में जुलाई के दौरान आई गिरावट और अब एक दिन में हुई बड़ी तेजी इसी अस्थिरता को दिखाती है।</p>
<p>सर्राफा कारोबारियों के लिए आने वाले दिनों में कीमतों की दिशा महत्वपूर्ण रहेगी। त्योहारी और शादी-ब्याह की मांग से पहले सोना ऊंचे स्तर पर बना रहता है तो ग्राहकों के खरीदारी पैटर्न में बदलाव देखने को मिल सकता है। लोग भारी ज्वेलरी के बजाय कम वजन वाले आभूषणों की ओर भी रुख कर सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Jul 2026 16:00:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Priyanka ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>महंगे कच्चे तेल ने बढ़ाई भारत की चिंता, ब्रेंट $90 के पार; महंगाई से रुपए तक दिख सकता है असर</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका-ईरान तनाव के बीच एक सप्ताह में करीब 16% उछला क्रूड, तेल आयात का खर्च बढ़ने और फ्यूल मार्केटिंग मार्जिन घटने का खतरा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/expensive-crude-oil-increases-indias-worries-brent-crosses-90-impact/article-59286"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/brent-crude-oil-price.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने भारत के लिए आर्थिक चिंता बढ़ा दी है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। पिछले एक सप्ताह में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 16 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd">पश्चिम एशिया में बढ़ती अनिश्चितता के कारण वैश्विक बाजार में तेल की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका बढ़ रही है। इसी वजह से कारोबारी और निवेशक कच्चे तेल की कीमतों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। यदि तनाव और बढ़ता है तो तेल बाजार में कीमतों का दबाव लंबे समय तक बना रह सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">भारत के लिए महंगा कच्चा तेल बड़ी चुनौती माना जाता है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमत बढ़ने पर भारत को तेल खरीदने के लिए ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ते हैं। इससे देश का आयात बिल बढ़ने और व्यापार घाटे पर दबाव आने की आशंका रहती है।</p>
<p class="isSelectedEnd">कच्चे तेल की तेजी का असर महंगाई पर भी पड़ सकता है। पेट्रोलियम उत्पादों का इस्तेमाल परिवहन, उद्योग, कृषि और लॉजिस्टिक्स सहित अर्थव्यवस्था के कई क्षेत्रों में होता है। ईंधन की लागत बढ़ने से माल ढुलाई महंगी हो सकती है, जिसका असर रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों तक पहुंच सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">खाद्य महंगाई के लिहाज से भी स्थिति महत्वपूर्ण है। फल, सब्जियां, अनाज और दूसरी आवश्यक वस्तुएं बड़ी मात्रा में सड़क परिवहन के जरिए बाजारों तक पहुंचती हैं। डीजल की लागत बढ़ने से ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ सकता है और इसका कुछ हिस्सा उपभोक्ताओं को अधिक कीमत के रूप में चुकाना पड़ सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच भारतीय रुपए पर भी दबाव बढ़ने की आशंका है। तेल आयात के भुगतान के लिए भारतीय कंपनियों को बड़ी मात्रा में डॉलर की जरूरत होती है। डॉलर की मांग बढ़ने की स्थिति में रुपए की विनिमय दर प्रभावित हो सकती है और आयात की लागत और ज्यादा बढ़ सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd">विदेशी पोर्टफोलियो निवेश यानी FPI के प्रवाह पर भी बाजार की नजर बनी हुई है। महंगा तेल भारत में महंगाई, चालू खाते और रुपए को प्रभावित कर सकता है। यदि वैश्विक निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता कम होती है तो उभरते बाजारों से पूंजी निकासी का दबाव भी बढ़ सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">तेल की कीमतों में तेजी का सीधा असर देश की ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के रिटेल कारोबार पर भी दिखाई दे रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में लागत बढ़ने के बावजूद घरेलू खुदरा कीमतों में उसी अनुपात में बदलाव नहीं होने पर कंपनियों के मार्केटिंग मार्जिन पर दबाव बढ़ जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">मौजूदा स्थिति में डीजल की बिक्री पर ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को करीब 20.4 रुपए प्रति लीटर तक का नुकसान होने की बात सामने आई है। यदि अंतरराष्ट्रीय कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं तो कंपनियों के फ्यूल मार्केटिंग कारोबार पर दबाव और बढ़ सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">हालांकि ऑयल कंपनियों को फिलहाल रिफाइनिंग कारोबार से कुछ राहत मिल रही है। रिफाइनिंग मार्जिन में मजबूत बढ़ोतरी के कारण रिटेल फ्यूल कारोबार में होने वाले नुकसान का कुछ हिस्सा संतुलित हो रहा है। इसी वजह से कंपनियों की कुल कमाई पर तत्काल उतना बड़ा असर दिखाई नहीं दे रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">कच्चे तेल की तेजी का असर एविएशन और ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर भी पड़ सकता है। एयरलाइंस के खर्च में एविएशन टर्बाइन फ्यूल की बड़ी हिस्सेदारी होती है। इसी तरह ट्रक और दूसरे कमर्शियल वाहनों के लिए डीजल प्रमुख खर्च है, इसलिए लंबे समय तक महंगा ईंधन परिचालन लागत बढ़ा सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">शेयर बाजार में भी क्रूड की तेजी के बाद अलग-अलग सेक्टर्स पर नजर बनी हुई है। एविएशन, पेंट, केमिकल, टायर, लॉजिस्टिक्स और पेट्रोलियम आधारित कच्चे माल का इस्तेमाल करने वाली कंपनियों की लागत प्रभावित हो सकती है। वहीं तेल उत्पादन से जुड़ी कंपनियों को ऊंची अंतरराष्ट्रीय कीमतों से फायदा मिलने की संभावना रहती है।</p>
<p class="isSelectedEnd">घरेलू स्तर पर पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर भी निगाहें बढ़ गई हैं। खुदरा ईंधन की कीमतें अंतरराष्ट्रीय क्रूड, डॉलर के मुकाबले रुपए की स्थिति, रिफाइनिंग लागत, मार्केटिंग मार्जिन और टैक्स जैसे कई कारकों से प्रभावित होती हैं। क्रूड लंबे समय तक महंगा रहा तो ऑयल कंपनियों पर लागत का दबाव बना रह सकता है।</p>
<p>आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव की दिशा कच्चे तेल की कीमतों के लिए सबसे महत्वपूर्ण फैक्टर रहेगी। इसके साथ ही वैश्विक तेल आपूर्ति, डॉलर की चाल और पश्चिम एशिया के घटनाक्रम पर बाजार की नजर रहेगी। ब्रेंट क्रूड का 90 डॉलर से ऊपर टिके रहना भारत के आयात खर्च, रुपए और महंगाई के लिए अहम साबित हो सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Jul 2026 15:59:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Priyanka ]]></dc:creator>
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                <title>भारतीय फिल्म निर्माता साजिद कुरैशी ने डिजिटल मीडिया में रखा कदम, Buzzzooka (बजूका) के रूप में लॉन्च किया नया मनोरंजन नेटवर्क</title>
                                    <description><![CDATA[Buzzzooka (बजूका)भारत का तेजी से उभरता हुआ डिजिटल एंटरटेनमेंट नेटवर्क है, जो बॉलीवुड, ओटीटी, सेलिब्रिटी जगत और लाइफस्टाइल से जुड़ी एक्सक्लूसिव सामग्री, फिल्म प्रमोशन और अंदरूनी जानकारी दर्शकों तक पहुंचा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/indian-filmmaker-sajid-qureshi-steps-into-digital-media-launches-new/article-59212"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/23.jpg" alt=""></a><br /><p>भारतीय मनोरंजन उद्योग में साजिद कुरैशी एक ऐसा नाम हैं, जिनके पास दो दशक से अधिक का अनुभव है। पिछले 20 वर्षों में उन्होंने फिल्म राइट्स ट्रेडिंग, डिजिटल मीडिया, फिल्म निर्माण, रेस्तरां व्यवसाय और डिजिटल आउट-ऑफ-होम विज्ञापन जैसे कई क्षेत्रों में अपनी मजबूत पहचान बनाई है। Inbox Pictures, T3 Streaming Private Limited और तेजी से लोकप्रिय हो रहे डिजिटल नेटवर्क Buzzzooka (बजूका) के संस्थापक के रूप में आज वह सिनेमा, स्ट्रीमिंग और नई डिजिटल मीडिया दुनिया के संगम पर खड़े हैं।</p>
<p><strong>Buzzzooka (बजूका) का उभार</strong></p>
<p>अपने व्यापक उद्योग अनुभव और मजबूत नेटवर्क के आधार पर साजिद कुरैशी ने वर्ष 2024 में Buzzzooka की शुरुआत एक नई पीढ़ी के मनोरंजन मंच के रूप में की। यह नेटवर्क बॉलीवुड, ओटीटी, टेलीविजन, सेलिब्रिटी संस्कृति, फैशन, फिटनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी खबरों और विशेष सामग्री पर केंद्रित है।</p>
<p>महज दो वर्षों में यह प्लेटफॉर्म तेजी से आगे बढ़ा है। इसके प्रमुख चैनल Buzzzooka Prime, Scrolls और Spotlight दर्शकों के बीच मजबूत लोकप्रियता हासिल कर चुके हैं।</p>
<p>Buzzzooka (बजूका) की सबसे बड़ी विशेषता इसकी इनसाइडर एक्सेस है। यह मंच दर्शकों को सेलिब्रिटी इंटरव्यू, फिल्म निर्माण के पीछे की झलक, रियल-टाइम पपराज़ी अपडेट और फिल्म प्रमोशन जैसी विशेष सामग्री सीधे उद्योग से उपलब्ध कराता है। अपनी इन-हाउस प्रोडक्शन टीम और मौलिक कंटेंट रणनीति के कारण यह केवल खबरों को दोहराने के बजाय दर्शकों को नया और विश्वसनीय अनुभव प्रदान करता है।</p>
<p><strong>20 वर्षों में 2,000 से अधिक फिल्मों का कारोबार</strong></p>
<p>साजिद कुरैशी के कारोबारी साम्राज्य की सबसे मजबूत नींव उनका फिल्म राइट्स ट्रेडिंग व्यवसाय है। पिछले दो दशकों में उन्होंने हिंदी और दक्षिण भारतीय सिनेमा की 2,000 से अधिक फिल्मों के अधिकारों का अधिग्रहण और व्यापार किया है।</p>
<p>T3 Streaming के माध्यम से उन्होंने देश की सबसे भरोसेमंद फिल्म राइट्स फैसिलिटेशन कंपनियों में अपनी पहचान बनाई है, जो भारत के प्रमुख ओटीटी प्लेटफॉर्म और सैटेलाइट नेटवर्क के साथ अधिकारों के कारोबार में सक्रिय है।</p>
<p>उनके ट्रेडिंग पोर्टफोलियो में RRR, Kantara Chapter 2, Don No. 1, Lal Salaam, Vettaiyan, Aranmanai 4 और Akhanda जैसी चर्चित फिल्में शामिल हैं। इस व्यापक अनुभव ने उन्हें निर्माताओं और डिजिटल प्लेटफॉर्म के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु बना दिया है।</p>
<p><strong>Inbox Pictures: फिल्म निर्माण का मजबूत आधार</strong></p>
<p>वर्ष 2016 में स्थापित Inbox Pictures ने कई व्यावसायिक फिल्मों का निर्माण किया है। नानू की जानू, जिसमें अभय देओल मुख्य भूमिका में थे, हॉरर-कॉमेडी शैली की फिल्म थी। वहीं फ्राइडे (FryDay) में गोविंदा और वरुण शर्मा ने पारिवारिक मनोरंजन प्रस्तुत किया।</p>
<p>इसके अलावा Bad Boy (नमाशी, अमरीन और निर्देशक राजकुमार संतोषी के साथ), Incar (राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अभिनेत्री रितिका सिंह अभिनीत) तथा आयुष शर्मा के साथ एक आगामी अनाम फिल्म भी निर्माणाधीन है।</p>
<p><strong>मनोरंजन से आगे: रेस्तरां और डिजिटल स्क्रीन नेटवर्क</strong></p>
<p>साजिद कुरैशी ने वर्ष 2016 में Sin City जैसे ब्रांड के साथ रेस्तरां व्यवसाय में प्रवेश किया। अब वह FryDum ब्रांड के तहत इस वर्ष दिल्ली में 10 क्विक सर्विस रेस्तरां (QSR) शुरू करने की तैयारी कर रहे हैं।</p>
<p>इसके साथ ही उन्होंने Fodxpert नामक डिजिटल स्क्रीन प्रमोशन नेटवर्क भी विकसित किया है, जिसके माध्यम से रेस्तरां और अधिक भीड़भाड़ वाले लाइफस्टाइल स्थलों पर डिजिटल विज्ञापन स्क्रीन स्थापित की जा रही हैं। यह पहल मीडिया और आउट-ऑफ-होम विज्ञापन को एक नए स्वरूप में जोड़ती है।</p>
<p><strong>भविष्य की योजना</strong></p>
<p>Buzzzooka की दो वर्ष की उपलब्धि पर साजिद कुरैशी ने कहा,</p>
<p>"हम केवल एक और मनोरंजन मंच नहीं बना रहे हैं, बल्कि एक ऐसा संगठित, मौलिक और दर्शक-केंद्रित मीडिया इकोसिस्टम तैयार कर रहे हैं, जो भारत और दुनिया में डिजिटल स्टोरीटेलिंग को नई दिशा देगा। हमारा उद्देश्य केवल तेज़ी से विकास करना नहीं, बल्कि गुणवत्ता, नवाचार और दर्शकों से स्थायी जुड़ाव के माध्यम से उद्योग में नेतृत्व स्थापित करना है।"</p>
<p><strong>बड़ी तस्वीर</strong></p>
<p>2,000 से अधिक फिल्मों के अधिकारों के कारोबार, सफल फिल्म निर्माण, Buzzzooka जैसे डिजिटल नेटवर्क की स्थापना और रेस्तरां व डिजिटल स्क्रीन नेटवर्क जैसे नए क्षेत्रों में विस्तार के साथ साजिद कुरैशी का सफर भारतीय मनोरंजन उद्योग के बदलते स्वरूप को दर्शाता है। वह उन चुनिंदा उद्यमियों में शामिल हैं जो सिनेमा, स्ट्रीमिंग, डिजिटल मीडिया और उपभोक्ता अनुभवों को एक साथ जोड़ते हुए भारत के मनोरंजन और लाइफस्टाइल उद्योग के अगले दौर को नई दिशा देने का प्रयास कर रहे हैं</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/business/indian-filmmaker-sajid-qureshi-steps-into-digital-media-launches-new/article-59212</link>
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                <pubDate>Sun, 19 Jul 2026 20:19:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[दैनिक जागरण]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शेयर बाजार की तेजी से दिग्गज कंपनियों की बढ़ी दौलत, TCS ने एक हफ्ते में जोड़े ₹72 हजार करोड़</title>
                                    <description><![CDATA[देश की 10 सबसे मूल्यवान कंपनियों में पांच का संयुक्त मार्केट कैप ₹1.54 लाख करोड़ से ज्यादा बढ़ा, रिलायंस, ICICI बैंक, SBI और बजाज फाइनेंस को भी फायदा; L&amp;T और LIC की वैल्यू में बड़ी गिरावट]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/wealth-of-big-companies-increased-due-to-stock-market-boom/article-59164"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/indian-stock-market.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">भारतीय शेयर बाजार में पिछले कारोबारी सप्ताह के दौरान आई तेजी का फायदा देश की कई दिग्गज कंपनियों को मिला। देश की टॉप-10 सबसे मूल्यवान कंपनियों में से पांच के मार्केट कैपिटलाइजेशन में संयुक्त रूप से ₹1.54 लाख करोड़ से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस दौरान सबसे ज्यादा फायदा आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज यानी TCS को हुआ। कंपनी के मार्केट कैप में अकेले ₹72,072.30 करोड़ का इजाफा हुआ और इसका कुल बाजार मूल्य बढ़कर करीब ₹8,20,672.70 करोड़ पहुंच गया। शेयरों में आई मजबूती और कंपनी के तिमाही प्रदर्शन को लेकर निवेशकों की सकारात्मक धारणा ने TCS को सप्ताह का सबसे बड़ा मार्केट कैप गेनर बना दिया।</p>
<p>पिछला कारोबारी सप्ताह प्रमुख शेयर बाजार सूचकांकों के लिए भी सकारात्मक रहा। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का बेंचमार्क सेंसेक्स सप्ताह के दौरान 582.06 अंक यानी करीब 0.75 प्रतिशत मजबूत होकर बंद हुआ। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 127.4 अंक यानी लगभग 0.52 प्रतिशत ऊपर रहा। वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों की दिशा, कच्चे तेल की कीमतों और भू-राजनीतिक तनाव को लेकर बनी अनिश्चितता के बावजूद घरेलू बाजार में चुनिंदा सेक्टरों में खरीदारी देखने को मिली। खासतौर पर आईटी, बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी ने बाजार को समर्थन दिया।</p>
<p>TCS के अलावा रिलायंस इंडस्ट्रीज, ICICI बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और बजाज फाइनेंस उन कंपनियों में शामिल रहीं, जिनकी बाजार पूंजी में पिछले सप्ताह बढ़ोतरी दर्ज की गई। बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर में लौटी खरीदारी से ICICI बैंक और SBI जैसे बड़े बैंकों के शेयरों को समर्थन मिला। बजाज फाइनेंस भी बढ़त वाली कंपनियों में शामिल रही। वहीं देश की सबसे बड़ी सूचीबद्ध कंपनियों में शामिल रिलायंस इंडस्ट्रीज के मार्केट कैप में भी इजाफा हुआ। इन पांचों कंपनियों के बाजार मूल्य में हुई संयुक्त बढ़ोतरी ₹1.54 लाख करोड़ से अधिक रही।</p>
<p>आईटी सेक्टर में TCS का प्रदर्शन खास तौर पर चर्चा में रहा। कंपनी के वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के प्रदर्शन के बाद निवेशकों का रुझान शेयर की ओर बढ़ा। बाजार में आईटी सेक्टर को लेकर बेहतर सेंटीमेंट बनने का असर कंपनी के वैल्यूएशन पर दिखाई दिया। एक सप्ताह में ₹72 हजार करोड़ से ज्यादा की बढ़ोतरी के साथ TCS ने मार्केट कैप बढ़ाने के मामले में अन्य सभी दिग्गज कंपनियों को पीछे छोड़ दिया।</p>
<p>हालांकि शेयर बाजार में कुल मिलाकर तेजी रहने के बावजूद टॉप-10 कंपनियों में शामिल सभी कंपनियों को फायदा नहीं हुआ। पांच कंपनियों के मार्केट कैप में गिरावट दर्ज की गई। इनमें लार्सन एंड टुब्रो यानी L&amp;T, भारतीय जीवन बीमा निगम यानी LIC, भारती एयरटेल, HDFC बैंक और हिंदुस्तान यूनिलीवर शामिल हैं। इन कंपनियों के शेयरों में अलग-अलग स्तर पर दबाव दिखाई दिया, जिसका असर सीधे उनके बाजार मूल्य पर पड़ा।</p>
<p>सबसे ज्यादा नुकसान इंजीनियरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र की प्रमुख कंपनी लार्सन एंड टुब्रो को हुआ। कंपनी का मार्केट कैप एक सप्ताह में ₹18,097.72 करोड़ घटकर करीब ₹5,24,840.68 करोड़ रह गया। टॉप-10 कंपनियों में मार्केट कैप के लिहाज से यह सबसे बड़ी गिरावट रही। बाजार के प्रमुख सूचकांकों में बढ़त के बावजूद L&amp;T के शेयरों में दबाव के कारण कंपनी की बाजार पूंजी में कमी दर्ज की गई।</p>
<p>सरकारी बीमा कंपनी LIC भी नुकसान उठाने वाली बड़ी कंपनियों में शामिल रही। LIC का मार्केट कैप ₹12,080.75 करोड़ कम होकर करीब ₹5,48,124.30 करोड़ पर आ गया। इसी तरह टेलीकॉम सेक्टर की दिग्गज भारती एयरटेल के बाजार मूल्य में ₹7,706.45 करोड़ की कमी आई और कंपनी का मार्केट कैप घटकर करीब ₹11,91,067.77 करोड़ रह गया।</p>
<p>देश के सबसे बड़े निजी बैंकों में शामिल HDFC बैंक के बाजार पूंजीकरण में भी पिछले सप्ताह गिरावट देखने को मिली। बैंक का मार्केट कैप करीब ₹7,084.61 करोड़ कम होकर ₹12,62,369.81 करोड़ के आसपास रह गया। वहीं FMCG सेक्टर की प्रमुख कंपनी हिंदुस्तान यूनिलीवर यानी HUL के मार्केट कैप में ₹1,221.79 करोड़ की कमी दर्ज की गई। इसके बाद कंपनी का कुल बाजार मूल्य करीब ₹5,03,775.86 करोड़ रह गया।</p>
<p>बाजार विशेषज्ञों के अनुसार पिछले सप्ताह भारतीय शेयर बाजार ने वैश्विक चुनौतियों के बीच मजबूती दिखाई। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। इसके अलावा कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और विभिन्न क्षेत्रों में जारी भू-राजनीतिक तनाव भी निवेशकों की रणनीति को प्रभावित कर रहे हैं। इसके बावजूद घरेलू अर्थव्यवस्था से जुड़े मजबूत संकेतों और कंपनियों के तिमाही नतीजों ने भारतीय बाजार को सहारा दिया।</p>
<p>रेलीगेयर ब्रोकिंग के रिसर्च एसवीपी अजीत मिश्रा के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर कई तरह की अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय शेयर बाजार सप्ताह के आखिरी हिस्से में रिकवरी करने में सफल रहा। आईटी सेक्टर में TCS के तिमाही नतीजों और बैंकिंग तथा वित्तीय शेयरों में दोबारा शुरू हुई खरीदारी ने प्रमुख इंडेक्स को मजबूती दी। घरेलू आर्थिक आंकड़ों से मिले सकारात्मक संकेतों ने भी निवेशकों की धारणा को बेहतर बनाने में भूमिका निभाई।</p>
<p>पिछले सप्ताह की बाजार गतिविधियों में सेक्टर आधारित अंतर भी साफ दिखाई दिया। आईटी और बैंकिंग कंपनियों के चुनिंदा शेयरों में मजबूत खरीदारी हुई, जबकि इंफ्रास्ट्रक्चर, बीमा, टेलीकॉम और FMCG से जुड़ी कुछ बड़ी कंपनियों के शेयर दबाव में रहे। इसी वजह से सेंसेक्स और निफ्टी में बढ़त के बावजूद टॉप-10 कंपनियों के मार्केट कैप की तस्वीर मिली-जुली रही।</p>
<p>मार्केट कैपिटलाइजेशन किसी सूचीबद्ध कंपनी की शेयर बाजार में कुल वैल्यू को दर्शाता है। इसे कंपनी के कुल जारी शेयरों की संख्या को मौजूदा शेयर मूल्य से गुणा करके निकाला जाता है। शेयर की कीमत बढ़ने पर कंपनी का मार्केट कैप बढ़ जाता है और शेयर में गिरावट आने पर बाजार पूंजीकरण कम हो जाता है। ऐसे में किसी कंपनी के मार्केट कैप में हजारों करोड़ रुपए की बढ़ोतरी का अर्थ यह नहीं है कि कंपनी को सीधे इतनी नकद रकम मिली है, बल्कि यह शेयर बाजार में कंपनी के कुल मूल्यांकन में आए बदलाव को दर्शाता है।</p>
<p>TCS के मार्केट कैप में ₹72 हजार करोड़ से ज्यादा की छलांग ने आईटी सेक्टर को सप्ताह की प्रमुख गतिविधियों के केंद्र में रखा। दूसरी तरफ रिलायंस इंडस्ट्रीज, ICICI बैंक, SBI और बजाज फाइनेंस की बढ़ी बाजार पूंजी ने लार्ज-कैप शेयरों में निवेशकों की खरीदारी का संकेत दिया। इसके विपरीत L&amp;T में ₹18 हजार करोड़ से अधिक और LIC में ₹12 हजार करोड़ से ज्यादा की मार्केट वैल्यू घटने से टॉप-10 कंपनियों के बीच प्रदर्शन का अंतर भी स्पष्ट दिखाई दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Jul 2026 13:02:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Priyanka ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>UAN Activation: EPFO का बड़ा बदलाव, अब उमंग ऐप से एक्टिवेट होगा UAN, फेस ऑथेंटिकेशन भी जरूरी</title>
                                    <description><![CDATA[EPFO ने UAN एक्टिवेशन की प्रक्रिया बदल दी है। अब उमंग ऐप पर आधार आधारित फेस ऑथेंटिकेशन के जरिए यह सुविधा मिलेगी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/uan-activation-is-a-big-change-in-epfo-now-uan/article-59073"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/uan-activation.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने यूनिवर्सल अकाउंट नंबर यानी UAN से जुड़ी ऑनलाइन प्रक्रिया में अहम बदलाव किया है। अब सदस्य पुराने तरीके से EPFO के मेंबर पोर्टल पर जाकर UAN एक्टिवेट नहीं कर पाएंगे। पोर्टल पर UAN Activation की सुविधा बंद कर दी गई है और सदस्यों को इसके लिए उमंग ऐप का इस्तेमाल करना होगा। नई व्यवस्था में आधार आधारित Face Authentication Technology यानी FAT को भी शामिल किया गया है। EPFO के आधिकारिक मेंबर पोर्टल पर इस बदलाव की सूचना दी गई है और वहां स्पष्ट किया गया है कि UAN एक्टिवेशन अब उमंग ऐप पर ‘UAN Services Through Face Auth’ के जरिए किया जाएगा। संगठन का फोकस सेवाओं को अधिक सुरक्षित, डिजिटल और पहचान सत्यापन से जोड़ने पर है।</p>
<p>नई प्रक्रिया में कर्मचारी को सबसे पहले अपने स्मार्टफोन में उमंग ऐप और आधार फेस ऑथेंटिकेशन के लिए जरूरी ऐप उपलब्ध रखना होगा। उमंग ऐप खोलने के बाद EPFO की सेवाओं में जाना होगा। यहां ‘UAN Services Through Face Auth’ के अंतर्गत UAN Activation का विकल्प मिलता है। सदस्य को मांगी गई जानकारी दर्ज करने के बाद आधार से जुड़े मोबाइल नंबर के जरिए OTP सत्यापन पूरा करना होगा। इसके बाद फेस ऑथेंटिकेशन की प्रक्रिया होगी। मोबाइल कैमरे के माध्यम से चेहरे की पहचान आधार से उपलब्ध रिकॉर्ड के साथ सत्यापित की जाती है। सफल सत्यापन के बाद पहले से जारी UAN को एक्टिवेट किया जा सकता है। EPFO की आधिकारिक व्यवस्था में नए UAN के आवंटन और एक्टिवेशन से जुड़ी फेस ऑथेंटिकेशन आधारित सेवाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं।</p>
<p>इस बदलाव का असर खास तौर पर उन कर्मचारियों पर पड़ेगा, जिन्होंने हाल ही में नौकरी शुरू की है या जिनका UAN जारी तो हो चुका है, लेकिन अभी तक एक्टिव नहीं किया गया। UAN कर्मचारी के पूरे नौकरी जीवन में एक स्थायी पहचान संख्या की तरह काम करता है। नौकरी बदलने पर नया PF खाता जुड़ सकता है, लेकिन UAN सामान्य रूप से वही रहता है। इसी नंबर के जरिए कर्मचारी अपने अलग-अलग Member ID को एक जगह मैनेज कर सकता है। UAN एक्टिव होने के बाद सदस्य EPF पासबुक, क्लेम, प्रोफाइल और दूसरी ऑनलाइन सुविधाओं तक पहुंच बना सकता है। EPFO का कहना है कि फेस ऑथेंटिकेशन के इस्तेमाल से सदस्य की पहचान सीधे आधार से सत्यापित करने में मदद मिलती है और गलत पहचान या रिकॉर्ड में गड़बड़ी की आशंका कम की जा सकती है।</p>
<p>अगर किसी सदस्य को यह देखना है कि उसका UAN पहले से एक्टिव है या नहीं, तो उमंग ऐप के EPFO सेक्शन में जाकर संबंधित फेस ऑथेंटिकेशन सेवा का इस्तेमाल किया जा सकता है। यहां UAN और मांगी गई पहचान संबंधी जानकारी भरने के बाद सत्यापन किया जाता है। यदि नंबर पहले ही सक्रिय है तो सिस्टम इसकी जानकारी स्क्रीन पर दिखा देता है। इससे उन कर्मचारियों को सुविधा होगी जिन्हें याद नहीं कि उन्होंने पहले UAN एक्टिवेशन पूरा किया था या नहीं। किसी तकनीकी समस्या की स्थिति में EPFO ने अपने हेल्पडेस्क नंबर 14470 के जरिए सहायता लेने की सुविधा भी बताई है।</p>
<p>UAN की प्रक्रिया में यह बदलाव EPFO की डिजिटल सेवाओं को फेस ऑथेंटिकेशन से जोड़ने की बड़ी योजना का हिस्सा है। संगठन पहले से डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट सहित कुछ सेवाओं में चेहरे के जरिए पहचान सत्यापन का इस्तेमाल कर रहा है। अब UAN से जुड़ी सेवाओं में भी इसी तकनीक का दायरा बढ़ाया गया है। इसका फायदा यह है कि कई मामलों में कर्मचारी को केवल OTP या दस्तावेज आधारित पहचान पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। हालांकि प्रक्रिया पूरी करने के लिए आधार में दर्ज जानकारी सही होना जरूरी है। नाम, जन्मतिथि या अन्य विवरणों में अंतर होने पर सदस्य को परेशानी आ सकती है, इसलिए आवेदन से पहले रिकॉर्ड की जांच करना उपयोगी रहेगा।</p>
<p>PF खाताधारकों के लिए ब्याज दर भी महत्वपूर्ण मुद्दा है। EPFO के केंद्रीय न्यासी बोर्ड ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए EPF जमा पर <strong>8.25 प्रतिशत वार्षिक ब्याज</strong> की सिफारिश की थी। EPFO के आधिकारिक दस्तावेजों में भी वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 8.25 प्रतिशत की दर की सिफारिश दर्ज है। कर्मचारी और नियोक्ता की ओर से जमा होने वाली राशि पर लागू नियमों के अनुसार ब्याज जोड़ा जाता है और यह लंबी अवधि में कर्मचारी की रिटायरमेंट सेविंग का अहम हिस्सा बनता है।</p>
<p>EPF से पैसे निकालने की व्यवस्था में भी पिछले समय में बदलाव किए गए हैं। यहां यह ध्यान रखना जरूरी है कि हर परिस्थिति में केवल 75 प्रतिशत निकासी और अनिवार्य रूप से 25 प्रतिशत बैलेंस रखने वाला एक सामान्य पुराना नियम मान लेना सही नहीं होगा। EPFO ने निकासी नियमों को सरल करने की दिशा में बदलाव किए हैं और अलग-अलग जरूरतों तथा पात्रता के अनुसार निकासी की सीमा तय होती है। आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार आंशिक निकासी आवास, शिक्षा, विवाह और चिकित्सा जैसी निर्धारित जरूरतों के लिए उपलब्ध है, जबकि हाल के सुधारों में कई पुराने प्रावधानों को सरल ढांचे में लाने की दिशा में कदम उठाए गए हैं। इसलिए PF निकालने से पहले सदस्य को अपनी पात्रता और उस समय लागू नियम EPFO की आधिकारिक सेवा पर जांच लेने चाहिए।</p>
<p><span><a class="decorated-link" href="https://unifiedportal-mem.epfindia.gov.in/?utm_source=chatgpt.com">EPFO Member Portal</a></span> पर UAN एक्टिवेशन की पुरानी सुविधा बंद होने की आधिकारिक सूचना देखी जा सकती है, जबकि <span><a class="decorated-link" href="https://web.umang.gov.in/landing/department/epfo.html?utm_source=chatgpt.com">UMANG पर EPFO Services</a></span> के जरिए उपलब्ध UAN और फेस ऑथेंटिकेशन सेवाओं की जानकारी मिलती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Jul 2026 12:31:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Priyanka ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Vikram-1 Launch: भारत के निजी स्पेस सेक्टर ने रचा इतिहास, पहला प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट अंतरिक्ष के लिए रवाना</title>
                                    <description><![CDATA[स्काईरूट एयरोस्पेस का विक्रम-1 श्रीहरिकोटा से लॉन्च हुआ, मिशन आगमन के जरिए रॉकेट को 450 किमी की कक्षा तक पहुंचाकर कई पेलोड तैनात करने के लिए तैयार किया गया है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/vikram-1-launch-indias-private-space-sector-creates-history-first-private/article-59072"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/vikram--1-launch.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में शनिवार, 18 जुलाई 2026 को एक नया अध्याय जुड़ गया। हैदराबाद की निजी स्पेस कंपनी <span><a class="decorated-link" href="https://www.skyroot.in/?utm_source=chatgpt.com">स्काईरूट एयरोस्पेस</a></span> ने अपना विक्रम-1 रॉकेट आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्च किया। यह भारत में निजी कंपनी द्वारा विकसित पहला ऑर्बिटल-क्लास लॉन्च व्हीकल है। उड़ान पहले सुबह 11:30 बजे निर्धारित थी, लेकिन लॉन्च से कुछ मिनट पहले काउंटडाउन को रोकना पड़ा। जरूरी जांच और कुछ समय के होल्ड के बाद प्रक्रिया दोबारा शुरू की गई और दोपहर करीब 12:05 बजे विक्रम-1 ने उड़ान भरी। इस मिशन को ‘आगमन’ नाम दिया गया है। विक्रम-1 की पहली ऑर्बिटल उड़ान को भारत के तेजी से बढ़ते निजी अंतरिक्ष उद्योग के लिए अहम पड़ाव माना जा रहा है। कंपनी के मुताबिक रॉकेट को छोटे सैटेलाइट्स को पृथ्वी की निचली कक्षा तक पहुंचाने के लिए विकसित किया गया है।</p>
<p>विक्रम-1 की यह उड़ान इसलिए भी खास है क्योंकि इससे पहले भारतीय अंतरिक्ष अभियानों में सरकारी एजेंसी इसरो की मुख्य भूमिका रही है। निजी कंपनियां उपकरण, तकनीक और अन्य सेवाओं में भागीदारी करती रही हैं, लेकिन अब निजी क्षेत्र अपने लॉन्च व्हीकल के जरिए ऑर्बिटल मिशन तक पहुंच रहा है। विक्रम-1 की पहली उड़ान का लक्ष्य करीब 450 किलोमीटर ऊंचाई वाली कक्षा तक पहुंचना रखा गया है। स्काईरूट के अनुसार विक्रम-1 छोटे उपग्रहों के लिए तैयार किया गया लॉन्च व्हीकल है और इसकी क्षमता 350 किलोग्राम तक के पेलोड को लो अर्थ ऑर्बिट में ले जाने की है। इससे पहले नवंबर 2022 में कंपनी ने विक्रम-S नाम का सबऑर्बिटल रॉकेट लॉन्च किया था। ‘मिशन प्रारंभ’ नाम की उस उड़ान के साथ स्काईरूट अंतरिक्ष में रॉकेट भेजने वाली भारत की पहली निजी कंपनी बनी थी। अब विक्रम-1 के जरिए कंपनी ने ऑर्बिटल लॉन्च की दिशा में अगला बड़ा कदम बढ़ाया है।</p>
<p>मिशन आगमन में केवल तकनीकी और व्यावसायिक पेलोड ही नहीं रखे गए, बल्कि कुछ प्रतीकात्मक चीजों ने भी लोगों का ध्यान खींचा। मिशन में अलग-अलग स्पेस और टेक्नोलॉजी कंपनियों से जुड़े पेलोड शामिल किए गए हैं। इनमें ग्रह स्पेस, कॉस्मोसर्व स्पेस और डी-क्यूब्ड से जुड़े पेलोड के साथ स्काईरूट का अपना प्रयोगात्मक पेलोड भी शामिल बताया गया है। रॉकेट में कला से जुड़ी ‘कॉस्मिक ब्लूम’ कलाकृति और एक विशेष माइक्रो-आर्ट पीस भी भेजा गया। इस छोटे आर्टवर्क को 18 कैरेट सोने से तैयार किया गया है और इसमें भारत के तीन महान वैज्ञानिकों—डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम, डॉ. विक्रम साराभाई और नोबेल पुरस्कार विजेता सर सीवी रमन—को सूक्ष्म कला के जरिए जगह दी गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथ से लिखा ‘वंदे मातरम्’ संदेश वाला पोस्टकार्ड भी मिशन से जोड़ा गया है। प्रधानमंत्री ने उड़ान से पहले विक्रम-1 को भारत की अंतरिक्ष यात्रा में एक ऐतिहासिक नया पड़ाव बताते हुए निजी क्षेत्र और युवा प्रतिभाओं की भूमिका का उल्लेख किया था।</p>
<p>विक्रम-1 की बनावट भी इसे खास बनाती है। रॉकेट में बड़े पैमाने पर कार्बन-कंपोजिट स्ट्रक्चर का इस्तेमाल किया गया है, जिससे इसका वजन पारंपरिक धातु संरचनाओं की तुलना में कम रखने में मदद मिलती है। करीब सात मंजिला ऊंचाई वाले इस लॉन्च व्हीकल का वजन लगभग 24 टन बताया गया है। इसकी शुरुआती उड़ान के लिए तीन सॉलिड प्रोपल्शन स्टेज का इस्तेमाल किया गया है। ये चरण एक के बाद एक सक्रिय होकर रॉकेट को वातावरण से ऊपर ले जाने और जरूरी गति हासिल कराने का काम करते हैं। ऊपरी चरण में कक्षा से जुड़े सटीक नियंत्रण के लिए अलग प्रणोदन तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। कंपनी ने रॉकेट में 3D-प्रिंटेड कंपोनेंट और स्वदेशी रूप से विकसित प्रणोदन प्रणालियों का भी उपयोग किया है।</p>
<p>कार्बन-कंपोजिट तकनीक का सबसे बड़ा फायदा रॉकेट का वजन कम करने में मिलता है। लॉन्च व्हीकल जितना हल्का होगा, उतनी ही बेहतर तरीके से उपलब्ध ऊर्जा का उपयोग पेलोड को कक्षा तक पहुंचाने में किया जा सकता है। विक्रम-1 को खास तौर पर तेजी से बढ़ते छोटे सैटेलाइट बाजार को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। ऐसे उपग्रह पृथ्वी अवलोकन, संचार, मौसम, कृषि निगरानी, वैज्ञानिक प्रयोग और कई व्यावसायिक सेवाओं में इस्तेमाल किए जा रहे हैं। स्काईरूट का लक्ष्य भविष्य में ऐसे ग्राहकों को जरूरत के अनुसार समर्पित और राइडशेयर लॉन्च विकल्प उपलब्ध कराना है। कंपनी विक्रम-II पर भी काम कर रही है, जिसकी पेलोड क्षमता विक्रम-1 से अधिक रखने की योजना है।</p>
<p>विक्रम-1 का नाम भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक डॉ. विक्रम साराभाई के सम्मान में रखा गया है। दिलचस्प बात यह भी है कि यह उड़ान 18 जुलाई को हुई, वही तारीख जब 1980 में भारत के SLV-3 ने रोहिणी उपग्रह को कक्षा में स्थापित कर देश की अंतरिक्ष यात्रा में ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की थी। करीब 46 साल बाद इसी तारीख को निजी क्षेत्र के ऑर्बिटल रॉकेट की उड़ान ने भारतीय स्पेस सेक्टर के बदलते स्वरूप को सामने रखा है। श्रीहरिकोटा में मिशन के दौरान अंतरिक्ष क्षेत्र से जुड़े वैज्ञानिक और विशेषज्ञ मौजूद रहे। इस उड़ान के जरिए रॉकेट के प्रणोदन, स्टेज सेपरेशन, गाइडेंस, नेविगेशन और ऑर्बिटल पेलोड डिप्लॉयमेंट जैसी अहम तकनीकों का वास्तविक परिस्थितियों में परीक्षण भी महत्वपूर्ण है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Jul 2026 12:22:38 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>विदेशों में पढ़ाई करने वाले भारतीय छात्रों को अब स्मार्ट बीमा योजना की जरूरत क्यों है   </title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय परिवार विदेशों में पढ़ाई पर अभूतपूर्व पैमाने पर निवेश कर रहे हैं। कई मामलों में यह सालों की वित्तीय योजना, आकांक्षा और बलिदान का नतीजा होता है, जिसका मकसद अगली पीढ़ी के लिए वैश्विक अवसर खोलना होता है। फिर भी इस निवेश का एक अहम हिस्सा अक्सर उचित ध्यान नहीं पाता: व्यापक जोखिम सुरक्षा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/why-indian-students-studying-abroad-now-need-a-smart-insurance/article-58964"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/विदेशों-में-पढ़ाई-करने-वाले-भारतीय-छात्रों-को-अब-स्मार्ट-बीमा-योजना-की-जरूरत-क्यों-है.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">अधिकांश परिवार गंतव्य</span><span lang="en-in" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">विश्वविद्यालय</span><span lang="en-in" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">ट्यूशन और आवास जैसे बड़े फैसले महीनों या साल पहले कर लेते हैं। बीमा पर विचार अक्सर बहुत बाद में आता है और अक्सर यह सिर्फ वीजा प्रक्रिया या यूनिवर्सिटी नामांकन जैसी औपचारिकता के रूप में रह जाता है। आज के वैश्विक शिक्षा माहौल में यह क्रम वास्तविकता से मेल नहीं खाता।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"> </p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="en-in" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in">2026 </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">तक छात्राओं की संख्या और उनके पढ़ने के स्थान दोनों में बदलाव आया है। विदेश मंत्रालय के अनुसार अब </span><span lang="en-in" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in">1.8 </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">मिलियन से अधिक भारतीय छात्र </span><span lang="en-in" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in">150 </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">से अधिक देशों में पढ़ रहे हैं। परंपरागत गंतव्य जैसे अमेरिका</span><span lang="en-in" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">ब्रिटेन और कनाडा अभी भी लोकप्रिय हैं</span><span lang="en-in" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">जबकि जर्मनी और यूरोप के अन्य हिस्से किफायती विकल्प</span><span lang="en-in" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">वैकल्पिक शिक्षा रास्ते और सहायक नीतियों की वजह से तेजी से छात्रों को आकर्षित कर रहे हैं</span><span lang="en-in" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in">; </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">अकेले जर्मनी में तकरीबन </span><span lang="en-in" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in">60,000 </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">भारतीय छात्र हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">यह विविधीकरण उत्साहजनक है</span><span lang="en-in" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">पर नई चुनौतियाँ भी लाया है। छात्र अपरिचित स्वास्थ्य प्रणालियाँ</span><span lang="en-in" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">नियामक ढाँचे और संस्थागत प्रक्रियाओं के बीच नेविगेट कर रहे हैं और अक्सर स्थानीय समर्थन सीमित होता है। जब परेशानी होती है—चाहे चिकित्सा हो</span><span lang="en-in" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">शैक्षणिक हो या लॉजिस्टिक—तो वे त्वरित रूप से गंभीर हो सकते हैं। अब जोखिम सिर्फ कुछ पेशानदेह देशों तक सीमित नहीं रहा</span><span lang="en-in" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in">; </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">यह अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों</span><span lang="en-in" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">स्वास्थ्य मॉडलों और अनुपालन आवश्यकताओं में फैला हुआ है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">जोखिम का स्वरूप अब और बहुस्तरीय हो गया है। </span><span lang="en-in" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in">2021 </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">से </span><span lang="en-in" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in">2025 </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">के बीच</span><span lang="en-in" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">चिकित्सा आपातकाल और दुर्घटनाओं समेत कारणों से </span><span lang="en-in" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in">49 </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">देशों में </span><span lang="en-in" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in">749 </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">भारतीय छात्रों की मृत्यु हुई। ये घटनाएँ दुखद हैं लेकिन व्यापक जोखिम का केवल एक हिस्सा हैं। बीमाकर्ता अब लंबी अस्पताल में भर्ती</span><span lang="en-in" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">यात्रा व्यवधान</span><span lang="en-in" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">मानसिक स्वास्थ्य संबंधी मामलों और शैक्षणिक रूकावटों से जुड़े दावों में वृद्धि देख रहे हैं—ऐसी घटनाएँ जो हमेशा सुर्खियों में नहीं आतीं</span><span lang="en-in" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">पर इनके गंभीर वित्तीय और भावनात्मक प्रभाव होते हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">मानसिक स्वास्थ्य एक बढ़ती चिंता बनकर उभरा है। शैक्षणिक दबाव</span><span lang="en-in" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">सांस्कृतिक समायोजन</span><span lang="en-in" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">अलगाव और परिवार से दूरी जल्दी जटिल समस्याओं का रूप ले सकती है। जब मानसिक स्वास्थ्य कारणों से अस्पताल भरती</span><span lang="en-in" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">पढ़ाई में ब्रेक या जल्दी वापसी हो</span><span lang="en-in" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">तो असर केवल चिकित्सा उपचार तक सीमित नहीं रहता</span><span lang="en-in" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in">; </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">यह शैक्षणिक निरंतरता</span><span lang="en-in" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">वीजा की स्थिति और दीर्घकालिक योजनाओं तक फैल जाता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">ऐसी स्थितियों के आर्थिक परिणाम महत्वपूर्ण होते हैं। विकसित देशों में अस्पताल में भर्ती होने के खर्च कई लाख रुपये तक पहुँच सकते हैं। गंभीर मामलों में मेडिकल इवैक्यूएशन (आपातकालीन चिकित्सा निकासी) का खर्च </span><span lang="en-in" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Arial, 'sans-serif';" xml:lang="en-in">₹</span><span lang="en-in" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in">50–80 </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">लाख से अधिक हो सकता है। जब बीमारी या पारिवारिक कारण पढ़ाई रोकने या छोड़ने पर मजबूर करें</span><span lang="en-in" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">तो पहले से दी गयी ट्यूशन फीस अक्सर वापस नहीं मिलती। परिवारों को तब भी मुश्किलें झेलनी पड़ सकती हैं जब कोई स्पॉन्सर बीच में सहायता करने में असमर्थ हो जाए। जैसे-जैसे छात्रों की विदेशी भागीदारी बढ़ रही है</span><span lang="en-in" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">ऐसे परिदृश्य अब अकेले अपवाद नहीं रह गए हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">फिर भी कई परिवार केवल वीजा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए या विश्वविद्यालय द्वारा दिए गए बेसिक इंश्योरेंस पर ही निर्भर रहते हैं। ये प्लान सीमित मेडिकल कवरेज दे सकते हैं</span><span lang="en-in" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">पर आज के व्यापक जोखिमों के लिए अक्सर अपर्याप्त होते हैं। आपातकालीन निकासी</span><span lang="en-in" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">पढ़ाई में रुकावट</span><span lang="en-in" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">स्पॉन्सर सुरक्षा</span><span lang="en-in" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">मानसिक स्वास्थ्य उपचार और यात्रा व्यवधानों के लिए कवरेज अक्सर सीमित या अनुपस्थित रहता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">इसलिए अब सवाल यह नहीं रहा कि बीमा है या नहीं</span><span lang="en-in" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">बल्कि यह है कि क्या वह पूरा कोर्स चलने तक पर्याप्त है</span><span lang="en-in" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">क्या वह उस गंतव्य के नियमों के अनुरूप है</span><span lang="en-in" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">और क्या वह उन गैर-चिकित्सा व्यवधानों को भी कवर करता है जो पढ़ाई भंग कर सकते हैं। नियामक आवश्यकताएँ भी जटिलता बढ़ाती हैं। कई देशों में वीजा या रेजिडेंसी के लिए लगातार कवरेज अनिवार्य है और विश्वविद्यालय अपने न्यूनतम मानक लागू कर सकते हैं—ये आवश्यकताएँ गंतव्य के हिसाब से काफी भिन्न हो सकती हैं। इसलिए परिवारों के लिए इन अंतरों को समझना जरूरी हो गया है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">स्वास्थ्य सेवाओं की असलियत इस अग्रिम तैयारी की जरूरत को और स्पष्ट करती है। यूरोप के कुछ हिस्सों में सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाएँ किफायती होती हैं</span><span lang="en-in" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">पर अक्सर वे रेफरल‑आधारित मॉडल पर काम करती हैं। इसके विपरीत अमेरिका जैसी निजी-प्रधान प्रणालियाँ तेज़ पहुँच देती हैं</span><span lang="en-in" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">पर कवरेज सीमा पार होने पर छात्रों को भारी खर्चों में डाल सकती हैं। दोनों ही मामलों में अपर्याप्त बीमा किसी स्वास्थ्य मुद्दे को तुरंत वित्तीय संकट में बदल सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">यह भी ध्यान दें कि छात्र इन मुश्किलों का काफी हद तक अकेले सामना करते हैं। परिवार से दूरी आपातकाल में तुरंत वित्तीय और लॉजिस्टिक मदद पहुँचाने में बाधा बनती है। ऐसे समय में बीमा तत्काल सहायता देने में अहम भूमिका निभाता है जब परिवार हजारों किलोमीटर दूर हों।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">बीमाकारों के अनुभव से आज के दावे अक्सर एक घटना तक सीमित नहीं रहते। एक चिकित्सा आपातकाल शैक्षणिक निरंतरता</span><span lang="en-in" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">यात्रा योजनाओं</span><span lang="en-in" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">वित्त और नियामक अनुपालन को एक साथ प्रभावित कर सकता है। टुकड़ों में या न्यूनतम कवरेज इस वास्तविकता से मेल नहीं खाती।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">माता‑पिता के लिए इसका मतलब है कि बीमा योजना को वे उसी गंभीरता और समयबद्धता से लें</span><span lang="en-in" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">जैसा वे विश्वविद्यालय के चुनाव और वित्तीय योजना के लिए करते हैं। कवरेज की जल्दी समीक्षा की जानी चाहिए</span><span lang="en-in" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">उसे पढ़ाई के स्थान और अवधि के अनुसार अनुकूलित करना चाहिए</span><span lang="en-in" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">और नियमित मेडिकल खर्चों के अलावा मानसिक स्वास्थ्य सहायता</span><span lang="en-in" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">पढ़ाई में अस्थायी रुकावट</span><span lang="en-in" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">आपातकालीन निकासी और स्पॉन्सर‑सम्बन्धी व्यवधान जैसे परिदृश्यों के लिए भी देखा जाना चाहिए। योजना के शुरुआत में सही सवाल पूछना बाद में बड़ा फर्क ला सकता है</span><span lang="en-in" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">ताकि कोई अप्रत्याशित घटना वर्षों की तैयारी और बलिदान को व्यर्थ न कर सके।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">अब आवश्यकता सोच में बदलाव की है। बीमा को केवल कागजी औपचारिकता न समझकर दीर्घकालिक और उच्च-मूल्य निवेश की सुरक्षा के रूप में देखा जाना चाहिए। जैसे‑जैसे भारतीय छात्रों की वैश्विक भागीदारी बढ़ेगी</span><span lang="en-in" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">हमारी तैयारी को भी अपनी आकांक्षा के अनुरूप विकसित करना होगा। यह सुनिश्चित करना कि तैयारी और उद्देश्य साथ‑साथ चलें</span><span lang="en-in" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="hi">विदेशी शिक्षा को न केवल सुलभ बल्कि वास्तव में टिकाऊ बनाना जरूरी होगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="en-in" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Arial Unicode MS', 'sans-serif';" xml:lang="en-in"> </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:center;" align="center"> </p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 11:58:02 +0530</pubDate>
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