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                <title>बिजनेस - दैनिक जागरण</title>
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                <description>बिजनेस RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>वेदांता ने नवीकरणीय ऊर्जा अपनाने में 50% से अधिक बढ़ोतरी की, वित्त वर्ष 2026 में 30 लाख टन सीओ₂ उत्सर्जन घटाया</title>
                                    <description><![CDATA[विश्व पृथ्वी दिवस के अवसर पर, वेदांता लिमिटेड (एनएसई: वीईडीएल), जो भारत की प्रमुख मेटल्स, ऑयल एंड गैस, क्रिटिकल मिनरल्स, पावर और टेक्नोलॉजी कंपनी है, ने घोषणा की कि वित्त वर्ष 2026 में उसके नवीकरणीय ऊर्जा उपयोग में पिछले वर्ष की तुलना में 50% से अधिक वृद्धि होकर 3.97 बिलियन यूनिट (बीयू) हो गई है। इस दौरान कंपनी ने 30 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन से बचाव किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/vedanta-increases-adoption-of-renewable-energy-by-more-than-50/article-51944"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/vedanta.jpg" alt=""></a><br /><p>वेदांता का रणनीतिक धातुओं और क्रिटिकल मिनरल्स का पोर्टफोलियो उन्नत मैन्युफैक्चरिंग, वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन और क्लीन टेक को आगे बढ़ाने में मदद कर रहा है। एल्युमिनियम हल्के और ऊर्जा-कुशल परिवहन तथा बिजली ट्रांसमिशन को समर्थन देता है, वहीं कॉपर विद्युतिकरण और पवन टर्बाइन जैसी नवीकरणीय अवसंरचना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सिल्वर सोलर फोटोवोल्टिक में अनिवार्य है। आयरन, स्टील और जिंक ऊर्जा अवसंरचना की मजबूत नींव बने हुए हैं, जबकि पावर और ऑयल एंड गैस ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं, जब तक नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन मांग के अनुसार तेजी से बढ़ रहा है।</p>
<p>वेदांता के एकीकृत संचालन और नवाचार पर ध्यान देश की इंडस्ट्री को ऐसे ट्रांज़िशन मटेरियल्स की भरोसेमंद उपलब्धता सुनिश्चित कर रहे हैं, जो लो-कार्बन तकनीकों और हरित अर्थव्यवस्था के लिए बेहद जरूरी हैं।</p>
<p>कंपनी अपनी नेट ज़ीरो यात्रा में लगातार ठोस प्रगति कर रही है। उसने मेटल्स इंटेंसिटी में 15% की कमी की है — जो वित्त वर्ष 2021 के 6.45 tCO₂e/tm के बेसलाइन से घटकर वित्त वर्ष 2026 में 5.44 tCO₂e/tm हो गई है। यह परिचालन दक्षता को दर्शाता है। वेदांता ने वैकल्पिक ईंधन के रूप में 365 किलो टन बायोमास का भी उपयोग किया है, जिससे अनुमानित 5 से 6 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आई है। इसके साथ ही, कंपनी ने अपने विभिन्न व्यवसायों में जल संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण प्रगति की है। हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड, केर्न ऑयल एंड गैस और इसके आयरन ओर बिज़नेस ने नेट वॉटर पॉज़िटिव स्थिति हासिल की है, जो मुख्य संचालन में स्थिरता को शामिल करने की इसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।</p>
<p>अपने संचालन से आगे बढ़कर, वेदांता समुदायों, संस्थानों और सरकारों के साथ साझेदारी कर जमीनी स्तर पर जलवायु कार्रवाई को बढ़ावा दे रहा है, साथ ही पर्यावरण संरक्षण को समावेशी और दीर्घकालिक सामुदायिक विकास के साथ जोड़ रहा है।</p>
<p>वेदांता के सस्टेनेबिलिटी प्रदर्शन को वैश्विक स्तर पर लगातार मान्यता मिल रही है, जिसकी प्रमुख उपलब्धियों में शामिल हैं:</p>
<p>लीडरशिप और रैंकिंग: हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड ने एसएंडपी ग्लोबल सस्टेनेबिलिटी ईयरबुक 2026 में दुनिया में #1 रैंक हासिल की, जबकि वेदांता ग्रुप लगातार तीसरे साल इस ईयरबुक में शामिल हुआ। वेदांता एल्युमिनियम भी एसएंडपी सस्टेनेबिलिटी ईयरबुक 2026 में दुनिया की टॉप 10 कंपनियों में शामिल रहा, जो उसके मजबूत वैश्विक ईएसजी प्रदर्शन को दर्शाता है।<br />वैश्विक मानक और प्रमाणन: हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड अंतरराष्ट्रीय काउंसिल ऑन माइनिंग एंड मेटल्स (आईसीएमएम) में शामिल होने वाली पहली भारतीय माइनिंग कंपनी बनी, जो वैश्विक सर्वोत्तम मानकों के अनुरूप एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इसे बिज़नेस रिस्पॉन्सिबिलिटी और सस्टेनेबिलिटी रिपोर्टिंग में उत्कृष्टता के लिए आईसीएआई सस्टेनेबिलिटी रिपोर्टिंग अवॉर्ड भी मिला। वहीं, वेदांता ने सीडीपी वाटर स्कोर A- और सप्लायर एंगेजमेंट रेटिंग A- हासिल कर अपने ईएसजी प्रदर्शन को और मजबूत किया। ईएसएल स्टील के वी-ज़ेगा टीएमटी बार्स को ग्रीनप्रो सर्टिफिकेशन मिला, जबकि केर्न ऑयल एंड गैस ने ऑयल एंड गैस मीथेन पार्टनरशिप 2.0 के तहत “गोल्ड स्टैंडर्ड पाथवे” हासिल किया। </p>
<p>उत्पाद और संचालन उत्कृष्टता: वेदांता एल्युमिनियम ने बाल्को में “रेस्टोरा” के साथ अपने लो-कार्बन ‘ग्रीन’ एल्युमिनियम पोर्टफोलियो का विस्तार किया। वहीं, आयरन ओर बिज़नेस को फेडरेशन ऑफ इंडियन मिनरल इंडस्ट्रीज़ द्वारा बेहतरीन ईएसजी प्रथाओं के लिए सम्मानित किया गया, जो जिम्मेदार संचालन और टिकाऊ उत्पाद नवाचार में निरंतर प्रगति को दर्शाता है।</p>
<p>जैसे-जैसे दुनिया जलवायु परिवर्तन की गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है, वेदांता अपनी रणनीति के केंद्र में सस्टेनेबिलिटी को शामिल करने के लिए प्रतिबद्ध है—जिम्मेदार विकास को आगे बढ़ाते हुए, हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग और ऊर्जा परिवर्तन को सक्षम बनाते हुए, और सभी हितधारकों के लिए दीर्घकालिक मूल्य सृजन कर रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 17:45:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[दैनिक जागरण]]></dc:creator>
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                <title>डेवलपर मनसुख शाह और पुत्र आकाश शाह की अग्रिम जमानत याचिका खारिज</title>
                                    <description><![CDATA[20 अप्रैल, 2026 को दिंडोशी सत्र न्यायालय ने डेवलपर द्वारा दायर अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। न्यायाधीश हाउसकॉन से जुड़े डेवलपर मनसुख शाह की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/anticipatory-bail-plea-of-developer-mansukh-shah-and-son-akash/article-51942"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/developer-mansukh-shah-and-son-akash-shah&#039;s-anticipatory-bail-application-rejected-(1).jpg" alt=""></a><br /><p>आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने मनसुख शाह और उनके बेटे आकाश शाह के खिलाफ मामला दर्ज किया है। उन पर एक व्यवसायी को पुनर्विकास परियोजना में ₹5.15 करोड़ का निवेश करने के लिए प्रेरित करने का आरोप है। समझौता ज्ञापन (MoU) के माध्यम से, उन्होंने उच्च रिटर्न का वादा किया और मलाड में एक संपत्ति पर विकास अधिकार होने का झूठा दावा किया। हालांकि, बाद में उन्होंने कथित तौर पर अनुबंध की शर्तों को पूरा नहीं किया।</p>
<p>मनसुख और आकाश शाह ने सत्र न्यायालय में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन किया था। गिरफ्तारी से बचने के लिए दोनों ने उच्च न्यायालय का भी दरवाजा खटखटाया था। शिकायतकर्ता-निवेशक, जिनका प्रतिनिधित्व अधिवक्ता आबाद पोंडा और सुवर्णा वास्त कर रहे थे, ने इस आवेदन का कड़ा विरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि इस मामले में राहत देना—जबकि उनकी जमानत याचिका पहले से ही सत्र न्यायालय में लंबित थी—एक गलत मिसाल कायम करेगा।</p>
<p>यह मामला धोखाधड़ी की एक FIR से जुड़ा है, जो शुरू में कस्तूरबा मार्ग पुलिस स्टेशन में शाह हाउसकॉन के खिलाफ दर्ज की गई थी। आगे की जांच के लिए मामला बाद में EOW को स्थानांतरित कर दिया गया।</p>
<p>FIR के अनुसार, 6 मई, 2025 को एक टर्म शीट पर हस्ताक्षर किए गए, उसके बाद 17 मई, 2025 को एक MoU और 16 जुलाई, 2025 को एक पूरक MoU पर हस्ताक्षर किए गए। ये समझौते 5,600 वर्ग मीटर के प्लॉट के विकास के लिए किए गए थे, जिसमें 4.5 लाख वर्ग फुट का प्रस्तावित बिक्री घटक शामिल था।</p>
<p>शाह हाउसकॉन महत्वपूर्ण पुनर्विकास गतिविधियों को पूरा करने में विफल रहा, जैसे कि रहने वालों को हटाना, स्पष्ट स्वामित्व स्थापित करना और संबंधित हितधारकों के साथ समन्वय करना। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि भूमि के विकास अधिकारों के बारे में भ्रामक जानकारी दी गई, क्योंकि भूमि का स्वामित्व कथित तौर पर एक धर्मार्थ ट्रस्ट के पास था।</p>
<p>शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपी ने उसी प्लॉट के लिए अन्य डेवलपर्स के साथ समानांतर समझौते किए, उनसे बड़ी रकम वसूली, और बाद में अतिरिक्त ₹25 करोड़ की मांग की। जब इस मांग को अस्वीकार कर दिया गया, तो कथित तौर पर धमकियां दी गईं और समझौतों को समाप्त करने के नोटिस भेजे गए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 17:37:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[दैनिक जागरण]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सेंसेक्स 852 अंक गिरकर 77,664 पर बंद, निफ्टी 24,173 पर</title>
                                    <description><![CDATA[शेयर बाजार गिरावट में ऑटो और बैंकिंग सेक्टर दबाव में, सेंसेक्स में भारी बिकवाली शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। ग्लोबल तनाव और विदेशी निवेशकों की बिकवाली से बाजार दबाव में दिखा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/sensex-fell-852-points-and-closed-at-77664-nifty-closed/article-51936"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/business---2026-04-23t155915.807.jpg" alt=""></a><br /><p>भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार, 23 अप्रैल को बड़ी गिरावट दर्ज की गई। <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">BSE Sensex</span></span> 852 अंकों यानी 1.09% की गिरावट के साथ 77,664 पर बंद हुआ, जबकि <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Nifty 50</span></span> 205 अंक फिसलकर 24,173 के स्तर पर आ गया। दिनभर के कारोबार में बाजार पर दबाव बना रहा, जिसमें खासकर ऑटो और सरकारी बैंकिंग शेयरों में तेज बिकवाली देखने को मिली।</p>
<p>विशेषज्ञों के मुताबिक, वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने बाजार की धारणा को कमजोर किया है। हालांकि फार्मा और मीडिया सेक्टर में सीमित खरीदारी ने गिरावट को कुछ हद तक थामने की कोशिश की।</p>
<h5><strong>ग्लोबल असर बढ़ा</strong></h5>
<p>रिपोर्ट्स के अनुसार, <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Donald Trump</span></span> द्वारा सीजफायर की समयसीमा बढ़ाने के बावजूद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम नहीं हुआ है। अमेरिकी नौसेना की ओर से ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी जारी है, जबकि ईरान ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में जहाजों को कब्जे में लिया है।</p>
<p>इस घटनाक्रम से वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ी है, जिसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी साफ दिखाई दिया। निवेशकों में जोखिम लेने की क्षमता घटी है और वे सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर झुकाव दिखा रहे हैं।</p>
<h5><strong>सेक्टरवार स्थिति</strong></h5>
<p>आज के कारोबार में ऑटो सेक्टर में सबसे ज्यादा दबाव रहा, जबकि सरकारी बैंकिंग शेयर भी गिरावट में रहे। इसके उलट फार्मा और मीडिया शेयरों में हल्की खरीदारी देखी गई, जिससे बाजार को सीमित सहारा मिला।</p>
<p>एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख रहा, जहां कुछ इंडेक्स में तेजी और कुछ में गिरावट दर्ज की गई। वहीं, 22 अप्रैल को अमेरिकी बाजारों में बढ़त देखने को मिली थी, लेकिन उसका सकारात्मक असर भारतीय बाजार पर नहीं दिखा।</p>
<p>बुधवार, 22 अप्रैल को भी बाजार में गिरावट दर्ज की गई थी, जब सेंसेक्स 757 अंक और निफ्टी 199 अंक नीचे बंद हुए थे। लगातार दो दिन की गिरावट ने बाजार की दिशा को लेकर अनिश्चितता बढ़ा दी है।</p>
<p>आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने 22 अप्रैल को करीब 2,000 करोड़ रुपए के शेयर बेचे। वहीं इस महीने अब तक कुल 44,000 करोड़ रुपए से ज्यादा की बिकवाली हो चुकी है।विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में उछाल भी बाजार के लिए चिंता का विषय है। ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है, जिससे महंगाई और आयात लागत बढ़ने की आशंका है। इसका असर आने वाले दिनों में कॉर्पोरेट मुनाफे और बाजार की चाल पर पड़ सकता है।</p>
<p>विश्लेषकों के मुताबिक, जब तक वैश्विक तनाव कम नहीं होता और विदेशी निवेशकों की बिकवाली थमती नहीं है, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 16:01:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[ANKITA ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सोना 927 गिरा, 1.51 लाख पर; चांदी 4,700 सस्ती</title>
                                    <description><![CDATA[सोना-चांदी की कीमतों में गिरावट के बावजूद 2026 में अब तक सोना महंगा; निवेशकों की नजर बाजार पर आज के बाजार में सोना-चांदी के दामों में आई गिरावट ने निवेशकों और खरीदारों का ध्यान खींचा है। हालांकि सालाना रुझान अभी भी तेजी का संकेत दे रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/gold-fell-by-927-rupees-and-silver-became-cheaper-by/article-51919"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/business---2026-04-23t142059.885.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई में आज जारी आंकड़ों के मुताबिक, सोना-चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन</span></span> के अनुसार, 24 कैरेट सोना 927 रुपए सस्ता होकर 10 ग्राम के लिए ₹1.51 लाख पर पहुंच गया। एक दिन पहले इसकी कीमत ₹1.52 लाख थी। वहीं, चांदी की कीमत में भी बड़ी गिरावट दर्ज हुई है और यह ₹4,700 घटकर ₹2.43 लाख प्रति किलो पर आ गई है।</p>
<h5><strong>बाजार में ताजा उतार-चढ़ाव</strong></h5>
<p>कीमतों में यह गिरावट ऐसे समय आई है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी धातुओं के दामों में अस्थिरता बनी हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक आर्थिक संकेतों और डॉलर की मजबूती का असर घरेलू बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है।</p>
<p>पिछले कुछ दिनों से सोने-चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है, जिससे निवेशक सतर्क रुख अपनाए हुए हैं। ज्वेलरी खरीदने वालों के लिए यह गिरावट कुछ राहत लेकर आई है।</p>
<h5><strong>सालभर में अब भी बढ़त</strong></h5>
<p>हालांकि, ताजा गिरावट के बावजूद 2026 में सोना अब तक मजबूत स्थिति में बना हुआ है। 31 दिसंबर 2025 को 10 ग्राम सोने की कीमत ₹1.33 लाख थी, जो अब बढ़कर ₹1.51 लाख तक पहुंच चुकी है। यानी इस साल अब तक करीब ₹18 हजार की बढ़त दर्ज की गई है।</p>
<p>इसी तरह चांदी भी साल की शुरुआत से अब तक करीब ₹13 हजार महंगी हुई है। हालांकि अपने उच्चतम स्तर से दोनों धातुएं अभी नीचे कारोबार कर रही हैं।</p>
<p>रिपोर्ट्स के अनुसार, जनवरी 2026 में सोने ने ₹1.76 लाख और चांदी ने ₹3.86 लाख का रिकॉर्ड स्तर छुआ था। इसके बाद से बाजार में करेक्शन देखा जा रहा है।</p>
<h5><strong>खरीदारों के लिए सलाह</strong></h5>
<p>ज्वेलरी खरीदने से पहले ग्राहकों को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक, हमेशा हॉलमार्क वाला प्रमाणित सोना ही खरीदना चाहिए। इसके अलावा खरीदारी के दिन की कीमत अलग-अलग स्रोतों से जांचना जरूरी है।चांदी खरीदते समय भी उसकी शुद्धता की जांच के लिए सरल घरेलू तरीके अपनाए जा सकते हैं, जैसे मैग्नेट या आइस टेस्ट।</p>
<p>विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले समय में सोने-चांदी की कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। वैश्विक आर्थिक हालात, ब्याज दरें और भू-राजनीतिक तनाव इनकी दिशा तय करेंगे।फिलहाल, सोना-चांदी की कीमतों में आई यह गिरावट बाजार में अस्थायी मानी जा रही है। ऐसे में निवेशक और खरीदार दोनों ही आने वाले दिनों के संकेतों पर नजर बनाए हुए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 14:21:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[ANKITA ]]></dc:creator>
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                <title>एटीएफ में एथेनॉल ब्लेंडिंग को मंजूरी, तेल आयात घटेगा</title>
                                    <description><![CDATA[एथेनॉल ब्लेंडिंग से एविएशन सेक्टर होगा स्वच्छ, सरकार ने ATF नियमों में किया बदलाव एविएशन सेक्टर में बड़ा बदलाव हुआ है। सरकार के इस फैसले से पर्यावरण और अर्थव्यवस्था दोनों पर असर पड़ेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/ethanol-blending-approved-in-atf-oil-import-will-reduce/article-51882"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/business---2026-04-23t095101.209.jpg" alt=""></a><br /><p>केंद्र सरकार ने एविएशन सेक्टर में प्रदूषण कम करने और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाने के उद्देश्य से बड़ा फैसला लिया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) में एथेनॉल ब्लेंडिंग को मंजूरी दे दी है। इसके लिए ATF मार्केटिंग नियमों में संशोधन किया गया है। इस फैसले के तहत अब विमान ईंधन में हाइड्रोकार्बन के साथ एथेनॉल जैसे सिंथेटिक घटकों को भी मिलाया जा सकेगा। सरकार का मानना है कि इससे न केवल पर्यावरण को लाभ होगा, बल्कि देश की विदेशी मुद्रा पर दबाव भी कम होगा। यह कदम सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF) को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>
<h5><strong>क्या बदला नियमों में</strong></h5>
<p>सरकार द्वारा जारी नोटिफिकेशन के अनुसार, एविएशन टर्बाइन फ्यूल की परिभाषा में बदलाव किया गया है। अब ATF में पारंपरिक ईंधन के साथ-साथ एथेनॉल जैसे वैकल्पिक घटकों को शामिल करने की अनुमति दी गई है।अधिकारियों के अनुसार, यह बदलाव अंतरराष्ट्रीय मानकों को ध्यान में रखते हुए किया गया है, जहां सस्टेनेबल फ्यूल की मांग तेजी से बढ़ रही है।</p>
<h5><strong>तेल आयात पर असर</strong></h5>
<p>भारत वर्तमान में अपनी जरूरत का लगभग 87% कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में वैश्विक बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।रिपोर्ट्स के मुताबिक, एथेनॉल ब्लेंडिंग से तेल की खपत कम होगी, जिससे आयात घटेगा और विदेशी मुद्रा की बचत संभव होगी।यह कदम ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में भी अहम माना जा रहा है।</p>
<h5><strong>गडकरी का बयान</strong></h5>
<p>केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनना जरूरी है।उन्होंने कहा कि भविष्य में देश को 100% एथेनॉल ब्लेंडिंग का लक्ष्य रखना चाहिए, जिससे जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता पूरी तरह खत्म की जा सके।गडकरी पहले भी फ्लेक्स-फ्यूल और ग्रीन हाइड्रोजन को बढ़ावा देने पर जोर देते रहे हैं।</p>
<h5><strong>SAF क्या है</strong></h5>
<p>सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF) एक वैकल्पिक ईंधन है, जिसे कचरे, कृषि अवशेष और इस्तेमाल किए गए तेल से तैयार किया जाता है।</p>
<p>विशेषज्ञों के अनुसार, SAF का उपयोग करने के लिए विमानों के इंजन में बड़े बदलाव की जरूरत नहीं होती। यह पारंपरिक ईंधन की तुलना में कार्बन उत्सर्जन को काफी कम करता है।सरकार का यह कदम आने वाले समय में एविएशन सेक्टर में बड़े बदलाव की शुरुआत माना जा रहा है।</p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि यदि एथेनॉल ब्लेंडिंग को बड़े स्तर पर लागू किया जाता है, तो इससे भारत की ऊर्जा नीति और पर्यावरणीय लक्ष्य दोनों को मजबूती मिलेगी।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 09:52:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[ANKITA ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सेंसेक्स 700 अंक टूटा, निफ्टी 24,200 से नीचे; ऑटो शेयरों में बिकवाली</title>
                                    <description><![CDATA[शेयर बाजार में गिरावट, आज सेंसेक्स और निफ्टी दोनों दबाव में, ऑटो सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावितशेयर बाजार में आज लगातार दूसरे दिन गिरावट देखने को मिली। निवेशकों में सतर्कता का माहौल बना हुआ है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/sensex-falls-700-points-nifty-below-24200-selling-in-auto/article-51880"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/business---2026-04-23t093523.039.jpg" alt=""></a><br /><p>भारतीय शेयर बाजार में आज 23 अप्रैल 2026 को गिरावट का रुख देखने को मिल रहा है। सेंसेक्स करीब 700 अंकों की गिरावट के साथ 77,800 के स्तर पर कारोबार कर रहा है, जबकि निफ्टी भी 200 अंक टूटकर 24,200 के नीचे आ गया है। शुरुआती कारोबार से ही बाजार में दबाव बना हुआ है, जिसमें ऑटो सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली देखने को मिल रही है। वैश्विक संकेत भी कमजोर बने हुए हैं, जिससे निवेशकों का रुख सतर्क बना हुआ है। लगातार दूसरे दिन आई इस गिरावट ने बाजार की दिशा को लेकर अनिश्चितता बढ़ा दी है।</p>
<h5><strong>बाजार में गिरावट का रुख</strong></h5>
<p>आज के कारोबार में लगभग सभी प्रमुख सेक्टरों में दबाव देखने को मिला, लेकिन ऑटो शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली दर्ज की गई।विशेषज्ञों के मुताबिक, निवेशक फिलहाल मुनाफावसूली कर रहे हैं और वैश्विक बाजारों से मिल रहे कमजोर संकेतों का असर भारतीय बाजार पर भी दिखाई दे रहा है।</p>
<h5><strong>एशियाई बाजारों का असर</strong></h5>
<p>एशियाई बाजारों में भी आज गिरावट का रुख देखने को मिला है।जापान का निक्केई, हॉन्गकॉन्ग का हैंगसेंग और दक्षिण कोरिया का कोस्पी—all प्रमुख इंडेक्स लाल निशान में कारोबार कर रहे हैं।रिपोर्ट्स के अनुसार, वैश्विक बाजारों में आई इस कमजोरी का सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर पड़ा है।</p>
<h5><strong>अमेरिकी बाजार से मिले मिश्रित संकेत</strong></h5>
<p>बुधवार को अमेरिकी बाजारों में तेजी दर्ज की गई थी।डाउ जोन्स, नैस्डैक और S&amp;P 500 में बढ़त देखने को मिली, जिससे शुरुआती उम्मीदें बनी थीं। हालांकि एशियाई बाजारों की कमजोरी ने उस सकारात्मकता को कमजोर कर दिया।</p>
<h5><strong>पिछले कारोबारी दिन का हाल</strong></h5>
<p>22 अप्रैल को भी भारतीय बाजार में गिरावट दर्ज की गई थी।सेंसेक्स 757 अंक गिरकर 78,516 पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 199 अंक टूटकर 24,378 के स्तर पर आ गया था।लगातार दूसरे दिन की गिरावट से बाजार में अस्थिरता का संकेत मिल रहा है।</p>
<hr />
<h5><strong>निवेशकों के लिए संकेत</strong></h5>
<p>बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस समय निवेशकों को सतर्कता के साथ निवेश करने की सलाह दी जा रही है।छोटे निवेशकों को जल्दबाजी में फैसले लेने से बचना चाहिए और बाजार की दिशा स्पष्ट होने का इंतजार करना बेहतर माना जा रहा है।आने वाले कारोबारी सत्रों में वैश्विक संकेत, कच्चे तेल की कीमतें और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां बाजार की दिशा तय कर सकती हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 09:38:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[ANKITA ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शेयर बाजार में गिरावट: सेंसेक्स 757 अंक लुढ़का, निफ्टी भी फिसला</title>
                                    <description><![CDATA[आईटी शेयरों में भारी बिकवाली से बाजार दबाव में, विदेशी निवेशकों की निकासी जारी भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को गिरावट देखने को मिली। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में बंद हुए, जबकि आईटी सेक्टर में सबसे ज्यादा दबाव रहा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/fall-in-stock-market-sensex-fell-by-757-points-nifty/article-51865"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/business---2026-04-22t161716.772.jpg" alt=""></a><br /><p>शेयर बाजार में 22 अप्रैल को कारोबार के दौरान कमजोरी देखने को मिली। दिन के अंत में प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 757 अंक गिरकर 78,516 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी भी 199 अंक टूटकर 24,378 पर आ गया। बाजार में यह गिरावट मुख्य रूप से आईटी शेयरों में भारी बिकवाली के चलते देखी गई।</p>
<p>दिनभर के कारोबार में FMCG और मीडिया सेक्टर के कुछ शेयरों में खरीदारी जरूर देखने को मिली, लेकिन आईटी सेक्टर की कमजोरी ने पूरे बाजार पर दबाव बनाए रखा। निवेशकों ने इस दौरान सतर्क रुख अपनाया।</p>
<p>एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख देखने को मिला। दक्षिण कोरिया का कोस्पी और जापान का निक्केई इंडेक्स हल्की बढ़त के साथ बंद हुए, जबकि हांगकांग का हैंगसेंग इंडेक्स में गिरावट दर्ज की गई।</p>
<p>अमेरिकी बाजारों में भी पिछले सत्र में कमजोरी रही थी। डाउ जोन्स, नैस्डैक और एसएंडपी 500 तीनों ही प्रमुख इंडेक्स में हल्की गिरावट दर्ज की गई थी, जिसका असर एशियाई और भारतीय बाजारों पर भी देखने को मिला।</p>
<p>विदेशी निवेशकों (FIIs) की बिकवाली भी बाजार पर दबाव का एक बड़ा कारण रही। मंगलवार को उन्होंने करीब 1,919 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए। इससे पहले भी लगातार बिकवाली देखने को मिली थी, जिससे बाजार की धारणा कमजोर बनी हुई है।</p>
<p>बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार विदेशी निवेशकों की निकासी और वैश्विक संकेतों की अनिश्चितता से निकट भविष्य में बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।</p>
<p>तकनीकी स्तर पर निफ्टी के लिए 23,940 से 24,000 का स्तर अहम सपोर्ट माना जा रहा है, जबकि ऊपर की ओर 24,400 से 24,650 के बीच मजबूत रेजिस्टेंस देखने को मिल सकता है।</p>
<p>विश्लेषकों का कहना है कि जब तक बाजार इन स्तरों को पार नहीं करता, तब तक स्पष्ट तेजी या गिरावट का रुझान बनना मुश्किल है। फिलहाल निवेशकों को सावधानी के साथ ट्रेडिंग करने की सलाह दी जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 16:18:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[ANKITA ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सोना-चांदी के दाम गिरे, 24 कैरेट गोल्ड 1.52 लाख पर आया</title>
                                    <description><![CDATA[IBJA के अनुसार सोना ₹105 और चांदी ₹836 सस्ती, फिर भी सालभर में बड़ी तेजी कीमती धातुओं के बाजार में आज हल्की राहत देखने को मिली है, हालांकि सालभर के ट्रेंड में अब भी मजबूती बनी हुई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/gold-and-silver-prices-fell-24-carat-gold-came-at/article-51856"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/business---2026-04-22t152928.407.jpg" alt=""></a><br /><p>देश में सोना-चांदी के दामों में 22 अप्रैल को गिरावट दर्ज की गई है। <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन</span></span> (IBJA) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 105 रुपए गिरकर 1,52,250 रुपए पर पहुंच गया है। इससे एक दिन पहले इसकी कीमत 1,52,355 रुपए प्रति 10 ग्राम थी।</p>
<p>वहीं चांदी की कीमत में भी नरमी देखी गई है। एक किलो चांदी 836 रुपए सस्ती होकर 2,49,677 रुपए पर आ गई है, जबकि पिछले कारोबारी दिन यह 2,50,513 रुपए प्रति किलो पर थी।</p>
<p>कीमतों में यह गिरावट ऐसे समय आई है जब पिछले कुछ महीनों में सोना-चांदी में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय संकेतों और घरेलू मांग के आधार पर कीमतों में रोजाना बदलाव हो रहा है।</p>
<p>दिलचस्प बात यह है कि मौजूदा गिरावट के बावजूद इस साल सोना और चांदी दोनों ने निवेशकों को मजबूत रिटर्न दिया है। साल 2026 की शुरुआत में 10 ग्राम सोना करीब 1.33 लाख रुपए था, जो अब बढ़कर 1.52 लाख रुपए के स्तर पर पहुंच चुका है। यानी अब तक इसमें लगभग 19 हजार रुपए की तेजी आई है।</p>
<p>इसी तरह चांदी भी साल की शुरुआत में करीब 2.30 लाख रुपए प्रति किलो थी, जो अब 2.50 लाख रुपए के आसपास कारोबार कर रही है। इस दौरान इसमें करीब 20 हजार रुपए की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।</p>
<p>बाजार के जानकार बताते हैं कि अलग-अलग शहरों में सोने की कीमतों में अंतर कई वजहों से होता है। इसमें ट्रांसपोर्टेशन और सुरक्षा लागत, स्थानीय मांग-सप्लाई, ज्वेलर्स का स्टॉक और खरीद मूल्य जैसे कारक शामिल होते हैं। दक्षिण भारत जैसे क्षेत्रों में अधिक मांग के कारण कीमतों पर अलग असर पड़ता है।</p>
<p>सरकार के हालिया फैसलों का भी बाजार पर असर देखने को मिल रहा है। विदेशी ज्वेलरी के आयात को अब ‘रिस्ट्रिक्टेड’ कैटेगरी में डाल दिया गया है। इसके तहत सोना, चांदी और प्लेटिनम से बने आभूषण आयात करने के लिए विशेष लाइसेंस लेना जरूरी होगा। अधिकारियों के मुताबिक, यह कदम फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के दुरुपयोग को रोकने के लिए उठाया गया है।</p>
<p>कुल मिलाकर, भले ही आज बाजार में थोड़ी गिरावट आई हो, लेकिन लंबी अवधि में सोना-चांदी अभी भी निवेश के मजबूत विकल्प बने हुए हैं। आने वाले दिनों में वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां और सरकारी नीतियां इनके भाव को प्रभावित करती रहेंगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 15:31:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[ANKITA ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अजय बंगा बोले- गरीबी मिटाने का सबसे असरदार तरीका नौकरी</title>
                                    <description><![CDATA[वर्ल्ड बैंक प्रमुख ने युवाओं को DQ अपनाने और स्किल्स बढ़ाने की सलाह दी रोजगार के बिना गरीबी खत्म करना संभव नहीं—यह साफ संदेश वर्ल्ड बैंक के अध्यक्ष ने दिया।युवाओं, अर्थव्यवस्था और भविष्य को लेकर उनकी बातों ने नीति बहस को नई दिशा दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/ajay-banga-said-job-is-the-most-effective-way/article-51801"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/business---2026-04-22t090447.901.jpg" alt=""></a><br /><p><span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">अजय बंगा</span></span> ने कहा है कि विकासशील देशों में गरीबी कम करने का सबसे प्रभावी तरीका बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन है। ब्रोकरेज फर्म ज़ेरोधा के सह-संस्थापक <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">निखिल कामथ</span></span> के साथ एक डिजिटल बातचीत में उन्होंने वैश्विक अर्थव्यवस्था, भारत की प्रगति और युवाओं की चुनौतियों पर विस्तार से विचार रखे। बंगा ने कहा कि केवल संसाधनों का पुनर्वितरण नहीं, बल्कि अवसरों का विस्तार जरूरी है, ताकि लोग स्थायी आय के जरिए अपने जीवन स्तर को बेहतर बना सकें।</p>
<p>उन्होंने चेतावनी दी कि आने वाले 15 वर्षों में उभरते बाजारों में करीब 120 करोड़ युवा कामकाजी उम्र में पहुंचेंगे, जबकि मौजूदा रफ्तार से केवल 40 करोड़ नौकरियां ही बन पाएंगी। यह बड़ा अंतर आर्थिक असंतुलन और सामाजिक तनाव का कारण बन सकता है।</p>
<h5><span><strong>रोजगार ही समाधान</strong></span></h5>
<p>बंगा ने कहा कि नौकरी केवल आय का स्रोत नहीं, बल्कि सामाजिक स्थिरता और आत्मविश्वास का आधार भी है।<br />उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार को मजबूत नीतियां और इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना चाहिए, जबकि रोजगार सृजन में निजी क्षेत्र, खासकर छोटे और मध्यम उद्योगों की अहम भूमिका है।उनके मुताबिक, “पानी का स्तर बढ़ाने” जैसा मॉडल अपनाना चाहिए, जिसमें समग्र विकास से सभी वर्गों को फायदा पहुंचे।</p>
<h5><span><strong>भारत पर भरोसा</strong></span></h5>
<p>भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर बंगा ने सकारात्मक रुख जताया।उन्होंने कहा कि पिछले दो दशकों में देश के इंफ्रास्ट्रक्चर—सड़क, बिजली, बंदरगाह और बुनियादी सुविधाओं—में बड़ा सुधार हुआ है, जिससे मध्यम वर्ग का विस्तार हुआ है।</p>
<p>हालांकि, उन्होंने पर्यटन क्षेत्र में अपेक्षित वृद्धि न होने को एक छूटा हुआ अवसर बताया। उनके अनुसार, भारत की सांस्कृतिक विविधता और प्राकृतिक संसाधनों के बावजूद विदेशी पर्यटकों की संख्या अभी भी संभावनाओं से कम है।</p>
<h5><span><strong>DQ बना नई सफलता का पैमाना</strong></span></h5>
<p>बंगा ने युवाओं के लिए IQ और EQ के साथ DQ (Decency Quotient) को जरूरी बताया।उन्होंने कहा कि आज के समय में शालीनता, ईमानदारी और दूसरों के प्रति सम्मान ही असली नेतृत्व की पहचान बनते जा रहे हैं।उनके अनुसार, ऐसे गुण टीम वर्क को मजबूत करते हैं और लंबे समय तक सफलता बनाए रखने में मदद करते हैं।</p>
<h5><span><strong>तकनीक और रोजगार</strong></span></h5>
<p>आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर उन्होंने संतुलित दृष्टिकोण रखा।बंगा ने कहा कि विकसित देशों में यह कुछ क्षेत्रों के लिए चुनौती हो सकता है, लेकिन भारत जैसे देशों में ‘स्मॉल AI’ बड़े अवसर पैदा कर सकता है, खासकर कृषि और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में।रिपोर्ट्स के अनुसार, सही स्किल्स के साथ तकनीक को अपनाया जाए तो यह रोजगार बढ़ाने में भी मददगार हो सकती है।</p>
<h3> </h3>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 09:06:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[ANKITA ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विदेशी ऑटो पेमेंट पर RBI सख्त, 24 घंटे पहले मिलेगा अलर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[ ई-मेंडेट नियम बदले, यूजर को मिलेगा ज्यादा कंट्रोल अब विदेशी ऐप्स के ऑटोमैटिक पेमेंट पर यूजर्स की पकड़ मजबूत होगी। पेमेंट से पहले नोटिफिकेशन और रोकने का विकल्प, डिजिटल सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/rbi-strict-on-foreign-auto-payment-alert-will-be-received/article-51799"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/business---2026-04-22t085607.026.jpg" alt=""></a><br /><p>भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने विदेशी कंपनियों को किए जाने वाले ऑटोमैटिक पेमेंट (ई-मेंडेट) से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है। नए नियमों के तहत अब यूजर्स को किसी भी विदेशी सर्विस—जैसे ओटीटी प्लेटफॉर्म या ऐप सब्सक्रिप्शन—के लिए होने वाले ऑटो-डेबिट से 24 घंटे पहले अनिवार्य रूप से नोटिफिकेशन मिलेगा। यह कदम डिजिटल ट्रांजैक्शन में पारदर्शिता बढ़ाने और यूजर्स को धोखाधड़ी से बचाने के उद्देश्य से उठाया गया है।</p>
<p>RBI के इस सरकारी अपडेट के अनुसार, अब हर ऑटो-पेमेंट से पहले एडिशनल फैक्टर ऑथेंटिकेशन (AFA) यानी OTP आधारित वेरिफिकेशन अनिवार्य होगा। इससे यूजर्स को यह सुविधा मिलेगी कि वे चाहें तो भुगतान को समय रहते रोक सकें। यह नियम खासतौर पर विदेशी मर्चेंट्स पर लागू होगा, जहां पहले ऐसी पारदर्शिता नहीं थी।</p>
<h5><span><strong>नए नियम और लिमिट</strong></span></h5>
<p>RBI ने ई-मेंडेट ट्रांजैक्शन के लिए स्पष्ट सीमा तय की है।<br />₹15,000 तक के ट्रांजैक्शन बिना अतिरिक्त ऑथेंटिकेशन के हो सकेंगे, जबकि विशेष श्रेणियों के लिए लिमिट बढ़ाई गई है।</p>
<p>क्रेडिट कार्ड बिल, बीमा प्रीमियम और म्यूचुअल फंड भुगतान के लिए यह सीमा ₹1 लाख तक रखी गई है। इससे अधिक राशि के लिए हर बार अतिरिक्त सत्यापन जरूरी होगा। साथ ही, ग्राहक अपनी अधिकतम भुगतान सीमा भी तय कर सकेंगे, जिससे अनियंत्रित कटौती की संभावना कम होगी।</p>
<h5><span><strong>फ्रॉड सुरक्षा और रिफंड</strong></span></h5>
<p>RBI ने गलत ट्रांजैक्शन की स्थिति में ग्राहकों के अधिकार भी स्पष्ट किए हैं।<br />अगर ग्राहक 3 कार्य दिवस के भीतर शिकायत दर्ज कराता है, तो उसे पूरी राशि वापस मिल सकती है।</p>
<p>अधिकारियों के अनुसार, बैंक की गलती होने पर यूजर की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी (जीरो लायबिलिटी)। वहीं 4 से 7 दिन के भीतर रिपोर्ट करने पर सीमित जिम्मेदारी लागू होगी। 7 दिन के बाद मामला बैंक की नीति के अनुसार तय किया जाएगा।</p>
<p>पिछले कुछ वर्षों में विदेशी डिजिटल सेवाओं—जैसे वीडियो स्ट्रीमिंग और ऑनलाइन सब्सक्रिप्शन—का उपयोग तेजी से बढ़ा है।<br />रिपोर्ट्स के अनुसार, कई मामलों में बिना जानकारी के ऑटो-डेबिट होने या फ्रॉड की शिकायतें सामने आई थीं, जिसके बाद RBI ने नियमों को सख्त करने का फैसला लिया।</p>
<p>इन नए नियमों से यूजर्स को अपने डिजिटल खर्च पर बेहतर नियंत्रण मिलेगा।विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाएगा, जिससे उपभोक्ता विश्वास भी बढ़ेगा।साथ ही, बैंक अब ई-मेंडेट सुविधा के लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं ले सकेंगे, जिससे ग्राहकों को सीधा लाभ मिलेगा।RBI के निर्देशों के बाद सभी बैंकों और पेमेंट प्लेटफॉर्म्स को इन नियमों को लागू करना होगा।आने वाले समय में डिजिटल पेमेंट सिस्टम में और सख्ती देखने को मिल सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 08:58:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[ANKITA ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>स्टेबलकॉइन्स और अनहोस्टेड वॉलेट्स: एएमएल ढांचे के सामने नई चुनौती</title>
                                    <description><![CDATA[वर्चुअल डिजिटल एसेट सेक्टर में अस्थिरता लंबे समय से लोगों और निवेशकों के लिए चिंता का विषय रहा है। इसी अस्थिरता के बीच स्टेबलकॉइन्स— ऐसे डिजिटल एसेट जिनके मूल्य भारतीय रुपये या अमेरिकी डॉलर जैसी मुद्राओं से जुड़े होते हैं— एक व्यावहारिक विकल्प के रूप में उभरे थे । ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/stablecoins-and-unhosted-wallets-pose-a-new-challenge-to-the/article-51791"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/beyond-the-exchange-stablecoins,-unhosted-wallets,-and-the-limits-of-aml-fr_20260421_230144_0000.jpg" alt=""></a><br /><p>कुछ वर्षों में इनका विस्तार खूब बढ़ा है। 2025 के मध्य तक करीब 250 स्टेबलकॉइन्स प्रचलन में थे, जिनका कुल बाजार मूल्य 300 अरब डॉलर से अधिक था और इनका ट्रेडिंग वॉल्यूम बिटकॉइन से भी आगे निकल चुका है ।</p>
<p>स्टेबलकॉइन्स की खासियत सिर्फ कीमत की स्थिरता तक सीमित नहीं है। इनमें अच्छी तरलता होती है, ये अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर आसानी से काम करते हैं और इनके जरिए तेजी से अंतरराष्ट्रीय लेनदेन किया जा सकता है। साथ ही में ये मूल्य-संचय का कार्य करती है। यही कारण है कि ये व्यक्तिगत, कंपनियों और संस्थानों के लिए एक उपयोगी वित्तीय साधन बन गए हैं। लेकिन फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की एक हालिया रिपोर्ट बताती है कि इन खूबियों के बावजूद इनका गलत इस्तेमाल भी हो सकता है।</p>
<p>रिपोर्ट का फोकस अनहोस्टेड वॉलेट्स के बीच होने वाले पीयर-टू-पीयर (P2P) लेनदेन पर है। ये ऐसे ट्रांजैक्शन होते हैं जो सीधे दो लोगों के बीच होते हैं, जिनमें कोई रेगुलेटेड एक्सचेंज या सर्विस प्रोवाइडर शामिल नहीं होता। इस वजह से ये लेनदेन एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग (AML) ढांचे और आतंकवादी फंडिंग रोकने वाली जांच से बाहर रह जाते हैं। DPRK और ईरान से जुड़े उदाहरण दिखाते हैं कि अपराधी पहले पैसे को स्टेबलकॉइन्स में बदलते हैं—जैसे ट्रोन ब्लॉकचेन पर रुपये को USDT में—और फिर OTC ब्रोकर या P2P प्लेटफॉर्म के जरिए उसे नकद में बदल लेते हैं।</p>
<p>यह समस्या केवल P2P तक सीमित नहीं है। रिपोर्ट में स्टेबलकॉइन के पूरे जीवनचक्र में – जैसे जारी करने, इस्तेमाल और रिडेम्पशन के दौरान– मौजूद कमजोरियों की पहचान की गई है। इन जोखिम को और बढ़ाते हैं अलग-अलग देशों के नियमों में अंतर, ऑफशोर जारीकर्ता, और OTC ब्रोकर या अनौपचारिक नेटवर्क जैसे विकल्प।जब लेनदेन कई ब्लॉकचेन के बीच होता है, तो ट्रैकिंग और भी कठिन हो जाती है।</p>
<p>इन समस्याओं से निपटने के लिए FATF का कहना है कि सभी देशों को वर्चुअल एसेट सर्विस प्रोवाइडर्स (VASPs) को सही तरीके से लाइसेंस देना और उनकी निगरानी करना जरूरी है। साथ ही ये नियम पूरे सिस्टम में समान रूप से लागू होने चाहिए। रिपोर्ट यह भी बताती है कि स्टेबलकॉइन जारी करने वाली कंपनियों के पास कुछ तकनीकी नियंत्रण होते हैं, जैसे किसी ट्रांजैक्शन को रोकना या फ्रीज़ करना। अगर इनका सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए, तो ये सुरक्षा बढ़ाने में मदद हो सकती है।</p>
<p>खास तौर पर P2P लेनदेन और अनहोस्टेड वॉलेट्स पर FATF देशों को सलाह देता है कि वे ये आकलन करें कि गतिविधियां कितनी आम हैं और इनसे किस स्तर का जोखिम जुड़ा है, और तदनुसार उपयुक्त नियम लागू करें।सिंगापुर और जर्मनी जैसे देशों ने इस दिशा में सख्त निगरानी व्यवस्था अपनाई है—जिसमें पहचान सत्यापन, ब्लॉकचेन विश्लेषण, लेनदेन की सीमा तय करना और लगातार निगरानी शामिल है। FATF का मानना है कि बेहतर तकनीक, सख्त निगरानी और सरकार व निजी क्षेत्र के बीच सहयोग से ही इन जोखिमों को कम किया जा सकता है। </p>
<p>भारत भी इस दिशा में कुछ हद तक तैयार नजर आता है। फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट (FIU- IND) के जरिए वर्चुअल एसेट सर्विस प्रोवाइडर VASPs पहले से निगरानी में हैं और साइबर सुरक्षा को मजबूत करने के प्रयास भी जारी हैं। लेकिन कुछ कमियां अभी भी बरकरार हैं। खासकर P2P लेनदेन से जुड़े जोखिमों को मौजूदा और आने वाले नियमों में संबोधित शामिल करना जरूरी है, क्योंकि ये पारंपरिक निगरानी के बाहर हैं। इन कमियों को दूर करना एक मजबूत और स्पष्ट नियामक ढांचे बनाने के लिए जरूरी होगा। साथ ही, सरकार और निजी प्लेटफॉर्म्स के बीच लगातार सहयोग भी बेहद अहम रहेगा, ताकि स्टेबलकॉइन्स और पूरे क्रिप्टो इकोसिस्टम से जुड़े जोखिमों को बेहतर तरीके से संभाला जा सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 23:02:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[दैनिक जागरण]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>स्वास्थ्य समस्याओं के बीच अस्थिलारिल कैप्सूल पर बढ़ा भरोसा</title>
                                    <description><![CDATA[अस्थिलारिल कैप्सूल को लेकर देशभर में रुचि तेजी से बढ़ी है, खासकर ऐसे समय में जब लीवर, किडनी, प्रोस्टेट और यूरिनरी सिस्टम से जुड़ी समस्याएं आम होती जा रही हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/increased-confidence-in-astilaril-capsules-amid-health-problems/article-51785"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/asthiril.jpg" alt=""></a><br /><p>यह आयुर्वेदिक हर्बल फॉर्मूलेशन एक मल्टी-कंडीशन सपोर्ट सप्लीमेंट के रूप में बाजार में उतारा गया है, जिसे कई स्वास्थ्य जरूरतों में सहायक माना जा रहा है। बदलती जीवनशैली, तनाव और अनियमित खानपान के कारण लोग अब प्राकृतिक विकल्पों की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं, जिससे ऐसे उत्पादों की मांग में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। भोपाल स्थित डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए इसकी उपलब्धता ने इसे व्यापक पहुंच दी है।</p>
<p><strong>क्या है यह उत्पाद</strong></p>
<p>अस्थिलारिल कैप्सूल एक आयुर्वेदिक सप्लीमेंट के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जो शरीर के विभिन्न आंतरिक अंगों के संतुलन को बनाए रखने में सहायक माना जाता है।</p>
<p>प्रचार सामग्री के अनुसार, यह प्रोस्टेट ग्रंथि, लीवर और किडनी के सामान्य कार्यों को सपोर्ट करने के साथ-साथ यूरिनरी सिस्टम के स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकता है।</p>
<p><strong>बढ़ती स्वास्थ्य चुनौतियां</strong></p>
<p>अनियमित जीवनशैली, तनाव और खानपान की बदलती आदतों के कारण लीवर और किडनी से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं।</p>
<p>इसके साथ ही, उम्र बढ़ने के साथ पुरुषों में प्रोस्टेट संबंधी दिक्कतें भी आम होती जा रही हैं, जिससे ऐसे आयुर्वेदिक सप्लीमेंट्स की मांग में बढ़ोतरी देखी जा रही है।</p>
<p><strong>संभावित लाभ</strong></p>
<p>उत्पाद के प्रचार में बताया गया है कि यह सूजन को नियंत्रित करने, मूत्र प्रवाह को संतुलित रखने और शरीर के प्राकृतिक संतुलन को बनाए रखने में सहायक हो सकता है।</p>
<p>यह फॉर्मूलेशन पारंपरिक आयुर्वेदिक सिद्धांतों पर आधारित है, जिसमें शरीर के समग्र स्वास्थ्य को बनाए रखने पर जोर दिया जाता है।</p>
<p><strong>बाजार और उपलब्धता</strong></p>
<p>आयुर्वेदिक उत्पादों का बाजार तेजी से विस्तार कर रहा है, जिसमें ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की भूमिका लगातार बढ़ रही है।</p>
<p>यह आयुर्वेदिक दवा का विपणन शर्मा मेडिकल, कानपुर द्वारा किया जा रहा है। यदि यह उत्पाद आपके नजदीकी स्टोर पर उपलब्ध न हो, तो आप<strong><a href="https://www.deviayurvedic.com"> www.deviayurvedic.com</a></strong><br /> वेबसाइट से इसे आसानी से खरीद सकते हैं। ऑनलाइन ऑर्डर पर पूरे भारत में कूरियर डिलीवरी की सुविधा उपलब्ध है, साथ ही समय-समय पर विशेष डिस्काउंट ऑफर्स भी दिए जा रहे हैं।</p>
<p><strong>स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता</strong></p>
<p>आज के समय में लोग अपनी सेहत को लेकर पहले से अधिक जागरूक हो रहे हैं और प्राकृतिक व संतुलित जीवनशैली को अपनाने पर जोर दे रहे हैं।</p>
<p>संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और आयुर्वेदिक सप्लीमेंट्स का संयोजन स्वास्थ्य को बनाए रखने में सहायक माना जा रहा है। अस्थिलारिल कैप्सूल इसी दिशा में एक उभरता हुआ विकल्प बनकर सामने आया है, जिस पर लोगों का भरोसा लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है।</p>
<p>Disclaimer: This article is for informational purposes only and does not constitute medical advice, diagnosis, or treatment. Reliance on any information herein is solely at your own risk.</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 16:20:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[दैनिक जागरण]]></dc:creator>
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