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                <title>पूजा पाठ - दैनिक जागरण</title>
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                <description>पूजा पाठ RSS Feed</description>
                
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                <title>बुधवार को भगवान गणेश की पूजा कैसे करें? जानें शुभ विधि, मंत्र, भोग और विशेष उपाय</title>
                                    <description><![CDATA[बुधवार भगवान गणेश को समर्पित माना जाता है। इस दिन विधि-विधान से पूजा, मंत्र जाप और विशेष उपाय करने से बुद्धि, सुख, समृद्धि और विघ्नों से मुक्ति मिलने की मान्यता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/puja-recitation/6a43c349ca70e/article-57466"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/wednesday-ganesh-puja.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">सनातन धर्म में सप्ताह का प्रत्येक दिन किसी न किसी देवी-देवता को समर्पित माना गया है। बुधवार का दिन प्रथम पूज्य भगवान श्रीगणेश की आराधना के लिए विशेष महत्व रखता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक भगवान गणेश की पूजा करने से जीवन के सभी विघ्न दूर होते हैं, बुद्धि और विवेक की प्राप्ति होती है तथा परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता, बुद्धिदाता और मंगलकर्ता कहा जाता है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत उनसे ही की जाती है। यदि आप चाहते हैं कि आपके कार्य बिना बाधा के पूरे हों, करियर और व्यापार में सफलता मिले तथा घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहे, तो बुधवार के दिन भगवान गणेश की विशेष पूजा अवश्य करनी चाहिए।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>बुधवार को ऐसे करें भगवान गणेश की पूजा</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">बुधवार की सुबह ब्रह्म मुहूर्त या सूर्योदय के बाद स्नान करके स्वच्छ और हल्के हरे या पीले रंग के वस्त्र धारण करें। घर के मंदिर की साफ-सफाई करें और भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र को स्वच्छ जल से पोंछकर लाल या पीले वस्त्र पर स्थापित करें।</p>
<p style="text-align:justify;">पूजा के दौरान सबसे पहले दीपक और धूप जलाएं। इसके बाद भगवान गणेश को गंगाजल अर्पित करें। फिर रोली, अक्षत, सिंदूर, दूर्वा घास, लाल फूल और मोदक या लड्डू का भोग लगाएं। गणेश जी को विशेष रूप से दूर्वा घास अत्यंत प्रिय मानी जाती है। मान्यता है कि 21 दूर्वा अर्पित करने से भगवान शीघ्र प्रसन्न होते हैं।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>गणेश मंत्रों का करें जाप</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">पूजा के समय भगवान गणेश के मंत्रों का जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार निम्न मंत्रों का जाप कर सकते हैं—</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>ॐ गं गणपतये नमः।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">या</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।<br />निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥</strong></p>
<p style="text-align:justify;">यदि समय हो तो गणेश अथर्वशीर्ष, गणेश चालीसा या संकटनाशन गणेश स्तोत्र का पाठ भी किया जा सकता है। इनका नियमित पाठ मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करने वाला माना जाता है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>भगवान गणेश को क्या भोग लगाएं</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">भगवान गणेश को मोदक सबसे प्रिय माना गया है। यदि मोदक उपलब्ध न हों तो बेसन के लड्डू, बूंदी के लड्डू, गुड़, नारियल, केले या अन्य मिठाइयों का भोग भी लगाया जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">भोग लगाने के बाद परिवार के सभी सदस्यों में प्रसाद बांटना शुभ माना जाता है। इससे घर में सुख-शांति और सौहार्द बना रहता है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>बुधवार को करें ये विशेष उपाय</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">यदि जीवन में लगातार बाधाएं आ रही हैं या आर्थिक परेशानियां बनी हुई हैं, तो बुधवार को कुछ सरल उपाय भी किए जा सकते हैं।</p>
<ul style="text-align:justify;">
<li>भगवान गणेश को 21 दूर्वा अर्पित करें।</li>
<li>हरे मूंग का दान किसी जरूरतमंद को करें।</li>
<li>गाय को हरा चारा खिलाएं।</li>
<li>विद्यार्थी भगवान गणेश को कलम और पुस्तक अर्पित कर सफलता की प्रार्थना करें।</li>
<li>व्यापार में उन्नति के लिए दुकान या कार्यालय में गणेश जी की प्रतिमा के सामने दीपक जलाएं।</li>
<li>गरीब या जरूरतमंद बच्चों को फल, मिठाई या स्टेशनरी का दान करें।</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">धार्मिक मान्यता है कि इन उपायों से शुभ फल प्राप्त होते हैं और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>क्या करें और क्या न करें</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">बुधवार के दिन पूजा करते समय मन को शांत रखें और किसी के प्रति क्रोध या कटु वचन बोलने से बचें। पूजा में बासी फूल या खराब भोग का उपयोग नहीं करना चाहिए। भगवान गणेश को तुलसी दल अर्पित नहीं किया जाता, इसलिए पूजा में इसका प्रयोग न करें।</p>
<p style="text-align:justify;">इस दिन झूठ बोलने, किसी का अपमान करने और अनावश्यक विवाद से बचने की भी सलाह दी जाती है। धार्मिक दृष्टि से संयम, सदाचार और सेवा भाव भगवान गणेश को प्रिय माने गए हैं।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>विद्यार्थियों और नौकरीपेशा लोगों के लिए विशेष महत्व</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">बुधवार का दिन विशेष रूप से विद्यार्थियों, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वालों और नौकरीपेशा लोगों के लिए शुभ माना जाता है। भगवान गणेश बुद्धि और ज्ञान के देवता हैं। इसलिए इस दिन उनकी पूजा करने से एकाग्रता बढ़ने और निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होने की मान्यता है।</p>
<p style="text-align:justify;">व्यापारियों के लिए भी बुधवार का दिन लाभकारी माना जाता है। नए कार्य की शुरुआत, नए सौदे या महत्वपूर्ण निर्णय लेने से पहले गणेश जी का स्मरण करना शुभ माना जाता है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>बुधवार का आध्यात्मिक संदेश</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">भगवान गणेश केवल धन और सफलता के प्रतीक नहीं हैं, बल्कि विवेक, धैर्य और सकारात्मक सोच का भी संदेश देते हैं। उनकी बड़ी सूंड, विशाल कान और छोटा मुख हमें अधिक सुनने, कम बोलने और सोच-समझकर निर्णय लेने की प्रेरणा देते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बुधवार को भगवान गणेश की श्रद्धापूर्वक पूजा करने से जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करने, मानसिक शांति प्राप्त करने और सुख-समृद्धि बढ़ाने की मान्यता है। नियमित पूजा, मंत्र जाप, दान और अच्छे कर्मों के साथ यदि भगवान गणेश का स्मरण किया जाए, तो व्यक्ति के जीवन में सकारात्मकता और आत्मविश्वास का संचार होता है। हालांकि, धार्मिक मान्यताएं आस्था पर आधारित होती हैं और उनका पालन प्रत्येक व्यक्ति अपनी श्रद्धा और परंपरा के अनुसार करता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पूजा पाठ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 00:00:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चंद्र दर्शन 2026 आज: अमावस्या के बाद चंद्रमा के दर्शन का विशेष महत्व, श्रद्धालु करेंगे व्रत और पूजा</title>
                                    <description><![CDATA[16 जून को मनाया जाएगा चंद्र दर्शन पर्व, चंद्र देव की आराधना से सुख, समृद्धि और सौभाग्य प्राप्त होने की मान्यता]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/religion/chandra-darshan-2026-today-after-amavasya-there-is-special-importance/article-56034"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/chandra-darshan-2026-(1).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">चंद्र दर्शन का पर्व 16 जून 2026, मंगलवार को श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाएगा। हिंदू पंचांग के अनुसार अमावस्या के बाद पहली बार चंद्रमा के दर्शन करने की परंपरा को चंद्र दर्शन कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं में इस दिन का विशेष महत्व बताया गया है। माना जाता है कि अमावस्या के अंधकार के बाद चंद्रमा के प्रथम दर्शन जीवन में नई ऊर्जा, सकारात्मकता और शुभ फल लेकर आते हैं। यही कारण है कि देश के विभिन्न हिस्सों में श्रद्धालु इस अवसर पर व्रत रखते हैं और चंद्र देव की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। चंद्रमा को मन, बुद्धि, भावनाओं और शांति का कारक माना गया है। नवग्रहों में भी चंद्रदेव का महत्वपूर्ण स्थान है। मान्यता है कि जिन लोगों की कुंडली में चंद्रमा मजबूत स्थिति में होता है, उन्हें जीवन में सुख, सम्मान और समृद्धि प्राप्त होती है। इसी विश्वास के साथ श्रद्धालु चंद्र दर्शन के दिन उपवास रखकर चंद्रदेव से कृपा और आशीर्वाद की कामना करते हैं। बताया जाता है कि यह पर्व विशेष रूप से मानसिक शांति, पारिवारिक सुख और आर्थिक उन्नति से जुड़ा हुआ माना जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">पंचांग के अनुसार प्रतिपदा तिथि 15 जून की सुबह 8 बजकर 24 मिनट से शुरू होकर 16 जून की सुबह 4 बजकर 31 मिनट तक रहेगी। वहीं 16 जून को चंद्रमा का उदय सुबह 6 बजकर 35 मिनट पर और अस्त रात 8 बजकर 50 मिनट पर होगा। हालांकि चंद्र दर्शन के लिए सबसे शुभ समय सूर्यास्त के बाद माना जाता है, जब श्रद्धालु आकाश में नवचंद्र के दर्शन कर पूजा संपन्न करते हैं। कई स्थानों पर परिवार के सदस्य एक साथ चंद्रमा को अर्घ्य देकर मंगलकामना करते हैं। धार्मिक परंपराओं के अनुसार इस दिन व्रत रखने वाले लोग पूरे दिन अन्न और जल का त्याग करते हैं। शाम को चंद्रमा के दर्शन के बाद पूजा कर व्रत खोला जाता है। पूजा में चंदन, अक्षत, सफेद पुष्प, दूध और मिठाई का विशेष महत्व बताया गया है। कई श्रद्धालु चंद्रदेव के मंत्रों का जाप भी करते हैं। माना जाता है कि इससे मन की अशांति दूर होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">चंद्र दर्शन के दिन दान-पुण्य का भी विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन गरीबों और जरूरतमंदों को चावल, चीनी, सफेद वस्त्र और अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करने से शुभ फल प्राप्त होता है। कई लोग ब्राह्मणों को भोजन कराकर आशीर्वाद भी प्राप्त करते हैं। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन किया गया दान कई गुना फलदायी होता है और व्यक्ति के जीवन में आने वाली बाधाएं कम होती हैं। पौराणिक कथाओं में चंद्रदेव को अत्यंत पूजनीय माना गया है। उन्हें राजा दक्ष की 27 पुत्रियों का पति बताया गया है, जिन्हें 27 नक्षत्रों के रूप में जाना जाता है। वहीं बुध ग्रह को चंद्रदेव का पुत्र माना जाता है। चंद्रमा का संबंध प्रकृति, वनस्पति और जीव-जंतुओं के पोषण से भी जोड़ा जाता है। यही कारण है कि भारतीय संस्कृति में चंद्रमा केवल एक खगोलीय पिंड नहीं बल्कि आध्यात्मिक और धार्मिक आस्था का भी महत्वपूर्ण केंद्र है।</p>
<p style="text-align:justify;">चंद्र दर्शन का पर्व उन लोगों के लिए विशेष लाभकारी माना जाता है, जो मानसिक तनाव, निर्णय लेने में कठिनाई या पारिवारिक समस्याओं का सामना कर रहे हैं। चंद्रदेव की आराधना से मन को स्थिरता और आत्मविश्वास प्राप्त होता है। कई लोग इस दिन चंद्रमा को दूध मिश्रित जल अर्पित कर विशेष पूजा करते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। देशभर के मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर भी चंद्र दर्शन को लेकर विशेष आयोजन किए जाते हैं। श्रद्धालु शाम के समय मंदिरों में पहुंचकर पूजा-अर्चना करते हैं और नवचंद्र के दर्शन कर अपने जीवन में सुख, शांति और सफलता की प्रार्थना करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि अमावस्या के बाद चंद्रमा के प्रथम दर्शन जीवन में नए अवसरों और सकारात्मक बदलावों का संकेत माने जाते हैं। इस वर्ष चंद्र दर्शन का पर्व ऐसे समय में आ रहा है जब लोग आध्यात्मिकता और धार्मिक परंपराओं की ओर अधिक आकर्षित हो रहे हैं। ऐसे में चंद्र दर्शन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का भी प्रतीक बन गया है। श्रद्धालुओं को विश्वास है कि चंद्रदेव की कृपा से उनके जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता का मार्ग प्रशस्त होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म</category>
                                            <category>पूजा पाठ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 00:00:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>11 जून 2026: परम एकादशी व्रत, जानें समय और महत्व</title>
                                    <description><![CDATA[देशभर में कल मनाई जाएगी परम एकादशी, विष्णु भक्ति और व्रत का विशेष महत्व, जानें पूरी जानकारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/religion/11-june-2026-param-ekadashi-fast-know-its-time-and/article-55467"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/param-ekadashi-2026.jpg" alt=""></a><br /><p>देशभर में 11 जून 2026 को परम एकादशी का पावन पर्व श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। सुबह से ही मंदिरों में भक्तों की आवाजाही बढ़ने लगी है और वातावरण पूरी तरह भक्ति रस में डूबा नजर आ रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार यह एकादशी कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि में आती है और इसे अधिमास या मलमास की अत्यंत पुण्यदायी तिथि माना गया है। इस वर्ष एकादशी तिथि 11 जून की रात 12:58 बजे शुरू होकर रात 10:36 बजे तक रहेगी। सूर्योदय सुबह 5:44 बजे और सूर्यास्त शाम 7:08 बजे दर्ज किया गया है। वहीं व्रत का पारण 12 जून की सुबह 5:44 बजे से 8:25 बजे के बीच किया जाएगा। इस बार की परम एकादशी को विशेष फलदायी माना जा रहा है क्योंकि यह समय भगवान विष्णु की आराधना के लिए अत्यंत शुभ बताया गया है।</p>
<p>परम एकादशी को ‘पुरुषोत्तम एकादशी’ भी कहा जाता है और इसका सीधा संबंध भगवान विष्णु से है। धार्मिक मान्यता है कि अधिमास में आने वाली यह एकादशी साधक के जीवन से न केवल पापों का नाश करती है बल्कि उसे आध्यात्मिक उन्नति की ओर भी ले जाती है। कहा जाता है कि इस व्रत को करने से मनुष्य को इस जीवन के साथ-साथ पूर्व जन्मों के पापों से भी मुक्ति मिलती है। पौराणिक कथाओं में वर्णन मिलता है कि स्वयं राजा युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से इस एकादशी के महत्व के बारे में प्रश्न किया था, जिसके उत्तर में श्रीकृष्ण ने इसे अत्यंत श्रेष्ठ और मोक्षदायी बताया था। कथा के अनुसार एक निर्धन ब्राह्मण और उसकी पत्नी ने ऋषि कौंड़िन्य के मार्गदर्शन में यह व्रत किया था, जिसके बाद उनके जीवन में अचानक गरीबी समाप्त होकर समृद्धि आ गई थी। बताया जाता है कि स्वयं कुबेर ने भी इस व्रत के प्रभाव से धन और वैभव प्राप्त किया था और देवताओं के कोषाध्यक्ष बने थे। यही कारण है कि इसे धन, सुख और समृद्धि प्रदान करने वाला व्रत भी माना जाता है।</p>
<p>धार्मिक परंपराओं के अनुसार इस दिन भक्त पूरे दिन उपवास रखते हैं। कुछ श्रद्धालु निर्जला व्रत का पालन करते हैं जबकि कुछ फलाहार और दूध पर निर्भर रहते हैं। सुबह स्नान के बाद भगवान विष्णु की पूजा की जाती है जिसमें तुलसी पत्र, फूल, दीपक, धूप और नैवेद्य अर्पित किया जाता है। मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन होता है और भक्त “विष्णु सहस्रनाम” का पाठ करते हैं। कई स्थानों पर रातभर भजन-कीर्तन और जागरण का आयोजन भी किया जाता है, जिसमें श्रद्धालु भगवान विष्णु के नाम का स्मरण करते रहते हैं। व्रत की शुरुआत दशमी तिथि से ही संयम और सात्विक भोजन के साथ की जाती है, ताकि एकादशी के दिन शरीर और मन पूर्ण रूप से शुद्ध रह सके। व्रत का समापन द्वादशी तिथि पर ब्राह्मणों को भोजन कराकर और दान-पुण्य करने के बाद किया जाता है।</p>
<p>स्थानीय मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिल रही है और कई स्थानों पर विशेष सुरक्षा एवं व्यवस्था की गई है। भोपाल सहित विभिन्न शहरों में भक्तजन परिवार सहित मंदिरों में पहुंचकर पूजा-अर्चना कर रहे हैं।  इस वर्ष की परम एकादशी पर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा जा रहा है, क्योंकि मान्यता है कि इस व्रत से जीवन में स्थायी सुख, शांति और समृद्धि प्राप्त होती है। पंडितों का कहना है कि जो भी व्यक्ति नियमपूर्वक इस एकादशी का व्रत करता है, उसे न केवल सांसारिक सुख प्राप्त होते हैं बल्कि अंततः वैकुंठ धाम की प्राप्ति भी होती है। धार्मिक ग्रंथों में इसे अत्यंत शक्तिशाली व्रत बताया गया है, जो व्यक्ति के जीवन की दिशा और दशा दोनों बदलने की क्षमता रखता है। इस प्रकार परम एकादशी का यह पावन पर्व एक बार फिर श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ पूरे देश में मनाया जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म</category>
                                            <category>पूजा पाठ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 12:03:47 +0530</pubDate>
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                <title>ईद पर चांद जैसी चमक चाहिए? घर पर बनाएं ये आसान नेचुरल फेसपैक</title>
                                    <description><![CDATA[बाजार के महंगे प्रोडक्ट्स से बेहतर हो सकते हैं घर के ये घरेलू फेसपैक, जो त्वचा को देंगे प्राकृतिक निखार और ताजगी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/life-style/want-to-glow-like-the-moon-on-eid-make-this/article-47939"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-03/mp---2026-03-11t155814.092.jpg" alt=""></a><br /><div class="flex flex-col text-sm">

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<p>ईद का त्योहार नजदीक आते ही लोग अपनी तैयारियों में जुट जाते हैं। नए कपड़े, स्वादिष्ट पकवान और घर की सजावट के साथ-साथ हर कोई चाहता है कि इस खास मौके पर उसका चेहरा भी दमकता नजर आए। अगर आप भी ईद पर चांद जैसी चमक पाना चाहते हैं, तो महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स की जगह कुछ आसान और नेचुरल घरेलू फेसपैक आपकी मदद कर सकते हैं।</p>
<p>विशेषज्ञों के अनुसार, प्राकृतिक चीजों से बने फेसपैक त्वचा को बिना नुकसान पहुंचाए साफ, मुलायम और चमकदार बनाते हैं। घर में मौजूद सामान्य चीजों से तैयार ये फेसपैक त्वचा को पोषण देने के साथ-साथ डलनेस को भी कम करते हैं।</p>
<h3><strong>1. बेसन और हल्दी का फेसपैक</strong></h3>
<p>बेसन और हल्दी का फेसपैक लंबे समय से स्किन केयर में इस्तेमाल होता रहा है। एक चम्मच बेसन में चुटकी भर हल्दी और थोड़ा दूध या गुलाबजल मिलाकर पेस्ट बना लें। इसे चेहरे पर 15 मिनट तक लगाकर रखें और फिर हल्के गुनगुने पानी से धो लें। यह फेसपैक त्वचा को साफ करने के साथ-साथ प्राकृतिक चमक देता है।</p>
<h3><strong>2. दही और शहद का फेसपैक</strong></h3>
<p>अगर त्वचा रूखी और बेजान लग रही है, तो दही और शहद का मिश्रण काफी फायदेमंद हो सकता है। एक चम्मच दही में आधा चम्मच शहद मिलाकर चेहरे पर लगाएं। करीब 10–15 मिनट बाद इसे धो लें। यह फेसपैक त्वचा को मॉइस्चर देता है और चेहरे की चमक बढ़ाने में मदद करता है।</p>
<h3><strong>3. एलोवेरा और खीरे का फेसपैक</strong></h3>
<p>गर्मियों के मौसम में एलोवेरा और खीरा त्वचा को ठंडक देने के लिए बेहतरीन माने जाते हैं। खीरे का रस निकालकर उसमें एक चम्मच एलोवेरा जेल मिलाएं और चेहरे पर लगाएं। यह फेसपैक त्वचा को ताजगी देता है और थकान के असर को कम करता है।</p>
<h3><strong>4. चावल के आटे और दूध का फेसपैक</strong></h3>
<p>चावल का आटा त्वचा की गंदगी और डेड स्किन हटाने में मदद करता है। एक चम्मच चावल के आटे में दूध मिलाकर पेस्ट तैयार करें और हल्के हाथों से चेहरे पर मसाज करें। कुछ देर बाद चेहरा धो लें। इससे त्वचा साफ और चमकदार दिखती है।</p>
<h3><strong>ध्यान रखने वाली बातें</strong></h3>
<p>किसी भी फेसपैक को लगाने से पहले चेहरे को अच्छी तरह साफ करना जरूरी है। अगर त्वचा संवेदनशील है, तो पहले पैच टेस्ट जरूर करें। साथ ही, फेसपैक लगाने के बाद हल्का मॉइस्चराइजर लगाना भी फायदेमंद होता है।</p>
<p>ईद जैसे खास मौके पर त्वचा की देखभाल के लिए ये घरेलू उपाय आसान और सुरक्षित विकल्प हो सकते हैं। नियमित रूप से इनका इस्तेमाल करने से चेहरे की प्राकृतिक चमक बनी रहती है और त्योहार के दिन आपका लुक और भी निखरकर सामने आता है।</p>
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                                                            <category>लाइफ स्टाइल</category>
                                            <category>पूजा पाठ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Mar 2026 16:00:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Shukrawar Ke Upay aur Totke: शुक्रवार को करें ये शुभ उपाय, धन-सुख और वैभव में आ सकती है स्थिरता</title>
                                    <description><![CDATA[मां लक्ष्मी की आराधना और शुक्र ग्रह से जुड़े उपायों को लेकर धार्मिक मान्यताएं, जानें क्या करें और किन बातों से बचें]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/religion/%E0%A4%B6%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%89%E0%A4%AA%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%9F%E0%A5%8B%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A5%87-do-these-auspicious-remedies-on/article-41075"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2025-12/mp---2025-12-26t101745.780.jpg" alt=""></a><br /><p>हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में शुक्रवार का दिन विशेष महत्व रखता है। यह दिन देवी लक्ष्मी और शुक्र ग्रह को समर्पित माना जाता है। मान्यता है कि शुक्रवार को किए गए कुछ विशेष उपाय व्यक्ति के जीवन में धन, सुख-समृद्धि और वैभव की स्थिरता ला सकते हैं। इसी कारण देश के कई हिस्सों में शुक्रवार को धार्मिक अनुष्ठान, दान और पूजा-पाठ की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है।</p>
<p>धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शुक्रवार की शुरुआत स्वच्छता और शुद्धता से करनी चाहिए। सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद घर और पूजा स्थल की सफाई की जाती है। इस दिन हल्के रंग, विशेषकर सफेद या गुलाबी वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। ये रंग शुक्र ग्रह और मां लक्ष्मी से जुड़े माने जाते हैं, जो सौंदर्य, ऐश्वर्य और सुख का प्रतीक हैं।</p>
<p><strong>मां लक्ष्मी की पूजा</strong><br />शुक्रवार को मां लक्ष्मी की विधिवत पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। पूजा स्थल पर दीपक जलाकर, फूल और भोग अर्पित करने की परंपरा है। कई परिवारों में खीर या दूध से बनी मिठाई का भोग लगाया जाता है। मान्यता है कि इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और आर्थिक परेशानियां धीरे-धीरे कम होती हैं।</p>
<p><strong>दान और सेवा का पक्ष</strong><br />धार्मिक ग्रंथों में शुक्रवार को दान को विशेष फलदायी माना गया है। कन्याओं को भोजन कराना, जरूरतमंदों को सफेद वस्तुओं का दान करना और पशु-पक्षियों को भोजन-पानी देना शुभ कर्मों में गिना जाता है। गाय, पक्षी या चींटियों को आहार देने को भी पुण्यदायी बताया गया है, जिससे व्यक्ति के जीवन में संतुलन और शांति आती है।</p>
<p><strong>शुक्र ग्रह से जुड़े उपाय</strong><br />ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शुक्र ग्रह धन, विलास और संबंधों का कारक है। जिन लोगों की कुंडली में शुक्र कमजोर माना जाता है, वे शुक्रवार को मंत्र जप, दान और संयमित दिनचर्या अपनाते हैं। सफेद खाद्य पदार्थों का सेवन और दिखावे से दूर रहना भी शुक्र को अनुकूल करने से जोड़ा जाता है।</p>
<p><strong>क्या न करें</strong><br />धार्मिक मान्यताओं में शुक्रवार को कुछ कार्यों से बचने की भी सलाह दी जाती है। जैसे इस दिन अनावश्यक उधार लेना, रसोई से जुड़ी वस्तुओं का संग्रह या नकारात्मक सोच को बढ़ावा देना वर्जित माना जाता है। साथ ही विवाद और कटु वचन से दूरी बनाए रखना भी आवश्यक बताया गया है।</p>
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                                                            <category>राशिफल</category>
                                            <category>धर्म</category>
                                            <category>पूजा पाठ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Dec 2025 10:48:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गुरुवार के उपाय: विष्णु और बृहस्पति पूजा से धन, ज्ञान और सौभाग्य में वृद्धि का विश्वास</title>
                                    <description><![CDATA[आस्था और परंपरा से जुड़े गुरुवार के उपायों को लेकर श्रद्धालुओं में बढ़ी रुचि, क्या करें और किन बातों से बचें]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/religion/remedies-for-thursday-worship-of-vishnu-and-jupiter-belief-in/article-40970"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2025-12/dharm-(31).jpg" alt=""></a><br /><p>हिंदू धर्म परंपरा में गुरुवार, जिसे बृहस्पतिवार भी कहा जाता है, भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति को समर्पित माना जाता है। देश के विभिन्न हिस्सों में श्रद्धालु इस दिन विशेष पूजा, दान और संयम का पालन करते हैं। मान्यता है कि गुरुवार के उपाय करने से धन-समृद्धि, ज्ञान, वैवाहिक सुख और मानसिक स्थिरता प्राप्त होती है। यही कारण है कि हर सप्ताह इस दिन मंदिरों और घरों में विशेष धार्मिक गतिविधियां देखने को मिलती हैं।</p>
<p>धार्मिक ग्रंथों और ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, बृहस्पति ग्रह को ज्ञान, धर्म और भाग्य का कारक माना गया है। गुरुवार को सुबह स्नान के बाद पीले वस्त्र पहनकर भगवान विष्णु और बृहस्पति देव की पूजा करने की परंपरा प्रचलित है। श्रद्धालु विष्णु की प्रतिमा या चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर “ॐ वृं बृहस्पतये नमः” या “ॐ ऐं श्रीं बृहस्पतये नमः” मंत्र का 108 बार जाप करते हैं।</p>
<p>गुरुवार के प्रमुख उपायों में हल्दी, चने की दाल और गुड़ का दान शामिल है। कई स्थानों पर आटे, गुड़ और हल्दी से बनी लोई गाय को खिलाने की परंपरा है, जिसे आर्थिक कठिनाइयों से राहत से जोड़ा जाता है। इसके अलावा केले के पेड़ की पूजा कर जल अर्पित करना और दीपक जलाना भी सौभाग्य और दीर्घायु के लिए शुभ माना जाता है।</p>
<p>धार्मिक जानकारों के अनुसार, इस दिन हल्दी या चंदन का तिलक लगाना सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। महिलाएं बाएं हाथ में और पुरुष दाहिने हाथ में पीला धागा बांधते हैं। घर की शुद्धि के लिए स्नान के जल में हल्दी या गंगाजल मिलाकर मुख्य द्वार पर छिड़काव करने की परंपरा भी कई परिवारों में देखी जाती है।</p>
<p>दान-पुण्य को गुरुवार का विशेष अंग माना जाता है। पीले वस्त्र, बेसन, चने की दाल या हल्दी का दान करने से पुण्य लाभ होने की मान्यता है। वहीं, विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ भी इस दिन व्यापक रूप से किया जाता है, जिसे मानसिक शांति और आध्यात्मिक बल से जोड़ा जाता है।</p>
<p>हालांकि, मान्यताओं के साथ कुछ निषेध भी जुड़े हैं। गुरुवार को हल्दी या पैसे उधार न देने, घर में पोछा न लगाने और किसी का दिल दुखाने से बचने की सलाह दी जाती है। राहुकाल के दौरान नया कार्य शुरू करने से परहेज करने की परंपरा भी प्रचलित है।</p>
<p>धार्मिक विशेषज्ञों का मानना है कि ये उपाय आस्था और अनुशासन से जुड़े हैं। इन्हें जीवनशैली में संयम, सकारात्मक सोच और सामाजिक सद्भाव के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। आज के दौर में भी गुरुवार के ये उपाय बड़ी संख्या में लोगों के लिए आस्था और विश्वास का विषय बने हुए हैं, जो पब्लिक इंटरेस्ट स्टोरी के रूप में लगातार चर्चा में रहते हैं।</p>
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                                            <category>पूजा पाठ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Dec 2025 09:23:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
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                <title>23 या 24 दिसंबर? जानिए साल 2025 की आखिरी विनायक चतुर्थी की सही तिथि, महत्व और पूजा विधि</title>
                                    <description><![CDATA[मार्गशीर्ष शुक्ल चतुर्थी को लेकर असमंजस खत्म, उदया तिथि के अनुसार 24 दिसंबर को मनाई जाएगी वर्ष की अंतिम विनायक चतुर्थी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/religion/know-the-exact-date-importance-and-method-of-worship-of/article-40587"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2025-12/dharm-(1)1.jpg" alt=""></a><br /><p>दिसंबर 2025 का महीना धार्मिक दृष्टि से खास है, क्योंकि इसी दौरान वर्ष की अंतिम विनायक चतुर्थी पड़ रही है। भगवान गणेश को समर्पित इस तिथि को लेकर श्रद्धालुओं के बीच यह सवाल बना हुआ था कि विनायक चतुर्थी 23 दिसंबर को मनाई जाए या 24 दिसंबर को। पंचांग और उदया तिथि के नियमों के अनुसार अब स्थिति स्पष्ट हो गई है। साल 2025 की आखिरी विनायक चतुर्थी बुधवार, 24 दिसंबर को मनाई जाएगी।</p>
<p>हिंदू पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष (अगहन) माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि का प्रारंभ 23 दिसंबर 2025 को दोपहर 3:45 बजे से हो रहा है, जबकि इसका समापन 24 दिसंबर को दोपहर 1:30 बजे होगा। चूंकि हिंदू धर्म में किसी भी व्रत और पर्व के लिए उदया तिथि को मान्यता दी जाती है, और 24 दिसंबर की सुबह सूर्योदय के समय चतुर्थी तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए धार्मिक रूप से इसी दिन विनायक चतुर्थी का व्रत और पूजन करना शास्त्रसम्मत माना गया है।</p>
<p>विनायक चतुर्थी हर महीने शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को आती है और भगवान गणेश की आराधना के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर गणेश जी भक्तों के सभी विघ्न दूर करते हैं और कार्यों में सफलता प्रदान करते हैं। वर्ष की अंतिम विनायक चतुर्थी होने के कारण इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। इसे बीते वर्ष की भूलों के लिए क्षमा प्रार्थना और आने वाले वर्ष के लिए मंगलकामना का विशेष अवसर माना जाता है।</p>
<p>पूजा विधि की बात करें तो श्रद्धालु सुबह स्नान कर स्वच्छ लाल या पीले वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें। घर के मंदिर में भगवान गणेश की मूर्ति या चित्र स्थापित कर गंगाजल से अभिषेक करें। इसके बाद सिंदूर, अक्षत, चंदन और जनेऊ अर्पित करें। गणेश जी को 21 दूर्वा और उनके प्रिय मोदक या लड्डू का भोग लगाना शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप, गणेश चालीसा का पाठ और अंत में आरती की जाती है।</p>
<p>धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विनायक चतुर्थी का व्रत रखने से बुद्धि और विवेक में वृद्धि होती है तथा जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं। विद्यार्थी, व्यापारी और नौकरीपेशा लोगों के लिए यह व्रत विशेष फलदायी माना गया है। शास्त्रों में उल्लेख है कि इस तिथि को भगवान गणेश शीघ्र प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राशिफल</category>
                                            <category>धर्म</category>
                                            <category>पूजा पाठ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 21 Dec 2025 17:24:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गुरुवार का महत्व: जानें तुलसी पूजा और आरती के सही नियम, जिनसे घर में बढ़े सुख-शांति</title>
                                    <description><![CDATA[तुलसी चालीसा पाठ से शुभ फल की मान्यता; गुरुवार को मंदिरों व घरों में विशेष पूजा-अर्चना]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/religion/tulsi-chalisa-recitation-on-thursday-increased-faith-among-vishnu-devotees/article-39637"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2025-12/dharm-(8).jpg" alt=""></a><br /><p>हिंदू धर्म में गुरुवार का दिन मां तुलसी की पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन तुलसी चालीसा का पाठ और सही दिशा में आरती करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है। विशेषज्ञों ने कहा कि पूजा के दौरान दिशा और विधि का पालन करना न केवल धार्मिक नियमों का हिस्सा है, बल्कि इससे मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा भी मिलती है।</p>
<p>धार्मिक विद्वानों के अनुसार, तुलसी माता को उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके पूजा करना चाहिए। पूजा में तुलसी के पत्ते, जल, दीपक और पुष्प अर्पित करना आवश्यक है। इसके साथ ही तुलसी चालीसा का पाठ नियमित रूप से करने से घर में धन-धान्य की वृद्धि और रोग-दोषों से मुक्ति मिलती है।</p>
<p>गुरुवार को तुलसी चालीसा का पाठ करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। इसमें तुलसी माता की महिमा, उनके पतिव्रता रूप की कथा और उनके द्वारा प्रदान किए गए आशीर्वाद का वर्णन मिलता है। कथा के अनुसार, तुलसी माता ने अपनी भक्ति और तपस्या से भगवान हरि को प्रसन्न किया और भक्तों को सुख-समृद्धि का वरदान दिया।</p>
<p>हिन्दू धर्म में  घर में तुलसी का पौधा होना और उसकी नियमित देखभाल करना भी शुभ माना जाता है। तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाना और भजन-पाठ करना पारिवारिक सौहार्द और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाता है। साथ ही तुलसी चालीसा के पाठ से मानसिक तनाव कम होता है और घर में शांति का वातावरण बना रहता है।</p>
<p>धार्मिक गतिविधियों और आस्था पर आधारित अध्ययन बताते हैं कि सही दिशा और विधि से आरती और पूजा करना न केवल आध्यात्मिक लाभ देता है, बल्कि सामाजिक और पारिवारिक जीवन में भी सकारात्मक प्रभाव डालता है। विशेषज्ञों ने अनुशंसा की है कि श्रद्धालु अपने घर में तुलसी की पूजा को नियमित रूप से अपनाएं और पूजा नियमों का पालन करें।</p>
<p>इस प्रकार, गुरुवार का दिन और तुलसी पूजा धार्मिक आस्था के साथ-साथ सकारात्मक जीवनशैली और मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी महत्वपूर्ण साबित होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि तुलसी चालीसा का पाठ और सही दिशा में आरती करने से जीवन में स्थायित्व, धन, सुख और समृद्धि बनी रहती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राशिफल</category>
                                            <category>धर्म</category>
                                            <category>पूजा पाठ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Dec 2025 11:54:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कब है 2025 की सफला एकादशी जानें, शुभ मुहूर्त, व्रत और पारण का पूरा मार्गदर्शन</title>
                                    <description><![CDATA[पौष कृष्ण पक्ष की इस एकादशी पर जानें पूजा का सही समय, राहुकाल और व्रत का महत्व]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/religion/when-is-saphala-ekadashi-in-2025-know-the-auspicious-time/article-39378"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2025-12/dharm.png" alt=""></a><br /><p>इस वर्ष सफला एकादशी 2025 पौष माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन व्रत और भगवान विष्णु की पूजा करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है, पापों का नाश होता है और कार्यों में सफलता मिलती है।</p>
<p>पंचांग के अनुसार, सफला एकादशी 14 दिसंबर शाम 6:49 बजे से प्रारंभ होकर 15 दिसंबर रात 9:19 बजे तक रहेगी। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि इस दिन व्रत और पूजा के लिए शोभन योग का होना अत्यंत लाभकारी है, जिससे व्रत का पुण्य अधिक होता है।</p>
<p><strong>पूजा और ब्रह्म मुहूर्त</strong><br />सफला एकादशी पर ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:17 से 6:12 बजे तक रहेगा, जो स्नान और व्रत प्रारंभ करने के लिए उत्तम समय माना जाता है। पूजा के लिए दो शुभ मुहूर्त हैं – पहला सुबह 7:06 से 8:24 बजे और दूसरा सुबह 9:41 से 10:59 बजे तक। इस दौरान भगवान विष्णु की पूजा और व्रत कथा सुनना अत्यंत लाभकारी है।</p>
<p><strong>राहुकाल और सावधानियां</strong><br />ज्योतिष के अनुसार, राहुकाल सुबह 8:24 से 9:41 बजे तक रहेगा। इस दौरान किसी भी शुभ कार्य से बचना चाहिए। यह सावधानी व्रत और पूजा के शुभ प्रभाव को सुनिश्चित करती है।</p>
<p><strong>व्रत का पारण समय</strong><br />जो श्रद्धालु सफला एकादशी का व्रत रखते हैं, वे पारण 16 दिसंबर को सुबह 7:07 से 9:11 बजे तक कर सकते हैं। उस दिन द्वादशी तिथि रात 11:57 बजे समाप्त होगी। सही समय पर पारण करने से व्रत का लाभ और अधिक बढ़ जाता है।</p>
<p><strong>धार्मिक और मानसिक लाभ</strong><br />सफला एकादशी का व्रत केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माना जाता है। संयम और उपवास से मानसिक स्थिरता बढ़ती है और शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। व्रत के दिन कथा सुनना और पूजा करना व्यक्ति को आध्यात्मिक रूप से सशक्त बनाता है।</p>
<p>विशेषज्ञों के अनुसार, शोभन योग और शुभ मुहूर्त के कारण इस वर्ष का व्रत विशेष रूप से लाभकारी है। पारिवारिक और सामूहिक पूजा करने से व्रत का पुण्य और अधिक बढ़ जाता है।</p>
<p>धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन व्रत रखने से घर में सुख-शांति, आर्थिक समृद्धि और कार्यों में सफलता सुनिश्चित होती है। इस वर्ष सफला एकादशी का व्रत अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त में करने से जीवन में सकारात्मक बदलाव और आध्यात्मिक लाभ अधिक मिलता है।</p>
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                                                            <category>धर्म</category>
                                            <category>पूजा पाठ</category>
                                            <category>पर्व त्यौहार</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Dec 2025 18:18:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>संकष्टी चतुर्थी 2025: शिवलिंग पर चढ़ाएं ये चीजें, मिलेगा विशेष कल्याण</title>
                                    <description><![CDATA[7 दिसंबर को अखुरथ संकष्टी चतुर्थी का व्रत, भगवान गणेश और शिव की कृपा पाने के सरल उपाय]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/religion/69325f4ed9dcd/article-39203"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2025-12/dharm-(6).jpg" alt=""></a><br /><p>7 दिसंबर, 2025 को आने वाली <strong>अखुरथ संकष्टी चतुर्थी</strong> इस महीने की महत्वपूर्ण तिथि है, जो भगवान गणेश को समर्पित होती है। इस दिन व्रत रखने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और कार्यों में सफलता मिलती है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि साधक इस दिन शिवलिंग पर कुछ विशेष वस्तुएं अर्पित करें, तो भगवान शिव और गणेश दोनों की कृपा प्राप्त होती है।</p>
<h5><strong>संकष्टी चतुर्थी का महत्व</strong></h5>
<p>संकष्टी चतुर्थी हर महीने आती है और इसे व्रत का शुभ अवसर माना जाता है। पौष महीने में आने वाली चतुर्थी को <strong>अखुरथ संकष्टी चतुर्थी</strong> कहा जाता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस दिन व्रत रखने और भगवान गणेश की पूजा करने से जीवन में आने वाली कठिनाइयाँ कम होती हैं और सुख-समृद्धि बढ़ती है।</p>
<h5><strong>शिवलिंग पर चढ़ाने योग्य 5 प्रमुख चीजें</strong></h5>
<p><strong>1. बिल्व पत्र और दूर्वा</strong><br />बिल्व पत्र भगवान शिव को अत्यंत प्रिय हैं, जबकि दूर्वा भगवान गणेश को। इन दोनों का एक साथ शिवलिंग पर अर्पण करने से दोनों देवताओं की कृपा प्राप्त होती है। यह उपाय जीवन की कठिनाइयों को दूर करने में मदद करता है।</p>
<p><strong>2. शहद मिश्रित जल</strong><br />शिवलिंग का अभिषेक शहद और जल से करने से जीवन में मिठास और शांति आती है। तांबे के पात्र में शुद्ध जल, थोड़ा सा शहद और गंगाजल मिलाकर अभिषेक करने से रोग दूर होते हैं।</p>
<p><strong>3. काले तिल</strong><br />चतुर्थी और पौष महीने में काले तिल का विशेष महत्व है। तिल का दान और शिवलिंग पर चढ़ाना <strong>शनि दोष</strong> और <strong>कालसर्प दोष</strong> से मुक्ति दिलाता है।</p>
<p><strong>4. कच्चा दूध</strong><br />कच्चे दूध से शिवलिंग का अभिषेक मानसिक शांति और सुख-समृद्धि प्रदान करता है। अभिषेक के समय ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है।</p>
<p><strong>5. गुड़</strong><br />शिवलिंग पर गुड़ अर्पित करने या गुड़ मिश्रित जल से अभिषेक करने से धन-संपत्ति में वृद्धि होती है और व्यापार में उन्नति मिलती है।</p>
<h5><strong>कैसे करें व्रत</strong></h5>
<p>विशेषज्ञों का कहना है कि संकष्टी व्रत के दौरान दिनभर हल्का आहार या उपवास रखकर भगवान गणेश और शिव की पूजा करनी चाहिए। शिवलिंग पर उपरोक्त पांच चीजों का समर्पण करना और मंत्र जाप करना शुभ फल देता है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म</category>
                                            <category>पूजा पाठ</category>
                                            <category>पर्व त्यौहार</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Dec 2025 11:24:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आंवला नवमी 2025 की तारीख को लेकर दुविधा खत्म! जानिए इस दिन के पीछे की पौराणिक कहानी</title>
                                    <description><![CDATA[धार्मिक मान्यताओं में कार्तिक माह का विशेष महत्व बताया गया है। इसी महीने आने वाली आंवला नवमी या अक्षय नवमी को ऐसा दिन माना जाता है, जब सतयुग की शुरुआत हुई थी। शास्त्रों में कहा गया है कि इस दिन किए गए शुभ कर्मों का फल कभी क्षय नहीं होता।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/religion/the-dilemma-regarding-the-date-of-amla-navami-2025-is/article-36588"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2025-10/dainik-jagarn-mpcg-.jpg" alt=""></a><br /><p>लेकिन इस बार लोगों में भ्रम है कि <strong>आंवला नवमी 30 अक्टूबर को है या 31 अक्टूबर को?</strong> आइए जानते हैं सही तिथि, पूजा विधि और इस पवित्र पर्व का धार्मिक महत्व।</p>
<hr />
<h3><strong>आंवला नवमी 2025 कब है?</strong></h3>
<p>पंचांग के अनुसार —</p>
<ul>
<li>
<p><strong>अक्षय नवमी 2025 की तिथि:</strong> <strong>31 अक्टूबर 2025, शुक्रवार</strong></p>
</li>
<li>
<p><strong>नवमी तिथि प्रारंभ:</strong> 30 अक्टूबर सुबह <strong>10:06 बजे</strong></p>
</li>
<li>
<p><strong>नवमी तिथि समाप्त:</strong> 31 अक्टूबर सुबह <strong>10:03 बजे</strong></p>
</li>
<li>
<p><strong>पर्व का शुभ मुहूर्त:</strong> 31 अक्टूबर को <strong>सुबह 6:32 से 10:03 बजे तक</strong></p>
</li>
</ul>
<p>यानी, <strong>आंवला नवमी का व्रत और पूजा 31 अक्टूबर, शुक्रवार को की जाएगी।</strong></p>
<hr />
<h3><strong>क्यों मनाई जाती है आंवला नवमी?</strong></h3>
<p>पुराणों के अनुसार, इसी दिन <strong>सतयुग का प्रारंभ</strong> हुआ था। इसलिए इसे “अक्षय नवमी” कहा जाता है — यानी ऐसा दिन, जब पुण्य कर्मों का क्षय नहीं होता। मान्यता है कि इस दिन <strong>भगवान विष्णु ने कूष्माण्ड नामक दैत्य का वध किया था</strong>, जिसके शरीर से “कूष्माण्ड” (कद्दू) की उत्पत्ति हुई। इसी कारण यह दिन <strong>कूष्माण्ड नवमी</strong> के नाम से भी प्रसिद्ध है।</p>
<p>आंवला वृक्ष को विष्णु जी का प्रिय माना गया है, इसलिए इस दिन <strong>आंवला पेड़ की पूजा और परिक्रमा</strong> करने का विशेष महत्व बताया गया है।</p>
<hr />
<h3><strong>आंवला नवमी पर क्यों की जाती है आंवला वृक्ष की पूजा?</strong></h3>
<p>शास्त्रों में कहा गया है कि आंवला वृक्ष में भगवान विष्णु, लक्ष्मी जी और देवी तुलसी का वास होता है।<br />इस वृक्ष की पूजा करने से —</p>
<ul>
<li>
<p>मनुष्य के <strong>पाप नष्ट</strong> होते हैं</p>
</li>
<li>
<p><strong>संतान सुख और दीर्घायु</strong> प्राप्त होती है</p>
</li>
<li>
<p>परिवार में <strong>शांति और समृद्धि</strong> बनी रहती है</p>
</li>
</ul>
<p>इस दिन आंवले के पेड़ के नीचे बैठकर भोजन करने और कथा सुनने का भी विशेष विधान है। इसे <strong>आंवला भोज</strong> कहा जाता है।</p>
<hr />
<h3><strong>आंवला नवमी की पूजा विधि</strong></h3>
<ol>
<li>
<p>प्रातः स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें।</p>
</li>
<li>
<p>भगवान विष्णु और आंवला वृक्ष की पूजा करें।</p>
</li>
<li>
<p>जल, अक्षत, पुष्प, दीप और गंध अर्पित करें।</p>
</li>
<li>
<p>विष्णु सहस्रनाम या विष्णु मंत्र का जाप करें।</p>
</li>
<li>
<p>गरीबों को भोजन, वस्त्र या फल का दान करें।</p>
</li>
<li>
<p>अंत में परिवार सहित आंवले के पेड़ की परिक्रमा करें।</p>
</li>
</ol>
<p>अगर तीर्थ यात्रा संभव न हो, तो घर में गंगाजल मिलाकर स्नान करने से भी अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।</p>
<hr />
<h3><strong>इस दिन के अन्य नाम और क्षेत्रीय महत्व</strong></h3>
<p>आंवला नवमी को अलग-अलग स्थानों पर अलग नामों से जाना जाता है —</p>
<ul>
<li>
<p><strong>अक्षय नवमी</strong> (उत्तर भारत)</p>
</li>
<li>
<p><strong>कूष्माण्ड नवमी</strong> (पूर्वी भारत)</p>
</li>
<li>
<p><strong>आरोग्य नवमी</strong> (स्वास्थ्य के लिए शुभ)</p>
</li>
<li>
<p><strong>धात्री नवमी</strong> (आंवला वृक्ष का दूसरा नाम ‘धात्री’ होने के कारण)</p>
</li>
</ul>
<p>उड़ीसा में इस दिन <strong>मां जगद्धात्री</strong> की विशेष पूजा की जाती है। वहीं मथुरा में इसी दिन से <strong>मथुरा प्रदक्षिणा</strong> का शुभारंभ होता है, जो 21 दिनों तक चलती है।</p>
<hr />
<h3><strong>आंवला नवमी का धार्मिक महत्व</strong></h3>
<p>इस पर्व का सार यही है कि कर्म, भक्ति और सेवा के माध्यम से ही सच्चा सुख प्राप्त होता है। सतयुग की शुरुआत जिस दिन हुई थी, वह दिन हमें याद दिलाता है —</p>
<blockquote>
<p>“सच्चे कर्म ही जीवन को अक्षय बनाते हैं।”</p>
</blockquote>
<p>जो व्यक्ति इस दिन विष्णु जी और आंवले के वृक्ष की पूजा करता है, उसे स्वास्थ्य, धन, संतति और मोक्ष के चारों फल प्राप्त होते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राशिफल</category>
                                            <category>धर्म</category>
                                            <category>पूजा पाठ</category>
                                            <category>पर्व त्यौहार</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Oct 2025 17:35:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गुरु नानक जयंती 2025: क्या आप जानते हैं इस दिन के पीछे की सच्ची कहानी?</title>
                                    <description><![CDATA[भारत की पावन भूमि सदियों से महान संतों और गुरुओं की जन्मस्थली रही है। इन्हीं में से एक हैं  सिख धर्म के संस्थापक और मानवता के अग्रदूत  गुरु नानक देव जी। हर साल उनकी जयंती को पूरे श्रद्धा और उल्लास के साथ गुरुपुरब या गुरु नानक जयंती के रूप में मनाया जाता है। यह सिर्फ एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि प्रेम, समानता और सेवा की भावना का प्रतीक पर्व है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/religion/guru-nanak-jayanti-2025-do-you-know-the-true-story/article-36582"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2025-10/dharam--(2).jpg" alt=""></a><br /><h3><strong>गुरु नानक जयंती 2025 कब है?</strong></h3>
<p>साल <strong>2025 में गुरु नानक जयंती 5 नवंबर (बुधवार)</strong> को मनाई जाएगी। यह दिन <strong>कार्तिक पूर्णिमा</strong> के पवित्र अवसर पर आता है। देशभर के गुरुद्वारों में इस दिन <strong>नगर कीर्तन</strong>, <strong>कीर्तन दरबार</strong>, और <strong>लंगर सेवा</strong> का आयोजन होता है। भक्त प्रभात फेरियां निकालते हैं और गुरु नानक जी के उपदेशों को जीवन में अपनाने का संकल्प लेते हैं।</p>
<hr />
<h3><strong>कौन थे गुरु नानक देव जी?</strong></h3>
<p>गुरु नानक देव जी का जन्म <strong>1469 ई.</strong> में <strong>तलवंडी (अब पाकिस्तान का ननकाना साहिब)</strong> में हुआ था। उनके पिता का नाम <strong>मेहता कालू चंद</strong> और माता का नाम <strong>माता तृप्ता</strong> था। बचपन से ही वे असाधारण बुद्धिमत्ता और आध्यात्मिकता के धनी थे।</p>
<p>उन्होंने समाज में फैले <strong>भेदभाव, अंधविश्वास और जात-पात की प्रथा</strong> का विरोध किया और सिखाया कि —</p>
<blockquote>
<p>“ईश्वर एक है और वह हर प्राणी में विद्यमान है।”</p>
</blockquote>
<p>उनका प्रसिद्ध उपदेश —</p>
<blockquote>
<p><strong>“एक ओंकार सतनाम, करता पुरख, निर्भउ, निरवैर।”</strong><br />आज भी सिख धर्म की नींव का आधार है।</p>
</blockquote>
<hr />
<h3><strong>गुरु नानक जयंती कैसे मनाई जाती है?</strong></h3>
<p>गुरु नानक जयंती से दो दिन पहले ही <strong>अखंड पाठ</strong> की परंपरा शुरू होती है, जिसमें 48 घंटे तक लगातार <strong>गुरु ग्रंथ साहिब</strong> का पाठ किया जाता है। जयंती के दिन सुबह-सुबह श्रद्धालु <strong>प्रभात फेरियां</strong> निकालते हैं। भजन-कीर्तन और ढोल-नगाड़ों के बीच नगर भ्रमण किया जाता है।</p>
<p>गुरुद्वारों में दिनभर <strong>लंगर सेवा</strong> चलती है, जहाँ हर धर्म और वर्ग के लोग एक साथ बैठकर भोजन करते हैं। यह गुरु नानक जी के समानता और भाईचारे के संदेश का जीवंत उदाहरण है।</p>
<hr />
<h3><strong>गुरु नानक जयंती का महत्व</strong></h3>
<p>गुरु नानक देव जी का पूरा जीवन मानवता के कल्याण के लिए समर्पित था।<br />उन्होंने सिखाया कि सच्ची पूजा केवल मंदिर या गुरुद्वारे में नहीं, बल्कि <strong>दूसरों की सेवा और प्रेम में</strong> है।</p>
<p>उनका संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है —</p>
<blockquote>
<p>“ना कोई हिन्दू, ना मुसलमान — सब इंसान हैं।”</p>
</blockquote>
<p>यह पर्व हमें याद दिलाता है कि धर्म से पहले इंसानियत आती है।</p>
<hr />
<h3><strong>गुरु नानक देव जी के प्रेरणादायक उपदेश</strong></h3>
<ol>
<li>
<p><strong>सत नाम:</strong> सच्चाई ही ईश्वर है।</p>
</li>
<li>
<p><strong>सेवा और सिमरन:</strong> निस्वार्थ सेवा और ईश्वर का स्मरण जीवन का आधार है।</p>
</li>
<li>
<p><strong>समानता:</strong> सभी मनुष्य एक समान हैं, चाहे उनका धर्म, जाति या लिंग कुछ भी हो।</p>
</li>
<li>
<p><strong>कर्म:</strong> बिना स्वार्थ के सच्चे मन से कर्म करना ही पूजा है।</p>
</li>
<li>
<p><strong>प्रेम और करुणा:</strong> दूसरों के दुख को समझना ही सच्ची भक्ति है।</p>
</li>
</ol>
<hr />
<h3><strong>गुरु नानक देव जी के जीवन से सीख</strong></h3>
<p>गुरु नानक जी ने अपने जीवन में चार प्रमुख यात्राएँ कीं, जिन्हें <strong>‘उदासियाँ’</strong> कहा जाता है। इन यात्राओं के दौरान उन्होंने मानवता, प्रेम और एकता का संदेश दूर-दूर तक फैलाया। उन्होंने सिखाया कि भगवान केवल मंदिरों या मस्जिदों में नहीं, बल्कि हर इंसान के हृदय में बसता है।</p>
<hr />
<h3><strong>गुरुपुरब पर किए जाने वाले शुभ कार्य</strong></h3>
<ul>
<li>
<p>प्रभात फेरी में भाग लें और कीर्तन करें।</p>
</li>
<li>
<p>जरूरतमंदों की सहायता करें।</p>
</li>
<li>
<p>गुरुद्वारे में सेवा या लंगर में योगदान दें।</p>
</li>
<li>
<p>गुरु नानक जी के उपदेशों को पढ़ें और जीवन में उतारें।</p>
</li>
</ul>
<hr />
<h3><strong>गुरु नानक जयंती 2025 की भावना</strong></h3>
<p>यह दिन हमें सिखाता है कि इंसानियत सबसे बड़ा धर्म है। गुरु नानक देव जी के विचार आज भी समाज में प्रेम, समानता और भाईचारे की भावना को जीवित रखते हैं। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि अगर मन में करुणा और सत्य है, तो कोई भी अंधकार हमारे जीवन में स्थायी नहीं रह सकता।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राशिफल</category>
                                            <category>धर्म</category>
                                            <category>पूजा पाठ</category>
                                            <category>पर्व त्यौहार</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/religion/guru-nanak-jayanti-2025-do-you-know-the-true-story/article-36582</link>
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                <pubDate>Wed, 29 Oct 2025 17:35:05 +0530</pubDate>
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