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                <title>चुनाव - दैनिक जागरण</title>
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                <description>चुनाव RSS Feed</description>
                
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                <title>रायपुर में आज सियासी टकराव के आसार, राजीव भवन का घेराव करेगी भाजयुमो</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस ने भी नेताओं-कार्यकर्ताओं को प्रदेश कार्यालय बुलाया, शंकर नगर और आसपास बदलेगी ट्रैफिक व्यवस्था; पुलिस ने बताए वैकल्पिक रास्ते]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/bjym-will-surround-rajiv-bhawan-due-to-political-conflict-in/article-59479"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/raipur-bjp-protest.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">राजधानी रायपुर में बुधवार को शंकर नगर और उसके आसपास के इलाकों में सियासी गतिविधियां तेज रहने वाली हैं। भारतीय जनता युवा मोर्चा ने प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन के घेराव का कार्यक्रम तय किया है। दूसरी तरफ कांग्रेस ने भी अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं को प्रदेश कार्यालय पहुंचने के निर्देश दिए हैं। दोनों दलों की गतिविधियों को देखते हुए इलाके में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं के जुटने की संभावना है। इसका सीधा असर सामान्य यातायात पर पड़ सकता है। रायपुर ट्रैफिक पुलिस ने इसे देखते हुए पहले ही एडवाइजरी जारी कर दी है। बीटीआई मैदान से अनुपम नगर चौक होते हुए दूरदर्शन कार्यालय और राजीव भवन की तरफ जाने वाले रास्तों पर आवाजाही प्रभावित रहने की संभावना जताई गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd">वाहन चालकों को शंकर नगर एक्सप्रेस-वे, बॉटल हाउस गली, अवंति विहार, लोधीपारा और मोवा की तरफ से वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। राजनीतिक कार्यक्रम की शुरुआत भाजयुमो कार्यकर्ताओं के बीटीआई मैदान क्षेत्र में जुटने से होने की संभावना है। यहां से कार्यकर्ता प्रदेश कांग्रेस कार्यालय की तरफ बढ़ेंगे। भाजपा की ओर से जारी संदेश में इस प्रदर्शन को दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास से जुड़े कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन की प्रतिक्रिया बताया गया है। भाजपा का आरोप है कि राहुल गांधी और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री आवास के घेराव की कोशिश करते हुए बिना किसी मुद्दे के अराजकता फैलाने का प्रयास किया। इसी के विरोध में भाजयुमो ने रायपुर स्थित प्रदेश कांग्रेस कार्यालय के घेराव का ऐलान किया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">संगठन ने अपने कार्यकर्ताओं से बड़ी संख्या में कार्यक्रम में पहुंचने को कहा है। भाजयुमो के प्रदर्शन की सूचना सामने आने के बाद कांग्रेस ने भी संगठन स्तर पर अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं को सक्रिय कर दिया है। पार्टी की तरफ से संदेश जारी कर प्रदेश कांग्रेस कार्यालय पहुंचने को कहा गया है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं का अंबेडकर चौक पर पुतला दहन का कार्यक्रम भी प्रस्तावित है। पार्टी की ओर से निर्देश दिया गया है कि वहां मौजूद नेता और कार्यकर्ता कार्यक्रम पूरा होने के बाद सीधे शंकर नगर स्थित राजीव भवन पहुंचें। ऐसे में दो अलग-अलग राजनीतिक कार्यक्रमों के कारण दोपहर के समय शहर के कुछ प्रमुख हिस्सों में कार्यकर्ताओं और वाहनों की संख्या बढ़ सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd"><strong>Raipur BJP Congress Protest</strong> को देखते हुए ट्रैफिक पुलिस का सबसे ज्यादा फोकस बीटीआई मैदान से राजीव भवन के बीच के हिस्से पर है। प्रस्तावित घेराव के दौरान बीटीआई मैदान, अनुपम नगर चौक और दूरदर्शन कार्यालय की ओर जाने वाले मार्ग पर सामान्य ट्रैफिक प्रभावित हो सकता है। स्थिति के हिसाब से कुछ हिस्सों में वाहनों की आवाजाही सीमित या अस्थायी रूप से रोकी जा सकती है। पुलिस ने वाहन चालकों से पहले ही वैकल्पिक मार्ग चुनने को कहा है, ताकि प्रदर्शन वाले क्षेत्र में अनावश्यक भीड़ न बढ़े। सबसे ज्यादा बदलाव खम्हारडीह, कचना, शंकर नगर, अनुपम नगर और अशोका रतन की तरफ आने-जाने वाले लोगों को ध्यान में रखना होगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">खम्हारडीह और कचना की दिशा में जाने वाले जो वाहन सामान्य दिनों में अनुपम नगर चौक से बीटीआई होकर गुजरते हैं, उन्हें शंकर नगर एक्सप्रेस-वे या बॉटल हाउस गली की ओर डायवर्ट किया जा सकता है। इन रास्तों का इस्तेमाल कर वाहन प्रदर्शन वाले मुख्य क्षेत्र से बचकर आगे निकल सकेंगे। इसी तरह खम्हारडीह से एसआरपी चौक की तरफ आने-जाने वाले वाहन चालकों को अवंति विहार, बॉटल हाउस और शंकर नगर अंडरब्रिज के रास्ते जाने की सलाह दी गई है। यह वैकल्पिक व्यवस्था उस स्थिति में ज्यादा महत्वपूर्ण होगी जब प्रदर्शन के दौरान अनुपम नगर चौक और बीटीआई क्षेत्र में कार्यकर्ताओं की भीड़ बढ़ती है। अशोका रतन और वीआईपी टर्निंग की तरफ जाने वाले वाहन चालकों के लिए भी अलग रूट सुझाया गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">अनुपम नगर चौक की तरफ से इस दिशा में जाने वाले लोग लोधीपारा चौक होकर आगे जा सकते हैं। इसके अलावा दूरदर्शन कार्यालय पहुंचने से पहले डॉ. पहलाजानी गली का इस्तेमाल वैकल्पिक मार्ग के रूप में किया जा सकता है। यदि अनुपम नगर चौक से अशोका रतन की ओर जाने वाला रास्ता पूरी तरह बंद करना पड़ता है तो वाहन लोधीपारा-मोवा मार्ग से निकल सकेंगे। ट्रैफिक पुलिस मौके की स्थिति के अनुसार डायवर्जन लागू करेगी। इसलिए संभव है कि कार्यक्रम के दौरान कुछ रास्ते थोड़े समय के लिए खुले रहें और भीड़ बढ़ने पर वहां आवाजाही नियंत्रित कर दी जाए।</p>
<p>शंकर नगर राजधानी के व्यस्त इलाकों में शामिल है और यहां प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय होने के कारण राजनीतिक प्रदर्शन के समय आसपास के मार्गों पर अक्सर अतिरिक्त दबाव बढ़ जाता है। इस बार स्थिति इसलिए भी अलग है क्योंकि भाजयुमो ने सीधे राजीव भवन के घेराव का कार्यक्रम घोषित किया है और कांग्रेस ने भी अपने कार्यकर्ताओं को कार्यालय पहुंचने का संदेश दिया है। दोनों तरफ से कार्यकर्ताओं के जुटने के कारण पुलिस और ट्रैफिक टीम की मौजूदगी बढ़ाई जा सकती है। बीटीआई मैदान से निकलने वाले भाजयुमो कार्यकर्ताओं के संभावित मार्ग और राजीव भवन के आसपास यातायात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने पहले से तैयारी की है। सामान्य लोगों के लिए सबसे जरूरी जानकारी यह है कि अनुपम नगर चौक से बीटीआई मैदान और दूरदर्शन कार्यालय की ओर जाने वाला नियमित रास्ता कार्यक्रम के दौरान सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकता है।</p>
<p>खम्हारडीह और कचना जाने वाले वाहन शंकर नगर एक्सप्रेस-वे का विकल्प चुन सकते हैं। बॉटल हाउस गली भी एक वैकल्पिक रास्ता रहेगा। एसआरपी चौक की दिशा में आवाजाही करने वालों को अवंति विहार होते हुए निकलने का विकल्प दिया गया है। अशोका रतन की तरफ जाने वाले लोग लोधीपारा चौक से रास्ता बदल सकते हैं। जरूरत पड़ने पर लोधीपारा-मोवा मार्ग का इस्तेमाल भी किया जा सकेगा। पुलिस ने लोगों से प्रभावित क्षेत्र में अनावश्यक रूप से वाहन लेकर नहीं जाने की अपील की है। विशेष रूप से कार्यक्रम के समय बीटीआई मैदान, अनुपम नगर और राजीव भवन के आसपास जाने वाले लोगों को अतिरिक्त समय लेकर निकलने की सलाह दी गई है।</p>
<p>मौके पर तैनात ट्रैफिक पुलिसकर्मी भीड़ और राजनीतिक कार्यक्रम की स्थिति देखकर वाहनों को दूसरे रास्तों पर भेज सकते हैं। वाहन चालकों से बैरिकेडिंग और पुलिसकर्मियों के निर्देशों का पालन करने को कहा गया है। दूसरी ओर राजनीतिक स्तर पर दोनों दलों ने अपने-अपने कार्यकर्ताओं को सक्रिय कर दिया है। भाजयुमो कार्यकर्ताओं को बीटीआई मैदान से प्रदेश कांग्रेस कार्यालय की ओर पहुंचना है, जबकि कांग्रेस ने अंबेडकर चौक के कार्यक्रम में मौजूद नेताओं और कार्यकर्ताओं से वहां से सीधे राजीव भवन आने को कहा है। ऐसे में अंबेडकर चौक से शंकर नगर की तरफ भी राजनीतिक कार्यकर्ताओं और वाहनों की आवाजाही बढ़ सकती है। पुलिस की नजर मुख्य प्रदर्शन स्थल के साथ आसपास के संपर्क मार्गों पर भी रहेगी। कार्यक्रम की अवधि और भीड़ की स्थिति के आधार पर ट्रैफिक डायवर्जन में मौके पर बदलाव किया जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>चुनाव</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Jul 2026 14:13:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Priyanka ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>संसद परिसर में PM मोदी का ‘56 साल के युवा’ वाला तंज, राहुल गांधी का नाम लिए बिना साधा निशाना</title>
                                    <description><![CDATA[मानसून सत्र के पहले दिन युवा शक्ति और स्पेस स्टार्टअप की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने किया कटाक्ष, टिप्पणी सुन पीछे खड़े किरेन रिजिजू भी हंस पड़े]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/pm-modis-56-year-old-youth-taunt-in-parliament-complex/article-59308"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/pm-modi-rahul-gandhi.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">संसद के मानसून सत्र के पहले दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मीडिया ब्रीफिंग में एक राजनीतिक टिप्पणी चर्चा का विषय बन गई। पीएम मोदी देश के युवा उद्यमियों और स्टार्टअप की उपलब्धियों का जिक्र कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने ‘56 साल के युवा’ का उल्लेख करते हुए ऐसा तंज किया, जिसे कांग्रेस नेता राहुल गांधी से जोड़कर देखा जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रधानमंत्री ने संसद परिसर के बाहर मीडिया को संबोधित करते हुए भारत के युवाओं की उपलब्धियों पर बात की। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी अलग-अलग क्षेत्रों में नए रिकॉर्ड बना रही है और देश का नाम आगे बढ़ा रही है। टेक्नोलॉजी और अंतरिक्ष क्षेत्र में भारतीय युवाओं की बढ़ती भूमिका का भी उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया।</p>
<p class="isSelectedEnd">पीएम मोदी ने अपने संबोधन में स्पेस सेक्टर से जुड़े भारतीय स्टार्टअप स्काईरूट एयरोस्पेस का जिक्र किया। उन्होंने कंपनी की युवा टीम की उपलब्धियों को उदाहरण के तौर पर सामने रखा। प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें जानकारी दी गई है कि इस उपलब्धि से जुड़ी टीम के सदस्यों की औसत उम्र केवल 28 वर्ष है।</p>
<p class="isSelectedEnd">इसी बात को आगे बढ़ाते हुए प्रधानमंत्री ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि वह किसी ‘56 साल के युवा’ की बात नहीं कर रहे हैं। उन्होंने किसी नेता का नाम नहीं लिया, लेकिन इस टिप्पणी को राहुल गांधी पर राजनीतिक कटाक्ष के रूप में देखा गया। राहुल गांधी की उम्र 56 वर्ष होने के कारण प्रधानमंत्री की टिप्पणी तुरंत चर्चा में आ गई।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रधानमंत्री के इतना कहते ही उनके पीछे मौजूद केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू हंसते हुए दिखाई दिए। इस दौरान वहां मौजूद अन्य नेताओं की प्रतिक्रिया भी कैमरों में दर्ज हुई। पीएम मोदी ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए फिर देश के युवाओं और उनकी उपलब्धियों पर ध्यान केंद्रित किया।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रधानमंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय आई, जब मानसून सत्र के पहले ही दिन सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक माहौल गर्म दिखाई दिया। विपक्ष कई मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार को घेरने की तैयारी के साथ संसद पहुंचा, जबकि सरकार ने सत्र में चर्चा और विधायी कामकाज को आगे बढ़ाने की बात कही।</p>
<p class="isSelectedEnd">मीडिया ब्रीफिंग में पीएम मोदी ने कहा कि देश की युवा पीढ़ी नए क्षेत्रों में संभावनाओं के दरवाजे खोल रही है। स्टार्टअप से लेकर स्पेस टेक्नोलॉजी तक भारतीय युवा अपनी क्षमताओं के दम पर आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी को भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र के विस्तार से जोड़कर देखा।</p>
<p class="isSelectedEnd">स्काईरूट एयरोस्पेस का उल्लेख इसी संदर्भ में किया गया। कंपनी भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र में सक्रिय प्रमुख स्टार्टअप में शामिल है। पीएम ने युवा टीम की औसत उम्र का जिक्र करते हुए इसे देश में तेजी से विकसित हो रहे स्टार्टअप इकोसिस्टम और नई पीढ़ी की तकनीकी क्षमता का उदाहरण बताया।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रधानमंत्री की ‘56 साल के युवा’ वाली टिप्पणी ने हालांकि उनके युवा शक्ति से जुड़े संदेश के बीच राजनीतिक रंग भी जोड़ दिया। राहुल गांधी का नाम सीधे नहीं लिया गया, लेकिन उनकी उम्र के कारण सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में इस बयान को उन्हीं पर निशाने के रूप में देखा जाने लगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">राहुल गांधी भी मानसून सत्र के पहले दिन संसद पहुंचे। विपक्ष की ओर से सरकार को विभिन्न राष्ट्रीय मुद्दों पर घेरने की रणनीति बनाई गई है। ऐसे में सत्र की शुरुआत में ही प्रधानमंत्री की टिप्पणी ने भाजपा और कांग्रेस के बीच चलने वाली राजनीतिक बयानबाजी को नया मुद्दा दे दिया।</p>
<p class="isSelectedEnd">पीएम मोदी ने अपने संबोधन में संसद के कामकाज को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने मानसून और मानसून सत्र के बीच तुलना करते हुए सक्रिय और उत्पादक माहौल की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका कहना था कि संसद में मुद्दों पर तर्क और तथ्यों के आधार पर चर्चा होनी चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd">मानसून सत्र के दौरान सरकार कई महत्वपूर्ण विधायी विषयों को आगे बढ़ाने की तैयारी में है। दूसरी ओर विपक्ष अलग-अलग मुद्दों पर चर्चा की मांग कर रहा है। ऐसे में सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक बहस देखने को मिल सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd">संसद सत्र की शुरुआत से पहले प्रधानमंत्री का मीडिया को संबोधित करना राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान सरकार अपनी प्राथमिकताओं और सत्र से अपेक्षाओं को सामने रखती है। इस बार पीएम ने संसदीय कामकाज के साथ युवा शक्ति, स्टार्टअप और अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों को प्रमुखता से उठाया।</p>
<p class="isSelectedEnd">स्पेस सेक्टर में निजी कंपनियों की भागीदारी पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ी है। युवा इंजीनियर, वैज्ञानिक और उद्यमी इस क्षेत्र में नए स्टार्टअप शुरू कर रहे हैं। पीएम मोदी ने इसी बदलाव को नई पीढ़ी की क्षमता से जोड़ते हुए 28 साल की औसत उम्र वाली टीम का उदाहरण दिया।</p>
<p>हालांकि इसी दौरान की गई एक लाइन ने राजनीतिक चर्चा का रुख बदल दिया। ‘56 साल के युवा’ वाली टिप्पणी के बाद किरेन रिजिजू की हंसी का वीडियो भी चर्चा में आ गया। सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री के बयान के इस हिस्से को राहुल गांधी पर किए गए राजनीतिक कटाक्ष के रूप में साझा किया जाने लगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>चुनाव</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Jul 2026 18:33:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Priyanka ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>संसद के मानसून सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक में सियासी टकराव, 40 दल पहुंचे; विपक्ष ने बीच बैठक किया सांकेतिक वॉकआउट</title>
                                    <description><![CDATA[तीन घंटे चली सर्वदलीय बैठक में सरकार ने सभी दलों से संसद की कार्यवाही सुचारु रखने में सहयोग मांगा, TMC के बागी सांसदों के गुट को बुलाने पर विपक्ष ने आपत्ति जताई]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/election/political-conflict-in-the-all-party-meeting-before-the-monsoon-session/article-59178"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/parliament-monsoon-session-2026-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">नई दिल्ली में संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से ठीक एक दिन पहले रविवार को सियासी गतिविधियां तेज रहीं। संसद भवन की एनेक्सी बिल्डिंग में सरकार की ओर से बुलाई गई सर्वदलीय बैठक करीब तीन घंटे तक चली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, डीएमके समेत करीब 40 राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि शामिल हुए। सरकार ने सभी दलों के सामने आगामी सत्र के कामकाज को लेकर अपनी प्राथमिकताएं रखीं और संसद के दोनों सदनों को बिना अनावश्यक व्यवधान के चलाने के लिए सहयोग मांगा। हालांकि बैठक के दौरान TMC से अलग हुए सांसदों के एक समूह की मौजूदगी को लेकर विवाद खड़ा हो गया और कई विपक्षी दलों ने इसका विरोध करते हुए सांकेतिक वॉकआउट किया।</p>
<p>सर्वदलीय बैठक के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि चर्चा के दौरान सभी राजनीतिक दलों ने अपने-अपने मुद्दे और सुझाव सामने रखे। उनका कहना था कि संसद की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों को इसमें सहयोग करना होगा। सरकार की कोशिश है कि महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा के साथ प्रस्तावित विधायी कामकाज भी पूरा किया जाए। दूसरी तरफ विपक्ष मानसून सत्र के दौरान कई राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगने की तैयारी में है।</p>
<p>संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त 2026 तक प्रस्तावित है। इस अवधि में कुल 19 बैठकें होने की बात कही गई है। सत्र के दौरान सरकार कई विधायी विषयों को आगे बढ़ाने की तैयारी में है, जबकि विपक्ष अलग-अलग मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की मांग कर सकता है। मानसून सत्र के शुरुआती दिनों के विधायी एजेंडे पर भी सभी की नजर रहेगी। किसी भी नए विधेयक को पेश किए जाने की अंतिम और आधिकारिक स्थिति संबंधित सदन की सूचीबद्ध कार्यसूची से स्पष्ट होगी।</p>
<p>सर्वदलीय बैठक में सबसे ज्यादा विवाद TMC से अलग हुए सांसदों के गुट को आमंत्रित किए जाने को लेकर हुआ। तृणमूल कांग्रेस और कई अन्य विपक्षी दलों ने सवाल उठाया कि जब इस समूह की संसदीय स्थिति और मान्यता को लेकर प्रक्रिया पर विवाद बना हुआ है, तब उसे अलग राजनीतिक समूह के रूप में बैठक में किस आधार पर जगह दी गई। विपक्षी नेताओं ने इसी मुद्दे पर अपना विरोध दर्ज कराया और कुछ समय के लिए बैठक से बाहर चले गए।</p>
<p>TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके, झारखंड मुक्ति मोर्चा, आम आदमी पार्टी, नेशनल कॉन्फ्रेंस, वाम दलों और शिवसेना (यूबीटी) समेत विपक्ष के कई दलों ने आपत्ति दर्ज कराई। उनका सवाल था कि तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए सांसदों के समूह की स्थिति को लेकर जब संसदीय और कानूनी प्रक्रियाएं पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं, तब उनके प्रतिनिधियों को सर्वदलीय बैठक में अलग पहचान के साथ बुलाने का आधार क्या है। विपक्ष ने इस मामले में दल-बदल से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों का भी हवाला दिया।</p>
<p>इस पूरे विवाद के बीच सुदीप बंदोपाध्याय की बैठक में मौजूदगी भी चर्चा का विषय बनी। उन्होंने खुद को नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया यानी NCPI के नेता के रूप में बैठक में शामिल होने की बात कही। विपक्ष ने इसी दावे को लेकर सरकार से स्पष्टीकरण मांगा। विपक्षी दलों का कहना है कि सांसदों के किसी समूह को नई राजनीतिक पहचान मिलने, संसदीय दल की स्थिति तय होने और अयोग्यता से जुड़े मामलों के बीच स्पष्ट कानूनी प्रक्रिया का पालन होना चाहिए।</p>
<p>TMC की ओर से 91वें संविधान संशोधन और दल-बदल विरोधी प्रावधानों का मुद्दा भी उठाया गया। विपक्ष का तर्क है कि सांसदों के किसी अलग समूह की स्थिति तय करने में संविधान की दसवीं अनुसूची और उससे जुड़े नियम महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे में यदि किसी सांसद के खिलाफ अयोग्यता का मामला लंबित है या नई राजनीतिक इकाई की संसदीय स्थिति स्पष्ट नहीं है, तो सरकार और संसद प्रशासन को पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से सामने रखनी चाहिए।</p>
<p>बैठक में हुए विवाद के बावजूद सरकार ने चर्चा को उपयोगी बताया। संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू के मुताबिक अलग-अलग दलों ने अपनी प्राथमिकताएं सरकार के सामने रखीं और आगामी सत्र को बेहतर तरीके से चलाने पर बातचीत हुई। सरकार चाहती है कि सदन में मुद्दों पर बहस हो और निर्धारित समय का अधिकतम उपयोग किया जाए। विपक्ष की ओर से भी जनहित और राजनीतिक महत्व के मुद्दों के लिए पर्याप्त समय देने की मांग सामने आने की संभावना है।</p>
<p>मानसून सत्र के दौरान वंदे मातरम से जुड़े विषय को लेकर भी राजनीतिक चर्चा बनी हुई है। किसी नए विधेयक या प्रस्ताव की वास्तविक प्रकृति संसद की आधिकारिक कार्यसूची से ही स्पष्ट होगी। वंदे मातरम से जुड़े ऐतिहासिक और राजनीतिक विषय पहले भी संसद में चर्चा का हिस्सा रहे हैं। ऐसे में इस मुद्दे से संबंधित किसी नए विधायी प्रस्ताव को लेकर सरकार की ओर से आधिकारिक संसदीय दस्तावेज सामने आने पर तस्वीर साफ होगी।</p>
<p>संसद का कोई भी बड़ा सत्र शुरू होने से पहले सर्वदलीय बैठक बुलाने का मुख्य उद्देश्य सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच संवाद स्थापित करना होता है। इसमें सरकार प्रस्तावित विधायी एजेंडे की जानकारी देती है, जबकि विपक्ष और अन्य राजनीतिक दल उन मुद्दों को सामने रखते हैं जिन्हें वे संसद में उठाना चाहते हैं। इसके अलावा संवेदनशील विषयों पर सहमति बनाने, चर्चा के लिए समय तय करने और दोनों सदनों में कामकाज को बेहतर ढंग से संचालित करने की कोशिश भी की जाती है।</p>
<p>हालांकि सर्वदलीय बैठक में सहमति बनने के बाद भी संसद का पूरा सत्र बिना हंगामे के चले, इसकी कोई गारंटी नहीं होती। कई बार किसी ताजा राजनीतिक घटनाक्रम, जांच, आर्थिक फैसले, विदेश नीति, कानून-व्यवस्था या अन्य मुद्दों को लेकर विपक्ष तत्काल चर्चा की मांग करता है। सरकार और विपक्ष के बीच चर्चा के नियम और समय को लेकर सहमति नहीं बनने पर सदन की कार्यवाही प्रभावित हो सकती है। यही कारण है कि मानसून सत्र से पहले हुई इस बैठक को आने वाले राजनीतिक टकराव और संसदीय रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>
<p>तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए 20 सांसदों का मामला भी मानसून सत्र में राजनीतिक बहस का विषय बन सकता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इन सांसदों की नई राजनीतिक पहचान और संसद में उनकी बैठने की व्यवस्था को लेकर पिछले कुछ समय से घटनाक्रम तेजी से बदले हैं। विपक्ष का कहना है कि केवल अलग सीटिंग व्यवस्था मिलना और किसी समूह को औपचारिक संसदीय मान्यता मिलना अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। इसलिए इस पूरे मामले में लोकसभा अध्यक्ष के स्तर पर होने वाली संवैधानिक और संसदीय कार्रवाई पर नजर रहेगी।</p>
<p>इसी तरह शिवसेना की अंदरूनी राजनीति से जुड़े सांसदों की बैठने की व्यवस्था में बदलाव का मामला भी चर्चा में है। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले गुट से अलग होकर दूसरे खेमे में गए सांसदों की संसदीय स्थिति को लेकर हुए बदलाव के बाद विपक्ष दल-बदल कानून के इस्तेमाल और उसके अलग-अलग मामलों में लागू होने के तरीके पर सवाल उठा सकता है। मानसून सत्र में ऐसे मुद्दे सरकार के विधायी एजेंडे के साथ-साथ राजनीतिक बहस को भी तेज कर सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>चुनाव</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Jul 2026 14:59:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Priyanka ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दिग्विजय सिंह ने सोशल मीडिया से बनाई दूरी, X अकाउंट ऑफिस को सौंपा; उज्जैन से अयोध्या तक करेंगे पदयात्रा</title>
                                    <description><![CDATA[20 अक्टूबर से महाकाल की नगरी से शुरू होगी यात्रा, राम मंदिर चंदे के हिसाब और पारदर्शिता का मुद्दा उठाएंगे]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/digvijay-singh-kept-distance-from-social-media-handed-over-account/article-59130"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/digvijaya-singh-social-media.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने अपनी प्रस्तावित उज्जैन-अयोध्या पदयात्रा से पहले सोशल मीडिया और निजी मोबाइल के इस्तेमाल से दूरी बनाने का फैसला किया है। उन्होंने अपने आधिकारिक X अकाउंट का संचालन कार्यालय की टीम को सौंप दिया है, जबकि निजी मोबाइल फोन की जिम्मेदारी अपने सचिव को दी है। दिग्विजय सिंह का कहना है कि पदयात्रा के दौरान वे सोशल मीडिया पर सक्रिय नहीं रहेंगे और राजनीतिक बयानबाजी से भी दूरी बनाएंगे। उनकी पदयात्रा 20 अक्टूबर 2026 को उज्जैन से शुरू होकर अयोध्या तक जाएगी।</p>
<p>दिग्विजय सिंह लंबे समय से सोशल मीडिया पर सक्रिय रहे हैं और विभिन्न राजनीतिक एवं सामाजिक मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया देते रहे हैं। अब उन्होंने अपने X अकाउंट के व्यक्तिगत संचालन से खुद को अलग कर लिया है। उनके पहले इस्तेमाल किए जा रहे अकाउंट को कार्यालय के माध्यम से संचालित किए जाने की व्यवस्था की गई है। इसका उद्देश्य यह स्पष्ट करना बताया जा रहा है कि भविष्य में उस अकाउंट से जारी होने वाली सूचनाएं व्यक्तिगत पोस्ट के बजाय उनके कार्यालय की ओर से साझा की जाएंगी।</p>
<p>इसके साथ ही दिग्विजय सिंह ने अपना निजी मोबाइल फोन भी सचिव सचिन वत्स को सौंप दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए जानकारी दी कि अब उनके निजी नंबर का इस्तेमाल सचिव करेंगे। फोन पर आने वाले जरूरी संदेशों और महत्वपूर्ण सूचनाओं की जानकारी उन्हें सचिव के माध्यम से दी जाएगी। इस फैसले को उन्होंने आगामी पदयात्रा के दौरान व्यक्तिगत रूप से सोशल मीडिया और मोबाइल से दूर रहने की अपनी योजना से जोड़ा है।</p>
<p>दिग्विजय सिंह की प्रस्तावित पदयात्रा मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर से शुरू होकर उत्तर प्रदेश के अयोध्या तक जाएगी। पहले इस यात्रा को 2 अक्टूबर यानी गांधी जयंती से शुरू करने की बात सामने आई थी, लेकिन बाद में कार्यक्रम में बदलाव करते हुए इसकी शुरुआत 20 अक्टूबर से करने का निर्णय लिया गया। यात्रा का समापन अयोध्या में प्रस्तावित है।</p>
<p>दिग्विजय सिंह ने इस यात्रा को किसी राजनीतिक दल के झंडे या औपचारिक पार्टी अभियान से अलग रखने की बात कही है। उनका कहना है कि यात्रा का उद्देश्य धार्मिक आस्था से जुड़े आर्थिक मामलों में जवाबदेही और पारदर्शिता के सवाल उठाना है। विशेष रूप से राम मंदिर निर्माण के लिए देशभर से जुटाए गए दान और उसके उपयोग से जुड़े विषयों को वे इस यात्रा के दौरान प्रमुखता से उठाने की तैयारी में हैं।</p>
<p>उन्होंने दावा किया है कि राम मंदिर के लिए श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान के हिसाब को लेकर कई सवाल हैं, जिन पर स्पष्ट जानकारी सामने आनी चाहिए। दिग्विजय सिंह स्वयं भी मंदिर निर्माण के लिए 1 लाख 11 हजार रुपए का योगदान देने की बात कह चुके हैं। उनका कहना है कि जिन लोगों ने अपनी आस्था के साथ मंदिर निर्माण के लिए आर्थिक सहयोग दिया, उन्हें यह जानने का अधिकार है कि राशि का उपयोग किस तरह किया गया।</p>
<p>दिग्विजय सिंह ने संकेत दिया है कि इस मुद्दे पर वे कानूनी रास्ता भी अपना सकते हैं। इसके लिए कानूनी विशेषज्ञों से सलाह लेने और जरूरत पड़ने पर अयोध्या में न्यायालय का रुख करने की बात कही गई है। हालांकि दान में कथित अनियमितताओं से जुड़े उनके आरोपों को स्वतंत्र रूप से प्रमाणित किया जाना बाकी है और संबंधित संस्थाओं का पक्ष भी इस मामले में महत्वपूर्ण होगा।</p>
<p>उन्होंने राम मंदिर निर्माण के लिए दान देने वाले श्रद्धालुओं से भी यात्रा में शामिल होने की अपील की है। दिग्विजय सिंह चाहते हैं कि ऐसे लोग अपनी दान रसीद के साथ पदयात्रा का हिस्सा बनें। इसके जरिए वे दान के हिसाब और पारदर्शिता की मांग को सार्वजनिक स्तर पर उठाने की तैयारी कर रहे हैं।</p>
<p>पूर्व मुख्यमंत्री ने अपनी उम्र और राजनीतिक जीवन को लेकर भी महत्वपूर्ण बात कही है। उन्होंने कहा है कि वे अब 80 वर्ष की आयु में पहुंच चुके हैं और कांग्रेस नेतृत्व के सामने अपनी इच्छा रख चुके हैं कि पार्टी में युवा नेताओं को ज्यादा अवसर दिया जाना चाहिए। उनका कहना है कि कांग्रेस ने उन्हें विधायक, सांसद, राज्यसभा सदस्य और मुख्यमंत्री सहित कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाने का अवसर दिया है।</p>
<p>दिग्विजय सिंह के अनुसार अब वे अपना अधिक समय धार्मिक और सामाजिक विषयों से जुड़े कार्यों में लगाना चाहते हैं। उन्होंने इसे ‘धर्म के लिए काम करने’ की इच्छा से जोड़ा है। हालांकि उन्होंने औपचारिक रूप से सक्रिय राजनीति छोड़ने की घोषणा नहीं की है। फिलहाल उनका जोर इस बात पर है कि प्रस्तावित यात्रा को पार्टी की नियमित राजनीतिक गतिविधि की तरह न देखा जाए।</p>
<p>पदयात्रा के दौरान राजनीतिक बयान और सोशल मीडिया पोस्ट नहीं करने की उनकी घोषणा भी इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। उन्होंने कहा है कि यात्रा के दौरान वे Facebook और X जैसे प्लेटफॉर्म पर व्यक्तिगत रूप से राजनीतिक सामग्री पोस्ट नहीं करेंगे। उनके सोशल मीडिया अकाउंट से यदि कोई आधिकारिक सूचना आती है तो उसका संचालन कार्यालय की टीम करेगी।</p>
<p>इस यात्रा में किसी बड़े राजनीतिक चेहरे को मुख्य अतिथि बनाने के बजाय अयोध्या आंदोलन से जुड़े कारसेवक संतोष दुबे को प्रमुख अतिथि बनाए जाने की बात कही गई है। दिग्विजय सिंह के मुताबिक संतोष दुबे अयोध्या आंदोलन के दौरान घायल हुए थे। इस चयन के जरिए यात्रा को सीधे राजनीतिक मंच के बजाय धार्मिक और जवाबदेही से जुड़े अभियान के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश दिखाई देती है।</p>
<p>दिग्विजय सिंह की इस घोषणा ने मध्य प्रदेश के राजनीतिक हलकों में भी चर्चा बढ़ा दी है। लंबे राजनीतिक करियर के बाद सोशल मीडिया से व्यक्तिगत दूरी, मोबाइल सचिव को सौंपने और उज्जैन से अयोध्या तक लंबी पदयात्रा करने का फैसला उनके सार्वजनिक जीवन में एक अलग चरण के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि वे कांग्रेस से जुड़े हुए हैं और पार्टी में उनकी वरिष्ठ भूमिका बनी हुई है।</p>
<p>उज्जैन से यात्रा की शुरुआत के पीछे धार्मिक महत्व भी जुड़ा है। महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग से यात्रा शुरू कर अयोध्या तक जाने की योजना के जरिए दो प्रमुख धार्मिक स्थलों को जोड़ा जाएगा। यात्रा किन शहरों और जिलों से होकर गुजरेगी, प्रतिदिन कितनी दूरी तय की जाएगी और इसमें कितने लोग शामिल होंगे, इससे जुड़ा विस्तृत कार्यक्रम आगे सामने आने की उम्मीद है।</p>
<p>राम मंदिर से जुड़े दान को यात्रा का प्रमुख मुद्दा बनाए जाने के कारण आने वाले समय में इस पर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज हो सकती है। दिग्विजय सिंह इसे पारदर्शिता और श्रद्धालुओं के पैसे के हिसाब से जुड़ा विषय बता रहे हैं। साथ ही उन्होंने दावा किया है कि उनकी यात्रा किसी राजनीतिक पार्टी के बैनर पर आयोजित नहीं होगी और इसका मुख्य उद्देश्य धार्मिक आस्था से जुड़े आर्थिक मामलों में जवाबदेही की मांग करना रहेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>चुनाव</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Jul 2026 18:52:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Priyanka ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अभिषेक बनर्जी से जुड़े अमतला ऑफिस पर चला बुलडोजर, अवैध निर्माण के आरोप में प्रशासन की बड़ी कार्रवाई</title>
                                    <description><![CDATA[दक्षिण 24 परगना में भारी सुरक्षा के बीच तोड़फोड़, प्रशासन ने निर्माण संबंधी मंजूरियों में गड़बड़ी का आरोप लगाया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/election/bulldozer-hits-amtala-office-linked-to-abhishek-banerjee-major-action/article-59123"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/abhishek-banerjee-office.jpg" alt=""></a><br /><p>पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के अमतला में तृणमूल कांग्रेस के सांसद और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी से जुड़े कार्यालय पर शनिवार को प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की। कथित तौर पर जरूरी निर्माण स्वीकृति और वैधानिक अनुमति नहीं होने के आरोप में भवन के हिस्सों को बुलडोजर से गिराया गया। कार्रवाई की संवेदनशीलता को देखते हुए सुबह से ही इलाके में भारी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में बुलडोजर मौके पर पहुंचे और तोड़फोड़ की कार्रवाई शुरू की गई।</p>
<p>प्रशासन के मुताबिक, संबंधित भवन के निर्माण से जुड़े स्वीकृत नक्शे और आवश्यक दस्तावेजों को लेकर सवाल उठे थे। अधिकारियों का दावा है कि इस संबंध में पहले भी संबंधित पक्ष को नोटिस जारी कर जरूरी कागजात और स्पष्टीकरण मांगा गया था। तय प्रक्रिया के तहत जवाब नहीं मिलने या आवश्यक अनुपालन पूरा नहीं होने के बाद प्रशासन ने कार्रवाई आगे बढ़ाई। हालांकि, निर्माण की वैधता और प्रशासन की पूरी प्रक्रिया को लेकर संबंधित पक्ष का विस्तृत आधिकारिक जवाब सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।</p>
<p>कार्रवाई शुरू होने से पहले पूरे क्षेत्र की घेराबंदी की गई। कार्यालय के आसपास बैरिकेड लगाए गए और आम लोगों की आवाजाही को नियंत्रित किया गया। बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों के साथ प्रशासनिक अधिकारी और अन्य संबंधित विभागों की टीमें मौके पर मौजूद रहीं। किसी भी तरह के विरोध या कानून-व्यवस्था की स्थिति से निपटने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल भी तैनात रखा गया। बुलडोजर की मदद से प्रशासन ने भवन के चिन्हित हिस्सों को हटाने की प्रक्रिया शुरू की।</p>
<p>इस मामले में जमीन और संपत्ति से जुड़े दस्तावेज भी चर्चा में हैं। प्रशासनिक स्तर पर यह जांच की जा रही है कि जिस जमीन पर कार्यालय बनाया गया, उससे जुड़े रिकॉर्ड क्या हैं और निर्माण के लिए जरूरी अनुमतियां किस स्तर पर ली गई थीं। संपत्ति के स्वामित्व को लेकर भी अलग-अलग दावे सामने आए हैं। ऐसे में जमीन के रिकॉर्ड, भवन निर्माण की अनुमति और अन्य वैधानिक दस्तावेज पूरे मामले की जांच में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।</p>
<p>अभिषेक बनर्जी से जुड़ी संपत्तियों के निर्माण को लेकर इससे पहले भी सवाल उठ चुके हैं। अलग-अलग रिपोर्टों में दावा किया गया था कि कुछ संपत्तियों में कथित अनधिकृत निर्माण को लेकर संबंधित अधिकारियों ने नोटिस जारी किए थे। ऐसे मामलों में निर्माण की मंजूरी और दस्तावेज पेश करने के लिए समय दिया गया था। अमतला स्थित कार्यालय पर हुई ताजा कार्रवाई के बाद यह मुद्दा एक बार फिर पश्चिम बंगाल की राजनीति के केंद्र में आ गया है।</p>
<p>बुलडोजर कार्रवाई की खबर फैलते ही घटनास्थल के आसपास राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हो गईं। कुछ भाजपा समर्थक मौके के आसपास पहुंचे और नारेबाजी की। भाजपा से जुड़े लोगों ने प्रशासन की कार्रवाई का समर्थन किया और कार्यालय को लेकर कई आरोप लगाए। हालांकि, कार्यालय के कथित गैरकानूनी इस्तेमाल से जुड़े राजनीतिक आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। प्रशासन ने कार्रवाई का आधार मुख्य रूप से निर्माण संबंधी कथित उल्लंघन और आवश्यक अनुमतियों की कमी को बताया है।</p>
<p>अमतला में चले इस अभियान के दौरान पुलिस की प्राथमिकता कानून-व्यवस्था बनाए रखने की रही। वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में कार्रवाई की गई और भीड़ को बुलडोजर वाले क्षेत्र से दूर रखा गया। प्रशासनिक अमले के साथ आपात स्थिति से निपटने के लिए अन्य विभागों के कर्मचारी भी मौजूद रहे। पूरे ऑपरेशन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई, ताकि राजनीतिक समर्थकों या स्थानीय लोगों के बीच किसी तरह का टकराव न हो।</p>
<p>यह मामला राजनीतिक रूप से इसलिए भी अहम हो गया है क्योंकि अभिषेक बनर्जी पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के सबसे प्रभावशाली नेताओं में शामिल हैं। वे डायमंड हार्बर से सांसद हैं और पार्टी संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में उनसे जुड़े कार्यालय पर बुलडोजर चलने की घटना ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। प्रशासन जहां इसे निर्माण नियमों से जुड़ी कार्रवाई बता रहा है, वहीं इस घटनाक्रम के राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं।</p>
<p>अमतला कार्यालय पर कार्रवाई के बाद अब नजर इस बात पर भी रहेगी कि प्रशासन की ओर से निर्माण और जमीन से जुड़े दस्तावेजों को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं। यदि अन्य संपत्तियों में भी नियमों के उल्लंघन से जुड़े मामले लंबित हैं, तो उन पर भी प्रशासनिक कार्रवाई की संभावना को लेकर चर्चा तेज हो सकती है। वहीं, तृणमूल कांग्रेस या अभिषेक बनर्जी की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया आने के बाद इस मामले में राजनीतिक और कानूनी स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>चुनाव</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Jul 2026 18:51:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Priyanka ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अमित शाह से मिले एकनाथ शिंदे, छह सांसदों के साथ दिल्ली बैठक से कैबिनेट विस्तार की अटकलें तेज</title>
                                    <description><![CDATA[शिवसेना के नए सांसदों के साथ केंद्रीय गृह मंत्री से करीब 50 मिनट चर्चा, संसदीय रणनीति, विकास कार्यों और संगठनात्मक मुद्दों पर हुई बातचीत; मंत्रिमंडल में हिस्सेदारी को लेकर भी बढ़ी चर्चाएं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/election/eknath-shinde-meets-amit-shah-delhi-meeting-with-six-mps/article-58822"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/eknath-shinde.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने मंगलवार को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। इस बैठक में उनके साथ वे छह लोकसभा सांसद भी मौजूद रहे, जिन्होंने हाल ही में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) छोड़कर शिंदे गुट का दामन थामा है। करीब 50 मिनट तक चली इस बैठक को आगामी मानसून सत्र और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के भीतर समन्वय के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि बैठक का आधिकारिक एजेंडा विकास कार्यों और संगठनात्मक विषयों को बताया गया, लेकिन इसके बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल के संभावित विस्तार को लेकर राजनीतिक चर्चाएं भी तेज हो गई हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">यह बैठक ऐसे समय हुई है जब हाल ही में छह सांसदों के शिंदे गुट में शामिल होने से लोकसभा में उनकी ताकत बढ़ी है। इसी वजह से यह मुलाकात राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बैठक में शिवसेना के लोकसभा नेता डॉ. श्रीकांत शिंदे भी शामिल रहे। पार्टी सूत्रों के अनुसार, संसद के मानसून सत्र से पहले संसदीय रणनीति, संगठन को मजबूत करने और विभिन्न संसदीय क्षेत्रों से जुड़े विकास कार्यों पर विस्तार से चर्चा की गई।</p>
<p class="isSelectedEnd">बैठक के दौरान सांसदों ने अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में लंबित परियोजनाओं और बुनियादी ढांचे से जुड़े मामलों को भी केंद्रीय गृह मंत्री के सामने रखा। बताया गया कि कई परियोजनाएं ऐसी हैं, जिनके लिए केंद्र सरकार के सहयोग की आवश्यकता है। पार्टी नेताओं के मुताबिक अमित शाह ने प्रतिनिधिमंडल को भरोसा दिलाया कि विकास कार्यों और जनकल्याण योजनाओं के लिए केंद्र की ओर से आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा। नेताओं का कहना है कि इससे विभिन्न क्षेत्रों में रुकी हुई परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd">सूत्रों के अनुसार बैठक में एनडीए के भीतर शिवसेना (शिंदे गुट) की भूमिका पर भी चर्चा हुई। संसद के आगामी मानसून सत्र में विभिन्न विधेयकों, राजनीतिक मुद्दों और गठबंधन के समन्वय को लेकर भी विचार-विमर्श किया गया। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि लोकसभा में बढ़ती संख्या के बाद शिंदे गुट गठबंधन के भीतर अपनी भूमिका और प्रभाव को और मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">छह सांसदों के पार्टी में शामिल होने के बाद अब उनसे जुड़ी संसदीय औपचारिकताओं पर भी काम चल रहा है। सूत्रों का कहना है कि लोकसभा सचिवालय मानसून सत्र शुरू होने से पहले इन सांसदों के शिंदे गुट में विलय को औपचारिक मान्यता दे सकता है। यदि ऐसा होता है तो लोकसभा में शिंदे गुट की स्थिति और अधिक मजबूत होगी तथा संसदीय स्तर पर पार्टी को अतिरिक्त मजबूती मिलेगी। हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस बैठक के बाद सबसे अधिक चर्चा केंद्रीय मंत्रिमंडल के संभावित विस्तार को लेकर हो रही है। राजनीतिक गलियारों में ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि लोकसभा में संख्या बढ़ने के बाद शिंदे नेतृत्व वाली शिवसेना को केंद्र सरकार में अतिरिक्त प्रतिनिधित्व मिल सकता है। सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि भविष्य में होने वाले मंत्रिमंडल विस्तार में पार्टी को एक कैबिनेट मंत्री और एक राज्य मंत्री का पद मिल सकता है। हालांकि भारतीय जनता पार्टी या केंद्र सरकार की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd">राजनीतिक हलकों में डॉ. श्रीकांत शिंदे के नाम को भी संभावित केंद्रीय मंत्री के तौर पर जोड़ा जा रहा है। पार्टी के भीतर उनकी सक्रिय भूमिका और लोकसभा में नेतृत्व को देखते हुए उनके नाम की चर्चा तेज है। हालांकि यह पूरी तरह राजनीतिक अटकलों के दायरे में है और अंतिम निर्णय भाजपा नेतृत्व तथा केंद्र सरकार द्वारा ही लिया जाएगा। फिलहाल इस संबंध में किसी भी स्तर पर आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है।</p>
<p>राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दिल्ली में हुई यह बैठक भाजपा और शिंदे नेतृत्व वाली शिवसेना के बीच लगातार बढ़ते समन्वय का संकेत देती है। आगामी मानसून सत्र, संगठनात्मक विस्तार, संसदीय रणनीति और गठबंधन की राजनीतिक दिशा जैसे कई मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच संवाद जारी है। वहीं सांसदों के औपचारिक विलय और संभावित मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर अब राजनीतिक निगाहें आने वाले दिनों की गतिविधियों पर टिकी हुई हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>चुनाव</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/election/eknath-shinde-meets-amit-shah-delhi-meeting-with-six-mps/article-58822</link>
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                <pubDate>Wed, 15 Jul 2026 17:50:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Priyanka ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>'हर दरवाजे पर शीश नवाऊंगा...' कहते ही भावुक हुए नरोत्तम मिश्रा, मंच पर छलके आंसू</title>
                                    <description><![CDATA[आशुतोष तिवारी के समर्थन में सभा को संबोधित करते समय रुंध गया गला, सीएम डॉ. मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने संभाला; भाजपा ने एकजुटता का दिया संदेश]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/election/narottam-mishra-became-emotional-as-he-said-i-will-bow/article-58676"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/datia-by-election-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश के दतिया उपचुनाव ने सोमवार को उस समय भावनात्मक मोड़ ले लिया, जब भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा सार्वजनिक सभा के दौरान भावुक हो गए। भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के नामांकन के बाद आयोजित जनसभा में भाषण देते हुए उनका गला भर आया और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। मंच पर मौजूद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने उन्हें ढांढस बंधाया। यह दृश्य कुछ ही देर में सभा में मौजूद कार्यकर्ताओं और लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया।</p>
<p style="text-align:justify;">दतिया उपचुनाव के लिए भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी ने सोमवार को अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे। नामांकन के बाद शहर के ऐतिहासिक किला चौक पर विशाल जनसभा आयोजित की गई, जिसमें भाजपा नेताओं ने कार्यकर्ताओं में जोश भरने और चुनावी जीत का विश्वास जताने का प्रयास किया।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>भाषण के दौरान भावुक हुए नरोत्तम मिश्रा</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">सभा को संबोधित करते हुए डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष भाजपा में मतभेद और फूट की बातें कर रहा है, लेकिन दतिया की धरती से यह साफ संदेश दिया जा रहा है कि पार्टी पूरी तरह एकजुट है। उन्होंने कहा कि भाजपा के सभी कार्यकर्ता और नेता मिलकर चुनाव लड़ेंगे और भारी मतों से जीत दर्ज करेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">अपने संबोधन के दौरान उन्होंने भाजपा की विचारधारा और संगठन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भाजपा के कार्यकर्ता बचपन से राष्ट्र सेवा की भावना लेकर घर से निकलते हैं और समाज की सेवा को अपना कर्तव्य मानते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके बाद उन्होंने कहा कि वह दतिया के हर घर और हर दरवाजे पर जाकर जनता के सामने सिर झुकाकर भाजपा प्रत्याशी के लिए समर्थन मांगेंगे। यह कहते-कहते उनका गला भर आया और वे कुछ क्षणों के लिए बोल नहीं सके। उनकी आंखें नम हो गईं और मंच पर भावुक माहौल बन गया।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>मुख्यमंत्री ने बंधाया हौसला</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">जैसे ही डॉ. नरोत्तम मिश्रा भावुक हुए, उनके बगल में बैठे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने उन्हें संभाला। दोनों नेताओं ने उनका हौसला बढ़ाया और कुछ देर बाद सभा का कार्यक्रम आगे बढ़ा। मंच पर मौजूद अन्य नेताओं और कार्यकर्ताओं ने तालियां बजाकर उनका उत्साह बढ़ाया।</p>
<p style="text-align:justify;">सभा में मौजूद लोगों ने इस पूरे घटनाक्रम को काफी भावनात्मक बताया। कई कार्यकर्ता भी इस दौरान भावुक नजर आए।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>भाजपा ने दिखाया एकजुटता का संदेश</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">दतिया उपचुनाव को भाजपा काफी महत्वपूर्ण मान रही है। ऐसे में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी को चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है। भाजपा नेताओं ने मंच से बार-बार यह संदेश देने की कोशिश की कि संगठन पूरी तरह एकजुट है और चुनाव में किसी प्रकार का आंतरिक मतभेद नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने अपने संबोधन में कहा कि भाजपा कार्यकर्ताओं की मेहनत और जनता के समर्थन के दम पर दतिया में जीत सुनिश्चित है। उन्होंने कहा कि पार्टी विकास और जनसेवा के मुद्दों पर जनता के बीच जा रही है और कार्यकर्ता पूरी ताकत से चुनाव अभियान में जुटे हुए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अपने संबोधन में डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने कांग्रेस पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस लगातार यह प्रचार कर रही है कि भाजपा के भीतर मतभेद हैं, लेकिन मंच पर मौजूद सभी नेता इस बात का प्रमाण हैं कि पार्टी पूरी मजबूती के साथ चुनाव लड़ रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि भाजपा विचारधारा आधारित संगठन है और यहां व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर संगठन और राष्ट्रहित को महत्व दिया जाता है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे घर-घर जाकर भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में मतदान की अपील करें।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>सीएम मोहन यादव ने जताया जीत का भरोसा</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">सभा समाप्त होने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मीडिया से बातचीत में कहा कि भाजपा पूरे आत्मविश्वास के साथ चुनाव मैदान में उतरी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, डॉ. नरोत्तम मिश्रा और पार्टी के सभी वरिष्ठ नेताओं के नेतृत्व में नामांकन प्रक्रिया पूरी हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री ने दावा किया कि भाजपा भारी बहुमत से उपचुनाव जीतेगी और जनता एक बार फिर पार्टी के विकास कार्यों पर भरोसा जताएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>चुनाव</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Jul 2026 18:50:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>वोटर बनने के नियम बदले, ऑनलाइन फॉर्म-6 में SIR से जुड़ा नया कॉलम अनिवार्य</title>
                                    <description><![CDATA[चुनाव आयोग ने ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया में किया बदलाव, नए मतदाताओं को माता-पिता के पुराने मतदाता रिकॉर्ड की जानकारी भी भरनी होगी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/election/rules-for-becoming-a-voter-changed-new-column-related-to/article-58574"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/election-commission.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">देश में नए मतदाताओं के पंजीकरण की प्रक्रिया में चुनाव आयोग ने एक अहम बदलाव किया है। अब वोटर लिस्ट में पहली बार नाम जुड़वाने के लिए ऑनलाइन आवेदन करने वाले नागरिकों को पहले की तुलना में अधिक जानकारी देनी होगी। निर्वाचन आयोग ने नए मतदाताओं के लिए इस्तेमाल होने वाले ऑनलाइन फॉर्म-6 में एक नया कॉलम जोड़ दिया है, जिसमें आवेदक को अपने या अपने माता-पिता के मतदाता रिकॉर्ड से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी भरनी होगी। इस बदलाव के बाद मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।</p>
<p>चुनाव आयोग के नए प्रावधान के अनुसार, ऑनलाइन फॉर्म-6 भरने वाले आवेदकों को यह बताना होगा कि उनके या उनके माता-पिता का नाम विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) के दौरान मतदाता सूची में किस स्थिति में था। यानी आवेदन करने वाले व्यक्ति को अपने परिवार के पुराने मतदाता रिकॉर्ड से संबंधित जानकारी भी उपलब्ध करानी होगी। आयोग का मानना है कि इससे मतदाता सूची को अधिक सटीक और अद्यतन बनाए रखने में मदद मिलेगी।</p>
<p>हालांकि इस बदलाव के साथ एक दिलचस्प स्थिति भी सामने आई है। फिलहाल यह नया कॉलम केवल ऑनलाइन फॉर्म-6 में जोड़ा गया है, जबकि ऑफलाइन आवेदन करने वालों के लिए उपलब्ध फॉर्म में ऐसा कोई अतिरिक्त प्रावधान नहीं है। यानी जो लोग ऑनलाइन आवेदन करेंगे, उन्हें यह जानकारी देना अनिवार्य होगा, जबकि ऑफलाइन आवेदन प्रक्रिया अभी पहले की तरह ही जारी है। यही अंतर अब कई सवाल भी खड़े कर रहा है।</p>
<p>जब तक इस बदलाव को कानूनी रूप से अधिसूचित नहीं किया जाता या संबंधित नियमों में संशोधन नहीं किया जाता, तब तक ऑनलाइन और ऑफलाइन प्रक्रिया में इस तरह का अंतर भ्रम की स्थिति पैदा कर सकता है। कई चुनाव विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी नियम को सभी आवेदकों पर लागू करना है तो उसे दोनों माध्यमों में समान रूप से लागू किया जाना चाहिए।</p>
<p>इस पूरे बदलाव की पृष्ठभूमि विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर अभियान से जुड़ी हुई है। चुनाव आयोग ने पिछले वर्ष कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची का व्यापक सत्यापन अभियान चलाया था। इस अभियान का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक पारदर्शी, अद्यतन और त्रुटिरहित बनाना था। इसके तहत मृत, स्थानांतरित, डुप्लीकेट और अन्य अयोग्य मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए।</p>
<p>आंकड़ों के अनुसार अब तक 10 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष गहन पुनरीक्षण का कार्य पूरा किया जा चुका है। इस अभियान के दौरान देशभर की मतदाता सूची से 5.58 करोड़ से अधिक नाम हटाए गए हैं। इतनी बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने के बाद अब नए मतदाताओं के पंजीकरण में अतिरिक्त जानकारी मांगे जाने को लेकर बहस तेज हो गई है।</p>
<p>यदि किसी परिवार के माता-पिता या अभिभावकों का नाम पहले किसी कारण से मतदाता सूची से हट चुका है, तो उनके बच्चों को नए मतदाता के रूप में पंजीकरण कराने में अतिरिक्त जांच का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि चुनाव आयोग की ओर से अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि ऐसी स्थिति में आवेदन स्वीकार करने की प्रक्रिया क्या होगी या इससे नए मतदाताओं के अधिकारों पर कोई प्रभाव पड़ेगा या नहीं।</p>
<p>ऑनलाइन आवेदन प्रणाली में लगातार डिजिटल बदलाव किए जा रहे हैं ताकि फर्जी या दोहराए गए पंजीकरण को रोका जा सके। चुनाव आयोग पिछले कुछ वर्षों से तकनीक के माध्यम से मतदाता सूची को बेहतर बनाने की दिशा में काम कर रहा है। आधार लिंकिंग, डिजिटल सत्यापन और ऑनलाइन आवेदन जैसी सुविधाओं के बाद अब फॉर्म-6 में नया कॉलम जोड़ना भी इसी दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है।</p>
<p>हालांकि कई सामाजिक संगठनों और चुनाव सुधार से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि नए नियम लागू करने से पहले व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाना चाहिए। बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जो पहली बार मतदान के लिए आवेदन करते हैं और उन्हें मतदाता पंजीकरण की प्रक्रिया की पूरी जानकारी नहीं होती। ऐसे में यदि आवेदन के दौरान अतिरिक्त जानकारी मांगी जाएगी तो लोगों को पहले उसके बारे में स्पष्ट जानकारी देना भी आवश्यक होगा।</p>
<p>इस बदलाव के बाद युवाओं के बीच भी यह सवाल उठ रहा है कि यदि उन्हें अपने माता-पिता के पुराने मतदाता रिकॉर्ड की जानकारी उपलब्ध नहीं है तो वे आवेदन कैसे करेंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में कई परिवारों के पास पुराने मतदाता रिकॉर्ड सुरक्षित नहीं होते। ऐसे मामलों में आवेदन प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका भी जताई जा रही है। चुनाव आयोग की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि ऑनलाइन आवेदन में नया कॉलम जोड़ा गया है, लेकिन इससे जुड़े विस्तृत दिशा-निर्देश और कानूनी संशोधन का इंतजार किया जा रहा है। आने वाले समय में आयोग इस संबंध में विस्तृत गाइडलाइन जारी कर सकता है, जिससे नए मतदाताओं और चुनाव अधिकारियों दोनों के लिए प्रक्रिया अधिक स्पष्ट हो सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>चुनाव</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/election/rules-for-becoming-a-voter-changed-new-column-related-to/article-58574</link>
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                <pubDate>Sun, 12 Jul 2026 18:00:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दतिया में धारा-163 लागू, बिना अनुमति सभा-जुलूस पर रोक; प्रशासन अलर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[टिकट विवाद के बाद हुए बवाल और हाईवे जाम की घटना के बाद प्रशासन ने पूरे दतिया अनुभाग में प्रतिबंधात्मक आदेश लागू कर दिए हैं। बिना अनुमति प्रदर्शन, रैली और पांच से अधिक लोगों के एकत्र होने पर रोक रहेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/section-163-imposed-in-datia-ban-on-meetings-and-processions/article-58471"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/datia-163.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">दतिया विधानसभा उपचुनाव से पहले जिले में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए पूरे दतिया अनुभाग में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), 2023 की धारा-163 लागू कर दी है। यह आदेश 10 जुलाई की रात 9 बजे से प्रभावी हो गया है और अगले आदेश तक लागू रहेगा। प्रशासन का कहना है कि हाल ही में हुए विरोध प्रदर्शन, राष्ट्रीय राजमार्ग पर लंबे चक्का जाम और हिंसक घटनाओं को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। अधिकारियों के अनुसार उपचुनाव के दौरान किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से बचने और शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखने के उद्देश्य से प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए गए हैं। आदेश लागू होने के बाद अब बिना प्रशासन की अनुमति कोई भी सभा, जुलूस, रैली, धरना या प्रदर्शन आयोजित नहीं किया जा सकेगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की लापरवाही या नियमों के उल्लंघन को गंभीरता से लिया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">अनुविभागीय दंडाधिकारी द्वारा जारी आदेश के अनुसार सार्वजनिक स्थानों पर लाठी, तलवार, भाला, फरसा, चाकू या अन्य घातक हथियार लेकर चलने पर भी प्रतिबंध रहेगा। इसके साथ ही एक स्थान पर पांच या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने पर रोक लगाई गई है। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि बिना अनुमति लाउडस्पीकर, ध्वनि विस्तारक यंत्र या अन्य सार्वजनिक प्रसारण उपकरणों का उपयोग नहीं किया जा सकेगा। सोशल मीडिया, पोस्टर, बैनर, नारे, भाषण या अन्य माध्यमों से ऐसी किसी भी सामग्री के प्रचार-प्रसार पर भी रोक रहेगी, जिससे सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ने या कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका हो। अधिकारियों ने बताया कि चुनाव के दौरान आदर्श आचार संहिता के पालन के साथ-साथ सामाजिक सौहार्द बनाए रखना भी आवश्यक है। इसलिए हर गतिविधि पर नजर रखी जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें। साथ ही राजनीतिक दलों और उनके कार्यकर्ताओं से भी चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपेक्षा जताई गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रशासन ने अपने आदेश में हाल ही में झांसी-ग्वालियर राष्ट्रीय राजमार्ग पर हुए चक्का जाम का भी उल्लेख किया है। अधिकारियों के अनुसार 10 जुलाई की रात हुए प्रदर्शन के दौरान लगभग 15 से 20 किलोमीटर लंबा ट्रैफिक जाम लग गया था, जिससे आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। इस दौरान कुछ स्थानों पर पथराव और वाहनों में तोड़फोड़ की घटनाएं भी सामने आई थीं। प्रशासन का कहना है कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसलिए एहतियात के तौर पर प्रतिबंधात्मक आदेश लागू किए गए हैं। आदेश के तहत भारतीय निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन कराया जाएगा। इसके अलावा मध्यप्रदेश संपत्ति विरूपण निवारण अधिनियम, 1994, मध्यप्रदेश कोलाहल नियंत्रण अधिनियम, 1985 और ध्वनि प्रदूषण (विनियमन एवं नियंत्रण) नियम, 2000 के प्रावधानों को भी प्रभावी रूप से लागू किया जाएगा। हालांकि यह आदेश पुलिस, होमगार्ड, केंद्रीय अर्धसैनिक बलों, सीआरपीएफ और अन्य प्रशासनिक एवं न्यायिक अधिकारियों पर उनके शासकीय दायित्वों के निर्वहन के दौरान लागू नहीं होगा। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े ने कहा कि दतिया विधानसभा उपचुनाव को शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल की भी तैनाती की गई है और संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखी जा रही है। धारा-163 लागू होने के बाद जिले में राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>चुनाव</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 11:27:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दतिया में नरोत्तम मिश्रा समर्थकों का बवाल, NH-44 जाम; पुलिस पर पथराव, एसपी-एएसपी समेत 6 घायल</title>
                                    <description><![CDATA[भाजपा की ओर से विधानसभा उपचुनाव के लिए उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद दतिया में विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया। एनएच-44 पर लंबा जाम लगा और पुलिस व प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति बन गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/narottam-mishra-supporters-create-ruckus-in-datia-stone-pelting-at/article-58468"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/datia-news-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">दतिया में आगामी विधानसभा उपचुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी द्वारा उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद शुक्रवार शाम से शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन देर रात और शनिवार तड़के हिंसक रूप ले बैठा। पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं मिलने से नाराज उनके समर्थकों ने नेशनल हाईवे-44 पर चक्का जाम कर दिया, जिससे करीब 15 किलोमीटर लंबा ट्रैफिक जाम लग गया। हालात उस समय और बिगड़ गए जब पुलिस ने हाईवे खाली कराने का प्रयास किया। इसी दौरान प्रदर्शनकारियों की ओर से पुलिस पर पथराव किया गया, जिसमें दतिया के पुलिस अधीक्षक मयूर खंडेलवाल, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सहित छह से अधिक पुलिसकर्मी घायल हो गए। घायलों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया, जबकि पुलिस ने हालात पर नियंत्रण पाने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और अतिरिक्त बल तैनात किया। घटना के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई और प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस अधिकारियों के अनुसार शुक्रवार शाम करीब छह बजे से बड़ी संख्या में लोग विरोध प्रदर्शन के लिए एकत्र होने लगे थे। प्रशासन का कहना है कि तीन हजार से अधिक लोगों की भीड़ ने पहले बाजार बंद कराने का प्रयास किया और फिर राष्ट्रीय राजमार्ग पर बैठकर चक्का जाम कर दिया। हाईवे पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, जिससे दतिया के साथ-साथ आसपास के जिलों की यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हुई। कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक ने कई बार प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर जाम समाप्त करने की अपील की, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल सका। अधिकारियों के मुताबिक तड़के करीब चार बजे स्थिति अचानक बिगड़ गई और पुलिस टीम पर पत्थर फेंके जाने लगे। इसके बाद पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पहले आंसू गैस का इस्तेमाल किया, लेकिन पथराव जारी रहने पर अतिरिक्त बल बुलाना पड़ा। पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कार्रवाई की गई और कुछ लोगों को हिरासत में भी लिया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि हिंसा में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने यह भी कहा कि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और सरकारी कार्य में बाधा डालने वालों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">विरोध प्रदर्शन की वजह भारतीय जनता पार्टी द्वारा दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार घोषित किया जाना बताया जा रहा है। पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों को उम्मीद थी कि पार्टी एक बार फिर उन्हें टिकट देगी। बताया जा रहा है कि उन्होंने नामांकन की तैयारी भी शुरू कर दी थी। जैसे ही पार्टी ने आशुतोष तिवारी के नाम की घोषणा की, समर्थकों में नाराजगी बढ़ गई और वे सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शन के दौरान कुछ समर्थकों ने सड़क पर लेटकर विरोध जताया और पार्टी नेतृत्व से फैसला बदलने की मांग की। दूसरी ओर भाजपा के जिला मंत्री भानु सिंह ने दावा किया कि कार्यकर्ता शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रख रहे थे और पूरी रात रामधुन गाकर पार्टी नेतृत्व से टिकट पर पुनर्विचार करने की अपील कर रहे थे। उनका आरोप है कि पुलिस प्रशासन ने सख्ती दिखाई, जिससे हालात बिगड़ गए। वहीं पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए और भीड़ द्वारा पहले हिंसक व्यवहार किया गया। इस बीच भाजपा उम्मीदवार आशुतोष तिवारी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि डॉ. नरोत्तम मिश्रा उनके वरिष्ठ नेता और अभिभावक हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि पार्टी के सभी कार्यकर्ता एकजुट होकर चुनाव लड़ेंगे और डॉ. मिश्रा का मार्गदर्शन उन्हें मिलता रहेगा। हाईवे पर यातायात धीरे-धीरे सामान्य कराया जा रहा है, जबकि पुलिस संवेदनशील इलाकों में लगातार गश्त कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की हिंसा या उपद्रव को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>चुनाव</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 11:27:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दतिया उपचुनाव में BJP का बड़ा सरप्राइज, आशुतोष तिवारी को मिला टिकट; नरोत्तम मिश्रा की दावेदारी खत्म</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के बाद भाजपा ने उम्मीदवार घोषित किया, चुनावी तैयारियों में जुटे पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा को नहीं मिला मौका; कांग्रेस और अन्य दल भी तेज कर रहे प्रचार अभियान।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/election/bjps-big-surprise-ashutosh-tiwari-got-ticket-in-datia-by-election/article-58439"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/bjp-candidate.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">दतिया विधानसभा उपचुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने लंबे इंतजार के बाद अपने उम्मीदवार के नाम का ऐलान कर दिया है। पार्टी ने आशुतोष तिवारी को मैदान में उतारने का फैसला किया है। इस घोषणा के साथ ही दतिया की राजनीति में कई दिनों से चल रही अटकलों पर विराम लग गया है। खास बात यह रही कि पूर्व गृहमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ. नरोत्तम मिश्रा का नाम सबसे मजबूत दावेदारों में माना जा रहा था। उन्होंने चुनाव की तैयारियां भी शुरू कर दी थीं, कई जनसभाएं कर चुके थे और नामांकन पत्र भी खरीद लिया था, लेकिन अंतिम समय में पार्टी नेतृत्व ने आशुतोष तिवारी पर भरोसा जताया। भाजपा ने यह फैसला ऐसे समय लिया है, जब दतिया उपचुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेजी से बढ़ चुकी हैं। उम्मीदवार घोषित होते ही भाजपा कार्यकर्ताओं में उत्साह दिखाई दिया और पार्टी ने चुनाव प्रचार को नई गति देने की तैयारी शुरू कर दी है। संगठन अब आशुतोष तिवारी को लेकर क्षेत्र में व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाने की रणनीति बना रहा है। आशुतोष तिवारी भाजपा संगठन के पुराने और अनुभवी नेताओं में गिने जाते हैं। उन्होंने वर्षों तक संगठन में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाई हैं। वे भाजपा के संभागीय संगठन मंत्री भी रह चुके हैं। इसके अलावा उन्हें मध्यप्रदेश हाउसिंग बोर्ड का अध्यक्ष भी बनाया गया था, जहां उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त था। संगठन और प्रशासनिक अनुभव को देखते हुए पार्टी ने उन्हें इस महत्वपूर्ण उपचुनाव के लिए उपयुक्त उम्मीदवार माना है। हालांकि, इस फैसले ने पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों को जरूर चौंकाया है। चुनाव की घोषणा के बाद से ही नरोत्तम मिश्रा लगातार दतिया क्षेत्र में सक्रिय थे। उन्होंने कई सार्वजनिक सभाओं को संबोधित किया और लोगों से संवाद स्थापित करने का प्रयास किया। उनकी सभाओं में बड़ी संख्या में समर्थक भी पहुंचे थे, जिससे यह माना जा रहा था कि पार्टी एक बार फिर उन पर भरोसा जता सकती है।</p>
<p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/bjp-candidate.jpg" alt="BJP Candidate" width="1366" height="1556"></img></p>
<p>चुनावी अभियान के दौरान नरोत्तम मिश्रा ने अपने संबोधनों में जनता से भावनात्मक अपील भी की थी। उन्होंने कहा था कि यदि उनसे पूर्व में कोई गलती हुई हो तो लोग उन्हें क्षमा करें। उन्होंने अपने व्यवहार में बदलाव लाने की बात भी कही थी और भरोसा दिलाया था कि भविष्य में जनता की अपेक्षाओं पर पूरी तरह खरा उतरने का प्रयास करेंगे। उनकी यह अपील राजनीतिक गलियारों में काफी चर्चा का विषय बनी रही। इसके अलावा एक अन्य जनसभा में उन्होंने कांग्रेस के आरोपों का भी जवाब दिया था। उन्होंने विपक्ष द्वारा लगाए गए खरीद-फरोख्त के आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि भाजपा सिद्धांतों पर चलने वाली पार्टी है और बेबुनियाद आरोपों का कोई आधार नहीं है। इन बयानों के जरिए वे चुनावी माहौल को अपने पक्ष में करने का प्रयास कर रहे थे। भाजपा द्वारा उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद अब चुनावी मुकाबला और रोचक हो गया है। कांग्रेस भी अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटी हुई है। दूसरी ओर अन्य राजनीतिक दल और निर्दलीय उम्मीदवार भी चुनावी समीकरणों पर नजर बनाए हुए हैं। दतिया सीट पर मुकाबला त्रिकोणीय होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। इस बीच कांग्रेस नेता और पूर्व विधायक राजेंद्र भारती की कानूनी लड़ाई भी चर्चा में रही। उनकी ओर से दायर याचिका को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिल सकी। इसके बाद कांग्रेस के सामने भी उम्मीदवार चयन को लेकर नई परिस्थितियां बनीं। राजेंद्र भारती ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि यदि पार्टी चाहे तो उनके परिवार के बजाय किसी अन्य नेता को उम्मीदवार बनाया जा सकता है और वे पूरी निष्ठा के साथ पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी का समर्थन करेंगे। दतिया उपचुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया भी जारी है। अब तक कई उम्मीदवार नामांकन पत्र खरीद चुके हैं और कुछ ने अपने नामांकन दाखिल भी कर दिए हैं। चुनाव आयोग की तय समय-सीमा के अनुसार आने वाले दिनों में उम्मीदवारों की अंतिम तस्वीर साफ हो जाएगी। इसके बाद सभी प्रमुख राजनीतिक दल प्रचार अभियान को और तेज करेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>चुनाव</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 18:53:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>केरल और तमिलनाडु में राज्य चुनाव आयुक्त को लेकर बढ़ा विवाद, संवैधानिक स्वायत्तता पर फिर उठे सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[नियुक्ति और हटाने की प्रक्रिया पर छिड़ी बहस, स्थानीय निकाय चुनावों की निष्पक्षता सुनिश्चित करने वाले राज्य चुनाव आयोग की भूमिका फिर चर्चा में।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/election/controversy-over-state-election-commissioner-increases-in-kerala-and-tamil/article-58313"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/state-election-commission.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">देश में स्थानीय निकाय चुनावों की निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने वाले राज्य चुनाव आयोग (SEC) की भूमिका एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। इसकी वजह केरल और तमिलनाडु में सामने आए दो अलग-अलग घटनाक्रम हैं, जिन्होंने राज्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति, अधिकारों और संवैधानिक स्वतंत्रता को लेकर नई बहस छेड़ दी है। दोनों राज्यों में उठे विवादों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता को किस तरह सुरक्षित रखा जाए और राजनीतिक हस्तक्षेप से उन्हें कैसे दूर रखा जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">केरल में राज्य चुनाव आयुक्त पद के लिए सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश एन. शेषाद्रिनाथन के नामांकन को लेकर विवाद शुरू हुआ है। इस नियुक्ति का विरोध करते हुए केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) के महासचिव पी.एम. नियास ने राज्य के गृह विभाग से इस मामले की जांच कराने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि शेषाद्रिनाथन कथित तौर पर एक विशेष वैचारिक संगठन से जुड़े रहे हैं। हालांकि इन आरोपों पर आधिकारिक स्तर पर कोई पुष्टि नहीं हुई है और न ही किसी जांच एजेंसी ने इस संबंध में कोई निष्कर्ष सार्वजनिक किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">एन. शेषाद्रिनाथन न्यायपालिका में लंबे समय तक सेवाएं दे चुके हैं। उन्होंने एर्नाकुलम स्थित केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की विशेष अदालत में न्यायाधीश के रूप में कार्य किया है। इसके अलावा वे लक्षद्वीप के कवरत्ती में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश भी रह चुके हैं। उनके प्रशासनिक और न्यायिक अनुभव को देखते हुए उनकी नियुक्ति की गई, लेकिन राजनीतिक आरोपों के चलते यह मामला विवादों में आ गया।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी ओर तमिलनाडु में राज्य सरकार और वर्तमान राज्य चुनाव आयुक्त बी. ज्योति निर्मलासामी के बीच टकराव की स्थिति बन गई है। राज्य सरकार ने उनसे पद छोड़ने के लिए कहा है। बी. ज्योति निर्मलासामी भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) की सेवानिवृत्त अधिकारी हैं और राज्य चुनाव आयुक्त के रूप में कार्यरत हैं। इस घटनाक्रम ने संवैधानिक पद पर कार्यरत अधिकारियों की स्वतंत्रता और सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">राज्य चुनाव आयोग भारतीय संविधान द्वारा स्थापित एक स्वतंत्र और स्वायत्त संस्था है। इसका मुख्य दायित्व राज्यों में पंचायतों, नगरपालिकाओं और नगर निगमों जैसे स्थानीय स्वशासी निकायों के चुनावों का स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी संचालन सुनिश्चित करना है। लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती में इस संस्था की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि स्थानीय स्तर पर चुनी जाने वाली सरकारें सीधे जनता के दैनिक जीवन से जुड़ी होती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">राज्य चुनाव आयोग चुनाव कार्यक्रम घोषित करने, नामांकन प्रक्रिया की निगरानी, मतदान, मतगणना और परिणामों की घोषणा तक की पूरी प्रक्रिया का संचालन करता है। इसके साथ ही जहां राज्य कानून में व्यवस्था हो, वहां मतदाता सूची का पुनरीक्षण और अद्यतन कराने की जिम्मेदारी भी आयोग निभाता है। चुनाव के दौरान आदर्श आचार संहिता लागू कर उसका पालन सुनिश्चित करना भी आयोग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में शामिल है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा स्थानीय निकाय चुनावों से पहले वार्डों और निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन का कार्य भी कई राज्यों में राज्य चुनाव आयोग की देखरेख में किया जाता है। चुनाव से जुड़े विवादों का निपटारा संबंधित राज्य कानूनों के अनुसार नामित न्यायालयों या अधिकृत प्राधिकरणों के माध्यम से किया जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि संविधान में राज्य चुनाव आयुक्त बनने के लिए कोई समान या अनिवार्य योग्यता निर्धारित नहीं की गई है। यही कारण है कि अलग-अलग राज्यों में नियुक्ति की प्रक्रिया और पात्रता अलग-अलग दिखाई देती है। कई राज्यों में सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को इस पद पर नियुक्त किया जाता है, जबकि कुछ राज्यों में पूर्व आईएएस अधिकारियों या अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को यह जिम्मेदारी दी जाती है। केरल में राज्य चुनाव आयुक्त को एक अतिरिक्त जिम्मेदारी भी निभानी होती है। वे परिसीमन आयोग से जुड़े सदस्य के रूप में विधानसभा और लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं के निर्धारण से संबंधित प्रक्रियाओं में भाग लेते हैं। साथ ही पंचायतों, नगरपालिकाओं और नगर निगमों के वार्ड परिसीमन के लिए गठित राज्य परिसीमन आयोग के अध्यक्ष भी होते हैं। तमिलनाडु में भी राज्य चुनाव आयुक्त परिसीमन आयोग के पदेन अध्यक्ष के रूप में कार्य करते हैं। चुनाव से पहले स्थानीय निकायों के वार्डों की सीमाओं का निर्धारण, आरक्षण व्यवस्था और जनसंख्या के आधार पर प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने जैसे महत्वपूर्ण कार्य उनके नेतृत्व में पूरे किए जाते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 16:38:59 +0530</pubDate>
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