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                <title>चुनाव - दैनिक जागरण</title>
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                <description>चुनाव RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>मीनाक्षी नटराजन की उम्मीदवारी पर कांग्रेस में उठे सवाल, पार्टी के भीतर बढ़ी हलचल</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्यप्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस द्वारा मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद पार्टी के अंदर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। उम्मीदवार के नाम के ऐलान के साथ ही अब पार्टी के भीतर से असहमति के स्वर भी सामने आने लगे हैं। भोपाल की हुजूर विधानसभा सीट से दो बार कांग्रेस प्रत्याशी रह चुके नरेश ज्ञानचंदानी ने सार्वजनिक तौर पर पार्टी नेतृत्व के फैसले पर सवाल उठाते हुए इसे बड़ी राजनीतिक चूक बताया है। उनके बयान के बाद राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के भीतर चल रही खींचतान अब खुलकर सामने आने लगी है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नरेश</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/questions-raised-in-congress-on-meenakshi-natarajans-candidature-increased-stir/article-55029"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/minakshi.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्यप्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस द्वारा मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद पार्टी के अंदर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। उम्मीदवार के नाम के ऐलान के साथ ही अब पार्टी के भीतर से असहमति के स्वर भी सामने आने लगे हैं। भोपाल की हुजूर विधानसभा सीट से दो बार कांग्रेस प्रत्याशी रह चुके नरेश ज्ञानचंदानी ने सार्वजनिक तौर पर पार्टी नेतृत्व के फैसले पर सवाल उठाते हुए इसे बड़ी राजनीतिक चूक बताया है। उनके बयान के बाद राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के भीतर चल रही खींचतान अब खुलकर सामने आने लगी है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नरेश ज्ञानचंदानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस नेतृत्व को सीधे संदेश दिया। उन्होंने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को टैग करते हुए लिखा कि मध्यप्रदेश जैसे राज्य में राज्यसभा उम्मीदवार चुनते समय ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत थी। उन्होंने दावा किया कि पार्टी के सामने क्रॉस वोटिंग का खतरा बना हुआ है और ऐसी स्थिति में उम्मीदवार चयन बेहद महत्वपूर्ण था। ज्ञानचंदानी का कहना है कि उन्होंने पहले भी पार्टी नेतृत्व को संदेश भेजकर इस विषय पर विचार करने की सलाह दी थी, लेकिन उनकी बात पर ध्यान नहीं दिया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अपने पोस्ट में उन्होंने यह भी कहा कि अगर वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह को दोबारा राज्यसभा भेजा जाता तो कांग्रेस की सीट पूरी तरह सुरक्षित मानी जा सकती थी। उनका मानना है कि वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में कुछ विधायकों के रुख को लेकर आशंकाएं बनी हुई हैं और इसका असर चुनावी परिणामों पर पड़ सकता है। हालांकि पार्टी नेतृत्व की ओर से अभी तक इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।</p>
<p style="text-align:justify;">राजनीतिक समीकरणों की बात करें तो राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 58 विधायकों के समर्थन की जरूरत होती है, जबकि कांग्रेस के पास फिलहाल 62 विधायक मौजूद हैं। आंकड़ों के हिसाब से पार्टी की स्थिति मजबूत दिखाई देती है, लेकिन पार्टी के अंदर से ही क्रॉस वोटिंग की चर्चा शुरू होने के बाद राजनीतिक गलियारों में नए तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। यही वजह है कि संख्या बल होने के बावजूद कांग्रेस के अंदर चिंता और चर्चा दोनों बढ़ती दिखाई दे रही हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>चुनाव</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 12:59:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[दैनिक जागरण]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>छत्तीसगढ़ निकाय और पंचायत चुनाव 2026: आज आएंगे नतीजे, 227 पदों पर फैसला, सुबह से शुरू होगी मतगणना</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ में हाल ही में संपन्न हुए निकाय और पंचायत चुनाव 2026 के नतीजों का इंतजार आखिरकार आज खत्म होने जा रहा है। सुबह से प्रदेश के अलग-अलग मतगणना केंद्रों में वोटों की गिनती शुरू होगी और इसके साथ ही 227 पदों पर चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों की किस्मत खुलनी शुरू हो जाएगी। चुनाव परिणामों को लेकर प्रत्याशियों से लेकर समर्थकों तक में बेचैनी साफ दिखाई दे रही है। कई इलाकों में देर रात तक चुनावी चर्चाएं चलती रहीं और सुबह से मतगणना केंद्रों के बाहर भी हलचल बढ़ने लगी है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राज्य निर्वाचन आयोग के मुताबिक मतगणना की प्रक्रिया प्रदेश</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/chhattisgarh-civic-and-panchayat-elections-2026-results-will-come-today/article-54935"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/cg-chunav-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ में हाल ही में संपन्न हुए निकाय और पंचायत चुनाव 2026 के नतीजों का इंतजार आखिरकार आज खत्म होने जा रहा है। सुबह से प्रदेश के अलग-अलग मतगणना केंद्रों में वोटों की गिनती शुरू होगी और इसके साथ ही 227 पदों पर चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों की किस्मत खुलनी शुरू हो जाएगी। चुनाव परिणामों को लेकर प्रत्याशियों से लेकर समर्थकों तक में बेचैनी साफ दिखाई दे रही है। कई इलाकों में देर रात तक चुनावी चर्चाएं चलती रहीं और सुबह से मतगणना केंद्रों के बाहर भी हलचल बढ़ने लगी है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राज्य निर्वाचन आयोग के मुताबिक मतगणना की प्रक्रिया प्रदेश के 13 निर्धारित केंद्रों में कराई जाएगी। इसके लिए करीब 395 अधिकारियों और कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। प्रशासनिक स्तर पर सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर तैयारियां पहले ही पूरी कर ली गई थीं। अधिकारियों के अनुसार मतगणना केंद्रों के आसपास सुरक्षा बलों की तैनाती भी की गई है ताकि पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण तरीके से पूरी कराई जा सके।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस बार जिन पदों के लिए मतदान कराया गया था उनमें 5 नगरीय निकाय अध्यक्ष, 71 पार्षद, 10 जनपद पंचायत सदस्य, 34 सरपंच और 107 पंच पद शामिल हैं। स्थानीय स्तर पर इन चुनावों को काफी अहम माना जा रहा है क्योंकि कई जगहों पर रिक्त पदों के साथ-साथ नवगठित निकायों में पहली बार प्रतिनिधि चुनने की प्रक्रिया भी हुई। ऐसे में आज आने वाले परिणाम सिर्फ उम्मीदवारों के लिए ही नहीं बल्कि स्थानीय राजनीति और प्रशासनिक समीकरणों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मतदान 1 जून को कराया गया था। उस दिन कई इलाकों में सुबह से ही मतदान केंद्रों पर लोगों की भीड़ दिखाई दी थी। राज्य निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के मुताबिक नगरीय निकाय क्षेत्रों में कुल 31 हजार 928 मतदाताओं में से 27 हजार 6 लोगों ने वोट डाले थे, जिससे 84.58 प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ। वहीं पंचायत क्षेत्रों में 1 लाख 2 हजार 797 मतदाताओं में से करीब 79 हजार 968 लोगों ने मतदान किया था। यहां 78.61 प्रतिशत मतदान रिकॉर्ड किया गया। चुनाव अधिकारियों का कहना है कि कई ग्रामीण इलाकों में सुबह से ही लंबी कतारें देखने को मिली थीं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मतदान के लिए नगरीय क्षेत्रों में 96 मतदान केंद्र और पंचायत क्षेत्रों में 274 मतदान केंद्र बनाए गए थे। संवेदनशील माने गए इलाकों में अतिरिक्त निगरानी रखी गई थी। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक पूरी मतदान प्रक्रिया शांतिपूर्ण रही और कहीं से बड़ी गड़बड़ी की सूचना सामने नहीं आई। राज्य निर्वाचन आयुक्त ने भी मतदान प्रक्रिया को संतोषजनक बताया था।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">निकाय चुनाव में जिन क्षेत्रों पर सबसे ज्यादा नजर बनी हुई है उनमें राजनांदगांव जिले की घुमका नगर पंचायत, जांजगीर-चांपा जिले की बम्हनीडीह, सूरजपुर की शिवानंदनपुर और बलौद जिले की पलारी नगर पंचायत शामिल हैं। इन क्षेत्रों में पहली बार स्थानीय प्रतिनिधियों के चुनाव को लेकर मतदाताओं में अलग तरह का उत्साह देखा गया था। मतदान के बाद से ही यहां जीत-हार के अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पंचायत चुनावों की बात करें तो कई गांवों में मुकाबला काफी करीबी माना जा रहा है। सरपंच और पंच पदों के लिए कई जगहों पर स्थानीय मुद्दे प्रमुख रहे, जबकि कुछ इलाकों में विकास कार्य, सड़क, पानी और पंचायत स्तर की राजनीति चुनावी चर्चा के केंद्र में रही। बताया जा रहा है कि कई सीटों पर बहुत कम अंतर से परिणाम आने की संभावना जताई जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">मतगणना शुरू होने से पहले ही प्रत्याशी और उनके समर्थक सक्रिय हो गए हैं। कई जगहों पर सुबह से ही समर्थकों की आवाजाही बढ़ गई है। हालांकि प्रशासन की तरफ से साफ किया गया है कि मतगणना केंद्रों के आसपास भीड़ नियंत्रण के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। अधिकारियों ने कहा है कि परिणाम आने के साथ ही आधिकारिक घोषणा चरणबद्ध तरीके से जारी की जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>चुनाव</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 10:05:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[दैनिक जागरण]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>डॉ. भार्गव मल्लप्पा ने मोबाइल सर्विलांस मामले में कर्नाटक सरकार से हस्तक्षेप की मांग की</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री और गृह मंत्री को लिखे पत्र में गैर-अधिकृत डिजिटल निगरानी की साइबर-फॉरेंसिक जांच की मांग]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/election/dr-bhargava-mallappa-seeks-karnataka-governments-intervention-in-mobile-surveillance/article-54019"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/dr.-bhargav-mallappa-seeks-karnataka-government’s-intervention-over-mobile-surveillance-concerns-(1).jpg" alt=""></a><br /><p>अखिल सेवक समाज संघ के अध्यक्ष डॉ. भार्गव मल्लप्पा ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री और गृह मंत्री को पत्र लिखकर कथित गैर-अधिकृत मोबाइल सर्विलांस और संदिग्ध डिजिटल निगरानी गतिविधियों की उच्चस्तरीय साइबर-फॉरेंसिक जांच कराने की मांग की है।</p>
<p>अखिल सेवक समाज काउंसिल की ओर से भेजे गए इन पत्रों में डॉ. मल्लप्पा ने कुछ मोबाइल कनेक्शनों से जुड़ी कथित ट्रेसिंग, मॉनिटरिंग और इंटरसेप्शन जैसी गतिविधियों पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि यह मामला निजता, डिजिटल सुरक्षा और संचार प्रणालियों के संभावित दुरुपयोग से जुड़ी गंभीर आशंकाएं पैदा करता है।</p>
<p>पत्रों में कर्नाटक सरकार से आग्रह किया गया है कि साइबर क्राइम सेल और संबंधित तकनीकी एजेंसियों को मामले की विस्तृत फॉरेंसिक जांच के निर्देश दिए जाएं। इसमें तकनीकी रूटिंग पैटर्न, सिग्नलिंग रिकॉर्ड और संबंधित मोबाइल नंबरों से जुड़े लोकेशन बेस्ड सर्विस (LBS) डेटा की जांच शामिल हो।</p>
<p>डॉ. मल्लप्पा ने कहा कि बिना कानूनी अनुमति या प्रक्रिया के किसी भी प्रकार की निगरानी या इंटरसेप्शन नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के लिए गंभीर चुनौती है।</p>
<p>“डिजिटल प्राइवेसी और संचार सुरक्षा हर नागरिक का मूल अधिकार है। निगरानी तंत्र के किसी भी संभावित दुरुपयोग या गैर-अधिकृत मॉनिटरिंग की निष्पक्ष और त्वरित जांच होनी चाहिए, ताकि लोगों का भरोसा बना रहे और भविष्य में ऐसे मामलों को रोका जा सके,” डॉ. मल्लप्पा ने कहा।</p>
<p>उन्होंने राज्य सरकार से मामले की पारदर्शी और समयबद्ध जांच सुनिश्चित करने तथा दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>चुनाव</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 May 2026 11:25:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[दैनिक जागरण]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राजस्थान की राजनीति में उभरती वैचारिक ताकत बन रही है स्टेट्समैन इंडिया पार्टी (इंटेलेक्चुअल) </title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान की राजनीति में पिछले कुछ वर्षों के दौरान कई नए वैचारिक और संगठनात्मक परिवर्तन देखने को मिले हैं। इन्हीं परिवर्तनों के बीच स्टेट्समैन इंडिया पार्टी (इंटेलेक्चुअल) ने अपनी अलग पहचान बनाई है। प्रशासनिक सुधार, प्रशिक्षित नेतृत्व और नीति-आधारित राजनीति को केंद्र में रखकर आगे बढ़ रही यह पार्टी अब राज्य की राजनीति में गंभीर चर्चा का विषय बन चुकी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वर्ष 2028 के राजस्थान विधानसभा चुनाव और 2029 के लोकसभा चुनाव में यह पार्टी कई स्थापित दलों के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है, विशेषकर शिक्षित युवाओं और प्रथम बार मतदान करने वाले मतदाताओं के बीच।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/election/statesman-india-party-intellectual-is-becoming-an-emerging-ideological-force/article-53654"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/राजस्थान-की-राजनीति-में-उभरती-वैचारिक-ताकत-बन-रही-है-स्टेट्समैन-इंडिया-पार्टी-(इंटेलेक्चुअल).jpg" alt=""></a><br /><p>पार्टी का गठन वर्ष 2023 में विराज जन पार्टी और अर्जुन भारत नेशनल पार्टी ( एबीएनपी ) के भीतर उभरे वैचारिक मतभेदों और राजनीतिक पुनर्गठन के बाद हुआ था। वर्तमान में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष विकास शर्मा हैं, जबकि पार्टी के कई वरिष्ठ नेता खुलकर स्वीकार करते हैं कि इस संगठन की मूल वैचारिक संरचना और राजनीतिक दिशा के प्रमुख सूत्रधार प्रशांत कुमार सैनी रहे हैं।</p>
<p>पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि यदि प्रशांत कुमार सैनी का सहयोग, मार्गदर्शन और पहल नहीं होती, तो उन्हें राजनीति में आने और अपना स्वतंत्र संगठन खड़ा करने का अवसर शायद नहीं मिल पाता। नेताओं के अनुसार सैनी ने केवल वैचारिक समर्थन ही नहीं दिया, बल्कि संगठन निर्माण, तकनीकी सलाह, कानूनी प्रक्रियाओं और राजनीतिक रणनीति के स्तर पर भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।</p>
<p>दिलचस्प बात यह है कि पहले अर्जुन भारत नेशनल पार्टी के प्रवक्ताओं ने भी सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार किया था कि उनकी पार्टी का अस्तित्व भी काफी हद तक प्रशांत कुमार सैनी की उदारता और सहयोग के कारण संभव हो पाया। हालांकि समय के साथ दोनों संगठनों की राजनीतिक दिशा और विचारधारा अलग हो गई तथा अब दोनों अलग-अलग रास्तों पर आगे बढ़ रहे हैं।</p>
<p> स्टेट्समैन इंडिया पार्टी (इंटेलेक्चुअल) जिसे SIPI  के नाम से भी जाना जाता है   स्वयं को एक धर्मनिरपेक्ष, प्रशासन-केंद्रित और बौद्धिक राजनीतिक संगठन के रूप में प्रस्तुत करती है। पार्टी का सबसे चर्चित एजेंडा निर्वाचित सांसदों और विधायकों के लिए अनिवार्य प्रशासनिक प्रशिक्षण की व्यवस्था लागू करना है। पार्टी का मानना है कि केवल चुनाव जीत लेना किसी व्यक्ति को आधुनिक शासन व्यवस्था चलाने के लिए पर्याप्त रूप से सक्षम नहीं बनाता।<br />इसी सोच के तहत पार्टी निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के लिए प्रशासन, अर्थव्यवस्था, संविधान, समाजशास्त्र, वैज्ञानिक सोच, वित्तीय प्रबंधन, अंतरराष्ट्रीय संबंध और सार्वजनिक नीति जैसे विषयों में व्यवस्थित प्रशिक्षण की वकालत करती है। पार्टी नेताओं के अनुसार भारत जैसे विशाल और जटिल देश को चलाने के लिए केवल लोकप्रियता नहीं बल्कि प्रशिक्षित और व्यावसायिक रूप से सक्षम नेतृत्व की आवश्यकता है।</p>
<p>पार्टी का दावा है कि इस विचार की मूल नींव विराज जन पार्टी के दौर में रखी गई थी, लेकिन बाद में स्टेट्समैन इंडिया पार्टी (इंटेलेक्चुअल)/SIPI ने इसे विस्तृत प्रशासनिक मॉडल का रूप दिया। इस मॉडल में प्रशिक्षण मॉड्यूल, मूल्यांकन प्रणाली, प्रशासनिक परीक्षाएं और व्यवहारिक प्रशासनिक अभ्यास जैसी व्यवस्थाओं को शामिल करने की बात कही जाती है।<br />राजस्थान के विभिन्न जिलों में पार्टी द्वारा चलाए जा रहे अभियान विशेष रूप से युवाओं और शिक्षित वर्ग को लक्ष्य बनाकर तैयार किए गए हैं। सोशल मीडिया और जनसभाओं में पार्टी “ प्रशिक्षित नेतृत्व”, “व्यावसायिक प्रशासन” और “जिम्मेदार राजनीति” जैसे नारों को प्रमुखता से उठा रही है। पार्टी नेताओं का दावा है कि वर्तमान समय में देश का एक बड़ा युवा वर्ग पारंपरिक राजनीति से निराश हो चुका है और वह ऐसी राजनीति चाहता है जो केवल जाति, धर्म और चुनावी भाषणों तक सीमित न रहे बल्कि प्रशासनिक परिणाम भी दे।</p>
<p>राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यही कारण है कि इंजीनियरिंग, प्रबंधन, कानून और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के बीच पार्टी की चर्चा लगातार बढ़ रही है। कई विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक समूहों में भी पार्टी के प्रशासनिक प्रशिक्षण मॉडल पर बहस देखने को मिल रही है।<br />हालांकि पार्टी के इस प्रस्ताव का विरोध भी हो रहा है। आलोचकों का कहना है कि यदि निर्वाचित प्रतिनिधियों के लिए अतिरिक्त प्रशिक्षण और मूल्यांकन अनिवार्य किया गया तो इससे लोकतंत्र में आम लोगों की भागीदारी कमजोर हो सकती है। कुछ राजनीतिक संगठनों का तर्क है कि लोकतंत्र का सबसे बड़ा आधार जनता का जनादेश होता है, न कि प्रशासनिक परीक्षा।</p>
<p>विशेष रूप से अर्जुन भारत नेशनल पार्टी ने इस विचार का विरोध करते हुए इसे अत्यधिक “तकनीकी” और “प्रशासनिक अभिजात्यवाद” की ओर ले जाने वाला बताया है। पार्टी का कहना है कि राजनीति को केवल प्रशासनिक दक्षता तक सीमित नहीं किया जा सकता क्योंकि लोकतंत्र सामाजिक प्रतिनिधित्व और जनभावनाओं से भी संचालित होता है।</p>
<p>इसके बावजूद स्टेट्समैन इंडिया पार्टी (इंटेलेक्चुअल) अपने अभियान को लगातार आगे बढ़ा रही है। पार्टी ने घोषणा की है कि आने वाले समय में वह अपने प्रशासनिक प्रशिक्षण मॉडल को औपचारिक रूप से राज्य और केंद्र सरकार के समक्ष प्रस्तुत करेगी। पार्टी का मानना है कि यदि यह मॉडल लागू होता है तो भ्रष्टाचार, प्रशासनिक अक्षमता और नीतिगत अव्यवस्था जैसी समस्याओं में कमी लाई जा सकती है।</p>
<p>राजस्थान की बदलती राजनीति में स्टेट्समैन इंडिया पार्टी (इंटेलेक्चुअल) अब केवल एक वैचारिक संगठन भर नहीं रह गई है, बल्कि उसे प्रशासनिक सुधारों पर आधारित एक गंभीर राजनीतिक प्रयोग के रूप में देखा जाने लगा है। आने वाले वर्षों में यह स्पष्ट होगा कि प्रशिक्षित राजनीतिक नेतृत्व का यह विचार भारतीय राजनीति में कितना व्यापक प्रभाव छोड़ पाता है, लेकिन इतना तय माना जा रहा है कि इसने शासन और लोकतंत्र को लेकर नई बहस जरूर शुरू कर दी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>चुनाव</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 May 2026 10:44:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[दैनिक जागरण]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चुनाव जीतना ही नहीं, प्रशासन चलाने की समझ भी जरूरी: राजस्थान में &quot;स्टेट्समैन इंडिया पार्टी (इंटेलेक्चुअल)&quot;ने शुरू किया बड़ा अभियान </title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान की उभरती हुई राजनीतिक पार्टी "स्टेट्समैन इंडिया पार्टी (इंटेलेक्चुअल)"  (Statesman India Party (Intellectual)/ SIPI) ने आज राज्यभर में एक बड़े जनसंपर्क और युवा जागरूकता अभियान की शुरुआत करते हुए निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के लिए “अनिवार्य प्रशासनिक प्रशिक्षण” लागू करने की मांग को फिर से राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है। पार्टी ने दावा किया है कि वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था में केवल चुनाव जीत लेना प्रशासन चलाने की योग्यता का प्रमाण नहीं हो सकता और देश को अब ऐसे नेतृत्व की आवश्यकता है जो राजनीतिक रूप से लोकप्रिय होने के साथ-साथ प्रशासनिक रूप से भी प्रशिक्षित और सक्षम हो।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/election/not-only-winning-elections-understanding-of-running-administration-is-also/article-53647"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/statemen-india-party.jpg" alt=""></a><br /><p>पार्टी द्वारा शुरू किए गए इस अभियान में युवाओं, शिक्षकों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न पेशेवर वर्गों से जुड़ने की कोशिश की जा रही है। जयपुर सहित राजस्थान के कई जिलों में पार्टी कार्यकर्ताओं ने पर्चे बांटे, बैठकों का आयोजन किया और सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को इस प्रस्ताव के समर्थन में जोड़ने की अपील की। पार्टी नेताओं का कहना है कि आने वाले दिनों में यह अभियान पूरे देश में भी फैलाया जाएगा।</p>
<p>पार्टी के अनुसार, यदि देश की नौकरशाही में किसी अधिकारी को प्रशासन संभालने से पहले कठिन परीक्षाओं, प्रशिक्षण और व्यावहारिक अभ्यास से गुजरना पड़ता है, तो सांसदों और विधायकों के लिए भी न्यूनतम प्रशासनिक समझ अनिवार्य होनी चाहिए। प्रस्तावित मॉडल के तहत चुनाव जीतने के बाद प्रत्येक सांसद और विधायक को एक निर्धारित अवधि का प्रशिक्षण लेना होगा। इसमें अर्थव्यवस्था, समाजशास्त्र, वैज्ञानिक सोच, संविधान, कानून, अंतरराष्ट्रीय संबंध, व्यापारिक वातावरण, बजट प्रबंधन, ग्रामीण विकास, तकनीकी प्रशासन और आपदा प्रबंधन जैसे विषय शामिल किए जाने की बात कही गई है।</p>
<p>राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विचार भारतीय राजनीति में एक नया विमर्श खड़ा कर रहा है। <br />हालांकि इस अवधारणा को सबसे पहले विराज जन पार्टी और उसके संस्थापक प्रशांत कुमार सैनी द्वारा सामने रखा गया था। उस समय पार्टी ने तर्क दिया था कि जिस देश में प्रशासनिक अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण आवश्यक है, वहां नीति निर्माण और शासन चलाने वाले जनप्रतिनिधियों के लिए भी मूलभूत प्रशासनिक दक्षता जरूरी होनी चाहिए।</p>
<p>बाद में यही विचार अलग होकर बनी Statesman India Party (Intellectual)/ (स्टेट्समैन इंडिया पार्टी (इंटेलेक्चुअल) ) ने और अधिक विस्तृत तथा व्यावहारिक रूप में प्रस्तुत किया। पार्टी ने दावा किया कि उसने इस अवधारणा को केवल नारे तक सीमित नहीं रखा, बल्कि प्रशिक्षण प्रणाली का एक विस्तृत मॉडल तैयार किया है जिसमें प्रशिक्षण की समय-सीमा, विषय, मूल्यांकन प्रक्रिया, व्यावहारिक अभ्यास और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़े कई प्रावधान शामिल हैं।</p>
<p>गौरतलब है कि स्टेट्समैन इंडिया पार्टी (इंटेलेक्चुअल)/SIPI का गठन उन नेताओं और सदस्यों द्वारा किया गया था जो पहले विराज जन पार्टी और अर्जुन भारत नेशनल पार्टी (एबीएनपी) से जुड़े हुए थे। वैचारिक मतभेदों और राजनीतिक दिशा को लेकर हुए विवादों के बाद इस नए संगठन ने स्वयं को “बौद्धिक और प्रशासनिक सुधार आधारित राजनीतिक मंच” के रूप में प्रस्तुत किया।</p>
<p>वहीं दूसरी ओर, इस प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक विवाद भी तेज होता जा रहा है। अर्जुन भारत नेशनल पार्टी (ABNP) लगातार इस विचार का विरोध कर रही है। पार्टी का कहना है कि यह व्यवस्था लोकतंत्र की मूल भावना के खिलाफ है और इससे आम जनता के प्रतिनिधित्व पर असर पड़ेगा। पार्टी नेताओं का तर्क है कि यदि निर्वाचित प्रतिनिधियों को चुनाव जीतने के बाद किसी प्रशिक्षण या परीक्षा से गुजरना पड़ेगा, तो भविष्य में राजनीति केवल शिक्षित और संपन्न वर्ग तक सीमित होकर रह जाएगी। पार्टी ने यह भी आरोप लगाया है कि इस तरह की व्यवस्था लागू होने पर गरीब, ग्रामीण और धार्मिक रूप से सक्रिय समुदायों का राजनीतिक प्रतिनिधित्व कम हो सकता है।<br />अर्जुन भारत नेशनल पार्टी ने हाल ही में यह आरोप भी लगाया था कि यह पूरा विचार वास्तव में विराज जन पार्टी की मूल रणनीति का हिस्सा है और Statesman India Party (Intellectual) उसी एजेंडे को आगे बढ़ा रही है। पार्टी का दावा है कि दोनों संगठन सार्वजनिक रूप से अलग दिखाई देते हैं, लेकिन कई मुद्दों पर उनकी सोच एक जैसी है।<br />इधर, प्रशांत कुमार सैनी ने अपने ऊपर लगाए जा रहे आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि प्रशासनिक प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल शासन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना है। उन्होंने कहा कि “प्रशिक्षण का भ्रष्टाचार से कोई संबंध नहीं है। यदि कुछ अधिकारी प्रशिक्षण के बाद भी भ्रष्ट हो जाते हैं तो इसका अर्थ यह नहीं कि प्रशिक्षण गलत है। समस्या व्यक्ति की नीयत में होती है, व्यवस्था में नहीं।”</p>
<p>हाल के महीनों में यह मुद्दा सोशल मीडिया और राजनीतिक मंचों पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है। कुछ युवा वर्ग इस प्रस्ताव को आधुनिक और भविष्य उन्मुख सोच बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर अतिरिक्त शर्त लगाने के रूप में देख रहे हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में यह बहस और तेज हो सकती है क्योंकि कई  क्षेत्रीय दल अब प्रशासनिक सुधार, राजनीतिक प्रशिक्षण और जवाबदेही जैसे मुद्दों को चुनावी एजेंडा बनाने लगे हैं।</p>
<p>इस बीच स्टेट्समैन इंडिया पार्टी (इंटेलेक्चुअल) ने घोषणा की है कि वह जल्द ही अपने प्रस्ताव का विस्तृत दस्तावेज राज्य और केंद्र सरकार को भेजेगी। पार्टी का कहना है कि यदि देश में डॉक्टर, इंजीनियर, न्यायाधीश, सैन्य अधिकारी और प्रशासनिक अधिकारी बनने के लिए विशेष प्रशिक्षण जरूरी है, तो करोड़ों लोगों के भविष्य से जुड़े निर्णय लेने वाले जनप्रतिनिधियों के लिए भी न्यूनतम प्रशासनिक प्रशिक्षण आवश्यक होना चाहिए।</p>
<p>राजनीतिक हलकों में अब यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या आने वाले वर्षों में भारत की राजनीति केवल चुनावी भाषणों और जनसभाओं तक सीमित रहेगी या फिर प्रशासनिक दक्षता और पेशेवर क्षमता भी राजनीतिक नेतृत्व का महत्वपूर्ण हिस्सा बनेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>चुनाव</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 May 2026 10:34:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[दैनिक जागरण]]></dc:creator>
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                <title>पूर्वांचल में बदल रहा भूमिहार राजनीति का समीकरण? अतुल राय–अजय राय की मुलाकात से बढ़ी सकती है बीजेपी की टेंशन</title>
                                    <description><![CDATA[उत्तर प्रदेश मे 2027 के चुनाव को देखते हुए बहुत से जातीय समीकरण तेज़ी से बनते बदलते दिख रहे है। जहाँ ब्राह्मण और ठाकुर विधायक और सांसदों की मीटिंग मीडिया चर्चा मे रही है। वही अब लगता है पूर्वांचल मे भूमिहार नेता एक मंच पे आने वाले है। इसकी शुरुवात घोसी के पूर्व संसद अतुल राय ने कर दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/election/the-equation-of-bhumihar-politics-is-changing-in-purvanchal-bjps/article-53359"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/purvanchal.jpg" alt=""></a><br /><p>इस बात को बल तब और मिला जब अतुल राय के सोशल मीडिया पोस्ट पर एक पिक्चर पोस्ट की जिस्मे वो वाराणसी लोक सभा सीट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कड़ी टक्कर देने वाले अजय राय से लखनऊ के मेदांता हॉस्पिटल मे मुलाक़ात कर उनकी तबीयत का हाल चाल लिया। अतुल, जिन्नोहोने 2017 मे आपने पहेल ही चुनाव मे समाजवादी पार्टी के दिग्गज ओम प्रकाश सिंह को तीसरे पायदान पे दाखिल दिया था, ने अजय राय को एक जूजाहरू और दिशा के विपरीत चलने मे संकोच ना करने वाले नेता बताया।<br /> <br />सियासी गलियारो मैं अतुल राय और अजय राय को चीर प्रतिदावंदी के रूप मैं देखा जाता रहा है । लेकिन अब लगता है, ये दोनों नेता जो कहीं ना कहीं पूर्वांचल मे एक साथ आते हुए दिखाई देते है। इनकी मुलाक़ात को भूमिहार नेता को एक मंच पे आने के रूप मे देखा जा रहा है।  <br /> <br />5 बार विधायक रहे अजय राय का राजनीति अनुभव करीब ४० साल का है। वही करीं ४५ साल के अतुल राय की कर राजनीतिक अनुभव करीब १० साल का है। अतुल राय की ऊर्जा और युवा वर्ग मैं लोकप्रियता, अजय राय का राजनीतिक अनुभव और समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और बीजेपी कई नेताओं मे अच्छी पकड़ से इस जोड़ी को बहुत ही मजबूत बनाता है।<br /> <br />पूर्वांचल की भूमिहार पॉलिटिक्स<br /> <br />पूर्वांचल में बीजेपी अभी भी कृष्णानंद राय के जाने के बाद, और मनोज सिन्हा के कश्मीर का गवर्नर बनाये जाने के बाद जो जगह ख़ाली हुई है, उसको भर नहीं पाई है. बीजेपी की स्थिति वाराणसी को छोड़ के किसी भी ज़िले में ठीक नहीं है। ग़ाज़ीपुर बीजेपी के एक भी विधायक नहीं है, यहाँ भूमिहार वोटर क़रीब 2 लाख है। बलिया, जहाँ भूमिहार वोटर क़रीब 1.5 लाख है, की 7 सीटों मैं बीजेपी के पास 2 सीट है । मऊ भूमिहार वोटर 1.5 लाख बीजेपी के पास 4 मैं से 1 सीट है। वही आजमगढ़ मे जीरो सीट है। भूमिहार वोटर 80 हज़ार है. ये वाही इलाका है जहाँ अतुल राय आज कल काफ़ी ऐक्टिव है. और ना सिर्फ़ भूमिहार वोटर्स मैं उनकी अच्छी पकड़ है बल्कि वो युवा और मुस्लिम और पिछड़े वर्ग मे अच्छी पकड़ है। अतुल को आज भी लोग कोरोना महामारी के दौरान उनके मेडिकल सहायत के लिए याद करते है।<br /> <br />हालाकि वाराणसी मैं बीजेपी के पास 7 की 7 सीटे है. लेकिन कैसे 2024 के लोक सभा चुनाव मैं भूमिहार वोटर्स ने अजय को वोट किया। और जीत का अंतर 1.5 लाख कर दिया. अगर अतुल अगले लोक सभा मैं अजय राय के पक्ष मैं खुल कर आए तो ये अंदर और भी कम हो सकता है, या शायद जीत मैं बदल सकता गई।<br /> <br />अतुल राय ने 2019 की लोक सभा चुनाव मे बीजेपी की लहर मैं अपना चुनाव 50% से जायदा वोट ले के जीता था। उनकी पकड़ ना सिर्फ़ भूमिहार वोटर्स मे है, बल्कि मुस्लिम, पिछड़ा, यूथ मे भी। हरिश्चंद्र, बीचयू और यूपी कॉलेज में भी उनकी मजबूत पकड़ है.<br /> <br />मुख़्तार अंसारी से दुश्मनी<br /> <br />भूमिहार जाति होने के अलाव दोनों को पूर्वांचल के बाहुबली रहे मुख़्तार अंसारी से दुश्मनी एक पाले मैं लाती है. मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो अतुल राय ने मुख़्तार अंसारी नए बेटे अफ़ज़ल अंसारी के बेटे का टिकट काट के चुनाव लड़ा और जीता। उनके जेल जाने के पीछे भी मुख्तार के शूटर अंगद राइ की भूमिका को कोर्ट ने संज्ञान मैं लेते हुए उनने बारी किया।<br /> <br />वाही अजय राय के बड़े भाई अवधेश राय के की हत्या मैं भी मुख़्तार अंसारी को उम्र क़ैद की सजा हुई.<br /> <br />दोनों के साथ आने से पूर्वांचल की भूमिहार वोट बैंक कंसोलिडेट हो सकता है. आने वाले समय मे क्या अतुल और अजय और भूमिहार नेताओ को साथ जोड़ने मे सफल होते है या नहीं, ये देखना बाक़ी है। और इनसे जुड़ी भविष्य की राजनीति क्या होगी ये भी चर्चा का विषय है। सवाल है भी है की क्या अतुल विधान सभा का चुनाव लड़ेंगे या परिवार के किसी सदस्य को लड़वाँयेगे।</p>
<p><br />पूर्वांचल मे राजनीतिक समीकरण लगातार बदल रहे है। देखा दिलचस्प हो की भूमिहार वोट बैंक किस पाले मे गिरता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>चुनाव</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 May 2026 16:39:37 +0530</pubDate>
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                <title>दैनिक जागरण MP-CG पर अब घर बैठे दें जाहिर सूचना और विज्ञापन, बस एक क्लिक में मिलेगी पूरी सुविधा</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong><span style="color:rgb(224,62,45);">डिजिटल दौर में अब हर काम तेजी और सुविधा के साथ ऑनलाइन हो रहा है। इसी कड़ी में <a class="decorated-link" style="color:rgb(224,62,45);" href="https://www.dainikjagranmpcg.com?utm_source=chatgpt.com">दैनिक जागरण MP-CG</a> अपने पाठकों और विज्ञापनदाताओं के लिए एक बेहद आसान और भरोसेमंद सुविधा लेकर आया है। अब जाहिर सूचना, निविदा, शोक संदेश, वैवाहिक विज्ञापन, व्यवसायिक प्रचार या किसी भी प्रकार का विज्ञापन देने के लिए आपको कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं होगी।</span></strong></p>
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/now-give-clear-information-and-advertisements-sitting-at-home-on/article-53299"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/dainikjagranmpcg.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong><span style="color:rgb(224,62,45);">डिजिटल दौर में अब हर काम तेजी और सुविधा के साथ ऑनलाइन हो रहा है। इसी कड़ी में <a class="decorated-link" style="color:rgb(224,62,45);" href="https://www.dainikjagranmpcg.com?utm_source=chatgpt.com">दैनिक जागरण MP-CG</a> अपने पाठकों और विज्ञापनदाताओं के लिए एक बेहद आसान और भरोसेमंद सुविधा लेकर आया है। अब जाहिर सूचना, निविदा, शोक संदेश, वैवाहिक विज्ञापन, व्यवसायिक प्रचार या किसी भी प्रकार का विज्ञापन देने के लिए आपको कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं होगी।</span></strong></p>
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                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>जागरण इवेन्ट</category>
                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                            <category>बालीवुड</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                            <category>धर्म</category>
                                            <category>चुनाव</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                            <category>विंध्य/रीवा</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/now-give-clear-information-and-advertisements-sitting-at-home-on/article-53299</link>
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                <pubDate>Thu, 14 May 2026 10:07:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[दैनिक जागरण]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>SIR बहस के साये में बंगाल का जनादेश</title>
                                    <description><![CDATA[हाल के वर्षों में शायद ही किसी चुनावी नतीजे ने उतनी राजनीतिक बहस और राष्ट्रीय आत्ममंथन को जन्म दिया हो, जितना पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की ऐतिहासिक जीत ने किया। लंबे समय तक बंगाल को भाजपा के लिए सबसे कठिन राजनीतिक जमीन माना जाता रहा। इसलिए यह जनादेश केवल सरकार बदलने भर की घटना नहीं थी, बल्कि राज्य की राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत भी था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/election/sir-bengals-mandate-under-the-shadow-of-debate/article-52944"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/sir-बहस-के-साये-में-बंगाल-का-जनादेश.jpg" alt=""></a><br /><p>चुनाव से पहले ही मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर माहौल गरम था। विपक्ष लगातार इस प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा था और इसे चुनावी निष्पक्षता से जोड़कर देख रहा था। नतीजों के बाद विपक्ष के कई नेताओं ने भाजपा की जीत को सीधे SIR से जोड़ने की कोशिश की और यह संदेश देने का प्रयास किया कि राजनीतिक लहर से ज्यादा प्रक्रियागत हस्तक्षेप ने जनादेश को प्रभावित किया।</p>
<p>लेकिन इन आरोपों के पीछे एक दूसरी राजनीतिक बेचैनी भी साफ दिखाई देती है — वह बेचैनी, जो भाजपा की उन इलाकों में बढ़ती स्वीकार्यता को लेकर है जिन्हें कभी उसके लिए वैचारिक रूप से असंभव माना जाता था। दरअसल, अगर पूरे विवाद को तथ्यों और व्यापक संदर्भ में देखा जाए, तो साफ होता है कि SIR कोई असाधारण या केवल बंगाल तक सीमित प्रक्रिया नहीं थी।</p>
<p><br /><strong>SIR कोई राजनीतिक प्रयोग नहीं, संवैधानिक प्रक्रिया थी</strong></p>
<p>मतदाता सूची का पुनरीक्षण चुनाव आयोग की नियमित संवैधानिक जिम्मेदारी का हिस्सा है। इसका उद्देश्य डुप्लीकेट, मृत या अयोग्य मतदाताओं के नाम हटाकर सूची को अद्यतन करना होता है। बिहार चुनावों के दौरान भी SIR को लेकर इसी तरह के सवाल उठे थे, लेकिन वहां भी अंततः भाजपा-नीत NDA सत्ता में लौटा।</p>
<p>यह दावा भी पूरी तरह टिकता नहीं दिखता कि मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया केवल विपक्ष शासित राज्यों को प्रभावित करने के लिए अपनाई गई थी। आंकड़े बताते हैं कि भाजपा शासित राज्यों में भी बड़े स्तर पर संशोधन हुए। गुजरात में मतदाता सूची में 13.39% की कमी दर्ज की गई, उत्तर प्रदेश में यह आंकड़ा 13.23% रहा, जबकि पश्चिम बंगाल में यह 11.63% था। छत्तीसगढ़ में भी लगभग इसी स्तर का संशोधन हुआ।</p>
<p>अगर पूरी प्रक्रिया किसी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा होती, तो भाजपा शासित राज्यों में इतने बड़े पैमाने पर संशोधन होना स्वाभाविक नहीं लगता। व्यापक तस्वीर यही बताती है कि यह एक राष्ट्रीय स्तर का प्रशासनिक अभ्यास था, जिसे सभी राज्यों में समान रूप से लागू किया गया।</p>
<p><strong>चुनाव केवल गणित से नहीं जीते जाते</strong></p>
<p>बंगाल के नतीजों को केवल वोटों के आंकड़ों और मतदाता सूची में हुए बदलाव तक सीमित कर देना भारतीय चुनावों की वास्तविक प्रकृति को नजरअंदाज करना होगा। भारत की फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट प्रणाली में वोट प्रतिशत का मामूली बदलाव भी सीटों में बड़ा उलटफेर कर सकता है।</p>
<p>बंगाल खुद इसका उदाहरण रहा है। 2006 से 2011 के बीच वाम मोर्चे का पतन भी धीरे-धीरे बनते राजनीतिक माहौल का परिणाम था। इस बार उत्तर बंगाल, जंगलमहल और प्रेसिडेंसी क्षेत्र में भाजपा का प्रदर्शन किसी एक मुद्दे का असर नहीं, बल्कि लंबे समय से चल रहे राजनीतिक विस्तार का संकेत था।</p>
<p>दिलचस्प बात यह है कि जिन सीटों पर सबसे ज्यादा मतदाता नाम हटाए गए, उनमें से बड़ी संख्या में सीटें तृणमूल कांग्रेस ने जीतीं। कई जगहों पर हटाए गए नाम जीत के अंतर से ज्यादा थे, फिर भी अलग-अलग सीटों पर भाजपा और TMC दोनों को जीत मिली। इससे यह धारणा कमजोर पड़ती है कि पूरी प्रक्रिया केवल एक पार्टी को फायदा पहुंचाने के लिए बनाई गई थी।</p>
<p><strong>संस्थाओं पर भरोसा परिणाम देखकर नहीं होना चाहिए</strong></p>
<p>चुनावों के बाद भारतीय राजनीति में एक परिचित पैटर्न बार-बार देखने को मिलता है। जब भाजपा उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन करती है, तब EVM, VVPAT, मतदाता सूची और अब SIR जैसे मुद्दों पर सवाल तेज हो जाते हैं। लेकिन जब विपक्ष कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश या तेलंगाना जैसे राज्यों में जीत दर्ज करता है, तब वही संस्थाएं अचानक स्वीकार्य लगने लगती हैं।</p>
<p>केरल में कांग्रेस-नीत UDF की वापसी भी इसी चुनावी व्यवस्था के तहत हुई, लेकिन वहां संस्थागत साजिश की वैसी बहस नहीं दिखी। यही विरोधाभास लोकतांत्रिक विमर्श को कमजोर करता है। संस्थाओं की विश्वसनीयता का मूल्यांकन राजनीतिक सुविधा के आधार पर नहीं होना चाहिए।</p>
<p>यह भी महत्वपूर्ण है कि पश्चिम बंगाल में पूरी SIR प्रक्रिया न्यायिक निगरानी के तहत हुई। सुप्रीम कोर्ट और कलकत्ता हाई कोर्ट में कई याचिकाओं पर सुनवाई हुई और अंततः अदालतों ने चुनाव आयोग की प्रक्रिया को जारी रखने की अनुमति दी।</p>
<p><strong>बंगाल का जनादेश जमीन की हकीकत से भी जुड़ा था</strong></p>
<p>बंगाल के नतीजों को केवल SIR के नजरिये से देखना राज्य में वर्षों से बढ़ रहे असंतोष को नजरअंदाज करना होगा। राजनीतिक हिंसा, चुनाव बाद प्रताड़ना, बेरोजगारी और शासन को लेकर थकान जैसी भावनाएं धीरे-धीरे लोगों के बीच मजबूत हो रही थीं।</p>
<p>संदेशखाली की घटनाओं और RG Kar मेडिकल कॉलेज रेप एवं हत्या मामले ने इस असंतोष को और गहरा कर दिया। खासकर महिलाओं और शहरी मतदाताओं के बीच यह धारणा मजबूत हुई कि जवाबदेही के सवाल पर राज्य सरकार का रवैया रक्षात्मक और संवेदनहीन रहा।</p>
<p>इसके अलावा अल्पसंख्यक तुष्टिकरण, राजनीतिक धमकी और विपक्षी कार्यकर्ताओं पर हमलों जैसे आरोपों ने पहले ही राजनीतिक ध्रुवीकरण को बढ़ा दिया था। ऐसे माहौल में भाजपा का उभार अचानक हुआ राजनीतिक चमत्कार नहीं, बल्कि लंबे समय से चल रहे सामाजिक और राजनीतिक बदलाव का परिणाम दिखा।</p>
<p><strong>लोकतंत्र में आत्ममंथन जरूरी है, स्थायी संदेह नहीं</strong></p>
<p>लोकतंत्र केवल तब तक विश्वसनीय नहीं माना जा सकता, जब तक परिणाम किसी राजनीतिक दल के पक्ष में आएं। हर हार को संस्थागत साजिश बताना अंततः लोकतांत्रिक संस्थाओं पर लोगों का भरोसा कमजोर करता है और राजनीतिक आत्ममंथन की गुंजाइश कम कर देता है।</p>
<p>बंगाल का जनादेश निश्चित रूप से कई स्थापित राजनीतिक धारणाओं को चुनौती देता है। लेकिन उसने भारतीय लोकतंत्र की एक पुरानी सच्चाई को फिर सामने रखा है — भारत का मतदाता अक्सर राजनीतिक दलों और विश्लेषकों की अपेक्षाओं से कहीं ज्यादा निर्णायक और अप्रत्याशित बदलाव लाने की क्षमता रखता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>चुनाव</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/election/sir-bengals-mandate-under-the-shadow-of-debate/article-52944</link>
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                <pubDate>Fri, 08 May 2026 18:00:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[दैनिक जागरण]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव विश्लेषण</title>
                                    <description><![CDATA[धन्यवाद, पश्चिम बंगाल, धन्यवाद]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/election/west-bengal-assembly-election-analysis/article-52941"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/पश्चिम-बंगाल-में-जन-क्रांति-भय-पर-भरोसे-की-विजय-और-विकसित-भारत-का-संकल्प.jpg" alt=""></a><br /><p>धन्यवाद, धन्यवाद, धन्यवाद ..... न केवल धन्यवाद, बारम्बार धन्यवाद, हार्दिक बधाइयाँ आपके दूरदृष्टिपूर्ण, साहसिक सुविचारित व स्पष्ट जनादेश के लिए, एक बार फिर से बधाई व धन्यवाद, वास्तव में पश्चिम बंगाल की माताओं, बहनों, बेटियों, मतदाताओं, कार्यकर्ताओं, चुनाव प्रक्रिया सम्पन्न कराने में जी-जान से जुटे शासकीय अधिकारियों, कर्मचारियों, चुनाव आयोग, सुरक्षा बलों, न्याय का झण्डा बुलन्द कर लोकतंत्र को जड़ों को मजबूती प्रदान करने वाले ज्ञात/अज्ञात सभी महानुभावों, विशिष्ट जनों, दैवीय शक्तियों के साथ-साथ भारत के संविधान निर्माताओं को जिन्होंने सत्ता को असली चाबी मतदाताओं को सोंपी है। विवेकपूर्ण, साहासिक व दूरदृष्टिपूर्ण निर्णय कि जितनी भी प्रशंसा की जावे वो छोटी ही प्रतीत होती है।</p>
<p>जब सत्ता की असली बागड़ोर संविधान निर्माताओं ने मतदाताओं को सौंपी है, तो जिस प्रकार हर अंधेरी रात की समय-सीमा समाप्ति के साथ-साथ सूर्योदय निश्चित है उसी प्रकार निरंकुश, अत्याचारी, भ्रष्टाचारी, दुराचारी, सनातन विरोधी, माताओं-बहनों -बेटियों, जो साक्षात् देवी रूप हैं, को सुरक्षा प्रदान करने में अक्षम, लोकतंत्र का उपहास उड़ाने वाली, देश की आर्थिक, सामाजिक व राजनैतिक प्रगति में बाधक सत्ता का अन्त होना भी सुनिश्चित ही था।</p>
<p>चुनाव प्रारम्भ होने की बेला से चुनाव आयोग की चुनाव सम्पन्न होने की अधिसूचना जारी होने तक का मतदाताओं, कार्यकर्ताओं का समीप से अध्ययन करने का अवसर प्राप्त हुआ, मतदाताओं, कार्यकर्ताओं की मानसिक स्थिति को पढ़ने का अवसर प्राप्त हुआ। मतदाताओं, कार्यकर्ताओं से संवाद में चुनाव परिणामों की तस्वीर स्पष्ट परिलक्षित हो रही थी, ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे मतदान की तिथि तक का समय एक कल्प की तरह लम्बा लग रहा है।</p>
<p>इतनी बेसब्री मतदान के लिए, 90% से अधिक का मतदान, ऐसा प्रतीत हो रहा है, जैसे मतदाताओं में मतदान की होड़ लग गई हो, देश-विदेश में बैठे पश्चिम बंगाल के मतदाता लाईन लगाकर, बेखौफ, मतदान के लिए जोश, जुनुन  के साथ लाईन में लग गये, 40 डिग्री सेंटीग्रेट का तापमान पर महिलाओं ने शत-प्रतिशत मतदान का निर्णय कर लिया। चाहे शहर हो, देहात हो, छोटा सा गांव, कस्बा, सूदूर जंगल में छोटी सी बस्ती हो, हर जगह शत-प्रतिशत मतदान की होड़ लगी थी, अगर आप इस मतदान के जोश की भावनाओं को समझ सकें तो चुनाव परिणाम मतदान की लाईन देखने मात्र से ही स्पष्ट था। मतदाताओं में राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी के प्रति विद्रोह, आक्रोश की ज्वाला धधक रही थी, जो उन्होंने मतदान शत-प्रतिशत करने को ठान कर अपने अन्तर्मन की ज्वाला को शान्त करने का मार्ग बनाया। ऐसा क्यों?</p>
<p>सत्तारूढ़ दल के प्रति इतना आक्रोश क्यो?<br />2-3 विधायकों वाली पार्टी 77 विधायकों तक पहुंचती है, फिर सीधे 207 विधायकों पर पहुँचती है। ऐसी स्वीकार्यता में बढ़ोत्तरी क्यो? <br />राजनैतिक विश्लेशकों का उत्तर भी बहुत स्पष्ट है व बहुत आसान है -कि SIR के कारण 90 लाख से अधिक घुसपैठिये मतदान प्रक्रिया से बाहर हो गये, सनातन का विरोध कर ध्रुवीकरण करने के प्रयासों से आम मतदाता चिढ़ गया था, आतंक, भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद, गुण्डागर्दी, महिलाओं के प्रति अपराधों का बड़ता ग्राफ, बेरोजगारी, तुष्टीकरण व भविष्य अंधकारमय देख रहा था आम मतदाता। केंद्रीय बलों की उपस्थिति के कारण आम मतदाता वोट डालने का साहस कर पाया, इत्यादि, इत्यादि ...... </p>
<p>पर एक और अति महत्वपूर्ण तर्क भी मतदाताओं को शांत नहीं बैठने दे रहा था, वो था, ममता सरकार में पश्चिम बंगाल मोदी सरकार के विकसित भारत@ 2047 व 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था की दौड़ में शामिल नहीं हो रहा था, और अगर सरकार न बदली होती तो पश्चिम बंगाल भविष्य में भारत के नक्शे पर गरीब, बीमारू व उन्नति के पैमाने पर मार्ग के किनारे पर दुखी, लाचार सा खड़ा मिलता, बच्चों का भविष्य क्या होता, बच्चों को रोजी-रोटी की तलाश में देशभर में भटकना पड़ता और बेरोजगारी दर बढ़ते ही अपराध चरम पर पहुँच जाता अर्थात राज्य का आर्थिक ढांचा चरमराते ही भविष्य अंधकारमय हो जावेगा। भारी निराशा हावी थी, एफडीआई पश्चिम बंगाल का रास्ता भूल चुका था। इंवेस्टमेंट ने पश्चिम बंगाल से अपना नाता तोड़ लिया था।</p>
<p>देशी विदेशी पर्यटक, धार्मिक पर्यटन, राज्य से निर्यात, कृषि, औद्योगिक उत्पादन, शिक्षा, स्वास्थ्य, अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर सुरक्षा सब हाँसिये पर जा चुका था। केन्द्रीय योजनाओं के लिए ममता सरकार दरवाजे बंद कर चुकी थी, इस प्रकार के प्रश्नों से न केवल पश्चिम बंगाल का नुकसान हो रहा था, बल्कि जिस तरह शरीर का कोई एक अंग बीमार हो जावे तो पूरा शरीर बीमार हो जाता है, उसी प्रकार देश के एक राज्य का प्रगति की दौड़ में पिछड़ना पूरे देश की प्रगति में घातक सिद्ध होता है। इसी कारण पश्चिम बंगाल के मतदाता, कार्यकर्ता, माताऐं-बहनें-बेटियाँ बहुत आदर के पात्र हैं जिन्होंने समय रहते सटीक निर्णय कर राज्य की बागड़ोर श्री नरेन्द्र मोदी जी को सोंप कर न केवल पश्चिम बंगाल को बर्बादी से बचा लिया बल्कि विकसित भारत@ 2047 व 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए खुले दिल से अपना सहयोग, समर्थन व आशीर्वाद प्रदान किया। अब श्री नरेन्द्र मोदी जी की जिम्मेदारी इस विश्वास को पूरा करने के लिए और भी अधिक बड़ गई है। आने वाली राज्य सरकार को जनता की भावनाओं, अपेक्षाओं व विश्वास को केन्द्र मे रख कर बिना थके-बिना रुके चहुमुखी विकास के लिए अत्यधिक प्रयास करने होंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>चुनाव</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 May 2026 17:43:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[दैनिक जागरण]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बंगाल में नई सरकार गठन लिए के नोटिफिकेशन हुआ जारी, ममता ने इस्तीफा देने से किया मना</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल में नई विधानसभा गठन का नोटिफिकेशन जारी हो गया है। ममता बनर्जी ने हार मानने और इस्तीफा देने से इनकार कर दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/notification-issued-for-formation-of-new-government-in-bengal-mamata/article-52790"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ-(77).jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पश्चिम बंगाल में चुनाव नतीजों के बाद सियासी तस्वीर तेजी से बदल रही है। चुनाव आयोग ने राज्य में नई विधानसभा के गठन के लिए अधिसूचना जारी कर दी है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे नई सरकार के गठन का रास्ता लगभग साफ हो गया है। आयोग की ओर से यह नोटिफिकेशन राज्यपाल को भेज दिया गया है और इसके साथ ही पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की औपचारिक प्रक्रिया पूरी मानी जा रही है। इधर चुनावी हार के बाद भी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पद छोड़ने से इनकार कर दिया है। ममता ने साफ कहा है कि वह चुनाव हारी नहीं हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्हें हराया गया है। उन्होंने ईवीएम में गड़बड़ी और चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे </span>“<span lang="hi" xml:lang="hi">जनादेश नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मैनेजमेंट</span>” <span lang="hi" xml:lang="hi">बताया। बंगाल की राजनीति में यह टकराव अब चुनावी हार-जीत से आगे संवैधानिक और राजनीतिक बहस का रूप लेता दिख रहा है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने इस पूरे घटनाक्रम पर कहा कि मुख्यमंत्री इस्तीफा देती हैं या नहीं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह चुनाव आयोग के दायरे का विषय नहीं है। अधिकारियों के अनुसार आयोग की भूमिका चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक सीमित रहती है और नई विधानसभा गठन की अधिसूचना जारी कर दी गई है। उन्होंने बताया कि अधिसूचना राज्यपाल को सौंप दी गई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अब आगे की प्रक्रिया संवैधानिक पदों के स्तर पर तय होगी। इसी बीच कोलकाता में नई सरकार के गठन की हलचल तेज हो गई है। बताया जा रहा है कि 8 मई को बीजेपी विधायक दल की बैठक बुलाई गई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें नए नेता का चुनाव होगा। इसके बाद 9 मई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर जयंती के दिन नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह हो सकता है। पार्टी की ओर से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को ऑब्जर्वर और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी को सह-पर्यवेक्षक बनाया गया है। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि बीजेपी बंगाल में सरकार गठन को लेकर तेजी से आगे बढ़ रही है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सूत्रों ने बताया कि विधायक दल की बैठक में शुभेंदु अधिकारी के नाम पर सहमति बन सकती है। बंगाल में बीजेपी की जीत के बाद मुख्यमंत्री पद की दौड़ में उनका नाम सबसे आगे माना जा रहा है। भवानीपुर सीट से ममता बनर्जी को हराने के बाद उनका राजनीतिक कद और मजबूत हुआ है। दूसरी तरफ ममता बनर्जी अब भी आक्रामक रुख में हैं और उन्होंने न तो हार को सहज स्वीकार किया है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">न ही पद छोड़ने के संकेत दिए हैं।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>चुनाव</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 May 2026 17:43:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>विजय थलपति ने तमिलनाडु में सरकार बनाने का किया दावा, कल लेंगे मुख्यमंत्री पद की शपथ</title>
                                    <description><![CDATA[टीवीके प्रमुख विजय ने तमिलनाडु में सरकार बनाने का दावा पेश किया। विजय गुरुवार सुबह चेन्नई के नेहरू स्टेडियम में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/vijay-thalapathy-claims-to-form-government-in-tamil-nadu-will/article-52791"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ-(78).jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा मोड़ आ गया है। टीवीके प्रमुख विजय ने बुधवार को राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया। पार्टी की ओर से इसकी आधिकारिक जानकारी दी गई। बताया जा रहा है कि विजय लोकभवन पहुंचे और वहां उन्होंने सरकार गठन का दावा सौंपा। इसके साथ ही तमिलनाडु में सत्ता परिवर्तन लगभग तय माना जा रहा है। अब सबकी नजर गुरुवार सुबह पर है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब विजय मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। तमिलनाडु में विजय के नेतृत्व में नई सरकार बनने जा रही है और इसे राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पार्टी सूत्रों के मुताबिक विजय गुरुवार सुबह 10 बजे से 11 बजकर 15 मिनट के बीच मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। शपथ ग्रहण के लिए यही समय तय किया गया है। समारोह चेन्नई के नेहरू स्टेडियम में होगा</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां तैयारियां देर शाम तक चलती रहीं। बताया जा रहा है कि विजय सुबह 10 बजे से पहले ही कार्यक्रम स्थल पहुंच जाएंगे। राज्यपाल की मौजूदगी में शपथ ग्रहण कराया जाएगा। स्टेडियम की क्षमता करीब 5000 लोगों की बताई जा रही है और पूरे आयोजन को लेकर प्रशासन सतर्क है। पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों में इसे लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है। नेहरू स्टेडियम के बाहर शाम से ही हलचल बढ़ गई थी और सुरक्षा इंतजाम भी कड़े कर दिए गए।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">स्टेडियम प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि सभी जरूरी तैयारियां रात में ही पूरी कर ली जाएं और गुरुवार सुबह 6 बजे तक परिसर कार्यक्रम के लिए पूरी तरह तैयार सौंप दिया जाए। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक शपथ ग्रहण कार्यक्रम सुबह 10 बजे से पहले शुरू हो जाएगा और 11:30 बजे तक पूरा होने की संभावना है। तमिलनाडु में विजय की एंट्री पहले ही राजनीति में नई चर्चा खड़ी कर चुकी थी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">अब मुख्यमंत्री पद की शपथ के साथ वह औपचारिक रूप से सत्ता की कमान संभालेंगे। माना जा रहा है कि यह सिर्फ सरकार बदलने का क्षण नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि राज्य की राजनीति में एक नए दौर की शुरुआत भी होगी।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>चुनाव</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 May 2026 17:43:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विधानसभा चुनाव में चौंकाने वाला रिजल्ट, MP के दो राज्यसभा सांसद हारे</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव नतीजों के बीच एक खबर मध्यप्रदेश की राजनीति से भी निकलकर सामने आई है, जिसने सबको थोड़ा चौंकाया है। एमपी से राज्यसभा जाने वाले दो नेता, जो इस बार दूसरे राज्यों में विधानसभा चुनाव मैदान में थे, उन्हें हार का सामना करना पड़ा है। 5 मई 2026 को आए इन नतीजों में केंद्रीय मंत्री स्तर के दोनों चेहरों का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा।</p>
<p style="text-align:justify;">जानकारी के मुताबिक डॉ. एल मुरुगन, जो केंद्र में संसदीय कार्य राज्यमंत्री हैं, तमिलनाडु की अवनाशी सीट से चुनाव लड़ रहे थे। शुरुआती रुझानों में मुकाबला कड़ा दिख रहा था,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/election/shocking-result-in-assembly-elections-two-rajya-sabha-mps-from/article-52708"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/mp.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव नतीजों के बीच एक खबर मध्यप्रदेश की राजनीति से भी निकलकर सामने आई है, जिसने सबको थोड़ा चौंकाया है। एमपी से राज्यसभा जाने वाले दो नेता, जो इस बार दूसरे राज्यों में विधानसभा चुनाव मैदान में थे, उन्हें हार का सामना करना पड़ा है। 5 मई 2026 को आए इन नतीजों में केंद्रीय मंत्री स्तर के दोनों चेहरों का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा।</p>
<p style="text-align:justify;">जानकारी के मुताबिक डॉ. एल मुरुगन, जो केंद्र में संसदीय कार्य राज्यमंत्री हैं, तमिलनाडु की अवनाशी सीट से चुनाव लड़ रहे थे। शुरुआती रुझानों में मुकाबला कड़ा दिख रहा था, लेकिन जैसे-जैसे काउंटिंग आगे बढ़ी, अंतर साफ होता गया। अंत में वे दूसरे स्थान पर रहे और उन्हें करीब 14 हजार वोटों से हार मिली। बताया जा रहा है कि स्थानीय समीकरण उनके पक्ष में पूरी तरह नहीं बन पाए। इसी तरह जार्ज कुरियन, जो अल्पसंख्यक और मत्स्य पालन राज्य मंत्री हैं, केरल की कांजीरापल्ली सीट से चुनाव मैदान में थे। वहां भी नतीजे उनके खिलाफ गए और वे तीसरे स्थान पर रहे। कांग्रेस प्रत्याशी ने उन्हें करीब 29 हजार वोटों से पीछे छोड़ दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">राजनीतिक हलकों में इसे लेकर अलग-अलग तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। सूत्रों का कहना है कि दोनों नेता राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय रहे हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर पकड़ उतनी मजबूत नहीं बन पाई। हालांकि उनके राज्यसभा कार्यकाल पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। डॉ. मुरुगन का कार्यकाल 2030 तक है, जबकि जार्ज कुरियन का कार्यकाल जल्द खत्म होने वाला है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>चुनाव</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 May 2026 10:58:46 +0530</pubDate>
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