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                <title>राज्य - दैनिक जागरण</title>
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                <description>राज्य RSS Feed</description>
                
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                <title>रायपुर पुलिस कमिश्नरेट को मिले 60 नए SI, थानों में शुरू होगी व्यावहारिक ट्रेनिंग</title>
                                    <description><![CDATA[बेसिक प्रशिक्षण पूरा होने के बाद शहर के विभिन्न थानों में पदस्थापना, कानून और पुलिसिंग की बारीकियां सीखेंगे नए अधिकारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/raipur-police-commissionerate-gets-60-new-si-police-stations-practical/article-54735"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/_new-si-training.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रायपुर पुलिस कमिश्नरेट को पुलिस व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए 60 नए उप निरीक्षक (एसआई) मिले हैं। बेसिक ट्रेनिंग पूरी करने के बाद इन सभी अधिकारियों को अब व्यावहारिक प्रशिक्षण के लिए शहर के विभिन्न थानों में पदस्थ किया गया है। इस संबंध में रायपुर पुलिस कमिश्नर की ओर से आदेश जारी कर दिए गए हैं। नए अधिकारियों की तैनाती ऐसे समय में की गई है जब पुलिस विभाग लगातार कानून-व्यवस्था को बेहतर बनाने और अपराध नियंत्रण के लिए अपने संसाधनों को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुलिस मुख्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार इन नए उप निरीक्षकों को शहर के अलग-अलग थानों में भेजा गया है, जहां वे अनुभवी अधिकारियों की देखरेख में कार्य करेंगे। प्रशिक्षण अवधि के दौरान उन्हें थाना संचालन, अपराध अनुसंधान, शिकायतों के निराकरण, कानून-व्यवस्था प्रबंधन और जनता से जुड़े विभिन्न मामलों की व्यवहारिक जानकारी दी जाएगी। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि अकादमिक प्रशिक्षण के बाद यह चरण किसी भी नए अधिकारी के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है क्योंकि यहीं से उसे वास्तविक पुलिसिंग की समझ विकसित होती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जारी आदेश के मुताबिक शहर के कई प्रमुख थानों में तीन-तीन उप निरीक्षकों की पदस्थापना की गई है। इनमें खम्हारडीह, खमतराई, कबीर नगर, गोलबाजार, मोहदापारा, कोतवाली, सिविल लाइन, टिकरापारा, पंडरी, पुरानी बस्ती, राजेंद्र नगर, डीडी नगर, उरला, तेलीबांधा, आमानाका, आजाद चौक और गंज थाना शामिल हैं। इन थानों को इसलिए चुना गया है क्योंकि यहां विभिन्न प्रकार के मामलों का निपटारा होता है और नए अधिकारियों को व्यापक अनुभव प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसके अलावा गुढ़ियारी, मुजगहन, सरस्वती नगर और देवेंद्र नगर थानों में दो-दो एसआई को प्रशिक्षण के लिए तैनात किया गया है। पुलिस विभाग का मानना है कि विभिन्न क्षेत्रों में कार्य करने से अधिकारियों को अलग-अलग परिस्थितियों में काम करने का अनुभव मिलेगा। इससे भविष्य में वे किसी भी चुनौतीपूर्ण स्थिति का सामना अधिक प्रभावी तरीके से कर सकेंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रशिक्षण के दौरान नए उप निरीक्षकों को केवल प्रशासनिक कार्यों तक सीमित नहीं रखा जाएगा। उन्हें अपराध की जांच प्रक्रिया, घटनास्थल निरीक्षण, साक्ष्य संग्रह, केस डायरी तैयार करने, न्यायालयीन प्रक्रियाओं और कानून की व्याख्या से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां भी दी जाएंगी। इसके साथ ही साइबर अपराध, महिला अपराध, सड़क सुरक्षा और सामुदायिक पुलिसिंग जैसे विषयों पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। बदलते समय के साथ अपराधों का स्वरूप भी बदल रहा है, इसलिए नए अधिकारियों को आधुनिक पुलिसिंग तकनीकों की जानकारी देना आवश्यक माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार यह व्यावहारिक प्रशिक्षण किसी भी नए अधिकारी के करियर की मजबूत नींव तैयार करता है। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मिलकर विभिन्न मामलों पर काम करने का अवसर मिलेगा। इससे वे न केवल कानून की बारीकियां समझ सकेंगे बल्कि निर्णय लेने की क्षमता भी विकसित कर पाएंगे। जनता से सीधे संवाद और शिकायतों के समाधान की प्रक्रिया को समझना भी इस प्रशिक्षण का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रायपुर पुलिस कमिश्नरेट में 60 नए एसआई की तैनाती को विभाग के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। लंबे समय से बढ़ते कार्यभार और पुलिस बल की जरूरतों को देखते हुए अतिरिक्त अधिकारियों की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। नए अधिकारियों के आने से थानों में कार्यों का बेहतर विभाजन हो सकेगा और लंबित मामलों के निपटारे में भी तेजी आने की उम्मीद है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुलिस व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए केवल संख्या बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि अधिकारियों को गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण देना भी उतना ही जरूरी है। इसी उद्देश्य से व्यावहारिक प्रशिक्षण को पुलिस सेवा का अहम हिस्सा बनाया गया है। प्रशिक्षण प्राप्त अधिकारी भविष्य में विभिन्न जिम्मेदार पदों पर कार्य करेंगे, इसलिए शुरुआती दौर में उन्हें व्यापक अनुभव प्रदान करना आवश्यक माना जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">शहर के नागरिकों को भी इस कदम से लाभ मिलने की उम्मीद है। नए अधिकारियों की तैनाती से थानों में उपलब्ध पुलिस बल बढ़ेगा, जिससे शिकायतों के समाधान में तेजी आ सकती है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने, अपराध नियंत्रण और जनसुनवाई जैसे कार्यों में भी सुधार की संभावना जताई जा रही है। पुलिस विभाग का लक्ष्य है कि प्रशिक्षित और सक्षम अधिकारियों के माध्यम से नागरिकों को बेहतर और प्रभावी पुलिस सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं। सभी नए उप निरीक्षक अपने-अपने निर्धारित थानों में रिपोर्ट कर चुके हैं और जल्द ही उनका व्यावहारिक प्रशिक्षण शुरू होगा। आने वाले महीनों में यह प्रशिक्षण उनकी कार्यशैली और पेशेवर दक्षता को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 14:16:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>रायपुर के मिवान स्टील प्लांट में भीषण आग, पांच घंटे बाद पाया गया काबू</title>
                                    <description><![CDATA[मंदिर हसौद स्थित औद्योगिक इकाई में सुबह लगी आग से मचा हड़कंप, 10 किलोमीटर दूर तक दिखाई दिया धुएं का गुबार, शॉर्ट सर्किट की आशंका]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/massive-fire-in-raipurs-miwan-steel-plant-brought-under-control/article-54742"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/raipur-fire-news.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के मंदिर हसौद औद्योगिक क्षेत्र स्थित मिवान स्टील लिमिटेड प्लांट में मंगलवार सुबह लगी भीषण आग ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया। आग इतनी विकराल थी कि इसकी ऊंची लपटें और आसमान में उठता काले धुएं का घना गुबार करीब 10 किलोमीटर दूर तक दिखाई देता रहा। सुबह के समय हुई इस घटना के बाद आसपास के औद्योगिक प्रतिष्ठानों और स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल बन गया। आग की सूचना मिलते ही दमकल विभाग, पुलिस और प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचा और कई घंटों तक चले रेस्क्यू एवं राहत अभियान के बाद आग पर काबू पाया जा सका।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार मंगलवार सुबह करीब 5:30 बजे प्लांट परिसर से धुआं उठता दिखाई दिया। शुरुआती समय में किसी को अंदाजा नहीं था कि आग इतनी तेजी से फैल जाएगी। कुछ ही मिनटों में आग ने प्लांट के एक बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया। देखते ही देखते आग की लपटें कई फीट ऊंची उठने लगीं और आसमान में काले धुएं का विशाल गुबार छा गया। धुएं का यह गुबार दूर-दराज के क्षेत्रों से भी साफ दिखाई दे रहा था, जिससे लोगों में चिंता और भय का माहौल बन गया।</p>
<p class="isSelectedEnd">घटना की जानकारी मिलते ही प्लांट प्रबंधन ने तत्काल दमकल विभाग और प्रशासन को सूचना दी। सूचना के बाद रायपुर, मंदिर हसौद और आसपास के क्षेत्रों से कई फायर ब्रिगेड वाहन मौके पर भेजे गए। आग की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त दमकल गाड़ियों को भी बुलाया गया। आग लगातार फैल रही थी, इसलिए फायर कर्मियों को काफी सतर्कता के साथ काम करना पड़ा। प्लांट में मौजूद ज्वलनशील सामग्री और औद्योगिक उपकरणों के कारण स्थिति और अधिक चुनौतीपूर्ण हो गई थी।</p>
<p class="isSelectedEnd">दमकल विभाग के कर्मचारियों ने आग को नियंत्रित करने के लिए पानी और फोम का लगातार उपयोग किया। कई घंटों तक लगातार प्रयास किए गए ताकि आग प्लांट के अन्य हिस्सों तक न पहुंच सके। करीब पांच घंटे तक चले अभियान के बाद आग पर नियंत्रण पाया जा सका। राहत की बात यह रही कि समय रहते स्थिति को संभाल लिया गया, जिससे आग आसपास की अन्य औद्योगिक इकाइयों तक नहीं फैल सकी।</p>
<p class="isSelectedEnd">घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए प्लांट के आसपास बैरिकेडिंग कर दी गई और लोगों की आवाजाही सीमित कर दी गई। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर आसपास के क्षेत्रों में मौजूद लोगों को भी सतर्क रहने की सलाह दी। अधिकारियों ने पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए रखी और राहत कार्यों का लगातार निरीक्षण किया।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस आगजनी की घटना में किसी प्रकार की जनहानि की सूचना नहीं मिली है, जिसे सबसे बड़ी राहत माना जा रहा है। प्लांट में कार्यरत कर्मचारियों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया गया था। हालांकि आग के कारण प्लांट को भारी आर्थिक नुकसान होने की संभावना जताई जा रही है। आग से मशीनरी, कच्चा माल और अन्य औद्योगिक संसाधनों को नुकसान पहुंचने की आशंका है। नुकसान का वास्तविक आंकलन विस्तृत जांच और सर्वेक्षण के बाद ही सामने आ सकेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">आग बुझने के बाद अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। फिलहाल आग लगने के सटीक कारणों का पता नहीं चल पाया है, लेकिन प्रारंभिक जांच में शॉर्ट सर्किट या तकनीकी खराबी की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों की टीम को आग के कारणों की जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जांच के दौरान विद्युत व्यवस्था, मशीनों की स्थिति और सुरक्षा मानकों की भी समीक्षा की जाएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">औद्योगिक क्षेत्र में हुई इस बड़ी घटना ने सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर भी कई सवाल खड़े किए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े उद्योगों में अग्नि सुरक्षा मानकों का नियमित परीक्षण और उपकरणों का समय-समय पर रखरखाव बेहद जरूरी है। किसी भी छोटी तकनीकी खराबी को नजरअंदाज करना बड़े हादसे का कारण बन सकता है। ऐसे में इस घटना के बाद अन्य औद्योगिक इकाइयों में भी सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा किए जाने की संभावना है।</p>
<p class="isSelectedEnd">स्थानीय लोगों ने बताया कि सुबह अचानक आसमान में घना काला धुआं दिखाई देने लगा था। शुरुआत में लोगों को समझ नहीं आया कि आखिर यह धुआं कहां से उठ रहा है। जब आग की जानकारी सामने आई तो बड़ी संख्या में लोग घटनास्थल के आसपास पहुंचने लगे। हालांकि पुलिस ने सुरक्षा कारणों से लोगों को दूर रखा और क्षेत्र को नियंत्रित किया।</p>
<p>प्रशासन का कहना है कि मामले की जांच पूरी गंभीरता से की जाएगी और यदि किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित पक्षों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और विशेषज्ञों की टीम आग लगने के वास्तविक कारणों की जांच में जुटी हुई है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस भीषण आग के पीछे तकनीकी खराबी थी या कोई अन्य वजह जिम्मेदार थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <title>छत्तीसगढ़ सरकार का बड़ा फैसला, मीसाबंदियों को हर माह 25 हजार रुपये सम्मान राशि</title>
                                    <description><![CDATA[लोकतंत्र सेनानी सम्मान अधिनियम में संशोधन, चिकित्सा सुविधाओं का भी मिलेगा लाभ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/big-decision-of-chhattisgarh-government-to-give-honorarium-of-rs/article-54732"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/chhattisgarh-misa-detainees.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">छत्तीसगढ़ सरकार ने आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले मीसाबंदियों और लोकतंत्र सेनानियों के हित में एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। राज्य सरकार ने लोकतंत्र सेनानी सम्मान अधिनियम में संशोधन करते हुए पात्र लोगों को मिलने वाली सम्मान राशि और सुविधाओं का दायरा बढ़ा दिया है। इस फैसले के तहत अब पात्र मीसाबंदियों को हर महीने 25 हजार रुपये तक की सम्मान राशि दी जाएगी। इसके साथ ही उन्हें स्वतंत्रता सेनानियों के समान चिकित्सा सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। सरकार के इस निर्णय को लंबे समय से लंबित मांगों को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। राज्य सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार संशोधित अधिनियम का उद्देश्य उन लोगों को सम्मान और आर्थिक सहायता प्रदान करना है, जिन्होंने आपातकाल के दौरान लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष किया था। आपातकाल के समय अनेक लोगों को मीसा (मेंटेनेंस ऑफ इंटरनल सिक्योरिटी एक्ट) के तहत गिरफ्तार किया गया था और कई लोगों ने जेलों में लंबा समय बिताया था। ऐसे लोगों को लोकतंत्र सेनानी के रूप में सम्मानित करने के लिए राज्य सरकार पहले से योजना चला रही थी, लेकिन अब इसमें महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">नई व्यवस्था के अनुसार योजना के दायरे से बाहर रह गए पात्र लोकतंत्र सेनानियों को भी लाभ लेने का अवसर मिलेगा। हालांकि इसके लिए उन्हें निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि पात्र व्यक्तियों को अधिसूचना जारी होने के 90 दिनों के भीतर आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। सम्मान राशि प्राप्त करने के लिए संबंधित जिला मजिस्ट्रेट के पास आवेदन देना अनिवार्य होगा। आवेदन के साथ जिला पुलिस अधीक्षक द्वारा जारी प्रमाण पत्र भी संलग्न करना होगा, जिससे यह प्रमाणित हो सके कि संबंधित व्यक्ति आपातकाल के दौरान निरुद्ध या कारावास में रहा था। सरकार ने आवेदन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए जिला स्तरीय समिति के गठन का प्रावधान भी किया है। यह समिति प्राप्त आवेदनों की जांच करेगी और पात्रता का निर्धारण करेगी। समिति की अध्यक्षता जिले के प्रभारी मंत्री करेंगे। इसके अलावा अन्य प्रशासनिक अधिकारी भी समिति का हिस्सा होंगे। जांच और सत्यापन के बाद पात्र लोगों को सम्मान राशि और अन्य सुविधाओं का लाभ दिया जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">संशोधित अधिनियम के तहत विभिन्न श्रेणियों के मीसाबंदियों के लिए अलग-अलग राशि निर्धारित की गई है। जिन लोगों को आपातकाल के दौरान एक महीने तक जेल या थाने में निरुद्ध रखा गया था, उन्हें प्रति माह 8 हजार रुपये की सम्मान राशि प्रदान की जाएगी। वहीं एक माह से अधिक और पांच माह तक जेल या थाने में निरुद्ध रहने वाले लोगों को हर महीने 15 हजार रुपये की राशि मिलेगी। लंबे समय तक कारावास झेलने वाले पात्र मीसाबंदियों को अधिक राशि दिए जाने का भी प्रावधान किया गया है। सरकार के फैसले के अनुसार कुछ श्रेणियों में यह सम्मान राशि बढ़ाकर 25 हजार रुपये प्रति माह तक दी जाएगी। सरकार ने केवल आर्थिक सहायता तक ही इस योजना को सीमित नहीं रखा है। संशोधन के बाद पात्र लोकतंत्र सेनानियों को स्वतंत्रता सेनानियों के समान चिकित्सा सुविधाएं भी प्रदान की जाएंगी। इससे उन्हें सरकारी अस्पतालों और निर्धारित स्वास्थ्य संस्थानों में बेहतर चिकित्सा सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा। माना जा रहा है कि इस कदम से बुजुर्ग लोकतंत्र सेनानियों और उनके परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी, क्योंकि बढ़ती उम्र के साथ स्वास्थ्य संबंधी जरूरतें भी बढ़ जाती हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर इस फैसले को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कई वर्षों से लोकतंत्र सेनानी संगठनों की ओर से सम्मान राशि बढ़ाने और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की जा रही थी। उनका कहना था कि आपातकाल के दौरान लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले लोगों को उचित सम्मान और सहायता मिलनी चाहिए। अब सरकार के इस फैसले के बाद इन मांगों को काफी हद तक पूरा माना जा रहा है। यह निर्णय केवल आर्थिक सहायता का विषय नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और ऐतिहासिक योगदान को सम्मान देने का प्रयास भी है। आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय माना जाता है और उस दौर में संघर्ष करने वाले लोगों की भूमिका को विभिन्न स्तरों पर याद किया जाता रहा है। ऐसे में राज्य सरकार का यह कदम उन लोगों के योगदान को औपचारिक रूप से मान्यता देने की दिशा में भी देखा जा रहा है।</p>
<p>अधिसूचना जारी होने के बाद पात्र लोगों के बीच आवेदन प्रक्रिया को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है। आने वाले दिनों में जिला स्तर पर आवेदन प्राप्त किए जाएंगे और सत्यापन की प्रक्रिया शुरू होगी। इसके बाद पात्र लोकतंत्र सेनानियों को सम्मान राशि और चिकित्सा सुविधाओं का लाभ मिलना प्रारंभ होगा। सरकार का मानना है कि इससे उन लोगों को सम्मान और सुरक्षा दोनों मिलेंगे जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष किया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 13:34:45 +0530</pubDate>
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                <title>ग्वालियर में हैवानियत की हदें पार: 15 साल की छात्रा से गैंगरेप के बाद हत्या</title>
                                    <description><![CDATA[प्यार के झांसे में फंसाकर भिंड से ग्वालियर लाया था प्रेमी, 50 हजार रुपये में सौदा करने का विरोध करने पर घोंटा गला; तीनों आरोपी गिरफ्तार]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/gang-rape-and-murder-of-a-15-year-old-girl/article-54730"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/gwalior-gangrape-case.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">मध्यप्रदेश के ग्वालियर से एक ऐसा दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जिसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। यहां एक 15 साल की नौवीं कक्षा की छात्रा के साथ उसके ही प्रेमी और उसके दो दोस्तों ने मिलकर सामूहिक दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया। दरिंदगी यहीं नहीं रुकी, जब नाबालिग ने अपनी अस्मत का सौदा होते देखा और विरोध किया, तो आरोपियों ने बेरहमी से उसकी गला दबाकर हत्या कर दी। इसके बाद कानून की गिरफ्त से बचने और सबूत मिटाने के लिए आरोपियों ने मृतका के शव पर पेट्रोल छिड़ककर उसे पहाड़ी पर ही जला दिया। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए मुख्य आरोपी समेत तीनों दरिंदों को गिरफ्तार कर लिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह पूरी खौफनाक वारदात भिंड और ग्वालियर जिले के बीच अंजाम दी गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार, भिंड जिले के मौ की रहने वाली 15 वर्षीय छात्रा का पिछले एक साल से रामू गुर्जर नाम के युवक से संपर्क था। दोनों की मुलाकात झांकरी स्कूल के पास हुई थी और छात्रा रामू पर अंधविश्वास करती थी। इसी प्यार के भरोसे का फायदा उठाकर आरोपी रामू गुर्जर 28 मई को नाबालिग को बहला-फुसलाकर उसके घर से भगा ले गया। वह उसे बाइक पर बैठाकर करीब 61 किलोमीटर दूर ग्वालियर लेकर आया। ग्वालियर पहुंचने के बाद रामू ने अपने दो दोस्तों, अरुण कुशवाहा और गौरव कुशवाहा से संपर्क किया, जो जनकगंज थाना क्षेत्र में गुप्तेश्वर पहाड़ी के नीचे रहते थे।</p>
<p style="text-align:justify;">योजना के मुताबिक, तीनों आरोपी छात्रा को लेकर सुनसान और करीब 500 फीट ऊंची गुप्तेश्वर पहाड़ी पर चले गए। पहाड़ी पर पहुंचकर सबसे पहले तीनों आरोपियों ने जमकर शराब पी। इसके बाद मुख्य आरोपी रामू ने छात्रा के साथ जबरन दुष्कर्म किया। इसी दौरान रामू की हैवानियत इस कदर बढ़ गई कि वह अपनी ही प्रेमिका को अपने दोस्त अरुण कुशवाहा को महज 50 हजार रुपये में बेचने का सौदा करने लगा। एक मासूम लड़की जिसे उम्मीद थी कि वह अपने प्यार के साथ सुरक्षित है, उसने जब खुद का सौदा होते सुना तो वह दंग रह गई। नाबालिग ने इस घिनौने सौदे का पूरी ताकत से विरोध किया और चीखने-चिल्लाने लगी।</p>
<p style="text-align:justify;">विरोध से बौखलाए आरोपियों ने पहले तो छात्रा के साथ मारपीट की, और फिर रामू के एक और साथी ने उसके साथ दरिंदगी की। पीड़िता लगातार रो रही थी और मदद की गुहार लगा रही थी, लेकिन सुनसान पहाड़ी पर उसकी आवाज सुनने वाला कोई नहीं था। बदनामी और पकड़े जाने के डर से रात करीब 11:30 बजे आरोपियों ने छात्रा के ही दुपट्टे से उसका गला घोंट दिया, जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई। हत्या के बाद तीनों आरोपी रात के अंधेरे में वहां से भाग निकले। अगले दिन सुबह, पुलिस को गुमराह करने और अपराध का कोई सबूत न छोड़ने की नीयत से तीनों आरोपी दोबारा पहाड़ी पर पहुंचे और शव पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी।</p>
<p style="text-align:justify;">इस सनसनीखेज वारदात का खुलासा तब हुआ जब मृतका के परिजनों ने भिंड के मौ थाने में उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने जब मामले की तफ्तीश शुरू की और कॉल डिटेल्स खंगाली, तो रामू गुर्जर का नाम सामने आया। पुलिस ने संदेह के आधार पर रामू को हिरासत में लिया और जब उससे कड़ाई से पूछताछ की, तो वह टूट गया। उसने रोते हुए अपना गुनाह कबूल कर लिया और पूरी खौफनाक दास्तान पुलिस के सामने उगल दी। रामू के कबूलनामे के बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उसके दोनों साथियों अरुण और गौरव कुशवाहा को भी दबोच लिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 13:34:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>'पंडित जी पायलागू' वीडियो पर रीवा में विवाद, माफी के बाद भी थमा नहीं मामला</title>
                                    <description><![CDATA[ब्राह्मण समाज पर टिप्पणी वाले वीडियो को लेकर सोशल मीडिया में बहस तेज, पुलिस कर रही पहचान और वीडियो की सत्यता की जांच]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/vindhya-rewa/controversy-in-rewa-over-panditji-payalagu-video-matter-not-stopped/article-54726"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/rewa-viral-video.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रीवा में सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। "पंडित जी पायलागू" शब्दों का इस्तेमाल करते हुए बनाए गए इस वीडियो में ब्राह्मण समाज को लेकर की गई टिप्पणियों पर कई सामाजिक संगठनों और लोगों ने आपत्ति जताई है। वीडियो सामने आने के बाद मामला तेजी से चर्चा में आ गया और देखते ही देखते सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर इसकी व्यापक प्रतिक्रिया देखने को मिली। कई लोगों ने इसे समाज के एक वर्ग की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला बताया, जबकि कुछ लोगों ने वीडियो के पीछे की मंशा और इसकी सत्यता की जांच की मांग की है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जानकारी के अनुसार वीडियो में दिखाई दे रही महिला ब्राह्मण समाज और उनसे जुड़े धार्मिक कार्यों को लेकर विवादित बातें कहती हुई सुनाई दे रही है। वीडियो वायरल होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने इसकी आलोचना शुरू कर दी। सोशल मीडिया पर कई पोस्ट और प्रतिक्रियाएं सामने आईं, जिनमें संबंधित महिला के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई। मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब विभिन्न सामाजिक संगठनों के सदस्यों ने भी इस पर नाराजगी जताई और प्रशासन से हस्तक्षेप करने की मांग की। वायरल वीडियो को लेकर एक और पहलू सामने आया है। विवाद बढ़ने के कुछ समय बाद एक दूसरा वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हुआ, जिसमें वही महिला अपने पहले बयान पर खेद व्यक्त करती दिखाई दे रही है। वीडियो में वह कान पकड़कर माफी मांगती नजर आती है और कहती है कि यदि उसके बयान से किसी की भावनाएं आहत हुई हैं तो वह उसके लिए क्षमा चाहती है। इस दूसरे वीडियो के सामने आने के बाद भी बहस पूरी तरह शांत नहीं हुई है। कई लोगों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, जबकि कुछ लोग माफी को पर्याप्त मान रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">महिला की पहचान को लेकर भी अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर उसे अमिलकी गांव की निवासी दामिनी पटेल उर्फ भोली बताया जा रहा है, लेकिन प्रशासन की ओर से अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। यही कारण है कि पुलिस और प्रशासन फिलहाल तथ्यों के सत्यापन पर जोर दे रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले वीडियो की वास्तविकता और उसमें दिखाई देने वाले व्यक्ति की पहचान सुनिश्चित करना जरूरी है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रीवा के पुलिस अधीक्षक गुरुकरण सिंह ने भी मामले पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक जानकारी के आधार पर वीडियो में दिखाई दे रही महिला रीवा शहर की निवासी प्रतीत नहीं होती है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि अभी जांच जारी है और वीडियो से जुड़ी सभी जानकारियों का सत्यापन किया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली किसी भी सामग्री के संबंध में तथ्यात्मक जांच बेहद जरूरी होती है, ताकि गलत जानकारी के आधार पर कार्रवाई न हो। इस पूरे घटनाक्रम के बीच सोशल मीडिया पर बहस लगातार जारी है। कुछ लोग इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे में देखने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि बड़ी संख्या में लोग इसे सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाला बयान बता रहे हैं। कई यूजर्स का कहना है कि किसी भी समुदाय, जाति या वर्ग के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी से बचना चाहिए। वहीं कुछ लोगों ने प्रशासन से यह भी मांग की है कि ऐसे मामलों में एक समान और निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सोशल मीडिया के दौर में किसी भी वीडियो का प्रभाव बहुत तेजी से फैलता है। ऐसे में किसी भी प्रकार की टिप्पणी, चाहे वह किसी भी समुदाय को लेकर हो, व्यापक प्रतिक्रिया का कारण बन सकती है। यही वजह है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस और प्रशासन लगातार लोगों से जिम्मेदारी के साथ सोशल मीडिया का उपयोग करने की अपील करते रहे हैं। रीवा पुलिस भी पहले कई बार भड़काऊ, आपत्तिजनक और सामाजिक तनाव बढ़ाने वाली पोस्टों को लेकर एडवाइजरी जारी कर चुकी है। इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू जांच का है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि वीडियो कब और कहां बनाया गया, उसमें दिखाई देने वाली महिला की वास्तविक पहचान क्या है और वीडियो का पूरा संदर्भ क्या था। जांच पूरी होने के बाद ही आगे की कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>विंध्य/रीवा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 13:34:11 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>इंजीनियरों का कमाल... गारंटी वाली सड़कों को फिर बनाने का भेज दिया प्रस्ताव, 9 अफसरों को नोटिस</title>
                                    <description><![CDATA[परफॉर्मेंस गारंटी में शामिल सड़कों पर दोबारा निर्माण की मांग, 140 करोड़ रुपए के प्रस्ताव पर विभाग सख्त]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/amazing-work-of-engineers-proposal-to-reconstruct-roads-with-guarantee/article-54714"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/pwd-road-scam.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने विभागीय कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जिन सड़कों की मरम्मत और रखरखाव की जिम्मेदारी अभी भी संबंधित ठेकेदारों के पास थी, उन्हीं सड़कों को दोबारा बनाने के लिए करोड़ों रुपए के प्रस्ताव शासन को भेज दिए गए। मामला सामने आने के बाद विभाग ने इसे गंभीर अनियमितता मानते हुए नौ इंजीनियरों को नोटिस जारी कर दिया है और उनसे 15 दिन के भीतर जवाब मांगा गया है। अधिकारियों का कहना है कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक प्रदेश के विभिन्न जिलों में ऐसी 19 सड़कें चिन्हित हुई हैं जो अभी परफॉर्मेंस गारंटी अवधि में हैं। नियमों के अनुसार इस अवधि के दौरान सड़क की गुणवत्ता बनाए रखने, मरम्मत करने और किसी भी प्रकार की खराबी दूर करने की जिम्मेदारी ठेकेदार की होती है। इसके बावजूद कुछ अधिकारियों ने इन सड़कों के लिए नए निर्माण और पुनर्निर्माण के प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेज दिए। इन प्रस्तावों की कुल लागत लगभग 140 करोड़ रुपए बताई गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मामला सामने आने के बाद विभागीय स्तर पर जांच की गई तो पता चला कि भोपाल, रायसेन, ग्वालियर, नर्मदापुरम, मंदसौर और मुरैना जिलों की सड़कों के लिए यह प्रस्ताव तैयार किए गए थे। नोटिस में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि अधिकारियों ने नियमों के विपरीत कार्य करते हुए परफॉर्मेंस गारंटी अवधि में ही नई लागत का आकलन कर प्रशासकीय स्वीकृति के लिए प्रस्ताव भेज दिए। यह प्रक्रिया विभागीय नियमों और वित्तीय अनुशासन के खिलाफ मानी गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सबसे बड़ा प्रस्ताव भोपाल और रायसेन क्षेत्र से जुड़ा बताया जा रहा है। यहां कार्यपालन यंत्री योगेंद्र कुमार ने आठ सड़कों पर व्हाइट टॉपिंग के लिए करीब 51.65 करोड़ रुपए का प्रस्ताव भेजा था। विभागीय अधिकारियों के अनुसार जिन सड़कों के लिए यह प्रस्ताव बनाया गया, उनमें से कई सड़कें अभी गारंटी अवधि में थीं। ऐसे में नए निर्माण का प्रस्ताव भेजना सवालों के घेरे में आ गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसी तरह राकेश निगम ने तीन सड़कों के लिए 27.50 करोड़ रुपए की मांग की थी। वहीं एसआर परते ने तीन सड़कों को दोबारा बनाने के लिए 19.03 करोड़ रुपए का प्रस्ताव तैयार किया। ग्वालियर क्षेत्र में एके जैन ने गांधी रोड के निर्माण के लिए 13.56 करोड़ रुपए का प्रस्ताव भेजा था। दिलचस्प बात यह रही कि इसी सड़क के लिए ओमहरि शर्मा द्वारा भी प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया था। इससे विभागीय स्तर पर समन्वय और प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मंदसौर जिले में आदित्य सोनी ने दो सड़कों के लिए 5.20 करोड़ रुपए की लागत का प्रस्ताव तैयार किया था। वहीं रायसेन जिले में पीके झा ने छींद मार्ग के लिए 5.12 करोड़ रुपए की मांग रखी। नर्मदापुरम क्षेत्र में सुभाष पाटिल और संजय रायकवार ने चार सड़कों की मरम्मत के लिए 2.23 करोड़ रुपए का प्रस्ताव शासन को भेजा था। अब इन सभी प्रस्तावों की जांच की जा रही है और संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विभागीय सूत्रों का कहना है कि परफॉर्मेंस गारंटी अवधि का उद्देश्य ही यह सुनिश्चित करना होता है कि सड़क निर्माण के बाद यदि कोई तकनीकी कमी सामने आती है तो उसका खर्च सरकारी खजाने पर न पड़े। ठेकेदार निर्धारित अवधि तक सड़क की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए बाध्य रहता है। ऐसे में यदि उसी अवधि के दौरान सड़क को दोबारा बनाने या मरम्मत कराने के लिए सरकारी धन की मांग की जाती है तो यह नियमों की मूल भावना के विपरीत माना जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मामले ने विभाग के भीतर भी हलचल बढ़ा दी है। अधिकारियों का कहना है कि यदि प्रस्तावों को समय रहते नहीं रोका जाता तो करोड़ों रुपए का अतिरिक्त वित्तीय बोझ सरकार पर पड़ सकता था। यही वजह है कि अब पूरे मामले की गहन समीक्षा की जा रही है। संबंधित फाइलों, तकनीकी स्वीकृतियों और प्रस्तावों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। इस तरह के मामलों में जवाबदेही तय होना जरूरी है ताकि सार्वजनिक धन का सही उपयोग सुनिश्चित किया जा सके। सभी नौ इंजीनियरों को नोटिस जारी कर 15 दिन के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 12:36:04 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>इंदौर में घर के बाहर खड़ी गाड़ियों में लगाई आग, ऑटो और दो बाइक जलकर खाक</title>
                                    <description><![CDATA[देर रात बदबू आने पर जागे लोग, पड़ोसियों के शोर से खुली आंखें; आरोपियों की तलाश में जुटी पुलिस]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/%E0%A4%87%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%8C%E0%A4%B0-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%98%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%B9%E0%A4%B0-%E0%A4%96%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A5%80-%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B2%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%88-%E0%A4%86%E0%A4%97--%E0%A4%91%E0%A4%9F%E0%A5%8B-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%A6%E0%A5%8B-%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%87%E0%A4%95-%E0%A4%9C%E0%A4%B2%E0%A4%95%E0%A4%B0-%E0%A4%96%E0%A4%BE%E0%A4%95/article-54715"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/indore-fire-incident.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इंदौर के बाणगंगा थाना क्षेत्र में सोमवार देर रात एक आगजनी की घटना ने इलाके के लोगों को दहशत में डाल दिया। साईं सुमन कॉलोनी में घर के बाहर खड़ी गाड़ियों को अज्ञात बदमाशों ने आग के हवाले कर दिया। घटना उस समय सामने आई जब देर रात अचानक जलने की तेज बदबू आने लगी और आसपास के लोगों ने शोर मचाना शुरू किया। शोर सुनकर परिवार के सदस्य घरों से बाहर निकले तो देखा कि बाहर खड़ी गाड़ियों में आग लगी हुई है। इस दौरान कुछ संदिग्ध युवक मौके से भागते हुए भी दिखाई दिए। घटना में एक ऑटो रिक्शा, दो बाइक, बिजली मीटर और अन्य सामान जलकर नष्ट हो गया। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुलिस के मुताबिक साईं सुमन कॉलोनी निवासी संजय डाबी की शिकायत पर जीत उर्फ बब्बन पुत्र संतोष यादव और अर्पित पुत्र पिंटू ठाकुर के खिलाफ आगजनी और विवाद का प्रकरण दर्ज किया गया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि घटना से कुछ समय पहले दोनों आरोपियों और शिकायतकर्ता के बीच कहासुनी हुई थी। बताया जा रहा है कि आरोपी घर के सामने खड़े होकर अपशब्द कह रहे थे। उस समय घर में मेहमान मौजूद थे, इसलिए संजय डाबी ने उन्हें अभद्र भाषा का इस्तेमाल नहीं करने और वहां से जाने के लिए कहा था। इसके बाद दोनों युवक वहां से चले गए थे, लेकिन कुछ घंटों बाद हुई आगजनी की घटना ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया। शिकायतकर्ता के अनुसार रात में परिवार के सभी सदस्य भोजन करने के बाद सो गए थे। देर रात अचानक जलने की गंध आने लगी। इसी दौरान बाहर से लोगों के चिल्लाने की आवाज भी सुनाई दी। जब वे घर से बाहर निकले तो सामने का दृश्य देखकर हैरान रह गए। घर के बाहर खड़ी उनकी ऑटो रिक्शा आग की लपटों में घिरी हुई थी। पास में खड़ी पड़ोसी जयप्रसाद की बाइक और एक अन्य वाहन भी जल रहे थे। आग तेजी से फैल रही थी और आसपास मौजूद लोग घबराए हुए थे। बताया जा रहा है कि आग की वजह से बिजली मीटर समेत आसपास रखा कुछ अन्य सामान भी इसकी चपेट में आ गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">संजय डाबी ने पुलिस को बताया कि जब वे बाहर पहुंचे तो उन्होंने कुछ लोगों को मौके पर देखा। उन्हें शक हुआ कि आगजनी की घटना में वही लोग शामिल हो सकते हैं जिनसे कुछ समय पहले विवाद हुआ था। उन्होंने उन्हें पकड़ने की कोशिश भी की, लेकिन अंधेरे का फायदा उठाकर वे मौके से फरार हो गए। इसके बाद स्थानीय लोगों ने मिलकर आग बुझाने का प्रयास शुरू किया। काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। यदि समय रहते लोगों की नींद नहीं खुलती तो आग आसपास के अन्य घरों और वाहनों तक भी पहुंच सकती थी। घटना के बाद इलाके में काफी देर तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। स्थानीय लोगों का कहना है कि रात के समय इस तरह की घटनाएं सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं। कॉलोनी के कई रहवासियों ने चिंता जताई कि यदि आग और ज्यादा फैल जाती तो बड़ा नुकसान हो सकता था। लोगों ने क्षेत्र में गश्त बढ़ाने और असामाजिक तत्वों पर कार्रवाई की मांग की है। घटना के बाद कई परिवार देर रात तक घरों के बाहर खड़े रहे और आग बुझाने के बाद ही स्थिति सामान्य हो सकी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच गंभीरता से की जा रही है। घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए गए हैं और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आग जानबूझकर लगाई गई थी या इसके पीछे कोई अन्य कारण था। हालांकि शिकायत और प्रारंभिक तथ्यों के आधार पर आगजनी और विवाद से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। प्रारंभिक जांच में पुरानी रंजिश और विवाद की बात भी सामने आ रही है। पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है। फरार आरोपियों की तलाश के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा और घटना के पीछे की वास्तविक वजह सामने लाई जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 12:35:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>रीवा से जुड़ा था शोमैन राज कपूर का खास रिश्ता, यहीं आई थी उनकी बारात</title>
                                    <description><![CDATA[पुण्यतिथि पर याद किए गए राज कपूर, रीवा में हुआ था विवाह; पत्नी कृष्णा राज कपूर के नाम पर बना है भव्य ऑडिटोरियम]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/vindhya-rewa/showman-raj-kapoor-had-a-special-relationship-with-rewa-his/article-54720"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/raj-kapoor-rewa.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भारतीय सिनेमा के इतिहास में जब भी महान कलाकारों का जिक्र होता है तो राज कपूर का नाम सबसे प्रमुखता से लिया जाता है। अभिनेता, निर्माता और निर्देशक के रूप में उन्होंने हिंदी सिनेमा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। आज उनकी पुण्यतिथि पर देशभर में उन्हें याद किया जा रहा है। हालांकि बहुत कम लोग जानते हैं कि हिंदी फिल्मों के इस महान शोमैन का मध्यप्रदेश के रीवा शहर से भी एक बेहद खास और भावनात्मक रिश्ता रहा है। यह रिश्ता सिर्फ एक औपचारिक संबंध नहीं था, बल्कि उनके जीवन की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक से जुड़ा हुआ था। वर्ष 1946 में राज कपूर की बारात रीवा आई थी और इसी ऐतिहासिक शहर में उनका विवाह संपन्न हुआ था।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राज कपूर और रीवा का यह संबंध आज भी शहर के लोगों के लिए गर्व का विषय माना जाता है। उस दौर में यह विवाह केवल दो परिवारों का मिलन नहीं था, बल्कि उस समय की एक चर्चित सामाजिक घटना भी थी। बताया जाता है कि मई 1946 में राज कपूर का विवाह कृष्णा मल्होत्रा से हुआ था, जिन्हें बाद में दुनिया कृष्णा राज कपूर के नाम से जानने लगी। उस समय कृष्णा के पिता करतार नाथ मल्होत्रा विंध्य क्षेत्र में पुलिस महानिरीक्षक यानी आईजी के पद पर कार्यरत थे। उनकी पोस्टिंग रीवा में थी, इसलिए विवाह समारोह का आयोजन भी यहीं किया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ऐतिहासिक जानकारियों के अनुसार विवाह समारोह रीवा स्थित तत्कालीन आईजी के सरकारी बंगले में संपन्न हुआ था। उस समय यह आयोजन पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया था। रीवा के पुराने परिवारों और इतिहास से जुड़े लोगों के बीच आज भी इस विवाह की यादें सुनने को मिल जाती हैं। कहा जाता है कि विवाह समारोह में उस दौर की कई प्रतिष्ठित हस्तियां भी शामिल हुई थीं। हालांकि समय के साथ कई दस्तावेज और प्रत्यक्ष स्मृतियां धुंधली हो गईं, लेकिन रीवा और कपूर परिवार का यह रिश्ता आज भी लोगों की यादों में जीवित है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राज कपूर ने अपने लंबे फिल्मी करियर में भारतीय सिनेमा को ऐसी पहचान दिलाई, जिसे दुनिया आज भी याद करती है। उन्होंने आम आदमी के संघर्ष, सपनों और भावनाओं को अपनी फिल्मों के माध्यम से बड़े पर्दे पर उतारा। 'आवारा', 'श्री 420', 'बरसात', 'संगम', 'जिस देश में गंगा बहती है' और 'मेरा नाम जोकर' जैसी फिल्मों ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय ख्याति दिलाई। खासकर रूस और पूर्व सोवियत देशों में उनकी लोकप्रियता का आलम यह था कि उनके गीत और फिल्में वहां के लोगों के बीच बेहद पसंद की जाती थीं। ऐसे महान कलाकार का जीवन का महत्वपूर्ण अध्याय रीवा से जुड़ा होना शहर के लिए सम्मान की बात मानी जाती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रीवा और कपूर परिवार के इस ऐतिहासिक संबंध की चर्चा कई दशकों तक लगातार होती रही। वर्ष 2020 में जब दिग्गज अभिनेता ऋषि कपूर का निधन हुआ, तब राष्ट्रीय मीडिया में भी रीवा और कपूर परिवार के रिश्ते का उल्लेख प्रमुखता से किया गया था। इसके बाद एक बार फिर लोगों का ध्यान इस ऐतिहासिक जुड़ाव की ओर गया। स्थानीय लोगों ने भी उस समय पुरानी स्मृतियों को साझा करते हुए बताया था कि रीवा का नाम कपूर परिवार के इतिहास में हमेशा विशेष स्थान रखता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसी संबंध को सम्मान देने और स्मृतियों को सहेजने के उद्देश्य से रीवा में कृष्णा राज कपूर के नाम पर एक भव्य ऑडिटोरियम का निर्माण कराया गया। आज 'कृष्णा राज कपूर ऑडिटोरियम' शहर की प्रमुख पहचान बन चुका है। यहां समय-समय पर सांस्कृतिक कार्यक्रम, साहित्यिक आयोजन, सरकारी बैठकें, सामाजिक गतिविधियां और विभिन्न औद्योगिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। यह भवन केवल एक ऑडिटोरियम नहीं बल्कि रीवा और कपूर परिवार के ऐतिहासिक रिश्ते का प्रतीक माना जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">स्थानीय स्तर पर एक और दिलचस्प कहानी वर्षों से सुनाई जाती रही है। कहा जाता है कि राज कपूर और कृष्णा कपूर ने रीवा शहर के प्रति अपने विशेष लगाव के कारण अपनी बेटी का नाम रीमा रखा था। हालांकि इस कहानी को लेकर आधिकारिक दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन रीवा के लोगों के बीच यह किस्सा काफी लोकप्रिय है। लोग इसे कपूर परिवार और रीवा के बीच भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक मानते हैं। आज भी शहर के बुजुर्ग इस प्रसंग को बड़े गर्व के साथ सुनाते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रीवा अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक राजघराने और दुनिया भर में प्रसिद्ध सफेद बाघों के लिए जाना जाता है। लेकिन राज कपूर से जुड़ा यह अध्याय शहर की पहचान को एक अलग ही आयाम देता है। यह केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि उस दौर की याद है जब भारतीय सिनेमा का भविष्य लिखने वाला एक युवा कलाकार अपने जीवन की नई शुरुआत करने के लिए विंध्य की इस धरती पर आया था। आज राज कपूर की पुण्यतिथि पर जब देश उन्हें याद कर रहा है, तब रीवा भी गर्व के साथ उस सुनहरे अध्याय को याद कर रहा है जिसने इस शहर को भारतीय सिनेमा के इतिहास से हमेशा के लिए जोड़ दिया। समय भले बदल गया हो, लेकिन शोमैन राज कपूर और रीवा का यह रिश्ता आज भी लोगों की स्मृतियों में उतना ही जीवंत है जितना दशकों पहले था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>विंध्य/रीवा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 12:35:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>प्रेमी जोड़े की मौत से उठे कई सवाल, वीडियो में परिजनों पर लगाए गंभीर आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[ग्वालियर के चर्चित मामले से जुड़े युवक-युवती की मौत के बाद सामने आए वीडियो, पुलिस सभी पहलुओं की जांच में जुटी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/many-questions-raised-by-the-death-of-the-loving-couple/article-54716"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/gwalior-news.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">ग्वालियर जिले से जुड़े एक प्रेमी जोड़े की मौत का मामला अब कई नए सवाल खड़े कर रहा है। सांक नदी क्षेत्र से युवक और युवती के शव मिलने के बाद सामने आए वीडियो ने पूरे घटनाक्रम को और अधिक चर्चा में ला दिया है। मृतक युवक भूपेंद्र धाकड़ और युवती राधा चौबे ने मौत से पहले सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो अपलोड किए थे, जिनमें उन्होंने अपने परिवार के कुछ सदस्यों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पुलिस ने वीडियो को जांच का हिस्सा बनाया है और मामले के सभी पहलुओं की पड़ताल शुरू कर दी है।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रारंभिक जानकारी के अनुसार भूपेंद्र धाकड़ मुरैना जिले के कैलारस क्षेत्र का रहने वाला था, जबकि राधा चौबे दतिया की निवासी थी। दोनों के बीच पिछले करीब दो वर्षों से प्रेम संबंध बताए जा रहे हैं। दोनों अलग-अलग समुदाय से थे और उनके रिश्ते को लेकर परिवारों में लंबे समय से असहमति बनी हुई थी। बताया जा रहा है कि परिवार की नाराजगी के बावजूद दोनों लगातार संपर्क में थे और साथ रहने का प्रयास कर रहे थे। इस संबंध को लेकर पहले भी विवाद की स्थिति बन चुकी थी। घटना के बाद सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में भूपेंद्र ने अपनी मौत के लिए अपने पिता, पत्नी और परिवार के कुछ अन्य सदस्यों को जिम्मेदार बताया है। वीडियो में उसने दावा किया कि उस पर सोना चोरी करने के झूठे आरोप लगाए जा रहे थे। उसने यह भी कहा कि जिस सोने को लेकर विवाद था, उसे परिवार की जानकारी में बैंक में गिरवी रखा गया था। वहीं एक अन्य वीडियो में राधा चौबे ने भी परिवार के लोगों पर मानसिक दबाव बनाने और झूठे आरोप लगाने की बात कही है।</p>
<p class="isSelectedEnd">वीडियो में लगाए गए आरोपों की पुष्टि अभी तक आधिकारिक रूप से नहीं हुई है। पुलिस का कहना है कि वीडियो की सत्यता, उसमें किए गए दावों और पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकेगा। अधिकारियों के अनुसार डिजिटल साक्ष्यों के साथ-साथ परिवार के सदस्यों और अन्य संबंधित लोगों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि भूपेंद्र और राधा पहले एक चर्चित स्पाई कैमरा और ब्लैकमेलिंग प्रकरण में आरोपी रह चुके थे। वर्ष 2025 में दोनों की गिरफ्तारी हुई थी और जांच के दौरान उनके मोबाइल फोन से कई वीडियो मिलने का दावा किया गया था। इस मामले के कारण दोनों लंबे समय तक चर्चा में रहे थे। बाद में कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद वे जेल से बाहर आए थे। माना जा रहा है कि इस प्रकरण का प्रभाव भी उनके निजी जीवन और सामाजिक परिस्थितियों पर पड़ा था। परिजनों के अनुसार भूपेंद्र ने कुछ वर्ष पहले अपने पिता से आर्थिक सहायता लेकर जौरा क्षेत्र में एक होटल शुरू किया था। इसी दौरान उसकी मुलाकात राधा से हुई और दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं। बाद में परिवार ने उसकी शादी सरस्वती नाम की युवती से करवा दी। शादी के बाद उसकी एक बेटी भी हुई, लेकिन राधा से उसका संपर्क बना रहा। यही बात परिवार में तनाव का कारण बनती रही। समय के साथ विवाद और बढ़ता गया और दोनों पक्षों के बीच संबंध लगातार खराब होते चले गए।</p>
<p class="isSelectedEnd">भूपेंद्र के पिता ने भी अपनी ओर से कई आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि परिवार में जेवरों को लेकर विवाद था और उन्होंने इस संबंध में कानूनी कार्रवाई की बात कही थी। उनके अनुसार घटना वाले दिन भूपेंद्र ने उनसे फोन पर बात की थी। इसके कुछ समय बाद वीडियो रिकॉर्ड किए गए। परिवार का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि वास्तविक तथ्य सामने आ सकें। पुलिस को सांक नदी क्षेत्र से दोनों के शव बरामद हुए। इसके बाद पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया पूरी कर शव परिजनों को सौंप दिए गए। शुरुआती जांच में पुलिस ने इसे आत्महत्या का मामला माना है, हालांकि वीडियो सामने आने के बाद जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि किसी भी पहलू को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">यह मामला केवल एक आपराधिक जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि पारिवारिक विवाद, सामाजिक दबाव, रिश्तों में तनाव और कानूनी विवाद जैसे कई पहलुओं को भी सामने लाता है। घटना के बाद स्थानीय क्षेत्र में चर्चा का माहौल है और लोग यह जानना चाहते हैं कि आखिर किन परिस्थितियों ने दोनों को इस स्थिति तक पहुंचाया। फिलहाल सभी की नजर पुलिस जांच पर टिकी हुई है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट और डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद इस पूरे मामले की कई परतें खुल सकती हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले में जल्दबाजी में किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। सभी वीडियो, कॉल रिकॉर्ड, पारिवारिक विवादों और पूर्व घटनाओं की विस्तार से जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वीडियो में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और इस दुखद घटना के पीछे वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 12:35:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>रतलाम में एक माह तक रुके चीनी नागरिक, सूचना छिपाने पर केस</title>
                                    <description><![CDATA[विदेशी नागरिकों की जानकारी नहीं देने पर होटल संचालक और मैनेजर के खिलाफ कार्रवाई]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/chinese-citizen-stayed-in-ratlam-for-a-month-case-for/article-54717"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/ratlam-news.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">रतलाम में विदेशी नागरिकों के ठहरने की जानकारी छिपाने का मामला सामने आने के बाद पुलिस ने होटल संचालक और मैनेजर के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है। मामला स्टेशन रोड थाना क्षेत्र स्थित होटल अजंता पैलेस से जुड़ा है, जहां चार चीनी नागरिक करीब एक महीने तक ठहरे रहे, लेकिन उनकी जानकारी न तो निर्धारित ऑनलाइन प्रणाली में दर्ज की गई और न ही स्थानीय पुलिस अथवा जिला प्रशासन को इसकी सूचना दी गई। मामला सामने आने के बाद पुलिस ने जांच कर होटल प्रबंधन की लापरवाही को गंभीर मानते हुए कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।</p>
<p class="isSelectedEnd">पुलिस के अनुसार यह मामला एसपी कार्यालय से प्राप्त जानकारी के आधार पर सामने आया। इसके बाद स्टेशन रोड थाना पुलिस ने जांच शुरू की। जांच के दौरान पता चला कि दिसंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच चार चीनी नागरिक होटल अजंता पैलेस में रुके थे। ये सभी विदेशी नागरिक बिजनेस वीजा पर भारत आए थे और मशीनरी से संबंधित कार्य के सिलसिले में रतलाम में ठहरे हुए थे। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार विदेशी नागरिक 17 दिसंबर 2025 को होटल में पहुंचे थे और 20 जनवरी 2026 तक वहीं ठहरे रहे। इस अवधि के दौरान होटल प्रबंधन ने उनके ठहरने की सूचना संबंधित विभागों को नहीं दी।</p>
<p class="isSelectedEnd">स्टेशन रोड थाना प्रभारी जितेंद्र सिंह जादौन के अनुसार प्रारंभिक जांच में पाया गया कि होटल प्रबंधन ने विदेशी नागरिकों की जानकारी देने से जुड़े निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया। नियमों के तहत किसी भी विदेशी नागरिक के होटल, लॉज, गेस्ट हाउस या अन्य ठहराव स्थल पर रुकने की स्थिति में उसकी जानकारी निर्धारित समय सीमा के भीतर ऑनलाइन सी-फॉर्म के माध्यम से अपलोड करना अनिवार्य होता है। इसके साथ ही स्थानीय प्रशासन और पुलिस को भी आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई जाती है। लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं किया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd">जांच के बाद पुलिस ने होटल संचालक डॉ. सुभाष अग्रवाल और होटल मैनेजर शिवसिंह राठौर के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि दोनों की ओर से विदेशी नागरिकों के संबंध में निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। यह लापरवाही आप्रवास एवं विदेशी विषयक अधिनियम, 2025 के प्रावधानों का उल्लंघन मानी गई है। इसी आधार पर संबंधित धाराओं में प्रकरण दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd">पुलिस रिकॉर्ड में जिन विदेशी नागरिकों के नाम दर्ज हैं उनमें मिस्टर शू हू, मिस्टर झी गुआंगजियन, मिस्टर यांग झोंगफू और मिस्टर लियू यान शामिल हैं। बताया जा रहा है कि ये सभी व्यवसायिक उद्देश्य से भारत आए थे। हालांकि पुलिस का कहना है कि फिलहाल जांच का मुख्य विषय होटल प्रबंधन द्वारा सूचना नहीं देना है। विदेशी नागरिकों की गतिविधियों को लेकर फिलहाल किसी प्रकार की संदिग्ध जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया जाना गंभीर मामला माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd"> विदेशी नागरिकों की जानकारी समय पर दर्ज कराने का नियम राष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इससे देश में आने वाले विदेशी नागरिकों की निगरानी और ट्रैकिंग सुनिश्चित की जाती है। किसी भी होटल या आवासीय परिसर में विदेशी मेहमान के रुकने पर उसकी पूरी जानकारी संबंधित पोर्टल पर अपलोड करना जरूरी होता है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य सुरक्षा एजेंसियों को आवश्यक सूचना उपलब्ध कराना है ताकि किसी भी संभावित खतरे या संदिग्ध गतिविधि पर समय रहते नजर रखी जा सके।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस घटना के सामने आने के बाद स्थानीय पुलिस की सूचना संकलन व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। नियमों के अनुसार शहर के होटल और लॉज अपने यहां ठहरने वाले यात्रियों की जानकारी नियमित रूप से पुलिस को उपलब्ध कराते हैं। ऐसे में चार विदेशी नागरिकों का करीब एक महीने तक शहर में रहना और इसकी जानकारी स्थानीय स्तर पर सामने नहीं आना कई सवाल खड़े कर रहा है। सुरक्षा से जुड़े जानकारों का मानना है कि ऐसी घटनाएं स्थानीय निगरानी तंत्र की कार्यप्रणाली की समीक्षा की जरूरत को भी दर्शाती हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस मामले के बाद जिले के अन्य होटल और लॉज संचालकों को भी नियमों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए जा सकते हैं। प्रशासन भविष्य में इस प्रकार की लापरवाही रोकने के लिए विशेष जांच अभियान भी चला सकता है। अधिकारियों का मानना है कि विदेशी नागरिकों से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की ढिलाई सुरक्षा के दृष्टिकोण से उचित नहीं मानी जा सकती। पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है और यह पता लगाया जा रहा है कि सूचना नहीं देने के पीछे केवल लापरवाही थी या इसके पीछे कोई अन्य कारण भी था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 12:35:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>रीवा में छत से गिरने से BSF जवान की मौत, परिवार सदमे में</title>
                                    <description><![CDATA[पौधों में पानी देते समय फिसला पैर, चार जून को ड्यूटी पर लौटना था]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/vindhya-rewa/6a1e7be9cd548/article-54718"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/rewa-bsf-jawan-death.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">रीवा जिले में एक दर्दनाक हादसे में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवान रंगीलाल कोरी की मौत हो गई। मंगलवार सुबह अपने घर की छत पर पौधों को पानी देते समय उनका पैर फिसल गया और वे संतुलन खोकर नीचे गिर पड़े। गंभीर रूप से घायल जवान को परिजन तत्काल अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इस घटना के बाद पूरे परिवार में मातम पसरा हुआ है, वहीं गांव और आसपास के क्षेत्र में भी शोक का माहौल है।</p>
<p class="isSelectedEnd">जानकारी के अनुसार बीएसएफ जवान रंगीलाल कोरी हाल ही में चुनावी ड्यूटी पूरी करने के बाद अवकाश पर अपने घर आए थे। वे पश्चिम बंगाल में चुनाव संबंधी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे थे और कुछ दिन पहले ही परिवार के साथ समय बिताने के लिए छुट्टी पर लौटे थे। परिवार के लोगों को उम्मीद थी कि छुट्टियां खत्म होने से पहले वे कुछ और समय अपने प्रियजनों के साथ बिताएंगे, लेकिन एक अचानक हुए हादसे ने सारी खुशियां छीन लीं।</p>
<p class="isSelectedEnd">बताया जा रहा है कि मंगलवार सुबह रोज की तरह रंगीलाल कोरी घर की छत पर रखे पौधों में पानी देने पहुंचे थे। इस दौरान छत पर फिसलन होने के कारण उनका पैर अचानक फिसल गया। संतुलन बिगड़ने से वे सीधे नीचे जा गिरे। गिरने की आवाज सुनकर परिवार के सदस्य और आसपास के लोग मौके पर पहुंचे। जवान गंभीर रूप से घायल अवस्था में पड़े थे। परिजन बिना देर किए उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन उनकी हालत काफी नाजुक थी।</p>
<p class="isSelectedEnd">अस्पताल में डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद उनकी स्थिति को गंभीर बताया। सिर और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें आने के कारण उनकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई। काफी प्रयासों के बावजूद चिकित्सक उन्हें बचा नहीं सके। जवान की मौत की खबर मिलते ही परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। गांव में भी जैसे ही यह समाचार पहुंचा, लोग बड़ी संख्या में उनके घर पहुंचने लगे।</p>
<p class="isSelectedEnd">परिजनों के अनुसार रंगीलाल कोरी की छुट्टियां समाप्त होने वाली थीं और उन्हें आगामी 4 जून को दिल्ली पहुंचकर अपनी यूनिट में दोबारा जॉइनिंग देनी थी। घर में उनकी वापसी की तैयारियां चल रही थीं। परिवार के सदस्य उनके लिए जरूरी सामान और यात्रा की व्यवस्थाओं में जुटे हुए थे। किसी को अंदाजा नहीं था कि ड्यूटी पर लौटने से ठीक पहले ऐसा दुखद हादसा हो जाएगा। परिवार के लोगों का कहना है कि वे पूरी तरह स्वस्थ थे और सामान्य दिनचर्या का पालन कर रहे थे।</p>
<p class="isSelectedEnd">घटना की सूचना मिलते ही पुलिस भी अस्पताल पहुंची और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया शुरू की। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और परिजनों से जानकारी जुटाई। प्रारंभिक जांच में यह मामला दुर्घटना का प्रतीत हुआ है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार फिलहाल किसी प्रकार की संदिग्ध परिस्थिति सामने नहीं आई है। शव का पोस्टमॉर्टम कराने के बाद उसे परिजनों को सौंप दिया गया है ताकि अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की जा सके।</p>
<p class="isSelectedEnd">बीएसएफ जवान की असामयिक मौत से क्षेत्र के लोगों में भी गहरा दुख है। स्थानीय लोगों का कहना है कि रंगीलाल कोरी बेहद सरल स्वभाव के व्यक्ति थे और हमेशा लोगों की मदद के लिए तैयार रहते थे। देश सेवा के प्रति उनका समर्पण सभी के लिए प्रेरणा था। छुट्टी पर घर आने के बाद वे परिवार और गांव के लोगों से मिल रहे थे। किसी ने नहीं सोचा था कि उनकी घर वापसी का यह समय अंतिम साबित होगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">सुरक्षा बलों में कार्यरत जवानों का जीवन हमेशा चुनौतियों से भरा रहता है। देश की सीमाओं पर तैनात रहकर वे अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हैं और जब छुट्टियों में घर आते हैं तो परिवार के साथ कुछ समय बिताने की कोशिश करते हैं। ऐसे में इस तरह की दुर्घटनाएं न केवल परिवार बल्कि पूरे समाज को झकझोर देती हैं। रंगीलाल कोरी की मौत ने एक बार फिर यह एहसास कराया है कि जीवन कितना अनिश्चित हो सकता है और एक छोटी सी चूक भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।</p>
<p>गांव के लोगों और रिश्तेदारों ने जवान को श्रद्धांजलि अर्पित की है। अंतिम संस्कार के दौरान बड़ी संख्या में लोग शामिल होने की संभावना है। सभी ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। परिवार इस गहरे सदमे से उबरने की कोशिश कर रहा है, लेकिन घर के एक जिम्मेदार सदस्य के अचानक चले जाने का दर्द लंबे समय तक उनके साथ रहेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>विंध्य/रीवा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 12:35:24 +0530</pubDate>
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                <title>कुपोषण पर सख्त हुए सीएम मोहन यादव, चार विभाग मिलकर बनाएंगे एक्शन प्लान</title>
                                    <description><![CDATA[बीमारू श्रेणी से बाहर निकला मध्यप्रदेश, लेकिन कुपोषण अब भी बड़ी चुनौती; पोषण आहार विवाद सुलझाने के भी निर्देश]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/cm-mohan-yadav-becomes-strict-on-malnutrition-four-departments-will/article-54706"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/madhya-pradesh-malnutrition.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्यप्रदेश भले ही बीमारू राज्यों की श्रेणी से बाहर निकल चुका हो, लेकिन कुपोषण आज भी राज्य के सामने एक बड़ी चुनौती बनकर खड़ा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए महिला एवं बाल विकास, स्वास्थ्य, स्कूल शिक्षा तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को संयुक्त रूप से काम करने के निर्देश दिए हैं। सोमवार को महिला एवं बाल विकास विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि कुपोषण के खिलाफ लड़ाई केवल एक विभाग के भरोसे नहीं जीती जा सकती। इसके लिए सभी संबंधित विभागों को मिलकर समन्वित कार्ययोजना तैयार करनी होगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उस बयान का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि मध्यप्रदेश सहित कई राज्य बीमारू श्रेणी से बाहर आ चुके हैं, लेकिन कुपोषण अब भी एक बड़ा दाग बना हुआ है। मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास के अन्य मानकों पर राज्य ने अच्छी प्रगति की है, लेकिन जब तक बच्चों और महिलाओं का स्वास्थ्य बेहतर नहीं होगा, तब तक विकास अधूरा माना जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बैठक में कुपोषण से जुड़े ताजा आंकड़ों की भी समीक्षा की गई। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएच) 2026 के अनुसार प्रदेश में पांच वर्ष से कम उम्र के 39.7 प्रतिशत बच्चे कम वजन के हैं। वहीं 23.8 प्रतिशत बच्चे दुबलेपन की समस्या से जूझ रहे हैं। हालांकि ठिगनेपन यानी स्टंटिंग के मामलों में कुछ सुधार देखने को मिला है और यह आंकड़ा 35.7 प्रतिशत से घटकर 31.4 प्रतिशत पर पहुंचा है। इसके बावजूद विशेषज्ञ मानते हैं कि स्थिति अभी भी चिंता का विषय बनी हुई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सबसे ज्यादा चिंता इस बात को लेकर जताई गई कि छह से 23 माह तक की उम्र के केवल 12 प्रतिशत बच्चों को ही पर्याप्त और संतुलित पोषण मिल पा रहा है। यह आंकड़ा बताता है कि शुरुआती उम्र में बच्चों को जरूरी पोषक तत्व नहीं मिल रहे हैं, जिसका असर उनके शारीरिक और मानसिक विकास पर पड़ सकता है। अधिकारियों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ कई शहरी इलाकों में भी पोषण संबंधी जागरूकता की कमी देखने को मिल रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री ने कहा कि स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों और स्वास्थ्य संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाना चाहिए। गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और छोटे बच्चों की नियमित निगरानी की व्यवस्था मजबूत करने पर भी जोर दिया गया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन जिलों में कुपोषण की दर अधिक है, वहां विशेष अभियान चलाए जाएं और परिणाम आधारित कार्ययोजना तैयार की जाए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बैठक में लंबे समय से चल रहे पोषण आहार वितरण से जुड़े विवाद का मुद्दा भी सामने आया। मुख्यमंत्री ने इस मामले का जल्द समाधान निकालने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह तय किया जाए कि पोषण आहार का कार्य स्वयं सहायता समूहों को दिया जाएगा या निजी कंपनियों को। इस संबंध में विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर अगली कैबिनेट बैठक में प्रस्तुत किया जाए ताकि निर्णय लेकर टेंडर प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पोषण आहार व्यवस्था को लेकर प्रदेश में लंबे समय से विभिन्न पक्षों के बीच मतभेद बने हुए हैं। एक ओर स्वयं सहायता समूहों को स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय का माध्यम मानकर उन्हें प्राथमिकता देने की मांग की जाती रही है, वहीं दूसरी ओर कुछ पक्ष बड़े स्तर पर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए निजी कंपनियों की भागीदारी की वकालत करते रहे हैं। ऐसे में सरकार का फैसला आने वाले समय में इस व्यवस्था की दिशा तय करेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कुपोषण केवल भोजन की उपलब्धता का मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच, स्वच्छता, शिक्षा और जागरूकता जैसे कई कारण जुड़े होते हैं। यही वजह है कि मुख्यमंत्री ने चार विभागों को एक साथ काम करने की जिम्मेदारी सौंपी है। माना जा रहा है कि यदि विभागों के बीच बेहतर तालमेल बनता है तो कुपोषण की समस्या को कम करने में मदद मिल सकती है। प्रदेश सरकार अब कुपोषण के खिलाफ बहुस्तरीय रणनीति पर काम करने की तैयारी में है। आने वाले महीनों में जिलों के प्रदर्शन की समीक्षा, पोषण योजनाओं की निगरानी और बच्चों तक गुणवत्तापूर्ण पोषण पहुंचाने के लिए नए कदम उठाए जा सकते हैं। फिलहाल सरकार का फोकस उन कमजोर कड़ियों की पहचान पर है, जिनकी वजह से वर्षों से चल रही योजनाओं के बावजूद अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पा रहे हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 12:35:07 +0530</pubDate>
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