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                <title>स्पेशल खबरें - दैनिक जागरण</title>
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                <title>खाना पहुंचाते- पहुंचाते कवि बने वांग जिबिंग, चीन के प्रतिष्ठित साहित्यिक पुरस्कार से हुए सम्मानित</title>
                                    <description><![CDATA[14 साल की उम्र में छूटी पढ़ाई, मजदूरी से लेकर फूड डिलीवरी तक किए कई काम; ग्राहक की नाराजगी ने कविता लिखने को किया प्रेरित, अब तक लिख चुके हैं 6 हजार से ज्यादा रचनाएं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/special-news/wang-jibing-who-became-a-poet-while-delivering-food-was/article-59289"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/wang-jibing.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">चीन में घर-घर खाना पहुंचाने वाले एक डिलीवरी राइडर की कविताओं ने उन्हें साहित्य की दुनिया में बड़ी पहचान दिलाई है। 56 वर्षीय वांग जिबिंग को उनके कविता संग्रह के लिए प्रतिष्ठित <strong>लू शुन साहित्य पुरस्कार</strong> से सम्मानित किया गया है। उनकी रचनाओं में डिलीवरी कर्मचारियों की भागदौड़, समय का दबाव और आम कामगारों की जिंदगी प्रमुखता से दिखाई देती है।</p>
<p class="isSelectedEnd">‘डिलीवरी पोएट’ के नाम से पहचान बना चुके वांग को 15 जुलाई को यह सम्मान मिलने की जानकारी सामने आई। उनका कविता संग्रह ‘लो फ्लाइट’ फूड डिलीवरी से जुड़े लोगों की जिंदगी को केंद्र में रखकर तैयार किया गया है। खास बात यह है कि इसकी कई कविताओं के विचार उन्हें काम करते हुए ही आए।</p>
<p class="isSelectedEnd">वांग के लिए कविता लिखने का कोई तय समय या जगह नहीं रही। ऑर्डर मिलने का इंतजार हो या एक डिलीवरी से दूसरी डिलीवरी के बीच मिले कुछ मिनट, वे उसी समय अपने मन में आए शब्दों को दर्ज कर लेते थे। कई बार उनके पास डायरी तक नहीं होती थी, इसलिए छोटे कागज या हाथ पर ही पंक्तियां लिख लेते थे।</p>
<h5><strong>14 साल की उम्र में पढ़ाई छूटी, जिंदगी ने जल्दी सिखाया संघर्ष</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd">वांग जिबिंग का जन्म चीन के जियांगसू प्रांत में हुआ। परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी, इसलिए महज 14 साल की उम्र में उनकी औपचारिक पढ़ाई रुक गई। कम उम्र में ही उन्हें परिवार की जरूरतें पूरी करने के लिए काम की दुनिया में उतरना पड़ा।</p>
<p class="isSelectedEnd">जीवन चलाने के लिए उन्होंने अलग-अलग तरह के काम किए। कभी निर्माण स्थल पर मजदूरी की, कभी कबाड़ से जुड़ा काम किया तो कभी सड़क किनारे सामान बेचा। काम बदलते रहे, लेकिन किताबों और शब्दों से उनका रिश्ता लगातार बना रहा।</p>
<p class="isSelectedEnd">आर्थिक परिस्थितियों के कारण स्कूल छूट गया था, लेकिन पढ़ने की आदत नहीं गई। खाली समय में साहित्य पढ़ना और अपने अनुभवों को शब्द देना धीरे-धीरे उनकी जिंदगी का हिस्सा बन गया। यही अभ्यास आगे चलकर उनकी अलग साहित्यिक पहचान की नींव बना।</p>
<h5><strong>फूड डिलीवरी की नौकरी ने दिया कविताओं को नया विषय</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd">करीब 2019 में वांग ने फूड डिलीवरी राइडर के रूप में काम करना शुरू किया। यह काम उनके लिए केवल कमाई का जरिया नहीं रहा। शहर की सड़कों, ग्राहकों के व्यवहार और हर ऑर्डर को समय पर पहुंचाने की दौड़ ने उन्हें आम कामगार की जिंदगी को बेहद करीब से देखने का मौका दिया।</p>
<p class="isSelectedEnd">डिलीवरी राइडर की नौकरी में हर मिनट महत्वपूर्ण होता है। ट्रैफिक, खराब मौसम, गलत पता और ग्राहक तक समय पर पहुंचने का दबाव रोजमर्रा की चुनौती है। वांग ने इन्हीं अनुभवों को कविता की भाषा में बदलना शुरू किया।</p>
<p class="isSelectedEnd">उनकी कविताओं में बड़े और काल्पनिक विषयों की जगह सड़क पर भागते आम लोगों की दुनिया दिखाई देती है। वे उस कामगार की आवाज को शब्द देते हैं, जो दिनभर दिखाई तो देता है लेकिन उसकी परेशानियां अक्सर लोगों की नजरों से छिपी रहती हैं।</p>
<h5><strong>एक नाराज ग्राहक से हुई घटना ने बदल दी कहानी</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd">वांग की साहित्यिक यात्रा में एक घटना महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई। 2019 में वे जियांगसू के कुनशान शहर में खाना पहुंचाने का काम कर रहे थे। एक ऑर्डर में ग्राहक की ओर से दर्ज पता सही नहीं था, जिसके कारण उन्हें सही घर खोजने में काफी परेशानी हुई।</p>
<p class="isSelectedEnd">बताया गया कि पता तलाशते हुए उन्हें कई रिहायशी इमारतों के बीच घूमना पड़ा। इतना ही नहीं, उन्हें 18 मंजिल तक जाना पड़ा। इस पूरी कोशिश में स्वाभाविक रूप से डिलीवरी में देरी हो गई।</p>
<p class="isSelectedEnd">जब वे आखिरकार ग्राहक तक खाना लेकर पहुंचे तो उनकी परेशानी समझने के बजाय देर होने पर उन्हें फटकार सुननी पड़ी। यह घटना उनके मन में गहराई तक उतर गई। घर लौटते समय उन्होंने अपनी नाराजगी, थकान और बेबसी को कविता में बदलना शुरू किया।</p>
<h5><strong>‘मैन इन ए हरी’ ने सोशल मीडिया पर दिलाई पहचान</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd">इसी अनुभव से उनकी चर्चित कविता ‘मैन इन ए हरी’ का जन्म हुआ। कविता में उस इंसान की जिंदगी को आवाज दी गई जो हर समय जल्दी में है, क्योंकि उसकी रोजी-रोटी समय की पाबंदी से जुड़ी हुई है।</p>
<p class="isSelectedEnd">2022 में यह कविता सोशल मीडिया पर बड़े स्तर पर चर्चा में आई। लोगों ने पहली बार एक डिलीवरी राइडर की नजर से उस जिंदगी को महसूस किया, जिसे वे आमतौर पर सिर्फ मोबाइल ऐप पर दिखने वाले ऑर्डर स्टेटस के रूप में देखते थे।</p>
<p class="isSelectedEnd">कविता की लोकप्रियता ने वांग को व्यापक पहचान दिलाई। इसके बाद उनकी रचनाओं को साहित्यिक मंचों और पत्रिकाओं में भी जगह मिलने लगी। एक फूड डिलीवरी कर्मचारी के अनुभव धीरे-धीरे चीन के साहित्यिक विमर्श का हिस्सा बनने लगे।</p>
<h5><strong>2023 में आया पहला कविता संग्रह</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd">सोशल मीडिया पर पहचान मिलने के बाद 2023 में उनका पहला कविता संग्रह ‘मैन इन ए हरी: पोएम्स ऑफ ए फूड डिलीवरी राइडर’ प्रकाशित हुआ। इस संग्रह में श्रम, समय, शहर और आम लोगों के संघर्ष से जुड़े अनुभवों को प्रमुखता दी गई।</p>
<p class="isSelectedEnd">उनकी कविताओं का केंद्र कोई असाधारण नायक नहीं, बल्कि रोज काम पर निकलने वाला सामान्य व्यक्ति है। डिलीवरी राइडर, मजदूर और छोटे काम करने वाले लोगों के जीवन को उन्होंने संवेदनशील तरीके से अपनी रचनाओं में जगह दी।</p>
<p class="isSelectedEnd">वांग की लेखन शैली की सबसे बड़ी विशेषता उनके निजी अनुभव हैं। उन्होंने उन परिस्थितियों को लिखा जिन्हें वे खुद जी चुके हैं। यही वजह रही कि उनकी कविताओं से बड़ी संख्या में कामकाजी लोग खुद को जोड़ पाए।</p>
<h5><strong>करीब 200 डिलीवरी राइडर्स से की बातचीत</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd">अपने नए कविता संग्रह को तैयार करते समय वांग ने केवल अपने अनुभवों पर निर्भर नहीं किया। उन्होंने अलग-अलग परिस्थितियों में काम करने वाले करीब 200 डिलीवरी राइडर्स से बातचीत की।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने जानने की कोशिश की कि अलग-अलग शहरों और परिस्थितियों में डिलीवरी कर्मचारी किन समस्याओं से गुजरते हैं। समय पर ऑर्डर पहुंचाने का दबाव, ग्राहकों की अपेक्षाएं, सड़क दुर्घटना का खतरा और कमाई की अनिश्चितता जैसे विषय इन बातचीतों में सामने आए।</p>
<p class="isSelectedEnd">इन अनुभवों को उन्होंने साहित्यिक रूप देकर अपने कविता संग्रह में शामिल किया। इस कारण उनकी किताब केवल व्यक्तिगत जीवन की कहानी न रहकर गिग इकोनॉमी में काम करने वाले एक बड़े वर्ग की आवाज बन गई।</p>
<h5><strong>‘नीचे उड़ना भी एक उड़ान है’</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd">वांग की रचनाओं में जीवन के संघर्ष को निराशा की बजाय अलग नजरिए से देखने की कोशिश दिखाई देती है। उनकी चर्चित पंक्तियों का भाव है कि उड़ान का मतलब हमेशा बहुत ऊंचाई तक पहुंचना नहीं होता, जमीन के करीब रहकर आगे बढ़ना भी अपनी तरह की उड़ान है।</p>
<p class="isSelectedEnd">यही विचार उनकी जिंदगी से भी जुड़ा दिखाई देता है। कम उम्र में पढ़ाई छोड़ने और वर्षों तक अलग-अलग छोटे काम करने के बावजूद उन्होंने साहित्य से अपना रिश्ता नहीं छोड़ा।</p>
<p class="isSelectedEnd">फूड डिलीवरी करते हुए लिखी गई उनकी कविताओं ने धीरे-धीरे उन्हें उस साहित्यिक मंच तक पहुंचाया, जहां उनकी रचनाओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली।</p>
<h5><strong>6 हजार से ज्यादा कविताएं लिख चुके हैं वांग</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd">वांग जिबिंग अब तक 6 हजार से अधिक कविताएं लिख चुके हैं। उनकी कई रचनाएं चीन की साहित्यिक पत्रिकाओं और विभिन्न प्रकाशनों में प्रकाशित हुई हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">उनकी लेखन प्रक्रिया आज भी रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी है। वे रास्ते में दिखाई देने वाली घटनाओं, लोगों के व्यवहार और कामगारों के अनुभवों को अपनी रचनाओं का विषय बनाते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">वांग का मानना है कि शायद लोग किसी डिलीवरी कर्मचारी का नाम याद न रखें, लेकिन सड़क पर तेजी से गुजरते उस व्यक्ति की छवि जरूर पहचानते हैं, जो समय से लड़ते हुए किसी का ऑर्डर पहुंचाने जा रहा होता है।</p>
<h5><strong>डिलीवरी कर्मचारियों को लेकर नजरिया बदलना चाहते हैं</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd">अपनी किताब के जरिए वांग समाज और डिलीवरी कर्मचारियों के बीच समझ बढ़ाना चाहते हैं। उनका मानना है कि ग्राहक अगर डिलीवरी राइडर्स की परिस्थितियों और काम के दबाव को बेहतर तरीके से समझें तो कई तरह के विवादों से बचा जा सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">खराब मौसम, ट्रैफिक जाम, गलत लोकेशन और लगातार मिलने वाले ऑर्डर जैसी परिस्थितियां डिलीवरी में देरी का कारण बन सकती हैं। इसके बावजूद कई बार पूरा दबाव केवल राइडर पर आ जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">उनकी रचनाएं इसी अदृश्य दबाव को सामने लाती हैं। वे चाहते हैं कि लोगों का व्यवहार उन कर्मचारियों के प्रति अधिक संवेदनशील हो, जो रोज शहर की तेज रफ्तार व्यवस्था का हिस्सा बने रहते हैं।</p>
<h5><strong>डिलीवरी से हर महीने करीब 6 हजार युआन की कमाई</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd">वांग आज भी फूड डिलीवरी का काम करते हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस काम से उनकी मासिक कमाई लगभग 6 हजार युआन के आसपास रहती है, जिसकी भारतीय मुद्रा में कीमत करीब 85 हजार रुपए के आसपास बैठती है।</p>
<p class="isSelectedEnd">साहित्यिक सफलता और पुरस्कार मिलने के बावजूद उन्होंने अपनी पुरानी नौकरी से दूरी बनाने का फैसला नहीं किया है। उनका कहना है कि अब उनकी जिंदगी केवल आर्थिक जरूरत के कारण इस काम पर निर्भर नहीं है, फिर भी वे इसे जारी रखना चाहते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">उनके लिए डिलीवरी का काम वास्तविक जीवन और आम लोगों से जुड़े रहने का माध्यम भी है। यही दुनिया उनके लेखन के लिए नए अनुभव और नए किरदार देती है।</p>
<h5><strong>पुरस्कार के बाद भी नौकरी छोड़ने का इरादा नहीं</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd">सम्मान मिलने के बाद वांग ने कहा कि वे फिलहाल फूड डिलीवरी की नौकरी छोड़ने की योजना नहीं बना रहे हैं। वे करीब 60 साल की उम्र तक इस काम को जारी रखना चाहते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">उनका कहना है कि यह काम उन्हें सक्रिय रखता है और समाज की वास्तविक जिंदगी से जोड़ता है। साहित्यिक पहचान मिलने के बाद भी वे अपने रोजमर्रा के जीवन में बड़ा बदलाव नहीं चाहते।</p>
<p class="isSelectedEnd">पुरस्कार की घोषणा के आसपास मीडिया का ध्यान अचानक बढ़ने से उन पर मानसिक दबाव भी आया। इसके बावजूद उन्होंने साफ किया कि साहित्यिक सफलता उनके काम और जीवन जीने के तरीके को पूरी तरह बदल नहीं देगी।</p>
<h5><strong>अंग्रेजी और फ्रेंच में भी पहुंचेगी उनकी कविता</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd">वांग की रचनाओं को अब चीन के बाहर भी पाठकों तक पहुंचाने की तैयारी है। उनकी किताब के अंग्रेजी और फ्रेंच संस्करण प्रकाशित किए जाने की योजना है।</p>
<p class="isSelectedEnd">इससे डिलीवरी कर्मचारियों और चीन की गिग इकोनॉमी से जुड़ी उनकी कविताएं अंतरराष्ट्रीय पाठकों तक पहुंच सकेंगी। श्रमिक जीवन पर आधारित साहित्य के रूप में उनकी रचनाओं को नए पाठक मिलने की संभावना है।</p>
<p class="isSelectedEnd">उनका साहित्य आधुनिक शहरों की उस व्यवस्था को सामने रखता है, जहां डिजिटल ऐप के पीछे हजारों वास्तविक कर्मचारी लगातार समय और लक्ष्य के दबाव में काम करते हैं।</p>
<h5><strong>चीन में सामने आ रहे मजदूर वर्ग के नए लेखक</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd">वांग जिबिंग अकेले ऐसे कामगार नहीं हैं जिन्हें अपने जीवन के अनुभवों को लिखने के कारण पहचान मिली है। हाल के वर्षों में चीन में ब्लू-कॉलर और गिग वर्कर्स के बीच से कई लेखक सामने आए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">इन लेखकों की खासियत यह है कि वे श्रमिक जीवन को बाहर से देखकर नहीं, बल्कि उसे जीते हुए लिख रहे हैं। उनकी कहानियों में नौकरी की असुरक्षा, शहरों में जीवन का दबाव और आर्थिक संघर्ष सीधे अनुभवों के रूप में सामने आते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">इसी क्रम में पूर्व डिलीवरी कर्मचारी हू आनयान की आत्मकथा ‘आई डिलीवर पार्सल्स इन बीजिंग’ ने भी बड़ी लोकप्रियता हासिल की। किताब चीन में बेस्टसेलर बनी और बाद में इसका अंग्रेजी अनुवाद भी प्रकाशित हुआ।</p>
<h5><strong>फान यूसु की कहानी ने भी इंटरनेट पर मचाई थी हलचल</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd">इससे पहले प्रवासी मजदूर फान यूसु ने भी अपने आत्मकथात्मक लेखन से व्यापक पहचान हासिल की थी। 2017 में उनका लेख ‘आई एम फान यूसु’ इंटरनेट पर तेजी से वायरल हुआ था।</p>
<p class="isSelectedEnd">उनके लेख ने चीन में प्रवासी मजदूरों की जिंदगी और संघर्ष को व्यापक चर्चा का विषय बना दिया। अचानक मिली लोकप्रियता इतनी ज्यादा थी कि लगातार मीडिया का ध्यान बढ़ने के कारण उन्हें कुछ समय के लिए अपने घर से दूर रहना पड़ा।</p>
<p class="isSelectedEnd">वांग की सफलता को भी चीन में उभर रहे इसी श्रमिक साहित्य की मजबूत होती धारा से जोड़कर देखा जा रहा है।</p>
<h5><strong>लू शुन के नाम पर दिया जाता है प्रतिष्ठित पुरस्कार</strong></h5>
<p class="isSelectedEnd">वांग को मिला साहित्यिक सम्मान चीन के महान लेखक लू शुन के नाम पर स्थापित है। लू शुन को आधुनिक चीनी साहित्य के सबसे प्रभावशाली साहित्यकारों में गिना जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने अपनी कहानियों, निबंधों और व्यंग्यात्मक लेखन के माध्यम से समाज की रूढ़ियों, असमानताओं और परंपरागत व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए थे। आधुनिक चीनी साहित्य के विकास में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।</p>
<p>लू शुन साहित्य पुरस्कार का आयोजन चाइना राइटर्स एसोसिएशन द्वारा किया जाता है। यह सम्मान अलग-अलग साहित्यिक श्रेणियों में उत्कृष्ट समकालीन रचनाओं को मान्यता देने के लिए प्रदान किया जाता है और चीन के प्रमुख राष्ट्रीय साहित्यिक पुरस्कारों में इसकी गिनती होती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Jul 2026 16:16:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Priyanka ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Village as a Classroom: उज्ज्वला वाडेकर ने गांव को बनाया पाठशाला, बढ़ई की दुकान से गणित और गैराज से विज्ञान सीख रहे बच्चे</title>
                                    <description><![CDATA[महाराष्ट्र के जलगांव की शिक्षिका उज्ज्वला वाडेकर बच्चों को किताबों से बाहर निकालकर गांव के कामकाज से जोड़ रही हैं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/special-news/village-as-a-classroom-ujjwala-wadekar-made-the-village-a/article-59098"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/village-as-a-classroom.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">महाराष्ट्र के जलगांव जिले में सरकारी स्कूल की शिक्षिका उज्ज्वला वाडेकर ने पढ़ाई का ऐसा तरीका अपनाया है, जिसमें स्कूल की चारदीवारी से बाहर पूरा गांव बच्चों के लिए क्लासरूम बन जाता है। कभी छात्र बढ़ई की दुकान पर पहुंचकर लंबाई-चौड़ाई और ज्यामिति समझते हैं, तो कभी ऑटो गैराज में मशीनों और औजारों को देखकर विज्ञान के सवालों के जवाब खोजते हैं। दर्जी की दुकान, खेत, पेट्रोल पंप और फायर स्टेशन जैसी आम जगहें भी उनकी पढ़ाई का हिस्सा बनती हैं। जिला परिषद स्कूल से जुड़ी वाडेकर तीन दशक से ज्यादा समय से शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रही हैं। उनका जोर इस बात पर रहा है कि ग्रामीण बच्चों को केवल किताब में लिखी जानकारी याद न कराई जाए, बल्कि उन्हें यह भी दिखाया जाए कि वही गणित, विज्ञान और भाषा रोजमर्रा की जिंदगी में कहां और कैसे इस्तेमाल होती है। उनके इस प्रयोग को <strong>‘Village as a Classroom’</strong> यानी ‘गांव ही कक्षा’ जैसे मॉडल के रूप में पहचान मिली है।</p>
<p>इस तरीके में बच्चों को किसी विषय की जानकारी देने के लिए हमेशा ब्लैकबोर्ड और पाठ्यपुस्तक पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। मान लीजिए गणित में माप, क्षेत्रफल या ज्यामितीय आकृतियां पढ़ानी हैं। सामान्य कक्षा में शिक्षक स्केल से बोर्ड पर आकृति बनाकर समझाते हैं, लेकिन वाडेकर बच्चों को स्थानीय बढ़ई के पास ले जाती हैं। वहां छात्र देखते हैं कि लकड़ी काटने से पहले उसकी लंबाई कैसे मापी जाती है, कोण क्यों जरूरी है और छोटी-सी गणना गलत होने पर तैयार होने वाले फर्नीचर पर क्या असर पड़ सकता है। बच्चों के सामने सेंटीमीटर, मीटर, कोण और आकार अचानक किताब के अध्याय नहीं रहते। वे उन्हें वास्तविक काम में इस्तेमाल होते देखते हैं। बढ़ई के हाथ में फीता और औजार बच्चों के लिए उसी गणित का व्यावहारिक रूप बन जाते हैं जिसे वे स्कूल में पढ़ते हैं।</p>
<p>विज्ञान की पढ़ाई में भी आसपास की जगहों का इसी तरह इस्तेमाल किया जाता है। बच्चों को फायर स्टेशन ले जाकर आग बुझाने की व्यवस्था, पानी के दबाव, सुरक्षा उपकरण और आपात स्थिति में अपनाई जाने वाली प्रक्रिया समझने का मौका मिलता है। पेट्रोल पंप पर ईंधन की माप, मशीनों की कार्यप्रणाली और सुरक्षा नियमों को देखा जा सकता है। ऑटो गैराज में इंजन, पहिए, हवा का दबाव, घर्षण, लीवर और अलग-अलग उपकरण बच्चों के सामने मौजूद होते हैं। जिस मशीन या प्रक्रिया को किताब में केवल तस्वीर के जरिए समझना मुश्किल लगता है, उसे सामने चलते हुए देखकर सवाल अपने आप निकलने लगते हैं। शिक्षक का काम यहां केवल जानकारी सुनाना नहीं रहता, बल्कि बच्चों को देखने, पूछने और चीजों के बीच संबंध समझने के लिए प्रेरित करना होता है।</p>
<p>ग्रामीण क्षेत्र में इस मॉडल की खासियत यह भी है कि इसके लिए हर बार महंगी स्मार्ट लैब या अत्याधुनिक उपकरण जरूरी नहीं होते। गांव में पहले से मौजूद संसाधन ही सीखने की सामग्री बन जाते हैं। खेत में मिट्टी, बीज, फसल और सिंचाई है। दर्जी के पास कपड़े की नाप और कटिंग है। मोची के काम में डिजाइन, सामग्री और माप दिखाई देता है। दुकानदार के पास जोड़-घटाव, वजन और पैसे का हिसाब है। किसान मौसम, मिट्टी और पौधों के बारे में अपने अनुभव से बहुत कुछ बता सकता है। बच्चे जब इन लोगों से सीधे बातचीत करते हैं तो उन्हें पाठ्यक्रम के साथ उस स्थानीय ज्ञान का भी अनुभव मिलता है, जो पीढ़ियों से काम के जरिए आगे बढ़ता आया है।</p>
<p>उज्ज्वला वाडेकर के शिक्षण प्रयोग में भाषा सीखने को भी रोजमर्रा के जीवन से जोड़ने की कोशिश दिखाई देती है। बच्चों को किसी स्थानीय कामगार से सवाल पूछना हो तो पहले यह तय करना पड़ता है कि क्या पूछें और कैसे पूछें। जवाब ध्यान से सुनना होता है, फिर उसे अपने शब्दों में बताना या लिखना पड़ता है। इस छोटी-सी गतिविधि में सुनना, बोलना, समझना और लिखना चारों कौशल साथ जुड़ जाते हैं। गांव के ऐसे बच्चे जो सामान्य कक्षा में बोलने से झिझकते हैं, बाहर निकलने पर कई बार ज्यादा सवाल पूछते हैं क्योंकि सामने मौजूद चीज उनके लिए जानी-पहचानी होती है। कोई बच्चा किसान परिवार से है तो खेती के बारे में पहले से कुछ जानता है, जबकि किसी दूसरे बच्चे ने अपने घर के आसपास बढ़ई या मैकेनिक को काम करते देखा होता है। यही परिचित माहौल बातचीत की शुरुआत आसान कर देता है।</p>
<p>‘Village as a Classroom’ की सोच पारंपरिक पढ़ाई को पूरी तरह हटाने की नहीं, बल्कि किताब में मौजूद जानकारी और वास्तविक दुनिया के बीच संबंध बनाने की है। स्कूल में किसी अवधारणा को पढ़ने के बाद बच्चे बाहर जाकर उसका इस्तेमाल देखते हैं। वापस कक्षा में आने पर उसी अनुभव पर चर्चा की जा सकती है। उदाहरण के लिए बढ़ई की दुकान से लौटे बच्चों से अलग-अलग वस्तुओं का माप निकालने को कहा जा सकता है। खेत देखकर लौटने वाले छात्र फसल चक्र, पानी या मिट्टी पर लिख सकते हैं। ऑटो गैराज की यात्रा के बाद मशीनों और ऊर्जा से जुड़े सवालों पर बातचीत हो सकती है। इस तरह बाहर का अनुभव अगली कक्षा के लिए सामग्री बन जाता है।</p>
<p>इस मॉडल का एक और पहलू बच्चों में काम और कामगारों के प्रति नजरिया बदलना है। आम तौर पर स्कूल में पेशों के बारे में अध्याय पढ़ाया जाता है, लेकिन यहां छात्र सीधे उन लोगों से मिलते हैं जो रोज अपने हाथ और कौशल से काम करते हैं। दर्जी कपड़े को नापकर आकार देता है, बढ़ई कच्ची लकड़ी से उपयोगी वस्तु बनाता है, मैकेनिक मशीन की खराबी पहचानता है और किसान मौसम तथा जमीन की स्थिति देखकर फैसले करता है। बच्चे यह समझते हैं कि इन कामों के पीछे भी गणना, अनुभव, निर्णय और तकनीकी समझ होती है। स्थानीय कामगार इस प्रक्रिया में केवल देखने की वस्तु नहीं रहते, बल्कि कुछ समय के लिए बच्चों के शिक्षक जैसी भूमिका निभाते हैं।</p>
<p>तीन दशक से अधिक के शिक्षण अनुभव के दौरान वाडेकर ने ग्रामीण बच्चों की जरूरतों को करीब से देखा है। ग्रामीण स्कूलों में पढ़ने वाले कई बच्चों के आसपास सीखने के संसाधन मौजूद होते हुए भी उन्हें औपचारिक शिक्षा का हिस्सा नहीं माना जाता। खेत सिर्फ खेती की जगह समझा जाता है, दुकान केवल सामान खरीदने की जगह और गैराज वाहन ठीक कराने की जगह। इस मॉडल में इन्हीं स्थानों को अलग नजर से देखा जाता है। एक पेट्रोल पंप गणित और विज्ञान दोनों सिखा सकता है। बाजार आर्थिक समझ विकसित कर सकता है। पंचायत या डाकघर नागरिक व्यवस्था समझने का माध्यम बन सकता है। सीखने की जगह बदलते ही बच्चे का सवाल भी बदलता है—‘यह पाठ परीक्षा में आएगा?’ की जगह ‘यह मशीन काम कैसे करती है?’ जैसे सवाल सामने आने लगते हैं।</p>
<p>इस तरह की गतिविधियों में शिक्षक को पहले से योजना बनानी पड़ती है। बच्चों को किसी कार्यस्थल पर ले जाने से पहले सुरक्षा, अनुमति और सीखने के उद्देश्य स्पष्ट रखना जरूरी होता है। फायर स्टेशन या गैराज जैसी जगहों पर बच्चों को सुरक्षित दूरी और नियमों का पालन कराना भी अहम है। हर जगह केवल भ्रमण करा देना experiential learning नहीं बनता। वहां देखी गई चीजों को पाठ्यक्रम से जोड़ना, बच्चों से सवाल करवाना और वापस स्कूल में उस अनुभव पर काम कराना जरूरी है। वाडेकर के मॉडल की चर्चा इसी वजह से होती है कि स्थानीय जीवन को पढ़ाई के साथ व्यवस्थित रूप से जोड़ने की कोशिश की गई।</p>
<p>यह तरीका बच्चों के आत्मविश्वास पर भी असर डाल सकता है। जब छात्र किसी दुकानदार से खुद सवाल करता है, किसी कारीगर से प्रक्रिया समझता है या खेत में देखकर अपनी जानकारी साझा करता है तो वह केवल सुनने वाला विद्यार्थी नहीं रहता। उसकी भूमिका सक्रिय हो जाती है। उसे लगता है कि सवाल पूछना भी सीखने का हिस्सा है। ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले बच्चों के लिए यह अनुभव खास हो सकता है, क्योंकि उनके अपने गांव और परिवार का ज्ञान भी स्कूल की पढ़ाई में जगह पाता है। घर में माता-पिता खेती या किसी हुनर से जुड़े हैं तो बच्चे पहली बार उस काम को अकादमिक विषयों के साथ जोड़कर देख सकते हैं।</p>
<p>उज्ज्वला वाडेकर की पहल शिक्षा से जुड़े उस पुराने सवाल को भी सामने रखती है कि बच्चे जो पढ़ रहे हैं, उसका अपनी जिंदगी से रिश्ता कितना समझ पा रहे हैं। गणित सिर्फ कॉपी में हल किए गए सवालों तक रहे तो वह कई बच्चों को मुश्किल लग सकता है, लेकिन वही गणित जब लकड़ी नापने, कपड़े की कटिंग या दुकान के हिसाब में दिखाई देता है तो उसका अर्थ बदल जाता है। विज्ञान केवल परिभाषाओं में सीमित रहने के बजाय इंजन, खेत, पानी और आग बुझाने की तकनीक में दिखाई देता है। भाषा केवल परीक्षा के उत्तर लिखने का माध्यम नहीं रहती, बल्कि किसी अनजान व्यक्ति से सवाल पूछने और उसकी बात समझने का जरिया बनती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Jul 2026 14:45:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Priyanka ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>30 सेकंड में 195 किस, ब्राजील के कपल ने बनाया अनोखा गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड</title>
                                    <description><![CDATA[रेनाटो अल्वेस और नाइआरा रोबर्टा ने प्यार को बदला रिकॉर्ड में, आधे मिनट में सबसे ज्यादा किस करने वाली जोड़ी बनी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/special-news/brazilian-couple-created-a-unique-guinness-world-record-by-kissing/article-58587"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/guinness-world-record.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">प्यार और जुनून की एक अनोखी मिसाल पेश करते हुए ब्राजील के एक कपल ने ऐसा रिकॉर्ड बना दिया है, जिसकी चर्चा दुनियाभर में हो रही है। ब्राजील के रेनाटो अल्वेस और उनकी गर्लफ्रेंड नाइआरा रोबर्टा रिबेरो डी मारिन्स ने केवल 30 सेकंड में 195 बार किस करके गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करा लिया है। इस अनोखी उपलब्धि के साथ दोनों ने साबित कर दिया कि उनका रिश्ता सिर्फ भावनाओं तक सीमित नहीं, बल्कि एक यादगार रिकॉर्ड का हिस्सा भी बन चुका है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस कपल ने यह चुनौती अंतरराष्ट्रीय किसिंग डे के कुछ समय बाद पूरी की। दोनों ने मिलकर इस रिकॉर्ड को हासिल करने का फैसला किया क्योंकि उनका मानना था कि उनके बीच का रिश्ता बेहद मजबूत है और वे इस खास पल को हमेशा यादगार बनाना चाहते थे। रेनाटो ने कहा कि उनके लिए यह सिर्फ एक रिकॉर्ड जीतने की कोशिश नहीं थी, बल्कि अपनी पार्टनर नाइआरा के साथ जिंदगी का एक खास अनुभव साझा करना था।</p>
<p style="text-align:justify;">रेनाटो अल्वेस के लिए यह पहला रिकॉर्ड नहीं है। वह पहले भी कई गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम कर चुके हैं। रिकॉर्ड बनाने के उनके जुनून ने उन्हें दुनिया के सामने एक अलग पहचान दिलाई है। इससे पहले उन्होंने कई अलग-अलग श्रेणियों में अपनी क्षमता साबित की है। इनमें सबसे तेज समय में 10 किताबों को व्यवस्थित कर गिराने का रिकॉर्ड भी शामिल है।</p>
<p style="text-align:justify;">रेनाटो ने यह उपलब्धि केवल 6.68 सेकंड में हासिल की थी। इसके अलावा उन्होंने पुरुषों के लिए सबसे बड़े पैर घुमाव (Largest Foot Rotation) का रिकॉर्ड भी बनाया है, जिसमें उनका प्रदर्शन 210.66 डिग्री दर्ज किया गया था। लगातार नए रिकॉर्ड बनाने की उनकी कोशिश ने उन्हें रिकॉर्ड प्रेमियों के बीच खास पहचान दिलाई है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बार रेनाटो ने अपनी उपलब्धि में अपनी गर्लफ्रेंड नाइआरा को भी बराबर का भागीदार बनाया। उनका कहना था कि वह चाहते थे कि रिकॉर्ड बुक में केवल उनका नाम नहीं बल्कि नाइआरा का नाम भी उनके साथ दर्ज हो। उनके लिए यह उपलब्धि व्यक्तिगत सफलता से ज्यादा एक साझा यादगार पल थी।</p>
<p style="text-align:justify;">रिकॉर्ड बनाने के लिए कपल को बेहद कम समय में तालमेल और गति बनाए रखनी थी। 30 सेकंड का समय बहुत छोटा होता है, ऐसे में दोनों के बीच सही तालमेल और एक-दूसरे के साथ सहजता बेहद जरूरी थी। कपल ने इस चुनौती को आत्मविश्वास के साथ पूरा किया और 195 किस का आंकड़ा छूकर नया रिकॉर्ड बना दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज होना दुनिया भर में कई लोगों का सपना होता है। लोग अलग-अलग और अनोखी क्षमताओं के जरिए रिकॉर्ड बनाने की कोशिश करते हैं। कोई अपनी शारीरिक क्षमता से तो कोई किसी खास हुनर के जरिए इतिहास बनाने की कोशिश करता है। रेनाटो और नाइआरा ने अपने रिश्ते और आपसी तालमेल को रिकॉर्ड बनाने का जरिया बनाया।</p>
<p style="text-align:justify;">सोशल मीडिया पर भी इस कपल की उपलब्धि चर्चा का विषय बनी हुई है। लोग उनके इस अनोखे प्रयास को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कुछ लोगों ने इसे प्यार और रिश्ते की खूबसूरत मिसाल बताया, तो कुछ ने इसे दुनिया के सबसे अलग रिकॉर्ड्स में शामिल एक मजेदार उपलब्धि कहा।</p>
<p style="text-align:justify;">रेनाटो का कहना है कि रिकॉर्ड बनाना उनके लिए हमेशा एक रोमांचक अनुभव रहा है। वह नए-नए क्षेत्रों में अपनी क्षमता को परखना पसंद करते हैं। हालांकि इस बार उनके लिए सबसे खास बात यह थी कि उन्होंने यह उपलब्धि अकेले नहीं बल्कि अपनी जीवनसाथी के साथ मिलकर हासिल की।</p>
<p style="text-align:justify;">किसिंग रिकॉर्ड को लेकर इससे पहले भी कई लोग गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करा चुके हैं, लेकिन हर नया रिकॉर्ड अपने आप में खास होता है। इस बार ब्राजील की इस जोड़ी ने अपने प्यार और आपसी समझ के दम पर एक ऐसा रिकॉर्ड बनाया, जिसे लंबे समय तक याद किया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">रेनाटो और नाइआरा की यह कहानी बताती है कि किसी भी उपलब्धि को खास बनाने के लिए सिर्फ मेहनत ही नहीं बल्कि साथ देने वाला साथी भी महत्वपूर्ण होता है। दोनों ने अपने रिश्ते को एक अनोखे अंदाज में दुनिया के सामने पेश किया और अब उनका नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड की किताब में हमेशा के लिए दर्ज हो गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 12 Jul 2026 18:24:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>30 साल से हर दिन चीलों को दाना खिला रहे 'ईगल मैन' अजीजका, एक सीटी पर उमड़ पड़ते हैं सैकड़ों शिकारी पक्षी</title>
                                    <description><![CDATA[केरल के कोझिकोड बीच पर हर दोपहर देखने को मिलता है अनोखा नजारा, इंसान और वन्यजीवों के भरोसे की मिसाल बने अजीजका, आवारा जानवरों की भी करते हैं सेवा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/special-news/eagle-man-azizka-has-been-feeding-the-eagles-every-day/article-58438"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/eagle-man.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">दुनिया में इंसान और जानवरों के बीच प्रेम और विश्वास की कई कहानियां सुनने को मिलती हैं, लेकिन केरल के कोझिकोड (कालीकट) से सामने आई एक कहानी इन सबसे अलग और बेहद प्रेरणादायक है। यहां रहने वाले अजीज, जिन्हें लोग प्यार से 'ईगल मैन' अजीजका के नाम से जानते हैं, पिछले 30 से भी अधिक वर्षों से बिना किसी स्वार्थ के हर दिन सैकड़ों शिकारी चीलों और आवारा जानवरों को भोजन करा रहे हैं। उनकी यह अनूठी सेवा न केवल स्थानीय लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र है, बल्कि देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को भी हैरान कर देती है। अजीजका का जीवन किसी नियमित दिनचर्या की तरह चलता है। चाहे मौसम कैसा भी हो, तेज बारिश हो, भीषण गर्मी हो या फिर त्योहार का दिन, वे अपनी सेवा में कभी विराम नहीं देते। हर दिन दोपहर ठीक 2 बजे वे अपनी पुरानी साइकिल पर चिकन के टुकड़ों से भरा एक बोरा लेकर अपने घर से निकलते हैं। उनका गंतव्य हमेशा एक ही होता है—कोझिकोड बीच, जहां सैकड़ों पक्षी और कई आवारा जानवर उनका इंतजार कर रहे होते हैं। बीच पर पहुंचने के बाद जो दृश्य दिखाई देता है, वह किसी फिल्मी दृश्य से कम नहीं होता। अजीजका जैसे ही अपनी खास अंदाज वाली सीटी बजाते हैं, कुछ ही क्षणों में आसमान में उड़ रही सैकड़ों चीलें उनकी ओर तेजी से आने लगती हैं। देखते ही देखते पूरा आसमान चीलों से भर जाता है और वे अजीजका के चारों ओर मंडराने लगती हैं। यह नजारा इतना अद्भुत होता है कि वहां मौजूद लोग कुछ देर के लिए मंत्रमुग्ध रह जाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">दिलचस्प बात यह है कि चीलों को स्वभाव से बेहद आक्रामक और शिकारी पक्षी माना जाता है। आमतौर पर ये पक्षी अपने शिकार पर तेज गति से हमला करते हैं और इंसानों से दूरी बनाए रखते हैं। लेकिन अजीजका के साथ इनका व्यवहार बिल्कुल अलग है। वर्षों से बना विश्वास इतना गहरा हो चुका है कि सैकड़ों चीलें उनके बेहद करीब आकर आराम से भोजन करती हैं, लेकिन उन्हें कभी कोई नुकसान नहीं पहुंचातीं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह रिश्ता एक-दो दिन या कुछ महीनों में नहीं बना। अजीजका ने लगातार तीन दशक तक बिना किसी लालच के इन पक्षियों की सेवा की है। उनकी नियमितता और समर्पण ने चीलों के मन में भरोसा पैदा किया, जिसका परिणाम आज दुनिया के सामने एक अनोखे उदाहरण के रूप में दिखाई देता है। अजीजका सिर्फ चीलों तक ही सीमित नहीं हैं। वे बीच के आसपास रहने वाले आवारा कुत्तों और अन्य जानवरों को भी भोजन कराते हैं। उनके लिए यह केवल सेवा नहीं बल्कि जीवन का उद्देश्य बन चुका है। उनका मानना है कि इंसानों की तरह जानवरों को भी भूख लगती है और यदि हम सक्षम हैं तो हमें उनकी मदद जरूर करनी चाहिए। कोझिकोड बीच पर आने वाले पर्यटक अक्सर इस दृश्य को अपने कैमरों में कैद करते हैं। सोशल मीडिया पर अजीजका के वीडियो लाखों बार देखे जा चुके हैं। लोग उन्हें "ईगल मैन" के नाम से पहचानते हैं और उनकी तुलना प्रकृति के सच्चे मित्र से करते हैं। कई सोशल मीडिया यूजर्स मजाकिया अंदाज में कहते हैं कि अजीजका को चीलों की "स्पेशल सिक्योरिटी" मिली हुई है, क्योंकि उनके आसपास सैकड़ों चीलें सुरक्षा घेरे की तरह मंडराती रहती हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 18:51:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मासूम आंखों वाला फिलीपींस टार्सियर क्यों माना जाता है दुनिया का सबसे नाजुक जीव?</title>
                                    <description><![CDATA[बड़ी-बड़ी आंखों और मासूम चेहरे वाला फिलीपींस टार्सियर जितना आकर्षक दिखता है, उतना ही संवेदनशील भी है। विशेषज्ञ बताते हैं कि अत्यधिक तनाव और कैद की स्थिति में यह खुद को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/special-news/why-is-the-innocent-eyed-philippines-tarsier-considered-the-most-delicate/article-58314"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/philippine-tarsier.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">दुनिया में ऐसे कई जीव हैं, जो अपनी अनोखी बनावट और व्यवहार के कारण लोगों का ध्यान आकर्षित करते हैं। इन्हीं में से एक है फिलीपींस टार्सियर (Philippine Tarsier)। यह नन्हा प्राइमेट अपनी बड़ी-बड़ी गोल आंखों, छोटे शरीर और मासूम चेहरे के कारण दुनिया के सबसे प्यारे जीवों में गिना जाता है। सोशल मीडिया पर इसकी तस्वीरें और वीडियो अक्सर वायरल होते रहते हैं और पहली नजर में इसे देखने वाला लगभग हर व्यक्ति इसकी मासूमियत का दीवाना हो जाता है। लेकिन इस छोटे से जीव की जिंदगी जितनी खूबसूरत दिखती है, उतनी ही नाजुक भी है।</p>
<p style="text-align:justify;">फिलीपींस टार्सियर मुख्य रूप से फिलीपींस के बोहोल, समर, लेयटे और मिंदानाओ जैसे द्वीपों के घने जंगलों में पाया जाता है। इसका शरीर बेहद छोटा होता है और इसकी लंबाई लगभग 8 से 16 सेंटीमीटर तक होती है। हालांकि इसकी पूंछ शरीर से भी लंबी हो सकती है, जिससे यह पेड़ों पर आसानी से संतुलन बना पाता है। इसका वजन सामान्यतः 100 से 150 ग्राम के बीच होता है, लेकिन अपनी फुर्ती और छलांग लगाने की क्षमता के कारण यह जंगल में आसानी से शिकार कर लेता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस जीव की सबसे खास पहचान इसकी विशाल आंखें हैं। किसी भी स्तनधारी की तुलना में उसके शरीर के अनुपात में टार्सियर की आंखें सबसे बड़ी मानी जाती हैं। यदि इंसानों में भी ऐसा अनुपात होता तो हमारी आंखों का आकार लगभग एक संतरे जितना होता। इसकी आंखें इतनी बड़ी होती हैं कि वे अपनी आंखों को घुमा नहीं सकते। इस कमी को पूरा करने के लिए टार्सियर अपना सिर लगभग 180 डिग्री तक दोनों दिशाओं में घुमा सकता है, जिससे वह आसपास की गतिविधियों पर आसानी से नजर रखता है। टार्सियर पूरी तरह निशाचर जीव है। दिन के समय यह पेड़ों की शाखाओं और घनी पत्तियों के बीच आराम करता है, जबकि रात में भोजन की तलाश में निकलता है। इसका भोजन मुख्य रूप से कीड़े-मकोड़े, टिड्डे, झींगुर, मकड़ियां, छिपकलियां और छोटे पक्षी होते हैं। यह अपने लंबे पैरों की मदद से एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर कई मीटर लंबी छलांग लगा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">सोशल मीडिया और कई वेबसाइटों पर अक्सर यह दावा किया जाता है कि टार्सियर हल्का सा शोर सुनते ही "आत्महत्या" कर लेता है। हालांकि वैज्ञानिक इस दावे को पूरी तरह सही नहीं मानते। विशेषज्ञों के अनुसार, यह जीव अत्यधिक संवेदनशील होता है और तेज आवाज, लगातार फ्लैश लाइट, भीड़, बार-बार छूने या कैद जैसी परिस्थितियों में गंभीर तनाव का शिकार हो सकता है। ऐसे तनावपूर्ण हालात में कुछ टार्सियर खुद को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करते हैं, सिर को बार-बार किसी कठोर सतह से टकराते हैं या अत्यधिक घबराहट के कारण उनकी मौत भी हो सकती है। इसलिए यह कहना कि हर तेज आवाज पर वह आत्महत्या कर लेता है, वैज्ञानिक रूप से सही नहीं है। सही बात यह है कि अत्यधिक तनाव और अनुचित वातावरण उसके लिए जानलेवा साबित हो सकता है। इसी वजह से वन्यजीव विशेषज्ञ लोगों से अपील करते हैं कि यदि जंगल में कभी टार्सियर दिखाई दे तो उसके पास शोर न करें, फ्लैश कैमरे का इस्तेमाल न करें और उसे छूने की कोशिश भी न करें। कई पर्यटक केवल तस्वीर लेने के लिए उसके बेहद करीब पहुंच जाते हैं, जिससे यह छोटा जीव डर जाता है और उसका प्राकृतिक व्यवहार प्रभावित होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">फिलीपींस सरकार ने टार्सियर के संरक्षण के लिए कई विशेष कदम उठाए हैं। बोहोल द्वीप पर टार्सियर संरक्षण केंद्र बनाए गए हैं, जहां पर्यटकों के लिए सख्त नियम लागू किए गए हैं। यहां तेज आवाज करना, फ्लैश फोटोग्राफी करना और जानवर को छूना पूरी तरह प्रतिबंधित है। इन नियमों का उद्देश्य टार्सियर को तनाव से बचाना और उसके प्राकृतिक आवास की रक्षा करना है। टार्सियर की संख्या धीरे-धीरे घट रही है। इसके पीछे जंगलों की कटाई, अवैध शिकार, पर्यटन का बढ़ता दबाव और प्राकृतिक आवास का नष्ट होना प्रमुख कारण हैं। यही वजह है कि इसके संरक्षण पर लगातार जोर दिया जा रहा है। यदि समय रहते इसके आवास और जीवनशैली की रक्षा नहीं की गई, तो भविष्य में यह दुर्लभ जीव और अधिक संकट में पड़ सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">टार्सियर केवल एक आकर्षक जीव नहीं, बल्कि प्रकृति के संतुलन का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह कीड़ों की संख्या नियंत्रित करने में मदद करता है और जंगल के पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित बनाए रखने में भूमिका निभाता है। वैज्ञानिक भी इसकी अनोखी शारीरिक संरचना और व्यवहार का लगातार अध्ययन कर रहे हैं, ताकि इसके बारे में और अधिक जानकारी जुटाई जा सके। फिलीपींस टार्सियर हमें यह भी सिखाता है कि प्रकृति के सबसे छोटे और मासूम दिखने वाले जीव भी बेहद संवेदनशील होते हैं। उनकी सुरक्षा केवल कानूनों से नहीं, बल्कि लोगों की जागरूकता और जिम्मेदार व्यवहार से संभव है। यदि हम वन्यजीवों का सम्मान करें, उनके प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखें और उन्हें अनावश्यक तनाव से बचाएं, तो आने वाली पीढ़ियां भी इस अद्भुत और प्यारे जीव को उसकी प्राकृतिक दुनिया में देख सकेंगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 16:38:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>टीवी देखे बिना दूध नहीं देती भैंस! वायरल वीडियो ने इंटरनेट पर मचाई धूम</title>
                                    <description><![CDATA[सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा मजेदार वीडियो, टीवी के सामने खड़ी भैंस को देखकर लोग बोले- 'ये तो असली एंटरटेनमेंट लवर निकली']]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/special-news/buffalo-does-not-give-milk-without-watching-tv-viral-video/article-58220"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/buffalo-viral-video.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">सोशल मीडिया पर रोजाना ऐसे कई वीडियो सामने आते हैं, जो लोगों को हैरान करने के साथ-साथ खूब गुदगुदाते भी हैं। इन दिनों एक ऐसा ही वीडियो इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक भैंस अपने अनोखे व्यवहार की वजह से चर्चा का विषय बनी हुई है। दावा किया जा रहा है कि यह भैंस तब तक दूध नहीं देती, जब तक उसे टीवी पर उसका पसंदीदा कार्यक्रम देखने को न मिले। इस वीडियो ने सोशल मीडिया यूजर्स का खूब ध्यान खींचा है और लोग इस पर मजेदार प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। आमतौर पर भैंसों को खेतों में चरते, तालाब में आराम करते या गोशाला में बैठे हुए देखा जाता है, लेकिन इस वायरल वीडियो में नजर आ रही भैंस की आदत बिल्कुल अलग है। वीडियो देखने वाले लोग इसे देखकर अपनी हंसी नहीं रोक पा रहे हैं। कई यूजर्स इसे आज के डिजिटल दौर का सबसे मजेदार उदाहरण बता रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">वीडियो की शुरुआत में एक व्यक्ति घर के बाहर खड़ी महिला से पूछता है कि भैंस दूध क्यों नहीं दे रही है। इस सवाल पर महिला मुस्कुराते हुए जवाब देती है कि अभी यह दूध नहीं देगी। जब व्यक्ति दोबारा पूछता है कि आखिर कब दूध देगी, तो महिला का जवाब सभी को चौंका देता है। वह कहती है कि पहले इसे टीवी देखने दीजिए, उसके बाद ही यह दूध देगी।इसके बाद कैमरा भैंस की ओर घूमता है। वीडियो में देखा जा सकता है कि भैंस घर के दरवाजे के बाहर खड़ी है और उसकी पूरी नजर कमरे के अंदर चल रहे टेलीविजन पर टिकी हुई है। ऐसा लग रहा है मानो वह बड़े ध्यान से कोई कार्यक्रम देख रही हो। आसपास मौजूद लोग उसे हटाने की कोशिश करते हैं, लेकिन भैंस अपनी जगह से हिलने को तैयार नहीं होती।</p>
<p style="text-align:justify;">वीडियो में एक महिला हाथ में दूध निकालने की बाल्टी लेकर भैंस के पास आती है। वह प्यार से उसकी पीठ थपथपाती है और उसे दूसरी ओर ले जाने की कोशिश करती है, लेकिन भैंस लगातार टीवी स्क्रीन की तरफ ही देखती रहती है। काफी कोशिशों के बाद भी जब वह अपनी जगह से नहीं हटती, तो वहां मौजूद लोग भी हंसने लगते हैं। यही अनोखा दृश्य सोशल मीडिया पर वायरल होने की सबसे बड़ी वजह बन गया है। लोग इस वीडियो को अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर शेयर कर रहे हैं और मजेदार कैप्शन के साथ अपनी प्रतिक्रियाएं भी दे रहे हैं। किसी ने लिखा कि अब जानवर भी मनोरंजन के बिना काम नहीं करते, तो किसी ने मजाक में कहा कि भैंस का भी अपना फेवरेट सीरियल होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि, इस वीडियो में किए जा रहे दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। यह स्पष्ट नहीं है कि भैंस वास्तव में टीवी देखने की आदी है या फिर यह वीडियो मनोरंजन के उद्देश्य से बनाया गया है। कई बार सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो हल्के-फुल्के अंदाज में रिकॉर्ड किए जाते हैं, जिनका मकसद केवल लोगों का मनोरंजन करना होता है। इसलिए वायरल वीडियो में दिखाई गई बातों को पूरी तरह सच मानने से पहले सावधानी बरतना जरूरी है।  भैंस और अन्य पालतू जानवर आवाज, रोशनी और आसपास की गतिविधियों पर प्रतिक्रिया जरूर देते हैं। कई बार वे किसी विशेष ध्वनि या रोजमर्रा की आदत के कारण किसी जगह पर खड़े रह सकते हैं। हालांकि, किसी जानवर का टीवी देखे बिना दूध न देना सामान्य व्यवहार नहीं माना जाता। इसलिए इस तरह के वायरल वीडियो को मनोरंजन के नजरिए से ही देखना बेहतर होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">सोशल मीडिया का दौर ऐसा है, जहां हर दिन कुछ नया देखने को मिलता है। कभी किसी कुत्ते का डांस वीडियो वायरल हो जाता है, तो कभी बिल्ली की शरारतें लोगों को हंसा देती हैं। अब इस भैंस के वीडियो ने भी लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। खास बात यह है कि वीडियो में किसी तरह की अफरा-तफरी नहीं, बल्कि एक सामान्य ग्रामीण माहौल दिखाई देता है, जिसने इसे और भी दिलचस्प बना दिया है। वीडियो पर हजारों लोग अपनी प्रतिक्रियाएं दे चुके हैं। कई यूजर्स ने लिखा कि अगर टीवी बंद कर दिया जाए तो शायद भैंस नाराज हो जाएगी। वहीं कुछ लोगों ने मजाक में कहा कि अब दूध निकालने से पहले रिमोट तैयार रखना पड़ेगा। ऐसे कमेंट्स इस वीडियो को और ज्यादा लोकप्रिय बना रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 18:17:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>2.5 लाख रुपये किलो का मियाजाकी आम बना आकर्षण, यूपी मैंगो फेस्टिवल में उमड़ी भीड़</title>
                                    <description><![CDATA[जापान की दुर्लभ मियाजाकी किस्म ने खींचा लोगों का ध्यान, कीमत सुनकर सोशल मीडिया पर आई मजेदार प्रतिक्रियाएं; विशेषज्ञ बोले- सही देखभाल से खेती बन सकती है मुनाफे का सौदा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/special-news/miyazaki-mango-worth-rs-25-lakh-per-kg-becomes-attraction/article-57940"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/miyazaki-mango.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश में आयोजित मैंगो फेस्टिवल इन दिनों देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। इसकी सबसे बड़ी वजह है जापान की मशहूर और बेहद दुर्लभ मियाजाकी आम (Miyazaki Mango) की प्रदर्शनी, जिसकी कीमत करीब 2.5 लाख रुपये प्रति किलोग्राम बताई जा रही है। इस आम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इसकी कीमत जानकर हैरान हैं। कई यूजर्स मजाकिया अंदाज में कह रहे हैं कि "एक आम खरीदने के लिए तो लोन लेना पड़ेगा।" मैंगो फेस्टिवल में पहुंचे लोगों की नजर सबसे पहले इसी खास आम पर ठहर रही है। लाल और बैंगनी रंग की चमक लिए यह आम अपने आकर्षक रूप, दुर्लभता और अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊंची कीमत के कारण चर्चा में बना हुआ है। आयोजकों का कहना है कि इस आम को लोगों को नई और दुर्लभ किस्मों से परिचित कराने के उद्देश्य से प्रदर्शित किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">मियाजाकी आम मूल रूप से जापान के मियाजाकी प्रांत में उगाया जाता है। इसे दुनिया के सबसे महंगे फलों में गिना जाता है। इसकी खेती बेहद नियंत्रित वातावरण में की जाती है, जहां तापमान, धूप, नमी और पोषण का विशेष ध्यान रखा जाता है। फल पूरी तरह पकने के बाद अपने आप पेड़ से गिरता है। गिरने से पहले उसे विशेष जालीदार बैग में सुरक्षित रखा जाता है ताकि फल को किसी प्रकार का नुकसान न पहुंचे। यही वजह है कि इसकी गुणवत्ता और स्वाद सामान्य आमों से अलग मानी जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">मियाजाकी आम का स्वाद बेहद मीठा होता है। इसमें प्राकृतिक शर्करा की मात्रा अधिक होती है और यह विटामिन ए, विटामिन सी, एंटीऑक्सीडेंट तथा अन्य पोषक तत्वों से भरपूर माना जाता है। फल का औसत वजन 350 से 500 ग्राम तक हो सकता है। इसकी चमकदार लाल रंगत और मुलायम गूदा इसे अन्य आमों से अलग पहचान दिलाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">मैंगो फेस्टिवल में प्रदर्शित मियाजाकी आम का वीडियो सोशल मीडिया पर लाखों बार देखा जा चुका है। वीडियो में लोग आम को देखकर उसकी तस्वीरें लेते और उसकी कीमत जानने के बाद आश्चर्य व्यक्त करते नजर आ रहे हैं। वीडियो वायरल होने के बाद इंटरनेट पर मजेदार प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। किसी ने लिखा, "इतने में तो नई बाइक आ जाएगी।" वहीं एक अन्य यूजर ने कहा, "आम नहीं, यह तो लग्जरी आइटम है।" कई लोगों ने इसे दुनिया का सबसे महंगा आम बताते हुए इसकी तुलना सोने से भी कर दी।</p>
<p style="text-align:justify;">मियाजाकी आम की खेती भारत में भी संभव है, लेकिन इसके लिए विशेष तकनीक, नियंत्रित वातावरण और उच्च गुणवत्ता वाली देखभाल की आवश्यकता होती है। देश के कुछ राज्यों जैसे मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार और उत्तर प्रदेश में कुछ किसानों ने प्रयोग के तौर पर इस किस्म की खेती शुरू की है। हालांकि बड़े स्तर पर इसकी खेती अभी सीमित है। यदि किसान सही तकनीक अपनाएं और बाजार तक अच्छी पहुंच बना सकें, तो यह फसल बेहतर आय का माध्यम बन सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">मियाजाकी आम का पौधा बड़े गमले में भी लगाया जा सकता है। हालांकि केवल पौधा लगाने से सफलता नहीं मिलती। नियमित सिंचाई, पर्याप्त धूप, संतुलित खाद, कीट नियंत्रण और समय-समय पर छंटाई जैसी प्रक्रियाओं का पालन करना जरूरी होता है। यदि पौधे की सही तरीके से देखभाल की जाए तो कुछ वर्षों बाद फल प्राप्त हो सकते हैं। हालांकि अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता हासिल करने के लिए वैज्ञानिक तरीके से खेती करना आवश्यक माना जाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 16:27:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एक तस्वीर से बदली किस्मत, दुनिया का सबसे लंबा डैशहाउंड बना इंटरनेट स्टार</title>
                                    <description><![CDATA[कैलिफोर्निया के डैशहाउंड ऑस्कर वाइल्ड की असाधारण लंबाई ने सोशल मीडिया पर मचाई धूम, वायरल तस्वीर के बाद रेस ट्रैक पर भी दिखाया दम और दुनिया भर के डॉग लवर्स का दिल जीत लिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/special-news/one-picture-changed-fate-worlds-tallest-dachshund-became-an-internet/article-57875"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/oscar-wilde-dog.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">सोशल मीडिया के दौर में कई बार एक तस्वीर किसी आम शख्स या जानवर को रातोंरात दुनिया भर में पहचान दिला देती है। ऐसा ही कुछ अमेरिका के कैलिफोर्निया में रहने वाले एक डैशहाउंड कुत्ते<strong> </strong>ऑस्कर वाइल्ड के साथ हुआ। अपनी असाधारण लंबाई के कारण ऑस्कर की एक साधारण-सी तस्वीर इंटरनेट पर वायरल हुई और देखते ही देखते वह दुनिया भर में चर्चा का विषय बन गया। अब यह डैशहाउंड केवल सोशल मीडिया का स्टार ही नहीं, बल्कि डॉग रेस ट्रैक का भी विजेता बन चुका है। ऑस्कर वाइल्ड की सबसे ज्यादा चर्चा उसकी लंबाई को लेकर हो रही है। वायरल तस्वीर में वह एक बड़े सोफे पर आराम से लेटा दिखाई देता है, लेकिन उसकी लंबाई इतनी ज्यादा है कि उसका शरीर सोफे के एक छोर से दूसरे छोर तक फैला नजर आता है। यही तस्वीर इंटरनेट पर लाखों लोगों का ध्यान खींचने में सफल रही। तस्वीर सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने उसे दुनिया का सबसे लंबा "वीनर डॉग" कहना शुरू कर दिया। हालांकि उसकी लंबाई को लेकर किसी आधिकारिक संस्था द्वारा विश्व रिकॉर्ड की पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन इंटरनेट पर लोग उसकी तुलना अन्य डैशहाउंड नस्ल के कुत्तों से कर रहे हैं।</p>
<p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/wiener-dog.jpg" alt="Wiener Dog" width="1366" height="967"></img></p>
<p style="text-align:justify;">डैशहाउंड नस्ल अपने लंबे शरीर और छोटे पैरों के कारण पूरी दुनिया में काफी लोकप्रिय मानी जाती है। इस नस्ल को कई देशों में प्यार से "सॉसेज डॉग" या "वीनर डॉग" भी कहा जाता है। आमतौर पर डैशहाउंड की लंबाई सीमित होती है, लेकिन ऑस्कर वाइल्ड का शरीर सामान्य डैशहाउंड की तुलना में कहीं अधिक लंबा दिखाई देता है। यही उसकी सबसे बड़ी पहचान बन गई है। सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद ऑस्कर वाइल्ड के हजारों नए प्रशंसक बन गए। लोग उसकी तस्वीरें और वीडियो बड़े उत्साह से साझा करने लगे। कई यूजर्स ने मजाकिया अंदाज में लिखा कि ऑस्कर को देखकर ऐसा लगता है मानो उसके शरीर की लंबाई खत्म ही नहीं होती। कुछ लोगों ने उसकी तुलना छोटे सोफे, बेंच और यहां तक कि बच्चों के बिस्तर से भी कर दी। इस अनोखे अंदाज ने उसे इंटरनेट का नया सेंसेशन बना दिया। वायरल होने के बाद ऑस्कर की लोकप्रियता केवल तस्वीरों तक सीमित नहीं रही। उसने हाल ही में आयोजित एक डॉग रेस प्रतियोगिता में भी शानदार प्रदर्शन किया और जीत हासिल की। रेस में उसकी फुर्ती और तेज रफ्तार ने दर्शकों को प्रभावित किया। इससे यह साबित हुआ कि केवल लंबाई ही नहीं, बल्कि वह शारीरिक रूप से भी बेहद सक्रिय और चुस्त है। प्रतियोगिता जीतने के बाद उसकी लोकप्रियता और तेजी से बढ़ गई।  ऑस्कर वाइल्ड इस बात का उदाहरण है कि हर जानवर अपनी किसी न किसी विशेषता की वजह से लोगों का दिल जीत सकता है। सोशल मीडिया पर अक्सर पालतू जानवरों के वीडियो और तस्वीरें वायरल होती रहती हैं, लेकिन ऑस्कर की कहानी इसलिए अलग है क्योंकि उसकी प्राकृतिक बनावट ही उसे भीड़ से अलग पहचान दिलाती है।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/dachshund.jpg" alt="Dachshund" width="1366" height="768"></img></p>
<p style="text-align:justify;">डैशहाउंड नस्ल मूल रूप से शिकार के लिए विकसित की गई थी। इनका लंबा शरीर और छोटे पैर इन्हें जमीन के भीतर बने बिलों में आसानी से जाने में मदद करते थे। हालांकि आज यह नस्ल दुनिया भर में पालतू जानवर के रूप में ज्यादा लोकप्रिय है। इनका स्वभाव मिलनसार, चंचल और बुद्धिमान माना जाता है। ऑस्कर वाइल्ड भी अपने शांत व्यवहार और लोगों के साथ घुलने-मिलने की आदत के कारण काफी पसंद किया जा रहा है। ऑस्कर के मालिक ने भी उसकी बढ़ती लोकप्रियता पर खुशी जताई है। उनका कहना है कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि घर के सोफे पर आराम करते हुए ली गई एक साधारण तस्वीर पूरी दुनिया में इतनी तेजी से वायरल हो जाएगी। अब लोग लगातार ऑस्कर की नई तस्वीरों और वीडियो का इंतजार करते हैं। सोशल मीडिया पर उसके प्रशंसकों की संख्या लगातार बढ़ रही है और कई लोग उसे दुनिया का सबसे प्यारा डैशहाउंड बता रहे हैं। इंटरनेट पर वायरल होने के बाद ऑस्कर से जुड़े कई मीम्स और रचनात्मक पोस्ट भी सामने आए हैं। कुछ लोगों ने उसकी लंबाई को लेकर मजेदार कैप्शन बनाए, जबकि कई कलाकारों ने उसकी तस्वीरों से डिजिटल आर्ट तैयार की। इस तरह ऑस्कर केवल एक पालतू कुत्ता नहीं रहा, बल्कि इंटरनेट संस्कृति का हिस्सा बन गया है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 15:20:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राज्यसभा सांसदों की सैलरी कितनी है? जानिए पूरी जानकारी</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">झारखंड और मिजोरम में हुए राज्यसभा चुनाव 2026 के नतीजों के बाद एक बार फिर उच्च सदन यानी राज्यसभा चर्चा में है। झारखंड में हुए चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा के उम्मीदवार बैद्यनाथ राम ने जीत दर्ज की, जबकि एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी भी राज्यसभा पहुंचने में सफल रहे। दूसरी ओर, INDIA गठबंधन के तहत मैदान में उतरी कांग्रेस को बड़ा झटका लगा। मिजोरम में भी राजनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण परिणाम सामने आए, जहां जोरम पीपुल्स मूवमेंट ने पहली बार राज्यसभा में अपना प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया। चुनावी नतीजों के बीच लोगों के मन में एक सवाल भी उठ</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/special-news/know-the-complete-information-about-the-salary-of-rajya-sabha/article-56554"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/rajysabha3.png" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">झारखंड और मिजोरम में हुए राज्यसभा चुनाव 2026 के नतीजों के बाद एक बार फिर उच्च सदन यानी राज्यसभा चर्चा में है। झारखंड में हुए चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा के उम्मीदवार बैद्यनाथ राम ने जीत दर्ज की, जबकि एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी भी राज्यसभा पहुंचने में सफल रहे। दूसरी ओर, INDIA गठबंधन के तहत मैदान में उतरी कांग्रेस को बड़ा झटका लगा। मिजोरम में भी राजनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण परिणाम सामने आए, जहां जोरम पीपुल्स मूवमेंट ने पहली बार राज्यसभा में अपना प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया। चुनावी नतीजों के बीच लोगों के मन में एक सवाल भी उठ रहा है कि आखिर राज्यसभा सांसदों को कितनी सैलरी मिलती है और क्या उनकी कमाई लोकसभा सांसदों से अलग होती है?</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भारत की संसदीय व्यवस्था में लोकसभा और राज्यसभा दोनों ही संसद के महत्वपूर्ण सदन हैं। लोकसभा के सदस्य सीधे जनता द्वारा चुने जाते हैं, जबकि राज्यसभा सांसदों का चुनाव अप्रत्यक्ष तरीके से होता है। हालांकि चुनाव की प्रक्रिया अलग होने के बावजूद वेतन और सुविधाओं के मामले में दोनों सदनों के सदस्यों के बीच कोई अंतर नहीं रखा गया है। संसद सदस्य वेतन, भत्ता और पेंशन अधिनियम के तहत दोनों सदनों के सांसदों को समान वेतन और सुविधाएं प्रदान की जाती हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मार्च 2025 में लागू संशोधित प्रावधानों के अनुसार प्रत्येक सांसद को प्रति माह 1.24 लाख रुपये का मूल वेतन दिया जाता है। यह राशि चाहे सांसद लोकसभा का सदस्य हो या राज्यसभा का, दोनों के लिए समान है। इसके अलावा सांसदों को अपने निर्वाचन क्षेत्र और जनसंपर्क से जुड़े कार्यों के लिए अलग से भत्ते भी मिलते हैं। सांसदों को हर महीने 87 हजार रुपये निर्वाचन क्षेत्र भत्ता दिया जाता है ताकि वे जनता से जुड़े कार्यों और क्षेत्रीय गतिविधियों को बेहतर तरीके से संचालित कर सकें।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसके साथ ही कार्यालय संचालन और प्रशासनिक खर्चों के लिए 75 हजार रुपये प्रति माह कार्यालय व्यय भत्ता भी दिया जाता है। इस राशि का उपयोग स्टाफ के वेतन, कार्यालय संचालन, स्टेशनरी और अन्य प्रशासनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जाता है। यदि मूल वेतन और इन दोनों प्रमुख भत्तों को जोड़ दिया जाए तो एक सांसद की मासिक आय करीब 2.86 लाख रुपये तक पहुंच जाती है। हालांकि यह केवल निश्चित भुगतान है। इसके अतिरिक्त सांसदों को कई अन्य सुविधाएं और भत्ते भी प्राप्त होते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">संसदीय सत्र या संसदीय समितियों की बैठकों में भाग लेने पर सांसदों को दैनिक भत्ता भी मिलता है। वर्तमान व्यवस्था के तहत सांसदों को प्रत्येक दिन की उपस्थिति के लिए 2,500 रुपये का दैनिक भत्ता दिया जाता है। संसद के कामकाज में सक्रिय भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए यह व्यवस्था लागू की गई है। संसद सत्र के दौरान यह राशि अलग से प्रदान की जाती है और इसे मासिक वेतन में शामिल नहीं किया जाता।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दिल्ली में रहने की सुविधा भी सांसदों को मिलने वाले प्रमुख लाभों में शामिल है। सांसदों को उनके कार्यकाल के दौरान नई दिल्ली में सरकारी आवास उपलब्ध कराया जाता है। पात्रता और उपलब्धता के आधार पर उन्हें बंगला या फ्लैट दिया जाता है। राजधानी में महंगे किराए और आवासीय खर्चों को देखते हुए यह सुविधा सांसदों के लिए काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यात्रा सुविधाओं की बात करें तो सांसदों को हवाई और रेल यात्रा में भी विशेष लाभ मिलता है। उन्हें हर साल 34 मुफ्त घरेलू हवाई यात्राओं की सुविधा दी जाती है। इसके अलावा भारतीय रेलवे में फर्स्ट एसी श्रेणी में असीमित यात्रा की सुविधा भी उपलब्ध रहती है। यही नहीं, सांसदों को विभिन्न आधिकारिक कार्यों के लिए यात्रा भत्ते भी दिए जाते हैं ताकि वे अपने क्षेत्र और राजधानी के बीच नियमित संपर्क बनाए रख सकें।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सांसदों को कई अन्य सुविधाएं भी प्राप्त होती हैं। उपलब्ध प्रावधानों के अनुसार उन्हें हर साल 50 हजार यूनिट तक मुफ्त बिजली और निर्धारित सीमा तक पानी की सुविधा दी जाती है। स्वास्थ्य सुविधाओं के तहत सांसद और उनके परिवार के सदस्य केंद्रीय सरकार स्वास्थ्य योजना (CGHS) के दायरे में आते हैं, जिससे उन्हें विभिन्न सरकारी और मान्यता प्राप्त अस्पतालों में चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सांसदों को दी जाने वाली ये सुविधाएं उनके सार्वजनिक दायित्वों और व्यापक जिम्मेदारियों को ध्यान में रखते हुए तय की गई हैं। संसद सदस्य केवल कानून निर्माण तक सीमित नहीं रहते, बल्कि अपने क्षेत्र के लोगों की समस्याओं को सरकार तक पहुंचाने और विभिन्न विकास कार्यों की निगरानी की जिम्मेदारी भी निभाते हैं। यही कारण है कि वेतन के साथ-साथ उन्हें कई प्रशासनिक और कार्यगत सुविधाएं भी प्रदान की जाती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">कुल मिलाकर यदि सवाल यह है कि राज्यसभा सांसदों को लोकसभा सांसदों से ज्यादा वेतन मिलता है या कम, तो जवाब साफ है। दोनों सदनों के सांसदों को समान वेतन, भत्ते और सुविधाएं मिलती हैं। संसद में उनकी भूमिका भले अलग हो, लेकिन आर्थिक लाभ और सरकारी सुविधाओं के मामले में दोनों के बीच कोई भेदभाव नहीं किया जाता।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 21 Jun 2026 13:15:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[दैनिक जागरण]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>9 महीने की गर्भवती योग प्रशिक्षक का वीडियो वायरल, सोशल मीडिया पर छिड़ी सुरक्षा और फिटनेस को लेकर बहस</title>
                                    <description><![CDATA[मुश्किल योगासन करते दिखीं महिला, लाखों लोगों ने जताई अलग-अलग राय; विशेषज्ञों ने गर्भावस्था में सावधानी बरतने की दी सलाह]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/special-news/video-of-9-months-pregnant-yoga-instructor-goes-viral-debate/article-54984"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/pregnant-woman-yoga-video.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">सोशल मीडिया पर इन दिनों एक गर्भवती महिला का योग करते हुए वीडियो तेजी से चर्चा का विषय बना हुआ है। वीडियो में महिला गर्भावस्था के अंतिम चरण में दिखाई दे रही हैं, लेकिन इसके बावजूद वे ऐसे योगासन कर रही हैं जिन्हें सामान्य परिस्थितियों में भी चुनौतीपूर्ण माना जाता है। वीडियो सामने आने के बाद इंटरनेट पर लोगों की प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई है। कोई इसे अनुशासन और फिटनेस का उदाहरण बता रहा है तो कोई इसे जोखिम भरा कदम मानकर चिंता जता रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/yoga.jpg" alt="yoga" width="1080" height="1043"></img></p>
<p class="isSelectedEnd">बताया जा रहा है कि वीडियो में नजर आने वाली महिला बेंगलुरु की योग प्रशिक्षक शशि प्रभा द्विवेदी हैं। वीडियो में वे पारंपरिक परिधान में बेहद संतुलित तरीके से चक्रासन सहित कई कठिन योग मुद्राएं करती दिखाई देती हैं। खास बात यह है कि उनकी गर्भावस्था नौवें महीने में बताई जा रही है। यही वजह है कि वीडियो ने लोगों का ध्यान तेजी से अपनी ओर खींच लिया। इंस्टाग्राम समेत कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर यह क्लिप लाखों नहीं बल्कि करोड़ों बार देखी जा चुकी है।</p>
<p class="isSelectedEnd"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/whatsapp-image-2026-06-04-at-5.30.58-pm-(1).jpeg" alt="WhatsApp Image 2026-06-04 at 5.30.58 PM (1)" width="1080" height="936"></img></p>
<p class="isSelectedEnd">वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया दो अलग-अलग पक्षों में बंटता नजर आया। एक वर्ग का कहना है कि यह वर्षों की मेहनत, नियमित अभ्यास और शरीर पर बेहतर नियंत्रण का परिणाम है। समर्थकों का मानना है कि जो व्यक्ति लंबे समय से योग और फिटनेस से जुड़ा हो, उसके लिए कुछ गतिविधियां सामान्य हो सकती हैं जिन्हें आम लोग कठिन समझते हैं। कई यूजर्स ने महिला की मानसिक मजबूती, आत्मविश्वास और फिटनेस स्तर की सराहना भी की है।</p>
<p class="isSelectedEnd">दूसरी ओर आलोचकों की संख्या भी कम नहीं है। कई लोगों ने सवाल उठाया कि गर्भावस्था के अंतिम दिनों में इस प्रकार के कठिन आसन करना कितना सुरक्षित है। कुछ यूजर्स ने चिंता जताई कि सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले ऐसे वीडियो कई बार लोगों को प्रभावित करते हैं और बिना पूरी जानकारी के दूसरे लोग भी उनकी नकल करने लगते हैं। उनका मानना है कि गर्भावस्था जैसी संवेदनशील अवस्था में किसी भी तरह की शारीरिक गतिविधि विशेषज्ञ सलाह के अनुसार ही की जानी चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/whatsapp-image-2026-06-04-at-5.30.58-pm-(2).jpeg" alt="WhatsApp Image 2026-06-04 at 5.30.58 PM (2)" width="1080" height="987"></img></p>
<p class="isSelectedEnd">ऑनलाइन बहस बढ़ने के बाद योग प्रशिक्षक ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे कई वर्षों से योग का अभ्यास कर रही हैं और उनका शरीर इस प्रकार के आसनों का अभ्यस्त है। उन्होंने कहा कि वीडियो का उद्देश्य किसी को प्रभावित करना या कोई रिकॉर्ड बनाना नहीं था। यह उनकी नियमित दिनचर्या का हिस्सा है। साथ ही उन्होंने लोगों से अपील की कि बिना चिकित्सकीय सलाह और प्रशिक्षित मार्गदर्शन के ऐसे अभ्यास करने की कोशिश न करें।</p>
<p class="isSelectedEnd"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/whatsapp-image-2026-06-04-at-5.30.59-pm.jpeg" alt="WhatsApp Image 2026-06-04 at 5.30.59 PM" width="1080" height="1103"></img></p>
<p class="isSelectedEnd">स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि गर्भावस्था के दौरान शारीरिक सक्रियता फायदेमंद हो सकती है, लेकिन इसकी सीमा और प्रकार हर महिला की शारीरिक स्थिति पर निर्भर करता है। डॉक्टरों के अनुसार किसी भी तरह का व्यायाम, योग या फिटनेस रूटीन अपनाने से पहले व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति का मूल्यांकन जरूरी होता है। विशेष रूप से गर्भावस्था के अंतिम चरण में अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इंटरनेट पर दिखने वाली हर गतिविधि सभी लोगों के लिए उपयुक्त नहीं होती।</p>
<p class="isSelectedEnd"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/whatsapp-image-2026-06-04-at-5.30.59-pm-(1).jpeg" alt="WhatsApp Image 2026-06-04 at 5.30.59 PM (1)" width="1080" height="1055"></img></p>
<p class="isSelectedEnd">फिटनेस और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के दौर में ऐसे वीडियो अक्सर व्यापक चर्चा को जन्म देते हैं। एक ओर लोग प्रेरणादायक कंटेंट की तलाश करते हैं, वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर चिंताएं भी सामने आती हैं। इस वीडियो ने भी इसी बहस को एक बार फिर तेज कर दिया है। कई विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर साझा किए जाने वाले फिटनेस कंटेंट के साथ संदर्भ और सावधानियां भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/whatsapp-image-2026-06-04-at-5.30.59-pm-(2).jpeg" alt="WhatsApp Image 2026-06-04 at 5.30.59 PM (2)" width="1080" height="984"></img></p>
<p>सोशल मीडिया पर वीडियो को लेकर चर्चाएं लगातार जारी हैं। विभिन्न प्लेटफॉर्म पर लोग अपने-अपने अनुभव, राय और स्वास्थ्य संबंधी दृष्टिकोण साझा कर रहे हैं। कुछ इसे आत्मविश्वास और समर्पण का प्रतीक बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे केवल प्रशिक्षित व्यक्तियों तक सीमित अभ्यास मान रहे हैं। इसी वजह से यह वीडियो इस सप्ताह इंटरनेट पर सबसे ज्यादा चर्चा बटोरने वाले कंटेंट में शामिल हो गया है।</p>
<p>---</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 17:57:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Priyanka ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इंस्टाग्राम पर कॉकरोच जनता पार्टी के तगड़े फॉलोवर्स, BJP-कांग्रेस पीछे छूटे, X अकाउंट भारत में ब्लॉक</title>
                                    <description><![CDATA[कॉकरोच जनता पार्टी के इंस्टाग्राम फॉलोअर्स 2 करोड़ पार पहुंच गए। BJP और कांग्रेस पीछे छूटे, वहीं X अकाउंट भारत में ब्लॉक हुआ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/cockroach-janata-partys-strong-followers-on-instagram-bjp-congress-left-behind/article-53965"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/cockroach-janata-party-cjp-instagram.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सोशल मीडिया पर इन दिनों </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">'<span lang="hi" xml:lang="hi">कॉकरोच जनता पार्टी</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">यानी </span>CJP <span lang="hi" xml:lang="hi">नाम का इंस्टाग्राम अकाउंट अचानक से चर्चा का केंद्र बन गया है। कुछ ही दिनों में इस अकाउंट ने इतनी गति पकड़ ली है कि इनके फॉलोअर्स बड़े राजनीतिक दलों के सोशल मीडिया हैंडल को भी पीछे छोड़ चुके हैं। हाल के आंकड़ों के मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कॉकरोच जनता पार्टी के इंस्टाग्राम फॉलोअर्स की संख्या 2 करोड़ के पार पहुंच गई है। यही वजह है कि सोशल मीडिया यूजर्स और डिजिटल एक्सपर्ट्स सभी इस अकाउंट की ग्रोथ की चर्चा कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि महज पांच दिन में लाखों लोग हर घंटे इस अकाउंट से जुड़े और इसने ट्रेंडिंग लिस्ट में अपनी जगह बना ली।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दिलचस्प बात ये है कि पहले इस अकाउंट ने भारतीय जनता पार्टी (</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">BJP) <span lang="hi" xml:lang="hi">के इंस्टाग्राम हैंडल को फॉलोअर्स में मात दी और अब कांग्रेस के ऑफिशियल अकाउंट को भी पीछे छोड़ दिया है। पूरा घटनाक्रम इतनी तेजी से हुआ कि सोशल मीडिया पर मीम्स और बहसें शुरू हो गईं। शुरूवात में यह अकाउंट व्यंग्य और मीम कंटेंट के लिए बनाया गया था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन अब यह युवाओं के बीच एक वायरल ट्रेंड बन चुका है। इसके पोस्ट में राजनीतिक तंज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सिस्टम पर कटाक्ष और इंटरनेट कल्चर का ऐसा मिश्रण है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे बड़ी तादाद में लोग शेयर कर रहे हैं। कुछ यूजर्स इसे </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">इंटरनेट मूवमेंट</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">तक कह रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हालांकि यह किसी राजनीतिक दल के तौर पर आधिकारिक रूप से रजिस्टर्ड नहीं है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इसी बीच एक नया विवाद भी सामने आया है। </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">CJP <span lang="hi" xml:lang="hi">के फाउंडर अभिजीत ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर कर दावा किया कि उनका </span>X <span lang="hi" xml:lang="hi">अकाउंट भारत में ब्लॉक कर दिया गया है। वीडियो में उन्होंने स्क्रीनशॉट दिखाते हुए कहा कि उनके अकाउंट को </span>X <span lang="hi" xml:lang="hi">प्लेटफॉर्म पर </span>'Withheld in India' <span lang="hi" xml:lang="hi">कर दिया गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि दूसरे देशों में यह अब भी दिखाई दे रहा है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारत में कानूनी मांग या प्लेटफॉर्म की नीति के आधार पर कभी-कभी अकाउंट्स को सीमित किया जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इस मामले में </span>X <span lang="hi" xml:lang="hi">की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अभिजीत का आरोप है कि पहले उनके सोशल मीडिया अकाउंट्स को हैक करने की कोशिश हुई और अब उनका अकाउंट ब्लॉक कर दिया गया। उन्होंने वीडियो में कहा कि उन्होंने कोई गलत गतिविधि नहीं की</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">फिर भी उनके अकाउंट पर कार्रवाई हुई। इस पूरे मामले के बाद सोशल मीडिया पर </span>#CockroachJantaParty <span lang="hi" xml:lang="hi">और </span>#CJP <span lang="hi" xml:lang="hi">हैशटैग तेजी से ट्रेंड करने लगे। कई लोग इसे अभिव्यक्ति की आजादी से जोड़कर देख रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि कुछ यूजर्स का कहना है कि इतनी बड़ी ग्रोथ की जांच होना चाहिए।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सोशल मीडिया एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस अकाउंट की लोकप्रियता में इंस्टाग्राम एल्गोरिदम और वायरल कंटेंट का काफी बड़ा हाथ है। जब कोई पोस्ट कम समय में ज्यादा शेयर और एंगेजमेंट हासिल करती है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो प्लेटफार्म उसे और बड़े ऑडियंस तक पहुंचाने लगता है। </span>CJP <span lang="hi" xml:lang="hi">के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। इसके कई वीडियो और मीम्स लाखों व्यूज पार कर चुके हैं। यही वजह है कि इसकी पहुंच लगातार बढ़ती गई।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हालांकि इतनी तेजी से ग्रोथ को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। कुछ डिजिटल एनालिस्ट्स का मानना है कि ऑर्गेनिक और प्रमोटेड रीच के बीच अंतर साफ नहीं है। फिर भी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह साफ है कि कॉकरोच जनता पार्टी सोशल मीडिया की दुनिया में एक बड़ा नाम बन चुकी है। आने वाले समय में इसकी लोकप्रियता बढ़ेगी या विवाद और गहरा होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस पर सभी की नजरें हैं।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 May 2026 13:57:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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                <title>कॉकरोच जनता पार्टी क्या है? जानिए कौन हैं इसके संस्थापक अभिजीत दीपके</title>
                                    <description><![CDATA[कॉकरोच जनता पार्टी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। जानिए इसके संस्थापक अभिजीत दीपके कौन हैं और कैसे शुरू हुआ यह कैंपेन।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/what-is-cockroach-janata-party-know-who-is-its-founder/article-53970"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/cockroach-janata-party-cjp-abhijeet-dipke.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इन दिनों सोशल मीडिया पर </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">“<span lang="hi" xml:lang="hi">कॉकरोच जनता पार्टी</span>” <span lang="hi" xml:lang="hi">या </span>CJP <span lang="hi" xml:lang="hi">नाम तेजी से चर्चा का विषय बन गया है। शुरू में इसे लोग बस एक मीम या मजाक समझ रहे थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन कुछ ही दिनों में ये ऑनलाइन कैंपेन बड़ा सुर्खियों में आ गया। इंस्टाग्राम पर इसके लाखों फॉलोअर्स हो गए हैं और हजारों लोग अपनी पहचान इसके सदस्य के रूप में बता रहे हैं। ये तब और ज्यादा चर्चा में आया जब सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने युवाओं पर कुछ टिप्पणी की</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। इसके बाद </span>“<span lang="hi" xml:lang="hi">कॉकरोच जनता पार्टी</span>” <span lang="hi" xml:lang="hi">नाम से एक व्यंग्यात्मक डिजिटल मुहिम चालू हुई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसने देखते ही देखते अपनी प्रभावी ऑनलाइन उपस्थिति बना ली।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके हैं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर से ताल्लुक रखते हैं। कहा जा रहा है कि उन्होंने पुणे में पढ़ाई की और कुछ समय आम आदमी पार्टी की कम्युनिकेशन टीम के साथ काम किया। फिर वे अमेरिका गए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां उन्होंने बोस्टन यूनिवर्सिटी से अपनी पढ़ाई पूरी की। अभिजीत के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ये पूरा कैंपेन अचानक पैदा हुए गुस्से और निराशा का नतीजा है। जब उन्होंने देखा कि सोशल मीडिया पर युवाओं का वर्णन </span>“<span lang="hi" xml:lang="hi">कॉकरोच</span>” <span lang="hi" xml:lang="hi">और </span>“<span lang="hi" xml:lang="hi">परजीवी</span>” <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे शब्दों से हो रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उन्हें लगा कि उन्हें इस पर व्यंग्य के जरिए प्रतिक्रिया देनी चाहिए।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि मजेदार तरीके से </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">“<span lang="hi" xml:lang="hi">कॉकरोच जनता पार्टी</span>” <span lang="hi" xml:lang="hi">नाम का ऑनलाइन प्लेटफार्म शुरू किया। शुरूआत में ये सिर्फ मीम और पैरोडी पेज था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन युवाओं का रिस्पॉन्स उससे कहीं ज्यादा बड़ा निकला। उन्होंने बताया कि पार्टी में शामिल होने की </span>“<span lang="hi" xml:lang="hi">पात्रता</span>” <span lang="hi" xml:lang="hi">भी पूरी तरह से व्यंग्यात्मक थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे बेरोजगार होना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लगातार ऑनलाइन रहना या सिस्टम से निराश होना। सोशल मीडिया पर यही बात तेजी से वायरल हो गई और हजारों लोग इससे जुड़ने लगे।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कुछ ही दिनों में इस मुहिम ने डिजिटल स्पेस में अपनी एक अलग पहचान बना ली। इंस्टाग्राम पर इसके फॉलोअर्स की संख्या लाखों में पहुंच गई। वेबसाइट पर भी बड़ी संख्या में लोगों ने रजिस्ट्रेशन करवा लिया। सोशल मीडिया यूजर्स खासकर इसके मीम्स</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">राजनीतिक कटाक्ष और सिस्टम पर किए जा रहे व्यंग्य को शेयर कर रहे हैं। युवाओं के बीच इसकी लोकप्रियता इसलिए भी बढ़ी क्योंकि इसमें उनकी निराशा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बेरोजगारी और वर्तमान राजनीति के प्रति नाराजगी साफ झलक रही है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कॉकरोच जनता पार्टी का घोषणापत्र भी सोशल मीडिया पर काफी शेयर हो रहा है। इसमें न्यायपालिका की स्वतंत्रता</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">महिलाओं के प्रतिनिधित्व और युवाओं की राजनीति में भागीदारी जैसे मुद्दों का जिक्र किया गया है। अभिजीत दीपके का कहना है कि ये सिर्फ मजाक नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि युवाओं की निराशा का प्रतीक बन चुका है। पर अभी तक ये कोई आधिकारिक राजनीतिक पार्टी नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और न ही चुनाव आयोग में इसका रजिस्ट्रेशन हुआ है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सोशल मीडिया एक्सपर्ट्स का मानना है कि </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">CJP <span lang="hi" xml:lang="hi">की तेजी से बढ़ती लोकप्रियता के पीछे वायरल एल्गोरिदम और युवा सहभागिता बड़ा कारण है। जब कोई सामग्री कम समय में बड़े पैमाने पर शेयर होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो प्लेटफार्म उसे और ज्यादा लोगों तक पहुंचाने लगता है। यही वजह है कि कॉकरोच जनता पार्टी का कंटेंट लगातार ट्रेंड कर रहा है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस पूरे अभियान को लेकर अब राजनीतिक और सामाजिक बहस भी शुरू हो चुकी है। कुछ लोग इसे युवाओं की आवाज मानते हैं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि कुछ इसे बस एक इंटरनेट ट्रेंड बता रहे हैं। लेकिन इतना तो है कि कॉकरोच जनता पार्टी ने सोशल मीडिया की दुनिया में एक खास पहचान बनाई है और फिलहाल इसकी चर्चा जोरों पर है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 May 2026 13:57:18 +0530</pubDate>
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