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                <title>मध्य प्रदेश - दैनिक जागरण</title>
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                <description>मध्य प्रदेश RSS Feed</description>
                
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                <title>भाभरा में किसानों को सीएम डॉ. मोहन यादव ने किया सम्मानित, प्राकृतिक खेती से बढ़ी आय और नई उम्मीदें</title>
                                    <description><![CDATA[बलराम कृषि महोत्सव में किसानों ने साझा किए अनुभव, सरकारी योजनाओं से मिली मदद के साथ कम बारिश पर जताई चिंता]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/cm-dr-mohan-yadav-honored-the-farmers-in-bhabhra-increase/article-59598"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/mohan-yadav-(1)1.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">आलीराजपुर जिले के भाभरा में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव किसानों के लिए खास अवसर बना। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के हाथों सम्मान पाने वाले किसानों ने खेती में किए गए अपने प्रयोग, प्राकृतिक कृषि से मिली सफलता और सरकारी योजनाओं से मिले सहयोग के अनुभव साझा किए। किसी किसान ने केसर आम के बड़े बगीचे को अपनी आय का मजबूत जरिया बनाया है तो कोई कम पानी में तैयार होने वाले मोटे अनाज और दलहन को प्राथमिकता दे रहा है। किसानों ने सम्मान मिलने पर खुशी जताने के साथ सिंचाई, फसल सुरक्षा, बेहतर बाजार, प्राकृतिक खेती के प्रमाणीकरण और कम बारिश से होने वाले संभावित नुकसान जैसे मुद्दे भी सामने रखे।</p>
<p>कांदा क्षेत्र के किसान यशपाल सिंह प्राकृतिक पद्धति से केसर आम का उत्पादन कर रहे हैं। करीब 18 एकड़ में फैले उनके बगीचे में एक हजार से अधिक आम के पेड़ हैं। उन्होंने अपनी खेती की शुरुआत सरकारी सहयोग से की थी। शुरुआती दौर में कृषि विभाग से करीब 400 पौधे उपलब्ध कराए गए और आर्थिक सहायता भी मिली। समय के साथ उन्होंने बगीचे का विस्तार किया और आज उनके यहां तैयार होने वाले आम दूसरे राज्यों तक पहुंच रहे हैं। यशपाल के मुताबिक उनके उत्पाद की मांग ऐसी है कि कई खरीदार सीधे उनके क्षेत्र तक पहुंच जाते हैं। सोलर पंप योजना से सिंचाई व्यवस्था में भी सहायता मिली है। अब उनकी कोशिश प्राकृतिक खेती का प्रमाणपत्र हासिल करने की है, ताकि भविष्य में अपने केसर आम को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की संभावना तलाश सकें।</p>
<p>जोबट क्षेत्र के कांदा गांव के विजय सिंह भी केसर आम की बागवानी को आय का प्रमुख जरिया बना चुके हैं। करीब नौ एकड़ जमीन पर उनके एक हजार से अधिक आम के पेड़ हैं। बागवानी विकसित करने के दौरान उन्हें विभाग से पौधों और आर्थिक सहायता का लाभ मिला। विजय के अनुसार इस वर्ष उन्होंने करीब आठ लाख रुपये मूल्य के आम बेचे और अधिकांश उपज स्थानीय स्तर पर ही आसानी से बिक गई। इससे उन्हें दूर के बाजारों तक फसल पहुंचाने का अतिरिक्त खर्च नहीं उठाना पड़ा। हालांकि उन्होंने बागानों की सुरक्षा को बड़ी जरूरत बताया। उनका कहना है कि यदि तार फेंसिंग जैसी सुविधा के लिए अतिरिक्त सहायता उपलब्ध हो तो पेड़ों और तैयार फसल को नुकसान से बचाना आसान होगा।</p>
<p>जानिया-केल्दी क्षेत्र की किसान माल मोटे अनाज और दलहन आधारित खेती करती हैं। करीब दो से तीन हेक्टेयर कृषि भूमि पर ज्वार, बाजरा और मक्का के साथ तुअर तथा उड़द जैसी फसलें उगाई जाती हैं। इस वर्ष अपेक्षाकृत कम बारिश के कारण किसानों की चिंता बढ़ी है, लेकिन मोटे अनाज की कई फसलें कम पानी में भी तैयार हो सकती हैं। इसी कारण ऐसे क्षेत्रों में इन फसलों को बेहतर विकल्प माना जा रहा है। किसान का कहना है कि मौसम की मार से फसल खराब होने की स्थिति में फसल बीमा से मिलने वाली सहायता आर्थिक नुकसान को कुछ हद तक कम करती है। कृषि विभाग के अधिकारी भी समय-समय पर खेती की तकनीक और योजनाओं से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराते हैं।</p>
<p>औजड़ की किसान पूनम सिंह करीब 1.30 एकड़ भूमि पर अलग-अलग फसलों की खेती करती हैं। उनके खेत में कपास, ज्वार, बाजरा, मूंगफली और सोयाबीन जैसी फसलें ली जाती हैं। मौजूदा खरीफ सीजन में उन्होंने कपास और बाजरा बोया है। कम वर्षा के कारण उत्पादन प्रभावित होने की आशंका जरूर बनी हुई है, लेकिन उनका कहना है कि सरकारी सहायता योजनाएं किसानों को जोखिम से निपटने में मदद करती हैं। कृषि उपज की बिक्री मंडी के जरिए होने और पात्रता के अनुसार विभिन्न योजनाओं का लाभ मिलने से खेती को जारी रखने में सहारा मिलता है।</p>
<p>पूनम सिंह के मुताबिक कृषि विभाग से उन्हें जैविक और प्राकृतिक खाद के इस्तेमाल के साथ आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी भी मिलती रहती है। छोटे किसानों के लिए केवल आर्थिक सहायता ही नहीं, बल्कि सही समय पर तकनीकी मार्गदर्शन भी महत्वपूर्ण है। मिट्टी की जरूरत के अनुसार फसल चुनने, प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने और खेती की लागत घटाने से जुड़ी जानकारी किसानों की उत्पादकता बढ़ाने में मदद कर सकती है।</p>
<p>सोरवा के किसान मुकेश करीब नौ एकड़ जमीन पर सोयाबीन, उड़द, मूंगफली और कपास की खेती करते हैं। वे प्राकृतिक खेती की दिशा में भी काम कर रहे हैं। उनके अनुसार विभाग की ओर से खाद-बीज और कृषि पद्धतियों से संबंधित मार्गदर्शन मिलता है। प्रशिक्षण और सलाह के जरिए किसानों को बदलते मौसम के अनुसार फसल प्रबंधन के तरीके समझाए जाते हैं। इस वर्ष कम बारिश उनके लिए भी चिंता का विषय बनी हुई है। यदि पर्याप्त वर्षा नहीं हुई और सूखे जैसी परिस्थिति बनी तो खरीफ की पैदावार प्रभावित हो सकती है। ऐसे में उन्होंने संभावित नुकसान की स्थिति में किसानों के लिए पर्याप्त आर्थिक सहायता की जरूरत बताई।</p>
<p>आमखूंट के किसान नौरतन सीमित कृषि भूमि पर प्राकृतिक तरीके से खेती कर रहे हैं। उनके पास करीब ढाई से तीन एकड़ जमीन है, जिसमें धान, ज्वार, बाजरा, उड़द और तुअर जैसी फसलें ली जाती हैं। मौजूदा मौसम में कम वर्षा को देखते हुए उन्होंने उड़द को प्राथमिकता दी है, क्योंकि यह अपेक्षाकृत कम पानी में तैयार होने वाली फसलों में शामिल है। उनका कहना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा है, लेकिन किसानों के लिए अपनी उपज का बेहतर मूल्य सुनिश्चित होना भी बेहद जरूरी है। उत्पादन लागत और मौसम के बढ़ते जोखिम के बीच उचित कीमत किसानों की आय के लिए महत्वपूर्ण आधार बनती है।</p>
<p>नानपुर की किसान गनबाई भी प्राकृतिक खेती से जुड़ी हैं। करीब दो एकड़ खेत में वे मक्का, ज्वार, बाजरा, मूंगफली और उड़द जैसी फसलें उगाती हैं। उन्हें भी मुख्यमंत्री के हाथों सम्मानित किए जाने की जानकारी मिली थी और उन्होंने कार्यक्रम में शामिल होने की तैयारी कर ली थी, लेकिन परिवार में शोक होने के कारण वे उपस्थित नहीं हो सकीं। इसके बावजूद किसान स्तर पर किए जा रहे काम को पहचान मिलने को उन्होंने महत्वपूर्ण बताया।</p>
<p>गनबाई के अनुसार प्राकृतिक खेती के लिए उन्हें विभागीय स्तर पर खाद और बीज से जुड़ी सहायता मिलती है। कृषि विज्ञान केंद्र के माध्यम से प्रशिक्षण कार्यक्रमों में किसानों को बेहतर कृषि तकनीक, प्राकृतिक संसाधनों के इस्तेमाल और फसल प्रबंधन की जानकारी दी जाती है। कम बारिश के मौजूदा हालात को देखते हुए उनके जैसे छोटे किसान ऐसी फसलों पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं, जिनकी पानी की जरूरत अपेक्षाकृत कम होती है।</p>
<p>भाभरा के बलराम कृषि महोत्सव में सामने आए किसानों के अनुभवों में बागवानी से लेकर मोटे अनाज और प्राकृतिक खेती तक अलग-अलग कृषि मॉडल दिखाई दिए। केसर आम की व्यावसायिक खेती करने वाले किसान अब दूसरे राज्यों के बाद विदेशी बाजार तक पहुंच बनाने की तैयारी करना चाहते हैं। वहीं छोटे और सीमांत किसान कम पानी वाली फसलों, फसल बीमा, कृषि प्रशिक्षण और सरकारी सहायता को खेती के जोखिम कम करने का जरिया मान रहे हैं। किसानों ने तार फेंसिंग, प्राकृतिक उत्पादों के प्रमाणीकरण, बेहतर उपज मूल्य और मौसम से होने वाले नुकसान की स्थिति में पर्याप्त सहायता जैसी जरूरतें भी सामने रखीं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 19:05:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Priyanka ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>रीवा में रिटायर्ड शिक्षक के घर बड़ी चोरी, परिवार सोता रहा और दीवार तोड़कर जेवर-नकदी ले गए चोर</title>
                                    <description><![CDATA[हरिहरपुर गांव में आधी रात वारदात, पीछे की दीवार तोड़कर घर में घुसे बदमाश; सुबह बिखरा सामान देखकर परिवार को लगी भनक]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/vindhya-rewa/big-theft-in-the-house-of-a-retired-teacher-in/article-59569"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/rewa-theft-news.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">जिले के सगरा थाना क्षेत्र के हरिहरपुर गांव में एक रिटायर्ड शिक्षक के घर रात के अंधेरे में बड़ी चोरी का मामला सामने आया है। मंगलवार और बुधवार की दरम्यानी रात अज्ञात बदमाश मकान के पिछले हिस्से की दीवार तोड़कर अंदर दाखिल हुए। उस वक्त परिवार के सदस्य घर में सो रहे थे और किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी। चोर घर के उस हिस्से तक पहुंच गए, जहां सोने-चांदी के जेवर और नकदी रखी थी। अलमारी और दूसरे सामान को खंगालने के बाद बदमाश कीमती सामान लेकर निकल गए। सुबह परिवार की नींद खुली तो कमरे की हालत देखकर चोरी का पता चला। वारदात की सूचना मिलने के बाद सगरा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल की जांच शुरू की। चोरी गए जेवर और नकदी की सही कीमत का आकलन अभी किया जा रहा है, हालांकि परिवार की ओर से नुकसान काफी बड़ा होने की बात सामने आई है।</p>
<p>हरिहरपुर गांव निवासी लाल बहादुर सिंह शासकीय शिक्षक के पद से सेवानिवृत्त हैं। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक चोरों ने उनके मकान को पहले से देखकर निशाना बनाया हो सकता है। बदमाश मुख्य दरवाजे से अंदर नहीं आए, बल्कि मकान के पीछे का रास्ता चुना। यहां दीवार में सेंध लगाकर घर के भीतर प्रवेश किया गया। इससे आशंका है कि आरोपियों को मकान की बनावट और अंदर रखे सामान के बारे में कुछ जानकारी रही होगी, हालांकि पुलिस ने फिलहाल इसकी पुष्टि नहीं की है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि वारदात अचानक की गई या इसके पीछे पहले से रेकी की गई थी।</p>
<p>घटना के समय मकान में परिवार के सदस्य मौजूद थे। सभी अपने-अपने कमरों में सो रहे थे। इसी दौरान चोर बेहद सावधानी से अंदर पहुंचे और बिना ज्यादा आवाज किए सामान तलाशते रहे। परिवार को रात में किसी संदिग्ध गतिविधि का अहसास नहीं हुआ। बताया जा रहा है कि बदमाश उस कमरे तक पहुंच गए जहां परिवार की तीन महिलाओं और एक पुरुष से संबंधित सोने-चांदी के आभूषण तथा नकदी रखी हुई थी। अलमारी और सामान खंगाला गया। कीमती जेवर और नकदी हाथ लगने के बाद आरोपी उसी रास्ते से निकल गए।</p>
<p>सुबह परिवार के सदस्य जागे तो घर के अंदर सामान अस्त-व्यस्त दिखाई दिया। अलमारी खुली हुई थी और कई चीजें अपनी जगह से गायब थीं। पीछे की तरफ देखने पर दीवार टूटी मिली। तभी साफ हुआ कि रात में घर में चोरी हुई है। अचानक इतनी बड़ी वारदात का पता चलते ही परिवार ने आसपास के लोगों को जानकारी दी और सगरा थाना पुलिस को सूचना भेजी गई। गांव में भी घटना की खबर तेजी से फैल गई।</p>
<p>पुलिस टीम मौके पर पहुंची और सबसे पहले उस जगह का निरीक्षण किया, जहां से बदमाशों के घर में दाखिल होने की बात सामने आई है। मकान के अंदर भी उन स्थानों को देखा गया जहां सामान रखा हुआ था। पुलिस उपलब्ध निशानों और दूसरे संभावित साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। परिवार के सदस्यों से भी पूरी जानकारी ली जा रही है कि कौन-कौन से जेवर और कितनी नकदी घर में रखी थी।</p>
<p>चोरी गए सामान का अंतिम आंकड़ा सामने आने के बाद ही नुकसान की वास्तविक कीमत स्पष्ट हो सकेगी। शुरुआती जानकारी में बड़ी मात्रा में आभूषण और नकदी चोरी होने की बात कही जा रही है। पुलिस सूची तैयार कर यह भी पता लगा रही है कि जेवर कितने पुराने थे और उनका अनुमानित वर्तमान मूल्य कितना है। परिवार के सदस्यों द्वारा दी गई जानकारी को भी जांच में शामिल किया जा रहा है।</p>
<p>इस वारदात में सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि घर में कई लोगों की मौजूदगी के बावजूद बदमाश चोरी करके निकल गए और किसी की नींद नहीं खुली। पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि चोरों ने वारदात के दौरान किस तरीके का इस्तेमाल किया और उन्हें घर के अंदर कितना समय लगा। मकान में प्रवेश के लिए दीवार तोड़ना और फिर सीधे कीमती सामान रखे स्थान तक पहुंचना जांच का महत्वपूर्ण बिंदु माना जा रहा है।</p>
<p>आसपास रहने वाले ग्रामीणों से भी पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि घटना वाली रात गांव में किसी अजनबी व्यक्ति या संदिग्ध वाहन को देखा गया था या नहीं। वारदात से पहले क्षेत्र में बाहरी लोगों की आवाजाही की जानकारी भी जुटाई जा रही है। आसपास कहीं सीसीटीवी कैमरे लगे होने की स्थिति में उनकी रिकॉर्डिंग खंगाली जा सकती है, जिससे संदिग्धों के आने-जाने का कोई सुराग मिल सके।</p>
<p>जांच टीम स्थानीय स्तर पर पहले हुई चोरी की घटनाओं और उनमें शामिल आरोपियों का रिकॉर्ड भी देख सकती है। आमतौर पर सेंधमारी की ऐसी वारदातों में पुलिस पुराने अपराधियों और हाल में जेल से बाहर आए आरोपियों की गतिविधियों की जानकारी जुटाती है। चोरी के तरीके को पुरानी वारदातों से मिलाकर देखने से भी गिरोह के बारे में सुराग मिलने की संभावना रहती है।</p>
<p>बदमाशों ने मुख्य प्रवेश द्वार छोड़कर मकान की पिछली दीवार को निशाना बनाया। गांव के मकानों में रात के समय पीछे के हिस्से में लोगों की आवाजाही कम रहती है। आशंका है कि इसी का फायदा उठाकर चोरों ने दीवार में रास्ता बनाया। घर में दाखिल होने के बाद वे ऐसे हिस्से तक पहुंचे जहां परिवार का कीमती सामान रखा था। पुलिस के लिए यह पता लगाना भी अहम होगा कि आरोपियों को इस कमरे की जानकारी कैसे मिली।</p>
<p>परिवार की ओर से चोरी हुए आभूषणों का विवरण पुलिस को दिया जा रहा है। तीन महिलाओं और एक पुरुष के जेवर चोरी होने की प्रारंभिक जानकारी है। इनमें सोने और चांदी के आभूषण शामिल बताए जा रहे हैं। नकदी भी गायब है। सही मूल्यांकन के बाद चोरी की कुल रकम को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी। शुरुआती स्तर पर नुकसान लाखों में होने की आशंका जताई जा रही है, लेकिन आधिकारिक आंकड़ा जांच और सूची पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।</p>
<p>घटना के बाद हरिहरपुर और आसपास के क्षेत्र में भी सुरक्षा को लेकर चर्चा बढ़ गई है। घर में लोगों की मौजूदगी के दौरान सेंध लगाकर चोरी होना गंभीर माना जा रहा है। पुलिस ने फिलहाल अज्ञात आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। संदिग्ध लोगों की जानकारी जुटाने के साथ संभावित रास्तों की पड़ताल की जा रही है, जिनका इस्तेमाल बदमाशों ने गांव तक पहुंचने और वारदात के बाद भागने में किया होगा।</p>
<p>पुलिस चोरी हुए आभूषणों की बिक्री की संभावना को देखते हुए स्थानीय स्तर पर भी जानकारी जुटा सकती है। अक्सर चोरी के बाद आरोपी जेवर बेचने या गलाने की कोशिश करते हैं। ऐसे में सराफा कारोबार से जुड़े लोगों को संदिग्ध गतिविधि दिखाई देने पर जानकारी देने के लिए सतर्क किया जा सकता है। मोबाइल लोकेशन और तकनीकी साक्ष्य भी जांच में उपयोगी हो सकते हैं, यदि पुलिस को किसी संदिग्ध व्यक्ति के बारे में शुरुआती सुराग मिलता है।</p>
<p>सगरा थाना पुलिस के सामने अब वारदात में शामिल लोगों की पहचान सबसे बड़ी चुनौती है। मकान में प्रवेश के तरीके, चोरी किए गए सामान और घटना के समय को आधार बनाकर जांच आगे बढ़ाई जा रही है। परिवार और आसपास के लोगों से मिली जानकारी को जोड़ा जा रहा है। चोरी गए जेवर और नकदी की विस्तृत सूची तैयार होने के बाद मामले में नुकसान की वास्तविक राशि भी दर्ज की जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>विंध्य/रीवा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 14:04:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Priyanka ]]></dc:creator>
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                <title>हॉकी विश्व कप के लिए टीम इंडिया में एमपी के विवेक सागर, मिडफील्ड में संभालेंगे जिम्मेदारी</title>
                                    <description><![CDATA[15 अगस्त से बेल्जियम-नीदरलैंड में विश्व कप, भारत के पूल में इंग्लैंड, पाकिस्तान और वेल्स]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/mps-vivek-sagar-will-take-charge-in-the-midfield-of/article-59568"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/vivek-sagar-prasad.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">मध्यप्रदेश के हॉकी खिलाड़ी विवेक सागर प्रसाद एक बार फिर बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करते नजर आएंगे। मध्यप्रदेश हॉकी अकादमी से जुड़े विवेक सागर को एफआईएच हॉकी विश्व कप 2026 के लिए भारतीय पुरुष टीम में जगह मिली है। विश्व कप 15 से 30 अगस्त तक बेल्जियम और नीदरलैंड में खेला जाना है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लंबे समय से भारतीय मिडफील्ड का हिस्सा रहे विवेक पर टूर्नामेंट में खेल की रफ्तार संभालने और आक्रमण व डिफेंस के बीच तालमेल बनाने की अहम जिम्मेदारी रहेगी। एफआईएच के रिकॉर्ड में भी विवेक सागर को भारत के सक्रिय मिडफील्डर के रूप में सूचीबद्ध किया गया है, जबकि विश्व कप का आयोजन 15 से 30 अगस्त के बीच निर्धारित है।</p>
<p>भारतीय टीम इस बार हरमनप्रीत सिंह की कप्तानी में विश्व कप में उतरेगी। टीम मैनेजमेंट ने अनुभवी खिलाड़ियों के साथ युवा चेहरों का संतुलन बनाने की कोशिश की है। मनप्रीत सिंह जैसे अनुभवी खिलाड़ी भी टीम का हिस्सा हैं। मुख्य कोच क्रेग फुल्टन की रणनीति में मिडफील्ड की भूमिका काफी महत्वपूर्ण रहने वाली है और इसी क्षेत्र में विवेक सागर का अनुभव भारत के काम आ सकता है। तेज पासिंग, गेंद पर नियंत्रण और दबाव के समय खेल की दिशा बदलने की क्षमता उनकी प्रमुख खूबियों में गिनी जाती है।</p>
<p>मध्यप्रदेश के लिए विवेक का चयन खास माना जा रहा है। प्रदेश की हॉकी व्यवस्था से निकलकर उन्होंने भारतीय टीम तक का लंबा सफर तय किया है और ओलंपिक सहित कई बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में देश का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। जूनियर स्तर पर भी उन्होंने भारतीय टीम की कप्तानी की थी। एफआईएच के रिकॉर्ड के अनुसार 2021 जूनियर विश्व कप में विवेक भारतीय टीम के कप्तान रहे थे। इससे पहले 2018 यूथ ओलंपिक में भी उन्होंने भारतीय टीम की अगुवाई की थी, जहां भारत ने रजत पदक हासिल किया था।</p>
<p>विश्व कप में भारत को पूल-डी में रखा गया है। यहां टीम का सामना वेल्स, इंग्लैंड और पाकिस्तान से होगा। भारतीय टीम अपना अभियान 15 अगस्त को वेल्स के खिलाफ शुरू करेगी। इसके बाद 17 अगस्त को इंग्लैंड से मुकाबला होगा। पूल चरण का सबसे चर्चित मैच 19 अगस्त को भारत और पाकिस्तान के बीच खेला जाना है। इस मुकाबले पर दोनों देशों के हॉकी प्रशंसकों की खास नजर रहने की उम्मीद है।</p>
<p>पूल चरण में शुरुआती तीन मुकाबले भारत के आगे के सफर की दिशा तय करेंगे। वेल्स के खिलाफ मजबूत शुरुआत के बाद इंग्लैंड जैसी चुनौतीपूर्ण टीम से मुकाबला आसान नहीं होगा। पाकिस्तान के खिलाफ मैच में खेल के साथ दबाव संभालना भी अहम रहेगा। ऐसे मैचों में अनुभवी खिलाड़ियों की भूमिका बढ़ जाती है और विवेक सागर जैसे मिडफील्डर से गेंद को नियंत्रित रखते हुए टीम की लय बनाए रखने की उम्मीद होगी।</p>
<p>विवेक सागर भारतीय हॉकी में कम उम्र से ही पहचान बनाने वाले खिलाड़ियों में शामिल रहे हैं। मध्यप्रदेश से निकलकर अंतरराष्ट्रीय हॉकी तक पहुंचे विवेक ने जूनियर और सीनियर दोनों स्तरों पर लगातार अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। उनकी सबसे बड़ी ताकत मैदान के बीच में तेजी से खेल को पढ़ना और जरूरत के हिसाब से आक्रामक तथा रक्षात्मक भूमिका बदलना रही है।</p>
<p>मध्यप्रदेश हॉकी अकादमी के लिए भी उनका विश्व कप टीम में चयन एक और बड़ी उपलब्धि है। प्रदेश में पिछले वर्षों में हॉकी के लिए अकादमी स्तर पर खिलाड़ियों को प्रशिक्षण, फिटनेस और प्रतियोगिताओं का एक्सपोजर देने पर काम हुआ है। यहां से तैयार हुए कई खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में जगह बनाई है। विवेक सागर इस व्यवस्था से निकलकर भारतीय हॉकी के प्रमुख नामों में शामिल हुए हैं।</p>
<p>विश्व कप में भारत की कोशिश शुरुआती मैचों से ही अपनी लय पकड़ने की होगी। बड़े टूर्नामेंट में पेनल्टी कॉर्नर के साथ मिडफील्ड में गेंद पर कब्जा और विपक्षी टीम के काउंटर अटैक को रोकना बेहद अहम रहता है। कप्तान हरमनप्रीत सिंह पर ड्रैग फ्लिक और डिफेंस की बड़ी जिम्मेदारी होगी, जबकि मिडफील्ड में विवेक सहित दूसरे खिलाड़ियों को आक्रमण के मौके तैयार करने होंगे।</p>
<p>एफआईएच हॉकी विश्व कप 2026 का आयोजन बेल्जियम और नीदरलैंड संयुक्त रूप से कर रहे हैं। दुनिया की शीर्ष हॉकी टीमें खिताब के लिए मैदान में उतरेंगी। भारतीय टीम के सामने पूल चरण से ही कड़ी चुनौती रहेगी, ऐसे में पहले तीन मुकाबलों में अंक जुटाना महत्वपूर्ण होगा। 15 अगस्त को वेल्स के खिलाफ मुकाबले के साथ भारत का अभियान शुरू होगा और चार दिन बाद पाकिस्तान के खिलाफ हाई-वोल्टेज मैच खेला जाएगा।</p>
<p>भोपाल और मध्यप्रदेश के हॉकी जगत की नजर खास तौर पर विवेक सागर के प्रदर्शन पर रहेगी। भारतीय टीम में उनकी भूमिका केवल एक अनुभवी खिलाड़ी की नहीं, बल्कि मैदान के बीच खेल की गति तय करने वाले मिडफील्डर की भी होगी। बड़े मुकाबलों का अनुभव उनके पक्ष में है और टीम प्रबंधन विश्व कप में इसी अनुभव का फायदा उठाना चाहेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 13:47:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Priyanka ]]></dc:creator>
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                <title>सावन में ओंकारेश्वर दर्शन की व्यवस्था बदलेगी, एंट्री से ट्रैफिक तक नए नियम</title>
                                    <description><![CDATA[श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को देखते हुए प्रशासन की तैयारी, अलग प्रवेश-निकासी मार्ग और वन-वे ट्रैफिक व्यवस्था होगी लागू]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/omkareshwar-darshan-system-will-change-in-sawan-new-rules-from/article-59566"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/omkareshwar-darshan-rules.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">सावन के दौरान मध्यप्रदेश के प्रसिद्ध श्री ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को इस बार बदली हुई व्यवस्था के तहत दर्शन करने होंगे। बड़ी संख्या में भक्तों के आने की संभावना को देखते हुए मंदिर में प्रवेश और निकासी के रास्ते अलग किए जा रहे हैं। इसके साथ ही ओंकारेश्वर नगर की यातायात व्यवस्था में भी बदलाव की तैयारी है। सामान्य दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं और शीघ्र दर्शन व प्रोटोकॉल श्रेणी में आने वालों के लिए अलग-अलग रास्ते तय किए जाएंगे। प्रशासन का फोकस मंदिर के आसपास एक ही स्थान पर भीड़ जमा होने से रोकने और श्रद्धालुओं की आवाजाही लगातार बनाए रखने पर है।</p>
<p>ओंकारेश्वर पुलिस कंट्रोल रूम में बुधवार शाम व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासन और पुलिस अधिकारियों की बैठक हुई। कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने मंदिर परिसर से लेकर पार्किंग और प्रमुख रास्तों तक की व्यवस्था की समीक्षा की। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि सावन की भीड़ बढ़ने से पहले जरूरी बदलाव पूरे कर लिए जाएं। प्रस्तावित व्यवस्था अगले दो से तीन दिनों में लागू किए जाने की तैयारी है। मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में सावन में काफी बढ़ जाती है। सोमवार, छुट्टी और विशेष धार्मिक तिथियों पर दबाव और ज्यादा रहता है। इसी वजह से इस बार दर्शन मार्ग को इस तरह तैयार किया जा रहा है कि आने और वापस जाने वाले श्रद्धालु एक ही रास्ते पर आमने-सामने न हों।</p>
<p>नई योजना के मुताबिक सामान्य दर्शन के लिए आने वाले भक्तों को सुखदेव मुनि द्वार की ओर से मंदिर में प्रवेश कराया जाएगा। श्रद्धालु यहां से निर्धारित सीढ़ियों और कतार वाले रास्ते से आगे बढ़ेंगे। मंदिर पहुंचने के बाद उन्हें गर्भगृह से करीब 10 फीट की दूरी से भगवान ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन कराने की व्यवस्था रहेगी। दर्शन पूरा होने के बाद उसी रास्ते से वापस लौटने की अनुमति नहीं होगी। श्रद्धालुओं को चांदी गेट की ओर से बाहर निकाला जाएगा और आगे झूला पुल वाले मार्ग से उनकी निकासी कराई जाएगी। इससे मंदिर की ओर आने और वहां से लौटने वाली भीड़ अलग-अलग दिशा में चल सकेगी।</p>
<p>मंदिर प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती कम जगह में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को संभालने की रहती है। कतार धीमी होने पर पीछे तेजी से भीड़ बढ़ती है और इसका असर पुलों तथा मंदिर की ओर जाने वाले रास्तों तक दिखाई देता है। सावन में ऐसी स्थिति न बने, इसके लिए प्रवेश और निकासी के रास्तों को पहले से नियंत्रित किया जाएगा। बैरिकेडिंग और कतार प्रबंधन की व्यवस्था भी इसी हिसाब से की जाएगी। भीड़ ज्यादा होने पर श्रद्धालुओं को चरणबद्ध तरीके से आगे भेजने की व्यवस्था रखी जा सकती है।</p>
<p>शीघ्र दर्शन और प्रोटोकॉल के जरिए मंदिर पहुंचने वाले लोगों के लिए सामान्य श्रद्धालुओं से अलग रास्ता रहेगा। अभी जिस गेट का इस्तेमाल निकासी के लिए किया जा रहा है, उसे इस श्रेणी के श्रद्धालुओं के प्रवेश मार्ग के रूप में उपयोग करने की तैयारी है। यहां से आने वाले श्रद्धालु दर्शन करने के बाद लकड़ी गेट की ओर से बाहर जाएंगे। अलग रास्ता होने से सामान्य कतार पर अतिरिक्त दबाव कम करने की कोशिश होगी।</p>
<p>शीघ्र दर्शन और प्रोटोकॉल से जुड़े टिकट काउंटर की जगह में भी बदलाव किया जा रहा है। इन्हें ब्रह्मपुरी पार्किंग क्षेत्र में शिफ्ट करने की योजना है। इसका फायदा यह होगा कि टिकट या दूसरी औपचारिकताओं के लिए श्रद्धालुओं को मंदिर के आसपास रुकना नहीं पड़ेगा। प्रशासन चाहता है कि मंदिर के नजदीक पहुंचने के बाद लोगों की आवाजाही लगातार बनी रहे और अनावश्यक भीड़ किसी एक जगह जमा न हो।</p>
<p>सावन की नई व्यवस्था केवल मंदिर परिसर तक सीमित नहीं रहेगी। ओंकारेश्वर नगर में ट्रैफिक को लेकर भी बड़े बदलाव किए जाएंगे। पूरे नगर में वन-वे यातायात व्यवस्था लागू करने की तैयारी है। वाहनों के आने और जाने के रास्तों को अलग रखा जाएगा, ताकि संकरे मार्गों पर जाम की स्थिति न बने। बाहरी वाहनों को सीधे भीड़ वाले प्रमुख क्षेत्रों तक जाने की अनुमति नहीं होगी। उन्हें प्रशासन द्वारा तय पार्किंग स्थलों पर खड़ा कराया जाएगा।</p>
<p>ओंकारेश्वर में सावन के दौरान ट्रैफिक बड़ी चुनौती बन जाता है। देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु निजी कार, बस और दूसरे वाहनों से यहां पहुंचते हैं। एक साथ बड़ी संख्या में वाहन आने से मुख्य मार्ग के साथ नगर के अंदर की सड़कों पर भी दबाव बढ़ जाता है। इस बार वाहनों को पहले ही निर्धारित पार्किंग में रोकने और वहां से श्रद्धालुओं की आगे की आवाजाही को व्यवस्थित करने पर जोर दिया जा रहा है।</p>
<p>वन-वे सिस्टम लागू होने के बाद वाहन चालकों को पुराने रास्ते के बजाय प्रशासन द्वारा निर्धारित रूट का पालन करना होगा। ऐसे में सावन में निजी वाहन से ओंकारेश्वर आने की योजना बना रहे लोगों के लिए मौके पर लगे ट्रैफिक संकेत और पुलिस के निर्देश महत्वपूर्ण होंगे। गलत दिशा से वाहन ले जाने पर वापस लौटना पड़ सकता है। खासकर सोमवार और ज्यादा भीड़ वाले दिनों में यातायात नियंत्रण अधिक सख्त रहने की संभावना है।</p>
<p>ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग नर्मदा नदी के बीच मांधाता पर्वत पर स्थित होने के कारण यहां दर्शन व्यवस्था सामान्य मंदिरों से अलग है। श्रद्धालुओं की आवाजाही पुलों और सीमित रास्तों से होती है। एक साथ अत्यधिक भीड़ होने पर पुलों और मंदिर के आसपास दबाव तेजी से बढ़ सकता है। प्रशासन इसी वजह से मंदिर तक पहुंचने से पहले ही श्रद्धालुओं और वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित करने की योजना बना रहा है।</p>
<p>सावन में भगवान शिव के दर्शन और नर्मदा स्नान के लिए मध्यप्रदेश के अलावा महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश सहित दूसरे राज्यों से भी श्रद्धालु ओंकारेश्वर पहुंचते हैं। कई श्रद्धालु नर्मदा परिक्रमा और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए भी आते हैं। सोमवार को सुबह से ही दर्शनार्थियों की कतार लंबी हो जाती है। प्रशासन ऐसे दिनों के लिए अतिरिक्त पुलिस बल, बैरिकेडिंग और भीड़ नियंत्रण व्यवस्था तैयार रखने पर काम कर रहा है।</p>
<p>नई दर्शन व्यवस्था लागू होने के बाद सामान्य श्रद्धालुओं को सुखदेव मुनि द्वार की दिशा में जाना होगा। दर्शन के बाद चांदी गेट और झूला पुल मार्ग से बाहर निकलना होगा। शीघ्र दर्शन और प्रोटोकॉल वाले श्रद्धालुओं का प्रवेश अलग गेट से कराया जाएगा और उनकी वापसी लकड़ी गेट से होगी। इस तरह दोनों श्रेणियों की कतारों को अलग रखकर मंदिर परिसर में क्रॉस मूवमेंट कम करने की योजना बनाई गई है।</p>
<p>प्रशासन ने संबंधित विभागों को बदलाव लागू करने से पहले सभी जरूरी तैयारियां पूरी करने को कहा है। इसमें प्रवेश और निकासी मार्ग पर संकेतक लगाने, बैरिकेडिंग, पुलिस बल की तैनाती, पार्किंग व्यवस्था और टिकट काउंटर स्थानांतरण जैसे काम शामिल हैं। श्रद्धालुओं को भी मौके पर तैनात पुलिस और मंदिर कर्मचारियों के बताए रास्ते का इस्तेमाल करना होगा।</p>
<p>सावन के शुरुआती दिनों में नई व्यवस्था की वास्तविक परीक्षा होगी। श्रद्धालुओं की संख्या के हिसाब से प्रशासन जरूरत पड़ने पर व्यवस्था में बदलाव भी कर सकता है। मंदिर परिसर में भीड़ बढ़ने की स्थिति में कतार को अलग-अलग स्थानों पर नियंत्रित किया जा सकता है। पार्किंग भरने पर वाहनों को दूसरे निर्धारित स्थानों की तरफ भेजने की तैयारी भी यातायात योजना का हिस्सा रहेगी।</p>
<p>ओंकारेश्वर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए सबसे बड़ा बदलाव यह रहेगा कि मंदिर पहुंचने के बाद पुराने परिचित रास्ते से सीधे प्रवेश संभव नहीं होगा। दर्शन की श्रेणी के हिसाब से तय प्रवेश द्वार का उपयोग करना पड़ेगा। वाहन से आने वाले लोगों को भी नगर के भीतर मनमाने रास्ते से जाने के बजाय वन-वे व्यवस्था का पालन करना होगा। प्रशासन नई व्यवस्था को अगले कुछ दिनों में जमीन पर उतारने की तैयारी कर रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 13:35:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Priyanka ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>राजा रघुवंशी हत्याकांड में सोनम को बड़ा झटका, सुप्रीम कोर्ट ने जमानत रद्द कर सरेंडर का दिया आदेश</title>
                                    <description><![CDATA[तीन हफ्ते में सरेंडर का निर्देश, छह महीने में ट्रायल पूरा नहीं हुआ तो दोबारा जमानत मांग सकेगी सोनम]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/big-blow-to-sonam-in-raja-raghuvanshi-murder-case-supreme/article-59564"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/sonam-raghuvanshi-bail-cancelled.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">मेघालय में हनीमून के दौरान इंदौर के कारोबारी राजा रघुवंशी की हत्या के चर्चित मामले में आरोपी पत्नी सोनम रघुवंशी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने गुरुवार, 23 जुलाई को सोनम को मिली जमानत रद्द कर दी और उसे तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का निर्देश दिया। इसके साथ ही अदालत ने ट्रायल को छह महीने के भीतर पूरा करने को कहा है। अगर इस अवधि में मुकदमे की सुनवाई पूरी नहीं होती है तो सोनम दोबारा जमानत के लिए आवेदन कर सकेगी। सोनम पर अपने पति राजा रघुवंशी की हत्या की साजिश में शामिल होने का आरोप है। मामला मई 2025 का है, जब शादी के कुछ ही दिन बाद दोनों हनीमून के लिए मेघालय गए थे। सुप्रीम कोर्ट का ताजा आदेश मेघालय सरकार की उस चुनौती पर आया, जिसमें सोनम को मिली जमानत रद्द करने की मांग की गई थी। अदालत ने आरोपों की गंभीरता को भी ध्यान में रखा।</p>
<p>सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सोनम को अब तय समय के भीतर संबंधित अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण करना होगा। इसके बाद उसे दोबारा न्यायिक हिरासत में भेजे जाने का रास्ता साफ हो गया है। अदालत ने जमानत के सामान्य सिद्धांत को ध्यान में रखते हुए भी मामले की परिस्थितियों और आरोपों की प्रकृति पर गौर किया। कोर्ट ने साफ किया कि ट्रायल अनिश्चित समय तक नहीं खिंचना चाहिए। इसी वजह से छह महीने की समयसीमा महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अगर इस दौरान सुनवाई पूरी नहीं होती है तो आरोपी के पास दोबारा जमानत मांगने का कानूनी विकल्प रहेगा।</p>
<p>राजा रघुवंशी हत्याकांड पिछले साल देशभर में चर्चा में आया था। इंदौर के रहने वाले राजा और सोनम की शादी मई 2025 में हुई थी। शादी के कुछ दिनों बाद दोनों मेघालय घूमने गए। 23 मई के आसपास दोनों का संपर्क परिवार से टूट गया और इसके बाद उनकी तलाश शुरू हुई। कुछ दिन बाद राजा का शव मेघालय के सोहरा इलाके में एक गहरी खाई से बरामद किया गया। शुरुआती दिनों में सोनम का भी पता नहीं चल रहा था, जिससे मामला और उलझ गया था। बाद में पुलिस जांच ने अलग दिशा ली और सोनम को गिरफ्तार किया गया। जांच एजेंसियों ने उसके खिलाफ हत्या की साजिश में शामिल होने के गंभीर आरोप लगाए। ये आरोप अभी अदालत में विचाराधीन हैं और दोष या निर्दोषता का अंतिम फैसला ट्रायल के बाद ही होगा।</p>
<p>मेघालय पुलिस ने मामले की जांच के दौरान कई लोगों को आरोपी बनाया था। पुलिस का आरोप है कि राजा की हत्या पहले से बनाई गई साजिश के तहत की गई। जांच में मोबाइल फोन रिकॉर्ड, यात्रा से जुड़े विवरण, आरोपियों की गतिविधियों और दूसरे साक्ष्यों को जोड़ा गया। सोनम की गिरफ्तारी के बाद उसे मेघालय ले जाया गया और मामले में पूछताछ की गई। शुरुआत से ही सोनम के परिवार और राजा के परिवार की ओर से अलग-अलग दावे सामने आते रहे। इसी वजह से यह केस केवल आपराधिक जांच ही नहीं बल्कि कानूनी प्रक्रिया को लेकर भी लगातार सुर्खियों में रहा।</p>
<p>सोनम को जमानत मिलने के बाद राजा रघुवंशी के परिवार ने इसका विरोध किया था। दूसरी तरफ बचाव पक्ष की ओर से गिरफ्तारी की प्रक्रिया और कानूनी प्रावधानों के पालन को लेकर सवाल उठाए गए थे। जमानत के पक्ष में प्रमुख आधारों में गिरफ्तारी के दौरान कथित प्रक्रियात्मक कमियों का मुद्दा भी शामिल रहा। मेघालय सरकार इस राहत से सहमत नहीं थी और मामला आखिरकार सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। उपलब्ध अदालती रिपोर्टों के मुताबिक, मेघालय हाईकोर्ट ने 29 जून 2026 को जमानत बरकरार रखी थी और राज्य सरकार 1 जुलाई को इसे चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट पहुंची।</p>
<p>सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान मुख्य सवाल यह रहा कि गिरफ्तारी की प्रक्रिया में कथित तकनीकी या प्रक्रियात्मक कमी क्या इतने गंभीर आरोप वाले मामले में जमानत जारी रखने का पर्याप्त आधार हो सकती है। शीर्ष अदालत ने मामले की परिस्थितियों पर विचार करने के बाद पहले के जमानत आदेश को रद्द कर दिया। इससे पहले 21 जुलाई की सुनवाई में भी कोर्ट ने सोनम के सरेंडर से जुड़े विकल्प पर विचार किया था और गिरफ्तारी के आधार उपलब्ध नहीं कराए जाने का मुद्दा देर से उठाने पर सवाल किया था। दो दिन बाद अदालत ने जमानत रद्द करने का आदेश दे दिया।</p>
<p>राजा रघुवंशी और सोनम की शादी मई 2025 में हुई थी। शादी के बाद दोनों मेघालय गए थे। यात्रा के दौरान अचानक संपर्क टूटने पर परिवार ने तलाश शुरू की। उनकी किराए की स्कूटी लावारिस मिलने और मोबाइल बंद होने के बाद मामला संदिग्ध होता चला गया। स्थानीय पुलिस, बचाव दल और दूसरे अधिकारियों ने दुर्गम इलाकों में खोज अभियान चलाया। बाद में राजा का शव खाई में मिलने के बाद जांच हत्या के एंगल से आगे बढ़ी।</p>
<p>राजा का शव मिलने के बाद भी सोनम का पता नहीं लगने से कई तरह की आशंकाएं सामने आई थीं। शुरुआत में उसके परिवार ने आशंका जताई थी कि वह भी किसी मुसीबत में हो सकती है। कुछ दिनों बाद जांच में बड़ा मोड़ आया और सोनम सामने आई। इसके बाद मेघालय पुलिस ने उसे मामले में आरोपी बनाते हुए गिरफ्तार किया। पुलिस ने दावा किया कि जांच में मिले तथ्यों के आधार पर हत्या की साजिश का मामला सामने आया है।</p>
<p>इस केस में अन्य आरोपियों की भूमिका की भी जांच की गई। अभियोजन पक्ष के आरोपों के अनुसार, हत्या को योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया गया था। हालांकि इन आरोपों को अदालत में सबूतों के आधार पर साबित किया जाना बाकी है। किसी भी आपराधिक मुकदमे की तरह इस मामले में भी सभी आरोपी कानूनन तब तक निर्दोष माने जाते हैं, जब तक सक्षम अदालत उन्हें दोषी नहीं ठहराती।</p>
<p>जमानत को लेकर कानूनी लड़ाई इसलिए भी महत्वपूर्ण रही क्योंकि एक तरफ हत्या और कथित साजिश जैसे गंभीर आरोप हैं, वहीं दूसरी तरफ आरोपी के संवैधानिक और कानूनी अधिकारों का सवाल भी है। भारतीय न्याय व्यवस्था में जमानत को लेकर सामान्य सिद्धांत है कि विचाराधीन आरोपी को अनावश्यक रूप से लंबे समय तक जेल में नहीं रखा जाना चाहिए, लेकिन हत्या जैसे गंभीर मामलों में अदालतें अपराध की प्रकृति, उपलब्ध साक्ष्य, गवाहों पर संभावित प्रभाव और आरोपी के फरार होने की आशंका जैसे कई पहलुओं को देखती हैं।</p>
<p>सुप्रीम कोर्ट ने ताजा आदेश में इसी संतुलन को ध्यान में रखते हुए ट्रायल के लिए छह महीने की अवधि तय की है। इससे अभियोजन और बचाव दोनों पक्षों पर मुकदमे की कार्यवाही तेजी से आगे बढ़ाने का दबाव रहेगा। अगर निर्धारित अवधि के भीतर ट्रायल पूरा नहीं होता तो सोनम को फिर से जमानत मांगने की अनुमति होगी। इसका मतलब यह नहीं है कि छह महीने बाद जमानत अपने आप मिल जाएगी। उसे नई याचिका दाखिल करनी होगी और उस समय अदालत परिस्थितियों को देखकर फैसला करेगी।</p>
<p>सोनम को तीन सप्ताह में सरेंडर करने का आदेश भी तत्काल गिरफ्तारी से अलग व्यवस्था देता है। उसे अदालत द्वारा दी गई अवधि के भीतर आत्मसमर्पण करना होगा। अगर आदेश का पालन किया जाता है तो वह फिर से न्यायिक हिरासत में चली जाएगी और ट्रायल आगे बढ़ेगा। कोर्ट के फैसले के बाद अब मामले में गवाहों, दस्तावेजी साक्ष्यों, डिजिटल रिकॉर्ड और पुलिस जांच के आधार पर अभियोजन को अपने आरोप साबित करने होंगे।</p>
<p>राजा रघुवंशी के परिवार की नजर भी लंबे समय से इस कानूनी प्रक्रिया पर बनी हुई है। सोनम को जमानत मिलने के बाद परिवार की तरफ से नाराजगी जताई गई थी और मामले में जल्द न्याय की मांग की गई थी। सुप्रीम कोर्ट में मामला पहुंचने के बाद परिवार को उम्मीद थी कि पहले दिए गए जमानत आदेश की दोबारा समीक्षा होगी। अब जमानत रद्द होने के बाद कानूनी लड़ाई का मुख्य केंद्र ट्रायल कोर्ट की सुनवाई बनने जा रहा है।</p>
<p>मामले में एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि जमानत रद्द होना किसी आरोपी को दोषी ठहराया जाना नहीं होता। जमानत का फैसला मुख्य मुकदमे से अलग कानूनी प्रक्रिया है। सोनम के खिलाफ लगाए गए हत्या और साजिश से जुड़े आरोपों पर अंतिम निर्णय ट्रायल कोर्ट को साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर करना है। सुप्रीम कोर्ट का मौजूदा आदेश मुख्य रूप से जमानत और हिरासत की स्थिति से जुड़ा है।</p>
<p>मेघालय सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में जमानत का विरोध करते हुए मामले की गंभीरता को सामने रखा गया था। राज्य की दलील थी कि आरोपों और जांच में सामने आए तथ्यों को देखते हुए आरोपी को जमानत पर बाहर रखने का आदेश उचित नहीं है। दूसरी ओर बचाव पक्ष ने गिरफ्तारी और प्रक्रिया से जुड़े कानूनी मुद्दों को आधार बनाया। शीर्ष अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद पहले मिली राहत को खत्म कर दिया।</p>
<p>इस हत्याकांड की सुनवाई अब अगले छह महीने में तेजी से आगे बढ़ने की संभावना है। अभियोजन पक्ष को आरोपों से जुड़े साक्ष्य अदालत में पेश करने होंगे, जबकि बचाव पक्ष उन साक्ष्यों और जांच के तरीके को चुनौती दे सकेगा। कोर्ट की ओर से समयसीमा तय होने के कारण अनावश्यक स्थगन से बचने और लगातार सुनवाई पर जोर रहने की संभावना है।</p>
<p>सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक सोनम के पास फिलहाल तीन सप्ताह का समय है। इस अवधि में उसे सरेंडर करना होगा। इसके बाद मुकदमे की आगे की प्रक्रिया ट्रायल कोर्ट में चलेगी। अगर छह महीने के भीतर सुनवाई पूरी नहीं होती है तो उसके लिए जमानत की नई अर्जी लगाने का रास्ता खुला रहेगा, जिस पर उस समय की परिस्थितियों और ट्रायल की प्रगति को देखते हुए अदालत फैसला करेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 13:26:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Priyanka ]]></dc:creator>
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                <title>मानसून सत्र में सरकार का रिपोर्ट कार्ड: CM मोहन यादव ने सदन में गिनाए विकास के काम</title>
                                    <description><![CDATA[विधानसभा के मानसून सत्र में विनियोग समेत 15 विधेयक पारित, मुख्यमंत्री ने गेहूं खरीदी से लेकर केन-बेतवा लिंक, नर्मदा परियोजना, एयर एम्बुलेंस, औद्योगिक निवेश और ई-विधान तक का रखा लेखाजोखा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/governments-report-card-in-the-monsoon-session-cm-mohan-yadav/article-59537"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/mohan-yadav.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">मध्यप्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के समापन पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सदन में सरकार के कामकाज का लेखाजोखा रखा। उन्होंने विधानसभा में पारित विधेयकों से लेकर किसानों, श्रमिकों, सिंचाई परियोजनाओं, परिवहन सुविधाओं और औद्योगिक निवेश तक सरकार की प्राथमिकताओं का जिक्र किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में जनकल्याण, सुशासन और औद्योगिक विकास की दिशा में लगातार कदम बढ़ाए जा रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि मानसून सत्र के दौरान एक विनियोग विधेयक सहित कुल 15 विधेयक पारित किए गए। सरकार इन विधायी फैसलों को प्रदेश के विकास और प्रशासनिक व्यवस्था से जोड़कर देख रही है। मुख्यमंत्री ने श्रम संहिता-2026 का भी विशेष रूप से उल्लेख किया और कहा कि इससे श्रमिकों को लचीली कार्य व्यवस्था का लाभ मिलने का रास्ता खुलेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">विधानसभा सत्र के दौरान सदस्यों की सक्रियता का आंकड़ा भी मुख्यमंत्री ने सदन के सामने रखा। उनके मुताबिक सत्र में कुल 900 तारांकित और 856 अतारांकित प्रश्न प्रस्तुत किए गए। इसके अलावा विधायकों की ओर से अलग-अलग विभागों और जनहित के मुद्दों से जुड़े विषय भी सदन में उठाए गए।</p>
<p class="isSelectedEnd">मानसून सत्र में 522 ध्यानाकर्षण सूचनाएं प्रस्तुत की गईं। इसके साथ ही 171 विषय शून्यकाल के माध्यम से सदन के सामने आए। कुल 21 अशासकीय संकल्प भी प्रस्तुत किए गए। इन आंकड़ों के जरिए मुख्यमंत्री ने सत्र के दौरान हुई संसदीय गतिविधियों और जनप्रतिनिधियों की भागीदारी का उल्लेख किया।</p>
<p class="isSelectedEnd">सरकार की उपलब्धियों का ब्यौरा रखते हुए मुख्यमंत्री ने किसानों और गेहूं खरीदी को प्रमुखता से सदन के सामने रखा। उन्होंने बताया कि प्रदेश में करीब 14 लाख किसानों से 104 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी की गई। किसानों को गेहूं के लिए 2625 रुपए प्रति क्विंटल की दर से भुगतान किया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd">गेहूं खरीदी के आंकड़ों को रखते हुए मुख्यमंत्री ने कृषि क्षेत्र में सरकार की प्राथमिकताओं का उल्लेख किया। बड़ी संख्या में किसानों से समर्थन व्यवस्था के तहत हुई खरीदी को सरकार ने कृषि अर्थव्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण कदम के रूप में सामने रखा। मुख्यमंत्री ने किसानों से जुड़े विषयों के साथ प्रदेश की बड़ी जल और सिंचाई परियोजनाओं की प्रगति का भी जिक्र किया।</p>
<p class="isSelectedEnd">सदन में नर्मदा से जुड़ी परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने प्रदेश में जल संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में किए जा रहे कामों की जानकारी दी। सरकार सिंचाई और पानी की उपलब्धता से जुड़ी बड़ी परियोजनाओं को विकास की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल कर रही है। मुख्यमंत्री ने इन परियोजनाओं को प्रदेश के भविष्य से जुड़े महत्वपूर्ण कामों में गिनाया।</p>
<p class="isSelectedEnd">केन-बेतवा लिंक परियोजना भी मुख्यमंत्री के संबोधन में प्रमुखता से शामिल रही। उन्होंने इस परियोजना को सरकार की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में रखा। जल संसाधनों से जुड़ी इस परियोजना के माध्यम से प्रदेश के संबंधित क्षेत्रों में पानी की जरूरतों को पूरा करने की दिशा में काम आगे बढ़ाया जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">मुख्यमंत्री ने प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए शुरू की गई एयर एम्बुलेंस सेवा का भी जिक्र किया। गंभीर परिस्थितियों में मरीजों को तेजी से चिकित्सा सुविधा तक पहुंचाने की व्यवस्था के रूप में सरकार इस सेवा को महत्वपूर्ण मान रही है। मुख्यमंत्री ने इसे प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार से जुड़े कदमों में शामिल किया।</p>
<p class="isSelectedEnd">एयर कनेक्टिविटी के साथ हेलीकॉप्टर कनेक्टिविटी को लेकर किए जा रहे प्रयासों का भी सदन में उल्लेख किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में अलग-अलग क्षेत्रों के बीच बेहतर संपर्क व्यवस्था विकसित करने की दिशा में काम हो रहा है। सरकार परिवहन और कनेक्टिविटी को विकास की रफ्तार बढ़ाने वाले प्रमुख क्षेत्रों में देख रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd">औद्योगिक विकास पर बात करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश में निवेश बढ़ाने की दिशा में सरकार की कोशिशों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देकर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों के नए अवसर तैयार करने की दिशा में तेजी से कदम उठाए जा रहे हैं। सरकार की प्राथमिकता प्रदेश में निवेश के लिए बेहतर माहौल तैयार करना है।</p>
<p class="isSelectedEnd">मुख्यमंत्री ने पूंजीगत निवेश बढ़ाने की नीति का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए पूंजीगत व्यय और निवेश में बढ़ोतरी की जा रही है। बुनियादी ढांचे और विकास से जुड़ी परियोजनाओं पर निवेश के जरिए आर्थिक गतिविधियों को गति देने पर सरकार का जोर है।</p>
<p class="isSelectedEnd">औद्योगिक निवेश को प्रदेश की आर्थिक वृद्धि से जोड़ते हुए मुख्यमंत्री ने सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयासों को सदन के सामने रखा। उनका कहना था कि निवेश बढ़ने से आर्थिक गतिविधियों के विस्तार का रास्ता तैयार होगा। इसके साथ रोजगार और उद्योगों के विकास के लिए भी नए अवसर बनेंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd">विधानसभा की कार्यप्रणाली में तकनीक के इस्तेमाल को लेकर भी मुख्यमंत्री ने बात रखी। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष की पहल पर शुरू की गई ई-विधान व्यवस्था की सराहना की। संसदीय कामकाज को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">ई-विधान के माध्यम से विधानसभा की कार्यवाही और उससे जुड़े दस्तावेजों को डिजिटल व्यवस्था की ओर ले जाने की पहल की गई है। मुख्यमंत्री ने विधानसभा में किए जा रहे इन संसदीय नवाचारों का उल्लेख करते हुए अध्यक्ष की पहल की प्रशंसा की। उन्होंने सदन की कार्यप्रणाली में हो रहे बदलावों को भी महत्वपूर्ण बताया।</p>
<p class="isSelectedEnd">महिला सदस्यों के लिए विधानसभा में विशेष चर्चा की पहल का भी मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में उल्लेख किया। उन्होंने इसे संसदीय व्यवस्था में भागीदारी बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास बताया। विधानसभा में अलग-अलग वर्गों और विषयों को चर्चा के लिए अवसर देने की पहल को मुख्यमंत्री ने सराहा।</p>
<p class="isSelectedEnd">मानसून सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के विधायकों की ओर से बड़ी संख्या में सवाल और जनहित के मुद्दे सदन में रखे गए। 900 तारांकित और 856 अतारांकित प्रश्नों के साथ 522 ध्यानाकर्षण सूचनाएं इस सत्र में प्रस्तुत हुईं। शून्यकाल में भी 171 मामलों को उठाया गया, जबकि 21 अशासकीय संकल्प सदन के सामने आए।</p>
<p class="isSelectedEnd">मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में विधायी कामकाज के साथ सरकार की योजनाओं और विकास कार्यों को एक साथ रखा। किसानों से 104 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी, 2625 रुपए प्रति क्विंटल की दर, जल परियोजनाएं, एयर एम्बुलेंस और औद्योगिक निवेश जैसे विषय उनके संबोधन के केंद्र में रहे।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकार ने पूंजीगत निवेश बढ़ाने को अपनी रणनीति का हिस्सा बताया है। मुख्यमंत्री ने सदन में कहा कि विकास परियोजनाओं और औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार के जरिए आर्थिक मजबूती की दिशा में काम किया जा रहा है। इसके साथ ही प्रशासनिक व्यवस्था में तकनीक के इस्तेमाल पर भी जोर दिया जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">विधानसभा के मानसून सत्र में पारित 15 विधेयकों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने इन्हें जनकल्याण, सुशासन और औद्योगिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण बताया। इनमें एक विनियोग विधेयक भी शामिल रहा। श्रम संहिता-2026 के प्रावधानों का उल्लेख करते हुए उन्होंने श्रमिकों के लिए लचीली कार्य व्यवस्था की बात सदन में रखी।</p>
<p>सत्र के समापन के मौके पर मुख्यमंत्री ने विधानसभा अध्यक्ष की ओर से किए गए संसदीय प्रयोगों और नई पहलों की सराहना की। ई-विधान व्यवस्था, महिला सदस्यों के लिए विशेष चर्चा और अन्य संसदीय नवाचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने विधानसभा की कार्यप्रणाली में हो रहे बदलावों को रेखांकित किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 11:28:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Priyanka ]]></dc:creator>
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                <title>विधानसभा पहुंचे मेधावी छात्रों से मिले CM मोहन यादव, लोकतंत्र और राष्ट्र निर्माण पर किया संवाद</title>
                                    <description><![CDATA[आगर-मालवा और जबलपुर से भोपाल आए 90 से ज्यादा विद्यार्थियों ने देखी मानसून सत्र की कार्यवाही, मुख्यमंत्री ने कहा- लोकतांत्रिक संस्थाओं को करीब से समझे नई पीढ़ी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/cm-mohan-yadav-met-the-brilliant-students-who-reached-the/article-59523"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/cm-mohan-yadav.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">मध्यप्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र देखने बुधवार को आगर-मालवा और जबलपुर से पहुंचे स्कूली विद्यार्थियों के लिए यह दौरा केवल सदन की कार्यवाही देखने तक सीमित नहीं रहा। विधानसभा परिसर में उनकी मुलाकात मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से भी हुई। अलग-अलग स्कूलों से आए 90 से ज्यादा विद्यार्थियों ने सदन में विधायी प्रक्रिया को करीब से देखा और बाद में मुख्यमंत्री के साथ बातचीत के दौरान अपने अनुभव साझा किए। मुख्यमंत्री ने बच्चों से कहा कि पढ़ाई और करियर के साथ देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को समझना भी जरूरी है। आज के विद्यार्थी आने वाले समय में समाज और देश की जिम्मेदारी संभालेंगे, इसलिए उन्हें यह जानकारी होनी चाहिए कि सरकार कैसे काम करती है, कानून किस प्रक्रिया से बनते हैं और लोकतंत्र में एक नागरिक की भूमिका क्या होती है। विधानसभा भ्रमण के दौरान बच्चों में भी खासा उत्साह दिखाई दिया। कई विद्यार्थियों के लिए यह पहला मौका था जब उन्होंने किताबों में पढ़ी विधानसभा और संसदीय प्रक्रिया को सामने से चलते देखा।</p>
<p>मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विधानसभा के समिति कक्ष क्रमांक-1 में विद्यार्थियों से मुलाकात की। इस दौरान आगर-मालवा जिले के अलग-अलग क्षेत्रों से आए 50 से अधिक मेधावी विद्यार्थी मौजूद रहे। इनके साथ जबलपुर के स्टेम फील्ड इंटरनेशनल स्कूल के करीब 40 विद्यार्थी भी विधानसभा पहुंचे थे। मुख्यमंत्री ने औपचारिक बातचीत तक सीमित रहने के बजाय बच्चों से सीधे उनके अनुभव पूछे। उन्होंने जानना चाहा कि सदन की कार्यवाही देखकर विद्यार्थियों को कैसा लगा और उन्होंने लोकतांत्रिक व्यवस्था के बारे में क्या नया समझा। बच्चों ने बताया कि विधानसभा के भीतर जनप्रतिनिधियों को अलग-अलग विषयों पर चर्चा करते देखना उनके लिए नया अनुभव रहा। स्कूल की किताबों में विधायिका, सरकार और कानून बनाने की जो प्रक्रिया पढ़ाई जाती है, उसका व्यावहारिक रूप उन्हें पहली बार देखने को मिला।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से बातचीत में कहा कि नई पीढ़ी को लोकतांत्रिक संस्थाओं से जोड़ना जरूरी है। लोकतंत्र केवल चुनाव या मतदान तक सीमित व्यवस्था नहीं है। सरकार की कार्यप्रणाली, विधानसभा की भूमिका, जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी और कानून बनने की प्रक्रिया को समझना भी जागरूक नागरिक बनने का हिस्सा है। उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि विधानसभा ऐसी जगह है जहां प्रदेश से जुड़े मुद्दे उठते हैं, उन पर बहस होती है और सरकार से सवाल पूछे जाते हैं। अलग-अलग क्षेत्रों से चुने गए विधायक अपने इलाके की समस्याएं और जरूरतें सदन के सामने रखते हैं। इसी प्रक्रिया से लोकतांत्रिक व्यवस्था आगे बढ़ती है। मुख्यमंत्री ने बच्चों को अपने आसपास होने वाले सामाजिक और विकास से जुड़े बदलावों को समझने तथा सकारात्मक तरीके से उनमें भागीदारी करने के लिए भी प्रेरित किया।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने युवाओं की भूमिका का जिक्र करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश और देश का आने वाला समय आज के विद्यार्थियों के हाथ में है। नई पीढ़ी केवल शिक्षा हासिल करने तक सीमित न रहे, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को भी समझे। लोकतांत्रिक मूल्यों को जानना और उन्हें व्यवहार में अपनाना एक जिम्मेदार नागरिक की पहचान है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी जितनी जल्दी शासन व्यवस्था और सार्वजनिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली को समझेंगे, उतनी ही बेहतर तरीके से भविष्य में समाज के लिए अपनी भूमिका तय कर सकेंगे। राज्य सरकार भी युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए अलग-अलग स्तर पर प्रयास कर रही है। शिक्षा के साथ कौशल, नवाचार और नेतृत्व क्षमता विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि युवा प्रदेश के विकास में सक्रिय भागीदार बन सकें।</p>
<p>विधानसभा की कार्यवाही देखने पहुंचे विद्यार्थियों के लिए सदन के भीतर का माहौल खासा दिलचस्प रहा। उन्होंने देखा कि विधानसभा में प्रश्न, चर्चा और विधायी कामकाज किस तरह आगे बढ़ता है। सदन में पक्ष और विपक्ष की भूमिका क्या होती है, मंत्री सवालों के जवाब किस तरह देते हैं और किसी विषय पर जनप्रतिनिधि अपनी बात कैसे रखते हैं, इन सभी प्रक्रियाओं को विद्यार्थियों ने करीब से समझा। सामान्य तौर पर स्कूली पाठ्यक्रम में लोकतंत्र और विधायिका के बारे में पढ़ाया जाता है, लेकिन वास्तविक सदन की कार्यवाही देखना अलग अनुभव था। विद्यार्थियों ने मुख्यमंत्री के सामने भी इस बात का जिक्र किया कि उन्हें संसदीय लोकतंत्र के बारे में कई ऐसी बातें जानने का मौका मिला, जिन्हें केवल किताबों से समझना मुश्किल था।</p>
<p>मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बच्चों की जिज्ञासा की सराहना की। उन्होंने कहा कि विधानसभा को लोकतांत्रिक व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण शिक्षण केंद्र भी माना जा सकता है, क्योंकि यहां सरकार और जनप्रतिनिधियों के कामकाज को प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर मिलता है। नियम-कानून कैसे तैयार होते हैं, किसी प्रस्ताव पर चर्चा किस तरह होती है और जनता से जुड़े मुद्दे सदन तक कैसे पहुंचते हैं, यह सब देखकर विद्यार्थियों को लोकतंत्र की व्यावहारिक जानकारी मिलती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसी यात्राओं से बच्चों में सार्वजनिक जीवन और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर समझ बढ़ती है। खासकर स्कूली उम्र में यदि विद्यार्थी इन संस्थाओं को करीब से देखते हैं तो उनके भीतर जिम्मेदार नागरिक बनने की सोच और मजबूत हो सकती है।</p>
<p>आगर-मालवा जिले से आए विद्यार्थियों का यह विधानसभा भ्रमण स्थानीय जनप्रतिनिधियों के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया था। आगर विधायक माधव सिंह मधु गहलोत के मार्गदर्शन में जिले के अलग-अलग क्षेत्रों से 50 से ज्यादा मेधावी विद्यार्थी भोपाल पहुंचे। बच्चों को विधानसभा भवन दिखाया गया और मानसून सत्र के दौरान चल रही सदन की कार्यवाही देखने का अवसर मिला। ग्रामीण और छोटे शहरी क्षेत्रों से आए कई विद्यार्थियों के लिए भोपाल स्थित विधानसभा का यह पहला दौरा था। उन्होंने सदन की व्यवस्था, जनप्रतिनिधियों की बैठने की प्रणाली और विधायी कार्यवाही को काफी उत्सुकता से देखा।</p>
<p>इसी तरह जबलपुर कैंट क्षेत्र से विधायक अशोक रोहाणी के मार्गदर्शन में स्टेम फील्ड इंटरनेशनल स्कूल के लगभग 40 विद्यार्थी विधानसभा पहुंचे थे। विद्यार्थियों ने भ्रमण के दौरान विधानसभा परिसर और सदन की गतिविधियों के बारे में जानकारी हासिल की। मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान बच्चों ने अपने अनुभव भी साझा किए। उन्होंने बताया कि विधानसभा में वास्तविक बहस और कामकाज देखने के बाद उन्हें यह समझने में मदद मिली कि प्रदेश स्तर पर फैसले किस तरह लिए जाते हैं। लोकतांत्रिक प्रक्रिया को लेकर बच्चों ने मुख्यमंत्री से बातचीत भी की और अपने भ्रमण से जुड़ी बातें बताईं।</p>
<p>विद्यार्थी इस मुलाकात में खाली हाथ नहीं पहुंचे थे। उन्होंने अपनी ओर से तैयार किए गए मॉडल और आकर्षक सीनरी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को भेंट किए। बच्चों द्वारा तैयार की गई इन रचनाओं में उनकी कल्पनाशीलता और रचनात्मकता दिखाई दी। मुख्यमंत्री ने इन्हें देखा और विद्यार्थियों की मेहनत की सराहना की। उन्होंने बच्चों से पढ़ाई के साथ रचनात्मक गतिविधियों, विज्ञान, तकनीक और नवाचार में भी रुचि बनाए रखने को कहा। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों की प्रतिभा और नए प्रयोग करने की सोच को महत्वपूर्ण बताते हुए उनके बेहतर भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।</p>
<p>मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री का जोर इस बात पर रहा कि विद्यार्थी केवल परीक्षा और अंक तक अपनी सोच सीमित न रखें। समाज में क्या हो रहा है, सरकार की नीतियां किस तरह बनती हैं और नागरिक के तौर पर उनकी जिम्मेदारियां क्या हैं, इसकी जानकारी भी जरूरी है। उन्होंने राष्ट्र निर्माण में युवाओं की सक्रिय भागीदारी की बात कही। मुख्यमंत्री के मुताबिक जागरूक नागरिक वही है जो अपने अधिकारों के साथ कर्तव्यों को भी समझे और समाज के विकास में सकारात्मक योगदान देने के लिए तैयार रहे।</p>
<p>मानसून सत्र के दौरान विधानसभा में विभिन्न विधेयकों, प्रदेश की योजनाओं, विकास कार्यों और जनहित से जुड़े विषयों पर चर्चा चल रही है। ऐसे समय विद्यार्थियों को सदन की कार्यवाही देखने का मौका मिलने से उन्हें लोकतांत्रिक व्यवस्था को वास्तविक रूप में समझने का अवसर मिला। उन्होंने यह भी देखा कि किसी मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के विचार अलग हो सकते हैं और इन्हीं मतभेदों के बीच चर्चा के जरिए सदन की प्रक्रिया आगे बढ़ती है। सवाल-जवाब और बहस लोकतंत्र का हिस्सा हैं। मुख्यमंत्री ने इसी संदर्भ में बच्चों से कहा कि मतभेद होना लोकतांत्रिक व्यवस्था की स्वाभाविक प्रक्रिया है, लेकिन सार्वजनिक जीवन में संवाद और संस्थागत व्यवस्था का महत्व समझना जरूरी है।</p>
<p>प्रदेश में स्कूली और उच्च शिक्षा से जुड़े विद्यार्थियों को शासन और प्रशासन की प्रक्रिया से परिचित कराने के लिए इस तरह के शैक्षणिक भ्रमण उपयोगी माने जाते हैं। विधानसभा पहुंचने वाले बच्चों को किताबों से अलग एक वास्तविक अनुभव मिलता है। उन्हें पता चलता है कि विधायक किस तरह जनता का प्रतिनिधित्व करते हैं, सदन के नियम क्यों जरूरी होते हैं और सरकार को अपने फैसलों के लिए किस तरह जवाब देना पड़ता है। आगर-मालवा और जबलपुर के विद्यार्थियों ने भी भ्रमण के दौरान इन्हीं प्रक्रियाओं को करीब से देखा और मुख्यमंत्री से बातचीत में अपनी जिज्ञासाएं तथा अनुभव साझा किए।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से भविष्य की पढ़ाई और रुचियों को लेकर भी बातचीत की। उन्होंने बच्चों की सृजनात्मक सोच और मॉडल तैयार करने की क्षमता की प्रशंसा करते हुए कहा कि युवाओं में मौजूद प्रतिभा को सही अवसर और दिशा मिलनी चाहिए। विज्ञान, तकनीक, नवाचार, प्रशासन, सामाजिक क्षेत्र या किसी दूसरे पेशे में जाने वाले विद्यार्थी अपने काम के जरिए प्रदेश और देश के विकास में योगदान दे सकते हैं। इसके लिए शिक्षा के साथ जिम्मेदारी और सामाजिक समझ भी उतनी ही जरूरी है।</p>
<p>विधानसभा भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों को शासकीय और संसदीय प्रक्रियाओं के बारे में जानकारी दी गई। बच्चों ने सदन की कार्यवाही के साथ यह समझने की कोशिश की कि विधायक अपने क्षेत्र के सवाल किस तरह उठाते हैं और शासन से संबंधित विषयों पर चर्चा कैसे आगे बढ़ती है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात के दौरान विद्यार्थियों ने अपने हाथों से बनाए मॉडल और सीनरी भी उन्हें सौंपे। इस दौरान आगर विधायक माधव सिंह मधु गहलोत और जबलपुर कैंट विधायक अशोक रोहाणी के मार्गदर्शन में आए विद्यार्थियों ने विधानसभा भ्रमण से जुड़े अपने अनुभव साझा किए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Jul 2026 19:03:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Priyanka ]]></dc:creator>
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                <title>भोपाल का निशातपुरा स्टेशन 26 जुलाई से खुलेगा, लंबा इंतजार होगा खत्म</title>
                                    <description><![CDATA[करीब तीन साल से तैयार स्टेशन पर शुरू होगी यात्री आवाजाही, निशातपुरा-करोंद समेत आसपास की बड़ी आबादी को मिलेगी राहत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopals-nishatpura-station-will-open-from-july-26-the-long/article-59456"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/nishatpura-railway-station.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">राजधानी के निशातपुरा इलाके में करीब तीन साल से बनकर तैयार खड़ा रेलवे स्टेशन अब आखिरकार यात्रियों के लिए खुलने जा रहा है। 26 जुलाई को निशातपुरा रेलवे स्टेशन का लोकार्पण प्रस्तावित है और इसके साथ ही यहां यात्री ट्रेनों का ठहराव शुरू करने की तैयारी की गई है। स्टेशन जून 2023 में तैयार हो गया था, लेकिन नियमित यात्री सेवा शुरू नहीं होने के कारण इसका इस्तेमाल नहीं हो पा रहा था। प्लेटफॉर्म बने थे, टिकट काउंटर और यात्रियों के बैठने की जगह तैयार थी, लिफ्ट से लेकर सीसीटीवी और लाइटिंग तक का इंतजाम मौजूद था, फिर भी स्टेशन पर यात्रियों की चहल-पहल दिखाई नहीं देती थी। अब लोकार्पण की तारीख तय होने के बाद निशातपुरा, करोंद और भोपाल के उत्तरी हिस्से में रहने वाले लोगों की उम्मीद बढ़ी है। भोपाल सांसद आलोक शर्मा ने इस मामले में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात कर स्टेशन को जल्द शुरू करने का मुद्दा उठाया था।</p>
<p class="isSelectedEnd">ताजा जानकारी के अनुसार 26 जुलाई को प्रस्तावित कार्यक्रम में रेल मंत्री वर्चुअल माध्यम से जुड़ सकते हैं, जबकि स्थानीय स्तर पर जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी रहेगी। शुरुआती चरण में स्टेशन पर चुनिंदा ट्रेनों का ठहराव शुरू करने की तैयारी है। अलग-अलग रिपोर्टों में ट्रेनों की संख्या को लेकर अंतर सामने आया है। पहले तीन ट्रेनों के संचालन या ठहराव की बात कही गई, जबकि बाद में सामने आई जानकारी में फिलहाल दो ट्रेनों को यहां ठहराव दिए जाने का उल्लेख है। इनमें मालवा एक्सप्रेस और सोमनाथ एक्सप्रेस का नाम सामने आया है। रेलवे की अंतिम समय-सारिणी और आधिकारिक परिचालन आदेश से ट्रेनों की पूरी स्थिति साफ होगी। स्टेशन शुरू होने का असर केवल निशातपुरा तक सीमित नहीं रहने वाला। करोंद, भानपुर, आसपास की कॉलोनियों, रायसेन रोड की ओर के कुछ हिस्सों और पुराने भोपाल से जुड़े इलाकों के यात्रियों के लिए भी यह एक नया विकल्प बन सकता है। अभी इन क्षेत्रों से बड़ी संख्या में यात्रियों को ट्रेन पकड़ने के लिए भोपाल जंक्शन या रानी कमलापति स्टेशन की ओर जाना पड़ता है। शहर के ट्रैफिक के बीच रेलवे स्टेशन तक पहुंचने में कई बार काफी समय लगता है। निशातपुरा में नियमित ट्रेन ठहराव बढ़ने पर आसपास रहने वाले यात्रियों को अपने घर के नजदीक से रेल सेवा मिलने की संभावना बनेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd"><strong>Nishatpura Railway Station</strong> को भोपाल के रेलवे नेटवर्क पर बढ़ते यात्री दबाव को देखते हुए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। स्थानीय स्तर पर अनुमान है कि निशातपुरा, करोंद और आसपास के इलाकों की करीब तीन लाख आबादी को स्टेशन के पूरी तरह सक्रिय होने से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष फायदा मिल सकता है। हालांकि वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि आने वाले समय में यहां कितनी ट्रेनों को नियमित ठहराव दिया जाता है। स्टेशन तैयार होने के बावजूद लंबे समय तक यात्री सेवा शुरू नहीं होने को लेकर स्थानीय लोगों के बीच लगातार सवाल उठते रहे। जुलाई के मध्य तक स्थिति यह थी कि स्टेशन पर न नियमित यात्रियों की आवाजाही थी और न ही सामान्य यात्री स्टेशन जैसी गतिविधि दिखाई देती थी। करीब छह करोड़ रुपये की लागत से विकसित इस सुविधा के लंबे समय तक उपयोग में नहीं आने को लेकर भी चर्चा रही। दिन में स्टेशन लगभग खाली दिखाई देता था। आसपास रहने वाले लोगों को उम्मीद थी कि निर्माण पूरा होने के बाद जल्द ट्रेनें रुकेंगी, लेकिन इंतजार लंबा खिंचता गया। स्टेशन पर यात्रियों की सुविधा के लिए जरूरी बुनियादी ढांचा पहले ही विकसित किया जा चुका है। प्लेटफॉर्म के साथ टिकट काउंटर, प्रतीक्षालय, लिफ्ट, सीसीटीवी कैमरे और आधुनिक प्रकाश व्यवस्था जैसी सुविधाएं यहां मौजूद हैं। स्टेशन को यात्री सेवा के लिए इस्तेमाल में लाने के बाद इन सुविधाओं का वास्तविक उपयोग शुरू हो सकेगा। रेलवे के लिए अगली चुनौती यहां नियमित यात्री गतिविधियों के हिसाब से स्टाफ, सुरक्षा, टिकटिंग और परिचालन व्यवस्था को सक्रिय रखना होगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">भोपाल जंक्शन शहर के सबसे पुराने और व्यस्त रेलवे स्टेशनों में शामिल है। पुराने शहर के बड़े हिस्से से यात्री इसी स्टेशन पर निर्भर रहते हैं। दूसरी तरफ रानी कमलापति रेलवे स्टेशन नए भोपाल और आसपास के क्षेत्रों के लिए बड़ा केंद्र बन चुका है। निशातपुरा को तीसरे विकल्प के तौर पर विकसित करने से यात्रियों का कुछ दबाव अलग दिशा में बांटा जा सकता है। खासकर वे ट्रेनें जो निशातपुरा से गुजरती हैं और जिन्हें यहां ठहराव दिया जा सकता है, उनके यात्रियों को भोपाल जंक्शन तक जाने की जरूरत कम होगी। इससे समय के साथ भोपाल के रेलवे यातायात का नया पैटर्न भी बन सकता है। फिलहाल शुरुआत सीमित ट्रेनों से होने की तैयारी है, इसलिए स्टेशन के पूरी क्षमता से इस्तेमाल में आने में समय लग सकता है।</p>
<p>निशातपुरा स्टेशन के लोकार्पण को लेकर चर्चा इसलिए भी ज्यादा रही क्योंकि हाल में मध्य प्रदेश के कई रेलवे स्टेशनों से जुड़े कार्यक्रम हुए, लेकिन निशातपुरा का इंतजार बना रहा। स्टेशन के तैयार होने और यात्री सेवाएं शुरू होने के बीच करीब तीन साल का अंतर स्थानीय स्तर पर बड़ा मुद्दा बन गया था। कुछ दिन पहले तक यहां ट्रेनें बिना रुके गुजर रही थीं और स्टेशन परिसर में वैसी गतिविधि नहीं थी जैसी किसी चालू यात्री स्टेशन पर सामान्य रूप से दिखाई देती है। अब 26 जुलाई की तारीख सामने आने के बाद रेलवे स्तर पर तैयारियां तेज होने की जानकारी है। प्रस्तावित कार्यक्रम सुबह के समय रखा जा सकता है और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के नई दिल्ली से वर्चुअल रूप से जुड़ने की संभावना बताई गई है। भोपाल सांसद आलोक शर्मा स्थानीय कार्यक्रम में मौजूद रह सकते हैं। ट्रेनों का ठहराव शुरू होने के बाद सबसे बड़ा बदलाव आसपास के यात्रियों की रोजमर्रा की यात्रा में दिखाई दे सकता है। निशातपुरा और करोंद का इलाका पिछले कुछ वर्षों में तेजी से आबादी वाला क्षेत्र बना है। यहां से भोपाल जंक्शन तक पहुंचने के लिए सड़क मार्ग से शहर के व्यस्त हिस्सों से गुजरना पड़ता है। त्योहारों और छुट्टियों के समय स्टेशन तक पहुंचना और मुश्किल हो जाता है।</p>
<p>निशातपुरा से लंबी दूरी की ट्रेनों का ठहराव बढ़ने पर यात्रियों को एक वैकल्पिक बोर्डिंग पॉइंट मिल सकेगा। रेलवे के सामने अब स्टेशन को चरणबद्ध तरीके से ज्यादा ट्रेनों से जोड़ने की मांग भी आ सकती है। शुरुआती ठहराव के बाद यात्री संख्या, टिकट बिक्री और परिचालन जरूरतों के आधार पर आगे अन्य ट्रेनों के स्टॉपेज पर फैसला लिया जा सकता है। स्टेशन की लोकेशन रेलवे के मौजूदा रूट पर होने के कारण यहां से गुजरने वाली कई ट्रेनों को भविष्य में ठहराव देने की संभावना पर स्थानीय स्तर पर पहले से मांग उठती रही है। 26 जुलाई के कार्यक्रम के साथ स्टेशन औपचारिक रूप से यात्री नक्शे पर आएगा, जबकि किन-किन ट्रेनों का स्थायी ठहराव रहेगा, उनके आगमन-प्रस्थान का समय क्या होगा और टिकट बुकिंग में निशातपुरा को किस तरह शामिल किया जाएगा, इसे लेकर रेलवे की विस्तृत परिचालन सूचना यात्रियों के लिए अहम रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Jul 2026 11:39:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Priyanka ]]></dc:creator>
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                <title>MP में फायर सेफ्टी का नया कानून, शहर में 10 और गांव में 20 मिनट का लक्ष्य</title>
                                    <description><![CDATA[विधानसभा से अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा विधेयक पारित, 15 मीटर से ऊंची इमारतों से लेकर पंडाल और स्कूल तक सुरक्षा नियमों के दायरे में]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/new-fire-safety-law-in-mp-target-of-10-minutes/article-59454"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/mp-fire-safety-bill-2026.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">मध्य प्रदेश में आग लगने की घटनाओं से निपटने और फायर सेफ्टी सिस्टम को एक तय व्यवस्था के तहत लाने के लिए विधानसभा ने अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाओं से जुड़ा अहम विधेयक पारित कर दिया है। मंगलवार, 21 जुलाई को विधानसभा में इस विधेयक पर चर्चा हुई और इसे मंजूरी दे दी गई। नए प्रावधानों का सबसे अहम पहलू दमकल सेवाओं के रिस्पॉन्स टाइम को लेकर है। सदन में दी गई जानकारी के मुताबिक प्रदेश में फायर स्टेशन और दमकल व्यवस्था इस तरह विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है कि शहरी इलाके में आग लगने की सूचना मिलने पर करीब 10 मिनट और ग्रामीण क्षेत्र में 20 मिनट के भीतर अग्निशमन वाहन मौके तक पहुंच सकें। अभी प्रदेश के कई दूर-दराज इलाकों में फायर स्टेशन की दूरी और संसाधनों की कमी के कारण दमकल को घटनास्थल तक पहुंचने में समय लग जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">नई व्यवस्था में इसी अंतर को कम करने पर जोर दिया गया है। नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने सदन में विधेयक की जानकारी देते हुए बताया कि इसे तैयार करने से पहले दूसरे राज्यों और केंद्र में लागू व्यवस्थाओं का अध्ययन किया गया है। सरकार का फोकस केवल आग लगने के बाद उसे बुझाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ऐसी घटनाएं होने से पहले सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित कराने की व्यवस्था भी मजबूत की जाएगी। अग्निशमन सेवाओं को अत्यावश्यक सेवाओं की श्रेणी में लाने का प्रावधान भी किया गया है। इसके साथ प्रदेश में फायर सेफ्टी के लिए अलग संचालनालय और राज्य स्तरीय प्रशिक्षण संस्थान बनाने की व्यवस्था प्रस्तावित है। इसका उद्देश्य अग्निशमन सेवाओं को अधिक संगठित करना, कर्मचारियों को आधुनिक प्रशिक्षण देना और अलग-अलग निकायों में काम कर रही व्यवस्थाओं के बीच बेहतर तालमेल तैयार करना है।</p>
<p class="isSelectedEnd">नए <strong>MP Fire Safety Bill 2026</strong> में जवाबदेही को भी अहम बनाया गया है। किसी इमारत या परिसर में आग लगने के बाद जांच के दौरान यदि यह सामने आता है कि वहां निर्धारित फायर सेफ्टी नियमों का पालन नहीं किया गया था, तो जिम्मेदारी केवल किसी एक स्तर तक सीमित नहीं रहेगी। संबंधित अधिकारी की भूमिका की जांच की जा सकेगी और भवन मालिक की जवाबदेही भी तय होगी। अभी तक आग की बड़ी घटनाओं के बाद अक्सर यह सवाल उठता रहा है कि संबंधित इमारत के पास जरूरी अनुमति थी या नहीं, फायर फाइटिंग उपकरण चालू हालत में थे या नहीं और समय रहते निरीक्षण क्यों नहीं किया गया। नई कानूनी व्यवस्था में इन बिंदुओं को स्पष्ट जिम्मेदारी के साथ जोड़ने की कोशिश की गई है। खास तौर पर ऊंची इमारतों के लिए नियम सख्त रखे गए हैं। सदन में दी गई जानकारी के अनुसार 15 मीटर से अधिक ऊंचाई वाली इमारतों के लिए फायर सेफ्टी एनओसी जरूरी होगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">ऐसे भवनों में आग लगने की स्थिति सामान्य इमारतों से अलग होती है। ऊपरी मंजिलों तक पहुंच, लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने और आग पर नियंत्रण पाने के लिए विशेष उपकरण और पहले से तैयार सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत पड़ती है। इसी वजह से एनओसी प्रक्रिया को अहम माना गया है। कानून का दायरा केवल बहुमंजिला इमारतों तक सीमित नहीं रहेगा। बड़े आयोजनों में लगाए जाने वाले पंडालों को भी फायर सेफ्टी व्यवस्था के तहत लाने का प्रावधान है। जबलपुर उत्तर से भाजपा विधायक अभिलाष पांडे ने विधेयक के समर्थन में चर्चा करते हुए सदन को बताया कि पंडालों के लिए भी अग्नि सुरक्षा संबंधी अनुमति जरूरी होगी। धार्मिक आयोजन, सामाजिक कार्यक्रम, मेले और दूसरे बड़े आयोजनों में अस्थायी पंडाल लगाए जाते हैं, जहां बिजली की वायरिंग, सजावटी सामग्री, कपड़े और बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी के कारण आग का खतरा बढ़ सकता है। नई व्यवस्था के तहत ऐसे आयोजनों में पहले से सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने पर जोर रहेगा। स्कूलों को लेकर भी फायर एनओसी के मापदंड तय किए जाने का प्रावधान है। स्कूल भवनों में बच्चों की संख्या अधिक होने के कारण आपात स्थिति में सुरक्षित निकासी सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक होती है। नियमों के तहत फायर सेफ्टी उपकरण, निकासी मार्ग और दूसरी जरूरी व्यवस्थाओं को निर्धारित मानकों के अनुसार रखना होगा।</p>
<p>विधेयक में आम लोगों की भागीदारी और आपातकालीन सेवाओं के गलत इस्तेमाल को रोकने से जुड़े प्रावधान भी शामिल किए गए हैं। विधायक अभिलाष पांडे के मुताबिक स्वैच्छिक कार्यकर्ताओं की व्यवस्था का प्रावधान रखा गया है, जिससे जरूरत पड़ने पर प्रशिक्षित स्वयंसेवकों की मदद ली जा सके। वहीं आग लगने की झूठी सूचना देकर दमकल और आपातकालीन सेवाओं को बेवजह व्यस्त करने वालों पर आर्थिक दंड लगाने की व्यवस्था भी प्रस्तावित है। फायर ब्रिगेड के लिए झूठी कॉल केवल संसाधनों की बर्बादी का मामला नहीं होती, बल्कि उसी समय किसी वास्तविक घटना में दमकल की जरूरत पड़ने पर रिस्पॉन्स प्रभावित हो सकता है। प्रदेश में फायर स्टेशन नेटवर्क के विस्तार को नए कानून का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। शहरी क्षेत्रों में तेजी से बढ़ती बहुमंजिला इमारतें, व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स, अस्पताल, स्कूल और घनी बस्तियां फायर सेफ्टी के लिहाज से लगातार नई चुनौती पैदा कर रही हैं। दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों में समस्या अलग है। कई गांव निकटतम नगर निकाय या फायर स्टेशन से काफी दूर हैं, इसलिए आग लगने के बाद दमकल पहुंचने तक नुकसान बढ़ने का खतरा रहता है। इसी अंतर को देखते हुए शहरों के लिए 10 मिनट और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 20 मिनट के रिस्पॉन्स टाइम का लक्ष्य सामने रखा गया है।</p>
<p>इसे जमीन पर लागू करने के लिए फायर स्टेशनों की संख्या, दमकल वाहनों की उपलब्धता, प्रशिक्षित कर्मचारियों और स्थानीय स्तर के संसाधनों को बढ़ाने की जरूरत होगी। विधेयक में राज्य स्तर पर प्रशिक्षण संस्थान बनाने का प्रावधान इसी ढांचे से जुड़ा है। यहां अग्निशमन कर्मचारियों को आधुनिक तकनीक, रेस्क्यू ऑपरेशन और अलग-अलग तरह की आपात परिस्थितियों से निपटने का प्रशिक्षण दिया जा सकेगा। मंगलवार को विधानसभा में केवल फायर सेफ्टी से जुड़ा विधेयक ही चर्चा में नहीं रहा। सदन में करीब साढ़े पांच घंटे चली कार्यवाही और चर्चा के दौरान राजमार्ग संशोधन, मध्य प्रदेश कार्यस्थल सशक्तीकरण संहिता और यूसीसी से जुड़े प्रस्ताव समेत कुल आठ विधेयकों को पारित किए जाने की जानकारी सामने आई। इनमें अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाओं से जुड़ा कानून सीधे शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ा है। अब इसके तहत बनने वाले नियमों, फायर स्टेशनों के नेटवर्क, कर्मचारियों की तैनाती, भवनों की एनओसी प्रक्रिया और निरीक्षण व्यवस्था पर आगे की कार्रवाई निर्भर करेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Jul 2026 11:28:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Priyanka ]]></dc:creator>
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                <title>मानसून सत्र का तीसरा दिन आज, अनुपूरक बजट पर चर्चा; सदन में रहेंगे CM मोहन यादव</title>
                                    <description><![CDATA[विधानसभा में वित्तीय प्रस्तावों पर सत्ता पक्ष-विपक्ष के बीच चर्चा के आसार, मुख्यमंत्री दोपहर में सामान्य प्रशासन विभाग की बैठक में भी होंगे शामिल]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/cm-mohan-yadav-will-be-in-the-house-to-discuss/article-59448"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/monsoon-session-day-3.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र का तीसरा दिन गुरुवार, 23 जुलाई को वित्तीय और प्रशासनिक कामकाज के लिहाज से अहम रहने वाला है। विधानसभा में प्रथम अनुपूरक बजट पर चर्चा प्रस्तावित है, जिस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायक अपनी बात रखेंगे। मानसून सत्र के शुरुआती दो दिनों में विधेयकों और दूसरे मुद्दों को लेकर सदन में राजनीतिक हलचल बनी रही, अब तीसरे दिन सरकार के वित्तीय प्रस्ताव चर्चा के केंद्र में रहेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सुबह विधानसभा पहुंचकर सदन की कार्यवाही में शामिल होंगे। दोपहर बाद उनका सामान्य प्रशासन विभाग से जुड़ी बैठक में शामिल होने का कार्यक्रम भी तय है। भोपाल में विधानसभा सत्र के कारण सुबह से ही राजनीतिक गतिविधियां तेज रहने की संभावना है।</p>
<p>मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हुआ है और पांच दिवसीय सत्र में सरकार ने कई महत्वपूर्ण विधायी और वित्तीय कामकाज को एजेंडे में रखा है। सत्र के शुरुआती दिनों में यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी UCC समेत कई विधेयक सदन के सामने आए, जिन्हें लेकर सरकार और विपक्ष आमने-सामने दिखाई दिए। पहले दिन ही UCC सहित कई मसौदा विधेयक पेश किए गए थे और कांग्रेस ने इस पर आपत्ति दर्ज कराई थी। अब तीसरे दिन सदन का फोकस अनुपूरक बजट और उससे जुड़े वित्तीय प्रावधानों पर रहने की उम्मीद है। सरकार को अलग-अलग विभागों और योजनाओं के लिए अतिरिक्त राशि की जरूरत और उसके इस्तेमाल को लेकर सदन में जवाब देना होगा। विपक्ष भी खर्च की प्राथमिकताओं और प्रदेश की वित्तीय स्थिति से जुड़े सवाल उठा सकता है।</p>
<p>मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का गुरुवार का कार्यक्रम भी विधानसभा की गतिविधियों के आसपास केंद्रित रहेगा। उपलब्ध कार्यक्रम के मुताबिक मुख्यमंत्री सुबह 11 बजे विधानसभा की कार्यवाही में शामिल होंगे। सदन में होने वाली चर्चा के दौरान सरकार की ओर से विभिन्न मुद्दों पर जवाब और पक्ष रखा जा सकता है। दोपहर करीब 1:30 बजे मुख्यमंत्री का समय मुलाकातों के लिए आरक्षित बताया गया है। इसके बाद दोपहर 2:30 बजे विधानसभा परिसर के समिति कक्ष क्रमांक-1 में सामान्य प्रशासन विभाग की बैठक प्रस्तावित है। विधानसभा सत्र के बीच होने वाली इस बैठक को प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, हालांकि बैठक के विस्तृत एजेंडे के सभी बिंदु सार्वजनिक जानकारी में स्पष्ट नहीं किए गए हैं।</p>
<p>अनुपूरक बजट पर होने वाली चर्चा तीसरे दिन के कामकाज का प्रमुख हिस्सा रहने की संभावना है। सामान्य तौर पर सरकार मुख्य बजट पारित होने के बाद ऐसी योजनाओं, परियोजनाओं या विभागीय जरूरतों के लिए अतिरिक्त वित्तीय प्रावधान लेकर आती है, जिनके लिए पहले स्वीकृत राशि पर्याप्त नहीं रहती या नई आवश्यकता सामने आती है। ऐसे प्रस्तावों पर विधानसभा में चर्चा होती है और संबंधित खर्च के लिए सदन की मंजूरी ली जाती है। इस दौरान विपक्ष को सरकार से यह पूछने का मौका मिलता है कि अतिरिक्त राशि की जरूरत क्यों पड़ी, पैसा किन योजनाओं पर खर्च किया जाएगा और पहले से स्वीकृत बजट की स्थिति क्या है। इसलिए अनुपूरक बजट की चर्चा केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि सरकार की प्राथमिकताओं पर भी राजनीतिक बहस होती है।</p>
<p>इस बार मानसून सत्र की शुरुआत से ही माहौल राजनीतिक रूप से गर्म रहा है। UCC विधेयक इस सत्र के सबसे चर्चित मुद्दों में शामिल रहा और इसे लेकर कांग्रेस तथा भाजपा के बीच तीखी बयानबाजी देखने को मिली। सरकार इसे समान नागरिक अधिकारों और सामाजिक सुधार की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, जबकि विपक्ष ने विधेयक की प्रक्रिया और कई प्रावधानों पर सवाल उठाए। पहले दिन UCC के साथ कई दूसरे विधेयक भी सदन में पेश किए गए। इस वजह से पांच दिन का यह छोटा सत्र विधायी कामकाज के लिहाज से काफी व्यस्त माना जा रहा है। तीसरे दिन भी विपक्ष दूसरे जनहित के मुद्दों को सदन में उठाने की कोशिश कर सकता है।</p>
<p>प्रदेश के किसानों, कानून-व्यवस्था, रोजगार, सड़क, बिजली, शिक्षा और स्थानीय विकास से जुड़े मुद्दों पर भी सदन में सवाल उठने की संभावना रहती है। मानसून के दौरान कई जिलों में स्थानीय समस्याएं सामने आती हैं, ऐसे में विधायक अपने निर्वाचन क्षेत्रों से जुड़े विषय प्रश्नकाल और अन्य संसदीय प्रक्रियाओं के जरिए उठा सकते हैं। विपक्ष की रणनीति सरकार को जनहित और प्रशासनिक मुद्दों पर घेरने की रहेगी, जबकि सत्ता पक्ष सरकार की योजनाओं और फैसलों को सामने रखने की कोशिश करेगा। सीमित अवधि के इस मानसून सत्र में बड़ी संख्या में विधायी कामकाज होने के कारण प्रत्येक दिन महत्वपूर्ण है। सरकार की कोशिश लंबित विधेयकों और वित्तीय प्रस्तावों को निर्धारित समय के भीतर पूरा कराने की है।</p>
<p>मुख्यमंत्री मोहन यादव की मौजूदगी के कारण सदन की राजनीतिक गतिविधियों पर भी नजर रहेगी। मुख्यमंत्री विधानसभा में सरकार के नेता होने के साथ कई विभागीय और नीतिगत मामलों में सीधे हस्तक्षेप करते हैं। तीसरे दिन उनका अधिकांश कार्यक्रम विधानसभा परिसर में ही केंद्रित है। सदन की कार्यवाही के बाद मुलाकातों के लिए निर्धारित समय के दौरान विधायक और अन्य प्रतिनिधि उनसे क्षेत्रीय या प्रशासनिक विषयों पर चर्चा कर सकते हैं। इसके बाद सामान्य प्रशासन विभाग की बैठक होगी। यह विभाग राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था, सरकारी सेवाओं और कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं से जुड़ा है, इसलिए सत्र के बीच होने वाली बैठक प्रशासनिक स्तर पर भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।</p>
<p>मानसून सत्र में वित्तीय प्रस्ताव इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि चालू वित्त वर्ष के दौरान सरकार को विभिन्न योजनाओं और विकास परियोजनाओं के लिए खर्च की व्यवस्था करनी होती है। मुख्य बजट में अनुमानित राशि तय होने के बावजूद साल के बीच नई परियोजनाएं, अतिरिक्त खर्च या किसी योजना की बढ़ी हुई जरूरत सामने आ सकती है। ऐसी स्थिति में अनुपूरक बजट के जरिए विधानसभा से अतिरिक्त राशि खर्च करने की अनुमति मांगी जाती है। सदन में चर्चा के दौरान विधायक यह जानने की कोशिश करते हैं कि अतिरिक्त आवंटन का फायदा किन क्षेत्रों और वर्गों को मिलेगा। सरकार को भी विभागवार खर्च और प्रस्तावित योजनाओं के बारे में स्थिति स्पष्ट करनी पड़ती है।</p>
<p>सत्र के शुरुआती दिनों में सरकार ने जिस तेजी से विधायी एजेंडा आगे बढ़ाया है, उससे तीसरे दिन भी सदन में लंबा कामकाज होने की संभावना बनी हुई है। विधानसभा का यह मानसून सत्र केवल पांच दिनों के लिए निर्धारित है, इसलिए प्रश्नकाल, विधेयक, वित्तीय प्रस्ताव और दूसरे शासकीय काम एक सीमित समय में पूरे किए जाने हैं। विपक्ष इसी छोटी अवधि को लेकर भी सरकार पर सवाल उठा सकता है। विपक्षी दल आम तौर पर लंबे सत्र की मांग करते रहे हैं ताकि जनहित और क्षेत्रीय मुद्दों पर ज्यादा समय तक चर्चा हो सके। सरकार की ओर से तय एजेंडे के मुताबिक कामकाज पूरा कराने पर जोर रहेगा। जून में सामने आए कार्यक्रम के अनुसार यह पांच दिवसीय सत्र 20 जुलाई से निर्धारित किया गया था।</p>
<p>विधानसभा परिसर के बाहर भी राजनीतिक बयानबाजी जारी रहने की संभावना है। सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायक सदन में जाने से पहले और कार्यवाही के बाद मीडिया के सामने अपनी बात रखते हैं। पिछले दिनों UCC समेत कई मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच तीखे आरोप-प्रत्यारोप देखने को मिले हैं। तीसरे दिन अनुपूरक बजट पर चर्चा के दौरान विपक्ष खर्च, कर्ज और योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठा सकता है। सरकार की तरफ से विकास कार्यों और कल्याणकारी योजनाओं के लिए अतिरिक्त वित्तीय जरूरत का पक्ष रखा जा सकता है। ऐसे में सदन के भीतर वित्तीय चर्चा के साथ राजनीतिक बहस भी तेज रहने के आसार हैं।</p>
<p>मुख्यमंत्री के सामान्य प्रशासन विभाग की बैठक पर भी प्रशासनिक हलकों की नजर रहेगी। विधानसभा सत्र के दौरान विभागीय बैठक होने से कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक विषयों की समीक्षा संभव है। हालांकि उपलब्ध सार्वजनिक कार्यक्रम में बैठक के विस्तृत एजेंडे का उल्लेख नहीं है, इसलिए किसी खास निर्णय को पहले से तय मानना उचित नहीं होगा। बैठक दोपहर 2:30 बजे विधानसभा के समिति कक्ष क्रमांक-1 में प्रस्तावित है। इससे पहले मुख्यमंत्री सदन की कार्यवाही और मुलाकातों में व्यस्त रहेंगे। इस तरह मुख्यमंत्री का दिन राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों गतिविधियों से भरा रहेगा।</p>
<p>भोपाल में विधानसभा सत्र के चलते सुरक्षा और यातायात व्यवस्था पर भी प्रशासन की नजर रहती है। विधानसभा परिसर में विधायकों, मंत्रियों, अधिकारियों और अन्य प्रतिनिधियों की आवाजाही बढ़ने के कारण आसपास के क्षेत्रों में सामान्य दिनों की तुलना में गतिविधियां ज्यादा रहती हैं। सत्र के दौरान अलग-अलग संगठन अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन या ज्ञापन देने भी पहुंचते हैं, इसलिए पुलिस और प्रशासन को अतिरिक्त व्यवस्था करनी पड़ती है। तीसरे दिन भी विधानसभा के आसपास सुरक्षा व्यवस्था बनी रहेगी। राजनीतिक घटनाक्रम के लिहाज से सभी की नजर सदन के भीतर होने वाली चर्चा और सरकार-विपक्ष के रुख पर रहेगी।</p>
<p>मानसून सत्र के बाकी दिनों में भी सरकार के सामने विधायी एजेंडा पूरा करने की चुनौती रहेगी। पांच दिन के इस सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयकों के साथ वित्तीय कामकाज को मंजूरी दिलाना है। UCC जैसे बड़े मुद्दे ने पहले ही सत्र को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया है। अब अनुपूरक बजट पर बहस के जरिए प्रदेश की आर्थिक प्राथमिकताएं और विभिन्न विभागों के लिए अतिरिक्त खर्च का मुद्दा सामने आएगा। मुख्यमंत्री मोहन यादव सुबह 11 बजे से विधानसभा की गतिविधियों में शामिल रहेंगे और दोपहर में प्रशासनिक बैठक करेंगे। तीसरे दिन की कार्यवाही में विपक्ष के सवाल, सरकार के जवाब और वित्तीय प्रस्तावों पर होने वाली बहस प्रमुख राजनीतिक घटनाक्रम रहेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/cm-mohan-yadav-will-be-in-the-house-to-discuss/article-59448</link>
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                <pubDate>Wed, 22 Jul 2026 11:02:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Priyanka ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मध्य प्रदेश में फिर सक्रिय हुआ मानसून, 15 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, अगले चार दिन जमकर बरसेंगे बादल</title>
                                    <description><![CDATA[भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर समेत कई जिलों में अच्छी बारिश के आसार, मौसम विभाग ने कुछ इलाकों में 24 घंटे में 8 इंच तक वर्षा की संभावना जताई]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/monsoon-becomes-active-again-in-madhya-pradesh-heavy-rain-alert/article-59437"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/madhya-pradesh-weather-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">मध्य प्रदेश में कई दिनों की सुस्ती के बाद मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। पिछले करीब 36 घंटों से प्रदेश के 35 से अधिक जिलों में लगातार बारिश दर्ज की जा रही है। मौसम विभाग का कहना है कि अगले चार दिनों तक बारिश का यह सिलसिला जारी रहेगा और कई इलाकों में तेज बारिश देखने को मिल सकती है। बुधवार के लिए शिवपुरी, गुना, सागर और डिंडौरी सहित 15 जिलों में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इसके अलावा श्योपुर, अशोकनगर, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, दमोह, नीमच, मंदसौर, उज्जैन, धार और बड़वानी में भी भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। राजधानी भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और आसपास के क्षेत्रों में भी अच्छी बारिश की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग ने कुछ इलाकों में अगले 24 घंटे के दौरान करीब 8 इंच तक बारिश होने की आशंका व्यक्त की है।</p>
<p>लगातार हो रही बारिश का असर अब प्रदेश के बारिश के आंकड़ों में भी दिखाई देने लगा है। कुछ दिन पहले तक मध्य प्रदेश सामान्य से काफी कम वर्षा वाले राज्यों में शामिल था, लेकिन ताजा बारिश के बाद स्थिति में सुधार आया है। सोमवार तक प्रदेश में सामान्य से 17 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई थी, जो मंगलवार तक घटकर 14 प्रतिशत रह गई। अब तक मध्य प्रदेश में 286.8 मिलीमीटर यानी लगभग 11.3 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई है, जबकि इस अवधि में सामान्य वर्षा 335.3 मिलीमीटर यानी करीब 13.2 इंच होनी चाहिए थी। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों तक बारिश इसी तरह जारी रही तो वर्षा की कमी और तेजी से कम हो सकती है।</p>
<p>हालांकि ताजा बारिश के बावजूद प्रदेश के 41 जिलों में अब भी सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है। पूर्वी मध्य प्रदेश के कई जिले अभी भी पर्याप्त बारिश का इंतजार कर रहे हैं। मौसम विभाग के अनुसार पूर्वी हिस्से में 18 प्रतिशत और पश्चिमी मध्य प्रदेश में 11 प्रतिशत बारिश की कमी बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि जुलाई का अंतिम सप्ताह प्रदेश के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहेगा, क्योंकि इसी दौरान अच्छी बारिश होने पर खरीफ फसलों की स्थिति मजबूत होगी और जलाशयों में भी पर्याप्त पानी पहुंच सकेगा।</p>
<p>बारिश के आंकड़ों पर नजर डालें तो देवास इस समय प्रदेश का सबसे अधिक बारिश वाला जिला बन गया है। यहां अब तक लगभग 18.4 इंच वर्षा दर्ज की जा चुकी है। इसके अलावा भोपाल, इंदौर, सीहोर, हरदा, उज्जैन, राजगढ़, नीमच, खंडवा और खरगोन सहित कुल 14 जिलों में सामान्य से अधिक बारिश हुई है। दूसरी ओर आलीराजपुर अभी भी सबसे पीछे बना हुआ है, जहां अब तक केवल लगभग 2 इंच बारिश दर्ज की गई है। कई अन्य जिलों में भी सामान्य से काफी कम वर्षा होने के कारण किसान मानसून के पूरी तरह सक्रिय होने का इंतजार कर रहे हैं।</p>
<p>मौसम विभाग के अनुसार वर्तमान में मानसून प्रणाली फिर से मजबूत हुई है, जिसके कारण पूरे प्रदेश में बारिश की गतिविधियां बढ़ी हैं। बंगाल की खाड़ी से लगातार नमी मिलने और सक्रिय मानसूनी द्रोणिका के प्रभाव से बादलों का घनत्व बढ़ा है। इसी वजह से कई जिलों में तेज बारिश, गरज-चमक और कहीं-कहीं तेज हवाएं चलने की संभावना बनी हुई है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि जिन जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है वहां लोगों को विशेष सतर्क रहने की जरूरत है। निचले इलाकों में जलभराव, छोटे नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने और ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन प्रभावित होने जैसी स्थिति बन सकती है।</p>
<p>लगातार बारिश से किसानों को भी राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। जून महीने में सामान्य से कम बारिश होने के कारण खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हुई थी। जुलाई के शुरुआती दिनों में कुछ राहत जरूर मिली, लेकिन इसके बाद करीब नौ दिनों तक मानसून कमजोर पड़ गया, जिससे बारिश का घाटा फिर बढ़ गया। अब मानसून के दोबारा सक्रिय होने से धान, सोयाबीन, मक्का, उड़द और अन्य खरीफ फसलों को फायदा मिलने की संभावना है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर अच्छी बारिश होने से फसलों की वृद्धि बेहतर होगी और सिंचाई पर किसानों की निर्भरता भी कम होगी।</p>
<p>प्रदेश के कई जलाशयों और बांधों में भी लगातार बारिश का असर दिखाई देने लगा है। जिन जलाशयों में अब तक पानी का स्तर कम था, वहां धीरे-धीरे जलभराव बढ़ रहा है। इससे आने वाले महीनों में पेयजल और सिंचाई दोनों के लिए राहत मिलने की उम्मीद है। प्रशासन ने संभावित भारी बारिश को देखते हुए जिला स्तर पर अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। आपदा प्रबंधन दलों को भी अलर्ट मोड पर रखा गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल सहायता पहुंचाई जा सके।</p>
<p>मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि भारी बारिश के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें, नदी-नालों के पास जाने से परहेज करें और बिजली गिरने की संभावना वाले समय में खुले स्थानों पर खड़े न रहें। अगले चार दिनों तक प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। यदि यही स्थिति बनी रहती है तो मध्य प्रदेश में बारिश का मौजूदा घाटा काफी हद तक कम हो सकता है और मानसून का यह दौर किसानों, जल संसाधनों और आम लोगों के लिए राहत लेकर आएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Jul 2026 08:57:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भोपाल टुडे 23 जुलाई: विधानसभा में अनुपूरक बजट पर चर्चा, सावन में डाकघर की नई सुविधा समेत कई अहम आयोजन</title>
                                    <description><![CDATA[मानसून सत्र का तीसरा दिन, मुख्यमंत्री के कार्यक्रम, धरौली कोल माइंस जनसुनवाई, ट्रेनों की जानकारी, हज आवेदन, खेल, कला और शिक्षा से जुड़े आज के प्रमुख अपडेट एक नजर में।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/bhopal-today-23-july-discussion-on-supplementary-budget-in-the/article-59433"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/bhopal-today-news.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल और प्रदेशभर में आज यानी 23 जुलाई का दिन राजनीतिक, प्रशासनिक, धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिहाज से काफी अहम रहने वाला है। विधानसभा के मानसून सत्र का तीसरा दिन होने के कारण सभी की निगाहें सदन की कार्यवाही पर टिकी रहेंगी। सरकार आज 7,765.77 करोड़ रुपए के प्रथम अनुपूरक बजट पर चर्चा कराएगी, जबकि विपक्ष विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है। इसके अलावा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम निर्धारित हैं। दूसरी ओर सावन के महीने में श्रद्धालुओं के लिए डाक विभाग ने विशेष गंगाजल सुविधा शुरू की है। वहीं सिंगरौली में धरौली कोल माइंस परियोजना की जनसुनवाई, भोपाल में सांस्कृतिक कार्यक्रम, खेल प्रतियोगिताएं और शिक्षा से जुड़े आयोजन भी पूरे दिन चर्चा में रहेंगे। आइए जानते हैं आज के सभी बड़े अपडेट।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><span><strong>आज के प्रमुख अपडेट</strong></span></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span><strong>1. विधानसभा में अनुपूरक बजट पर चर्चा</strong></span></h5>
<ul style="text-align:justify;">
<li>मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र का आज तीसरा दिन।</li>
<li>7,765.77 करोड़ रुपए के प्रथम अनुपूरक बजट पर चर्चा होगी।</li>
<li>सिंचाई, परिवहन, शिक्षा, पुलिस आधुनिकीकरण और विकास कार्यों के लिए अतिरिक्त राशि का प्रावधान।</li>
<li>विपक्ष सरकार को कई मुद्दों पर घेरने की तैयारी में।</li>
<li>हंगामे और तीखी बहस की संभावना।</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><span><strong>2. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कार्यक्रम</strong></span></h5>
<ul style="text-align:justify;">
<li>सुबह 11 बजे विधानसभा की कार्यवाही में शामिल होंगे।</li>
<li>दोपहर 1:30 बजे मुलाकात के लिए समय आरक्षित।</li>
<li>दोपहर 2:30 बजे समिति कक्ष-1 में सामान्य प्रशासन विभाग की बैठक करेंगे।</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><span><strong>3. सावन में डाकघर की विशेष सुविधा</strong></span></h5>
<ul style="text-align:justify;">
<li>प्रदेश के 43 प्रधान डाकघरों में सीलबंद गंगाजल उपलब्ध रहेगा।</li>
<li>श्रद्धालु 30 रुपए में गंगोत्री और ऋषिकेश का गंगाजल खरीद सकेंगे।</li>
<li>विशेष काउंटर और शिविर लगाकर वितरण किया जाएगा।</li>
<li>जलाभिषेक करने वाले श्रद्धालुओं को बड़ी राहत मिलेगी।</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><span><strong>4. धरौली कोल माइंस परियोजना की जनसुनवाई</strong></span></h5>
<ul style="text-align:justify;">
<li>सिंगरौली में रेलवे लाइन परियोजना को लेकर आज जनसुनवाई।</li>
<li>ग्रामीणों ने उचित मुआवजे और पारदर्शी भूमि अधिग्रहण की मांग रखी।</li>
<li>2013 के भूमि अधिग्रहण कानून के तहत कार्रवाई होने पर सहमति।</li>
<li>अन्य प्रक्रिया अपनाने पर विरोध की चेतावनी।</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><span><strong>5. हज-2027 के लिए आवेदन शुरू</strong></span></h5>
<ul style="text-align:justify;">
<li>हज कमेटी ऑफ इंडिया ने ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू की।</li>
<li>मध्य प्रदेश राज्य हज कमेटी ने पात्र लोगों से समय पर आवेदन करने की अपील की।</li>
<li>आवेदन पूरी तरह ऑनलाइन माध्यम से किए जाएंगे।</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><span><strong>6. जोधपुर-चेन्नई समर स्पेशल ट्रेन</strong></span></h5>
<ul style="text-align:justify;">
<li>25 जुलाई तक प्रत्येक शनिवार संचालित होगी।</li>
<li>मध्य प्रदेश के कई प्रमुख स्टेशनों से यात्रियों को सुविधा मिलेगी।</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><span><strong>7. कानपुर-मदुरै स्पेशल ट्रेन</strong></span></h5>
<ul style="text-align:justify;">
<li>प्रत्येक बुधवार विशेष ट्रेन का संचालन।</li>
<li>भोपाल, बीना और इटारसी में स्टॉपेज रहेगा।</li>
<li>यात्रियों को अतिरिक्त यात्रा सुविधा मिलेगी।</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><span><strong>8. टीटी नगर स्टेडियम में एथलेटिक्स ट्रायल</strong></span></h5>
<ul style="text-align:justify;">
<li>टैलेंट सर्च अभियान 2026-27 के तहत चयन ट्रायल।</li>
<li>बालक और बालिका वर्ग के खिलाड़ी भाग लेंगे।</li>
<li>खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने की पहल।</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><span><strong>9. जनजातीय चित्र प्रदर्शनी</strong></span></h5>
<ul style="text-align:justify;">
<li>मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय में भील चित्रकार सुनीता परमार की प्रदर्शनी।</li>
<li>30 जुलाई तक दर्शकों के लिए खुली रहेगी।</li>
<li>जनजातीय कला और संस्कृति को करीब से जानने का अवसर।</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><span><strong>10. राष्ट्रीय संस्कृत रूपक-निर्देशन कार्यशाला</strong></span></h5>
<ul style="text-align:justify;">
<li>केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय भोपाल परिसर में आयोजन।</li>
<li>27 जुलाई तक चलेगी कार्यशाला।</li>
<li>संस्कृत रंगमंच और अभिनय पर विशेष प्रशिक्षण।</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><span><strong>11. जामिया और आईईएचई में नए शैक्षणिक बदलाव</strong></span></h5>
<ul style="text-align:justify;">
<li>जामिया मिलिया इस्लामिया ने अपने ऑनलाइन कोर्स शुरू किए।</li>
<li>आईईएचई में ई-प्रवेश और नई काउंसलिंग प्रक्रिया लागू होगी।</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">आज राजधानी भोपाल में राजनीतिक गतिविधियों के साथ-साथ धार्मिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक कार्यक्रमों की भी भरमार रहेगी। विधानसभा की कार्यवाही से लेकर मुख्यमंत्री की बैठकों तक कई महत्वपूर्ण फैसलों पर नजर रहेगी। वहीं सावन के दौरान श्रद्धालुओं के लिए शुरू की गई गंगाजल सुविधा लोगों के लिए खास आकर्षण बनी हुई है। सिंगरौली की जनसुनवाई, रेलवे की विशेष ट्रेनों, खेल ट्रायल और कला प्रदर्शनियों के चलते प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में भी पूरे दिन हलचल बनी रहेगी। ऐसे में 23 जुलाई का दिन मध्य प्रदेश के लिए कई मायनों में महत्वपूर्ण रहने वाला है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>जागरण इवेन्ट</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
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                <pubDate>Wed, 22 Jul 2026 08:23:19 +0530</pubDate>
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