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                <title>सत्यकथा - दैनिक जागरण</title>
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                <title>दिल्ली में चलती बस में महिला से गैंगरेप की सनसनीखेज वारदात</title>
                                    <description><![CDATA[रानी बाग इलाके में स्लीपर बस के अंदर विवाहिता से दरिंदगी, पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया, मामला निर्भया कांड की याद दिलाता है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/satyakatha/sensational-incident-of-gang-rape-of-a-woman-in-a/article-54912"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/rani-bagh-case-delhi.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एक बार फिर चलती बस के अंदर महिला सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। 11 मई की देर रात रानी बाग इलाके में एक 30 वर्षीय विवाहिता के साथ कथित तौर पर चलती स्लीपर बस में सामूहिक दुष्कर्म की सनसनीखेज घटना सामने आई है। पीड़िता ने आरोप लगाया है कि रात की शिफ्ट से घर लौटते समय उसे जबरन बस में खींचकर वारदात को अंजाम दिया गया। पुलिस ने मामला दर्ज कर दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और बस को जब्त कर जांच शुरू कर दी है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><span><strong>रात में बस में वारदात</strong></span></h5>
<p style="text-align:justify;">घटना 11 मई की रात उस समय हुई जब पीड़िता फैक्ट्री से काम खत्म कर घर लौट रही थी। आरोप है कि बस स्टैंड पर खड़ी एक स्लीपर बस में सवार होने के बाद उसे जबरन अंदर खींच लिया गया। शुरुआती जांच के अनुसार बस में ड्राइवर और कंडक्टर मौजूद थे, जिन्होंने कथित रूप से अपराध को अंजाम दिया। पीड़िता का आरोप है कि बस के अंदर उसे धमकाकर और मारपीट कर शारीरिक शोषण किया गया।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><span><strong>चलती बस का रास्ता</strong></span></h5>
<p style="text-align:justify;">पुलिस जांच में सामने आया है कि घटना के दौरान बस दिल्ली के व्यस्त इलाकों से गुजरती रही। आरोप है कि बस के शीशों पर पर्दे लगे होने के कारण अंदर की गतिविधियां बाहर दिखाई नहीं दे रही थीं। इसी दौरान करीब दो घंटे तक यह घटना चलती रही। बाद में पीड़िता को गंभीर हालत में सड़क किनारे छोड़ दिया गया।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><span><strong>पुलिस की त्वरित कार्रवाई</strong></span></h5>
<p style="text-align:justify;">सूचना मिलते ही रानी बाग पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। बिहार नंबर प्लेट वाली बस को जब्त कर लिया गया है। पुलिस ने चालक और सहायक को गिरफ्तार कर लिया है। उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि डिजिटल सबूत और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><span><strong>पीड़िता की स्थिति और बयान</strong></span></h5>
<p style="text-align:justify;">पीड़िता को तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने दुष्कर्म की पुष्टि की। हालांकि गंभीर चोटों के बावजूद उसने अस्पताल में भर्ती होने से इनकार कर दिया। बताया गया है कि उसके परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर है और घर में छोटे बच्चे और बीमार पति हैं, जिसके चलते वह उपचार जारी नहीं रख सकी।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><span><strong>वाहन सुरक्षा पर सवाल</strong></span></h5>
<p style="text-align:justify;">जांच में यह भी सामने आया है कि बस में टिंटेड ग्लास और भारी पर्दे लगे थे, जो नियमों के खिलाफ है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद कई सार्वजनिक वाहनों में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि बस किसकी अनुमति से चल रही थी और इसमें सुरक्षा नियमों की अनदेखी कैसे हुई।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><span><strong>जांच में नए सवाल</strong></span></h5>
<p style="text-align:justify;">पुलिस सूत्रों के अनुसार मामले में कुछ संदिग्ध पहलू भी सामने आए हैं। शुरुआती कॉल और पीड़िता के बयान को लेकर भी जांच की जा रही है। हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना अभी जल्दबाजी होगी और सभी पहलुओं की जांच जारी है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><span><strong>निर्भया कांड से तुलना</strong></span></h5>
<p style="text-align:justify;">इस घटना ने 2012 के निर्भया कांड की यादें फिर से ताजा कर दी हैं, जिसमें चलती बस में महिला के साथ क्रूर अपराध हुआ था। उस घटना के बाद देशभर में कानून और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़े बदलाव किए गए थे, लेकिन ऐसी घटनाओं का फिर सामने आना व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सत्यकथा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 18:34:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>जबलपुर आरक्षक हत्याकांड: एक फोन कॉल से खुला पूरा राज</title>
                                    <description><![CDATA[हत्या, जांच और तीन अलग-अलग कहानियों के बीच उलझा सच]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/satyakatha/jabalpur-constable-murder-case-whole-secret-revealed-by-one-phone/article-54789"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/jabalpur-murder-case.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">जबलपुर में छठवीं बटालियन में पदस्थ आरक्षक राजेश बेन की हत्या का मामला उस समय पूरे इलाके में सनसनी बन गया था, जब 2017 में उनका शव झाड़ियों में मिला। शुरुआत में यह एक अज्ञात हत्या का मामला लगा, लेकिन धीरे-धीरे पुलिस जांच, सोशल मीडिया पहचान और एक फोन कॉल की रिकॉर्डिंग ने इस केस की दिशा ही बदल दी।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस की शुरुआती जांच में शव की हालत देखकर यह स्पष्ट हो गया था कि यह सामान्य मौत नहीं, बल्कि गला दबाकर की गई हत्या है। शव की पहचान तब हुई जब सोशल मीडिया पर तस्वीरें फैलने के बाद एक आरक्षक ने कलाई पर बने टैटू देखकर पहचान की पुष्टि की। इसके बाद मामला तेजी से आगे बढ़ा और जांच का केंद्र मृतक की पत्नी पर आकर टिक गया।</p>
<p style="text-align:justify;">जांच का सबसे अहम मोड़ तब आया जब एक महिला आरक्षक ने पुलिस को एक फोन कॉल की रिकॉर्डिंग भेजी। इस रिकॉर्डिंग में कथित तौर पर मृतक की पत्नी अपने भाई से शव को ठिकाने लगाने में मदद मांगती हुई सुनाई दी। इसी रिकॉर्डिंग ने पूरे मामले को नई दिशा दी और पुलिस को शक के घेरे को मजबूत आधार मिला। इसके बाद पुलिस ने पत्नी से पूछताछ की, जिसमें शुरुआती इनकार के बाद कई अहम खुलासे हुए। पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर मामले की तह तक जाने की कोशिश की। पुलिस जांच के दौरान यह सामने आया कि हत्या में केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि कई लोगों की भूमिका हो सकती है। जांच में पत्नी के साथ उसकी चचेरी बहन और एक अन्य नाबालिग सहेली के शामिल होने की बात भी सामने आई। पुलिस ने दावा किया कि हत्या में इस्तेमाल कपड़ा और वाहन भी बरामद किए गए। जांच के अनुसार घटना के बाद शव को घर में कई घंटों तक छिपाकर रखा गया और फिर देर से उसे ठिकाने लगाने की कोशिश की गई।</p>
<p style="text-align:justify;">जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, मामला और जटिल होता गया। एक ओर पुलिस की जांच में घरेलू विवाद और प्रताड़ना को कारण बताया गया, वहीं दूसरी ओर परिजनों ने पूरी कहानी को अलग नजरिए से पेश किया। परिजनों ने आरोप लगाया कि हत्या के पीछे आर्थिक विवाद और बाहरी संबंधों की भूमिका हो सकती है। उनका दावा था कि यह केवल घरेलू हिंसा का मामला नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश भी हो सकती है। इस पूरे मामले की सबसे बड़ी जटिलता यह रही कि एक ही हत्या के पीछे तीन अलग-अलग कहानियां सामने आईं। पहली कहानी पुलिस और आरोपी पक्ष की ओर से घरेलू विवाद और प्रताड़ना को कारण बताती है। दूसरी कहानी परिजनों द्वारा आर्थिक और निजी संबंधों को कारण मानती है। तीसरी कहानी चर्चाओं के आधार पर व्यक्तिगत विवादों और आपसी तनाव को जिम्मेदार ठहराती है। इन अलग-अलग दावों ने जांच को और पेचीदा बना दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">इस केस में पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती साक्ष्यों और बयानों के बीच तालमेल बैठाने की थी। फोन रिकॉर्डिंग, गवाहों के बयान और घटनास्थल से मिले सबूतों के आधार पर जांच आगे बढ़ी। लेकिन लगातार बदलते बयान और नए आरोपों ने केस को जटिल बना दिया। पुलिस अधिकारियों का मानना था कि यह मामला केवल एक साधारण हत्या नहीं, बल्कि कई स्तरों पर जुड़ा हुआ विवाद है, जिसमें पारिवारिक और व्यक्तिगत कारण दोनों शामिल हो सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इस घटना ने स्थानीय स्तर पर कई सवाल खड़े कर दिए। क्या घरेलू विवाद इतने बड़े अपराध में बदल सकते हैं? क्या तकनीक जैसे फोन रिकॉर्डिंग आज अपराध सुलझाने में सबसे बड़ा सबूत बन चुकी है? और क्या हर कहानी के पीछे एक ही सच होता है? यह मामला केवल एक हत्या तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह एक ऐसा केस बन गया जिसमें सच और दावों के बीच की रेखा धुंधली हो गई। जबलपुर आरक्षक हत्याकांड एक ऐसा मामला है जिसने यह दिखाया कि आधुनिक जांच तकनीक और मानवीय रिश्तों की जटिलता मिलकर कैसे एक अपराध की पूरी तस्वीर बदल सकती है। एक फोन कॉल ने जहां जांच की दिशा तय की, वहीं अलग-अलग कहानियों ने इस केस को रहस्यमय बनाए रखा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सत्यकथा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 18:31:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>गवाही गमछे की: शादी में हुई मासूम की हत्या का खुलासा</title>
                                    <description><![CDATA[मुरैना के रामपाल का पुरा गांव में रिश्तों के शक ने ले ली 7 साल की तनु की जान, गमछे ने खोला पूरा राज]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/satyakatha/testimony-reveals-murder-of-innocent-child-at-gamchas-wedding/article-54796"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/morena-crime-news.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">मुरैना जिले के चिन्नोन थाना क्षेत्र के रामपाल का पुरा गांव में हुई एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे इलाके को हिला दिया है। शादी समारोह के बीच 7 साल की मासूम बच्ची तनु की हत्या ने रिश्तों, शक और गुस्से की ऐसी कहानी सामने रख दी, जिसने हर किसी को स्तब्ध कर दिया। शुरुआती जांच में जो मामला एक सामान्य गुमशुदगी जैसा लग रहा था, वह धीरे-धीरे एक जघन्य हत्या की गुत्थी में बदल गया, और इस पूरे केस की सबसे अहम कड़ी बना एक गमछा।</p>
<p class="isSelectedEnd">घटना 12 मई की सुबह सामने आई जब शादी समारोह में शामिल परिवार को पता चला कि तनु अपने दादा रघुनाथ सिंह के पास नहीं है। रात भर शादी में नाच-गाना चलता रहा था और सभी लोग थककर सो गए थे। सुबह जब बच्ची की तलाश शुरू हुई तो पहले उसे आसपास के गांव और खेतों में ढूंढा गया, लेकिन कुछ घंटों बाद एक सुनसान इलाके में गुफा जैसे गड्ढे में उसका शव मिला। बच्ची के हाथ-पैर एक नए गमछे से बंधे थे और सिर पर पत्थर से वार किया गया था। इस दृश्य ने पूरे परिवार और गांव को सदमे में डाल दिया। पुलिस के अनुसार, शुरुआती जांच में यह मामला किसी बाहरी व्यक्ति द्वारा किए गए अपराध जैसा लग रहा था, लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, शक की सुई शादी में शामिल लोगों की ओर घूमने लगी। मौके पर मिले गमछे ने जांच को निर्णायक दिशा दी। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुरेन्द्र पाल सिंह ने मौके पर पहुंचकर जांच संभाली और परिवार से जानकारी जुटानी शुरू की। जब बच्ची के पिता ने गमछे को पहचाना और बताया कि यह रामदीन जाटव का हो सकता है, तो पुलिस का शक गहरा गया।</p>
<p class="isSelectedEnd">फोटोग्राफी और वीडियो रिकॉर्डिंग की मदद से पुलिस ने जब शादी समारोह के फुटेज खंगाले, तो सामने आया कि रामदीन ने उसी तरह का गमछा अपने सिर पर बांध रखा था। यही सुराग पुलिस के लिए सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ। इसके बाद हिरासत में लेकर पूछताछ की गई तो पूरा मामला खुलता चला गया। पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया। जांच में सामने आया कि रामदीन और रघुनाथ पड़ोसी हैं और उनके बीच बकरियों के कारोबार को लेकर आर्थिक संबंध भी हैं। रघुनाथ बकरी खरीद-फरोख्त का हिसाब रखता था और इसी कारण उसका रामदीन के घर आना-जाना लगा रहता था। इसी दौरान रामदीन की पत्नी को लेकर उसके मन में शक पैदा हो गया। उसे लगता था कि रघुनाथ का उसकी पत्नी से संबंध है, जबकि इसके पीछे कोई ठोस आधार नहीं था। धीरे-धीरे यह शक उसके दिमाग में गहराता गया और उसने बदले की भावना पाल ली।</p>
<p class="isSelectedEnd">पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आरोपी के मन में यह धारणा मजबूत हो गई थी कि रघुनाथ उसकी गैरमौजूदगी में उसकी पत्नी के करीब आता है। गांव में फैली छोटी-छोटी बातों और अपनी कल्पनाओं के आधार पर उसने एक खतरनाक योजना बना ली। 11 मई की रात शादी समारोह के दौरान जब सभी लोग व्यस्त थे, तब उसने मौका देखकर बच्ची को उठा लिया। इसके बाद सुनसान जगह पर ले जाकर उसके हाथ-पैर गमछे से बांधे और सिर पर पत्थर से वार कर उसकी हत्या कर दी। हत्या के बाद वह दोबारा शादी समारोह में लौट आया और सामान्य व्यवहार करता रहा, ताकि किसी को शक न हो। अगले दिन जब बच्ची की तलाश शुरू हुई, तो वह भी भीड़ में शामिल होकर खोज में हिस्सा लेता रहा। लेकिन पुलिस की जांच और गमछे की पहचान ने उसकी पूरी कहानी उजागर कर दी।</p>
<p class="isSelectedEnd">गांव में इस घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं भी सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे शक और भ्रम का परिणाम बता रहे हैं, तो कुछ का कहना है कि आरोपी ने पहले से ही इस तरह की योजना बना रखी थी। हालांकि पुलिस का कहना है कि जांच में मिले सबूत और स्वीकारोक्ति के आधार पर मामला स्पष्ट हो चुका है। यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि व्यक्तिगत शक और मानसिक असंतुलन किस तरह समाज में बड़े अपराध को जन्म दे सकता है। एक मासूम बच्ची की जान उस विवाद का शिकार हो गई, जिसका उससे कोई संबंध ही नहीं था। आरोपी पुलिस हिरासत में है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सत्यकथा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 18:30:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सत्यकथा: रास्ते का कांटा बन रहे प्रेमिका के पति को आशिक ने उतारा मौत के घाट</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">चार अप्रैल की सुबह मैहर जिले के अमरपाटन थाने की सीमा में पडक्का औद्योगिक इलाके झन्ना नाले के पास किसी युवक की रक्त रंजित लाश पड़ी होने की सूचना पाकर जब अमरपाटन टीआई विजय सिंह परस्ते मौके पर पहुंचे तो शव की स्थिति देखते की उनके सामने यह बात साफ हो गई कि युवक की हत्या की गई है। शव के पेट गर्दन और चेहरे में गहरे घाव थे। घटनास्थल के आसपास खून भी बिखरा पड़ा था जिससे साफ था कि युवक की हत्या मौके पर ही की गई है। टीआई परस्ते ने मौके से ही घटना की जानकारी एसडीओपी</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/satyakatha/lover-killed-girlfriends-husband-who-was-becoming-a-thorn-in/article-53879"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/satyakatha-(4).jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">चार अप्रैल की सुबह मैहर जिले के अमरपाटन थाने की सीमा में पडक्का औद्योगिक इलाके झन्ना नाले के पास किसी युवक की रक्त रंजित लाश पड़ी होने की सूचना पाकर जब अमरपाटन टीआई विजय सिंह परस्ते मौके पर पहुंचे तो शव की स्थिति देखते की उनके सामने यह बात साफ हो गई कि युवक की हत्या की गई है। शव के पेट गर्दन और चेहरे में गहरे घाव थे। घटनास्थल के आसपास खून भी बिखरा पड़ा था जिससे साफ था कि युवक की हत्या मौके पर ही की गई है। टीआई परस्ते ने मौके से ही घटना की जानकारी एसडीओपी ख्याति मिश्रा को दे दी। जिससे सुश्री ख्याति मिश्रा ने इस बात की जानकारी एडीशनल एसपी डॉ. चंचल नागर और एसपी मैहर अवधेश प्रताप सिंह को देकर स्वयं मौके पर पहुंच गई।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पुलिस ने शव की शिनाख्ती का प्रयास किया जिसमें जल्द ही उसकी पहचान मौहरिया जगन्नाथ गांव निवासी </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">26<span lang="hi" xml:lang="hi"> वर्षीय राजभान कोल के रूप में हो गई। परिवार ने पूछताछ में बताया कि कल शाम को किसी ने उसे फोन कर बुलाया था जिसके बाद वह रात भर घर नहीं लौटा। पास पड़ोस वालों के अनुसार राजभान भला आदमी था उसकी किसी से कोई रंजिश नहीं थी। साल भर पहले ही उसकी शादी पास के गांव में रहने वाली निशा कोल से हुई थी।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;"><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-05/satna.jpg" alt="SATNA" width="1600" height="900"></img></span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पुलिस ने निशा से भी पूछताछ की जिसमें उसे कुछ हाथ नहीं लगा। इसी बीच पुलिस को राजभान के मोबाइल की काल डिटेल मिली जिसमें उसके पास आखिरी फोन निशा के मायके में रहने वाले दिलीप पटेल नाम के युवक का मिला। जब इस बारे में पूछा गया तो मृतक के पिता ने बताया कि बहू के गांव का दिलीप अक्सर उसके घर आता था।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इससे पुलिस का शक निशा और दिलीप के बीच अवैध संबंध को लेकर गहरा गया इसलिए पुलिस ने दिलीप को उठाकर सख्ती से पूछताछ की जिसमें कुछ ही देर में दिलीप पटेल टूट गया। उसने राजभान की हत्या की बात स्वीकार करते हुए बताया कि निशा उसके बचपन की प्रेमिका है। शादी के बाद वह निशा को भूल नहीं पा रहा था इसलिए उसने अपने दोस्त विजेन्द्र उर्फ बिज्जू</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">करन केवट और दो अन्य के साथ मिलकर उसकी हत्या कर दी। पुलिस ने तुरंत बिज्जू को भी गिरफ्तार कर लिया लेकिन करन और दो अन्य फरार हो गए। जिसके बाद आरोपियों से की गई पूछताछ में कहानी इस प्रकार सामने आई।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भगवान ने निशा को सांवला रंग देकर भी नाक नक्श ऐसे दिए थे कि जो नजर उस पर जाती पर<span>  </span>ठहर का रह जाती थी। किशोर उम्र में ही गांव के कई युवक निशा के दीवाने हो चुके थे। जिनमें से एक दिलीप पटेल भी था। दिलीप संपन्न परिवार से था इसलिए उसका रहन सहन भी दूसरे युवकों की तुलना में शहरी और चमक दमक से भरा था। किशोर उम्र अक्सर ऐसी चमक दमक से प्रभावित हो ही जाती है। इसलिए निशा ने जब देखा कि दिलीप उसके आगे-पीछे घूमता रहता है तो उसने दिलीप के प्रति अपने दिल की लगाम ढीली छोड़ दी। यह देख एक रोज साहस करके सुनसान खेत में दिलीप ने निशा की कलाई पकड़ ली।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-05/satana-satyakatha.jpg" alt="SATANA satyakatha" width="1271" height="738"></img></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">छोड़ो कोई देख लेगा तो आफत हो जाएगी। निशा ने घबड़ाकर कहा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मैं तुम्हारे लिए हर आफत से लड़ने तैयार हूं बस तुम हां कह दो।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">तुम रईसों का क्या भरोसा आज मेरा हाथ पकड़ रहे हो कल किसी और का थाम लोगे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मेरा भरोसा करो निशा कभी तुम्हारा साथ नहीं छोडूंगा</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">निशा को अपने पास खींचते हुए दिलीप ने कहा ने तो निशा चुपचाप उसके सीने से लग गई।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इसके बाद दोनों की प्रेम कहानी जो शुरू हुई तो सारी मर्यादाएं तोड़ते हुए दोनों आधी रात में भी छुपकर मिलने लगे। दिलीप तो मानो निशा के प्यार करने के अंदाज का दीवाना ही हो गया था। तो दूसरी तरफ किशोर उम्र में ही शारीरिक रिश्ते का सुख पाकर निशा भी दिलीप के लिए पागल हो चुकी थी। लेकिन चंद सालों के बाद ही निशा ने जैसे ही जवानी में पैर रखा उसके परिवार ने निशा की शादी राजभान कोल से कर दी। दिलीप निशा को खोना नहीं चाहता था लेकिन अलग समाज की होने के कारण निशा से शादी नहीं कर सकता था इसलिए अपना मन मारकर रह गया।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><img style="margin-left:auto;margin-right:auto;" src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-05/saing-23.jpg" alt="SAING 23" width="289" height="329"></img></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">निशा का पति राजभान भी उसे बेहद प्यार करता था इसलिए निशा जल्द ही राजभान के प्यार में प्रेमी को भूलने लगी। लेकिन यहां निशा के प्यार का दीवाना दिलीप उसे भूल नहीं पा रहा था। इसलिए एक बार जब राजभान किसी काम से ससुराल आया तो दिलीप ने उससे दोस्ती कर ली और इसी दोस्ती के बहाने वह अक्सर राजभान के घर जाने लगा। निशा ने पुराने प्रेमी को पति के दोस्त के रूप में घर आते देखा तो वह समझ गई कि उसका मकसद क्या है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">उसे डर भी लगा और अपने बचपन के यार की यह दीवानगी अच्छी भी लगी। इसलिए जब भी राजभान आता वह किसी न किसी बहाने उसके साथ दो-चार घड़ी बैठकर बात कर लेती। राजभान भी इस बात का बुरा नहीं मानता था। लेकिन धीरे-धीरे दिलीप का आना-जाना अक्सर होने लगा था इस दौरान उसने निशा का मोबाइल नंबर लेकर उससे बातें करना भी शुरू कर दिया था। निशा नहीं चाहती थी कि उसकी शादीशुदा जिंदगी में कोई तूफान आए इसलिए उसने पहले तो दिलीप को समझाने की कोशिश की लेकिन जब दिलीप ने उसे फोन पर बार-बार अपने प्यार का वास्ता दिया तो निशा उसकी बातों में आ गई। इसके बाद दिलीप चोरी छुपे निशा की ससुराल में आकर उससे मिलने लगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-05/satna-satyakatha.jpg" alt="SATNA satyakatha" width="1272" height="676"></img></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">लेकिन ऐसा संभव नहीं है कि एक लड़की पति के घर में रहते हुए मायके के प्रेमी से मिलना जारी रखे और किसी को खबर न हो। इसलिए जल्द ही राजभान को समझ में आ गया कि दिलीप का उसके घर आने जाने का कारण क्या है इसलिए वह दिलीप से दूरी बनाने लगा। यह बात दिलीप की समझ में आई तो वह परेशान हो गया। क्योंकि निशा का संग वह भूल नहीं सकता था और न उससे दूर जा सकता था। निशा को भी समझ में आ गया था कि राजभान को शक हो गया है इसलिए उसने दिलीप से दूरी बनाना शुरू कर दिया था।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इससे परेशान होकर दिलीप ने अपने दोस्त विजेन्द्र उर्फ बिज्जू को राजभान की हत्या में साथ देने की योजना बनाकर राजभान को रास्ते से हटाने का फैसला कर लिया। राजभान किसी सूरत में जिंदा न रहे इसके लिए करन केवट और उसके दो साथियों को भी पैसे का लालच देकर अपने साथ मिला लिया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-05/satyakatha-(5).jpg" alt="Satyakatha (5)" width="1272" height="708"></img></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इसके बाद योजना अनुसार </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">3<span lang="hi" xml:lang="hi"> अप्रैल को दिलीप ने बड़ी मात्रा में शराब खरीदी और पडक्का औद्योगिक इलाके में साथियों के साथ जाकर राजभान को फोन कर पार्टी के लिए बुलाया। शराब के लालच में राजभान पार्टी में शामिल होने वहां पहुंच गया तो चारों ने मिलकर उसे पेट भर शराब पिलाई और फिर शराब की खाली बोतल तोड़कर उसकी हत्या कर लाश को नाले के पास पड़ा छोड़कर भाग गए।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">आरोपियों को भरोसा था कि उन्हें किसी ने नहीं देखा इसलिए वह कभी नहीं पकड़े जाएंगे लेकिन पुलिस ने </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">24<span lang="hi" xml:lang="hi"> घंटे में ही मामले का खुलासा कर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सत्यकथा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 May 2026 14:01:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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                <title>सत्यकथा: मनोज हत्याकांड में पत्नी और उसके प्रेेमी को मिली आजीवन कारावास की सजा</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">उस रोज हरदा की जिला अदालत में पेशी पर आई एक निहायत ही खूबसूरत युवती मनीषा की नजरें लगातार अदालत में आने वाले रास्ते पर टिकी हुई थी। कहते हैं कि नजरें मन की हर बात बयां कर<span>    </span>देती है। इसलिए मनीषा नाम की उस युवती की निगाहों में झलक रही बेताबी से जाहिर था कि उसे जिसका इंताजार है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">वो जरूर उसके लिए बहुत खास है। इसलिए थोड़ी देर बाद ही उसे सूरज अदालत की तरफ आते दिखाई दिया तो उसके चेहरे पर संतोष की लहर दौड़ गई।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">देर कर दी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">कब से तुम्हारा इंतजार कर रही</span></span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/satyakatha/wife-and-her-lover-sentenced-to-life-imprisonment-in-manoj/article-53883"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/satyakatha-(6).jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">उस रोज हरदा की जिला अदालत में पेशी पर आई एक निहायत ही खूबसूरत युवती मनीषा की नजरें लगातार अदालत में आने वाले रास्ते पर टिकी हुई थी। कहते हैं कि नजरें मन की हर बात बयां कर<span>  </span>देती है। इसलिए मनीषा नाम की उस युवती की निगाहों में झलक रही बेताबी से जाहिर था कि उसे जिसका इंताजार है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">वो जरूर उसके लिए बहुत खास है। इसलिए थोड़ी देर बाद ही उसे सूरज अदालत की तरफ आते दिखाई दिया तो उसके चेहरे पर संतोष की लहर दौड़ गई।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">देर कर दी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">कब से तुम्हारा इंतजार कर रही थी। सूरज के पास आते ही मनीषा ने उससे कहा।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मंदिर चला गया था यार। मन्नत मांग कर आया हूं। आज बरी होने के बाद सीधे ही हम दोनों मंदिर चलेंगे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">तुम्हें भरोसा है कि हम बरी हो जाएंगे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पूरा-पूरा। तुम्हें नहीं है क्या</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">?</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मुझे तो केवल तुम पर भरोसा है। कहकर मनीषा ने एक लंबी सांस ली। यह देखकर सूरज बोला परेशान न हो मैं वकील से मिलकर आता हूं। यह कहते हुए सूरज उसके कंधे पर हाथ रख मनीषा को सांत्वना देते हुए वकील से मिलने चला गया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">वास्तव में मनीषा और सूरज दोनों पर ही अक्टूबर </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">2018<span lang="hi" xml:lang="hi"> में<span>  </span>मनीषा के पति मनोज की हत्या करने का आरोप था। पांच साल से अदालत में उनकी सुनवाई चल रही थी जिसके बाद उस रोज अदालत अपना फैसला सुनाने वाली थी। जाहिर सी बात है कि हर आरोपी चाहता है कि उसे निर्दोष माना जाए। चूंकि ऐसे मामलों में फंसने के बाद वह दुनिया भर का दान-धर्म कर चुका है और अदालत से बरी होने के बाद कई कथा-भंडारे करवाने की मान्यता भी मान लेता है। मोटी फीस लेने वाले ज्योतिषाचार्य भी ग्रह स्थिति के अनुसार उनको बरी हो जाने का भरोसा दिला देते हैं। इसलिए सूरज और मनीषा को भी भरोसा था कि आज अदालत उन्हें हत्या के आरोप से बरी कर देगी।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;"><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-05/satyakatha-(6)1.jpg" alt="satyakatha (6)" width="1366" height="768"></img></span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ तय समय पर विशेष न्यायाधीश ने पति की हत्या के आरोप में मनीषा और उसके प्रेमी सूरज उर्फ सीपी को आजीवन कारावास और दो-दो हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई। वहीं धारा-</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">201<span lang="hi" xml:lang="hi"> में दोषी पाए जाने पर तीन-तीन साल का सश्रम कारावास और एक-एक हजार रुपए के अर्थदंड की सजा भी सुनाई। जिसके बाद पांच साल पुराना हत्याकांड फिर चर्चा में आ गया जो इस प्रकार है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">12-13<span lang="hi" xml:lang="hi"> अक्टूबर </span>2018<span lang="hi" xml:lang="hi"> की रात के कोई एक बजे का वक्त था। जिला मुख्यालय हरदा की सड़कों के साथ-साथ पुलिस कोतवाली में भी सन्नाटा पसरा हुआ था। इसी दौरान थाने के फोन पर ड्यूटी आफीसर को इलाके की शिक्षक कॉलोनी में रहने वाले मनोज पर जानलेवा हमले की खबर मिली। पुलिस को सह सूचना पास के गांव में रहने वाले मनोज का भाई दे रहा था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसको यह खबर कुछ ही देर पहले उसकी भाभी यानी मनोज की पत्नी मनीषा ने दी थी।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ड्यूटी ऑफीसर ने तुरंत आधी रात को ही यह जानकारी तत्कालीन कोतवाली थाना प्रभारी को दी और खुद दलबल लेकर मौके पर पहुंच गए। घटनास्थल शिक्षक कॉलोनी कोतवाली से ज्यादा दूर नहीं था। इसलिए पुलिस जब कॉलोनी में बने मनोज के घर पहुंची तब तक पत्नी की चीख पुकार सुनकर कॉलोनी की खासी भीड़ वहां जमा हो चुकी थी। पास के गांव से मृतक का भाई हरदा पहुंच चुका था।<span>  </span>उसने पुलिस को बताया कि रात लगभग एक बजे भाभी मनीषा ने उसको फोन करके बताया था कि कुछ लोग भाई को बुरी तरह से घायल करके भाग गए हैं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके बाद मैंने पुलिस को सूचना दी थी। प्रारंभिक पूछताछ में मनीषा ने भी पुलिस को यही बताया कि उसे नहीं मालूम कि वे लोग कौन थे और उनकी मेरे पति से क्या दुश्मनी थी। मनीषा ने हमलावरों को देखा भी नहीं था। वह तो बाद में उस समय मौके पर पहुंची थी जब मनोज ने चीखकर उसे पुकारा था। अगले दिन तत्कालीन एसपी<span>  </span>भी मौके पर पहुंचे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद उन्होंने टीआई<span>  </span>के नेतृत्व में एक टीम गठित कर मनोज के हत्यारों को जल्द से जल्द पकड़ने के निर्देश दे दिए।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><span> </span>पास के गांव का रहने वाला मनोज<span>  </span>कई साल पहले गांव छोड़कर हरदा में आकर बस गया था। यहां<span>  </span>मनोज ने ं अपना छोटा सा घर भी बना लिया था। मनीषा को मनोज से कोई शिकायत नहीं थी। सिवाए इसके की कलेक्शन के काम में मनोज तो लगभग पूरा दिन ही बाहर रहता था। बच्चे भी स्कूल चले जाते थे। ऐसे में मनीषा दिन भर घर में अकेली खाली बैठी रहती थी। इस बात की शिकायत उसने कई बार मनोज से की तो उसने मनीषा के लिए घर में ही किराना नुमा छोटा सा जनरल स्टोर खोल दिया। सुबह के समय मनोज दुकान में समय देता और खाना बनाने के काम से फुरसत होकर मनीषा स्टोर संभालती एवं मनोज अपनी गाड़ी लेकर दिन भर के लिए काम पर निकल जाता।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><span> </span>कोई तीन किलोमीटर दूर बसे छोटी हरदा गांव में रहने वाले एक<span>  </span>युवक से मनीषा की छोटी बहन ने प्रेम विवाह किया था। जिसका एक रिश्तेदार सूरज का हरदा आना-जाना था। एक दिन सूरज घूमते-घूमते ं मनीषा की दुकान पर पहुंचगया। उस समय मनोज अपने काम पर<span>  </span>निकल चुका था और दोनों बेटियां स्कूल गई थीं। मनीषा उसको अच्छे से पहचानती थी। उसने सूरज को घर में बैठाकर हालचाल पूछे और चाय पानी पिलाकर विदा कर दिया</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन वह इस बात पर ध्यान नहीं दे पाई कि जब तक सूरज वहां रहा उसकी नजर मनीषा की पतली कमर और भरे हुए बदन पर फिसलती रही थी। इसलिए सूरज उस रोज तो वहां से उठकर आ गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन फिर अक्सर मनीषा की दुकान पर छोटा-मोटा सामान खरीदने के बहाने आने-जाने लगा। जिससे दोनों के बीच अपनापन बढ़ने लगा।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">वास्तव में सूरज सामान लेने के बहाने मनीषा की सुंदरता के दर्शन करने उसकी दुकान पर जाता था। जब तक मनीषा सामने रहती वह उसे पी जाने वाली नजरों से घूरता रहता। जिससे कुछ ही दिनों में मनीषा</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">सूरज के बार-बार दुकान पर आने का कारण समझ गई। मनीषा गांव की रहने वाली थी। शहर आने के बाद वह खुद को काफी स्मार्ट समझने लगी थी। ऐसे में जब अपने से उम्र में काफी छोटे सूरज को अपनी तरफ ललचाई नजरों से घूरते देखती तो उसे खुद गर्व होने लगता। इसलिए धीरे-धीरे वह भी सूरज को अपनी सुंदरता की झलक दिखाने की कोशिश करने लगी। जिससे बात धीरे-धीरे आगे बढ़ते-बढ़ते इतने आगे बढ़ गई कि कमलेश के घर से निकलते ही सूरज शिक्षक कॉलोनी पहुंच जाता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां सूरज को देखते ही मनीषा उसे अंदर के कमरे में ले जाती और फिर कुछ ही देर में कमरा उन दोनों की सांसों की आवाज से गूंजने लगता।<span>  </span>लेकिन ऐसे काम मोहल्ले वालों की नजर से ज्यादा देर तक छुपे नहीं रहते। जल्द ही मनीषा और सूरज के संबंधों की चर्चा होने लगी जो दो साल में मनोज के कान तक भी पहुंच गई।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मनोज अपनी पत्नी को बहुत चाहता था</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए उसने उसे समझा बुझाकर रास्ते पर लाने की कोशिश की</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन अब तक मनीषा पर सूरज का रंग पूरी तरह से चढ़ चुका था। इसलिए मनोज की बात वह एक कान से सुनकर दूसरे से बाहर निकाल देती। मनोज ने उस पर दबाव बनाया तो मनीषा के प्रेमी सूरज ने एक दिन सरेआम मनीषा के सामने ही मनोज को अपनी हद में रहने की हिदायत दे दी। मनोज सीधा-साधा आदमी था सो डरकर रहने लगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे मनीषा खुलकर अपने प्रेमी के संग अय्याशी करने लगी। इधर मनोज की दोनों बेटियां बड़ी हो रही थीं। वह जानता था कि मनीषा की इन हरकतों का असर बेटियों पर पड़ेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए उसने मनीषा को तलाक देने का मन बना लिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इसमें दिक्कत यह थी कि मनोज ने अपना मकान स्वयं के और पत्नी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दोनों के नाम पर बनवाया था। इसलिए तलाक के बाद मनीषा मकान पर अपना हक जता सकती थी। इसलिए सोच विचार के बाद मनोज ने तलाक की कार्रवाई शुरू करने से पहले मकान बेचने का फैसला कर चुपचाप ग्राहक खोजना शुरू कर दिए। इस बात की जानकारी मनीषा को लग गई तो प्रेमी की मदद से वह खुद मकान बेचने के लिए ग्राहक खोजने लगी। उसने चालीस लाख में सौदा कर चार लाख रुपया एडवांस भी ले लिया। इसकी जानकारी लगने पर मनोज ने उसे भला बुरा कहा तो मनीषा ने साफ कह दिया कि चुपचाप दस्तखत कर देना वर्ना तुम्हारे हाथ फिर कभी पेन पकड़ने लायक नहीं बचेंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन मनोज ने सोच लिया कि एक दिन तो मरना ही है फिर डरना कैसा। इससे वह भी विवाद करने पर उताऊ हो गया। यह देखकर मनीषा और सूरज समझ गए कि अब मनोज अगर जिंदा रहा तो उन लोगों को चैन से अय्याशी नहीं करने देगा। इसलिए दोनों ने मिलकर मनोज की हत्या की योजना बना ली।</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके चलते १२-१३ अक्टूबर की रात में मनोज के सो जाने के बाद मनीषा के इशारे पर सूरज उसके घर पहुंच गया और चाकू से उसका गलता रेतने के बाद मनीषा के संग अय्याशी कर वापस गांव भाग गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके बाद मनीषा ने अपने देवर को फोन करके पटना की जानकारी दी।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;"><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-05/aarpy-premi-prkash-tatha-patni-manisha-satyakatha.jpg" alt="AARPY PREMI PRKASH TATHA PATNI MANISHA satyakatha" width="1260" height="944"></img></span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">काल डिटेल से खुला था राज</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मनीषा के शक के दायरे में आने के बाद पुलिस ने उसकी मोबाइल काल डिटेल निकाली जिसमें पता चला कि घटना दिनांक को मनीषा और सूरज<span>  </span>के बीच कई बार बात हुई थी। इतना ही नहीं घटना वाली रात में भी देर रात को दोनों की बात हुई थी। पुलिस ने सूरज के मोबाइल की लोकेशन निकाली</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें घटना के समय वह मनीषा के घर की पाई गई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे पुलिस ने मनीषा से सघन पूछताछ की तो वह टूट गई और उसने पूरी कहानी सुना दी।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस तरह फंसी कानून के जाल में</span></strong></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जांच के दौरान पुलिस का पहला शक मनीषा की छोटी बहन के पति पर था जो आरोपी सूरज का छोटा भाई है। जिस समय पुलिस उसके साथ सख्ती से पेश आ रही थी तब मनीषा भी थाने में मौजूद थी। इसलिए अपनी छोटी बहन के पति की तकलीफ उससे देखी नहीं गई। उसने टीआई से कहा कि इसे छोड़ दो</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह मेरे पति पर हमला करने वालों में नहीं था। इससे टीआई<span>  </span>चौंक गए क्योंकि अब तक मनीषा पुलिस को यही बता रही थी कि उसने हमला करने वालों को नहीं देखा था। फिर अगर नहीं देखा तो यह कैसे देख लिया कि उसकी बहन का पति साथ नहीं था। इसलिए<span>  </span>उन्होंने मनीषा पर दबाव बनाना शुरू कर दिया कि अगर तेरी बहन का पति हमला करने वालों में शामिल नहीं था तो बताओ कौन-कौन थे। इस पर मनीषा कानून की गिरफ्त में आ गई।<span>  </span>जिसकी जानकारी लगने पर प्रेमी सूरज को गिरफ्तार किया था। अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी सहायक जिला लोक अभियोजक विनोद कुमार अहिरवार ने की।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सत्यकथा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 May 2026 14:01:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सत्यकथा: नाबालिग प्रेमिका संग मिलकर पति ने की नाबालिग पत्नी की हत्या</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">16<span lang="hi" xml:lang="hi"> अप्रैल की दोपहर में में अनूपपुर जिले के जैतहारी थाने की वेंकटनगर चौकी प्रभारी प्रवीण साहू जब चौकी इलाके के एक पुराने मामले को हल करने की कवायद में जुटे थे तभी ग्राम निगौरा से आए चौबीस वर्षीय युवक शैलेश ने मेहरा ने उन्हें अपनी पत्नी गुडिया .. (बदला नाम) के लापता होने की खबर दी। अपनी रिपोर्ट में उसने बताया कि कल उसकी पत्नी निगौरा रेलवे स्टेशन से लापता हुई है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मामला इसलिए गंभीर था कि गुड़िया भले की शादीशुदा हो लेकिन वह अभी नाबालिग थी। इसलिए नाबालिग होने के कारण नियमानुसार पुलिस ने उसके अपहरण का मामला</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/satyakatha/true-story-husband-along-with-minor-girlfriend-murdered-minor-wife/article-53884"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/satyakatha-(7).jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">16<span lang="hi" xml:lang="hi"> अप्रैल की दोपहर में में अनूपपुर जिले के जैतहारी थाने की वेंकटनगर चौकी प्रभारी प्रवीण साहू जब चौकी इलाके के एक पुराने मामले को हल करने की कवायद में जुटे थे तभी ग्राम निगौरा से आए चौबीस वर्षीय युवक शैलेश ने मेहरा ने उन्हें अपनी पत्नी गुडिया .. (बदला नाम) के लापता होने की खबर दी। अपनी रिपोर्ट में उसने बताया कि कल उसकी पत्नी निगौरा रेलवे स्टेशन से लापता हुई है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मामला इसलिए गंभीर था कि गुड़िया भले की शादीशुदा हो लेकिन वह अभी नाबालिग थी। इसलिए नाबालिग होने के कारण नियमानुसार पुलिस ने उसके अपहरण का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी। इसी बीच दो दिन के बाद पास के जंगल की उमरिया बीट में किसी युवती को शव एक पेड़ पर फांसी पर लटका मिला। पुलिस ने शैलेश को बुलाकर शव दिखाया तो उसने शव की पहचान अपनी पत्नी के रूप में कर दी।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-05/satyakatha-(8).jpg" alt="satyakatha (8)" width="1225" height="700"></img></span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पीएम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। पहली नजर में मामला आत्महत्या का नजर आ रहा था लेकिन पीएम रिपोर्टर् से साफ हो गया कि मृतका की गला दबाकर हत्या करने के बाद शव को फांसी पर लटकाया गया है। इसलिए जांच के दौरान शैलेश के परिजनों से पता चला कि </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">14<span lang="hi" xml:lang="hi"> अप्रैल को खुद शैलेश ही गुड़िया को लेकर जंगल की तरफ गया था। इस पर चौकी प्रभारी प्रवीण साहू ने उसे हिरासत में लेकर सख्ती से पूछताछ की जिससे उसने न केवल अपना अपराध स्वीकार कर लिया बल्कि इसमें शामिल अपनी प्रेमिका राजो (बदला नाम) और गांव के एक अन्य नवयुवक विजय(बदला नाम) का नाम भी बता दिया।</span></span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मृतका गुड़िया की तरह </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">24<span lang="hi" xml:lang="hi"> साल के शैलेश की प्रेमिका राजो और हत्या में शामिल विजय भी नाबालिग हैं। इसलिए पुलिस ने दोनों को बाल न्यायालय में पेश कर क्रमश: शहडोल और रीवा के बाल सम्प्रेक्षण गृह भेज दिया जबकि शैलेश को अदालत ने जेल भेज दिया। जिसके बाद यह नाबालिग किशोरियों के संग सेक्स के शौकीन कातिल युवक की कहानी इस प्रकार सामने आई।</span></span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">शैलेश को कम उम्र की लड़कियों के साथ संबंध बनाने का शौक लगने के पीछे उसके मोहल्ले की एक भाभी जिम्मेदार है। हुआ यह कि कोई छह साल पहले शैलेश ने एक रोज मोहल्ले की भाभी को गांव के एक युवक के साथ सूने खेत में आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-05/satyakatha-(9).jpg" alt="satyakatha (9)" width="509" height="379"></img></span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भाभी को डर था कि कही शैलेश इसके बारे में उसके पति को न बता दे। इसलिए उसने अगले की दिन शैलेश को अपने घर बुलाकर पति को उसके पाप के बारे में न बताने के बदले पड़ोस की एक </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">12-13<span lang="hi" xml:lang="hi"> साल की लड़की के साथ संबंध बनवा दिए। इतना ही नहीं इसके बाद शैलेश जब भी भाभी से कहता तो वह उसके लिए अपने घर में उस नाबालिग से मिलने की व्यवस्था कर देती।<span>  </span>इसी बीच उस नाबालिग की भी शादी हो गई जिसके साथ गांव की भाभी शैलेष की मुलाकात करवाती थी। इससे शैलेश परेशान रहने लगा। लेकिन इसी दौरान उसकी भाभी की बहन गुड़िया अपनी बहन के घर आकर कुछ दिन रूकी। गुड़िया नाबालिग थी यह देखकर शैलेश ने उससे पे्रम का नाटक कर संबंध बना लिए। इस बात की खबर घर वालों को लगी तो उन्होंने दोनों की आपस में शादी करवा दी।</span></span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">गुड़िया शैलेश की पत्नी बनकर आ गई तो उसका मन भी गुड़िया में लगने लगा। जो उससे </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">7<span lang="hi" xml:lang="hi"> साल से ज्यादा छोटी थी। लेकिन कोई साल भर पहले शैलेश के संबंध गांव की एक अन्य नाबालिग किशोरी राजो से बन गए। चूंकि राजो उम्र में शैलेश की पत्नी से भी अधिक छोटी थी इसलिए शैलेश को अपनी पत्नी गुड़िया बुरी लगने लगी। वह सोचने लगा कि काश गुड़िया से किसी तरह छुटकारा मिल जाए तो वह राजो के साथ ज्यादा सुख उठा सकता है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">राजो भी उसकी बनकर रहने राजी थी इसलिए गुड़िया से छुटकारा पाने शैलेश और उसकी नाबालिग प्रेमिका ने मिलकर गुड़िया की हत्या करने की योजना बना डाली। जिसमें राजो का एक और नाबालिग दोस्त विजय साथ देने के लिए राजी हो गया। इसके बाद योजना अनुसार शैलेश </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">14<span lang="hi" xml:lang="hi"> अप्रैल की शाम को जंगल में पार्टी करने का लालच देकर गुड़िया को अपने साथ ले घने जंगल में वहां ले गया जहां पहले से राजो और विजय छुपकर बैठे थे।</span></span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;"><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-05/satyakatha-(10).jpg" alt="satyakatha (10)" width="502" height="383"></img></span></span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जंगल में ले जाकर शैलेश</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">गुड़िया के संग प्यार करने का नाटक करने लगा। जिससे जब राजो और विजय ने देखा की गुड़िया प्यार के नशे में बेखबर हो चुकी है तो दोनों ने पीछे से जाकर उसे पकड़ लिया जिसके बाद शैलेश की मदद से तीनों ने उसका गला घोंटकर हत्या करने के बाद शव को उसकी ही साड़ी के सहारे फांसी पर लटका दिया ताकि पुलिस उसे आत्महत्या माने। लेकिन चौकी प्रभारी प्रवीण साहू की टीम ने जल्द ही शैलेश की साजिश से पर्दा उठा दिया।</span></span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दो आरोपी नाबालिग है</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पुलिस के अनुसार मृतका गुडिया का आरोपी पति </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">24<span lang="hi" xml:lang="hi"> साल का है जबकि उसकी पत्नी मृतका गुड़िया और गुड़िया की हत्या में साथ देने वाली शैलेश की प्रेमिका राजो भी नाबालिग है। इसलिए राजो के अलावा तीसरे नाबालिग साथी विजय को बाल सम्पे्रक्षण गृह में भेजा गया है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;"><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-05/satyakatha-(11).jpg" alt="satyakatha (11)" width="499" height="377"></img></span></span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">आरोपी के बड़े भाई की साली थी मृतका</span></strong></p>
<p><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मृतका गुड़िया आरोपी शैलेश के बड़े भाई की साली थी। जानकारी अनुसार गुड़िया जब अपनी बहन के घर आई थी तब शैलेश ने रिश्ते का फायदा उठाकर गुड़िया के साथ शारीरिक संबंध बना लिए थे। जिसकी खबर लगने पर दोनों परिवार ने मिलकर उनकी आपस में शादी कर दी थी। हत्या के समय भी गुड़िया नाबालिग थी।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सत्यकथा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 May 2026 14:00:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>सत्यकथा: जिसकी टैक्सी में सवार होकर पति से मिलने जाती थी उसी टैक्सी ड्राइवर के साथ भाग गई बैंक मैनेजर की पत्नी</title>
                                    <description><![CDATA[शादीशुदा जोड़े जितना संभव हो सके एक दूसरे के साथ रहें। वर्ना तनहाई के अंधेरे में कभी जवान उम्र बहक जाती है तो कभी जवां दिल।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/satyakatha/bank-managers-wife-ran-away-with-the-same-taxi-driver/article-53877"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/satyakatha.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कहने को तो लोग जयपुर को गुलाबी नगर कहा करते हैं। लेकिन मई की तपती दोपहरी में घर की खिड़की से आती गर्म हवा के थपेड़ों से बेखबर दूर तक फैली रेत को निहारते कर्णव खत्री को अपने जीवन की कहानी भी तपते रेत के टीलों सी नजर आ रही थी।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">वह फैसला नहीं कर पा रहे थे कि कल्पना</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके साथ उन्होंने जवानी का एक लंबा दौर गुजारा था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">के खिलाफ पुलिस में जाएं भी या नहीं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अनिर्णय की स्थिति में फंसे<span>  </span>कर्णव को अपने उस निर्णय पर भी पछतावा हो रहा था जब उन्होंने कल्पना को उसकी गलती माफ कर दूसरी बार अपनी जिंदगी में वही जगह दी थी जो आठ साल पहले हुई शादी के बाद दी थी। अब कल्पना माफ करने के उनके फैसले को गलत साबित करते हुए एक बार फिर उसी रास्ते पर निकल चुकी थी जिस पर चलने के बाद वह वापस लौटी थी।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-05/4a11.jpg" alt="4A11" width="1890" height="1417"></img></span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">रिपोर्ट दर्ज करवाने और न करवाने के फैसले के बीच कर्णव हफ्ते भर तक पशोपेश में रहे लेकिन अंत में अपने दो बच्चों का भविष्य देखते हुए </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">7<span lang="hi" xml:lang="hi"> मार्च को उन्होंने अपनी पत्नी कल्पना ... बदला नाम .... के राजगढ़ इलाका निवासी टैक्सी ड्राइवर त्र्ऋषभ शर्मा के साथ भागने और उन दोनों ने अपनी जान को खतरा होने की रिपोर्ट दर्ज करवा दी।</span></span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">7<span lang="hi" xml:lang="hi"> मार्च </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi"> को दर्ज करवाई गई अपनी रिपोर्ट में उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी घर से भागते समय लगभग </span>50<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख रूपए की संपति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें जेवर और नगदी दोनों शामिल हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकर गई है। इतना ही नहीं अपने पे्रमी के संग भागने के बाद कल्पना और उसका प्रेमी ऋषभ दोनों बार-बार फोन कर कर्णव को धमकियां भी दे रहे हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पुलिस ने कर्णव की रिपोर्ट दर्ज कर प्रेमी ऋषभ शर्मा के साथ फरार उसकी पत्नी कल्पना की तलाश आरंभ कर दी। लेकिन महीना भर बीत जाने के बाद भी उनकी कोई खबर नहीं लगा। लेकिन इसी बीच अचानक कल्पना और उसका प्रेमी दोनों एसपी जयपुर के सामने पेश हो गए। यह जानकारी लगते ही एनईबी थाना पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया। जिसके बाद कल्पना को जेल भेज दिया गया जबकि उसके प्रेमी ऋषभ को रिमांड पर लेकर पुलिस ने उससे गहराई से पूछताछ की जिसमें पूरी कहानी इस प्रकार सामने आई।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-05/alwar-satyakatha.jpg" alt="alwar satyakatha" width="644" height="675"></img></span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">एक प्राइवेट बैंक में मैनेजर के पद पर पदस्थ कर्णव खत्री मूल रूप से अलवर का रहने वाला है। भले स्वभाव का हमेशा शांत रहने वाला कर्णव अपने दोस्तों और रिश्तेदारों का चहेता था। इसलिए जब परिवार वालों ने उसके रिश्ते के लिए लड़की की तलाश शुरू की तो उसके सामने दर्जनों परिवारों के प्रस्ताव की लाइन लग गई। जिनमें से काफी सोच विचार के बाद उसने गोविंदगढ़ निवासी कल्पना अरोड़ा को जीवन साथी के रूप में पसंद किया। कल्पना और उसके परिवार वाले भी इस रिश्ते के लिए पहले से ही राजी थे। इसलिए कर्णव के हां कहते ही </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">2018<span lang="hi" xml:lang="hi"> में धूमधाम से दोनों की शादी कर दी गई।</span></span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">शादी के बाद कुछ महीने तो हंसी खुशी से बीते लेकिन उसके बाद जब कल्पना को अलवर में छोड़कर कर्णव जयपुर अपनी नौकरी पर चला गया तो कल्पना और कर्णव दोनों को ही एक दूसरे से यह दूरी जरा भी पसंद नहीं आ रही थी। खासकर कल्पना बिना कर्णव के बैचेन हो उठी। इसका एक कारण कल्पना की कैमिस्ट्री में अत्यधिक वासना का होना था। उसे पुरूष का संग किए बिना नींद नहीं आती थी। अपितु यह स्थिति शादी से पूर्व नहीं थी लेकिन शादी के बाद महीने दो महीने के साथ में ही कर्णव ने कल्पना को इतना प्यार दिया कि उसके शरीर को पुरूष रोज की जरूरत बन चुका था। कर्णव को भी कल्पना के बिना चैन नहीं पड़ता था इसलिए पहले तो वह हर दो-तीन दिन में जयपुर से अलवर आता और पत्नी के संग रात बिता कर सुबह होते की बैंक के लिए जयपुर निकल जाता।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">लेकिन हफ्ते में दो तीन दिन का साथ कर्णव के लिए भले की बहुत था मगर कल्पना को सात में सात रात<span>  </span>पति अपने पास चाहिए होता था। लेकिन मजबूरी आदमी से सब करवा देती है। इसलिए धीरे-धीरे कल्पना ने भी अपने मन को इस परिस्थिती में ढाल लिया था।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">समय के साथ कल्पना दो बच्चों की मां बन गए। इसके बावजूद कल्पना के मन से भले की न उतरा हो लेकिन कर्णव के मन से शादी का नशा जो शुरूआती दौर में हर एक के मन में छाया रहता है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">उतर चुका था। इसलिए पहले वह जहां हफ्ते में दो-तीन रात अपनी पत्नी के पास अलवर में आकर बिताता था वहीं अब वह केवल रविवार से रविवार अलवर आने लगा। हां इस बीच कभी कोई अन्य तीज-त्यौहार का अवकाश मिल जाए तो कर्णव अलवर आना नहीं भूलता था।</span></span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;"><span lang="hi" xml:lang="hi"><img style="margin-left:auto;margin-right:auto;" src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-05/alwar-satyakatha-(3).jpg" alt="alwar satyakatha (3)" width="204" height="238"></img></span></span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">लेकिन वक्त के साथ कर्णव को प्रमोशन मिल जाने से उसकी जिम्मेदारियां लगातार बढ़ती जा रही थी ऐसे में कई बार रविवार के दिन भी उसे अलवर आकर पत्नी के साथ समय बिताना मुश्किल होने लगा। खासकर क्वार्टरली</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">हॉफ ईयरी और मार्च क्लोजिंग के दौरान तो उसका बैंक छोड़ना मुश्किल ही रहता था।</span></span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कल्पना उससे शिकायत करती तो कर्णव उसे समझाने की कोशिश करता कि यार कब तक वो बीस-बाईस साल के दौर में जीती रहोगी। दो बच्चे है और अब हमारे ऊपर जिम्मेदारियां बढ़ रही है इसलिए खुद पर काबू रखो। लेकिन पति के लाख समझाने पर भी कल्पना को यह बात समझ में नहीं आ रही थी। दरअसल इसमें गलती कल्पना की नहीं उसकी अपनी जैविक कैमिस्ट्री थी जिसके चलते शारीरिक संतुष्टि उसकी पहली जरूरत थी।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कर्णव जानता था कि कल्पना चाह कर भी खुद पर काबू नहीं रख पाती इसलिए यह हल निकाला गया कि अगर कभी कर्णव बैंक की व्यस्तता की वजह से अलवर न आ पाए तो खुद कल्पना अलवर से जयपुर आ जाया करेगी। कल्पना के लिए यह फैसला उसके मन को खुशी देने वाला था और कर्णव कल्पना की खुशी में खुश था। लेकिन दोनों को नहीं मालूम था कि उनका यह फैसला भविष्य में क्या कुछ गुल खिलाने वाला है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हुआ यह कि कल्पना खुद जयपुर जाने लगी तो कर्णव बेफ्रिक हो गया। वह अब भी समय मिलता तो अलवर आता था लेकिन कल्पना को जयपुर को छूट मिली तो वह आए दिन पति के साथ क्लालिटी टाइम बिताने जयपुर आने लगी। शुरू में कई बार कल्पना ने यह रास्ता बस से तो कभी ट्रेन से तय किया लेकिन जब देखा कि इसमें कई मुश्किलों को सामना करना पड़ता है तो पति की सलाह पर वह टैक्सी बुक कर अलवर से जयपुर आने लगी।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इसी दौरान उसने एक रोज राजगढ़ इलाके में रहने वाले ऋषभ शर्मा की टैक्सी जयपुर जाने के लिए किराये पर ली। लेकिन अजीब संयोग हुआ कि दो दिन बाद ही जब वह फिर जयपुर जाने घर से निकली तो उसे ऋषभ की ही टैक्सी मिली। यह देखकर ऋषभ ने उससे पूछा मैम क्या आप जयपुर में नौकरी करती हैं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">?</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-05/alwar-satyakatha-(4).jpg" alt="alwar satyakatha (4)" width="1890" height="1417"></img></span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">नहीं मेरे पति वहां बैंक मैनेजर हैं। उनको अक्सर काम की वजह से अलवर आने का समय नहीं मिलता इसलिए मैं जयपुर चली जाती हूं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पहली बार इससे ज्यादा दोनों के बीच कोई और बात नहीं हुई। लेकिन कोई दस दिन बाद एक बार फिर कल्पना ने ऋषभ की टैक्सी ली तो ऋषभ ने कल्पना को अपना मोबाइल नंबर देते हुए कहा मैम आपको जब भी टैक्सी चाहिए मुझे फोन कर दिया करें। मैं आपकी सुविधा के अनुसार आपको घर से ही ले लिया करूंगा।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">यह तो अच्छी बात है कहते हुए कल्पना ने उसका नंबर ले लिया।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">आप वापस भी टैक्सी से ही आती हैं क्या</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">?</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हां।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अभी कब वापस लौटना होगा</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">?</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कल सुबह कोई </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">9<span lang="hi" xml:lang="hi"> बजे।</span></span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">तब ठीक है आप मुझे फोन कर ले। अगर मुझे कोई दूसरी सवारी नहीं मिली तो आपको वापस ले चलूंगा।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ओके तुम क्या अलवर में रहते हो</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">?</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जी राजगढ़ इलाके में यहां मेरे नाना रहते हैं उन्हीं के साथ रहता हूं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">और तुम्हारे माता-पिता</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">?</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">वो दोनों की अब दुनिया में नहीं रहे।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ओह। ऋषभ की बात सुनकर कल्पना ने उससे कहा।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कहना नहीं होगा कि अब कल्पना जब भी जयपुर जाती और जयपुर से अलवर वापस आती हमेशा ऋषभ की टैक्सी का उपयोग करने लगी। इससे धीरे-धीरे उनके बीच बातें औपचारिकता की सीमा से बाहर निकलकर भी होने लगी। ऐसे में एक रोज कल्पना ने उससे पूछा- तुम्हारी शादी हो गई क्या</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">?</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">नहीं अभी तक तो नहीं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">क्यों</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">कोई बढ़ा भाई-बहन भी है क्या।</span></span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कोई नहीं। लेकिन कोई बात नहीं मैम मैने तो सुना है कि शादी के बाद आदमी की जिंदगी में परेशानियां और भी बढ़ जाती हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">गलत सुना है तुमने। मेरा तो मानना है कि आदमी को सही वक्त पर शादी जरूर कर लेना चाहिए। अब मुझे ही देख लो शादी को आठ साल होने को आए लेकिन हम पति-पत्नी में इतना प्यार है कि अभी भी हम दोनों दो-तीन से ज्यादा एक दूसरे से दूर नहीं रहते। कभी वो अलवर आ जाते है तो कभी मैं जयपुर।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भाई साहब किस्मत वाले है जो उनकी शादी आपसे हुई।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">क्यों ऐसा क्या है मेरे मैं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">?</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">आप अपने पति को इतना प्यार जो करती हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बस या कुछ और भी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">? <span lang="hi" xml:lang="hi">कल्पना ने उसे छेड़ा।</span></span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सुंदर भी तो हैं आप</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऋषभ ने कुछ डरते हुए कहा।</span></span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हूं वो तो ठीक है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">तुम्हें कैसी लगती हूं</span>?</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अच्छी।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बस अच्छी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">?</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">नहीं मेरा मतलब है बहुत अच्छी। खासकर जब आप वो नीला वाला सूट पहनकर आती है न तब तो लगता है...</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">क्या लगता है बात पूरी करो न</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">?</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">आप नाराज तो नहीं होगी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">?</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बिल्कुल नहीं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">लगता है जैसे नीले बादलों में चांद निकला हो।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ऋषभ की बात सुनकर कल्पना जोर से हंस पड़ी। बोली अरे ये चांद तारों वाली बातें बच्चों को अच्छी लगती है। खैर तुम्हारी शादी नहीं हुई न इसलिए तुम अभी केवल चांद तारे देखते हो। खैर तुम्हें नीले सूट में मैं अच्छी लगती हूं तो अगली बार वही पहनकर चलूंगी। सचमुच ही जब चार रोज के बाद कल्पना ने उसे जयपुर जाने के लिए बुलाया तो वही नीला सूट पहना जिसकी तारीफ ऋषभ ने की थी।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस तरह धीरे-धीरे कल्पना और उस टैक्सी ड्राइवर ऋषभ के बीच बातों ही बातों में दूरी कम होती गई। जिसका नतीजा यह हुआ कि कल्पना जो पहले हमेशा पीछे वाली सीट पर बैठकर सफर करती थी अब आगे ड्राइवर के साथ वाली सीट पर बैठकर सफर करने लगी। पूरे सफर के दौरान दोनों बातें करते रहते जिससे सफर भी आसानी से कटने लगा और उनके बीच के रिश्ते दोस्ती में बदलने लगे।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">एक दिन जब कल्पना जयपुर से<span> </span>ऋषभ के साथ लौट रही थी तब रास्ते में अचानक की काफी जोर की बारिश होने लगी। कार चलाना मुश्किल था इसलिए ऋषभ ने एक पेड़ के नीचे कार रोक दी।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कितना सुंदर मौसम है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">है न। कल्पना ने कहा।</span></span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जी।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अच्छा एक बात बताओ तुम्हारी कोई गर्ल फ्रेंड है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">थी लेकिन अब नहीं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कहां चली गई</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">?</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">उसकी शादी हो गई।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">तुमने उसके साथ शादी करने की कोशिश नहीं की।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">नहीं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">क्यों</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">?</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">उसे गरीबी पसंद नहीं थी।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">क्या यार ये अमीरी गरीबी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">अच्छा एक बताओ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सच बताना।</span></span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पूछिए।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">उस साथ कभी वो सब किया था।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हां</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">शर्माते हुए ऋषभ ने कहा तो कल्पना बोली बड़े छुपे रुस्तम निकले तुम तो मैं तो समझती थी कि तुम बहुत सीधे हो।</span></span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">नहीं वो ऐसी बात नहीं है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसने हकलाते हुए कहा तो कल्पना बीच में ही बोल पड़ी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अरे डरते क्यों हो अच्छा लगा तुमने सही बोला। लेकिन वो चली गई तो जाने दो कोई दूसरी खोज लो। तुम आदमी अच्छे हो हैंडसम भी हो कोई भी लड़की राजी हो जाएगी। भाई मैं तो सच कहती हूं कि मुझे कोई तुम्हारे जैसा लड़का लाईन मारे तो मैं तो आज भी इश्क करने राजी हो जाऊं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कल्पना की बात सुनकर ऋषभ उसे देखता रह गया तो कल्पना बोला क्या देख रहे हो सचमुच लाईन मारने का इरादा है क्या</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">?</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">नहीं ... नहीं .. तो।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ऋषभ का डर देख कल्पना बोली पागल कहीं के</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">और जोर से हंस पड़ी।</span></span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">उस रोज घर पहुंचकर ऋषभ के कानों में वहीं एक शब्द गूंजता रहा</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">पागल कहीं के। उसे लगा कि शायद कल्पना तैयार थी उसने मना कर दिया इसीलिए उसने मुझे पागल कहा। अब क्या हो सकता था वक्त हाथ से निकल चुका था लेकिन उसने ठान लिया कि अब कभी ऐसा मौका आया तो वह पीछे नहीं हटेगा।</span></span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अगली बार ही कल्पना ने जब उसे जयपुर चलने बुलाया तो उसने वही नीला सूट पहन रखा था ऋषभ की पसंद का। यह देखकर शहर से बाहर निकलते ही ऋषभ ने कल्पना का हाथ थाम लिया। यह देखकर कल्पना ने उसका विरोध नहीं किया उल्टे अपना सिर उसके कंधे पर टिका दिया।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-05/alwar-satyakatha-(2).jpg" alt="alwar satyakatha (2)" width="452" height="319"></img></span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">प्यार की कहानी शुरू हो चुकी थी इसलिए जल्द ही एक रोज जयपुर से वापस आते समय टैक्सी में ही उनके बीच शारीरिक संबंध भी बन गए। जिसके बाद तो यह हर बार की बात हो गई। कभी जयपुर जाते समय तो कभी वहां से वापस आते समय तो कभी आते में भी और जाते मैं भी उनके बीच टैक्सी में ही वासना का खेल खेला जाने लगा।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">खुद कर्णव का अभी भी सनडे और दूसरी छुट्टी के दिन अलवर आना जारी था। हां यह जरूर है कि कल्पना को अब पति का अलवर आना पसंद नहीं था। इसलिए ऋषभ के साथ मिलने का मौका मिल सके इसलिए कई बार रविवार को भी कल्पना ही जयपुर चली आती थी।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कल्पना को अपने से उम्र में छोटा और पति की तुलना मैं कहीं बहुत अधिक यंग प्रेमी मिला तो वह उसकी दीवानी हो गई। ऋषभ को तो कल्पना का साथ मिलना लॉटरी लगने जैसा था क्योंकि अब वह उसके ऊपर पैसा भी लुटाने लगी थी। इसलिए एक दूसरे के प्रति उनकी दीवानगी का आलम यह हो गया कि वे दोनों कर्णव को रास्ते से हटाकर एक दूसरे के होकर जीने का सपना ही नहीं देखने लगे बल्कि कर्णव से छुटकारा कैसे मिले इसकी योजना भी बनाने लगे।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">लेकिन किसी की हत्या करना आसान तो नहीं होता। इसलिए दोनों मौके की तलाश करने लगे। इसी बीच संयोग से एक दिन रविवार को जब कर्णव जयपुर से अपनी पत्नी और बच्चों के पास अलवर आ रहा था तब संयोग से उसने ऋषभ की टैक्सी किराये पर ली। ऋषभ</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">कर्णव को और कर्णव ऋषभ को जानता था।</span></span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कर्णव को लेकर ऋषभ अलवर की तरफ चला तो देखा के थका-हारा कर्णव पीछे की सीट पर आंख बंद कर बैठ गया। थोड़ी देर बाद ऋषभ ने देखा कि कर्णव सो गया है तो उसने मोबाइल निकालकर कल्पना को फोन कर बताया कि उसका पति आज उसकी टैक्सी में आ रहा है। सो रहा है कहो तो इसे आज ही ठिकाने लगा दें।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">लेकिन जिस कर्णव को ऋषभ सोया हुआ समझ रहा था वह जागा हुआ था इसलिए उसने जब यह बात सुनी तो समझ गया कि ड्राइवर उसकी पत्नी से बात कर रहा है। इसलिए वह और गहरी नींद में सोने का नाटक करने लगा। अपितु फोन पर कल्पना ने अपने प्रेमी को हत्या करने से तो रोक दिया लेकिन यह जानकर की पति टैक्सी में सो रहा है उसके साथ प्यार भरी अश्लील बातें करने लगी। ऋषभ भी अपनी प्रेमिका की बात का जबाव दे रहा था। इसलिए ड्राइवर के साथ पत्नी की अश्लील बातें सुनकर कर्णव सब समझ गया। उसने दोनों की बातें रिकार्ड कर ली। लेकिन घर पहुंचकर कल्पना से कुछ नहीं कहा।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अगले एक महीने तक कर्णव सबूत जुटाने में लगा रहा। उसने दोनों के मोबाइल फोन की डिटेल के अलावा काल रिकार्डिंग भी प्राप्त करने के बाद जब इस बारे में कल्पना से बात की तो कल्पना झगड़ा करने पर उतर आई। उसने कर्णव से </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">50<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख की मांग करते हुए तलाक मांग लिया। इतना ही नहीं खुद बीवी का प्रेमी टैक्सी ड्राइवर भी कर्णव को धमकाने लगा। जिससे विवाद बढ़ने लगा तो एक रोज दिसंबर में कल्पना घर छोड़कर ऋषभ के साथ भाग गई।</span></span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कर्णव ने अपने स्तर पर उसे खोजने की कोशिश की लेकिन सफल नहीं हुआ। लेकिन इसी बीच फरवरी महीने में कल्पना अचानक वापस आ गई तो कर्णव ने उसकी गलती माफ करते हुए अपने साथ रख लिया। लेकिन कल्पना किसी और ही योजना के तहत वापस आई थी। मार्च के महीने में वह घर से लगभग </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">50<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख के जेवर और नगदी समेटने के अलावा अपने छोटे बेटे को साथ लेकर फिर प्रेमी के साथ भाग गई।</span></span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भागने के बाद कल्पना और ऋषभ ने कर्णव को धमकाते हुए पैसा मांगना शुरू कर दिया। उनका कहना था कि अगर कर्णव ने पैसा नहीं दिया तो वे छोटे बेटे की हत्या कर उसका आरोप कर्णव पर लगा देंगे। इससे परेशान होकर कर्णव ने पुलिस में रिपोर्ट कर दी। जिसके बाद अब पत्नी के साथ उसका टैक्सी ड्राइवर प्रेमी दोनों जेल में है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जिस ड्राइवर के साथ भागी उसकी टैक्सी में जाती थी पति से मिलने</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कर्णव ने बताया कि वो जयपुर में रहता था जबकि उसकी पत्नी अलवर में। जिसके चलते कभी पत्नी से मिलने कर्णव अलवर आता था तो कभी पत्नी कल्पना पति के पास जयपुर आ जाती थी। कल्पना जयपुर आने-जाने के लिए हमेशा ऋषभ शर्मा नाम के युवक की टैक्सी किराये पर लेती थी। इसलिए लंबे समय तक टैक्सी ड्राइवर के साथ आने-जाने से दोनों में अवैध संबंध बन गए जिसके बाद लाखों रुपए कमाने वाले बैंक मैनेजर पति को छोड़कर कल्पना टैक्सी ड्राइवर के साथ फरार हो गई।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ऐसे खुला राज</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">एक रोज जयपुर से अलवर आते समय संयोग से कर्णव ने भी ऋषभ शर्मा की टैक्सी किराये पर ली। कर्णव को लेकर ऋषभ अलवर की तरफ चला तो देखा के थका-हारा कर्णव पीछे की सीट पर आंख बंद कर बैठ गया। उसे लगा कि कर्णव सो गया है तो उसने मोबाइल निकालकर कल्पना को फोन कर बताया कि उसका पति आज उसकी टैक्सी में आ रहा है। सो रहा है वो कहो तो इसे आज ही ठिकाने लगा दें। लेकिन जिस कर्णव को ऋषभ सोया हुआ समझ रहा था वह जागा हुआ था इसलिए उसने जब यह बात सुनी तो समझ गया कि ड्राइवर उसकी पत्नी से बात कर रहा है। इसके बाद ड्राइवर कर्णव को सोया जानकर कल्पना के साथ अश्लील बातें करने लगा जिससे पति के सामने ड्राइवर के साथ बीवी के अवैध संबंध का राज खुल गया।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पचास लाख के साथ मांग रही थी तलाक</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पति के सामने टैक्सी ड्राइवर के संग अपने अवैध रिश्ते का खुलासा हो जाने के बाद भी कल्पना पर कोई फर्क नहीं पड़ा। उल्टे वह अपने पति से </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">50<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख रुपयों के साथ तलाक की मांग करने लगी।</span></span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;"><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-05/alwar-satyakatha-(5).jpg" alt="alwar satyakatha (5)" width="1200" height="675"></img></span></span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दो बार भागी प्रेमी के साथ</span></strong></p>
<p><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पहली बार कल्पना दिसंबर </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">25<span lang="hi" xml:lang="hi"> में टैक्सी ड्राइवर के साथ भागकर फरवरी में वापस आई थी। पति ने पत्नी की भूल का माफ कर उसे अपने साथ रख लिया। लेकिन महीने भर बाद ही वह एक बार फिर घर से जेवर और नगदी समेटकर ले जाने के अलावा अपने संग छोटे बेटे को भी ले गई थी। इसी बेटे को निशाना बनाकर कल्पना और उसका प्रेमी बैंक मैनेजर पति को धमका रहा था।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सत्यकथा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 May 2026 13:21:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सत्यकथा: दूसरी बेगम के साथ रह रहे शौहर के संग रहने की जिद में मारी गई पहली बेगम</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सत्ररह मार्च की दोपहर का समय था जब सिंगरौली जिले के बरगोदा थाने की सीमा में फैले पिडरवाह-चिजरवई जंगल में किसी सड़े-गले शव के पड़े होने की सूचना पुलिस को मिली। मामला हत्या और आत्महत्या के अलावा किसी जंगली जानवर के शिकार का भी हो सकता था। लेकिन जब बगरोदा टीआई को मौके पर किसी जवान युवती का सड़ा-गला शव मिला तो कम से कम इतना तो साफ हो गया कि मामला जंगली जानवर के हमले का नहीं है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पुलिस ने मौके पर चारों तरफ बारीकी से सुराग की तलाश की तो कागज का एक ऐसा टुकड़ा हाथ आ लगा</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/satyakatha/true-story-the-first-begum-was-killed-in-her-insistence/article-53878"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/satyakatha-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सत्ररह मार्च की दोपहर का समय था जब सिंगरौली जिले के बरगोदा थाने की सीमा में फैले पिडरवाह-चिजरवई जंगल में किसी सड़े-गले शव के पड़े होने की सूचना पुलिस को मिली। मामला हत्या और आत्महत्या के अलावा किसी जंगली जानवर के शिकार का भी हो सकता था। लेकिन जब बगरोदा टीआई को मौके पर किसी जवान युवती का सड़ा-गला शव मिला तो कम से कम इतना तो साफ हो गया कि मामला जंगली जानवर के हमले का नहीं है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पुलिस ने मौके पर चारों तरफ बारीकी से सुराग की तलाश की तो कागज का एक ऐसा टुकड़ा हाथ आ लगा जिसने पुलिस को जांच की राह दिखा दी। दरअसल शव के पास ही इलाज की एक पर्ची पड़ी थी। जिसमें कुछ दवाओं के नाम के अलावा पर्ची के ऊपर मरीज के तौर पर समीना खातून शौहर जहरूद्दीन अंसारी के साथ-साथ कसरा गांव का नाम भी लिखा था। पुलिस ने अनुमान लगाया कि यह मृतका का नाम पता हो सकता है इसलिए जब पुलिस कसरा गांव में समीना का घर खोजते हुए पहुंची तो वहां मौके पर पुलिस को नजमा नाम की एक युवती मिली। जिसने बताया कि समीना उसकी बड़ी बहन का नाम है जो बैढ़न में रहती है।<span>  </span>बैढ़न में समीना के घर का पता बताते हुए उसने यह भी कहा कि कई दिनों से उसकी समीना से फोन पर बात नहीं हुई है। वह जब भी फोन लगाती है उसे समीना का शौहर जहरूद्दीन अटैंड करता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-05/satyakatha-(3).jpg" alt="Satyakatha (3)" width="597" height="444"></img></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पुलिस नजमा को मौके पर ले गई जहां उसने कपड़ों के आधार पर शव की पहचान अपनी बहन अमीना के तौर पर कर दी। जिसके बाद पुलिस ने शव को पीएम के लिए रीवा मेडिकल कॉलेज भेजते हुए इस बात की जानकारी जहरूद्दीन को फोन पर दी तो उसने आधा घंटे में पहुंचने की बात कही लेकिन वह पूरे </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">4<span lang="hi" xml:lang="hi"> घंटे के बाद आया। थाने आकर उसने माना की समीना उसकी पहली बेगम थी लेकिन साथ में उसने यह भी कहा कि वो ट्रक ड्राइवर है इसलिए काम की अधिकता के चलते उसकी समीना से कई दिनों से मुलाकात नहीं हुई है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इधर शार्ट पीएम में समीना की मौत का कारण गला दबाकर हत्या करना सामने आने के बाद पुलिस ने बैढ़न के महाजन चौक स्थित समीना के घर के आसपास रहने वालों से पूछताछ की। जिसमें उन्होंने बताया कि समीना यहां अकेली रहती थी कभी कभार उसका शौहर मिलने आता था। लोगों ने यह भी बताया कि आखिरी बार उन्होंने </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">12-13<span lang="hi" xml:lang="hi"> मार्च को समीना के शौहर जहरूद्दीन को यहां देखा था तब वह समीना को अपने साथ मोटर साइकल पर कहीं लेकर गया था। उसके बाद से समीना घर वापस नहीं आई।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पुलिस ने बैढ़न में समीना के निवास से चितरवई जाने वाले रास्ते पर लगे सीसीटीवी खंगाले तो </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">13<span lang="hi" xml:lang="hi"> मार्च को जहरूद्दीन मोटर साइकल पर समीना को लेकर चितरवई की तरफ जाते दिखा। जिसके बाद पुलिस ने उसे भरगवां थाना इलाके के चिकनी टोला गांव से हिरासत में ले लिया जहां वह अपनी दूसरी बेगम के साथ रहता था। जिसके बाद उसने पूछताछ में अपना अपराध स्वीकार कर लिया जिसके बाद यह कहानी इस प्रकार सामने आई।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">चिकली टोला गांव में अपनी बेगम समीना खातून के साथ<span>  </span>रहने वाला जहरूद्दीन ट्रक ड्राइवर की नौकरी करता था। नौकरी ऐसी थी सो घर से हफ्तों बाहर रहने के कारण किसी सफर में उसकी मुलाकात शबनम(बदला नाम) नाम की युवती से हुई। शबनम पर उसका दिल आ जाने से उसने शबनम के साथ दूसरा निकाह कर लिया और अपने साथ घर ले आया। शबनम पहली बेगम की तुलना में जवान और खूबसूरत थी। प्यार करने के नए-नए</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">देशी-विदेशी तरीके भी जानती थी। इसलिए जहरूद्दीन दूसरी बेगम के कमरे में ज्यादा सोता था। इस बात से समीना का चिढ़ना बनता था इसलिए दोनों बीवियों में अक्सर झगड़ा होने के चलते उसने कुछ समय पहले समीना को बैढ़न में अलग मकान लेकर रहने का इंतजाम कर दिया।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;"><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-05/sing.jpg" alt="SING" width="724" height="542"></img></span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">समीना अलग रहने लगी तो उसे सौतन ज्यादा खटकने लगी। शौहर भले की ट्रक लेकर परदेश गया होता लेकिन उसे लगता कि वह शबनम के संग ऐश कर रहा होगा। इसलिए कुछ ही महीने अलग रहने के बाद वह शौहर पर दबाव डालने लगी कि या तो वो हमेशा उसके साथ बैढ़न में रहे या उसे भी अपने साथ गांव में रखे। लेकिन इस बात के लिए शबनम राजी नहीं थी कि समीना साथ में रहे। इससे जहरूद्दीन परेशान हो गया जिसके चलते उसने समीना को रास्ते से हटाने की ठान ली।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इसके लिए </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">13<span lang="hi" xml:lang="hi"> मार्च को वह उसे डॉक्टर को दिखाने के बहाने मोटर साइकल पर साथ ले गया। लौटते समय उसने चितरवई के जंगल में बाइक रोक कर समीना से अंदर चलकर खुले आसमान तले मस्ती करने को कहा।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">समीना राजी हो गई तो वह उसे लेकर जंगल में गया जहां दोनों ने बिस्कुट नमकीन खाने के बाद पति-पत्नी का रिश्ता बनाना शरू कर दिया। जहरूद्दीन काफी दिनों के बाद समीना के पास आया था इसलिए वासना में पागल समीना की आंखे बंद हो चुकी थी जिससे मौका देखते ही जहरूद्दीन सेक्स करने के दौरान ही समीना का दुपट्टा उसके गले में कसकर उसकी हत्या कर दी और लाश को जंगल में पड़ा छोड़कर वापस आ गया। लेकिन डॉक्टर के इलाज की पर्ची ने उसका पूरा राज खोल दिया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मरने के बाद भी...</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सूत्रों के अनुसार पूछताछ में आरोपी ने माना कि उसने सेक्स करते हुए बीवी का गला दबाया था जिससे वह मर गई लेकिन उस समय तक जहरूद्दीन की वासना शांत नहीं हुई थी इसलिए उसने बीवी की लाश के साथ अपनी वासना शांत की थी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-05/sing-satyakatha.jpg" alt="Sing Satyakatha" width="725" height="541"></img></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दूसरी बेगम की खूबसूरती से चिढ़ती थी मृतका</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जांच में सामने आया कि आरोपी की दूसरी बेगम पहली बेगम से अधिक सुंदर और उम्र में छोटी थी। इसलिए जहरूद्दीन उस पर लट्टू रहता था जिससे पहली बेगम मृतका समीना अपनी सौत से चिढ़ती थी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">डॉक्टर की पर्ची ने खोला राज</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हत्या से पहले समीना पर अपना प्यार जताने का नाटक करने आरोपी उसे डॉक्टर के पास ले गया था। डॉक्टर ने समीना के लिए जो पर्ची बनाई थी वह पर्ची हत्या के बाद आरोपी ने घटनास्थल पर छोड़ दी जो उसकी गिरफ्तारी का कारण बनी। </span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सत्यकथा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 May 2026 13:21:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सत्यकथा: भाई-बहन और पति-पत्नी के गिरोह ने किया दो मासूम का अपहरण</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">23 अप्रैल की रात 8 बजे तक इंदौर के पलासिया थाना इलाके में बसे लालाराम नगर में सब कुछ रोज की तरह सामान्य था। लेकिन 9 बजते-बजते इलाके में रहने वाले 9 और 11 साल के दो मासूम बच्चों के अपहरण की खबर से पूरे इलाके में हलचल सी मच गई।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">लालाराम नगर में अधिकांश निम्न मध्यवर्गीय परिवार रहते है। इसलिए ऐसे दो परिवारों के मासूम बेटों के अपहरण की बात किसी की समझ में नहीं आ रही थी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">दरअसल हुआ यह कि यह दोनों बच्चे रोज की तरह तिरूपति खेल मैदान में मोहल्ले के बच्चों के साथ क्रिकेट खेल</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/satyakatha/indore/article-52987"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-09t145506.001.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">23 अप्रैल की रात 8 बजे तक इंदौर के पलासिया थाना इलाके में बसे लालाराम नगर में सब कुछ रोज की तरह सामान्य था। लेकिन 9 बजते-बजते इलाके में रहने वाले 9 और 11 साल के दो मासूम बच्चों के अपहरण की खबर से पूरे इलाके में हलचल सी मच गई।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">लालाराम नगर में अधिकांश निम्न मध्यवर्गीय परिवार रहते है। इसलिए ऐसे दो परिवारों के मासूम बेटों के अपहरण की बात किसी की समझ में नहीं आ रही थी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">दरअसल हुआ यह कि यह दोनों बच्चे रोज की तरह तिरूपति खेल मैदान में मोहल्ले के बच्चों के साथ क्रिकेट खेल रहे थे। यह इनका रोज का काम था मगर जब उस रोज अंधेरा घिरने तक दोनों अपने घर वापस नहीं आए तो दूसरे बच्चों ने बताया कि उनको एक लड़की तोता</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">खरगोश दिखाने अपने साथ ले गई थी।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;"><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-05/ind-3-(1).jpg" alt="IND 3" width="599" height="447"></img></span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">खबर पाकर पलासिया पुलिस मौके पर पहुंची तो इलाके के एक सीसीटीवी कैमरे में दोनों बच्चे एक युवती के साथ जाते दिखे। यह देखकर पुलिस क साथ-साथ मोहल्ले वाले भी बच्चों की खोज में जुट गए। लेकिन इससे पहले की उनका कुछ पता चल पाता रात लगभग 11 बजे इनमें एक बच्चे की मां पर आए वीडियो काल के बाद मामला बेहद गंभीर हो गया। फोन पर बच्चों को छोड़ने के लिए 15 लाख की फिरौती की मांग की गई थी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">जिन दो किशोरों का अपहरण हुआ था उनमें एक के पिता गन्ने के रस का ठेला लगाते है तो दूसरे के पिता रामायण मंडली में ढोलक बजाने का काम करते हैं। ऐसे में इन परिवारों के लिए इतने पैसों का इंतजाम करना आसान नहीं था। इसलिए अपहृत की मां बदमाशों के सामने बार-बार हाथ पैर जोड़ रही थी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">लेकिन ऐसे में लालाराम नगर में रहने वाले सभी गरीब परिवार एक जुट हो गए और जिसके पास जो कुछ था सब लाकर पीड़ित परिवार को सौंप दिया जिससे कुछ ही देर में साढे सात लाख रुपए जमा हो गए। इसलिए परिवार ने बदमाशों से अनुरोध किया कि वे इतना पैसा लेकर उनके बच्चों को छोड़ दे। इससे अधिक पैसा वो नहीं दे पाएंगे। लेकिन बदमाश 15 लाख से कम पर राजी नहीं हो रहे थे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">इधर यह सब चल रहा था तो दूसरी तरफ एसीपी तुषार सिंह के नेतृत्व में पलासिया</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">संयोगिता गंज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बड़ी ग्वालटोली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राजेन्द्र नगर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">द्वारकापुरी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तुकोगंज आदि थानों की टीम अपने काम में लग चुकीं थी।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">दरअसल फिरौती के लिए जिस नंबर से फोन आया था उसकी लोकशन राजेन्द्र नगर की मिल रही थी। इसलिए पुलिस का पूरा जोर राजेन्द्र नगर पर था। इसके अलावा अपहरण के स्थान से राजेन्द्र नगर तक जाने वाले रास्तों में पढ़ने वाला थाना इलाकों में भी पुलिस सर्तक थी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">साइबर टीम लगातार काम कर रही थी। जिसके चलते पता चला कि जिस नंबर से आरोपी पीड़ित परिवार से वाट्सएप चैटिंग के जरिए बात कर रहे है वह राजेन्द्र नगर थाना इलाके के दत्तनगर में एक्टिव है। इससे बड़ी संख्या में पुलिस दत्तनगर में चारों तरफ फैलकर एक-एक मकान पर नजर रखने लगी। इस दौरान एक मकान की लाइट आधी रात में बार-बार जलने और बंद होने से पुलिस ने शक के आधार पर वहां दबिश दी तो दोनों अपहृत बच्चों के साथ 19 साल की राधा नाम की युवती को गिरफ्तार कर लिया। जिसने पूछताछ में अपने तीन साथी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">सगे भाई विनीत तथा अपनी सहेली तनीषा और उसके पति ललित के नाम भी बता दिए जो इस वारदात में शामिल थे जिससे पुलिस ने उसी समय छापामारी कर इस तीन आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">इधर मोहल्ले वालों को जब पता चला कि महज 5 घंटे में ही पुलिस ने दोनों बच्चों को सुरक्षित बरामद कर लिया है तो लालाराम नगर में उत्सव मनाया जाने लगा। जिसके बाद जल्द ही पुलिस ने दोनों बच्चों को उनके परिजनों को सौंप दिया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-05/ind-5-(1).jpg" alt="IND 5" width="1280" height="720"></img></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">बच्चों ने बताया कि कुछ दिनों ने खेल के मैदान में आने वाली दीदी उन्हें तोता</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">खरगोश और कुत्तों के बच्चे देने का बोलकर अपने साथ ले गई थीं। वे उन्हें कुछ दूर तक पैदल फिर कार में बैठाकर ले गई थी। घर ले जाकर उन्होंने उनको खाने-पीने के लिए भी दिया। इसी बीच एक बच्चे से उसकी मां का फोन नंबर लिया था।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">बच्चों ने यह भी बताया कि जब पुलिस आई तो दीदी ने कहा था कि बदमाश आ गए हैं। तुम लोग छुप जाओ और शोर मत करना जिससे हम लोग गैलरी में चादर ओढ़कर छुप गए थे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">दूसरी तरफ आरोपियों से पूछताछ में पूरी कहानी इस प्रकार सामने आई। विनीत और राधा दोनों आपस में भाई-बहन हैं। विनीत एक प्राइवेट कंपनी में काम करता था जो फर्जी निकली और उसका 6 माह का वेतन दिए बिना ही बंद हो गई। जबकि राधा टेलीकालिंग का काम करती थी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">ललित ड्राइवर था लेकिन 6 माह से वह भी बेरोजगार था। उसकी पत्नी पहले फ्लिपकार्ट में नौकरी करती थी लेकिन आजकल एक दुकान में सेल्सगर्ल का का कर रही थी जो ठीक नहीं चल रहा था। तनीषा</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">राधा की सहेली थी इसलिए दोनों ने मिलकर अपनी गरीबी दूर करने का उपाय सोचना शुरू कर दिया। कम समय में ज्यादा पैसा सीधे रास्ते तो आ नहीं सकता था इसलिए पहले उन्होंने किसी ज्वैलर्स के शोरूम को लूटने की योजना बनाई जिसमें विनीत और ललित भी साथ देने राजी हो गए। लेकिन यह योजना सफल नहीं हो सकी तो बच्चों के अपहरण की योजना बनाई गई।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">राधा को मालूम था तिरूपति ग्राउंड में रईस परिवारों के बच्चे खेलने आते हैं। इसलिए योजना बनाकर दो दिन तक तनिषा ने वहां रेकी की और बच्चों को मोबाइल पर जानवरों के वीडियो दिखाकर उनसे दोस्ती करने के बाद 11 अप्रैल को उनमें से दो बच्चों को अपने साथ ले गई।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">लेकिन यहां बच्चों की पहचान करने में उससे गलती हुई जिससे किसी रईस परिवार के बच्चों को ले जाने के बजाए उसने दो मजदूर परिवार के बच्चों को अपहरण कर लिया। लेकिन पुलिस ने 5 घंटे में ही दोनों बच्चों को सुरक्षित बरामद कर चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-05/ind-5-(1)1.jpg" alt="IND 5" width="1280" height="720"></img></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">सामने आया इंदौर का मानवीय चेहरा</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">जिन दो बच्चों को अपहरण किया गया था वे मजदूर परिवार से थे। उनके पिता 15 लाख की फिरौती नहीं दे सकते थे। यह जानकर बस्ती के सभी लोग मदद के लिए आगे आए और कुछ ही घंटों में साढे सात लाख रुपया जमा कर पीड़ित परिवारों को सौंप दिया ताकि उनके बच्चे सुरक्षित वापस आ जाए। लेकिन इसी बीच इंदौर पुलिस ने भी अपनी तत्परता दिखाई और पांच घंटे में ही बच्चों को सुरक्षित बरामद कर सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों ने बताया कि अपहरण से पहले उन्होंने किसी ज्वैलरी शो-रूम को लूटने की योजना बनाई थी लेकिन वह सफल नहीं हो सकी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">शार्ट एनकाउंटर के थे आदेश</span></strong></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">आरोपी फिरौती की रकम लेने के लिए रेत घाट आने की बात कर रहे थे। पहले पुलिस की योजना फिरौती लेने आने के समय बदमाशों को दबोचने की थी इसके लिए शार्ट एनकाउंटर की तैयारी भी कर ली गई थी।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सत्यकथा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 16:57:51 +0530</pubDate>
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                <title>सत्यकथा: परिवार द्वारा प्रेमी की हत्या से दुखी बेटी ने दे दी जान</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">तीस मार्च की सुबह का वक्त था। ऐेसे में शिवपुरी जिले के कोलारस में बायपास के पास एक नाले के पास लोगों ने </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;">22-25 <span lang="hi" xml:lang="hi">साल के किसी नवयुवक का शव पड़ा देख पुलिस को खबर कर दी। सूचना पाकर मौके पर पहुंचे टीआई गब्बर सिंह गुर्जर और एसडीओपी संजय मिश्रा शव के शरीर पर चोटों के निशान देखते ही समझ गए कि युवक की हत्या किसी और स्थान पर कर शव को यहां लाकर फेंका गया है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">पुलिस ने मौके पर शव की पहचान करने की कोशिश की लेकिन भीड़ में मौजूद कोई आदमी उसकी पहचान नहीं कर सका।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-05/shiv-men.jpg" alt="SHIV MEN" width="1200" height="1200" /></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">लेकिन</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/satyakatha/saddened-by-the-murder-of-her-lover-by-the-satyakatha/article-52983"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-09t133747.098.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">तीस मार्च की सुबह का वक्त था। ऐेसे में शिवपुरी जिले के कोलारस में बायपास के पास एक नाले के पास लोगों ने </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;">22-25 <span lang="hi" xml:lang="hi">साल के किसी नवयुवक का शव पड़ा देख पुलिस को खबर कर दी। सूचना पाकर मौके पर पहुंचे टीआई गब्बर सिंह गुर्जर और एसडीओपी संजय मिश्रा शव के शरीर पर चोटों के निशान देखते ही समझ गए कि युवक की हत्या किसी और स्थान पर कर शव को यहां लाकर फेंका गया है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">पुलिस ने मौके पर शव की पहचान करने की कोशिश की लेकिन भीड़ में मौजूद कोई आदमी उसकी पहचान नहीं कर सका।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-05/shiv-men.jpg" alt="SHIV MEN" width="1600" height="1200"></img></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">लेकिन थोड़ी ही देर बाद युवक की पहचान अर्जुन पाल निवासी रेगमा थाना रन्नौद के रूप में हो गई। दरअसल हुआ यह कि कुछ ही देर के बाद रेगमा गांव से मृतक के पिता ने थाने आकर बताया कि रात में उनके बहनोई के बेटे कल्ला पाल ने उन्हें बताया कि मेरे बेटे को कोलारस में बायपास रोड़ पर रहने वाले दिनेश और उसके पिता लट्टू कुशवाहा ने अपने कुछ रिश्तेदारों के साथ पकड़ कर मारपीट की है। घटना के समय कल्ला भी मेरे बेटे के साथ था लेकिन वह किसी तरह से भागने में सफल हो गया। जिसके बाद रात में ही उसने मुझे यह जानकारी दी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">चूंकि जिस नाले में युवक की लाश मिली थी वह बायपास इलाके में था इसलिए पुलिस ने जब उसे वह लाश दिखाई तो उन्होंने उसकी पहचान अपने बेटे अर्जुन के रूप में कर दी। मामला साफ था क्योंकि अर्जुन के पिता के साथ कल्ला पाल भी थाने आया था जो घटना के वक्त रात में अर्जुन के साथ था। उसने यह भी बताया कि इस विवाद की पूरी जड़ दिनेश की बेहद खूबसूरत </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;">20 <span lang="hi" xml:lang="hi">वर्षीय बेटी साधना है जिसके साथ अर्जुन का प्रेम प्रसंग चल रहा था।</span></span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;"><br style="text-decoration-thickness:initial;text-decoration-style:initial;text-decoration-color:initial;word-spacing:0px;" /><span lang="hi" style="background:#FFFFFF;" xml:lang="hi"><span style="text-decoration-thickness:initial;text-decoration-style:initial;text-decoration-color:initial;float:none;word-spacing:0px;">टीआई गब्बर सिंह का मानना था कि कल्ला से पूरी कहानी तो फिर सुन लेंगे लेकिन अगर देर हुई तो हो सकता है कि आरोपी फरार न हो जाएं। इसलिए उन्होंने तत्काल दबिश देकर दिनेश और उसके पिता लट्टू को गिरफ्तार कर लिया। उस रोज दिनेश की बेटी की गोद भरने के लिए वर पक्ष के लोग आने वाले थे इसलिए उनके कई रिश्तेदार भी कोलारस आए थे जो रात की घटना के बाद वहां से भाग गए थे।</span></span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;"><span lang="hi" style="background:#FFFFFF;" xml:lang="hi"><span style="text-decoration-thickness:initial;text-decoration-style:initial;text-decoration-color:initial;float:none;word-spacing:0px;"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-05/shiv-1.jpg" alt="SHIV" width="508" height="379"></img></span></span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">पूछताछ में पहले तो बाप-बेटा दोनों खुद को निर्दोष बताते रहे लेकिन जल्द ही उन्होंने हत्या की बात स्वीकार कर ली। उनका कहना था कि आज उनकी बेटी की सगाई थी घर में नाते रिश्तेदार जुड़ चुके थे। ऐसे में अर्जुन हमारी इज्जत से खेलने के लिए बेटी को भगा ले जाने आया था। हमने उसे घर के पास देखकर उसे वहां से चले जाने को कहा जिससे विवाद हुआ था। पुलिस ने आरोपियों के पास से वह रस्सी जिससे अर्जुन का बांधा गया था और लाठी आदि बरामद कर अदालत में पेश किया जहां से उनको जेल भेज देने के बाद पूरी कहानी इस प्रकार सामने आई।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">रेन्नौद थाने के रेगंवा गांव का रहने वाला </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;">24 <span lang="hi" xml:lang="hi">वर्षीय अर्जुन ट्रक ड्राइवर की नौकरी करता था। कोलारस में उसके फुफेरा भाई कल्ला पाल ने एक किसान की जमीन बंटाई पर ली थी। इसलिए कल्ला पाल कोलारस में ही रहता था। ऐसे में अर्जुन का जब कभी भी ट्रक लेकर कोलारस से निकलना होता वह कल्ला के पास जरूर रुकता था।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">कोई छह-आठ माह पुरानी बात है। एक रोज अर्जुन कल्ला से मिलने उसके खेत पर पहुंचा तो वहां उसने एक बेहद ही सुंदर युवती को काम करते देखा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;"><span lang="hi" style="background:#FFFFFF;" xml:lang="hi"><span style="text-decoration-thickness:initial;text-decoration-style:initial;text-decoration-color:initial;float:none;word-spacing:0px;">यह राजकुमारी कौन है यार</span><span style="background:#FFFFFF;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसे देखते ही उसने कल्ला से पूछा।</span></span></span><br style="text-decoration-thickness:initial;text-decoration-style:initial;text-decoration-color:initial;word-spacing:0px;" /><span lang="hi" style="background:#FFFFFF;" xml:lang="hi"><span style="text-decoration-thickness:initial;text-decoration-style:initial;text-decoration-color:initial;float:none;word-spacing:0px;">सच कह रहे हो</span><span style="background:#FFFFFF;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">शक्ल सूरत में तो राजकुमारी ही है लेकिन बेचारी मजदूरी करती है।</span></span></span><br style="text-decoration-thickness:initial;text-decoration-style:initial;text-decoration-color:initial;word-spacing:0px;" /><span lang="hi" style="background:#FFFFFF;" xml:lang="hi"><span style="text-decoration-thickness:initial;text-decoration-style:initial;text-decoration-color:initial;float:none;word-spacing:0px;">क्या नाम है इसका</span><span style="background:#FFFFFF;">?</span></span><br style="text-decoration-thickness:initial;text-decoration-style:initial;text-decoration-color:initial;word-spacing:0px;" /><span lang="hi" style="background:#FFFFFF;" xml:lang="hi"><span style="text-decoration-thickness:initial;text-decoration-style:initial;text-decoration-color:initial;float:none;word-spacing:0px;">साधना (बदला नाम) ।</span></span><br style="text-decoration-thickness:initial;text-decoration-style:initial;text-decoration-color:initial;word-spacing:0px;" /><span lang="hi" style="background:#FFFFFF;" xml:lang="hi"><span style="text-decoration-thickness:initial;text-decoration-style:initial;text-decoration-color:initial;float:none;word-spacing:0px;">मेरा तो दिल आ गया भाई इस पर काश यह मुझे मिल जाए तो जिंदगी बन जाएगी।</span></span><br style="text-decoration-thickness:initial;text-decoration-style:initial;text-decoration-color:initial;word-spacing:0px;" /><span lang="hi" style="background:#FFFFFF;" xml:lang="hi"><span style="text-decoration-thickness:initial;text-decoration-style:initial;text-decoration-color:initial;float:none;word-spacing:0px;">देख भाई इस मामले में मैं कुछ नहीं कर सकता। लेकिन तू कोशिश कर ले अगर साधना मान गई तो तेरी किस्मत। कल्ला ने उसकी बात सुनकर अर्जुन से कहा।</span></span><br style="text-decoration-thickness:initial;text-decoration-style:initial;text-decoration-color:initial;word-spacing:0px;" /><span lang="hi" style="background:#FFFFFF;" xml:lang="hi"><span style="text-decoration-thickness:initial;text-decoration-style:initial;text-decoration-color:initial;float:none;word-spacing:0px;">ठीक है भाई देखते है भगवान ने मेरी किस्मत में इसे लिखा है या नहीं।</span></span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;"><span lang="hi" style="background:#FFFFFF;" xml:lang="hi"><span style="text-decoration-thickness:initial;text-decoration-style:initial;text-decoration-color:initial;float:none;word-spacing:0px;">कहना नहीं होगा कि उस दिन के बाद अर्जुन अक्सर ही कल्ला के खेत पर आने लगा और पहले जहां वह घंटे दो घंटे रुकता था अब दिन-दो दिन रुकने लगा। इस दौरान उसकी नजरे जब तक साधना खेत पर रहती उस पर ही लगी रहती। काम देखने के बहाने वह कभी-कभी साधना से बात भी करने लगा।</span></span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;"><span lang="hi" style="background:#FFFFFF;" xml:lang="hi"><span style="text-decoration-thickness:initial;text-decoration-style:initial;text-decoration-color:initial;float:none;word-spacing:0px;">साधना बीस साल की हो चुकी थी। फिर अपनी सुंदरता के कारण लोगों की नजरों को पहचानना तो उसे किशोर उम्र में ही आ गया था। इसलिए उसने यह समझने में देर नहीं लगी कि अर्जुन उससे क्या चाहता है। पहले तो उसने ध्यान नहीं दिया लेकिन जब उसे लगा कि अर्जुन सचमुच उससे प्यार करता है तो धीरे-धीरे वह भी उसकी ओर झुकने लगी। जिससे जल्द ही उनकी प्रेम कहानी शुरू हो गई।</span></span></span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;"><span lang="hi" style="background:#FFFFFF;" xml:lang="hi"><span style="text-decoration-thickness:initial;text-decoration-style:initial;text-decoration-color:initial;float:none;word-spacing:0px;"><img style="margin-left:auto;margin-right:auto;" src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-05/shiv-2.jpg" alt="SHIV" width="286" height="393"></img></span></span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">अब जब भी अर्जुन कोलारस आता तो कल्ला किसी बहाने से खेत छोड़कर चला जाता जिससे अर्जुन और साधना खेत में बने कमरे में घंटो एक दूसरे की बाहों में सिमट कर जिंदगी भर साथ रहने के सपने देखते। अर्जुन ने साधना को एक मोबाइल भी लाकर दे दिया जिससे जब अर्जुन ट्रक पर होता तो दोनों फोन पर बातें कर अपने सपनों में रंग भरते रहते।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">लेकिन कोई ढेड महीने पहले अचानक की एक रोज पिता दिनेश ने साधना के हाथ में मोबाइल देख लिया। यह देखकर साधना ने जल्द ही मोबाइल अपने कुर्ते के गले में छुपा लिया लेकिन तब तक दिनेश सब समझ चुके थे उन्होंने पत्नी को आवाज देकर साधना के कुर्ते से मोबाइल निकलवाने के बाद बेटी की खूब खबर ली और उसके घर से बाहर निकलने पर रोक लगा दी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">यह जानकारी अर्जुन को लगी तो वह परेशान हो गया। इसी बीच बेटी हाथ से न निकल जाए इसलिए दिनेश ने उसकी सगाई भी पास के एक गांव में तय कर दी। </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;">30 <span lang="hi" xml:lang="hi">मार्च को लड़के वाले साधना की गोद भरने के लिए आने वाले थे। यह खबर साधना ने एक सहेली के मोबाइल से अर्जुन को दी और गांव आकर उसे साथ ले जाने को कहा।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;"><span lang="hi" xml:lang="hi"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-05/shiv-21.jpg" alt="SHIV" width="599" height="387"></img></span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">इस पर अर्जुन</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">कल्ला को लेकर </span>29 <span lang="hi" xml:lang="hi">मार्च की रात अपनी प्रेमिका के घर के बाहर कुछ दूरी पर जाकर खड़ा हो गया। योजना अनुसार साधना को घर से निकलकर अर्जुन से मिलना था। जहां से दोनों की योजना अगले दिन शिवपुरी में लव मैरिज करने की थी।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">चूंकि अगले की दिन उसकी गोद भरी जानी थी इसलिए कई रिश्तेदार घर आ चुके थे। इसके बावजूद आधी रात में जब सब सो गए तो साधना चुपचाप दरवाजा खोलकर बाहर जाने लगी। लेकिन उसे नहीं मालूम था कि उसका पिता आजकल उस पर नजर रखने के लिए एक आंख से सोता है। इसलिए जैसे ही साधना ने दरवाजा खोला दिनेश की नींद टूट गई और उसने साधना को पकड़ लिया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">यह देखकर साधना ने अपने पिता के हाथ जोड़कर कहा मुझे जाने दो मेरा अर्जुन बाहर मेरा इंतजार कर रहा है। यह सुनते की बेटी को घर में कैद कर दिनेश अपने पिता लट्टू और कुछ रिश्तेदारों को लेकर वहां पहुंचा जहां अर्जुन का कल्ला साधना का इंतजार कर रहे थे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-05/shiv.jpg" alt="SHIV" width="726" height="546"></img></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;"><span lang="hi" style="background:#FFFFFF;" xml:lang="hi"><span style="text-decoration-thickness:initial;text-decoration-style:initial;text-decoration-color:initial;float:none;word-spacing:0px;">दिनेश और उसके साथियों ने दोनों पर हमला कर दिया जिससे कल्ला तो निकल भागने में सफल रहा लेकिन अर्जुन पकड़ा गया जिसे वे लोग घर ले आए और रस्सी से बांधकर रात भर उसकी पिटाई की जिससे अर्जुन की मौत हो गई तो शव को घर से कुछ दूरी पर नाले में फेंक दिया।</span></span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">चूंकि कल्ला भागने में सफल हो गया था इसलिए अर्जुन का शव मिलने के साथ ही आरोपियों के नाम भी सामने आ जाने से पुलिस ने दिनेश और उसके पिता को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-05/shiv-3.jpg" alt="SHIV" width="1260" height="687"></img></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">दो दिन बाद बेटी ने भी दी जान</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">पकड़े जाने के बाद दिनेश का कहना था कि उन्हें अर्जुन की हत्या का कोई अफसोस नहीं है क्योंकि वह मेरी बेटी को भगाने आया था। लेकिन दिनेश को क्या पता था कि उसने बेटी को प्रेमी के साथ भागने से भले ही रोक लिया हो लेकिन वह उसे बांधकर नहीं रख सकेगा। प्रेमी की हत्या से दुखी साधना ने भी दो दिन बाद फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">था प्रेमिका का इंतजार आई मौत</span></strong></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">घटना की रात प्रेमिका के कहने पर अर्जुन उसे भगाने के लिए गांव गया था। लेकिन वहां उसका सामना मौत से हुआ। बेटी की योजना पता चल जाने पर उसके पिता और दादा ने कुछ लोगों के साथ मिलकर अर्जुन की हत्या कर दी।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सत्यकथा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 14:46:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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                <title>सत्यकथा: झाड़-फूंक के बहाने हिंदू नाम से शातिर मुबारक अली कर रहा था युवतियों का यौन शोषण</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">मुबारक अली ने गांव की भोली-भाली खूबसूरत युवतियों को अपने जाल में फंसाने के लिए तांत्रिक का चोला ओढ़ लिया था। युवतियों को अपने जाल में फंसाने के लिए वह उनकी कोख में डायन का साया और पति में मर्दाना कमजोरी की बात बताकर उन्हें अपने सांचे में उतारने के बाद उनका यौन शोषण कर रहा था। .</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">इज्जत के डर से चुप होकर बैठने से कोई फायदा नहीं। ऐसा ही चलता रहा तो एक रोज बाजार में पगड़ी उतरना ही है यह सोचकर मंदसौर जिले के गरोठ थाना इलाके के बलौदा गांव में रहने वाले काशीराम (बदला नाम) ने</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/satyakatha/true-story-under-the-pretext-of-exorcism-vicious-mubarak-ali/article-52986"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-09t143524.095.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">मुबारक अली ने गांव की भोली-भाली खूबसूरत युवतियों को अपने जाल में फंसाने के लिए तांत्रिक का चोला ओढ़ लिया था। युवतियों को अपने जाल में फंसाने के लिए वह उनकी कोख में डायन का साया और पति में मर्दाना कमजोरी की बात बताकर उन्हें अपने सांचे में उतारने के बाद उनका यौन शोषण कर रहा था। .</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">इज्जत के डर से चुप होकर बैठने से कोई फायदा नहीं। ऐसा ही चलता रहा तो एक रोज बाजार में पगड़ी उतरना ही है यह सोचकर मंदसौर जिले के गरोठ थाना इलाके के बलौदा गांव में रहने वाले काशीराम (बदला नाम) ने शाम के समय चौपाल में जाकर गांव के कुछ बुजुर्गों को पूरी बात बता दी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-05/garoth1111.jpg" alt="GAROTH" width="1260" height="709"></img></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">दरअसल हुआ यह कि काशीराम का बड़ा बेटा पिछले दो तीन साल से बीमार चल रहा था। कई जगह इलाज करवाने के बाद भी जब उसे फायदा नहीं हुआ तो उसकी पत्नी ने गांव में रहने वाले एक मुबारक अली से झाड़-फूंक करवाना शुरू कर दिया था।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">जिसके चलते चंद रोज पहले काशीराम के छोटे बेटे ने अपनी भाभी के मोबाइल में मुबारक अली के साथ उनके सेक्स वीडियो और फोटो देखकर जब भाभी से इस बारे में बात की तो वह भड़क गई। ससुर ने भी उसे मना किया कि आगे से मुबारिक के पास जाने की कोई जरूरत नहीं लेकिन बहू ने ससुर की भी नहीं सुनी। उसके बाद भी वह रोज शाम को पूजा के नाम पर 4-5 घंटे मुबारिक के साथ अकेले कमरे में गुजार रही थी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">काशीराम को नहीं मालूम था कि यह अकेले उसके घर की नहीं बल्कि गांव के कई घरों की कहानी है। किसी की बहू तांत्रिक के मुरीद बनी हुई है तो किसी की बेटी। इसलिए जैसे ही काशीराम ने हिम्मत कर अपने घर की कहानी लोगों को सुनाई वैसे ही कई लोगों ने भी अपना दर्द व्यक्त कर दिया जिनके घरों की बहू-बेटी मुबारक की शिकार थी। इसलिए गांव वालों ने अगले ही दिन गरोठ जाकर हिंदू संगठन के नेताओं को साथ लेेकर गरोठ थाने में फर्जी तांत्रिक के खिलाफ आवेदन दे दिया। आवेदन में यह भी आरोप लगाया गया कि मुबारक ने हिंदू नाम से एक आधारकार्ड बनवा रखा है। वह इस फर्जी आधारकार्ड के सहारे लड़कियों का शोषण करने के लिए बाहर शहरों की होटल में कमरा किराये पर लेकर वहां उनका बलात्कार करता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-05/garaoth2.jpg" alt="GARAOTH2" width="648" height="486"></img></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">तत्कालीन टीआई हरीश मालवीय ने गांव वालों की शिकायत को बेहद गंभीरता से लेते हुए इसकी जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को देकर दो दिन बाद<span>  </span>बलौदा में मुबारक अली के घर पर छापामार कर बड़ी मात्रा में तंत्र-मंत्र का सामान</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">अश्लील फोटो वाली किताबें</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">सेक्स पॉवर बढ़ाने वाली दवा की टेबलेट और कई लड़कियों की अश्लील फोटो बरामद कर उसे गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ के दौरान मुबारक ने बताया कि वह झांड-फूंक करता<span>  </span>है लेकिन लड़कियों का यौन शोषण करने का आरोप पूरी तरह गलत है।<span>  </span>मगर पुलिस ने जब उसके साथ सख्ती से पूछताछ की तो उसने कई दर्जन युवतियों के यौन शोषण की बात स्वीकार कर ली। जिसके बाद यह कहानी इस प्रकार सामने आई।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">कोई 35-40 साल पुरानी बात है जब गरोठ थाना इलाके बलौदा गांव में पहला मुस्लिम परिवार आकर बसा। गांव में रहने वाले बाकी सभी सनातनी परिवारों को इससे कोई ऐतराज नहीं था इसलिए यह परिवार जल्द ही सबसे घुलमिल गया। कुछ समय के बाद इसी गांव में आने के बाद इस परिवार में एक बेटे का जन्म हुआ जिसका नाम मुबारक अली रखा गया। मुबारक गांव के दूसरे बच्चों के साथ खेलते हुए बड़ा हुआ लेकिन जब वह बीस साल का था अचानक एक साल के तक गांव से लापता होने के बाद जब वापस लौटा तो उसने खुद को बड़ा तांत्रिक बताना शुरू कर दिया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-05/garaoth8.jpg" alt="GARAOTH" width="945" height="483"></img></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">पहले-पहले तो मुबारक की बात को किसी ने गंभीरता से नहीं लिया लेकिन महिलाएं तंत्र-मंत्र में कुछ ज्यादा ही रुचि लेती हैं इसलिए पहले गांव की एक महिला अपनी समस्या को लेकर मुबारक से मिली फिर इनकी संख्या 2-3 से होते होते सैकड़ों में पहुंच गई। इतना ही नहीं कुछ ही महीनों के बाद आसपास के गांव की महिलाएं भी मुबारक के पास अपनी समस्या लेकर आने लगी। और खुद मुबारक भी अपनी भक्त महिलाओं के कहने पर उनके घर पूजा-पाठ करने जाने लगा। धीरे-धीरे मुबारक की आर्थिक स्थिति सुधरने लगी। जिसके बाद उसने गांव वालों पर अपने तंत्र-मंत्र का रौब दिखाना शुरू कर दिया। कौन घर बैठे आफत मोल ले यह सोचकर गांव के लोग उससे बचकर रहने लगे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">मुबारक बेहद शातिर तरीके से युवतियों और महिलाओं का शिकार करता था। वह कुंवारी लड़कियों का चेहरा पढ़कर उनकी शादी न होने का डर दिखाता था तो ज्यादातर संतान प्राप्ति के आने वाली शादीशुदा महिलाओं को उनके पति के नपंसुक होने या उनकी कोख पर डायन बैठने का डर दिखाकर पूजा के नाम पर न केवल पैसा ऐठता था बल्कि उनका यौन शोषण भी करता था।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-05/garaoth3.jpg" alt="GARAOTH" width="1260" height="1658"></img></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">मुबारक के काले कारनामों को राज उस समय खुला जब काशीराम के दो बड़े बेटों में एक</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">बड़ा बेटा दो साल पहले अचानक बीमार हुआ। पति की तबियत को लेकर उसकी पत्नी माया (बदला नाम) काफी परेशान थी। इसलिए कोई साल भर पहले जब गांव की एक औरत ने उसे अपने पति की झाड़-फूंक मुबारक अली से करवाने की सलाह दी तो माया दो दिन बाद ही पति को लेकर मुबारक अली के दरबार में जा पहुंची।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">लगभग 23-24 साल की माया यौवन से लदी निहायत ही खूबसूरत औरत थी। इसलिए जब माया अपने पति को लेकर उसके पास पहुंची तो माया को सामने देख मुबारक के मुंह में पानी आ गया। उसने ठान लिया कि वह यह मौका हाथ से जाने से नहीं देखा। इसलिए उसने भीड़ को बाहर कर विशेष रूप से माया के पति को चौकी पर बैठाकर आंख बंद कर पूजा का नाटक करने के बाद माया को कहा तुम बिलकुल सही समय पर इसे लेकर मेरे पास आई हो अगर आठ दिन बाद आने वाली अमावस्या तक देर करती तो शायद पति से हाथ धो बैठती। लेकिन अब डरने की कोई बात नहीं बाबा के पास आई तो खुशियां लेकर ही जाओगी। इसके बाद उसने माया के पति के सिर पर हाथ रखकर कुछ मंत्र पढ़े फिर उसके माथे पर राख मलते हुए कहा</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">थोड़ा समय लगेगा क्योंकि इसके अंदर बैठी बुरी आत्मा ने इसको पूरी तरह से जकड़ लिया था। इसलिए हर रविवार को इसे लेकर आती रहना। काशीराम और उसके परिवार के दूसरे सदस्यों को न तो तंत्र-मंत्र पर भरोसा था और न मुबाकर पर। लेकिन वे माया को इसलिए नहीं रोक पा रहे थे कि माया जो कुछ भी कर रही है आखिर अपने पति और उनके बेटे के लिए ही तो कर रही है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> </p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">लेकिन महीने भर बाद मुबाकर ने माया को कहा कि अब पति को साथ लेकर आने की जरूरत नहीं है तुम अकेली आया करो मैँ पूजा कर दिया करुंगा। इसलिए अगले हफ्ते से माया अकेली जाने लगी। इस दौरान पूजा के दौरान एक रोज मुबाकर ने उससे पूछा:</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">कुछ फायदा हुआ पति को कि नहीं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;">?</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">अभी तो समझ में नहीं आ रहा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">अरे पागल मेरे कहने का मतबल यह है कि तेरा पति तेरे साथ दो साल से हमबिस्तर नहीं हुआ</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">सच है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;">?</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">जी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">मुबाकर की बात सुनकर माया ने सिर झुकाकर कहा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">होगा भी कैसे क्योंकि उसके हर एक अंग को बुरी आत्मा से जकड़ रखा है। लेकिन यह भी सच है कि तेरी इच्छा पति के साथ हमबिस्तर होने की होती है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;">?</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;">मु</span>बाकर की बात सुनकर माया चुप रही तो वह बोला बाबा से शर्म न करो जो पूछा जा रहा है सच बोला।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">जी होती तो है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">ऐसी कौन लड़की होगी जो इस उम्र में ऐसी कामना नहीं करेगी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">लेकिन तू किसी को बताना मत कम से कम पांच साल लगेगा तेरे पति को ठीक होने में वह तब तक तेरे साथ हमबिस्तर भी नहीं हो पाएगा। बोलो इतना इंतजार कर सकोगी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;">?</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">करुंगी और कोई रास्ता भी तो नहीं है।</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">मेरे पास हर एक समस्या का रास्ता है। मैं तेरे साथ बिस्तर पूजा करुंगा फिर देखना कैसे तेरा पति तुझे बिस्तर से नीचे नहीं उतरने देगा। लेकिन इसके लिए तुझे मेरे साथ चार दिन के लिए बाहर चलना पड़ेगा क्योंकि पूरे चार दिन तुझे पूजा में साथ रहना होगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">गांव में नहीं हो सकती क्या यह पूजा</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;">?</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">पागल जैसी बात मत कर। तेरी ससुराल वाले चार दिन तुझे मेरे घर में रहने देंगे। तू एक काम कर किसी रिश्तेदार के यहां जाने के बहाने मेरे साथ शहर चल वहां हम चुपचाप बिस्तर पूजा कर वापस आ जाएगें।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-05/garoth-89.jpg" alt="GAROTH" width="508" height="379"></img></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">मुबाकर की बात पर माया राजी हो गई तो हफ्ते भर बाद माया अपने रिश्तेदार के घर जाने का बोलकर चुपचाप मुबारक के साथ शहर आ गई। यहां मुबारक ने हिंदू नाम से बनाए आधार कार्ड की मदद से होटल में कमरा ले लिया। जहां रात में उसने बिस्तर पूजा के नाम पर माया को निर्वस्त्र होकर बिस्तर पर बैठाने के बाद खुद भी निर्वस्त्र होकर बिस्तर पर बैठकर पूजा का नाटक करने लगा। इस दौरान वह बीच-बीच में माया के शरीर पर भभूत लगाने के नाम पर उसके नाजुक अंगों से छेड़छाड़ भी करता जा रहा था। पति की बीमारी के चलते पिछले ढेड दो साल से माया पुरुष सुख से वंचित थी इसलिए मुबाकर की हरकतों से उसने कुछ देर तक तो अपनी वासना के घोड़ों को वश में बनाए रखा लेकिन जल्द ही उसका खुद पर से नियंत्रण टूट गया जिससे मुबाकर ने जब उसके कंधे पकड़कर बिस्तर पूजा के नाम पर लेटने का कहा तो माया ने उसके आदेश को चुपचाप मान लिया जिसके बाद अगले चार दिनों तक होटल के कमरे में मुबारक ने माया कि साथ कई दर्जन बार शारीरिक संबंध बनाकर उसे पूरी तरह से अपना मुरीद बना लिया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">चार दिन बाद माया गांव लौटी तो उसके रंग ढंग पूरी तरह बदल चुके थे। इस पर शुरू में तो उसके ससुर ने ध्यान नहीं दिया लेकिन जब ससुर ने देखा कि माया पूजा के नाम पर रोज मुबारक के घर में चार-पांच घंटे बिताने लगी है तो उनके कहने पर एक रोज देवर ने माया को मुबाकर का चक्कर छोड़कर भाई पर ध्यान देने को कहा। उसका कहना था कि दो साल हो गए मुबारक की पूजा से कोई लाभ तो हुआ नहीं तो क्यों उसके पीछे समय खराब कर रही हो।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">तुम्हारा भाई पागल हो गया है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">सुना तुमने पागल हो गया है तुम्हारा भाई। उसके लिए मैं दिन रात खप रही हूं और तुम लोग मेरे ऊपर बंदिश लगाना चाहते हो ताकि मैं विधवा हो जाऊ और पूरी जमीन जायजाद तुम्हें मिल जाए। देवर की बात पर माया ने भड़के हुए कहा और गांव में बखेड़ा खड़ा कर दिया। जिससे काशीराम ने बहू की हरकतों की तरफ से आंखें बंद कर ली। जिसका फायदा उठाकर माया अक्सर रिश्तेदारों के घर जाने का कहकर दो-चार दिन के लिए गायब रहने लगी। इस दौरान देवर ने देखा कि जब भाभी बाहर जाती है तब मुबारक भी गांव में दिखाई नहीं देता। इसलिए उसने भाभी का सच जानने के लिए एक रोज जब माया नहा रही थी उसने माया का मोबाइल चेक किया तो उसमें मुबारक के साथ भाभी<span>  </span>के अश्लील वीडियो और फोटो मिल गए।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">अब काशीराम के पास माया के पैर बांधकर रखने के लिए पर्याप्त सबूत थे लेकिन माया इतने पर नहीं रुकी। ससुराल में बात खुल जाने के बाद भी उसने पूजा के नाम पर रोज घंटों के लिए मुबाकर के पास जाना जारी रखा। मुबाकर के पास महिलाओं की भीड़ लगती थी। गांव की अविवाहित बेटियां भी उसके घर आना जाना करती थी जिससे काशीराम को लगा कि अगर इज्जत के डर से वह चुप रहे तो न जाने गांव के कितने परिवारों की इज्जत से मुबारक खेलता रहेगा। इसलिए उन्होंने हिम्मत कर मुबारक की करतूत के बारे में गांव के लोगों से चर्चा की तो कई पीड़ित परिवार सामने आ गए जिससे यह पाखंडी मुबारक अंसारी को सलाखों के पीछे डाल दिया गया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-05/garoth879.jpg" alt="GAROTH" width="695" height="392"></img></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">घर में मिला अश्लील साहित्य का जखीरा</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">पुलिस ने जब मुबारक के घर छापामारी की तो ढेर सारी अश्लील साहित्य और चित्रों वाली किताबें मिली। इसके अलावा तंत्र-मंत्र का सामान और यौन शक्ति बढ़ाने वाली टेबलेट में भी बड़ी मात्रा में बरामद की गई। बताया जाता है कि मुबारक इस दवाओं को सेवन करके ही अपनी महिला भक्तों का शोषण करता था जिससे वे उसकी सेक्स पॉवर का गुलाम बन जाती थी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">पचास से अधिक महिलाओं का किया शोषण</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">जांच में सामने आया है कि मुबाकर ने आसपास के गांव की पचास से भी अधिक बहू-बेटियों को तंत्र-मंत्र के नाम पर अपनी वासना का शिकार बनाया है। पुलिस जानकारी जुटाकर अधिक से अधिक पीड़ित महिलाओं से संपर्क करने का प्रयास कर रही है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-05/garoth098.jpg" alt="GAROTH"></img></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">हिंदू नाम का आधारकार्ड मिला</span></strong></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">आरोपी के घर की तलाशी के दौरान पुलिस को मुबारक के पास से एक हिंदू नाम का फर्जी आधारकार्ड भी मिला है। जानकारी के अनुसार मुबारक महिलाओं के साथ होटल में रुकने के लिए इसी आधारकार्ड का उपयोग करता था। जांच में सामने आया है कि वह महिलाओं को बिस्तर पूजा के नाम पर बिना किसी को बताए शहर लेकर जाता था जहां होटल में रुककर बिस्तर पर बैठकर पूजा करने के बहाने उनके साथ बलात्कार करता था।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सत्यकथा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 14:45:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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                <title>सत्यकथा: जीजा की होकर रहने की खातिर साली ने करवाई पति की हत्या</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">रानी रूपमति और बाजबहादुर की अमर प्रेम कथा के लिए प्रसिद्ध धार जिले के एक गांव में अप्रैल महीने में 6 और 7 तारीख की दर्मियानी रात को जो कुछ हुआ </span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">उसे अगर कुछ और न भी कहा जाए तो यह तो कहा ही जा सकता है कि इस एक घटना ने जिले में प्रेम के इतिहास पर अपनी काली परछाई अवश्य छोड़ी है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">धार जिले में सरदार पुरा तहसील का गोंदीखेड़ी चारण गांव। छोटा सा शांत गांव जहां की सीमित आबादी में हर कोई एक दूसरे को जानता-पहचानता ही नहीं बल्कि एक दूसरे के सुख-दुख में शरीक भी</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/satyakatha/true-story-sister-in-law-got-her-husband-murdered-in-order-to/article-52975"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-09t124810.197.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">रानी रूपमति और बाजबहादुर की अमर प्रेम कथा के लिए प्रसिद्ध धार जिले के एक गांव में अप्रैल महीने में 6 और 7 तारीख की दर्मियानी रात को जो कुछ हुआ </span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">उसे अगर कुछ और न भी कहा जाए तो यह तो कहा ही जा सकता है कि इस एक घटना ने जिले में प्रेम के इतिहास पर अपनी काली परछाई अवश्य छोड़ी है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">धार जिले में सरदार पुरा तहसील का गोंदीखेड़ी चारण गांव। छोटा सा शांत गांव जहां की सीमित आबादी में हर कोई एक दूसरे को जानता-पहचानता ही नहीं बल्कि एक दूसरे के सुख-दुख में शरीक भी है। इसी गांव में रहने वाला 29 वर्षीय देवकृष्ण पुरोहित भी गांव के हर एक घर में पहचाने जाने वाला नाम है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-05/dhar-a7.jpg" alt="DHAR" width="647" height="484"></img></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">देवकृष्ण के पिता एक समय गांव में किराने की दुकान किया करते थे। 1995 में असमय ही जब उनकी मृत्यु हुई तब देवकृष्ण केवल दो साल का और उससे भी छोटी बहन थी ज्योति। मां लक्ष्मी ने गांव में ही रहने वाले ताऊ की मदद से दोनों बच्चों की परवरिश की। समय के साथ देवकृष्ण बड़ा हुआ तो उसने मसाले का करोबार करना शुरू कर दिया। मेहनती और ईमानदार था इससे जल्द ही उसके कारोबार ने गति पकड़ ली।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">यह देखकर मां के मन में बहू लाने का विचार आने पर उन्होंने रिश्तेदारों ने चर्चा की जिसके चलते 1 अप्रैल 2015 को जब देवकृष्ण केवल 19 साल का था उसकी शादी महाराष्ट्र के पन्नाखेड़ी में रहने वाले परिवार के पुराने परिचित की बेटी रानी से कर दी गई। विवाह के समय रानी केवल 15 साल की थी इसलिए उसे शादी के पांच साल बाद 2020 में हुए गौना के बाद ही पति पास भेजा गया था।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-05/dhar-a4.jpg" alt="DHAR" width="945" height="710"></img></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इसलिए घटना की रात इस घर में चार लोग मौजूद थे। 4-5 रोज पहले मायके से वापस आई बहू रानी</span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">देवकृष्ण और मां लक्ष्मी तथा बहन ज्योति।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">आधी रात बीत चुकी थी। पूरा गांव गहरी नींद में था कि इसी बीच देवकृष्ण के घर से आ रही चीख-पुकार की आवाज से जागे लोग चंद पल में उसके घर पर जमा हो गए। जहां का नजारा काफी डरावना था। अपने कमरे में देवकृष्ण का रक्त रंजित शव उसके पलंग पर पड़ा था और मां</span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बहन तथा रानी पलंग को घेर का बैठी दहाड़ मारकर रो रहीं थी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-05/dhar-a9.jpg" alt="DHAR" width="1260" height="940"></img></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मामला गांव वालों की समझ से परे था। लेकिन इतना तो देखने से जाहिर था कि देवकृष्ण की हत्या की गई है। इसलिए गांव वालों ने राजोद थाने को घटना की जानकारी दे दी जिससे कुछ ही समय में टीआई राजोद दलबल लेकर मौके पर पहुंच गए। मौके पर देवकृष्ण की मां ने उन्हें बताया कि वो बेटी के साथ एक कमरे में सो रही थी जबकि बहू और बेटा दूसरे दो कमरों में अलग-अलग सो रहे थे। उन्होंने बताया कि पड़ोस की एक महिला ने उन्हें फोनकर बेटे के कमरे में जाकर देखने का कहा तो वह बेटी के साथ यहां आई तब यह सब देखने को मिला। उन्होंने यह भी बताया कि उस समय दूसरे कमरे में बहू के हाथ पैर बंधे थे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">यानी वास्तव में हुआ क्या है यह बात रानी बता सकती थी। सो पूछे जाने पर उसने बताया कि आधी रात चार डकैत घर में घुस आए थे। उन्होंने मुझे कमरे में बांध दिया और लूट पाट करने लगे। पति ने उनका विरोध किया तो उन्होंने उनकी हत्या कर दी। यह कहकर रानी दहाड़ मार कर रोने लगी। लगभग तीन लाख कीमत के जेवर और 50 हजार की नकदी लूटे जाने की बात भी परिवार ने पुलिस को बताई।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-05/dhar-2.jpg" alt="DHAR 2" width="595" height="444"></img></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">डकैती और हत्या जैसी गंभीर वारदात की खबर पाकर एसडीओपी सरदारपुर सुश्री बेलापुरकर और एसपी धार भी मौके पर पहुंच गए।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">घटना स्थल की जांच के दौरान रानी की बात पुलिस के गले नहीं उतर रही थी। क्योंकि अगर हत्या देवकृष्ण के विरोध करने के चलते हुई है तो उसकी लाश बिस्तर के बजाए फर्श पर कहीं मिलना चाहिए थी। इसके अलावा मृतक के सिर पर धारदार हथियार से जो बार किया गया था वह देखकर ही साफ था कि बार हत्या के मकसद से किया गया है और हत्या के समय मृतक बिस्तर र सो रहा होगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मामला संदिग्ध था इसलिए शव को पीएम के लिए भेजने के बाद पुलिस ने घर की बारीकी से जांच की तो काफी कुछ काला-सफेद सामने आने लगा। परिवार जिन जेवर और नगदी की लूट की बात बता रहा था वह घर में छुपाकर रखे मिल गए। इसके अलावा सबसे चौंकाने वाली चीज रानी के कमरे में उसके बिस्तर के नीचे मिली</span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">एक यूज किया हुआ...।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">लेकिन रानी तो उस रात पति से अलग दूसरे कमरे में सो रही थी। यह मान भी लिया जाए कि सोने से पहले पति-पत्नी नजदीक आए होंगे तब भी कंडोम देवकृष्ण के कमरे में मिलना चाहिए था न कि रानी के। क्योंकि रानी का कमरा उस कमरे से लगा हुआ था जिसमें उसकी सास और ननद सो रही थी। फिर उस रात पति से मिलने जैसी कोई बात रानी ने पुलिस को नहीं बताई थी। इसलिए रानी शक के घेरे में आ गई।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-05/dhar-1.jpg" alt="DHAR" width="1260" height="683"></img></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इसी बीच पुलिस ने गांव वालों के बीच चल रही कानापूसी पर कान लगाया तो काफी चौंकाने वाली बातें जानकारी में आ गई। जिसमें सबसे बड़ी बात तो यही थी कि शादी के बाद से ही रानी की न तो अपने पति से बनती थी और न सास ननद से। इतना ही नहीं 2020 में गौना होने के बाद से रानी व मुश्किल महीने भर ही ससुराल में रही थी। वह केवल चार-पांच रोज ससुराल में रहकर महीनों के लिए कभी मायके तो कभी बदनावर में रहने वाली अपनी नानी के घर चली जाती थी। इतना ही नहीं ससुराल में रहने की उसकी अपनी शर्तें भी थी</span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मसलन कोई उसका मोबाइल नहीं छुएगा</span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">उससे घर के किसी काम को करने के लिए नहीं कहा जाएगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सास और ननद से बताया कि वह दिन भर फोन पर बातें करती रहती थी। पति से भी सीधे मुंह बात नहीं करती थी न उसके साथ कमरे में सोती थी। रानी ने परिवार में ऐसा दबदबा बना रखा था कि उसके सामने बेटा अपनी मां और बहन से बात भी नहीं कर पाता था।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात ननद ने पुलिस को बताई उसने बताया कि भाभी के अपने गांव में रहने वाले उनके रिश्ते के जीजा कमल पुरोहित के साथ भाभी के गंदे संबंध है।<span>  </span>रानी के मोबाइल पर कमल के साथ उनकी गंदी चैट और फोटो पकड़ी भी जा चुकी हैं। जिसके बाद वह लड़-झगड़ कर मायके चली गई थी और लगभग दो साल तक नहीं आई थी। फिर आई तो अपनी शर्तों पर।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">घटना 7 अप्रैल को घटी उससे पहले भी वह 1 अप्रैल को ही ससुराल आई थी और जब से आई है भाई के कमरे में एक रात भी नहीं सोई।<span>  </span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अगर पति से इस हद तक विवाद था तो फिर रानी के कमरे में बिस्तर के नीचे छुपाकर रखा गया ...। कई सवाल उठ खड़े हुए थे। इसलिए कमल से संंबंधो के चलते रानी ही शक के दायरे में आ गई। कमल पुरोहित रानी के गांव का ही रहने वाला था और रिश्ते में उसका जीजा लगता था।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-05/dhar-67.jpg" alt="DHAR" width="727" height="546"></img></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">देवकृष्ण के अंतिम संस्कार के बाद उसी रात को एसडीओपी सुश्री बेलापुरकर ने रानी को पूछताछ के लिए राजोद थाने बुला भेजा। जहां पहले तो रानी रात वाली वही लूट की कहानी दोहराती रही लेकिन जब पुलिस ने उससे सख्ती से पूछताछ कर बार-बार मायके जाने के बारे में पूछते हुए कमल पुरोहित के नाम की तरफ इशारा किया तो 24 साल की रानी डर गई। उसने जल्द ही अपना अपराध स्वीकार करते हुए बता दिया कि उसने ही अपने पति को मरवाया है ताकि वह अपने आशिक के साथ बाकी की जिंदगी बिता सके। इस काम के लिए कमल ने सुरेन्द्र पाल सिंह नाम के एक बदमाश को एक लाख रुपए की सुपारी दी थी जिसमें से 50 हजार रूपए एडवांस के तौर पर दिए जा चुके थे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">रानी द्वारा अपना अपराध स्वीकार कर लेने के बाद पुलिस ने छापामारी कर कमल पुरोहित को गिरफ्तार कर लिया जबकि सुपारी किलर सुरेन्द्र फरार होने में कामयाब हो गया। पुलिस ने दोनों आरोपी प्रेमी जीजा-साली को अदालत में पेश किया जहां से उनको जेल भेज देने के बाद यह कहानी इस प्रकार सामने आई।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-05/dhar-66.jpg" alt="DHAR" width="667" height="544"></img></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पिता की असमय मृत्यु के बाद मां की आंचल की छांव में पलकर बड़े हुए देवकृष्ण ने मसालों का कारोबार शुरू किया था। चूंकि उसका व्यवहार अच्छा था इससे जल्द ही उसका कारोबार स्थापित हो गया। हर मां की तरह देवकृष्ण की मां लक्ष्मी देवी के मन में भी बेटे के लिए चांद जैसी बहू लाने की हसरत थी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">महाराष्ट्र में पन्नाखेड़ी में रहने वाला रानी के परिवार का देवकृष्ण के परिवार से पुराना परिचय था। इसलिए जब बात रानी के पिता को पता चली तो उन्होंने लक्ष्मी देवी के सामने रानी का विवाह देवकृष्ण से करने की इच्छा जाहिर की। रानी सुंदर ही नहीं अति सुंदर थी फिर परिवार भी जाना पहचाना था इसलिए दोनों की कुंडली का मिलान हो जाने पर लक्ष्मी देवी इस रिश्ते के लिए राजी हो गई। जिससे 1 अप्रैल 2015 में देवकृष्ण और रानी की शादी कर दी गई।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">चूंकि विवाह के समय रानी की उम्र केवल 15 साल थी इसलिए इस कच्ची उम्र में उसे पति के पास भेजना दोनों परिवार को उचित नहीं लगा इसलिए आपसी सहमति से एक दो साल बाद गौना करने के बाद रानी को ससुराल भेजने की बात तय हो जाने पर शादी के बाद दूल्हा देवकृष्ण अकेला ही वापस घर आकर काम-धंधे में लग गया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">वास्तव में मायके वालों की तरह लक्ष्मी देवी का भी सोचना था कि 15 साल की मासूम सी रानी अभी पति-पत्नी के रिश्ते के बारे में क्या ही कुछ जाने। लेकिन वे भूल गए थे कि आज के समय में बच्चे 10-12 साल की उम्र में ही वह सब कुछ जानने समझने लगते हैं जो पुरानी पीढ़ी 20-22 की उम्र में जाकर जान पाती थी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">गांव की कुछ भाभियों और विवाहित सहेलियों के द्वारा रानी भी सब कुछ जानने लगी थी कि शादी का मतलब क्या होता है। पति के प्यार को लेकर वह रोमांचित भी थी इसलिए शादी के बाद जब उसे एक-दो साल बाद गौना करने के नाम पर पति के साथ विदा नहीं किया गया तो रानी उदास हो गई। लेकिन अपने दर्द को वह किससे कहती इसलिए बेसब्री से वह उस दिन का इंतजार करने लगी जब उसका गौना हो और पति का प्यार मिले।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दो बहने अगर शादीशुदा हो तो उनके बीच बातचीत की मर्यादा काफी कुछ मिट जाती है। कमल पुरोहित के साथ रानी के बड़े पिता की बेटी की शादी हुई थी। इसलिए एक बार जब दोनों बहनें मिली तो रानी ने बातों-बातों में अपनी बहन को बताया कि माता-पिता तो उसकी शादी करके बैठ गए है अब जाने कब गौना होगा</span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us">?</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">क्यों सुहागरात की जल्दी है क्या</span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">रानी की बात पर उसकी बहन से कहा तो रानी शर्मा कर रह गई। लेकिन उसी रोज रानी की वह बहन जब अपने पति कमल के साथ थी तो उसने बातों-बातों में कमल को बता दिया कि रानी बेचारी परेशान है कि कब उसका गौना हो और पति का संग मिले।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कमल घाघ था इसलिए पत्नी की बात सुनकर भी उसने अनसुनी कर दी। लेकिन वह समझ गया कि शादी होने के बाद भी सुहागरात के लिए तरस रही साली को हाथ में लेने के लिए यह मौका अच्छा है। इसलिए अगले की दिन से उसने रानी के घर आना-जाना शुरू कर दिया। वैसे भी रिश्तेदारी के कारण उसका रानी के घर में आना-जाना पहले से था ही। इस दौरान उसे जब भी मौका मिलता रानी के साथ हंसी मजाक करने लगता। कुछ दिनों तक रानी का मन तौलने के बाद उसने बातों-बातों में रानी से कुछ गहरी मजाक करना शुरू कर दिया। इस पर भी रानी ने बुरा नहीं माना तो एक दिन मौका पाकर उसने रानी से कहा कि मैने आज तक देवकृष्ण जैसा आदमी नहीं देखा जो तुम्हारी जैसी सुंदर पत्नी होने के बाद भी रातों में अकेला सो रहा है। सच मानो अगर तुम्हारी शादी मेरे साथ हुई होती तो मैं तो एक रोज भी तुम्हारे बिना न सो पता।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कमल की बात सुनकर रानी शर्मा गई तो वह बोला अरे मुझसे क्या शर्माना। मेरी बात झूठ लगे तो अपनी बहन से पूछ लेना मैं तो आज भी हर रात उसे प्यार किए बिना नहीं सोता। प्यार का मतलब समझ रहीं हो न।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">रानी चुप रही तो कमल ने कहा अरे यार पति-पत्नी वाला प्यार। अच्छा एक बात बताओ तुम्हें शादी के बाद अकेले नींद आ जाती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">रानी ने नजरे झुकाए हुए हां में सिर हिलाया तो कमल बोला हो सकता है क्योंकि अभी तुमने उस प्यार का नशा किया नहीं न</span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">किसी दिन कर लोगी तो फिर अकेले नींद नहीं आएगी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इसी तरह मौका मिलने पर कमल रानी के मन में आग लगाता रहा और जब देखा कि अब रानी उसका विरोध नहीं करेगी तो एक रोज मौका मिलने पर उसने रानी के मना करते-करते भी उसके साथ शारीरिक संबंध बना डाला। रानी को दुख तो हुआ और बुरा भी लगा लेकिन शारीरिक सुख के अनुभव ने उसे सब कुछ भुला दिया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">उस रोज के बाद कमल और रानी अक्सर अकेले में मिलने के मौके निकालने लगे। कमल जो चाहता था वो हासिल कर चुका था लेकिन वो यह भी जानता था कि एक न एक रोज रानी को अपने पति के घर जाना है इसलिए पति के घर जाकर भी वह कमल से दूर न जाए इसलिए वे उसके मन में पति के प्रति नफरत के बीज बोता रहा। वह रानी को कहता कि ऐसा कैसा पति है कि भले ही गौना न हुआ हो कभी किसी बहाने से तुमसे मिलने तो आ ही सकता है। रानी कमल की दीवानी हो चुकी थी इसलिए उसे कमल की हर बात अच्छी और सच्ची लगने लगी थी। इसलिए शादी के बाद लगभग चार साल तक कमल के साथ अवैध सुख उठाने के बाद 2020 में जब रानी का गौना हुआ तो बेमन से पति के साथ आ गई।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ससुराल में आकर रानी रात-दिन कमल से फोन पर बातें करने लगी। पति से भी सीधे मुंह बात नहीं करती थी। देवकृष्ण सीधा-साधा युवक था इसलिए वह पत्नी के इस व्यवहार को नजर अंदाज करता रहा। इतना ही नहीं ससुराल में वह चार-पांच दिन ही रही फिर तो मायके गई तो दो-तीन महीने तक वापस नहीं आई। फिर जब आई तो वही हफ्ते भर रहकर वापस महीने भर को मायके चली गई। इस पर देवकृष्ण ने उसे टोका तो उसने घर में लड़ाई झगड़ा शुरू कर दिया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इसी बीच रिश्तेदारी का बहाना लेकर कमल ने भी रानी की ससुराल में आना-जाना शुरू कर दिया। कमल के आने पर रानी उसे अकेले ले जाकर अपने कमरे मं घंटों बैठाने लगी तो आखिर सास का सब्र टूट गया। उन्होंने इस बारे में बहू को टोका तो रानी ऐसा बखेड़ा खड़ा किया कि सास और ननद दोनों उससे डरकर रहने लगी।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><img style="margin-left:auto;margin-right:auto;" src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-05/dhar-65.jpg" alt="DHAR" width="256" height="281"></img></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस बात का फायदा उठाकर रानी ने पति देवकृष्ण को बात-बात में नीचा दिखाना शुरू कर दिया। लेकिन अब तक ननद हो शक हो चुका था कि भाभी कमल से ही दिन भर बात करती है इसलिए उसने एक रोज मौका पाकर रानी का मोबाइल चेक किया तो उसमें रानी और कमल की ढेरों अश्लील फोटो के अलावा गंदी चैट भी सामने आ गई। इस पर देवकृष्ण ने उससे सवाल जबाब किया तो वह लड़कर मायके चली गईर् और फिर पूरे दो साल बाद वापस आई तो अपनी शर्तों पर।<span>  </span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">रानी की सभी शर्तें मान ली गई। जिसके बाद वह दिन भर अपने कमरे में पड़ी फोन पर चिपकी रहने लगी। न तो उसे किसी काम का ककहा जाता और विवाद न हो इसलिए मां और बहन रानी के सामने देवकृष्ण बात तक नहीं करती थी। लेकिन अब भी रानी हमेशा की तरह दो चार दिन ससुराल में रहती फिर मायके चली या बदनावर में रहने वाली अपनी नानी के घर।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इससे धीरे-धीरे देवकृष्ण समझ गया कि उसकी पत्नी अभी भी अपने आशिक जीजा के साथ संबंध है। इसलिए कुछ समय के बाद वह रानी के बार-बार मायके जाने पर ऐतराज करने लगा। इतना की नहीं एक दो बार तो उसने इस बात को लेकर विवाद भी किया। देवकृष्ण जो अब तक रानी के डर से उसके सामने अपनी मां और बहन से बात तक नहीं करता था वही अब उसके मायके जाने का विरोध करने लगा तो रानी समझ गई कि उसका और कमल को खेल अब ज्यादा नहीं चल सकेगा। इसलिए मार्च के महीने में जब वह होली का त्यौहार बनाने के बहाने मायके गई तो उसने सोच लिया कि इस बार वह कमल से आरपार की बात करके ही आएगी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">होली पर रानी मायके आई और जब कमल उससे होली खेलने आया तो रानी का मन उदास देखकर उसने इसका कारण पूछा। इस पर रानी ने बताया कि देवकृष्ण अब सख्ती करने लगा है। इसलिए उसे नहीं लगता कि अब मैं बार-बार तुमसे मिलने आ पाऊंगी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ऐसा मत कहो यार मेरा तुम्हारे बिना मन नहीं लगता। मालूम है जब से तुमसे रिश्ता बना है मुझे तो तुम्हारी बहन को प्यार करना भी अच्छा नहीं लगता।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मगर करते तो हो न</span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us">?</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हां मजबूरी में नहीं तो वह मुझ पर शक करने लगेगी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">यही शक तो देवकृष्ण को हो गया है। मगर तुम तो जानते हो कि मुझे तुम्हारी बाहों के बिना नींद भी नहीं आती।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">तो क्या करें इसका</span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कहो तो रास्ते से हटा दें।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हां वर्ना हमारे प्यार को मुश्किल हो जाएगी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मायके में पति की हत्या की साजिश रची गई। कमल ने अपने पहचान के एक हिस्ट्रीशीटर बदमाश सुरेन्द्र सिंह को एक लाख रुपए में देवकृष्ण की हत्या के लिए राजी कर लिया। इसके बाद योजना अनुसार महीने भर मायके रहकर रानी 1 अप्रैल को ससुराल लौटी। 4 अप्रैल की रात देवकृष्ण की हत्या की जानी थी मगर उस रात सुरेन्द्र नहीं आया जिससे योजना आगे 7 अप्रैल के लिए टल गई। 7 अप्रैल को योजना अनुसार रात में सबके सो जाने के बाद रानी ने चुपचाप उठकर बाहर का दरवाजा को खोल दिया और वापस आकर अपने कमरे में लेटकर प्रेमी के आकर पति की कहानी खत्म करने का इंतजार करने लगी। रात लगभग 1 बजे कमल</span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सुरेन्द्र को लेकर रानी के घर में दाखिल हुआ और रानी द्वारा इशारे से बताए गए देवकृष्ण के कमरे में जाकर गहरी नींद में सो रहे देवकृष्ण के सिर पर कुल्हाड़ी से बार कर उसकी कहानी खत्म कर दी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सुरेन्द्र को 50 हजार रुपया पहले ही दिया जा चुका था। हत्या के बाद रानी ने अपने कमरे से लाकर उसे 50 हजार रूपया और दिया जिससे सुरेन्द्र वहां से चला गया जबकि रानी कमल का हाथ पकड़ कर अपने कमरे में ले आई जहां दोनों ने शारीरिक सुख भोगा फिर कमल दिखावे के लिए रानी के हाथ पैर साड़ी से बांधकर वहां से चला गया। जिसके चले जाने के लगभग आधा घंटे बाद रानी ने शोर मचाया जिससे पहले ननद और सास के बाद गांव वाले वहां पहुंचे फिर पुलिस। रानी को भरोसा था कि उसके ऊपर कोई शक नहीं करेगा लेकिन उसके बिस्तर के नीचे छुपाकर रखे गए कंडोम ने पुलिस को कातिल तक पहुंचा दिया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जिससे छुपाते थे राज</span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">उसी ने खोल दिया राज</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जिस कंडोम को रानी और कमल अपने अवैध संबंध की सबसे बड़ी सुरक्षा समझते थे उसी ने दोनों को कत्ल का आरोपी साबित करने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई। दरअसल ऐसा कहा जाता है कि रानी ने कभी अपने पति देवकृष्ण से संबंध नहीं बनाए थे। वह हमेशा उसके साथ न सोकर दूसरे कमरे में अकेली सोती थी। ऐसे में कमल और रानी को डर था कि अगर कभी गर्भ रूक गया तो उनके संबंध का भांडा कम से कम देवकृष्ण के सामने तो फूट ही जाएगा। इसलिए हत्या के बाद रानी और कमल ने गर्भ रोकने के लिए इसका उपयोग किया था जिसे बाद में रानी ने बिस्तर के नीचे छुपा दिया जो जांच के दौरान पुलिस के हाथ लग जाने से बड़ा सुराग बना।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-05/devkrishn-ki-ma-and-bahin.jpg" alt="DEVKRISHN KI MA AND BAHIN" width="728" height="544"></img></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भाई को हमेशा नीचा दिखाती थी भाभी</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">देवकृष्ण की बहन ने पुलिस को बताया कि शादी के बाद भाभी 5 साल मायके में रही फिर गौना होकर हमारे घर आते ही उन्होंने बात-बात पर हम लोगों से लड़ाई झगड़ा शुरू कर दिया था। वह पहली रात ही बड़ी मुश्किल से उनके कमरे में सोने गई थी। उस समय हम लोगों ने उनकी इस बात को उनकी शर्म समझा लेकिन अगले की दिन से उन्होंने भाई से अलग कमरे में सोना शुरू कर दिया था। जब मैने उनसे इस बारे में पूछा तो उन्होंने सीधे कह दिया कि मुझे उनसे सवाल करने का हक नहीं है। वह बात-बात में भाई कभी काला कलूटा तो कभी गंवार कहकर नीचा दिखाती थी। एक बार तो उन्होंने भाई का गला दबाने की भी कोशिश की थी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">रंगे हाथ पकड़ी गई थी अश्लील चैटिंग</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ससुराल में आकर रानी दिन रात अपने प्रेमी जीजा से फोन पर बात करती रहती थी। कुछ दिनों के बाद रिश्तेदारी की ओट लेकर कमल ने भी रानी की ससुराल आना जाना शुरू कर दिया था। जब कमल कुछ ज्यादा ही आने जाने लगा तो रानी की ननद और सास को उनके रिश्ते पर शक हुआ जिसके बाद ननद ने रानी के मोबाइल पर कमल के साथ उनके अश्लील फोटो और चैटिंग पकड़ ली थी। जिससे लड़ झगड़ कर रानी मायके चली गई थी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अपनी शर्त पर रहती थी ससुराल में</span></strong></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">झगड़ा कर मायके गई रानी तीन साल बाद जब वापस लौटी तो अपनी शर्तों पर। उसकी शर्त थी कि वह घर का कोई काम नहीं करेगी। न कोई उसका मोबाइल छुएगा और न उसके कमरे में आएगा। देवकृष्ण ने यह शर्तें मान ली थी तब कहीं जाकर रानी ससुराल आई थी। लेकिन अब कमल का उसकी ससुराल आना बंद हो गया था इसलिए रानी ससुराल में चार-पांच दिन से अधिक नहीं रहती थी। वह कभी मायके चली जाती तो कभी बदनावर में अपनी नानी के घर।</span></p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 13:41:42 +0530</pubDate>
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