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                <title>सत्यकथा - दैनिक जागरण</title>
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                <title>इंदौर की बड़ी ठगी की कहानी: नकली पुलिस और तांत्रिक की मिलीजुली करतूत</title>
                                    <description><![CDATA[स्कूल के दिनों से शुरू हुआ इश्क किशोरावस्था में हुई दोस्ती ने वर्षों बाद प्रेम में तब्दील हो गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/satyakatha/indores-big-fraud-story-collusion-between-fake-police-and-tantrik/article-50362"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/ेsathyakatha-(2).jpg" alt=""></a><br /><p>इंदौर में हाल ही में पुलिस ने एक बड़े धोखाधड़ी के जाल का खुलासा किया है, जिसमें नकली पुलिस अफसर और महिला तांत्रिक ने मिलकर लोगों को करोड़ों रुपए का चूना लगाया। मामला तब सामने आया जब सिमरोल निवासी सरिता ने अपने मंगेतर सपन सोलंकी पर शक करना शुरू किया। सपन ने खुद को एएसआई और बाद में एसआई बताकर सरिता से सगाई के समय आठ लाख रुपए ठगे और एक एक्टिवा भी ले लिया। सरिता ने सपन के पुलिस की वर्दी पहनकर हर बार मिलने पर भी ध्यान दिया, और अंततः अपने भाई की मदद से यह पता लगाया कि सपन इंदौर पुलिस में कार्यरत ही नहीं है।</p>
<p><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-04/in.jpg" alt="IN" width="460" height="767"></img></p>
<p>सपन ने धोखे के लिए अपनी पढ़ाई और वास्तविक योग्यता का फायदा उठाते हुए नकली पुलिस आईडी और वर्दी तैयार करवा ली थी। इसके बाद उसने कई लड़कियों और लोगों को नौकरी और प्रमोशन का लालच देकर पैसे वसूलने शुरू कर दिए। शहर और आसपास के गांवों में अपने पुलिस अफसर बनने का दिखावा कर उसने लोगों को भरोसा दिलाया और कई मामलों में उनकी बड़ी रकम ठग ली।</p>
<p>सपन के ठगी के नेटवर्क में शामिल थी छोटू महाराज, जो असल में महिला थी। सीमा नाम की यह महिला पिछले आठ साल से पुरुष बनकर इंदौर और उज्जैन में तंत्र-मंत्र के नाम पर लोगों को ठग रही थी। आश्रम में आने वाले भक्तों और युवतियों को नोट बारिश और पूजा के बहाने करोड़ों रुपए देने का लालच देकर ठगी की जाती थी। छोटू महाराज के सहयोगी विष्णु और राहुल शमशान और अंधेरी जगहों पर पूजन कर लोगों को डराते और उनके पैसे वसूलते थे।</p>
<p><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-04/inn.jpg" alt="INN" width="534" height="400"></img></p>
<p>सरिता की रिपोर्ट के बाद विजयनगर थाना टीआई तहजीब काजी और उनकी टीम ने मामले की जांच शुरू की। पुलिस ने सिमरोल और सुपर कॉरिडोर में सपन और छोटू के ठगी के नेटवर्क को ट्रैक किया। पूछताछ में यह सामने आया कि सपन ने दो अलग-अलग युवतियों के साथ धोखाधड़ी और बलात्कार भी किया। इसके अलावा सपन और छोटू ने नोट बारिश के नाम पर कई लोगों से बड़ी रकम ठग ली थी। आश्रम की तलाशी में पुलिस को तंत्र-मंत्र में इस्तेमाल होने वाली सामग्री और रिकॉर्डिंग भी बरामद हुई।</p>
<p><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-04/new-project-31_1635870203-(1)1.jpg" alt="NEW-PROJECT-31_1635870203 (1)" width="559" height="289"></img></p>
<p>पूछताछ में यह भी पता चला कि छोटू महाराज ने अपने आश्रम में आने वाली लड़कियों को सपन के बारे में बताया कि वह आईपीएस अधिकारी है और जल्द ही कमिश्नर बनने वाला है। इस झांसे में युवतियों से लाखों रुपए ठगे गए। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद यह गिरोह पकड़ में आया और करोड़ों रुपए के इस ठगी के जाल का पर्दाफाश हुआ।</p>
<p><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-04/ti-tahzeeb-kazi88.jpg" alt="TI TAHZEEB KAZI88" width="476" height="575"></img></p>
<p>इंदौर पुलिस की सतर्कता और टीमवर्क के कारण नकली पुलिस अफसर और महिला तांत्रिक का यह रहस्य उजागर हुआ। यह मामला समाज के लिए चेतावनी है कि किसी भी दिखावे या लालच में तुरंत भरोसा नहीं करना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सत्यकथा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 15:28:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[ANKITA ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>हवलदारनी का इश्क: मेरठ में पुलिस सिपाही ने शादी से पहले भागकर चुना अपने हिस्ट्रीशीटर आशिक का साथ</title>
                                    <description><![CDATA[शादी से ठीक पहले भागी पुलिसकर्मी मेरठ जिले में महिला सिपाही ने हिस्ट्रीशीटर प्रेमी के साथ घर छोड़ा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/satyakatha/havaldarnis-love-police-constable-in-meerut-ran-away-before-marriage/article-50352"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/ेsathyakatha-(1).jpg" alt=""></a><br /><p>उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में एक महिला पुलिसकर्मी की शादी से ठीक एक दिन पहले भागने की घटना ने पूरे जिले में सनसनी मचा दी। पुलिस रिकॉर्ड में हिस्ट्रीशीटर के रूप में दर्ज प्रेमी के साथ भागी दुल्हन की यह कहानी परिवार, समाज और कानून के बीच उलझे प्रेम की मिसाल बन गई है।</p>
<p><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-04/meerut2---copy.jpg" alt="MEERUT2 - Copy" width="434" height="323"></img></p>
<p>7 फरवरी की रात मेरठ जिले के अकबरपुर सादात के बहसूमा इलाके में महिला सिपाही की शादी की तैयारियां जोरों पर थीं। विवाह अलीगढ़ के थाने में तैनात एक अन्य सिपाही से तय हुआ था। ढोल-नगाड़ों और गीतों के बीच घर में उत्साह का माहौल था, लेकिन 2 बजे के करीब अचानक बाइक की आवाज ने सबको चौका दिया। बाइक पर उसका प्रेमी, जो हिस्ट्रीशीटर था, आया और महिला सिपाही उसके साथ घर से फरार हो गई।</p>
<h5><strong>अपहरण या मर्जी?</strong></h5>
<p><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-04/meerut-(2).jpg" alt="MEERUT (2)" width="373" height="499"></img></p>
<p>सुबह होते ही महिला सिपाही के पिता ने थाने में अपहरण की एफआईआर दर्ज कराई। हालांकि पुलिस जांच में पाया गया कि महिला सिपाही ने अपने प्रेमी के साथ अपनी मर्जी से घर छोड़ा था। आठ घंटे बाद महिला सिपाही स्वयं मवाना थाने पहुंची और खुलासा किया कि वह अपने प्रेमी के साथ कोर्ट मैरिज करने का इरादा लेकर गई थी।</p>
<h5><strong>स्कूल के दिनों से शुरू हुआ इश्क</strong></h5>
<p>जानकारी के अनुसार, दोनों की मुलाकात लगभग 12 साल पहले स्कूल के दौरान हुई थी। किशोरावस्था में दोस्ती धीरे-धीरे प्रेम में बदल गई। महिला सिपाही के परिवार को इस रिश्ते का पता था, लेकिन उन्होंने इसे गंभीरता से नहीं लिया।</p>
<p>महिला सिपाही पढ़ी-लिखी और योग्य हैं। पुलिस विभाग में शामिल होने से पहले उन्होंने शिक्षक भर्ती परीक्षा, रेलवे और दिल्ली पुलिस की परीक्षा भी पास की थी। उनकी करियर आकांक्षाएं समाज में सम्मान और स्थायित्व की ओर थीं।</p>
<p>प्रेमी के खिलाफ मवाना थाने में नौ और किला परीक्षितगढ़ थाने में दो आपराधिक मामले दर्ज हैं। मई 2025 में उसने शराब की दुकान पर लूट की घटना में भाग लिया था और पुलिस मुठभेड़ में घायल हुआ। वह मेरठ के गोलू गैंग से भी जुड़ा है।</p>
<p>पुलिस ने घटना के तुरंत बाद पूरे जिले में घेराबंदी की और प्रेमी की तलाश की। महिला सिपाही के परिवार ने इसे अपहरण बताया, जबकि महिला सिपाही ने कोर्ट में स्पष्ट किया कि उन्होंने अपने प्रेमी के साथ जाने का निर्णय स्वयं लिया था। इस बयान के बाद पुलिस ने अपहरण केस को कमजोर मानते हुए रिपोर्ट में बदलाव किया।</p>
<p>यह मामला दर्शाता है कि कभी-कभी प्यार परिवार और कानून की सीमाओं को चुनौती दे सकता है। महिला सिपाही और हिस्ट्रीशीटर प्रेमी की कहानी सामाजिक और कानूनी दृष्टिकोण से चर्चा का विषय बनी हुई है। अभी दोनों की कोर्ट मैरिज की संभावना और कानूनी स्थिति पर निगरानी बनी हुई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सत्यकथा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 14:58:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[ANKITA ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सिर्फ़ मोहब्बत नहीं, लालच और अंधे प्यार ने रचा खौफनाक मर्डर</title>
                                    <description><![CDATA[एक शिक्षक की मौत, पत्नी और उसके प्रेमी की साजिश ने शहर में मचाई सनसनी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/satyakatha/the-cruel-truth-of-love-betrayal-and-murder-karahal-valley/article-50193"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/satyakatha-(6).jpg" alt=""></a><br /><p>श्योपुर की कराहल घाटी की सुबह हमेशा की तरह शांत थी। हल्की धूप ने धीरे‑धीरे घाटी के पेड़ों पर अपने सुनहरे रंग बिखेर दिए थे। लेकिन उस दिन घाटी की ठंडी हवा के बीच एक भयावह खबर ने सबको झकझोर दिया — घाटी के करालह मोड़ पर एक आदमी का शव पड़ा था, और उसके पास उसकी बाइक बिखरी हुई थी। ग्रामीणों की आँखों में डर और आश्चर्य दोनों झलक रहे थे। कोई यह नहीं समझ पाया कि यह सिर्फ़ सड़क हादसा था, या किसी ने इसे ऐसा दिखाने की साजिश रची थी।</p>
<p><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-04/syp-4.jpg" alt="SYP 4" width="483" height="376"></img></p>
<p>रमाकांत पाठक, 49 साल के, स्कूल के एक सम्मानित शिक्षक थे। व्यवहार में सरल, हमेशा अपने छात्रों और समाज के लिए समर्पित। घर में भी वह जिम्मेदार पति थे। लेकिन सरकारी नौकरी और घर की व्यस्तताओं ने उनके और उनकी पत्नी के बीच धीरे‑धीरे दूरी पैदा कर दी थी। वह अपने घर और छात्रों के बीच उलझे रहते, और शायद यह दूरी ही उनकी जिंदगी में अँधेरी छाया का कारण बनी।</p>
<h4><span><strong>अराधना मोह और लालच की जाल में फंसी</strong></span></h4>
<p>अराधना, रमाकांत की पत्नी, 37 साल की एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता। उसका दिल अभी भी अपनी जवानी की चमक में था, और इसी बीच उसने ध्यान दिया कि एक युवक — मनीष — रोज़ उसी पेट्रोल पंप पर खड़ा रहता है जहां से वह गुजरती थी। पहले सिर्फ़ नमस्ते, फिर मुस्कान, और फिर धीरे‑धीरे एक खतरनाक आकर्षण। उम्र का फ़र्क़ उसे रोक नहीं पाया।</p>
<p>अराधना को पता था कि रमाकांत उसके साथ पूरा समय नहीं दे सकते। इस कमी ने मनीष की ओर उसकी दृष्टि बदल दी। और मनीष? वह भी अराधना की ओर खिंचा चला आया, उसकी साधारण जिंदगी में अब रोमांच और लालच की नई दुनिया खुल रही थी।</p>
<h4><span><strong><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-04/syp.jpg" alt="satyakatha" width="516" height="284"></img></strong></span></h4>
<h4><span><strong>मनीष साधारण युवक, बड़ी चाहत और लालच</strong></span></h4>
<p>मनीष साकेत, 24 साल का, पेट्रोल पंप पर मामूली तनख्वाह पाने वाला युवक। पैसों की कमी ने उसे हमेशा चिंता में रखा। अराधना से मुलाकात ने उसे एक बड़ी सोच दी अगर रमाकांत नहीं रहे तो वह अराधना का साथी बन सकता है, और साथ में उसकी संपत्ति का लाभ भी।</p>
<p>धीरे‑धीरे, अराधना और मनीष की मुलाकातें बढ़ीं। कभी सुनसान घर में, कभी जंगल की तरफ़, उनकी चाहत और वासना ने उन्हें एक दूसरे का दीवाना बना दिया। लेकिन यह दीवानगी अब मासूम नहीं थी यह अँधेरे रास्ते की ओर बढ़ रही थी।</p>
<h5><span><strong><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-04/syp-5-(1).jpg" alt="satyakatha" width="312" height="381"></img></strong></span></h5>
<h5><span><strong>साज़िश प्यार से मौत की ओर</strong></span></h5>
<p>रमाकांत की मौजूदगी अब उनके लिए बाधा बन गई थी। अराधना और मनीष ने मिलकर रमाकांत को रास्ते से हटाने की योजना बनाई। मनीष ने अपने दोस्त सतनाम सिंह को भी इसमें शामिल किया, जो पैसों के लालच में किसी भी हद तक जा सकता था।</p>
<p>सतनाम को 4 लाख रुपये का वादा किया गया — राशि जो मनीष खुद नहीं जुटा सकता था। लेकिन अराधना ने कहा, “तुम पैसों की चिंता मत करो, मैं देने का इंतजाम कर दूंगी। बस जल्दी इसे खत्म करो।”</p>
<hr />
<h5><span><strong><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-04/syp4.jpg" alt="SYP4" width="315" height="448"></img></strong></span></h5>
<h5><span><strong>27 दिसंबर की रात अँधेरा और मौत</strong></span></h5>
<p>वह रात, तीनों — रमाकांत, मनीष और सतनाम एक कार में जंगल की ओर निकले। बहाना था — “चलो घूमने चलते हैं।” जैसे ही रमाकांत कार से उतरे, सतनाम ने डंडा उठाया। एक भयानक वार, और रमाकांत जमीन पर गिर पड़ा। सांसें थम गईं।मनीष और सतनाम ने शव और बाइक को खाई में फेंक दिया। यह हादसा दिखाने का उनका आखिरी प्रयास था।</p>
<p>सुबह सब कुछ सामान्य लग रहा था। लेकिन पोस्टमार्टम ने सच उजागर किया  सिर पर गंभीर चोटें और शरीर पर संघर्ष के निशान। पुलिस ने आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले।<br />फुटेज ने सबकुछ स्पष्ट कर दिया  रमाकांत, मनीष और सतनाम साथ थे। दबाव में मनीष ने कबूल किया, सतनाम ने पुष्टि की, और अंततः अराधना को भी गिरफ्तार कर लिया गया।</p>
<p><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-04/syp2.jpg" alt="SYP2" width="488" height="366"></img></p>
<p>शहर में शोक की लहर दौड़ गई। लोग यह नहीं मान पा रहे थे कि एक पत्नी अपने पति की हत्या में शामिल हो सकती है। सोशल मीडिया, स्थानीय सभा, और समाज सबने अराधना सहित सभी आरोपियों के लिए कड़ी सज़ा की मांग की।</p>
<p>यह कहानी सिर्फ़ प्रेम की नहीं, बल्कि मनुष्य की लालच, धोखा और अंधे प्यार की भी है।<br />कभी प्यार दिल को रोशन करता है, कभी वही अँधेरे में धकेल देता है। रमाकांत की जिंदगी खत्म हो गई, लेकिन सच और न्याय की आवाज़ अब हमेशा गूंजती रहेगी</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सत्यकथा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Apr 2026 16:21:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[ANKITA ]]></dc:creator>
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                <title> सत्यकथा: आठ साल का डर, एक दिन का न्याय</title>
                                    <description><![CDATA[<p>फरवरी की सुबह थी, अदालत कक्ष का वातावरण भारी था, जैसे दीवारें भी किसी लंबे संघर्ष की गवाह हों। बेंच पर बैठी नीता (परिवर्तित नाम) अपनी उंगलियाँ आपस में भींचे हुए थी। आठ वर्षों की पीड़ा, अपमान और भय आज शब्दों में नहीं, फैसले में बदलने वाला था।जब न्यायाधीश ने सजा सुनाई, तो उसकी आँखों से बहते आँसू केवल दर्द के नहीं थे — वे मुक्त होने की घोषणा थे।यह कहानी किसी एक घटना की नहीं, बल्कि धीरे-धीरे टूटती एक जिंदगी और फिर उसी जिंदगी के खड़े होने की कहानी है।</p>
<h5><strong>एक साधारण शुरुआत, असाधारण मोड़</strong></h5>
<p>नीता एक साधारण परिवार</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/satyakatha/phone-pay-loan-and-insurance-sector-are-big-business-growth-drivers/article-46786"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-02/sathykatha.jpg" alt=""></a><br /><p>फरवरी की सुबह थी, अदालत कक्ष का वातावरण भारी था, जैसे दीवारें भी किसी लंबे संघर्ष की गवाह हों। बेंच पर बैठी नीता (परिवर्तित नाम) अपनी उंगलियाँ आपस में भींचे हुए थी। आठ वर्षों की पीड़ा, अपमान और भय आज शब्दों में नहीं, फैसले में बदलने वाला था।जब न्यायाधीश ने सजा सुनाई, तो उसकी आँखों से बहते आँसू केवल दर्द के नहीं थे — वे मुक्त होने की घोषणा थे।यह कहानी किसी एक घटना की नहीं, बल्कि धीरे-धीरे टूटती एक जिंदगी और फिर उसी जिंदगी के खड़े होने की कहानी है।</p>
<h5><strong>एक साधारण शुरुआत, असाधारण मोड़</strong></h5>
<p>नीता एक साधारण परिवार से थी। पिता शिक्षक, माँ गृहिणी, दो छोटे भाई — और घर की पहली बेटी जिसने सरकारी नौकरी हासिल की।<br />उस दिन जब वह पहली बार नौकरी पर निकली थी, पिता ने कहा था ,ईमानदारी से काम करना… और कभी झुकना मत।”पहले कुछ महीने सामान्य रहे। खेतों के रिकॉर्ड, लोगों की समस्याएँ, सरकारी काम, उसे अपना काम पसंद था।लेकिन धीरे-धीरे एक अधिकारी का “विशेष ध्यान” उस पर केंद्रित होने लगा।शुरुआत मदद से हुई।फिर मार्गदर्शन से।फिर बुलावे से।और अंततः दबाव से। नीता को देर शाम बुलाया जाने लगा। बातचीत का स्वर बदलने लगा।वह समझ नहीं पा रही थी — यह संरक्षण है या नियंत्रण?</p>
<p><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-02/adm.jpg" alt="adm" width="290" height="433"></img></p>
<h5><strong>भरोसे का टूटना</strong></h5>
<p>एक शाम उसे “जरूरी दस्तावेज़” के बहाने बुलाया गया। कार्यालय लगभग खाली था।दरवाज़ा बंद हुआ। कमरे में शराब की गंध थी।<br />और फिर… उसके विरोध का कोई अर्थ नहीं रह गया।उस रात के बाद नीता कई दिनों तक बीमार रही।घरवालों ने पूछा — उसने चुप्पी चुनी।क्योंकि उसे बताया गया था अगर बोली तो नौकरी जाएगी, परिवार टूटेगा, समाज तिरस्कार करेगा। उसने सोचा — शायद यह आखिरी बार था।<br />लेकिन यह शुरुआत थी।</p>
<hr />
<p><strong>आने वाले वर्षों में शोषण एक सुनियोजित तंत्र बन गया।</strong></p>
<p>बार-बार अकेले बुलाना, पद और प्रभाव का डर, शादी के रिश्ते तुड़वाना,जबरन तस्वीरें और वीडियो बनाकर ब्लैकमेल ,परिवार को नुकसान पहुँचाने की धमकियाँ,नीता का जीवन दो हिस्सों में बँट गया —,बाहरी दुनिया में वह एक सरकारी कर्मचारी थी,,भीतर से वह लगातार डर में जी रही थी।समाज को कुछ पता नहीं था।कार्यालय में फुसफुसाहट थी।लेकिन आवाज़ नहीं थी।</p>
<p><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-02/badbani.jpg" alt="badbani" width="945" height="517"></img></p>
<p><strong>नीता क्यों चुप रही?</strong><br />क्योंकि हर रास्ता बंद दिखता था।वह जानती थी —शिकायत का मतलब सिर्फ न्याय की लड़ाई नहीं, चरित्र पर सवाल भी होगा।उसे अपनेपरिवार की चिंता थी।उसे अपनी नौकरी की चिंता थी।उसे अपने भविष्य की चिंता थी।और सबसे बड़ी बात — उसे यकीन नहीं था कि कोई विश्वास करेगा।चुप्पी उसका बचाव भी थी और कैद भी।</p>
<p>दिसंबर की एक रात ने सब बदल दिया।नशे में धुत आरोपित उसके घर पहुँचा।गुस्सा, हिंसा और अपमान…मारपीट ने उसे भीतर तक तोड़ दिया।उस रात पहली बार उसे महसूस हुआ —डर उसे बचा नहीं रहा, खत्म कर रहा है।अगले दिन आईने में खुद को देखकर उसने फैसला लिया —अब खामोशी नहीं।</p>
<hr />
<p>शिकायत दर्ज करना आसान नहीं था।हर बयान में उसे अपना दर्द दोबारा जीना पड़ा।जांच, बयान, सवाल, जिरह — हर कदम एक परीक्षा था।लेकिन धीरे-धीरे सच्चाई की कड़ियाँ जुड़ने लगीं —फोन रिकॉर्ड, गवाह, व्यवहार के प्रमाण, परिस्थितियाँ।सबसे मजबूत सबूत था — उसकी लगातार और सुसंगत गवाही।वह अब डरकर नहीं, सच बोलकर रोती थी।</p>
<h2><strong>न्याय का क्षण</strong></h2>
<p>अदालत ने माना कि पद और प्रभाव का इस्तेमाल कर व्यवस्थित शोषण किया गया।यह केवल व्यक्तिगत अपराध नहीं, सत्ता के दुरुपयोग का मामला था।जब सजा सुनाई गई, तो अदालत में मौजूद लोग स्तब्ध थे।नीता शांत थी।आठ साल बाद उसने पहली बार अपने पिता की आँखों में बिना झिझक देखा।</p>
<p><strong>यह कहानी केवल अपराध और सजा की नहीं है।यह कहानी तीन सच्चाइयों की है:</strong></p>
<p>डर लंबे समय तक शासन कर सकता है, लेकिन हमेशा नहीं।सत्ता शक्तिशाली होती है, पर जवाबदेही उससे बड़ी होती है।न्याय देर से आता है, पर जब आता है तो इतिहास बदल देता है।समाज अक्सर पूछता है — “इतने साल चुप क्यों रही?”यह कथा जवाब देती है —<br />क्योंकि कभी-कभी बोलने से पहले जीवित बचना जरूरी होता है।और जब कोई बोलता है, तो वह सिर्फ अपने लिए नहीं बोलता —<br />वह उन सबकी आवाज़ बनता है जो अभी भी चुप हैं।</p>
<p>--------------------------</p>
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                                                            <category>सत्यकथा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Feb 2026 16:18:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[ANKITA ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सत्यकथा : “पिया दगाबाज़: प्रेम के बहाने पति ने पत्नी की जान ली”</title>
                                    <description><![CDATA[अशोकनगर: शक की आग में जली भरोसे की गृहस्थी, पति ने ही रच दिया पत्नी का अंत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/satyakatha/satyakatha-irani-camps-don-raju-irani-arrested-police-clamps-down/article-44676"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-01/satya-katha-(5).jpg" alt=""></a><br /><p>शक जब रिश्तों में घर कर जाता है, तो वह प्रेम, भरोसे और साथ की सारी नींव को धीरे-धीरे खोखला कर देता है। अशोकनगर जिले के अमाही ताल क्षेत्र में सामने आई एक दिल दहला देने वाली घटना ने यही साबित किया है, जहां एक पति ने अपनी ही पत्नी को बेवफाई के भ्रम में मौत के घाट उतार दिया।</p>
<p>जनवरी 2026 की ठिठुरन भरी रातें चल रही थीं। पांच दिन बीत चुके थे, लेकिन सर्द हवाओं का असर कम होने का नाम नहीं ले रहा था। अशोकनगर जिले के गांव अमाही ताल में रहने वाली गौरी (परिवर्तित नाम) उस रात कुछ अलग ही उम्मीदों में थी। बीते कई दिनों से पति नन्नू आदिवासी के साथ उसका विवाद चल रहा था। झगड़े बढ़कर मारपीट तक पहुंच चुके थे, लेकिन उस दिन सुबह नन्नू ने पहली बार नरमी दिखाई थी।</p>
<p><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-01/askn-2.jpg" alt="ASKN 2" width="570" height="798"></img></p>
<p>काम पर जाने से पहले उसने पत्नी से माफी मांगी, हाथ थामकर भरोसा दिलाया कि शाम को जल्दी लौटेगा। यही वजह थी कि गौरी उस रात का बेसब्री से इंतजार कर रही थी, यह जाने बिना कि यह उसकी जिंदगी की आखिरी रात होगी।</p>
<p>रात ढलते ही दोनों कमरे में चले गए। बाहर अलाव तापते परिजनों को क्या पता था कि भीतर भरोसे की सांसें टूट रही हैं। कुछ ही देर बाद, नन्नू ने मौका देखकर पत्नी का गला दबा दिया। इसके बाद उसने शव को कंबल में लपेटकर आग लगाने की कोशिश की, ताकि मामला हादसा लगे।</p>
<p>आधी रात के बाद डायल 112 पर सूचना पहुंची। बहादुरपुर थाना क्षेत्र के ग्राम हासली निवासी और गौरी के पिता मानसिंह आदिवासी ने पुलिस को बताया कि उनकी बेटी की हत्या कर दी गई है। सूचना मिलते ही देहात थाना प्रभारी उपनिरीक्षक भुवनेश शर्मा पुलिस बल के साथ अमाही ताल पहुंचे।</p>
<p>मौके पर गौरी का शव पड़ा था। गले पर दबाव के स्पष्ट निशान थे। आसपास मौजूद लोगों ने पुलिस को बताया कि नन्नू खुद ही यह कह रहा था कि उसने अपनी पत्नी को मार दिया है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा और हत्या का मामला दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू की।</p>
<p> </p>
<p><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-01/askn-4.jpg" alt="ASKN 4" width="1080" height="1320"></img></p>
<p>घटना के महज आठ घंटे के भीतर पुलिस ने नन्नू आदिवासी को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उसने अपराध स्वीकार कर लिया। इसके बाद जांच में जो कहानी सामने आई, वह और भी डरावनी थी।</p>
<p>नन्नू और गौरी की शादी करीब पांच साल पहले हुई थी। शुरुआती चार साल दोनों के बीच सब कुछ सामान्य रहा। दो छोटे बच्चों के साथ परिवार खुशहाल दिखता था। लेकिन पिछले एक साल से नन्नू के व्यवहार में बदलाव आने लगा। वह पत्नी के चरित्र पर शक करने लगा था।</p>
<p>पुलिस जांच में सामने आया कि नन्नू अपनी शारीरिक कमजोरी को लेकर मानसिक दबाव में था। उसे डर था कि उसकी अक्षमता के कारण पत्नी किसी और से संबंध बना सकती है। इसी आशंका ने उसके भीतर अविश्वास और गुस्से को जन्म दिया। हाल ही में गौरी के शरीर में आए बदलावों को उसने गलत नजरिए से देखना शुरू कर दिया।</p>
<p> </p>
<p><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-01/askn-3.jpg" alt="ASKN 3" width="640" height="640"></img></p>
<p>पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गौरी के गर्भवती होने की पुष्टि नहीं हुई, जिससे साफ हो गया कि आरोपी का शक पूरी तरह निराधार था।</p>
<p>पुलिस के अनुसार, नन्नू ने पहले पत्नी को भरोसे में लिया, फिर प्रेम का नाटक कर उसे असहाय स्थिति में पहुंचाया और बाद में वारदात को अंजाम दिया। हत्या के बाद सबूत मिटाने की भी कोशिश की गई, लेकिन वह ज्यादा देर तक कानून से बच नहीं सका।<img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-01/askn-1.jpg" alt="ASKN 1" width="597" height="723"></img></p>
<p>यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि शक, जब संवाद की जगह ले लेता है, तो वह केवल एक रिश्ते को नहीं, पूरी जिंदगी को खत्म कर देता है।</p>
<p>------</p>
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                                                            <category>सत्यकथा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 29 Jan 2026 13:48:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सत्यकथा :  इश्क की साजिश, कत्ल का अंजाम</title>
                                    <description><![CDATA[भिण्ड: अवैध रिश्ते में बाधा बना पति, प्रेमी से करवाई हत्या, कुएं में फिंकवाया शव]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/satyakatha/satyakatha-irani-camps-don-raju-irani-arrested-police-clamps-down/article-44666"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-01/satya-katha-(4).jpg" alt=""></a><br /><p>प्यार जब लालच और वासना में बदल जाता है, तब वह रिश्तों की मर्यादा ही नहीं, इंसानियत की सीमाएं भी तोड़ देता है। भिण्ड जिले के उटीला थाना क्षेत्र में सामने आया महावीर हत्याकांड इसी कड़वे सच का उदाहरण है, जहां एक महिला ने अपने अवैध संबंधों की राह साफ करने के लिए पति की हत्या करवा दी।</p>
<p><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-01/gwl-aaropi-surendra.jpg" alt="GWL AAROPI SURENDRA" width="498" height="663"></img></p>
<p>5 सितंबर 2024 को भोगीपुरा गांव के पास सड़क किनारे एक खेत में बने कुएं से दुर्गंध उठने की सूचना पुलिस को मिली। तत्कालीन थाना प्रभारी शिवम राजावत पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। कुएं से एक युवक का शव बरामद हुआ, लेकिन मौके पर ऐसा कोई सुराग नहीं मिला, जिससे पहचान या हत्या की वजह साफ हो सके।</p>
<p>शव की शिनाख्त ई-रक्षा एप और गुमशुदगी रिकॉर्ड के जरिए महावीर के रूप में हुई, जो भिण्ड जिले का रहने वाला था और फिलहाल ग्वालियर में रह रहा था। उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट उसी दिन आलमपुर थाने में दर्ज कराई गई थी।</p>
<p><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-01/gwl-jyoti.jpg" alt="GWL JYOTI" width="720" height="911"></img></p>
<p>जांच की शुरुआत आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों से हुई। फुटेज में महावीर को एक युवक के साथ देखा गया। परिजनों ने उसकी पहचान सुरेंद्र के रूप में की और साथ ही यह चौंकाने वाली जानकारी दी कि सुरेंद्र के महावीर की पत्नी सीमा (परिवर्तित नाम) से नजदीकी संबंध थे।</p>
<p>संदेह गहराने पर पुलिस ने सुरेंद्र को हिरासत में लिया। सख्त पूछताछ में वह टूट गया और उसने स्वीकार किया कि सीमा के कहने पर ही उसने महावीर की हत्या की थी।</p>
<p>पूछताछ में सामने आया कि महावीर शादी के बाद पत्नी और तीन साल के बेटे के साथ ग्वालियर में किराए के मकान में रहता था। सुरेंद्र रिश्तेदार होने के नाते उसके घर आता-जाता था। इसी दौरान सीमा और सुरेंद्र के बीच नजदीकियां बढ़ीं, जो धीरे-धीरे अवैध संबंधों में बदल गईं।</p>
<p>जब महावीर को इस रिश्ते की भनक लगी तो घर में तनाव बढ़ गया। पति की सख्ती से परेशान सीमा ने प्रेमी पर दबाव बनाया कि अगर वह उसे हमेशा के लिए पाना चाहता है तो महावीर को रास्ते से हटाना होगा। आत्महत्या की धमकी ने सुरेंद्र को अपराध की राह पर धकेल दिया।</p>
<p><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-01/ggwl.jpg" alt="GGWL" width="272" height="180"></img></p>
<p> </p>
<p>योजना के तहत 3 सितंबर को सुरेंद्र महावीर को ग्वालियर जेल में बंद एक रिश्तेदार से मिलाने के बहाने अपने साथ ले गया। अगले दिन लौटते समय उटीला क्षेत्र के भोगीपुरा के पास सुनसान जगह पर गांजा पीने का बहाना बनाकर बाइक रुकवाई। मौका पाते ही सुरेंद्र ने पत्थर से महावीर के सिर पर वार कर दिया और शव को पास के कुएं में फेंक दिया।</p>
<p>हत्या के बाद सुरेंद्र ने सीमा को फोन कर काम पूरा होने की जानकारी दी। सबूत मिटाने के लिए मृतक की बाइक नहर किनारे छिपा दी गई, मोबाइल और खून से सने कपड़े झाड़ियों में फेंक दिए गए।</p>
<p><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-01/gwll.jpg" alt="GWLL" width="800" height="541"></img></p>
<p>पुलिस ने सुरेंद्र के बयान के आधार पर सीमा को भी गिरफ्तार कर लिया। जांच में यह भी सामने आया कि हत्या के बाद सीमा ने प्रेमी को अयोध्या भेज दिया था, ताकि शक से बचा जा सके। दोनों के आगरा घूमने की भी योजना थी, लेकिन पुलिस ने समय रहते पूरी साजिश का पर्दाफाश कर दिया।</p>
<p>थाना प्रभारी शिवम राजावत के मुताबिक यह हत्या पूरी तरह योजनाबद्ध थी। दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।</p>
<p><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-01/01.jpg" alt="01" width="945" height="591"></img></p>
<p>यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि जब रिश्तों में भरोसे की जगह स्वार्थ और वासना ले लेती है, तो उसका अंत अक्सर खून और पछतावे में ही क्यों होता है।</p>
<p>-----</p>
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                <pubDate>Thu, 29 Jan 2026 13:48:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सत्यकथा : अंधविश्वास का खूनी अंजाम</title>
                                    <description><![CDATA[नर्मदापुरम: जादू-टोने के शक में दोस्त ने रची दोस्त की हत्या, जंगल में जलाया शव]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/satyakatha/true-story-bloody-consequences-of-superstition/article-44663"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-01/ndp-mritak.jpg" alt=""></a><br /><p>अंधविश्वास जब तर्क और संवेदना पर हावी हो जाता है, तो उसका परिणाम अक्सर हिंसा और विनाश के रूप में सामने आता है। नर्मदापुरम जिले में सामने आया चंदन नागवंशी हत्याकांड इसी कड़वी सच्चाई की गवाही देता है, जहां एक युवक ने अपनी मां की मौत का बदला लेने के नाम पर अपने ही दोस्त की निर्मम हत्या कर दी।</p>
<p><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-01/ndp-mritak.jpg" alt="NDP MRITAK" width="268" height="397"></img></p>
<p>घटना जावली गांव की है। 22 दिसंबर की ठंडी शाम को गांव के पांच युवक दो मोटरसाइकिलों पर सवार होकर घर से निकले। उनमें 21 वर्षीय चंदन नागवंशी भी शामिल था। वह यह नहीं जानता था कि जिन दोस्तों पर वह आंख बंद कर भरोसा कर रहा है, वे पहले ही उसकी हत्या की साजिश रच चुके हैं।</p>
<p>पुलिस जांच में सामने आया कि चंदन के दोस्त सुशील नागवंशी की मां का एक महीने पहले अचानक निधन हो गया था। इस मौत के पीछे सुशील ने बिना किसी आधार के यह मान लिया कि चंदन की मां ने जादू-टोना कराया है। यही शक धीरे-धीरे नफरत में बदला और नफरत ने हत्या की साजिश का रूप ले लिया।</p>
<p><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-01/ndp1.jpg" alt="NDP1" width="727" height="545"></img></p>
<p>सुशील ने अपने दोस्त साहिल और दो नाबालिग साथियों को इस साजिश में शामिल किया। योजना बेहद शातिर थी। चंदन को भरोसे में लेने के लिए उसे कई बार जंगल में शराब पार्टी के बहाने ले जाया गया। हर बार स्थान और माहौल ऐसा चुना गया कि चंदन को किसी खतरे का आभास न हो।</p>
<p>अंततः 22 दिसंबर को उसे मिडघाट के घने जंगल में ले जाया गया। रास्ते में शराब खरीदी गई और जंगल के भीतर एक सुनसान जगह पर पार्टी शुरू हुई। आरोपियों ने लड़की के आने का झूठा बहाना बनाकर चंदन को नशे में धुत कर दिया। जब वह पूरी तरह बेसुध हो गया, तभी सुशील ने भारी पत्थर से उसके सिर पर वार कर दिया। मौके पर ही चंदन की मौत हो गई।</p>
<p> </p>
<p><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-01/ndp.jpg" alt="NDP" width="476" height="412"></img></p>
<p>हत्या के बाद पहचान छुपाने के इरादे से आरोपियों ने शव और मोटरसाइकिल पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी। इसके बाद वे गांव लौट आए, जैसे कुछ हुआ ही न हो।</p>
<p>इधर चंदन के घर न लौटने पर परिजनों ने तलाश शुरू की और माखननगर थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई। शुरुआती पूछताछ में आरोपी पुलिस को गुमराह करते रहे और प्रेमिका के साथ फरार होने की कहानी गढ़ते रहे।</p>
<p>मामले में मोड़ तब आया जब पुलिस ने मोबाइल लोकेशन खंगाली। सभी आरोपियों की लोकेशन घटना के समय मिडघाट के जंगल में एक साथ मिली। सख्ती से पूछताछ के बाद आरोपी टूट गए और उन्होंने अपना जुर्म कबूल कर लिया।</p>
<p><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-01/ndp-2.jpg" alt="NDP 2" width="235" height="270"></img></p>
<p>31 दिसंबर को आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने जंगल से चंदन का अधजला शव और जली हुई बाइक बरामद की। सुशील और साहिल को जेल भेजा गया, जबकि दोनों नाबालिगों को बाल सुधार गृह भेजा गया।</p>
<p>नर्मदापुरम एसपी सांई कृष्णा थोटा ने बताया कि यह हत्या पूरी तरह योजनाबद्ध थी और सबूत मिटाने का प्रयास भी किया गया। उन्होंने अंधविश्वास और नाबालिगों की अपराधों में बढ़ती संलिप्तता को समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय बताया।</p>
<p>आज चंदन का परिवार न्याय की आस में है। सबसे ज्यादा पीड़ा उस मां की है, जिसने अपने बेटे को सिर्फ एक अंधविश्वास की भेंट चढ़ते देखा — एक ऐसा दर्द, जो शायद कभी कम न हो।</p>
<p>-------</p>
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                                                            <category>सत्यकथा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 29 Jan 2026 13:17:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सत्यकथा : लखीसराय में प्रेम-साजिश में हत्‍या: पत्नी व प्रेमी समेत पांच आरोपी गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[कोर्ट मैरिज के बाद पहले साथी को रास्ते से हटाने के लिए डेढ़ महीने पहले की हत्या की साजिश, तकनीकी सबूतों से खुला मामला]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/satyakatha/five-accused-including-wife-and-lover-arrested-for-murder-in/article-44655"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-01/satya-katha-(1).jpg" alt=""></a><br /><p>बिहार के लखीसराय जिले के किऊल थाना क्षेत्र में 24 दिसंबर की रात को ट्रेन में मिली मुलाकात के बाद शुरू हुए प्रेम संबंध ने एक व्यक्ति के जीवन को छीन लिया था। पुलिस ने सघन जांच के बाद हत्याकांड को प्रेम-साजिश और राजनीतिक नहीं, योजनाबद्ध हत्या करार देते हुए प्रमुख आरोपी समेत कुल <strong>पांच आरोपियों को गिरफ्तार</strong> कर जेल भेज दिया है। मृतक 32-वर्षीय विनोद साह पटना सिटी का रहने वाला था और वह कुछ महीने पहले अपनी ‘साथी’ गुंजा के साथ किऊल में रह रहा था।</p>
<p><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-01/lkh-1.jpg" alt="LKH 1" width="763" height="425"></img></p>
<p>अमल में लाया गया साजिश मूलत: तब उजागर हुआ जब पुलिस ने मोबाइल कॉल डिटेल, सीसीटीवी फुटेज और कोर्ट मैरिज दस्तावेजों को मिला कर जांच को गहन किया। इन तकनीकी सबूतों के आधार पर मुख्य आरोपी, गुंजा देवी, उसके नए पति <strong>संतोष कुमार</strong> और उसके साथ मिलकर साजिश रचने वाले तीन अन्य आरोपियों — <strong>राजन</strong>, <strong>अजीत कुमार</strong> और <strong>मोहम्मद अफताब</strong> — को गिरफ्तार किया गया।</p>
<h5><strong>घटना-स्थल और हत्या का तरीका</strong></h5>
<p>रात करीब 9 बजे 24 दिसंबर को किऊल के वृंदावन इलाके में अपने घर की ओर अकेले जा रहे विनोद को तीन युवक साइकिलों से घेरकर उसके गले पर लंबे ब्लेड से हमला कर दिया गया। यह घटना सुनसान रेलवे मैदान के पास हुई और बदमाश तुरंत मौके से फरार हो गए। खून से लथपथ हालत में विनोद को ग्रामीणों ने घायल मिलाया, घायल अवस्था में उसे सदर अस्पताल लाया गया, लेकिन पटना ले जाने के रास्ते में उसने दम तोड़ दिया।</p>
<p><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-01/kinnar-1.jpg" alt="KINNAR 1" width="1286" height="1600"></img></p>
<h5><strong>प्रारंभिक रिपोर्ट में दिया गया झूठा आरोप</strong></h5>
<p>हत्या के तीन दिन बाद यानी 27 दिसंबर को विनोद की पत्नी गुंजा देवी ने किऊल थाने में आवेदन देकर आरोप लगाया कि तीन आरोपियों — अमर पासवान, शक्ति पासवान और रंजन पासवान — ने जमीन विवाद के चलते उसके पति की हत्या की है। पुलिस ने इन लोगों से पूछताछ की, लेकिन विवाद के दावों और अन्य तथ्यों में सामंजस्य नहीं मिल पाया।</p>
<h5><strong>जांच का रुख बदलने वाले सबूत</strong></h5>
<p>विशेष जांच टीम ने तकनीकी खोजबीन में पाया कि हत्या से पहले और बाद दोनों स्थितियों में विनोद, गुंजा और संतोष के फोन पर बार-बार संपर्क हुआ था। पुलिस जब संतोष के बारे में पूछताछ कर रही थी, उसने शुरुआत में खुद को ‘रिश्तेदार’ बताया, लेकिन जांच में पता चला कि <strong>12 दिसंबर 2025 को संतोष और गुंजा ने कोर्ट मैरिज कर ली थी</strong>, यानी हत्या से ठीक 12 दिन पहले ही वे पति-पत्नी बन चुके थे।</p>
<p>फिर साजिश की असल तस्वीर उभरने लगी: विनोद और गुंजा के बीच प्रेम संबंध ट्रेन में शुरू हुआ था, लेकिन बाद में गुंजा की मुलाकात संतोष से हुई। संतोष से प्रेम बढ़ा तो गुंजा ने <strong>पहले प्रेमी विनोद को हटाने की योजना बनाई</strong>। पुलिस के मुताबिक संतोष ने गुंजा को हत्या के लिए एक लाख रुपये देने का वादा किया था।</p>
<p><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-01/lkh.jpg" alt="LKH" width="1200" height="675"></img></p>
<h5><strong>अपराध की योजना और गिरफ्तारी</strong></h5>
<p>खोजबीन में पुलिस ने पाया कि संतोष ने तीन विश्वसनीय साथियों — राजन, अजीत और अफताब — को हत्या के लिए तैयार किया था। आरोप है कि गुंजा ने पुलिस की जांच भटकाने के लिए झूठा शिकायत भी दर्ज कराई थी, ताकि असली दोषी बच जाएँ।</p>
<p>एसपी अजय कुमार ने बताया कि गुरिमेंट मोबाइल फोन, सीसीटीवी फुटेज और कोर्ट मैरिज दस्तावेजों के आधार पर गुंजा को हिरासत में लिया गया। जांच में संतोष ने साजिश का अंदाज़ी इकरार किया। आरोपियों की निशानदेही पर वही दो ब्लेड बरामद हुए जिनसे हत्या की गई थी।</p>
<h5><strong>आरोप और मुकदमा</strong></h5>
<p>गुंजा देवी, संतोष कुमार, राजन, अजीत और मोहम्मद अफताब पर <strong>हत्या, साजिश रचना, झूठी रिपोर्ट दर्ज कराना और सबूत छिपाने</strong> जैसे आपराधिक आरोप लगाए गए हैं। पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों को अदालत में पेश कर जेल भेज दिया है।</p>
<p><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-01/kkinnnar.jpg" alt="KKINNNAR" width="1599" height="899"></img></p>
<p>एसपी का कहना है कि तकनीकी सबूतों और आपसी बातचीत की जांच ने अपराध की असली तस्वीर को बेनकाब किया है, और यह सुनिश्चत किया गया है कि भविष्य में ऐसी योजनाबद्ध वारदातों की पुनरावृत्ति न हो।</p>
<p><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-01/lkh-5.jpg" alt="LKH 5" width="316" height="313"></img></p>
<p>------</p>
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                <pubDate>Thu, 29 Jan 2026 13:16:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सत्यकथा :  ईरानी डेरे का डॉन राजू ईरानी गिरफ्तार, दो दशक से फैले अपराध नेटवर्क पर पुलिस का शिकंजा</title>
                                    <description><![CDATA[ठगी, लूट और जमीन कब्जाने के दर्जनों मामलों में वांटेड रहमान डकैत सूरत से पकड़ा गया, कई राज्यों की पुलिस को बड़ी राहत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/satyakatha/satyakatha-irani-camps-don-raju-irani-arrested-police-clamps-down/article-44653"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-01/untitled-design1.jpg" alt=""></a><br />
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<p>भोपाल के कुख्यात ‘ईरानी डेरे’ का सरगना राजू ईरानी उर्फ आबिद अली उर्फ रहमान डकैत आखिरकार पुलिस के शिकंजे में आ गया है। दो दशक से ज्यादा समय तक देश के कई राज्यों में ठगी, लूट, डकैती और जमीन कब्जाने के मामलों में वांटेड रहे इस अपराधी की गिरफ्तारी को पुलिस बड़ी कामयाबी मान रही है। हालांकि, यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या यह गिरफ्तारी ईरानी डेरे के संगठित अपराध नेटवर्क का अंत साबित होगी या सिर्फ एक अध्याय का समापन है।</p>
<p><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-01/13421.jpg" alt="13421" width="914" height="635"></img></p>
<p>राजू ईरानी का नाम लंबे समय से भोपाल की अमन कॉलोनी स्थित ईरानी डेरे से जुड़ा रहा है। यह डेरा सिर्फ एक बस्ती नहीं, बल्कि संगठित अपराध का मजबूत ठिकाना माना जाता रहा है। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, यहां रहने वाले दर्जनों परिवारों के सदस्य अलग-अलग राज्यों में दर्ज आपराधिक मामलों में शामिल रहे हैं। चोरी, ठगी, नकली पुलिस और केंद्रीय एजेंसी के अफसर बनकर वारदात करना, हाईवे पर फर्जी चेकिंग और जमीनों पर जबरन कब्जा—इन सबकी साजिश इसी डेरे से रची जाती थी।</p>
<p>दिसंबर के अंत में भोपाल पुलिस ने करीब 150 जवानों के साथ ईरानी डेरे में बड़ा कॉम्बिंग ऑपरेशन चलाया था। मकसद था गिरोह के सरगना राजू ईरानी की गिरफ्तारी। तलाशी के दौरान अवैध हथियार, बिना नंबर की स्पोर्ट्स बाइक, नकली नोट और दर्जनों मोबाइल फोन बरामद किए गए। हालांकि, हंगामे और विरोध के बीच राजू ईरानी पुलिस की पकड़ से बचकर फरार हो गया। इस दौरान बलवे के आरोप में कई लोगों की गिरफ्तारी भी हुई।</p>
<p><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-01/lead-01.jpg" alt="LEAD 01" width="1260" height="1041"></img></p>
<p>फरारी ज्यादा दिन नहीं चली। मुखबिरों की सूचना पर सूरत क्राइम ब्रांच ने उसे गुजरात के लालगेट इलाके से दबोच लिया। बताया गया कि वह वहां अपने रिश्तेदार के घर छिपा हुआ था और किसी बड़ी वारदात की तैयारी में था। गिरफ्तारी के समय उसके पास फर्जी दस्तावेज और वेश बदलने का सामान मिला। पुलिस का दावा है कि वह पहचान बदलने में माहिर था और पहले भी कई बार इसी तरीके से बच निकल चुका था।</p>
<p>जांच में सामने आया है कि राजू ईरानी का नेटवर्क किसी कॉरपोरेट सिस्टम की तरह काम करता था। अलग-अलग गैंग अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालते थे। कोई बुजुर्गों को निशाना बनाता था, तो कोई साधु या अधिकारी का भेष धरकर ठगी करता था। पकड़े जाने पर जमानत और कानूनी खर्च की जिम्मेदारी सरगना उठाता था, बदले में उसे हर वारदात से तय हिस्सा मिलता था।</p>
<p>ईरानी डेरे का आपराधिक इतिहास 1970 के दशक से जुड़ा माना जाता है। समय के साथ इसका दायरा बढ़ता गया और डर का ऐसा माहौल बना कि लोग शिकायत करने से भी कतराते थे। जमीनें औने-पौने दामों में बेचने को मजबूर हुए, दुकानदारों से रंगदारी वसूली गई।</p>
<p><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-01/121212.jpg" alt="121212" width="1260" height="1417"></img></p>
<p>अब राजू ईरानी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस उसके पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने की तैयारी में है। फरारी में मदद करने वालों और गिरोह के अन्य सक्रिय सदस्यों पर भी शिकंजा कसने की बात कही जा रही है। हालांकि, पुलिस अधिकारी मानते हैं कि चुनौती अभी खत्म नहीं हुई है। डेरे के कई युवा सदस्य अब भी सक्रिय हैं और नेतृत्व किसी और के हाथ में जा सकता है।</p>
<p>राजू ईरानी की गिरफ्तारी संगठित अपराध के खिलाफ बड़ी सफलता जरूर है, लेकिन यह आने वाले समय में साफ होगा कि क्या इससे ईरानी डेरे का डर और अपराध दोनों खत्म हो पाएंगे या यह नेटवर्क किसी नए चेहरे के साथ फिर उभर आएगा।</p>
<p>-------</p>
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                                                            <category>सत्यकथा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 29 Jan 2026 12:21:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सत्यकथा : संजय बनकर आया, सलमान बनकर जिस्म और रूह दोनों लूटता रहा</title>
                                    <description><![CDATA[खंडवा की एक महिला की सच्ची कहानी, जिसने अपनी बेटी को बचाने के लिए टूटकर भी हार नहीं मानी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/satyakatha/true-legend/article-43488"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-01/whatsapp-image-2026-01-17-at-7.31.17-pm.jpeg" alt=""></a><br /><p>लिंक पर क्लीक करके आप ये सत्यकथा वीडियो फॉर्मेट में भी देख सकते हैं </p>
<p><a href="https://youtu.be/f7PpslcfuGY?si=FCWtUr0K9hUZRowX">https://youtu.be/f7PpslcfuGY?si=FCWtUr0K9hUZRowX</a></p>
<p style="text-align:justify;"><em><strong>मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के पिपलोद क्षेत्र</strong></em> में रहने वाली 30 वर्षीय रीता (बदला हुआ नाम) एक सामान्य गृहिणी नहीं, बल्कि एक निजी कार्यालय में कार्यरत आत्मनिर्भर महिला थीं। पति, एक बेटी और सीमित दुनिया में सिमटी रीता की जिंदगी बस घर से ऑफिस और ऑफिस से घर तक ही घूमती थी। सुबह 7:30 बजे बस पकड़ना, शाम 7:30 बजे लौट आना — यही उसकी दिनचर्या थी।</p>
<p style="text-align:justify;">साल 2022 की गर्मियों में बस स्टैंड पर उसकी जिंदगी की सबसे बड़ी त्रासदी ने चुपचाप दस्तक दी।</p>
<p style="text-align:justify;">बस में टिकट बेचने वाला एक युवक, जो खुद को <strong>“संजय”</strong> बताता था, रोज उसे दीदी कहकर हालचाल पूछता। समय, मौसम, बस लेट होने जैसी छोटी-छोटी बातों से बातचीत शुरू हुई। रीता ने इसे सामान्य शिष्टाचार समझा। लेकिन वह नहीं जानती थी कि यह सामान्य बातचीत एक गहरी साजिश की नींव बन चुकी है।</p>
<p style="text-align:justify;">कुछ ही दिनों में ‘संजय’ ने रीता का मोबाइल नंबर ले लिया — बहाना था, बस लेट होने की सूचना देना। इसी नंबर के जरिए उसने रीता की सोशल मीडिया प्रोफाइल खोज निकाली और उसकी तस्वीरें जुटा लीं।</p>
<p style="text-align:justify;">एक दिन अचानक रीता के फोन पर एक ऐसी एडिटेड तस्वीर आई, जिसमें चेहरा उसी का था, लेकिन तस्वीर पूरी तरह आपत्तिजनक थी। रीता घबरा गई। जब उसने विरोध किया तो उधर से धमकी मिली —<br />“अगर मुझसे नहीं मिलीं, तो ये तस्वीरें आपके पति, ऑफिस और रिश्तेदारों तक पहुंच जाएंगी।”</p>
<p style="text-align:justify;">यहीं से शुरू हुआ ब्लैकमेल का वो दौर, जिसने रीता की जिंदगी को नरक बना दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">पहले पैसों की मांग हुई — 50 हजार, फिर एक लाख…<br />फिर पैसों के साथ जबरन मुलाकातें…<br />और धीरे-धीरे वह मानसिक, आर्थिक और शारीरिक शोषण की शिकार होती चली गई।</p>
<p style="text-align:justify;">कुछ समय बाद रीता को पता चला कि ‘संजय’ का असली नाम <strong>सलमान</strong> है। इसके बाद दबाव और बढ़ गया। उस पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया जाने लगा। डर के कारण रीता चुप रही। परिवार बचाने के लिए वह सब कुछ सहती रही।</p>
<p style="text-align:justify;">जब उसके पति को शक हुआ और उन्होंने मोबाइल देखा, तो सच्चाई सामने आ गई। वे पुलिस जाना चाहते थे, लेकिन रीता डर गई — बदनामी, समाज, बेटी का भविष्य…</p>
<p style="text-align:justify;">सलमान ने इसी डर का फायदा उठाकर एक और घिनौनी शर्त रखी —<br />अपने बहनोई <strong>शाहरुख</strong> को भी “खुश” करना होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">टूटी हुई रीता और लाचार पति ने मजबूरी में हामी भरी।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन कुछ समय बाद सलमान की नीयत रीता की <strong>किशोर बेटी</strong> पर जा टिकी।</p>
<p style="text-align:justify;">यही वो पल था, जब डर के ऊपर <strong>मां</strong> भारी पड़ गई।</p>
<p style="text-align:justify;">जिस महिला ने सालों अपमान सहा, वही रीता अपनी बेटी के लिए शेरनी बनकर खड़ी हो गई। उसने बिना एक पल गंवाए पदम नगर थाने पहुंचकर पूरी कहानी पुलिस को सुना दी — दोस्ती, फर्जी पहचान, एडिटेड फोटो, ब्लैकमेलिंग, शोषण, जबरन वसूली और बेटी पर बुरी नजर।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस ने तुरंत मामला दर्ज कर सलमान को गिरफ्तार किया। उसके मोबाइल से एडिटेड तस्वीरें, चैट्स और वीडियो बरामद हुए। बैंक खातों की जांच में पैसों के लेन-देन की पुष्टि हुई। कुछ ही समय में शाहरुख को भी गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।</p>
<hr />
<h2 style="text-align:justify;"><strong>जब ‘संजय’ निकला सलमान</strong></h2>
<p style="text-align:justify;">रीता ने पुलिस को बताया कि बस में खुद को संजय बताकर बात करने वाला युवक असल में सलमान था। उसी ने उसका भरोसा जीता, नंबर लिया और सोशल मीडिया से तस्वीरें निकालकर उन्हें आपत्तिजनक रूप में एडिट कर ब्लैकमेलिंग शुरू की।</p>
<hr />
<h2 style="text-align:justify;"><strong>बेटी पर नजर गई तो टूट गया डर</strong></h2>
<p style="text-align:justify;">रीता सालों तक डरती रही, सहती रही। लेकिन जिस दिन सलमान की नजर उसकी नाबालिग बेटी पर पड़ी, उसी दिन उसने तय कर लिया —<br /><strong>“अब चाहे मेरी इज्जत जाए, लेकिन मेरी बेटी सुरक्षित रहेगी।”</strong><br />और यही फैसला दोनों दरिंदों को जेल तक ले गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सत्यकथा</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/satyakatha/true-legend/article-43488</link>
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                <pubDate>Sun, 18 Jan 2026 09:24:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[दैनिक जागरण]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>खोजी कुत्ते ने खोला कत्ल का राज, प्रेमिका की हत्या कर बोरे में छिपाई थी लाश</title>
                                    <description><![CDATA[अकेलेपन और लालच ने लिया खतरनाक मोड़, प्रेमिका की जान गई]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/satyakatha/the-sniffer-dog-revealed-the-secret-of-the-murder-after/article-41979"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-01/satyakatha-(5).jpg" alt=""></a><br /><p> राजस्थान की राजधानी जयपुर के शास्त्री नगर इलाके में 23 दिसंबर की सुबह उस समय सनसनी फैल गई, जब एक रिहायशी मकान के पोर्च में रखे सफेद प्लास्टिक के बोरे से महिला का शव बरामद हुआ। शुरुआत में यह मामला रहस्यमय लग रहा था, लेकिन पुलिस के खोजी कुत्ते (डॉग स्क्वायड) ने चंद ही मिनटों में इस जघन्य अपराध की गुत्थी सुलझा दी।</p>
<p><img width="366" height="275" alt="2Q=="></img></p>
<p>शास्त्री नगर के सुभाष नगर क्षेत्र में रहने वाले ठेकेदार सूरज प्रकाश रोज़ की तरह सुबह अपने घर के पोर्च में पहुंचे, तो उनकी नजर एक बड़े सफेद बोरे पर पड़ी। बोरा वहां पहले नहीं था। पत्नी मुन्नी देवी से पूछताछ और ऊपर रहने वाले किराएदारों से जानकारी लेने के बाद भी जब बोरे के बारे में कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला, तो संदेह गहराने लगा।</p>
<p>रस्सी काटकर जैसे ही बोरे को खोला गया, तेज दुर्गंध फैली और अंदर महिला का शव दिखाई दिया। घटना की सूचना तुरंत पुलिस को दी गई, जिसके बाद कुछ ही देर में इलाके में भीड़ जमा हो गई।</p>
<p><img width="405" height="226" alt="2Q=="></img></p>
<p>मौके पर पहुंची पुलिस ने प्रारंभिक जांच में ही स्पष्ट कर दिया कि यह कोई सामान्य मौत नहीं, बल्कि हत्या का मामला है। महिला के शरीर पर गंभीर चोटों के निशान थे। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजते हुए फोरेंसिक टीम ने बोरा, रस्सी और अन्य साक्ष्यों को जब्त कर लिया।</p>
<p>घटना की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त बजरंग सिंह शेखावत और डीसीपी नॉर्थ करण शर्मा स्वयं मौके पर पहुंचे।</p>
<p><img width="419" height="235" alt="2Q=="></img></p>
<p>पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यह था कि हत्यारे ने शव को इसी पोर्च में क्यों छोड़ा? क्या वह किसी को फंसाना चाहता था या फिर यह महज़ जल्दबाजी में उठाया गया फैसला था?</p>
<p>जांच के दौरान पुलिस ने डॉग स्क्वायड की मदद ली। प्रशिक्षित जर्मन शेफर्ड को शव और घटनास्थल की गंध सूंघाई गई। कुत्ता सीधे घटनास्थल से निकलकर पास की गलियों से होता हुआ करीब सौ मीटर दूर एक मकान के सामने जाकर रुक गया और लगातार भौंकने लगा।</p>
<p><img width="428" height="323" alt="2Q=="></img></p>
<p>यह मकान 48 वर्षीय जितेंद्र सिंह का था, जो एक निजी कंपनी में क्लर्क के पद पर कार्यरत था और लंबे समय से अकेला रह रहा था।</p>
<p>पुलिस ने मकान की तलाशी ली तो अंदर के फर्श पर हाल ही में की गई असामान्य सफाई और डिटर्जेंट की तेज गंध मिली। इसी दौरान आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच में एक व्यक्ति भारी बोरा घसीटते हुए दिखाई दिया, जिसकी कद-काठी और कपड़े जितेंद्र सिंह से मेल खाते थे।</p>
<p>सबूत सामने आने पर जितेंद्र को हिरासत में लिया गया। प्रारंभिक पूछताछ में वह बचने की कोशिश करता रहा, लेकिन जब डॉग स्क्वायड, सीसीटीवी फुटेज और फोरेंसिक संकेतों को सामने रखा गया, तो वह टूट गया।</p>
<p>पूछताछ में जितेंद्र ने बताया कि मृतका कुसुम देवी (बदला नाम) से उसके पिछले कई वर्षों से संबंध थे। दोनों अकेलेपन से जूझ रहे थे और इसी दौरान एक-दूसरे के संपर्क में आए। समय के साथ यह रिश्ता भावनात्मक और आर्थिक निर्भरता में बदल गया।</p>
<p>जांच में सामने आया कि हाल के महीनों में पैसों को लेकर दोनों के बीच विवाद बढ़ने लगा था। घटना वाली रात भी इसी बात को लेकर कहासुनी हुई, जो अचानक हिंसक झड़प में बदल गई। धक्का लगने से महिला गंभीर रूप से घायल हो गई और उसकी मौत हो गई।</p>
<p>हत्या के बाद घबराए आरोपी ने शव को छिपाने और सबूत मिटाने की कोशिश की। उसने बाजार से प्लास्टिक के बोरे और रस्सी खरीदी, शव को उसमें बंद किया और पहचान छिपाने के इरादे से दूसरे के पोर्च में छोड़ दिया। लेकिन उसकी यह चाल पुलिस के खोजी कुत्ते के सामने ज्यादा देर टिक नहीं सकी।</p>
<p>पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी ने अपराध के बाद जिस तरह सबूत मिटाने की कोशिश की, उससे उसकी मंशा साफ जाहिर होती है। आरोपी के खिलाफ हत्या और सबूत मिटाने की धाराओं में मामला दर्ज कर उसे अदालत में पेश किया गया।</p>
<p>मामले में पेश किए गए सीसीटीवी फुटेज, फोरेंसिक रिपोर्ट, डॉग स्क्वायड की भूमिका और आरोपी की स्वीकारोक्ति को आधार बनाते हुए अदालत ने जितेंद्र सिंह को हत्या का दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।</p>
<p>यह मामला केवल एक हत्या की कहानी नहीं, बल्कि अकेलेपन, भावनात्मक निर्भरता, आर्थिक दबाव और सामाजिक भय के खतरनाक मेल की तस्वीर भी पेश करता है। एक क्षण का क्रोध और गलत निर्णय दो जिंदगियों को तबाही की ओर ले गया।</p>
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                                                            <category>सत्यकथा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 03 Jan 2026 17:58:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[ANKITA ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इश्क में अंधी पत्नी ने प्रेमी को बनाया हथियार, पति को उतारा मौत के घाट</title>
                                    <description><![CDATA[चार साल का अवैध प्रेम उजागर होते ही रची गई पति की हत्या की साजिश]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/satyakatha/jabalpur-life-imprisonment-to-the-wife-who-murdered-her-husband/article-41977"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-01/p3.jpg" alt=""></a><br /><p>प्रेम संबंध और व्यक्तिगत विवाद के चलते पति की हत्या करवाने वाली 28 वर्षीय आराधना चौधरी को जबलपुर की एसएसी-एसटी कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई। अदालत ने आराधना के प्रेमी धर्मेन्द्र उर्फ धिन्नू और उसके साथी अमित उर्फ चालीसा पटेल को भी दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा दी।</p>
<p>30 वर्षीय आशीष चौधरी की लाश 25 सितंबर 2022 को मझगंवा थाना क्षेत्र में कुम्ही और परसोल के बीच खेत में पाई गई। उनके सिर पर चोट के निशान थे और मोटर साइकल पास ही गड्डे में गिरी हुई थी। शुरुआती नजर में यह रोड एक्सीडेंट प्रतीत हुआ, लेकिन पुलिस ने मौके की जांच में पाया कि हत्या की आड़ में एक्सीडेंट का दृश्य रचा गया था।</p>
<p>तत्कालीन एडीशनल एसपी शिवेश बघेल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना टीम को जांच के लिए निर्देशित किया। प्रारंभिक पूछताछ और ग्रामीण स्रोतों से मिली जानकारी के आधार पर पता चला कि आशीष के पास कोई बड़ी संपत्ति नहीं थी, लेकिन उसकी पत्नी आराधना के पास धन था।</p>
<p>जांच में सामने आया कि आराधना ने अपने प्रेमी धर्मेन्द्र के साथ अवैध संबंध बनाए थे। चार साल तक चल रहे इस संबंध के दौरान, आशीष ने अपनी पत्नी के व्यवहार में बदलाव और प्रेमी के साथ संबंध का पता लगाया। इसके बाद आराधना ने अपने पति की हत्या करवाने की योजना बनाई।</p>
<p>धर्मेन्द्र ने अपने साथी अमित उर्फ चालीसा के साथ मिलकर योजना बनाई। उन्होंने आशीष को शराब पीने के लिए बाहर बुलाया और मौका पाकर पत्थर से हमला कर उसकी हत्या कर दी। मृतक की मोटर साइकल को पास के गड्डे में फेंककर हत्या को एक्सीडेंट का रूप देने की कोशिश की गई।</p>
<p>पुलिस के अनुसार, हत्या के तुरंत बाद धर्मेन्द्र ने आराधना को फोन कर इस बात की सूचना दी। आराधना ने घटना के बाद अपने प्रेमी से मिलने के लिए उसे घर बुलाया। इस तरह, हत्या की योजना और कार्यान्वयन में आराधना की भूमिका स्पष्ट हो गई।</p>
<p>27 जून को जबलपुर की एसएसी-एसटी कोर्ट में माननीय न्यायाधीश गिरीश दीक्षित ने सभी आरोपियों को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने कहा कि हत्या पूरी तरह पूर्वनियोजित और शातिराना थी, जिसमें प्रेम संबंध और आर्थिक स्वार्थ मुख्य कारण थे।</p>
<p>यह मामला स्थानीय और आसपास के क्षेत्रों में चर्चा का विषय बन गया। यह घटना साबित करती है कि व्यक्तिगत संबंध और आर्थिक स्वार्थ गंभीर अपराधों की दिशा में ले जा सकते हैं।</p>
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                                                            <category>सत्यकथा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 03 Jan 2026 17:32:24 +0530</pubDate>
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