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                <title>टॉप न्यूज़ - दैनिक जागरण</title>
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                <title>इंदौर में कल से शुरू होगा ब्रिक्स कृषि मंत्रियों का सम्मेलन, 20 देशों के प्रतिनिधि होंगे शामिल</title>
                                    <description><![CDATA[केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दी जानकारी, छोटे किसानों, खाद्य सुरक्षा, जलवायु अनुकूल कृषि और नवाचार पर होगा मंथन]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/brics-agriculture-ministers-conference-will-start-from-tomorrow-in-indore/article-55243"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/indore-brics-summit.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत मध्य प्रदेश का इंदौर शहर एक बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन का साक्षी बनने जा रहा है। 9 जून से यहां ब्रिक्स कृषि मंत्रियों और कृषि कार्य समूह की महत्वपूर्ण बैठकों की शुरुआत होगी, जिसमें सदस्य और साझेदार देशों सहित करीब 20 देशों के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रविवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस सम्मेलन की विस्तृत जानकारी साझा करते हुए इसे वैश्विक कृषि सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने कहा कि ब्रिक्स की स्थापना वर्ष 2006 में हुई थी और समय के साथ यह दुनिया के सबसे प्रभावशाली अंतरराष्ट्रीय समूहों में शामिल हो चुका है। वर्तमान में ब्रिक्स के 11 सदस्य देश और 10 साझेदार देश हैं। वैश्विक कृषि पर इसके प्रभाव का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दुनिया की लगभग 42 प्रतिशत कृषि भूमि, 68 प्रतिशत कृषि जोतें और करीब 42 प्रतिशत खाद्य उत्पादन ब्रिक्स देशों के पास है। ऐसे में इस मंच पर होने वाले निर्णय और सहयोग का असर विश्व खाद्य सुरक्षा पर भी पड़ता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि भारत इससे पहले वर्ष 2012, 2016 और 2021 में भी ब्रिक्स की अध्यक्षता कर चुका है। वर्ष 2016 में भारत की अध्यक्षता के दौरान ब्रिक्स कृषि अनुसंधान मंच की शुरुआत की गई थी, जिसने सदस्य देशों के बीच कृषि अनुसंधान और तकनीकी सहयोग को नई दिशा दी। इस बार भी भारत कृषि क्षेत्र में साझा विकास और नवाचार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण पहल लेकर आगे बढ़ रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">कृषि मंत्री ने कहा कि कृषि कार्य समूह के अधिकारियों की अब तक आठ बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं। इन बैठकों में खाद्य सुरक्षा, मत्स्य पालन, पशुपालन, कृषि व्यापार और किसानों की आय जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई है। उन्होंने कहा कि भारत की कृषि नीतियों के केंद्र में हमेशा छोटे और सीमांत किसान रहे हैं। इन्हीं किसानों को नई तकनीकों, अनुसंधान, बाजार और कृषि ऋण तक बेहतर पहुंच दिलाने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने बताया कि इस वर्ष के सम्मेलन का मुख्य फोकस चार प्रमुख क्षेत्रों पर रहेगा। इनमें खाद्य सुरक्षा, पोषण और आजीविका; कृषि व्यापार और सहयोग; जलवायु परिवर्तन के अनुकूल कृषि और सतत विकास; तथा कृषि एवं खाद्य प्रणालियों में नवाचार और साझेदारी को मजबूत बनाना शामिल है। उनका कहना था कि कृषि विकास तभी सार्थक होगा जब किसानों की आय बढ़ेगी और उनकी आजीविका अधिक सुरक्षित होगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का जिक्र करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि दुनिया भर के किसान बदलते मौसम के प्रभावों का सामना कर रहे हैं। ऐसे में पुनर्योजी कृषि, टिकाऊ खेती की पद्धतियां और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी आधुनिक तकनीकों को छोटे किसानों तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में महिलाओं और युवाओं की भूमिका लगातार बढ़ रही है और भविष्य की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उनके नेतृत्व को भी मजबूत किया जा रहा है। इसी कड़ी में 12 जून को “लघु किसानों, महिलाओं एवं युवाओं के माध्यम से भविष्य की खाद्य सुरक्षा” विषय पर विशेष मंत्री स्तरीय संवाद आयोजित किया जाएगा। इसमें कृषि क्षेत्र में महिलाओं और युवाओं की भागीदारी बढ़ाने तथा नई पीढ़ी को कृषि नवाचारों से जोड़ने पर चर्चा होगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">तय कार्यक्रम के अनुसार 9 से 11 जून तक कृषि कार्य समूह की बैठकें आयोजित होंगी। इसके बाद 12 और 13 जून को कृषि मंत्रियों की मुख्य बैठक होगी। सम्मेलन के दौरान खाद्य हानि को कम करने, पशुपालन, मत्स्य पालन, कृषि नवाचार, किसानों के अधिकार और सतत कृषि विकास जैसे विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार विभिन्न देशों के प्रतिनिधि अपने अनुभव और सफल मॉडल भी साझा करेंगे, जिससे सदस्य देशों के बीच सहयोग और मजबूत होगा। इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन को विशेष बनाने के लिए “ब्रिक्स वाटिका” का भी निर्माण किया जाएगा। इसमें सदस्य देशों के मंत्रियों और प्रतिनिधियों की सहभागिता से सामूहिक वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित होगा। यह पहल पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास के प्रति ब्रिक्स देशों की साझा प्रतिबद्धता का प्रतीक मानी जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd">विदेशी मेहमानों को भारत की सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने के लिए विशेष कार्यक्रम भी तैयार किए गए हैं। सम्मेलन में शामिल प्रतिनिधियों को इंदौर के ऐतिहासिक राजवाड़ा, प्रसिद्ध छप्पन दुकान और ऐतिहासिक नगर मांडू का भ्रमण कराया जाएगा। इसके जरिए भारत की समृद्ध संस्कृति, खानपान और विरासत को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करने का प्रयास किया जाएगा। केंद्रीय कृषि मंत्री ने विश्वास जताया कि इंदौर में आयोजित यह सम्मेलन ब्रिक्स देशों के बीच कृषि सहयोग को नई दिशा देगा। साथ ही वैश्विक स्तर पर करोड़ों छोटे किसानों के हितों को मजबूत करने और खाद्य सुरक्षा से जुड़े मुद्दों के समाधान में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इंदौर में होने वाला यह आयोजन न केवल भारत की अंतरराष्ट्रीय भूमिका को मजबूत करेगा बल्कि कृषि क्षेत्र में साझा विकास और सहयोग के नए अवसर भी पैदा करेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 12:58:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>संसदीय समिति ने NTA और CBSE से पेपर लीक पर मांगे जवाब</title>
                                    <description><![CDATA[NEET पेपर लीक और OSM सिस्टम विवाद पर दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली समिति ने दोनों संस्थानों से कड़े सवाल पूछे, बैकग्राउंड जांच और परिभाषा पर उठे गंभीर प्रश्न]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/parliamentary-committee-seeks-answers-from-nta-and-cbse-on-paper/article-55242"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/nta-paper-leak.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">संसदीय समिति ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (National Testing Agency) और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (Central Board of Secondary Education) से जुड़े परीक्षा प्रणाली, पेपर लीक और डिजिटल मूल्यांकन व्यवस्था पर कई गंभीर और सीधे सवाल उठाए हैं। NEET पेपर लीक विवाद और ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम को लेकर चल रही जांच के बीच समिति की बैठक में माहौल काफी सख्त रहा और अधिकारियों से लिखित जवाब भी मांगे गए। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस सांसद (Digvijaya Singh) की अध्यक्षता वाली इस समिति ने सबसे पहले यही सवाल किया कि आखिर ‘पेपर लीक’ की परिभाषा सरकारी परीक्षा एजेंसियों के हिसाब से क्या मानी जाती है, और क्या इस परिभाषा को लेकर किसी तरह की स्पष्ट गाइडलाइन मौजूद है या नहीं। बैठक में यह भी पूछा गया कि जब संस्थान खुद यह दावा करते हैं कि सिस्टम से कोई पेपर लीक नहीं हुआ, तो फिर अलग-अलग स्तर पर सामने आने वाली गड़बड़ियों और लीक जैसे आरोपों को किस श्रेणी में रखा जाए। इस पूरे सवाल-जवाब के दौरान समिति ने यह भी संकेत दिया कि केवल तकनीकी सफाई देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरी परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और जवाबदेही को भी स्पष्ट करना जरूरी है, क्योंकि देशभर में लाखों छात्र इन परीक्षाओं पर निर्भर हैं और किसी भी तरह की गड़बड़ी का सीधा असर उनके भविष्य पर पड़ता है।</p>
<p style="text-align:justify;">समिति ने विशेष रूप से National Testing Agency से 2018 के बाद आयोजित सभी प्रमुख परीक्षाओं का पूरा रिकॉर्ड मांगा है और पूछा है कि क्या कभी आधिकारिक रूप से किसी परीक्षा में पेपर लीक की पुष्टि हुई है या केवल अफवाह और तकनीकी गड़बड़ी के आधार पर ही ऐसे मामले सामने आते रहे हैं। हाल ही में एजेंसी की ओर से यह दावा किया गया था कि उनके सिस्टम में वास्तविक पेपर लीक नहीं हुआ, बल्कि केवल एक ‘गेस पेपर’ या अनुमानित प्रश्न पत्र प्रसारित हुआ था, जिस पर समिति ने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर यह केवल अनुमानित सामग्री थी तो फिर परीक्षा सुरक्षा प्रणाली की मजबूती पर सवाल क्यों खड़े होते हैं। इसके अलावा समिति ने NTA से उसके आंतरिक ढांचे, मानव संसाधन, तकनीकी टीम और पिछले तीन वर्षों में की गई सभी नियुक्तियों का पूरा ब्योरा भी तलब किया है। बताया जा रहा है कि समिति यह समझने की कोशिश कर रही है कि इतनी बड़ी परीक्षा एजेंसी के भीतर स्टाफिंग, निगरानी और तकनीकी नियंत्रण की व्यवस्था कितनी मजबूत है। बैठक में यह भी चर्चा हुई कि बार-बार सामने आने वाले विवाद केवल बाहरी समस्या हैं या फिर सिस्टम के भीतर कोई संरचनात्मक कमजोरी मौजूद है। इसी संदर्भ में यह सवाल भी उठा कि क्या परीक्षा संचालन के दौरान किसी भी स्तर पर लापरवाही या निगरानी की कमी रही है, जिसके कारण छात्रों के बीच असंतोष बढ़ता जा रहा है और परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता प्रभावित हो रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी ओर केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (Central Board of Secondary Education) के ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम और डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर भी समिति ने विस्तृत सवाल पूछे हैं। सबसे बड़ा सवाल कोएम्प्ट (Coempt) कंपनी को दिए गए ठेके और उसके चयन की प्रक्रिया पर केंद्रित रहा। समिति ने पूछा कि क्या बोर्ड ने टेंडर देने से पहले कंपनी का विस्तृत बैकग्राउंड वेरिफिकेशन किया था या नहीं, और क्या यह जानकारी थी कि कंपनी के डायरेक्टर पहले ग्लोबरेना टेक्नोलॉजीज से जुड़े रहे हैं, जिस पर पहले परीक्षा परिणामों में गड़बड़ी के आरोप लग चुके हैं। सूत्रों के अनुसार, समिति ने यह भी पूछा कि विवादित इतिहास वाली कंपनियों को चयन प्रक्रिया से बाहर करने की शर्त को तीसरे टेंडर में क्यों हटा दिया गया और क्या यह किसी विशेष कंपनी को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से किया गया था या तकनीकी कारणों से। इसके अलावा 12वीं बोर्ड की उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग प्रक्रिया में आधुनिक रोबोटिक स्कैनर के बजाय सामान्य स्कैनर के उपयोग की अनुमति देने पर भी सवाल उठाए गए। समिति का कहना है कि जब परीक्षा मूल्यांकन जैसे संवेदनशील कार्य में तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है, तो उसमें गुणवत्ता और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होना चाहिए। इसी बीच राजनीतिक हलकों में भी यह मुद्दा तेजी से गरमाया हुआ है, खासकर जब कांग्रेस नेता (Rahul Gandhi) ने सार्वजनिक रूप से कोएम्प्ट कंपनी और टेंडर प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए थे, जिसके बाद यह मामला और अधिक चर्चा में आ गया। अब समिति की ओर से मांगे गए जवाबों के बाद माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस पूरे प्रकरण पर और अधिक राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल देखने को मिल सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 11:07:15 +0530</pubDate>
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                <title>देश के कई हिस्सों में मानसून ने बढ़ाई रफ्तार, अगले 7 दिन भारी बारिश का अलर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[IMD ने दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की, कई राज्यों में तेज हवाओं और आंधी का भी अनुमान]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/monsoon-increased-speed-in-many-parts-of-the-country-alert/article-55165"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/monsoon-2026.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">नई दिल्ली। दक्षिण-पश्चिम मानसून ने देश के कई हिस्सों में अपनी रफ्तार और बढ़ा दी है। मानसून ने महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, गोवा, कर्नाटक, तमिलनाडु और पूर्वोत्तर भारत के कुछ और इलाकों में आगे बढ़त दर्ज की है। मौसम विभाग का कहना है कि अगले कुछ दिनों में मानसून और तेजी से आगे बढ़ सकता है, जिससे कई राज्यों में बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है।</p>
<p class="isSelectedEnd">मौसम विभाग की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक 6 जून को मानसून ने पूरे गोवा, कर्नाटक के बड़े हिस्से, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश के कुछ क्षेत्रों तथा तमिलनाडु के अधिकांश इलाकों को कवर कर लिया। साथ ही पूर्वोत्तर राज्यों में भी मानसून की सक्रियता बढ़ी है। विभाग का अनुमान है कि अगले दो से पांच दिनों के भीतर तेलंगाना, छत्तीसगढ़, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर के अन्य क्षेत्रों में भी मानसून आगे बढ़ सकता है। इस बीच दक्षिण भारत के कई राज्यों के लिए भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु और लक्षद्वीप में अगले सात दिनों तक कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। तटीय कर्नाटक और केरल में लगातार वर्षा के चलते निचले इलाकों में जलभराव की आशंका जताई गई है। स्थानीय प्रशासन को भी सतर्क रहने के लिए कहा गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">पूर्वोत्तर भारत में भी मौसम काफी सक्रिय रहने वाला है। अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में व्यापक वर्षा का अनुमान है। कुछ स्थानों पर बहुत भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग के अनुसार पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और सड़क अवरोध जैसी स्थितियां भी बन सकती हैं। ऐसे क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd">पूर्वी भारत में ओडिशा, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के कई हिस्सों में भी बारिश का दौर जारी रह सकता है। कुछ जिलों में तेज हवाओं के साथ गरज-चमक की संभावना है। बिहार और ओडिशा के कुछ इलाकों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। बताया जा रहा है कि बंगाल की खाड़ी में सक्रिय मौसम प्रणालियों के कारण यह स्थिति बनी हुई है। मध्य भारत भी मौसम के असर से अछूता नहीं है। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और विदर्भ क्षेत्र में अगले कुछ दिनों तक गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग ने कई स्थानों पर 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान जताया है। शुक्रवार को मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में तेज हवा दर्ज की गई थी। भोपाल, सीहोर, सतना और सागर समेत कई जिलों में हवा की गति सामान्य से अधिक रिकॉर्ड की गई।</p>
<p class="isSelectedEnd">उत्तर-पश्चिम भारत में फिलहाल बारिश की गतिविधियां सीमित हैं, लेकिन जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। वहीं दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के कुछ हिस्सों में अगले दिनों में तापमान बढ़ने का अनुमान है। मौसम विभाग ने 8 जून से 11 जून के बीच दिल्ली, पंजाब और हरियाणा में लू चलने की संभावना जताई है। पश्चिमी राजस्थान में भी गर्मी का असर तेज हो सकता है। इस समय देश के विभिन्न हिस्सों में कई ऊपरी हवा के चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय हैं। इसके अलावा एक पश्चिमी विक्षोभ भी उत्तर भारत को प्रभावित कर रहा है। यही कारण है कि कई राज्यों में अलग-अलग तरह की मौसम गतिविधियां देखने को मिल रही हैं। दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत में जहां बारिश का दबदबा है, वहीं उत्तर-पश्चिमी हिस्सों में गर्मी बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">मछुआरों के लिए भी विशेष चेतावनी जारी की गई है। बंगाल की खाड़ी और अरब सागर के कई हिस्सों में समुद्र की स्थिति खराब रहने की संभावना है। मौसम विभाग ने 11 जून तक कई समुद्री क्षेत्रों में मछुआरों को न जाने की सलाह दी है। तेज हवाओं और ऊंची लहरों के कारण समुद्री गतिविधियों पर असर पड़ सकता है। भारी बारिश वाले इलाकों में स्थानीय बाढ़, जलभराव और यातायात प्रभावित होने जैसी स्थितियां बन सकती हैं। वहीं तेज आंधी और तूफानी हवाओं से पेड़ों, बिजली लाइनों और फसलों को नुकसान पहुंचने का भी खतरा है। लोगों को मौसम से जुड़ी ताजा जानकारी पर नजर रखने और प्रशासन की सलाह का पालन करने की अपील की गई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 12:00:33 +0530</pubDate>
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                <title>घरेलू LPG सिलेंडर ₹29 महंगा, तीन महीने में ₹89 बढ़े दाम</title>
                                    <description><![CDATA[नई दरें आधी रात से लागू, दिल्ली में 14.2 किलो का सिलेंडर अब ₹942 में मिलेगा; बढ़ती ऊर्जा लागत और कंपनियों के नुकसान को बताया गया वजह।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/6a25074f61360/article-55164"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/घरेलू-lpg-सिलेंडर-₹29-महंगा,-उपभोक्ताओं-को-झटका.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">घरेलू रसोई गैस का इस्तेमाल करने वाले करोड़ों उपभोक्ताओं को एक बार फिर महंगाई का झटका लगा है। घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत में ₹29 की बढ़ोतरी कर दी गई है। नई दरें आधी रात से लागू हो गई हैं, जिसके बाद राजधानी दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाला घरेलू गैस सिलेंडर ₹913 से बढ़कर ₹942 का हो गया है। यह पिछले तीन महीनों के भीतर दूसरी बार है जब घरेलू LPG की कीमतों में इजाफा किया गया है। इससे पहले मार्च में भी सिलेंडर के दाम ₹60 बढ़ाए गए थे। ऐसे में मार्च से जून के बीच घरेलू गैस सिलेंडर कुल ₹89 महंगा हो चुका है। कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी का असर सीधे आम परिवारों के मासिक बजट पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">तेल कंपनियों और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े सूत्रों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा उत्पादों की बढ़ती कीमतों का दबाव लगातार बना हुआ है। इसके अलावा आयात लागत, परिवहन खर्च और वितरण से जुड़े खर्चों में भी बढ़ोतरी हुई है। बताया जा रहा है कि इन्हीं कारणों को देखते हुए घरेलू LPG की कीमतों में संशोधन किया गया है। कंपनियों का दावा है कि घरेलू सिलेंडर की बिक्री पर उन्हें लंबे समय से नुकसान उठाना पड़ रहा था। ऐसे में बढ़े हुए दाम केवल आंशिक राहत देने वाले हैं और पूरी लागत की भरपाई अभी भी नहीं हो पा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सरकारी तेल कंपनियों को प्रत्येक घरेलू LPG सिलेंडर पर करीब ₹703 का नुकसान हो रहा था। कंपनियों का कहना है कि वर्तमान मूल्य वृद्धि के बाद भी यह अंतर पूरी तरह खत्म नहीं होगा। ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतों में नरमी नहीं आती है तो आने वाले समय में मूल्य निर्धारण को लेकर फिर समीक्षा की जा सकती है। हालांकि इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक संकेत नहीं दिया गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">घरेलू सिलेंडर के साथ-साथ छोटे 5 किलोग्राम वाले LPG सिलेंडर की कीमतों में भी बढ़ोतरी की गई है। इस श्रेणी के सिलेंडर पर ₹11 का इजाफा किया गया है, जिसके बाद इसकी कीमत ₹821.50 तक पहुंच गई है। छोटे सिलेंडर आमतौर पर अस्थायी उपयोग, छोटे परिवारों और कुछ व्यावसायिक जरूरतों के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। ऐसे में इस वर्ग के उपभोक्ताओं पर भी अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रसोई गैस की कीमतों में बढ़ोतरी ऐसे समय हुई है जब पेट्रोल, डीजल और CNG के दाम भी पिछले कुछ सप्ताहों में ऊपर गए हैं। मई के दौरान पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कुल मिलाकर करीब ₹7.50 प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि CNG भी लगभग ₹6 प्रति किलोग्राम महंगी हुई है। लगातार बढ़ती ईंधन लागत का असर परिवहन, लॉजिस्टिक्स और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईंधन महंगा होता है तो इसका प्रभाव धीरे-धीरे कई अन्य क्षेत्रों में भी दिखाई देने लगता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">तेल कंपनियों का कहना है कि पेट्रोल और डीजल की बिक्री में भी उन्हें पूरी लागत के मुकाबले कम मूल्य मिल रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार कंपनियों को पेट्रोल पर लगभग ₹11 प्रति लीटर और डीजल पर ₹33.6 प्रति लीटर तक का नुकसान होने का दावा किया गया है। हालांकि सरकार का कहना है कि वैश्विक बाजार में आई पूरी मूल्य वृद्धि का बोझ सीधे उपभोक्ताओं पर नहीं डाला गया है। कुछ हिस्से का भार तेल विपणन कंपनियां स्वयं वहन कर रही हैं ताकि आम लोगों पर असर सीमित रखा जा सके।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">LPG सिलेंडर की कीमत तय करने की प्रक्रिया कई कारकों पर निर्भर करती है। सबसे पहले अंतरराष्ट्रीय बाजार में LPG की कीमतों का आकलन किया जाता है। भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए वैश्विक दरों में बदलाव का सीधा असर घरेलू कीमतों पर पड़ता है। इसके अलावा डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यदि रुपया कमजोर होता है तो आयात महंगा पड़ता है और इसका प्रभाव कीमतों में दिखाई देता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसके साथ ही गैस आयात करने, उसे देश के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचाने, बॉटलिंग प्लांट में भरने और वितरण नेटवर्क के संचालन पर होने वाला खर्च भी जोड़ा जाता है। तेल कंपनियां इन सभी लागतों का आकलन करने के बाद बाजार की परिस्थितियों के अनुरूप मूल्य तय करती हैं। सरकार की कर नीति, सब्सिडी व्यवस्था और अन्य प्रशासनिक निर्णय भी अंतिम कीमत को प्रभावित करते हैं। घरेलू LPG की कीमतों में ताजा बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब महंगाई पहले से ही आम परिवारों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। रसोई गैस हर घर की जरूरत है और इसकी कीमत बढ़ने से मासिक घरेलू खर्च पर सीधा असर पड़ता है। विशेष रूप से मध्यम वर्ग और सीमित आय वाले परिवारों को अपने बजट में अतिरिक्त प्रबंधन करना पड़ सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 11:45:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी का प्रदर्शन, शिक्षा और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर जुटे युवा</title>
                                    <description><![CDATA[सोशल मीडिया से शुरू हुआ कॉकरोच जनता पार्टी अभियान अब सड़कों तक पहुंचा, दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में युवाओं की मौजूदगी ने खींचा ध्यान।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/cockroach-janata-partys-demonstration-at-jantar-mantar-youth-engaged-on/article-55065"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/cockroach-janata-party.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर शनिवार सुबह से अलग तरह का माहौल देखने को मिला, जब सोशल मीडिया पर चर्चा में रहने वाली कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के समर्थक बड़ी संख्या में यहां पहुंचने लगे। शिक्षा व्यवस्था में सुधार और कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठा रहे इस अभियान ने पिछले कुछ दिनों में इंटरनेट पर काफी चर्चा बटोरी थी, लेकिन अब यह डिजिटल दुनिया से निकलकर जमीन पर दिखाई दिया। सुबह से ही जंतर-मंतर के आसपास युवाओं की भीड़ जुटने लगी थी। कई लोग हाथों में पोस्टर और बैनर लिए नजर आए, जबकि कुछ समूहों में बैठकर अपनी मांगों और मुद्दों पर चर्चा करते दिखाई दिए। प्रदर्शन को लेकर पहले से ही चर्चाएं तेज थीं और इसी वजह से मीडिया संस्थानों के प्रतिनिधि भी बड़ी संख्या में मौके पर मौजूद रहे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रदर्शन के केंद्र में कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके रहे, जिनके दिल्ली पहुंचने को लेकर सोशल मीडिया पर लगातार अपडेट साझा किए जा रहे थे। इससे पहले यह आशंका जताई जा रही थी कि एयरपोर्ट पर उन्हें रोका जा सकता है या किसी तरह की कार्रवाई हो सकती है। हालांकि बाद में सामने आई तस्वीरों में उन्हें एयरपोर्ट से बाहर निकलते और वाहन से आगे बढ़ते देखा गया। इस घटनाक्रम के बाद उनके समर्थकों के बीच उत्साह बढ़ गया। शुरुआती जानकारी के मुताबिक अभिजीत दीपके सीधे प्रदर्शन स्थल की ओर बढ़े, जहां पहले से मौजूद युवा उनका इंतजार कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उनकी लड़ाई किसी एक व्यक्ति के खिलाफ नहीं बल्कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दिल्ली का जंतर-मंतर लंबे समय से लोकतांत्रिक विरोध और जन आंदोलनों का केंद्र रहा है। संसद मार्ग के करीब स्थित यह स्थान कई बड़े आंदोलनों का गवाह बन चुका है। ऐसे में कॉकरोच जनता पार्टी का यहां प्रदर्शन करना भी प्रतीकात्मक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई थी। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के कर्मचारी लगातार गतिविधियों पर नजर बनाए हुए थे। हालांकि प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से चलता दिखाई दिया। युवाओं की बढ़ती संख्या के बावजूद कहीं से किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कॉकरोच जनता पार्टी का नाम और उसकी शैली शुरू से ही सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय रही है। व्यंग्य और मीम संस्कृति के जरिए शुरू हुआ यह अभियान धीरे-धीरे एक संगठित विरोध अभियान में बदलता दिखाई दे रहा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इसके समर्थक खुद को “कॉकरोच” कहकर संबोधित करते हैं और व्यवस्था से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर सवाल उठाते रहे हैं। हाल के दिनों में शिक्षा नीति, परीक्षा प्रणाली और सरकारी जवाबदेही जैसे विषयों को लेकर इस समूह की सक्रियता बढ़ी है। यही वजह है कि जंतर-मंतर पर हुए इस प्रदर्शन को केवल एक इंटरनेट ट्रेंड के रूप में नहीं देखा जा रहा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मौके पर मौजूद कई युवाओं का कहना था कि वे बेहतर शिक्षा व्यवस्था और पारदर्शिता की मांग को लेकर यहां पहुंचे हैं। कुछ छात्रों ने परीक्षा और भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर भी अपनी चिंताएं जाहिर कीं। प्रदर्शन के दौरान विभिन्न राज्यों से आए युवाओं की मौजूदगी भी देखने को मिली। कई लोग रात में ही दिल्ली पहुंच गए थे ताकि सुबह से कार्यक्रम में शामिल हो सकें। जंतर-मंतर के आसपास दिन चढ़ने के साथ भीड़ बढ़ती गई और माहौल लगातार सक्रिय बना रहा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">किसी भी सामाजिक या राजनीतिक अभियान की वास्तविक ताकत तब सामने आती है जब वह सोशल मीडिया की सीमाओं को पार कर जमीन पर लोगों को जोड़ने लगे। कॉकरोच जनता पार्टी के मामले में भी यही सवाल उठ रहा है कि क्या यह अभियान आगे चलकर एक व्यापक जन आंदोलन का रूप ले पाएगा या फिर यह सीमित दायरे तक ही रहेगा। फिलहाल इतना साफ दिखाई दे रहा है कि इस अभियान ने युवाओं के एक वर्ग का ध्यान अपनी ओर खींचा है और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर नई बहस शुरू की है।</p>
<p style="text-align:justify;">दिनभर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन, नारेबाजी और चर्चा का दौर जारी रहा। सुरक्षा व्यवस्था के बीच प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर डटे रहे। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह अभियान किस दिशा में आगे बढ़ता है और इसके मुद्दों को राजनीतिक तथा सामाजिक स्तर पर कितनी गंभीरता से लिया जाता है। फिलहाल दिल्ली के जंतर-मंतर पर जुटी भीड़ ने इतना संकेत जरूर दे दिया है कि सोशल मीडिया से शुरू हुई यह आवाज अब वास्तविक दुनिया में भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की कोशिश कर रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 12:03:20 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>लुधियाना रेलवे स्टेशन पर टला बड़ा हादसा, वैष्णो देवी जा रही ट्रेन का कपलर टूटा, यात्रियों में मचा हड़कंप</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली से श्री माता वैष्णो देवी कटरा जा रही स्पेशल ट्रेन में तेज आवाज के बाद अफरा-तफरी मच गई, जांच में कपलर टूटने की बात सामने आई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/major-accident-averted-at-ludhiana-railway-station-coupler-of-train/article-55063"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/ludhiana-railway-station.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पंजाब के लुधियाना रेलवे स्टेशन पर शनिवार सुबह उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया जब नई दिल्ली से श्री माता वैष्णो देवी कटरा जा रही एक स्पेशल ट्रेन में अचानक तेज आवाज सुनाई दी। आवाज इतनी जोरदार थी कि यात्रियों को पहले पहल किसी धमाके या बड़ी अनहोनी का अंदेशा हो गया। कुछ ही पलों में ट्रेन के भीतर बैठे यात्रियों के बीच घबराहट फैल गई और कई लोग अपनी सीटों से उठकर कोच के दरवाजों की तरफ बढ़ने लगे। घटना उस समय हुई जब ट्रेन लुधियाना स्टेशन से आगे बढ़ने की तैयारी में थी। शुरुआती सूचना सामने आते ही रेलवे सुरक्षा बल, जीआरपी और स्थानीय पुलिस के अधिकारी मौके पर पहुंच गए। चूंकि पंजाब में इन दिनों ऑपरेशन ब्लू स्टार की बरसी के मद्देनजर पहले से ही सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है, इसलिए प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच शुरू कर दी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जानकारी के अनुसार न्यू दिल्ली-श्री माता वैष्णो देवी कटरा स्पेशल ट्रेन शनिवार तड़के नई दिल्ली से रवाना हुई थी और निर्धारित समय के अनुसार सुबह करीब 8:47 बजे लुधियाना रेलवे स्टेशन पहुंची। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक ट्रेन जब स्टेशन से आगे बढ़ने लगी तो अचानक एक जोरदार आवाज सुनाई दी। आवाज के साथ ही झटका महसूस हुआ, जिससे यात्रियों के बीच चीख-पुकार मच गई। कई लोगों ने इसे धमाके जैसी आवाज बताया। ट्रेन के एक हिस्से में मौजूद यात्रियों ने घबराकर बाहर निकलने की कोशिश की। इस दौरान कुछ समय के लिए स्टेशन पर भी तनावपूर्ण माहौल बन गया। मौके पर मौजूद रेलवे कर्मचारियों ने तुरंत स्थिति को संभालने का प्रयास किया और यात्रियों को शांत रहने की अपील की।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रारंभिक जांच में सामने आया कि ट्रेन के दो डिब्बों को जोड़ने वाला कपलर टूट गया था। कपलर टूटने के कारण कोचों के बीच अचानक दबाव और झटका पैदा हुआ, जिससे एक स्लीपर कोच का शौचालय हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। हालांकि राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी यात्री के घायल होने की सूचना नहीं मिली। अधिकारियों के अनुसार हादसा गंभीर हो सकता था, लेकिन समय रहते स्थिति नियंत्रित कर ली गई। रेलवे की तकनीकी टीम ने तुरंत प्रभावित हिस्से का निरीक्षण शुरू कर दिया और ट्रेन को सुरक्षित रूप से आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक मरम्मत कार्य किया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस और रेलवे प्रशासन दोनों सक्रिय नजर आए। लुधियाना के अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त समीर वर्मा ने जांच के बाद बताया कि यह किसी प्रकार का विस्फोट नहीं था। उनके अनुसार ट्रेन चलने के दौरान दो कोचों को जोड़ने वाला कपलर टूट गया, जिसके कारण तेज आवाज आई और यात्रियों में भ्रम की स्थिति पैदा हो गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल किसी तरह की संदिग्ध गतिविधि या सुरक्षा खतरे के संकेत नहीं मिले हैं। इसके बावजूद सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच जारी रखी गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूसरी ओर फिरोजपुर मंडल के मंडल रेल प्रबंधक संजीव कुमार ने कहा कि जिस डिब्बे में यह समस्या सामने आई, उसकी उम्र अभी निर्धारित सीमा से काफी कम है। रेलवे के अनुसार एक कोच की सामान्य सेवा अवधि लगभग 25 वर्ष होती है, जबकि संबंधित कोच करीब 15 वर्ष पुराना बताया जा रहा है। ऐसे में तकनीकी खराबी की सटीक वजह जानने के लिए विस्तृत जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि किसी भी यांत्रिक हिस्से के टूटने पर तेज आवाज आना स्वाभाविक है, लेकिन अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">घटना के बाद कुछ यात्रियों ने दावा किया कि उन्होंने कपलर टूटने से पहले धमाके जैसी आवाज सुनी थी। इसी कारण शुरुआती स्तर पर सुरक्षा एजेंसियों ने सभी संभावनाओं को ध्यान में रखकर जांच शुरू की। हालांकि रेलवे अधिकारियों का मानना है कि ट्रेन के आगे बढ़ने के दौरान कपलिंग सिस्टम पर अचानक दबाव बढ़ने से यह घटना हुई हो सकती है। तकनीकी विशेषज्ञ अब यह पता लगाने में जुटे हैं कि क्या कपलर में पहले से कोई खामी थी या फिर परिचालन के दौरान किसी वजह से उस पर अत्यधिक तनाव पड़ा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">शनिवार सुबह हुई इस घटना ने एक बार फिर रेलवे सुरक्षा और रखरखाव व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि नियमित निरीक्षण की प्रक्रिया अपनाई जाती है और इस मामले में भी सभी तकनीकी पहलुओं की जांच की जाएगी। रेलवे प्रशासन का दावा है कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और घटना से जुड़े हर तथ्य की जांच की जा रही है ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने।</p>
<p style="text-align:justify;">राहत की बात यह है कि समय रहते स्थिति नियंत्रण में आ गई और एक संभावित बड़ा हादसा टल गया। रेलवे और पुलिस की संयुक्त जांच जारी है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट के आधार पर यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना केवल तकनीकी खराबी का परिणाम थी या इसके पीछे कोई अन्य कारण भी मौजूद था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 12:00:13 +0530</pubDate>
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                <title>मध्यप्रदेश में प्री-मानसून की दस्तक, 45 जिलों में बारिश-आंधी अलर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[मध्यप्रदेश में प्री-मानसून की एंट्री के साथ ही मौसम ने अचानक करवट ले ली है। कई दिनों से भीषण गर्मी और तेज धूप झेल रहे लोगों को अब राहत मिलने लगी है। प्रदेश के बड़े हिस्से में आंधी, बारिश और ठंडी हवाओं का असर दिखाई दे रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/this-is-a-natural-newsroom-style-article-based-on-your/article-55025"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/mausam-bhopal.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मौसम विभाग ने शुक्रवार को भी प्रदेश के 45 जिलों में तेज आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया है। कुछ इलाकों में हवा की रफ्तार 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की संभावना जताई गई है। मौसम में आए इस बदलाव के बाद तापमान में भी गिरावट दर्ज की जा रही है और अगले चार दिन तक राहत का दौर जारी रहने के संकेत मिल रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राजधानी भोपाल में गुरुवार शाम हालात अचानक बदल गए। दिनभर उमस और गर्मी के बाद देर शाम तेज हवाएं चलना शुरू हुईं और कुछ ही देर में कई इलाकों में धूलभरी आंधी के साथ बारिश शुरू हो गई। बताया जा रहा है कि शहर में कुछ समय के लिए हवा की रफ्तार करीब 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच गई थी। तेज हवाओं का असर शहर की सड़कों पर साफ दिखाई दिया। अलग-अलग इलाकों में पेड़ और उनकी बड़ी शाखाएं टूटकर गिर गईं, जिससे कई जगह यातायात प्रभावित हुआ। कई प्रमुख मार्गों पर देर तक जाम की स्थिति बनी रही और लोगों को परेशानी उठानी पड़ी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक तेज हवाओं के कारण राजधानी में करीब 80 से ज्यादा पेड़ और शाखाएं गिरने की घटनाएं सामने आईं। इसका असर बिजली व्यवस्था पर भी पड़ा। कई इलाकों में बिजली लाइनें प्रभावित होने के कारण घंटों तक सप्लाई बंद रही। शहर के कुछ हिस्सों में लोग देर रात तक बिजली आने का इंतजार करते रहे। बिजली विभाग की टीमें अलग-अलग स्थानों पर मरम्मत कार्य में लगी रहीं। मौसम बिगड़ने के बाद कई जगह लोग दुकानों और भवनों के नीचे खड़े होकर बारिश रुकने का इंतजार करते दिखाई दिए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">केवल भोपाल ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों में भी मौसम का असर दिखाई दिया। सीहोर जिले के इछावर क्षेत्र में झमाझम बारिश दर्ज की गई। कई स्थानों पर खेतों और सड़कों पर पानी भरने की स्थिति बनी। ग्रामीण इलाकों से भी तेज हवाओं और बारिश की खबरें सामने आईं। बताया जा रहा है कि कई किसान इस बारिश को राहत के रूप में देख रहे हैं क्योंकि लगातार बढ़ती गर्मी का असर खेती और पशुपालन दोनों पर पड़ रहा था।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्यप्रदेश में प्री-मानसून की सक्रियता बढ़ने के पीछे मौसम वैज्ञानिक अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी को बड़ी वजह मान रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, नमी और स्थानीय मौसमीय परिस्थितियों के कारण प्रदेश में लगातार बादल, तेज हवाएं और बारिश की स्थिति बन रही है। यही कारण है कि कई जिलों में अगले कुछ दिनों तक मौसम इसी तरह बने रहने की संभावना जताई जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 11:36:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[दैनिक जागरण]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नोएडा की IVY काउंटी सोसाइटी में भीषण आग, 12वीं मंजिल से उठीं लपटें, 2 फ्लैट जलकर खाक</title>
                                    <description><![CDATA[नोएडा के सेक्टर-74 स्थित IVY काउंटी सोसाइटी में शुक्रवार सुबह अचानक लगी भीषण आग ने कुछ ही मिनटों में पूरे इलाके में अफरा-तफरी मचा दी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/massive-fire-in-noidas-ivy-county-society-flames-rose-from/article-55019"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/noida.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सुबह का समय होने के कारण ज्यादातर लोग अपने घरों में मौजूद थे, लेकिन जैसे ही ऊंची इमारत की 12वीं मंजिल से धुएं का गुबार उठता दिखाई दिया, सोसाइटी के भीतर हड़कंप मच गया। देखते ही देखते आग इतनी तेजी से फैली कि आसपास के लोग अपने मोबाइल कैमरों से वीडियो बनाने लगे जबकि कई परिवार जल्दबाजी में बच्चों और बुजुर्गों को लेकर नीचे की तरफ भागते दिखाई दिए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक आग सोसाइटी की ऊपरी मंजिल पर स्थित एक फ्लैट में शुरू हुई और कुछ ही देर में आसपास के दूसरे फ्लैट तक पहुंच गई। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि शुरुआत में लोगों को लगा कि सामान्य धुआं है, लेकिन कुछ मिनट बाद खिड़कियों से निकलती तेज लपटों ने स्थिति की गंभीरता साफ कर दी। आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत फायर विभाग और पुलिस को सूचना दी जिसके बाद दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। ऊंची इमारत होने की वजह से राहत और बचाव अभियान आसान नहीं था और दमकल कर्मियों को आग तक पहुंचने में भी काफी मशक्कत करनी पड़ी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">घटना के बाद सोसाइटी प्रबंधन और सुरक्षा कर्मियों ने अलर्ट जारी करते हुए आसपास के फ्लैट खाली करवाने शुरू किए। कई निवासी सीढ़ियों के जरिए नीचे उतरते दिखाई दिए क्योंकि कुछ लोगों को डर था कि कहीं धुआं पूरे टावर में न फैल जाए। कुछ परिवार अपने जरूरी सामान तक नहीं निकाल पाए और सीधे खुले स्थानों की तरफ चले गए। मौके पर मौजूद लोगों के मुताबिक आग लगने के कुछ देर बाद पूरे इलाके में धुएं की परत दिखाई देने लगी थी और दूर से भी जलती हुई इमारत साफ नजर आ रही थी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंच गए। पूरे इलाके को अस्थायी रूप से नियंत्रित किया गया ताकि राहत कार्य प्रभावित न हो। दमकल विभाग की टीमों ने पहले आग को दूसरे हिस्सों में फैलने से रोकने पर फोकस किया और बाद में प्रभावित फ्लैटों में फायर फाइटिंग ऑपरेशन शुरू किया। अधिकारियों के अनुसार प्राथमिक लक्ष्य लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना था और इसी वजह से आसपास के फ्लैटों को खाली कराया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">फिलहाल आग लगने की वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है। शुरुआती स्तर पर शॉर्ट सर्किट या किसी तकनीकी खराबी की आशंका जताई जा रही है, हालांकि अधिकारियों का कहना है कि बिना जांच पूरी किए किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। जांच एजेंसियां और फायर विभाग घटना के तकनीकी पहलुओं की पड़ताल करेंगे। बताया जा रहा है कि आग की तीव्रता इतनी अधिक थी कि प्रभावित दोनों फ्लैटों में भारी नुकसान हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">राहत की बात यह रही कि खबर लिखे जाने तक किसी के हताहत होने की सूचना सामने नहीं आई थी। हालांकि एहतियात के तौर पर मेडिकल टीमों और आपात सेवाओं को भी मौके पर रखा गया ताकि जरूरत पड़ने पर तत्काल सहायता दी जा सके। कई लोगों को धुएं की वजह से सांस लेने में परेशानी महसूस हुई लेकिन गंभीर चोट या जानमाल के नुकसान की पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 08:49:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[दैनिक जागरण]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>18 जून को बैतूल पहुंचेंगी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, ब्रह्माकुमारीज के विशेष कार्यक्रम में लेंगी हिस्सा</title>
                                    <description><![CDATA[आदिवासी सशक्तिकरण और आध्यात्मिक जागरूकता पर केंद्रित आयोजन, प्रशासन ने सुरक्षा और व्यवस्थाओं की तैयारियां तेज कीं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/president-draupadi-murmu-will-reach-betul-on-june-18-and/article-54983"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/droupadi-murmu-betul-visit.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का मध्यप्रदेश के बैतूल जिले का प्रस्तावित दौरा प्रशासनिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। राष्ट्रपति 18 जून को बैतूल पहुंचकर प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम में भाग लेंगी। इस दौरे को लेकर जिला प्रशासन ने व्यापक स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं और विभिन्न विभागों को जिम्मेदारियां सौंप दी गई हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">राष्ट्रपति के आगमन को देखते हुए गुरुवार को प्रशासनिक अधिकारियों ने कार्यक्रम स्थल और आसपास के क्षेत्रों का निरीक्षण किया। कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे और पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र जैन ने लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। अधिकारियों ने पुलिस ग्राउंड में प्रस्तावित हेलीपैड स्थल का भी निरीक्षण किया, जहां राष्ट्रपति के हेलीकॉप्टर के उतरने की संभावना जताई जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन के बीच समन्वय बैठकों का दौर भी शुरू हो चुका है।</p>
<p style="text-align:justify;">जानकारी के अनुसार कार्यक्रम का मुख्य फोकस जनजातीय समाज के विकास, मानसिक स्वास्थ्य, आध्यात्मिक जागरूकता और सामाजिक उत्थान जैसे विषयों पर रहेगा। ब्रह्माकुमारीज संस्था इस आयोजन को बड़े स्तर पर आयोजित करने की तैयारी में है। कार्यक्रम में जिले सहित आसपास के क्षेत्रों से हजारों लोगों के पहुंचने की संभावना व्यक्त की जा रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए यातायात व्यवस्था, पार्किंग, सुरक्षा घेरा, मंच निर्माण और अतिथियों के बैठने की व्यवस्था को लेकर विस्तृत योजना बनाई जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक आयोजन का विषय ‘आध्यात्मिक जागृति से जनजातीय समाज का सशक्तिकरण’ रखा गया है। इस कार्यक्रम में आदिवासी समुदाय के सामाजिक विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और आत्मनिर्भरता से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा होने की संभावना है। आयोजक संस्था का मानना है कि आध्यात्मिक मूल्यों के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है और इसी संदेश को व्यापक स्तर पर पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का ब्रह्माकुमारीज संस्था के साथ वर्षों पुराना जुड़ाव रहा है। वे विभिन्न अवसरों पर संस्था के राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों में भाग लेती रही हैं। राजयोग ध्यान और आध्यात्मिक जीवन शैली को लेकर उनकी रुचि पहले भी सार्वजनिक मंचों पर दिखाई दे चुकी है। कई मौकों पर उन्होंने आत्मिक शांति, नैतिक मूल्यों और सामाजिक सद्भाव को आधुनिक समाज की जरूरत बताया है।</p>
<p style="text-align:justify;">बैतूल में होने वाला यह आयोजन इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि जिले में बड़ी जनजातीय आबादी निवास करती है। प्रशासन का मानना है कि राष्ट्रपति की मौजूदगी से कार्यक्रम को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी। स्थानीय स्तर पर भी इस दौरे को लेकर उत्साह का माहौल देखा जा रहा है। विभिन्न सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने राष्ट्रपति के आगमन का स्वागत किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बीच सुरक्षा एजेंसियां भी सक्रिय हो गई हैं। राष्ट्रपति के दौरे को लेकर विशेष सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू किए जाने की तैयारी है। कार्यक्रम स्थल, हेलीपैड और संभावित मार्गों का सुरक्षा ऑडिट किया जा रहा है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं ताकि दौरे के दौरान किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि कार्यक्रम में राष्ट्रपति के साथ कौन-कौन से केंद्रीय या राज्यस्तरीय अतिथि शामिल होंगे, इसे लेकर अभी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। आयोजन से जुड़े प्रतिनिधियों ने भी विस्तृत कार्यक्रम सार्वजनिक नहीं किया है। बताया जा रहा है कि अगले कुछ दिनों में राष्ट्रपति सचिवालय और राज्य सरकार की ओर से अंतिम कार्यक्रम जारी किया जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">राष्ट्रपति के बैतूल आगमन को देखते हुए शहर में कई स्तरों पर तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। सड़क मरम्मत, सफाई व्यवस्था और सार्वजनिक स्थलों के सौंदर्यीकरण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रशासन का प्रयास है कि कार्यक्रम के दौरान आने वाले मेहमानों और स्थानीय लोगों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।</p>
<p style="text-align:justify;">----</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/president-draupadi-murmu-will-reach-betul-on-june-18-and/article-54983</link>
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                <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 17:18:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[priyanka]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अफगानिस्तान सीरीज से पहले टीम इंडिया की बढ़ी टेंशन, विराट कोहली पर संशय; रोहित की फिटनेस भी चर्चा में</title>
                                    <description><![CDATA[13 जून से शुरू होने वाली वनडे श्रृंखला से पहले चयनकर्ताओं की नजर मेडिकल रिपोर्ट पर, कई युवा खिलाड़ियों के नाम विकल्पों में शामिल]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/team-indias-tension-increased-before-the-afghanistan-series-doubts-on/article-54972"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/virat-kohli-injury-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अफगानिस्तान के खिलाफ होने वाली वनडे सीरीज शुरू होने में अब कुछ ही दिन बचे हैं, लेकिन भारतीय टीम के दो सबसे बड़े नामों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। क्रिकेट गलियारों में चर्चा है कि विराट कोहली चोट की वजह से पूरी श्रृंखला से बाहर रह सकते हैं, जबकि रोहित शर्मा की फिटनेस को लेकर भी अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। आधिकारिक तौर पर कोई घोषणा नहीं की गई है, लेकिन टीम इंडिया के कैंप और चयन से जुड़े घटनाक्रमों ने उत्सुकता बढ़ा दी है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बताया जा रहा है कि विराट कोहली हाल ही में खेले गए टी-20 टूर्नामेंट के दौरान मांसपेशियों से जुड़ी परेशानी का सामना कर रहे थे। कुछ मैचों में उनकी मूवमेंट पहले जैसी सहज नहीं दिखी थी। क्रिकेट से जुड़े सूत्रों का कहना है कि मेडिकल टीम लगातार उनकी स्थिति पर नजर रखे हुए है। फिलहाल प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि खिलाड़ी पूरी तरह फिट होने के बाद ही मैदान पर लौटें। ऐसे में अफगानिस्तान के खिलाफ वनडे सीरीज में उनकी भागीदारी को लेकर तस्वीर अभी साफ नहीं है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भारतीय क्रिकेट में विराट कोहली की भूमिका सिर्फ एक बल्लेबाज की नहीं मानी जाती। पिछले कई वर्षों में उन्होंने टीम के लिए कई महत्वपूर्ण पारियां खेली हैं और मुश्किल परिस्थितियों में जिम्मेदारी संभाली है। ऐसे में यदि वह उपलब्ध नहीं रहते हैं तो बल्लेबाजी क्रम में बदलाव देखने को मिल सकता है। टीम प्रबंधन को नए संयोजन पर भी विचार करना पड़ सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसी बीच रोहित शर्मा को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। अनुभवी सलामी बल्लेबाज हाल के महीनों में फिटनेस संबंधी चुनौतियों से जूझते रहे हैं। कुछ मुकाबलों में उन्हें आराम दिया गया था और अब उनकी मैच फिटनेस का आकलन किया जा रहा है। शुरुआती संकेत बताते हैं कि रोहित की रिकवरी सकारात्मक दिशा में है, लेकिन अंतिम निर्णय मेडिकल और ट्रेनिंग रिपोर्ट के आधार पर ही लिया जाएगा। टीम के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि कोई भी फैसला जल्दबाजी में नहीं किया जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भारत और अफगानिस्तान के बीच क्रिकेट मुकाबलों को लेकर हमेशा दिलचस्पी रही है। अफगानिस्तान ने पिछले कुछ वर्षों में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी अलग पहचान बनाई है और कई बड़ी टीमों को कड़ी चुनौती दी है। यही वजह है कि भारतीय टीम इस श्रृंखला को हल्के में लेने के मूड में नहीं दिखाई दे रही। अफगानिस्तान के स्पिन आक्रमण और युवा खिलाड़ियों की आक्रामक शैली को देखते हुए टीम इंडिया मजबूत संयोजन के साथ उतरना चाहेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">13 जून से शुरू होने वाली वनडे सीरीज के लिए चयनकर्ताओं के सामने कई विकल्प मौजूद हैं। यदि विराट कोहली नहीं खेलते हैं तो मध्यक्रम में जगह भरने के लिए कुछ युवा खिलाड़ियों पर भरोसा किया जा सकता है। हालिया घरेलू और फ्रेंचाइजी क्रिकेट में अच्छा प्रदर्शन करने वाले कई बल्लेबाज चयन की दौड़ में हैं। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि यह सीरीज कुछ नए चेहरों के लिए बड़ा अवसर साबित हो सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">संजू सैमसन, तिलक वर्मा, ऋतुराज गायकवाड़, रजत पाटीदार और देवदत्त पडिक्कल जैसे खिलाड़ियों के नाम चर्चा में हैं। इनमें से कई खिलाड़ी लंबे समय से राष्ट्रीय टीम में नियमित अवसर का इंतजार कर रहे हैं। चयन समिति भविष्य की योजनाओं को ध्यान में रखते हुए युवा और अनुभवी खिलाड़ियों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">टीम प्रबंधन की एक और चिंता यह है कि वरिष्ठ खिलाड़ियों की अनुपस्थिति दर्शकों की रुचि पर भी असर डाल सकती है। विराट कोहली और रोहित शर्मा भारतीय क्रिकेट के सबसे लोकप्रिय चेहरों में शामिल हैं। सीमित ओवरों के प्रारूप में दोनों की मौजूदगी मैचों को अतिरिक्त आकर्षण देती है। ऐसे में क्रिकेट प्रेमी लगातार उनकी फिटनेस से जुड़ी खबरों पर नजर बनाए हुए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बीसीसीआई से जुड़े अधिकारियों के अनुसार आने वाले दिनों में खिलाड़ियों का अंतिम फिटनेस मूल्यांकन किया जाएगा। इसके बाद टीम की तस्वीर काफी हद तक साफ हो जाएगी। फिलहाल भारतीय क्रिकेट प्रशंसक यही इंतजार कर रहे हैं कि अफगानिस्तान के खिलाफ मैदान पर उतरने वाली टीम में विराट कोहली और रोहित शर्मा शामिल होंगे या नहीं। दोनों खिलाड़ियों की उपलब्धता को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है और टीम इंडिया की तैयारियों पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">----</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 15:42:17 +0530</pubDate>
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                <title>भोपाल के बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलने की प्रक्रिया तेज, कार्य परिषद ने प्रस्ताव को दी मंजूरी</title>
                                    <description><![CDATA[‘वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय’ नाम पर सहमति, अकादमिक ढांचे और विभागीय संरचना में भी बड़े बदलाव की तैयारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/the-process-of-changing-the-name-of-barkatullah-university-of/article-54959"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/barkatullah-university.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">भोपाल स्थित बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलने की लंबे समय से चल रही चर्चा अब प्रशासनिक प्रक्रिया के अगले चरण में पहुंच गई है। विश्वविद्यालय की कार्य परिषद की बैठक में संस्थान का नाम बदलकर ‘वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय’ किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। इस फैसले के बाद अब पूरा मामला राज्य स्तर पर आगे बढ़ेगा और अंतिम स्वीकृति के लिए संबंधित संवैधानिक और प्रशासनिक प्रक्रियाओं से गुजरेगा। विश्वविद्यालय प्रशासन से जुड़े सूत्रों का कहना है कि परिषद की बैठक में इस विषय पर विस्तृत चर्चा हुई और सदस्यों ने इसे प्रदेश की ऐतिहासिक पहचान और सांस्कृतिक विरासत से जोड़कर देखा।</p>
<p class="isSelectedEnd">बैठक के दौरान यह तर्क सामने रखा गया कि मध्यप्रदेश के इतिहास में राजा भोज का विशेष स्थान रहा है और भोपाल का प्राचीन नाम भोजपाल भी उनसे जुड़ा माना जाता है। इसी आधार पर विश्वविद्यालय के नाम को क्षेत्र की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और सांस्कृतिक परंपरा से जोड़ने का प्रस्ताव रखा गया। परिषद के कई सदस्यों ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों के नाम केवल पहचान का माध्यम नहीं होते बल्कि वे किसी क्षेत्र की ऐतिहासिक स्मृति और बौद्धिक विरासत को भी दर्शाते हैं। इसी सोच के साथ नए नाम को लेकर सहमति बनी।</p>
<p class="isSelectedEnd">हालांकि केवल नाम परिवर्तन ही इस बैठक का प्रमुख विषय नहीं रहा। विश्वविद्यालय के भीतर अकादमिक ढांचे में बदलाव को लेकर भी कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। जानकारी के अनुसार कुछ विभागों के पुनर्गठन की योजना तैयार की गई है, जिसके तहत पारंपरिक भाषा और संस्कृति से जुड़े विषयों को नए स्वरूप में विकसित किया जाएगा। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि बदलते शैक्षणिक परिवेश में विभागों को अधिक बहुआयामी बनाना जरूरी हो गया है ताकि छात्रों को व्यापक अध्ययन के अवसर मिल सकें।</p>
<p class="isSelectedEnd">विश्वविद्यालय से जुड़े अधिकारियों के अनुसार भाषा अध्ययन और सांस्कृतिक शोध को एकीकृत दृष्टिकोण से आगे बढ़ाने के लिए नई अकादमिक संरचना पर काम किया जा रहा है। इसके तहत अलग-अलग भाषाई और सांस्कृतिक विषयों को एक मंच पर लाकर अध्ययन और शोध की नई संभावनाएं विकसित करने की योजना बनाई गई है। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि देशभर के कई विश्वविद्यालय अब पारंपरिक विषयों को आधुनिक अकादमिक ढांचे के साथ जोड़ने की दिशा में काम कर रहे हैं और भोपाल का यह विश्वविद्यालय भी उसी दिशा में कदम बढ़ाता दिखाई दे रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">नाम परिवर्तन की प्रक्रिया अपने आप में काफी विस्तृत और कानूनी चरणों से गुजरने वाली होती है। विश्वविद्यालय की कार्य परिषद से प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद इसे राज्य सरकार के उच्च शिक्षा विभाग के पास भेजा जाता है। वहां से विभिन्न प्रशासनिक स्तरों पर इसकी समीक्षा की जाती है। चूंकि विश्वविद्यालय का संचालन राज्य अधिनियम के तहत होता है, इसलिए नाम बदलने के लिए संबंधित कानून में संशोधन आवश्यक माना जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">जानकारों के अनुसार इसके लिए राज्य विधानसभा में संशोधन विधेयक लाया जाता है। विधेयक पारित होने के बाद उसे राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजा जाता है। संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद सरकार राजपत्र में अधिसूचना प्रकाशित करती है, जिसके साथ नया नाम आधिकारिक रूप से लागू माना जाता है। इसके बाद विश्वविद्यालय के सभी आधिकारिक रिकॉर्ड, वेबसाइट, डिग्रियां, अंकसूचियां, प्रमाणपत्र और प्रशासनिक दस्तावेजों में बदलाव की प्रक्रिया शुरू होती है।</p>
<p class="isSelectedEnd">भोपाल के शैक्षणिक और सामाजिक हलकों में इस प्रस्ताव को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। कुछ शिक्षाविद इसे क्षेत्रीय इतिहास और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने वाला कदम मान रहे हैं, जबकि कुछ लोगों का मानना है कि नाम परिवर्तन के साथ-साथ विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता और शोध गतिविधियों पर भी समान रूप से ध्यान दिया जाना चाहिए। छात्रों के बीच भी इस विषय पर चर्चा तेज है और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इसे लेकर अलग-अलग राय व्यक्त की जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd">बरकतउल्ला विश्वविद्यालय मध्यप्रदेश के प्रमुख उच्च शिक्षा संस्थानों में गिना जाता है और यहां प्रदेश सहित देश के विभिन्न हिस्सों से छात्र पढ़ाई करने आते हैं। विश्वविद्यालय में कला, विज्ञान, वाणिज्य, प्रबंधन, विधि और अन्य विषयों की पढ़ाई होती है। वर्षों से यह संस्थान क्षेत्र के उच्च शिक्षा केंद्र के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। ऐसे में नाम परिवर्तन और अकादमिक पुनर्गठन से जुड़े फैसलों को केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं बल्कि संस्थान की भविष्य की दिशा तय करने वाले कदम के रूप में भी देखा जा रहा है।</p>
<p>----</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 14:13:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[priyanka]]></dc:creator>
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                <title>तृणमूल कांग्रेस में सबसे बड़ा सियासी झटका, 28 साल बाद खुलकर दिखी अंदरूनी दरार</title>
                                    <description><![CDATA[विधायकों के बदले रुख से बंगाल की राजनीति में हलचल, कोलकाता से दिल्ली तक तेज हुई बैठकों और रणनीतियों की चर्चा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/biggest-political-shock-in-trinamool-congress-internal-rift-openly-visible/article-54952"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/tmc-internal-crisis-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल की राजनीति में बीते कुछ दिनों के दौरान ऐसा घटनाक्रम सामने आया है जिसने राज्य की सत्ता और विपक्ष दोनों के समीकरणों को नई दिशा दे दी है। लंबे समय से मजबूत संगठनात्मक पकड़ और केंद्रीकृत नेतृत्व के लिए पहचानी जाने वाली तृणमूल कांग्रेस अब अपने सबसे कठिन राजनीतिक दौरों में से एक का सामना करती दिखाई दे रही है। पार्टी के भीतर उभरी असहमति अब बंद कमरों से निकलकर सार्वजनिक मंचों तक पहुंच गई है और इसका असर सीधे सत्ता संरचना पर दिखाई देने लगा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि सब कुछ अचानक नहीं हुआ। पिछले कुछ महीनों से पार्टी के अंदर कई स्तरों पर असंतोष पनप रहा था। संगठनात्मक फैसलों, नेतृत्व की कार्यशैली और भविष्य की राजनीतिक रणनीति को लेकर कुछ नेताओं और विधायकों के बीच नाराजगी बढ़ती जा रही थी। हालांकि शुरुआत में इसे सामान्य राजनीतिक मतभेद माना गया, लेकिन मई के अंतिम सप्ताह में घटनाओं ने तेजी से करवट लेनी शुरू कर दी। दिल्ली में हुई कुछ महत्वपूर्ण मुलाकातों और उसके बाद बंगाल लौटे नेताओं की गतिविधियों ने राजनीतिक हलकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बताया जा रहा है कि राष्ट्रीय राजधानी में हुई एक मुलाकात ने पार्टी के भीतर चल रही चर्चाओं को नया मोड़ दिया। इसके बाद लगातार संपर्क, बैठकों और राजनीतिक बातचीत का सिलसिला तेज हुआ। देखते ही देखते बड़ी संख्या में विधायक एक साझा रुख की ओर बढ़ने लगे। राज्य की राजनीति पर नजर रखने वाले जानकारों का कहना है कि जिस गति से घटनाएं आगे बढ़ीं, उसने कई वरिष्ठ नेताओं को भी चौंका दिया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कोलकाता में पिछले कुछ दिनों से पार्टी कार्यालयों, नेताओं के आवासों और राजनीतिक केंद्रों पर बैठकों का दौर लगातार जारी रहा। कई ऐसे चेहरे, जिन्हें लंबे समय से शीर्ष नेतृत्व के बेहद करीबी माना जाता था, अचानक नई राजनीतिक गतिविधियों के केंद्र में दिखाई देने लगे। इससे अटकलों का दौर और तेज हो गया। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि केवल विधायकों की संख्या ही नहीं, बल्कि प्रभावशाली नेताओं की बदलती सक्रियता ने पूरे घटनाक्रम को और महत्वपूर्ण बना दिया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसी बीच राज्य प्रशासन से जुड़ी बैठकों में कुछ वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी भी चर्चा का विषय बनी रही। राजनीतिक विरोधियों ने इसे बदलते राजनीतिक माहौल का संकेत बताया, जबकि संबंधित नेताओं की ओर से इसे सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया कहा गया। इसके बावजूद बंगाल की राजनीति में यह सवाल लगातार उठ रहा है कि क्या यह केवल संयोग है या फिर पर्दे के पीछे कोई बड़ा राजनीतिक पुनर्संतुलन चल रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कोलकाता नगर निगम की राजनीति भी इस घटनाक्रम से प्रभावित होती नजर आई। शहर के प्रमुख प्रशासनिक पदों से जुड़े नेताओं को लेकर दिनभर अलग-अलग तरह की चर्चाएं होती रहीं। कुछ नेताओं के संभावित फैसलों को लेकर कयास लगाए गए, जबकि आधिकारिक स्तर पर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो सकी। राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि कई नेता अभी सार्वजनिक रूप से कोई बड़ा कदम उठाने से बच रहे हैं और हालात पर नजर बनाए हुए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच भी असमंजस का माहौल देखा जा रहा है। जिलों से लेकर महानगर तक संगठन के स्थानीय पदाधिकारी लगातार बैठकों में व्यस्त हैं। कार्यकर्ताओं के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि आने वाले दिनों में पार्टी की दिशा क्या होगी और नेतृत्व इस चुनौती का सामना किस तरह करेगा। कई जगहों पर संगठन के भीतर संवाद बढ़ाने और कार्यकर्ताओं का मनोबल बनाए रखने की कोशिशें भी जारी हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बंगाल की राजनीति में यह केवल एक संगठनात्मक विवाद नहीं है। इसका असर आगामी चुनावी रणनीतियों, गठबंधनों और सत्ता समीकरणों पर भी पड़ सकता है। राज्य की राजनीति हमेशा से व्यक्तित्व आधारित रही है और ऐसे में नेतृत्व से जुड़े किसी भी बड़े घटनाक्रम का व्यापक प्रभाव देखने को मिलता है। यही कारण है कि दिल्ली से लेकर कोलकाता तक राजनीतिक दलों की नजर इस पूरे घटनाक्रम पर बनी हुई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उधर कानूनी और प्रशासनिक मोर्चों पर भी कुछ ऐसे मामले सामने आए हैं जिनकी चर्चा राजनीतिक बहस के साथ-साथ चल रही है। अदालतों में चल रही सुनवाई और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को लेकर भी राजनीतिक दल अपने-अपने तरीके से बयान दे रहे हैं। इससे राजनीतिक माहौल और ज्यादा गर्म हो गया है। राज्य के राजनीतिक गलियारों में दिनभर बैठकों, फोन कॉल्स और रणनीतिक चर्चाओं का दौर जारी रहा, जबकि कार्यकर्ता और समर्थक लगातार अगले घटनाक्रम का इंतजार करते दिखाई दिए।</p>
<p style="text-align:justify;">कोलकाता में राजनीतिक गतिविधियां सामान्य दिनों की तुलना में कहीं अधिक तेज नजर आ रही हैं। कई वरिष्ठ नेताओं के कार्यक्रम अचानक बढ़ गए हैं, जबकि कुछ चेहरे सार्वजनिक रूप से कम दिखाई दे रहे हैं। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि आने वाले कुछ दिन पश्चिम बंगाल की राजनीति के लिए बेहद अहम साबित हो सकते हैं क्योंकि मौजूदा घटनाक्रम ने राज्य के राजनीतिक परिदृश्य में अनिश्चितता और उत्सुकता दोनों को बढ़ा दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">---</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 13:18:09 +0530</pubDate>
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