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                <title>स्पोर्ट्स - दैनिक जागरण</title>
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                <title>ऑस्ट्रेलिया दौरे से पहले बांग्लादेश को झटका, पेसर इबादत हुसैन टेस्ट सीरीज से बाहर</title>
                                    <description><![CDATA[इबादत नहीं खेलेंगे दो टेस्ट, नाहिद राणा की फिटनेस पर भी संशय]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/shock-to-bangladesh-before-australia-tour-pacer-ibadat-hussain-out/article-59583"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/ebadot-hossain.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अगले महीने होने वाली दो टेस्ट मैचों की सीरीज से पहले बांग्लादेश क्रिकेट टीम को बड़ा झटका लगा है। तेज गेंदबाज इबादत हुसैन इस दौरे पर टीम के साथ नहीं होंगे। इबादत जल्द पिता बनने वाले हैं और इसी निजी कारण से उन्होंने सीरीज से खुद को अनुपलब्ध रखा है। बांग्लादेश के लिए उनकी गैरमौजूदगी अहम मानी जा रही है, क्योंकि ऑस्ट्रेलियाई परिस्थितियों में तेज गेंदबाजों की भूमिका काफी महत्वपूर्ण रहती है। टीम को अब उनके बिना अपने पेस अटैक का नया संयोजन तैयार करना होगा।</p>
<p>बांग्लादेश और ऑस्ट्रेलिया के बीच दो टेस्ट मैचों की सीरीज 13 अगस्त से डार्विन में शुरू होगी। यह सीरीज वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के तहत खेली जाएगी, इसलिए दोनों मुकाबलों के नतीजे बांग्लादेश के लिए काफी मायने रखेंगे। मुख्य सीरीज से पहले टीम को स्थानीय परिस्थितियों में तैयारी का मौका भी मिलेगा। बांग्लादेश 3 अगस्त से क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया इलेवन के खिलाफ तीन दिवसीय अभ्यास मुकाबला खेलेगा। इस मैच के जरिए बल्लेबाजों को उछाल और गति वाली परिस्थितियों के अनुकूल होने का मौका मिलेगा, जबकि गेंदबाज अपनी लाइन-लेंथ और सही संयोजन पर काम कर सकेंगे।</p>
<p>इबादत हुसैन के बाहर होने के बाद बांग्लादेश की परेशानी नाहिद राणा की चोट ने और बढ़ा दी है। तेज गेंदबाज नाहिद साइड इंजरी से जूझ रहे हैं और उनकी चोट की स्थिति जानने के लिए स्कैन कराया गया है। पहले टेस्ट में वह खेल पाएंगे या नहीं, इस पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। उनकी फिटनेस पर मेडिकल टीम लगातार नजर रख रही है। अगर नाहिद समय रहते पूरी तरह फिट नहीं होते हैं तो बांग्लादेश को अपने तेज गेंदबाजी आक्रमण में एक और बदलाव करना पड़ सकता है।</p>
<p>नाहिद राणा अपनी रफ्तार के कारण बांग्लादेश के गेंदबाजी आक्रमण में अलग प्रभाव पैदा करते हैं। ऑस्ट्रेलिया की पिचों पर अतिरिक्त उछाल के साथ उनकी गति टीम के लिए उपयोगी साबित हो सकती है। हालांकि साइड इंजरी तेज गेंदबाज के लिए गंभीर परेशानी बन सकती है, खासकर टेस्ट क्रिकेट में जहां लंबे स्पेल डालने पड़ते हैं। ऐसे में टीम प्रबंधन उन्हें मैदान पर उतारने से पहले पूरी तरह आश्वस्त होना चाहेगा। अभ्यास मुकाबले से पहले और उसके दौरान उनकी स्थिति को देखते हुए आगे का फैसला लिया जा सकता है।</p>
<p>बांग्लादेश के लिए राहत की उम्मीद अनुभवी बल्लेबाज लिटन दास से जुड़ी है। लिटन फिलहाल पिंडली की चोट से उबर रहे हैं और टीम को उम्मीद है कि वह टेस्ट सीरीज शुरू होने तक पूरी फिटनेस हासिल कर लेंगे। ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजी आक्रमण के सामने बांग्लादेश के बल्लेबाजों की कड़ी परीक्षा होने वाली है। ऐसे में लिटन का अनुभव मध्यक्रम को मजबूती दे सकता है। उनकी उपलब्धता बल्लेबाजी संयोजन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण होगी, हालांकि उन्हें टीम में शामिल करने का फैसला फिटनेस की स्थिति देखने के बाद ही किया जाएगा।</p>
<p>3 अगस्त से होने वाला अभ्यास मैच बांग्लादेश के लिए बेहद अहम रहेगा। टीम इस मुकाबले में केवल परिस्थितियों को समझने की कोशिश नहीं करेगी, बल्कि संभावित प्लेइंग इलेवन को लेकर भी प्रयोग किए जा सकते हैं। इबादत की गैरमौजूदगी और नाहिद की चोट के कारण तेज गेंदबाजी विभाग पर खास नजर रहेगी। उपलब्ध गेंदबाजों में से कौन नई गेंद से बेहतर प्रभाव डाल सकता है और कौन लंबे स्पेल में नियंत्रण बनाए रखता है, इसका आकलन अभ्यास मुकाबले के दौरान किया जा सकता है।</p>
<p>ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट क्रिकेट खेलना बांग्लादेश के लिए आसान चुनौती नहीं होगी। वहां की पिचों पर गति और उछाल बल्लेबाजों के लिए मुश्किल पैदा कर सकती है, जबकि गेंदबाजों को सही लाइन और लेंथ बनाए रखना जरूरी होगा। नई गेंद से विकेट निकालने के साथ मेजबान बल्लेबाजों पर लगातार दबाव बनाना बांग्लादेश की रणनीति का अहम हिस्सा हो सकता है। इबादत के उपलब्ध नहीं रहने से अनुभव की कमी महसूस हो सकती है, इसलिए दूसरे तेज गेंदबाजों पर अतिरिक्त जिम्मेदारी आने की संभावना है।</p>
<p>वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के तहत खेली जा रही इस सीरीज में बांग्लादेश के लिए हर अंक महत्वपूर्ण रहेगा। विदेशी मैदान पर ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत टीम का सामना करना बड़ी परीक्षा होगी। टीम को बल्लेबाजी में लंबी साझेदारियां बनाने के साथ गेंदबाजी में लगातार विकेट निकालने होंगे। पहले टेस्ट से पहले टीम प्रबंधन की सबसे बड़ी चिंता खिलाड़ियों की फिटनेस और सही संयोजन तैयार करने की रहेगी। नाहिद राणा की मेडिकल रिपोर्ट और लिटन दास की रिकवरी पर भी लगातार नजर बनी हुई है।</p>
<p>इबादत हुसैन के नहीं होने से बांग्लादेश को अपने तेज गेंदबाजी विभाग की योजना में बदलाव करना पड़ेगा। यदि नाहिद भी पहले मुकाबले तक फिट नहीं होते हैं तो उपलब्ध पेसर्स में से किसी अन्य खिलाड़ी को बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। ऑस्ट्रेलियाई विकेटों पर केवल तेज गति पर्याप्त नहीं होती, बल्कि गेंद को सही क्षेत्र में लगातार डालना और बल्लेबाजों को गलती के लिए मजबूर करना भी जरूरी रहता है। इसी वजह से अभ्यास मैच में गेंदबाजों का प्रदर्शन टीम चयन में अहम भूमिका निभा सकता है।</p>
<p>बांग्लादेश की तैयारी फिलहाल 3 अगस्त से शुरू होने वाले तीन दिवसीय अभ्यास मुकाबले पर केंद्रित रहेगी। इसके बाद 13 अगस्त से टीम ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट सीरीज की चुनौती में उतरेगी। इबादत की अनुपस्थिति तय हो चुकी है, जबकि नाहिद राणा और लिटन दास की उपलब्धता फिटनेस पर निर्भर करेगी। ऐसे में अभ्यास मैच के बाद ही बांग्लादेश की संभावित प्लेइंग इलेवन और तेज गेंदबाजी आक्रमण की तस्वीर ज्यादा स्पष्ट होने की उम्मीद है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 16:32:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Priyanka ]]></dc:creator>
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                <title>फ्रांस की कमान संभाल सकते हैं जिनेदिन जिदान, देशां के बाद नए दौर की तैयारी</title>
                                    <description><![CDATA[2030 वर्ल्ड कप तक जिम्मेदारी मिलने की चर्चा, रोड्री पर रियल मैड्रिड की नजर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/zinedine-zidane-can-take-command-of-france-preparing-for-a/article-59582"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/zinedine-zidane.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">फ्रांस की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम में बड़े बदलाव की तैयारी की खबरें सामने आ रही हैं। पूर्व दिग्गज फुटबॉलर और सफल कोच जिनेदिन जिदान को फ्रांस की सीनियर पुरुष टीम की जिम्मेदारी मिलने की संभावना जताई जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मंगलवार को उनके नाम की आधिकारिक घोषणा हो सकती है। यदि ऐसा होता है तो लंबे समय से फ्रांस की कमान संभाल रहे दिदिएर देशां का कार्यकाल समाप्त होने के बाद टीम एक नए कोचिंग दौर में प्रवेश करेगी।</p>
<p>54 वर्षीय जिदान को कथित तौर पर चार साल के कार्यकाल के लिए फ्रांस का मुख्य कोच बनाया जा सकता है। यह संभावित अनुबंध 2030 फीफा वर्ल्ड कप तक रहने की बात कही जा रही है। फ्रांस जैसे मजबूत फुटबॉल देश की जिम्मेदारी जिदान के लिए उनके कोचिंग करियर का एक नया अध्याय होगी। खिलाड़ी के रूप में वह पहले ही फ्रांस के सबसे प्रतिष्ठित फुटबॉलरों में अपनी जगह बना चुके हैं।</p>
<h5><strong>देशां के लंबे कार्यकाल के बाद बदलाव</strong></h5>
<p>दिदिएर देशां 2012 से फ्रांस की राष्ट्रीय टीम के मुख्य कोच की जिम्मेदारी संभालते रहे हैं। उनके नेतृत्व में फ्रांस ने अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल में कई बड़ी उपलब्धियां हासिल कीं और लंबे समय तक दुनिया की सबसे मजबूत टीमों में अपनी जगह बनाए रखी। ऐसे में उनके बाद टीम की जिम्मेदारी संभालने वाले कोच पर प्रदर्शन और अपेक्षाओं का बड़ा दबाव रहेगा।</p>
<p>देशां के दौर में फ्रांस ने प्रतिभाशाली युवा खिलाड़ियों और अनुभवी सितारों के संयोजन के साथ अपनी अलग पहचान बनाई। टीम ने बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में लगातार मजबूत चुनौती पेश की। अब संभावित बदलाव के साथ फ्रांसीसी फुटबॉल प्रशासन की नजर अगले विश्व कप चक्र और भविष्य की टीम तैयार करने पर होगी।</p>
<h5><strong>जिदान के पास बड़े मुकाबलों का अनुभव</strong></h5>
<p>जिनेदिन जिदान का नाम विश्व फुटबॉल के महान खिलाड़ियों में शामिल किया जाता है। फ्रांस की जर्सी में खेलते हुए उन्होंने अपने देश को कई यादगार सफलताएं दिलाने में अहम भूमिका निभाई। मैदान पर उनकी तकनीक, खेल को समझने की क्षमता और दबाव वाले मुकाबलों में प्रदर्शन ने उन्हें फुटबॉल की दुनिया में विशेष पहचान दिलाई।</p>
<p>खिलाड़ी के बाद जिदान ने कोच के रूप में भी अपनी क्षमता साबित की। रियल मैड्रिड के साथ उनका कार्यकाल बेहद सफल रहा और उन्होंने यूरोपीय क्लब फुटबॉल के सबसे बड़े मंच पर महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल कीं। बड़े सितारों से भरी टीम को संभालने का उनका अनुभव फ्रांस की राष्ट्रीय टीम के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।</p>
<h5><strong>2030 तक टीम तैयार करने की चुनौती</strong></h5>
<p>अगर जिदान को चार साल का अनुबंध मिलता है तो उनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारियों में फ्रांस की टीम को 2030 फीफा वर्ल्ड कप के लिए तैयार करना शामिल होगा। इस दौरान उन्हें मौजूदा अनुभवी खिलाड़ियों के साथ नई पीढ़ी के फुटबॉलरों को भी टीम में स्थापित करना होगा। टीम की रणनीति, खिलाड़ियों की भूमिकाओं और खेल शैली में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।</p>
<p>जिदान की कोचिंग शैली में गेंद पर नियंत्रण, तेज पासिंग और आक्रामक फुटबॉल को महत्व दिया जाता रहा है। हालांकि राष्ट्रीय टीम का संचालन क्लब फुटबॉल से अलग चुनौती है। यहां खिलाड़ियों के साथ तैयारी के लिए सीमित समय मिलता है और बड़े टूर्नामेंटों में कम समय के भीतर सही संयोजन तैयार करना जरूरी होता है।</p>
<h5><strong>फ्रांस के साथ जिदान का पुराना रिश्ता</strong></h5>
<p>जिदान का फ्रांस की राष्ट्रीय टीम से गहरा जुड़ाव रहा है। अपने अंतरराष्ट्रीय करियर के दौरान वह टीम के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे। ऐसे में यदि उन्हें मुख्य कोच बनाया जाता है तो वह उसी टीम के तकनीकी नेतृत्व की जिम्मेदारी संभालेंगे, जिसके लिए उन्होंने खिलाड़ी के रूप में लंबे समय तक योगदान दिया।</p>
<p>उनके संभावित कार्यकाल में फ्रांस के प्रदर्शन के साथ टीम की नई पीढ़ी पर भी नजर रहेगी। अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल में लगातार बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच फ्रांस को यूरोप और दक्षिण अमेरिका की मजबूत टीमों से चुनौती मिलती रहेगी। ऐसे में जिदान के सामने टीम को निरंतर शीर्ष स्तर पर बनाए रखने की बड़ी जिम्मेदारी होगी।</p>
<h5><strong>रोड्री को लेकर रियल मैड्रिड की दिलचस्पी</strong></h5>
<p>फ्रांस के संभावित कोचिंग बदलाव के बीच यूरोपीय क्लब फुटबॉल के ट्रांसफर बाजार से भी बड़ी खबर सामने आई है। रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि रियल मैड्रिड की नजर स्पेन के स्टार मिडफील्डर रोड्री पर है। उनके भविष्य को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं और आने वाले ट्रांसफर विंडो में उनकी स्थिति महत्वपूर्ण हो सकती है।</p>
<p>रोड्री मिडफील्ड में खेल को नियंत्रित करने, गेंद की रिकवरी और डिफेंस से अटैक के बीच तालमेल बनाने की क्षमता के लिए जाने जाते हैं। इसी वजह से दुनिया के बड़े क्लबों की नजर उन पर बनी रहती है। रियल मैड्रिड अपने मिडफील्ड को लंबे समय के लिए मजबूत करने की योजना के तहत उनके विकल्प पर विचार कर सकता है।</p>
<h5><strong>मैनचेस्टर सिटी के साथ अनुबंध पर नजर</strong></h5>
<p>दी गई जानकारी के मुताबिक, मैनचेस्टर सिटी के साथ रोड्री के मौजूदा अनुबंध की अवधि कम होने के कारण उनके संभावित ट्रांसफर को लेकर अटकलें बढ़ी हैं। यदि क्लब और खिलाड़ी के बीच नया समझौता नहीं होता है तो ट्रांसफर बाजार में उनकी उपलब्धता को लेकर बड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिल सकती है।</p>
<p>रियल मैड्रिड के लिए रोड्री जैसे अनुभवी मिडफील्डर को टीम में शामिल करना भविष्य की रणनीति का अहम हिस्सा हो सकता है। हालांकि किसी संभावित ट्रांसफर की स्थिति क्लबों के बीच बातचीत, खिलाड़ी की प्राथमिकता और अनुबंध की शर्तों पर निर्भर करेगी। फिलहाल उनके भविष्य को लेकर आधिकारिक फैसले का इंतजार है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 16:17:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Priyanka ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>चीन ओपन में पीवी सिंधु का सफर खत्म, चार मैच पॉइंट गंवाकर चेन युफेई से हारीं</title>
                                    <description><![CDATA[तीन गेम तक चला कड़ा मुकाबला, 89 मिनट में युफेई ने दर्ज की जीत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/pv-sindhus-journey-ends-in-china-open-losing-to-chen/article-59581"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/p.v.-sindhu.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">पिछले सप्ताह जापान ओपन सुपर-750 का खिताब जीतने के बाद शानदार लय में नजर आ रहीं भारतीय बैडमिंटन स्टार पीवी सिंधु का चीन ओपन सुपर-1000 में अभियान प्री-क्वार्टर फाइनल में थम गया। गुरुवार को चांगझोउ में खेले गए महिला सिंगल्स मुकाबले में सिंधु को चीन की वर्ल्ड नंबर-4 चेन युफेई ने तीन गेम तक चले संघर्षपूर्ण मैच में 16-21, 22-20, 21-18 से हराया। करीब एक घंटे 29 मिनट चले मुकाबले में सिंधु ने पहला गेम अपने नाम कर मजबूत शुरुआत की थी। दूसरे गेम में भी वह मैच जीतने की स्थिति तक पहुंच गईं और उनके पास मुकाबला खत्म करने के चार मैच पॉइंट थे, लेकिन भारतीय खिलाड़ी इन मौकों को जीत में नहीं बदल सकीं। यहीं से मुकाबले का रुख बदल गया और घरेलू दर्शकों के सामने खेल रहीं युफेई ने वापसी करते हुए क्वार्टर फाइनल में जगह बना ली।</p>
<p>पहले गेम में सिंधु ने शुरुआत से ही आक्रामक बैडमिंटन खेला। लंबी रैलियों के साथ उन्होंने कोर्ट के दोनों किनारों का इस्तेमाल किया और युफेई को लगातार दबाव में रखा। भारतीय खिलाड़ी ने नेट के पास भी नियंत्रण बनाए रखा और मौका मिलते ही तेज स्मैश से अंक निकाले। युफेई ने बीच-बीच में वापसी की कोशिश की, लेकिन सिंधु ने अपनी बढ़त हाथ से नहीं जाने दी। उन्होंने पहला गेम 21-16 से जीतकर मुकाबले में 1-0 की बढ़त बना ली। जापान ओपन की खिताबी जीत के बाद जिस आत्मविश्वास के साथ सिंधु चीन पहुंची थीं, उसका असर शुरुआती गेम में साफ नजर आया।</p>
<p>दूसरा गेम मुकाबले का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा साबित हुआ। दोनों खिलाड़ियों के बीच एक-एक अंक के लिए लंबी रैलियां देखने को मिलीं। सिंधु ने दबाव के बावजूद बढ़त बनाई और मुकाबले को खत्म करने के करीब पहुंच गईं। उनके पास चार मैच पॉइंट आए, लेकिन चेन युफेई ने हर बार खुद को मुकाबले में बनाए रखा। सिंधु इन मौकों पर निर्णायक अंक हासिल नहीं कर सकीं। युफेई ने लगातार दबाव बनाते हुए स्कोर बराबर किया और फिर अतिरिक्त अंकों तक पहुंचे गेम को 22-20 से अपने नाम कर लिया। इस गेम के साथ मुकाबला 1-1 की बराबरी पर आ गया।</p>
<p>चार मैच पॉइंट गंवाना सिंधु के लिए भारी पड़ा। दूसरी तरफ युफेई का आत्मविश्वास बढ़ गया और निर्णायक तीसरे गेम में मुकाबला फिर बेहद करीबी रहा। दोनों खिलाड़ियों ने लंबी रैलियों में एक-दूसरे की फिटनेस और धैर्य की परीक्षा ली। सिंधु ने कई बार अंतर कम किया, लेकिन अंतिम हिस्से में चीनी खिलाड़ी ने अहम अंकों पर बेहतर नियंत्रण रखा। स्कोर जब निर्णायक स्थिति में पहुंचा तो युफेई ने गलतियां कम कीं और 21-18 से तीसरा गेम जीतते हुए मुकाबला अपने नाम कर लिया।</p>
<p>इस हार के साथ सिंधु का चीन ओपन सुपर-1000 में सफर समाप्त हो गया। हालांकि हाल के टूर्नामेंटों में उनका प्रदर्शन भारतीय बैडमिंटन के लिए अहम माना जा रहा है। जापान ओपन सुपर-750 में खिताबी सफलता हासिल करने के बाद उनसे चीन में भी लंबा सफर तय करने की उम्मीद थी। चांगझोउ में वह प्री-क्वार्टर फाइनल तक पहुंचीं, लेकिन चेन युफेई के खिलाफ मिले निर्णायक मौकों को भुना नहीं पाने के कारण उन्हें बाहर होना पड़ा।</p>
<p>चेन युफेई के खिलाफ यह मुकाबला इसलिए भी चुनौतीपूर्ण था क्योंकि वह अपने घरेलू कोर्ट पर खेल रही थीं। वर्ल्ड नंबर-4 चीनी खिलाड़ी ने पहला गेम गंवाने के बाद जिस तरह वापसी की, उसमें उनका अनुभव दिखाई दिया। खासकर दूसरे गेम में मैच पॉइंट बचाना मुकाबले का टर्निंग पॉइंट रहा। सिंधु के पास सीधे दो गेम में मुकाबला समाप्त करने का अवसर था, लेकिन युफेई ने लगातार चार मैच पॉइंट बचाकर मुकाबले को निर्णायक गेम तक पहुंचा दिया।</p>
<p>सिंधु की हार के बीच गुरुवार को क्रिकेट से जुड़ी एक और बड़ी अंतरराष्ट्रीय खबर सामने आई। इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल ने 2027 में होने वाले वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप फाइनल के आयोजन स्थल और तारीखों की घोषणा कर दी है। WTC 2027 का खिताबी मुकाबला लंदन के ऐतिहासिक द ओवल मैदान पर 9 से 13 जून के बीच खेला जाएगा। इसके साथ एक रिजर्व डे की व्यवस्था किए जाने की संभावना भी टूर्नामेंट की खेल परिस्थितियों के अनुसार रहेगी।</p>
<p>द ओवल लगातार दूसरी बार वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप के फाइनल की मेजबानी करेगा। इससे पहले 2023 का WTC फाइनल भी इसी मैदान पर खेला गया था। उस मुकाबले में भारत और ऑस्ट्रेलिया आमने-सामने थे। ऑस्ट्रेलिया ने भारतीय टीम को हराकर वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप का खिताब अपने नाम किया था। अब 2027 में एक बार फिर टेस्ट क्रिकेट की दो शीर्ष टीमें इसी मैदान पर विश्व चैंपियन बनने के लिए उतरेंगी।</p>
<p>2027 का WTC फाइनल ऐतिहासिक लिहाज से भी खास होगा। उस वर्ष टेस्ट क्रिकेट अपने 150 साल पूरे करेगा। पहला आधिकारिक टेस्ट मुकाबला 1877 में ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पर खेला गया था। ऐसे में टेस्ट क्रिकेट की डेढ़ सदी पूरी होने वाले साल में होने वाला वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप फाइनल इस प्रारूप के लिए विशेष आयोजन माना जा रहा है।</p>
<p>इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड को आने वाले तीन WTC फाइनल की मेजबानी भी दी गई है। जानकारी के अनुसार 2027 के साथ 2029 और 2031 के वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप फाइनल भी इंग्लैंड में आयोजित किए जाएंगे। हालांकि बाद के दोनों फाइनल के लिए संबंधित मैदानों और विस्तृत कार्यक्रम को लेकर आगे और जानकारी जारी की जाएगी।</p>
<p>वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप की शुरुआत टेस्ट क्रिकेट को एक व्यवस्थित वैश्विक प्रतियोगिता का स्वरूप देने के उद्देश्य से की गई थी। इसमें निर्धारित चक्र के दौरान अलग-अलग टेस्ट सीरीज से टीमों को अंक मिलते हैं और अंक प्रतिशत के आधार पर शीर्ष दो टीमें फाइनल में पहुंचती हैं। इंग्लैंड के मैदान अब तक WTC फाइनल के प्रमुख आयोजन स्थल रहे हैं। 2021 में पहला फाइनल साउथैम्प्टन में भारत और न्यूजीलैंड के बीच हुआ था, जबकि 2023 में भारत और ऑस्ट्रेलिया द ओवल में आमने-सामने थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 16:17:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Priyanka ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का ग्लासगो में आगाज, भारत के 125 खिलाड़ी मैदान में</title>
                                    <description><![CDATA[8 खेलों में भारतीय चुनौती, लवलीना का पदक तय]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/commonwealth-games-2026-begins-in-glasgow-125-indian-players-in/article-59580"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/commonwealth-games-2026.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">ग्लासगो में 23वें कॉमनवेल्थ गेम्स का आज से आगाज होने जा रहा है। स्कॉटलैंड का यह शहर एक बार फिर कॉमनवेल्थ देशों के खिलाड़ियों की मेजबानी के लिए तैयार है। 23 जुलाई से शुरू हो रहे खेल 2 अगस्त तक चलेंगे, जिसमें 74 देशों और क्षेत्रों से 3 हजार से अधिक खिलाड़ी अपनी चुनौती पेश करेंगे। इस बार 10 खेलों में कुल 215 मेडल इवेंट रखे गए हैं और इनमें 47 पैरा स्पोर्ट्स इवेंट भी शामिल हैं। भारत की ओर से 125 खिलाड़ियों का दल ग्लासगो पहुंचा है। भारतीय खिलाड़ी आठ खेलों में हिस्सा लेंगे। हालांकि हॉकी, बैडमिंटन, शूटिंग और कुश्ती जैसे उन खेलों को इस बार कार्यक्रम में जगह नहीं मिली है, जिनमें भारत का रिकॉर्ड काफी मजबूत रहा है। ऐसे में छोटे दल और सीमित खेलों के बावजूद भारतीय खिलाड़ियों से पदकों की उम्मीद बनी हुई है।</p>
<p>भारत के अभियान की शुरुआत से पहले ही बॉक्सिंग से अच्छी खबर आई है। ओलिंपिक पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन ने महिलाओं के 75 किलोग्राम भार वर्ग में कम से कम कांस्य पदक सुनिश्चित कर लिया है। ड्रॉ में उन्हें क्वार्टर फाइनल में बाई मिली, जिससे वह सीधे सेमीफाइनल में पहुंच गई हैं। उनका सेमीफाइनल मुकाबला 31 जुलाई को टी.के.बी.पी. ताफाकी के खिलाफ निर्धारित है। बॉक्सिंग प्रतियोगिता में कांस्य पदक के लिए अलग मुकाबला नहीं होता। दोनों सेमीफाइनल में हारने वाले मुक्केबाजों को कांस्य दिया जाता है, इसलिए अंतिम चार में जगह बनाते ही लवलीना का पदक पक्का हो गया है। अब उनकी कोशिश फाइनल में पहुंचकर पदक का रंग बदलने की होगी।</p>
<p>कॉमनवेल्थ गेम्स का इतिहास करीब एक सदी पुराना है। इसकी पहली प्रतियोगिता 1930 में कनाडा के हैमिल्टन शहर में हुई थी। उस समय इन खेलों को ब्रिटिश एम्पायर गेम्स के नाम से जाना जाता था। शुरुआती आयोजन में 11 देशों के 400 से ज्यादा खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था और एथलेटिक्स, मुक्केबाजी, लॉन बॉल्स, रोइंग, तैराकी और कुश्ती जैसी स्पर्धाएं कराई गई थीं। समय के साथ प्रतियोगिता का नाम कई बार बदला। 1954 में इसे ब्रिटिश एम्पायर एंड कॉमनवेल्थ गेम्स कहा गया, जबकि 1970 में नाम ब्रिटिश कॉमनवेल्थ गेम्स हुआ। वर्ष 1978 से यह आयोजन मौजूदा नाम यानी कॉमनवेल्थ गेम्स के रूप में आयोजित किया जा रहा है। सामान्य तौर पर इसका आयोजन चार साल में एक बार किया जाता है।</p>
<p>भारत ने इन खेलों में पहली बार 1934 में हिस्सा लिया था। लंदन में हुए उस संस्करण में भारतीय दल काफी छोटा था और केवल छह खिलाड़ी पहुंचे थे। भारत ने ट्रैक एंड फील्ड तथा कुश्ती की स्पर्धाओं में चुनौती पेश की थी। उसी प्रतियोगिता में पहलवान राशिद अनवर ने पुरुष फ्रीस्टाइल कुश्ती के 74 किलोग्राम वर्ग में कांस्य जीतकर भारत को कॉमनवेल्थ गेम्स इतिहास का पहला पदक दिलाया। शुरुआती वर्षों के मुकाबले बाद में भारत इस प्रतियोगिता की बड़ी खेल शक्तियों में शामिल हुआ। उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार भारतीय खिलाड़ियों ने अब तक कॉमनवेल्थ गेम्स में कुल 564 पदक हासिल किए हैं, जिनमें 203 स्वर्ण, 189 रजत और 172 कांस्य शामिल हैं।</p>
<p>ग्लासगो में होने वाला इस बार का आयोजन भारत के लिए पिछले कई संस्करणों से अलग रहने वाला है। इसकी बड़ी वजह खेलों की संख्या में कटौती है। क्रिकेट, हॉकी, बैडमिंटन, शूटिंग, कुश्ती, टेबल टेनिस और स्क्वैश को 2026 के कार्यक्रम में शामिल नहीं किया गया है। इन खेलों का बाहर होना भारतीय पदक संभावनाओं पर सीधा असर डाल सकता है। खास तौर पर शूटिंग और कुश्ती लंबे समय से भारत के मजबूत खेल रहे हैं। शूटिंग में भारत ने कॉमनवेल्थ स्तर पर बड़ी संख्या में पदक जीते हैं, जबकि कुश्ती में भी भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन लगातार मजबूत रहा है। बैडमिंटन और टेबल टेनिस में भी पिछले आयोजनों में भारतीय खिलाड़ियों ने कई पदक अपने नाम किए थे।</p>
<p>इस बार प्रतियोगिता को अपेक्षाकृत सीमित स्वरूप में आयोजित किया जा रहा है। कुल 10 खेलों में मुकाबले होंगे और इनमें 215 स्वर्ण पदक दांव पर रहेंगे। पैरा खिलाड़ियों के लिए भी आयोजन खास है। छह खेलों में पैरा स्पर्धाओं को मुख्य कार्यक्रम के साथ जोड़ा गया है और कुल 47 पैरा मेडल इवेंट होंगे। इसे कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास के सबसे बड़े एकीकृत पैरा स्पोर्ट्स कार्यक्रमों में गिना जा रहा है। इससे पैरा खिलाड़ियों को मुख्य प्रतियोगिता के साथ बड़े मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा।</p>
<p>एथलेटिक्स में भी इस बार एक पुरानी प्रतियोगिता वापस लौट रही है। कॉमनवेल्थ माइल को लंबे अंतराल के बाद कार्यक्रम में शामिल किया गया है। यह स्पर्धा आखिरी बार 1966 में आयोजित हुई थी। इसमें पारंपरिक 1500 मीटर दौड़ के स्थान पर एक मील यानी करीब 1.609 किलोमीटर की पुरुष और महिला रेस होगी। इस बदलाव को कॉमनवेल्थ गेम्स की पुरानी खेल परंपरा से जोड़कर देखा जा रहा है।</p>
<p>ग्लासगो दूसरी बार इन खेलों की मेजबानी कर रहा है। इससे पहले 2014 में भी शहर ने कॉमनवेल्थ गेम्स आयोजित किए थे। इस बार मुकाबलों को चार प्रमुख आयोजन स्थलों तक सीमित रखा गया है। इससे खिलाड़ियों, अधिकारियों और दर्शकों की आवाजाही को आसान बनाने की कोशिश की गई है। शहर में प्रतियोगिता से जुड़ी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और अलग-अलग देशों के खिलाड़ी अपने अभ्यास सत्र में जुटे हैं।</p>
<p>ओपनिंग सेरेमनी भी भारतीय खेल प्रेमियों के लिए खास रहने वाली है। भारत की तरफ से ओलिंपिक पदक विजेता वेटलिफ्टर मीराबाई चानू और मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन को ध्वजवाहक की जिम्मेदारी दी गई है। उद्घाटन समारोह ग्लासगो के ओवीओ हाइड्रो एरीना में आयोजित होगा। भारतीय समय के अनुसार कार्यक्रम देर रात करीब 12:30 बजे शुरू होकर 2:30 बजे तक चलने की जानकारी है। समारोह में ब्रिटिश गायक टॉम वॉकर की प्रस्तुति भी प्रस्तावित है। भारतीय दल के मार्च पास्ट पर भी खास नजर रहेगी।</p>
<p>इस बार खिलाड़ियों को दिए जाने वाले पदकों के डिजाइन में भी कई बदलाव किए गए हैं। ग्लासगो की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को पदकों में जगह देने की कोशिश की गई है। इन्हें कलाकार और डिजाइनर मिलित्सा मिलेनकोवा ने तैयार किया है। डिजाइन में शहर के प्रमुख लैंडमार्क, औद्योगिक विरासत, स्थानीय प्रतीकों और सांस्कृतिक पहचान से प्रेरित तत्व शामिल किए गए हैं। खास बात यह है कि पहली बार पदकों में ब्रेल और स्पर्श से पहचाने जा सकने वाले टैक्टाइल एलिमेंट भी जोड़े गए हैं। इसका उद्देश्य पदकों को अधिक समावेशी बनाना है।</p>
<p>भारत के लिए इस संस्करण में सबसे बड़ी चुनौती उन खेलों की गैरमौजूदगी है, जिनसे आम तौर पर पदक तालिका में बड़ा योगदान मिलता रहा है। शूटिंग, कुश्ती, बैडमिंटन और टेबल टेनिस के हटने से भारतीय दल का आकार भी सीमित हुआ है। इसके बावजूद बॉक्सिंग, वेटलिफ्टिंग, एथलेटिक्स और दूसरे शामिल खेलों में भारतीय खिलाड़ियों से अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है। लवलीना का पदक प्रतियोगिता शुरू होने से पहले ही सुनिश्चित होने से भारतीय खेमे को शुरुआती बढ़त मिली है।</p>
<p>कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत की यात्रा कई उतार-चढ़ाव से गुजरी है। भारत ने 1930 के पहले संस्करण में हिस्सा नहीं लिया था और 1934 में अपना अभियान शुरू किया। इसके बाद कुछ संस्करणों को छोड़कर भारतीय खिलाड़ी लगातार इस प्रतियोगिता का हिस्सा रहे। दशकों के दौरान भारत ने एथलेटिक्स और कुश्ती से आगे बढ़कर शूटिंग, वेटलिफ्टिंग, बैडमिंटन, टेबल टेनिस, बॉक्सिंग और हॉकी सहित कई खेलों में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई।</p>
<p>भारतीय दर्शक ग्लासगो से होने वाले मुकाबलों का सीधा प्रसारण टीवी और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर देख सकेंगे। उपलब्ध प्रसारण जानकारी के मुताबिक भारत में मुकाबले सोनी स्पोर्ट्स नेटवर्क पर दिखाए जाएंगे, जबकि डिजिटल लाइव स्ट्रीमिंग सोनी लिव पर उपलब्ध होगी। डीडी स्पोर्ट्स पर भी चुनिंदा प्रसारण उपलब्ध होने की जानकारी दी गई है। अलग-अलग स्पर्धाओं के समय में भारत और स्कॉटलैंड के टाइम जोन का अंतर रहेगा, इसलिए कई अहम मुकाबले भारतीय समय के अनुसार शाम और देर रात खेले जा सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 16:16:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Priyanka ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>हॉकी विश्व कप के लिए टीम इंडिया में एमपी के विवेक सागर, मिडफील्ड में संभालेंगे जिम्मेदारी</title>
                                    <description><![CDATA[15 अगस्त से बेल्जियम-नीदरलैंड में विश्व कप, भारत के पूल में इंग्लैंड, पाकिस्तान और वेल्स]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/mps-vivek-sagar-will-take-charge-in-the-midfield-of/article-59568"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/vivek-sagar-prasad.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">मध्यप्रदेश के हॉकी खिलाड़ी विवेक सागर प्रसाद एक बार फिर बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करते नजर आएंगे। मध्यप्रदेश हॉकी अकादमी से जुड़े विवेक सागर को एफआईएच हॉकी विश्व कप 2026 के लिए भारतीय पुरुष टीम में जगह मिली है। विश्व कप 15 से 30 अगस्त तक बेल्जियम और नीदरलैंड में खेला जाना है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लंबे समय से भारतीय मिडफील्ड का हिस्सा रहे विवेक पर टूर्नामेंट में खेल की रफ्तार संभालने और आक्रमण व डिफेंस के बीच तालमेल बनाने की अहम जिम्मेदारी रहेगी। एफआईएच के रिकॉर्ड में भी विवेक सागर को भारत के सक्रिय मिडफील्डर के रूप में सूचीबद्ध किया गया है, जबकि विश्व कप का आयोजन 15 से 30 अगस्त के बीच निर्धारित है।</p>
<p>भारतीय टीम इस बार हरमनप्रीत सिंह की कप्तानी में विश्व कप में उतरेगी। टीम मैनेजमेंट ने अनुभवी खिलाड़ियों के साथ युवा चेहरों का संतुलन बनाने की कोशिश की है। मनप्रीत सिंह जैसे अनुभवी खिलाड़ी भी टीम का हिस्सा हैं। मुख्य कोच क्रेग फुल्टन की रणनीति में मिडफील्ड की भूमिका काफी महत्वपूर्ण रहने वाली है और इसी क्षेत्र में विवेक सागर का अनुभव भारत के काम आ सकता है। तेज पासिंग, गेंद पर नियंत्रण और दबाव के समय खेल की दिशा बदलने की क्षमता उनकी प्रमुख खूबियों में गिनी जाती है।</p>
<p>मध्यप्रदेश के लिए विवेक का चयन खास माना जा रहा है। प्रदेश की हॉकी व्यवस्था से निकलकर उन्होंने भारतीय टीम तक का लंबा सफर तय किया है और ओलंपिक सहित कई बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में देश का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। जूनियर स्तर पर भी उन्होंने भारतीय टीम की कप्तानी की थी। एफआईएच के रिकॉर्ड के अनुसार 2021 जूनियर विश्व कप में विवेक भारतीय टीम के कप्तान रहे थे। इससे पहले 2018 यूथ ओलंपिक में भी उन्होंने भारतीय टीम की अगुवाई की थी, जहां भारत ने रजत पदक हासिल किया था।</p>
<p>विश्व कप में भारत को पूल-डी में रखा गया है। यहां टीम का सामना वेल्स, इंग्लैंड और पाकिस्तान से होगा। भारतीय टीम अपना अभियान 15 अगस्त को वेल्स के खिलाफ शुरू करेगी। इसके बाद 17 अगस्त को इंग्लैंड से मुकाबला होगा। पूल चरण का सबसे चर्चित मैच 19 अगस्त को भारत और पाकिस्तान के बीच खेला जाना है। इस मुकाबले पर दोनों देशों के हॉकी प्रशंसकों की खास नजर रहने की उम्मीद है।</p>
<p>पूल चरण में शुरुआती तीन मुकाबले भारत के आगे के सफर की दिशा तय करेंगे। वेल्स के खिलाफ मजबूत शुरुआत के बाद इंग्लैंड जैसी चुनौतीपूर्ण टीम से मुकाबला आसान नहीं होगा। पाकिस्तान के खिलाफ मैच में खेल के साथ दबाव संभालना भी अहम रहेगा। ऐसे मैचों में अनुभवी खिलाड़ियों की भूमिका बढ़ जाती है और विवेक सागर जैसे मिडफील्डर से गेंद को नियंत्रित रखते हुए टीम की लय बनाए रखने की उम्मीद होगी।</p>
<p>विवेक सागर भारतीय हॉकी में कम उम्र से ही पहचान बनाने वाले खिलाड़ियों में शामिल रहे हैं। मध्यप्रदेश से निकलकर अंतरराष्ट्रीय हॉकी तक पहुंचे विवेक ने जूनियर और सीनियर दोनों स्तरों पर लगातार अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। उनकी सबसे बड़ी ताकत मैदान के बीच में तेजी से खेल को पढ़ना और जरूरत के हिसाब से आक्रामक तथा रक्षात्मक भूमिका बदलना रही है।</p>
<p>मध्यप्रदेश हॉकी अकादमी के लिए भी उनका विश्व कप टीम में चयन एक और बड़ी उपलब्धि है। प्रदेश में पिछले वर्षों में हॉकी के लिए अकादमी स्तर पर खिलाड़ियों को प्रशिक्षण, फिटनेस और प्रतियोगिताओं का एक्सपोजर देने पर काम हुआ है। यहां से तैयार हुए कई खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में जगह बनाई है। विवेक सागर इस व्यवस्था से निकलकर भारतीय हॉकी के प्रमुख नामों में शामिल हुए हैं।</p>
<p>विश्व कप में भारत की कोशिश शुरुआती मैचों से ही अपनी लय पकड़ने की होगी। बड़े टूर्नामेंट में पेनल्टी कॉर्नर के साथ मिडफील्ड में गेंद पर कब्जा और विपक्षी टीम के काउंटर अटैक को रोकना बेहद अहम रहता है। कप्तान हरमनप्रीत सिंह पर ड्रैग फ्लिक और डिफेंस की बड़ी जिम्मेदारी होगी, जबकि मिडफील्ड में विवेक सहित दूसरे खिलाड़ियों को आक्रमण के मौके तैयार करने होंगे।</p>
<p>एफआईएच हॉकी विश्व कप 2026 का आयोजन बेल्जियम और नीदरलैंड संयुक्त रूप से कर रहे हैं। दुनिया की शीर्ष हॉकी टीमें खिताब के लिए मैदान में उतरेंगी। भारतीय टीम के सामने पूल चरण से ही कड़ी चुनौती रहेगी, ऐसे में पहले तीन मुकाबलों में अंक जुटाना महत्वपूर्ण होगा। 15 अगस्त को वेल्स के खिलाफ मुकाबले के साथ भारत का अभियान शुरू होगा और चार दिन बाद पाकिस्तान के खिलाफ हाई-वोल्टेज मैच खेला जाएगा।</p>
<p>भोपाल और मध्यप्रदेश के हॉकी जगत की नजर खास तौर पर विवेक सागर के प्रदर्शन पर रहेगी। भारतीय टीम में उनकी भूमिका केवल एक अनुभवी खिलाड़ी की नहीं, बल्कि मैदान के बीच खेल की गति तय करने वाले मिडफील्डर की भी होगी। बड़े मुकाबलों का अनुभव उनके पक्ष में है और टीम प्रबंधन विश्व कप में इसी अनुभव का फायदा उठाना चाहेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 13:47:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Priyanka ]]></dc:creator>
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                <title>IND vs ZIM: हरारे में आज पहला टी-20, श्रेयस की कप्तानी में पहली जीत की तलाश</title>
                                    <description><![CDATA[इंग्लैंड-आयरलैंड दौरे की निराशा पीछे छोड़ने उतरेगी युवा टीम इंडिया; वैभव सूर्यवंशी की हरारे से जुड़ी सुनहरी यादें, जिम्बाब्वे का तेज गेंदबाजी आक्रमण बन सकता है बड़ी चुनौती]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/ind-vs-zim-first-t20-today-in-harare-looking-for/article-59542"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/ind-vs-zim-1st-t20i-2026.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">गातार खराब नतीजों के बाद भारतीय टी-20 टीम गुरुवार, 23 जुलाई को जिम्बाब्वे के खिलाफ नए सिरे से शुरुआत करने उतरेगी। तीन मैचों की टी-20 सीरीज का पहला मुकाबला हरारे स्पोर्ट्स क्लब में खेला जाना है। श्रेयस अय्यर की कप्तानी वाली युवा भारतीय टीम के लिए यह सीरीज केवल जीत की पटरी पर लौटने का मौका नहीं, बल्कि पिछले दो विदेशी दौरों की निराशा पीछे छोड़ने की भी चुनौती है। तीनों मुकाबले हरारे में ही खेले जाने हैं।</p>
<p>भारत बनाम ज़िम्बाब्वे पहला T20I 2026 से पहले सबसे ज्यादा नजर कप्तान श्रेयस अय्यर पर है। इंग्लैंड और आयरलैंड में मिली निराशा के बाद भारतीय टीम अब जिम्बाब्वे में अपनी लय तलाश रही है। श्रेयस ने सीरीज से पहले खिलाड़ियों को हार के डर से बाहर निकलकर आत्मविश्वास के साथ खेलने का संदेश दिया है। टीम प्रबंधन भी चाहता है कि युवा खिलाड़ी पिछली नाकामियों का दबाव लेकर मैदान पर न उतरें।</p>
<p>भारत के लिए यह छोटा दौरा है। पहला मुकाबला 23 जुलाई को होगा, जबकि दूसरा टी-20 25 जुलाई और तीसरा मुकाबला 26 जुलाई को खेला जाएगा। तीनों मैच हरारे स्पोर्ट्स क्लब में रखे गए हैं। ऐसे में परिस्थितियों को जल्दी समझना और पहले ही मैच से बढ़त हासिल करना दोनों टीमों के लिए अहम होगा।</p>
<p>भारतीय बल्लेबाजी में युवा और अनुभवी खिलाड़ियों का मिश्रण दिखाई देगा। टीम में अभिषेक शर्मा, वैभव सूर्यवंशी, ईशान किशन, तिलक वर्मा, रिंकू सिंह और शिवम दुबे जैसे बल्लेबाज मौजूद हैं। श्रेयस अय्यर खुद मध्यक्रम की जिम्मेदारी संभालेंगे। भारत ने इस दौरे के लिए 15 सदस्यीय टीम चुनी है और तिलक वर्मा को उपकप्तान बनाया गया है।</p>
<p>सबसे ज्यादा चर्चा 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी को लेकर है। इंग्लैंड और आयरलैंड के हालिया दौरों में वह अपनी क्षमता के मुताबिक बड़ी पारी नहीं खेल पाए थे। अब जिम्बाब्वे में उनके सामने खुद को दोबारा साबित करने का मौका है। कप्तान श्रेयस ने भी युवा बल्लेबाज का समर्थन किया है और भरोसा जताया है कि पिछले अनुभवों से उन्होंने अपनी गलतियों पर काम किया होगा।</p>
<p>हरारे का नाम आते ही सूर्यवंशी की एक यादगार पारी भी चर्चा में है। अंडर-19 विश्व कप फाइनल में उन्होंने इसी शहर में 80 गेंदों पर 175 रन की विस्फोटक पारी खेली थी। उस प्रदर्शन ने भारत की खिताबी जीत में बड़ी भूमिका निभाई थी। अब सीनियर स्तर पर उसी मैदान पर लौटते हुए उनसे एक बार फिर आक्रामक बल्लेबाजी की उम्मीद रहेगी।</p>
<p>सूर्यवंशी के साथ अभिषेक शर्मा भारतीय पारी को तेज शुरुआत देने की भूमिका निभा सकते हैं। ईशान किशन विकेटकीपर-बल्लेबाज के रूप में शीर्ष क्रम को मजबूती देते हैं। मध्यक्रम में श्रेयस और तिलक वर्मा के पास पारी संभालने की जिम्मेदारी होगी, जबकि शिवम दुबे और रिंकू सिंह आखिरी ओवरों में तेजी से रन बनाने की क्षमता रखते हैं।</p>
<p>भारतीय टीम के सामने बड़ी चुनौती यह होगी कि बल्लेबाजी क्रम जल्दी विकेट गंवाने से बचे। हरारे में नई गेंद तेज गेंदबाजों को मदद दे सकती है। शुरुआती कुछ ओवर संभाल लिए जाएं तो बल्लेबाजों के लिए रन बनाने के मौके बढ़ सकते हैं। ऐसे में भारत के टॉप ऑर्डर की भूमिका पहले मुकाबले में काफी अहम रहने वाली है।</p>
<p>जिम्बाब्वे को उसकी घरेलू परिस्थितियों में हल्के में लेना भारत के लिए मुश्किल पैदा कर सकता है। टीम के पास ब्लेसिंग मुजरबानी और रिचर्ड नगारवा जैसे तेज गेंदबाज हैं, जो हरारे की परिस्थितियों का फायदा उठाना जानते हैं। ब्रैड इवांस भी पेस अटैक को मजबूती देते हैं। नई गेंद के साथ यह आक्रमण भारतीय बल्लेबाजों की शुरुआती परीक्षा ले सकता है।</p>
<p>ब्लेसिंग मुजरबानी जिम्बाब्वे के गेंदबाजी आक्रमण के प्रमुख हथियारों में शामिल हैं। उनकी लंबाई और अतिरिक्त उछाल बल्लेबाजों के लिए परेशानी खड़ी कर सकती है। रिचर्ड नगारवा बाएं हाथ से अलग कोण बनाते हैं। हरारे की पिच पर अगर शुरुआत में सीम या उछाल मिला तो भारत को पहले छह ओवर काफी संभलकर खेलने पड़ सकते हैं।</p>
<p>जिम्बाब्वे ने इस सीरीज के लिए विकेटकीपर-बल्लेबाज तफाद्जवा त्सिगा को पहली बार टी-20 अंतरराष्ट्रीय टीम में शामिल किया है। मेजबान टीम नए खिलाड़ियों और अनुभवी चेहरों के मिश्रण के साथ मैदान पर उतर रही है। सिकंदर रजा की मौजूदगी बल्लेबाजी के साथ टीम को अनुभव भी देती है।</p>
<p>ब्रायन बेनेट जिम्बाब्वे के शीर्ष क्रम में महत्वपूर्ण बल्लेबाज साबित हो सकते हैं। उनके साथ वेस्ली मधेवेरे से भी टीम को अच्छी शुरुआत की उम्मीद होगी। मध्यक्रम में सिकंदर रजा और रयान बर्ल जैसे खिलाड़ी तेजी से मैच की दिशा बदलने की क्षमता रखते हैं। भारतीय गेंदबाजों को घरेलू टीम के इन बल्लेबाजों के खिलाफ अनुशासित लाइन पर गेंदबाजी करनी होगी।</p>
<p>भारत का गेंदबाजी आक्रमण अपेक्षाकृत युवा है। स्क्वाड में हर्ष दुबे, वरुण चक्रवर्ती, प्रिंस यादव, यश ठाकुर, अशोक शर्मा और मयंक यादव जैसे विकल्प मौजूद हैं। शिवम दुबे भी जरूरत के मुताबिक गेंदबाजी में योगदान दे सकते हैं। टीम संयोजन में स्पिन और तेज गेंदबाजी के बीच संतुलन किस तरह बनाया जाता है, इस पर नजर रहेगी।</p>
<p>मयंक यादव की रफ्तार भारत के लिए बड़ा हथियार साबित हो सकती है, लेकिन प्लेइंग इलेवन का फैसला पिच और फिटनेस को ध्यान में रखकर होगा। वहीं वरुण चक्रवर्ती अपनी विविधता से बीच के ओवरों में विकेट निकालने का विकल्प देते हैं। प्रिंस यादव और यश ठाकुर जैसे गेंदबाजों के लिए भी यह दौरा अपनी पहचान मजबूत करने का मौका है।</p>
<p>भारत और जिम्बाब्वे की टी-20 प्रतिद्वंद्विता में भारतीय टीम का पलड़ा भारी रहा है, लेकिन हरारे में मेजबान टीम पहले भी उलटफेर कर चुकी है। इसलिए श्रेयस की टीम के लिए शुरुआत से दबाव बनाना जरूरी होगा। जिम्बाब्वे घरेलू मैदान और परिस्थितियों का फायदा उठाने की कोशिश करेगा, जबकि भारत बेहतर बल्लेबाजी गहराई के दम पर मुकाबला नियंत्रित करना चाहेगा।</p>
<p>हालिया प्रदर्शन की वजह से भारतीय टीम पर जीत का दबाव भी रहेगा। इंग्लैंड और आयरलैंड के खिलाफ नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे और टीम को लगातार मुश्किलों का सामना करना पड़ा। जिम्बाब्वे दौरे को अब नए आत्मविश्वास की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है। श्रेयस ने भी खिलाड़ियों से पिछली हार के डर के बजाय सकारात्मक और निडर क्रिकेट खेलने को कहा है।</p>
<p>हरारे स्पोर्ट्स क्लब की परिस्थितियां शुरुआत में तेज गेंदबाजों को मदद दे सकती हैं। गेंद पुरानी होने के बाद बल्लेबाजी अपेक्षाकृत आसान होने की संभावना रहती है। ऐसे में टॉस की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। लक्ष्य का पीछा करने वाली टीम परिस्थितियों का अंदाजा लगाकर अपनी बल्लेबाजी रणनीति तैयार कर सकती है।</p>
<p>भारत की संभावित प्लेइंग-11 में अभिषेक शर्मा और वैभव सूर्यवंशी ओपनिंग की जिम्मेदारी संभाल सकते हैं। ईशान किशन विकेटकीपर के रूप में शीर्ष क्रम में उतर सकते हैं। इसके बाद श्रेयस अय्यर, तिलक वर्मा, शिवम दुबे और रिंकू सिंह बल्लेबाजी को गहराई देंगे। गेंदबाजी संयोजन पिच को देखकर तय किया जा सकता है।</p>
<p>जिम्बाब्वे की संभावित टीम में ब्रायन बेनेट, वेस्ली मधेवेरे, तादिवानाशे मारुमानी या तफाद्जवा त्सिगा, डिओन मायर्स, सिकंदर रजा, रयान बर्ल और मिल्टन शुम्बा बल्लेबाजी विकल्प हो सकते हैं। निचले क्रम और गेंदबाजी में ब्रैड इवांस, न्यूमैन न्यामहुरी, रिचर्ड नगारवा और ब्लेसिंग मुजरबानी भूमिका निभा सकते हैं।</p>
<p><strong>भारत का स्क्वाड:</strong> श्रेयस अय्यर (कप्तान), वैभव सूर्यवंशी, अभिषेक शर्मा, तिलक वर्मा (उपकप्तान), ईशान किशन (विकेटकीपर), शिवम दुबे, सूर्यांश शेडगे, रिंकू सिंह, हर्ष दुबे, वरुण चक्रवर्ती, प्रिंस यादव, यश ठाकुर, अशोक शर्मा, मयंक यादव और प्रभसिमरन सिंह (विकेटकीपर)।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 12:03:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Priyanka ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अफगानिस्तान की वनडे कप्तानी से हटे हशमतुल्लाह शाहिदी, निजी कारणों से लिया फैसला</title>
                                    <description><![CDATA[टीम की कमान छोड़ने के बाद भी बल्लेबाज के रूप में खेलते रहेंगे शाहिदी, अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने अभी नए वनडे कप्तान के नाम का नहीं किया ऐलान]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/hashmatullah-shahidi-steps-down-from-afghanistans-odi-captaincy-decision-taken/article-59496"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/hashmatullah-shahidi.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">अफगानिस्तान क्रिकेट टीम में नेतृत्व को लेकर बड़ा बदलाव सामने आया है। अनुभवी बल्लेबाज हशमतुल्लाह शाहिदी ने वनडे टीम की कप्तानी छोड़ने का फैसला किया है। 31 साल के शाहिदी ने सोशल मीडिया के जरिए अपने फैसले की जानकारी दी और इसके पीछे निजी कारण बताए हैं। कप्तानी छोड़ने के बावजूद वह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलना जारी रखेंगे और वनडे टीम में बल्लेबाज के तौर पर चयन के लिए उपलब्ध रहेंगे। अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड यानी ACB ने फिलहाल उनके उत्तराधिकारी के नाम की घोषणा नहीं की है।</p>
<p>शाहिदी पिछले कुछ वर्षों से अफगानिस्तान की वनडे टीम के अहम चेहरों में शामिल रहे हैं। मध्यक्रम में बल्लेबाजी के साथ उन्होंने टीम के नेतृत्व की जिम्मेदारी भी संभाली और अफगानिस्तान को विश्व क्रिकेट की बड़ी टीमों के खिलाफ कई यादगार मुकाबलों में आगे बढ़ाया। उनके कार्यकाल में अफगान टीम का वनडे प्रदर्शन काफी चर्चा में रहा। खासतौर पर बड़े ICC टूर्नामेंटों में अफगानिस्तान ने जिस तरह मजबूत टीमों को चुनौती दी, उससे टीम की पहचान केवल उलटफेर करने वाली टीम से आगे बढ़ी।</p>
<p>कप्तानी छोड़ने की जानकारी देते हुए शाहिदी ने अपने कार्यकाल को सम्मानजनक जिम्मेदारी बताया। उन्होंने कहा कि निजी परिस्थितियों के चलते उन्होंने यह पद छोड़ने का निर्णय लिया है। शाहिदी ने इस दौरान साथ निभाने वाले साथी खिलाड़ियों, कोचिंग स्टाफ और अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड के प्रति आभार जताया। उन्होंने संकेत दिया कि कप्तानी का अध्याय समाप्त होने के बावजूद खिलाड़ी के रूप में उनका सफर जारी रहेगा। वह अपनी बल्लेबाजी के जरिए टीम के लिए योगदान देते रहना चाहते हैं।</p>
<p><strong>Hashmatullah Shahidi Captaincy</strong> का सबसे चर्चित दौर 2023 वनडे वर्ल्ड कप के दौरान देखने को मिला। भारत में खेले गए इस टूर्नामेंट में अफगानिस्तान ने अपने प्रदर्शन से कई बड़ी टीमों को चौंका दिया था। टीम ने डिफेंडिंग चैंपियन इंग्लैंड को हराकर बड़ा उलटफेर किया। इसके बाद पाकिस्तान और श्रीलंका जैसी मजबूत एशियाई टीमों के खिलाफ भी जीत दर्ज की। नीदरलैंड्स को हराकर अफगानिस्तान ने टूर्नामेंट में अपनी स्थिति और मजबूत की थी।</p>
<p>2023 वर्ल्ड कप में अफगानिस्तान की टीम सेमीफाइनल तक नहीं पहुंच सकी, लेकिन उसके प्रदर्शन ने विश्व क्रिकेट का ध्यान जरूर खींचा। टीम ने नौ लीग मुकाबलों में चार जीत दर्ज की थीं और अंक तालिका में छठे स्थान पर रही थी। यह उसका तब तक का सबसे सफल वनडे वर्ल्ड कप अभियान था। शाहिदी ने कप्तानी के साथ मध्यक्रम में बल्लेबाजी की जिम्मेदारी भी संभाली। उनके शांत नेतृत्व और मैदान पर फैसलों को उस अभियान के दौरान काफी अहम माना गया।</p>
<p>उस वर्ल्ड कप में अफगानिस्तान ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भी जीत की स्थिति बना ली थी। मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खेले गए मुकाबले में अफगान गेंदबाजों ने ऑस्ट्रेलिया के सात विकेट 91 रन पर गिरा दिए थे। हालांकि ग्लेन मैक्सवेल की नाबाद दोहरी शतकीय पारी ने मुकाबले की तस्वीर बदल दी और ऑस्ट्रेलिया ने मैच जीत लिया। उस हार के बावजूद अफगानिस्तान ने दिखाया कि वह वनडे क्रिकेट की शीर्ष टीमों को लगातार चुनौती देने की क्षमता विकसित कर चुका है।</p>
<p>शाहिदी की कप्तानी में अफगानिस्तान ने 2025 की चैंपियंस ट्रॉफी में भी हिस्सा लिया। ICC के इस बड़े टूर्नामेंट के लिए क्वालिफाई करना अफगानिस्तान क्रिकेट के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि थी। टीम ने टूर्नामेंट में इंग्लैंड के खिलाफ यादगार जीत दर्ज की थी। अफगानिस्तान का प्रदर्शन पिछले कुछ वर्षों में लगातार बेहतर हुआ और वनडे फॉर्मेट में राशिद खान, रहमत शाह, इब्राहिम जादरान तथा अजमतुल्लाह उमरजई जैसे खिलाड़ियों के साथ शाहिदी टीम के अहम स्तंभ रहे।</p>
<p>शाहिदी की बल्लेबाजी का तरीका अफगानिस्तान के कई आक्रामक खिलाड़ियों से अलग रहा है। वह आमतौर पर पारी को संभालने और मध्यक्रम में टिककर खेलने की भूमिका निभाते हैं। टीम के शुरुआती विकेट जल्दी गिरने पर उनकी जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। कप्तानी करते हुए भी उन्होंने इसी भूमिका को जारी रखा। अब नेतृत्व की जिम्मेदारी हटने के बाद उनका पूरा ध्यान बल्लेबाजी पर रहने की संभावना है, हालांकि टीम में उनकी आगे की भूमिका चयन और टीम मैनेजमेंट की रणनीति पर निर्भर करेगी।</p>
<p>अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड के सामने अब सबसे बड़ा सवाल नए वनडे कप्तान के चयन का है। बोर्ड ने शाहिदी के स्थान पर किसी खिलाड़ी को स्थायी कप्तान बनाए जाने की घोषणा अभी नहीं की है। टीम में कई अनुभवी खिलाड़ी मौजूद हैं, लेकिन आधिकारिक फैसला आने तक किसी नाम को तय नहीं माना जा सकता। आने वाले वनडे कार्यक्रम को देखते हुए ACB को कप्तानी की तस्वीर साफ करनी होगी, ताकि नए कप्तान को टीम के साथ रणनीति तैयार करने के लिए पर्याप्त समय मिल सके।</p>
<p>अफगानिस्तान में अलग-अलग फॉर्मेट के लिए नेतृत्व की व्यवस्था पहले भी अलग रही है। ऐसे में वनडे कप्तानी को लेकर बोर्ड अनुभव, भविष्य की योजना और टीम संयोजन को ध्यान में रखते हुए फैसला कर सकता है। शाहिदी के हटने से वनडे टीम में नेतृत्व का एक महत्वपूर्ण स्थान खाली हुआ है। नए कप्तान के सामने उस प्रदर्शन को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी, जो अफगानिस्तान ने पिछले वनडे वर्ल्ड कप और अन्य द्विपक्षीय सीरीज में हासिल किया है।</p>
<p>शाहिदी के कप्तानी कार्यकाल में अफगानिस्तान ने सिर्फ बड़े टूर्नामेंटों में ही नहीं, बल्कि द्विपक्षीय वनडे सीरीज में भी अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश की। टीम की बल्लेबाजी पहले की तुलना में ज्यादा संतुलित हुई और स्पिन गेंदबाजी उसकी सबसे बड़ी ताकत बनी रही। राशिद खान और दूसरे गेंदबाजों के साथ बल्लेबाजी विभाग ने भी कई मौकों पर जिम्मेदारी संभाली। कप्तान के तौर पर शाहिदी को इन अलग-अलग विभागों के बीच संतुलन बनाने की जिम्मेदारी निभानी पड़ी।</p>
<p>अफगानिस्तान क्रिकेट के लिए 2023 वर्ल्ड कप का प्रदर्शन खास तौर पर बदलाव का संकेत माना गया था। इससे पहले टीम को बड़े टूर्नामेंटों में मुख्य रूप से अपनी स्पिन गेंदबाजी के लिए जाना जाता था, लेकिन भारत में हुए विश्व कप में बल्लेबाजों ने भी लंबी पारियां खेलीं। पाकिस्तान के खिलाफ लक्ष्य का सफल पीछा इसका बड़ा उदाहरण रहा। शाहिदी के नेतृत्व वाली टीम ने उस मुकाबले में दबाव के बावजूद संयम बनाए रखा और ऐतिहासिक जीत हासिल की।</p>
<p>अब कप्तानी से हटने के बाद शाहिदी टीम में एक वरिष्ठ बल्लेबाज की भूमिका निभाते दिखाई दे सकते हैं। लंबे समय तक कप्तान रहने के कारण उनके पास मैच की परिस्थितियों और विपक्षी रणनीति को समझने का अनुभव है। नया कप्तान चुने जाने के बाद भी टीम मैनेजमेंट को उनके अनुभव का फायदा मिल सकता है। हालांकि उन्होंने अपने फैसले के पीछे निजी कारण बताए हैं और इन कारणों के बारे में विस्तार से कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।</p>
<p>अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड की ओर से नए वनडे कप्तान के नाम का इंतजार किया जा रहा है। बोर्ड को आगामी अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम और अगले बड़े ICC आयोजनों को ध्यान में रखकर नेतृत्व का फैसला करना होगा। शाहिदी ने अपनी तरफ से यह स्पष्ट किया है कि कप्तानी छोड़ने का अर्थ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से अलग होना नहीं है। वह बल्लेबाज के रूप में टीम के लिए उपलब्ध रहेंगे और चयन होने पर अफगानिस्तान की ओर से मैदान पर उतरते दिखाई देंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Jul 2026 16:05:03 +0530</pubDate>
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                <title>भारत से T20 मुकाबलों के लिए जिम्बाब्वे का स्क्वॉड तय, सिकंदर रजा संभालेंगे कमान</title>
                                    <description><![CDATA[हरारे में 23 जुलाई से शुरू होगी तीन मैचों की सीरीज, मधेवेरे और न्यामहुरी की वापसी; युवा विकेटकीपर ताफदजवा त्सिगा को पहली बार T20I टीम में मिला मौका]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/zimbabwes-squad-decided-for-t20-matches-with-india-sikandar-raza/article-59495"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/india-vs-zimbabwe-t20.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">भारत के खिलाफ घरेलू मैदान पर होने वाली तीन मैचों की T20 इंटरनेशनल सीरीज के लिए जिम्बाब्वे ने अपनी 15 सदस्यीय टीम तय कर दी है। अनुभवी ऑलराउंडर सिकंदर रजा को कप्तानी की जिम्मेदारी दी गई है। सीरीज का पहला मुकाबला 23 जुलाई को खेला जाएगा। इसके बाद दोनों टीमें 25 जुलाई को दूसरे और 26 जुलाई को तीसरे T20 में आमने-सामने होंगी। तीनों मुकाबले हरारे स्पोर्ट्स क्लब में आयोजित किए जाएंगे।</p>
<p>भारत के खिलाफ उतरने वाली जिम्बाब्वे टीम में चयनकर्ताओं ने पुराने अनुभव के साथ कुछ नए विकल्पों पर भी भरोसा जताया है। ऑलराउंडर वेस्ली मधेवेरे की स्क्वॉड में वापसी हुई है, जबकि तेज गेंदबाज न्यूमैन न्यामहुरी को भी दोबारा मौका मिला है। सबसे ज्यादा ध्यान विकेटकीपर-बल्लेबाज ताफदजवा त्सिगा के चयन ने खींचा है। त्सिगा को पहली बार जिम्बाब्वे की T20 इंटरनेशनल टीम में शामिल किया गया है।</p>
<p>पिछली बांग्लादेश सीरीज की टीम से तुलना करें तो जिम्बाब्वे ने कुछ खिलाड़ियों को बाहर भी किया है। क्लाइव मडांडे, टिनोटेंड मापोसा और ताशिंगा मुसेकिवा भारत के खिलाफ होने वाली इस सीरीज के स्क्वॉड में शामिल नहीं हैं। उनकी जगह टीम मैनेजमेंट ने अलग संयोजन के साथ उतरने का फैसला किया है। तीन मैचों की छोटी सीरीज होने के कारण खिलाड़ियों के पास खुद को साबित करने के लिए ज्यादा समय नहीं होगा।</p>
<p>जिम्बाब्वे ने हाल के समय में अलग-अलग फॉर्मेट में उतार-चढ़ाव वाला प्रदर्शन किया है। बांग्लादेश के खिलाफ टेस्ट और वनडे मुकाबलों में टीम ने जीत दर्ज कर अपनी क्षमता दिखाई थी, हालांकि T20 सीरीज में उसे हार का सामना करना पड़ा। अब उसके सामने भारत की चुनौती है। घरेलू मैदान और परिचित परिस्थितियां मेजबान खिलाड़ियों के पक्ष में रह सकती हैं, लेकिन भारतीय टीम के खिलाफ उन्हें तीनों विभागों में बेहतर प्रदर्शन करना होगा।</p>
<p>सिकंदर रजा एक बार फिर जिम्बाब्वे की रणनीति के केंद्र में रहेंगे। वह टीम के सबसे अनुभवी खिलाड़ियों में शामिल हैं और बल्लेबाजी के साथ गेंदबाजी में भी योगदान देने की क्षमता रखते हैं। कप्तानी करते हुए मध्यक्रम को संभालने की बड़ी जिम्मेदारी भी उनके कंधों पर होगी। दबाव के समय मैच की दिशा बदलने की उनकी क्षमता को देखते हुए टीम मैनेजमेंट को इस सीरीज में उनसे काफी उम्मीदें रहेंगी।</p>
<p>बल्लेबाजी और ऑलराउंड विभाग में जिम्बाब्वे ने कई विकल्प रखे हैं। ब्रायन बेनेट, रयान बर्ल, बेन करन, ब्रैड इवांस, वेस्ली मधेवेरे, तदिवानाशे मारुमानी, डियोन मायर्स और मिल्टन शुम्बा को 15 सदस्यीय दल में जगह मिली है। इनमें कई खिलाड़ी बल्लेबाजी के अलावा गेंद से भी योगदान दे सकते हैं। इससे कप्तान सिकंदर रजा के पास परिस्थितियों के हिसाब से प्लेइंग इलेवन तैयार करने के विकल्प बढ़ेंगे।</p>
<p>वेस्ली मधेवेरे की वापसी जिम्बाब्वे के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। वह बल्लेबाजी के साथ जरूरत पड़ने पर गेंदबाजी का विकल्प भी उपलब्ध कराते हैं। T20 क्रिकेट में ऐसे खिलाड़ियों की भूमिका काफी अहम होती है, जो एक से अधिक विभागों में टीम के काम आ सकें। भारत के खिलाफ सीरीज में मधेवेरे को मौका मिलता है तो उनके प्रदर्शन पर नजर रहेगी। खासतौर पर मध्यक्रम में उनसे तेजी से रन बनाने की उम्मीद की जा सकती है।</p>
<p>विकेटकीपिंग विभाग में इस बार ताफदजवा त्सिगा को मौका देकर चयनकर्ताओं ने नया विकल्प चुना है। पहली बार T20I स्क्वॉड में शामिल किए गए त्सिगा के लिए भारत जैसी टीम के खिलाफ सीरीज बड़ा अवसर हो सकती है। अगर उन्हें प्लेइंग इलेवन में जगह मिलती है तो बल्लेबाजी के साथ विकेट के पीछे भी उनकी परीक्षा होगी। युवा खिलाड़ी के लिए घरेलू दर्शकों के सामने इंटरनेशनल स्तर पर अपनी पहचान बनाने का यह अहम मौका रहेगा।</p>
<p>तेज गेंदबाजी में ब्लेसिंग मुजारबानी और रिचर्ड नगरवा पर मेजबान टीम की बड़ी जिम्मेदारी रहेगी। दोनों गेंदबाज अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का अच्छा अनुभव रखते हैं और नई गेंद से विपक्षी बल्लेबाजों को परेशान करने की क्षमता रखते हैं। भारतीय बल्लेबाजी क्रम के सामने शुरुआती ओवरों में विकेट निकालना जिम्बाब्वे की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है। डेथ ओवर्स में भी इन अनुभवी गेंदबाजों की भूमिका अहम रहने वाली है।</p>
<p>न्यूमैन न्यामहुरी की वापसी से तेज गेंदबाजी विभाग में एक और विकल्प जुड़ गया है। उनके साथ तनाका चिवांगा भी स्क्वॉड का हिस्सा हैं। स्पिन विभाग में वेलिंग्टन मसाकाद्जा को जगह दी गई है। हरारे की पिच और मैच के दिन की परिस्थितियों को देखकर टीम मैनेजमेंट गेंदबाजी संयोजन तय कर सकता है। लगातार एक ही मैदान पर तीन मुकाबले होने के कारण दोनों टीमें परिस्थितियों को जल्दी समझने की कोशिश करेंगी।</p>
<p>भारत के खिलाफ यह सीरीज जिम्बाब्वे के कई युवा खिलाड़ियों के लिए खुद को साबित करने का मौका भी होगी। बड़ी टीमों के खिलाफ घरेलू मैदान पर अच्छा प्रदर्शन खिलाड़ियों का आत्मविश्वास बढ़ा सकता है। चयनकर्ताओं ने स्क्वॉड में ऐसे खिलाड़ियों को रखा है जो बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों में विकल्प दे सकते हैं। हालांकि अंतिम प्लेइंग इलेवन में किन खिलाड़ियों को जगह मिलेगी, यह मैच की परिस्थितियों और टीम की रणनीति पर निर्भर करेगा।</p>
<p>तीन मैचों का कार्यक्रम भी काफी व्यस्त रहने वाला है। पहला T20 23 जुलाई को खेलने के बाद दोनों टीमों को एक दिन का अंतर मिलेगा और दूसरा मैच 25 जुलाई को होगा। इसके ठीक अगले दिन 26 जुलाई को तीसरा और आखिरी मुकाबला खेला जाएगा। आखिरी दोनों मैच लगातार दिनों में होने के कारण खिलाड़ियों की फिटनेस और गेंदबाजों के वर्कलोड को संभालना टीम मैनेजमेंट के लिए अहम रहेगा।</p>
<p>हरारे स्पोर्ट्स क्लब में पूरी सीरीज आयोजित होने से जिम्बाब्वे को बार-बार यात्रा नहीं करनी पड़ेगी। मेजबान टीम को मैदान, पिच और स्थानीय मौसम की जानकारी का भी फायदा मिलेगा। दूसरी ओर भारतीय टीम परिस्थितियों के मुताबिक खुद को जल्दी ढालने की कोशिश करेगी। सीरीज के शुरुआती मुकाबले का नतीजा आगे की रणनीति पर असर डाल सकता है, क्योंकि तीन मैचों की सीरीज में वापसी के लिए ज्यादा मुकाबले उपलब्ध नहीं रहते।</p>
<p>जिम्बाब्वे की घोषित 15 सदस्यीय टीम में सिकंदर रजा कप्तान होंगे। उनके साथ ब्रायन बेनेट, रयान बर्ल, बेन करन, ब्रैड इवांस, वेस्ली मधेवेरे, तदिवानाशे मारुमानी, डियोन मायर्स और मिल्टन शुम्बा शामिल हैं। विकेटकीपर के तौर पर ताफदजवा त्सिगा को जगह मिली है। गेंदबाजी विभाग में वेलिंग्टन मसाकाद्जा, ब्लेसिंग मुजारबानी, रिचर्ड नगरवा, न्यूमैन न्यामहुरी और तनाका चिवांगा को चुना गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Jul 2026 16:04:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Priyanka ]]></dc:creator>
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                <title>IPL-2009 FEMA केस में ललित मोदी को राहत, ट्रिब्यूनल ने हटाया ED का जुर्माना</title>
                                    <description><![CDATA[दक्षिण अफ्रीका में IPL कराने के लिए विदेशी भुगतान से जुड़ा था 16 साल पुराना मामला, ट्रिब्यूनल ने कहा- FEMA अनुपालन की जिम्मेदारी ललित मोदी पर साबित नहीं हुई]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/relief-to-lalit-modi-in-ipl-2009-fema-case-tribunal-removes/article-59492"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/lalit-modi-case.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">IPL के पूर्व चेयरमैन ललित मोदी को 2009 में दक्षिण अफ्रीका में हुए इंडियन प्रीमियर लीग के दूसरे सीजन से जुड़े FEMA मामले में बड़ी कानूनी राहत मिली है। SAFEMA के तहत अपीलेट ट्रिब्यूनल ने प्रवर्तन निदेशालय यानी ED की ओर से उन पर लगाया गया जुर्माना रद्द कर दिया है। यह विवाद उस विदेशी भुगतान से जुड़ा था, जो IPL-2009 को भारत के बजाय दक्षिण अफ्रीका में आयोजित करने के दौरान किया गया था। ED ने आरोप लगाया था कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी BCCI की ओर से टूर्नामेंट के आयोजन से जुड़े भुगतान भारतीय रिजर्व बैंक की जरूरी अनुमति के बिना विदेश भेजे गए और इसमें विदेशी मुद्रा प्रबंधन कानून के प्रावधानों का उल्लंघन हुआ।</p>
<p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">करीब 16 साल से अलग-अलग कानूनी प्रक्रियाओं से गुजर रहे इस मामले में ट्रिब्यूनल ने ललित मोदी की व्यक्तिगत जिम्मेदारी को लेकर ED के निष्कर्ष को स्वीकार नहीं किया। उपलब्ध फैसले की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रिब्यूनल ने माना कि रिकॉर्ड पर ऐसा पर्याप्त आधार नहीं है जिससे यह साबित हो कि BCCI की ओर से FEMA नियमों का पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी ललित मोदी के पास थी या उन्हें उस तरह की वित्तीय शक्तियां दी गई थीं, जैसा आरोप लगाया गया था। ट्रिब्यूनल ने संबंधित विदेशी भुगतान की प्रकृति को लेकर भी ED के रुख से अलग निष्कर्ष निकाला और इन्हें करंट अकाउंट ट्रांजैक्शन माना। इसी आधार पर ललित मोदी पर लगाई गई पेनल्टी को हटाने का आदेश दिया गया। यह फैसला 16 जुलाई को सुनाया गया। मामले में BCCI के तत्कालीन अन्य पदाधिकारियों की अपीलों पर भी ट्रिब्यूनल ने राहत दी है या जुर्माने में बदलाव किया है।</p>
<p>मामले की जड़ 2009 के उस IPL सीजन में है, जब भारत में लोकसभा चुनाव और टूर्नामेंट की तारीखें एक ही समय के आसपास पड़ने के कारण सुरक्षा व्यवस्था बड़ी चुनौती बन गई थी। इसके बाद IPL का दूसरा संस्करण बेहद कम समय में दक्षिण अफ्रीका स्थानांतरित किया गया। पूरा टूर्नामेंट वहीं आयोजित हुआ। इसी आयोजन के दौरान हुए विदेशी मुद्रा लेनदेन बाद में ED की जांच के दायरे में आए। आरोप था कि BCCI ने दक्षिण अफ्रीका में टूर्नामेंट आयोजित करने के सिलसिले में लगभग 4.98 करोड़ अमेरिकी डॉलर के बराबर रकम विदेश भेजी और इसके लिए FEMA के तहत आवश्यक प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। उस समय भारतीय मुद्रा में इस रकम का मूल्य 243 करोड़ रुपए से अधिक बताया गया था।</p>
<p>ED ने जांच के बाद 2011 में कारण बताओ नोटिस जारी किए और लंबी प्रक्रिया के बाद मई 2018 में BCCI तथा उससे जुड़े तत्कालीन अधिकारियों पर पेनल्टी लगाई। उस आदेश में BCCI पर 82.66 करोड़ रुपए, तत्कालीन पदाधिकारी एन. श्रीनिवासन पर 11.53 करोड़ रुपए और ललित मोदी पर 10.65 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया गया था। एमपी पांडोव और स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर पर भी अलग-अलग पेनल्टी लगाई गई थी। इन आदेशों को बाद में अपीलेट ट्रिब्यूनल के सामने चुनौती दी गई। ललित मोदी की ओर से पूरे मामले में लगातार यह पक्ष रखा गया कि विदेशी मुद्रा नियमों के अनुपालन की व्यक्तिगत जिम्मेदारी उन पर नहीं डाली जा सकती और BCCI में वित्तीय निर्णय लेने की व्यवस्था अलग थी। अब <strong>Lalit Modi FEMA Case</strong> में ट्रिब्यूनल का फैसला इसी सवाल पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>
<p>रिपोर्ट के मुताबिक ट्रिब्यूनल ने पाया कि ललित मोदी को BCCI के वित्तीय मामलों के लिए उस तरह जिम्मेदार साबित करने के पर्याप्त साक्ष्य नहीं थे, जिनके आधार पर उनके खिलाफ व्यक्तिगत पेनल्टी कायम रखी जा सके। ट्रिब्यूनल ने ED के उस आधार पर भी सवाल उठाया जिस पर संबंधित विदेशी भुगतान को FEMA उल्लंघन माना गया था। फैसले में इन रेमिटेंस को कैपिटल अकाउंट के बजाय करंट अकाउंट ट्रांजैक्शन माना गया है। यही वर्गीकरण मामले में अहम रहा, क्योंकि दोनों तरह के लेनदेन पर विदेशी मुद्रा नियमों की प्रकृति अलग होती है। अपीलेट ट्रिब्यूनल आधिकारिक रूप से FEMA के तहत पेनल्टी लगाने वाले आदेशों के खिलाफ अपील भी सुनता है।</p>
<p>इस मामले में एक दिलचस्प कानूनी मोड़ करीब एक साल पहले भी आया था। जून 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने ललित मोदी की वह याचिका खारिज कर दी थी जिसमें उन्होंने BCCI को उनके ऊपर लगाए गए 10.65 करोड़ रुपए के FEMA जुर्माने की भरपाई करने का निर्देश देने की मांग की थी। उस समय मूल पेनल्टी के खिलाफ उनकी अपील अलग से अपीलेट ट्रिब्यूनल में लंबित थी। सुप्रीम कोर्ट का मामला इस सवाल से जुड़ा था कि जुर्माने की आर्थिक जिम्मेदारी BCCI उठाए या नहीं, जबकि अब आया ट्रिब्यूनल का फैसला मूल FEMA पेनल्टी की वैधता से संबंधित है।</p>
<p>ट्रिब्यूनल से राहत मिलने के बाद ललित मोदी ने अपने पक्ष को सही ठहराते हुए कहा कि उन्होंने भारतीय क्रिकेट और IPL के हित में काम किया तथा व्यक्तिगत तौर पर कोई गलत काम नहीं किया। उनका कहना है कि आरोपों का फैसला कानून और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होना चाहिए। 2009 का IPL भारतीय क्रिकेट के इतिहास में असामान्य परिस्थितियों में आयोजित हुआ था। चुनाव के कारण सुरक्षा उपलब्ध कराने में कठिनाई सामने आने के बाद पूरा टूर्नामेंट दक्षिण अफ्रीका ले जाने का निर्णय हुआ और कम समय में वहां मैचों की व्यवस्था की गई। उस सीजन का खिताब डेक्कन चार्जर्स ने जीता था।</p>
<p>फाइनल में उसने रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु को छह रन से हराया था। टूर्नामेंट सफलतापूर्वक पूरा होने के बाद इसके आयोजन से जुड़े विदेशी भुगतान जांच के घेरे में आए और मामला कई वर्षों तक चलता रहा। ED के 2018 के आदेश के खिलाफ संबंधित पक्षों ने अपील की थी। अब अपीलेट ट्रिब्यूनल ने ललित मोदी के मामले में उनकी व्यक्तिगत जवाबदेही साबित नहीं होने और लेनदेन की प्रकृति से जुड़े निष्कर्षों के आधार पर पेनल्टी हटाई है। ट्रिब्यूनल के फैसले की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि केवल IPL चेयरमैन की भूमिका में होने से ललित मोदी को BCCI के FEMA अनुपालन के लिए स्वतः जिम्मेदार नहीं माना जा सकता, जब तक उनकी जिम्मेदारी और वित्तीय अधिकारों को पर्याप्त साक्ष्यों से स्थापित न किया जाए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Jul 2026 15:18:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Priyanka ]]></dc:creator>
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                <title>कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले भारतीय बॉक्सिंग टीम की बढ़ी परेशानी, बेलफास्ट में छूटा सामान</title>
                                    <description><![CDATA[ग्लासगो पहुंची भारतीय मुक्केबाजी टीम के कई बैग नहीं पहुंचे साथ, ट्रेनिंग किट से लेकर ओपनिंग सेरेमनी की ड्रेस तक सामान में शामिल]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/indian-boxing-teams-problems-increase-before-commonwealth-games-luggage-left/article-59458"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/indian-boxing-team.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 शुरू होने से ठीक पहले भारतीय मुक्केबाजी दल को ऐसी परेशानी का सामना करना पड़ा है, जिसका असर खिलाड़ियों की अंतिम तैयारियों पर पड़ सकता है। बेलफास्ट में अपना प्री-गेम्स ट्रेनिंग कैंप पूरा करने के बाद ग्लासगो पहुंची 22 सदस्यीय भारतीय बॉक्सिंग टीम का काफी सामान उसके साथ नहीं पहुंच सका। जानकारी के मुताबिक दल के कई बैग बेलफास्ट एयरपोर्ट पर ही रह गए। इन बैगों में सिर्फ खिलाड़ियों का निजी सामान नहीं, बल्कि बॉक्सिंग की ट्रेनिंग में इस्तेमाल होने वाली जरूरी किट और कॉमनवेल्थ गेम्स की ओपनिंग सेरेमनी के लिए रखी गई आधिकारिक पोशाकें भी शामिल बताई जा रही हैं। भारतीय दल जब ग्लासगो पहुंचा और सामान की जांच की गई, तब कई बैग गायब होने की जानकारी सामने आई। इसके बाद संबंधित एयरलाइन और आयोजन से जुड़े अधिकारियों के स्तर पर सामान को तलाशने और जल्द से जल्द ग्लासगो पहुंचाने की कोशिश शुरू की गई। कॉमनवेल्थ गेम्स का आयोजन 23 जुलाई से 2 अगस्त तक स्कॉटलैंड के ग्लासगो में होना है। ऐसे में प्रतियोगिता शुरू होने के बेहद करीब इस तरह की लॉजिस्टिक परेशानी ने टीम प्रबंधन की चिंता बढ़ा दी है। मुक्केबाजों के लिए प्रतियोगिता से पहले के आखिरी दिन काफी अहम होते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">इसी दौरान खिलाड़ी अपनी तकनीक, फिटनेस, वजन और मुकाबले की रणनीति पर अंतिम काम करते हैं। ट्रेनिंग से जुड़ा सामान समय पर उपलब्ध नहीं होने से अभ्यास कार्यक्रम प्रभावित हो सकता है, हालांकि टीम प्रबंधन वैकल्पिक व्यवस्था करने की कोशिश में जुटा है। भारतीय मुक्केबाजी दल कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारी के लिए उत्तरी आयरलैंड के बेलफास्ट में ट्रेनिंग कर रहा था। कैंप खत्म होने के बाद टीम को ग्लासगो पहुंचना था, लेकिन यात्रा के दौरान बैगेज से जुड़ी समस्या सामने आ गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार टीम के कुल सामान का बड़ा हिस्सा समय पर गंतव्य तक नहीं पहुंचा। इनमें ग्लव्स और अभ्यास से जुड़ी दूसरी जरूरी सामग्री होने की बात सामने आई है। प्रतियोगिता के ठीक पहले खिलाड़ी आम तौर पर अपने व्यक्तिगत ट्रेनिंग गियर के साथ अभ्यास करना पसंद करते हैं, क्योंकि वे लंबे समय से उसी उपकरण के साथ तैयारी कर रहे होते हैं। यही कारण है कि सामान मिलने में ज्यादा देरी हुई तो खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ को अस्थायी विकल्प तलाशने पड़ सकते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">मामला केवल <strong>Indian Boxing Team</strong> की ट्रेनिंग किट तक सीमित नहीं है। गायब बैगों में ओपनिंग सेरेमनी के लिए तैयार आधिकारिक और सेरेमोनियल ड्रेस भी बताई जा रही हैं। गुरुवार को प्रस्तावित उद्घाटन समारोह में अलग-अलग देशों के खिलाड़ी अपने आधिकारिक दल की पोशाक में हिस्सा लेते हैं। भारतीय दल के लिए भी निर्धारित ड्रेस तैयार की गई है, लेकिन मुक्केबाजी टीम से जुड़े कुछ खिलाड़ियों का यह सामान बैग के साथ बेलफास्ट में रह जाने की जानकारी सामने आई। समय कम होने के कारण इसे ग्लासगो तक पहुंचाना फिलहाल प्राथमिकता बनी हुई है। सामान किस वजह से विमान में लोड नहीं हो सका, इसकी पूरी तस्वीर तत्काल साफ नहीं हुई है। एयर ट्रैवल में कभी-कभी कनेक्टिंग यात्रा, बैगेज हैंडलिंग या लोडिंग से जुड़ी गड़बड़ी के कारण सामान पीछे छूट जाता है। यहां मुश्किल यह है कि घटना किसी सामान्य यात्रा के दौरान नहीं, बल्कि बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजन से ठीक पहले हुई है। भारतीय खिलाड़ी पहले ही लंबी तैयारी और ट्रेनिंग कैंप के बाद ग्लासगो पहुंचे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">अब उन्हें प्रतियोगिता स्थल के माहौल के हिसाब से खुद को ढालना है और मुकाबलों से पहले अंतिम अभ्यास करना है। ऐसे में टीम मैनेजमेंट नहीं चाहता कि बैगेज की परेशानी खिलाड़ियों के फोकस को प्रभावित करे। संबंधित अधिकारियों से लगातार संपर्क बनाए जाने की जानकारी है ताकि छूटा सामान जल्द से जल्द टीम तक पहुंच सके। जरूरत पड़ने पर खिलाड़ियों के लिए स्थानीय स्तर पर अभ्यास उपकरण उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की जा सकती है। कॉमनवेल्थ गेम्स में बॉक्सिंग भारत के लिए महत्वपूर्ण खेलों में शामिल रही है। भारतीय मुक्केबाजों ने पिछले संस्करणों में कई पदक जीते हैं और इस बार भी टीम से अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है। इसी कारण प्रतियोगिता से पहले होने वाली हर छोटी-बड़ी तैयारी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बॉक्सर आमतौर पर मुकाबले से पहले नियंत्रित ट्रेनिंग करते हैं। इसमें पैड वर्क, हल्की स्पैरिंग, फिटनेस ड्रिल और वजन को तय सीमा में रखने पर विशेष ध्यान दिया जाता है। व्यक्तिगत ग्लव्स और दूसरे उपकरण खिलाड़ियों की नियमित तैयारी का हिस्सा होते हैं। अचानक उपकरण उपलब्ध न होने पर अभ्यास का तरीका बदलना पड़ सकता है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय स्तर की टीमों के पास ऐसी परिस्थितियों के लिए बैकअप व्यवस्था रहती है, फिर भी इतने बड़े दल का सामान एक साथ पीछे छूटना सामान्य स्थिति नहीं मानी जा रही।</p>
<p>ग्लासगो दूसरी बार कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी कर रहा है। इससे पहले 2014 में भी यहां खेलों का आयोजन हुआ था। इस बार 23 जुलाई से प्रतियोगिताएं शुरू होने जा रही हैं और 2 अगस्त तक विभिन्न खेलों में मुकाबले खेले जाएंगे। दुनियाभर के कॉमनवेल्थ देशों के खिलाड़ी ग्लासगो पहुंच चुके हैं या पहुंचने की प्रक्रिया में हैं। भारतीय दल भी अलग-अलग खेलों में अपनी तैयारियों को अंतिम रूप दे रहा है। इसी बीच बॉक्सिंग टीम के बैगेज का मामला सामने आने से शुरुआती तैयारियों में अतिरिक्त चुनौती जुड़ गई। बेलफास्ट में भारतीय मुक्केबाजों का कैंप इसी उद्देश्य से लगाया गया था कि खिलाड़ी ब्रिटेन के मौसम और स्थानीय परिस्थितियों के साथ तालमेल बैठा सकें। वहां ट्रेनिंग पूरी करने के बाद ग्लासगो तक की यात्रा अपेक्षाकृत छोटी थी, इसलिए टीम को उम्मीद थी कि वह समय रहते गेम्स विलेज पहुंचकर नियमित कार्यक्रम शुरू कर देगी। सामान पीछे छूटने की जानकारी मिलने के बाद खिलाड़ियों के जरूरी उपकरणों की सूची तैयार किए जाने और संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय की बात सामने आई है। सबसे ज्यादा जल्दी उन वस्तुओं को लेकर है जिनकी तत्काल जरूरत है। उद्घाटन समारोह की पोशाक के लिए भी समय बेहद कम है। यदि मूल बैग समय पर नहीं पहुंचते हैं तो वैकल्पिक पोशाक उपलब्ध कराने की जरूरत पड़ सकती है। हालांकि अधिकारियों की पहली कोशिश यही है कि बेलफास्ट में मौजूद बैगेज को अगली उपलब्ध फ्लाइट या दूसरे तेज माध्यम से ग्लासगो भेज दिया जाए।</p>
<p>खिलाड़ियों को फिलहाल प्रतियोगिता की तैयारी पर ध्यान रखने को कहा गया है। बॉक्सिंग मुकाबलों का कार्यक्रम अलग-अलग भार वर्गों के अनुसार तय है और प्रत्येक खिलाड़ी के लिए वजन जांच भी अहम प्रक्रिया होती है। ऐसे में टीम का सपोर्ट स्टाफ खिलाड़ियों की दिनचर्या को सामान्य बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। सामान कब तक ग्लासगो पहुंचेगा, इस पर संबंधित एयरलाइन और टीम अधिकारियों के बीच संपर्क जारी है। ओपनिंग सेरेमनी बेहद करीब होने के कारण सेरेमोनियल ड्रेस वाले बैगों को भी प्राथमिकता के आधार पर तलाशा जा रहा है, जबकि ट्रेनिंग उपकरणों की जरूरत खिलाड़ियों के अभ्यास सत्र शुरू होते ही पड़ने वाली है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Jul 2026 11:50:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Priyanka ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>दलीप ट्रॉफी के लिए वेस्ट जोन का स्क्वॉड घोषित, ऋतुराज गायकवाड़ संभालेंगे कमान</title>
                                    <description><![CDATA[शम्स मुलानी को मिली उपकप्तानी, पृथ्वी शॉ और सरफराज खान समेत कई बड़े नाम टीम में; 23 अगस्त से बेंगलुरु में शुरू होगा टूर्नामेंट]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/west-zone-squad-announced-for-duleep-trophy-ruturaj-gaikwad-will/article-59386"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/duleep-trophy-2026.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">घरेलू क्रिकेट के बड़े टूर्नामेंट दलीप ट्रॉफी 2026 के लिए वेस्ट जोन ने अपनी 15 सदस्यीय टीम घोषित कर दी है। महाराष्ट्र के बल्लेबाज ऋतुराज गायकवाड़ को टीम की कप्तानी सौंपी गई है, जबकि मुंबई के स्पिन ऑलराउंडर शम्स मुलानी उपकप्तान की जिम्मेदारी संभालेंगे। स्क्वॉड में घरेलू क्रिकेट के कई अनुभवी और चर्चित खिलाड़ियों को जगह मिली है। शार्दुल ठाकुर, सरफराज खान, पृथ्वी शॉ, मुशीर खान और तनुश कोटियान जैसे खिलाड़ी भी वेस्ट जोन की ओर से मैदान पर उतरते दिखाई देंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd">दलीप ट्रॉफी का नया सीजन 23 अगस्त से शुरू होगा और मुकाबले 10 सितंबर तक खेले जाएंगे। टूर्नामेंट का आयोजन बेंगलुरु स्थित BCCI सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में किया जाएगा। घरेलू सीजन के लिहाज से यह टूर्नामेंट खिलाड़ियों के लिए काफी महत्वपूर्ण रहेगा। यहां अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों के पास आगे राष्ट्रीय चयनकर्ताओं का ध्यान खींचने का मौका होगा। खासकर उन क्रिकेटरों के लिए यह बड़ा मंच है जो टीम इंडिया में जगह बनाने या वापसी की कोशिश कर रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">ऋतुराज गायकवाड़ को कप्तानी मिलने के साथ बल्लेबाजी में भी बड़ी जिम्मेदारी दी जाएगी। सीमित ओवर क्रिकेट में आमतौर पर पारी की शुरुआत करने वाले ऋतुराज दलीप ट्रॉफी में मध्यक्रम में खेलते नजर आ सकते हैं। टीम संयोजन को देखते हुए उनकी बल्लेबाजी की भूमिका में यह बदलाव महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लंबे प्रारूप में वह पहले भी अलग-अलग क्रम पर बल्लेबाजी कर चुके हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">गायकवाड़ के पास घरेलू क्रिकेट का अच्छा अनुभव है। तकनीकी रूप से मजबूत बल्लेबाज माने जाने वाले ऋतुराज नई और पुरानी दोनों गेंद के खिलाफ लंबी पारी खेलने की क्षमता रखते हैं। सफेद गेंद क्रिकेट में उनकी पहचान आक्रामक बल्लेबाज की रही है, लेकिन फर्स्ट क्लास क्रिकेट में वह परिस्थितियों के अनुसार अपनी बल्लेबाजी की गति बदल सकते हैं। कप्तान के तौर पर उनसे बल्लेबाजी के साथ टीम को मैदान पर संभालने की भी उम्मीद रहेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">वेस्ट जोन के पास बल्लेबाजी में कई मजबूत विकल्प मौजूद हैं। सबसे ज्यादा नजर पृथ्वी शॉ पर रहेगी, जिन्होंने घरेलू क्रिकेट में अपने प्रदर्शन से फिर चर्चा बटोरी है। मुंबई से अलग होकर महाराष्ट्र के लिए खेलने का फैसला करने वाले पृथ्वी को रणजी ट्रॉफी 2025-26 में किए गए प्रदर्शन का फायदा मिला है। उन्हें वेस्ट जोन की 15 सदस्यीय टीम में शामिल किया गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">पृथ्वी शॉ ने पिछले रणजी सीजन में 537 रन बनाए थे। इस दौरान उनकी सबसे चर्चित पारी चंडीगढ़ के खिलाफ आई, जब उन्होंने सिर्फ 156 गेंदों पर 222 रन ठोक दिए। इस दोहरे शतक में उनका पुराना आक्रामक अंदाज देखने को मिला। तेज गति से रन बनाने की उनकी क्षमता लंबे प्रारूप में भी विपक्षी टीम को जल्दी बैकफुट पर धकेल सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd">पृथ्वी के लिए दलीप ट्रॉफी का यह सीजन काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक समय भारतीय टेस्ट टीम का हिस्सा रह चुके पृथ्वी पिछले कुछ वर्षों से इंटरनेशनल क्रिकेट से बाहर हैं। घरेलू क्रिकेट में प्रदर्शन और फिटनेस को लेकर भी वह लगातार चर्चा में रहे। महाराष्ट्र की ओर से रन बनाने के बाद अब उनके पास वेस्ट जोन के लिए मजबूत प्रदर्शन कर अपनी दावेदारी आगे बढ़ाने का मौका होगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">पृथ्वी शॉ और ऋतुराज गायकवाड़ के अलावा सरफराज खान टीम की बल्लेबाजी को मजबूती देंगे। घरेलू फर्स्ट क्लास क्रिकेट में लगातार बड़े स्कोर बनाने वाले सरफराज मध्यक्रम के अहम बल्लेबाज माने जाते हैं। लंबी पारी खेलने और स्पिन गेंदबाजी के खिलाफ तेजी से रन बनाने की उनकी क्षमता वेस्ट जोन के लिए उपयोगी साबित हो सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd">सरफराज पिछले कई घरेलू सीजन में मुंबई के लिए बड़ी पारियां खेल चुके हैं। दलीप ट्रॉफी जैसे मल्टी-डे टूर्नामेंट में उनका अनुभव टीम के काम आ सकता है। अगर शुरुआती विकेट जल्दी गिरते हैं तो मध्यक्रम को संभालने की जिम्मेदारी ऋतुराज और सरफराज जैसे बल्लेबाजों पर होगी। दोनों के पास पारी को संभालने के साथ जरूरत पड़ने पर तेजी से रन बनाने की क्षमता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">युवा बल्लेबाज मुशीर खान को भी 15 सदस्यीय स्क्वॉड में जगह दी गई है। मुशीर ने कम उम्र में घरेलू क्रिकेट में अपनी बल्लेबाजी से पहचान बनाई है। वह बल्लेबाजी के साथ उपयोगी स्पिन गेंदबाजी भी कर सकते हैं। उनकी ऑलराउंड क्षमता टीम मैनेजमेंट को प्लेइंग इलेवन तैयार करते समय अतिरिक्त विकल्प दे सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd">वेस्ट जोन की टीम में अनुभवी ऑलराउंडर शार्दुल ठाकुर की मौजूदगी भी महत्वपूर्ण होगी। शार्दुल गेंदबाजी के साथ निचले क्रम में उपयोगी बल्लेबाजी करने के लिए जाने जाते हैं। लंबे प्रारूप में वह कई बार मुश्किल परिस्थितियों में महत्वपूर्ण साझेदारियां कर चुके हैं। तेज गेंदबाज के रूप में नई गेंद और पुरानी गेंद दोनों से विकेट निकालने की क्षमता उन्हें टीम का अहम सदस्य बनाती है।</p>
<p class="isSelectedEnd">शार्दुल के अनुभव का फायदा युवा गेंदबाजों को भी मिल सकता है। घरेलू क्रिकेट के अलावा वह भारत के लिए टेस्ट क्रिकेट खेल चुके हैं और विदेशों में भी महत्वपूर्ण प्रदर्शन कर चुके हैं। लंबे टूर्नामेंट में कप्तान के पास ऐसा गेंदबाज होना उपयोगी रहता है जो लंबे स्पेल डालने के साथ जरूरत के समय विकेट निकाल सके।</p>
<p class="isSelectedEnd">स्पिन विभाग में शम्स मुलानी की भूमिका सबसे अहम रहने वाली है। उन्हें टीम का उपकप्तान भी बनाया गया है। मुंबई के लिए घरेलू क्रिकेट में मुलानी लगातार गेंद और बल्ले दोनों से योगदान देते रहे हैं। बाएं हाथ की स्पिन गेंदबाजी के साथ वह निचले मध्यक्रम में रन बनाने की क्षमता रखते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">मुलानी लंबे स्पेल डालने वाले गेंदबाज हैं और फर्स्ट क्लास क्रिकेट में उनका इस्तेमाल अक्सर विपक्षी बल्लेबाजों पर लगातार दबाव बनाने के लिए किया जाता है। बेंगलुरु की पिचों पर मैच आगे बढ़ने के साथ स्पिनरों को मदद मिलती है तो उनकी भूमिका और बड़ी हो सकती है। कप्तान ऋतुराज के लिए मुलानी गेंदबाजी में प्रमुख विकल्पों में रहेंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd">तनुश कोटियान को भी टीम में शामिल किया गया है। वह पिछले कुछ समय में घरेलू क्रिकेट में ऑलराउंड प्रदर्शन के कारण चर्चा में रहे हैं। ऑफ स्पिन गेंदबाजी के साथ निचले क्रम में उनकी बल्लेबाजी कई बार टीम के लिए उपयोगी साबित हुई है। लंबे प्रारूप में ऐसे खिलाड़ी टीम का संतुलन बेहतर करते हैं जो दो विभागों में योगदान दे सकें।</p>
<p class="isSelectedEnd">मुलानी और कोटियान की मौजूदगी वेस्ट जोन को स्पिन गेंदबाजी के साथ बल्लेबाजी में गहराई देती है। अगर टीम दोनों को प्लेइंग इलेवन में शामिल करती है तो निचला क्रम मजबूत हो सकता है। साथ ही कप्तान के पास दो अलग तरह के स्पिन विकल्प उपलब्ध रहेंगे। मैच की पिच और विपक्षी बल्लेबाजी के अनुसार टीम संयोजन तय किया जा सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस स्क्वॉड में 19 वर्षीय आयुष म्हात्रे का नाम नहीं है। चोट के कारण वह चयन के लिए उपलब्ध नहीं हो सके। युवा बल्लेबाज ने घरेलू स्तर पर अपने प्रदर्शन से तेजी से पहचान बनाई है और उन्हें वेस्ट जोन टीम में जगह का दावेदार माना जा रहा था। फिटनेस की समस्या के चलते वह इस बार दलीप ट्रॉफी का हिस्सा नहीं बन पाएंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd">आयुष की गैरमौजूदगी के बावजूद वेस्ट जोन का बल्लेबाजी क्रम काफी मजबूत नजर आता है। टीम के पास अनुभव और युवा प्रतिभा का मिश्रण मौजूद है। ऋतुराज गायकवाड़, पृथ्वी शॉ और सरफराज खान जैसे स्थापित बल्लेबाज हैं, वहीं मुशीर खान जैसे युवा खिलाड़ी भी अपनी जगह बनाने की कोशिश करेंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd">दलीप ट्रॉफी भारतीय घरेलू क्रिकेट के सबसे महत्वपूर्ण रेड-बॉल टूर्नामेंट में शामिल है। यहां अलग-अलग जोन की टीमों में देश के बेहतरीन घरेलू खिलाड़ी एक-दूसरे के खिलाफ उतरते हैं। रणजी ट्रॉफी में अच्छा प्रदर्शन करने वाले क्रिकेटरों को इस टूर्नामेंट में मजबूत प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है। यही वजह है कि चयनकर्ता भी दलीप ट्रॉफी के प्रदर्शन पर करीब से नजर रखते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस बार टूर्नामेंट 23 अगस्त से शुरू होकर 10 सितंबर तक चलेगा। सभी मुकाबले बेंगलुरु के BCCI सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में आयोजित किए जाने हैं। एक ही स्थान पर मुकाबले होने से टीमों को यात्रा की परेशानी कम होगी, लेकिन लगातार क्रिकेट के कारण खिलाड़ियों की फिटनेस और वर्कलोड महत्वपूर्ण रहेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">बेंगलुरु की परिस्थितियां भी टीम संयोजन तय करने में भूमिका निभा सकती हैं। शुरुआती समय में तेज गेंदबाजों को नई गेंद से मदद मिल सकती है, जबकि मैच आगे बढ़ने के साथ स्पिनर प्रभावी हो सकते हैं। ऐसे में वेस्ट जोन के पास शार्दुल ठाकुर जैसे अनुभवी तेज गेंदबाज और शम्स मुलानी तथा तनुश कोटियान जैसे स्पिन विकल्प मौजूद होना टीम को संतुलन देता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">ऋतुराज के लिए कप्तानी का यह मौका उनके रेड-बॉल करियर के लिहाज से भी अहम होगा। वह सीमित ओवरों के क्रिकेट में नेतृत्व की जिम्मेदारी निभा चुके हैं, लेकिन दलीप ट्रॉफी में कप्तानी अलग तरह की चुनौती होगी। मल्टी-डे क्रिकेट में गेंदबाजों का इस्तेमाल, फील्ड सेटिंग और लंबे समय तक मैच की स्थिति को पढ़ना कप्तान की बड़ी परीक्षा होती है।</p>
<p class="isSelectedEnd">बल्लेबाजी क्रम में भी उन्हें अपनी व्यक्तिगत भूमिका और कप्तानी के बीच संतुलन बनाना होगा। मध्यक्रम में उतरने की स्थिति में ऋतुराज को कई बार नई गेंद पुरानी होने के बाद बल्लेबाजी करनी होगी। वहीं शुरुआती विकेट जल्दी गिरने पर उन्हें मुश्किल परिस्थितियों में क्रीज पर आना पड़ सकता है। टीम को उनसे बड़ी पारियों की उम्मीद रहेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">पृथ्वी शॉ के प्रदर्शन पर इस टूर्नामेंट में खास नजर रहने वाली है। रणजी ट्रॉफी में 537 रन बनाने के बाद वह अपनी फॉर्म को दलीप ट्रॉफी में जारी रखना चाहेंगे। चंडीगढ़ के खिलाफ 222 रन की तेज पारी ने दिखाया कि लय में होने पर वह कुछ ही सेशन में मैच का रुख बदल सकते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">उनके लिए निरंतरता सबसे बड़ा मुद्दा रहेगी। एक या दो बड़ी पारियों के बजाय पूरे टूर्नामेंट में लगातार रन बनाना उनकी आगे की दावेदारी के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण होगा। घरेलू स्तर पर मजबूत गेंदबाजी आक्रमण के खिलाफ प्रदर्शन चयनकर्ताओं को ज्यादा प्रभावित कर सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">सरफराज खान के लिए भी दलीप ट्रॉफी महत्वपूर्ण रहेगी। मध्यक्रम में उनका और ऋतुराज का कॉम्बिनेशन वेस्ट जोन की बल्लेबाजी की दिशा तय कर सकता है। दोनों लंबे समय तक बल्लेबाजी करने में सक्षम हैं। अगर शीर्ष क्रम मजबूत शुरुआत देता है तो सरफराज तेजी से रन बनाकर विपक्ष पर दबाव बढ़ा सकते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">मुशीर खान और तनुश कोटियान जैसे खिलाड़ियों के पास भी इस टूर्नामेंट के जरिए अपनी रेड-बॉल साख मजबूत करने का मौका रहेगा। घरेलू क्रिकेट में युवा खिलाड़ियों के लिए दलीप ट्रॉफी रणजी से ऊपर की प्रतिस्पर्धा का मंच मानी जाती है। यहां अच्छा प्रदर्शन करने पर इंडिया-A और राष्ट्रीय टीम के आसपास पहुंचने का रास्ता खुल सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">शम्स मुलानी पर उपकप्तान होने के कारण अतिरिक्त जिम्मेदारी होगी। गेंदबाजी में लंबे स्पेल के साथ वह कप्तान को रणनीतिक फैसलों में भी सहयोग करेंगे। मुंबई के लिए घरेलू क्रिकेट खेलने का उनका लंबा अनुभव वेस्ट जोन के लिए उपयोगी रहेगा। खासकर मैच के तीसरे और चौथे दिन पिच टूटने पर उनकी स्पिन निर्णायक साबित हो सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd">शार्दुल ठाकुर जैसे सीनियर खिलाड़ी की मौजूदगी टीम के गेंदबाजी विभाग को अनुभव देती है। जरूरत पड़ने पर वह नई गेंद संभाल सकते हैं और पुरानी गेंद से रिवर्स स्विंग का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। बल्लेबाजी में उनकी आक्रामक शैली निचले क्रम में तेजी से रन जोड़ने में मदद कर सकती है।</p>
<p>दलीप ट्रॉफी का यह संस्करण कई खिलाड़ियों के लिए आने वाले घरेलू और अंतरराष्ट्रीय सीजन से पहले अपनी स्थिति मजबूत करने का मौका होगा। वेस्ट जोन के स्क्वॉड में ऐसे कई खिलाड़ी हैं जो पहले भारतीय टीम का हिस्सा रह चुके हैं या राष्ट्रीय चयन के करीब माने जाते हैं। इसलिए हर मुकाबले और हर पारी पर चयनकर्ताओं की नजर रहने की संभावना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Jul 2026 15:46:03 +0530</pubDate>
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                <title>हॉकी वर्ल्ड कप के लिए भारत की 20 सदस्यीय टीम घोषित, हरमनप्रीत होंगे कप्तान</title>
                                    <description><![CDATA[अनुभवी और युवा खिलाड़ियों के मिश्रण के साथ उतरेगी टीम इंडिया, पूल-D में इंग्लैंड-पाकिस्तान से बड़ी टक्कर; 15 अगस्त को वेल्स के खिलाफ पहला मुकाबला]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/indias-20-member-team-announced-for-the-hockey-world-cup-harmanpreet/article-59384"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/fih-hockey-world-cup-2026.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">अगले महीने होने वाले FIH मेंस हॉकी वर्ल्ड कप के लिए भारत ने अपनी 20 सदस्यीय टीम का ऐलान कर दिया है। अनुभवी ड्रैग फ्लिकर हरमनप्रीत सिंह को एक बार फिर टीम की कमान सौंपी गई है। हॉकी इंडिया ने बड़े टूर्नामेंट के लिए अनुभव और युवा खिलाड़ियों को मिलाकर टीम तैयार की है। मनप्रीत सिंह, हार्दिक सिंह, विवेक सागर प्रसाद, अमित रोहिदास और अभिषेक जैसे लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय हॉकी खेल रहे खिलाड़ी स्क्वॉड का अहम हिस्सा हैं। भारत 15 अगस्त को वेल्स के खिलाफ अपने अभियान की शुरुआत करेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">टीम चयन में हालिया प्रदर्शन के साथ बड़े मुकाबलों के अनुभव को भी महत्व दिया गया है। प्रो लीग में भारतीय टीम का हिस्सा रहे चार खिलाड़ियों को वर्ल्ड कप के अंतिम दल में जगह नहीं मिली। इनमें डिफेंडर अमनदीप लकड़ा, मिडफील्डर राज कुमार पाल और रबीचंद्र सिंह मोइरांगथेम के अलावा फॉरवर्ड सेल्वम कार्थी शामिल हैं। इन खिलाड़ियों के बाहर होने के बाद अलग-अलग पोजिशन पर चयनकर्ताओं ने दूसरे विकल्पों पर भरोसा जताया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">हरमनप्रीत सिंह के कंधों पर कप्तानी के साथ भारतीय डिफेंस और पेनल्टी कॉर्नर को गोल में बदलने की बड़ी जिम्मेदारी होगी। वह पिछले कई वर्षों से भारतीय हॉकी टीम के सबसे महत्वपूर्ण खिलाड़ियों में शामिल रहे हैं। दुनिया के बेहतरीन ड्रैग फ्लिकरों में गिने जाने वाले हरमनप्रीत दबाव वाले मुकाबलों में पेनल्टी कॉर्नर के जरिए मैच का रुख बदलने की क्षमता रखते हैं। वर्ल्ड कप जैसे टूर्नामेंट में भारत के लिए उनकी फॉर्म काफी महत्वपूर्ण रहने वाली है।</p>
<p class="isSelectedEnd">भारत की सबसे बड़ी ताकत टीम में मौजूद अनुभवी खिलाड़ियों का समूह माना जा रहा है। पूर्व कप्तान मनप्रीत सिंह एक बार फिर मिडफील्ड में बड़ी भूमिका निभाते नजर आएंगे। लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर के दौरान वह ओलिंपिक, वर्ल्ड कप और एशियाई स्तर के कई बड़े टूर्नामेंट खेल चुके हैं। मैदान पर गेंद को नियंत्रित करने के साथ डिफेंस और अटैक के बीच तालमेल बनाने में उनका अनुभव टीम के लिए उपयोगी होगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">मनप्रीत के साथ हार्दिक सिंह और विवेक सागर प्रसाद मिडफील्ड की जिम्मेदारी संभालेंगे। दोनों खिलाड़ी अपनी गति और गेंद पर नियंत्रण के लिए जाने जाते हैं। हार्दिक तेजी से डिफेंस को अटैक में बदलने की क्षमता रखते हैं, जबकि विवेक छोटे पास और गेंद की मूवमेंट के जरिए विपक्षी टीम की संरचना तोड़ने की कोशिश करते हैं। वर्ल्ड कप में मजबूत यूरोपीय टीमों के खिलाफ भारत के मिडफील्ड की परीक्षा काफी कठिन रहने वाली है।</p>
<p class="isSelectedEnd">मिडफील्ड में नीलकांत शर्मा का अनुभव भी टीम को मजबूती देगा। वह दबाव के समय गेंद को नियंत्रित रखने और विपक्ष के हमले को बीच मैदान में रोकने की भूमिका निभा सकते हैं। उनके साथ राजिंदर सिंह और आदित्य अर्जुन लालगे को भी टीम में जगह मिली है। युवा खिलाड़ियों के लिए यह टूर्नामेंट दुनिया की शीर्ष टीमों के खिलाफ खुद को साबित करने का बड़ा मंच होगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">भारतीय डिफेंस में कप्तान हरमनप्रीत सिंह के साथ अमित रोहिदास का अनुभव अहम रहेगा। रोहिदास लंबे समय से भारतीय बैकलाइन के भरोसेमंद खिलाड़ियों में शामिल हैं। वह विपक्षी फॉरवर्ड के हमले रोकने के साथ पेनल्टी कॉर्नर डिफेंस में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बड़े मुकाबलों में उनका अनुभव भारत के युवा डिफेंडरों के लिए भी मददगार साबित हो सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">डिफेंस में जर्मनप्रीत सिंह, जुगराज सिंह, संजय, सुमित और यशदीप सिवाच को भी चुना गया है। जुगराज और संजय के रूप में भारत के पास पेनल्टी कॉर्नर पर अतिरिक्त ड्रैग फ्लिक विकल्प मौजूद रहेंगे। इसका फायदा तब मिल सकता है जब विपक्षी टीम हरमनप्रीत को रोकने के लिए खास रणनीति के साथ मैदान पर उतरे। एक से ज्यादा ड्रैग फ्लिक विकल्प होने से भारत की पेनल्टी कॉर्नर रणनीति में विविधता बनी रहेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">सुमित अपनी गति और गेंद को आगे ले जाने की क्षमता के कारण डिफेंस से आक्रमण तैयार करने में उपयोगी साबित हो सकते हैं। आधुनिक हॉकी में डिफेंडरों की भूमिका केवल अपने गोल की रक्षा करने तक सीमित नहीं रहती। उन्हें गेंद के साथ तेजी से आगे बढ़कर मिडफील्ड और फॉरवर्ड लाइन को सपोर्ट करना होता है। भारतीय टीम ने इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए डिफेंस में अलग-अलग शैली के खिलाड़ियों को जगह दी है।</p>
<p class="isSelectedEnd">गोलकीपिंग विभाग में मोहित एचएस और सूरज करकेरा को चुना गया है। वर्ल्ड कप जैसे टूर्नामेंट में गोलकीपर की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि नॉकआउट मुकाबलों में एक बचाव भी मैच का परिणाम बदल सकता है। पेनल्टी कॉर्नर और शूटआउट जैसी परिस्थितियों में गोलकीपर पर दबाव कई गुना बढ़ जाता है। दोनों खिलाड़ियों के बीच अंतिम एकादश में जगह के लिए मुकाबला रहेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">भारतीय टीम की फॉरवर्ड लाइन में अनुभव और आक्रामक गति दोनों को जगह मिली है। मंदीप सिंह और दिलप्रीत सिंह लंबे समय से भारतीय अटैक का हिस्सा रहे हैं। दोनों खिलाड़ियों के पास विपक्षी सर्कल के अंदर जगह बनाने और गोल के मौके तैयार करने का अनुभव है। तेज हॉकी खेलने वाली टीमों के खिलाफ भारत को इन खिलाड़ियों से लगातार दबाव बनाने की जरूरत होगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">अभिषेक भारतीय आक्रमण के सबसे महत्वपूर्ण खिलाड़ियों में से एक माने जा रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने अपनी गति, ड्रिब्लिंग और गोल करने की क्षमता से प्रभावित किया है। विपक्षी डिफेंडरों के बीच जगह बनाकर सर्कल में प्रवेश करना उनकी बड़ी ताकत है। वर्ल्ड कप में भारत को उनसे महत्वपूर्ण मौकों पर गोल की उम्मीद रहेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">सुखजीत सिंह और शिलानंद लकड़ा को भी फॉरवर्ड लाइन में जगह दी गई है। दोनों खिलाड़ियों की गति भारतीय टीम को काउंटर अटैक में मदद कर सकती है। तेज पासिंग के साथ अचानक विपक्षी सर्कल में पहुंचना भारत की आक्रामक रणनीति का हिस्सा रहा है। टीम को हालांकि मिले मौकों को गोल में बदलने की दर बेहतर रखनी होगी, क्योंकि वर्ल्ड कप में छोटी गलतियां भी भारी पड़ सकती हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">मुख्य कोच क्रेग फुल्टन ने चुनी गई टीम में अनुभव और युवा खिलाड़ियों के संतुलन पर भरोसा जताया है। उनका मानना है कि स्क्वॉड में ऐसे खिलाड़ी मौजूद हैं जो पहले बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट का दबाव झेल चुके हैं, जबकि युवा खिलाड़ी टीम में नई ऊर्जा लेकर आते हैं। पिछले कुछ समय से भारतीय टीम की रणनीति में मजबूत डिफेंस के साथ तेजी से काउंटर अटैक करने पर जोर दिया गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">फुल्टन के सामने वर्ल्ड कप से पहले सबसे बड़ी चुनौती सही प्लेइंग कॉम्बिनेशन तैयार करने की होगी। 20 सदस्यीय टीम में कई पोजिशन पर एक से ज्यादा विकल्प मौजूद हैं। विपक्षी टीम और मैच की परिस्थितियों के आधार पर खिलाड़ियों की भूमिका बदल सकती है। यूरोपीय टीमों के खिलाफ भारत को गेंद पर ज्यादा नियंत्रण रखने के साथ अपने डिफेंस को भी मजबूत रखना होगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस बार का वर्ल्ड कप भारतीय हॉकी के लिए ऐतिहासिक संदर्भ में भी खास माना जा रहा है। भारत ने 1975 में पहली और अब तक की अपनी एकमात्र पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप ट्रॉफी जीती थी। उस ऐतिहासिक सफलता के करीब पांच दशक बाद भारतीय टीम एक बार फिर विश्व खिताब की तलाश में उतरेगी। कोचिंग स्टाफ इसी मौके को खिलाड़ियों के लिए अतिरिक्त प्रेरणा के रूप में देख रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">1975 के वर्ल्ड कप में भारत ने फाइनल में पाकिस्तान को हराकर खिताब जीता था। उसके बाद भारतीय टीम कई बार टूर्नामेंट में उतरी, लेकिन दोबारा विश्व चैंपियन नहीं बन सकी। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में भारतीय हॉकी के प्रदर्शन में सुधार देखने को मिला है। ओलिंपिक में लगातार अच्छे प्रदर्शन और बड़ी टीमों के खिलाफ जीत ने उम्मीदें बढ़ाई हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस वर्ल्ड कप में भारत को पूल-D में रखा गया है। उसके साथ इंग्लैंड, पाकिस्तान और वेल्स की टीमें हैं। ग्रुप आसान नहीं माना जा रहा, क्योंकि इंग्लैंड दुनिया की मजबूत हॉकी टीमों में शामिल है और पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबला हमेशा दबाव वाला होता है। वेल्स भी उलटफेर करने की क्षमता रखता है। ऐसे में भारत के लिए हर ग्रुप मैच महत्वपूर्ण होगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">टीम इंडिया अपना पहला मुकाबला 15 अगस्त को वेल्स के खिलाफ खेलेगी। स्वतंत्रता दिवस के दिन होने वाले इस मैच से भारत अपने अभियान की शुरुआत करेगा। टूर्नामेंट में आगे की स्थिति मजबूत रखने के लिए पहले मैच में जीत बेहद महत्वपूर्ण होगी। शुरुआती मुकाबले में पूरे अंक मिलने से टीम पर अगले दो कठिन मैचों का दबाव कुछ कम हो सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">वेल्स के बाद भारत की असली परीक्षा 17 अगस्त को इंग्लैंड के खिलाफ होगी। दोनों टीमों के बीच पिछले कुछ वर्षों में कई करीबी मुकाबले हुए हैं। इंग्लैंड अपनी तेज और शारीरिक रूप से मजबूत हॉकी के लिए जाना जाता है। भारतीय मिडफील्ड को इस मुकाबले में गेंद पर नियंत्रण बनाए रखने के साथ इंग्लैंड के तेज काउंटर अटैक को रोकना होगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">पूल चरण का सबसे चर्चित मुकाबला 19 अगस्त को भारत और पाकिस्तान के बीच खेला जाएगा। दोनों देशों की हॉकी प्रतिद्वंद्विता का लंबा इतिहास रहा है। हाल के वर्षों में भारतीय टीम का प्रदर्शन पाकिस्तान के मुकाबले अधिक स्थिर रहा है, लेकिन दोनों टीमों के बीच मैच में पिछला रिकॉर्ड कई बार मायने नहीं रखता। दबाव और भावनाओं के बीच खिलाड़ियों के लिए अनुशासन बनाए रखना जरूरी होगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">भारत और पाकिस्तान के मुकाबले में पेनल्टी कॉर्नर की भूमिका भी अहम रह सकती है। हरमनप्रीत सिंह की ड्रैग फ्लिक भारत के लिए बड़ी ताकत है। पाकिस्तान की टीम भी तेज आक्रामक हॉकी के लिए जानी जाती है। ऐसे में भारत को सर्कल के आसपास अनावश्यक फाउल से बचना होगा और अपने मौकों का बेहतर इस्तेमाल करना पड़ेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">भारत के सभी पूल मुकाबले नीदरलैंड के एम्सटेलवीन में खेले जाएंगे। यूरोप की परिस्थितियों में खेलना भारतीय खिलाड़ियों के लिए नया नहीं है, क्योंकि टीम नियमित रूप से FIH प्रो लीग और दूसरे अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट के लिए वहां जाती रही है। फिर भी मौसम और मैदान की परिस्थितियों के अनुसार खुद को जल्दी ढालना जरूरी होगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">टीम चयन में प्रो लीग का हिस्सा रहे चार खिलाड़ियों का बाहर होना भी चर्चा में है। डिफेंडर अमनदीप लकड़ा को अंतिम 20 में जगह नहीं मिली। मिडफील्ड से राज कुमार पाल और रबीचंद्र सिंह मोइरांगथेम भी स्क्वॉड से बाहर हैं। फॉरवर्ड सेल्वम कार्थी को भी वर्ल्ड कप टीम में शामिल नहीं किया गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">इन खिलाड़ियों की गैरमौजूदगी में चुने गए सदस्यों पर अपनी जगह सही साबित करने का दबाव रहेगा। बड़े टूर्नामेंट में टीम चयन हमेशा हालिया फॉर्म, फिटनेस और रणनीतिक जरूरतों के आधार पर किया जाता है। कोचिंग स्टाफ ने अलग-अलग पोजिशन पर उन खिलाड़ियों को चुना है जिन्हें वर्ल्ड कप की योजना के लिए बेहतर विकल्प माना गया।</p>
<p class="isSelectedEnd">हरमनप्रीत के लिए कप्तान के रूप में यह टूर्नामेंट बड़ी परीक्षा होगा। उन्हें अपनी व्यक्तिगत भूमिका के साथ पूरी टीम की रणनीति संभालनी होगी। पेनल्टी कॉर्नर पर गोल करने का दबाव भी उन्हीं पर रहेगा। विपक्षी टीमें उनके ड्रैग फ्लिक को रोकने के लिए खास रणनीति तैयार करेंगी, इसलिए जुगराज और संजय जैसे दूसरे विकल्प महत्वपूर्ण हो सकते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">मनप्रीत सिंह का अनुभव भी दबाव वाले मैचों में काम आएगा। लंबे समय तक भारतीय टीम की कप्तानी कर चुके मनप्रीत मैदान पर खिलाड़ियों को व्यवस्थित रखने की क्षमता रखते हैं। खासकर इंग्लैंड और पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबलों में उनके अनुभव की जरूरत होगी। युवा खिलाड़ियों के लिए भी मैदान के भीतर उनका मार्गदर्शन महत्वपूर्ण रहेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">भारत की आगे की राह काफी हद तक पूल चरण के प्रदर्शन पर निर्भर करेगी। शुरुआती तीन मुकाबलों में अंक गंवाने से नॉकआउट की राह मुश्किल हो सकती है। टीम की कोशिश वेल्स के खिलाफ मजबूत शुरुआत करने और फिर इंग्लैंड तथा पाकिस्तान के सामने अपनी सर्वश्रेष्ठ हॉकी खेलने की होगी। टीम प्रबंधन मैच-दर-मैच रणनीति के साथ आगे बढ़ने की तैयारी कर रहा है।</p>
<p><strong>भारत की 20 सदस्यीय टीम:</strong> गोलकीपर – मोहित एचएस, सूरज करकेरा। डिफेंडर – जर्मनप्रीत सिंह, हरमनप्रीत सिंह (कप्तान), अमित रोहिदास, जुगराज सिंह, संजय, सुमित और यशदीप सिवाच। मिडफील्डर – मनप्रीत सिंह, हार्दिक सिंह, विवेक सागर प्रसाद, नीलकांत शर्मा, राजिंदर सिंह और आदित्य अर्जुन लालगे। फॉरवर्ड – मंदीप सिंह, दिलप्रीत सिंह, अभिषेक, सुखजीत सिंह और शिलानंद लकड़ा।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Tue, 21 Jul 2026 15:45:41 +0530</pubDate>
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