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                <title>लाइफ स्टाइल - दैनिक जागरण</title>
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                <title>स्ट्रॉ वाला ट्रैवल हैक वायरल, ज्वेलरी पैकिंग की टेंशन खत्म</title>
                                    <description><![CDATA[नेकलेस और पतली चेन को उलझने से बचाने का आसान और सस्ता तरीका, सोशल मीडिया पर बना ट्रेंड]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/life-style/6a2408ff39087/article-55147"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/travel-hack.jpg" alt=""></a><br /><p>आज के समय में ट्रैवलिंग केवल एक जरूरत नहीं बल्कि लाइफस्टाइल का अहम हिस्सा बन चुकी है। लोग छुट्टियों, बिजनेस ट्रिप, फैमिली फंक्शन और खास मौकों पर लगातार यात्रा करते रहते हैं। ऐसे में पैकिंग का तरीका जितना स्मार्ट होगा, सफर उतना ही आसान बनता है। कपड़े, मेकअप और जरूरी सामान तो लोग बड़े ध्यान से पैक कर लेते हैं, लेकिन ज्वेलरी पैकिंग अक्सर एक बड़ी परेशानी बन जाती है।</p>
<p>खासतौर पर पतली और नाजुक नेकलेस चेन यात्रा के दौरान उलझ जाती हैं, जिन्हें सुलझाने में काफी समय और मेहनत लगती है। कई बार यह उलझन इतनी बढ़ जाती है कि चेन टूटने का खतरा भी पैदा हो जाता है। इसी समस्या का एक बेहद आसान और सस्ता समाधान इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे लोग “स्ट्रॉ ज्वेलरी ट्रैवल हैक” के नाम से जान रहे हैं। इस ट्रिक का सबसे खास पहलू यह है कि इसके लिए किसी महंगे ज्वेलरी बॉक्स या विशेष ऑर्गेनाइज़र की जरूरत नहीं पड़ती। सिर्फ एक साधारण प्लास्टिक या पेपर ड्रिंकिंग स्ट्रॉ से ही इस समस्या का हल निकल आता है। यह छोटा-सा तरीका यात्रियों, खासकर महिलाओं के बीच काफी लोकप्रिय हो रहा है।</p>
<p>इस ट्रिक को अपनाना बेहद आसान है। सबसे पहले नेकलेस या पतली चेन का एक सिरा खोल लिया जाता है। इसके बाद चेन को धीरे-धीरे स्ट्रॉ के अंदर से गुजारा जाता है और दूसरी तरफ से बाहर निकाला जाता है। फिर क्लैस्प बंद कर दिया जाता है। इस प्रक्रिया के बाद पूरी चेन स्ट्रॉ के अंदर सुरक्षित और सीधी रहती है। इसे आसानी से बैग, पाउच या ट्रैवल किट में रखा जा सकता है। गंतव्य पर पहुंचने पर चेन बिल्कुल सुलझी हुई और पहनने के लिए तैयार मिलती है। यह तरीका खासतौर पर उन लोगों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो रहा है जो मिनिमलिस्ट ज्वेलरी पसंद करते हैं। आजकल पतली गोल्ड चेन, सिल्वर लेयर नेकलेस और छोटे पेंडेंट का चलन काफी बढ़ गया है। ये ज्वेलरी देखने में स्टाइलिश होती हैं, लेकिन पैकिंग के दौरान सबसे ज्यादा उलझती हैं। एक से ज्यादा चेन साथ रखने पर समस्या और बढ़ जाती है। ऐसे में स्ट्रॉ ट्रिक उन्हें अलग-अलग और सुरक्षित रखने का सरल समाधान बनकर सामने आई है।</p>
<p>फैशन विशेषज्ञों का मानना है कि यह तरीका केवल सुविधा ही नहीं देता बल्कि ज्वेलरी की उम्र भी बढ़ाता है। बार-बार उलझने और सुलझाने से पतली चेन कमजोर हो सकती हैं, उनके लिंक ढीले पड़ सकते हैं और टूटने का खतरा बढ़ सकता है। स्ट्रॉ के अंदर सुरक्षित रखने से उनकी मजबूती और आकार दोनों बने रहते हैं। खासकर महंगी या भावनात्मक रूप से महत्वपूर्ण ज्वेलरी के लिए यह तरीका बेहद फायदेमंद है। इस ट्रिक की सबसे बड़ी खासियत इसकी किफायती और सरल प्रकृति है। बाजार में मिलने वाले ज्वेलरी ऑर्गेनाइज़र कई बार महंगे होते हैं और यात्रा के दौरान अतिरिक्त जगह भी घेरते हैं। वहीं स्ट्रॉ हल्के होते हैं, आसानी से मिल जाते हैं और कम जगह लेते हैं। पेपर स्ट्रॉ पर्यावरण के लिहाज से भी बेहतर विकल्प माना जा रहा है। लंबी या मोटी चेन के लिए चौड़े स्ट्रॉ का उपयोग किया जा सकता है, जिससे अलग-अलग तरह की ज्वेलरी को आसानी से व्यवस्थित किया जा सकता है।</p>
<p>सोशल मीडिया पर यह ट्रैवल हैक तेजी से वायरल हो रहा है। ट्रैवल ब्लॉगर, फैशन इन्फ्लुएंसर और लाइफस्टाइल क्रिएटर्स इसे लगातार अपने फॉलोअर्स के साथ साझा कर रहे हैं। कई लोगों ने इसे “गेम चेंजर ट्रैवल टिप” बताया है। खासकर वे महिलाएं जो शादी, पार्टी या डेस्टिनेशन इवेंट्स में कई तरह की ज्वेलरी साथ लेकर जाती हैं, उनके लिए यह तरीका बेहद उपयोगी साबित हो रहा है। कुछ यूजर्स ने तो इसे केवल यात्रा तक सीमित नहीं रखा, बल्कि अपने रोजमर्रा के ज्वेलरी स्टोरेज का हिस्सा भी बना लिया है। घर पर भी स्ट्रॉ के माध्यम से चेन रखने से ज्वेलरी उलझती नहीं है और जरूरत के समय आसानी से मिल जाती है।</p>
<p>विशेषज्ञों का कहना है कि आज के दौर में लोग ऐसे स्मार्ट और सिंपल सॉल्यूशंस की तलाश में रहते हैं, जो कम खर्च में बड़ी समस्या का हल दे सकें। स्ट्रॉ ट्रिक इसका एक बेहतरीन उदाहरण है। यह दिखाता है कि कैसे एक साधारण-सी चीज भी हमारी रोजमर्रा की परेशानियों को आसान बना सकती है। अगली बार जब आप यात्रा पर निकलें, तो ज्वेलरी पैकिंग से पहले इस आसान स्ट्रॉ ट्रिक को जरूर अपनाएं। यह न केवल आपका समय बचाएगा बल्कि आपकी पसंदीदा ज्वेलरी को सुरक्षित और व्यवस्थित भी रखेगा। छोटी-सी समझदारी आपके पूरे सफर को और ज्यादा आसान, स्मार्ट और तनावमुक्त बना सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>लाइफ स्टाइल</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 17:38:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>घर पर ऐसे बनाएं टेस्टी सांभर, नोट कर लें आसान रेसिपी</title>
                                    <description><![CDATA[जानिए घर पर टेस्टी सांभर बनाने का आसान तरीका। कौन सी सब्जियां और मसाले डालें, पढ़ें स्टेप बाय स्टेप सांभर रेसिपी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/life-style/how-to-make-tasty-sambar-at-home-note-down-the/article-54145"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/south-sambar-recipe.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">साउथ इंडियन खाने के शौकीनों के बीच सांभर की एक खास जगह है। इडली</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">डोसा या गर्म चावल के साथ इसका मजे़दार स्वाद लोगों को बहुत भाता है। भले ही कई लोग इसे घर पर बनाने की कोशिश करते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन होटल जैसा चटपटा स्वाद नहीं आ पाता। इसका मुख्य कारण सही सब्जियों और मसालों का संतुलन न होना होता है। अगर सांभर में खट्टापन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हल्का तीखापन और सब्जियों का सही मिश्रण हो जाए तो ये और भी शानदार हो जाता है। खुशकिस्मती से सांभर बनाना कोई बहुत मुश्किल काम नहीं है। घर में मौजूद दाल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कुछ सब्जियाँ और बुनियादी मसालों से भी स्वादिष्ट सांभर तैयार किया जा सकता है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">आमतौर पर सांभर बनाने के लिए अरहर दाल का इस्तेमाल होता है। सब्जियों में सहजन</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">गाजर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">टमाटर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लौकी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कद्दू</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्याज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बैंगन और भिंडी डाली जा सकती हैं। कुछ लोग इसमें मूली और बीन्स भी मिलाते हैं। सांभर का असली स्वाद इसके मसालों और इमली के पानी से आता है। इसके लिए सांभर मसाला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हल्दी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लाल मिर्च</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जीरा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हींग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मेथी दाना और करी पत्ते का होना जरूरी है। अगर तड़का अच्छे से लगाया जाए तो ये और भी सुगंधित और स्वादिष्ट हो जाता है। दक्षिण भारत में अलग-अलग जगहों पर इसे बनाने का तरीका थोड़ा भिन्न हो सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन मूल प्रक्रिया लगभग एक जैसी रहती है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सांभर बनाने के लिए सबसे पहले एक कप अरहर दाल को अच्छे से धो लें। फिर कुकर में दाल</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">हल्दी और आवश्यकता अनुसार पानी डालकर </span>3<span lang="hi" xml:lang="hi"> से </span>4<span lang="hi" xml:lang="hi"> सीटी आने तक पकाएं। दूसरी ओर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सभी सब्जियों को काटकर हल्का नमक डालकर नरम होने तक उबाल लें। अब एक कटोरी इमली को गुनगुने पानी में लगभग </span>10<span lang="hi" xml:lang="hi"> मिनट के लिए भिगो दें और उसका रस निकाल लें। जब दाल अच्छी तरह से पक जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उसमें उबली हुई सब्जियाँ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इमली का पानी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और </span>2<span lang="hi" xml:lang="hi"> से </span>3<span lang="hi" xml:lang="hi"> चम्मच सांभर मसाला डालें। इसे धीमी आंच पर कुछ देर उबलने दें ताकि सारे फ्लेवर अच्छे से मिल जाएं।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अब तड़के की बारी आती है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो सांभर को सबसे ज्यादा स्वादिष्ट बनाता है। एक छोटे पैन में थोड़ा तेल या घी गरम करें। इसमें राई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जीरा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मेथी दाना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सूखी लाल मिर्च</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">करी पत्ता और चुटकीभर हींग डालें। जैसे ही मसालों की खुशबू निकलने लगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ये तड़का सांभर में डाल दें। फिर सांभर को </span>2 <span lang="hi" xml:lang="hi">मिनट और पकाएं। गरमागरम सांभर को इडली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डोसा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वड़ा या चावल के साथ सर्व किया जा सकता है। कई लोग इसके ऊपर हरा धनिया डालकर भी इसका स्वाद और बढ़ाते हैं। घर पर बना ताजा सांभर न केवल स्वादिष्ट होता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि हेल्दी भी माना जाता है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>लाइफ स्टाइल</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 May 2026 00:00:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>थकान या सिर्फ दिमाग का खेल? चाय पीते ही क्यों आ जाती है ताजगी</title>
                                    <description><![CDATA[चाय पीते ही थकान क्यों कम लगती है? जानिए कैफीन और दिमाग के एडेनोसिन पर असर के साथ इसके साइकोलॉजिकल कारण।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/life-style/tiredness-or-just-a-mental-game-why-do-you-feel/article-53914"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/effects-of-tea.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दिनभर की भागदौड़</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऑफिस का दबाव या फिर दोपहर की सुस्ती</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इन सब मौकों पर एक कप चाय राहत देती है। जैसे ही गर्म चाय गले से उतरती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शरीर हल्का और मन ताज़ा महसूस करने लगता है। कई लोग इसे थकान मिटाने का सबसे आसान तरीका मानते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन असली सवाल ये है कि क्या चाय वाकई थकान कम करती है या ये सिर्फ हमारे दिमाग का खेल है</span>?</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इसके पीछे एक दिलचस्प विज्ञान है। विशेषज्ञों का कहना है कि चाय में कैफीन होता है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो हमारे दिमाग की गतिविधियों पर असर डालता है। हमारे मस्तिष्क में एक केमिकल एडेनोसिन होता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो दिनभर बढ़ता जाता है और थकान व नींद का संकेत देता है। जैसे-जैसे एडेनोसिन का लेवल बढ़ता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हम ज्यादा सुस्त और थके हुए महसूस करते हैं। लेकिन जब हम चाय पीते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उसमें मौजूद कैफीन एडेनोसिन के रिसेप्टर्स को ब्लॉक कर देता है। इससे दिमाग को थकान के संकेत नहीं मिलते और शरीर कुछ समय के लिए एक्टिव महसूस करता है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">लेकिन ये सब सिर्फ केमिकल का खेल नहीं है। डॉक्टरों का कहना है कि चाय का असर मानसिक और भावनात्मक स्तर पर भी होता है। चाय बनाने की प्रक्रिया</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">पानी उबालना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चाय बनाना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कप पकड़ना और धीरे-धीरे चुस्की लेना</span>—<span lang="hi" xml:lang="hi">ये सब दिमाग को एक छोटा ब्रेक देते हैं। भागदौड़ और तनाव के बीच ये चंद मिनट का ठहराव मानसिक सुकून देता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे लगता है कि थकान कम हो गई है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">साइकायट्रिस्ट के मुताबिक</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">चाय कई लोगों के लिए सिर्फ एक पेय नहीं बल्कि एक तरह का "मूड बूस्टर" बन गई है। ये रोजमर्रा के तनाव से कुछ पल की राहत देती है और दिमाग को रिलैक्स करने में मदद करती है। यही वजह है कि कई बार सिर्फ चाय के बारे में सोचते ही लोग हल्का महसूस करने लगते हैं।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हालांकि</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">विशेषज्ञ इस बात की चेतावनी भी देते हैं कि चाय पर जरूरत से ज्यादा निर्भरता ठीक नहीं है। अगर कोई इंसान बिना चाय के थकान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चिड़चिड़ापन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सिरदर्द या सुस्ती महसूस करने लगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो ये कैफीन की आदत का संकेत हो सकता है। ऐसे में शरीर इसकी लत का आदी हो सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो लंबे समय में नुकसानदेह हो सकता है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>लाइफ स्टाइल</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 May 2026 00:00:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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                <title>मटके का पानी रहेगा बर्फ जैसा ठंडा, गर्मी में अपनाएं ये आसान देसी उपाय</title>
                                    <description><![CDATA[गर्मी में मटके का पानी भी हो रहा गर्म? जानिए ऐसे आसान देसी जुगाड़ जिनसे 24 घंटे तक पानी रहेगा ठंडा और ताजा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/life-style/the-water-in-the-pot-will-remain-as-cold-as/article-53902"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/simple-traditional-methods-to-keep-water-cool-in-an-earthen-pot.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">गर्मी के मौसम में ठंडा पानी लोगों के लिए सबसे बड़ा सहारा बन जाता है। कई शहरों में तापमान 45 डिग्री से भी ऊपर पहुंच रहा है और ऐसे में घर में रखा पानी जल्दी ही गुनगुना हो जाता है। ज्यादातर लोग फ्रिज का पानी पीना पसंद करते हैं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन लगातार बहुत ठंडा पानी पीना सेहत के लिए उतना अच्छा नहीं माना जाता। इसी वजह से अब मटके का पानी फिर से लोगों की पसंद बन रहा है। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब गर्मी बहुत ज्यादा होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो मटके का पानी भी जल्दी ठंडा नहीं रहता। इस समस्या का हल पाने के लिए गांवों में कुछ पुराने देसी तरीके फिर से चर्चा में आ रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनसे मटके का पानी लंबे समय तक ठंडा रखा जा सकता है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बुजुर्गों का कहना है कि पहले बिना फ्रिज के भी लोग मटके का पानी घंटों तक ठंडा रखते थे। इसके लिए सबसे आसान तरीका यह है कि मटके पर मोटा सूती कपड़ा लपेटा जाए। कपड़े को ऊपर से नीचे तक अच्छे से ढंकना ज़रूरी है और फिर उसे पानी से भिगोया जाता है। कहा जाता है कि कपड़े की नमी धीरे-धीरे मटके की सतह को ठंडा रखती है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे भीतर का पानी भी ठंडा रहता है। कई जगह सूती कपड़े की जगह टाट या बोरे का भी इस्तेमाल किया जाता है। गांवों में आज भी यह तरीका खूब अपनाया जाता है। खास बात यह है कि इसके लिए बिजली की जरूरत नहीं होती</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और पानी प्राकृतिक रूप से ठंडा रहता है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">शुरुआती जानकारी के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">मटके को रखने का स्थान भी पानी की ठंडक पर असर डालता है। अगर मटके को सीधे गर्म फर्श या धूप में रखा जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो पानी जल्दी गर्म हो जाता है। इस स्थिति में लोग रेत या मिट्टी का सहारा लेते हैं। एक बड़े बर्तन में हल्की गीली रेत भरकर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसके बीच में मटका रखा जाता है। इससे मटके को बाहर से ठंडक मिलती रहती है। यह भी बताया जा रहा है कि मटके की सतह पर मौजूद छोटे-छोटे छिद्र नमी को सोख लेते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे अंदर का पानी लंबे समय तक ठंडा बना रहता है। कुछ लोग बालू की जगह साधारण मिट्टी का भी उपयोग करते हैं।</span></span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;"> </span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इधर</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">कई इलाकों में सेंधा नमक का उपाय भी चर्चा में है। घरेलू जानकारों के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नया मटका इस्तेमाल करने से पहले उसमें एक चम्मच सेंधा नमक डालकर कुछ घंटों के लिए पानी भरकर छोड़ दिया जाता है। फिर उस पानी को निकालकर साफ पानी भरा जाता है। ऐसा कहा जा रहा है कि इससे मटके की कूलिंग क्षमता बढ़ जाती है और पानी लंबे समय तक ठंडा रहता है। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विशेषज्ञ बहुत ज्यादा ठंडा पानी पीने से बचने की सलाह देते हैं। उनका मानना है कि मटके का प्राकृतिक ठंडा पानी शरीर के लिए ज्यादा फायदेमंद है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खासकर गर्मी और लू के मौसम में। इसी वजह से अब शहरों में भी लोग पुराने देसी तरीकों की ओर लौटते हुए नजर आ रहे हैं।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>लाइफ स्टाइल</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 May 2026 15:23:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कॉकरोच भगाने के लिए घर में लगाएं ये पौधे, केमिकल स्प्रे की नहीं पड़ेगी जरूरत</title>
                                    <description><![CDATA[घर से कॉकरोच भगाने के लिए पुदीना, लेमनग्रास, तेजपत्ता और गेंदा जैसे पौधे असरदार माने जाते हैं। जानिए प्राकृतिक उपाय।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/life-style/plant-these-plants-in-the-house-to-drive-away-cockroaches/article-53794"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/cockroaches-home-remedies.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">घर में कॉकरोच का दिखना आम बात है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन ये सिर्फ गंदगी का ही संकेत नहीं देते</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि कई बीमारियों का खतरा भी बढ़ाते हैं। खासतौर पर रसोई और नमी वाली जगहों पर ये तेजी से फैलते हैं। लोग आमतौर पर इन्हें दूर करने के लिए बाजार में मिलने वाले स्प्रे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जेल या चाक का इस्तेमाल करते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन लंबे समय तक इन केमिकल्स का इस्तेमाल सेहत के लिए नुकसानदेह हो सकता है। इसीलिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अब कई लोग प्राकृतिक उपायों की ओर लौट रहे हैं। कहा जा रहा है कि कुछ ऐसे पौधे हैं जिनकी तेज गंध कॉकरोचों को बिल्कुल पसंद नहीं आती</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे ये उन जगहों से दूर रहने लगते हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सबसे पहले पुदीने का नाम आता है। इसकी खुशबू इंसानों को ताजगी देती है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन कॉकरोच इसके आस-पास भी नहीं भटकते। पुदीने में मौजूद मेंथॉल एक नैचुरल रिपेलेंट की तरह काम करता है। लोग अक्सर रसोई की खिड़की</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सिंक के पास या दरवाजे के आसपास छोटे गमलों में पुदीना लगाते हैं। इसके अलावा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेमनग्रास भी काफी प्रभावी माना जाता है। इसकी तेज खुशबू में मौजूद सिट्रोनेला तेल के कारण कॉकरोच</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मच्छर और मक्खियां दूर रहते हैं। यह पौधा ज्यादा देखभाल नहीं मांगता और जल्दी बढ़ता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए इसे बालकनी या घर के एंट्री पॉइंट पर लगाना फायदेमंद हो सकता है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">घर में इस्तेमाल होने वाला तेजपत्ता भी काफी कारगर बताया जाता है। इसकी गंध कॉकरोचों को परेशान करती है। अगर पौधा लगाना संभव नहीं है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो सूखे तेजपत्तों को कुचलकर अलमारी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रसोई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">या सिंक के आसपास रखने की सलाह दी जाती है। कई घरेलू उपायों में इसका इस्तेमाल लंबे समय से होता आ रहा है। वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गेंदा का पौधा सिर्फ सजावट के लिए नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि कीटों को दूर रखने के लिए भी जाना जाता है। इसके फूलों और पत्तियों से निकलने वाली तेज गंध कॉकरोचों को घर के अंदर आने से रोकती है। खासकर बरसात और गर्मी में लोग इसे घर के बाहर या बालकनी में लगाना पसंद करते हैं।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">विशेषज्ञों के मुताबिक</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">सिर्फ पौधे लगाने से पूरी तरह छुटकारा नहीं मिलता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन अगर घर की साफ-सफाई का ध्यान रखा जाए और इन पौधों का उपयोग किया जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो कॉकरोचों की समस्या काफी हद तक कम हो सकती है। रसोई में पानी जमा न होने देना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रात में खुले बर्तन न छोड़ना और कूड़ेदान को साफ रखना भी जरूरी है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>लाइफ स्टाइल</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 May 2026 17:10:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मार्केट जैसा गाढ़ा मैंगो शेक घर पर बनाना आसान, बस डालें ये खास चीजें</title>
                                    <description><![CDATA[घर पर बनाएं मार्केट जैसा गाढ़ा और क्रीमी मैंगो शेक। जानिए कौन सा आम, दूध और खास चीजें डालने से बढ़ता है स्वाद।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/life-style/it-is-easy-to-make-market-like-thick-mango-shake-at/article-53711"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/mango-shake-recipe.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">गर्मियों में जब भी मैंगो शेक का नाम सुनते हैं</span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">तो ठंडक का अहसास होने लगता है। इस वक्त शहरों में जूस कॉर्नर और कैफे में मैंगो शेक की डिमांड जबरदस्त है</span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">खासकर बच्चों और युवाओं के बीच। हालांकि</span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कई लोग घर पर इसे बनाने की कोशिश करते हैं</span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">लेकिन उसका स्वाद और टेक्सचर वही नहीं आता जो बाजार में मिलता है। घर का बनाया शेक अक्सर थोड़ा पतला रह जाता है</span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जबकि मार्केट वाला शेक गाढ़ा</span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">क्रीमी और स्मूद होता है। इसलिए लोग जानना चाहते हैं कि दुकानों पर जो मैंगो शेक बनता है</span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">उसमें ऐसा क्या डाला जाता है कि उसका स्वाद इतना खास हो जाता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बताया गया है कि मैंगो शेक का असली स्वाद अच्छे पके आम और गाढ़े दूध पर निर्भर करता है। इसके लिए ऐसे आम का चुनाव करना बेहतर है जिसमें गूदा ज्यादा हो। सफेदा आम को कई लोग सबसे अच्छा मानते हैं</span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">लेकिन अन्य मीठे और जूसी आम भी काम आते हैं। आम को छीलकर छोटे टुकड़ों में काटा जाता है और गुठली अलग कर दी जाती है। उसके बाद फुल क्रीम दूध का इस्तेमाल होता है। कुछ दुकानदार बिना उबाले</span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ठंडा पैकेट वाला दूध सीधे मिक्सी में डालते हैं ताकि शेक और क्रीमी बन सके। कुछ जगह</span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">स्वाद बढ़ाने के लिए वनीला या मैंगो आइसक्रीम भी मिलाई जाती है</span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जिससे शेक में हल्की मिठास और रिचनेस आ जाती है। अगर आइसक्रीम उपलब्ध नहीं है</span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">तो ताजा मलाई या थोड़ा कंडेंस्ड मिल्क डालने की सलाह दी जाती है। यही चीजें मैंगो शेक को बाजार जैसा गाढ़ा और स्मूद बनाती हैं।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मैंगो शेक बनाने के लिए मिक्सी के जार में आम के टुकड़े</span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ठंडा फुल क्रीम दूध और थोड़ा क्रश किया हुआ बर्फ डालें। स्वाद के अनुसार चीनी भी मिलाई जा सकती है। कुछ दुकानों में रंग को और आकर्षक दिखाने के लिए हल्का ऑरेंज या रेड फूड कलर भी इस्तेमाल किया जाता है</span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हालांकि ये पूरी तरह से वैकल्पिक हैं। जब सारी चीजें अच्छी तरह ब्लेंड कर ली जाती हैं</span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">तो तैयार शेक काफी गाढ़ा नजर आता है। कई लोग इसे ऊपर से ड्राई फ्रूट्स या आइसक्रीम डालकर भी सर्व करते हैं। गर्मियों के मौसम में यह ड्रिंक तेजी से एनर्जी दे सकता है और शरीर को ठंडक भी पहुंचाता है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>लाइफ स्टाइल</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 May 2026 17:17:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>गर्मी में थकान और कमजोरी बढ़ा सकती हैं ये गलतियां, डाइट में शामिल करें ये चीजें</title>
                                    <description><![CDATA[गर्मी में थकान, कमजोरी और डिहाइड्रेशन से बचने के लिए जानिए क्या खाएं, क्या नहीं और किन आसान आदतों से शरीर को रखें एक्टिव।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/life-style/these-mistakes-can-increase-fatigue-and-weakness-in-summer-include/article-53615"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/summer-health-tips.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जैसे ही गर्मी का मौसम आता है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">लोगों को थकान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कमजोरी और आलस्य जैसी समस्याएं परेशान करने लगती हैं। कभी-कभी तो ऐसा लगता है कि बिना ज्यादा काम किए ही शरीर थक गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सिर भारी होने लगता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और थोड़ी देर धूप में रहने पर चक्कर भी आ सकते हैं। डॉक्टरों के मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसका सबसे बड़ा कारण शरीर में पानी और जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी है। तेज धूप और लगातार पसीना बहाने से शरीर धीरे-धीरे डिहाइड्रेशन की ओर बढ़ने लगता है। और अगर सही खानपान न हो तो कमजोरी और बढ़ जाती है। गर्मियों में थोड़ी सतर्कता बरतकर डाइट और लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव करके इन समस्याओं से काफी हद तक बचा जा सकता है। डॉक्टर भी यही कहते हैं कि इस मौसम में हल्का</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पौष्टिक और पानी से भरपूर भोजन शरीर को सक्रिय बनाए रखने में मदद करता है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">गर्मी में कमजोरी के कुछ सामान्य लक्षण भी होते हैं। बहुत से लोगों को दिन भर आलस्य होता है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">काम में मन नहीं लगता और आराम करने के बाद भी शरीर तरोताजा महसूस नहीं करता। डिहाइड्रेशन बढ़ने पर सिरदर्द और चक्कर आना जैसी दिक्कतें भी हो सकती हैं। कुछ लोगों की भूख भी कम हो जाती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे शरीर को जरूरी पोषण नहीं मिल पाता। वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ज्यादा पसीना बहने के कारण इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी होने लगती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और इसका असर मांसपेशियों पर पड़ता है। कभी-कभी हाथ-पैरों में कमजोरी या हल्की ऐंठन तक महसूस होने लगती है। विशेषज्ञों का कहना है कि पानी कम पीना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नींद पूरी न लेना और अनियमित खानपान इन समस्याओं को बढ़ा देते हैं। यही वजह है कि गर्मियों में खानपान में लापरवाही करना हानिकारक हो सकता है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ऐसे मौसम में पानी से भरपूर फल खाना काफी फायदेमंद होता है। जैसे तरबूज</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">खरबूजा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संतरा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अनानास और स्ट्रॉबेरी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ये सारे फल शरीर को लंबे समय तक हाइड्रेट रखने में मदद करते हैं। इनमें मौजूद विटामिन और मिनरल्स शरीर को ऊर्जा देने में मददगार साबित होते हैं। सुबह का हेल्दी नाश्ता भी बेहद जरूरी है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि नाश्ते में दूध</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अंडा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्प्राउट्स या पनीर जैसी चीजें शामिल करनी चाहिए ताकि शरीर को पर्याप्त प्रोटीन और ऊर्जा मिल सके। इसके अलावा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ड्राई फ्रूट्स और बीज भी शरीर की कमजोरी दूर करने में मदद करते हैं। गर्मियों में नारियल पानी और नींबू पानी भी बहुत फायदेमंद होते हैं क्योंकि ये शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखते हैं। हाल के कुछ समय में गोंद कतीरा का इस्तेमाल भी बढ़ गया है। आयुर्वेद में इसे शरीर को ठंडक देने वाला माना गया है और कई लोग इसे दूध या शरबत में मिलाकर पीते हैं।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">स्वास्थ्य विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि सिर्फ खानपान ही नहीं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">लाइफस्टाइल में बदलाव भी जरूरी हैं। दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी पीना सबसे अहम होता है। कोशिश करें कि धूप में ज्यादा देर न रहें और शरीर को डिहाइड्रेशन से बचाकर रखें। अच्छी नींद भी शरीर की रिकवरी के लिए जरूरी है। गर्मियों में लोग अक्सर देर रात तक जागते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो शरीर की ऊर्जा पर असर डालता है। सुबह की हल्की वॉक या योग भी शरीर को सक्रिय रखने में मदद कर सकती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन बहुत गर्मी में भारी एक्सरसाइज से बचने की सलाह दी जाती है। साथ ही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तली-भुनी और मसालेदार चीजों का सेवन कम करना चाहिए। ज्यादा चाय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कॉफी और कोल्ड ड्रिंक पीने से भी शरीर में पानी की कमी बढ़ सकती है। पैकेटबंद और प्रोसेस्ड फूड से दूरी बनाना बेहतर होता है क्योंकि इनमें सोडियम की मात्रा ज्यादा होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो शरीर को और ज्यादा डिहाइड्रेट कर सकती है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>लाइफ स्टाइल</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 17 May 2026 16:18:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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                <title>बिना बर्फ के कूलर देगा AC जैसी ठंडी हवा, बस गर्मी में अपनाएं ये आसान ट्रिक</title>
                                    <description><![CDATA[गर्मियों में बिना बर्फ डाले भी कूलर से AC जैसी ठंडी हवा मिल सकती है। जानिए कूलर की सफाई और सही इस्तेमाल के आसान तरीके।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/life-style/6a086605be0cd/article-53550"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/cooler-ac-like-cooling-tips.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जैसे ही गर्मी बढ़ती है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">कूलर और एसी की मांग घरों में फिर से बढ़ जाती है। लेकिन एसी चलाना हर किसी के लिए आसान नहीं होता। बढ़ते बिजली बिल से लोगों की जेब पर सीधा असर पड़ता है। इस वजह से ज्यादातर लोग कूलर का सहारा लेते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हालांकि कई बार कूलर से वो ठंडी हवा नहीं मिल पाती</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसकी उम्मीद होती है। यही कारण है कि लोग बार-बार उसमें बर्फ डालते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन राहत थोड़ी देर तक ही मिलती है। इन दिनों सोशल मीडिया और लोकल बाजारों में एक तरीका चर्चा का विषय बना हुआ है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे बिना बर्फ के भी कूलर से एसी जैसी ठंडी हवा मिल सकती है। इसका राज बस कूलर की सही सफाई और सेटिंग में है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">शुरुआती जानकारी के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">लंबे समय तक बंद रहने से कूलर के हनीकॉम्ब पैड्स या घास पर धूल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मिट्टी और नमक जम जाता है। खासतौर पर उन जगहों पर जहां पानी खारा होता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ये समस्या ज्यादा देखने को मिलती है। इससे हवा का फ्लो रुक जाता है और कूलर ठंडक कम दे पाता है। जानकारों का कहना है कि पहले पैड्स को निकालकर उन्हें अच्छी तरह साफ करना चाहिए। कई लोग इसके लिए पानी में सिरका या नींबू का रस मिलाकर पैड्स को कुछ देर भिगोते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फिर तेज पानी से धोते हैं। इससे जमे हुए नमक और धूल हट जाते हैं। कहा जा रहा है कि इस एक काम से कूलर की कूलिंग पहले से काफी बेहतर हो सकती है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इसके अतिरिक्त</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऊपर लगी पानी की पाइपलाइन भी अक्सर जाम हो जाती है। छोटे-छोटे छेद बंद होने से पानी सही से गिरता नहीं और पैड्स सूखे रह जाते हैं। इसलिए इन छेदों को पतली सुई या तार से साफ करना जरूरी है। कई लोग इस हिस्से को नजरअंदाज कर देते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि असली ठंडक यहीं से प्रभावित होती है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">गर्मी के मौसम में कूलर को इस्तेमाल करने का तरीका भी मायने रखता है। अधिकारियों और तकनीकी जानकारों के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">कूलर को हमेशा ऐसी जगह रखना चाहिए जहां बाहर की ताजा हवा सीधे अंदर आ सके। बंद कमरे में कूलर चलाने से उमस बढ़ जाती है और हवा चिपचिपी महसूस होती है। इसलिए पुराने घरों में लोग दरवाजे या खिड़कियां थोड़ी खुली रखते थे। सही क्रॉस वेंटिलेशन मिलने पर कूलर ज्यादा प्रभावी तरीके से काम करता है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">एक और जरूरी बात है कि वाटर पंप और फैन की टाइमिंग को लेकर भी सावधानी रखनी चाहिए। कई लोग कूलर ऑन करते ही फैन चला देते हैं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि पहले कुछ मिनट केवल पंप चालू रखना ज्यादा फायदेमंद होता है। इससे पैड्स पूरी तरह गीले हो जाते हैं और फिर जब फैन चलता है तो हवा ज्यादा ठंडी लगती है। लोकल इलेक्ट्रॉनिक्स दुकानदारों का कहना है कि अगर कूलर की नियमित सफाई होती रहे और पानी का फ्लो सही बना रहा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो बिना बर्फ के भी अच्छी ठंडक मिल सकती है। इस बीच</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बढ़ती गर्मी में लोग ऐसे सस्ते और आसान उपाय तेजी से अपनाते हुए नजर आ रहे हैं।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>लाइफ स्टाइल</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 16 May 2026 18:41:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तेज धूप से बचाएंगे ये आसान स्किनकेयर टिप्स, टैनिंग और पिंपल्स से मिलेगी राहत</title>
                                    <description><![CDATA[गर्मी में स्किन को हेल्दी और ग्लोइंग रखने के लिए अपनाएं ये 7 आसान टिप्स। जानिए हाइड्रेशन, सनस्क्रीन और डेली केयर से जुड़ी जरूरी बातें।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/life-style/these-easy-skincare-tips-will-protect-you-from-strong-sunlight/article-53467"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/skincare-tips-for-summer.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जैसे ही गर्मी का मौसम आता है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्किन से जुड़ी समस्याएं भी बढ़ जाती हैं। तेज धूप</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पसीना और गर्म हवाएं चेहरे की नमी को छीन लेती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे टैनिंग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पिंपल्स</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रैशेज और डल स्किन जैसी दिक्कतें पैदा होने लगती हैं। इस सीजन में लोग स्किन केयर टिप्स की तलाश में हैं। डॉक्टर कहते हैं कि इस वक्त महंगी प्रोडक्ट्स के अलावा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कुछ रोजाना की आसान आदतें भी आपकी स्किन को हेल्दी और ग्लोइंग बनाए रख सकती हैं। खासकर उन लोगों को</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो दिन में ज्यादा समय धूप में बिताते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपनी स्किन का ख्याल ज्यादा रखना चाहिए। कई शहरों में इस बार तापमान काफी बढ़ रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो सीधा आपकी त्वचा पर असर डाल रहा है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">गर्मी में सबसे जरूरी है शरीर को हाइड्रेट रखना। जब शरीर में पानी की कमी होती है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो इसका असर सबसे पहले चेहरे पर नजर आता है। इसलिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दिनभर में पर्याप्त पानी पीना बेहद जरूरी है। अब तो कई लोग अलार्म लगाकर पानी पीने की आदत भी बना रहे हैं। नींबू पानी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नारियल पानी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पुदीना ड्रिंक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और मौसमी फलों का जूस न केवल शरीर को ठंडा रखते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि स्किन को भी तरोताजा रखते हैं। इसके साथ ही हल्का और पानी से भरपूर खाना खाने की सलाह भी दी जाती है। सलाद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तरबूज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खीरा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और हरी सब्जियां गर्मियों में काफी फायदेमंद मानी जाती हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि तला-भुना और ज्यादा मसालेदार खाना स्किन की समस्याएं बढ़ा सकता है। धूप में निकलने से पहले सनस्क्रीन लगाना तो लगभग जरूरी हो गया है। कई लोग टैनिंग और सन डैमेज से बचने के लिए विटामिन-</span>C <span lang="hi" xml:lang="hi">सीरम भी इस्तेमाल कर रहे हैं। अगर आपकी स्किन सेंसिटिव है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो डॉक्टर की सलाह पर प्रोडक्ट चुनना ज्यादा बेहतर है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">गर्मी में आराम और अच्छी नींद को भी स्किन की सेहत से जोड़ा जाता है। देर रात तक मोबाइल चलाने और कम नींद लेने से आंखों के नीचे डार्क सर्कल और चेहरे पर थकान दिखने लगती है। इसलिए</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">सोने से पहले स्क्रीन टाइम कम करने की सलाह दी जाती है। कुछ लोग रात में हल्की स्ट्रेचिंग या किताब पढ़ने की आदत भी बना रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे दिमाग शांत रहता है। इसके अलावा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ढीले और कॉटन के कपड़े पहनना भी गर्मी में काफी राहत देता है। सिंथेटिक कपड़ों से पसीना ज्यादा आता है और स्किन इरिटेशन बढ़ सकता है। मानसिक तनाव का असर भी चेहरे पर नजर आता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसीलिए मेडिटेशन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हल्की एक्सरसाइज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और प्रकृति के बीच समय बिताना फायदेमंद हो सकता है। दिन में बार-बार चेहरा धोना और रोज नहाना भी जरूरी माना जा रहा है। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विशेषज्ञ ज्यादा फेसवॉश के इस्तेमाल से बचने की सलाह देते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि इससे स्किन ड्राई हो सकती है। गर्मियों में स्किन केयर टिप्स में सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि शरीर और स्किन दोनों को ठंडा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साफ और हाइड्रेट रखना चाहिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि आपका चेहरा लंबे समय तक ग्लोइंग और स्मूथ बना रह सके।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>लाइफ स्टाइल</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 15 May 2026 18:06:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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                <title>केला टेढ़ा क्यों होता है? इसके पीछे छिपा है गुरुत्वाकर्षण और सूरज की रोशनी का साइंस। जानें यहां</title>
                                    <description><![CDATA[क्या आपने सोचा है केला हमेशा टेढ़ा ही क्यों होता है? जानिए गुरुत्वाकर्षण, रोशनी और ऑक्सिन हार्मोन से जुड़ा इसका वैज्ञानिक कारण।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/life-style/the-science-of-gravity-and-sunlight-is-hidden-behind-why/article-53372"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-14t174223.048.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">केला दुनिया के सबसे लोकप्रिय फलों में से एक है। सुबह के नाश्ते से लेकर जिम की डाइट तक</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">लोग इसे हर दिन खाते हैं। इसके स्वाद और सेहत के फायदों के साथ-साथ इसका आकार भी लोगों का ध्यान खींचता है। अक्सर लोगों के मन में ये सवाल आता है कि आखिर केला हमेशा टेढ़ा क्यों होता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सीधे क्यों नहीं बढ़ता। देखने में साधारण लगने वाली इस बात के पीछे एक दिलचस्प वैज्ञानिक प्रक्रिया छिपी हुई है। वैज्ञानिक इसे </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">ऋणात्मक गुरुत्वाकर्षण प्रतिक्रिया</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">या नेगेटिव जियोट्रॉपिज्म से समझाते हैं। यह प्रक्रिया ही है जो केला उगते समय अपना आकार बदलता है और अंत में मुड़ा हुआ दिखाई देता है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जानकारी के मुताबिक</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">केले की शुरुआत बाकी फलों की तरह सीधी नहीं होती। जब फल छोटे होते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो वे नीचे की ओर लटके रहते हैं। केले के बड़े गुच्छे को </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">हैंड</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">कहा जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और इनमें लगे छोटे फल शुरुआत में जमीन की तरफ झुके रहते हैं। लेकिन जैसे-जैसे इनका आकार बढ़ता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पौधे के भीतर हार्मोन सक्रिय हो जाते हैं। ये हार्मोन केले को सूरज की रोशनी की तरफ बढ़ने का सिग्नल देते हैं। उधर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गुरुत्वाकर्षण फल को नीचे खींचता है और पौधे की प्राकृतिक प्रवृत्ति उसे रोशनी की दिशा में मोड़ने लगती है। इस खिंचाव के बीच</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">केला धीरे-धीरे मुड़ जाता है। अगर केले पर गुरुत्वाकर्षण और प्रकाश का यह दबाव न होता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो शायद उसका आकार बिलकुल अलग होता।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस पूरी प्रक्रिया में </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">'<span lang="hi" xml:lang="hi">ऑक्सिन</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">नाम का हार्मोन बेहद महत्वपूर्ण होता है। यह हार्मोन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो पौधों की ग्रोथ को नियंत्रित करता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">केले के अलग-अलग हिस्सों में समान रूप से नहीं फैला होता। यदि फल के किसी हिस्से पर ज्यादा रोशनी पड़ती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो ऑक्सिन दूसरे हिस्से में जमा होने लगता है। इससे एक तरफ की कोशिकाएं तेजी से बढ़ती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि दूसरी तरफ की ग्रोथ सामान्य रहती है। यही असमान बढ़त केले को सीधा नहीं रहने देती</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और उसका आकार मुड़ने लगता है। वैज्ञानिकों के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यही कारण है कि केले में प्राकृतिक कर्व दिखाई देता है। इसी वजह से लगभग हर प्रकार का केला थोड़ा या ज्यादा टेढ़ा नजर आता है। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अलग-अलग मौसम और खेती की परिस्थितियों के कारण इसका घुमाव थोड़ा कम या ज्यादा हो सकता है। कई वैज्ञानिक प्रयोगों में भी यह साबित हुआ है कि रोशनी की दिशा बदलने पर केले के बढ़ने का एंगल भी बदल जाता है। इसलिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह साधारण चीज भी अपने अंदर गहरा विज्ञान छुपाए हुए है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>लाइफ स्टाइल</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 May 2026 18:17:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हंता वायरस को लेकर WHO ने दिया अलर्ट, क्या दुनिया पर फिर मंडरा रहा कोरोना जैसी महामारी का खतरा?</title>
                                    <description><![CDATA[WHO ने हंता वायरस के बढ़ते मामलों पर दुनियाभर को सतर्क रहने को कहा। एक्सपर्ट्स ने बताया क्यों यह कोविड जैसी महामारी नहीं है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/life-style/who-gave-alert-regarding-hanta-virus-is-the-threat-of/article-53284"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-13t170900.890.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हंता वायरस संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">विश्व स्वास्थ्य संगठन (</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">WHO) </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ने सभी देशों को सतर्क रहने की सलाह दी है। </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">WHO </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">की चेतावनी के बाद</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कई देशों की स्वास्थ्य एजेंसियां सक्रिय हो गई हैं। हाल के हालात ये हैं कि अंटार्कटिका की ओर जा रहे क्रूज जहाज</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">एमवी होंडियस में इस वायरस का प्रकोप सामने आया है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जहां तीन लोगों की मौत हो गई है। कई यात्री संक्रमित पाए गए हैं और कुछ को आइसोलेशन में रखा गया है। बताया जा रहा है कि जहाज पर मौजूद लोग विभिन्न देशों से आए थे</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">और इस वजह से संक्रमण के वैश्विक स्तर पर फैलने की चिंता बढ़ गई है। </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">WHO </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अधानोम घेब्रेयसस ने कहा कि लंबी ऊष्मायन अवधि और लगातार होने वाली अंतरराष्ट्रीय यात्राएं चिंता को बढ़ा सकती हैं। फिर भी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">विशेषज्ञ इस वायरस को कोरोना जैसी वैश्विक महामारी मानने से इनकार कर रहे हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हंता वायरस मुख्य रूप से चूहों और अन्य कृंतकों के मूत्र</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मल या लार के संपर्क से फैलता है। संक्रमित स्थानों की हवा में मौजूद कणों के जरिए भी इंसान संक्रमित हो सकता है। अमेरिका और दक्षिण अमेरिका में इसके कई स्ट्रेन पहले भी देखे जा चुके हैं। कुछ मामलों में</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">यह गंभीर फेफड़ों की बीमारी का कारण बनता है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जिसे हंता वायरस पल्मोनरी सिंड्रोम कहा जाता है। डॉक्टरों का कहना है कि इस बीमारी में सांस लेने में तकलीफ तेजी से बढ़ सकती है और हालत अचानक बिगड़ जाती है। फिलहाल चर्चा में जो स्ट्रेन है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">उसे एंडीज स्ट्रेन कहा जा रहा है। यह सीमित स्तर पर इंसान से इंसान में फैल सकता है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">लेकिन इसके लिए अत्यधिक करीबी संपर्क जरूरी होता है। इसलिए एक्सपर्ट्स इसे कोविड-19 के समान खतरा नहीं मानते।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">क्रूज जहाज पर सामने आए मामलों ने लोगों को कोरोना काल की याद दिला दी है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि कुछ यात्री संक्रमण की पुष्टि से पहले ही विभिन्न देशों में पहुंच गए थे। इसके बाद से यूरोप और उत्तरी अमेरिका के कुछ एयरपोर्ट्स और बंदरगाहों पर निगरानी बढ़ा दी गई है। हालांकि </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">WHO </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अधिकारियों का कहना है कि स्थिति अभी नियंत्रित है और इसे </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">'</span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सीमित प्रकोप</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">' </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">माना जा रहा है। मिनेसोटा विश्वविद्यालय के संक्रामक रोग विशेषज्ञों का भी मानना है कि हंता वायरस का फैलाव काफी धीमा होता है। यह कोविड की तरह हवा में तेजी से नहीं फैलता और न ही बिना लक्षण वाले रोगियों से बड़े स्तर पर संक्रमण फैलने के संकेत मिले हैं। विशेषज्ञों के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">वायरस की म्यूटेशन स्पीड भी कम है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इसलिए इसके अचानक बेहद संक्रामक बन जाने की संभावना कम है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">फिलहाल</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">स्वास्थ्य एजेंसियां लोगों से घबराने के बजाय सतर्क रहने की अपील कर रही हैं। </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">WHO </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">और विभिन्न देशों के स्वास्थ्य मंत्रालयों ने साफ-सफाई बनाए रखने</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">चूहों और संक्रमित जानवरों से दूरी रखने और किसी भी लक्षण के दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करने की सलाह दी है। शुरुआती लक्षणों में तेज बुखार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बदन दर्द</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">थकान और सांस लेने में परेशानी शामिल हो सकते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि लगातार निगरानी जरूरी है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">क्योंकि अंतरराष्ट्रीय यात्राओं के दौरान किसी भी संक्रमण को हल्के में नहीं लेना चाहिए।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>लाइफ स्टाइल</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 May 2026 17:23:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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                <title>गर्मी में रामबाण घरेलू ड्रिंक: किशमिश-सौंफ पानी पीने से मिलते हैं गजब के फायदे, जानें कैसे आजमाएं</title>
                                    <description><![CDATA[गर्मियों में किशमिश और सौंफ का पानी शरीर को ठंडक देने, पाचन सुधारने और एनर्जी बढ़ाने में मदद कर सकता है। जानें इसके फायदे और उपयोग का तरीका।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/life-style/drinking-raisin-fennel-water-a-panacea-home-drink-in-summer-gives/article-53275"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-13t152405.626.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><strong>Raisin Fennel And Water Benefits:</strong> गर्मियों में अपने शरीर को ठंडा और हाइड्रेट रखना बेहद महत्वपूर्ण होता है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि तेज धूप और उमस की वजह से डिहाइड्रेशन की समस्या जल्दी बढ़ जाती है। इसीलिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लोग घरेलू नुस्खों की ओर बढ़ रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और इनमें से एक है किशमिश और सौंफ का पानी। कई लोग इसे सुबह खाली पेट पीना पसंद करते हैं। ये एक सरल सा पेय है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो ना सिर्फ शरीर को ठंडक देता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि पाचन और ऊर्जा स्तर को भी संतुलित रखने में मदद करता है। गर्मियों में यह नुस्खा खासकर तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">आयुर्वेद के जानकारों के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">किशमिश और सौंफ का पानी गर्मियों में स्वास्थ्य के लिए काफी लाभकारी माना जाता है। दोनों की तासीर ठंडी होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे शरीर का तापमान संतुलित रहने में मदद मिलती है। बताया जाता है कि रात को एक गिलास पानी में लगभग एक चम्मच सौंफ और </span>4<span lang="hi" xml:lang="hi"> से </span>5<span lang="hi" xml:lang="hi"> किशमिश भिगोकर रख दें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और सुबह इसे छानकर पिएं। कुछ लोग किशमिश को चबाकर भी खाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह आसान सी प्रक्रिया शरीर को डिटॉक्स करने और पूरे दिन हल्का महसूस कराने में मददगार हो सकती है। यह दवा तो नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन एक सहायक स्वास्थ्य पेय के रूप में देखा जा सकता है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">गर्मियों में किशमिश और सौंफ का पानी पीने से शरीर को ठंडक मिलती है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">और लू लगने का जोखिम कुछ हद तक कम हो सकता है। सौंफ पाचन तंत्र को शांत रखने में मदद करती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे गैस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एसिडिटी और पेट फूलने जैसी समस्याओं में राहत मिलती है। वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किशमिश में प्राकृतिक शुगर और फाइबर होते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो शरीर को हल्की ऊर्जा देने के साथ-साथ कब्ज में भी राहत पहुंचाने में मदद कर सकते हैं। कई लोग बताते हैं कि इसे नियमित रूप से लेने से सुबह पेट साफ रहता है और दिन भर भारीपन महसूस नहीं होता।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इसके अलावा</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह भी कहा जाता है कि यह पेय त्वचा पर भी अच्छा असर डाल सकता है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर से टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में मदद करते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे त्वचा पर नैचुरल ग्लो आ सकता है। गर्मियों में होने वाले पिंपल्स और रूखापन जैसी समस्याओं में भी कुछ लोग इसे फायदेमंद मानते हैं। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसका असर व्यक्ति की लाइफस्टाइल और डाइट पर भी निर्भर करता है। डॉक्टरों की सलाह है कि किसी भी घरेलू नुस्खे को संतुलित खानपान और पर्याप्त पानी के साथ ही अपनाना चाहिए।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>लाइफ स्टाइल</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 May 2026 15:49:15 +0530</pubDate>
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