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गरीबी की जंजीरों को तोड़कर सफलता के आकाश पर चमकता सितारा मुकेश कुमार मासूम, लाखों लोगों के लिए बने प्रेरणा और आदर्श
मुंबई
आज की तारीख में मुकेश कुमार मासूम किसी परिचय के मोहताज नहीं हैँ। आज पूरे देश में " मासूम " शब्द को एक सुपर ब्रांड बनाने वाले मुकेश कुमार मासूम की चर्चा जोर- शोर से हो रही है। उनके लिखे गीत " दिल का खुदा " ( गायक - पद्मश्री पद्म भूषण उदित नारायण ) " बेदर्दी " ( गायक - अगम कुमार निगम ) सहित दर्जनों गीत एक के बाद एक सुपर हिट हो रहे हैँ। सैकड़ों गीत अभी रिलीज होने वाले हैँ।
भारत की समकालीन साहित्यिक और सांस्कृतिक दुनिया में कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं जिनकी कहानी केवल सफलता की कहानी नहीं होती, बल्कि संघर्ष, संकल्प और सृजन की अमर प्रेरक गाथा बन जाती है। मुकेश कुमार मासूम ऐसा ही एक नाम है—एक संवेदनशील रचनाकार, प्रखर विचारक और बहुआयामी व्यक्तित्व, जिन्होंने अभावों की कठोर जमीन से उठकर साहित्य, पत्रकारिता और बॉलीवुड की दुनिया में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की है।
उनकी लेखनी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वह सरल भाषा में गहरी संवेदनाओं को व्यक्त करती है। उनके शब्दों में जीवन की सच्चाइयाँ हैं, समाज की धड़कन है और मानवीय भावनाओं की वह ऊष्मा है जो पाठकों और श्रोताओं के मन को सीधे छू जाती है। यही कारण है कि उनकी रचनाएँ केवल साहित्यिक अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि अनुभवों और संवेदनाओं का जीवंत दस्तावेज़ बन जाती हैं।
अभावों में बीता बचपन, पर हौसला हिमालय जैसा :
मुकेश कुमार मासूम जन्म 13 जुलाई 1974 को उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा क्षेत्र के गाँव दयानतपुर में एक साधारण श्रमिक परिवार में हुआ। बचपन से ही जीवन ने उन्हें संघर्षों से परिचित करा दिया था।
वह समय जब बच्चों के हाथों में किताबें और खिलौने होने चाहिए थे, उस समय उनके हाथों में मजदूरी और सिलाई के औज़ार थे। परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि जब पढ़ने का समय था तब उनके पास स्कूल की फीस भरने तक के पैसे नहीं होते थे। कई बार तो घर में भोजन तक का अभाव हो जाता था, ऐसे में फीस भरना तो बहुत दूर की बात थी।
लेकिन शिक्षा के प्रति उनका प्रेम कभी कम नहीं हुआ। परिस्थितियों के कारण पढ़ाई छूट गई, परंतु उनके भीतर ज्ञान प्राप्त करने की तीव्र इच्छा जीवित रही। बाद के वर्षों में उन्होंने दिन-रात परिश्रम करके अपने इस अधूरे स्वप्न को पूरा किया।
खुद कमाया, खुद पढ़ाई की और आगे चलकर M.A. (स्नातकोत्तर) तथा L.L.B. (कानून) की शिक्षा प्राप्त की। वर्तमान में वे Ph.D. (शोधरत)भी हैं। उन्होने अपनी जन्मभूमि दयानतपुर ( जेवर ) और कर्मभूमि मुंबई दोनों का ही नाम रौशन किया है।
संघर्ष की आग में तपकर बनी पहचान :
बेहतर भविष्य और आत्मसम्मानपूर्ण जीवन की तलाश में 22 अप्रैल 1992 को वे अकेले ही सपनों की नगरी मुंबई पहुँचे। वे आर्थिक तंगी से हमेशा के लिए छुटकारा पाना चाहते थे। इसलिए घर से भागकर मुंबई आ गये। उस वक्त उनकी जेब में मुश्किल से पांच रूपये और दो सूखी रोटियां थी।
यह वह शहर था जहाँ लाखों सपने जन्म लेते हैं, लेकिन बहुत कम लोग उन्हें साकार कर पाते हैं। यहाँ ना तो उनका कोई दोस्त था, ना रिश्तेदार ना परिवार। मुंबई में उनका संघर्ष बेहद कठिन था। जीवन के शुरुआती वर्षों में वे सिलाई की फैक्ट्रियों में लगातार कई-कई दिन और रात तक बिना सोए काम किया करते थे। थकान और दर्द मानो उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गए थे।
सिलाई मशीन पर काम करते समय कई बार मशीन की सुई उनकी उँगलियों में टूटकर घुस जाती थी।सामान्य व्यक्ति ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर के पास जाता, लेकिन आर्थिक तंगी इतनी गहरी थी कि वे डॉक्टर के पास तक भी नहीं जा पाते थे। वे किसी मेडिकल स्टोर से सस्ती दवा ले लेते और उसी से उँगली से सुई निकलवाकर फिर से काम में लग जाते थे।

पद्मश्री, पद्म भूषण, उदित नारायण व रॉक स्टार संगीत मासूम के साथ मुकेश कुमार मासूम
ऐसी परिस्थितियाँ किसी भी व्यक्ति का मनोबल तोड़ सकती थीं, लेकिन मुकेश कुमार मासूम का हौसला हिमालय की तरह अडिग था। कठिनाइयों ने उन्हें कमजोर नहीं किया, बल्कि और अधिक मजबूत और संघर्षशील बना दिया।
साहित्य और सिनेमा के बीच एक सशक्त सेतु :
मुकेश कुमार मासूम स्क्रीन राइटर्स एसोसिएशन (SWA) तथा इंडियन मोशन पिक्चर्स प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (IMPPA) के सदस्य हैं, जो साहित्य और फिल्म उद्योग दोनों क्षेत्रों में उनके सक्रिय योगदान का प्रमाण है।
बॉलीवुड में वे एक प्रतिष्ठित गीतकार के रूप में पहचाने जाते हैं और उनके लिखे गीतों को देश के कई दिग्गज गायकों ने अपनी आवाज़ दी है। महान सिंगर अगम कुमार निगम, पद्मश्री सोनू निगम, फेमस संगीतकार दिलीप सेन, महान संगीतकार निखिल कामथ सहित बॉलीवुड की बड़ी हस्तियां उनके लेखन की प्रशंसा करती हैँ।
उनके चर्चित गीतों में —
“दिल तोड़ने वाला, दिल का खुद निकला (उदित नारायण),
“दारू सिगरेट छोड़ दे” (ममता शर्मा),
“जीवन एक अमृत है” (उदित नारायण),
“मेरे मन को” (उदित नारायण),
“भगवान ज़रूरी है” (अल्तमश फ़रीदी),
“खाटू श्याम जाना है” (अनूप जलोटा),
“जय भीम बोलो रे” (मोहम्मद अज़ीज़),
“ब्रेकअप पार्टी” (हरमन नाज़िम),
“मेनू हँसके विदा कर दे” (शबाब साबरी),
“बौद्ध धर्म के अनुयाई” (अनूप जलोटा)
और “उस बेदर्दी ने दिल तोड़ा” (अगम कुमार निगम) जैसे गीत विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं।उनका लिखा फ़िल्म " धन्नो ढाबे वाली " का गीत भी बहुत लोकप्रिय हुआ।
उन्होंने अगम कुमार निगम, समीर खान, ममता शर्मा, अल्तमश फ़रीदी, शबाब साबरी, स्वर्गीय मोहम्मद अज़ीज़, पद्मश्री कुमार शानू, पद्मश्री अनूप जलोटा तथा पद्मश्री और पद्मभूषण उदित नारायण जैसे प्रतिष्ठित गायकों के लिए गीत लिखे हैं।
उनके शब्द श्रोताओं के मन को उसी प्रकार शीतलता प्रदान करते हैं जैसे तपते रेगिस्तान में अचानक मिल जाने वाली शीतल छाँव।
साहित्य और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान :
साहित्य के क्षेत्र में उनकी चर्चित पुस्तक गुलिस्तां” सहित कई कृतियाँ प्रकाशित हो चुकी हैं, जिन्हें पाठकों और समीक्षकों से व्यापक सराहना मिली है। उनकी शानदार ऑडियो बुक " पंडित जी का लोटा ", पुनरावृति और बड़े दिलवाला " सभी डिजिटल प्लेटफार्म पर उपलब्ध हैँ और देश - विदेश के अनगिनत लोगों द्वारा सराही जा रही हैँ।
पत्रकारिता के क्षेत्र में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है। वे मुंबई के एक बहुभाषीय सात दैनिक समाचार पत्रों के समूह में वर्षों तक संपादक रहे और अपने संपादकीय लेखन के माध्यम से समाज के अनेक मुद्दों पर प्रभावशाली विचार प्रस्तुत करते रहे।

पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद जी मुकेश कुमार मासूम को सम्मानित करते हुए। साथ में हैँ केंद्रीय सामाजिक न्याय व अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास आठवले तथा विधान परिषद सदस्य डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल
वर्तमान कार्य और नई पहल :
वर्तमान में वे सिनेविस्टा लिमिटेड जैसी प्रतिष्ठित फिल्म और टेलीविजन निर्माण कंपनी सहित बॉलीवुड की कई नामचीन हस्तियों के लिए लेखन कार्य कर रहे हैं।उनका बेटा संगीत मासूम एक होनहार और प्रसिद्ध अभिनेता है।
इसके साथ ही वे शीघ्र ही “राष्ट्रमाता पॉडकास्ट” भी शुरू करने जा रहे हैं, जिसमें देश की जानी-मानी हस्तियों के साक्षात्कार प्रस्तुत किए जाएंगे।
सम्मान और उपलब्धियाँ :
मुकेश कुमार मासूम की साहित्यिक और सांस्कृतिक उपलब्धियों को देखते हुए उन्हें समय-समय पर अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है। उन्हें “कवि भूषण सम्मान”तथा “पंडित दीनदयाल उपाध्याय पुरस्कार” जैसे महत्वपूर्ण और प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं।
उनकी उपलब्धियों का सम्मान देश के सर्वोच्च स्तर पर भी हुआ है। भारत के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी उन्हें उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया है।
प्रेरणा की जीवंत मिसाल :
मुकेश कुमार मासूम का जीवन केवल एक व्यक्ति की सफलता की कहानी नहीं, बल्कि संघर्ष, संकल्प और सृजन की प्रेरक गाथा है। अभावों में जन्म लेकर, कठिनाइयों से जूझते हुए और अपने अदम्य साहस के बल पर उन्होंने जो मुकाम हासिल किया है, वह यह सिद्ध करता है कि सच्ची प्रतिभा और अथक परिश्रम के बल पर साधारण पृष्ठभूमि से उठकर भी असाधारण ऊँचाइयों तक पहुँचा जा सकता है।
आज देशभर में लाखों लोग उनकी संघर्षमय जीवन यात्रा से प्रेरणा लेते हैं और यह मानते हैं कि मुकेश कुमार मासूम केवल एक गीतकार या लेखक नहीं, बल्कि संघर्ष से सफलता तक की जीवंत मिसाल हैं


