योगी बोले- मारीच और सुबाहु भी लैंड जिहाद में थे शामिल

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लखनऊ में रामभद्राचार्य की श्रीरामकथा में पहुंचे मुख्यमंत्री, कहा- राम का जीवन आज भी समाज के लिए आदर्श, लव जिहाद और सामाजिक चुनौतियों पर भी रखी बात

लखनऊ में आयोजित जगद्गुरु रामभद्राचार्य की श्रीरामकथा के समापन दिवस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रामायण के विभिन्न प्रसंगों का उल्लेख करते हुए वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों से उन्हें जोड़ने की कोशिश की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं है, बल्कि समाज को दिशा देने वाला आदर्श भी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के समय में भी राम के जीवन से कई महत्वपूर्ण सीख ली जा सकती हैं और समाज की अनेक समस्याओं का समाधान उनके आदर्शों में दिखाई देता है।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में रामायण के पात्रों का जिक्र करते हुए कहा कि जब भगवान राम वनवास के दौरान दंडकारण्य पहुंचे थे, तब वहां खर-दूषण, मारीच और सुबाहु जैसे राक्षसों का प्रभाव था। उन्होंने कहा कि ये शक्तियां साधु-संतों को उनके स्थानों से हटाने का काम करती थीं। इसी संदर्भ में उन्होंने मारीच और सुबाहु को लैंड जिहाद से जोड़ते हुए टिप्पणी की। योगी ने कहा कि जब भी नकारात्मक शक्तियां समाज में प्रभाव बढ़ाती हैं, तब विनाश और अव्यवस्था का माहौल बनता है। रामकथा ऐसे ही प्रसंगों के माध्यम से समाज को सजग रहने का संदेश देती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान राम ने अपने जीवन में नारी सम्मान और मर्यादा की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जब लव जिहाद जैसे मुद्दों पर चर्चा होती है, तब राम का जीवन एक आदर्श उदाहरण के रूप में सामने आता है। उनके अनुसार श्रीराम ने अपने आचरण से यह दिखाया कि समाज में महिलाओं का सम्मान और सुरक्षा कितनी महत्वपूर्ण है। उन्होंने लोगों से रामकथा को केवल सुनने तक सीमित न रखने बल्कि उसके संदेशों को जीवन में उतारने का आग्रह किया।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि जिसने भी भगवान राम को अपने जीवन का आदर्श बनाया, उसका कल्याण हुआ। वहीं जो लोग राम के मार्ग से भटके, उनका इतिहास में सम्मानजनक स्थान नहीं बच पाया। उन्होंने रावण, मारीच और अन्य पात्रों का उदाहरण देते हुए कहा कि उच्च कुल में जन्म लेने के बावजूद गलत रास्ता अपनाने वालों का अंत अच्छा नहीं हुआ। दूसरी ओर विभीषण और हनुमान जैसे पात्र आज भी श्रद्धा और सम्मान के साथ याद किए जाते हैं क्योंकि उन्होंने धर्म और सत्य का साथ चुना।

योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक मूल्यों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत की पहचान उसकी आस्था, संस्कृति और परंपराओं से है। जो लोग भारत के प्रति निष्ठा और यहां की सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान नहीं रखते, उन्हें देश की भावना को समझने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज को जाति, धर्म और अन्य आधारों पर बांटने की कोशिशें समय-समय पर होती रही हैं, लेकिन संत परंपरा हमेशा लोगों को जोड़ने का काम करती रही है।

उन्होंने रामजन्मभूमि आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि सदियों तक संतों और श्रद्धालुओं ने भगवान राम के जन्मस्थान के लिए संघर्ष किया। यह संघर्ष किसी व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं बल्कि आस्था और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के लिए था। मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान राम ऐसा नाम हैं जो उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक पूरे देश को जोड़ने की क्षमता रखते हैं। यही कारण है कि राम भारतीय समाज की एकता और सांस्कृतिक चेतना के केंद्र में बने हुए हैं।

अपने संबोधन के दौरान योगी आदित्यनाथ ने जगद्गुरु रामभद्राचार्य की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार मध्यकाल में गोस्वामी तुलसीदास ने समाज को जागरूक करने और एकजुट करने का कार्य किया था, उसी प्रकार आज रामभद्राचार्य समाज में आध्यात्मिक चेतना फैलाने का कार्य कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने उन्हें आधुनिक युग का प्रेरक संत बताते हुए कहा कि उन्होंने शिक्षा और सेवा के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय योगदान दिया है। चित्रकूट में दिव्यांग विश्वविद्यालय की स्थापना इसका उदाहरण है।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने रामभद्राचार्य को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। इस दौरान दोनों के बीच कुछ देर चर्चा भी हुई। कथा स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे और समापन दिवस के अवसर पर धार्मिक माहौल देखने को मिला। आयोजन के दौरान रामकथा के माध्यम से समाज, संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों पर कई महत्वपूर्ण संदेश दिए गए, जिन पर श्रद्धालुओं ने भी अपनी सहमति जताई।

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09 Jun 2026 By Vaishnavi.J

योगी बोले- मारीच और सुबाहु भी लैंड जिहाद में थे शामिल

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लखनऊ में आयोजित जगद्गुरु रामभद्राचार्य की श्रीरामकथा के समापन दिवस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रामायण के विभिन्न प्रसंगों का उल्लेख करते हुए वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों से उन्हें जोड़ने की कोशिश की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं है, बल्कि समाज को दिशा देने वाला आदर्श भी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के समय में भी राम के जीवन से कई महत्वपूर्ण सीख ली जा सकती हैं और समाज की अनेक समस्याओं का समाधान उनके आदर्शों में दिखाई देता है।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में रामायण के पात्रों का जिक्र करते हुए कहा कि जब भगवान राम वनवास के दौरान दंडकारण्य पहुंचे थे, तब वहां खर-दूषण, मारीच और सुबाहु जैसे राक्षसों का प्रभाव था। उन्होंने कहा कि ये शक्तियां साधु-संतों को उनके स्थानों से हटाने का काम करती थीं। इसी संदर्भ में उन्होंने मारीच और सुबाहु को लैंड जिहाद से जोड़ते हुए टिप्पणी की। योगी ने कहा कि जब भी नकारात्मक शक्तियां समाज में प्रभाव बढ़ाती हैं, तब विनाश और अव्यवस्था का माहौल बनता है। रामकथा ऐसे ही प्रसंगों के माध्यम से समाज को सजग रहने का संदेश देती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान राम ने अपने जीवन में नारी सम्मान और मर्यादा की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जब लव जिहाद जैसे मुद्दों पर चर्चा होती है, तब राम का जीवन एक आदर्श उदाहरण के रूप में सामने आता है। उनके अनुसार श्रीराम ने अपने आचरण से यह दिखाया कि समाज में महिलाओं का सम्मान और सुरक्षा कितनी महत्वपूर्ण है। उन्होंने लोगों से रामकथा को केवल सुनने तक सीमित न रखने बल्कि उसके संदेशों को जीवन में उतारने का आग्रह किया।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि जिसने भी भगवान राम को अपने जीवन का आदर्श बनाया, उसका कल्याण हुआ। वहीं जो लोग राम के मार्ग से भटके, उनका इतिहास में सम्मानजनक स्थान नहीं बच पाया। उन्होंने रावण, मारीच और अन्य पात्रों का उदाहरण देते हुए कहा कि उच्च कुल में जन्म लेने के बावजूद गलत रास्ता अपनाने वालों का अंत अच्छा नहीं हुआ। दूसरी ओर विभीषण और हनुमान जैसे पात्र आज भी श्रद्धा और सम्मान के साथ याद किए जाते हैं क्योंकि उन्होंने धर्म और सत्य का साथ चुना।

योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक मूल्यों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत की पहचान उसकी आस्था, संस्कृति और परंपराओं से है। जो लोग भारत के प्रति निष्ठा और यहां की सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान नहीं रखते, उन्हें देश की भावना को समझने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज को जाति, धर्म और अन्य आधारों पर बांटने की कोशिशें समय-समय पर होती रही हैं, लेकिन संत परंपरा हमेशा लोगों को जोड़ने का काम करती रही है।

उन्होंने रामजन्मभूमि आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि सदियों तक संतों और श्रद्धालुओं ने भगवान राम के जन्मस्थान के लिए संघर्ष किया। यह संघर्ष किसी व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं बल्कि आस्था और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के लिए था। मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान राम ऐसा नाम हैं जो उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक पूरे देश को जोड़ने की क्षमता रखते हैं। यही कारण है कि राम भारतीय समाज की एकता और सांस्कृतिक चेतना के केंद्र में बने हुए हैं।

अपने संबोधन के दौरान योगी आदित्यनाथ ने जगद्गुरु रामभद्राचार्य की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार मध्यकाल में गोस्वामी तुलसीदास ने समाज को जागरूक करने और एकजुट करने का कार्य किया था, उसी प्रकार आज रामभद्राचार्य समाज में आध्यात्मिक चेतना फैलाने का कार्य कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने उन्हें आधुनिक युग का प्रेरक संत बताते हुए कहा कि उन्होंने शिक्षा और सेवा के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय योगदान दिया है। चित्रकूट में दिव्यांग विश्वविद्यालय की स्थापना इसका उदाहरण है।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने रामभद्राचार्य को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। इस दौरान दोनों के बीच कुछ देर चर्चा भी हुई। कथा स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे और समापन दिवस के अवसर पर धार्मिक माहौल देखने को मिला। आयोजन के दौरान रामकथा के माध्यम से समाज, संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों पर कई महत्वपूर्ण संदेश दिए गए, जिन पर श्रद्धालुओं ने भी अपनी सहमति जताई।

https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/yogi-said-marich-and-subahu-were-also-involved-in-land/article-55451

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