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मुंबई लीग से IPL तक का सपना, चिन्मय सुतार की नजर अब बड़े मंच पर
स्पोर्ट्स डेस्क
मुंबई क्रिकेट लीग के ऑरेंज कैप विजेता चिन्मय सुतार ने बीमारी से वापसी की कहानी सुनाई, कहा- इस सीजन का लक्ष्य IPL फ्रेंचाइजी का ध्यान आकर्षित करना है।
मुंबई क्रिकेट लीग में पिछले सीजन शानदार प्रदर्शन कर ऑरेंज कैप जीतने वाले युवा बल्लेबाज चिन्मय सुतार अब अपने क्रिकेट करियर के अगले बड़े लक्ष्य पर नजर लगाए हुए हैं। मराठा रॉयल्स के लिए खेलने वाले इस प्रतिभाशाली खिलाड़ी का सपना अब इंडियन प्रीमियर लीग यानी IPL तक पहुंचने का है। आगामी मुंबई क्रिकेट लीग को वह अपने लिए एक बड़े अवसर के रूप में देख रहे हैं और उनका मानना है कि यदि इस बार भी उनका प्रदर्शन दमदार रहा तो IPL फ्रेंचाइजी टीमों का ध्यान उनकी ओर जरूर जाएगा।
चिन्मय सुतार ने हाल ही में अपने क्रिकेट सफर, शुरुआती संघर्ष, बीमारी के दौर और परिवार से मिले समर्थन को लेकर खुलकर बातचीत की। उन्होंने बताया कि क्रिकेट उनके जीवन का हिस्सा बचपन से रहा है। महज पांच साल की उम्र में उन्होंने बल्ला थाम लिया था। उस समय उन्हें यह अंदाजा नहीं था कि आगे चलकर क्रिकेट ही उनका पेशा बनेगा, लेकिन खेल के प्रति लगाव धीरे-धीरे जुनून में बदलता गया।
उनके क्रिकेट करियर की सबसे बड़ी प्रेरणा उनके पिता राजेश सुतार रहे हैं। राजेश खुद भी क्रिकेट से जुड़े रहे हैं और उन्होंने अपने दौर में कई अच्छे खिलाड़ियों के साथ खेला। चिन्मय बताते हैं कि बचपन में वह अक्सर अपने पिता को मैदान पर खेलते हुए देखा करते थे। वहीं से उनके मन में क्रिकेट के प्रति रुचि पैदा हुई। घर में खेल का माहौल होने के कारण उन्हें शुरू से ही क्रिकेट की बारीकियां समझने का मौका मिला। उन्होंने कहा कि जब भी वह अपने पिता को खेलते देखते थे तो उन्हें भी मैदान पर उतरने की इच्छा होती थी।
चिन्मय के अनुसार शुरुआती वर्षों में क्रिकेट उनके लिए सिर्फ एक खेल था, जिसे वह पूरी तरह आनंद के साथ खेलते थे। लेकिन जैसे-जैसे उन्होंने आयु वर्ग की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना शुरू किया, उन्हें प्रोफेशनल क्रिकेट की वास्तविक तस्वीर समझ में आने लगी। स्कूल स्तर के मुकाबलों से लेकर अंडर-14 और फिर क्लब क्रिकेट तक का सफर उनके लिए सीखने का महत्वपूर्ण दौर रहा। इसी दौरान उन्हें महसूस हुआ कि क्रिकेट में आगे बढ़ने के लिए सिर्फ प्रतिभा ही नहीं बल्कि अनुशासन, मेहनत और निरंतरता भी बेहद जरूरी है।
हालांकि उनका सफर हमेशा आसान नहीं रहा। जब वह लगभग 15 साल के थे, तब उन्हें एक गंभीर बीमारी का सामना करना पड़ा। यह समय उनके क्रिकेट करियर का सबसे कठिन दौर साबित हुआ। बीमारी के कारण उन्हें करीब 10 से 11 महीने तक मैदान से दूर रहना पड़ा। किसी भी युवा खिलाड़ी के लिए यह स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण होती है, क्योंकि लंबे समय तक खेल से दूर रहने का असर शारीरिक और मानसिक दोनों स्तरों पर पड़ता है।
उस दौर को याद करते हुए चिन्मय बताते हैं कि यह उनके जीवन का बेहद भावुक और कठिन समय था। जब साथी खिलाड़ी मैदान पर अभ्यास कर रहे थे, तब वह इलाज और रिकवरी में व्यस्त थे। कई बार निराशा भी होती थी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने खुद को मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखा और वापसी की तैयारी जारी रखी। उनका मानना है कि मुश्किल समय इंसान को मजबूत बनाता है और वही अनुभव आगे की राह में सबसे बड़ी ताकत साबित होते हैं।
इस पूरे सफर में उनके पिता ने सबसे अहम भूमिका निभाई। चिन्मय कहते हैं कि उनके पिता सिर्फ उनके कोच नहीं बल्कि जीवन के सबसे बड़े मार्गदर्शक हैं। जब भी वह क्रिकेट या निजी जीवन में किसी कठिनाई का सामना करते हैं, उनके पिता हमेशा साथ खड़े रहते हैं। उन्होंने बताया कि खराब प्रदर्शन हो या आत्मविश्वास की कमी, हर मुश्किल वक्त में पिता ने उन्हें संभाला और आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। यही वजह है कि वह अपनी सफलता का बड़ा श्रेय अपने परिवार, खासकर पिता को देते हैं।
खेल की बात करें तो चिन्मय खुद को मुख्य रूप से एक टॉप ऑर्डर बल्लेबाज मानते हैं। उनका कहना है कि बल्लेबाजी ही उनकी असली पहचान है और वह टीम के लिए ऊपर के क्रम में खेलना पसंद करते हैं। हालांकि जरूरत पड़ने पर वह स्पिन गेंदबाजी भी कर सकते हैं, लेकिन उनकी प्राथमिक भूमिका बल्लेबाज की ही रहती है। पिछले सीजन में मुंबई क्रिकेट लीग में उनके बल्ले से निकले रनों ने उन्हें ऑरेंज कैप दिलाई थी और इसी प्रदर्शन ने उन्हें क्रिकेट जगत में नई पहचान भी दिलाई। अब आगामी सीजन को लेकर उनकी तैयारियां जोरों पर हैं। चिन्मय का लक्ष्य सिर्फ रन बनाना नहीं बल्कि अपने खेल में और अधिक निखार लाना है। उनका मानना है कि मुंबई क्रिकेट लीग जैसे मंच युवा खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का बड़ा अवसर देते हैं। इसी वजह से वह इस सीजन को अपने करियर का महत्वपूर्ण पड़ाव मान रहे हैं।
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मुंबई लीग से IPL तक का सपना, चिन्मय सुतार की नजर अब बड़े मंच पर
स्पोर्ट्स डेस्क
मुंबई क्रिकेट लीग में पिछले सीजन शानदार प्रदर्शन कर ऑरेंज कैप जीतने वाले युवा बल्लेबाज चिन्मय सुतार अब अपने क्रिकेट करियर के अगले बड़े लक्ष्य पर नजर लगाए हुए हैं। मराठा रॉयल्स के लिए खेलने वाले इस प्रतिभाशाली खिलाड़ी का सपना अब इंडियन प्रीमियर लीग यानी IPL तक पहुंचने का है। आगामी मुंबई क्रिकेट लीग को वह अपने लिए एक बड़े अवसर के रूप में देख रहे हैं और उनका मानना है कि यदि इस बार भी उनका प्रदर्शन दमदार रहा तो IPL फ्रेंचाइजी टीमों का ध्यान उनकी ओर जरूर जाएगा।
चिन्मय सुतार ने हाल ही में अपने क्रिकेट सफर, शुरुआती संघर्ष, बीमारी के दौर और परिवार से मिले समर्थन को लेकर खुलकर बातचीत की। उन्होंने बताया कि क्रिकेट उनके जीवन का हिस्सा बचपन से रहा है। महज पांच साल की उम्र में उन्होंने बल्ला थाम लिया था। उस समय उन्हें यह अंदाजा नहीं था कि आगे चलकर क्रिकेट ही उनका पेशा बनेगा, लेकिन खेल के प्रति लगाव धीरे-धीरे जुनून में बदलता गया।
उनके क्रिकेट करियर की सबसे बड़ी प्रेरणा उनके पिता राजेश सुतार रहे हैं। राजेश खुद भी क्रिकेट से जुड़े रहे हैं और उन्होंने अपने दौर में कई अच्छे खिलाड़ियों के साथ खेला। चिन्मय बताते हैं कि बचपन में वह अक्सर अपने पिता को मैदान पर खेलते हुए देखा करते थे। वहीं से उनके मन में क्रिकेट के प्रति रुचि पैदा हुई। घर में खेल का माहौल होने के कारण उन्हें शुरू से ही क्रिकेट की बारीकियां समझने का मौका मिला। उन्होंने कहा कि जब भी वह अपने पिता को खेलते देखते थे तो उन्हें भी मैदान पर उतरने की इच्छा होती थी।
चिन्मय के अनुसार शुरुआती वर्षों में क्रिकेट उनके लिए सिर्फ एक खेल था, जिसे वह पूरी तरह आनंद के साथ खेलते थे। लेकिन जैसे-जैसे उन्होंने आयु वर्ग की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना शुरू किया, उन्हें प्रोफेशनल क्रिकेट की वास्तविक तस्वीर समझ में आने लगी। स्कूल स्तर के मुकाबलों से लेकर अंडर-14 और फिर क्लब क्रिकेट तक का सफर उनके लिए सीखने का महत्वपूर्ण दौर रहा। इसी दौरान उन्हें महसूस हुआ कि क्रिकेट में आगे बढ़ने के लिए सिर्फ प्रतिभा ही नहीं बल्कि अनुशासन, मेहनत और निरंतरता भी बेहद जरूरी है।
हालांकि उनका सफर हमेशा आसान नहीं रहा। जब वह लगभग 15 साल के थे, तब उन्हें एक गंभीर बीमारी का सामना करना पड़ा। यह समय उनके क्रिकेट करियर का सबसे कठिन दौर साबित हुआ। बीमारी के कारण उन्हें करीब 10 से 11 महीने तक मैदान से दूर रहना पड़ा। किसी भी युवा खिलाड़ी के लिए यह स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण होती है, क्योंकि लंबे समय तक खेल से दूर रहने का असर शारीरिक और मानसिक दोनों स्तरों पर पड़ता है।
उस दौर को याद करते हुए चिन्मय बताते हैं कि यह उनके जीवन का बेहद भावुक और कठिन समय था। जब साथी खिलाड़ी मैदान पर अभ्यास कर रहे थे, तब वह इलाज और रिकवरी में व्यस्त थे। कई बार निराशा भी होती थी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने खुद को मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखा और वापसी की तैयारी जारी रखी। उनका मानना है कि मुश्किल समय इंसान को मजबूत बनाता है और वही अनुभव आगे की राह में सबसे बड़ी ताकत साबित होते हैं।
इस पूरे सफर में उनके पिता ने सबसे अहम भूमिका निभाई। चिन्मय कहते हैं कि उनके पिता सिर्फ उनके कोच नहीं बल्कि जीवन के सबसे बड़े मार्गदर्शक हैं। जब भी वह क्रिकेट या निजी जीवन में किसी कठिनाई का सामना करते हैं, उनके पिता हमेशा साथ खड़े रहते हैं। उन्होंने बताया कि खराब प्रदर्शन हो या आत्मविश्वास की कमी, हर मुश्किल वक्त में पिता ने उन्हें संभाला और आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। यही वजह है कि वह अपनी सफलता का बड़ा श्रेय अपने परिवार, खासकर पिता को देते हैं।
खेल की बात करें तो चिन्मय खुद को मुख्य रूप से एक टॉप ऑर्डर बल्लेबाज मानते हैं। उनका कहना है कि बल्लेबाजी ही उनकी असली पहचान है और वह टीम के लिए ऊपर के क्रम में खेलना पसंद करते हैं। हालांकि जरूरत पड़ने पर वह स्पिन गेंदबाजी भी कर सकते हैं, लेकिन उनकी प्राथमिक भूमिका बल्लेबाज की ही रहती है। पिछले सीजन में मुंबई क्रिकेट लीग में उनके बल्ले से निकले रनों ने उन्हें ऑरेंज कैप दिलाई थी और इसी प्रदर्शन ने उन्हें क्रिकेट जगत में नई पहचान भी दिलाई। अब आगामी सीजन को लेकर उनकी तैयारियां जोरों पर हैं। चिन्मय का लक्ष्य सिर्फ रन बनाना नहीं बल्कि अपने खेल में और अधिक निखार लाना है। उनका मानना है कि मुंबई क्रिकेट लीग जैसे मंच युवा खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का बड़ा अवसर देते हैं। इसी वजह से वह इस सीजन को अपने करियर का महत्वपूर्ण पड़ाव मान रहे हैं।
