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खजराना मंदिर के पुजारियों को हटाने की मांग, बहू ने दहेज प्रताड़ना मामले में प्रशासन से की कार्रवाई की अपील
इंदौर,(म.प्र.)
इंदौर कलेक्टर जनसुनवाई में पहुंची पीड़िता, जांच पूरी होने तक पुजारियों को पूजा कार्य और गर्भगृह से दूर रखने की मांग
इंदौर के प्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर से जुड़े पुजारी परिवार के खिलाफ दर्ज दहेज प्रताड़ना और घरेलू हिंसा के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। मामले की शिकायतकर्ता डॉ. इंद्रा भट्ट मंगलवार को कलेक्टर जनसुनवाई में पहुंचीं और प्रशासन से मांग की कि जांच पूरी होने तक संबंधित पुजारियों को मंदिर में पूजा-पाठ और गर्भगृह से दूर रखा जाए। इस मांग के साथ मामला धार्मिक, सामाजिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।
डॉ. इंद्रा भट्ट ने अपनी शिकायत में कहा है कि उनका विवाह मई 2025 में खजराना मंदिर से जुड़े पुजारी पुनित भट्ट के साथ हुआ था। विवाह के कुछ समय बाद ही ससुराल पक्ष की ओर से दहेज की मांग शुरू हो गई। उन्होंने आरोप लगाया कि मांग पूरी नहीं होने पर उन्हें लगातार मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया। शिकायत के अनुसार उन्हें अपमानित किया गया, मारपीट की गई और कई बार धमकियां भी दी गईं। पीड़िता का कहना है कि उन्होंने लंबे समय तक रिश्ते को बचाने की कोशिश की, लेकिन हालात लगातार बिगड़ते गए।
मामले की शिकायत महिला थाना इंदौर में दर्ज कराई गई थी। पुलिस ने प्राथमिक जांच के बाद पुनित भट्ट सहित परिवार के अन्य सदस्यों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज किया है। एफआईआर में दहेज प्रताड़ना, मारपीट, गाली-गलौज और धमकी देने जैसी धाराएं शामिल हैं। पीड़िता का कहना है कि जब मामला न्यायालय और पुलिस जांच के स्तर पर पहुंच चुका है, तब तक संबंधित लोगों को मंदिर की धार्मिक गतिविधियों से अलग रखा जाना चाहिए।
जनसुनवाई में दिए गए आवेदन में डॉ. इंद्रा भट्ट ने विशेष रूप से मध्य प्रदेश श्री गणपति मंदिर खजराना (इंदौर) अधिनियम, 2003 का उल्लेख किया है। उनका तर्क है कि मंदिर एक विशेष अधिनियम के तहत संचालित होता है और यदि किसी पुजारी के खिलाफ गंभीर आपराधिक प्रकरण दर्ज हो, तो जांच पूरी होने तक उसे धार्मिक जिम्मेदारियों से अलग करने पर विचार किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि इससे मंदिर की गरिमा और श्रद्धालुओं का विश्वास भी बना रहेगा।
शिकायत में केवल दहेज प्रताड़ना का मामला ही नहीं उठाया गया है, बल्कि मंदिर परिसर में कथित अनियमितताओं के आरोप भी लगाए गए हैं। पीड़िता ने दावा किया है कि मंदिर परिसर में कुछ ऐसे घटनाक्रम हुए हैं जो धार्मिक मर्यादाओं के अनुरूप नहीं हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई जाने वाली दक्षिणा के उपयोग को लेकर भी सवाल उठाए हैं। शिकायत में कहा गया है कि इन आरोपों के समर्थन में उनके पास वीडियो और अन्य दस्तावेज मौजूद हैं, जिन्हें जरूरत पड़ने पर जांच एजेंसियों को उपलब्ध कराया जा सकता है।
मामले में पीड़िता के अधिवक्ता कृष्ण कुमार कुन्हारे ने कहा कि मंदिर अधिनियम के प्रावधानों के तहत यदि किसी व्यक्ति के आचरण से मंदिर की प्रतिष्ठा प्रभावित होने की आशंका हो, तो प्रशासक या जिला प्रशासन आवश्यक कदम उठा सकता है। उनका कहना है कि यह किसी को दोषी ठहराने की मांग नहीं है, बल्कि जांच निष्पक्ष रूप से पूरी होने तक प्रशासनिक स्तर पर एहतियाती कदम उठाने की मांग है।
वहीं अधिवक्ता डॉ. रुपाली राठौर ने भी कानूनी पक्ष रखते हुए कहा कि देश के कई राज्यों में ऐसे उदाहरण देखने को मिले हैं, जहां गंभीर आपराधिक मामलों में नाम आने के बाद संबंधित धार्मिक पदाधिकारियों को अस्थायी रूप से सेवा से अलग किया गया था। उनका कहना है कि इससे जांच प्रभावित नहीं होती और संस्थान की साख भी बनी रहती है।
दूसरी ओर, इस पूरे मामले को लेकर मंदिर प्रशासन और संबंधित पक्षों की ओर से अब तक कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि जनसुनवाई में प्राप्त शिकायत का परीक्षण किया जाएगा और सभी तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भी निर्णय से पहले कानूनी पहलुओं और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण आवश्यक होगा।
खजराना गणेश मंदिर मध्य प्रदेश ही नहीं बल्कि देश के प्रमुख गणेश मंदिरों में गिना जाता है। यहां हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में मंदिर से जुड़े किसी भी विवाद का व्यापक सामाजिक प्रभाव पड़ता है। यही वजह है कि यह मामला अब केवल पारिवारिक विवाद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि मंदिर की व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही से भी जुड़ गया है। पीड़िता ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं करता है, तो वह सामाजिक संगठनों और समर्थकों के साथ मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपेंगी। उनका कहना है कि वह इस मामले को राज्य स्तर तक ले जाएंगी ताकि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित हो सके।
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खजराना मंदिर के पुजारियों को हटाने की मांग, बहू ने दहेज प्रताड़ना मामले में प्रशासन से की कार्रवाई की अपील
इंदौर,(म.प्र.)
इंदौर के प्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर से जुड़े पुजारी परिवार के खिलाफ दर्ज दहेज प्रताड़ना और घरेलू हिंसा के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। मामले की शिकायतकर्ता डॉ. इंद्रा भट्ट मंगलवार को कलेक्टर जनसुनवाई में पहुंचीं और प्रशासन से मांग की कि जांच पूरी होने तक संबंधित पुजारियों को मंदिर में पूजा-पाठ और गर्भगृह से दूर रखा जाए। इस मांग के साथ मामला धार्मिक, सामाजिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।
डॉ. इंद्रा भट्ट ने अपनी शिकायत में कहा है कि उनका विवाह मई 2025 में खजराना मंदिर से जुड़े पुजारी पुनित भट्ट के साथ हुआ था। विवाह के कुछ समय बाद ही ससुराल पक्ष की ओर से दहेज की मांग शुरू हो गई। उन्होंने आरोप लगाया कि मांग पूरी नहीं होने पर उन्हें लगातार मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया। शिकायत के अनुसार उन्हें अपमानित किया गया, मारपीट की गई और कई बार धमकियां भी दी गईं। पीड़िता का कहना है कि उन्होंने लंबे समय तक रिश्ते को बचाने की कोशिश की, लेकिन हालात लगातार बिगड़ते गए।
मामले की शिकायत महिला थाना इंदौर में दर्ज कराई गई थी। पुलिस ने प्राथमिक जांच के बाद पुनित भट्ट सहित परिवार के अन्य सदस्यों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज किया है। एफआईआर में दहेज प्रताड़ना, मारपीट, गाली-गलौज और धमकी देने जैसी धाराएं शामिल हैं। पीड़िता का कहना है कि जब मामला न्यायालय और पुलिस जांच के स्तर पर पहुंच चुका है, तब तक संबंधित लोगों को मंदिर की धार्मिक गतिविधियों से अलग रखा जाना चाहिए।
जनसुनवाई में दिए गए आवेदन में डॉ. इंद्रा भट्ट ने विशेष रूप से मध्य प्रदेश श्री गणपति मंदिर खजराना (इंदौर) अधिनियम, 2003 का उल्लेख किया है। उनका तर्क है कि मंदिर एक विशेष अधिनियम के तहत संचालित होता है और यदि किसी पुजारी के खिलाफ गंभीर आपराधिक प्रकरण दर्ज हो, तो जांच पूरी होने तक उसे धार्मिक जिम्मेदारियों से अलग करने पर विचार किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि इससे मंदिर की गरिमा और श्रद्धालुओं का विश्वास भी बना रहेगा।
शिकायत में केवल दहेज प्रताड़ना का मामला ही नहीं उठाया गया है, बल्कि मंदिर परिसर में कथित अनियमितताओं के आरोप भी लगाए गए हैं। पीड़िता ने दावा किया है कि मंदिर परिसर में कुछ ऐसे घटनाक्रम हुए हैं जो धार्मिक मर्यादाओं के अनुरूप नहीं हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई जाने वाली दक्षिणा के उपयोग को लेकर भी सवाल उठाए हैं। शिकायत में कहा गया है कि इन आरोपों के समर्थन में उनके पास वीडियो और अन्य दस्तावेज मौजूद हैं, जिन्हें जरूरत पड़ने पर जांच एजेंसियों को उपलब्ध कराया जा सकता है।
मामले में पीड़िता के अधिवक्ता कृष्ण कुमार कुन्हारे ने कहा कि मंदिर अधिनियम के प्रावधानों के तहत यदि किसी व्यक्ति के आचरण से मंदिर की प्रतिष्ठा प्रभावित होने की आशंका हो, तो प्रशासक या जिला प्रशासन आवश्यक कदम उठा सकता है। उनका कहना है कि यह किसी को दोषी ठहराने की मांग नहीं है, बल्कि जांच निष्पक्ष रूप से पूरी होने तक प्रशासनिक स्तर पर एहतियाती कदम उठाने की मांग है।
वहीं अधिवक्ता डॉ. रुपाली राठौर ने भी कानूनी पक्ष रखते हुए कहा कि देश के कई राज्यों में ऐसे उदाहरण देखने को मिले हैं, जहां गंभीर आपराधिक मामलों में नाम आने के बाद संबंधित धार्मिक पदाधिकारियों को अस्थायी रूप से सेवा से अलग किया गया था। उनका कहना है कि इससे जांच प्रभावित नहीं होती और संस्थान की साख भी बनी रहती है।
दूसरी ओर, इस पूरे मामले को लेकर मंदिर प्रशासन और संबंधित पक्षों की ओर से अब तक कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि जनसुनवाई में प्राप्त शिकायत का परीक्षण किया जाएगा और सभी तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भी निर्णय से पहले कानूनी पहलुओं और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण आवश्यक होगा।
खजराना गणेश मंदिर मध्य प्रदेश ही नहीं बल्कि देश के प्रमुख गणेश मंदिरों में गिना जाता है। यहां हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में मंदिर से जुड़े किसी भी विवाद का व्यापक सामाजिक प्रभाव पड़ता है। यही वजह है कि यह मामला अब केवल पारिवारिक विवाद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि मंदिर की व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही से भी जुड़ गया है। पीड़िता ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं करता है, तो वह सामाजिक संगठनों और समर्थकों के साथ मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपेंगी। उनका कहना है कि वह इस मामले को राज्य स्तर तक ले जाएंगी ताकि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित हो सके।
