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                <title>Stock Market - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Stock Market RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>शेयर बाजार में जोरदार उछाल, सेंसेक्स 700 अंक चढ़ा; आईटी और मेटल शेयरों में दिखी मजबूत खरीदारी</title>
                                    <description><![CDATA[टीसीएस के बेहतर तिमाही नतीजों से बाजार को मिला सहारा, निफ्टी 24,150 के पार पहुंचा; एशियाई बाजारों की तेजी और निवेशकों की खरीदारी से बढ़ा उत्साह]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/strong-surge-in-stock-market-sensex-rises-700-points-strong/article-58361"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/tcs-q1-results.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">भारतीय शेयर बाजार ने शुक्रवार को कारोबारी सप्ताह के अंतिम दिन मजबूत शुरुआत करते हुए निवेशकों का भरोसा फिर से मजबूत कर दिया। शुरुआती कारोबार में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स करीब 700 अंकों की बढ़त के साथ 77,500 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी भी लगभग 200 अंक चढ़कर 24,150 के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। बाजार में आई इस तेजी के पीछे आईटी और मेटल सेक्टर के शेयरों में जोरदार खरीदारी को प्रमुख कारण माना जा रहा है। कारोबार की शुरुआत से ही निवेशकों का रुझान सकारात्मक बना रहा। बड़ी कंपनियों के शेयरों में लगातार खरीदारी देखने को मिली, जिससे बाजार का माहौल उत्साहपूर्ण रहा। खासतौर पर आईटी कंपनियों ने बाजार को मजबूती देने में अहम भूमिका निभाई। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) के बेहतर तिमाही नतीजों के बाद उसके शेयरों में दो प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई। इसका असर पूरे आईटी सेक्टर पर दिखाई दिया और अन्य टेक्नोलॉजी कंपनियों के शेयरों में भी खरीदारी बढ़ी।</p>
<p style="text-align:justify;">टीसीएस ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के नतीजे जारी किए हैं, जिनमें कंपनी का शुद्ध लाभ पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में लगभग पांच प्रतिशत बढ़कर 13,349 करोड़ रुपये पहुंच गया। वहीं, कंपनी की आय भी सालाना आधार पर करीब 14 प्रतिशत बढ़कर 72,275 करोड़ रुपये दर्ज की गई। मजबूत वित्तीय प्रदर्शन के साथ कंपनी ने प्रति शेयर 12 रुपये के अंतरिम लाभांश (डिविडेंड) की भी घोषणा की है। इस घोषणा ने निवेशकों का भरोसा और मजबूत किया तथा शेयर में तेजी देखने को मिली। हालांकि पिछले छह महीनों में टीसीएस के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई थी और एक वर्ष के दौरान भी इसमें उल्लेखनीय कमजोरी रही, लेकिन ताजा नतीजों के बाद निवेशकों ने इसे सकारात्मक संकेत के रूप में लिया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाली तिमाहियों में भी कंपनी इसी तरह का प्रदर्शन बनाए रखती है तो आईटी सेक्टर में निवेशकों का विश्वास और बढ़ सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">आईटी के अलावा मेटल सेक्टर के शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली। वैश्विक स्तर पर धातुओं की मांग में सुधार और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सकारात्मक संकेतों के कारण इस क्षेत्र की कंपनियों के शेयरों में तेजी बनी रही। स्टील और धातु क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों में निवेशकों ने सक्रिय रुचि दिखाई, जिससे बाजार को अतिरिक्त मजबूती मिली। घरेलू बाजार को विदेशी संकेतों का भी समर्थन मिला। एशियाई शेयर बाजारों में शुक्रवार को अच्छी बढ़त दर्ज की गई। दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक चार प्रतिशत से अधिक उछला, जबकि जापान का निक्केई और हांगकांग का हैंगसेंग इंडेक्स भी मजबूत बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए। एशियाई बाजारों में इस सकारात्मक माहौल का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा और निवेशकों का मनोबल मजबूत हुआ।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी शेयर बाजारों से भी अच्छे संकेत मिले। पिछले कारोबारी सत्र में डाउ जोंस, नैस्डैक और एसएंडपी 500 तीनों प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ बंद हुए थे। विशेष रूप से टेक्नोलॉजी शेयरों में तेजी ने वैश्विक निवेशकों के बीच सकारात्मक माहौल बनाया, जिसका असर भारतीय आईटी शेयरों पर भी देखने को मिला। विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने पिछले कारोबारी सत्र में करीब 533 करोड़ रुपये के शेयरों की बिकवाली की थी, लेकिन घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 2,000 करोड़ रुपये से अधिक की खरीदारी कर बाजार को संतुलन प्रदान किया। पिछले एक महीने के आंकड़ों पर नजर डालें तो घरेलू निवेशकों की मजबूत भागीदारी भारतीय शेयर बाजार के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूत स्थिति, कंपनियों के बेहतर वित्तीय नतीजे और वैश्विक बाजारों से मिल रहे सकारात्मक संकेत फिलहाल भारतीय बाजार को समर्थन दे रहे हैं। हालांकि निवेशकों को आने वाले दिनों में महंगाई, ब्याज दरों और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों पर भी नजर बनाए रखनी होगी क्योंकि इनका असर बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण रहेगा। कॉरपोरेट आय के मौजूदा सीजन में यदि बड़ी कंपनियां उम्मीद से बेहतर नतीजे पेश करती हैं तो बाजार में तेजी का सिलसिला आगे भी जारी रह सकता है। इसके अलावा विदेशी निवेशकों की वापसी और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं में कमी भी बाजार के लिए सकारात्मक साबित हो सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 10:56:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>सेंसेक्स 200 अंक चढ़ा, IT और बैंकिंग शेयरों में खरीदारी से बाजार मजबूत</title>
                                    <description><![CDATA[निफ्टी भी 24,500 के करीब पहुंचा, घरेलू बाजार में सकारात्मक रुख; एशियाई बाजारों में दबाव के बीच भारतीय सूचकांकों ने दिखाई मजबूती।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/sensex-rises-200-points-and-market-strengthens-due-to-buying/article-58052"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/sensex-today-(6).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार ने सकारात्मक शुरुआत की। मंगलवार को शुरुआती कारोबार में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स करीब 200 अंकों की बढ़त के साथ 78,500 के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी लगभग 50 अंक मजबूत होकर 24,500 के आसपास पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में सबसे ज्यादा खरीदारी आईटी और बैंकिंग सेक्टर के शेयरों में देखने को मिली। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू निवेशकों की लगातार खरीदारी और कुछ प्रमुख कंपनियों में मजबूत निवेशकों की दिलचस्पी से बाजार को सहारा मिल रहा है। हालांकि वैश्विक बाजारों से मिले मिश्रित संकेतों के बीच निवेशक अब आगे आने वाले आर्थिक आंकड़ों और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर भी नजर बनाए हुए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बाजार खुलने के साथ ही कई बड़ी आईटी और बैंकिंग कंपनियों के शेयरों में अच्छी तेजी दर्ज की गई। शुरुआती सत्र में निवेशकों ने इन क्षेत्रों में ज्यादा रुचि दिखाई, जिससे दोनों प्रमुख सूचकांकों को मजबूती मिली। जानकारों का कहना है कि आने वाले दिनों में पहली तिमाही के वित्तीय नतीजों का सीजन शुरू होने वाला है। ऐसे में निवेशकों की नजर खास तौर पर आईटी, बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और ऑटोमोबाइल कंपनियों के प्रदर्शन पर बनी हुई है। यदि कंपनियों के नतीजे उम्मीद से बेहतर रहते हैं तो बाजार में तेजी का यह रुख आगे भी जारी रह सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">हालांकि वैश्विक बाजारों का माहौल पूरी तरह सकारात्मक नहीं रहा। एशियाई शेयर बाजारों में मंगलवार को दबाव देखने को मिला। दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक सबसे ज्यादा गिरावट के साथ कारोबार करता दिखाई दिया। जापान का निक्केई सूचकांक भी कमजोरी के साथ खुला, जबकि हांगकांग के हैंगसेंग इंडेक्स में भी हल्की गिरावट दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में जारी उतार-चढ़ाव के बावजूद भारतीय शेयर बाजार ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया। विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूती और निवेशकों का भरोसा भारतीय बाजार को वैश्विक दबाव से काफी हद तक बचाए हुए है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूसरी ओर अमेरिकी शेयर बाजारों से सकारात्मक संकेत मिले थे। पिछले कारोबारी सत्र में डाउ जोंस, नैस्डैक और एसएंडपी 500 तीनों प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ बंद हुए। विशेष रूप से तकनीकी कंपनियों में खरीदारी के चलते नैस्डैक में एक प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई। अमेरिकी बाजारों की मजबूती का असर भारतीय निवेशकों के मनोबल पर भी देखने को मिला। जब वैश्विक स्तर पर जोखिम लेने की धारणा मजबूत रहती है तो उसका सकारात्मक प्रभाव उभरते बाजारों, खासकर भारत जैसे देशों पर भी दिखाई देता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) की सक्रिय खरीदारी भी बाजार को मजबूती देने वाले प्रमुख कारणों में शामिल रही। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार पिछले कारोबारी दिन घरेलू संस्थागत निवेशकों ने करीब 3,792 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। वहीं विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की ओर से भी सीमित स्तर पर सकारात्मक निवेश दर्ज किया गया। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि पिछले कुछ समय से घरेलू निवेशकों की मजबूत भागीदारी भारतीय बाजार की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी है। इससे विदेशी निवेश में उतार-चढ़ाव का असर पहले की तुलना में कम दिखाई दे रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सोमवार के कारोबारी सत्र में भी शेयर बाजार में अच्छी तेजी देखने को मिली थी। उस दिन सेंसेक्स 521 अंक चढ़कर 78,285 के स्तर पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 160 अंक की बढ़त के साथ 24,430 पर पहुंच गया था। लगातार दूसरे दिन बाजार में बनी मजबूती यह संकेत देती है कि निवेशकों का भरोसा फिलहाल कायम है। हालांकि विशेषज्ञ निवेशकों को सलाह दे रहे हैं कि मौजूदा स्तरों पर सोच-समझकर निवेश करें और केवल मजबूत बुनियादी आधार वाली कंपनियों में ही निवेश को प्राथमिकता दें।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">आर्थिक मोर्चे पर भी आने वाले दिनों में कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम बाजार की दिशा तय कर सकते हैं। निवेशकों की नजर महंगाई के आंकड़ों, केंद्रीय बैंक की नीति से जुड़े संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक आर्थिक घटनाओं पर बनी रहेगी। इसके अलावा कंपनियों के तिमाही परिणाम भी बाजार में सेक्टर आधारित उतार-चढ़ाव ला सकते हैं। यदि आईटी और बैंकिंग कंपनियों के नतीजे मजबूत आते हैं तो इन क्षेत्रों में निवेशकों की दिलचस्पी और बढ़ सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 12:00:27 +0530</pubDate>
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                <title>सेंसेक्स में 200 अंक की गिरावट, आईटी और ऑटो शेयरों में बिकवाली से बाजार दबाव में</title>
                                    <description><![CDATA[सप्ताह के पहले कारोबारी दिन घरेलू शेयर बाजार कमजोर शुरुआत के साथ कारोबार करता दिखा। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में रहे, जबकि आईटी और ऑटो सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/sensex-falls-by-200-points-market-under-pressure-due-to/article-57374"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/nifty-today.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत कमजोरी के साथ हुई। शुरुआती कारोबार में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का सेंसेक्स करीब 200 अंक तक फिसलकर 76,550 के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी भी करीब 50 अंक की गिरावट के साथ 23,900 के स्तर पर बना रहा। बाजार खुलते ही निवेशकों ने मुनाफावसूली का रुख अपनाया, जिसका असर प्रमुख सूचकांकों के साथ कई बड़े सेक्टरों पर भी दिखाई दिया। खास तौर पर आईटी और ऑटो कंपनियों के शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली दर्ज की गई, जिससे बाजार पर दबाव और बढ़ गया। कारोबार की शुरुआत में निवेशकों की नजर घरेलू और वैश्विक संकेतों पर रही। पिछले कुछ दिनों से बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव का माहौल बना हुआ है और निवेशक किसी भी बड़े निवेश से पहले सतर्क नजर आ रहे हैं। शुरुआती कारोबार में कई दिग्गज आईटी कंपनियों के शेयर लाल निशान में कारोबार करते दिखाई दिए। इसके अलावा ऑटो सेक्टर के शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के दिनों में जिन शेयरों में अच्छी तेजी आई थी, उनमें निवेशकों ने मुनाफावसूली की, जिससे प्रमुख सूचकांक दबाव में आ गए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">हालांकि सभी सेक्टरों में एक जैसी स्थिति नहीं रही। कुछ चुनिंदा शेयरों में खरीदारी भी देखने को मिली, लेकिन उसका असर बाजार की समग्र दिशा बदलने के लिए पर्याप्त नहीं था। बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में सीमित दायरे में कारोबार होता रहा, जबकि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी मिश्रित रुख देखने को मिला। निवेशकों का फोकस फिलहाल आगामी आर्थिक आंकड़ों, कंपनियों के तिमाही नतीजों और वैश्विक बाजारों से मिलने वाले संकेतों पर बना हुआ है। वैश्विक बाजारों की बात करें तो एशियाई शेयर बाजारों में मिला-जुला कारोबार देखने को मिला। जापान का निक्केई और दक्षिण कोरिया का कोस्पी बढ़त के साथ कारोबार करते दिखाई दिए। निक्केई में करीब 0.93 प्रतिशत और कोस्पी में लगभग 0.69 प्रतिशत की मजबूती दर्ज की गई। दूसरी ओर हांगकांग का हैंगसेंग इंडेक्स कमजोरी के साथ कारोबार करता नजर आया और इसमें करीब 0.93 प्रतिशत की गिरावट रही। एशियाई बाजारों के इस मिश्रित रुख का असर भी भारतीय बाजार की शुरुआत पर देखने को मिला, जहां निवेशकों ने सतर्कता बरतना बेहतर समझा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अमेरिकी शेयर बाजार से हालांकि सकारात्मक संकेत मिले थे। पिछले कारोबारी सत्र में डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज, नैस्डैक और एसएंडपी 500 तीनों प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ बंद हुए। नैस्डैक में दो प्रतिशत से अधिक की तेजी रही, जबकि डाउ जोन्स और एसएंडपी 500 में भी अच्छी बढ़त दर्ज की गई। अमेरिकी बाजारों की मजबूती के बावजूद घरेलू बाजार में उसका सकारात्मक असर सीमित रहा। इसकी एक बड़ी वजह घरेलू स्तर पर जारी मुनाफावसूली और विदेशी निवेशकों की बिकवाली मानी जा रही है। विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा रही हैं। हाल के सात कारोबारी दिनों में विदेशी निवेशकों ने करीब 2,810 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध बिकवाली की है। वहीं पिछले 30 दिनों के दौरान भी विदेशी निवेशकों की ओर से 46 हजार करोड़ रुपये से अधिक की निकासी दर्ज की गई है। इसके उलट घरेलू संस्थागत निवेशक (डीआईआई) लगातार खरीदारी कर रहे हैं। पिछले सात दिनों में उन्होंने 12 हजार करोड़ रुपये से अधिक और बीते एक महीने में लगभग 79 हजार करोड़ रुपये के शेयर खरीदे हैं। घरेलू निवेशकों की यह खरीदारी बाजार को बड़े स्तर पर गिरने से रोकने में सहायक साबित हो रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पिछले कारोबारी सत्र में भी बाजार दबाव में रहा था। सेंसेक्स 372 अंक की गिरावट के साथ 76,728 पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 110 अंक टूटकर 23,946 के स्तर पर आ गया था। लगातार दूसरे कारोबारी दिन बाजार में कमजोरी बने रहने से निवेशकों के बीच सतर्कता बढ़ी है। यह गिरावट व्यापक घबराहट की नहीं बल्कि सामान्य उतार-चढ़ाव का हिस्सा है। निवेशकों को जल्दबाजी में फैसले लेने से बचना चाहिए और मजबूत कंपनियों में लंबी अवधि के नजरिए से निवेश बनाए रखना चाहिए। आने वाले दिनों में वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों, डॉलर की चाल, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और कंपनियों के पहली तिमाही के वित्तीय नतीजों का असर बाजार की दिशा पर साफ दिखाई देगा। यदि विदेशी निवेशकों की बिकवाली कम होती है और घरेलू निवेशकों की खरीदारी जारी रहती है तो बाजार में स्थिरता लौट सकती है। वहीं किसी भी बड़े वैश्विक घटनाक्रम या आर्थिक आंकड़े का असर भी निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 11:20:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>Persistent Systems के शेयर 8% गिरे, Nagarro डील से मचा बाजार में हड़कंप</title>
                                    <description><![CDATA[जर्मन कंपनी Nagarro SE के 1.4 अरब यूरो अधिग्रहण के ऐलान के बाद ब्रोकरेज हुए बंटे, मिडकैप इंडेक्स में सबसे बड़ा नुकसान]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/shares-of-persistent-systems-fell-8-nagarro-deal-created-panic/article-57280"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/persistent-systems.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">Persistent Systems के शेयरों में सोमवार, 29 जून को अचानक तेज गिरावट देखने को मिली जब कंपनी के जर्मनी स्थित डिजिटल इंजीनियरिंग फर्म Nagarro SE के अधिग्रहण की घोषणा ने बाजार में हलचल मचा दी। शुरुआती कारोबार में ही स्टॉक करीब 8.2 प्रतिशत तक टूट गया और यह BSE मिडकैप इंडेक्स का सबसे बड़ा गिरने वाला शेयर बन गया। कारोबार के दौरान शेयर लगभग 4,445 रुपये तक फिसल गया, जिससे निवेशकों में अचानक घबराहट का माहौल बन गया। यह गिरावट तब आई जब कंपनी ने 1.4 अरब यूरो की बड़ी डील के तहत Nagarro SE के अधिग्रहण की योजना का ऐलान किया। यह डील Persistent Systems की सहायक कंपनी Galaxy Germany Holding के जरिए की जा रही है, जिसमें Nagarro के सभी बचे हुए शेयरों को 81 यूरो प्रति शेयर नकद में खरीदने का प्रस्ताव रखा गया है। बताया जा रहा है कि यह ऑफर कंपनी के 25 जून के अनडिस्टर्ब्ड क्लोजिंग प्राइस पर लगभग 140 प्रतिशत का प्रीमियम दर्शाता है, लेकिन इसके बावजूद बाजार की प्रतिक्रिया नकारात्मक रही।</p>
<p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;"><img alt="2Q=="></img></p>
<p style="text-align:justify;">कुछ ब्रोकरेज इसे Persistent के लिए दीर्घकालिक रणनीतिक कदम मान रहे हैं, जिससे कंपनी की ग्लोबल डिजिटल इंजीनियरिंग क्षमता मजबूत हो सकती है। वहीं दूसरी तरफ कुछ विश्लेषक इस डील को महंगा और जोखिम भरा बता रहे हैं, खासकर तब जब कंपनी पर पहले से ही ग्रोथ और मार्जिन प्रेशर बना हुआ है। शुरुआती प्रतिक्रिया में निवेशकों ने इस सौदे को लेकर सतर्क रुख अपनाया है। बताया जा रहा है कि इतनी बड़ी विदेशी अधिग्रहण डील के चलते कंपनी की बैलेंस शीट और कैश फ्लो पर दबाव बढ़ सकता है, जिसका असर निकट भविष्य में शेयर प्रदर्शन पर भी देखने को मिल सकता है। कुछ बाजार जानकारों का कहना है कि यह डील भले ही रणनीतिक रूप से सही दिशा में हो, लेकिन इसकी कीमत और इंटीग्रेशन रिस्क निवेशकों को परेशान कर रहा है। गौर करने वाली बात यह है कि पिछले एक साल में भी Persistent Systems का प्रदर्शन कमजोर रहा है। स्टॉक पहले ही करीब 26.3 प्रतिशत तक गिर चुका है, जबकि इसी अवधि में निफ्टी 50 में लगभग 5.6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। ऐसे में ताजा गिरावट ने निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी है। विदेशी अधिग्रहणों में अक्सर इंटीग्रेशन, कल्चर और ऑपरेशनल चुनौतियां सामने आती हैं, और यही वजह है कि कई निवेशक इस डील को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं दिख रहे हैं। हालांकि कंपनी की ओर से अभी तक यह स्पष्ट किया गया है कि यह अधिग्रहण उनके ग्लोबल विस्तार और क्लाइंट बेस बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 12:35:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कच्चे तेल की कीमतें फिर 72 डॉलर पर, एपल प्रोडक्ट महंगे; टेक और बाजार में बड़े बदलाव</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान युद्ध से पहले वाले स्तर पर लौटा ब्रेंट क्रूड, भारत में आईपैड और मैकबुक की कीमतों में भारी बढ़ोतरी, माइक्रोन ने मार्केट कैप में मेटा और टेस्ला को पीछे छोड़ा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/crude-oil-prices-again-at-72-apple-products-expensive-tech/article-57087"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/crude-oil-price-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर बड़ी गिरावट देखने को मिली है। ईरान से जुड़े तनाव के बीच जो उछाल कच्चे तेल में आया था, वह अब लगभग खत्म हो चुका है। गुरुवार को वैश्विक बाजार में बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड ऑयल 72 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया। यह वही कीमत है जो युद्ध जैसे हालात बनने से पहले दर्ज की गई थी। ऊर्जा बाजार पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल सप्लाई को लेकर डर कम होने और बाजार में स्थिरता लौटने से कीमतों पर दबाव बना है। इसका असर आने वाले दिनों में कई देशों की अर्थव्यवस्था और ईंधन बाजार पर भी दिखाई दे सकता है। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ऐसे समय आई है जब दुनिया भर के निवेशक पश्चिम एशिया की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। कुछ सप्ताह पहले तक यह आशंका जताई जा रही थी कि यदि तनाव और बढ़ा तो तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है। इसी डर से कीमतों में तेजी देखने को मिली थी। लेकिन हालात फिलहाल नियंत्रण में रहने और सप्लाई चेन सामान्य रहने से बाजार का भरोसा वापस लौटा है। यही वजह है कि ब्रेंट क्रूड फिर से 72 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों के लिए यह राहत भरी खबर मानी जा रही है। देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से खरीदता है, इसलिए कच्चे तेल की कीमतों में कमी आने पर आयात बिल घट सकता है। इससे पेट्रोल और डीजल की लागत पर भी सकारात्मक असर पड़ने की उम्मीद रहती है। हालांकि खुदरा ईंधन की कीमतों में किसी बदलाव का फैसला तेल कंपनियां और सरकार बाजार की स्थिति को देखते हुए करती हैं। फिलहाल उपभोक्ताओं की नजर इस बात पर है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार की यह गिरावट घरेलू बाजार तक कब पहुंचती है। इधर टेक्नोलॉजी सेक्टर से भी बड़ी खबर सामने आई है। एपल ने अमेरिका में अपने कई लोकप्रिय प्रोडक्ट्स की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है। कंपनी ने आईपैड और मैकबुक के कुछ मॉडल 300 डॉलर तक महंगे कर दिए हैं। इसका असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिला है। भारत में इन डिवाइसों की कीमतों में लगभग एक लाख रुपये तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। नई कीमतें लागू होने के बाद प्रीमियम कैटेगरी के कई मॉडल पहले की तुलना में काफी महंगे हो गए हैं। कीमतों में यह बदलाव उत्पादन लागत, आयात शुल्क, वैश्विक सप्लाई चेन और मुद्रा विनिमय दर जैसे कई कारणों से जुड़ा हो सकता है। भारत में एपल के प्रोडक्ट पहले से ही प्रीमियम श्रेणी में आते हैं। ऐसे में नई कीमतें उन ग्राहकों पर सीधा असर डालेंगी जो नया आईपैड या मैकबुक खरीदने की योजना बना रहे हैं। कई रिटेल स्टोर्स पर नई कीमतों के अनुसार बिक्री शुरू हो चुकी है और ग्राहक भी इस बढ़ोतरी को लेकर चर्चा कर रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूसरी ओर शेयर बाजार और टेक इंडस्ट्री में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है। अमेरिकी चिप निर्माता माइक्रोन ने बाजार पूंजीकरण के मामले में बड़ी छलांग लगाई है। कंपनी का मार्केट कैप बढ़ने के बाद उसने दुनिया की दो बड़ी टेक कंपनियों मेटा और टेस्ला को पीछे छोड़ दिया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और हाई-परफॉर्मेंस मेमोरी चिप्स की बढ़ती मांग का सबसे बड़ा फायदा माइक्रोन को मिल रहा है। निवेशकों का भरोसा लगातार बढ़ने से कंपनी के शेयरों में तेजी आई और उसका मूल्यांकन भी मजबूत हुआ। एआई तकनीक के तेजी से विस्तार ने सेमीकंडक्टर कंपनियों की स्थिति बदल दी है। पहले जहां निवेशकों का अधिक ध्यान सोशल मीडिया और इलेक्ट्रिक व्हीकल कंपनियों पर था, वहीं अब चिप बनाने वाली कंपनियां भी बाजार की अगली बड़ी ताकत बनती दिखाई दे रही हैं। माइक्रोन की इस उपलब्धि को उसी बदलाव का संकेत माना जा रहा है। आने वाले समय में यदि एआई आधारित तकनीकों की मांग इसी तरह बढ़ती रही तो सेमीकंडक्टर उद्योग में और भी बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। एक ही दिन में सामने आई इन तीन खबरों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की अलग-अलग तस्वीर पेश की है। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ऊर्जा बाजार को राहत देती दिख रही है, वहीं एपल के महंगे प्रोडक्ट उपभोक्ताओं की जेब पर असर डाल सकते हैं। दूसरी तरफ माइक्रोन का तेजी से बढ़ता बाजार मूल्य यह संकेत देता है कि दुनिया की टेक इंडस्ट्री अब नई दिशा में आगे बढ़ रही है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Jun 2026 11:57:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>शेयर बाजार में जोरदार वापसी, सेंसेक्स 500 अंक चढ़ा; निफ्टी 24,150 के पार</title>
                                    <description><![CDATA[सप्ताह के पहले कारोबारी दिन बाजार में खरीदारी का माहौल दिखा। IT और ऑयल एंड गैस शेयरों में तेजी से सेंसेक्स 77,300 के करीब पहुंचा, जबकि निफ्टी में भी 150 अंकों की बढ़त दर्ज की गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/6a38cae5b4995/article-56611"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/sensex-today-(4).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को भारतीय शेयर बाजार ने मजबूत शुरुआत की। पिछले कारोबारी सत्र में आई भारी गिरावट के बाद निवेशकों की वापसी देखने को मिली और बाजार में चौतरफा खरीदारी का माहौल बना रहा। शुरुआती कारोबार के दौरान सेंसेक्स करीब 500 अंक की तेजी के साथ 77,300 के स्तर के आसपास पहुंच गया, जबकि निफ्टी भी लगभग 150 अंक मजबूत होकर 24,150 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया। बाजार में सबसे ज्यादा खरीदारी सूचना प्रौद्योगिकी यानी IT और ऑयल एंड गैस सेक्टर के शेयरों में देखने को मिली।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेत और विदेशी निवेशकों की खरीदारी ने घरेलू बाजार को सहारा दिया है। पिछले कुछ दिनों से बाजार में उतार-चढ़ाव बना हुआ था, लेकिन सोमवार को निवेशकों का भरोसा लौटता दिखाई दिया। बड़ी कंपनियों के शेयरों में खरीदारी बढ़ने से प्रमुख सूचकांकों को मजबूती मिली। कारोबार के शुरुआती घंटों में कई दिग्गज IT कंपनियों के शेयर हरे निशान में कारोबार करते नजर आए। इसके अलावा तेल और गैस क्षेत्र की कंपनियों में भी निवेशकों की रुचि बढ़ी। माना जा रहा है कि वैश्विक स्तर पर ऊर्जा बाजार में स्थिरता और घरेलू मांग के सकारात्मक संकेतों ने इन शेयरों को समर्थन दिया है। बैंकिंग और ऑटो सेक्टर में भी सीमित लेकिन सकारात्मक बढ़त दर्ज की गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">एशियाई बाजारों की बात करें तो सोमवार को वहां मिला-जुला कारोबार देखने को मिला। जापान का निक्केई सूचकांक मजबूत बढ़त के साथ कारोबार करता दिखाई दिया। दक्षिण कोरिया का कोस्पी भी हरे निशान में रहा और निवेशकों का उत्साह देखने को मिला। हालांकि हांगकांग का हैंगसेंग इंडेक्स दबाव में रहा और उसमें गिरावट दर्ज की गई। एशियाई बाजारों के इस मिश्रित प्रदर्शन के बावजूद भारतीय बाजार ने मजबूती दिखाई, जिसे घरेलू निवेशकों के भरोसे का संकेत माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वैश्विक बाजारों से भी भारतीय निवेशकों को सकारात्मक संकेत मिले हैं। पिछले कारोबारी सत्र में अमेरिकी बाजार बढ़त के साथ बंद हुए थे। डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज में मामूली तेजी दर्ज की गई, जबकि नैस्डैक और एसएंडपी 500 में मजबूत उछाल देखने को मिला। तकनीकी कंपनियों के शेयरों में खरीदारी बढ़ने से अमेरिकी बाजारों को सहारा मिला था। इसका असर सोमवार को एशियाई और भारतीय बाजारों पर भी देखने को मिला।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बाजार विशेषज्ञों के अनुसार विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। शुक्रवार को एफआईआई ने भारतीय शेयर बाजार में करीब 4,859 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की थी। यह आंकड़ा निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। हालांकि पिछले 30 दिनों के आंकड़ों पर नजर डालें तो विदेशी निवेशकों की कुल निकासी अभी भी अधिक बनी हुई है, लेकिन हाल के दिनों में उनकी खरीदारी ने बाजार को राहत दी है। वहीं घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी डीआईआई की भूमिका भी महत्वपूर्ण बनी हुई है। पिछले कुछ महीनों में घरेलू निवेशकों ने बाजार में लगातार निवेश किया है, जिससे वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय बाजार को स्थिरता मिली है। म्यूचुअल फंड और बीमा कंपनियों की ओर से लगातार निवेश बाजार के लिए मजबूत आधार तैयार कर रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सोमवार की तेजी इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि पिछले सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन बाजार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी। शुक्रवार को सेंसेक्स करीब 607 अंक टूटकर 76,802 के स्तर पर बंद हुआ था। वहीं निफ्टी भी 154 अंक गिरकर 24,013 के स्तर पर आ गया था। उस गिरावट के बाद निवेशकों में कुछ चिंता देखी जा रही थी, लेकिन सप्ताह की शुरुआत में आई तेजी ने बाजार की धारणा को बेहतर किया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर कई महत्वपूर्ण आर्थिक संकेतकों और वैश्विक घटनाक्रमों पर बनी रहेगी। कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियां, विदेशी निवेशकों का रुख और मानसून की प्रगति जैसे कारक बाजार की दिशा तय कर सकते हैं। इसके अलावा कंपनियों के तिमाही नतीजों को लेकर भी निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ने लगी है। छोटे और मझोले शेयरों में भी सोमवार को सकारात्मक रुझान देखने को मिला। कई सेक्टरों में खरीदारी का दायरा बढ़ा, जिससे व्यापक बाजार को मजबूती मिली। हालांकि विशेषज्ञ निवेशकों को सलाह दे रहे हैं कि वे केवल तेजी देखकर निवेश के फैसले न लें और कंपनियों की बुनियादी स्थिति का मूल्यांकन जरूर करें।  सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार ने मजबूती के साथ शुरुआत की है। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में आई बढ़त ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है। विदेशी निवेशकों की खरीदारी, वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेत और चुनिंदा सेक्टरों में मजबूत प्रदर्शन के कारण बाजार में उत्साह का माहौल बना हुआ है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 11:38:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>जियो प्लेटफॉर्म्स के सबसे बड़े IPO की तैयारी, 12.5 लाख करोड़ वैल्यूएशन का अनुमान</title>
                                    <description><![CDATA[रिलायंस समर्थित जियो ने सेबी के पास DRHP दाखिल किया, भारत के सबसे बड़े IPO की दिशा में ऐतिहासिक कदम, 27 करोड़ नए शेयर जारी होंगे]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/preparation-for-the-biggest-ipo-of-jio-platforms-estimated-valuation/article-56438"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/jio-ipo-2026.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भारत के पूंजी बाजारों में एक ऐतिहासिक मोड़ लेते हुए रिलायंस इंडस्ट्रीज समर्थित जियो प्लेटफॉर्म्स ने शुक्रवार को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के पास अपना ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) दाखिल कर दिया है। इस कदम के साथ देश के अब तक के सबसे बड़े प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) की नींव रखी गई है, जिसकी अनुमानित वैल्यूएशन करीब 12.5 लाख करोड़ रुपये बताई जा रही है। जियो प्लेटफॉर्म्स इस आईपीओ के तहत लगभग 27 करोड़ नए शेयर जारी करेगी और इससे करीब 36,000 करोड़ रुपये तक की राशि जुटाने की संभावना है। यह पूरी फंडरेजिंग नई इक्विटी जारी करके की जाएगी और इसमें मौजूदा निवेशकों द्वारा किसी तरह का ऑफर फॉर सेल शामिल नहीं होगा। इसका मतलब है कि मौजूदा निवेशक अपनी हिस्सेदारी बेचकर बाहर नहीं निकलेंगे, बल्कि कंपनी की ग्रोथ में बने रहेंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कंपनी द्वारा जुटाई गई इस राशि का उपयोग मुख्य रूप से मौजूदा कर्ज को कम करने और सामान्य कॉर्पोरेट जरूरतों को पूरा करने में किया जाएगा। DRHP के अनुसार करीब 27,500 करोड़ रुपये के कर्ज को आंशिक या पूर्ण रूप से चुकाने की योजना है। यह कदम कंपनी के बैलेंस शीट को मजबूत करने और भविष्य की ग्रोथ को गति देने के उद्देश्य से उठाया गया है।इस IPO को भारतीय कैपिटल मार्केट्स के लिए एक बड़ी परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है। हाल के महीनों में वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और बाजार की अस्थिरता के कारण निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई थी, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह मेगा आईपीओ बाजार में नई ऊर्जा ला सकता है। दूसरी ओर, NSE द्वारा भी अपना DRHP दाखिल करने की तैयारी से आने वाले महीनों में IPO मार्केट में तेज गतिविधि देखने को मिल सकती है। रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने इस घोषणा को एक भावनात्मक क्षण बताया। उन्होंने कहा कि यह कदम न केवल रिलायंस परिवार बल्कि करोड़ों शेयरधारकों के लिए भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि उनके बच्चे आकाश, ईशा और अनंत जियो IPO प्रक्रिया का नेतृत्व कर रहे हैं और भविष्य में कंपनी के नए विकास अवसरों को आगे बढ़ाएंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रिलायंस इंडस्ट्रीज ने 2020 में वैश्विक निवेशकों से बड़ी पूंजी जुटाकर जियो प्लेटफॉर्म्स में अपनी हिस्सेदारी लगभग 33 प्रतिशत कम की थी। उस दौर में Meta, Google, KKR, Silver Lake, Vista Equity Partners और कई sovereign funds जैसे Abu Dhabi Investment Authority ने जियो में निवेश किया था। यह निवेश भारत की तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था पर वैश्विक भरोसे का संकेत माना गया था। आज जियो प्लेटफॉर्म्स केवल एक टेलीकॉम कंपनी नहीं रह गई है, बल्कि यह AI, क्लाउड सेवाओं, एंटरप्राइज नेटवर्क और डिजिटल एप्लिकेशन जैसे क्षेत्रों में भी विस्तार कर चुकी है। भारत की 1.4 अरब की जनसंख्या, सस्ती इंटरनेट दरें और तेजी से बढ़ती डिजिटल पहुंच ने कंपनी को बड़े पैमाने पर विकास का अवसर दिया है। वित्तीय वर्ष 2026 में जियो प्लेटफॉर्म्स ने 1.47 लाख करोड़ रुपये का राजस्व और लगभग 30,000 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया है, जो इसकी मजबूत वित्तीय स्थिति को दर्शाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस IPO से कंपनी की वैश्विक स्थिति और मजबूत होगी और यह भारत को टेक्नोलॉजी कंपनियों के वैश्विक हब के रूप में स्थापित करने में मदद करेगा। जियो प्लेटफॉर्म्स का यह प्रस्तावित IPO भारतीय बाजार के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 11:24:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>शेयर बाजार में तेज गिरावट, सेंसेक्स 800 अंक लुढ़का</title>
                                    <description><![CDATA[आईटी शेयरों में भारी बिकवाली से बाजार दबाव में, इंफोसिस 8% तक टूटा, निफ्टी भी 200 अंक नीचे]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/sharp-decline-in-stock-market-sensex-fell-800-points/article-56362"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/stock-market-crash-india.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">शेयर बाजार में 19 जून को कारोबार की शुरुआत से ही भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला और दिन बढ़ने के साथ गिरावट गहराती चली गई। शुरुआती आंकड़ों के अनुसार सेंसेक्स करीब 800 अंक गिरकर 76,600 के स्तर पर आ गया, जबकि निफ्टी भी लगभग 200 अंक टूटकर 23,950 के आसपास कारोबार करता दिखा। बाजार में सबसे ज्यादा दबाव आईटी सेक्टर में देखा गया, जहां बड़ी कंपनियों के शेयरों में जोरदार बिकवाली दर्ज की गई। आईटी शेयरों में गिरावट ने पूरे बाजार के मूड को कमजोर कर दिया। इंफोसिस के शेयर में करीब 8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि टीसीएस और टेक महिंद्रा में लगभग 6-6 प्रतिशत तक की गिरावट देखने को मिली। एचसीएल टेक भी करीब 5 प्रतिशत तक टूट गया। बताया जा रहा है कि वैश्विक संकेतों और निवेशकों की मुनाफावसूली के चलते आईटी सेक्टर पर सबसे ज्यादा दबाव बना हुआ है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि इस सेक्टर में हालिया तेजी के बाद करेक्शन जरूरी था, जो अब देखने को मिल रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">एशियाई बाजारों में भी मिला-जुला रुख देखने को मिला। कोरिया का कोस्पी इंडेक्स मजबूत बढ़त के साथ 2 प्रतिशत से अधिक चढ़ा, जबकि जापान का निक्केई हल्की बढ़त में रहा। दूसरी ओर हांगकांग का हैंगसेंग इंडेक्स दबाव में नजर आया और करीब डेढ़ प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ। इससे यह संकेत मिला कि वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है और निवेशक सतर्क रुख अपना रहे हैं। अमेरिकी बाजारों में पिछले कारोबारी सत्र में तेजी देखने को मिली थी। डाउ जोन्स, नैस्डैक और एसएंडपी 500 सभी प्रमुख इंडेक्स हरे निशान में बंद हुए थे। नैस्डैक में करीब 2 प्रतिशत की मजबूती दर्ज की गई थी, जिससे टेक शेयरों को वैश्विक स्तर पर सपोर्ट मिला था, लेकिन इसका असर भारतीय बाजार में टिक नहीं सका। विशेषज्ञों के अनुसार घरेलू स्तर पर आईटी शेयरों में बिकवाली और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां बाजार पर भारी पड़ रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">विदेशी निवेशकों यानी FII की ओर से भी बिकवाली का दबाव बना हुआ है। हाल के आंकड़ों के अनुसार एफआईआई ने 1025 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की है, जिससे बाजार में नकदी प्रवाह कमजोर हुआ है। वहीं घरेलू संस्थागत निवेशक यानी DII ने खरीदारी की है, लेकिन वह एफआईआई की बिकवाली की भरपाई नहीं कर पाई। पिछले कई दिनों से एफआईआई लगातार बिकवाली कर रहे हैं, जिससे बाजार की दिशा पर असर पड़ा है। बाजार में मौजूदा गिरावट मुख्य रूप से ग्लोबल संकेतों, आईटी सेक्टर में मुनाफावसूली और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली का परिणाम है। हालांकि पिछले कारोबारी सत्र यानी 18 जून को बाजार में तेजी देखी गई थी, जहां सेंसेक्स 254 अंक चढ़कर 77,410 पर बंद हुआ था और निफ्टी भी 82 अंक की बढ़त के साथ 24,168 के स्तर पर पहुंचा था। लेकिन यह तेजी अगले ही दिन दबाव में बदल गई।बाजार में फिलहाल अस्थिरता का माहौल बना हुआ है। निवेशक सतर्क रुख अपना रहे हैं और आईटी सेक्टर में कमजोरी ने पूरे बाजार को नीचे खींचा है। बाजार की दिशा वैश्विक संकेतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर निर्भर करेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 10:44:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>सेंसेक्स में हल्की गिरावट, IT और मीडिया शेयर दबाव में</title>
                                    <description><![CDATA[निफ्टी भी फिसला, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक बाजारों के मिश्रित संकेतों का असर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/slight-fall-in-sensex-and-media-shares-under-pressure/article-56249"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/nifty-fall-2026.jpg" alt=""></a><br /><div class="qMYqUG_convSearchResultHighlightRoot">
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<p style="text-align:justify;">आज यानी 18 जून को घरेलू शेयर बाजार में हल्की कमजोरी देखने को मिली और कारोबार के दौरान बाजार सीमित दायरे में ही घूमता नजर आया। सुबह की शुरुआत से ही निवेशकों में सतर्कता का माहौल था और इसका असर सीधे इंडेक्स पर दिखा। सेंसेक्स करीब 50 अंक की गिरावट के साथ 77,100 के आसपास कारोबार करता रहा, जबकि निफ्टी भी लगभग 20 अंक टूटकर 24,050 के स्तर पर आ गया। पूरे सत्र में बाजार में बड़ी हलचल नहीं दिखी लेकिन IT और मीडिया सेक्टर में लगातार बिकवाली का दबाव बना रहा, जिससे कुल मिलाकर सेंटीमेंट कमजोर रहा। कारोबार के दौरान देखा गया कि शुरुआती मिनटों में बाजार स्थिर था लेकिन जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ा, निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी। खासकर टेक और मीडिया कंपनियों के शेयरों में दबाव ज्यादा रहा। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के दिनों में तेज़ी के बाद निवेशक अब थोड़ा मुनाफा निकाल रहे हैं, जिससे इंडेक्स पर असर पड़ रहा है। इसके साथ ही वैश्विक संकेतों में अनिश्चितता भी बाजार को ऊपर जाने से रोक रही है। कई ब्रोकरेज हाउस का कहना है कि फिलहाल बाजार में “वेट एंड वॉच” की स्थिति बनी हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">विदेशी निवेशकों की गतिविधियों ने भी बाजार पर असर डाला है। पिछले कुछ दिनों से FIIs लगातार बिकवाली कर रहे हैं, जिससे बाजार में दबाव बढ़ा है। बीते 7 दिनों में विदेशी निवेशकों ने लगभग 1,530 करोड़ रुपये के शेयरों की बिकवाली की है। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशक (DII) लगातार खरीदारी कर रहे हैं, जिससे बाजार को कुछ हद तक सपोर्ट मिल रहा है, लेकिन यह सपोर्ट उतना मजबूत नहीं है कि पूरे बाजार को ऊपर खींच सके। यही कारण है कि बाजार बार-बार ऊपर जाने की कोशिश करता है लेकिन फिर सीमित दायरे में लौट आता है। वैश्विक बाजारों की बात करें तो एशियाई बाजारों में आज मिला-जुला रुख देखने को मिला। साउथ कोरिया का कोस्पी इंडेक्स मजबूती के साथ ऊपर रहा और इसमें करीब 1 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई। वहीं जापान का निक्केई इंडेक्स भी मजबूत बढ़त के साथ बंद हुआ। लेकिन दूसरी ओर हांगकांग का हैंगसेंग इंडेक्स दबाव में रहा और इसमें करीब 1.8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इससे साफ है कि एशियाई बाजारों में भी निवेशकों की धारणा एक जैसी नहीं है और अलग-अलग संकेतों के चलते अस्थिरता बनी हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी बाजारों में पिछले कारोबारी सत्र में गिरावट देखने को मिली थी। डाउ जोन्स, नैस्डैक और S&amp;P 500 तीनों प्रमुख इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए थे। इसका असर आज भारतीय बाजार पर भी दिखा क्योंकि ग्लोबल निवेशक फिलहाल जोखिम लेने से बच रहे हैं। ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता और वैश्विक आर्थिक सुस्ती की आशंका ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है। यही वजह है कि दुनिया भर के बाजारों में अस्थिरता का माहौल बना हुआ है और भारत भी इससे अछूता नहीं है। घरेलू स्तर पर देखें तो पिछले कारोबारी दिन यानी 17 जून को बाजार में तेजी देखने को मिली थी। उस दिन सेंसेक्स 347 अंक की बढ़त के साथ 77,156 पर बंद हुआ था और निफ्टी भी 97 अंक चढ़कर 24,086 पर पहुंचा था। लेकिन एक दिन बाद ही बाजार उस तेजी को कायम नहीं रख सका और हल्की गिरावट में आ गया। यह दिखाता है कि बाजार फिलहाल किसी एक दिशा में मजबूत ट्रेंड नहीं बना पा रहा है। आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक विदेशी निवेशकों के रुख, ग्लोबल संकेतों और कॉरपोरेट अर्निंग्स पर निर्भर करेगी। अगर FII की बिकवाली कम होती है और वैश्विक बाजारों में स्थिरता आती है तो बाजार फिर से ऊपर की ओर जा सकता है। लेकिन फिलहाल स्थिति यह है कि बाजार एक सीमित दायरे में फंसा हुआ है और किसी बड़े ट्रिगर का इंतजार कर रहा है। 18 जून का दिन शेयर बाजार के लिए हल्की सुस्ती और सावधानी भरा रहा। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में मामूली गिरावट दर्ज हुई और सेक्टोरल दबाव खासकर IT और मीडिया में देखने को मिला। </p>
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</div>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 11:35:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>शेयर बाजार में तेजी, सेंसेक्स 77,100 के करीब</title>
                                    <description><![CDATA[निफ्टी भी 100 अंक चढ़ा, IT और कंज्यूमर शेयरों में खरीदारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/stock-market-rises-sensex-nears-77100/article-56157"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/stock-market.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">17 जून को शेयर बाजार में एक बार फिर तेजी देखने को मिली। शुरुआती कारोबार से ही शेयर बाजार में मजबूती का रुख बना रहा और निवेशकों की खरीदारी के चलते सेंसेक्स करीब 300 अंक की बढ़त के साथ 77,100 के स्तर के आसपास कारोबार करता नजर आया। वहीं निफ्टी भी लगभग 100 अंक चढ़कर 24,050 के पास पहुंच गया। बाजार में खासतौर पर IT और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली, जिससे पूरे इंडेक्स को सपोर्ट मिला। शुरुआती घंटे में ही कई बड़ी कंपनियों के शेयरों में हल्की-हल्की तेजी दिखी और धीरे-धीरे यह रफ्तार पूरे बाजार में फैल गई। दिन के दौरान शेयर बाजार की चाल थोड़ी उतार-चढ़ाव भरी भी रही, लेकिन कुल मिलाकर रुझान सकारात्मक ही रहा। वैश्विक संकेतों में मिली-जुली स्थिति के बावजूद घरेलू स्तर पर निवेशकों का भरोसा बना हुआ है। एशियाई बाजारों में भी आज मिश्रित कारोबार देखने को मिला, जहां साउथ कोरिया का कोस्पी हल्की बढ़त के साथ बंद हुआ, वहीं जापान का निक्केई इंडेक्स अच्छी तेजी में रहा। दूसरी ओर हॉन्गकॉन्ग का हैंगसेंग दबाव में नजर आया और वहां गिरावट दर्ज की गई। इस तरह वैश्विक बाजारों से मिले संकेतों का असर भारतीय शेयर बाजार पर सीमित ही रहा।</p>
<p style="text-align:justify;">उधर, अमेरिकी बाजारों में पिछले कारोबारी सत्र के दौरान भी मिला-जुला रुख देखने को मिला था। डाउ जोन्स में बढ़त दर्ज की गई, जबकि नैस्डैक और S&amp;P 500 दबाव में रहे। टेक्नोलॉजी शेयरों में गिरावट का असर अमेरिकी इंडेक्स पर साफ दिखाई दिया। इसका असर एशियाई और उभरते बाजारों की धारणा पर भी पड़ा है। इसी बीच विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर नजर डालें तो पिछले कुछ दिनों में लगातार बिकवाली का दबाव बना हुआ है। आंकड़ों के मुताबिक, बीते सात दिनों में FIIs ने करीब 3,618 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए हैं। वहीं 30 दिन की अवधि में भी भारी निकासी देखने को मिली है। दूसरी ओर घरेलू संस्थागत निवेशक यानी DIIs लगातार बाजार को सपोर्ट कर रहे हैं और उन्होंने इसी अवधि में खरीदारी बनाए रखी है। बाजार में मौजूदा तेजी के पीछे चुनिंदा सेक्टरों की मजबूत खरीदारी और घरेलू फंड्स का सपोर्ट अहम कारण है। खासकर IT सेक्टर में हाल के दिनों में विदेशी ऑर्डर्स और बेहतर आउटलुक की वजह से निवेशकों की रुचि बढ़ी है। कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर में भी ग्रामीण और शहरी मांग में सुधार की उम्मीदों ने खरीदारी को बढ़ावा दिया है। हालांकि FII की बिकवाली एक चिंता का विषय बनी हुई है, लेकिन घरेलू निवेशक फिलहाल इस दबाव को संतुलित करने में सफल दिख रहे हैं। कल यानी 16 जून को भी शेयर बाजार में अच्छी तेजी दर्ज की गई थी, जब सेंसेक्स 544 अंक की छलांग लगाकर 76,808 के स्तर पर बंद हुआ था और निफ्टी 135 अंक बढ़कर 23,989 पर बंद हुआ था। लगातार दो सत्रों से मिल रही इस तेजी ने निवेशकों की धारणा को मजबूत किया है, हालांकि विशेषज्ञ अभी भी सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं क्योंकि वैश्विक संकेत और FII फ्लो में उतार-चढ़ाव आगे भी बाजार की दिशा तय कर सकते हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 12:34:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>सेंसेक्स 350 अंक चढ़ा, निफ्टी 23,900 के पार, FMCG और IT शेयरों में तेजी</title>
                                    <description><![CDATA[बाजार में मजबूती का रुख, वोलैटिलिटी घटी, मेटल शेयरों की कमजोरी ने बढ़त को सीमित किया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/sensex-rises-350-points-nifty-crosses-23900-rise-in-fmcg/article-56048"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/sensex-today-(3).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार सुबह कारोबार की शुरुआत मजबूती के साथ देखने को मिली और जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ा, बाजार में सकारात्मक रुझान और साफ होता गया। शुरुआती कारोबार में ही सेंसेक्स करीब 354.54 अंक की बढ़त के साथ 76,618.87 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया, जबकि निफ्टी 84.80 अंक चढ़कर 23,938.70 के आसपास पहुंच गया। बाजार में यह तेजी मुख्य रूप से FMCG, आईटी और एनर्जी सेक्टर के शेयरों में खरीदारी के चलते देखने को मिली। वहीं दूसरी तरफ बाजार में अस्थिरता को मापने वाला India VIX भी 5 प्रतिशत से ज्यादा गिरकर लगभग 13.6 के स्तर पर आ गया, जिससे निवेशकों के बीच जोखिम लेने की भावना थोड़ी मजबूत होती दिखी। कुल मिलाकर बाजार की चौड़ाई भी सकारात्मक रही, जहां लगभग 2,030 शेयरों में बढ़त और 1,604 में गिरावट दर्ज की गई। शुरुआती संकेतों से ही यह साफ था कि बाजार में खरीदारी का माहौल बना हुआ है, हालांकि मेटल सेक्टर की कमजोरी ने इस तेजी को पूरी तरह खुलकर आगे नहीं बढ़ने दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">दिन के कारोबार में कुछ खास शेयरों ने निवेशकों का ध्यान खींचा। खासतौर पर Sonata Software में जबरदस्त तेजी देखी गई, जहां शेयर करीब 14.80 प्रतिशत उछलकर 299.05 रुपये के आसपास पहुंच गया। इस शेयर में ट्रेडिंग वॉल्यूम भी सामान्य से कई गुना ज्यादा रहा, जिससे यह साफ संकेत मिला कि इसमें अचानक भारी खरीदारी आई है। वहीं दूसरी ओर मेटल सेक्टर में कमजोरी का दबाव साफ नजर आया। Hindalco Industries निफ्टी के लिए सबसे बड़ा दबाव बनाने वाले शेयरों में रहा, जबकि JSW Steel और Tata Steel जैसे दिग्गज स्टॉक्स भी गिरावट में रहे। इसी तरह NALCO में भी तेज गिरावट देखी गई और यह मिडकैप इंडेक्स का सबसे बड़ा लूज़र बनकर उभरा, जहां यह 5 प्रतिशत से अधिक टूट गया। इसके अलावा Ola Electric, Paytm और Kalyan Jewellers जैसे शेयरों में भी कमजोरी देखी गई, जिससे मिडकैप स्पेस में मिला-जुला रुख बना रहा। हालांकि दूसरी तरफ Suzlon Energy ने 3 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त दर्ज कर निवेशकों को आकर्षित किया, वहीं Schaeffler India और Kaynes Technology जैसे शेयरों में भी मजबूती देखने को मिली। बाजार के कुल रुझान की बात करें तो फिलहाल निवेशकों का मूड सतर्क लेकिन सकारात्मक बना हुआ है। FMCG और IT जैसे डिफेंसिव और ग्रोथ सेक्टर में लगातार खरीदारी से बाजार को सपोर्ट मिल रहा है, जबकि ग्लोबल संकेतों और सेक्टरल दबाव के चलते कुछ हिस्सों में मुनाफावसूली भी देखने को मिल रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि वोलैटिलिटी में आई गिरावट से निकट भविष्य में बाजार में स्थिरता बढ़ सकती है, लेकिन मेटल और बैंकिंग सेक्टर की चाल आगे की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी। SBI और Axis Bank जैसे बड़े बैंकिंग स्टॉक्स में कमजोरी ने भी इंडेक्स की बढ़त को सीमित किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 11:58:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>US-ईरान समझौते से क्रूड ऑयल 4.8% टूटा, बाजारों में तेजी</title>
                                    <description><![CDATA[वैश्विक शांति संकेतों से तेल कीमतों में गिरावट, शेयर बाजारों में जोरदार उछाल, निवेशकों का भरोसा मजबूत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/crude-oil-prices-fall-by-48-due-to-us-iran-agreement/article-56049"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/us-iran-deal-(2).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">US-ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव में संभावित शांति समझौते की खबर के बाद वैश्विक बाजारों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। क्रूड ऑयल की कीमतों में अचानक तेज गिरावट दर्ज की गई है और इसका सीधा असर दुनिया भर के शेयर बाजारों पर पड़ा है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड करीब 4.8 प्रतिशत गिरकर 83.18 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गया है। कुछ ही हफ्ते पहले यह कीमत 100 डॉलर के आसपास पहुंच गई थी, जबकि युद्ध जैसे हालात में यह 120 डॉलर प्रति बैरल तक भी चला गया था। अब समझौते की उम्मीदों के बीच कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर चिंता कम हुई है, जिससे बाजार में राहत का माहौल बन गया है और निवेशकों की धारणा में सुधार देखा जा रहा है। वैश्विक शेयर बाजारों में इस खबर का असर तेजी के रूप में सामने आया है। अमेरिका के वॉल स्ट्रीट पर डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज करीब 650 अंक की बढ़त के साथ मजबूत हुआ, जबकि S&amp;P 500 में 1.5 प्रतिशत और नैस्डैक में 2.3 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। एयरलाइंस सेक्टर में सबसे ज्यादा हलचल देखी गई क्योंकि ईंधन लागत में कमी की उम्मीद से यूनाइटेड एयरलाइंस में 5.2 प्रतिशत और अमेरिकन एयरलाइंस में करीब 7 प्रतिशत की बढ़त दर्ज हुई। क्रूज ऑपरेटर कंपनियों के शेयर भी मजबूत हुए। दूसरी ओर टेक्नोलॉजी और एआई सेक्टर में भी खरीदारी देखने को मिली, जहां माइक्रोन टेक्नोलॉजी 7.8 प्रतिशत और AMD करीब 7 प्रतिशत चढ़ गए। दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों में शामिल एनवीडिया के शेयर में भी करीब 2.7 प्रतिशत की तेजी आई, जिससे पूरे टेक इंडेक्स को सपोर्ट मिला।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बीच बाजार में एक और बड़ी खबर इलॉन मस्क की स्पेसएक्स को लेकर रही, जिसकी वैल्यूएशन लिस्टिंग के बाद तेजी से बढ़कर 2.1 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंच गई है। निवेशकों का एआई और स्पेस टेक्नोलॉजी में भरोसा अभी भी मजबूत बना हुआ है, जिससे इस सेक्टर में लगातार निवेश आ रहा है। वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी ब्याज दर नीति को लेकर भी बाजार में हलचल बनी हुई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक US-ईरान समझौते के बाद ब्याज दरों में वृद्धि की संभावना घटकर 55 प्रतिशत रह गई है, जिससे यह संकेत मिल रहा है कि फेड इस बार दरों को स्थिर रख सकता है। भारतीय शेयर बाजारों पर भी इस वैश्विक घटनाक्रम का सकारात्मक असर देखा गया। सेंसेक्स सोमवार को 736 अंकों की बढ़त के साथ 76,264 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 231 अंक चढ़कर 23,853 पर बंद हुआ। एशियाई बाजारों में भी मजबूती देखने को मिली, जहां साउथ कोरिया का कोस्पी और जापान का निक्केई इंडेक्स बड़ी बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए। हांगकांग का हैंगसेंग भी हल्की तेजी के साथ बंद हुआ। कुल मिलाकर वैश्विक बाजारों में यह तेजी ऊर्जा कीमतों में गिरावट और भू-राजनीतिक तनाव कम होने की उम्मीदों का सीधा परिणाम मानी जा रही है। हालांकि यह समझौता अभी पूरी तरह लागू नहीं हुआ है और आने वाले हफ्तों में बातचीत और हस्ताक्षर प्रक्रिया पर बाजार की नजर बनी रहेगी। अगर यह समझौता सफल रहता है तो ऊर्जा क्षेत्र में और स्थिरता आ सकती है, लेकिन किसी भी तरह की देरी या रुकावट से बाजार में फिर से अस्थिरता बढ़ सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 11:58:21 +0530</pubDate>
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