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                <title>Market Update - दैनिक जागरण</title>
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                <title>सोने की कीमत ₹1.43 लाख के पार, एक दिन में ₹1,022 की तेजी; चांदी भी महंगी</title>
                                    <description><![CDATA[24 कैरेट सोना नए स्तर पर पहुंचा, चांदी में भी ₹1,752 प्रति किलो की बढ़त; विशेषज्ञों ने खरीदारी से पहले सावधानी बरतने की सलाह दी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/raipur-created-a-new-record-99-government-health-institutions-got/article-58277"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/gold-price-today-(10).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">सोने और चांदी की कीमतों में गुरुवार को एक बार फिर तेज उछाल दर्ज किया गया। लगातार बदलते वैश्विक आर्थिक माहौल और निवेशकों की बढ़ती रुचि के बीच घरेलू सर्राफा बाजार में दोनों कीमती धातुओं के दाम मजबूत बने हुए हैं। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार 24 कैरेट सोने की कीमत में 10 ग्राम पर 1,022 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। इस तेजी के बाद 10 ग्राम सोने का भाव बढ़कर 1.43 लाख रुपये के स्तर पर पहुंच गया है। वहीं चांदी की कीमत में भी मजबूती देखने को मिली और एक किलो चांदी 1,752 रुपये महंगी होकर करीब 2.23 लाख रुपये प्रति किलो के स्तर पर पहुंच गई। पिछले कुछ समय से सोने और चांदी की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले बदलाव, डॉलर की चाल, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां और निवेशकों का रुझान घरेलू बाजार की कीमतों को प्रभावित कर रहा है। ऐसे में हर कारोबारी दिन सोने और चांदी के दाम नए स्तर पर पहुंचते दिखाई दे रहे हैं। गुरुवार को आई तेजी ने एक बार फिर निवेशकों और खरीदारों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।</p>
<p style="text-align:justify;">आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2026 की शुरुआत से अब तक सोने की कीमत में लगभग 10 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम की बढ़ोतरी दर्ज की जा चुकी है। 31 दिसंबर 2025 को 24 कैरेट सोना करीब 1.33 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास था। इसके बाद से लगातार बढ़ोतरी का दौर जारी रहा और अब इसका भाव 1.43 लाख रुपये के स्तर तक पहुंच गया है। इससे यह साफ है कि साल के शुरुआती महीनों में सोने ने निवेशकों को अच्छा रिटर्न दिया है। हालांकि चांदी की कीमतों का रुख सोने से कुछ अलग रहा है। मौजूदा तेजी के बावजूद वर्ष 2025 के अंतिम कारोबारी दिन की तुलना में चांदी अभी भी करीब 7 हजार रुपये प्रति किलो सस्ती है। 31 दिसंबर 2025 को चांदी का भाव लगभग 2.30 लाख रुपये प्रति किलो था, जबकि वर्तमान में इसकी कीमत करीब 2.23 लाख रुपये प्रति किलो है। हालांकि हाल के दिनों में चांदी में भी लगातार तेजी देखने को मिल रही है, जिससे बाजार में इसकी मांग बनी हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस वर्ष सोना और चांदी दोनों ने रिकॉर्ड स्तर भी छुए हैं। आंकड़ों के अनुसार 29 जनवरी 2026 को सोने की कीमत ने लगभग 1.76 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम का ऑलटाइम हाई बनाया था। वहीं चांदी भी उसी अवधि में करीब 3.86 लाख रुपये प्रति किलो के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई थी। इसके बाद दोनों धातुओं में उतार-चढ़ाव का सिलसिला जारी रहा और कीमतों में कई बार गिरावट और तेजी देखने को मिली। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के समय निवेशक सुरक्षित निवेश के विकल्प के रूप में सोने की ओर अधिक आकर्षित होते हैं। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किसी भी आर्थिक या भू-राजनीतिक तनाव का असर सबसे पहले सोने की कीमतों पर दिखाई देता है। इसके अलावा केंद्रीय बैंकों की नीतियां, ब्याज दरों में बदलाव और विदेशी मुद्रा बाजार की गतिविधियां भी सोने और चांदी के भाव तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">यदि वैश्विक परिस्थितियां इसी तरह बनी रहीं तो आने वाले दिनों में सोने और चांदी की कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। हालांकि निवेशकों को किसी भी तरह का निवेश करने से पहले बाजार की स्थिति और विशेषज्ञों की राय पर ध्यान देना चाहिए। केवल कीमतों में तेजी देखकर जल्दबाजी में निर्णय लेना उचित नहीं माना जाता। ज्वेलरी खरीदने वाले ग्राहकों के लिए भी विशेषज्ञों ने कुछ महत्वपूर्ण सलाह दी है। सबसे पहले हमेशा भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) की हॉलमार्किंग वाला प्रमाणित सोना ही खरीदना चाहिए। हॉलमार्क यह सुनिश्चित करता है कि खरीदा गया सोना निर्धारित शुद्धता का है। प्रत्येक हॉलमार्क वाले आभूषण पर एक विशिष्ट अल्फान्यूमेरिक कोड अंकित होता है, जिससे उसकी प्रमाणिकता की जांच की जा सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि खरीदारी से पहले सोने और चांदी की कीमतों का विभिन्न विश्वसनीय स्रोतों से मिलान जरूर कर लेना चाहिए। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन सहित अन्य मान्यता प्राप्त स्रोतों पर प्रतिदिन जारी होने वाले भाव देखकर ग्राहक सही कीमत का अनुमान लगा सकते हैं। इसके अलावा यह भी ध्यान रखना चाहिए कि 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट सोने की कीमत अलग-अलग होती है। इसलिए आभूषण खरीदते समय उसकी शुद्धता और कैरेट की जानकारी अवश्य जांचनी चाहिए। त्योहारी सीजन और शादी-विवाह के मौसम में सोने और चांदी की मांग सामान्य दिनों की तुलना में अधिक रहती है। ऐसे समय कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर सीधे ग्राहकों के बजट पर पड़ता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 14:13:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>सेंसेक्स 200 अंक चढ़ा, IT और बैंकिंग शेयरों में खरीदारी से बाजार मजबूत</title>
                                    <description><![CDATA[निफ्टी भी 24,500 के करीब पहुंचा, घरेलू बाजार में सकारात्मक रुख; एशियाई बाजारों में दबाव के बीच भारतीय सूचकांकों ने दिखाई मजबूती।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/sensex-rises-200-points-and-market-strengthens-due-to-buying/article-58052"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/sensex-today-(6).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार ने सकारात्मक शुरुआत की। मंगलवार को शुरुआती कारोबार में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स करीब 200 अंकों की बढ़त के साथ 78,500 के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी लगभग 50 अंक मजबूत होकर 24,500 के आसपास पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में सबसे ज्यादा खरीदारी आईटी और बैंकिंग सेक्टर के शेयरों में देखने को मिली। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू निवेशकों की लगातार खरीदारी और कुछ प्रमुख कंपनियों में मजबूत निवेशकों की दिलचस्पी से बाजार को सहारा मिल रहा है। हालांकि वैश्विक बाजारों से मिले मिश्रित संकेतों के बीच निवेशक अब आगे आने वाले आर्थिक आंकड़ों और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर भी नजर बनाए हुए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बाजार खुलने के साथ ही कई बड़ी आईटी और बैंकिंग कंपनियों के शेयरों में अच्छी तेजी दर्ज की गई। शुरुआती सत्र में निवेशकों ने इन क्षेत्रों में ज्यादा रुचि दिखाई, जिससे दोनों प्रमुख सूचकांकों को मजबूती मिली। जानकारों का कहना है कि आने वाले दिनों में पहली तिमाही के वित्तीय नतीजों का सीजन शुरू होने वाला है। ऐसे में निवेशकों की नजर खास तौर पर आईटी, बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और ऑटोमोबाइल कंपनियों के प्रदर्शन पर बनी हुई है। यदि कंपनियों के नतीजे उम्मीद से बेहतर रहते हैं तो बाजार में तेजी का यह रुख आगे भी जारी रह सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">हालांकि वैश्विक बाजारों का माहौल पूरी तरह सकारात्मक नहीं रहा। एशियाई शेयर बाजारों में मंगलवार को दबाव देखने को मिला। दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक सबसे ज्यादा गिरावट के साथ कारोबार करता दिखाई दिया। जापान का निक्केई सूचकांक भी कमजोरी के साथ खुला, जबकि हांगकांग के हैंगसेंग इंडेक्स में भी हल्की गिरावट दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में जारी उतार-चढ़ाव के बावजूद भारतीय शेयर बाजार ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया। विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूती और निवेशकों का भरोसा भारतीय बाजार को वैश्विक दबाव से काफी हद तक बचाए हुए है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूसरी ओर अमेरिकी शेयर बाजारों से सकारात्मक संकेत मिले थे। पिछले कारोबारी सत्र में डाउ जोंस, नैस्डैक और एसएंडपी 500 तीनों प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ बंद हुए। विशेष रूप से तकनीकी कंपनियों में खरीदारी के चलते नैस्डैक में एक प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई। अमेरिकी बाजारों की मजबूती का असर भारतीय निवेशकों के मनोबल पर भी देखने को मिला। जब वैश्विक स्तर पर जोखिम लेने की धारणा मजबूत रहती है तो उसका सकारात्मक प्रभाव उभरते बाजारों, खासकर भारत जैसे देशों पर भी दिखाई देता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) की सक्रिय खरीदारी भी बाजार को मजबूती देने वाले प्रमुख कारणों में शामिल रही। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार पिछले कारोबारी दिन घरेलू संस्थागत निवेशकों ने करीब 3,792 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। वहीं विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की ओर से भी सीमित स्तर पर सकारात्मक निवेश दर्ज किया गया। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि पिछले कुछ समय से घरेलू निवेशकों की मजबूत भागीदारी भारतीय बाजार की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी है। इससे विदेशी निवेश में उतार-चढ़ाव का असर पहले की तुलना में कम दिखाई दे रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सोमवार के कारोबारी सत्र में भी शेयर बाजार में अच्छी तेजी देखने को मिली थी। उस दिन सेंसेक्स 521 अंक चढ़कर 78,285 के स्तर पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 160 अंक की बढ़त के साथ 24,430 पर पहुंच गया था। लगातार दूसरे दिन बाजार में बनी मजबूती यह संकेत देती है कि निवेशकों का भरोसा फिलहाल कायम है। हालांकि विशेषज्ञ निवेशकों को सलाह दे रहे हैं कि मौजूदा स्तरों पर सोच-समझकर निवेश करें और केवल मजबूत बुनियादी आधार वाली कंपनियों में ही निवेश को प्राथमिकता दें।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">आर्थिक मोर्चे पर भी आने वाले दिनों में कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम बाजार की दिशा तय कर सकते हैं। निवेशकों की नजर महंगाई के आंकड़ों, केंद्रीय बैंक की नीति से जुड़े संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक आर्थिक घटनाओं पर बनी रहेगी। इसके अलावा कंपनियों के तिमाही परिणाम भी बाजार में सेक्टर आधारित उतार-चढ़ाव ला सकते हैं। यदि आईटी और बैंकिंग कंपनियों के नतीजे मजबूत आते हैं तो इन क्षेत्रों में निवेशकों की दिलचस्पी और बढ़ सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 12:00:27 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>सेंसेक्स में 200 अंक की गिरावट, आईटी और ऑटो शेयरों में बिकवाली से बाजार दबाव में</title>
                                    <description><![CDATA[सप्ताह के पहले कारोबारी दिन घरेलू शेयर बाजार कमजोर शुरुआत के साथ कारोबार करता दिखा। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में रहे, जबकि आईटी और ऑटो सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/sensex-falls-by-200-points-market-under-pressure-due-to/article-57374"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/nifty-today.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत कमजोरी के साथ हुई। शुरुआती कारोबार में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का सेंसेक्स करीब 200 अंक तक फिसलकर 76,550 के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी भी करीब 50 अंक की गिरावट के साथ 23,900 के स्तर पर बना रहा। बाजार खुलते ही निवेशकों ने मुनाफावसूली का रुख अपनाया, जिसका असर प्रमुख सूचकांकों के साथ कई बड़े सेक्टरों पर भी दिखाई दिया। खास तौर पर आईटी और ऑटो कंपनियों के शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली दर्ज की गई, जिससे बाजार पर दबाव और बढ़ गया। कारोबार की शुरुआत में निवेशकों की नजर घरेलू और वैश्विक संकेतों पर रही। पिछले कुछ दिनों से बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव का माहौल बना हुआ है और निवेशक किसी भी बड़े निवेश से पहले सतर्क नजर आ रहे हैं। शुरुआती कारोबार में कई दिग्गज आईटी कंपनियों के शेयर लाल निशान में कारोबार करते दिखाई दिए। इसके अलावा ऑटो सेक्टर के शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के दिनों में जिन शेयरों में अच्छी तेजी आई थी, उनमें निवेशकों ने मुनाफावसूली की, जिससे प्रमुख सूचकांक दबाव में आ गए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">हालांकि सभी सेक्टरों में एक जैसी स्थिति नहीं रही। कुछ चुनिंदा शेयरों में खरीदारी भी देखने को मिली, लेकिन उसका असर बाजार की समग्र दिशा बदलने के लिए पर्याप्त नहीं था। बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में सीमित दायरे में कारोबार होता रहा, जबकि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी मिश्रित रुख देखने को मिला। निवेशकों का फोकस फिलहाल आगामी आर्थिक आंकड़ों, कंपनियों के तिमाही नतीजों और वैश्विक बाजारों से मिलने वाले संकेतों पर बना हुआ है। वैश्विक बाजारों की बात करें तो एशियाई शेयर बाजारों में मिला-जुला कारोबार देखने को मिला। जापान का निक्केई और दक्षिण कोरिया का कोस्पी बढ़त के साथ कारोबार करते दिखाई दिए। निक्केई में करीब 0.93 प्रतिशत और कोस्पी में लगभग 0.69 प्रतिशत की मजबूती दर्ज की गई। दूसरी ओर हांगकांग का हैंगसेंग इंडेक्स कमजोरी के साथ कारोबार करता नजर आया और इसमें करीब 0.93 प्रतिशत की गिरावट रही। एशियाई बाजारों के इस मिश्रित रुख का असर भी भारतीय बाजार की शुरुआत पर देखने को मिला, जहां निवेशकों ने सतर्कता बरतना बेहतर समझा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अमेरिकी शेयर बाजार से हालांकि सकारात्मक संकेत मिले थे। पिछले कारोबारी सत्र में डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज, नैस्डैक और एसएंडपी 500 तीनों प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ बंद हुए। नैस्डैक में दो प्रतिशत से अधिक की तेजी रही, जबकि डाउ जोन्स और एसएंडपी 500 में भी अच्छी बढ़त दर्ज की गई। अमेरिकी बाजारों की मजबूती के बावजूद घरेलू बाजार में उसका सकारात्मक असर सीमित रहा। इसकी एक बड़ी वजह घरेलू स्तर पर जारी मुनाफावसूली और विदेशी निवेशकों की बिकवाली मानी जा रही है। विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा रही हैं। हाल के सात कारोबारी दिनों में विदेशी निवेशकों ने करीब 2,810 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध बिकवाली की है। वहीं पिछले 30 दिनों के दौरान भी विदेशी निवेशकों की ओर से 46 हजार करोड़ रुपये से अधिक की निकासी दर्ज की गई है। इसके उलट घरेलू संस्थागत निवेशक (डीआईआई) लगातार खरीदारी कर रहे हैं। पिछले सात दिनों में उन्होंने 12 हजार करोड़ रुपये से अधिक और बीते एक महीने में लगभग 79 हजार करोड़ रुपये के शेयर खरीदे हैं। घरेलू निवेशकों की यह खरीदारी बाजार को बड़े स्तर पर गिरने से रोकने में सहायक साबित हो रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पिछले कारोबारी सत्र में भी बाजार दबाव में रहा था। सेंसेक्स 372 अंक की गिरावट के साथ 76,728 पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 110 अंक टूटकर 23,946 के स्तर पर आ गया था। लगातार दूसरे कारोबारी दिन बाजार में कमजोरी बने रहने से निवेशकों के बीच सतर्कता बढ़ी है। यह गिरावट व्यापक घबराहट की नहीं बल्कि सामान्य उतार-चढ़ाव का हिस्सा है। निवेशकों को जल्दबाजी में फैसले लेने से बचना चाहिए और मजबूत कंपनियों में लंबी अवधि के नजरिए से निवेश बनाए रखना चाहिए। आने वाले दिनों में वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों, डॉलर की चाल, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और कंपनियों के पहली तिमाही के वित्तीय नतीजों का असर बाजार की दिशा पर साफ दिखाई देगा। यदि विदेशी निवेशकों की बिकवाली कम होती है और घरेलू निवेशकों की खरीदारी जारी रहती है तो बाजार में स्थिरता लौट सकती है। वहीं किसी भी बड़े वैश्विक घटनाक्रम या आर्थिक आंकड़े का असर भी निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 11:20:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>Persistent Systems के शेयर 8% गिरे, Nagarro डील से मचा बाजार में हड़कंप</title>
                                    <description><![CDATA[जर्मन कंपनी Nagarro SE के 1.4 अरब यूरो अधिग्रहण के ऐलान के बाद ब्रोकरेज हुए बंटे, मिडकैप इंडेक्स में सबसे बड़ा नुकसान]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/shares-of-persistent-systems-fell-8-nagarro-deal-created-panic/article-57280"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/persistent-systems.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">Persistent Systems के शेयरों में सोमवार, 29 जून को अचानक तेज गिरावट देखने को मिली जब कंपनी के जर्मनी स्थित डिजिटल इंजीनियरिंग फर्म Nagarro SE के अधिग्रहण की घोषणा ने बाजार में हलचल मचा दी। शुरुआती कारोबार में ही स्टॉक करीब 8.2 प्रतिशत तक टूट गया और यह BSE मिडकैप इंडेक्स का सबसे बड़ा गिरने वाला शेयर बन गया। कारोबार के दौरान शेयर लगभग 4,445 रुपये तक फिसल गया, जिससे निवेशकों में अचानक घबराहट का माहौल बन गया। यह गिरावट तब आई जब कंपनी ने 1.4 अरब यूरो की बड़ी डील के तहत Nagarro SE के अधिग्रहण की योजना का ऐलान किया। यह डील Persistent Systems की सहायक कंपनी Galaxy Germany Holding के जरिए की जा रही है, जिसमें Nagarro के सभी बचे हुए शेयरों को 81 यूरो प्रति शेयर नकद में खरीदने का प्रस्ताव रखा गया है। बताया जा रहा है कि यह ऑफर कंपनी के 25 जून के अनडिस्टर्ब्ड क्लोजिंग प्राइस पर लगभग 140 प्रतिशत का प्रीमियम दर्शाता है, लेकिन इसके बावजूद बाजार की प्रतिक्रिया नकारात्मक रही।</p>
<p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;"><img alt="2Q=="></img></p>
<p style="text-align:justify;">कुछ ब्रोकरेज इसे Persistent के लिए दीर्घकालिक रणनीतिक कदम मान रहे हैं, जिससे कंपनी की ग्लोबल डिजिटल इंजीनियरिंग क्षमता मजबूत हो सकती है। वहीं दूसरी तरफ कुछ विश्लेषक इस डील को महंगा और जोखिम भरा बता रहे हैं, खासकर तब जब कंपनी पर पहले से ही ग्रोथ और मार्जिन प्रेशर बना हुआ है। शुरुआती प्रतिक्रिया में निवेशकों ने इस सौदे को लेकर सतर्क रुख अपनाया है। बताया जा रहा है कि इतनी बड़ी विदेशी अधिग्रहण डील के चलते कंपनी की बैलेंस शीट और कैश फ्लो पर दबाव बढ़ सकता है, जिसका असर निकट भविष्य में शेयर प्रदर्शन पर भी देखने को मिल सकता है। कुछ बाजार जानकारों का कहना है कि यह डील भले ही रणनीतिक रूप से सही दिशा में हो, लेकिन इसकी कीमत और इंटीग्रेशन रिस्क निवेशकों को परेशान कर रहा है। गौर करने वाली बात यह है कि पिछले एक साल में भी Persistent Systems का प्रदर्शन कमजोर रहा है। स्टॉक पहले ही करीब 26.3 प्रतिशत तक गिर चुका है, जबकि इसी अवधि में निफ्टी 50 में लगभग 5.6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। ऐसे में ताजा गिरावट ने निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी है। विदेशी अधिग्रहणों में अक्सर इंटीग्रेशन, कल्चर और ऑपरेशनल चुनौतियां सामने आती हैं, और यही वजह है कि कई निवेशक इस डील को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं दिख रहे हैं। हालांकि कंपनी की ओर से अभी तक यह स्पष्ट किया गया है कि यह अधिग्रहण उनके ग्लोबल विस्तार और क्लाइंट बेस बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 12:35:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शेयर बाजार में जोरदार वापसी, सेंसेक्स 500 अंक चढ़ा; निफ्टी 24,150 के पार</title>
                                    <description><![CDATA[सप्ताह के पहले कारोबारी दिन बाजार में खरीदारी का माहौल दिखा। IT और ऑयल एंड गैस शेयरों में तेजी से सेंसेक्स 77,300 के करीब पहुंचा, जबकि निफ्टी में भी 150 अंकों की बढ़त दर्ज की गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/6a38cae5b4995/article-56611"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/sensex-today-(4).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को भारतीय शेयर बाजार ने मजबूत शुरुआत की। पिछले कारोबारी सत्र में आई भारी गिरावट के बाद निवेशकों की वापसी देखने को मिली और बाजार में चौतरफा खरीदारी का माहौल बना रहा। शुरुआती कारोबार के दौरान सेंसेक्स करीब 500 अंक की तेजी के साथ 77,300 के स्तर के आसपास पहुंच गया, जबकि निफ्टी भी लगभग 150 अंक मजबूत होकर 24,150 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया। बाजार में सबसे ज्यादा खरीदारी सूचना प्रौद्योगिकी यानी IT और ऑयल एंड गैस सेक्टर के शेयरों में देखने को मिली।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेत और विदेशी निवेशकों की खरीदारी ने घरेलू बाजार को सहारा दिया है। पिछले कुछ दिनों से बाजार में उतार-चढ़ाव बना हुआ था, लेकिन सोमवार को निवेशकों का भरोसा लौटता दिखाई दिया। बड़ी कंपनियों के शेयरों में खरीदारी बढ़ने से प्रमुख सूचकांकों को मजबूती मिली। कारोबार के शुरुआती घंटों में कई दिग्गज IT कंपनियों के शेयर हरे निशान में कारोबार करते नजर आए। इसके अलावा तेल और गैस क्षेत्र की कंपनियों में भी निवेशकों की रुचि बढ़ी। माना जा रहा है कि वैश्विक स्तर पर ऊर्जा बाजार में स्थिरता और घरेलू मांग के सकारात्मक संकेतों ने इन शेयरों को समर्थन दिया है। बैंकिंग और ऑटो सेक्टर में भी सीमित लेकिन सकारात्मक बढ़त दर्ज की गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">एशियाई बाजारों की बात करें तो सोमवार को वहां मिला-जुला कारोबार देखने को मिला। जापान का निक्केई सूचकांक मजबूत बढ़त के साथ कारोबार करता दिखाई दिया। दक्षिण कोरिया का कोस्पी भी हरे निशान में रहा और निवेशकों का उत्साह देखने को मिला। हालांकि हांगकांग का हैंगसेंग इंडेक्स दबाव में रहा और उसमें गिरावट दर्ज की गई। एशियाई बाजारों के इस मिश्रित प्रदर्शन के बावजूद भारतीय बाजार ने मजबूती दिखाई, जिसे घरेलू निवेशकों के भरोसे का संकेत माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वैश्विक बाजारों से भी भारतीय निवेशकों को सकारात्मक संकेत मिले हैं। पिछले कारोबारी सत्र में अमेरिकी बाजार बढ़त के साथ बंद हुए थे। डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज में मामूली तेजी दर्ज की गई, जबकि नैस्डैक और एसएंडपी 500 में मजबूत उछाल देखने को मिला। तकनीकी कंपनियों के शेयरों में खरीदारी बढ़ने से अमेरिकी बाजारों को सहारा मिला था। इसका असर सोमवार को एशियाई और भारतीय बाजारों पर भी देखने को मिला।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बाजार विशेषज्ञों के अनुसार विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। शुक्रवार को एफआईआई ने भारतीय शेयर बाजार में करीब 4,859 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की थी। यह आंकड़ा निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। हालांकि पिछले 30 दिनों के आंकड़ों पर नजर डालें तो विदेशी निवेशकों की कुल निकासी अभी भी अधिक बनी हुई है, लेकिन हाल के दिनों में उनकी खरीदारी ने बाजार को राहत दी है। वहीं घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी डीआईआई की भूमिका भी महत्वपूर्ण बनी हुई है। पिछले कुछ महीनों में घरेलू निवेशकों ने बाजार में लगातार निवेश किया है, जिससे वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय बाजार को स्थिरता मिली है। म्यूचुअल फंड और बीमा कंपनियों की ओर से लगातार निवेश बाजार के लिए मजबूत आधार तैयार कर रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सोमवार की तेजी इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि पिछले सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन बाजार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी। शुक्रवार को सेंसेक्स करीब 607 अंक टूटकर 76,802 के स्तर पर बंद हुआ था। वहीं निफ्टी भी 154 अंक गिरकर 24,013 के स्तर पर आ गया था। उस गिरावट के बाद निवेशकों में कुछ चिंता देखी जा रही थी, लेकिन सप्ताह की शुरुआत में आई तेजी ने बाजार की धारणा को बेहतर किया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर कई महत्वपूर्ण आर्थिक संकेतकों और वैश्विक घटनाक्रमों पर बनी रहेगी। कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियां, विदेशी निवेशकों का रुख और मानसून की प्रगति जैसे कारक बाजार की दिशा तय कर सकते हैं। इसके अलावा कंपनियों के तिमाही नतीजों को लेकर भी निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ने लगी है। छोटे और मझोले शेयरों में भी सोमवार को सकारात्मक रुझान देखने को मिला। कई सेक्टरों में खरीदारी का दायरा बढ़ा, जिससे व्यापक बाजार को मजबूती मिली। हालांकि विशेषज्ञ निवेशकों को सलाह दे रहे हैं कि वे केवल तेजी देखकर निवेश के फैसले न लें और कंपनियों की बुनियादी स्थिति का मूल्यांकन जरूर करें।  सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार ने मजबूती के साथ शुरुआत की है। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में आई बढ़त ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है। विदेशी निवेशकों की खरीदारी, वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेत और चुनिंदा सेक्टरों में मजबूत प्रदर्शन के कारण बाजार में उत्साह का माहौल बना हुआ है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 11:38:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>जियो प्लेटफॉर्म्स के सबसे बड़े IPO की तैयारी, 12.5 लाख करोड़ वैल्यूएशन का अनुमान</title>
                                    <description><![CDATA[रिलायंस समर्थित जियो ने सेबी के पास DRHP दाखिल किया, भारत के सबसे बड़े IPO की दिशा में ऐतिहासिक कदम, 27 करोड़ नए शेयर जारी होंगे]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/preparation-for-the-biggest-ipo-of-jio-platforms-estimated-valuation/article-56438"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/jio-ipo-2026.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भारत के पूंजी बाजारों में एक ऐतिहासिक मोड़ लेते हुए रिलायंस इंडस्ट्रीज समर्थित जियो प्लेटफॉर्म्स ने शुक्रवार को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के पास अपना ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) दाखिल कर दिया है। इस कदम के साथ देश के अब तक के सबसे बड़े प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) की नींव रखी गई है, जिसकी अनुमानित वैल्यूएशन करीब 12.5 लाख करोड़ रुपये बताई जा रही है। जियो प्लेटफॉर्म्स इस आईपीओ के तहत लगभग 27 करोड़ नए शेयर जारी करेगी और इससे करीब 36,000 करोड़ रुपये तक की राशि जुटाने की संभावना है। यह पूरी फंडरेजिंग नई इक्विटी जारी करके की जाएगी और इसमें मौजूदा निवेशकों द्वारा किसी तरह का ऑफर फॉर सेल शामिल नहीं होगा। इसका मतलब है कि मौजूदा निवेशक अपनी हिस्सेदारी बेचकर बाहर नहीं निकलेंगे, बल्कि कंपनी की ग्रोथ में बने रहेंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कंपनी द्वारा जुटाई गई इस राशि का उपयोग मुख्य रूप से मौजूदा कर्ज को कम करने और सामान्य कॉर्पोरेट जरूरतों को पूरा करने में किया जाएगा। DRHP के अनुसार करीब 27,500 करोड़ रुपये के कर्ज को आंशिक या पूर्ण रूप से चुकाने की योजना है। यह कदम कंपनी के बैलेंस शीट को मजबूत करने और भविष्य की ग्रोथ को गति देने के उद्देश्य से उठाया गया है।इस IPO को भारतीय कैपिटल मार्केट्स के लिए एक बड़ी परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है। हाल के महीनों में वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और बाजार की अस्थिरता के कारण निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई थी, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह मेगा आईपीओ बाजार में नई ऊर्जा ला सकता है। दूसरी ओर, NSE द्वारा भी अपना DRHP दाखिल करने की तैयारी से आने वाले महीनों में IPO मार्केट में तेज गतिविधि देखने को मिल सकती है। रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने इस घोषणा को एक भावनात्मक क्षण बताया। उन्होंने कहा कि यह कदम न केवल रिलायंस परिवार बल्कि करोड़ों शेयरधारकों के लिए भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि उनके बच्चे आकाश, ईशा और अनंत जियो IPO प्रक्रिया का नेतृत्व कर रहे हैं और भविष्य में कंपनी के नए विकास अवसरों को आगे बढ़ाएंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रिलायंस इंडस्ट्रीज ने 2020 में वैश्विक निवेशकों से बड़ी पूंजी जुटाकर जियो प्लेटफॉर्म्स में अपनी हिस्सेदारी लगभग 33 प्रतिशत कम की थी। उस दौर में Meta, Google, KKR, Silver Lake, Vista Equity Partners और कई sovereign funds जैसे Abu Dhabi Investment Authority ने जियो में निवेश किया था। यह निवेश भारत की तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था पर वैश्विक भरोसे का संकेत माना गया था। आज जियो प्लेटफॉर्म्स केवल एक टेलीकॉम कंपनी नहीं रह गई है, बल्कि यह AI, क्लाउड सेवाओं, एंटरप्राइज नेटवर्क और डिजिटल एप्लिकेशन जैसे क्षेत्रों में भी विस्तार कर चुकी है। भारत की 1.4 अरब की जनसंख्या, सस्ती इंटरनेट दरें और तेजी से बढ़ती डिजिटल पहुंच ने कंपनी को बड़े पैमाने पर विकास का अवसर दिया है। वित्तीय वर्ष 2026 में जियो प्लेटफॉर्म्स ने 1.47 लाख करोड़ रुपये का राजस्व और लगभग 30,000 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया है, जो इसकी मजबूत वित्तीय स्थिति को दर्शाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस IPO से कंपनी की वैश्विक स्थिति और मजबूत होगी और यह भारत को टेक्नोलॉजी कंपनियों के वैश्विक हब के रूप में स्थापित करने में मदद करेगा। जियो प्लेटफॉर्म्स का यह प्रस्तावित IPO भारतीय बाजार के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 11:24:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सोना ₹4,090 और चांदी ₹9,658 टूटी, 10 दिन में निवेशकों को बड़ा झटका</title>
                                    <description><![CDATA[मिडिल ईस्ट तनाव के बीच सोना 1.48 लाख और चांदी 2.36 लाख रुपए पर पहुंची, निवेशकों का रुझान कैश की ओर बढ़ा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/6a29097e81a7d/article-55493"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/gold-rate-india.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच बुधवार 10 जून को सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। आमतौर पर युद्ध या अंतरराष्ट्रीय तनाव के समय निवेशक सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने और चांदी की ओर रुख करते हैं, लेकिन इस बार तस्वीर कुछ अलग दिखाई दे रही है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के ताजा आंकड़ों के अनुसार 24 कैरेट सोने की कीमत 4,090 रुपए टूटकर 1,48,429 रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गई। वहीं चांदी में और बड़ी गिरावट देखने को मिली तथा इसकी कीमत 9,658 रुपए घटकर 2,36,280 रुपए प्रति किलोग्राम रह गई। बुलियन बाजार में आई इस तेज गिरावट ने निवेशकों और कारोबारियों दोनों का ध्यान खींचा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">हालात इसलिए अलग हैं क्योंकि इस बार निवेशक अनिश्चितता के दौर में अपनी पूंजी को नकदी के रूप में रखना ज्यादा सुरक्षित समझ रहे हैं। बताया जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय हालात तेजी से बदल रहे हैं और निवेशक जोखिम कम करने के लिए अपने सोने और चांदी के निवेश बेच रहे हैं। इसका सीधा असर कीमतों पर दिखाई दे रहा है। पिछले कुछ महीनों में सोने और चांदी ने रिकॉर्ड स्तर छुए थे, जिसके बाद अब बड़े निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली यानी प्रॉफिट बुकिंग भी की जा रही है। बाजार में सप्लाई बढ़ने से कीमतों पर दबाव और ज्यादा बढ़ गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अगर पिछले 10 दिनों के आंकड़ों पर नजर डालें तो चांदी में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई है। 31 मई को चांदी की कीमत 2,63,350 रुपए प्रति किलोग्राम थी, जो अब घटकर 2,36,280 रुपए रह गई है। यानी सिर्फ दस दिनों में चांदी करीब 27 हजार रुपए सस्ती हो गई। इसी अवधि में सोना भी लगभग 8 हजार रुपए कमजोर हुआ है। निवेशकों के लिए यह गिरावट इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जनवरी महीने में दोनों धातुओं ने रिकॉर्ड ऊंचाई हासिल की थी। उस समय लगातार बढ़ती कीमतों को देखते हुए बड़ी संख्या में निवेशकों ने खरीदारी की थी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस साल की शुरुआत में सोना 29 जनवरी को 1,76,121 रुपए प्रति 10 ग्राम के ऑलटाइम हाई स्तर पर पहुंच गया था। उस रिकॉर्ड स्तर से अब तक सोने की कीमत में लगभग 28 हजार रुपए की गिरावट दर्ज की जा चुकी है। वहीं चांदी ने भी 29 जनवरी को 3,85,933 रुपए प्रति किलोग्राम का रिकॉर्ड बनाया था। उस स्तर से तुलना करें तो चांदी अब करीब 1.50 लाख रुपए तक सस्ती हो चुकी है। यह गिरावट बुलियन बाजार के इतिहास में हाल के वर्षों की बड़ी गिरावटों में शामिल मानी जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">देश के प्रमुख शहरों में भी सोने की कीमतों में नरमी दिखाई दी। दिल्ली और जयपुर में 24 कैरेट सोना 1,49,010 रुपए प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता दिखा। मुंबई, कोलकाता और रायपुर में इसकी कीमत 1,48,860 रुपए रही। भोपाल, पटना और अहमदाबाद में सोना 1,48,910 रुपए प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया। बाजार जानकारों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय कीमतों और डॉलर की चाल का असर आने वाले दिनों में भी भारतीय बाजार पर दिखाई दे सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कारोबारियों के मुताबिक ग्राहकों की खरीदारी में भी फिलहाल थोड़ी सुस्ती देखने को मिल रही है। कई लोग अभी और गिरावट की उम्मीद में खरीदारी टाल रहे हैं। हालांकि कुछ निवेशक इसे लंबे समय के निवेश के लिए अवसर के रूप में भी देख रहे हैं। ज्वेलरी कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि शादी और त्योहारों के सीजन से पहले यदि कीमतें इसी स्तर पर बनी रहती हैं तो मांग में सुधार देखने को मिल सकता है। आने वाले दिनों में सोने और चांदी की दिशा काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर निर्भर करेगी। यदि मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ता है तो बाजार की प्रतिक्रिया बदल सकती है। वहीं यदि हालात सामान्य होते हैं तो निवेशकों का रुझान दोबारा इक्विटी और अन्य निवेश विकल्पों की ओर बढ़ सकता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 13:25:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>ईरान-इजरायल तनाव से शेयर बाजार में हड़कंप, सेंसेक्स 900 अंक टूटा</title>
                                    <description><![CDATA[मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव का असर वैश्विक बाजारों पर दिखा, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और विदेशी निवेशकों की बिकवाली से भारतीय बाजार दबाव]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/6a265aa8a5d71/article-55252"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/sensex-today-(2).jpg" alt=""></a><br /><p>भारतीय शेयर बाजार में सोमवार, 8 जून 2026 को कारोबार की शुरुआत भारी दबाव के साथ हुई। मध्य पूर्व में ईरान और इजरायल के बीच एक बार फिर बढ़े सैन्य तनाव ने दुनिया भर के निवेशकों की चिंता बढ़ा दी, जिसका सीधा असर भारतीय बाजार पर भी दिखाई दिया। सुबह बाजार खुलते ही सेंसेक्स करीब 900 अंक तक टूट गया, जबकि निफ्टी में भी लगभग एक प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। शुरुआती कारोबार में निफ्टी 23,113 के स्तर तक फिसल गया। हालांकि बाद में कुछ चुनिंदा शेयरों में खरीदारी लौटने से बाजार ने अपने नुकसान का एक हिस्सा कम किया, लेकिन पूरे दिन निवेशकों के बीच सतर्कता का माहौल बना रहा।</p>
<p>ईरान और इजरायल के बीच हालिया सैन्य कार्रवाई ने वैश्विक निवेशकों को जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाने के लिए मजबूर किया है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों और उसके जवाब में ईरान की मिसाइल कार्रवाई ने पहले से संवेदनशील वैश्विक माहौल को और तनावपूर्ण बना दिया। ऐसे हालात में निवेशक आमतौर पर सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं और शेयर बाजारों से पैसा निकालने लगते हैं। यही वजह रही कि भारतीय बाजार में भी बिकवाली का दबाव बढ़ गया।</p>
<p>सेंसेक्स में शामिल कई बड़ी कंपनियों के शेयरों में गिरावट देखी गई। टीसीएस, महिंद्रा एंड महिंद्रा, इंडिगो, बजाज फाइनेंस, एलएंडटी और इटरनल जैसे शेयर शुरुआती कारोबार में प्रमुख नुकसान झेलने वालों में शामिल रहे। आईटी, ऑटो, वित्तीय सेवाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर से जुड़े शेयरों पर दबाव अधिक दिखाई दिया। निवेशकों को डर है कि यदि मध्य पूर्व का संकट लंबा खिंचता है तो वैश्विक अर्थव्यवस्था और व्यापार पर इसका असर पड़ सकता है।</p>
<p>सेक्टोरल स्तर पर भी अधिकांश सूचकांक लाल निशान में कारोबार करते दिखाई दिए। रियल्टी सेक्टर में सबसे अधिक कमजोरी देखने को मिली और यह करीब दो प्रतिशत तक नीचे फिसल गया। इसके अलावा मेटल, ऑटो, आईटी और एफएमसीजी सेक्टरों में भी गिरावट दर्ज की गई। हालांकि फार्मा, हेल्थकेयर और पीएसयू बैंकिंग शेयरों में कुछ मजबूती देखने को मिली। बाजार जानकारों के अनुसार अनिश्चित परिस्थितियों में निवेशक अक्सर डिफेंसिव सेक्टरों की ओर रुख करते हैं, इसलिए स्वास्थ्य और दवा कंपनियों के शेयर अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन करते नजर आए।</p>
<p>इस बीच कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। मध्य पूर्व दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक क्षेत्रों में से एक माना जाता है और वहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव तेल आपूर्ति को प्रभावित कर सकता है। इसी आशंका के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमत में तेज उछाल दर्ज किया गया और यह 96 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया। वहीं वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 93 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चला गया। भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी महंगाई और व्यापार घाटे को प्रभावित कर सकती है, इसलिए बाजार ने इस खबर पर भी नकारात्मक प्रतिक्रिया दी।</p>
<p>भारतीय बाजार पर विदेशी निवेशकों की बिकवाली का असर भी साफ दिखाई दिया। हाल के कारोबारी सत्रों में विदेशी संस्थागत निवेशकों ने लगातार भारतीय शेयरों में बिकवाली की है। 5 जून को भी विदेशी निवेशकों ने हजारों करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी ने कुछ हद तक बाजार को सहारा देने का काम किया, लेकिन विदेशी पूंजी की निकासी का दबाव अभी भी बना हुआ है। जब तक वैश्विक स्तर पर स्थिति सामान्य नहीं होती, विदेशी निवेशकों का रुख सतर्क बना रह सकता है।</p>
<p>एशियाई बाजारों में भी कमजोरी का माहौल देखने को मिला। दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक चार प्रतिशत से अधिक टूट गया, जबकि जापान का निक्केई भी भारी गिरावट के साथ कारोबार करता दिखाई दिया। हांगकांग के हैंगसेंग सूचकांक में भी गिरावट दर्ज की गई। इससे पहले अमेरिकी बाजारों में भी सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन बड़ी गिरावट देखी गई थी। नैस्डैक, डॉव जोंस और एसएंडपी 500 जैसे प्रमुख सूचकांकों में कमजोरी ने वैश्विक निवेशकों की चिंता को और बढ़ा दिया है।</p>
<p>विदेशी मुद्रा बाजार में भी तनाव का असर दिखाई दिया। सोमवार सुबह रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 17 पैसे कमजोर होकर 95.35 के स्तर पर पहुंच गया। जानकारों के अनुसार कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और विदेशी निवेशकों की बिकवाली भारतीय मुद्रा पर दबाव बना रही हैं। आने वाले दिनों में यदि भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ता है तो रुपये में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। निवेशकों की नजर मध्य पूर्व से आने वाली खबरों और वैश्विक बाजारों के रुख पर बनी हुई है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है और निवेशकों को जल्दबाजी में बड़े फैसले लेने से बचना चाहिए। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 12:58:59 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>इस हफ्ते सोना-चांदी हुआ सस्ता, निवेशकों की नजर बाजार की अगली चाल पर</title>
                                    <description><![CDATA[एक सप्ताह में सोने के दाम 2,225 रुपए और चांदी 6,442 रुपए तक फिसली, हालांकि सालभर के आंकड़े अब भी मजबूत तेजी की ओर इशारा कर रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/gold-and-silver-became-cheaper-this-week-investors-are-eyeing/article-55066"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/gold-price-today-(4).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">सोने और चांदी की कीमतों में इस सप्ताह गिरावट दर्ज की गई है, जिससे सर्राफा बाजार में हलचल देखने को मिल रही है। लगातार ऊंचे स्तर पर कारोबार करने के बाद दोनों कीमती धातुओं में आई इस नरमी ने निवेशकों और खरीदारी की योजना बना रहे ग्राहकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के ताजा आंकड़ों के अनुसार 24 कैरेट सोने की कीमत में पिछले एक सप्ताह के दौरान 2,225 रुपए प्रति 10 ग्राम की कमी आई है। वहीं चांदी के दाम में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है और इसकी कीमत 6,442 रुपए प्रति किलोग्राम तक घट गई है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि हालिया गिरावट के बावजूद सोना और चांदी अभी भी लंबे समय के निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">आंकड़ों के मुताबिक 30 मई को 24 कैरेट सोना 1,56,463 रुपए प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा था, जो अब घटकर 1,54,238 रुपए पर पहुंच गया है। इसी तरह चांदी की कीमत 2,63,350 रुपए प्रति किलोग्राम से घटकर 2,56,908 रुपए रह गई है। हालांकि यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब पिछले कुछ महीनों में सोना और चांदी दोनों ने रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचकर निवेशकों को चौंका दिया था। सर्राफा कारोबारियों का कहना है कि ऊंचे स्तर पर मुनाफावसूली और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उतार-चढ़ाव का असर घरेलू बाजार पर भी देखने को मिला है। कैरेट के हिसाब से देखें तो 24 कैरेट सोना 1,54,238 रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है, जबकि 22 कैरेट सोना 1,41,282 रुपए और 18 कैरेट सोना 1,15,679 रुपए प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा है। वहीं 14 कैरेट सोने का भाव 90,229 रुपए प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया है। अलग-अलग शहरों में टैक्स और अन्य स्थानीय शुल्कों के कारण कीमतों में थोड़ा अंतर देखने को मिल रहा है। दिल्ली और जयपुर में 24 कैरेट सोना 1,55,910 रुपए प्रति 10 ग्राम के स्तर पर है, जबकि भोपाल, पटना और अहमदाबाद में इसका भाव 1,55,810 रुपए के आसपास दर्ज किया गया। मुंबई, कोलकाता और रायपुर जैसे शहरों में सोना अपेक्षाकृत कम कीमत पर उपलब्ध है।</p>
<p class="isSelectedEnd">हालांकि एक सप्ताह की गिरावट के बावजूद यदि पूरे साल का आंकड़ा देखा जाए तो सोना और चांदी दोनों ने निवेशकों को मजबूत रिटर्न दिया है। वर्ष 2026 की शुरुआत में 31 दिसंबर 2025 को सोने की कीमत 1,33,195 रुपए प्रति 10 ग्राम थी। वर्तमान स्तर की तुलना करें तो सोना अब भी करीब 21 हजार रुपए से अधिक महंगा है। इसी तरह चांदी भी 2,30,420 रुपए प्रति किलोग्राम से बढ़कर 2,56,908 रुपए तक पहुंच चुकी है। यानी साल की शुरुआत की तुलना में चांदी अब भी करीब 27 हजार रुपए महंगी बनी हुई है। इस साल सर्राफा बाजार ने कई बड़े उतार-चढ़ाव देखे हैं। जनवरी महीने में सोने ने 1.76 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम और चांदी ने 3.86 लाख रुपए प्रति किलोग्राम का रिकॉर्ड स्तर छुआ था। इसके बाद बाजार में सुधार और गिरावट का दौर भी देखने को मिला। फरवरी और मार्च में कीमतों में नरमी आई, लेकिन अप्रैल और मई में फिर तेजी लौटती नजर आई। अब जून के पहले सप्ताह में आई गिरावट को बाजार सामान्य करेक्शन के रूप में देख रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">आर्थिक परिस्थितियां, डॉलर की चाल, केंद्रीय बैंकों की नीतियां और अंतरराष्ट्रीय मांग सोने-चांदी की कीमतों को प्रभावित करती हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में कीमतों में फिर बदलाव देखने को मिल सकता है। कई निवेशक मौजूदा गिरावट को खरीदारी के अवसर के रूप में भी देख रहे हैं, जबकि कुछ लोग आगे की दिशा स्पष्ट होने का इंतजार कर रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">सोना खरीदने की योजना बना रहे ग्राहकों को कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखने की सलाह दी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार हमेशा बीआईएस हॉलमार्क वाला प्रमाणित सोना ही खरीदना चाहिए। हॉलमार्क सोने की शुद्धता की गारंटी देता है और ग्राहकों को गुणवत्ता को लेकर भरोसा प्रदान करता है। इसके अलावा खरीदारी से पहले अलग-अलग स्रोतों से सोने का ताजा भाव जांच लेना भी जरूरी माना जाता है। इससे ग्राहकों को सही कीमत पर खरीदारी करने में मदद मिलती है। बाजार में आई ताजा गिरावट ने ग्राहकों को थोड़ी राहत जरूर दी है। शादी-ब्याह और त्योहारों के सीजन से पहले कीमतों में नरमी को खरीदारी के लिहाज से सकारात्मक माना जा रहा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 12:43:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>सेंसेक्स 700 अंक टूटा, निफ्टी 23,350 के करीब फिसला, आईटी शेयरों में भारी बिकवाली</title>
                                    <description><![CDATA[वैश्विक तनाव, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और कमजोर मानसून अनुमान से बाजार पर दबाव]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/6a1fe1bfdc827/article-54853"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/sensex-today-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को कारोबार की शुरुआत कमजोरी के साथ हुई और दिन चढ़ने के साथ बिकवाली का दबाव और बढ़ता गया। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स करीब 700 अंक टूटकर 73,950 के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया, जबकि निफ्टी भी लगभग 150 अंकों की गिरावट के साथ 23,350 के आसपास पहुंच गया। बाजार में सबसे ज्यादा दबाव आईटी और रियल्टी सेक्टर के शेयरों पर देखने को मिला। निवेशकों की सतर्कता और वैश्विक घटनाक्रमों ने बाजार के माहौल को प्रभावित किया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">मंगलवार को बाजार मजबूत बढ़त के साथ बंद हुआ था और निवेशकों को उम्मीद थी कि यह तेजी आगे भी जारी रह सकती है। हालांकि बुधवार को शुरुआती कारोबार से ही तस्वीर बदलती नजर आई। कई बड़े शेयरों में बिकवाली शुरू हुई और इसका असर प्रमुख सूचकांकों पर साफ दिखाई दिया। घरेलू और वैश्विक दोनों स्तरों पर मौजूद अनिश्चितताओं ने निवेशकों को सतर्क रुख अपनाने के लिए मजबूर किया है। बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव माना जा रहा है। अमेरिका, इजराइल और ईरान से जुड़ी घटनाओं पर दुनिया भर के निवेशकों की नजर बनी हुई है। क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता का माहौल है। निवेशक फिलहाल जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाते दिखाई दे रहे हैं, जिसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ा है। ऐसे समय में कई निवेशक मुनाफावसूली करना बेहतर समझ रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">दूसरा बड़ा कारण विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली को माना जा रहा है। हाल के दिनों में विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय बाजार से बड़ी मात्रा में धन निकाला है। आंकड़ों के अनुसार मई महीने के दौरान विदेशी निवेशकों ने हजारों करोड़ रुपए के शेयर बेचे हैं। केवल पिछले कारोबारी सत्र में भी विदेशी निवेशकों की ओर से भारी बिकवाली दर्ज की गई। इससे बाजार में दबाव और बढ़ गया। विदेशी निवेशक इस समय वैश्विक परिस्थितियों का मूल्यांकन कर रहे हैं। ब्याज दरों, अंतरराष्ट्रीय तनाव और अन्य आर्थिक कारकों के चलते वे अपने निवेश पोर्टफोलियो में बदलाव कर रहे हैं। इसका असर उभरते बाजारों पर देखने को मिल रहा है, जिनमें भारत भी शामिल है।</p>
<p class="isSelectedEnd">तीसरा महत्वपूर्ण कारण मौसम से जुड़ा हुआ है। भारतीय मौसम विभाग द्वारा मानसून के अनुमान में हल्की कमी किए जाने के बाद कृषि और ग्रामीण मांग को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। मानसून भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि देश की बड़ी आबादी कृषि पर निर्भर है। बारिश सामान्य से कम रहने की आशंका बाजार के कुछ वर्गों में चिंता का कारण बनी हुई है। वास्तविक प्रगति आने वाले सप्ताहों में अधिक स्पष्ट तस्वीर पेश करेगी। सेक्टरवार प्रदर्शन की बात करें तो आईटी शेयरों में सबसे ज्यादा कमजोरी देखी गई। कई बड़ी तकनीकी कंपनियों के शेयर दबाव में रहे। वैश्विक मांग को लेकर चिंताओं और विदेशी बाजारों से मिलने वाले संकेतों का असर इस क्षेत्र पर दिखाई दिया। इसके अलावा रियल्टी सेक्टर में भी बिकवाली का माहौल बना रहा। निवेशकों ने कई प्रमुख रियल एस्टेट कंपनियों के शेयरों में मुनाफावसूली की।</p>
<p class="isSelectedEnd">बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र के कुछ शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली, हालांकि चुनिंदा कंपनियों ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया। बाजार में व्यापक रूप से देखा जाए तो अधिकांश सेक्टर लाल निशान में कारोबार करते नजर आए। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी दबाव बना रहा, जिससे निवेशकों का रुझान कमजोर दिखाई दिया। एशियाई बाजारों से मिले संकेत भी मिश्रित रहे। जापान के बाजार में मजबूती देखने को मिली, जबकि हांगकांग के बाजार में गिरावट दर्ज की गई। दक्षिण कोरिया का बाजार सीमित दायरे में कारोबार करता दिखाई दिया। इन मिश्रित संकेतों ने भी भारतीय बाजार को स्पष्ट दिशा देने में मदद नहीं की।</p>
<p class="isSelectedEnd">वहीं अमेरिकी बाजारों ने पिछले कारोबारी सत्र में सकारात्मक प्रदर्शन किया था। डाउ जोंस, नैस्डैक और एसएंडपी 500 सूचकांक बढ़त के साथ बंद हुए थे। इसके बावजूद भारतीय बाजार में घरेलू कारणों और विदेशी निवेशकों की बिकवाली का असर अधिक देखने को मिला। विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान समय में घरेलू निवेशकों की नजर वैश्विक संकेतों के साथ-साथ स्थानीय आर्थिक परिस्थितियों पर भी बनी हुई है। निवेशकों को इस समय घबराने के बजाय संतुलित दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है और अल्पकालिक घटनाएं अक्सर बाजार की दिशा को प्रभावित करती हैं। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मजबूत कंपनियों पर ध्यान देना और सोच-समझकर निवेश करना अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 14:17:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>इस हफ्ते सोने-चांदी में गिरावट, निवेशकों की नजर अब अगले रुख पर</title>
                                    <description><![CDATA[रिकॉर्ड स्तर से फिसले दाम, एक हफ्ते में सोना ₹1654 और चांदी ₹2650 सस्ती]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/fall-in-gold-and-silver-this-week-investors-are-now/article-54570"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/gold-price-today-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सोने और चांदी की कीमतों में इस सप्ताह गिरावट दर्ज की गई है। पिछले कुछ महीनों से लगातार चर्चा में बने दोनों कीमती धातुओं के दाम अब नरम पड़ते दिखाई दे रहे हैं। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के ताजा आंकड़ों के अनुसार 24 कैरेट सोने की कीमत में एक सप्ताह के दौरान 1,654 रुपए प्रति 10 ग्राम की कमी आई है। इसके साथ ही सोने का भाव 1.58 लाख रुपए से घटकर करीब 1.56 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है। वहीं चांदी की कीमतों में भी गिरावट देखने को मिली और यह 2.66 लाख रुपए प्रति किलोग्राम से फिसलकर 2.63 लाख रुपए प्रति किलोग्राम रह गई। यानी एक सप्ताह में चांदी करीब 2,650 रुपए सस्ती हो गई। जनवरी में जिस तेजी ने सोने और चांदी को रिकॉर्ड ऊंचाई तक पहुंचाया था, अब उसी तेजी के बाद मुनाफावसूली का दौर चल रहा है। बड़े निवेशक ऊंचे स्तर पर खरीद की गई होल्डिंग को बेच रहे हैं, जिससे बाजार में सप्लाई बढ़ी है और कीमतों पर दबाव बना हुआ है। यही वजह है कि पिछले कुछ सप्ताह से दोनों धातुओं में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अगर इस साल की शुरुआत से तुलना करें तो सोने ने पहले निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया था। 31 दिसंबर 2025 को सोने की कीमत करीब 1.33 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम थी। इसके बाद तेजी का ऐसा दौर आया कि 29 जनवरी 2026 को सोना अपने अब तक के उच्चतम स्तर 1.76 लाख रुपए तक पहुंच गया। महज एक महीने के भीतर आए इस उछाल ने बाजार को चौंका दिया था। हालांकि इसके बाद कीमतों में धीरे-धीरे गिरावट शुरू हुई और अब सोना अपने ऑलटाइम हाई से करीब 20 हजार रुपए नीचे कारोबार कर रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">चांदी की बात करें तो इसमें उतार-चढ़ाव और भी ज्यादा देखने को मिला। साल की शुरुआत में चांदी का भाव करीब 2.30 लाख रुपए प्रति किलो था। जनवरी के अंत तक इसमें जबरदस्त तेजी आई और यह 3.86 लाख रुपए प्रति किलो के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई। उस समय बाजार में चांदी की मांग और निवेश दोनों तेजी से बढ़े थे। लेकिन इसके बाद तस्वीर बदल गई। लगातार बिकवाली और निवेशकों के रुख में बदलाव के चलते चांदी की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई। अब यह 2.63 लाख रुपए प्रति किलो के स्तर पर पहुंच चुकी है। यानी सिर्फ 118 दिनों में चांदी करीब 1.23 लाख रुपए प्रति किलो सस्ती हो गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">आमतौर पर अंतरराष्ट्रीय तनाव या युद्ध जैसे हालात में निवेशक सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने और चांदी की ओर रुख करते हैं, जिससे इनके दाम बढ़ जाते हैं। लेकिन इस बार तस्वीर कुछ अलग दिखाई दे रही है। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और वैश्विक अनिश्चितता के बीच निवेशकों का एक वर्ग नकदी को प्राथमिकता दे रहा है। बाजार जानकारों के मुताबिक कई निवेशक अपने पास मौजूद सोना और चांदी बेचकर नकदी जमा कर रहे हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति या बाजार में बड़े बदलाव के समय उनके पास पर्याप्त लिक्विड फंड उपलब्ध रहे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूसरी बड़ी वजह प्रॉफिट बुकिंग को माना जा रहा है। जनवरी में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद कई बड़े निवेशकों ने अपने निवेश पर मुनाफा निकालना शुरू कर दिया। बड़ी मात्रा में हुई बिकवाली का असर सीधे कीमतों पर पड़ा और बाजार में गिरावट का माहौल बन गया। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वैश्विक आर्थिक संकेत स्पष्ट नहीं होते, तब तक सोने और चांदी में इसी तरह का उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बीच शादी-ब्याह और निवेश के लिए सोना खरीदने वालों के लिए कुछ सावधानियां भी जरूरी हैं। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि हमेशा बीआईएस हॉलमार्क वाला प्रमाणित सोना ही खरीदना चाहिए। हॉलमार्क यह सुनिश्चित करता है कि खरीदा गया सोना तय गुणवत्ता और शुद्धता का है। इसके अलावा खरीदारी से पहले सोने की कीमत विभिन्न विश्वसनीय स्रोतों से जांच लेना भी जरूरी है ताकि उपभोक्ता सही कीमत पर खरीदारी कर सकें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 May 2026 14:57:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>अमेरिका-ईरान डील की खबर से शेयर बाजार में आई जोरदार तेजी, सेंसेक्स 1000 अंक उछला</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका-ईरान डील की खबर से शेयर बाजार में जोरदार तेजी लौटी। सेंसेक्स 1073 अंक चढ़ा और निफ्टी फिर 24 हजार के पार पहुंचा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/there-was-a-strong-rise-in-the-stock-market-due/article-54177"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/share-market-sensex-nifty.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सोमवार को भारतीय शेयर बाजार ने काफी जोरदार वापसी की</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">खासकर कई दिनों की उथल-पुथल और वैश्विक तनाव के बीच। अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते की खबरों ने निवेशकों का भरोसा फिर से जगाया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे बाजार में दिनभर खरीदारी का माहौल बना रहा। इसके अलावा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ने बाजार को और मजबूती दी। खासकर बैंकिंग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऑटो और रियल्टी सेक्टर के शेयरों में अच्छी तेजी देखने को मिली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ने मजबूत बढ़त के साथ कारोबार खत्म किया।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कारोबार खत्म होने पर बीएसई सेंसेक्स 1073 अंक बढ़कर 76,488 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी 312 अंक बढ़कर 24,031 तक पहुंच गया। निफ्टी ने कई सत्रों बाद फिर से 24 हजार का स्तर पार किया। जैसे ही बाजार खुला</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">निवेशकों ने खरीदारी शुरू कर दी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और दिनभर यही रुख बना रहा। दलाल स्ट्रीट पर माहौल पिछले कुछ दिनों की तुलना में काफी सकारात्मक नजर आया।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">निफ्टी के प्रमुख शेयरों में आइशर मोटर्स</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">एलएंडटी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बजाज फाइनेंस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अडानी एंटरप्राइजेज और एचडीएफसी बैंक में सबसे ज्यादा तेजी देखने को मिली। वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मैक्स हेल्थकेयर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ओएनजीसी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हिंडाल्को</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">टीसीएस और बजाज ऑटो जैसे कुछ शेयर दबाव में रहे। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी संकेतों में सुधार और कच्चे तेल की कीमतों में कमी से निवेशकों का सेंटीमेंट मजबूत हुआ है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सोमवार की तेजी केवल बड़े शेयरों तक ही सीमित नहीं रही। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली। ऑयल एंड गैस</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">बैंकिंग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऑटो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मीडिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रियल्टी और एनर्जी सेक्टर के इंडेक्स हरे निशान में बंद हुए। शुरुआती कारोबार में थोड़ी सावधानी जरूर दिखी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन जैसे-जैसे अमेरिका-ईरान डील की खबरें मजबूत होती गईं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बाजार में तेजी बढ़ती चली गई।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;"> </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के चलते कच्चे तेल की कीमतें निरंतर बढ़ती जा रही थीं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे भारत जैसे तेल आयातक देशों पर दबाव बढ़ रहा था। अब खबरें आ रही हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने की बातचीत आगे बढ़ रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और इसी उम्मीद में ब्रेंट क्रूड की कीमत 5 फीसदी से ज्यादा गिरकर 100 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गई। इससे निवेशकों को राहत मिली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि सस्ता कच्चा तेल भारतीय अर्थव्यवस्था और कंपनियों के लिए सकारात्मक माना जाता है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">विदेशी मुद्रा बाजार में भी भारतीय रुपये ने मजबूती दिखाई। डॉलर के मुकाबले रुपया 47 पैसे मजबूत होकर 95.23 पर बंद हुआ। जानकारों का कहना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हालात और बेहतर होते हैं और कच्चे तेल में गिरावट बनी रहती है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो आने वाले दिनों में शेयर बाजार में और तेजी देखने को मिल सकती है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 May 2026 17:08:00 +0530</pubDate>
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