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                <title>Investigation - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Investigation RSS Feed</description>
                
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                <title>तीन कथित घोटालों के आरोपी रामगोपाल अग्रवाल ने किया सरेंडर, EOW की पूछताछ शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[पूर्व कांग्रेस कोषाध्यक्ष पर शराब, कोल लेवी और कस्टम मिलिंग मामलों में जांच; जब्त डायरी में कथित वित्तीय लेन-देन की एंट्री मिलने के बाद कार्रवाई तेज।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/ramgopal-aggarwal-accused-of-three-alleged-scams-surrenders-eow-inquiry/article-58276"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/ramgopal-agrawal.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कथित शराब, कोल लेवी और कस्टम मिलिंग घोटालों की जांच में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल ने करीब तीन साल बाद रायपुर स्थित आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) के कार्यालय पहुंचकर सरेंडर कर दिया। इसके बाद EOW ने उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। जांच एजेंसी का कहना है कि उनसे कथित वित्तीय लेन-देन, जब्त दस्तावेजों और विभिन्न मामलों में सामने आए तथ्यों के आधार पर पूछताछ की जा रही है। यह मामला उन तीन प्रमुख आर्थिक मामलों से जुड़ा है, जिनकी जांच पिछले कुछ वर्षों से केंद्रीय और राज्य की जांच एजेंसियां कर रही हैं। EOW के अनुसार, कोल लेवी मामले की जांच के दौरान कारोबारी सूर्यकांत तिवारी से जब्त की गई एक डायरी में कथित तौर पर कांग्रेस भवन के नाम पर करोड़ों रुपये की एंट्रियां मिली थीं। जांच एजेंसी का दावा है कि इन एंट्रियों के आधार पर यह संदेह पैदा हुआ कि कथित रकम रामगोपाल अग्रवाल के माध्यम से कांग्रेस भवन तक पहुंची। एजेंसी अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि धन का स्रोत क्या था, राशि किसने उपलब्ध कराई, किसने उसे प्राप्त किया और उसका उपयोग किन उद्देश्यों के लिए किया गया। इन सभी बिंदुओं पर पूछताछ जारी है।</p>
<p style="text-align:justify;">जांच एजेंसी का यह भी दावा है कि कथित शराब घोटाले में आरोपी अनवर ढेबर और उससे जुड़े लोगों ने करोड़ों रुपये रामगोपाल अग्रवाल तक पहुंचाए थे। वहीं, कथित कस्टम मिलिंग प्रोत्साहन घोटाले में भी कारोबारी रोशन चंद्राकर के माध्यम से बड़ी रकम कांग्रेस भवन तक पहुंचाने का आरोप लगाया गया है। हालांकि इन सभी आरोपों की न्यायिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और मामले की जांच तथा अदालती प्रक्रिया जारी है। रामगोपाल अग्रवाल या कांग्रेस की ओर से इन आरोपों पर विस्तृत प्रतिक्रिया फिलहाल सामने नहीं आई है। EOW ने रामगोपाल अग्रवाल के बेटे वैभव अग्रवाल से भी लगातार दो दिनों तक पूछताछ की है। सूत्रों के अनुसार, अधिकारियों ने उनसे पिछले तीन वर्षों के दौरान रामगोपाल अग्रवाल के ठिकानों, उनके संपर्कों, आर्थिक गतिविधियों और कथित नेटवर्क से जुड़े कई सवाल किए। एजेंसी का कहना है कि पूछताछ के दौरान प्राप्त जानकारियों का अन्य दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों से मिलान किया जा रहा है। जांच पूरी तरह तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा का कहना है कि रामगोपाल अग्रवाल की भूमिका, उनसे जुड़े लोगों के संपर्क, बैंकिंग लेन-देन, धन के स्रोत, उसकी प्राप्ति और उपयोग सहित कई पहलुओं की गहन जांच की जा रही है। एजेंसी ने बताया कि पूछताछ के दौरान जब्त डायरी, दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और विवेचना में जुटाए गए अन्य साक्ष्यों का उपयोग किया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई का निर्णय लिया जाएगा। रामगोपाल अग्रवाल का नाम जिन मामलों में सामने आया है, उनमें कथित 3,000 करोड़ रुपये का शराब घोटाला, लगभग 450 करोड़ रुपये का कोल लेवी मामला और करीब 127 करोड़ रुपये का कस्टम मिलिंग प्रोत्साहन घोटाला शामिल है। जांच एजेंसियां इन मामलों में कथित धन के प्रवाह, लाभार्थियों और कमीशन के नेटवर्क की पड़ताल कर रही हैं। हालांकि इन मामलों में सभी आरोप अभी जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं तथा किसी भी आरोपी को अदालत द्वारा दोषी घोषित नहीं किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">रामगोपाल अग्रवाल पिछले करीब तीन वर्षों से सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए थे। इस दौरान उनके देश और विदेश में होने की चर्चाएं भी सामने आती रहीं। जांच एजेंसियां उनकी गतिविधियों और लोकेशन से जुड़े तथ्यों की भी जांच कर रही थीं। अब उनके सरेंडर के बाद जांच को नई दिशा मिलने की संभावना जताई जा रही है। छत्तीसगढ़ का कथित शराब घोटाला राज्य के सबसे चर्चित आर्थिक मामलों में शामिल है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) और EOW के अनुसार वर्ष 2019 से 2022 के बीच सरकारी शराब बिक्री व्यवस्था में कथित सिंडिकेट बनाकर अवैध शराब की बिक्री, कमीशनखोरी और सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने का आरोप है। जांच एजेंसियों का दावा है कि इस पूरे नेटवर्क के माध्यम से हजारों करोड़ रुपये का अवैध आर्थिक लाभ अर्जित किया गया। हालांकि इन आरोपों की न्यायिक पुष्टि अभी शेष है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी तरह कथित कोल लेवी घोटाला वर्ष 2020 से 2022 के बीच कोयला परिवहन और खनन कारोबार से जुड़ा मामला है। जांच एजेंसियों के अनुसार कोयला परिवहन करने वाले कारोबारियों से प्रति टन तय राशि की कथित अवैध वसूली की गई। एजेंसियों का दावा है कि इस नेटवर्क के माध्यम से करोड़ों रुपये की अवैध लेवी वसूली गई। इस मामले में भी कई अधिकारियों, कारोबारियों और अन्य लोगों के नाम जांच में सामने आए हैं, लेकिन अंतिम निर्णय अदालत में विचाराधीन है।कथित कस्टम मिलिंग प्रोत्साहन घोटाला धान मिलिंग के लिए राइस मिलर्स को दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि में कथित अनियमितताओं से जुड़ा हुआ है। EOW के अनुसार वर्ष 2015 से 2023 के बीच नियमों का उल्लंघन कर कुछ राइस मिलर्स को अनुचित लाभ पहुंचाने के आरोपों की जांच की जा रही है। एजेंसी का दावा है कि इससे सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ। इस मामले में भी कई अधिकारियों और कारोबारियों की भूमिका की जांच जारी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 13:15:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>राजा रघुवंशी हत्याकांड: सुप्रीम कोर्ट में सोनम का जवाबी हलफनामा, खुद को बताया बेगुनाह</title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से पहले सोनम रघुवंशी ने कहा- झूठे आरोपों में फंसाया गया, जांच और ट्रायल में लगातार कर रही हूं सहयोग।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/raja-raghuvanshi-murder-case-sonams-counter-affidavit-in-supreme-court/article-58261"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/raja-raghuvanshi-case.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">देशभर में चर्चा का विषय बने राजा रघुवंशी हत्याकांड में एक बार फिर कानूनी हलचल तेज हो गई है। मामले की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी ने सुप्रीम कोर्ट में जवाबी हलफनामा दाखिल करते हुए खुद को पूरी तरह बेगुनाह बताया है। उसने अदालत से कहा है कि उसे इस मामले में झूठे आरोपों के आधार पर फंसाया गया है और वह शुरुआत से ही जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग करती रही है। सोनम ने अपने हलफनामे में यह भी कहा कि वह ट्रायल की प्रक्रिया में भी पूरी तरह शामिल है और अदालत की हर शर्त का पालन कर रही है। इस बीच सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई को लेकर सभी की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि इस फैसले का असर आगे की कानूनी प्रक्रिया पर पड़ सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट में 9 जुलाई को इस मामले की अहम सुनवाई प्रस्तावित है। सुनवाई के दौरान मेघालय सरकार की ओर से दायर उस याचिका पर विचार किया जाएगा, जिसमें सोनम रघुवंशी को मिली जमानत को चुनौती दी गई है। अदालत के सामने यह सवाल भी रहेगा कि मौजूदा परिस्थितियों में सोनम की जमानत बरकरार रहेगी या नहीं। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इस सुनवाई को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पिछले कुछ महीनों से यह केस लगातार सुर्खियों में बना हुआ है और हर सुनवाई के साथ इसमें नए कानूनी पहलू सामने आ रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">सोनम रघुवंशी ने अपने जवाबी हलफनामे में दावा किया है कि उसके खिलाफ लगाए गए आरोप तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। उसने कहा कि जांच एजेंसियों ने उसे गलत तरीके से इस मामले में आरोपी बनाया है। हलफनामे में यह भी कहा गया है कि वह जांच अधिकारियों के बुलाने पर हर बार उपस्थित हुई है और अदालत की ओर से तय की गई सभी शर्तों का पालन कर रही है। उसके अनुसार वह किसी भी स्तर पर जांच में बाधा नहीं डाल रही और न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करते हुए पूरा सहयोग कर रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">पिछली सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि इस मामले में अभी 94 गवाहों के बयान दर्ज होने बाकी हैं। उन्होंने अदालत को जानकारी दी थी कि मुकदमा फिलहाल ट्रायल के महत्वपूर्ण चरण में है और बड़ी संख्या में गवाहों की गवाही शेष है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने भी जांच की प्रगति और ट्रायल की गति को लेकर कई सवाल पूछे थे। इसके बाद अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 9 जुलाई की तारीख तय की थी। माना जा रहा है कि इस बार अदालत मामले की प्रगति और जमानत से जुड़े पहलुओं पर विस्तार से विचार कर सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">मामले के अन्य आरोपियों की बात करें तो राज कुशवाह और उसके तीन साथी फिलहाल शिलांग जेल में बंद हैं। वहीं सोनम रघुवंशी को पहले ही सशर्त जमानत मिल चुकी है। इसके अलावा इस मामले में तीन अन्य आरोपियों और एक मकान मालिक को भी अदालत से जमानत मिली हुई है। हालांकि मुख्य साजिश और हत्या से जुड़े आरोपों की जांच और ट्रायल अभी जारी है। यही वजह है कि इस मामले में हर नई कानूनी कार्रवाई पर लोगों की नजर बनी हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह मामला पिछले वर्ष उस समय चर्चा में आया था जब इंदौर के ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी की शादी 11 मई 2025 को सोनम रघुवंशी से हुई थी। शादी के कुछ दिन बाद दोनों हनीमून मनाने के लिए मेघालय गए। 23 मई को दोनों के अचानक लापता होने की खबर सामने आई, जिसके बाद पुलिस ने बड़े स्तर पर तलाश अभियान शुरू किया। कई दिनों तक खोजबीन के बाद 3 जून 2025 को मेघालय की एक गहरी खाई से राजा रघुवंशी का शव बरामद किया गया। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था।</p>
<p style="text-align:justify;">शव मिलने के बाद जांच एजेंसियों ने घटनास्थल, मोबाइल रिकॉर्ड, कॉल डिटेल और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया। पुलिस के अनुसार जांच के दौरान कई ऐसे तथ्य सामने आए, जिनसे यह मामला सामान्य गुमशुदगी नहीं बल्कि सुनियोजित हत्या का प्रतीत हुआ। इसके बाद पुलिस ने कई लोगों को गिरफ्तार किया और पूछताछ के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर सोनम रघुवंशी को भी मुख्य आरोपी के रूप में गिरफ्तार किया गया था। बाद में अदालत से उसे सशर्त जमानत मिल गई थी, जबकि अन्य आरोपी अब भी न्यायिक हिरासत में हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले जून महीने में सोनम रघुवंशी ने मीडिया से बातचीत में उन आरोपों का भी खंडन किया था, जिनमें कहा गया था कि वह जमानत मिलने के बाद नेपाल भाग गई है। उसने स्पष्ट कहा था कि वह कहीं नहीं गई और शिलांग में ही मौजूद है। सोनम ने कहा था कि उसके बारे में झूठी अफवाहें फैलाई जा रही हैं और लोगों को ऐसी बातों पर भरोसा नहीं करना चाहिए। उसने यह भी दोहराया था कि वह जांच एजेंसियों और अदालत की कार्यवाही में लगातार सहयोग करती रही है और आगे भी करती रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 12:07:11 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>छत्तीसगढ़ शराब घोटाले की जांच तेज, कांग्रेस नेता रामगोपाल अग्रवाल के बेटे से EOW की लंबी पूछताछ</title>
                                    <description><![CDATA[शराब, कोल लेवी और कस्टम मिलिंग मामलों में जांच का दायरा बढ़ा, वैभव अग्रवाल से कई घंटों तक पूछताछ; एजेंसी ने आधिकारिक बयान जारी नहीं किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/investigation-into-chhattisgarh-liquor-scam-intensifies-eows-long-interrogation-of/article-58201"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/chhattisgarh-liquor-scam.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कथित शराब घोटाले की जांच एक बार फिर तेज होती नजर आ रही है। आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने कांग्रेस के पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल के बेटे वैभव अग्रवाल से लंबी पूछताछ की है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक अधिकारियों ने उनसे रामगोपाल अग्रवाल के पिछले कुछ वर्षों के ठिकानों, आर्थिक गतिविधियों और संपर्कों को लेकर कई सवाल किए। हालांकि पूछताछ के बाद न तो किसी गिरफ्तारी की पुष्टि हुई है और न ही एजेंसी की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी जारी है और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस घटनाक्रम के बाद राज्य की राजनीति में भी हलचल बढ़ गई है, क्योंकि यह मामला पहले से ही कई बड़े नामों और आर्थिक अनियमितताओं के आरोपों से जुड़ा हुआ है। बताया जा रहा है कि वैभव अग्रवाल से सुबह शुरू हुई पूछताछ देर शाम तक चली। सूत्रों के अनुसार अधिकारियों ने केवल पारिवारिक जानकारी ही नहीं बल्कि कथित आर्थिक नेटवर्क, वित्तीय लेन-देन और उन लोगों के बारे में भी जानकारी जुटाने की कोशिश की, जो पिछले कुछ वर्षों में रामगोपाल अग्रवाल के संपर्क में रहे। जांच एजेंसी इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में लगी हुई है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कथित अवैध धन का प्रवाह किन-किन माध्यमों से हुआ। फिलहाल एजेंसी ने पूछताछ के विषय और उसमें सामने आई जानकारियों को सार्वजनिक नहीं किया है। इसलिए आधिकारिक पुष्टि का इंतजार किया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">रामगोपाल अग्रवाल पिछले करीब तीन वर्षों से सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं। इस दौरान उनके देश और विदेश में होने की चर्चाएं भी समय-समय पर सामने आती रही हैं। जांच एजेंसियां उनकी वास्तविक लोकेशन और उनसे जुड़े लोगों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही हैं। EOW के सूत्रों के अनुसार हाल ही में उन्हें प्रदेश में होने की सूचना मिली थी। इसी इनपुट के बाद जांच में तेजी लाई गई और उनके बेटे को पूछताछ के लिए बुलाया गया। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। एजेंसी की ओर से अभी तक यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि रामगोपाल अग्रवाल के खिलाफ आगे क्या कदम उठाए जाएंगे। रामगोपाल अग्रवाल का नाम राज्य के तीन बड़े कथित आर्थिक मामलों में सामने आया है। इनमें करीब 3,200 करोड़ रुपए के कथित शराब घोटाले, कोल लेवी वसूली और कस्टम मिलिंग प्रोत्साहन राशि से जुड़े मामले शामिल हैं। जांच एजेंसियों का आरोप है कि इन मामलों में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं हुईं और सरकारी व्यवस्था का दुरुपयोग किया गया। हालांकि यह भी महत्वपूर्ण है कि इन सभी मामलों में आरोपों की न्यायिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और जांच के साथ-साथ अदालती प्रक्रिया भी जारी है। किसी भी व्यक्ति की कानूनी जिम्मेदारी का अंतिम फैसला अदालत ही करेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">कथित शराब घोटाले की बात करें तो जांच एजेंसियों का दावा है कि वर्ष 2019 से 2022 के बीच राज्य की सरकारी शराब बिक्री व्यवस्था में एक संगठित नेटवर्क के जरिए अवैध शराब की बिक्री, कमीशनखोरी और सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाया गया। एजेंसियों के अनुसार इस पूरे नेटवर्क से हजारों करोड़ रुपए के अवैध लेन-देन की आशंका है। इस मामले में कई अधिकारियों, कारोबारियों और राजनीतिक रूप से जुड़े लोगों के नाम भी जांच के दायरे में आए हैं। हालांकि संबंधित पक्षों ने समय-समय पर आरोपों से इनकार किया है और कई मामलों में कानूनी लड़ाई जारी है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी तरह कोल लेवी मामले में भी प्रवर्तन निदेशालय (ED) और EOW का आरोप है कि वर्ष 2020 से 2022 के बीच कोयला परिवहन और खनन से जुड़े कारोबारियों से प्रति टन तय राशि की अवैध वसूली की गई। जांच एजेंसियों का कहना है कि इस कथित नेटवर्क के जरिए सैकड़ों करोड़ रुपए की लेवी वसूली गई। इस मामले में भी कई अधिकारियों, कारोबारियों और अन्य लोगों के नाम सामने आए हैं। फिलहाल जांच एजेंसियां दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड और अन्य सबूतों के आधार पर पूरे मामले की पड़ताल कर रही हैं। कस्टम मिलिंग प्रोत्साहन राशि से जुड़ा मामला भी जांच एजेंसियों के लिए अहम बना हुआ है। EOW का आरोप है कि वर्ष 2015 से 2023 के बीच धान मिलिंग के लिए दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि के भुगतान में नियमों का उल्लंघन किया गया और कुछ राइस मिलर्स को अनुचित लाभ पहुंचाया गया। एजेंसी के अनुसार इस प्रक्रिया में करोड़ों रुपए की वित्तीय अनियमितताओं की आशंका है। इस मामले में भी कई अधिकारियों और कारोबारियों की भूमिका की जांच जारी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 15:53:15 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>तेलंगाना के DSP के पास 300 करोड़ रुपये की कथित बेनामी संपत्ति का खुलासा, एसीबी की कार्रवाई से मचा हड़कंप</title>
                                    <description><![CDATA[16 ठिकानों पर छापेमारी के बाद गिरफ्तारी, रिश्तेदारों और सहयोगियों के नाम पर खरीदी गई करोड़ों की संपत्तियां; डायरी से खुले कई अहम राज]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/telangana-dsp-reveals-alleged-benami-property-worth-rs-300-crores/article-58130"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/telangana-dsp.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">तेलंगाना में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच एक बड़े पुलिस अधिकारी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला सामने आने से प्रशासनिक महकमे में हलचल मच गई है। हैदराबाद में पुलिस कंप्यूटर सर्विसेज में तैनात डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (डीएसपी) संकीरेड्डी भीम रेड्डी को कथित तौर पर करोड़ों रुपये की बेनामी संपत्ति रखने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। तेलंगाना एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की शुरुआती जांच में करीब 300 करोड़ रुपये की संपत्तियों का खुलासा हुआ है, जिन्हें कथित रूप से रिश्तेदारों, दोस्तों, सहयोगियों और बेनामी व्यक्तियों के नाम पर खरीदा गया था। मामले की जांच पिछले कई दिनों से चल रही थी। एसीबी ने 2 जुलाई को डीएसपी से जुड़े 16 अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की थी। तलाशी के दौरान बड़ी मात्रा में नकदी, सोना, चांदी, बैंक खातों से जुड़े दस्तावेज और संपत्ति के रिकॉर्ड बरामद किए गए। जांच पूरी होने के बाद सोमवार देर शाम आरोपी अधिकारी को गिरफ्तार कर लिया गया और मंगलवार सुबह उन्हें अदालत में पेश किया गया।</p>
<p>जांच एजेंसी के अनुसार छापेमारी के दौरान डीएसपी के कब्जे से करीब 3.60 लाख रुपये नकद, लगभग 2 किलोग्राम सोने के आभूषण, करीब 20 किलोग्राम चांदी के सामान और विभिन्न बैंक खातों में लगभग 20 लाख रुपये की राशि मिली। हालांकि जांच का सबसे अहम हिस्सा वह निजी डायरी साबित हुई, जिसने पूरे मामले को नई दिशा दे दी। एसीबी अधिकारियों के मुताबिक तलाशी के दौरान भीम रेड्डी की हस्तलिखित एक निजी डायरी मिली, जिसमें उनकी संपत्तियों, निवेश, वित्तीय लेनदेन, देनदारियों और कथित बेनामीदारों के नाम दर्ज थे। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि इस डायरी में कई ऐसी जानकारियां थीं, जिनकी मदद से एजेंसी को नई संपत्तियों और निवेश का पता चला।</p>
<p>जांच में यह भी खुलासा हुआ कि डीएसपी ने मई महीने में चारधाम यात्रा पर जाने से पहले इस डायरी की स्कैन कॉपी अपने दोनों बेटों को व्हाट्सएप के माध्यम से भेजी थी। माना जा रहा है कि यात्रा के दौरान किसी अनहोनी की आशंका को देखते हुए उन्होंने अपनी वित्तीय जानकारी सुरक्षित रखने के उद्देश्य से ऐसा किया था। यही दस्तावेज अब जांच एजेंसी के लिए सबसे महत्वपूर्ण सबूत बन गया है। प्रारंभिक जांच के अनुसार आरोपी अधिकारी ने तेलंगाना और कर्नाटक के कई शहरों में बड़ी संख्या में अचल संपत्तियां खरीदी थीं। इनमें कृषि भूमि, प्लॉट, आवासीय भवन, व्यावसायिक परिसरों और अन्य निवेश शामिल बताए जा रहे हैं। इन संपत्तियों का स्वामित्व सीधे उनके नाम पर नहीं था, बल्कि रिश्तेदारों, मित्रों और सहयोगियों के नाम पर दर्ज किया गया था। एसीबी इन्हें कथित बेनामी संपत्ति मानकर उनकी कानूनी जांच कर रही है।</p>
<p>जांच अधिकारियों का कहना है कि बरामद दस्तावेजों और डायरी के आधार पर संपत्तियों की वास्तविक कीमत का आकलन किया जा रहा है। शुरुआती अनुमान लगभग 300 करोड़ रुपये का है, लेकिन विस्तृत जांच पूरी होने के बाद यह आंकड़ा और बढ़ भी सकता है। एजेंसी अब इन संपत्तियों से जुड़े बैंक रिकॉर्ड, रजिस्ट्री दस्तावेज, निवेश विवरण और आय के स्रोत की भी जांच कर रही है। आय से अधिक संपत्ति के मामलों में यह जांच इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि आरोपी एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी हैं और लंबे समय से विभिन्न जिम्मेदार पदों पर कार्यरत रहे हैं। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि सरकारी सेवा के दौरान अर्जित आय और घोषित संपत्ति के मुकाबले यह निवेश किस प्रकार किया गया। यदि आय के वैध स्रोत नहीं मिलते हैं तो आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p>एसीबी का कहना है कि मामले में अभी कई वित्तीय लेनदेन की जांच बाकी है। कुछ संपत्तियों के दस्तावेज और बैंक खातों की जानकारी भी जुटाई जा रही है। इसके अलावा जिन लोगों के नाम पर संपत्तियां खरीदी गई हैं, उनसे भी पूछताछ की जाएगी ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वे वास्तविक मालिक हैं या केवल नाम मात्र के बेनामीदार। इस कार्रवाई के बाद राज्य के प्रशासनिक और पुलिस महकमे में भी चर्चा तेज हो गई है। भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार अभियान चला रही एसीबी का कहना है कि किसी भी सरकारी अधिकारी के खिलाफ यदि आय से अधिक संपत्ति की विश्वसनीय शिकायत मिलती है तो निष्पक्ष जांच की जाएगी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 10:12:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर चंपत राय की पहली प्रतिक्रिया, बोले- SIT की अंतिम रिपोर्ट के बाद दूंगा हर सवाल का जवाब</title>
                                    <description><![CDATA[श्रीरामचरितमानस की चौपाई साझा कर तोड़ी चुप्पी, पत्र जारी कर कहा- मौन इसलिए हूं क्योंकि जांच पूरी होने का इंतजार है; ट्रस्ट और SIT की कार्रवाई जारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/champat-rais-first-reaction-on-the-ram-temple-offering-controversy/article-58124"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/ram-mandir-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े विवाद के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने पहली बार सार्वजनिक रूप से अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर श्रीरामचरितमानस की एक प्रसिद्ध चौपाई साझा करते हुए संकेत दिया कि कठिन समय में धैर्य और सत्य की परीक्षा होती है। इसके साथ ही उन्होंने रामभक्तों के नाम एक हस्तलिखित पत्र जारी कर स्पष्ट किया कि वह फिलहाल किसी भी आरोप का जवाब नहीं देंगे और विशेष जांच दल (SIT) की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले पर विस्तार से अपनी बात रखेंगे। चंपत राय ने अपने संदेश में लिखा कि उन पर लगाए गए आरोप निराधार हैं, लेकिन उन्होंने जांच की निष्पक्षता को ध्यान में रखते हुए मौन रहने का निर्णय लिया है। उनका कहना है कि ट्रस्ट की बैठक में SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट प्रस्तुत की गई थी, जिसके बाद उससे जुड़ी कई जानकारियां सार्वजनिक हो गईं। उन्होंने भरोसा जताया कि अंतिम जांच रिपोर्ट आने के बाद सभी तथ्यों के साथ जवाब दिया जाएगा और सच्चाई सभी के सामने होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">अपने पत्र में उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि वर्ष 1991 में उन्हें संगठन की ओर से अयोध्या की जिम्मेदारी सौंपी गई थी और तब से लेकर अब तक का उनका सार्वजनिक जीवन पूरी तरह पारदर्शी रहा है। उन्होंने कहा कि दशकों के सार्वजनिक जीवन में उन्होंने हमेशा संगठन और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का ईमानदारी से निर्वहन किया है। इधर, चढ़ावा मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम ने अब जांच का दायरा और व्यापक कर दिया है। जानकारी के अनुसार, जांच एजेंसी अब राम मंदिर से जुड़े प्रमुख आयोजनों में हुए खर्च का भी परीक्षण कर रही है। विशेष रूप से 22 जनवरी 2024 को आयोजित प्राण प्रतिष्ठा समारोह और नवंबर 2025 में हुए ध्वजारोहण कार्यक्रम से संबंधित बिल, भुगतान और वित्तीय दस्तावेजों की समीक्षा की जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार, प्राण प्रतिष्ठा समारोह पर लगभग 113 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे, जबकि ध्वजारोहण कार्यक्रम पर करीब 10.12 करोड़ रुपये का व्यय दर्ज किया गया। जांच एजेंसियां इन खर्चों से जुड़े दस्तावेजों का मिलान कर रही हैं ताकि वित्तीय प्रक्रिया की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सके। हालांकि, जांच अभी जारी है और किसी भी प्रकार की अंतिम टिप्पणी या निष्कर्ष सामने नहीं आया है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस पूरे घटनाक्रम के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि महाराज ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उनके अनुसार चंपत राय का इस कथित मामले से कोई व्यक्तिगत या चारित्रिक संबंध नहीं हो सकता। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि प्रशासनिक स्तर पर कुछ चूक हुई होगी, जिसका फायदा कुछ लोगों ने उठाया। उन्होंने संकेत दिया कि भविष्य में ट्रस्ट की प्रशासनिक व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की व्यवस्था लागू की जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">उधर, ट्रस्ट में नए महासचिव के रूप में कृष्ण मोहन दास ने अपना कार्यभार संभाल लिया है। ट्रस्ट प्रशासन का कहना है कि जांच प्रक्रिया पूरी तरह जारी रहेगी और आवश्यक प्रशासनिक सुधार भी किए जाएंगे ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी स्थिति की पुनरावृत्ति न हो। वहीं, मामले में गिरफ्तार किए गए तीन आरोपियों को पूछताछ के लिए पुलिस रिमांड भी मिली है। जांच एजेंसियां उनसे पूछताछ कर पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने में जुटी हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस बीच विश्व हिंदू परिषद ने भी चंपत राय को लेकर अपना पक्ष स्पष्ट किया है। संगठन का कहना है कि जब तक किसी व्यक्ति के खिलाफ आरोप जांच में सिद्ध नहीं हो जाते, तब तक उसके खिलाफ कार्रवाई करना उचित नहीं होगा। इसी कारण चंपत राय संगठन में अपनी वर्तमान जिम्मेदारी पर बने रहेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 10:11:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>उज्जैन में दो गायों की मौत के बाद बस में तोड़फोड़, आग से वाहन जलकर खाक</title>
                                    <description><![CDATA[पंथ पिपलाई के पास हादसे के बाद ग्रामीणों में आक्रोश, यात्रियों को सुरक्षित उतारने के बाद बस में आग लगी, पुलिस जांच में जुटी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/after-the-death-of-two-cows-in-ujjain-the-bus/article-58068"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/ujjain-news-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उज्जैन-इंदौर मार्ग पर सोमवार रात एक सड़क हादसे के बाद हालात अचानक तनावपूर्ण हो गए। पंथ पिपलाई क्षेत्र में बलराम जाट ढाबे के पास उज्जैन की ओर जा रही एक यात्री बस की टक्कर सड़क पर बैठी दो गायों से हो गई। हादसे में दोनों गायों की मौके पर ही मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के ग्रामीण बड़ी संख्या में मौके पर पहुंच गए और आक्रोश जताने लगे। स्थिति बिगड़ती देख सबसे पहले बस में मौजूद सभी यात्रियों को सुरक्षित नीचे उतारा गया। इसके बाद बस पर पथराव किया गया, जिससे उसके कई शीशे टूट गए। कुछ ही देर बाद बस में आग लग गई और देखते ही देखते पूरा वाहन आग की चपेट में आ गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। राहगीरों और स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस तथा फायर ब्रिगेड को सूचना दी। आग इतनी तेज थी कि कुछ ही समय में बस का बड़ा हिस्सा जलकर खाक हो गया। दमकल की टीम ने मौके पर पहुंचकर काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। राहत की बात यह रही कि हादसे के समय बस में सवार सभी यात्री सुरक्षित बाहर निकाल लिए गए थे, इसलिए किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। हालांकि बस को भारी नुकसान पहुंचा है।हादसा उस समय हुआ जब बस उज्जैन की ओर जा रही थी। सड़क पर बैठी दो गायें अचानक बस की चपेट में आ गईं। स्थानीय लोगों का कहना है कि हादसे के बाद क्षेत्र में मौजूद लोगों में नाराजगी फैल गई। मौके पर मौजूद लोगों ने बस को रोक लिया और घटना का विरोध शुरू कर दिया। देखते ही देखते वहां भीड़ बढ़ गई। कुछ लोगों ने बस पर पत्थर फेंके, जिससे उसके कांच टूट गए। इसके बाद बस में आग लगने की घटना हुई। आग लगने के कारणों को लेकर फिलहाल अलग-अलग बातें सामने आ रही हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नानाखेड़ा थाना प्रभारी नरेंद्र यादव ने बताया कि दो गायों की मौत के बाद बस को नुकसान पहुंचाने की घटना सामने आई है। वहीं, आग लगने के कारणों की भी जांच की जा रही है। शुरुआती आशंका शॉर्ट सर्किट की भी जताई गई है, लेकिन पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है। घटनास्थल से आवश्यक साक्ष्य जुटाए गए हैं और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही आग लगने की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी। घटना के बाद कुछ समय के लिए उज्जैन-इंदौर मार्ग पर यातायात भी प्रभावित रहा। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया और भीड़ को शांत कराया। इसके बाद क्षतिग्रस्त बस को सड़क से हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई, जिससे यातायात धीरे-धीरे सामान्य हो सका। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और जांच पूरी होने तक धैर्य बनाए रखने की अपील की है। स्थानीय प्रशासन के अनुसार सड़क पर मवेशियों की मौजूदगी कई बार दुर्घटनाओं का कारण बनती रही है। घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है ताकि घटनाक्रम की पूरी तस्वीर सामने आ सके। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि आग किन परिस्थितियों में लगी। संबंधित विभागों की रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 12:37:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारतवंशी कारोबारी पर इंडोनेशिया में 425 करोड़ की कथित रक्षा धोखाधड़ी का आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[रिपोर्ट में दावा- खुद को CIA एजेंट बताकर राष्ट्रपति प्रबोवो का भरोसा जीता, रक्षा सौदों के नाम पर फर्जी कर्ज मंजूर कराने का आरोप।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/indian-origin-businessman-accused-of-alleged-defense-fraud-of-rs-425/article-58053"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/gaurav-srivastava.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अमेरिका में पहले से धोखाधड़ी के मामलों का सामना कर रहे भारतवंशी कारोबारी गौरव श्रीवास्तव पर अब इंडोनेशिया में भी बड़े वित्तीय फर्जीवाड़े के आरोप लगे हैं। अंतरराष्ट्रीय जांच रिपोर्टों के अनुसार गौरव ने खुद को अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए का एजेंट बताकर इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो और उनके करीबी अधिकारियों का विश्वास हासिल किया। आरोप है कि इसी भरोसे का फायदा उठाकर उसने रक्षा सौदों के नाम पर लगभग 425 करोड़ रुपये के फर्जी कर्ज को मंजूरी दिलवाई। यह मामला सामने आने के बाद इंडोनेशिया में राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है। हालांकि सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि जिन रक्षा सौदों पर बातचीत हुई थी, वे अंतिम समझौते तक नहीं पहुंचे और इसलिए सरकार को प्रत्यक्ष आर्थिक नुकसान नहीं हुआ।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जांच से जुड़ी रिपोर्टों के मुताबिक यह कथित घटनाक्रम वर्ष 2020 से 2022 के बीच का है। दावा किया गया है कि गौरव श्रीवास्तव ने इंडोनेशियाई सेना को आधुनिक सैन्य उपकरण उपलब्ध कराने का प्रस्ताव दिया था। इसमें 36 एफ-15 लड़ाकू विमान, ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर और अत्याधुनिक सैन्य कमांड सिस्टम उपलब्ध कराने की बात कही गई थी। केवल लड़ाकू विमानों की संभावित डील का मूल्य लगभग 1.32 लाख करोड़ रुपये बताया गया। शुरुआती स्तर पर इन परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए वित्तीय व्यवस्थाओं और कर्ज से जुड़े दस्तावेज तैयार किए गए, लेकिन बाद में जांच के दौरान कई गंभीर अनियमितताओं की जानकारी सामने आई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि गौरव श्रीवास्तव ने कई शेल कंपनियों का इस्तेमाल कर रक्षा क्षेत्र से जुड़े सौदों को आगे बढ़ाने की कोशिश की। जांच में जिन चार कंपनियों का उल्लेख किया गया है, उनके माध्यम से पांच अलग-अलग रक्षा समझौतों की प्रक्रिया शुरू हुई थी। बाद में इन कंपनियों के खिलाफ टैक्स संबंधी अनियमितताओं के मामले सामने आए और उन्हें बंद कर दिया गया। जांच एजेंसियों का कहना है कि इन कंपनियों की वास्तविक व्यावसायिक गतिविधियां बेहद सीमित थीं, जबकि इनके जरिए बड़े वित्तीय लेन-देन किए जा रहे थे। यही वजह है कि इन सौदों की विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रिपोर्टों के अनुसार गौरव श्रीवास्तव ने केवल व्यावसायिक संपर्कों के आधार पर ही नहीं, बल्कि व्यक्तिगत विश्वास कायम करके भी प्रभाव बनाया। दावा किया गया है कि राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो उन्हें ‘मिस्टर जी’ कहकर संबोधित करते थे। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि गौरव को राष्ट्रपति के निजी जीवन से जुड़ी कुछ ऐसी जानकारियां भी थीं, जो सामान्य तौर पर केवल उनके करीबी लोगों को ही मालूम थीं। इन्हीं जानकारियों का इस्तेमाल कर उसने अपने प्रभाव को और मजबूत बनाया। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जांच रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि गौरव ने अपने प्रभाव को बढ़ाने के लिए कई बड़े दावे किए थे। उसने कथित तौर पर कहा कि वर्ष 2002 के बाली बम धमाकों के आरोपियों को पकड़वाने में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। इसके अलावा उसने यह भी दावा किया कि उसने राष्ट्रपति प्रबोवो का नाम अमेरिकी इमिग्रेशन की ब्लैकलिस्ट से हटवाने में मदद की थी। इन दावों के जरिए उसने खुद को अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और खुफिया नेटवर्क से जुड़ा प्रभावशाली व्यक्ति साबित करने की कोशिश की। हालांकि इन दावों की भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और जांच एजेंसियां इन्हें भी मामले का हिस्सा मानकर जांच कर रही हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कथित फर्जीवाड़े से जुड़े पैसों का इस्तेमाल अमेरिका के लॉस एंजिलिस में एक महंगा आलीशान बंगला खरीदने में भी किया गया। इस संपत्ति की कीमत लगभग 208 करोड़ रुपये बताई गई है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि धन का स्रोत क्या था और क्या इस खरीद में कथित धोखाधड़ी से जुड़ी रकम का इस्तेमाल हुआ। वित्तीय लेन-देन, बैंक रिकॉर्ड और संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इधर इंडोनेशिया के रक्षा मंत्रालय ने पूरे मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि जिन रक्षा परियोजनाओं पर बातचीत हुई थी, वे अंतिम अनुबंध तक नहीं पहुंचीं। मंत्रालय के प्रवक्ता रिको सिराइत के अनुसार किसी भी प्रस्ताव को अंतिम स्वीकृति नहीं मिली थी, इसलिए सरकार को प्रत्यक्ष वित्तीय नुकसान नहीं हुआ। फिर भी पूरे घटनाक्रम की गंभीरता को देखते हुए संबंधित तथ्यों की जांच जारी है। दूसरी ओर अमेरिका में भी गौरव श्रीवास्तव के खिलाफ वर्ष 2024 से धोखाधड़ी और अन्य वित्तीय मामलों में कानूनी कार्रवाई चल रही है</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/indian-origin-businessman-accused-of-alleged-defense-fraud-of-rs-425/article-58053</link>
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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 12:00:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राममंदिर चढ़ावा चोरी मामले में SIT की रिपोर्ट, CCTV में 70 संदिग्ध घटनाएं कैद</title>
                                    <description><![CDATA[प्रारंभिक जांच में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल, चढ़ावे की गिनती प्रक्रिया में गंभीर खामियां; कई कर्मचारियों और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका जांच के दायरे में।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/sit-report-in-ram-temple-offering-theft-case-70-suspicious/article-58042"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/ram-mandir-donation-theft-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अयोध्या के राममंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले में स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की शुरुआती रिपोर्ट सामने आने के बाद पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है। रिपोर्ट के मुताबिक 27 अप्रैल से 5 जून के बीच चढ़ावे की गिनती वाले कमरे में लगे सीसीटीवी कैमरों में करीब 70 संदिग्ध घटनाएं रिकॉर्ड हुई हैं। जांच में सामने आया कि गिनती का काम कर रहे कुछ कर्मचारी नोटों की गड्डियां अपने कपड़ों, जेबों, जूतों और मोजों में छिपाते हुए दिखाई दिए। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक गिरफ्तार किए गए आठ आरोपियों में से कई की गतिविधियां फुटेज में साफ नजर आई हैं। इसी बीच राममंदिर ट्रस्ट की बैठक में ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों के इस्तीफे भी स्वीकार किए गए, जिससे मामला और चर्चा में आ गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में मंदिर की नकदी गिनती और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। जांच टीम का कहना है कि चढ़ावे की गिनती की पूरी प्रक्रिया में कई ऐसी खामियां थीं, जिनका फायदा उठाकर लगातार चोरी की घटनाओं को अंजाम दिया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि नकदी प्रबंधन और वित्तीय व्यवस्था की निगरानी से जुड़े डॉ. अनिल मिश्रा को पहले से सुरक्षा व्यवस्था में कमियों की जानकारी दी गई थी, लेकिन समय रहते प्रभावी लिखित निर्देश जारी नहीं किए गए। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि कर्मचारियों की नियमित तलाशी नहीं ली जाती थी, जिससे नकदी बाहर ले जाना आसान हो गया। अधिकारियों के अनुसार कर्मचारियों की बायोमैट्रिक उपस्थिति, तय यूनिफॉर्म, निजी सामान पर नियंत्रण, नकदी का रिकॉर्ड और दैनिक निगरानी जैसी व्यवस्थाएं पूरी तरह प्रभावी नहीं थीं। ऐसे हालात में सुरक्षा प्रणाली कमजोर पड़ती गई और चोरी की घटनाएं लगातार होती रहीं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जांच में यह भी सामने आया कि चंपत राय के ड्राइवर रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू के पास बिना किसी औपचारिक लिखित आदेश के मंदिर की हुंडियों और गिनती कक्ष से जुड़ी चाबियों का नियंत्रण था। इतना ही नहीं, उसकी सिफारिश पर मनीष कुमार यादव को चढ़ावे की गिनती के काम में लगाया गया, जो बाद में आरोपियों में शामिल पाया गया। एसआईटी ने इसे सुरक्षा व्यवस्था की बड़ी चूक माना है। रिपोर्ट के मुताबिक सीसीटीवी फुटेज में कई बार कर्मचारी एक-दूसरे को इशारों से सतर्क करते भी दिखाई दिए, जिससे जांच टीम को यह गतिविधि संगठित तरीके से होने का संदेह हुआ। जांच अधिकारियों ने इन घटनाओं को अलग-अलग नहीं बल्कि लगातार दोहराए गए पैटर्न के रूप में दर्ज किया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रारंभिक जांच के आधार पर अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पाण्डेय और रमाशंकर मिश्रा समेत कई लोगों की भूमिका संदिग्ध बताई गई है। एसआईटी का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज, बरामद नकदी और बैंक खातों की जांच में इनके खिलाफ पर्याप्त शुरुआती साक्ष्य मिले हैं। रिपोर्ट में इनके खिलाफ चोरी, आपराधिक न्यासभंग, आपराधिक दुर्विनियोग, षड्यंत्र और चोरी की संपत्ति रखने जैसी धाराओं में कार्रवाई की सिफारिश की गई है। इसी रिपोर्ट के आधार पर ट्रस्ट की ओर से मामला दर्ज कराया गया था, जिसके बाद आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">आरोपी अविनाश शुक्ला के पास से अब तक 20.39 लाख रुपये नकद, 1121 अमेरिकी डॉलर, सोने-चांदी के आभूषण और अन्य कीमती सामान बरामद किया गया है। जांच में यह भी सामने आया कि लगभग 20 हजार रुपये मासिक वेतन पाने वाले कुछ कर्मचारियों के बैंक खातों में लाखों रुपये के लेन-देन दर्ज मिले हैं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार आरोपी ने परिवार और दोस्तों पर बड़ी रकम खर्च करने की बात भी स्वीकार की है। एक भाई की शादी पर लाखों रुपये खर्च करने, दूसरे भाई को नकद राशि देने, कार खरीदने और दोस्तों को पैसे ट्रांसफर करने जैसे पहलुओं की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि चोरी की रकम को बैंक खातों और संपत्तियों के जरिए खपाने की कोशिश की गई हो सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि यह केवल शुरुआती जांच है और कई महत्वपूर्ण पहलुओं की पड़ताल अभी बाकी है। निगरानी व्यवस्था में लापरवाही, जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका, सुरक्षा प्रोटोकॉल में सुधार और अन्य संभावित लोगों की संलिप्तता को लेकर विस्तृत जांच जारी है। अंतिम रिपोर्ट में इन सभी बिंदुओं पर विस्तृत निष्कर्ष और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सुझाव सरकार को सौंपे जाएंगे। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 11:59:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शादी का झांसा देकर तीन साल तक दुष्कर्म का आरोप, बिलासपुर में आरक्षक गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[सोशल मीडिया पर हुई थी पहचान, युवती का आरोप- शादी का भरोसा देकर बनाए संबंध, बाद में खुद को शादीशुदा और दो बच्चों का पिता बताया; पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी को भेजा जेल।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/constable-arrested-in-bilaspur-accused-of-raping-for-three-years/article-57894"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/korba-murder-case-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में एक आरक्षक पर शादी का झांसा देकर युवती के साथ लंबे समय तक दुष्कर्म करने का गंभीर आरोप लगा है। पुलिस के अनुसार शिकायत मिलने के बाद आरोपी आरक्षक के खिलाफ मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। युवती का आरोप है कि आरोपी ने पहले सोशल मीडिया के माध्यम से उससे दोस्ती की, फिर शादी का वादा कर करीब तीन वर्षों तक शारीरिक संबंध बनाए। जब उसने विवाह की बात को लेकर दबाव बनाया तो आरोपी ने खुद को पहले से शादीशुदा और दो बच्चों का पिता बताते हुए शादी से इनकार कर दिया। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि इसके बाद आरोपी ने युवती को धमकाना शुरू कर दिया। मामला तखतपुर थाना क्षेत्र का है और पुलिस पूरे प्रकरण की जांच में जुटी हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, वर्ष 2023 में 22 वर्षीय युवती की पहचान सोशल मीडिया के जरिए तखतपुर में पदस्थ आरक्षक सुमंत मिरी से हुई थी। शुरुआत में दोनों के बीच सामान्य बातचीत होती रही, लेकिन समय के साथ दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ गईं। युवती का आरोप है कि इसी दौरान आरक्षक ने उससे शादी करने का वादा किया और भरोसा दिलाया कि वह भविष्य में उससे विवाह करेगा। युवती का कहना है कि इसी भरोसे के आधार पर दोनों के बीच शारीरिक संबंध बने। शिकायत के मुताबिक आरोपी लगातार शादी का आश्वासन देता रहा, जिससे उसे विश्वास था कि दोनों का रिश्ता जल्द ही विवाह में बदल जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">युवती का आरोप है कि यह सिलसिला करीब तीन साल तक चलता रहा। इस दौरान आरोपी आरक्षक अलग-अलग मौकों पर उससे मिलता रहा और हर बार शादी की बात दोहराता रहा। पुलिस के अनुसार, शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि बाद में आरक्षक का तबादला बिलासपुर पुलिस लाइन हो गया, लेकिन इसके बावजूद उसने युवती से संपर्क नहीं तोड़ा। वह उससे मिलता रहा और शादी का भरोसा देता रहा। युवती का कहना है कि उसे लंबे समय तक इस बात का पता नहीं था कि आरोपी पहले से विवाहित है।</p>
<p style="text-align:justify;">मामले में नया मोड़ तब आया जब युवती ने शादी को लेकर स्पष्ट जवाब मांगा। शिकायत के अनुसार, इस दौरान आरोपी ने बताया कि वह पहले से शादीशुदा है और उसके दो बच्चे भी हैं। युवती का आरोप है कि आरोपी ने यह तथ्य शुरुआत से उससे छिपाकर रखा था। जब उसे सच्चाई का पता चला तो उसने इसका विरोध किया और शादी के वादे की याद दिलाई। आरोप है कि इसके बाद आरोपी ने शादी से साफ इनकार कर दिया और उससे दूरी बनाने लगा।</p>
<p style="text-align:justify;">शिकायत में यह भी कहा गया है कि सच्चाई सामने आने के बाद आरोपी ने युवती को धमकाना शुरू कर दिया। लगातार मानसिक दबाव और कथित धमकियों से परेशान होकर युवती ने अंततः तखतपुर थाने पहुंचकर पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर प्रारंभिक जांच की और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद आरोपी आरक्षक के खिलाफ मामला दर्ज किया।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आरोपी आरक्षक सुमंत मिरी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। मामले की जांच जारी है और पुलिस सभी तथ्यों की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों, बयान और अन्य कानूनी पहलुओं के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस विभाग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए विभागीय स्तर पर भी कार्रवाई शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार, आरोपी आरक्षक के खिलाफ विभागीय जांच की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। साथ ही उसके निलंबन की कार्रवाई भी नियमों के अनुसार की जा रही है। विभाग का कहना है कि यदि किसी पुलिसकर्मी के खिलाफ गंभीर आरोप सामने आते हैं तो विभागीय नियमों के तहत स्वतंत्र जांच भी कराई जाती है। शादी का झांसा देकर बनाए गए संबंधों से जुड़े मामलों में जांच के दौरान परिस्थितियों, उपलब्ध साक्ष्यों और दोनों पक्षों के बयानों का विस्तार से परीक्षण किया जाता है। ऐसे मामलों में न्यायालय और जांच एजेंसियां प्रत्येक तथ्य का कानूनी आधार पर मूल्यांकन करती हैं। इसलिए मामले की अंतिम स्थिति न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 18:45:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>केतन अग्रवाल हत्याकांड: सिया का दूसरा मोबाइल बरामद, कोडवर्ड चैट से खुल सकते हैं कई राज</title>
                                    <description><![CDATA[पुणे कोर्ट ने सिया गोयल और चेतन चौधरी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा, नार्को टेस्ट से दोनों ने किया इनकार; पुलिस डिजिटल सबूतों और कथित तीसरे शख्स की भूमिका की जांच में जुटी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/ketan-aggarwal-murder-case-sias-second-mobile-recovered-many-secrets/article-57841"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/ketan-agrawal-murder-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच लगातार नए मोड़ ले रही है। इस मामले में गिरफ्तार मुख्य आरोपी सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी को वडगांव अदालत ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। दोनों अब पुणे की येरवदा जेल में रहेंगे। पुलिस ने अदालत से दोनों की पुलिस कस्टडी बढ़ाने की मांग की थी, लेकिन अदालत ने इसे स्वीकार नहीं किया। सुनवाई के दौरान दोनों आरोपियों ने नार्को और पॉलीग्राफ टेस्ट कराने से साफ इनकार कर दिया। अदालत ने भी स्पष्ट किया कि किसी आरोपी की सहमति के बिना इस तरह का परीक्षण नहीं कराया जा सकता। इसी बीच जांच में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। पुलिस ने सिया गोयल के घर से एक दूसरा मोबाइल फोन बरामद किया है, जिसे कथित तौर पर छिपाकर रखा गया था। जांच एजेंसियों का मानना है कि इस मोबाइल में हत्या की साजिश से जुड़े महत्वपूर्ण डिजिटल सबूत मिल सकते हैं। फोन को फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) भेज दिया गया है, जहां उसके डेटा की गहन जांच की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार पहले जब्त किए गए मोबाइल से बड़ी मात्रा में डिलीट किया गया डेटा रिकवर किया गया है और अब दूसरे मोबाइल से भी अहम जानकारी मिलने की उम्मीद है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि सिया और चेतन कथित तौर पर सामान्य भाषा में बातचीत करने के बजाय कोडवर्ड, निकनेम और इमोजी का इस्तेमाल करते थे। जांच अधिकारियों का कहना है कि दोनों के बीच हुई चैट में कई ऐसे शब्द और संकेत मिले हैं, जिनका वास्तविक अर्थ फिलहाल स्पष्ट नहीं है। इन्हें समझने के लिए साइबर और डिजिटल फोरेंसिक विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है। माना जा रहा है कि दोनों ने अपनी कथित योजना को छिपाने के लिए सांकेतिक भाषा का इस्तेमाल किया था। जांच टीम अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन कोडवर्ड का क्या मतलब था और क्या इनका संबंध हत्या की कथित साजिश से है। पुलिस के मुताबिक यदि इन चैट का सही अर्थ सामने आता है तो मामले की जांच को नई दिशा मिल सकती है। अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल साक्ष्य इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इसी वजह से मोबाइल फोन, चैट हिस्ट्री, कॉल रिकॉर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की बारीकी से जांच की जा रही है। दूसरी ओर अदालत में पेशी के दौरान अभियोजन पक्ष ने दोनों आरोपियों से और पूछताछ की जरूरत बताई थी, लेकिन अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने का फैसला सुनाया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जांच के दौरान एक और नया पहलू सामने आया है। सूत्रों के अनुसार पुलिस ने महाराष्ट्र के बीड जिले से एक युवक को हिरासत में लिया है। बताया जा रहा है कि वह बालेवाड़ी की एक निजी कंपनी में काम करता है और सिया या केतन में से किसी एक का परिचित है। पुलिस यह जांच कर रही है कि क्या उसे कथित हत्या की योजना की पहले से जानकारी थी। शुरुआती जानकारी के अनुसार दोनों आरोपियों ने उससे किसी स्तर पर योजना साझा की थी। हालांकि पुलिस ने अभी तक इस युवक की आधिकारिक भूमिका स्पष्ट नहीं की है। यह भी संभावना जताई जा रही है कि जांच में सहयोग मिलने पर उसे गवाह बनाया जा सकता है। पुलिस फिलहाल उससे पूछताछ कर घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने का प्रयास कर रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जांच एजेंसियों के अनुसार कथित साजिश की शुरुआत मई के अंतिम सप्ताह में हुई थी। पुलिस का दावा है कि 31 मई के आसपास सिया ने केतन की हत्या का विचार बनाया। जांच में यह भी सामने आया कि केतन को ट्रैकिंग और पहाड़ी क्षेत्रों में घूमने का शौक था, जिसका फायदा उठाकर उसे बार-बार लोहगढ़ किले चलने के लिए कहा गया। पुलिस के अनुसार 5 जून को सिया ने दोबारा वहां जाने की जिद की, लेकिन उस समय योजना सफल नहीं हो सकी। इसी बीच विदेश यात्रा से पहले कथित तौर पर केतन का पासपोर्ट भी छिपा दिया गया ताकि यात्रा टल जाए। इसके बाद 14 जून को दोनों फिर लोहगढ़ पहुंचे। पुलिस का दावा है कि उस दिन भी केतन को धक्का देने की कोशिश की गई, लेकिन वह पेड़ का सहारा मिलने से बच गया। पूछने पर सिया ने कथित तौर पर कहा कि उसने सांप से बचाने के लिए धक्का दिया था। जांच एजेंसियों का कहना है कि इसी वजह से उस समय किसी को शक नहीं हुआ।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस के अनुसार 18 जून को तीसरी बार कथित योजना को अंजाम दिया गया। दावा है कि 19 जून को सिया का जन्मदिन मनाने के लिए केतन ने महाबलेश्वर के एक रिजॉर्ट में बुकिंग कर रखी थी, लेकिन उससे पहले प्री-वेडिंग फोटोशूट का बहाना बनाकर उसे फिर लोहगढ़ किले ले जाया गया। जांच में आरोप है कि इस बार चेतन चौधरी भी पीछे-पीछे वहां पहुंचा। पुलिस का दावा है कि जब केतन पहाड़ी की ओर देख रहा था, तभी दोनों ने पीछे से उसे धक्का दे दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। फिलहाल पुलिस सभी डिजिटल सबूत, घटनास्थल से मिले साक्ष्य, मोबाइल डेटा और गवाहों के बयानों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की पुष्टि करने में जुटी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी जारी है और फोरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद कई नए तथ्य सामने आ सकते हैं। फिलहाल दोनों आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं और मामले की अगली सुनवाई निर्धारित तिथि पर होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 12:53:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>गुजरात-एमपी से जैश-ए-मोहम्मद के 8 संदिग्ध आतंकी गिरफ्तार, ATS ने नेटवर्क का किया खुलासा</title>
                                    <description><![CDATA[गुजरात ATS का बड़ा ऑपरेशन, सोशल मीडिया के जरिए कथित भर्ती और पाकिस्तान स्थित हैंडलर से संपर्क की जांच तेज; कई जिलों में एक साथ कार्रवाई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/8-suspected-jaish-e-mohammed-terrorists-arrested-from-gujarat-mp-ats-reveals-network/article-57831"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/gujarat-ats.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">गुजरात आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS) ने प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से कथित रूप से जुड़े आठ संदिग्धों को गुजरात और मध्य प्रदेश से गिरफ्तार किया है। एजेंसी के मुताबिक यह कार्रवाई कई दिनों से चल रही खुफिया निगरानी और तकनीकी इनपुट के आधार पर की गई। गिरफ्तार किए गए सभी संदिग्धों से पूछताछ जारी है और जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि उनका नेटवर्क कितना व्यापक था और वे किन गतिविधियों में शामिल थे। अधिकारियों के अनुसार गिरफ्तार किए गए लोगों में दो युवकों की उम्र 18 और 19 वर्ष है। प्रारंभिक जांच में दावा किया गया है कि सभी गुजरात के रहने वाले हैं और राज्य में जैश-ए-मोहम्मद का एक सक्रिय नेटवर्क खड़ा करने की कोशिश कर रहे थे। एटीएस का कहना है कि यह नेटवर्क कथित तौर पर नए सदस्यों को जोड़ने, संगठन की विचारधारा फैलाने और भविष्य में आतंकी गतिविधियों के लिए आधार तैयार करने के उद्देश्य से काम कर रहा था। इसी सूचना के आधार पर एटीएस ने अलग-अलग टीमें बनाकर गुजरात के बनासकांठा, मेहसाणा, नवसारी और पाटण के अलावा मध्य प्रदेश के देवास जिले में एक साथ छापेमारी की। अभियान के दौरान सभी आठ संदिग्धों को हिरासत में लिया गया और बाद में उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया। अधिकारियों के अनुसार सभी से पूछताछ के साथ-साथ जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और अन्य दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">गुजरात एटीएस के डीआईजी सुनील जोशी ने बताया कि सबसे पहले दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया था। उनसे पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर छह अन्य लोगों तक जांच पहुंची और उन्हें भी अलग-अलग स्थानों से गिरफ्तार किया गया। अधिकारियों के मुताबिक आरोपियों के पास से कुछ साहित्य, झंडे और अन्य सामग्री बरामद हुई है, जिसकी जांच की जा रही है। इसके अलावा कई मोबाइल फोन भी जब्त किए गए हैं। एटीएस का कहना है कि इन मोबाइल फोन से महत्वपूर्ण डिजिटल जानकारी मिली है, जिसकी साइबर विशेषज्ञों की मदद से जांच जारी है। प्रारंभिक जांच के अनुसार सभी संदिग्ध सोशल मीडिया के जरिए पाकिस्तान में मौजूद एक कथित हैंडलर के संपर्क में थे, जिसकी पहचान 'अब्दुल्ला साहब' के नाम से हुई है। जांच एजेंसियों का दावा है कि इसी हैंडलर के निर्देश पर गुजरात में संगठन का नेटवर्क मजबूत करने की कोशिश की जा रही थी। अधिकारियों ने यह भी बताया कि आरोपियों तक कथित तौर पर तीन लाख रुपये की रकम भी पहुंचाई गई थी। फिलहाल एजेंसियां इस धनराशि के स्रोत, लेन-देन के तरीके और उससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही हैं। एटीएस के अनुसार गिरफ्तार किए गए कुछ संदिग्ध पाटण जिले के एक मदरसे में रह रहे थे। वहां से भी कुछ दस्तावेज और प्रचार सामग्री बरामद की गई है। हालांकि जांच एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि पूरे मामले की जांच जारी है और सभी तथ्यों की पुष्टि साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">जांच में यह भी सामने आया है कि संदिग्धों ने कथित तौर पर 'तंजीम' नाम से एक समूह बनाया था, जिसके जरिए नए सदस्यों को जोड़ने और उन्हें संगठन की विचारधारा से प्रभावित करने की कोशिश की जा रही थी। एटीएस का दावा है कि यह समूह स्थानीय स्तर पर युवाओं से संपर्क कर उनका ब्रेनवॉश करने की कोशिश कर रहा था। साथ ही प्रतिबंधित संगठन से जुड़े साहित्य का गुजराती भाषा में अनुवाद कर उसे स्थानीय स्तर पर प्रसारित करने की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इसमें और कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं। सुरक्षा एजेंसियां सोशल मीडिया अकाउंट, डिजिटल चैट, वित्तीय लेन-देन और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की भी पड़ताल कर रही हैं। जैश-ए-मोहम्मद पाकिस्तान आधारित प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन है, जिसकी स्थापना वर्ष 2000 में मसूद अजहर ने की थी। भारत में कई बड़े आतंकी हमलों में इस संगठन का नाम सामने आ चुका है और इसे लेकर सुरक्षा एजेंसियां लगातार सतर्क रहती हैं। उल्लेखनीय है कि इसी वर्ष अप्रैल में गुजरात एटीएस ने कथित तौर पर आईएसआईएस से जुड़े दो संदिग्धों को भी गिरफ्तार किया था। उस मामले में भी सोशल मीडिया के जरिए कट्टरपंथी विचारधारा फैलाने और नेटवर्क तैयार करने के आरोप लगाए गए थे। ताजा कार्रवाई के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने एक बार फिर लोगों से अपील की है कि यदि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिले तो तुरंत पुलिस या संबंधित एजेंसी को सूचित करें। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 11:51:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा दावा, TVK विधायकों को करोड़ों की रिश्वत का ऑफर; सरकार गिराने की कथित साजिश की जांच तेज</title>
                                    <description><![CDATA[TVK विधायक ने ₹35 करोड़ की पेशकश और धमकी मिलने का आरोप लगाया, शिकायत के बाद तीन लोग गिरफ्तार; राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच मामले की जांच जारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/big-claim-in-tamil-nadu-politics-tvk-mlas-offered-bribe/article-57556"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/tamil-nadu-politics-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। अभिनेता और तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) के संस्थापक विजय की अगुवाई वाली सरकार को कथित रूप से अस्थिर करने की साजिश का दावा किया गया है। पार्टी की ओर से आरोप लगाया गया है कि उसके विधायकों को करोड़ों रुपये की रिश्वत देकर सरकार गिराने की कोशिश की गई। इस मामले में एक विधायक की शिकायत के आधार पर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और तीन लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">मामले ने राज्य की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। एक ओर TVK इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था को अस्थिर करने की कोशिश बता रही है, वहीं दूसरी ओर डीएमके ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार और राजनीतिक नैरेटिव करार दिया है। फिलहाल पुलिस और संबंधित एजेंसियां पूरे मामले की जांच कर रही हैं।</p>
<h5 style="text-align:justify;">विधायक ने लगाया 35 करोड़ रुपये की रिश्वत का आरोप</h5>
<p style="text-align:justify;">TVK के ऊथंगुरै विधानसभा क्षेत्र से विधायक डॉ. एन. इलैयाराजा ने चेन्नई पुलिस आयुक्त को शिकायत देकर आरोप लगाया कि उन्हें फोन के माध्यम से संपर्क कर विधानसभा अध्यक्ष के खिलाफ आने वाले एक प्रस्ताव में विशेष तरीके से मतदान करने के लिए कहा गया। इसके बदले उन्हें 35 करोड़ रुपये देने की पेशकश की गई।</p>
<p style="text-align:justify;">शिकायत के अनुसार, फोन करने वाले व्यक्ति ने खुद को इंडियन पॉलिटिकल डेमोक्रेटिक स्ट्रैटेजीज (IPDS) नामक संगठन का प्रतिनिधि बताया। विधायक का दावा है कि उन्होंने इस प्रस्ताव को तुरंत ठुकरा दिया और दोबारा संपर्क न करने की बात कही। आरोप है कि इसके बाद उन्हें और उनके परिवार को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी गई।</p>
<h5 style="text-align:justify;">15 विधायकों के इस्तीफे की कथित योजना</h5>
<p style="text-align:justify;">यह केवल एक विधायक तक सीमित मामला नहीं था। कथित योजना के तहत TVK के 15 विधायकों से एक साथ इस्तीफा दिलाकर सरकार के बहुमत को प्रभावित करने की रणनीति बनाई गई थी। हालांकि इस दावे की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और जांच एजेंसियां सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">TVK नेताओं का कहना है कि यदि समय रहते इस मामले का खुलासा नहीं होता तो राज्य की राजनीतिक स्थिति प्रभावित हो सकती थी। पार्टी ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।</p>
<h5 style="text-align:justify;">शिकायत के बाद तीन लोगों की गिरफ्तारी</h5>
<p style="text-align:justify;">विधायक की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की। जांच के दौरान चेन्नई स्थित एक कंसल्टेंसी फर्म से जुड़े तीन लोगों—तिरुनावुक्करासु, नरेश और त्यागराजन—को गिरफ्तार किया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रारंभिक जांच में इन लोगों के कुछ राजनीतिक संपर्कों की भी जानकारी सामने आने की बात कही जा रही है। हालांकि पुलिस ने अभी तक किसी भी राजनीतिक दल या नेता की भूमिका पर अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट जानकारी सामने आएगी।</p>
<h5 style="text-align:justify;">TVK ने लगाए गंभीर राजनीतिक आरोप</h5>
<p style="text-align:justify;">TVK नेताओं ने आरोप लगाया कि पार्टी के कई विधायकों से संपर्क कर उन्हें दल बदलने या सरकार के खिलाफ मतदान करने के लिए करोड़ों रुपये की पेशकश की गई। पार्टी का कहना है कि यह लोकतांत्रिक व्यवस्था को प्रभावित करने का प्रयास है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">TVK का दावा है कि कई विधायकों को 20 करोड़ से 50 करोड़ रुपये तक की पेशकश किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।</p>
<h5 style="text-align:justify;">डीएमके ने आरोपों को बताया निराधार</h5>
<p style="text-align:justify;">दूसरी ओर डीएमके ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। पार्टी के प्रवक्ता ए. सरवनन ने कहा कि TVK बिना तथ्यों के राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश कर रही है। उनका कहना है कि यदि किसी के पास ठोस सबूत हैं तो उन्हें जांच एजेंसियों के सामने प्रस्तुत किया जाना चाहिए। डीएमके का कहना है कि मामले की जांच कानून के अनुसार होनी चाहिए और बिना जांच पूरी हुए किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">TVK और डीएमके के बीच पिछले कुछ समय से राजनीतिक बयानबाजी तेज रही है। चुनावी सभाओं और विभिन्न सार्वजनिक कार्यक्रमों के दौरान दोनों दलों के नेताओं के बीच कई बार तीखी टिप्पणियां देखने को मिली हैं। हाल के महीनों में भी विभिन्न राजनीतिक मुद्दों को लेकर दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी रहा है। मौजूदा मामला उसी राजनीतिक माहौल के बीच सामने आया है, जिससे इसकी संवेदनशीलता और बढ़ गई है।</p>
<h5 style="text-align:justify;">पुलिस सभी पहलुओं की कर रही जांच</h5>
<p style="text-align:justify;">पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की गंभीरता को देखते हुए सभी इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, कॉल रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की जांच की जा रही है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों से पूछताछ जारी है और आवश्यकता पड़ने पर अन्य लोगों से भी पूछताछ की जा सकती है। जांच एजेंसियों का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई होगी। इस घटनाक्रम के बाद तमिलनाडु की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है। विपक्ष और सत्तापक्ष दोनों इस मुद्दे पर अपनी-अपनी दलीलें रख रहे हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जांच में रिश्वत या सरकार गिराने की किसी संगठित साजिश के प्रमाण मिलते हैं तो यह राज्य की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण मामला साबित हो सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 17:46:13 +0530</pubDate>
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