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                <title>Science News - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Science News RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>बरमूडा ट्रायंगल के नीचे मिला अनोखा भूगर्भीय रहस्य, वैज्ञानिक भी हैरान</title>
                                    <description><![CDATA[बरमूडा ट्रायंगल के नीचे 20 किमी गहराई में हल्की चट्टानी परत मिली। वैज्ञानिकों ने इसे भूगर्भीय खोज बताया, हादसों से कोई संबंध नहीं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/special-news/scientists-are-also-surprised-by-the-unique-geological-mystery-found/article-53678"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/bermuda-triangle-mystery.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बरमूडा ट्रायंगल</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो कि दुनिया के सबसे रहस्यमयी स्थानों में से एक माना जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">के बारे में एक नई वैज्ञानिक खोज सामने आई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसने इस इलाके को फिर से चर्चा में ला दिया है। सालों से इस क्षेत्र में जहाजों और विमानों के अचानक गायब होने की कई कहानियाँ सुनाई जाती रही हैं। इसे कुछ लोग एलियंस के साथ जोड़ते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि अन्य इसे रहस्यमयी शक्तियों का स्थान मानते हैं। लेकिन अब वैज्ञानिकों ने इसके नीचे एक भूगर्भीय तथ्य खोजा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसने इस रहस्य को एक नई दिशा दी है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हाल ही की रिसर्च में वैज्ञानिकों ने पाया कि बरमूडा ट्रायंगल के नीचे करीब 20 किलोमीटर गहराई पर एक अद्भुत हल्की चट्टानी परत मौजूद है। यह खोज जर्नल </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">Geophysical Research Letters <span lang="hi" xml:lang="hi">में प्रकाशित की गई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें बताया गया है कि इस क्षेत्र की संरचना बाकी समुद्री द्वीपों से काफी अलग है। रिसर्च से यह भी पता चला है कि समुद्र की सतह और मेंटल के बीच यह परत एक तरह से </span>“<span lang="hi" xml:lang="hi">तैरते प्लेटफॉर्म</span>” <span lang="hi" xml:lang="hi">की तरह कार्य करती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो पूरे इलाके को स्थिर बनाए रखने में मदद करती है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">यह रिसर्च </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">Carnegie Science <span lang="hi" xml:lang="hi">और </span>Yale University <span lang="hi" xml:lang="hi">के भूवैज्ञानिकों ने भूकंपीय तरंगों का उपयोग करके बनाई गई 3</span>D <span lang="hi" xml:lang="hi">इमेजिंग के आधार पर की है। वैज्ञानिक मानते हैं कि करोड़ों साल पहले ज्वालामुखीय गतिविधियाँ समाप्त होने पर वहां का मैग्मा धीरे-धीरे ठंडा होकर इस हल्की चट्टानी परत में बदल गया। यही कारण है कि यह क्षेत्र समुद्र में होने के बावजूद लंबे समय तक स्थिर रहा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि आमतौर पर ज्वालामुखीय क्षेत्र समय के साथ धंसने लगते हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हालांकि</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस खोज के बावजूद वैज्ञानिकों ने यह स्पष्ट किया है कि इसका जहाजों या विमानों के गायब होने की घटनाओं से कोई सीधा संबंध नहीं है। अमेरिकी तटरक्षक बल और अन्य एजेंसियाँ पहले भी कह चुकी हैं कि इस क्षेत्र में असामान्य हादसों की कोई ठोस वैज्ञानिक पुष्टि नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि यहां होने वाले अधिकांश हादसे खराब मौसम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तेज तूफान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऊँची समुद्री लहरें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तकनीकी खामियाँ और मानव त्रुटियों के कारण होते हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कुछ वैज्ञानिक यह भी मानते हैं कि बरमूडा ट्रायंगल के बारे में जो रहस्य और कहानियाँ फैली हैं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">वे काफी हद तक फिल्मों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मीडिया रिपोर्टों और लोककथाओं के कारण बढ़ी हैं। वास्तव में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह एक सामान्य समुद्री क्षेत्र है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां शिपिंग और हवाई यातायात का बड़ा हिस्सा होता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे हादसों की घटनाएँ अधिक दर्ज होती हैं। अब तक इस क्षेत्र में किसी तरह की अलौकिक शक्ति या एलियन गतिविधि के कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिले हैं।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">फिर भी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह नई खोज भूगर्भ विज्ञान के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि इससे पृथ्वी की आंतरिक संरचना और समुद्री द्वीपों के निर्माण की प्रक्रिया को बेहतर तरीके से समझा जा सकता है। वैज्ञानिक अब यह भी अध्ययन कर रहे हैं कि क्या ऐसी ही संरचनाएँ दुनिया के अन्य समुद्री इलाकों के नीचे भी मौजूद हैं। यह अध्ययन पृथ्वी के भूगर्भीय इतिहास को समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 May 2026 13:50:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>केला टेढ़ा क्यों होता है? इसके पीछे छिपा है गुरुत्वाकर्षण और सूरज की रोशनी का साइंस। जानें यहां</title>
                                    <description><![CDATA[क्या आपने सोचा है केला हमेशा टेढ़ा ही क्यों होता है? जानिए गुरुत्वाकर्षण, रोशनी और ऑक्सिन हार्मोन से जुड़ा इसका वैज्ञानिक कारण।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/life-style/the-science-of-gravity-and-sunlight-is-hidden-behind-why/article-53372"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-14t174223.048.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">केला दुनिया के सबसे लोकप्रिय फलों में से एक है। सुबह के नाश्ते से लेकर जिम की डाइट तक</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">लोग इसे हर दिन खाते हैं। इसके स्वाद और सेहत के फायदों के साथ-साथ इसका आकार भी लोगों का ध्यान खींचता है। अक्सर लोगों के मन में ये सवाल आता है कि आखिर केला हमेशा टेढ़ा क्यों होता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सीधे क्यों नहीं बढ़ता। देखने में साधारण लगने वाली इस बात के पीछे एक दिलचस्प वैज्ञानिक प्रक्रिया छिपी हुई है। वैज्ञानिक इसे </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">ऋणात्मक गुरुत्वाकर्षण प्रतिक्रिया</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">या नेगेटिव जियोट्रॉपिज्म से समझाते हैं। यह प्रक्रिया ही है जो केला उगते समय अपना आकार बदलता है और अंत में मुड़ा हुआ दिखाई देता है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जानकारी के मुताबिक</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">केले की शुरुआत बाकी फलों की तरह सीधी नहीं होती। जब फल छोटे होते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो वे नीचे की ओर लटके रहते हैं। केले के बड़े गुच्छे को </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">हैंड</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">कहा जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और इनमें लगे छोटे फल शुरुआत में जमीन की तरफ झुके रहते हैं। लेकिन जैसे-जैसे इनका आकार बढ़ता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पौधे के भीतर हार्मोन सक्रिय हो जाते हैं। ये हार्मोन केले को सूरज की रोशनी की तरफ बढ़ने का सिग्नल देते हैं। उधर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गुरुत्वाकर्षण फल को नीचे खींचता है और पौधे की प्राकृतिक प्रवृत्ति उसे रोशनी की दिशा में मोड़ने लगती है। इस खिंचाव के बीच</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">केला धीरे-धीरे मुड़ जाता है। अगर केले पर गुरुत्वाकर्षण और प्रकाश का यह दबाव न होता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो शायद उसका आकार बिलकुल अलग होता।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस पूरी प्रक्रिया में </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">'<span lang="hi" xml:lang="hi">ऑक्सिन</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">नाम का हार्मोन बेहद महत्वपूर्ण होता है। यह हार्मोन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो पौधों की ग्रोथ को नियंत्रित करता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">केले के अलग-अलग हिस्सों में समान रूप से नहीं फैला होता। यदि फल के किसी हिस्से पर ज्यादा रोशनी पड़ती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो ऑक्सिन दूसरे हिस्से में जमा होने लगता है। इससे एक तरफ की कोशिकाएं तेजी से बढ़ती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि दूसरी तरफ की ग्रोथ सामान्य रहती है। यही असमान बढ़त केले को सीधा नहीं रहने देती</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और उसका आकार मुड़ने लगता है। वैज्ञानिकों के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यही कारण है कि केले में प्राकृतिक कर्व दिखाई देता है। इसी वजह से लगभग हर प्रकार का केला थोड़ा या ज्यादा टेढ़ा नजर आता है। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अलग-अलग मौसम और खेती की परिस्थितियों के कारण इसका घुमाव थोड़ा कम या ज्यादा हो सकता है। कई वैज्ञानिक प्रयोगों में भी यह साबित हुआ है कि रोशनी की दिशा बदलने पर केले के बढ़ने का एंगल भी बदल जाता है। इसलिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह साधारण चीज भी अपने अंदर गहरा विज्ञान छुपाए हुए है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>लाइफ स्टाइल</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 May 2026 18:17:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिका में न्यूक्लियर और स्पेस रिसर्च से जुड़े वैज्ञानिकों की गुमशुदगी और मौतों पर बढ़ा रहस्य, व्हाइट हाउस ने जांच का दिया आश्वासन</title>
                                    <description><![CDATA[2023 से अब तक 10 से अधिक मामलों में वैज्ञानिक या तो लापता या संदिग्ध हालात में मृत मिले, हाई-सिक्योरिटी लैब्स से जुड़े मामलों ने बढ़ाई चिंता]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/mystery-increases-over-the-disappearance-and-deaths-of-scientists-associated/article-51372"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/us-scientists.jpg" alt=""></a><br /><p>अमेरिका में न्यूक्लियर और स्पेस रिसर्च से जुड़े वैज्ञानिकों की रहस्यमय गुमशुदगी और मौतों के मामलों ने सरकार और सुरक्षा एजेंसियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। 2023 से अब तक ऐसे 10 से अधिक मामले सामने आए हैं, जिनमें वैज्ञानिक या तो अचानक लापता हो गए या फिर संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाए गए।</p>
<p>इस पूरे घटनाक्रम को लेकर पहली बार व्हाइट हाउस ने आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है। प्रेस ब्रीफिंग के दौरान प्रेस सचिव ने कहा कि यदि ये तथ्य सही पाए जाते हैं, तो यह निश्चित रूप से गंभीर मामला है और इसकी जांच आवश्यक होगी। उन्होंने यह भी कहा कि संबंधित एजेंसियों से जानकारी जुटाई जाएगी और जल्द ही स्थिति स्पष्ट की जाएगी।</p>
<h5><strong>हाई-सिक्योरिटी रिसर्च संस्थानों से जुड़े मामले</strong></h5>
<p>रिपोर्ट्स के अनुसार, ये सभी मामले अमेरिका की प्रमुख रिसर्च संस्थाओं से जुड़े हैं, जिनमें परमाणु अनुसंधान प्रयोगशालाएं, अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र और रक्षा से जुड़े वैज्ञानिक प्रोजेक्ट शामिल हैं। इन संस्थानों में काम करने वाले वैज्ञानिकों की भूमिका राष्ट्रीय सुरक्षा और अत्याधुनिक तकनीकी विकास से जुड़ी बताई जाती है।</p>
<p>कई मामलों में सामने आया है कि वैज्ञानिक अचानक अपने घरों से निकले और फिर वापस नहीं लौटे। कुछ मामलों में उन्होंने मोबाइल फोन, पहचान दस्तावेज और निजी सामान घर पर ही छोड़ दिया, जिससे जांच एजेंसियों की चिंता और बढ़ गई है।</p>
<h5><strong>गुमशुदगी और मौतों का पैटर्न</strong></h5>
<p>रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया है कि कई वैज्ञानिकों की गुमशुदगी एक समान पैटर्न दिखाती है। कुछ लोग पैदल ही घर से निकले, कुछ मामलों में मानसिक असंतुलन की आशंका जताई गई, जबकि कुछ मौतें अब तक स्पष्ट कारणों से परे हैं।</p>
<p>एक पूर्व सैन्य अधिकारी के लापता होने का मामला भी इन घटनाओं में शामिल है, जिसने सुरक्षा विशेषज्ञों के बीच गंभीर चर्चा को जन्म दिया है। इसके अलावा कई वैज्ञानिक परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष तकनीक और एडवांस्ड रिसर्च प्रोजेक्ट्स से जुड़े हुए थे।</p>
<p>व्हाइट हाउस ने कहा है कि अभी तक सभी मामलों की पूरी जानकारी एकत्र नहीं की गई है, लेकिन यदि किसी प्रकार का पैटर्न या साजिश सामने आती है, तो व्यापक जांच की जाएगी। सुरक्षा एजेंसियों को भी इस विषय पर सक्रिय किया गया है।</p>
<p>हालांकि, अब तक किसी भी आधिकारिक जांच में इन घटनाओं के बीच प्रत्यक्ष संबंध साबित नहीं हुआ है। कुछ मामलों में मौत को प्राकृतिक या व्यक्तिगत कारणों से जुड़ा बताया गया है, जबकि कुछ मामलों में जांच जारी है।</p>
<p>इन घटनाओं के सामने आने के बाद वैज्ञानिक समुदाय और सुरक्षा विश्लेषकों के बीच चिंता बढ़ी है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह जरूरी है कि सभी मामलों की स्वतंत्र और पारदर्शी जांच हो, ताकि किसी भी तरह की गलतफहमी या अफवाहों को रोका जा सके।</p>
<p>फिलहाल अमेरिकी एजेंसियां सभी मामलों की समीक्षा कर रही हैं। आने वाले दिनों में सरकार की ओर से विस्तृत रिपोर्ट या आधिकारिक बयान जारी किए जाने की संभावना है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Apr 2026 16:26:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
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