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                <title>WorldNews - दैनिक जागरण</title>
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                <title>टेलर स्विफ्ट और ट्रैविस केल्से ने की शादी, समारोह के 13 मिनट बाद दिखा इंद्रधनुष बना चर्चा का विषय</title>
                                    <description><![CDATA[न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में निजी समारोह में शादी, सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों ने बढ़ाई उत्सुकता; इंद्रधनुष को लेकर फैन्स के बीच कई तरह की चर्चाएं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/bollywood/taylor-swift-and-travis-kelces-wedding-becomes-a-topic-of/article-57840"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/taylor-swift.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अमेरिकी पॉप स्टार टेलर स्विफ्ट और एनएफएल स्टार ट्रैविस केल्से ने शुक्रवार, 3 जुलाई को न्यूयॉर्क के प्रतिष्ठित मैडिसन स्क्वायर गार्डन में निजी समारोह में शादी कर ली। समारोह को पूरी तरह गोपनीय रखा गया था और इसमें केवल परिवार के सदस्य, करीबी दोस्त और चुनिंदा मेहमानों को ही आमंत्रित किया गया था। शादी के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और आयोजन स्थल के आसपास आम लोगों की आवाजाही सीमित रही। हालांकि समारोह के भीतर की तस्वीरें सार्वजनिक नहीं की गईं, लेकिन शादी के कुछ ही मिनट बाद आसमान में दिखाई दिए इंद्रधनुष ने पूरे आयोजन को सोशल मीडिया पर सबसे चर्चित विषय बना दिया। समारोह के बाहर मौजूद लोगों और फैन अकाउंट्स द्वारा साझा की गई तस्वीरों में मैडिसन स्क्वायर गार्डन के ऊपर गहरे बादलों के बीच चमकता इंद्रधनुष दिखाई दिया। दावा किया गया कि यह दृश्य शादी के करीब 13 मिनट बाद नजर आया। इसके बाद यह तस्वीरें तेजी से वायरल हो गईं और दुनियाभर में फैन्स के बीच चर्चा का विषय बन गईं। टेलर स्विफ्ट के प्रशंसकों ने इस संयोग को खास बताया, क्योंकि उनके करियर और निजी जीवन में अंक 13 को लंबे समय से शुभ माना जाता है। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इसे महज संयोग बताया, जबकि कुछ प्रशंसकों ने इसे यादगार पल का प्रतीक मानते हुए अलग-अलग प्रतिक्रियाएं साझा कीं। देखते ही देखते यह इंद्रधनुष शादी की सबसे ज्यादा चर्चित तस्वीरों में शामिल हो गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">शादी का आयोजन पूरी तरह निजी रखा गया था। आयोजन स्थल के बाहर बैरिकेडिंग, सुरक्षा घेरा और काले रंग की एसयूवी गाड़ियों की लंबी कतारें दिखाई दीं। समारोह में शामिल होने वाले मेहमानों को भी विशेष सुरक्षा व्यवस्था के बीच प्रवेश दिया गया। रिपोर्टों के अनुसार अभिनेता एडम सैंडलर ने विवाह समारोह का संचालन किया। टेलर स्विफ्ट के भाई ऑस्टिन स्विफ्ट ने 'मैन ऑफ ऑनर' की भूमिका निभाई, जबकि ट्रैविस केल्से के भाई जेसन केल्से उनके 'बेस्ट मैन' बने। इस शादी में पारंपरिक ब्राइड्समेड्स और ग्रूम्समेन की व्यवस्था नहीं रखी गई थी। आयोजन को सरल लेकिन बेहद निजी अंदाज में आयोजित किया गया। मैडिसन स्क्वायर गार्डन ने भी इस खास मौके पर अपनी डिजिटल मार्की को गुलाबी रोशनी से सजाया और उस पर "JUST&amp;T MARRIED!" संदेश प्रदर्शित किया। यह दृश्य भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और लोगों ने इसकी तस्वीरें साझा कीं। शादी के बाद यह डिजिटल संदेश पूरे आयोजन की पहचान बन गया। बाहर मौजूद लोगों के लिए यही सबसे बड़ा आधिकारिक संकेत था कि समारोह संपन्न हो चुका है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">टेलर स्विफ्ट के प्रतिनिधि की ओर से साझा की गई जानकारी के अनुसार उन्होंने इस अवसर पर क्रिश्चियन डियोर हाउट कूचर का विशेष ब्राइडल परिधान पहना। ट्रैविस केल्से का परिधान भी डियोर ने तैयार किया था। दोनों के परिधानों को डिजाइनर जोनाथन एंडरसन ने विशेष रूप से तैयार किया। टेलर ने अपने लुक को कार्टियर के आभूषणों से पूरा किया, जबकि दोनों ने कस्टम क्रिश्चियन लूबोटिन के जूते पहने। फैशन जगत में भी इस शादी की काफी चर्चा रही, क्योंकि टेलर स्विफ्ट पहले भी अपने एरास टूर के दौरान क्रिश्चियन लूबोटिन के विशेष डिजाइन वाले जूतों का इस्तेमाल कर चुकी हैं। इस वजह से प्रशंसकों ने उनके ब्राइडल लुक और पुराने मंचीय परिधानों के बीच भी समानताएं खोजनी शुरू कर दीं। शादी के दौरान पहने गए परिधानों और आभूषणों की तस्वीरों का फैन्स को अब भी इंतजार है, क्योंकि समारोह को पूरी तरह निजी रखा गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">टेलर स्विफ्ट और ट्रैविस केल्से की प्रेम कहानी वर्ष 2023 में सार्वजनिक रूप से चर्चा में आई थी। उस समय ट्रैविस केल्से ने अपने पॉडकास्ट 'न्यू हाइट्स' में बताया था कि उन्होंने टेलर स्विफ्ट को अपने फोन नंबर वाला फ्रेंडशिप ब्रेसलेट देने की कोशिश की थी। इसके बाद दोनों के रिश्ते को लेकर चर्चाएं तेज हुईं और समय के साथ उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपने संबंध को स्वीकार किया। अगस्त 2025 में दोनों ने सगाई की घोषणा करते हुए मजाकिया अंदाज में लिखा था, "Your English teacher and your gym teacher are getting married." यह संदेश भी सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था। अब उसी रिश्ते ने शादी का रूप ले लिया है। शादी के बाद सामने आए इंद्रधनुष ने इस आयोजन को और भी यादगार बना दिया। हालांकि इसे लेकर कई तरह की भावनात्मक और सांकेतिक बातें सोशल मीडिया पर की जा रही हैं, लेकिन मौसम विशेषज्ञ इसे सामान्य प्राकृतिक घटना मानते हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बालीवुड</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 12:53:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>अली खामेनेई की अंतिम यात्रा शुरू, 14 महीने की पोती का छोटा ताबूत भी साथ रखा गया</title>
                                    <description><![CDATA[तेहरान में लाखों लोगों ने दी श्रद्धांजलि, छह दिन तक चलेंगे अंतिम संस्कार कार्यक्रम; ईरान और इराक के कई शहरों से होकर गुजरेगी अंतिम यात्रा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/ali-khameneis-funeral-procession-begins-small-coffin-of-14-month-old-granddaughter/article-57834"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/ali-khamenei-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई को अंतिम विदाई देने का सिलसिला शनिवार से तेहरान में आधिकारिक रूप से शुरू हो गया। राजधानी के इमाम खुमैनी ग्रैंड मुसल्ला परिसर में आयोजित श्रद्धांजलि समारोह में सुबह से ही हजारों लोग पहुंचने लगे। पूरे परिसर में शोक का माहौल दिखाई दिया और बड़ी संख्या में लोग अपने हाथों में ईरानी झंडे, धार्मिक प्रतीक और खामेनेई की तस्वीरें लेकर मौजूद रहे। समारोह के दौरान खामेनेई का ताबूत ईरान के राष्ट्रीय ध्वज में लिपटा हुआ मुख्य हॉल में लाया गया, जिसके ऊपर उनकी पहचान मानी जाने वाली काली पगड़ी भी रखी गई थी। इसी दौरान एक भावुक दृश्य तब सामने आया जब उनके परिवार के अन्य दिवंगत सदस्यों के ताबूत भी साथ रखे गए। इनमें 14 महीने की उनकी पोती जाहरा मोहम्मदी गोलपायेगानी का छोटा ताबूत भी शामिल था। इस दृश्य ने वहां मौजूद लोगों को भावुक कर दिया और कई लोग रोते हुए नजर आए। बताया जा रहा है कि फरवरी के अंत में हुए हमलों में खामेनेई के साथ परिवार के कुछ अन्य सदस्य भी मारे गए थे। अंतिम संस्कार के पहले दिन श्रद्धांजलि देने वालों की लंबी कतारें देखने को मिलीं और पूरे परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ईरानी प्रशासन के अनुसार खामेनेई के पार्थिव शरीर को शुक्रवार को तेहरान लाया गया था। इसके बाद छह दिनों तक सार्वजनिक श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई गई है ताकि देशभर से लोग अंतिम दर्शन कर सकें। राजधानी में तीन दिनों तक पार्थिव शरीर आम लोगों के लिए रखा जाएगा। प्रशासन का अनुमान है कि केवल तेहरान में ही अगले तीन दिनों के दौरान डेढ़ से दो करोड़ लोगों के शामिल होने की संभावना है। इसी को देखते हुए परिवहन, स्वास्थ्य सेवाओं और सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह अलर्ट मोड पर रखा गया है। शहर की प्रमुख सड़कों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है, जबकि सेना और सुरक्षा एजेंसियां भी लगातार निगरानी कर रही हैं। समारोह स्थल तक पहुंचने वाले सभी रास्तों पर कई स्तर की सुरक्षा जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि इतनी बड़ी भीड़ को देखते हुए यातायात व्यवस्था में भी अस्थायी बदलाव किए गए हैं। लोगों की सुविधा के लिए अतिरिक्त बसें और अन्य सार्वजनिक परिवहन सेवाएं चलाई गई हैं ताकि दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी न हो।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">श्रद्धांजलि समारोह में देश के कई वरिष्ठ राजनीतिक और धार्मिक नेता भी मौजूद रहे। सरकारी अधिकारियों के अलावा न्यायपालिका, संसद और विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भी खामेनेई को अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित की। समारोह के दौरान कई धार्मिक अनुष्ठान किए गए और विशेष प्रार्थनाएं भी आयोजित हुईं। बड़ी संख्या में महिलाएं, बुजुर्ग और युवा भी श्रद्धांजलि देने पहुंचे। कई लोग अपने परिवार के साथ अंतिम दर्शन के लिए घंटों तक कतार में खड़े रहे। पूरे कार्यक्रम के दौरान स्वयंसेवक भी लगातार लोगों की मदद करते दिखाई दिए। चिकित्सा सहायता केंद्र, पीने के पानी और अन्य जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था भी प्रशासन की ओर से की गई। अधिकारियों ने लोगों से अपील की कि वे धैर्य बनाए रखें और सुरक्षा एजेंसियों के निर्देशों का पालन करें ताकि कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अधिकारियों के मुताबिक अंतिम यात्रा केवल तेहरान तक सीमित नहीं रहेगी। तय कार्यक्रम के अनुसार सोमवार को राजधानी की सड़कों पर विशाल अंतिम यात्रा निकाली जाएगी। इसके बाद मंगलवार को पार्थिव शरीर को ईरान के धार्मिक महत्व वाले शहर क़ोम ले जाया जाएगा, जहां विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। इसके अगले दिन अंतिम यात्रा पड़ोसी देश इराक के कुछ पवित्र शहरों तक पहुंचेगी। वहां भी श्रद्धांजलि सभाएं आयोजित की जाएंगी और स्थानीय धार्मिक नेताओं की मौजूदगी में विशेष कार्यक्रम होंगे। अंतिम चरण में गुरुवार को खामेनेई के पैतृक शहर मशहद में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। प्रशासन का कहना है कि इस पूरे कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था लगातार कड़ी रहेगी और हर चरण की निगरानी की जाएगी। लाखों लोगों के शामिल होने की संभावना को देखते हुए यात्रा मार्ग पर भी विशेष इंतजाम किए गए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">खामेनेई की अंतिम यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि ईरान की आंतरिक राजनीति और क्षेत्रीय प्रभाव के लिहाज से भी काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। मध्य पूर्व के मौजूदा हालात और हाल के घटनाक्रम के बीच इस अंतिम संस्कार पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है। कई देशों के प्रतिनिधिमंडल भी ईरान पहुंच चुके हैं और विभिन्न स्तरों पर श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं शहर के संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं और ड्रोन के जरिए भी निगरानी की जा रही है। अस्पतालों और आपातकालीन सेवाओं को भी अलर्ट पर रखा गया है। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 12:52:58 +0530</pubDate>
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                <title>भारत दौरे पर जापान की पीएम सानाए ताकाइची, राष्ट्रपति भवन में भव्य स्वागत</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सानाए ताकाइची आज व्यापार, निवेश, रक्षा, सेमीकंडक्टर, सप्लाई चेन और इंडो-पैसिफिक सहयोग पर चर्चा करेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/grand-welcome-at-rashtrapati-bhavan-for-japanese-pm-sanae-takaichi/article-57629"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/sanae-takaichi-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची के तीन दिवसीय भारत दौरे की औपचारिक शुरुआत गुरुवार को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में हुई, जहां उनका पूरे सम्मान के साथ स्वागत किया गया। राष्ट्रपति भवन में आयोजित विशेष समारोह में उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मौजूद रहे और उन्होंने जापान की प्रधानमंत्री का स्वागत किया। प्रधानमंत्री बनने के बाद सानाए ताकाइची की यह पहली भारत यात्रा है, जिसे भारत और जापान के बीच रणनीतिक, आर्थिक और कूटनीतिक संबंधों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>
<p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/_japan-pm.jpg" alt="_Japan PM" width="1366" height="900"></img></p>
<p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">अपने दौरे के दूसरे दिन सानाए ताकाइची प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगी। दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय वार्ता में निवेश, व्यापार, रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, सेमीकंडक्टर निर्माण, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति, ऑटोमोबाइल उद्योग और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग जैसे कई अहम विषयों पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है। दोनों देशों के बीच विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को और मजबूत बनाने के लिए कई नए समझौतों पर भी बातचीत हो सकती है।= इस दौरे का सबसे महत्वपूर्ण एजेंडा आर्थिक सहयोग को नई गति देना माना जा रहा है। भारत और जापान के बीच व्यापार और निवेश लगातार बढ़ रहा है और दोनों देश अब इसे अगले स्तर तक ले जाने की तैयारी में हैं। इसी उद्देश्य से जापान के 150 से अधिक उद्योगपति भारत-जापान बिजनेस फोरम में हिस्सा लेंगे। इस मंच पर दोनों देशों के उद्योग जगत के प्रतिनिधि नए निवेश, औद्योगिक सहयोग और तकनीकी साझेदारी पर चर्चा करेंगे। माना जा रहा है कि इस बैठक के बाद कई नई निवेश परियोजनाओं का रास्ता साफ हो सकता है। इस यात्रा के दौरान सबसे अधिक चर्चा भारत और जापान के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार की संभावित व्यवस्था को लेकर हो रही है। दोनों देश अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए भारतीय रुपए और जापानी येन में सीधे भुगतान की व्यवस्था विकसित करने पर काम कर रहे हैं। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो पहली बार दोनों देशों के बीच व्यापार का भुगतान बिना अमेरिकी डॉलर के सीधे स्थानीय मुद्राओं में किया जा सकेगा। इससे विदेशी मुद्रा विनिमय की लागत कम होगी और व्यापारिक लेनदेन पहले की तुलना में अधिक तेज और आसान हो जाएगा। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत जापानी कंपनियां भारत के बैंकों में विशेष खाते खोल सकेंगी और उन्हीं के माध्यम से रुपए और येन में लेनदेन कर पाएंगी। इससे अंतरराष्ट्रीय भुगतान के लिए तीसरे देश की बैंकिंग प्रणाली या अमेरिकी डॉलर की आवश्यकता नहीं होगी।</p>
<p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/japan-pm-india-visit.jpg" alt="JAPAN PM INDIA VISIT" width="1366" height="1002"></img></p>
<p style="text-align:justify;">भारत और जापान के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार की दिशा में पहले भी सहमति बन चुकी है। वर्ष 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जापान यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अगले दस वर्षों के साझा विजन दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए थे। उसी दौरान भुगतान प्रणाली को मजबूत करने और स्थानीय मुद्राओं के उपयोग को बढ़ावा देने पर भी सहमति बनी थी। अब दोनों देश उस योजना को व्यावहारिक रूप देने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। आर्थिक मोर्चे पर जापान भारत के सबसे महत्वपूर्ण निवेशकों में शामिल है। वित्त वर्ष 2025-26 में दोनों देशों के बीच व्यापार 27.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इसी अवधि में जापान ने भारत में अरबों डॉलर का निवेश किया है और अगले दस वर्षों में 61 अरब डॉलर से अधिक निवेश का लक्ष्य तय किया गया है। यह निवेश मुख्य रूप से सेमीकंडक्टर, स्वच्छ ऊर्जा, हाई-टेक रक्षा उद्योग, डिजिटल तकनीक और विनिर्माण क्षेत्र में किया जाएगा। वर्तमान में भारत में लगभग 1400 जापानी कंपनियां सक्रिय हैं। इनमें से बड़ी संख्या विनिर्माण क्षेत्र से जुड़ी हुई है। मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना दोनों देशों के सहयोग का सबसे बड़ा उदाहरण मानी जाती है, जिसमें जापानी शिनकानसेन तकनीक और वित्तीय सहयोग का उपयोग किया जा रहा है। इसके अलावा ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, डिजिटल टेक्नोलॉजी और ग्रीन एनर्जी के क्षेत्रों में भी जापानी कंपनियां भारत में तेजी से निवेश बढ़ा रही हैं। दोनों देश क्वाड समूह के सदस्य हैं और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता तथा नियम आधारित व्यवस्था को बनाए रखने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, संयुक्त सैन्य अभ्यास और महत्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने जैसे विषय भी इस यात्रा के दौरान प्रमुख एजेंडे में शामिल रहेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 12:16:38 +0530</pubDate>
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                <title>केइको फुजीमोरी बनीं पेरू की पहली महिला राष्ट्रपति, संघर्षों से भरा जीवन</title>
                                    <description><![CDATA[19 साल की उम्र में फर्स्ट लेडी बनीं केइको, जेल और राजनीतिक उतार-चढ़ाव के बाद मिली ऐतिहासिक जीत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/keiko-fujimori-becomes-perus-first-female-president-life-full-of/article-57063"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/keiko-fujimori.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">पेरू ने इतिहास रच दिया है, जहां दक्षिणपंथी नेता केइको फुजीमोरी देश की पहली महिला राष्ट्रपति चुनी गई हैं। 51 वर्षीय केइको ने बेहद करीबी मुकाबले में जीत दर्ज की, जिसमें उन्हें लगभग 50.1% वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी रोबर्टो सांचेज को 49.9% वोट हासिल हुए। 28 जुलाई को केइको राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगी। अब उनके सामने देश में बढ़ते अपराध, भ्रष्टाचार और राजनीतिक अस्थिरता जैसी गंभीर चुनौतियां होंगी।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><span><strong>संघर्षों से भरा बचपन</strong></span></h5>
<p style="text-align:justify;">केइको फुजीमोरी का जीवन शुरुआत से ही संघर्षों से भरा रहा है। 1990 के दशक में जब उनके पिता अल्बर्टो फुजीमोरी पेरू के राष्ट्रपति थे, तब देश उग्रवादी संगठन “सेंडेरो लुमिनोसो” के हमलों से जूझ रहा था। उस दौरान राष्ट्रपति भवन और सरकारी संस्थान लगातार निशाने पर थे। सुरक्षा कारणों से केइको और उनके भाई-बहनों को लंबे समय तक बंकरों में रहना पड़ा। धमाकों और हमलों की आवाजें उनके बचपन का हिस्सा बन गई थीं। हालांकि इन कठिन परिस्थितियों के बावजूद उनके पिता का सख्त नियम था कि किसी भी हालत में पढ़ाई नहीं रुकनी चाहिए। यही अनुशासन केइको के जीवन की नींव बना।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><span><strong>19 साल की उम्र में फर्स्ट लेडी की जिम्मेदारी</strong></span></h5>
<p style="text-align:justify;">केइको ने अमेरिका की स्टोनी ब्रूक यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान 1994 में बड़ा बदलाव देखा। उनके माता-पिता के बीच विवाद बढ़ गया और परिवार टूटने की कगार पर पहुंच गया। उनकी मां सुजाना हिगुची ने पिता अल्बर्टो फुजीमोरी के सहयोगियों पर भ्रष्टाचार और राजनीतिक हस्तक्षेप के गंभीर आरोप लगाए। इस विवाद के कारण केइको को पढ़ाई बीच में छोड़कर पेरू लौटना पड़ा। सिर्फ 19 साल की उम्र में उन्हें देश की फर्स्ट लेडी की जिम्मेदारी सौंपी गई, क्योंकि उनके पिता ने उनकी मां को इस पद से हटा दिया था। इस फैसले ने उन्हें दुनिया की सबसे कम उम्र की फर्स्ट लेडी में शामिल कर दिया।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><span><strong>आलोचना और शुरुआती राजनीतिक अनुभव</strong></span></h5>
<p style="text-align:justify;">फर्स्ट लेडी बनने के बाद केइको को लगातार आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। अनुभवहीन होने के कारण उन्हें “किशोरी फर्स्ट लेडी” कहा गया। उन्होंने राष्ट्रपति भवन के कुछ हिस्सों को अपने पसंदीदा गुलाबी रंग से सजवाया, जो चर्चा का विषय बना। हालांकि केइको ने इन आलोचनाओं को ज्यादा गंभीरता से नहीं लिया और अपने काम पर ध्यान केंद्रित किया। यही शुरुआती अनुभव आगे चलकर उनकी राजनीतिक समझ और नेतृत्व क्षमता के लिए महत्वपूर्ण साबित हुआ।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><span><strong>जेल से लेकर राजनीतिक वापसी तक का सफर</strong></span></h5>
<p style="text-align:justify;">केइको फुजीमोरी का जीवन सिर्फ सत्ता और सफलता का नहीं बल्कि विवादों और संघर्षों का भी रहा है। वर्ष 2018 में उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग और चुनावी फंडिंग से जुड़े मामलों में जेल जाना पड़ा। वे लगभग 13 महीने तक जेल में रहीं। इस दौरान उन्होंने अपनी दो बेटियों को पत्र लिखे, जिनमें उन्हें पढ़ाई, हिम्मत और परिवार के महत्व की सीख दी गई। इन पत्रों ने न केवल उनकी बेटियों को भावनात्मक सहारा दिया, बल्कि खुद केइको को भी कठिन समय में मानसिक शक्ति प्रदान की। रिहाई के बाद उन्होंने राजनीति में दोबारा सक्रिय भूमिका निभाई और लगातार जनता का समर्थन जुटाने में सफल रहीं।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><span><strong>राजनीतिक जीत और नई जिम्मेदारी</strong></span></h5>
<p style="text-align:justify;">चुनाव में बेहद करीबी मुकाबले के बाद केइको फुजीमोरी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की। यह उनकी चौथी कोशिश थी, जिसमें आखिरकार उन्हें सफलता मिली। अब राष्ट्रपति के रूप में उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती देश की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना, भ्रष्टाचार पर नियंत्रण पाना और राजनीतिक स्थिरता स्थापित करना होगा। उनकी जीत न केवल व्यक्तिगत संघर्षों की कहानी है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि लगातार प्रयास और दृढ़ संकल्प से कठिन से कठिन लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं। केइको फुजीमोरी का जीवन एक ऐसे सफर की कहानी है जिसमें बचपन का डर, पारिवारिक विवाद, राजनीतिक दबाव, जेल की सजा और अंततः ऐतिहासिक जीत शामिल है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 17:08:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ईरान युद्ध खर्च पर ट्रम्प ने मांगे ₹8.3 लाख करोड़, संसद में बढ़ा विरोध</title>
                                    <description><![CDATA[व्हाइट हाउस ने अतिरिक्त रक्षा फंडिंग की मांग को सैन्य तैयारी और हथियार भंडार से जोड़ा, जबकि अमेरिकी संसद के दोनों सदनों में सैन्य कार्रवाई को लेकर सवाल तेज हो गए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/trump-demands-%E2%82%B983-lakh-crore-on-iran-war-expenditure-opposition/article-56869"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/donald-trump-(5).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प एक बार फिर अपनी विदेश नीति और रक्षा रणनीति को लेकर घरेलू राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गए हैं। ट्रम्प प्रशासन ने अमेरिकी संसद से 87.6 अरब डॉलर यानी करीब 8.3 लाख करोड़ रुपए की अतिरिक्त फंडिंग मंजूर करने की मांग की है। सरकार का कहना है कि यह रकम ईरान के खिलाफ हालिया सैन्य अभियानों, सेना की तैयारियों और हथियारों के भंडार को दोबारा मजबूत करने के लिए जरूरी है। हालांकि संसद में इस प्रस्ताव को लेकर विरोध बढ़ता दिखाई दे रहा है और कई सांसद इसे सैन्य खर्च बढ़ाने की दिशा में एक विवादित कदम मान रहे हैं। व्हाइट हाउस की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक यह अतिरिक्त फंडिंग पहले से स्वीकृत रक्षा बजट का हिस्सा नहीं है। पिछले साल अमेरिकी कांग्रेस करीब 1 ट्रिलियन डॉलर के रक्षा बजट को मंजूरी दे चुकी थी, जबकि अगले वित्तीय वर्ष के लिए लगभग 1.5 ट्रिलियन डॉलर की नई मांग पहले से ही रखी जा चुकी है। इसके बावजूद ट्रम्प प्रशासन का कहना है कि ईरान के साथ बढ़े तनाव और सैन्य अभियानों के कारण अतिरिक्त संसाधनों की आवश्यकता पैदा हुई है। अधिकारियों के अनुसार इस राशि का इस्तेमाल सैन्य ऑपरेशनों की लागत पूरी करने, आधुनिक हथियारों की खरीद, गोला-बारूद के भंडार को फिर से भरने और कुछ गोपनीय रक्षा कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने में किया जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बताया जा रहा है कि हाल के महीनों में मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य गतिविधियां बढ़ी हैं। ईरान और उसके समर्थक समूहों के साथ तनाव के बीच अमेरिका ने कई रणनीतिक कदम उठाए हैं। इन अभियानों में बड़ी मात्रा में मिसाइलों, रक्षा प्रणालियों और अन्य सैन्य संसाधनों का इस्तेमाल हुआ है। प्रशासन का तर्क है कि यदि समय रहते अतिरिक्त धन उपलब्ध नहीं कराया गया तो सेना की परिचालन क्षमता और भविष्य की तैयारियों पर असर पड़ सकता है। रक्षा विभाग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि कई महत्वपूर्ण सैन्य भंडार अपेक्षा से अधिक तेजी से खर्च हुए हैं, जिनकी भरपाई जरूरी है। हालांकि संसद में इस मांग को लेकर माहौल पूरी तरह सरकार के पक्ष में नहीं दिख रहा। मंगलवार को अमेरिकी सीनेट ने एक प्रस्ताव पारित कर ट्रम्प प्रशासन से ईरान के खिलाफ आगे की सैन्य कार्रवाई रोकने का आग्रह किया। इससे पहले प्रतिनिधि सभा यानी लोअर हाउस भी इसी तरह का प्रस्ताव पारित कर चुकी है। इन प्रस्तावों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बिना स्पष्ट संसदीय मंजूरी के किसी बड़े सैन्य संघर्ष में अमेरिका की भागीदारी न बढ़े। दिलचस्प बात यह रही कि कुछ रिपब्लिकन सांसदों ने भी अपनी ही पार्टी के राष्ट्रपति के खिलाफ जाकर डेमोक्रेट सांसदों का समर्थन किया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यह मामला सिर्फ रक्षा बजट तक सीमित नहीं है बल्कि राष्ट्रपति और संसद के बीच अधिकारों की बहस भी इससे जुड़ी हुई है। अमेरिका में युद्ध और सैन्य कार्रवाई से जुड़े फैसलों पर लंबे समय से विवाद रहा है। कई सांसदों का तर्क है कि बड़े सैन्य अभियानों से पहले कांग्रेस की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। दूसरी ओर ट्रम्प समर्थकों का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में राष्ट्रपति को तेजी से फैसले लेने की जरूरत होती है और ऐसे समय में राजनीतिक मतभेदों को प्राथमिकता नहीं दी जानी चाहिए। आर्थिक दृष्टि से भी यह प्रस्ताव चर्चा का विषय बन गया है। अमेरिका पहले से ही बड़े बजट घाटे और बढ़ते सरकारी कर्ज की चुनौती का सामना कर रहा है। ऐसे में अतिरिक्त 87.6 अरब डॉलर की मांग को लेकर वित्तीय विशेषज्ञों ने भी सवाल उठाए हैं। रक्षा खर्च लगातार बढ़ने से अन्य घरेलू योजनाओं पर दबाव पड़ सकता है। वहीं समर्थकों का तर्क है कि राष्ट्रीय सुरक्षा पर खर्च को कम नहीं किया जा सकता और वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए सेना को पर्याप्त संसाधन देना जरूरी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Jun 2026 11:42:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने PM मोदी को न्योता, 4 जुलाई से शुरू होंगे कार्यक्रम</title>
                                    <description><![CDATA[तेहरान में राजकीय जनाजे की तैयारियां तेज, करीब 2 करोड़ लोगों के शामिल होने की उम्मीद; भारत की भागीदारी पर सस्पेंस]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/pm-modi-invited-to-attend-khameneis-funeral-programs-will-start/article-56850"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/khamenei-funeral.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। इसी बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस अंतिम संस्कार समारोह में शामिल होने का आधिकारिक न्योता भेजा गया है। यह समारोह 4 जुलाई से शुरू होने जा रहा है और इसे लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हलचल बढ़ गई है। हालांकि अभी तक भारत सरकार की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। खामेनेई का अंतिम संस्कार कार्यक्रम कई चरणों में आयोजित किया जाएगा। उनके पार्थिव शरीर को पहले तेहरान के ग्रैंड मोसल्ला परिसर में अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा, जहां हजारों लोगों के पहुंचने की संभावना है। इसके बाद 9 जुलाई को उन्हें मशहद स्थित इमाम रजा दरगाह में दफनाया जाएगा। अधिकारियों का अनुमान है कि इस पूरे कार्यक्रम में तेहरान, कुम और मशहद में करीब 2 करोड़ लोग शामिल हो सकते हैं, जो इसे दुनिया के सबसे बड़े जनाजों में से एक बना सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले यह कार्यक्रम 4 मार्च को आयोजित होना था, लेकिन क्षेत्रीय तनाव और युद्ध जैसी परिस्थितियों के चलते इसे टाल दिया गया था। अब हालात सामान्य होने के बाद इसे दोबारा शुरू किया जा रहा है। ईरान प्रशासन इस आयोजन को बेहद व्यापक स्तर पर करने की तैयारी में जुटा है, जिसमें सुरक्षा से लेकर भीड़ प्रबंधन तक के लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं।भारत की ओर से इस कार्यक्रम में कौन शामिल होगा, इस पर अभी संशय बना हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निमंत्रण जरूर भेजा गया है, लेकिन उनके शामिल होने को लेकर कोई पुष्टि नहीं हुई है। इससे पहले भी जब ईरान के पूर्व राष्ट्रपति इब्राहिम रायसी का निधन हुआ था, तब भारत ने उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल तेहरान भेजा था। उस समय तत्कालीन उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अंतिम संस्कार में भारत का प्रतिनिधित्व किया था।</p>
<p style="text-align:justify;">ईरान में यह परंपरा रही है कि महत्वपूर्ण राजनीतिक और धार्मिक नेताओं के अंतिम संस्कार में विदेशी प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया जाता है। खामेनेई का अंतिम संस्कार भी इसी परंपरा के तहत आयोजित किया जा रहा है, लेकिन इस बार आयोजन का आकार और सुरक्षा चुनौती कहीं अधिक बड़ी बताई जा रही है। युद्ध के हालात और हालिया तनावों के कारण प्रशासन के सामने भीड़ नियंत्रण सबसे बड़ी चुनौती है। खामेनेई के दफन स्थल को लेकर भी धार्मिक और रणनीतिक दृष्टि से विशेष तैयारी की गई है। उन्हें मशहद स्थित इमाम रजा दरगाह परिसर में दफनाया जाएगा, जो शिया इस्लाम का सबसे पवित्र धार्मिक स्थल माना जाता है। मशहद न केवल ईरान का दूसरा सबसे बड़ा शहर है, बल्कि शिया समुदाय के लिए वैश्विक आस्था का केंद्र भी है।</p>
<p style="text-align:justify;">अधिकारियों के अनुसार, अंतिम संस्कार को तीन दिन तक सार्वजनिक रूप से आयोजित किया जाएगा। इस पूरे कार्यक्रम की जिम्मेदारी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) को सौंपी गई है, जो सुरक्षा और प्रबंधन दोनों की निगरानी कर रहा है। प्रशासन का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर आयोजन को नियंत्रित करना बेहद चुनौतीपूर्ण होगा, खासकर तब जब लाखों लोगों के जुटने की संभावना हो। ईरान के इतिहास में इससे पहले 1989 में अयातुल्ला रुहोल्लाह खोमैनी के अंतिम संस्कार में करीब 1 करोड़ लोग शामिल हुए थे। वह जनाजा आज भी दुनिया के सबसे बड़े जनाजों में गिना जाता है, जिसमें भारी भीड़ के कारण भगदड़ जैसी स्थिति भी बन गई थी और कई लोगों की जान चली गई थी। इसी अनुभव को देखते हुए इस बार सुरक्षा व्यवस्था को बेहद सख्त रखा जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी की संभावित भागीदारी को लेकर कूटनीतिक हलकों में चर्चा तेज है, लेकिन आधिकारिक स्थिति स्पष्ट नहीं है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Jun 2026 18:06:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ईरान का अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी हमला, मध्य पूर्व में बढ़ा तनाव</title>
                                    <description><![CDATA[बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को बनाया निशाना, अमेरिकी एयरस्ट्राइक के बाद ईरान की कार्रवाई से क्षेत्र में हालात और गंभीर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/irans-retaliatory-attack-on-american-bases-increases-tension-in-the/article-55550"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/iran-us-conflict-(3).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव खतरनाक स्तर पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। ईरान ने बुधवार को बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए। ईरान की ओर से दावा किया गया कि अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाते हुए कुल 21 हमले किए गए हैं। हालांकि अमेरिकी अधिकारियों ने इस दावे को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया है और कहा है कि ईरान नुकसान को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा है। फिर भी इस घटना ने पूरे क्षेत्र में सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें अब मध्य पूर्व की बदलती स्थिति पर टिक गई हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी आईआरजीसी ने बयान जारी कर कहा कि यह कार्रवाई अमेरिकी सैन्य हमलों के जवाब में की गई है। ईरानी पक्ष का कहना है कि हाल के दिनों में अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट के पास उसके कई रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया था। इनमें एयर डिफेंस सिस्टम, निगरानी रडार और कमांड एंड कंट्रोल सेंटर शामिल थे। ईरान का आरोप है कि अमेरिका लगातार उसके सैन्य ढांचे को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है और ताजा हमला उसी रणनीति का हिस्सा था। इसके जवाब में ईरान ने क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">तनाव की शुरुआत उस घटना के बाद और बढ़ गई जब होर्मुज स्ट्रेट के पास अमेरिकी सेना का एक एएच-64 अपाचे हेलिकॉप्टर समुद्र में गिर गया था। घटना के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान पर गंभीर आरोप लगाए थे। ट्रम्प ने कहा था कि हेलिकॉप्टर को ईरान समर्थित ताकतों ने निशाना बनाया और अमेरिका इस कार्रवाई का जवाब जरूर देगा। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा था कि जिम्मेदार लोगों को इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। हालांकि ईरान ने हेलिकॉप्टर गिराने में किसी भी तरह की भूमिका से इनकार किया है और इस घटना की जिम्मेदारी नहीं ली है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अमेरिका ने हेलिकॉप्टर हादसे के कुछ समय बाद ही जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए थे। अमेरिकी सेना का कहना था कि इन हमलों का उद्देश्य संभावित खतरों को समाप्त करना और क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था। इसके बाद से दोनों देशों के बीच बयानबाजी लगातार तेज होती चली गई। अब ईरान की ओर से अमेरिकी ठिकानों पर हमला किए जाने के बाद स्थिति और अधिक संवेदनशील हो गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस बीच अमेरिकी राजनीति में भी ईरान मुद्दा प्रमुख बन गया है। हाल ही में आयोजित एक रिपब्लिकन रैली में ट्रम्प ने दावा किया था कि अमेरिका ईरान के खिलाफ रणनीतिक बढ़त बनाए हुए है। उन्होंने कहा कि अगले दो सप्ताह के भीतर अमेरिका "पूरी जीत" की घोषणा कर सकता है। ट्रम्प ने यह भी कहा था कि क्षेत्र में स्थिरता लौटने के बाद वैश्विक तेल बाजार को राहत मिलेगी और तेल की कीमतों में गिरावट देखने को मिल सकती है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव और बढ़ता है तो इसका असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों पर पड़ सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूसरी ओर इजराइल ने भी ईरान को लेकर सख्त रुख अपनाया हुआ है। इजराइली सेना प्रमुख एयाल जामिर ने हाल ही में कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो इजराइल ईरान के खिलाफ और बड़े सैन्य अभियान चलाने के लिए तैयार है। उनका कहना था कि हालिया सैन्य कार्रवाई केवल शुरुआत थी और राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता नहीं किया जाएगा। इससे संकेत मिल रहे हैं कि क्षेत्रीय शक्तियां भी इस संघर्ष पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसी दौरान अमेरिका और इजराइल के रिश्तों को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ईरान को लेकर अमेरिका और इजराइल की रणनीतियों में कुछ मतभेद सामने आए हैं। रिपोर्टों के अनुसार ट्रम्प ने इजराइली नेतृत्व को संघर्ष को और अधिक न बढ़ाने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्रीय तनाव नियंत्रण से बाहर हुआ तो इसके व्यापक भू-राजनीतिक परिणाम सामने आ सकते हैं।  बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है और क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी गई है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार घटनाक्रम पर नजर रखे हुए है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 17:28:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>ईरान को 28 लाख करोड़ रुपए के फंड का प्रस्ताव, परमाणु समझौते पर नए दावे</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका और ईरान के बीच संभावित युद्धविराम समझौते की चर्चा तेज, ट्रम्प ने परमाणु कार्यक्रम पर सहमति का दावा किया, तेहरान ने किया खंडन]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/fund-proposal-of-rs-28-lakh-crore-to-iran-new/article-54559"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/iran-reconstruction-fund.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव के बीच एक नई कूटनीतिक पहल की खबर सामने आई है। रिपोर्टों के मुताबिक दोनों देशों के बीच प्रस्तावित 60 दिन के युद्धविराम समझौते में ईरान को 300 अरब डॉलर यानी करीब 28.5 लाख करोड़ रुपए के पुनर्निर्माण फंड का प्रस्ताव दिया गया है। बताया जा रहा है कि इस आर्थिक पैकेज के तहत अमेरिकी कंपनियों को भी ईरान में निवेश की अनुमति मिल सकती है। हालांकि समझौते को लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सामने आई जानकारियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई चर्चा शुरू कर दी है।</p>
<p class="isSelectedEnd">जानकारी के अनुसार यह प्रस्ताव उस व्यापक समझौते का हिस्सा माना जा रहा है, जिस पर पिछले कुछ समय से विभिन्न स्तरों पर बातचीत चल रही है। एक ईरानी अधिकारी ने इसे रीकंस्ट्रक्शन प्रोग्राम बताते हुए कहा कि यदि अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर होते हैं तो ईरान को आर्थिक पुनर्निर्माण के लिए बड़ी सहायता उपलब्ध कराई जा सकती है। वर्षों से प्रतिबंधों, क्षेत्रीय तनाव और सैन्य टकरावों का सामना कर रहे ईरान के लिए यह फंड बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर सहमति बनने के संकेत मिल रहे हैं। ट्रम्प के अनुसार संभावित समझौते के तहत ईरान परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा और उसके संवर्धित यूरेनियम को समाप्त किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि यदि समझौता सफल होता है तो अमेरिका कुछ आर्थिक और समुद्री प्रतिबंधों में राहत देने पर विचार कर सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">हालांकि ट्रम्प के इन दावों को ईरान ने तुरंत खारिज कर दिया। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने स्पष्ट कहा कि परमाणु मुद्दे पर इस समय किसी तरह की बातचीत नहीं चल रही है। उनका कहना था कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया में जो बातें सामने आ रही हैं, वे वास्तविक स्थिति को नहीं दर्शातीं। इसके अलावा ईरान की फार्स न्यूज एजेंसी ने भी सूत्रों के हवाले से बताया कि समझौते के किसी मसौदे में परमाणु सामग्री को नष्ट करने जैसी कोई शर्त शामिल नहीं है।</p>
<p class="isSelectedEnd">यह विरोधाभास दिखाता है कि दोनों पक्षों के बीच अभी भी कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सार्वजनिक बयानों और बंद कमरे में चल रही वार्ताओं के बीच अंतर होना असामान्य नहीं है। अक्सर ऐसे संवेदनशील समझौतों में अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचने से पहले दोनों पक्ष अपने-अपने राजनीतिक और रणनीतिक हितों को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग संदेश देते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">उधर होर्मुज स्ट्रेट को लेकर भी तनाव बना हुआ है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ट्रम्प ने कहा कि संभावित समझौते के बाद इस क्षेत्र में नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त की जा सकती है और जहाजों से किसी प्रकार का अतिरिक्त टोल नहीं लिया जाएगा। दूसरी ओर अमेरिका ने ओमान को चेतावनी दी है कि यदि उसने ईरान की किसी टोल व्यवस्था का समर्थन किया तो संबंधित देशों, कंपनियों और व्यक्तियों पर कार्रवाई की जा सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd">ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने भी अमेरिका के प्रति अविश्वास जताया है। उन्होंने कहा कि तेहरान केवल बयानों पर नहीं बल्कि वास्तविक कार्रवाई पर भरोसा करता है। उनके अनुसार जब तक अमेरिका अपने व्यवहार में ठोस बदलाव नहीं दिखाता, तब तक ईरान भी किसी प्रकार की रियायत देने के पक्ष में नहीं है। यह बयान दोनों देशों के बीच मौजूद गहरे अविश्वास को दर्शाता है, जो वर्षों से विभिन्न विवादों के कारण बना हुआ है।</p>
<p class="isSelectedEnd">इसी दौरान ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया कि पिछले 24 घंटों में 24 जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित गुजरने की अनुमति दी गई। ईरान का कहना है कि समुद्री यातायात को नियंत्रित और सुरक्षित तरीके से संचालित किया जा रहा है। हालांकि पश्चिमी देशों की ओर से लगातार इस क्षेत्र में गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।</p>
<p>क्षेत्रीय हालात को और जटिल बनाते हुए इजराइल ने दक्षिणी लेबनान के कुछ इलाकों में नई चेतावनी जारी की है। इजराइली सेना का कहना है कि वह हिजबुल्लाह के खिलाफ संभावित अभियान की तैयारी कर रही है और नागरिकों को सुरक्षा के मद्देनजर प्रभावित क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी गई है। इससे पश्चिम एशिया में पहले से मौजूद तनाव और बढ़ सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 May 2026 13:56:01 +0530</pubDate>
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                <title>ट्रम्प का दावा—ईरान यूरेनियम सौंपने को तैयार, मिडिल ईस्ट में सीजफायर की ओर बढ़ते कदम</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका-ईरान बातचीत तेज, इजराइल-लेबनान में 10 दिन का युद्धविराम लागू; वैश्विक तनाव के बीच कूटनीतिक हल की उम्मीद]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/trumps-claim-iran-ready-to-hand-over-uranium-steps/article-51409"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/donaldtrump-(3).jpg" alt=""></a><br /><p>मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Donald Trump</span></span> ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि ईरान अपने एनरिच्ड यूरेनियम का भंडार अमेरिका को सौंपने के लिए तैयार है। व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच शांति समझौता अब बेहद करीब है और बातचीत “बहुत सफल” चल रही है।</p>
<p>ट्रम्प के मुताबिक, यदि यह समझौता होता है तो होर्मुज स्ट्रेट खुला रहेगा, तेल आपूर्ति सामान्य हो जाएगी और क्षेत्र में स्थिरता लौट सकती है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अगर यह डील इस्लामाबाद में साइन होती है, तो वे पाकिस्तान की यात्रा कर सकते हैं। हालांकि ईरान की सरकारी मीडिया ने इन दावों को खारिज करते हुए इसे “हवाई किले” बताया है।</p>
<h5><strong>इजराइल-लेबनान में सीजफायर लागू</strong></h5>
<p>इस बीच, <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Israel</span></span> और <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Lebanon</span></span> के बीच 10 दिन का युद्धविराम लागू हो गया है। यह सीजफायर भारतीय समयानुसार देर रात 3:30 बजे से प्रभावी हुआ। ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर बताया कि यह सहमति लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन और इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से बातचीत के बाद बनी।</p>
<p>हालांकि, युद्धविराम के कुछ ही समय बाद दक्षिणी लेबनान में गोलाबारी और सैन्य गतिविधियों की खबरें भी सामने आई हैं, जिससे स्थिति पूरी तरह स्थिर नहीं मानी जा रही।</p>
<h5><strong>परमाणु कार्यक्रम पर बढ़ता दबाव</strong></h5>
<p>ईरान का यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय रहा है। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के अनुसार, ईरान के पास 5-6 टन तक एनरिच्ड यूरेनियम है, जिसमें से करीब 120-130 किलोग्राम 60% तक शुद्ध किया जा चुका है। यदि यह स्तर 90% तक पहुंचता है, तो इसका उपयोग परमाणु हथियार बनाने में किया जा सकता है।</p>
<p>इसी वजह से अमेरिका और उसके सहयोगी देश ईरान पर अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने का दबाव बना रहे हैं। ट्रम्प का ताजा बयान इसी कूटनीतिक प्रयास का हिस्सा माना जा रहा है।</p>
<h5><strong>सैन्य गतिविधियां और वैश्विक चिंता</strong></h5>
<p>अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने पुष्टि की है कि मिडिल ईस्ट में उसकी सेना हाई अलर्ट पर है। क्षेत्र में 12 युद्धपोत, 100 से अधिक विमान और हजारों सैनिक तैनात किए गए हैं। वहीं G-7 देशों ने भी इस संघर्ष के वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चिंता जताई है और शांति प्रक्रिया को तेज करने की अपील की है।</p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच समझौता होता है, तो यह मिडिल ईस्ट में लंबे समय से चले आ रहे तनाव को कम करने की दिशा में बड़ा कदम होगा। हालांकि जमीनी हालात और विभिन्न पक्षों की प्रतिक्रियाएं यह संकेत देती हैं कि स्थायी शांति की राह अभी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/trumps-claim-iran-ready-to-hand-over-uranium-steps/article-51409</link>
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                <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 09:58:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
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