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                <title>InternationalNews - दैनिक जागरण</title>
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                <title>अली खामेनेई की अंतिम यात्रा शुरू, 14 महीने की पोती का छोटा ताबूत भी साथ रखा गया</title>
                                    <description><![CDATA[तेहरान में लाखों लोगों ने दी श्रद्धांजलि, छह दिन तक चलेंगे अंतिम संस्कार कार्यक्रम; ईरान और इराक के कई शहरों से होकर गुजरेगी अंतिम यात्रा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/ali-khameneis-funeral-procession-begins-small-coffin-of-14-month-old-granddaughter/article-57834"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/ali-khamenei-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई को अंतिम विदाई देने का सिलसिला शनिवार से तेहरान में आधिकारिक रूप से शुरू हो गया। राजधानी के इमाम खुमैनी ग्रैंड मुसल्ला परिसर में आयोजित श्रद्धांजलि समारोह में सुबह से ही हजारों लोग पहुंचने लगे। पूरे परिसर में शोक का माहौल दिखाई दिया और बड़ी संख्या में लोग अपने हाथों में ईरानी झंडे, धार्मिक प्रतीक और खामेनेई की तस्वीरें लेकर मौजूद रहे। समारोह के दौरान खामेनेई का ताबूत ईरान के राष्ट्रीय ध्वज में लिपटा हुआ मुख्य हॉल में लाया गया, जिसके ऊपर उनकी पहचान मानी जाने वाली काली पगड़ी भी रखी गई थी। इसी दौरान एक भावुक दृश्य तब सामने आया जब उनके परिवार के अन्य दिवंगत सदस्यों के ताबूत भी साथ रखे गए। इनमें 14 महीने की उनकी पोती जाहरा मोहम्मदी गोलपायेगानी का छोटा ताबूत भी शामिल था। इस दृश्य ने वहां मौजूद लोगों को भावुक कर दिया और कई लोग रोते हुए नजर आए। बताया जा रहा है कि फरवरी के अंत में हुए हमलों में खामेनेई के साथ परिवार के कुछ अन्य सदस्य भी मारे गए थे। अंतिम संस्कार के पहले दिन श्रद्धांजलि देने वालों की लंबी कतारें देखने को मिलीं और पूरे परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ईरानी प्रशासन के अनुसार खामेनेई के पार्थिव शरीर को शुक्रवार को तेहरान लाया गया था। इसके बाद छह दिनों तक सार्वजनिक श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई गई है ताकि देशभर से लोग अंतिम दर्शन कर सकें। राजधानी में तीन दिनों तक पार्थिव शरीर आम लोगों के लिए रखा जाएगा। प्रशासन का अनुमान है कि केवल तेहरान में ही अगले तीन दिनों के दौरान डेढ़ से दो करोड़ लोगों के शामिल होने की संभावना है। इसी को देखते हुए परिवहन, स्वास्थ्य सेवाओं और सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह अलर्ट मोड पर रखा गया है। शहर की प्रमुख सड़कों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है, जबकि सेना और सुरक्षा एजेंसियां भी लगातार निगरानी कर रही हैं। समारोह स्थल तक पहुंचने वाले सभी रास्तों पर कई स्तर की सुरक्षा जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि इतनी बड़ी भीड़ को देखते हुए यातायात व्यवस्था में भी अस्थायी बदलाव किए गए हैं। लोगों की सुविधा के लिए अतिरिक्त बसें और अन्य सार्वजनिक परिवहन सेवाएं चलाई गई हैं ताकि दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी न हो।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">श्रद्धांजलि समारोह में देश के कई वरिष्ठ राजनीतिक और धार्मिक नेता भी मौजूद रहे। सरकारी अधिकारियों के अलावा न्यायपालिका, संसद और विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भी खामेनेई को अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित की। समारोह के दौरान कई धार्मिक अनुष्ठान किए गए और विशेष प्रार्थनाएं भी आयोजित हुईं। बड़ी संख्या में महिलाएं, बुजुर्ग और युवा भी श्रद्धांजलि देने पहुंचे। कई लोग अपने परिवार के साथ अंतिम दर्शन के लिए घंटों तक कतार में खड़े रहे। पूरे कार्यक्रम के दौरान स्वयंसेवक भी लगातार लोगों की मदद करते दिखाई दिए। चिकित्सा सहायता केंद्र, पीने के पानी और अन्य जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था भी प्रशासन की ओर से की गई। अधिकारियों ने लोगों से अपील की कि वे धैर्य बनाए रखें और सुरक्षा एजेंसियों के निर्देशों का पालन करें ताकि कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अधिकारियों के मुताबिक अंतिम यात्रा केवल तेहरान तक सीमित नहीं रहेगी। तय कार्यक्रम के अनुसार सोमवार को राजधानी की सड़कों पर विशाल अंतिम यात्रा निकाली जाएगी। इसके बाद मंगलवार को पार्थिव शरीर को ईरान के धार्मिक महत्व वाले शहर क़ोम ले जाया जाएगा, जहां विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। इसके अगले दिन अंतिम यात्रा पड़ोसी देश इराक के कुछ पवित्र शहरों तक पहुंचेगी। वहां भी श्रद्धांजलि सभाएं आयोजित की जाएंगी और स्थानीय धार्मिक नेताओं की मौजूदगी में विशेष कार्यक्रम होंगे। अंतिम चरण में गुरुवार को खामेनेई के पैतृक शहर मशहद में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। प्रशासन का कहना है कि इस पूरे कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था लगातार कड़ी रहेगी और हर चरण की निगरानी की जाएगी। लाखों लोगों के शामिल होने की संभावना को देखते हुए यात्रा मार्ग पर भी विशेष इंतजाम किए गए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">खामेनेई की अंतिम यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि ईरान की आंतरिक राजनीति और क्षेत्रीय प्रभाव के लिहाज से भी काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। मध्य पूर्व के मौजूदा हालात और हाल के घटनाक्रम के बीच इस अंतिम संस्कार पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है। कई देशों के प्रतिनिधिमंडल भी ईरान पहुंच चुके हैं और विभिन्न स्तरों पर श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं शहर के संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं और ड्रोन के जरिए भी निगरानी की जा रही है। अस्पतालों और आपातकालीन सेवाओं को भी अलर्ट पर रखा गया है। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 12:52:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>भारत दौरे पर जापान की पीएम सानाए ताकाइची, राष्ट्रपति भवन में भव्य स्वागत</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सानाए ताकाइची आज व्यापार, निवेश, रक्षा, सेमीकंडक्टर, सप्लाई चेन और इंडो-पैसिफिक सहयोग पर चर्चा करेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/grand-welcome-at-rashtrapati-bhavan-for-japanese-pm-sanae-takaichi/article-57629"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/sanae-takaichi-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची के तीन दिवसीय भारत दौरे की औपचारिक शुरुआत गुरुवार को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में हुई, जहां उनका पूरे सम्मान के साथ स्वागत किया गया। राष्ट्रपति भवन में आयोजित विशेष समारोह में उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मौजूद रहे और उन्होंने जापान की प्रधानमंत्री का स्वागत किया। प्रधानमंत्री बनने के बाद सानाए ताकाइची की यह पहली भारत यात्रा है, जिसे भारत और जापान के बीच रणनीतिक, आर्थिक और कूटनीतिक संबंधों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>
<p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/_japan-pm.jpg" alt="_Japan PM" width="1366" height="900"></img></p>
<p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">अपने दौरे के दूसरे दिन सानाए ताकाइची प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगी। दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय वार्ता में निवेश, व्यापार, रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, सेमीकंडक्टर निर्माण, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति, ऑटोमोबाइल उद्योग और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग जैसे कई अहम विषयों पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है। दोनों देशों के बीच विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को और मजबूत बनाने के लिए कई नए समझौतों पर भी बातचीत हो सकती है।= इस दौरे का सबसे महत्वपूर्ण एजेंडा आर्थिक सहयोग को नई गति देना माना जा रहा है। भारत और जापान के बीच व्यापार और निवेश लगातार बढ़ रहा है और दोनों देश अब इसे अगले स्तर तक ले जाने की तैयारी में हैं। इसी उद्देश्य से जापान के 150 से अधिक उद्योगपति भारत-जापान बिजनेस फोरम में हिस्सा लेंगे। इस मंच पर दोनों देशों के उद्योग जगत के प्रतिनिधि नए निवेश, औद्योगिक सहयोग और तकनीकी साझेदारी पर चर्चा करेंगे। माना जा रहा है कि इस बैठक के बाद कई नई निवेश परियोजनाओं का रास्ता साफ हो सकता है। इस यात्रा के दौरान सबसे अधिक चर्चा भारत और जापान के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार की संभावित व्यवस्था को लेकर हो रही है। दोनों देश अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए भारतीय रुपए और जापानी येन में सीधे भुगतान की व्यवस्था विकसित करने पर काम कर रहे हैं। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो पहली बार दोनों देशों के बीच व्यापार का भुगतान बिना अमेरिकी डॉलर के सीधे स्थानीय मुद्राओं में किया जा सकेगा। इससे विदेशी मुद्रा विनिमय की लागत कम होगी और व्यापारिक लेनदेन पहले की तुलना में अधिक तेज और आसान हो जाएगा। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत जापानी कंपनियां भारत के बैंकों में विशेष खाते खोल सकेंगी और उन्हीं के माध्यम से रुपए और येन में लेनदेन कर पाएंगी। इससे अंतरराष्ट्रीय भुगतान के लिए तीसरे देश की बैंकिंग प्रणाली या अमेरिकी डॉलर की आवश्यकता नहीं होगी।</p>
<p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/japan-pm-india-visit.jpg" alt="JAPAN PM INDIA VISIT" width="1366" height="1002"></img></p>
<p style="text-align:justify;">भारत और जापान के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार की दिशा में पहले भी सहमति बन चुकी है। वर्ष 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जापान यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अगले दस वर्षों के साझा विजन दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए थे। उसी दौरान भुगतान प्रणाली को मजबूत करने और स्थानीय मुद्राओं के उपयोग को बढ़ावा देने पर भी सहमति बनी थी। अब दोनों देश उस योजना को व्यावहारिक रूप देने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। आर्थिक मोर्चे पर जापान भारत के सबसे महत्वपूर्ण निवेशकों में शामिल है। वित्त वर्ष 2025-26 में दोनों देशों के बीच व्यापार 27.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इसी अवधि में जापान ने भारत में अरबों डॉलर का निवेश किया है और अगले दस वर्षों में 61 अरब डॉलर से अधिक निवेश का लक्ष्य तय किया गया है। यह निवेश मुख्य रूप से सेमीकंडक्टर, स्वच्छ ऊर्जा, हाई-टेक रक्षा उद्योग, डिजिटल तकनीक और विनिर्माण क्षेत्र में किया जाएगा। वर्तमान में भारत में लगभग 1400 जापानी कंपनियां सक्रिय हैं। इनमें से बड़ी संख्या विनिर्माण क्षेत्र से जुड़ी हुई है। मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना दोनों देशों के सहयोग का सबसे बड़ा उदाहरण मानी जाती है, जिसमें जापानी शिनकानसेन तकनीक और वित्तीय सहयोग का उपयोग किया जा रहा है। इसके अलावा ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, डिजिटल टेक्नोलॉजी और ग्रीन एनर्जी के क्षेत्रों में भी जापानी कंपनियां भारत में तेजी से निवेश बढ़ा रही हैं। दोनों देश क्वाड समूह के सदस्य हैं और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता तथा नियम आधारित व्यवस्था को बनाए रखने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, संयुक्त सैन्य अभ्यास और महत्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने जैसे विषय भी इस यात्रा के दौरान प्रमुख एजेंडे में शामिल रहेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 12:16:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>ईरान युद्ध खर्च पर ट्रम्प ने मांगे ₹8.3 लाख करोड़, संसद में बढ़ा विरोध</title>
                                    <description><![CDATA[व्हाइट हाउस ने अतिरिक्त रक्षा फंडिंग की मांग को सैन्य तैयारी और हथियार भंडार से जोड़ा, जबकि अमेरिकी संसद के दोनों सदनों में सैन्य कार्रवाई को लेकर सवाल तेज हो गए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/trump-demands-%E2%82%B983-lakh-crore-on-iran-war-expenditure-opposition/article-56869"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/donald-trump-(5).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प एक बार फिर अपनी विदेश नीति और रक्षा रणनीति को लेकर घरेलू राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गए हैं। ट्रम्प प्रशासन ने अमेरिकी संसद से 87.6 अरब डॉलर यानी करीब 8.3 लाख करोड़ रुपए की अतिरिक्त फंडिंग मंजूर करने की मांग की है। सरकार का कहना है कि यह रकम ईरान के खिलाफ हालिया सैन्य अभियानों, सेना की तैयारियों और हथियारों के भंडार को दोबारा मजबूत करने के लिए जरूरी है। हालांकि संसद में इस प्रस्ताव को लेकर विरोध बढ़ता दिखाई दे रहा है और कई सांसद इसे सैन्य खर्च बढ़ाने की दिशा में एक विवादित कदम मान रहे हैं। व्हाइट हाउस की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक यह अतिरिक्त फंडिंग पहले से स्वीकृत रक्षा बजट का हिस्सा नहीं है। पिछले साल अमेरिकी कांग्रेस करीब 1 ट्रिलियन डॉलर के रक्षा बजट को मंजूरी दे चुकी थी, जबकि अगले वित्तीय वर्ष के लिए लगभग 1.5 ट्रिलियन डॉलर की नई मांग पहले से ही रखी जा चुकी है। इसके बावजूद ट्रम्प प्रशासन का कहना है कि ईरान के साथ बढ़े तनाव और सैन्य अभियानों के कारण अतिरिक्त संसाधनों की आवश्यकता पैदा हुई है। अधिकारियों के अनुसार इस राशि का इस्तेमाल सैन्य ऑपरेशनों की लागत पूरी करने, आधुनिक हथियारों की खरीद, गोला-बारूद के भंडार को फिर से भरने और कुछ गोपनीय रक्षा कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने में किया जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बताया जा रहा है कि हाल के महीनों में मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य गतिविधियां बढ़ी हैं। ईरान और उसके समर्थक समूहों के साथ तनाव के बीच अमेरिका ने कई रणनीतिक कदम उठाए हैं। इन अभियानों में बड़ी मात्रा में मिसाइलों, रक्षा प्रणालियों और अन्य सैन्य संसाधनों का इस्तेमाल हुआ है। प्रशासन का तर्क है कि यदि समय रहते अतिरिक्त धन उपलब्ध नहीं कराया गया तो सेना की परिचालन क्षमता और भविष्य की तैयारियों पर असर पड़ सकता है। रक्षा विभाग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि कई महत्वपूर्ण सैन्य भंडार अपेक्षा से अधिक तेजी से खर्च हुए हैं, जिनकी भरपाई जरूरी है। हालांकि संसद में इस मांग को लेकर माहौल पूरी तरह सरकार के पक्ष में नहीं दिख रहा। मंगलवार को अमेरिकी सीनेट ने एक प्रस्ताव पारित कर ट्रम्प प्रशासन से ईरान के खिलाफ आगे की सैन्य कार्रवाई रोकने का आग्रह किया। इससे पहले प्रतिनिधि सभा यानी लोअर हाउस भी इसी तरह का प्रस्ताव पारित कर चुकी है। इन प्रस्तावों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बिना स्पष्ट संसदीय मंजूरी के किसी बड़े सैन्य संघर्ष में अमेरिका की भागीदारी न बढ़े। दिलचस्प बात यह रही कि कुछ रिपब्लिकन सांसदों ने भी अपनी ही पार्टी के राष्ट्रपति के खिलाफ जाकर डेमोक्रेट सांसदों का समर्थन किया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यह मामला सिर्फ रक्षा बजट तक सीमित नहीं है बल्कि राष्ट्रपति और संसद के बीच अधिकारों की बहस भी इससे जुड़ी हुई है। अमेरिका में युद्ध और सैन्य कार्रवाई से जुड़े फैसलों पर लंबे समय से विवाद रहा है। कई सांसदों का तर्क है कि बड़े सैन्य अभियानों से पहले कांग्रेस की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। दूसरी ओर ट्रम्प समर्थकों का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में राष्ट्रपति को तेजी से फैसले लेने की जरूरत होती है और ऐसे समय में राजनीतिक मतभेदों को प्राथमिकता नहीं दी जानी चाहिए। आर्थिक दृष्टि से भी यह प्रस्ताव चर्चा का विषय बन गया है। अमेरिका पहले से ही बड़े बजट घाटे और बढ़ते सरकारी कर्ज की चुनौती का सामना कर रहा है। ऐसे में अतिरिक्त 87.6 अरब डॉलर की मांग को लेकर वित्तीय विशेषज्ञों ने भी सवाल उठाए हैं। रक्षा खर्च लगातार बढ़ने से अन्य घरेलू योजनाओं पर दबाव पड़ सकता है। वहीं समर्थकों का तर्क है कि राष्ट्रीय सुरक्षा पर खर्च को कम नहीं किया जा सकता और वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए सेना को पर्याप्त संसाधन देना जरूरी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Jun 2026 11:42:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>अमेरिका-ईरान समझौते के संकेत तेज, होर्मुज जलडमरूमध्य पर बनी सहमति की चर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा- समझौता पहले से ज्यादा करीब, वहीं इजराइल पर बातचीत पटरी से उतारने की कोशिश का आरोप]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/signs-of-us-iran-agreement-intensify-discussion-of-consensus-on-strait/article-55824"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/us-iran-deal.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रही तनातनी के बीच एक संभावित समझौते को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि दोनों देशों के बीच एक प्रस्तावित समझौता पहले की तुलना में कहीं अधिक करीब पहुंच गया है। हालांकि उन्होंने मीडिया और राजनीतिक विश्लेषकों से अपील की है कि अंतिम रूप दिए जाने से पहले समझौते की शर्तों को लेकर अटकलें लगाने से बचें। अराघची का कहना है कि जब भी किसी दस्तावेज पर अंतिम सहमति बनेगी, तब उसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक की जाएगी। उनके बयान ने ऐसे समय में ध्यान खींचा है जब मध्य पूर्व पहले से ही युद्ध, समुद्री सुरक्षा और परमाणु कार्यक्रमों को लेकर बढ़ते तनाव का सामना कर रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ईरानी मीडिया में सामने आई रिपोर्टों के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच जिस प्रारूप समझौते पर चर्चा चल रही है, उसमें कई महत्वपूर्ण बिंदु शामिल हैं। इनमें होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन व्यवस्था, समुद्री मार्गों की सुरक्षा और परमाणु कार्यक्रम को लेकर आगे की बातचीत का ढांचा शामिल बताया जा रहा है। हालांकि ईरान ने साफ किया है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना नियंत्रण छोड़ने को तैयार नहीं है। यह क्षेत्र दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। इसलिए इस जलमार्ग से जुड़ी किसी भी खबर का असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों और वैश्विक राजनीति दोनों पर पड़ता है। अराघची ने अपने बयान में इजराइल पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ ताकतें अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते को पटरी से उतारने की कोशिश कर रही हैं। उनका इशारा स्पष्ट रूप से इजराइल की ओर माना जा रहा है। ईरान लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि इजराइल क्षेत्रीय तनाव को बनाए रखना चाहता है और किसी भी ऐसे समझौते का विरोध करता है जिससे तेहरान और वाशिंगटन के संबंधों में सुधार हो सकता हो। दूसरी तरफ इजराइल का कहना है कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम क्षेत्र और दुनिया की सुरक्षा के लिए खतरा है तथा उसे परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना जरूरी है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसी बीच इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी बयान दिया है कि वह और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के मुद्दे पर पूरी तरह एकमत हैं। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका की ओर से संभावित समझौते के संकेत दिए जा रहे हैं। इससे यह साफ हो गया है कि कूटनीतिक बातचीत के समानांतर सुरक्षा और रणनीतिक चिंताएं भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कोई समझौता होता भी है तो उसमें परमाणु गतिविधियों पर निगरानी और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े सख्त प्रावधान शामिल हो सकते हैं। इस पूरे घटनाक्रम के बीच समुद्री सुरक्षा का मुद्दा भी प्रमुख बन गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आरोप लगाया है कि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से निकल रहे भारतीय जहाजों पर ड्रोन हमले किए हैं। उनके अनुसार ओमान तट के पास इस सप्ताह तीन जहाज हमले की चपेट में आए थे। इनमें से एक घटना में भारतीय चालक दल के तीन नाविकों की मौत हो गई। इस आरोप के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है। हालांकि ईरान की ओर से इन आरोपों पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े देशों की नजर अब इस पूरे मामले पर टिकी हुई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ईरान की सरकारी मीडिया ने दावा किया है कि प्रस्तावित समझौते के तहत अमेरिका और ईरान के बीच अगले 60 दिनों तक परमाणु समझौते को लेकर गहन बातचीत की जा सकती है। रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि यह मसौदा केवल परमाणु मुद्दे तक सीमित नहीं है बल्कि क्षेत्रीय संघर्षों को कम करने और कई मोर्चों पर तनाव घटाने के लिए एक व्यापक ढांचा तैयार करने का प्रयास है। लेबनान सहित कई क्षेत्रों में चल रहे संघर्षों को भी इस बातचीत से जोड़कर देखा जा रहा है। यदि अमेरिका और ईरान किसी साझा समझ पर पहुंचते हैं तो इसका असर केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं रहेगा। इसका प्रभाव पूरे मध्य पूर्व, वैश्विक ऊर्जा बाजार, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर पड़ सकता है। वहीं यदि बातचीत किसी कारण से विफल होती है तो क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका भी बनी रहेगी। फिलहाल दोनों पक्ष सार्वजनिक रूप से सतर्क रुख अपनाए हुए हैं, लेकिन लगातार आ रहे बयानों से यह संकेत जरूर मिल रहा है कि पर्दे के पीछे महत्वपूर्ण स्तर की बातचीत जारी है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि प्रस्तावित समझौता वास्तव में अंतिम रूप ले पाता है या नहीं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 14:11:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ईरान का अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी हमला, मध्य पूर्व में बढ़ा तनाव</title>
                                    <description><![CDATA[बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को बनाया निशाना, अमेरिकी एयरस्ट्राइक के बाद ईरान की कार्रवाई से क्षेत्र में हालात और गंभीर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/irans-retaliatory-attack-on-american-bases-increases-tension-in-the/article-55550"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/iran-us-conflict-(3).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव खतरनाक स्तर पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। ईरान ने बुधवार को बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए। ईरान की ओर से दावा किया गया कि अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाते हुए कुल 21 हमले किए गए हैं। हालांकि अमेरिकी अधिकारियों ने इस दावे को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया है और कहा है कि ईरान नुकसान को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा है। फिर भी इस घटना ने पूरे क्षेत्र में सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें अब मध्य पूर्व की बदलती स्थिति पर टिक गई हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी आईआरजीसी ने बयान जारी कर कहा कि यह कार्रवाई अमेरिकी सैन्य हमलों के जवाब में की गई है। ईरानी पक्ष का कहना है कि हाल के दिनों में अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट के पास उसके कई रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया था। इनमें एयर डिफेंस सिस्टम, निगरानी रडार और कमांड एंड कंट्रोल सेंटर शामिल थे। ईरान का आरोप है कि अमेरिका लगातार उसके सैन्य ढांचे को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है और ताजा हमला उसी रणनीति का हिस्सा था। इसके जवाब में ईरान ने क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">तनाव की शुरुआत उस घटना के बाद और बढ़ गई जब होर्मुज स्ट्रेट के पास अमेरिकी सेना का एक एएच-64 अपाचे हेलिकॉप्टर समुद्र में गिर गया था। घटना के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान पर गंभीर आरोप लगाए थे। ट्रम्प ने कहा था कि हेलिकॉप्टर को ईरान समर्थित ताकतों ने निशाना बनाया और अमेरिका इस कार्रवाई का जवाब जरूर देगा। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा था कि जिम्मेदार लोगों को इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। हालांकि ईरान ने हेलिकॉप्टर गिराने में किसी भी तरह की भूमिका से इनकार किया है और इस घटना की जिम्मेदारी नहीं ली है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अमेरिका ने हेलिकॉप्टर हादसे के कुछ समय बाद ही जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए थे। अमेरिकी सेना का कहना था कि इन हमलों का उद्देश्य संभावित खतरों को समाप्त करना और क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था। इसके बाद से दोनों देशों के बीच बयानबाजी लगातार तेज होती चली गई। अब ईरान की ओर से अमेरिकी ठिकानों पर हमला किए जाने के बाद स्थिति और अधिक संवेदनशील हो गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस बीच अमेरिकी राजनीति में भी ईरान मुद्दा प्रमुख बन गया है। हाल ही में आयोजित एक रिपब्लिकन रैली में ट्रम्प ने दावा किया था कि अमेरिका ईरान के खिलाफ रणनीतिक बढ़त बनाए हुए है। उन्होंने कहा कि अगले दो सप्ताह के भीतर अमेरिका "पूरी जीत" की घोषणा कर सकता है। ट्रम्प ने यह भी कहा था कि क्षेत्र में स्थिरता लौटने के बाद वैश्विक तेल बाजार को राहत मिलेगी और तेल की कीमतों में गिरावट देखने को मिल सकती है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव और बढ़ता है तो इसका असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों पर पड़ सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूसरी ओर इजराइल ने भी ईरान को लेकर सख्त रुख अपनाया हुआ है। इजराइली सेना प्रमुख एयाल जामिर ने हाल ही में कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो इजराइल ईरान के खिलाफ और बड़े सैन्य अभियान चलाने के लिए तैयार है। उनका कहना था कि हालिया सैन्य कार्रवाई केवल शुरुआत थी और राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता नहीं किया जाएगा। इससे संकेत मिल रहे हैं कि क्षेत्रीय शक्तियां भी इस संघर्ष पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसी दौरान अमेरिका और इजराइल के रिश्तों को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ईरान को लेकर अमेरिका और इजराइल की रणनीतियों में कुछ मतभेद सामने आए हैं। रिपोर्टों के अनुसार ट्रम्प ने इजराइली नेतृत्व को संघर्ष को और अधिक न बढ़ाने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्रीय तनाव नियंत्रण से बाहर हुआ तो इसके व्यापक भू-राजनीतिक परिणाम सामने आ सकते हैं।  बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है और क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी गई है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार घटनाक्रम पर नजर रखे हुए है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 17:28:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ट्रम्प का दावा—ईरान यूरेनियम सौंपने को तैयार, मिडिल ईस्ट में सीजफायर की ओर बढ़ते कदम</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका-ईरान बातचीत तेज, इजराइल-लेबनान में 10 दिन का युद्धविराम लागू; वैश्विक तनाव के बीच कूटनीतिक हल की उम्मीद]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/trumps-claim-iran-ready-to-hand-over-uranium-steps/article-51409"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/donaldtrump-(3).jpg" alt=""></a><br /><p>मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Donald Trump</span></span> ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि ईरान अपने एनरिच्ड यूरेनियम का भंडार अमेरिका को सौंपने के लिए तैयार है। व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच शांति समझौता अब बेहद करीब है और बातचीत “बहुत सफल” चल रही है।</p>
<p>ट्रम्प के मुताबिक, यदि यह समझौता होता है तो होर्मुज स्ट्रेट खुला रहेगा, तेल आपूर्ति सामान्य हो जाएगी और क्षेत्र में स्थिरता लौट सकती है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अगर यह डील इस्लामाबाद में साइन होती है, तो वे पाकिस्तान की यात्रा कर सकते हैं। हालांकि ईरान की सरकारी मीडिया ने इन दावों को खारिज करते हुए इसे “हवाई किले” बताया है।</p>
<h5><strong>इजराइल-लेबनान में सीजफायर लागू</strong></h5>
<p>इस बीच, <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Israel</span></span> और <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Lebanon</span></span> के बीच 10 दिन का युद्धविराम लागू हो गया है। यह सीजफायर भारतीय समयानुसार देर रात 3:30 बजे से प्रभावी हुआ। ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर बताया कि यह सहमति लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन और इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से बातचीत के बाद बनी।</p>
<p>हालांकि, युद्धविराम के कुछ ही समय बाद दक्षिणी लेबनान में गोलाबारी और सैन्य गतिविधियों की खबरें भी सामने आई हैं, जिससे स्थिति पूरी तरह स्थिर नहीं मानी जा रही।</p>
<h5><strong>परमाणु कार्यक्रम पर बढ़ता दबाव</strong></h5>
<p>ईरान का यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय रहा है। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के अनुसार, ईरान के पास 5-6 टन तक एनरिच्ड यूरेनियम है, जिसमें से करीब 120-130 किलोग्राम 60% तक शुद्ध किया जा चुका है। यदि यह स्तर 90% तक पहुंचता है, तो इसका उपयोग परमाणु हथियार बनाने में किया जा सकता है।</p>
<p>इसी वजह से अमेरिका और उसके सहयोगी देश ईरान पर अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने का दबाव बना रहे हैं। ट्रम्प का ताजा बयान इसी कूटनीतिक प्रयास का हिस्सा माना जा रहा है।</p>
<h5><strong>सैन्य गतिविधियां और वैश्विक चिंता</strong></h5>
<p>अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने पुष्टि की है कि मिडिल ईस्ट में उसकी सेना हाई अलर्ट पर है। क्षेत्र में 12 युद्धपोत, 100 से अधिक विमान और हजारों सैनिक तैनात किए गए हैं। वहीं G-7 देशों ने भी इस संघर्ष के वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चिंता जताई है और शांति प्रक्रिया को तेज करने की अपील की है।</p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच समझौता होता है, तो यह मिडिल ईस्ट में लंबे समय से चले आ रहे तनाव को कम करने की दिशा में बड़ा कदम होगा। हालांकि जमीनी हालात और विभिन्न पक्षों की प्रतिक्रियाएं यह संकेत देती हैं कि स्थायी शांति की राह अभी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/trumps-claim-iran-ready-to-hand-over-uranium-steps/article-51409</link>
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                <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 09:58:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
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