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                <title>G7Summit - दैनिक जागरण</title>
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                <title>G7 में ग्लोबल साउथ की आवाज बनेंगे पीएम मोदी</title>
                                    <description><![CDATA[फ्रांस दौरे में मैक्रों से मुलाकात, तकनीक, रक्षा और वैश्विक मुद्दों पर होगी चर्चा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/pm-modi-will-become-the-voice-of-global-south-in/article-55855"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/pm-modi.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फ्रांस और स्लोवाकिया की महत्वपूर्ण यात्रा पर रवाना हो गए हैं। इस दौरान वह फ्रांस में आयोजित होने वाले जी7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे और दुनिया के प्रमुख नेताओं के साथ कई अहम मुद्दों पर चर्चा करेंगे। यात्रा से पहले प्रधानमंत्री ने कहा कि वह जी7 सम्मेलन में ग्लोबल साउथ यानी विकासशील देशों की आकांक्षाओं, चुनौतियों और प्राथमिकताओं को मजबूती से सामने रखेंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि फ्रांस और स्लोवाकिया की यह यात्रा यूरोप के साथ भारत की बढ़ती साझेदारी को और मजबूत बनाएगी। प्रधानमंत्री का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब दुनिया कई बड़े भू-राजनीतिक और आर्थिक संकटों का सामना कर रही है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव, ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी चुनौतियां, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और तकनीकी प्रतिस्पर्धा जैसे मुद्दे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रमुखता से चर्चा में हैं। ऐसे माहौल में भारत की भूमिका लगातार बढ़ रही है और दुनिया भारत को एक जिम्मेदार तथा प्रभावशाली वैश्विक शक्ति के रूप में देख रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">फ्रांस पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। यात्रा का मुख्य फोकस तकनीक, नवाचार और रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाना रहेगा। नीस में दोनों नेता संयुक्त रूप से भारत इनोवेट्स कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगे। इस आयोजन में भारत, फ्रांस और अन्य देशों के प्रमुख स्टार्टअप, निवेशक और उद्योग जगत के प्रतिनिधि शामिल होंगे। बताया जा रहा है कि 120 से अधिक भारतीय कंपनियां और स्टार्टअप इस कार्यक्रम का हिस्सा बनेंगे। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों के बीच द्विपक्षीय शिखर वार्ता भी होगी। यह बैठक दोनों देशों के बीच हाल ही में स्थापित विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी के बाद पहली उच्चस्तरीय वार्ता मानी जा रही है। दोनों देशों के बीच रक्षा, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा और डिजिटल तकनीक जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत बनाने पर चर्चा होने की संभावना है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पेरिस में प्रधानमंत्री यूरोप के सबसे बड़े तकनीकी और स्टार्टअप आयोजन वीवाटेक सम्मेलन में भी शामिल होंगे। इस कार्यक्रम में भारत की मजबूत उपस्थिति देखने को मिलेगी। भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम और नवाचार क्षमता को दुनिया के सामने प्रदर्शित करने के लिए विशेष भारतीय मंडप भी तैयार किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारतीय तकनीकी कंपनियों और स्टार्टअप्स को वैश्विक निवेश आकर्षित करने में मदद मिल सकती है। जी7 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी की मौजूदगी को भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत जी7 का सदस्य नहीं है, लेकिन पिछले कई वर्षों से विशेष आमंत्रित देश के रूप में लगातार भाग ले रहा है। इस बार भी भारत को आमंत्रित किया गया है, जो वैश्विक स्तर पर उसकी बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। प्रधानमंत्री सम्मेलन के दौरान ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और विकासशील देशों के हितों जैसे मुद्दों को उठाने वाले हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और समुद्री मार्गों पर बढ़ते खतरे भारत के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं। हाल के महीनों में अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर तनाव बढ़ने से ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार पर असर पड़ा है। भारत जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देश के लिए यह स्थिति आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। ऐसे में जी7 सम्मेलन भारत को अपनी चिंताओं को प्रमुख वैश्विक शक्तियों के सामने रखने का अवसर देगा। भारत और फ्रांस के संबंधों की बात करें तो दोनों देशों के बीच दशकों पुराना भरोसा और रणनीतिक सहयोग रहा है। फ्रांस उन चुनिंदा देशों में शामिल है जिसने कई संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भारत का साथ दिया है। यही कारण है कि दोनों देशों के संबंध केवल व्यापार या कूटनीति तक सीमित नहीं हैं बल्कि रक्षा, विज्ञान, अंतरिक्ष और ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों तक फैले हुए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रक्षा क्षेत्र में राफेल लड़ाकू विमान, स्कॉर्पीन पनडुब्बियां और हेलीकॉप्टर इंजन जैसी परियोजनाएं दोनों देशों के मजबूत सहयोग का उदाहरण हैं। अंतरिक्ष क्षेत्र में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन और फ्रांस की अंतरिक्ष एजेंसी के बीच छह दशक से अधिक पुराना सहयोग मौजूद है। कई संयुक्त उपग्रह मिशनों और वैज्ञानिक परियोजनाओं पर दोनों देश साथ काम कर चुके हैं। परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में भी सहयोग लगातार बढ़ रहा है। स्वच्छ ऊर्जा और टिकाऊ विकास को ध्यान में रखते हुए दोनों देश नई तकनीकों पर मिलकर काम कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले वर्षों में छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर और उन्नत ऊर्जा प्रणालियों के क्षेत्र में साझेदारी और मजबूत हो सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भारत और फ्रांस के बीच संबंधों की सबसे बड़ी ताकत आपसी विश्वास है। यही विश्वास तकनीकी साझेदारी, रक्षा सहयोग और वैश्विक मंचों पर समन्वय को मजबूत बनाता है। प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा भी उसी भरोसे को और आगे बढ़ाने का प्रयास मानी जा रही है। फ्रांस और स्लोवाकिया की इस यात्रा के दौरान भारत न केवल अपने रणनीतिक हितों को आगे बढ़ाएगा बल्कि विकासशील देशों की आवाज को भी वैश्विक मंच पर मजबूती से रखेगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 17:42:00 +0530</pubDate>
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                <title>ट्रम्प का दावा—ईरान यूरेनियम सौंपने को तैयार, मिडिल ईस्ट में सीजफायर की ओर बढ़ते कदम</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका-ईरान बातचीत तेज, इजराइल-लेबनान में 10 दिन का युद्धविराम लागू; वैश्विक तनाव के बीच कूटनीतिक हल की उम्मीद]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/trumps-claim-iran-ready-to-hand-over-uranium-steps/article-51409"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/donaldtrump-(3).jpg" alt=""></a><br /><p>मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Donald Trump</span></span> ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि ईरान अपने एनरिच्ड यूरेनियम का भंडार अमेरिका को सौंपने के लिए तैयार है। व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच शांति समझौता अब बेहद करीब है और बातचीत “बहुत सफल” चल रही है।</p>
<p>ट्रम्प के मुताबिक, यदि यह समझौता होता है तो होर्मुज स्ट्रेट खुला रहेगा, तेल आपूर्ति सामान्य हो जाएगी और क्षेत्र में स्थिरता लौट सकती है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अगर यह डील इस्लामाबाद में साइन होती है, तो वे पाकिस्तान की यात्रा कर सकते हैं। हालांकि ईरान की सरकारी मीडिया ने इन दावों को खारिज करते हुए इसे “हवाई किले” बताया है।</p>
<h5><strong>इजराइल-लेबनान में सीजफायर लागू</strong></h5>
<p>इस बीच, <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Israel</span></span> और <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Lebanon</span></span> के बीच 10 दिन का युद्धविराम लागू हो गया है। यह सीजफायर भारतीय समयानुसार देर रात 3:30 बजे से प्रभावी हुआ। ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर बताया कि यह सहमति लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन और इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से बातचीत के बाद बनी।</p>
<p>हालांकि, युद्धविराम के कुछ ही समय बाद दक्षिणी लेबनान में गोलाबारी और सैन्य गतिविधियों की खबरें भी सामने आई हैं, जिससे स्थिति पूरी तरह स्थिर नहीं मानी जा रही।</p>
<h5><strong>परमाणु कार्यक्रम पर बढ़ता दबाव</strong></h5>
<p>ईरान का यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय रहा है। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के अनुसार, ईरान के पास 5-6 टन तक एनरिच्ड यूरेनियम है, जिसमें से करीब 120-130 किलोग्राम 60% तक शुद्ध किया जा चुका है। यदि यह स्तर 90% तक पहुंचता है, तो इसका उपयोग परमाणु हथियार बनाने में किया जा सकता है।</p>
<p>इसी वजह से अमेरिका और उसके सहयोगी देश ईरान पर अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने का दबाव बना रहे हैं। ट्रम्प का ताजा बयान इसी कूटनीतिक प्रयास का हिस्सा माना जा रहा है।</p>
<h5><strong>सैन्य गतिविधियां और वैश्विक चिंता</strong></h5>
<p>अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने पुष्टि की है कि मिडिल ईस्ट में उसकी सेना हाई अलर्ट पर है। क्षेत्र में 12 युद्धपोत, 100 से अधिक विमान और हजारों सैनिक तैनात किए गए हैं। वहीं G-7 देशों ने भी इस संघर्ष के वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चिंता जताई है और शांति प्रक्रिया को तेज करने की अपील की है।</p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच समझौता होता है, तो यह मिडिल ईस्ट में लंबे समय से चले आ रहे तनाव को कम करने की दिशा में बड़ा कदम होगा। हालांकि जमीनी हालात और विभिन्न पक्षों की प्रतिक्रियाएं यह संकेत देती हैं कि स्थायी शांति की राह अभी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 09:58:06 +0530</pubDate>
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