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                <title>Kerala News - दैनिक जागरण</title>
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                <title>हाथी दांत मामले में फिर चर्चा में मोहनलाल, वन विभाग को 10 दांत और 13 मूर्तियों की दी जानकारी</title>
                                    <description><![CDATA[15 साल पुराने मामले में एमनेस्टी योजना के तहत किया खुलासा, वन विभाग करेगा जांच; डीएनए परीक्षण की भी संभावना जताई गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/bollywood/6a4cb43280040/article-58093"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/mohanlal.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मलयालम फिल्म इंडस्ट्री के वरिष्ठ अभिनेता मोहनलाल एक बार फिर हाथी दांत रखने से जुड़े पुराने मामले को लेकर चर्चा में हैं। केरल वन विभाग के समक्ष अभिनेता ने सरकार की एमनेस्टी योजना के तहत 10 हाथी के दांत और हाथी दांत से बनी 13 मूर्तियों की जानकारी दी है। इस खुलासे के बाद एक बार फिर वह मामला सुर्खियों में आ गया है, जिसकी शुरुआत करीब 15 साल पहले हुई थी। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पहले अभिनेता ने केवल चार हाथी दांत होने की जानकारी दी थी, लेकिन अब उन्होंने छह और हाथी दांत के साथ कई कलाकृतियों की भी घोषणा की है। विभाग पूरे मामले की जांच कर रहा है और जरूरत पड़ने पर इन वस्तुओं का डीएनए परीक्षण भी कराया जा सकता है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही आगे की कार्रवाई को लेकर फैसला लिया जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अभिनेता ने जिन वस्तुओं की घोषणा की है, उनमें भगवान कृष्ण, भगवान राम और तिरुपति बालाजी सहित कई धार्मिक प्रतिमाएं शामिल हैं। इन सभी हाथी दांतों और मूर्तियों का कुल वजन करीब 46 किलोग्राम बताया जा रहा है। मोहनलाल का कहना है कि ये वस्तुएं उन्हें विरासत में मिली थीं या फिर उपहार के रूप में प्राप्त हुई थीं। उन्होंने इन्हें किसी अवैध व्यापार या शिकार के जरिए हासिल नहीं किया। हालांकि वन विभाग अब इस दावे की भी जांच करेगा कि इन वस्तुओं की वास्तविक उत्पत्ति क्या है और क्या इनके पास रखने की प्रक्रिया उस समय लागू नियमों के अनुरूप थी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यह मामला पहली बार वर्ष 2011 में सामने आया था। उस समय आयकर विभाग की टीम कोच्चि के थेवारा इलाके में स्थित मोहनलाल के घर पर छापेमारी के लिए पहुंची थी। अधिकारियों का उद्देश्य वित्तीय दस्तावेज और अन्य रिकॉर्ड की जांच करना था, लेकिन तलाशी के दौरान घर में हाथी दांत और उनसे बनी कई कलाकृतियां मिलीं। इसके बाद मामला वन विभाग तक पहुंचा। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत सरकार की अनुमति के बिना हाथी दांत रखना या उसका स्वामित्व रखना प्रतिबंधित है। इसी आधार पर वन विभाग ने इन वस्तुओं को जब्त किया और पेरुम्बावूर की अदालत में मामला दर्ज कराया। तभी से यह प्रकरण कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बना हुआ है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मामला सामने आने के बाद मोहनलाल ने अपनी सफाई भी दी थी। उन्होंने कहा था कि जिन हाथी दांतों की बात हो रही है, वे एक ऐसे पालतू हाथी के थे जिसकी प्राकृतिक कारणों से मृत्यु हो गई थी। अभिनेता का दावा था कि उन्होंने उन्हें केवल स्मृति के रूप में अपने पास रखा था और उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि ऐसा करना कानून के दायरे में प्रतिबंधित है। बाद में वर्ष 2015 में राज्य सरकार ने उन्हें इन हाथी दांतों की घोषणा करने की अनुमति दी और वर्ष 2016 में स्वामित्व प्रमाणपत्र भी जारी कर दिया गया। उस समय इस फैसले पर भी कई वन्यजीव संरक्षण संगठनों ने सवाल उठाए थे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसके बाद मामला अदालत तक पहुंचा और कानूनी प्रक्रिया जारी रही। मोहनलाल ने निचली अदालत के आदेश को केरल हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, जहां उन्हें कुछ समय के लिए अंतरिम राहत मिली। इस दौरान उन्होंने राज्य सरकार से मामले को वापस लेने का भी अनुरोध किया, लेकिन यह मांग स्वीकार नहीं की गई। बाद में सेवानिवृत्त वन अधिकारियों और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े लोगों की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने अभिनेता को जारी स्वामित्व प्रमाणपत्र को अवैध घोषित कर दिया। हालांकि अदालत ने उनके खिलाफ तत्काल आपराधिक मुकदमा चलाने का आदेश नहीं दिया। इसके बाद मामला फिर वन विभाग की जांच के दायरे में आ गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अब सरकार की एमनेस्टी योजना के तहत मोहनलाल द्वारा अतिरिक्त हाथी दांत और मूर्तियों की घोषणा किए जाने के बाद विभाग एक बार फिर सभी तथ्यों की जांच कर रहा है। अधिकारियों के अनुसार यदि आवश्यकता पड़ी तो हाथी दांतों और उनसे बनी मूर्तियों का डीएनए परीक्षण कराया जाएगा। इससे यह पता लगाने की कोशिश होगी कि ये वस्तुएं किस हाथी से संबंधित हैं और इनकी वास्तविक स्थिति क्या है। जांच के नतीजों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया तय की जाएगी।वन्यजीव संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि हाथी दांत से संबंधित मामलों में कानून काफी सख्त है, क्योंकि अवैध शिकार और हाथी दांत के व्यापार पर रोक लगाने के लिए देश में लंबे समय से विशेष प्रावधान लागू हैं। ऐसे मामलों में प्रत्येक वस्तु की उत्पत्ति, स्वामित्व और कानूनी दस्तावेजों की जांच जरूरी होती है। दूसरी ओर अभिनेता के समर्थकों का कहना है कि उन्होंने एमनेस्टी योजना के तहत स्वयं जानकारी देकर कानून का पालन करने की कोशिश की है और जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बालीवुड</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 14:48:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अभिनेता सलीम कुमार का निधन, मलयालम सिनेमा में शोक की लहर</title>
                                    <description><![CDATA[56 वर्ष की उम्र में कार्डियक अरेस्ट से ली अंतिम सांस, तीन दशक लंबे करियर में 300 से अधिक फिल्मों में निभाए यादगार किरदार]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/bollywood/national-award-winning-actor-salim-kumar-passes-away-wave-of/article-55213"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/salim-kumar.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कोच्चि। मलयालम सिनेमा के लोकप्रिय अभिनेता और राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता सलीम कुमार का शनिवार रात कार्डियक अरेस्ट के कारण निधन हो गया। 56 वर्षीय अभिनेता पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे और उन्हें कोच्चि के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर सामने आते ही फिल्म जगत, राजनीतिक क्षेत्र और उनके प्रशंसकों के बीच शोक की लहर दौड़ गई। मलयालम फिल्म इंडस्ट्री ने एक ऐसे कलाकार को खो दिया, जिसने अपने अभिनय से तीन दशकों तक दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई। रविवार सुबह उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए पारावुर टाउन हॉल में रखा गया, जहां बड़ी संख्या में लोग उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे। फिल्म जगत से जुड़े कलाकारों, सामाजिक संगठनों और राजनीतिक नेताओं ने भी उन्हें अंतिम विदाई दी। सलीम कुमार के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई राष्ट्रीय और क्षेत्रीय नेताओं ने दुख व्यक्त किया। केरल सरकार ने भी उनके योगदान को याद करते हुए अंतिम संस्कार से जुड़े खर्च वहन करने का निर्णय लिया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सलीम कुमार का जन्म केरल के एर्नाकुलम जिले के उत्तरी परवूर क्षेत्र में हुआ था। साधारण परिवार से आने वाले सलीम ने अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर मनोरंजन जगत में पहचान बनाई। अभिनय के शुरुआती दिनों में उन्होंने मंच और टेलीविजन कार्यक्रमों में काम किया। उनकी कॉमिक टाइमिंग और सहज अभिनय शैली ने जल्द ही उन्हें दर्शकों के बीच लोकप्रिय बना दिया। बाद में यही लोकप्रियता उन्हें मलयालम सिनेमा तक ले गई। उन्होंने 1997 में रिलीज हुई फिल्म ‘इष्टमनु नूरु वट्टम’ से फिल्मी करियर की शुरुआत की थी। शुरुआत में उन्हें हास्य भूमिकाएं मिलीं, लेकिन उन्होंने हर किरदार में अपनी अलग छाप छोड़ी। जल्द ही वह मलयालम फिल्मों के सबसे भरोसेमंद कॉमेडी कलाकारों में गिने जाने लगे। उनकी संवाद अदायगी, चेहरे के भाव और सटीक कॉमिक टाइमिंग दर्शकों को खूब पसंद आती थी। हालांकि समय के साथ उन्होंने खुद को केवल हास्य अभिनेता तक सीमित नहीं रखा और गंभीर तथा भावनात्मक किरदारों में भी अपनी प्रतिभा साबित की।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सलीम कुमार के करियर का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ वर्ष 2010 में आया, जब उन्होंने फिल्म ‘आदामिन्टे मकन अबू’ में मुख्य भूमिका निभाई। इस फिल्म में उनके अभिनय को राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया और उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। यही नहीं, इस भूमिका के लिए उन्हें केरल राज्य फिल्म पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। यह उपलब्धि उनके करियर की सबसे बड़ी सफलताओं में गिनी जाती है। फिल्म में उन्होंने जिस संवेदनशीलता और सादगी के साथ किरदार निभाया, उसने दर्शकों और समीक्षकों दोनों को प्रभावित किया। अपने लंबे करियर में सलीम कुमार ने 300 से अधिक फिल्मों में काम किया। उन्होंने मुख्य रूप से मलयालम फिल्मों में अभिनय किया, लेकिन तमिल और ओडिया फिल्मों में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। ‘मीसा माधवन’, ‘मायावी’, ‘पुलिवाल कल्याणम’, ‘अचनुरंगथा वीडु’ और कई अन्य फिल्मों में उनके अभिनय को खूब सराहना मिली। अलग-अलग तरह के किरदार निभाने की क्षमता ने उन्हें इंडस्ट्री का बहुमुखी कलाकार बना दिया था।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सिर्फ फिल्मों तक ही नहीं, सलीम कुमार ने टेलीविजन और डबिंग की दुनिया में भी अपनी पहचान बनाई। उन्होंने कई फिल्मों में बतौर डबिंग आर्टिस्ट अपनी आवाज दी। कुछ फिल्मों में उन्होंने नैरेटर की भूमिका निभाई, जबकि कई अनोखे किरदारों को भी अपनी आवाज से जीवंत बनाया। अभिनय के साथ-साथ लेखन और रचनात्मक कार्यों में भी उनकी रुचि थी, जिसके कारण वे हमेशा कुछ नया करने की कोशिश करते रहे। फिल्म इंडस्ट्री के लोगों का कहना है कि सलीम कुमार सिर्फ एक अभिनेता नहीं थे, बल्कि बेहद सरल और मिलनसार इंसान भी थे। नए कलाकारों को प्रोत्साहित करना और उनके साथ सहजता से काम करना उनकी विशेषता मानी जाती थी। यही वजह है कि उनके साथ काम करने वाले कलाकार उन्हें सिर्फ सहकर्मी नहीं, बल्कि एक मार्गदर्शक के रूप में भी याद कर रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">परिवार की बात करें तो उनके पीछे पत्नी सुनीता और दो बेटे हैं। उनके बड़े बेटे चंदू सलीम कुमार भी अभिनय क्षेत्र से जुड़े हुए हैं और हाल के वर्षों में फिल्मों में नजर आ चुके हैं। परिवार के लिए यह बेहद कठिन समय माना जा रहा है, वहीं उनके प्रशंसक सोशल मीडिया पर लगातार श्रद्धांजलि संदेश साझा कर रहे हैं। सलीम कुमार का जाना मलयालम सिनेमा के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है। उन्होंने अपनी मेहनत, प्रतिभा और बहुआयामी अभिनय से जो पहचान बनाई, वह आने वाले वर्षों तक याद की जाएगी। उनके किरदार, संवाद और फिल्मों में निभाई गई भूमिकाएं हमेशा दर्शकों के बीच जीवित रहेंगी। भारतीय सिनेमा ने एक ऐसे कलाकार को खो दिया है जिसने हंसी, भावनाओं और संवेदनशील अभिनय के जरिए करोड़ों लोगों के दिलों में अपनी स्थायी जगह बनाई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बालीवुड</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 17:37:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>केरल में बना देश का पहला AI मंत्रालय, जानें कैसे काम करेगी यह मिनिस्ट्री</title>
                                    <description><![CDATA[केरल देश का पहला राज्य बना जहां AI के लिए अलग मंत्रालय बनाया गया। पी. के. कुन्हालीकुट्टी को AI विभाग की जिम्मेदारी दी गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/countrys-first-ai-ministry-formed-in-kerala-know-how-this/article-53962"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/kerala-ai-minister-ai-ministry.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भारत में पहली बार किसी राज्य सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">AI) <span lang="hi" xml:lang="hi">के लिए एक अलग मंत्रालय का गठन किया है। यह कदम केंद्रीय सरकार की बजाय केरल सरकार ने उठाया है। नई सरकार में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के वरिष्ठ नेता पी. के. कुन्हालीकुट्टी को </span>AI <span lang="hi" xml:lang="hi">विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। इस तरह केरल देश का पहला राज्य बन गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां </span>AI <span lang="hi" xml:lang="hi">के लिए न केवल एक मंत्रालय बल्कि एक मंत्री भी बनाया गया है। यह निर्णय तकनीकी दृष्टिकोण से नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि आने वाले समय में प्रशासनिक और आर्थिक तैयारी के रूप में देखा जा रहा है। सरकार का मानना है कि </span>AI <span lang="hi" xml:lang="hi">अब सिर्फ मोबाइल ऐप या चैटबॉट तक सीमित नहीं रहेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वास्थ्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ट्रैफिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकारी सेवाओं और रोजगार पर भी इसका व्यापक प्रभाव पड़ेगा।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सरकारी सूत्रों के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, AI <span lang="hi" xml:lang="hi">मंत्रालय का काम विभिन्न विभागों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग को एक नीति के तहत लाना होगा। पहले टेक्नोलॉजी से जुड़े फैसले अलग-अलग विभाग अपने तरीके से लेते थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन अब </span>AI <span lang="hi" xml:lang="hi">से संबंधित कार्यों के लिए एक केंद्रीकृत व्यवस्था बनाई जाएगी। खबर है कि अस्पतालों में बीमारियों की जल्दी पहचान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ट्रैफिक सिस्टम को स्मार्ट बनाने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकारी शिकायतों के निपटारे और ऑनलाइन सेवाओं को तेज करने में </span>AI <span lang="hi" xml:lang="hi">का उपयोग बढ़ाने पर ध्यान दिया जाएगा। राज्य सरकार इस दिशा में रिसर्च और टेक्नोलॉजी कंपनियों के साथ भी सहयोग कर सकती है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">केरल हमेशा से शिक्षा और डिजिटल साक्षरता में अग्रणी रहा है। अब </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">AI <span lang="hi" xml:lang="hi">मंत्रालय की स्थापना के बाद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राज्य स्टार्टअप</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रिसर्च सेंटर और निवेश आकर्षित करने का प्रयास करेगा। सूत्रों के मुताबिक</span>, AI <span lang="hi" xml:lang="hi">आधारित उद्योग आने वाले वर्षों में एक बड़ा रोजगार क्षेत्र बन सकती है। इसीलिए सरकार कॉलेजों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्कूलों और प्रोफेशनल संस्थानों में </span>AI <span lang="hi" xml:lang="hi">और डिजिटल स्किल्स से जुड़े ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरु करने की योजना बना रही है। ऐसा माना जा रहा है कि पारंपरिक नौकरियों में बदलाव के खतरे को देखते हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकार नए तकनीक के मुताबिक लोगों को तैयार करना चाहती है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;"> </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">केरल के इस कदम से पड़ोसी राज्य तमिलनाडु पर भी प्रभाव पड़ा है। चुनावी प्रचार के दौरान टीवीके प्रमुख थलपति विजय ने भी अलग </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">AI <span lang="hi" xml:lang="hi">मंत्रालय या </span>AI <span lang="hi" xml:lang="hi">गवर्नेंस सिस्टम बनाने का वादा किया था। राजनीतिक हलकों में चर्चा चल रही है कि तमिलनाडु सरकार भी जल्द इस दिशा में कोई महत्वपूर्ण निर्णय ले सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में अन्य राज्य भी </span>AI <span lang="hi" xml:lang="hi">को लेकर अपनी नीतियाँ बना सकते हैं। अब </span>AI <span lang="hi" xml:lang="hi">को केवल टेक्नोलॉजी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि प्रशासन और अर्थव्यवस्था का नया इंजन माना जा रहा है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अगर हम दुनिया के दूसरे देशों पर नजर डालें तो संयुक्त अरब अमीरात ने 2017 में ही </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">AI <span lang="hi" xml:lang="hi">मंत्री नियुक्त कर लिया था। </span>UAE <span lang="hi" xml:lang="hi">आज स्मार्ट सिटी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऑटोमेशन और </span>AI <span lang="hi" xml:lang="hi">रिसर्च में भारी निवेश कर रहा है। वहीं सऊदी अरब और सिंगापुर भी </span>AI <span lang="hi" xml:lang="hi">नीति और सुरक्षा ढांचे पर तेजी से काम कर रहे हैं। ऐसे में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">केरल का यह कदम भारत में </span>AI <span lang="hi" xml:lang="hi">गवर्नेंस की नई शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 May 2026 13:37:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>केरल में वीडी सतीशन ने ली मुख्यमंत्री पद की शपथ, राहुल, प्रियंका और खरगे समेत कई बड़े कांग्रेस नेता हुए शामिल</title>
                                    <description><![CDATA[तिरुवनंतपुरम में वीडी सतीशन ने केरल के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और खरगे समेत कई बड़े नेता मौजूद रहे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/in-kerala-vd-satheesan-took-oath-as-chief-minister-many/article-53663"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/kerala-v.d.-satheesan-congress-rahul-gandhi-news.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">केरल की नई सरकार ने सोमवार को आधिकारिक रूप से अपने कार्यभार संभाल लिया। तिरुवनंतपुरम के सेंट्रल स्टेडियम में हुए शपथ ग्रहण समारोह में कांग्रेस नेता वीडी सतीशन ने मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। इस समारोह में कई प्रमुख कांग्रेस नेता भी शामिल हुए। राहुल गांधी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रियंका गांधी वाड्रा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की उपस्थिति ने इसे राजनीतिक तौर पर खास बना दिया। सुबह से ही स्टेडियम के बाहर समर्थकों की भीड़ जुटने लगी थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच उत्साह साफ नजर आ रहा था। वीडी सतीशन के मुख्यमंत्री बनने की चर्चा पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच काफी समय से चल रही थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और अब नई सरकार के गठन के साथ यह वास्तविकता में बदल गई है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने वीडी सतीशन को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">और शपथ लेने के बाद राज्यपाल ने उन्हें बधाई भी दी। सिर्फ मुख्यमंत्री ने ही नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि 20 सदस्यीय मंत्रिमंडल ने भी शपथ ली। वरिष्ठ कांग्रेस नेता रमेश चेन्निथला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">के मुरलीधरन और केपीसीसी अध्यक्ष सनी जोसेफ को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है। इसके साथ ही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गठबंधन सहयोगी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के नेताओं को भी सरकार में जगह मिली। पीके कुन्हालीकुट्टी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पीके बशीर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एन समसुद्दीन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">केएम शाजी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और वीई अब्दुल गफूर ने मंत्री पद की शपथ ली। मंत्रिमंडल गठन को लेकर पिछले कुछ दिनों से लगातार बैठकों का दौर चल रहा था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और क्षेत्रीय व सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए नाम तय किए गए।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस समारोह के दौरान मॉन्स जोसेफ</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिबू बेबी जॉन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अनूप जैकब</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सीपी जॉन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एपी अनिल कुमार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">टी सिद्दीकी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पीसी विष्णुनाथ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रोजी एम जॉन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बिंदू कृष्णा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एम लिजू</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">केए थुलसी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और ओ जे जनीश ने भी मंत्री पद की शपथ ली। समारोह में कार्यकर्ताओं ने कई बार नारेबाजी की। कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व की उपस्थिति के कारण राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना रहा। ऐसा माना जा रहा है कि पार्टी दक्षिण भारत में अपने संगठन को मजबूत करने का संदेश देने के लिए इस कार्यक्रम को देख रही है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस बीच</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">वीडी सतीशन ने पहले से ही स्पष्ट कर दिया था कि वरिष्ठ नेता थिरुवनचूर राधाकृष्णन विधानसभा अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालेंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि शनिमोल उस्मान उपाध्यक्ष के पद पर होंगे। विधायक अपू जॉन जोसेफ को मुख्य सचेतक नियुक्त किया गया है। नई सरकार के सामने महंगाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रोजगार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और राज्य की वित्तीय स्थिति जैसे मुद्दों पर तेजी से फैसले लेने की चुनौती होगी। फिलहाल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कांग्रेस समर्थकों में नई सरकार को लेकर खुशी और उत्साह का माहौल देखने को मिल रहा है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 May 2026 11:51:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वीडी सतीशन बनेंगे केरल के नए सीएम, जानें क्यों चुना गया?</title>
                                    <description><![CDATA[केरल में बड़ा सियासी बदलाव संभव, वीडी सतीशन के नाम पर सीएम पद के लिए लगभग सहमति। कांग्रेस में अंदरूनी हलचल तेज।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/vd-satheesan-will-become-the-new-cm-of-kerala-know/article-53330"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-14t122817.792.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">केरल की राजनीति में इन दिनों एक बड़ा बदलाव चर्चा में है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">और इस दौरान सबसे ज्यादा ध्यान वीडी सतीशन पर जा रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो कि केरल के नए मुख्यमंत्री बनने के लिए चर्चा में हैं। खबरों के मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कांग्रेस आलाकमान ने उनके नाम पर लगभग सहमति बना ली है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और आधिकारिक घोषणा जल्द हो सकती है। जैसे ही यह खबर सामने आई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तिरुवनंतपुरम से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पार्टी ने अभी तक कोई औपचारिक जानकारी नहीं दी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन अंदरूनी चर्चाओं में सतीशन का नाम सामने आया है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कांग्रेस नेतृत्व लंबे समय से केरल में एक ऐसे नेता की तलाश में था जो संगठन को मजबूत रख सके और विधानसभा में विपक्ष की भूमिका को प्रभावशाली तरीके से निभा सके। इस संदर्भ में वीडी सतीशन का नाम सामने आया है। वे पिछले कुछ वर्षों से केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में कार्य कर रहे हैं और सरकार के खिलाफ कई मुद्दों पर अपनी राय रख चुके हैं। पार्टी के भीतर उनकी छवि एक ऐसे नेता की है जो कार्यकर्ताओं से जमीनी स्तर पर जुड़े रहते हैं और स्थानीय मुद्दों को मजबूती से उठाते हैं। यही कारण है कि आलाकमान ने उन पर भरोसा दिखाने में कदम बढ़ाया है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पार्टी के सूत्रों के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">केरल में कांग्रेस को एक ऐसे नेतृत्व की जरूरत थी जो युवा कार्यकर्ताओं को साथ लेकर चल सके और मौजूदा राजनीतिक हालात में मजबूत चुनौती पेश कर सके। वीडी सतीशन इस मापदंड पर काफी हद तक फिट नजर आते हैं। संगठन में उनकी स्वीकार्यता बढ़ रही है और कई वरिष्ठ नेता भी उनके नाम पर सहमति जता चुके हैं। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अभी कुछ स्तर पर चर्चा और सलाह-मशविरा बाकी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन माहौल स्पष्ट रूप से उनके पक्ष में बनता दिख रहा है। पिछले कुछ दिनों में दिल्ली में हुई बैठकों में उनके नाम पर गंभीरता से विचार किया गया।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि वीडी सतीशन केरल के नए मुख्यमंत्री बनते हैं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो यह कांग्रेस की राजनीति में एक बड़ा बदलाव होगा। इससे पार्टी में नई ऊर्जा आने की संभावना है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खासकर जब केरल में राजनीतिक मुकाबला लगातार कड़ा रहा है। दूसरी ओर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विरोधी दल भी इस घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं और अपने स्तर पर रणनीतियों में बदलाव पर विचार कर रहे हैं। फिलहाल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सभी की निगाहें कांग्रेस आलाकमान की आधिकारिक घोषणा पर टिकी हुई हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो कुछ घंटों या दिनों में स्थिति स्पष्ट कर सकती है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 May 2026 12:48:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सबरीमाला केस: सुप्रीम कोर्ट ने पूछा, मूर्ति छूना अपमान कैसे</title>
                                    <description><![CDATA[सबरीमाला केस में धार्मिक परंपरा बनाम संवैधानिक अधिकार पर बहस तेज, फैसला जल्द संभव सुनवाई के दौरान कोर्ट की टिप्पणियों ने बहस को नया मोड़ दे दिया। देशभर में नजरें अब इस अहम फैसले पर टिकी हैं।

]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/sabarimala-case-supreme-court-asked-how-touching-the-idol-is/article-51778"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/sabarimala-case-supreme-court.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली में <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">सुप्रीम कोर्ट</span></span> में <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">सबरीमाला मंदिर</span></span> से जुड़े बहुचर्चित मामले की सुनवाई मंगलवार को निर्णायक चरण में पहुंचती दिखी। नौ जजों की संवैधानिक पीठ ने सुनवाई के दौरान अहम सवाल उठाते हुए पूछा कि किसी भक्त द्वारा मूर्ति को छूना ईश्वर का अपमान कैसे माना जा सकता है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति को केवल जन्म, लिंग या वंश के आधार पर देवता को छूने या मंदिर में प्रवेश से रोका जाता है, तो क्या संविधान उसकी रक्षा के लिए आगे नहीं आएगा। यह मामला महिलाओं के प्रवेश, धार्मिक स्वतंत्रता और समानता के अधिकार जैसे संवेदनशील मुद्दों से जुड़ा है और आज की ताज़ा ख़बरें व भारत समाचार अपडेट में प्रमुख बना हुआ है।</p>
<p>सुनवाई के दौरान पीठ ने इस बात पर भी जोर दिया कि आस्था और मौलिक अधिकारों के बीच संतुलन जरूरी है। जजों ने कहा कि आधुनिक समाज में बदलती सोच और संवैधानिक मूल्यों को ध्यान में रखते हुए धार्मिक प्रथाओं की समीक्षा जरूरी हो सकती है। कोर्ट ने संकेत दिया कि किसी भी परंपरा को अंतिम मानने से पहले यह देखना होगा कि वह संविधान के मूल सिद्धांतों के अनुरूप है या नहीं।</p>
<h3><strong>धार्मिक तर्क</strong></h3>
<p>मंदिर पक्ष की ओर से पेश वकीलों ने दलील दी कि हर मंदिर की अपनी विशिष्ट परंपराएं होती हैं, जो वहां के देवता की प्रकृति और मान्यताओं पर आधारित होती हैं। उनके अनुसार, भगवान अयप्पा को ‘नैष्ठिक ब्रह्मचारी’ माना जाता है, इसलिए सबरीमाला मंदिर में कुछ विशेष नियम लागू हैं। वकीलों ने कहा कि पूजा-पद्धति और धार्मिक अनुष्ठानों में हस्तक्षेप आस्था पर सीधा असर डाल सकता है, जिसे संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत संरक्षण प्राप्त है।</p>
<h3><strong>संवैधानिक बहस</strong></h3>
<p>सुनवाई के दौरान यह सवाल भी उठा कि क्या कोई आस्तिक व्यक्ति अपने ही धर्म की प्रथाओं को अदालत में चुनौती दे सकता है। जजों ने कहा कि यदि धार्मिक समुदाय के भीतर ही किसी प्रथा को लेकर मतभेद है, तो अदालत की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या आधुनिक शिक्षा और तकनीकी प्रगति के दौर में धार्मिक मान्यताओं की व्याख्या बदली जा सकती है।</p>
<p>इस मामले में कुल 66 याचिकाएं जुड़ी हुई हैं, जिनमें महिलाओं के प्रवेश पर रोक, धार्मिक स्वतंत्रता और समानता के अधिकार जैसे मुद्दे शामिल हैं। इससे पहले 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने 10 से 50 वर्ष की महिलाओं के प्रवेश पर लगे प्रतिबंध को हटाने का फैसला सुनाया था। इसके बाद कई पुनर्विचार याचिकाएं दाखिल की गईं, जिन पर अब सुनवाई जारी है।</p>
<p>अधिकारियों के अनुसार, इस संवेदनशील मामले में फैसला जल्द आ सकता है। इसका असर न केवल सबरीमाला मंदिर की परंपराओं पर पड़ेगा, बल्कि देशभर में धार्मिक प्रथाओं और संवैधानिक अधिकारों के बीच संतुलन को लेकर एक नई दिशा भी तय कर सकता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 15:54:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सबरीमाला केस पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई तेज, आस्था बनाम समानता पर बड़ा फैसला संभव</title>
                                    <description><![CDATA[महिलाओं की एंट्री को लेकर 9 जजों की बेंच कर रही सुनवाई, देशभर के धार्मिक मामलों पर पड़ सकता है असर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/hearing-on-sabarimala-case-intensifies-in-supreme-court-big-decision/article-51448"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/sabarimala-case.jpg" alt=""></a><br /><div class="flex flex-col text-sm pb-25">

<div class="text-base my-auto mx-auto pb-10 [--thread-content-margin:var(--thread-content-margin-xs,calc(var(--spacing)*4))] @w-sm/main:[--thread-content-margin:var(--thread-content-margin-sm,calc(var(--spacing)*6))] @w-lg/main:[--thread-content-margin:var(--thread-content-margin-lg,calc(var(--spacing)*16))] px-(--thread-content-margin)">
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<p>केरल के <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">सबरीमाला मंदिर</span></span> में महिलाओं के प्रवेश से जुड़े विवाद पर <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">सुप्रीम कोर्ट</span></span> में सुनवाई पांचवें दिन भी जारी रही। नौ जजों की संवैधानिक पीठ इस मामले में दाखिल पुनर्विचार याचिकाओं पर विस्तार से दलीलें सुन रही है। यह मामला धार्मिक परंपराओं और संवैधानिक अधिकारों के बीच संतुलन को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>
<p>सुनवाई के दौरान पीठ ने टिप्पणी की कि करोड़ों लोगों की आस्था को गलत ठहराना आसान नहीं है। साथ ही यह भी कहा गया कि सामाजिक सुधार के नाम पर धार्मिक संरचनाओं को कमजोर नहीं किया जा सकता। कोर्ट की ये टिप्पणियां मामले की संवेदनशीलता को दर्शाती हैं।</p>
<p>इस विवाद की जड़ 2018 के फैसले में है, जब सुप्रीम कोर्ट ने सभी उम्र की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की अनुमति दी थी। इससे पहले 1991 में <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">केरल हाईकोर्ट</span></span> ने 10 से 50 वर्ष की महिलाओं के प्रवेश पर रोक को बरकरार रखा था। 2018 के फैसले के खिलाफ कई याचिकाएं दाखिल की गईं, जिन पर अब सुनवाई हो रही है।</p>
<p>मंदिर का प्रबंधन करने वाला <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड</span></span> इस परंपरा का समर्थन कर रहा है। बोर्ड का कहना है कि सबरीमाला के देवता भगवान अयप्पा को ब्रह्मचारी माना जाता है और यह परंपरा उसी धार्मिक मान्यता से जुड़ी है। उनके अनुसार, यह किसी सार्वजनिक स्थान का मामला नहीं, बल्कि एक विशिष्ट धार्मिक परंपरा है।</p>
<p>सुनवाई के दौरान पक्षकारों ने संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता का हवाला दिया। उनका तर्क है कि राज्य को धार्मिक प्रथाओं के मूल स्वरूप में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। दूसरी ओर, याचिकाकर्ताओं का कहना है कि महिलाओं को प्रवेश से वंचित करना समानता के अधिकार के खिलाफ है।</p>
<p>यह मामला केवल एक मंदिर तक सीमित नहीं है। इसी सुनवाई में मस्जिदों में महिलाओं के प्रवेश, पारसी अग्नि मंदिर में अधिकार, दाऊदी बोहरा समुदाय की प्रथाओं और धार्मिक संस्थाओं में जेंडर भेदभाव जैसे मुद्दों पर भी विचार हो रहा है। इससे स्पष्ट है कि अदालत का फैसला व्यापक प्रभाव डाल सकता है।</p>
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                <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 13:28:37 +0530</pubDate>
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