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                <title>स्पेन से हारकर पुर्तगाल वर्ल्ड कप से बाहर, रोनाल्डो के करियर का यादगार अध्याय हुआ खत्म</title>
                                    <description><![CDATA[क्वार्टर फाइनल में स्पेन ने 1-0 से दर्ज की जीत, बेल्जियम ने मेजबान अमेरिका को 4-1 से हराकर अंतिम आठ में बनाई जगह]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/the-memorable-chapter-of-ronaldos-career-ended-after-portugal-lost/article-58098"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/fifa-world-cup-2026-(13).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">फुटबॉल विश्व कप में मंगलवार का दिन कई बड़े उलटफेर और भावुक पलों का गवाह बना। दुनिया के महान फुटबॉल खिलाड़ियों में शुमार क्रिस्टियानो रोनाल्डो की टीम पुर्तगाल टूर्नामेंट से बाहर हो गई। क्वार्टर फाइनल में स्पेन ने शानदार रक्षात्मक प्रदर्शन करते हुए पुर्तगाल को 1-0 से मात दी और सेमीफाइनल की ओर मजबूत कदम बढ़ाया। इस हार के साथ ही 41 वर्षीय रोनाल्डो के विश्व कप करियर का भी अंत हो गया। स्टेडियम में मौजूद हजारों दर्शकों ने खड़े होकर तालियों के साथ उनका सम्मान किया। रोनाल्डो ने भी भावुक अंदाज में हाथ हिलाकर प्रशंसकों का अभिवादन किया, लेकिन उनके चेहरे पर हार की मायूसी साफ दिखाई दे रही थी। स्पेन ने पूरे मुकाबले में अनुशासित खेल का प्रदर्शन किया। टीम की मजबूत डिफेंस लाइन ने पुर्तगाल के आक्रमण को लगभग पूरी तरह निष्क्रिय कर दिया। रोनाल्डो को मैच में कुछ मौके जरूर मिले, लेकिन स्पेन के गोलकीपर उनाई सिमोन ने बेहतरीन बचाव करते हुए उन्हें गोल करने का कोई अवसर नहीं दिया। पहले हाफ में रोनाल्डो के दो खतरनाक प्रयासों को सिमोन ने शानदार तरीके से रोककर मैच का रुख बदल दिया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस जीत के साथ स्पेन ने विश्व कप इतिहास में लगातार छह मुकाबलों तक क्लीन शीट रखने का नया रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया। इससे पहले लगातार पांच मैचों तक गोल नहीं खाने का रिकॉर्ड इटली और स्विट्जरलैंड के नाम था। स्पेन की यह उपलब्धि उसकी मजबूत रक्षात्मक रणनीति और खिलाड़ियों के बेहतरीन तालमेल को दर्शाती है। स्पेन के गोलकीपर उनाई सिमोन ने व्यक्तिगत उपलब्धि भी हासिल की। उन्होंने लगातार 609 मिनट तक गोल नहीं खाकर विश्व कप का नया रिकॉर्ड बनाया। इससे पहले यह रिकॉर्ड इटली के महान गोलकीपर वाल्टर जेंगा के नाम था। सिमोन की लगातार शानदार फॉर्म ने स्पेन को खिताब का मजबूत दावेदार बना दिया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">क्रिस्टियानो रोनाल्डो का विश्व कप सफर भी इस मुकाबले के साथ समाप्त हो गया। उन्होंने वर्ष 2006 में पहली बार विश्व कप खेला था और उसी टूर्नामेंट में पुर्तगाल को सेमीफाइनल तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई थी। इसके बाद कई विश्व कप में उन्होंने अपनी टीम का नेतृत्व किया और कई यादगार मुकाबले खेले। वर्ष 2018 में स्पेन के खिलाफ उनकी हैट्रिक आज भी फुटबॉल प्रेमियों को याद है। हालांकि इस बार उनका सपना अधूरा रह गया और वे विश्व कप ट्रॉफी जीतने से एक बार फिर चूक गए। मैच समाप्त होने के बाद स्टेडियम में भावुक माहौल देखने को मिला। पुर्तगाल के खिलाड़ी निराश नजर आए, जबकि स्पेन के खिलाड़ियों ने अपनी ऐतिहासिक जीत का जश्न मनाया। फुटबॉल विशेषज्ञों का मानना है कि स्पेन की संतुलित टीम और मजबूत रक्षा पंक्ति उसे इस विश्व कप का सबसे बड़ा दावेदार बना रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूसरे क्वार्टर फाइनल मुकाबले में बेल्जियम ने मेजबान अमेरिका को 4-1 से हराकर शानदार जीत दर्ज की। मैच की शुरुआत से ही बेल्जियम ने आक्रामक खेल दिखाया। आठवें मिनट में चार्ल्स डी केटेलारे ने पहला गोल कर अपनी टीम को बढ़त दिलाई। अमेरिका ने 31वें मिनट में फ्री-किक के जरिए बराबरी कर ली, लेकिन यह खुशी ज्यादा देर तक नहीं टिक सकी।सिर्फ एक मिनट बाद डी केटेलारे ने दूसरा गोल कर बेल्जियम को फिर बढ़त दिला दी। इसके बाद अमेरिकी टीम दबाव में आ गई। 57वें मिनट में गोलकीपर की गलती का फायदा उठाकर हैंस वानाकेन ने तीसरा गोल किया। अतिरिक्त समय में अनुभवी स्ट्राइकर रोमेलु लुकाकू ने चौथा गोल दागकर बेल्जियम की जीत पूरी तरह सुनिश्चित कर दी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बेल्जियम की जीत में चार्ल्स डी केटेलारे सबसे बड़े नायक साबित हुए। उन्होंने दो गोल करने के अलावा एक अन्य गोल में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। टीम के मिडफील्ड और डिफेंस ने भी शानदार प्रदर्शन किया, जिससे अमेरिका को वापसी का कोई मौका नहीं मिला। मेजबान अमेरिका के लिए यह हार निराशाजनक रही। घरेलू दर्शकों के सामने टीम से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद थी, लेकिन रक्षात्मक गलतियां और गोलकीपर की चूक टीम पर भारी पड़ गई। पूरे मैच में अमेरिका ने कुछ अच्छे अवसर बनाए, लेकिन उन्हें गोल में बदलने में सफलता नहीं मिल सकी। अब विश्व कप के क्वार्टर फाइनल मुकाबले और भी रोमांचक होने की उम्मीद है। स्पेन और बेल्जियम जैसी टीमें शानदार लय में दिखाई दे रही हैं। स्पेन जहां अपनी मजबूत रक्षा के दम पर आगे बढ़ रहा है, वहीं बेल्जियम का आक्रामक खेल विरोधी टीमों के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 14:47:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अमेरिका आजादी के 250वें वर्ष पर दफन करेगा 408 किलो का टाइम कैप्सूल, 2276 में खुलेगा इतिहास का यह अनोखा संदेश</title>
                                    <description><![CDATA[फिलाडेल्फिया के इंडिपेंडेंस नेशनल हिस्टोरिकल पार्क में 10 फीट नीचे रखा जाएगा विशेष टाइम कैप्सूल, जिसमें AI की भविष्यवाणी, ऐतिहासिक दस्तावेज, व्हेल की हड्डी और 50 राज्यों से चुनी गई यादगार वस्तुएं शामिल हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/america-will-bury-a-408-kg-time-capsule-on-the/article-57815"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/america-time-capsule.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">अमेरिका अपनी आजादी के 250 वर्ष पूरे होने के अवसर पर एक ऐसा कदम उठाने जा रहा है, जो आने वाली कई पीढ़ियों के लिए इतिहास का अनमोल दस्तावेज बन सकता है। 4 जुलाई को फिलाडेल्फिया स्थित इंडिपेंडेंस नेशनल हिस्टोरिकल पार्क में करीब 408 किलो वजनी एक विशेष टाइम कैप्सूल जमीन के भीतर दफन किया जाएगा। इसे अब से ठीक 250 साल बाद यानी वर्ष 2276 में खोला जाएगा। इस परियोजना का उद्देश्य केवल कुछ वस्तुओं को सुरक्षित रखना नहीं है, बल्कि 2026 के अमेरिका की सोच, तकनीक, संस्कृति और सामाजिक जीवन की झलक भविष्य की पीढ़ियों तक पहुंचाना भी है। बताया जा रहा है कि इस टाइम कैप्सूल का रिकॉर्ड भी आधिकारिक रूप से दर्ज कर दिया गया है, ताकि आने वाले समय में इसकी सही पहचान और स्थान सुरक्षित रहे।</p>
<p>फिलाडेल्फिया को इस ऐतिहासिक पहल के लिए इसलिए चुना गया क्योंकि यही वह शहर है, जहां 4 जुलाई 1776 को अमेरिका के स्वतंत्रता घोषणा पत्र को मंजूरी मिली थी। इसी कारण इस स्थान को अमेरिकी लोकतंत्र और आजादी का प्रतीक माना जाता है। अधिकारियों के अनुसार, टाइम कैप्सूल में रखी गई वस्तुएं केवल सरकारी संस्थानों ने नहीं चुनीं, बल्कि देश के सभी 50 राज्यों और आम नागरिकों की भागीदारी से उनका चयन किया गया है। इनमें व्हेल की हड्डी, दुनिया के सबसे बड़े जिप्सम रेगिस्तान की रेत, राइट बंधुओं के ऐतिहासिक विमान का कपड़ा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI से जुड़ी भविष्यवाणियां, महत्वपूर्ण दस्तावेज और कई ऐसी वस्तुएं शामिल हैं, जो वर्तमान समय की पहचान मानी जाती हैं।</p>
<p>टाइम कैप्सूल एक ऐसा बंद कंटेनर होता है, जिसमें किसी खास दौर की वस्तुओं को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जाता है। इसका मकसद भविष्य के लोगों को यह बताना होता है कि उस समय समाज कैसा था, लोग किस तरह का जीवन जीते थे और विज्ञान तथा तकनीक किस स्तर पर पहुंच चुके थे। यही वजह है कि इस बार तैयार किया गया अमेरिकी टाइम कैप्सूल केवल इतिहास का संग्रह नहीं, बल्कि वर्तमान पीढ़ी की ओर से भविष्य के लोगों के लिए एक संदेश भी माना जा रहा है।</p>
<p>इस परियोजना की सबसे बड़ी चुनौती टाइम कैप्सूल को तैयार करना नहीं, बल्कि उसे पूरे 250 वर्षों तक सुरक्षित बनाए रखना था। वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने कई वर्षों तक शोध करने के बाद ऐसा डिजाइन तैयार किया, जो नमी, पानी, जंग और मौसम के प्रभाव से लंबे समय तक बचा रह सके। कैप्सूल को पारंपरिक चौकोर आकार की बजाय बेलनाकार बनाया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि चौकोर कंटेनरों के कोनों पर समय के साथ दबाव अधिक पड़ता है और वहीं से पानी अंदर जाने की संभावना बढ़ जाती है। इसके विपरीत बेलनाकार संरचना अधिक मजबूत और टिकाऊ मानी जाती है।</p>
<p>कैप्सूल को विशेष गुणवत्ता वाले स्टेनलेस स्टील से तैयार किया गया है, जिसका उपयोग वैज्ञानिक उपकरणों और अत्यधिक सुरक्षित संरचनाओं में किया जाता है। इसे पहले ही पूरी तरह सील किया जा चुका है और 4 जुलाई को केवल जमीन के भीतर स्थापित किया जाएगा। सीलिंग के लिए इंडियम नाम की विशेष धातु का इस्तेमाल किया गया है। यह धातु बेहद मुलायम होती है और ढक्कन बंद करते समय सबसे छोटी दरार को भी भर देती है। इससे हवा और पानी के प्रवेश की संभावना लगभग समाप्त हो जाती है।</p>
<p>वैज्ञानिकों ने कैप्सूल के भीतर नमी का स्तर भी सावधानी से नियंत्रित किया है। यदि नमी अधिक होती तो कागज और अन्य सामग्री खराब हो सकती थी, जबकि अत्यधिक सूखापन कुछ वस्तुओं को नुकसान पहुंचा सकता था। इसलिए इसके अंदर लगभग 35 प्रतिशत आर्द्रता बनाए रखी गई है। इसे करीब 10 फीट गहराई में दफनाया जाएगा, जहां तापमान अपेक्षाकृत स्थिर रहता है और मौसम के बदलाव का असर बहुत कम होता है।</p>
<p>इस टाइम कैप्सूल की सुरक्षा के लिए एक अतिरिक्त स्टील सिलेंडर भी लगाया जाएगा। दोनों परतों के बीच मौजूद हवा पानी को भीतर पहुंचने से रोकेगी। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि भविष्य में भूजल का स्तर बढ़ भी जाए या बाढ़ जैसी स्थिति बन जाए, तब भी यह संरचना लंबे समय तक सुरक्षित रह सकती है। परियोजना से जुड़े वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि किसी दिन इस कैप्सूल तक पानी पहुंच गया, तो इसका मतलब होगा कि पूरा क्षेत्र गंभीर प्राकृतिक संकट का सामना कर रहा होगा।</p>
<p>अमेरिका इस पहल के जरिए केवल अपनी उपलब्धियों को संरक्षित नहीं करना चाहता, बल्कि यह भी दिखाना चाहता है कि वर्ष 2026 का समाज किस तरह सोचता था और किन तकनीकों का उपयोग कर रहा था। यही कारण है कि इसमें सरकारी दस्तावेजों के साथ आम लोगों की ओर से चुनी गई वस्तुओं को भी समान महत्व दिया गया है। इससे भविष्य की पीढ़ियां उस दौर को केवल किताबों के माध्यम से नहीं, बल्कि वास्तविक वस्तुओं के जरिए भी समझ सकेंगी।</p>
<p>दुनिया में इससे पहले भी कई प्रसिद्ध टाइम कैप्सूल बनाए जा चुके हैं। अमेरिका का 'क्रिप्ट ऑफ सिविलाइजेशन' सबसे चर्चित उदाहरणों में शामिल है, जिसे लगभग 6,000 वर्षों तक बंद रखने की योजना बनाई गई है और इसे वर्ष 8113 में खोला जाएगा। वहीं 1939 में न्यूयॉर्क में दफन किया गया वेस्टिंगहाउस टाइम कैप्सूल भी भविष्य के लिए सुरक्षित रखा गया है। भारत में भी 1973 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल के दौरान लाल किले के पास 'कलपात्र' नाम से टाइम कैप्सूल दफन किया गया था, जिसे बाद में नई सरकार बनने पर बाहर निकाल लिया गया। हालांकि उसमें मौजूद सामग्री को लेकर आज भी कई चर्चाएं होती हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 11:14:49 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>ईरान जंग के बीच वैश्विक तेल संकट गहराया, 115 करोड़ बैरल सप्लाई गायब</title>
                                    <description><![CDATA[होर्मुज स्ट्रेट खुलने के बाद भी पूरी तरह राहत नहीं, तेल भंडार 36 साल के निचले स्तर पर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/global-oil-crisis-deepens-amid-iran-war-115-crore-barrel/article-56437"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/iran-oil-crisis.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दुनिया के ऊर्जा बाजार में ईरान-अमेरिका संघर्ष के बीच बड़ा झटका सामने आया है। हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पिछले चार महीनों में वैश्विक तेल सप्लाई से करीब 115 करोड़ बैरल कच्चा तेल गायब हो गया है। यह आंकड़ा एनालिटिक्स फर्म केपलर की रिपोर्ट में सामने आया है, जिसने पूरी दुनिया में ऊर्जा सुरक्षा को लेकर नई चिंता खड़ी कर दी है। होर्मुज स्ट्रेट फिर से खुलने के बाद बाजार में थोड़ी राहत जरूर देखी गई है, लेकिन स्थिति अभी भी सामान्य नहीं मानी जा रही है। मिडिल ईस्ट में युद्ध के दौरान तेल आपूर्ति लगभग बाधित रही, जिससे दुनिया के रणनीतिक और वाणिज्यिक तेल भंडार पर भारी दबाव पड़ा। रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान करीब 19 करोड़ बैरल तेल स्टॉक से निकाल लिया गया, जिससे वैश्विक रिजर्व तेजी से घटे हैं। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी के आंकड़ों के मुताबिक स्ट्रेटजिक रिजर्व 1990 के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं, जबकि अमेरिका का इमरजेंसी रिजर्व 43 साल के न्यूनतम स्तर पर दर्ज किया गया है। हालात इतने गंभीर रहे कि कई देशों को अपने दैनिक ईंधन उपयोग को संतुलित करने के लिए आपातकालीन खरीदारी करनी पड़ी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल ही में वर्साय में G7 बैठक के दौरान कहा कि अगर युद्ध लंबा चलता, तो अमेरिका के तेल भंडार करीब चार हफ्तों में खत्म हो जाते। उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान के साथ समझौते के बाद स्थिति नियंत्रण में आई है, लेकिन अगर होर्मुज स्ट्रेट बंद रहता तो वैश्विक अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान उठाना पड़ता। विशेषज्ञों का कहना है कि यह बयान ऊर्जा संकट की गंभीरता को दर्शाता है, क्योंकि दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं तेल आपूर्ति पर अत्यधिक निर्भर हैं। सीजफायर और समझौते के बाद ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट देखी गई है। युद्ध के दौरान जहां कीमतें 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं, वहीं अब यह 80 डॉलर से नीचे आ चुकी हैं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट केवल अस्थायी राहत है, क्योंकि सप्लाई चेन अभी भी पूरी तरह बहाल नहीं हुई है। समुद्री रास्तों से संभावित बारूदी खतरे हटाने, खाली टैंकरों की वापसी और उत्पादन सामान्य करने में अभी लंबा समय लग सकता है। बाजार फिलहाल जरूरत से ज्यादा आशावादी हो गया है। RBC कैपिटल मार्केट्स की विश्लेषक हेलिमा क्रॉफ्ट का कहना है कि संकट खत्म मान लेना जल्दबाजी होगी, क्योंकि तेल आपूर्ति को सामान्य स्थिति में आने में कई महीनों का समय लग सकता है। वहीं इंफ्रास्ट्रक्चर कैपिटल एडवाइजर्स के CEO जे हैटफील्ड का मानना है कि OPEC देश उत्पादन बढ़ाकर बाजार में स्थिरता ला सकते हैं, जिससे कीमतों पर दबाव कम हो सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मैक्वेरी ग्रुप के ग्लोबल ऑयल एंड गैस स्ट्रैटेजिस्ट विकास द्विवेदी के अनुसार युद्ध से पहले दुनिया के पास पर्याप्त तेल स्टॉक था, इसी कारण इतनी बड़ी सप्लाई बाधा के बावजूद बाजार पूरी तरह नहीं टूटा। उन्होंने यह भी बताया कि डीजल और पेट्रोल के भंडार में गिरावट जरूर आई है, लेकिन स्थिति अभी नियंत्रण में है और आने वाले हफ्तों में सप्लाई चैन में सुधार देखा जा सकता है। आंकड़ों के मुताबिक, दुनिया में इस समय प्रतिदिन लगभग 10.3 करोड़ बैरल कच्चे तेल का उत्पादन हो रहा है। इसमें अमेरिका, सऊदी अरब, रूस, कनाडा और इराक जैसे देश प्रमुख भूमिका निभाते हैं, जो मिलकर वैश्विक तेल सप्लाई का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा देते हैं। ऐसे में इन देशों में किसी भी प्रकार की राजनीतिक अस्थिरता या युद्ध सीधे तौर पर वैश्विक बाजार और ईंधन कीमतों को प्रभावित करती है। युद्ध के दौरान गायब हुए 115 करोड़ बैरल तेल की भरपाई आसान नहीं होगी। यदि उत्पादन मांग से 50 लाख बैरल प्रतिदिन अधिक भी बढ़ाया जाए, तब भी इस कमी को पूरा करने में लगभग एक साल का समय लग सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 11:24:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>यूएस-ईरान न्यूक्लियर डील पर ट्रंप का बड़ा दावा, ईरान ने परमाणु हथियार न बनाने पर सहमति जताई</title>
                                    <description><![CDATA[ट्रंप बोले—ईरान को 300 अरब डॉलर देने की खबर फर्जी, वेंस ने समझौते को बताया ऐतिहासिक कूटनीतिक सफलता]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/trumps-big-claim-on-us-iran-nuclear-deal-iran-agreed-not/article-56041"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/us-iran-nuclear-deal.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रहे तनाव और संघर्ष के बीच अब परमाणु कार्यक्रम को लेकर एक बड़ा राजनीतिक दावा सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा कि ईरान ने परमाणु हथियार कभी न बनाने पर सहमति जताई है। ट्रंप ने यह भी साफ किया कि सोशल मीडिया और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में जो यह दावा किया जा रहा है कि अमेरिका ईरान को 300 अरब डॉलर दे रहा है, वह पूरी तरह “फर्जी खबर” है। ट्रंप ने यह बयान अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए दिया। उन्होंने लिखा कि ईरान ने स्पष्ट रूप से परमाणु हथियार न रखने पर सहमति दी है और 300 मिलियन या अरब डॉलर देने की बात गलत तरीके से फैलायी जा रही है। ट्रंप ने इस तरह की खबरों को राजनीतिक विरोधियों की साजिश बताया और कहा कि यह जानकारी अमेरिकी जनता को भ्रमित करने के लिए फैलाई जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यह बयान उस समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच एक प्रारंभिक समझौते पर हस्ताक्षर होने की खबरें सामने आई हैं। इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच वर्षों से चले आ रहे युद्ध जैसे हालात को समाप्त करना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर एक स्थायी ढांचा तैयार करना बताया जा रहा है। हालांकि अभी तक इस डील के सभी विस्तृत बिंदु सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, जिससे कई सवाल बने हुए हैं। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने भी ट्रंप के बयान का समर्थन करते हुए इसे बड़ी कूटनीतिक सफलता बताया है। वेंस ने कहा कि पूरी प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य यही था कि ईरान किसी भी स्थिति में परमाणु हथियार विकसित न कर सके। उन्होंने यह भी दावा किया कि यह समझौता अमेरिकी विदेश नीति की बड़ी उपलब्धि है और इससे क्षेत्रीय स्थिरता को मजबूती मिलेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसी बीच ईरान की तरफ से भी सावधानी भरी प्रतिक्रिया सामने आई है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने इस समझौते को एक महत्वपूर्ण कदम बताया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि अभी अंतिम शांति समझौता तैयार होना बाकी है। ईरानी पक्ष का कहना है कि किसी भी स्थायी समझौते के लिए विस्तृत बातचीत और ठोस शर्तों पर सहमति जरूरी है। सबसे बड़ा विवाद उस 300 अरब डॉलर के कथित पैकेज को लेकर है, जिस पर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। ट्रंप ने जहां इसे पूरी तरह झूठ बताया है, वहीं कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स में कहा गया है कि यह रकम किसी प्रत्यक्ष भुगतान के रूप में नहीं बल्कि आर्थिक पुनर्निर्माण और निवेश कार्यक्रम से जुड़ी हो सकती है। ईरानी मीडिया का दावा है कि यह राशि युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई और प्रतिबंधों में राहत के तौर पर मांगी गई संभावित आर्थिक पैकेज का हिस्सा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि ईरान ने 24 अरब डॉलर की फ्रीज संपत्तियों की रिहाई की मांग की है और साथ ही तेल और पेट्रोकेमिकल सेक्टर पर लगे प्रतिबंधों में ढील की भी बात शामिल है। ईरानी पक्ष का तर्क है कि देश को हुए नुकसान का आकलन कई सौ अरब डॉलर तक पहुंच सकता है, इसलिए आर्थिक राहत किसी भी समझौते का अहम हिस्सा होना चाहिए। दूसरी ओर पश्चिमी मीडिया रिपोर्ट्स में इस आंकड़े को अलग नजरिए से देखा जा रहा है। इन रिपोर्ट्स के अनुसार यह 300 अरब डॉलर का पैकेज सीधे भुगतान नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय निवेश और पुनर्निर्माण सहयोग से जुड़ा एक प्रस्ताव हो सकता है, जिसमें निजी क्षेत्र की भागीदारी भी शामिल हो सकती है। इस अंतर ने पूरे समझौते को और अधिक विवादित बना दिया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">समझौते के प्रारंभिक ढांचे को लेकर उपराष्ट्रपति वेंस ने कहा है कि यह दस्तावेज अभी केवल डेढ़ पेज का है और बहुत सामान्य प्रकृति का है। उन्होंने यह भी बताया कि आने वाले दिनों में इसके और विवरण सामने आएंगे। वेंस के अनुसार समझौते में परमाणु निरीक्षकों की वापसी, यूरेनियम स्टॉकपाइल के प्रबंधन और प्रतिबंधों में राहत जैसे मुद्दे शामिल हैं। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के निरीक्षकों को ईरान में दोबारा प्रवेश की अनुमति दी जा सकती है, ताकि परमाणु गतिविधियों पर निगरानी रखी जा सके। इसके अलावा यह भी प्रस्ताव है कि ईरान के उच्च स्तर पर समृद्ध यूरेनियम भंडार को लेकर एक साझा समाधान निकाला जाएगा। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि किसी भी अंतिम समझौते से पहले ईरान को कई अहम शर्तों को पूरा करना होगा, जिनमें परमाणु हथियार न बनाने की गारंटी और क्षेत्रीय उग्रवादी समूहों से दूरी बनाना शामिल है। हालांकि ईरान की ओर से इन शर्तों पर औपचारिक प्रतिक्रिया अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 11:19:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>यूएस-ईरान डील पर ट्रंप का बड़ा दावा, शुक्रवार तक समझौता जारी हो सकता है</title>
                                    <description><![CDATA[वेस्ट एशिया युद्ध खत्म करने के लिए वॉशिंगटन और तेहरान के बीच सहमति, वेंस बोले—परमाणु निरीक्षकों की वापसी तय मानी जा रही है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/trumps-big-claim-on-us-iran-deal-agreement-may-be-finalized/article-56039"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/us-iran-deal-2026.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रहे तनाव और संघर्ष के बीच अब एक बड़ा राजनीतिक मोड़ सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को संकेत दिया कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच हुआ नया समझौता शुक्रवार तक सार्वजनिक किया जा सकता है। यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच कई हफ्तों से चली आ रही कूटनीतिक बातचीत और तनावपूर्ण हालात के बाद वेस्ट एशिया में शांति की उम्मीदें बढ़ी हैं। ट्रंप ने यह भी कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही फिर से सामान्य हो रही है और यह अहम तेल मार्ग शुक्रवार तक पूरी तरह “खुला” हो सकता है। यह समझौता कई दौर की कठिन वार्ताओं के बाद तैयार हुआ है, जिसमें सैन्य तनाव, क्षेत्रीय सुरक्षा और परमाणु कार्यक्रम जैसे मुद्दों पर गहन चर्चा हुई। हालांकि अभी तक इस डील के सभी बिंदु सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, जिससे कई सवाल बने हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि समझौते की वास्तविक शर्तें सामने आने के बाद ही यह साफ होगा कि दोनों देशों ने किन मुद्दों पर समझौता किया है और किन पर अभी भी मतभेद बने हुए हैं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस पूरे घटनाक्रम पर सतर्क प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि उनके देश का इतिहास टूटे हुए वादों और अधूरे समझौतों से भरा रहा है, इसलिए वे किसी भी समझौते को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं हो सकते। अराघची ने कहा कि पिछले अनुभवों को देखते हुए ईरान सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर आगे बढ़ रहा है और किसी भी जल्दबाजी से बचना चाहता है। उनके बयान से यह साफ संकेत मिला है कि ईरान अभी भी पूरी तरह भरोसे की स्थिति में नहीं है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस बीच अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने भी इस समझौते को लेकर अहम जानकारी दी है। उन्होंने एक टेलीविजन इंटरव्यू में कहा कि इस डील के तहत परमाणु निरीक्षकों को ईरान में दोबारा प्रवेश की अनुमति दी जाएगी। वेंस के अनुसार यह कदम पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बेहद जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि यह समझौता दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे युद्ध और तनाव को खत्म करने की दिशा में एक बड़ा कदम हो सकता है। यह पूरा घटनाक्रम कई हफ्तों की कूटनीतिक बातचीत, दबाव और क्षेत्रीय तनाव के बाद सामने आया है। इस दौरान कई बार ऐसी आशंका जताई गई थी कि स्थिति और बिगड़ सकती है और सैन्य टकराव दोबारा शुरू हो सकता है। लेकिन अचानक हुए इस समझौते ने हालात को काफी हद तक बदल दिया है। हालांकि अभी भी  इस बात पर जोर दे रहे हैं कि जब तक आधिकारिक दस्तावेज सामने नहीं आते, तब तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। सबसे अहम मुद्दों में होर्मुज जलडमरूमध्य का खुलना शामिल है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ट्रंप के अनुसार, इस रूट से जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू हो चुकी है और आने वाले दिनों में यह पूरी तरह सामान्य हो जाएगी। अगर यह स्थिति स्थिर रहती है तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी देखने को मिल सकता है, जहां पिछले कुछ समय से अस्थिरता बनी हुई थी। अमेरिका और ईरान के बीच इस संभावित समझौते को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी नजर बनाए हुए है। कई देशों का मानना है कि यदि यह डील सफल रहती है तो वेस्ट एशिया में शांति की दिशा में यह एक बड़ा कदम साबित हो सकता है। यह समझौता कितना टिकाऊ होगा, यह आने वाले समय में दोनों देशों के व्यवहार और प्रतिबद्धताओं पर निर्भर करेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 11:19:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>फर्जी पिज्जा ऑर्डर के बहाने भारतीय युवक की हत्या, अमेरिका में सनसनी</title>
                                    <description><![CDATA[फिलाडेल्फिया में तेलंगाना के अंशुल कुंचा को डिलीवरी के लिए बुलाया गया, परिवार ने सुनियोजित साजिश का लगाया आरोप]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/murder-of-indian-youth-on-the-pretext-of-fake-pizza/article-55215"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/anshul-kuncha.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अमेरिका के फिलाडेल्फिया शहर में भारतीय मूल के एक युवक की गोली मारकर हत्या किए जाने का मामला सामने आने के बाद प्रवासी भारतीय समुदाय में चिंता बढ़ गई है। मृतक की पहचान तेलंगाना के रहने वाले 28 वर्षीय अंशुल कुंचा के रूप में हुई है। परिवार का आरोप है कि अंशुल को फर्जी पिज्जा ऑर्डर के जरिए एक सुनसान इलाके में बुलाया गया और वहां पहले से घात लगाए बैठे हमलावरों ने उन पर हमला कर दिया। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई है और पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जानकारी के मुताबिक अंशुल कुंचा फिलाडेल्फिया में एक मल्टीनेशनल कंपनी में कार्यरत थे। नौकरी के साथ-साथ अतिरिक्त आय के लिए वे सप्ताहांत में पिज्जा डिलीवरी का पार्ट-टाइम काम भी करते थे। शनिवार रात उन्हें एक डिलीवरी ऑर्डर मिला था। बताया जा रहा है कि यह ऑर्डर फिलाडेल्फिया के एक अपेक्षाकृत सुनसान इलाके का था। अंशुल तय पते पर पिज्जा पहुंचाने पहुंचे, लेकिन वहां पहुंचते ही उन पर हमला कर दिया गया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार हमलावर ने बेहद करीब से उनके सिर पर कई गोलियां चलाईं, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस और आपातकालीन सेवाओं की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। पुलिस ने घटनास्थल को घेरकर जांच शुरू की। मौके से तीन खाली कारतूस बरामद किए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि कारतूसों की स्थिति से संकेत मिलता है कि हमलावर और पीड़ित के बीच बहुत कम दूरी थी। जांच दल ने आसपास के इलाके से सबूत जुटाने का काम भी शुरू कर दिया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अंशुल के परिवार ने इस घटना को सामान्य आपराधिक वारदात मानने से इनकार किया है। उनकी बहन तन्वी कुंचा का कहना है कि यह डिलीवरी ऑर्डर एक जाल था। उनके मुताबिक जिस स्थान पर अंशुल को बुलाया गया, वहां कोई ग्राहक मौजूद नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि हमलावरों ने पहले से योजना बनाकर अंशुल को निशाना बनाया। परिवार का यह भी कहना है कि घटना के बाद अंशुल का कोई सामान नहीं लूटा गया। ऐसे में हत्या के पीछे की वजह और भी रहस्यमय हो जाती है। परिवार के अनुसार यदि यह लूटपाट की घटना होती तो हमलावर उनका मोबाइल फोन, नकदी या अन्य सामान लेकर जाते। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। यही कारण है कि परिवार इसे सुनियोजित हमला मान रहा है। हालांकि पुलिस ने अभी तक किसी भी संभावित कारण पर आधिकारिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं की है और जांच जारी होने की बात कही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">फिलाडेल्फिया पुलिस को जांच के दौरान कुछ महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं। अधिकारियों ने बताया कि जिस फोन नंबर से पिज्जा का ऑर्डर दिया गया था, उसकी जानकारी हासिल कर ली गई है। जांचकर्ता अब उस नंबर की कॉल डिटेल और अन्य तकनीकी जानकारियों के आधार पर संदिग्धों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। माना जा रहा है कि यही नंबर मामले की गुत्थी सुलझाने में अहम भूमिका निभा सकता है। घटनास्थल के आसपास लगे निगरानी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है। फिलाडेल्फिया हाउसिंग अथॉरिटी के कैमरों में घटना से पहले की कुछ गतिविधियां रिकॉर्ड हुई हैं। हालांकि गोली चलाने की पूरी घटना कैमरे में कैद नहीं हो सकी। फुटेज में अंशुल के पीछे दो संदिग्ध लोगों को चलते हुए देखा गया है। दोनों ने गहरे रंग के कपड़े पहन रखे थे और उनमें से एक व्यक्ति के पास बैकपैक भी दिखाई दे रहा था। पुलिस अब इन दोनों लोगों की पहचान करने का प्रयास कर रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अंशुल कुंचा का जीवन संघर्ष और मेहनत की मिसाल माना जाता है। परिवार के अनुसार उन्होंने हैदराबाद से बीटेक की पढ़ाई पूरी की थी। इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका गए, जहां उन्होंने मास्टर्स की डिग्री हासिल की। पढ़ाई पूरी होने के बाद उन्हें KWC कंपनी में नौकरी मिली और वे अपने करियर को आगे बढ़ाने में जुटे हुए थे। अतिरिक्त खर्चों और बचत के लिए उन्होंने सप्ताहांत में डिलीवरी का काम भी शुरू किया था। परिवार ने यह भी बताया कि अंशुल पहले भी अमेरिका में एक आपराधिक घटना का शिकार हो चुके थे। कुछ समय पहले उनसे लूटपाट की गई थी, जिसमें उनकी चेन, मोबाइल फोन और नकदी छीन ली गई थी। हालांकि उस दौरान उन्हें शारीरिक नुकसान नहीं पहुंचाया गया था। इस बार हुई घटना ने परिवार को पूरी तरह तोड़ दिया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">घटना के बाद भारत और अमेरिका दोनों जगह रहने वाले रिश्तेदारों और दोस्तों में शोक की लहर है। परिवार ने भारतीय और अमेरिकी अधिकारियों से अनुरोध किया है कि अंशुल का पार्थिव शरीर जल्द भारत भेजा जाए ताकि अंतिम संस्कार समय पर किया जा सके। वहीं न्यूयॉर्क स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास ने भी घटना पर दुख व्यक्त किया है और कहा है कि वह स्थानीय प्रशासन तथा परिवार के संपर्क में है। पुलिस हत्या के पीछे की वास्तविक वजह का पता लगाने की कोशिश कर रही है। अभी तक किसी संदिग्ध की गिरफ्तारी नहीं हुई है। परिवार को उम्मीद है कि जांच जल्द पूरी होगी और अंशुल की हत्या के जिम्मेदार लोगों को कानून के दायरे में लाया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/murder-of-indian-youth-on-the-pretext-of-fake-pizza/article-55215</link>
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                <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 17:38:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ट्रंप की बेटी इवांका ट्रंप पर हमले की साजिश हुई नाकाम, अमेरिकी एजेंसियों का दावा</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी एजेंसियों ने इवांका ट्रंप की हत्या की साजिश नाकाम करने का दावा किया है। IRGC और कातिब हिजबुल्लाह से जुड़े आरोपी की गिरफ्तारी हुई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/plot-to-attack-trumps-daughter-ivanka-trump-failed-us-agencies/article-54073"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/usa-donald-trump-ivanka-trump-irgc.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">डोनाल्ड ट्रंप की बेटी और पूर्व व्हाइट हाउस सलाहकार इवांका ट्रंप को लेकर आए कथित सुरक्षा खतरे ने अमेरिका में हड़कंप मचा दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों ने एक ऐसी साजिश का खुलासा किया है जिसमें ईरान से जुड़े एक संदिग्ध पर इवांका ट्रंप की हत्या की योजना बनाने का आरोप है। यह मामला ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रहे तनाव से जुड़ा हुआ है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विशेष रूप से कासिम सुलेमानी की मौत के संदर्भ में।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सूत्रों के मुताबिक</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">पकड़े गए आरोपी मोहम्मद बाकेर अल-सादी इराक का नागरिक है और उस पर ईरान समर्थित संगठन कटाइब हिज्बुल्लाह से संबंध रखने का आरोप है। जांच एजेंसियों का कहना है कि आरोपी को ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड से जुड़े नेटवर्क द्वारा प्रशिक्षित किया गया था। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आरोपी के पास इवांका ट्रंप के फ्लोरिडा स्थित घर का नक्शा और कुछ संवेदनशील जानकारियां भी मिली हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे संदेह और बढ़ गया है। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अब तक किसी आधिकारिक एजेंसी ने इन सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन जांच को बहुत गंभीरता से लिया जा रहा है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बताया जा रहा है कि आरोपी इस कथित योजना के पीछे ईरानी सैन्य कमांडर कासिम सुलेमानी की मौत का बदला लेने की बात कर रहा था। सुलेमानी की मौत के बाद से ईरान समर्थक समूहों और अमेरिकी एजेंसियों के बीच तनाव कई बार खुलकर सामने आया है। रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि आरोपी ने अपने संपर्कों के बीच इवांका ट्रंप को निशाना बनाने की बात कही थी और इसके लिए संभावित हमले की योजना पर काम कर रहा था। इसी दौरान अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों ने उसे ट्रैक कर गिरफ्तार किया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">वाशिंगटन में मौजूद कुछ पूर्व अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि आरोपी के पास फ्लोरिडा के आवास का ब्लूप्रिंट मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर आगई थीं। जांच एजेंसियों को आशंका है कि इस नेटवर्क के और सदस्य भी सक्रिय हो सकते हैं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो अमेरिका में किसी बड़े हमले की साजिश कर रहे हैं। फिलहाल आरोपी से पूछताछ जारी है और उसकी डिजिटल गतिविधियों की भी जांच की जा रही है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस पूरे मामले ने अमेरिकी राजनीति और सुरक्षा तंत्र में नई बहस छेड़ दी है। ट्रंप परिवार की सुरक्षा को लेकर पहले भी कई सवाल उठते रहे हैं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इस तरह की सीधी साजिश के आरोपों ने चिंताओं को और बढ़ा दिया है। अधिकारी यह दावा कर रहे हैं कि स्थिति नियंत्रण में है और किसी भी संभावित खतरे को रोकने के लिए सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं। आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़े और खुलासे सामने आने की संभावना जताई जा रही है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 May 2026 17:58:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अमेरिका में रहस्यमयी पदार्थ से हुई 3 की मौत, बचाने गए राहतकर्मी भी पड़े बीमार</title>
                                    <description><![CDATA[न्यू मैक्सिको के माउंटेनएयर में रहस्यमयी पदार्थ के संपर्क में आने से 3 लोगों की मौत हो गई, कई राहतकर्मी भी बीमार पड़े।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/3-died-due-to-mysterious-substance-in-america-rescue-workers/article-53892"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/usa-new-mexico-mountainair-mysterious-substance.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">न्यू मैक्सिको के अमेरिका में एक अजीब स्थिति ने हड़कंप मचा दिया है। माउंटेनएयर के एक घर में चार लोग संदिग्ध परिस्थितियों में बेहोश मिले</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनमें से तीन की मौत हो गई। इस घटना के बाद जब कई राहतकर्मी मौके पर पहुंचे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो वे भी अचानक बीमार पड़ गए। अधिकारियों के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस पूरे मामले के चलते कुल </span>23<span lang="hi" xml:lang="hi"> लोगों को मेडिकल जांच और डी-कंटैमिनेशन प्रक्रिया से गुजरना पड़ा। घटना के बाद इलाके में भय और चिंताजनक माहौल बना हुआ है। पुलिस और हाजमैट टीम मामले की तहकीकात में जुटी है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">न्यू मैक्सिको स्टेट पुलिस ने बताया कि अल्बुकर्क शहर के पूर्व में स्थित ग्रामीण क्षेत्र माउंटेनएयर में संदिग्ध ड्रग ओवरडोज की सूचना मिली थी। जब फर्स्ट रिस्पॉन्डर्स वहां पहुंचे</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो राहतकर्मियों में से कुछ भी अनजाने पदार्थ के संपर्क में आ गए। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कई लोगों में मतली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चक्कर और कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके बाद सभी को तुरंत अस्पताल भेजा गया। यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू मैक्सिको अस्पताल ने पुष्टि की कि कुल </span>23<span lang="hi" xml:lang="hi"> लोगों की जांच की गई और उन्हें डी-कंटैमिनेशन प्रक्रिया से गुजरना पड़ा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनमें ज्यादातर पुलिसकर्मी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फायर फाइटर्स और मेडिकल स्टाफ शामिल थे। अधिकारियों ने बताया कि अधिकांश लोगों की हालत स्थिर है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन कुछ मरीजों की अभी भी निगरानी की जा रही है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">घटना के बाद अल्बुकर्क फायर रेस्क्यू की हाजमैट टीम भी मौके पर आई। टीम उस रहस्यमय पदार्थ की पहचान करने की कोशिश कर रही है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसने यह स्थिति उत्पन्न की। पुलिस अधिकारी विल्सन सिल्वर ने बताया कि शुरुआती जांच से यह संकेत मिलता है कि यह पदार्थ संपर्क के जरिए फैल सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हालांकि अभी तक यह पुष्टि नहीं हुई है कि यह हवा के माध्यम से भी फैल सकता है। सुरक्षा के दृष्टिकोण से</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इलाके को सील कर दिया गया है और घर की ओर जाने वाली सड़क भी बंद कर दी गई है। माउंटेनएयर के मेयर पीटर नीतो ने सोशल मीडिया पर कहा कि प्रारंभिक संकेत ड्रग्स से जुड़े मामले की ओर इशारा कर रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन पूरी जांच होने से पहले कुछ भी स्पष्ट कहना जल्दबाजी होगी। घटना के पश्चात स्थानीय लोगों ने इलाके में बढ़ती नशे की समस्या को लेकर चिंता जताई है और सोशल मीडिया पर प्रशासन से सख्त कदम उठाने की मांग की है। फिलहाल पुलिस पूरी घटना की जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि वह कौन- सा पदार्थ था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसने यह संकट खड़ा किया।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 May 2026 14:40:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पश्चिम एशिया तनाव BRICS में गूंजा, ईरान बोला- US-इजरायल की हरकतों की हो निंदा</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली BRICS बैठक में ईरान ने अमेरिका-इजरायल की निंदा की मांग की। जयशंकर ने पश्चिम एशिया संकट पर चिंता जताई और शांति की अपील की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/west-asia-tension-echoed-in-brics-iran-said-%E2%80%93-us-israels/article-53347"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-14t151151.621.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">नई दिल्ली में चल रही </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">BRICS <span lang="hi" xml:lang="hi">बैठक के दौरान अचानक पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का मुद्दा छा गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब ईरान ने अमेरिका और इजरायल पर गंभीर आरोप लगाते हुए सदस्य देशों से खुलकर निंदा करने की मांग की। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरगची ने कहा कि मौजूदा हालात सिर्फ एक देश से जुड़े नहीं हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि पूरी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का मामला बन चुके हैं। उनका कहना था कि पश्चिम एशिया में हो रही घटनाओं में अंतरराष्ट्रीय कानूनों की अनदेखी साफ नजर आती है और ऐसे में </span>BRICS <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे मंच को इस पर स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए। कई कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ईरान के इस बयान ने माहौल को गंभीर और संवेदनशील बना दिया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि यह मुद्दा अब केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं रह गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि भू-राजनीतिक टकराव से भी जुड़ता दिख रहा है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अरगची ने अपने संबोधन में कहा कि दुनिया एक नई वैश्विक व्यवस्था की ओर बढ़ रही है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें ग्लोबल साउथ के देशों की भूमिका बढ़ती जा रही है। उन्होंने </span>BRICS <span lang="hi" xml:lang="hi">को इस बदलती व्यवस्था का महत्वपूर्ण प्रतीक बताया और कहा कि यह समूह अब सिर्फ आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं रह गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि वैश्विक राजनीति में भी इसकी भूमिका बढ़ रही है। इसी दौरान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्होंने अमेरिका और इजरायल पर कई आरोप लगाए और कहा कि इन देशों की नीतियों ने क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित किया है। उन्होंने यह भी बताया कि पश्चिमी देशों के खिलाफ ईरान की स्थिति को केवल राष्ट्रीय सुरक्षा के नजरिए से नहीं देखना चाहिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि यह विकासशील देशों के हितों से भी जुड़ा है। बैठक में उन्होंने यह मांग की कि </span>BRICS <span lang="hi" xml:lang="hi">देश बिना किसी शर्त के अमेरिका और इजरायल की उन कार्रवाइयों की निंदा करें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिन्हें ईरान अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन मानता है। उनके बयान के बाद चर्चा का रुख कूटनीतिक तनाव की ओर मुड़ गया और कई प्रतिनिधियों ने इसे गंभीर वैश्विक चिंता का विषय बताया।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बैठक में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी पश्चिम एशिया की स्थिति को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में चल रहा बढ़ता तनाव</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर खतरा और ऊर्जा आपूर्ति पर असर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय है। जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत फिलिस्तीन मुद्दे पर दो-राष्ट्र समाधान का समर्थन करता है और क्षेत्र में शांति स्थापना के लिए कूटनीतिक प्रयासों को जरूरी मानता है। उन्होंने लेबनान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सीरिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सूडान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यमन और लीबिया जैसे देशों में चल रहे संकटों का भी जिक्र किया और कहा कि इन संघर्षों का सीधा असर आम नागरिकों पर पड़ रहा है। सूत्रों के मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जयशंकर ने यह भी कहा कि शांति को टुकड़ों में नहीं बांटा जा सकता और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान हर देश की जिम्मेदारी है। नई दिल्ली में 14 और 15 मई को हो रही इस </span>BRICS <span lang="hi" xml:lang="hi">बैठक में वैश्विक आर्थिक व्यवस्था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुरक्षा चुनौतियों और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा जारी है। भारत ने इस वर्ष </span>BRICS <span lang="hi" xml:lang="hi">की अध्यक्षता संभाली है और वह लगातार संतुलित और संवाद आधारित कूटनीति की वकालत कर रहा है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 May 2026 15:38:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिकी हमला, ईरान के 2 तेल टैंकर रोके, रातभर चली गोलीबारी</title>
                                    <description><![CDATA[स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिका ने ईरान के दो टैंकरों पर कार्रवाई की। गोलीबारी और मिसाइल हमलों के बीच मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/american-attack-in-strait-of-hormuz-stopped-2-oil-tankers/article-53011"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-09t174941.204.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में एक बार फिर हालात अचानक तनावपूर्ण हो गए हैं। अमेरिकी सेना ने ईरान के दो तेल टैंकरों पर कार्रवाई करते हुए उन्हें निष्क्रिय करने का दावा किया है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इलाके में पूरी रात तनाव बना रहा और दोनों पक्षों के बीच भारी गोलीबारी की खबरें सामने आईं। इस घटनाक्रम के बाद मिडिल ईस्ट में बड़े संघर्ष की आशंका फिर तेज हो गई है। वहीं संयुक्त अरब अमीरात ने भी दावा किया है कि उसके ऊपर ईरान की ओर से मिसाइल और ड्रोन हमले किए गए। हालांकि इन दावों को लेकर दोनों पक्षों की तरफ से अलग-अलग बयान सामने आ रहे हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार ईरान के ये टैंकर अमेरिकी नाकाबंदी को तोड़ने की कोशिश कर रहे थे। बताया जा रहा है कि अमेरिकी नौसेना ने पहले कुछ सैन्य जहाजों पर संभावित हमले को रोका और उसके बाद जवाबी कार्रवाई करते हुए होर्मुज के आसपास मौजूद ईरानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इसके कुछ देर बाद दो तेल टैंकरों पर ऑपरेशन किया गया। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक टैंकरों को पूरी तरह डुबोया नहीं गया लेकिन उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया गया। इलाके में मौजूद कई जहाजों को हाई अलर्ट पर रखा गया है और समुद्री रास्तों की निगरानी बढ़ा दी गई है। हालात ऐसे हैं कि वैश्विक बाजार भी एक बार फिर दबाव में दिखाई दे रहे हैं क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया की ऊर्जा सप्लाई का बेहद अहम रास्ता माना जाता है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">दरअसल 28 फरवरी के बाद से यह जलमार्ग लगातार विवाद के केंद्र में बना हुआ है। अमेरिका और इजरायल की ओर से सैन्य कार्रवाई शुरू होने के बाद ईरान ने इस क्षेत्र में आवाजाही को सीमित कर दिया था। इसके चलते कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया और कई देशों की चिंता बढ़ गई। अप्रैल में अमेरिका और ईरान के बीच हुई शांति वार्ता भी बेनतीजा खत्म हुई थी। उसके बाद से दोनों देशों के बीच बयानबाजी और सैन्य गतिविधियां लगातार बढ़ती गईं। अब ताजा हमले के बाद स्थिति और संवेदनशील मानी जा रही है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा है कि अगर अमेरिकी हितों को चुनौती दी गई तो जवाब दिया जाएगा। वहीं ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिकी कार्रवाई को उकसाने वाला कदम बताया है और इसे संघर्षविराम का उल्लंघन करार दिया है। इस बीच शहबाज़ शरीफ़ ने कहा कि पाकिस्तान दोनों देशों के संपर्क में है और तनाव कम करने की कोशिश कर रहा है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 17:54:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ईरान-अमेरिका तनाव के बीच ट्रंप की चेतावनी, बोले- सीजफायर टूटा तो दिखेगा बड़ा धमाका</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान-अमेरिका तनाव के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने सीजफायर पर बड़ा बयान दिया। होर्मुज के पास सैन्य झड़पों के बाद अमेरिका ने जवाबी कार्रवाई का दावा किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/amidst-iran-america-tension-trump-warns-if-ceasefire-is-broken-big/article-52921"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-08t144038.308.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान सामने आया है। ट्रंप ने दावा किया है कि दोनों देशों के बीच घोषित सीजफायर अभी भी लागू है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">हालांकि हाल के दिनों में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास सैन्य गतिविधियां और झड़पें लगातार बढ़ी हैं। वॉशिंगटन में मीडिया से बातचीत के दौरान ट्रंप ने काफी आक्रामक अंदाज में कहा कि अगर यह सीजफायर टूटा तो दुनिया को उसका असर तुरंत दिखाई देगा। उन्होंने कहा</span>, “<span lang="hi" xml:lang="hi">आपको यह जानने की जरूरत नहीं पड़ेगी कि सीजफायर खत्म हुआ या नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बस ईरान की तरफ उठती हुई रोशनी देख लेंगे।</span>” <span lang="hi" xml:lang="hi">ट्रंप के इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि अमेरिका अब ईरान को लेकर पहले से ज्यादा सख्त रुख में दिखाई दे रहा है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बताया जा रहा है कि हाल ही में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास अमेरिकी नौसेना के जहाजों को निशाना बनाने की कोशिश की गई थी। अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">CENTCOM <span lang="hi" xml:lang="hi">के मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अमेरिकी युद्धपोत यूएसएस ट्रक्सटन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यूएसएस राफेल पेराल्टा और यूएसएस मेसन ओमान की खाड़ी की ओर बढ़ रहे थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तभी उन पर मिसाइल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ड्रोन और छोटी नावों के जरिए हमला किया गया। हालांकि अमेरिकी सेना ने दावा किया कि सभी हमलों को बीच रास्ते में ही नाकाम कर दिया गया और किसी जहाज को नुकसान नहीं पहुंचा। अधिकारियों के अनुसार जवाबी कार्रवाई में ईरानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर इन हमलों में हो रहा था। देर रात तक अमेरिकी रक्षा विभाग की तरफ से लगातार अपडेट जारी किए जाते रहे। इलाके में तनाव काफी ज्यादा बताया जा रहा है और समुद्री रास्तों पर निगरानी भी बढ़ा दी गई है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर भी इस पूरे घटनाक्रम को लेकर कई पोस्ट किए। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी सेना ने </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">“<span lang="hi" xml:lang="hi">पूरी ताकत</span>” <span lang="hi" xml:lang="hi">से जवाब दिया और ईरानी हमलावरों को भारी नुकसान पहुंचाया गया। ट्रंप ने लिखा कि कई छोटी नावें तबाह हुईं और मिसाइलों व ड्रोन को अमेरिकी डिफेंस सिस्टम ने हवा में ही खत्म कर दिया। बातचीत के दौरान उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के साथ समझौते की संभावना पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। </span>“<span lang="hi" xml:lang="hi">डील हो सकती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नहीं भी हो सकती</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ये किसी भी दिन तय हो सकता है</span>,” <span lang="hi" xml:lang="hi">ट्रंप ने कहा। हालांकि उनके बयान में सख्ती ज्यादा दिखाई दी।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
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                <pubDate>Fri, 08 May 2026 14:47:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>तेल संकट के बीच बड़ी डील, होर्मुज मार्ग खोलने पर राजी हुए अमेरिका-ईरान</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर सहमति बनने की खबर, फंसे जहाजों को जल्द मिल सकती है निकलने की अनुमति।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/america-iran-agree-to-open-hormuz-passage-in-big-deal-amid/article-52854"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-07t154500.443.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव के बीच अब राहत की खबर सामने आ रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों देशों के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर एक अहम सहमति बनी है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके तहत अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी में धीरे-धीरे ढील दी जाएगी और बदले में ईरान रणनीतिक रूप से बेहद अहम </span>‘<span lang="hi" xml:lang="hi">स्ट्रेट ऑफ होर्मुज</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">को चरणबद्ध तरीके से फिर से खोलने पर राजी हुआ है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक आने वाले कुछ घंटों में वहां फंसे कई व्यापारिक जहाजों को निकलने की अनुमति मिल सकती है। पिछले कुछ दिनों से इस समुद्री मार्ग पर हालात काफी तनावपूर्ण बने हुए थे और दुनिया भर की नजरें इसी इलाके पर टिकी थीं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अरबी मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि दोनों पक्षों के बीच बैकचैनल बातचीत लगातार चल रही थी। बताया जा रहा है कि गुरुवार देर रात तक कई दौर की बातचीत के बाद स्थिति नरम पड़नी शुरू हुई। अमेरिका-ईरान संघर्ष तेज होने के बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया था। इसके बाद दुनिया के कई देशों की तेल और गैस सप्लाई प्रभावित होने लगी थी। हालात ऐसे हो गए थे कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अचानक उछाल देखने को मिला। कई शिपिंग कंपनियों ने अपने जहाजों के रूट बदल दिए थे जबकि कुछ जहाज इसी मार्ग में फंस गए थे। समुद्री व्यापार से जुड़े विशेषज्ञ लगातार चेतावनी दे रहे थे कि अगर यह संकट लंबा खिंचता है तो एशिया और यूरोप के कई देशों में ऊर्जा संकट गहरा सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में गिना जाता है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। ऐसे में इसके बंद होने का असर सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार पर पड़ा। शुरुआती रिपोर्ट्स में कहा गया था कि अमेरिकी नौसेना ने इलाके में अपनी निगरानी बढ़ा दी थी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि ईरान ने भी सैन्य गतिविधियां तेज कर दी थीं। इसी बीच अमेरिकी लड़ाकू विमान द्वारा ईरानी तेल टैंकर को निशाना बनाने की खबर ने तनाव को और बढ़ा दिया था। बताया गया कि हमले में टैंकर के रडर हिस्से को नुकसान पहुंचा था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे जहाज की दिशा नियंत्रित करने में दिक्कत आई। हालांकि इस घटना के बाद दोनों देशों के बीच बयानबाजी भी काफी तेज हो गई थी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने समझौता नहीं होने की स्थिति में ईरान पर बड़े हमले की चेतावनी दी थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं ईरान की तरफ से भी जवाबी कार्रवाई की बात कही गई थी।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अब जो संकेत सामने आ रहे हैं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनसे माना जा रहा है कि फिलहाल टकराव टालने की कोशिश की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार समुद्री मार्ग को पूरी तरह सामान्य होने में थोड़ा वक्त लग सकता है क्योंकि सुरक्षा जांच और जहाजों की आवाजाही को चरणबद्ध तरीके से बहाल किया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय बाजार भी इस खबर पर नजर बनाए हुए हैं। तेल कारोबारियों और शिपिंग कंपनियों को उम्मीद है कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से खुलता है तो कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता लौट सकती है। हालांकि अभी तक अमेरिका और ईरान की ओर से इस समझौते को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। ऐसे में दुनिया फिलहाल अगले कुछ घंटों का इंतजार कर रही है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
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                <pubDate>Thu, 07 May 2026 16:25:26 +0530</pubDate>
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