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                <title>Spirituality - दैनिक जागरण</title>
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                            <item>
                <title>जगन्नाथ रथयात्रा की परंपरा पर नया विवाद, पुरी गजपति महाराज ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से की हस्तक्षेप की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[ISKCON द्वारा अलग-अलग तिथियों पर रथयात्रा और स्नान यात्रा आयोजित करने पर जताई आपत्ति, शास्त्रीय परंपराओं की रक्षा और धार्मिक मर्यादा बनाए रखने की अपील।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/6a507984676f8/article-58357"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/jagannath-rath-yatra.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा को लेकर एक बार फिर परंपरा और आधुनिक व्यवस्थाओं के बीच विवाद गहरा गया है। ओडिशा के पुरी स्थित श्रीजगन्नाथ मंदिर के गजपति महाराज दिव्यसिंह देव ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर प्राचीन धार्मिक परंपराओं की रक्षा करने की मांग की है। उन्होंने विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्यरत इस्कॉन (ISKCON) द्वारा अलग-अलग तिथियों पर रथयात्रा और स्नान यात्रा आयोजित किए जाने पर गंभीर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि यह परंपरा, शास्त्रों और भगवान जगन्नाथ की निर्धारित धार्मिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं है तथा इससे करोड़ों श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं प्रभावित हो रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">8 जुलाई को लिखे गए इस पत्र में गजपति महाराज ने कहा कि जगन्नाथ संस्कृति केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं बल्कि सदियों पुरानी आध्यात्मिक परंपरा का प्रतीक है। ऐसे में यदि अलग-अलग संस्थाएं अपनी सुविधा के अनुसार रथयात्रा की तिथियां तय करेंगी तो मूल परंपरा कमजोर होगी और श्रद्धालुओं के बीच भ्रम की स्थिति पैदा होगी। उन्होंने केंद्र सरकार से अनुरोध किया कि इस विषय पर गंभीरता से विचार कर उचित कदम उठाए जाएं, ताकि भगवान जगन्नाथ की प्राचीन परंपराओं की गरिमा बनी रहे।</p>
<p style="text-align:justify;">गजपति महाराज दिव्यसिंह देव केवल पुरी राजघराने के प्रमुख ही नहीं, बल्कि श्रीजगन्नाथ मंदिर प्रबंधन समिति (SJTMC) के स्थायी अध्यक्ष भी हैं। जगन्नाथ परंपरा में उन्हें 'ठाकुर राजा' का विशेष सम्मान प्राप्त है। धार्मिक मान्यता के अनुसार वे भगवान जगन्नाथ के प्रथम सेवक माने जाते हैं। हर वर्ष रथयात्रा के दौरान तीनों रथों पर सोने की झाड़ू से सफाई करने की प्रसिद्ध 'छेरा पंहरा' सेवा भी गजपति महाराज द्वारा ही संपन्न की जाती है। यह सेवा राजसत्ता के बजाय भगवान के प्रति पूर्ण समर्पण और सेवा भाव का प्रतीक मानी जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">दिव्यसिंह देव का राज्याभिषेक वर्ष 1970 में मात्र 17 वर्ष की आयु में हुआ था। उन्होंने विधि की उच्च शिक्षा प्राप्त की है और लंबे समय से श्रीजगन्नाथ मंदिर की धार्मिक व्यवस्थाओं तथा परंपराओं के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। ऐसे में उनके द्वारा उठाया गया यह मुद्दा धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विवाद की मुख्य वजह इस वर्ष विभिन्न देशों में अलग-अलग समय पर आयोजित रथयात्राएं हैं। इस्कॉन ने जून और जुलाई के दौरान लंदन, न्यूयॉर्क तथा सिडनी सहित कई शहरों में रथयात्रा निकाली, जबकि पुरी में इस वर्ष भगवान जगन्नाथ की मुख्य रथयात्रा 16 जुलाई को आयोजित होनी है। इसके अलावा स्नान पूर्णिमा का आयोजन 29 जून को हुआ था। गजपति महाराज का कहना है कि शास्त्रों के अनुसार इन धार्मिक आयोजनों की निश्चित तिथियां निर्धारित हैं और उनसे अलग जाकर आयोजन करना उचित नहीं माना जा सकता।</p>
<p style="text-align:justify;">गजपति महाराज ने मध्य प्रदेश में प्रस्तावित रथयात्राओं पर भी सवाल उठाए हैं। जानकारी के अनुसार उज्जैन स्थित इस्कॉन मंदिर द्वारा 16 से 25 जुलाई के बीच राज्य के 66 स्थानों पर रथयात्रा निकालने की योजना बनाई गई है। इस पर आपत्ति जताते हुए उन्होंने कहा कि धार्मिक ग्रंथों में रथयात्रा को आषाढ़ शुक्ल द्वितीया से प्रारंभ होने वाला नौ दिवसीय उत्सव बताया गया है। इसलिए अलग-अलग स्थानों पर अलग तिथियों में रथयात्रा आयोजित करना शास्त्रीय परंपराओं के अनुरूप नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने अपने पत्र में स्कंद पुराण का भी उल्लेख किया है। उनके अनुसार महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित स्कंद पुराण में स्वयं भगवान जगन्नाथ ने स्नान यात्रा और रथयात्रा की तिथियों का उल्लेख किया है। ऐसे में इन तिथियों में परिवर्तन करना धार्मिक दृष्टि से उचित नहीं माना जा सकता। गजपति महाराज का मानना है कि यदि इस प्रकार की परंपराएं लगातार बदलती रहीं तो आने वाली पीढ़ियों तक मूल धार्मिक स्वरूप सुरक्षित रखना कठिन हो जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी ओर, इस्कॉन ने अपने पक्ष में स्पष्ट किया है कि उसका उद्देश्य किसी भी परंपरा का उल्लंघन करना नहीं है। संगठन का कहना है कि भगवान जगन्नाथ केवल पुरी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरी दुनिया के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र हैं। विदेशों में स्थानीय परिस्थितियां, सरकारी नियम, जलवायु और प्रशासनिक व्यवस्थाएं अलग-अलग होती हैं। कई देशों में निर्धारित तिथि पर विशाल रथयात्रा निकालने की अनुमति या आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध नहीं हो पातीं। इसलिए स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग तिथियों पर आयोजन किया जाता है, ताकि अधिक से अधिक श्रद्धालु इसमें शामिल हो सकें।</p>
<p style="text-align:justify;">इस्कॉन ने पहले भी स्पष्ट किया था कि रूस सहित कई देशों में मौसम और प्रशासनिक नियमों के कारण शास्त्रों में वर्णित तिथियों पर रथयात्रा आयोजित करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं होता। संगठन का कहना है कि उसका उद्देश्य केवल भगवान जगन्नाथ की भक्ति और भारतीय संस्कृति का वैश्विक स्तर पर प्रचार-प्रसार करना है। रथयात्रा को लेकर यह विवाद पहली बार सामने नहीं आया है। वर्ष 2024 और 2025 में भी पुरी के गजपति महाराज ने इस्कॉन से अनुरोध किया था कि विदेशों में भी रथयात्रा पुरी के धार्मिक पंचांग के अनुसार आयोजित की जाए। हालांकि उस समय भी इस्कॉन ने स्थानीय परिस्थितियों का हवाला देते हुए अपने कार्यक्रमों का बचाव किया था। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 10:42:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तुलसीदास का अमूल्य संदेश: मीठी वाणी से बनते हैं रिश्ते, कठोर शब्द बिगाड़ देते हैं जीवन</title>
                                    <description><![CDATA['तुलसी मीठे बचन ते, सुख उपजत चहुँ ओर' दोहे में छिपा है मधुर वाणी, सकारात्मक व्यवहार और सफल जीवन का गहरा संदेश, जो आज भी उतना ही प्रासंगिक है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/mantras-of-life/write-800-words-news-article-without-link-in-hindi-with/article-57962"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/tulsidas-doha.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">भारतीय संत परंपरा में गोस्वामी तुलसीदास का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। उनकी रचनाएं केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला भी सिखाती हैं। उनके दोहे आज भी समाज को नैतिकता, सदाचार और व्यवहारिक ज्ञान का मार्ग दिखाते हैं। ऐसा ही एक प्रसिद्ध दोहा है—</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>"तुलसी मीठे बचन ते, सुख उपजत चहुँ ओर।<br />बसीकरन इक मंत्र है, परिहरू बचन कठोर॥"</strong></p>
<p style="text-align:justify;">इस दोहे में तुलसीदास जी ने मधुर वाणी की शक्ति और कठोर शब्दों के दुष्प्रभाव को बेहद सरल लेकिन प्रभावशाली तरीके से समझाया है। उनका संदेश है कि मनुष्य के शब्द ही उसकी सबसे बड़ी पहचान होते हैं। यदि हमारी वाणी मधुर होगी तो परिवार, समाज और कार्यस्थल हर जगह प्रेम, सम्मान और विश्वास का वातावरण बनेगा। वहीं कटु और कठोर शब्द रिश्तों में दूरियां पैदा कर सकते हैं। तुलसीदास जी कहते हैं कि मीठे वचन चारों ओर सुख और आनंद का वातावरण बना देते हैं। किसी व्यक्ति के चेहरे पर मुस्कान लाने के लिए हमेशा धन या उपहार की आवश्यकता नहीं होती। कई बार सम्मानपूर्वक बोले गए दो मधुर शब्द ही किसी का दिन बेहतर बना सकते हैं। यही कारण है कि भारतीय संस्कृति में वाणी की मधुरता को सबसे बड़ा आभूषण माना गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">आज के समय में यह संदेश पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। आधुनिक जीवन की भागदौड़, तनाव और प्रतिस्पर्धा के बीच लोग अक्सर छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा कर बैठते हैं। सोशल मीडिया से लेकर घर और कार्यालय तक कई विवाद केवल इसलिए बढ़ जाते हैं क्योंकि लोग सोच-समझकर बोलने के बजाय आवेश में कठोर शब्दों का प्रयोग कर देते हैं। ऐसे में तुलसीदास का यह दोहा हमें संयमित और सकारात्मक संवाद की सीख देता है। मधुर वाणी केवल रिश्तों को मजबूत नहीं बनाती, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव डालती है। जब व्यक्ति प्रेम और सम्मान से बात करता है तो सामने वाला भी उसी प्रकार प्रतिक्रिया देता है। इससे विवाद कम होते हैं और आपसी विश्वास बढ़ता है। परिवार में बच्चों के साथ अच्छा व्यवहार, दंपति के बीच सम्मानजनक संवाद और कार्यस्थल पर सकारात्मक भाषा बेहतर माहौल तैयार करती है।</p>
<p style="text-align:justify;">तुलसीदास ने मीठी वाणी को 'वशीकरण मंत्र' कहा है। यहां वशीकरण का अर्थ किसी पर नियंत्रण पाना नहीं, बल्कि प्रेम, सम्मान और विश्वास से लोगों का दिल जीतना है। किसी भी व्यक्ति को सम्मान और स्नेह से संबोधित करने पर वह स्वाभाविक रूप से आपकी बात सुनने और समझने के लिए तैयार होता है। यही सफल नेतृत्व और प्रभावी व्यक्तित्व की सबसे बड़ी पहचान भी मानी जाती है। कठोर शब्दों के प्रभाव को समझना भी उतना ही आवश्यक है। एक बार बोले गए कटु वचन लंबे समय तक लोगों के मन में रह जाते हैं। कई रिश्ते केवल इसलिए टूट जाते हैं क्योंकि समय पर माफी नहीं मांगी गई या गुस्से में ऐसे शब्द कह दिए गए जिन्हें वापस नहीं लिया जा सकता। इसलिए भारतीय संस्कृति में हमेशा सोच-समझकर बोलने और सत्य को भी प्रिय भाषा में कहने की सलाह दी गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">आज कॉर्पोरेट जगत में भी 'कम्युनिकेशन स्किल' को सफलता की सबसे महत्वपूर्ण कुंजी माना जाता है। इंटरव्यू से लेकर टीम मैनेजमेंट तक व्यक्ति की भाषा, व्यवहार और संवाद शैली उसके व्यक्तित्व का मूल्यांकन करती है। मधुर वाणी आत्मविश्वास बढ़ाती है और लोगों के बीच सकारात्मक छवि बनाती है। बच्चों के संस्कारों में भी भाषा का विशेष महत्व है। बच्चे वही सीखते हैं जो अपने घर में सुनते और देखते हैं। यदि परिवार में सम्मानपूर्वक बातचीत होती है तो बच्चों का व्यवहार भी सकारात्मक बनता है। वहीं लगातार कठोर भाषा सुनने वाले बच्चों के स्वभाव पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए माता-पिता और शिक्षकों की जिम्मेदारी है कि वे स्वयं भी संयमित भाषा का प्रयोग करें। धार्मिक दृष्टि से भी मधुर वाणी को पुण्य का कार्य माना गया है। अनेक ग्रंथों में कहा गया है कि मीठे शब्द न केवल दूसरों को सुख देते हैं, बल्कि बोलने वाले के भीतर भी सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं। यही कारण है कि संत-महात्मा हमेशा विनम्रता और मधुर व्यवहार को सबसे बड़ा गुण बताते आए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">डिजिटल युग में जहां सोशल मीडिया पर विचारों का आदान-प्रदान तेजी से होता है, वहां भी इस दोहे का महत्व और बढ़ जाता है। बिना सोचे-समझे की गई टिप्पणी या कठोर शब्द कई बार विवाद का कारण बन जाते हैं। यदि लोग संयम, शालीनता और सम्मान के साथ अपनी बात रखें तो संवाद अधिक सकारात्मक और सार्थक बन सकता है। तुलसीदास का यह दोहा केवल नैतिक शिक्षा नहीं, बल्कि सफल और संतुलित जीवन का व्यावहारिक सूत्र भी है। यह हमें याद दिलाता है कि शब्दों में अपार शक्ति होती है। मधुर वाणी से जहां रिश्ते मजबूत होते हैं, वहीं कठोर शब्द वर्षों की नजदीकियों को भी समाप्त कर सकते हैं। इसलिए हर व्यक्ति को अपनी भाषा और व्यवहार पर विशेष ध्यान देना चाहिए। यदि समाज में अधिक से अधिक लोग इस संदेश को अपनाएं तो परिवारों में प्रेम, कार्यस्थलों पर सहयोग और समाज में आपसी सौहार्द का वातावरण और अधिक मजबूत हो सकता है। यही तुलसीदास जी के इस अमर दोहे का वास्तविक संदेश है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>जीवन के मंत्र</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 17:47:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रायपुर में 8 से 14 जुलाई तक देवकीनंदन ठाकुर की श्रीमद्भागवत कथा, ‘नो तिलक-नो एंट्री’ नियम रहेगा लागू</title>
                                    <description><![CDATA[बूढ़ापारा इंडोर स्टेडियम में सात दिवसीय धार्मिक आयोजन, प्रतिदिन दोपहर 3:30 बजे से कथा; कलश यात्रा, श्रीकृष्ण जन्मोत्सव, महारास सहित कई विशेष कार्यक्रम होंगे, आस्था चैनल और यूट्यूब पर होगा सीधा प्रसारण।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/devkinandan-thakurs-shrimad-bhagwat-katha-no-tilak-no-entry-rule-will/article-57949"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/devkinandan-thakur.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">राजधानी रायपुर एक बार फिर भक्ति, आध्यात्म और सनातन संस्कृति के रंग में रंगने जा रही है। शहर के बूढ़ापारा स्थित इंडोर स्टेडियम में 8 जुलाई से 14 जुलाई तक प्रसिद्ध कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर के श्रीमुख से श्रीमद्भागवत कथा का भव्य आयोजन किया जाएगा। यह सात दिवसीय धार्मिक आयोजन अंतरराष्ट्रीय वैश्य फेडरेशन के तत्वावधान में आयोजित होगा, जिसमें छत्तीसगढ़ सहित देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।</p>
<p style="text-align:justify;">आयोजकों के अनुसार कथा का शुभारंभ प्रतिदिन दोपहर 3:30 बजे होगा। सात दिनों तक श्रीमद्भागवत की विभिन्न लीलाओं, भगवान श्रीकृष्ण के जीवन प्रसंगों और सनातन धर्म के मूल सिद्धांतों पर आधारित प्रवचन होंगे। कथा के साथ भजन, संकीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों का भी आयोजन किया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बार आयोजन की सबसे विशेष बात ‘नो तिलक, नो एंट्री’ अभियान है। आयोजकों ने श्रद्धालुओं से आग्रह किया है कि कथा स्थल पर प्रवेश से पहले सभी अपने माथे पर तिलक अवश्य लगाकर आएं। उनका कहना है कि यह केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति के सम्मान और उसकी पहचान का प्रतीक है। इस पहल का उद्देश्य लोगों में अपनी धार्मिक परंपराओं के प्रति जागरूकता और गौरव की भावना विकसित करना है।</p>
<p style="text-align:justify;">आयोजन समिति का मानना है कि वर्तमान समय में भारतीय संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के लिए ऐसे प्रयास आवश्यक हैं। तिलक लगाने की परंपरा भारतीय संस्कृति में सदियों से चली आ रही है और इसे आध्यात्मिक ऊर्जा, सकारात्मकता तथा धार्मिक पहचान का प्रतीक माना जाता है। इसी संदेश को व्यापक स्तर पर पहुंचाने के लिए कथा स्थल पर इस नियम को लागू किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">कार्यक्रम की शुरुआत 8 जुलाई को भव्य कलश यात्रा और भागवत महात्म्य के साथ होगी। इस अवसर पर बड़ी संख्या में महिलाएं और श्रद्धालु पारंपरिक वेशभूषा में कलश यात्रा में शामिल होंगे। इसके बाद प्रतिदिन श्रीमद्भागवत के विभिन्न प्रसंगों का विस्तृत वर्णन किया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">9 जुलाई को भीष्म पितामह, माता कुंती के आगमन तथा पूतना वध की कथा सुनाई जाएगी। 10 जुलाई को गोवर्धन पूजा, अन्नकूट महोत्सव और छप्पन भोग का विशेष आयोजन रहेगा। श्रद्धालुओं को भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और गोवर्धन पर्वत की महिमा से जुड़े प्रसंग सुनने का अवसर मिलेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">11 जुलाई को वामन अवतार, भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन और श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का भव्य आयोजन किया जाएगा। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के दौरान आकर्षक झांकियां, भजन और विशेष सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आयोजित की जाएंगी, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">12 जुलाई को भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं, माखन चोरी, गोवर्धन पूजन और छप्पन भोग का आयोजन होगा। इसके बाद 13 जुलाई को महारास, सुदामा मिलन, रुक्मिणी विवाह और चिंतक विदाई जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक प्रसंगों का वर्णन किया जाएगा। इन आयोजनों में भक्ति संगीत और धार्मिक प्रस्तुतियां भी आकर्षण का केंद्र रहेंगी।</p>
<p style="text-align:justify;">सात दिवसीय कथा का समापन 14 जुलाई को सुदामा चरित्र, कंस वध और हवन-पूजन के साथ होगा। अंतिम दिन श्रद्धालु सामूहिक रूप से पूर्णाहुति में शामिल होंगे और धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से आयोजन का समापन किया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">आयोजन समिति ने बताया कि कथा में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएं की जा रही हैं। कथा स्थल पर बैठने, पेयजल, पार्किंग, सुरक्षा और चिकित्सा जैसी सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी। प्रशासन और स्वयंसेवकों की टीम आयोजन को व्यवस्थित और सुचारु रूप से संचालित करने में सहयोग करेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">जो श्रद्धालु किसी कारणवश रायपुर नहीं पहुंच पाएंगे, उनके लिए कथा का सीधा प्रसारण भी किया जाएगा। आयोजन का लाइव टेलीकास्ट आस्था चैनल और यूट्यूब के माध्यम से प्रसारित होगा, जिससे देश-विदेश में बैठे श्रद्धालु भी कथा का लाभ ले सकेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">आयोजन से पहले अंतरराष्ट्रीय वैश्य फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष योगेश अग्रवाल के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका से राजभवन में मुलाकात कर उन्हें कथा में शामिल होने का निमंत्रण दिया। प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश महामंत्री एवं प्रवक्ता राजकुमार राठी सहित कई पदाधिकारी उपस्थित रहे। राज्यपाल ने आयोजन के लिए शुभकामनाएं देते हुए निमंत्रण स्वीकार किया और धार्मिक आयोजनों के सामाजिक महत्व की सराहना की।</p>
<p style="text-align:justify;">आयोजन समिति का कहना है कि श्रीमद्भागवत कथा केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज में नैतिक मूल्यों, पारिवारिक संस्कारों और भारतीय संस्कृति के संरक्षण का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। देवकीनंदन ठाकुर अपने सहज, सरल और प्रेरणादायी प्रवचनों के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध हैं। उनके कथा कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं और सामाजिक समरसता, आध्यात्मिक जागरूकता तथा सांस्कृतिक मूल्यों को बढ़ावा मिलता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 17:23:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>संत कबीर का अमर संदेश: 'धीरे-धीरे रे मना' में छिपा है सफल जीवन का मंत्र</title>
                                    <description><![CDATA[संत कबीर दास का प्रसिद्ध दोहा आज भी धैर्य, निरंतर प्रयास और सही समय का महत्व सिखाता है। बदलती जीवनशैली के बीच यह संदेश मानसिक संतुलन और सफलता की राह दिखाता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/mantras-of-life/the-mantra-of-successful-life-is-hidden-in-the-immortal/article-57601"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/sant-kabir-das.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">भारतीय संत परंपरा में संत कबीर दास का नाम उन महान संतों में लिया जाता है, जिनकी वाणी सदियों बाद भी लोगों के जीवन को नई दिशा देती है। उनके दोहे केवल साहित्य का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि व्यवहारिक जीवन के ऐसे सूत्र हैं, जो हर दौर में प्रासंगिक बने रहते हैं। आज की तेज रफ्तार जिंदगी में, जब हर व्यक्ति कम समय में बड़ी सफलता हासिल करना चाहता है, तब संत कबीर का प्रसिद्ध दोहा "धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय। माली सींचे सौ घड़ा, ऋतु आए फल होय।।" पहले से कहीं अधिक अर्थपूर्ण नजर आता है। यह दोहा बताता है कि जीवन में हर काम का अपना समय होता है और धैर्य के बिना किसी भी सफलता को लंबे समय तक हासिल नहीं किया जा सकता।</p>
<p>संत कबीर ने इस दोहे में एक साधारण उदाहरण के माध्यम से जीवन का गहरा दर्शन समझाया है। जैसे एक माली पौधे को रोज पानी देता है, उसकी देखभाल करता है, लेकिन फल तभी मिलता है जब उसका मौसम आता है। चाहे वह कितना भी अधिक पानी क्यों न दे, प्रकृति के नियमों से पहले फल नहीं लग सकता। ठीक यही बात इंसान के जीवन पर भी लागू होती है। मेहनत करना हमारे हाथ में है, लेकिन उसका परिणाम सही समय आने पर ही मिलता है। यही कारण है कि कबीर धैर्य को जीवन की सबसे बड़ी शक्ति मानते हैं।</p>
<p>आज के समय में लोग अक्सर तुरंत परिणाम की उम्मीद रखते हैं। पढ़ाई हो, नौकरी हो, व्यापार हो या फिर व्यक्तिगत जीवन, हर क्षेत्र में जल्द सफलता पाने की होड़ दिखाई देती है। सोशल मीडिया और डिजिटल दुनिया ने भी इस मानसिकता को और बढ़ाया है। लोग दूसरों की उपलब्धियां देखकर अपनी तुलना करने लगते हैं और अगर उन्हें जल्दी सफलता नहीं मिलती तो निराश हो जाते हैं। ऐसे समय में संत कबीर का यह संदेश याद दिलाता है कि हर व्यक्ति की यात्रा अलग होती है और हर सफलता का अपना समय तय होता है। जल्दबाजी कई बार सही फैसलों को भी गलत दिशा में ले जाती है।</p>
<p>विशेषज्ञ भी मानते हैं कि धैर्य केवल एक गुण नहीं, बल्कि मानसिक मजबूती का प्रतीक है। जो व्यक्ति कठिन परिस्थितियों में भी संयम बनाए रखता है और लगातार प्रयास करता रहता है, वही लंबे समय में बेहतर परिणाम प्राप्त करता है। जीवन में आने वाली चुनौतियां व्यक्ति की परीक्षा लेती हैं, लेकिन धैर्य और सकारात्मक सोच उसे आगे बढ़ने की ताकत देती है। संत कबीर का यह दोहा इसी मानसिक शक्ति को विकसित करने की प्रेरणा देता है। यह बताता है कि असफलता अंत नहीं होती, बल्कि आगे की सफलता की तैयारी होती है।</p>
<p>शिक्षा के क्षेत्र में भी यह दोहा विद्यार्थियों के लिए बेहद उपयोगी माना जाता है। कई छात्र परीक्षा या प्रतियोगी परीक्षाओं में एक-दो बार असफल होने के बाद निराश हो जाते हैं। लेकिन सफलता अक्सर लगातार अभ्यास और धैर्य का परिणाम होती है। इसी तरह नौकरी की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए भी यह संदेश महत्वपूर्ण है। हर प्रयास तुरंत परिणाम नहीं देता, लेकिन लगातार मेहनत अंततः नई संभावनाओं के द्वार खोलती है। यही कारण है कि कई शिक्षक और प्रेरक वक्ता आज भी अपने संबोधन में संत कबीर के इस दोहे का उल्लेख करते हैं।</p>
<p>व्यापार और करियर के क्षेत्र में भी यह विचार उतना ही प्रासंगिक है। कोई भी सफल व्यवसाय एक दिन में खड़ा नहीं होता। हर बड़े उद्योग की शुरुआत छोटे स्तर से होती है। समय के साथ अनुभव, मेहनत और सही निर्णय उसे सफलता तक पहुंचाते हैं। इसी प्रकार किसी भी पेशे में सम्मान और पहचान पाने के लिए लगातार सीखना और धैर्य बनाए रखना आवश्यक होता है। संत कबीर का संदेश बताता है कि सफलता की राह में शॉर्टकट नहीं होते। जो लोग प्रक्रिया पर भरोसा रखते हैं, वही अंततः अपने लक्ष्य तक पहुंचते हैं।</p>
<p>पारिवारिक जीवन में भी यह दोहा गहरा महत्व रखता है। रिश्तों में विश्वास, समझ और प्रेम समय के साथ मजबूत होते हैं। यदि हर छोटी बात पर जल्दबाजी में निर्णय लिए जाएं तो रिश्तों में दूरियां आ सकती हैं। धैर्यपूर्वक संवाद और एक-दूसरे को समझने की कोशिश रिश्तों को लंबे समय तक मजबूत बनाए रखती है। यही संदेश संत कबीर अपने सरल शब्दों में देते हैं कि जीवन की हर अच्छी चीज समय, मेहनत और संयम से ही प्राप्त होती है।</p>
<p>आध्यात्मिक दृष्टि से भी यह दोहा आत्मविश्वास और विश्वास दोनों का संतुलन सिखाता है। यह व्यक्ति को कर्म करने की प्रेरणा देता है, लेकिन परिणाम को लेकर अधीर होने से बचने की सीख भी देता है। भारतीय दर्शन में कर्म और धैर्य का जो महत्व बताया गया है, वही संत कबीर की वाणी में सहज और सरल रूप में दिखाई देता है। यही वजह है कि उनके दोहे आज भी गांव से लेकर शहर और विद्यालयों से लेकर आध्यात्मिक मंचों तक समान रूप से पढ़े और सुनाए जाते हैं।</p>
<p>आज जब जीवन की रफ्तार पहले से कहीं अधिक तेज हो चुकी है, तब संत कबीर का यह संदेश हमें ठहरकर सोचने की प्रेरणा देता है। यह सिखाता है कि सफलता केवल मंजिल तक पहुंचने का नाम नहीं, बल्कि सही दिशा में लगातार चलते रहने की प्रक्रिया भी है। धैर्य, मेहनत और समय का सम्मान करने वाला व्यक्ति ही जीवन में स्थायी सफलता और सच्ची संतुष्टि प्राप्त कर सकता है। यही कारण है कि सदियों पहले लिखा गया यह दोहा आज भी हर पीढ़ी के लिए जीवन का अमूल्य मंत्र बना हुआ है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>जीवन के मंत्र</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 09:45:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>प्रेमानंद जी महाराज के जीवन के 10 अनमोल मंत्र, जो बदल सकते हैं सोच, व्यवहार और जीवन की दिशा</title>
                                    <description><![CDATA[प्रेमानंद जी महाराज के प्रेरक जीवन मंत्र, भक्ति, सेवा, विनम्रता, संतोष और सकारात्मक सोच से जीवन को बेहतर बनाने का संदेश देते हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/mantras-of-life/10-precious-mantras-from-the-life-of-premanand-ji-maharaj/article-57453"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/premanand-ji-maharaj.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद जी महाराज आज देशभर में लाखों श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक प्रेरणा का स्रोत बन चुके हैं। उनके प्रवचन केवल धार्मिक विषयों तक सीमित नहीं रहते, बल्कि जीवन को सरल, सकारात्मक और संतुलित बनाने की सीख भी देते हैं। सोशल मीडिया से लेकर सत्संग सभाओं तक उनके विचार बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंच रहे हैं। प्रेमानंद जी महाराज का कहना है कि जीवन की सबसे बड़ी सफलता धन, पद या प्रसिद्धि नहीं, बल्कि मन की शांति और ईश्वर के प्रति सच्चा प्रेम है। उनका मानना है कि यदि व्यक्ति अपने व्यवहार, सोच और कर्म में थोड़ा बदलाव कर ले तो उसका जीवन पूरी तरह बदल सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रेमानंद जी महाराज हमेशा कहते हैं कि मनुष्य को सबसे पहले अपने भीतर झांकना चाहिए। दूसरों की गलतियां देखने से पहले अपनी कमियों को पहचानना आवश्यक है। उनका मानना है कि जब तक इंसान स्वयं को नहीं समझता, तब तक वह जीवन का वास्तविक आनंद नहीं ले सकता। वे बार-बार आत्मचिंतन पर जोर देते हैं और कहते हैं कि हर दिन कुछ समय अपने विचारों और कर्मों का मूल्यांकन करना चाहिए। यही आदत व्यक्ति को बेहतर इंसान बनाती है। उनके सबसे चर्चित संदेशों में से एक है कि भगवान से प्रेम करो, लेकिन स्वार्थ के लिए नहीं। प्रेमानंद जी कहते हैं कि अधिकांश लोग भगवान को तभी याद करते हैं जब उन्हें कोई परेशानी होती है। जबकि सच्ची भक्ति वह है जिसमें कोई लालच, भय या अपेक्षा न हो। यदि मन से भगवान का स्मरण किया जाए तो जीवन की कठिन परिस्थितियों का सामना करना भी आसान हो जाता है। उनके अनुसार भक्ति केवल मंदिर जाने तक सीमित नहीं है, बल्कि हर अच्छे कर्म में भगवान का अनुभव करना ही सच्ची उपासना है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रेमानंद जी महाराज सेवा को सबसे बड़ा धर्म मानते हैं। उनका कहना है कि किसी भूखे को भोजन कराना, किसी दुखी का सहारा बनना या किसी जरूरतमंद की मदद करना ही वास्तविक पूजा है। यदि व्यक्ति दूसरों की भलाई के लिए कार्य करता है तो ईश्वर स्वयं उसके जीवन की कठिनाइयों को कम कर देते हैं। वे बताते हैं कि सेवा कभी दिखावे के लिए नहीं करनी चाहिए। निस्वार्थ भाव से किया गया छोटा सा कार्य भी भगवान को प्रिय होता है। उनका एक और महत्वपूर्ण जीवन मंत्र है कि अहंकार मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है। प्रेमानंद जी कहते हैं कि जैसे ही व्यक्ति को अपनी सफलता, ज्ञान या धन पर घमंड होने लगता है, उसी समय उसका पतन शुरू हो जाता है। इसलिए हमेशा विनम्र रहना चाहिए। वे बताते हैं कि फल से लदा हुआ पेड़ हमेशा झुक जाता है। उसी प्रकार सच्चा ज्ञानी और सफल व्यक्ति भी हमेशा विनम्र रहता है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रेमानंद जी महाराज क्रोध को जीवन का सबसे बड़ा नुकसान मानते हैं। उनका कहना है कि कुछ क्षण का गुस्सा वर्षों पुराने रिश्तों को खत्म कर सकता है। इसलिए क्रोध आने पर तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय शांत रहने की आदत विकसित करनी चाहिए। वे बताते हैं कि धैर्य रखने वाला व्यक्ति कठिन परिस्थितियों में भी सही निर्णय ले पाता है। इसलिए संयम और धैर्य जीवन की सबसे बड़ी ताकत हैं। वे संतोष को भी सुखी जीवन का आधार मानते हैं। प्रेमानंद जी कहते हैं कि आज अधिकांश लोग दूसरों से तुलना करके दुखी रहते हैं। जबकि वास्तविक खुशी अपनी परिस्थितियों को स्वीकार करने और ईमानदारी से मेहनत करने में है। उनका मानना है कि मेहनत जरूर करें, लेकिन परिणाम को लेकर अत्यधिक चिंता न करें। जो व्यक्ति संतोष के साथ जीवन जीता है, वही वास्तविक आनंद का अनुभव करता है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रेमानंद जी महाराज का कहना है कि माता-पिता और गुरु का सम्मान करना हर व्यक्ति का कर्तव्य है। उनके अनुसार जिस घर में माता-पिता का आदर होता है, वहां सुख-समृद्धि बनी रहती है। गुरु केवल शिक्षा नहीं देते बल्कि जीवन जीने की सही दिशा भी दिखाते हैं। इसलिए उनके प्रति श्रद्धा और सम्मान बनाए रखना चाहिए। वे हमेशा सकारात्मक सोच रखने की सलाह देते हैं। उनका कहना है कि जीवन में कठिनाइयां हर किसी के सामने आती हैं, लेकिन सफल वही होता है जो विपरीत परिस्थितियों में भी उम्मीद नहीं छोड़ता। नकारात्मक विचार मनुष्य की ऊर्जा को कमजोर कर देते हैं, जबकि सकारात्मक सोच नई संभावनाओं के रास्ते खोलती है। इसलिए हर परिस्थिति में अच्छा सोचने और अच्छा करने का प्रयास करना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रेमानंद जी महाराज समय के महत्व पर भी विशेष बल देते हैं। उनका कहना है कि बीता हुआ समय कभी वापस नहीं आता। इसलिए हर दिन का सही उपयोग करना चाहिए। समय को व्यर्थ की बहस, ईर्ष्या, क्रोध और आलस्य में नष्ट करने के बजाय ज्ञान, सेवा और आत्मविकास में लगाना चाहिए। यही आदत भविष्य को बेहतर बनाती है। उनके प्रवचनों में बार-बार नाम जप का महत्व भी बताया जाता है। वे कहते हैं कि यदि व्यक्ति प्रतिदिन कुछ समय भगवान के नाम का स्मरण करे तो मन शांत होता है और नकारात्मक विचार धीरे-धीरे समाप्त होने लगते हैं। उनके अनुसार नाम जप केवल धार्मिक क्रिया नहीं बल्कि मानसिक शांति का सरल माध्यम भी है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रेमानंद जी महाराज का पूरा संदेश यही है कि जीवन को सरल रखें, दूसरों के प्रति प्रेम रखें, ईमानदारी से मेहनत करें और हर परिस्थिति में भगवान पर विश्वास बनाए रखें। वे बताते हैं कि सच्ची सफलता बाहरी उपलब्धियों से नहीं बल्कि मन की शांति, अच्छे संस्कार और दूसरों के प्रति करुणा से मिलती है। यदि व्यक्ति इन मूल्यों को अपने दैनिक जीवन में अपनाता है तो वह न केवल स्वयं खुश रह सकता है बल्कि समाज के लिए भी प्रेरणा बन सकता है। आज के तनावपूर्ण और भागदौड़ भरे जीवन में प्रेमानंद जी महाराज के ये जीवन मंत्र लोगों को मानसिक संतुलन, सकारात्मक सोच और आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करने का संदेश देते हैं। यही कारण है कि उनके विचार हर उम्र के लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। उनके अनुसार जीवन का सबसे बड़ा लक्ष्य केवल सफलता नहीं, बल्कि ऐसा व्यक्तित्व बनाना है जिससे स्वयं भी सुखी रहें और दूसरों के जीवन में भी खुशियां बांट सकें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>जीवन के मंत्र</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 00:01:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>संकष्टी चतुर्थी 3 जुलाई को, जानिए व्रत का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और धार्मिक महत्व</title>
                                    <description><![CDATA[3 जुलाई 2026 को मनाई जाएगी संकष्टी चतुर्थी, भगवान गणेश की पूजा, चंद्र दर्शन, व्रत विधि और शुभ मुहूर्त जानिए विस्तार से।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/religion/know-the-auspicious-time-of-sankashti-chaturthi-fast-on-3rd/article-57452"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/sankashti-chaturthi-2026-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">संकष्टी चतुर्थी का पर्व भगवान श्री गणेश की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार यह व्रत प्रत्येक माह कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा करने और पूरे श्रद्धाभाव से व्रत रखने से जीवन के सभी संकट दूर होते हैं तथा सुख, समृद्धि और सफलता का आशीर्वाद मिलता है। जुलाई 2026 की संकष्टी चतुर्थी 3 जुलाई, शुक्रवार को मनाई जाएगी। इस दिन देशभर के गणेश भक्त उपवास रखकर भगवान गणपति का पूजन करेंगे और रात्रि में चंद्र दर्शन के बाद व्रत का पारण करेंगे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार संकष्टी चतुर्थी का व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी माना जाता है जो जीवन में लगातार बाधाओं, आर्थिक परेशानियों, पारिवारिक तनाव या स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना कर रहे हों। पंचांग के अनुसार चतुर्थी तिथि 3 जुलाई 2026 को सुबह 11 बजकर 20 मिनट से शुरू होकर 4 जुलाई को दोपहर 12 बजकर 40 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर संकष्टी चतुर्थी का व्रत 3 जुलाई को रखा जाएगा। इस दिन शाम को भगवान गणेश की पूजा के बाद चंद्रमा के दर्शन का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि चंद्रमा को अर्घ्य दिए बिना यह व्रत पूर्ण नहीं माना जाता। इसलिए श्रद्धालु पूरे दिन उपवास रखने के बाद रात में चंद्र दर्शन करते हैं और फिर व्रत खोलते हैं। मंदिरों में भी विशेष पूजा-अर्चना और गणपति आरती का आयोजन किया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">'संकष्टी' शब्द संस्कृत भाषा से लिया गया है, जिसका अर्थ होता है संकटों से मुक्ति। वहीं 'चतुर्थी' का अर्थ है चंद्र पक्ष का चौथा दिन। इस प्रकार संकष्टी चतुर्थी वह पावन अवसर माना जाता है जब भगवान गणेश अपने भक्तों के सभी संकट दूर करते हैं। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और प्रथम पूज्य देव माना गया है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत उनके पूजन से ही होती है। इसलिए संकष्टी चतुर्थी का व्रत विशेष फलदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण किए जाते हैं। घर के मंदिर या पूजा स्थल को साफ करके भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की जाती है। इसके बाद दूर्वा घास, लाल फूल, सिंदूर, अक्षत, चंदन, धूप, दीप और मोदक का भोग अर्पित किया जाता है। भगवान गणेश के मंत्रों का जाप, गणेश अथर्वशीर्ष, संकटनाशन स्तोत्र और गणेश चालीसा का पाठ करना भी शुभ माना जाता है। कई श्रद्धालु पूरे दिन निर्जला व्रत रखते हैं, जबकि कुछ लोग फलाहार ग्रहण करते हैं। शाम के समय विशेष पूजा के बाद चंद्रमा को जल अर्पित कर व्रत का समापन किया जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश को मोदक, लड्डू और तिल से बने प्रसाद का विशेष भोग लगाया जाता है। माना जाता है कि गणेश जी को मोदक अत्यंत प्रिय हैं। पूजा के दौरान 21 दूर्वा, 21 लड्डू और लाल पुष्प अर्पित करने की भी परंपरा है। पूजा समाप्त होने के बाद परिवार के सभी सदस्य प्रसाद ग्रहण करते हैं और भगवान गणेश से सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। धार्मिक ग्रंथों में संकष्टी चतुर्थी का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि जो व्यक्ति नियमित रूप से इस व्रत का पालन करता है, उसके जीवन की कठिनाइयां धीरे-धीरे समाप्त होने लगती हैं। विद्यार्थियों को शिक्षा में सफलता, व्यापारियों को कारोबार में उन्नति, नौकरीपेशा लोगों को करियर में प्रगति और परिवार को सुख-शांति प्राप्त होती है। संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले दंपति भी श्रद्धापूर्वक यह व्रत रखते हैं। कई लोग इसे मानसिक शांति और आत्मिक ऊर्जा प्राप्त करने का भी माध्यम मानते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु सहित देश के कई राज्यों में संकष्टी चतुर्थी बड़े उत्साह के साथ मनाई जाती है। विशेष रूप से महाराष्ट्र में गणपति मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। कई स्थानों पर सामूहिक आरती और भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाता है। श्रद्धालु पूरे परिवार के साथ भगवान गणेश के दर्शन करने पहुंचते हैं और मंगलकामनाएं करते हैं। जुलाई 2026 की संकष्टी चतुर्थी शुक्रवार को पड़ रही है, इसलिए इसका धार्मिक महत्व और भी अधिक माना जा रहा है। हालांकि यह अंगारकी संकष्टी चतुर्थी नहीं है, क्योंकि अंगारकी संकष्टी तब होती है जब यह व्रत मंगलवार को पड़ता है। फिर भी शुक्रवार का दिन माता लक्ष्मी और भगवान गणेश दोनों की कृपा प्राप्त करने के लिए शुभ माना जाता है। ऐसे में श्रद्धालु इस दिन गणेश पूजा के साथ मां लक्ष्मी की आराधना भी कर सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"> व्रत केवल भोजन का त्याग नहीं बल्कि मन, वचन और कर्म की शुद्धि का भी माध्यम है। इसलिए इस दिन क्रोध, झूठ, विवाद और नकारात्मक विचारों से दूर रहकर भगवान गणेश का स्मरण करना चाहिए। जरूरतमंद लोगों की सहायता, दान-पुण्य और गौ सेवा जैसे कार्य भी इस दिन शुभ माने जाते हैं। ऐसा करने से भगवान गणेश की विशेष कृपा प्राप्त होती है।इस वर्ष 3 जुलाई को पड़ने वाली संकष्टी चतुर्थी पर देशभर के गणेश मंदिरों में विशेष आयोजन होंगे। श्रद्धालु पूरे विधि-विधान से पूजा कर अपने जीवन से विघ्नों के निवारण और सुख-समृद्धि की कामना करेंगे। धार्मिक मान्यता है कि सच्ची श्रद्धा और विश्वास के साथ किया गया यह व्रत भगवान गणेश को प्रसन्न करता है और भक्तों के जीवन में नई ऊर्जा, सफलता और खुशहाली का मार्ग प्रशस्त करता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 00:01:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>गुरु पूर्णिमा 2026: 5 जुलाई, रविवार को मनाया जाएगा गुरु श्रद्धा और ज्ञान का महापर्व</title>
                                    <description><![CDATA[5 जुलाई 2026, रविवार को देशभर में गुरु पूर्णिमा श्रद्धा और आस्था के साथ मनाई जाएगी। इस दिन गुरु पूजन, दान, सत्संग और आध्यात्मिक साधना का विशेष महत्व माना जाता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/festival-festival/guru-purnima-2026-the-great-festival-of-guru-shraddha-and/article-57455"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/guru-purnima-2026.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सदैव सर्वोच्च माना गया है। गुरु केवल शिक्षा देने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि जीवन की सही दिशा दिखाने वाला मार्गदर्शक भी होता है। इसी गुरु परंपरा को सम्मान देने के लिए हर वर्ष आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि पर गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता है। वर्ष 2026 में गुरु पूर्णिमा 5 जुलाई, रविवार को मनाई जाएगी। इस अवसर पर देशभर के मंदिरों, आश्रमों, मठों और धार्मिक स्थलों में विशेष पूजा-अर्चना, सत्संग, भजन-कीर्तन और गुरु वंदना के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। लाखों श्रद्धालु अपने गुरु का आशीर्वाद लेने के लिए विभिन्न धार्मिक स्थलों पर पहुंचेंगे और ज्ञान, सेवा तथा संस्कार की परंपरा को आगे बढ़ाने का संकल्प लेंगे। सनातन धर्म में गुरु को भगवान से भी ऊंचा स्थान दिया गया है। प्रसिद्ध श्लोक <em>"गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः"</em> गुरु की महिमा का वर्णन करता है। मान्यता है कि गुरु ही वह शक्ति हैं, जो अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं। गुरु के बिना जीवन अधूरा माना जाता है, क्योंकि सही मार्गदर्शन ही व्यक्ति को सफलता, संस्कार और आध्यात्मिक उन्नति की ओर ले जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था। महर्षि वेदव्यास ने चारों वेदों का संकलन किया, महाभारत की रचना की और अठारह पुराणों का संपादन किया। भारतीय ज्ञान परंपरा को व्यवस्थित स्वरूप देने में उनका योगदान अतुलनीय माना जाता है। इसलिए इस दिन उन्हें आदिगुरु के रूप में भी याद किया जाता है और श्रद्धापूर्वक पूजा की जाती है। गुरु पूर्णिमा का महत्व केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सामाजिक और शैक्षणिक दृष्टि से भी बहुत बड़ा है। इस दिन विद्यार्थी अपने शिक्षकों का सम्मान करते हैं, उनके प्रति आभार व्यक्त करते हैं और उनसे जीवन में आगे बढ़ने का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। कई स्कूलों, कॉलेजों और शैक्षणिक संस्थानों में गुरु सम्मान समारोह आयोजित किए जाते हैं। विद्यार्थी अपने शिक्षकों को शुभकामनाएं देते हैं और उनके मार्गदर्शन के लिए धन्यवाद व्यक्त करते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">देशभर के प्रमुख आश्रमों और आध्यात्मिक केंद्रों में गुरु पूर्णिमा के अवसर पर विशेष आयोजन किए जाते हैं। सुबह से ही श्रद्धालु स्नान कर पूजा की तैयारी करते हैं। भगवान विष्णु, महर्षि वेदव्यास और अपने गुरु का पूजन किया जाता है। फूल, फल, दीपक, धूप और प्रसाद अर्पित कर आशीर्वाद लिया जाता है। कई श्रद्धालु इस दिन व्रत भी रखते हैं और जरूरतमंद लोगों को भोजन, वस्त्र तथा अन्य आवश्यक सामग्री का दान करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि गुरु पूर्णिमा पर किया गया दान और सेवा विशेष पुण्य प्रदान करता है। बौद्ध धर्म में भी गुरु पूर्णिमा का विशेष महत्व है। मान्यता है कि ज्ञान प्राप्त करने के बाद भगवान बुद्ध ने इसी दिन सारनाथ में अपने प्रथम पांच शिष्यों को पहला उपदेश दिया था। इसे धर्मचक्र प्रवर्तन दिवस भी कहा जाता है। इसलिए बौद्ध अनुयायी इस दिन ध्यान, प्रार्थना और धर्म उपदेश के कार्यक्रम आयोजित करते हैं। जैन धर्म में भी गुरु पूर्णिमा के अवसर पर आचार्यों और साधु-संतों के प्रति श्रद्धा व्यक्त की जाती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">आधुनिक समय में गुरु पूर्णिमा का स्वरूप कुछ बदला जरूर है, लेकिन इसकी भावना आज भी वैसी ही बनी हुई है। आज लोग अपने गुरु, शिक्षक और मार्गदर्शक को सोशल मीडिया, वीडियो कॉल और डिजिटल माध्यमों से भी शुभकामनाएं भेजते हैं। कई धार्मिक संस्थाएं ऑनलाइन प्रवचन और लाइव सत्संग का आयोजन करती हैं, जिनमें देश-विदेश से श्रद्धालु जुड़ते हैं। इससे यह पर्व नई पीढ़ी तक भी प्रभावी ढंग से पहुंच रहा है। गुरु पूर्णिमा केवल पूजा-पाठ का दिन नहीं, बल्कि आत्ममंथन और सीखने का अवसर भी है। यह पर्व हमें विनम्रता, अनुशासन, सेवा और ज्ञान का महत्व समझाता है। गुरु का सम्मान केवल एक दिन तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उनके बताए मार्ग पर चलना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धा मानी जाती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">गुरु पूर्णिमा के दिन कई लोग नए कार्यों की शुरुआत भी करते हैं। आध्यात्मिक साधना, योग, ध्यान और धार्मिक अध्ययन प्रारंभ करने के लिए भी यह दिन शुभ माना जाता है। कई आश्रमों में नए शिष्यों को दीक्षा दी जाती है और आध्यात्मिक जीवन की शुरुआत कराई जाती है। इस दिन किए गए संकल्पों को विशेष फलदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुरु पूर्णिमा पर पीले वस्त्र पहनना, भगवान विष्णु की पूजा करना, केले के पेड़ की पूजा करना और ब्राह्मणों या जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र, फल और दक्षिणा का दान करना शुभ माना जाता है। साथ ही अपने गुरु या शिक्षकों का सम्मान करना और उनका आशीर्वाद लेना भी इस दिन का सबसे महत्वपूर्ण कार्य माना गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">5 जुलाई 2026, रविवार को मनाई जाने वाली गुरु पूर्णिमा एक बार फिर पूरे देश में श्रद्धा, भक्ति और ज्ञान का संदेश लेकर आएगी। यह पर्व हमें याद दिलाता है कि जीवन में सफलता पाने के लिए केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि सही मार्गदर्शन भी उतना ही आवश्यक है। गुरु का सम्मान, उनके प्रति कृतज्ञता और उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प ही इस पर्व की वास्तविक भावना है। भारतीय संस्कृति में सदियों से चली आ रही गुरु-शिष्य परंपरा आज भी समाज को संस्कार, नैतिकता और ज्ञान की दिशा में आगे बढ़ाने का कार्य कर रही है और गुरु पूर्णिमा इसी अमूल्य परंपरा का सबसे महत्वपूर्ण उत्सव है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पर्व त्यौहार</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 00:00:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>बुधवार को भगवान गणेश की पूजा कैसे करें? जानें शुभ विधि, मंत्र, भोग और विशेष उपाय</title>
                                    <description><![CDATA[बुधवार भगवान गणेश को समर्पित माना जाता है। इस दिन विधि-विधान से पूजा, मंत्र जाप और विशेष उपाय करने से बुद्धि, सुख, समृद्धि और विघ्नों से मुक्ति मिलने की मान्यता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/puja-recitation/6a43c349ca70e/article-57466"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/wednesday-ganesh-puja.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">सनातन धर्म में सप्ताह का प्रत्येक दिन किसी न किसी देवी-देवता को समर्पित माना गया है। बुधवार का दिन प्रथम पूज्य भगवान श्रीगणेश की आराधना के लिए विशेष महत्व रखता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक भगवान गणेश की पूजा करने से जीवन के सभी विघ्न दूर होते हैं, बुद्धि और विवेक की प्राप्ति होती है तथा परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता, बुद्धिदाता और मंगलकर्ता कहा जाता है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत उनसे ही की जाती है। यदि आप चाहते हैं कि आपके कार्य बिना बाधा के पूरे हों, करियर और व्यापार में सफलता मिले तथा घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहे, तो बुधवार के दिन भगवान गणेश की विशेष पूजा अवश्य करनी चाहिए।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>बुधवार को ऐसे करें भगवान गणेश की पूजा</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">बुधवार की सुबह ब्रह्म मुहूर्त या सूर्योदय के बाद स्नान करके स्वच्छ और हल्के हरे या पीले रंग के वस्त्र धारण करें। घर के मंदिर की साफ-सफाई करें और भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र को स्वच्छ जल से पोंछकर लाल या पीले वस्त्र पर स्थापित करें।</p>
<p style="text-align:justify;">पूजा के दौरान सबसे पहले दीपक और धूप जलाएं। इसके बाद भगवान गणेश को गंगाजल अर्पित करें। फिर रोली, अक्षत, सिंदूर, दूर्वा घास, लाल फूल और मोदक या लड्डू का भोग लगाएं। गणेश जी को विशेष रूप से दूर्वा घास अत्यंत प्रिय मानी जाती है। मान्यता है कि 21 दूर्वा अर्पित करने से भगवान शीघ्र प्रसन्न होते हैं।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>गणेश मंत्रों का करें जाप</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">पूजा के समय भगवान गणेश के मंत्रों का जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार निम्न मंत्रों का जाप कर सकते हैं—</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>ॐ गं गणपतये नमः।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">या</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।<br />निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥</strong></p>
<p style="text-align:justify;">यदि समय हो तो गणेश अथर्वशीर्ष, गणेश चालीसा या संकटनाशन गणेश स्तोत्र का पाठ भी किया जा सकता है। इनका नियमित पाठ मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करने वाला माना जाता है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>भगवान गणेश को क्या भोग लगाएं</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">भगवान गणेश को मोदक सबसे प्रिय माना गया है। यदि मोदक उपलब्ध न हों तो बेसन के लड्डू, बूंदी के लड्डू, गुड़, नारियल, केले या अन्य मिठाइयों का भोग भी लगाया जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">भोग लगाने के बाद परिवार के सभी सदस्यों में प्रसाद बांटना शुभ माना जाता है। इससे घर में सुख-शांति और सौहार्द बना रहता है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>बुधवार को करें ये विशेष उपाय</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">यदि जीवन में लगातार बाधाएं आ रही हैं या आर्थिक परेशानियां बनी हुई हैं, तो बुधवार को कुछ सरल उपाय भी किए जा सकते हैं।</p>
<ul style="text-align:justify;">
<li>भगवान गणेश को 21 दूर्वा अर्पित करें।</li>
<li>हरे मूंग का दान किसी जरूरतमंद को करें।</li>
<li>गाय को हरा चारा खिलाएं।</li>
<li>विद्यार्थी भगवान गणेश को कलम और पुस्तक अर्पित कर सफलता की प्रार्थना करें।</li>
<li>व्यापार में उन्नति के लिए दुकान या कार्यालय में गणेश जी की प्रतिमा के सामने दीपक जलाएं।</li>
<li>गरीब या जरूरतमंद बच्चों को फल, मिठाई या स्टेशनरी का दान करें।</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">धार्मिक मान्यता है कि इन उपायों से शुभ फल प्राप्त होते हैं और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>क्या करें और क्या न करें</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">बुधवार के दिन पूजा करते समय मन को शांत रखें और किसी के प्रति क्रोध या कटु वचन बोलने से बचें। पूजा में बासी फूल या खराब भोग का उपयोग नहीं करना चाहिए। भगवान गणेश को तुलसी दल अर्पित नहीं किया जाता, इसलिए पूजा में इसका प्रयोग न करें।</p>
<p style="text-align:justify;">इस दिन झूठ बोलने, किसी का अपमान करने और अनावश्यक विवाद से बचने की भी सलाह दी जाती है। धार्मिक दृष्टि से संयम, सदाचार और सेवा भाव भगवान गणेश को प्रिय माने गए हैं।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>विद्यार्थियों और नौकरीपेशा लोगों के लिए विशेष महत्व</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">बुधवार का दिन विशेष रूप से विद्यार्थियों, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वालों और नौकरीपेशा लोगों के लिए शुभ माना जाता है। भगवान गणेश बुद्धि और ज्ञान के देवता हैं। इसलिए इस दिन उनकी पूजा करने से एकाग्रता बढ़ने और निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होने की मान्यता है।</p>
<p style="text-align:justify;">व्यापारियों के लिए भी बुधवार का दिन लाभकारी माना जाता है। नए कार्य की शुरुआत, नए सौदे या महत्वपूर्ण निर्णय लेने से पहले गणेश जी का स्मरण करना शुभ माना जाता है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>बुधवार का आध्यात्मिक संदेश</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">भगवान गणेश केवल धन और सफलता के प्रतीक नहीं हैं, बल्कि विवेक, धैर्य और सकारात्मक सोच का भी संदेश देते हैं। उनकी बड़ी सूंड, विशाल कान और छोटा मुख हमें अधिक सुनने, कम बोलने और सोच-समझकर निर्णय लेने की प्रेरणा देते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बुधवार को भगवान गणेश की श्रद्धापूर्वक पूजा करने से जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करने, मानसिक शांति प्राप्त करने और सुख-समृद्धि बढ़ाने की मान्यता है। नियमित पूजा, मंत्र जाप, दान और अच्छे कर्मों के साथ यदि भगवान गणेश का स्मरण किया जाए, तो व्यक्ति के जीवन में सकारात्मकता और आत्मविश्वास का संचार होता है। हालांकि, धार्मिक मान्यताएं आस्था पर आधारित होती हैं और उनका पालन प्रत्येक व्यक्ति अपनी श्रद्धा और परंपरा के अनुसार करता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पूजा पाठ</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/puja-recitation/6a43c349ca70e/article-57466</link>
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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 00:00:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राम मंदिर विवाद पर बोले धीरेंद्र शास्त्री, कहा- कुकृत्य करने वालों को महादंड मिलेगा</title>
                                    <description><![CDATA[भोपाल दौरे पर बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर ने राम मंदिर से जुड़े विवाद, धार्मिक संस्थानों के प्रबंधन और सामाजिक सौहार्द पर अपनी प्रतिक्रिया दी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/dhirendra-shastri-spoke-on-ram-temple-controversy-and-said/article-57401"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/dhirendra-krishna-shastri.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भोपाल दौरे पर पहुंचे बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने राम मंदिर से जुड़े हालिया विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस घटना ने करोड़ों रामभक्तों की आस्था को आहत किया है। उन्होंने कहा कि किसी भी धार्मिक स्थल की पवित्रता और गरिमा बनाए रखना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उनके अनुसार यदि कोई व्यक्ति भगवान के धाम में रहकर अनुचित कार्य करता है तो उसे उसके कर्मों का परिणाम अवश्य भुगतना पड़ता है। उन्होंने कहा कि धर्मस्थलों की मर्यादा का उल्लंघन केवल एक संस्थान का नहीं, बल्कि पूरे सनातन समाज के विश्वास का विषय है। धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अपने संबोधन में कहा कि धार्मिक परंपराओं में यह स्पष्ट रूप से बताया गया है कि अधर्म और अन्याय का अंत निश्चित होता है। उन्होंने धार्मिक प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि रावण ने माता सीता का हरण किया था और अंत में उसे अपने कर्मों का फल मिला। उन्होंने इसी संदर्भ में कहा कि जो भी व्यक्ति धर्मस्थलों की पवित्रता को भंग करेगा, उसे भी अपने कर्मों का परिणाम अवश्य मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह केवल कानूनी विषय नहीं बल्कि आस्था और नैतिक जिम्मेदारी से जुड़ा मामला भी है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उन्होंने यह भी कहा कि मंदिरों और अन्य धार्मिक संस्थानों के संचालन की जिम्मेदारी ऐसे लोगों के हाथों में होनी चाहिए जो सनातन परंपराओं, धार्मिक मूल्यों और सेवा भावना के प्रति पूरी निष्ठा रखते हों। उनके अनुसार धार्मिक संस्थानों की गरिमा तभी सुरक्षित रह सकती है जब उनका प्रबंधन पारदर्शी, जिम्मेदार और धर्म के प्रति समर्पित लोगों के हाथों में हो। उन्होंने कहा कि समाज को भी इस दिशा में जागरूक रहना चाहिए ताकि धार्मिक स्थलों की प्रतिष्ठा बनी रहे। अपने संबोधन के दौरान धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने भारत के मुसलमानों के संदर्भ में इंडोनेशिया का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई देशों में अलग-अलग धार्मिक समुदाय अपनी-अपनी आस्था का पालन करने के साथ-साथ एक-दूसरे के त्योहारों और सांस्कृतिक परंपराओं का भी सम्मान करते हैं। उन्होंने कहा कि इंडोनेशिया में बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जो नियमित रूप से नमाज अदा करते हैं और साथ ही दिवाली जैसे भारतीय सांस्कृतिक पर्वों में भी भाग लेते हैं। उन्होंने इस उदाहरण के माध्यम से सामाजिक सद्भाव, पारस्परिक सम्मान और सांस्कृतिक सहभागिता का संदेश देने की बात कही।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उनके इस बयान के बाद विभिन्न स्तरों पर चर्चा भी शुरू हो गई। कुछ लोगों ने इसे सामाजिक सौहार्द का संदेश बताया, जबकि कई लोगों ने इसे अलग-अलग दृष्टिकोण से देखा। हालांकि धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अपने संबोधन में बार-बार इस बात पर जोर दिया कि समाज में आपसी सम्मान, संवाद और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज की मजबूती उसके सांस्कृतिक मूल्यों और पारस्परिक विश्वास से तय होती है। भोपाल दौरे के दौरान धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री कैंसर हीलर सेंटर के उद्घाटन कार्यक्रम में भी शामिल होने वाले हैं। हबीबगंज क्षेत्र में स्थापित इस सेंटर का उद्देश्य कैंसर मरीजों को एक ही स्थान पर आधुनिक जांच, विशेषज्ञ चिकित्सकीय परामर्श और उपचार की सुविधा उपलब्ध कराना है। कार्यक्रम में चिकित्सा क्षेत्र के विशेषज्ञ, समाजसेवी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सेंटर के निदेशक डॉ. तरंग कृष्ण ने बताया कि संस्थान में आधुनिक चिकित्सा उपकरणों के साथ कैंसर की जांच और उपचार की सुविधाएं विकसित की गई हैं। उनका कहना है कि समय पर जांच और उचित इलाज से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि इस सेंटर का उद्देश्य भोपाल के साथ-साथ आसपास के जिलों के मरीजों को भी गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है ताकि उन्हें उपचार के लिए बड़े महानगरों का रुख न करना पड़े। उद्घाटन समारोह के दौरान धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री श्रद्धालुओं और उपस्थित लोगों को संबोधित भी करेंगे। इसके बाद चिकित्सा विशेषज्ञ सेंटर की कार्यप्रणाली, उपलब्ध सुविधाओं और भविष्य की योजनाओं की जानकारी साझा करेंगे। आयोजन में कैंसर के प्रति जागरूकता, समय पर जांच और बेहतर उपचार व्यवस्था पर भी विशेष चर्चा प्रस्तावित है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 12:59:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आज का अंक ज्योतिष 24 जून 2026: मूलांक 6 के प्रभाव से इन जातकों को मिलेगी करियर में बड़ी सफलता</title>
                                    <description><![CDATA[न्यूमरोलॉजी (Numerology) की गणना के अनुसार बुधवार का दिन रचनात्मकता और आर्थिक समृद्धि के दृष्टिकोण से रहेगा विशेष, मूलांक 3 और 9 वाले जातकों को मिलेगा भाग्य का पूरा साथ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/horoscope/todays-numerology-24-june-2026-due-to-the-influence-of/article-56754"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/ank-jyotish-24-june-2026.jpg" alt=""></a><br /><p>आइए जानते हैं मूलांक 1 से लेकर 9 तक के सभी जातकों के लिए आज का दिन कैसा रहने वाला है।</p>
<h5><strong>मूलांक 1 से 3 तक का दैनिक अंक राशिफल</strong></h5>
<h6><strong>मूलांक 1 (यदि आपका जन्म किसी भी महीने की 1, 10, 19, या 28 तारीख को हुआ है)</strong></h6>
<p>आज का दिन आपके भीतर आत्मविश्वास और प्रशासनिक क्षमताओं को बढ़ाएगा। कार्यक्षेत्र में आपकी लीडरशिप की सराहना होगी।</p>
<ul>
<li>
<p>करियर व धन: व्यापार में नए प्रोजेक्ट्स शुरू करने के लिए समय अनुकूल है। अटका हुआ धन वापस मिल सकता है।</p>
</li>
<li>
<p>संबंध व स्वास्थ्य: जीवनसाथी के साथ वैचारिक मतभेद दूर होंगे। आंखों का विशेष ध्यान रखें, ठंडे पानी से धोएं।</p>
</li>
<li>
<p>शुभ अंक और रंग: आज आपका शुभ अंक 1 और शुभ रंग सुनहरा है।</p>
</li>
</ul>
<h6><strong>मूलांक 2 (यदि आपका जन्म किसी भी महीने की 2, 11, 20, या 29 तारीख को हुआ है)</strong></h6>
<p>आज भावनाओं में बहकर कोई भी बड़ा व्यावसायिक निर्णय लेने से बचें। मानसिक रूप से थोड़े उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है।</p>
<ul>
<li>
<p>करियर व धन: नौकरीपेशा लोगों को आज ऑफिस में सहकर्मियों का सहयोग मिलेगा। खर्चों पर थोड़ा नियंत्रण रखना जरूरी है।</p>
</li>
<li>
<p>संबंध व स्वास्थ्य: परिवार के साथ शांतिपूर्ण समय बिताएंगे। अत्यधिक सोचने के कारण सिरदर्द की समस्या हो सकती है।</p>
</li>
<li>
<p>शुभ अंक और रंग: आज आपका शुभ अंक 7 और शुभ रंग सफेद है।</p>
</li>
</ul>
<h6><strong>मूलांक 3 (यदि आपका जन्म किसी भी महीने की 3, 12, 21, या 30 तारीख को हुआ है)</strong></h6>
<p>मूलांक 3 वाले जातकों के लिए आज का दिन अत्यंत भाग्यशाली रहने वाला है। आपकी ज्ञान और सूझबूझ से जटिल कार्य भी आसानी से पूरे हो जाएंगे।</p>
<ul>
<li>
<p>करियर व धन: शिक्षा, परामर्श और मार्केटिंग से जुड़े लोगों को बड़ा आर्थिक लाभ होगा। निवेश के लिए दिन बहुत अच्छा है।</p>
</li>
<li>
<p>संबंध व स्वास्थ्य: प्रेम संबंधों में प्रगाढ़ता आएगी। संतान पक्ष से कोई शुभ समाचार मिल सकता है। स्वास्थ्य उत्तम रहेगा।</p>
</li>
<li>
<p>शुभ अंक और रंग: आज आपका शुभ अंक 3 और शुभ रंग पीला है।</p>
</li>
</ul>
<h5><strong>मूलांक 4 से 6 तक का दैनिक अंक राशिफल</strong></h5>
<h6><strong>मूलांक 4 (यदि आपका जन्म किसी भी महीने की 4, 13, 22, या 31 तारीख को हुआ है)</strong></h6>
<p>चूंकि आज का भाग्यांक भी 4 है, इसलिए आज आपको अप्रत्याशित परिणाम देखने को मिलेंगे। अचानक से यात्रा का प्लान बन सकता है।</p>
<ul>
<li>
<p>करियर व धन: कार्यस्थल पर किसी भी तरह के वाद-विवाद या राजनीति से खुद को दूर रखें। गुप्त शत्रुओं से सावधान रहने की आवश्यकता है।</p>
</li>
<li>
<p>संबंध व स्वास्थ्य: वाणी पर नियंत्रण रखें, अन्यथा प्रियजनों के साथ बहस हो सकती है। मानसिक तनाव को हावी न होने दें।</p>
</li>
<li>
<p>शुभ अंक और रंग: आज आपका शुभ अंक 4 और शुभ रंग नीला है।</p>
</li>
</ul>
<h6><strong>मूलांक 5 (यदि आपका जन्म किसी भी महीने की 5, 14, या 23 तारीख को हुआ है)</strong></h6>
<p>बुधवार का दिन होने के कारण मूलांक 5 वालों के लिए आज संवाद कौशल और व्यापार में उन्नति के बेहतरीन अवसर बनेंगे।</p>
<ul>
<li>
<p>करियर व धन: यदि आप नया स्टार्टअप या साझेदारी का काम शुरू करना चाहते हैं, तो आज का दिन श्रेष्ठ है। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।</p>
</li>
<li>
<p>संबंध व स्वास्थ्य: मित्रों के साथ गेट-टुगेदर (Get-together) हो सकता है। सेहत अच्छी रहेगी, आप खुद को ऊर्जावान महसूस करेंगे।</p>
</li>
<li>
<p>शुभ अंक और रंग: आज आपका शुभ अंक 5 और शुभ रंग हल्का हरा है।</p>
</li>
</ul>
<h6><strong>मूलांक 6 (यदि आपका जन्म किसी भी महीने की 6, 15, या 24 तारीख को हुआ है)</strong></h6>
<p>आज आपका ही मूलांक प्रभावी है। शुक्र के प्रभाव से कला, मीडिया, डिजाइनिंग और फैशन से जुड़े लोगों के लिए आज का दिन स्वर्णिम रहेगा।</p>
<ul>
<li>
<p>करियर व धन: कार्यक्षेत्र में आपकी रचनात्मकता की तारीफ होगी और बड़े आर्थिक लाभ के योग बनेंगे। सुख-सुविधाओं पर खर्च होगा।</p>
</li>
<li>
<p>संबंध व स्वास्थ्य: दांपत्य जीवन में रोमांस और आपसी समझ बढ़ेगी। अपनी जीवनशैली और खानपान को संतुलित रखें।</p>
</li>
<li>
<p>शुभ अंक और रंग: आज आपका शुभ अंक 6 और शुभ रंग गुलाबी है।</p>
</li>
</ul>
<h5><strong>मूलांक 7 से 9 तक का दैनिक अंक राशिफल</strong></h5>
<h6><strong>मूलांक 7 (यदि आपका जन्म किसी भी महीने की 7, 16, या 25 तारीख को हुआ है)</strong></h6>
<p>आज का दिन आध्यात्मिक चिंतन और शोध कार्यों के लिए बहुत अच्छा है। भौतिक दुनिया से थोड़ा खिंचाव महसूस कर सकते हैं।</p>
<ul>
<li>
<p>करियर व धन: किस्मत के भरोसे बड़ा धन निवेश करने से बचें। नौकरी में अपने काम पर ध्यान केंद्रित रखें।</p>
</li>
<li>
<p>संबंध व स्वास्थ्य: परिवार के बुजुर्गों की सलाह आपके बहुत काम आएगी। योग और मेडिटेशन करने से मानसिक शांति मिलेगी।</p>
</li>
<li>
<p>शुभ अंक और रंग: आज आपका शुभ अंक 2 और शुभ रंग क्रीम है।</p>
</li>
</ul>
<h6><strong>मूलांक 8 (यदि आपका जन्म किसी भी महीने की 8, 17, या 26 तारीख को हुआ है)</strong></h6>
<p>मूलांक 8 वाले जातकों को आज अपनी कड़ी मेहनत का उचित फल प्राप्त होगा। कार्यों में थोड़ी देरी हो सकती है, लेकिन सफलता निश्चित है।</p>
<ul>
<li>
<p>करियर व धन: प्रॉपर्टी या जमीन-जायदाद से जुड़े मामलों में डील फाइनल हो सकती है। धन का आगमन निरंतर बना रहेगा।</p>
</li>
<li>
<p>संबंध व स्वास्थ्य: जीवनसाथी का हर मोड़ पर सहयोग मिलेगा। पैरों में दर्द या थकान की शिकायत हो सकती है, पर्याप्त आराम करें।</p>
</li>
<li>
<p>शुभ अंक और रंग: आज आपका शुभ अंक 8 और शुभ रंग गहरा नीला है।</p>
</li>
</ul>
<h6><strong>मूलांक 9 (यदि आपका जन्म किसी भी महीने की 9, 18, या 27 तारीख को हुआ है)</strong></h6>
<p>मूलांक 9 वालों के पराक्रम और साहस में वृद्धि होगी। आप किसी नए और बड़े काम का जोखिम उठाने के लिए पूरी तरह तैयार रहेंगे।</p>
<ul>
<li>
<p>करियर व धन: कोर्ट-कचहरी या विवादित मामलों में सफलता मिलेगी। व्यापार में प्रतिस्पर्धियों पर आप भारी पड़ेंगे।</p>
</li>
<li>
<p>संबंध व स्वास्थ्य: भाइयों के साथ संबंध मजबूत होंगे। गुस्सा करने से बचें ताकि रक्तचाप (Blood Pressure) सामान्य रहे।</p>
</li>
<li>
<p>शुभ अंक और रंग: आज आपका शुभ अंक 9 और शुभ रंग लाल है।</p>
</li>
</ul>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राशिफल</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Jun 2026 10:43:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>टैरो राशिफल 24 जून 2026: 'द एम्परर' और 'द स्टार' के प्रभाव से चमकेगा इन राशियों का भाग्य</title>
                                    <description><![CDATA[रहस्यमयी टैरो कार्ड्स की गणना के अनुसार बुधवार का दिन कुछ राशियों के लिए लाएगा अप्रत्याशित वित्तीय लाभ, तो कुछ को रखनी होगी विशेष सावधानी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/horoscope/tarot-horoscope-24-june-2026-the-fortunes-of-these-zodiac/article-56753"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/tarot-rashifal-24-june-2026.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">आइए जानते हैं मेष से लेकर मीन तक, सभी 12 राशियों के लिए आज के टैरो कार्ड्स क्या संकेत दे रहे हैं और आपको किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>मेष से कर्क राशि तक का टैरो राशिफल</strong></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>1. </strong><span class="citation-173 citation-end-173"><strong>मेष राशि (Aries) - कार्ड: द टावर (The Tower)</strong><sup class="superscript"></sup></span></h5>
<p style="text-align:justify;"><span class="citation-172 citation-end-172">मेष राशि के जातकों के लिए आज अचानक कुछ बदलाव या छोटी-मोटी रुकावटें आ सकती हैं।<sup class="superscript"></sup></span> घबराएं नहीं, यह कार्ड जीवन से गैर-जरूरी चीजों को हटाने का संकेत देता है। </p>
<ul style="text-align:justify;">
<li>
<p>करियर व धन: कार्यस्थल पर किसी अप्रत्याशित बदलाव के लिए तैयार रहें। निवेश के मामले में जल्दबाजी बिल्कुल न करें।</p>
</li>
<li>
<p>रिश्ते व स्वास्थ्य: बातचीत में अपनी जिद पर अड़े रहने से बचें। मानसिक शांति के लिए थोड़ा एकांत समय बिताएं।</p>
</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>2. </strong><span class="citation-171 citation-end-171"><strong>वृषभ राशि (Taurus) - कार्ड: नाइन ऑफ स्वार्ड्स (Nine of Swords)</strong><sup class="superscript"></sup></span></h5>
<p style="text-align:justify;">वृषभ राशि वाले आज बेवजह की चिंताओं और मानसिक तनाव से घिरे रह सकते हैं। परिस्थितियों को खुद पर हावी न होने दें।</p>
<ul style="text-align:justify;">
<li>
<p><span class="citation-170">करियर व धन:</span><span class="citation-170 citation-end-170"> पैसों के लेन-देन में बेहद सतर्क रहें।<sup class="superscript"></sup></span> व्यापार में किसी बड़े प्रलोभन या लालच में आने से बचें। </p>
</li>
<li>
<p><span class="citation-169">रिश्ते व स्वास्थ्य:</span><span class="citation-169 citation-end-169"> पारिवारिक माहौल सामान्य रहेगा, लेकिन विचारों के मतभेद से असहजता बढ़ सकती है।<sup class="superscript"></sup></span> आज नींद की कमी परेशान कर सकती है। </p>
</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>3. </strong><span class="citation-168 citation-end-168"><strong>मिथुन राशि (Gemini) - कार्ड: एस ऑफ कप्स (Ace of Cups)</strong><sup class="superscript"></sup></span></h5>
<p style="text-align:justify;">मिथुन राशि वालों के लिए आज का दिन बेहद खूबसूरत और भावनाओं से भरा रहेगा। आपके भीतर रचनात्मक ऊर्जा का नया संचार होगा।</p>
<ul style="text-align:justify;">
<li>
<p>करियर व धन: कार्यक्षेत्र में आपकी नई सोच और आइडियाज की सराहना होगी। आर्थिक लाभ के नए अवसर मिलेंगे।</p>
</li>
<li>
<p>रिश्ते व स्वास्थ्य: लव लाइफ के लिए आज का दिन सर्वश्रेष्ठ है। पार्टनर से कोई दिल की बात साझा कर सकते हैं। स्वास्थ्य उत्तम रहेगा।</p>
</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>4. </strong><span class="citation-167 citation-end-167"><strong>कर्क राशि (Cancer) - कार्ड: नाइन ऑफ कप्स (Nine of Cups - Reversed)</strong><sup class="superscript"></sup></span></h5>
<p style="text-align:justify;">कर्क राशि के जातकों को आज अपनी इच्छाओं और अपेक्षाओं पर थोड़ा नियंत्रण रखना होगा। काम मनमुताबिक न होने से थोड़ी निराशा हो सकती है।</p>
<ul style="text-align:justify;">
<li>
<p>करियर व धन: मेहनत पूरी करनी होगी, तभी परिणाम मिलेंगे। शॉर्टकट आज आपको नुकसान पहुंचा सकता है।</p>
</li>
<li>
<p>रिश्ते व स्वास्थ्य: अपनों के साथ संवाद में स्पष्टता रखें। पेट से जुड़ी समस्याओं के प्रति सावधान रहें और संतुलित आहार लें।</p>
</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>सिंह से वृश्चिक राशि तक का टैरो राशिफल</strong></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>5. </strong><span class="citation-166 citation-end-166"><strong>सिंह राशि (Leo) - कार्ड: क्वीन ऑफ कप्स (Queen of Cups)</strong><sup class="superscript"></sup></span></h5>
<p style="text-align:justify;">सिंह राशि वालों के लिए आज का दिन चारों ओर से सकारात्मक परिणाम लेकर आ रहा है। आपके व्यक्तित्व में एक अलग ही आकर्षण देखने को मिलेगा।</p>
<ul style="text-align:justify;">
<li>
<p><span class="citation-165">करियर व धन:</span><span class="citation-165 citation-end-165"> व्यावसायिक निर्णय लेने के लिए बेहतरीन दिन है।<sup class="superscript"></sup></span> आकर्षक प्रस्ताव मिल सकते हैं। धन लाभ के योग हैं। </p>
</li>
<li>
<p><span class="citation-164">रिश्ते व स्वास्थ्य:</span><span class="citation-164 citation-end-164"> घर में मेहमानों का आगमन हो सकता है जिससे खुशियां बढ़ेंगी।<sup class="superscript"></sup></span> स्वास्थ्य और जीवनशैली शानदार रहेगी। </p>
</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>6. </strong><span class="citation-163 citation-end-163"><strong>कन्या राशि (Virgo) - कार्ड: सेवन ऑफ पेंटाकल्स (Seven of Pentacles)</strong><sup class="superscript"></sup></span></h5>
<p style="text-align:justify;">कन्या राशि वालों के लिए आज का कार्ड धैर्य रखने की सलाह देता है। परिणाम की चिंता किए बिना अपने काम की निरंतरता बनाए रखें।</p>
<ul style="text-align:justify;">
<li>
<p>करियर व धन: व्यापार में स्पष्टता आएगी और सहयोगियों के साथ तालमेल बेहतर होगा। आपकी प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी।</p>
</li>
<li>
<p>रिश्ते व स्वास्थ्य: अपनों के साथ सुखद पल बिताने का मौका मिलेगा। दिनचर्या को अनुशासित रखने से स्वास्थ्य अच्छा रहेगा।</p>
</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>7. तुला राशि (Libra) - कार्ड: थ्री ऑफ वांड्स (Three of Wands - Reversed)</strong></h5>
<p style="text-align:justify;"><span class="citation-162 citation-end-162">तुला राशि वालों की कुछ बड़ी योजनाएं आज समय की कमी या समन्वय न बैठने के कारण थोड़ी धीमी गति से आगे बढ़ेंगी।<sup class="superscript"></sup></span> </p>
<ul style="text-align:justify;">
<li>
<p>करियर व धन: लंबी अवधि के निवेश या विदेशी योजनाओं में कुछ देरी हो सकती है। आज कागजी कार्रवाई पर ध्यान दें।</p>
</li>
<li>
<p>रिश्ते व स्वास्थ्य: जीवनसाथी का सहयोग आपको संबल देगा। मानसिक थकान को दूर करने के लिए योग का सहारा लें।</p>
</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>8. वृश्चिक राशि (Scorpio) - कार्ड: द लवर्स (The Lovers)</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">वृश्चिक राशि के जातकों के लिए आज का दिन कोई बड़ा और महत्वपूर्ण निर्णय लेने का है। आपके निर्णय आपके भविष्य की दिशा तय करेंगे।</p>
<ul style="text-align:justify;">
<li>
<p>करियर व धन: पार्टनरशिप के बिजनेस में बड़ा फायदा हो सकता है। नौकरी में भी आपकी स्थिति मजबूत होगी।</p>
</li>
<li>
<p>रिश्ते व स्वास्थ्य: यदि आप किसी रिश्ते में हैं, तो आज आपसी विश्वास और गहरा होगा। शारीरिक ऊर्जा का स्तर ऊंचा रहेगा।</p>
</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>धनु से मीन राशि तक का टैरो राशिफल</strong></h5>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>9. धनु राशि (Sagittarius) - कार्ड: किंग ऑफ वांड्स (King of Wands)</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">धनु राशि वालों के लिए आज का दिन बेहद ऊर्जावान और साहसी रहने वाला है। आप अपनी लीडरशिप क्वालिटी से सबको प्रभावित करेंगे।</p>
<ul style="text-align:justify;">
<li>
<p>करियर व धन: वित्तीय हितों को साधने में आप सफल रहेंगे। रुकी हुई योजनाएं दोबारा गति पकड़ेंगी।</p>
</li>
<li>
<p>रिश्ते व स्वास्थ्य: परिवार में आपका मान-सम्मान बढ़ेगा। पुराना कोई पुराना दर्द या बीमारी आज पूरी तरह ठीक हो सकती है।</p>
</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>10. </strong><span class="citation-161 citation-end-161"><strong>मकर राशि (Capricorn) - कार्ड: जस्टिस (Justice)</strong><sup class="superscript"></sup></span></h5>
<p style="text-align:justify;">मकर राशि के जातकों के लिए आज न्याय और निष्पक्षता का दिन है। आपके पुराने अच्छे कर्मों का फल आज आपको मिल सकता है।</p>
<ul style="text-align:justify;">
<li>
<p>करियर व धन: यदि कोई कानूनी या व्यावसायिक विवाद चल रहा था, तो फैसला आपके पक्ष में आ सकता है। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।</p>
</li>
<li>
<p>रिश्ते व स्वास्थ्य: वाणी और व्यवहार से सभी का दिल जीतेंगे। सेहत अच्छी रहेगी, लेकिन आंखों का ख्याल रखें।</p>
</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>11. कुंभ राशि (Aquarius) - कार्ड: पेज ऑफ पेंटाकल्स (Page of Pentacles)</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">कुंभ राशि वालों के लिए आज का दिन सीखने, समझने और नई शुरुआत करने का है। विद्यार्थियों के लिए विशेष रूप से लाभदायक समय है।</p>
<ul style="text-align:justify;">
<li>
<p>करियर व धन: धन संचय के नए रास्ते खुलेंगे। किसी नए प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी आपको मिल सकती है, जो भविष्य में फलदायी होगी।</p>
</li>
<li>
<p>रिश्ते व स्वास्थ्य: मित्रों का पूरा सहयोग मिलेगा। अपनी रीढ़ की हड्डी और बैठने के पोस्चर (Posture) का ध्यान रखें।</p>
</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>12. मीन राशि (Pisces) - कार्ड: सिक्स ऑफ स्वार्ड्स (Six of Swords)</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">मीन राशि के जातकों के लिए आज का दिन किसी पुराने विवाद या परेशानी से बाहर निकलने का है। आप मानसिक शांति की ओर बढ़ेंगे।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<p>करियर व धन: नौकरी में ट्रांसफर या स्थान परिवर्तन के योग बन रहे हैं, जो आपके लिए सुखद रहेगा। आर्थिक स्थिति सामान्य रहेगी।</p>
</li>
<li>
<p style="text-align:justify;">रिश्ते व स्वास्थ्य: किसी करीबी मित्र की मदद से पुराने गिले-शिकवे दूर होंगे। मानसिक तनाव कम होने से आप राहत महसूस करेंगे।</p>
</li>
</ul>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राशिफल</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Jun 2026 10:43:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>सोमवार भस्म आरती में महाकाल का दिव्य श्रृंगार, पंचामृत पूजन के बाद दिए राजा स्वरूप दर्शन</title>
                                    <description><![CDATA[उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में तड़के भस्म आरती के दौरान भगवान महाकाल का जलाभिषेक, पंचामृत पूजन और रजत आभूषणों से विशेष श्रृंगार किया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन किए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/6a38cce6c593f/article-56623"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/mahakal-bhasma-aarti-(9).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में सोमवार तड़के आयोजित होने वाली भस्म आरती के दौरान श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। अलसुबह चार बजे मंदिर के पट खुलते ही गर्भगृह में धार्मिक अनुष्ठानों का क्रम शुरू हुआ। मंदिर के पंडे-पुजारियों ने विधि-विधान के साथ भगवान महाकाल का पूजन-अर्चन किया और इसके बाद जलाभिषेक संपन्न कराया। भस्म आरती में शामिल होने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे श्रद्धालु देर रात से ही मंदिर परिसर में कतारबद्ध होकर बाबा महाकाल के दर्शन की प्रतीक्षा कर रहे थे। सोमवार होने के कारण महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में अधिक रही। मंदिर के पट खुलने के बाद सबसे पहले गर्भगृह में स्थापित सभी देवी-देवताओं का पूजन किया गया। इसके पश्चात भगवान महाकाल का पवित्र जल से अभिषेक किया गया। धार्मिक परंपराओं के अनुसार अभिषेक के दौरान वैदिक मंत्रों का उच्चारण किया गया, जिससे मंदिर परिसर पूरी तरह आध्यात्मिक वातावरण में डूब गया। हर-हर महादेव और जय श्री महाकाल के जयघोष से पूरा परिसर गूंज उठा। जलाभिषेक के बाद भगवान महाकाल का पंचामृत से विशेष पूजन किया गया। दूध, दही, घी, शक्कर और विभिन्न फलों के रस से तैयार पंचामृत भगवान को अर्पित किया गया। सनातन परंपरा में पंचामृत पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इससे भगवान प्रसन्न होते हैं और भक्तों पर अपनी विशेष कृपा बनाए रखते हैं। पूजन के दौरान पुजारियों ने वैदिक विधि से आराधना करते हुए भक्तों की सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना की।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भस्म आरती से पहले प्रथम घंटाल बजाकर मंदिर में प्रवेश किया गया और मंत्रोच्चार के साथ भगवान का ध्यान किया गया। इसके बाद हरिओम का पवित्र जल अर्पित कर विशेष पूजा की गई। कपूर आरती के पश्चात भगवान महाकाल के मस्तक पर भांग, चंदन और त्रिपुंड अर्पित किया गया। यह श्रृंगार भगवान शिव के स्वरूप का प्रतीक माना जाता है और महाकाल मंदिर की परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस समय भगवान महाकाल का स्वरूप अत्यंत दिव्य और आकर्षक दिखाई देता है। श्रृंगार की अगली प्रक्रिया में भगवान महाकाल को रजत आभूषणों से अलंकृत किया गया। जटाधारी स्वरूप में विराजमान बाबा महाकाल को राजा स्वरूप में सजाया गया। रजत मुकुट, रजत की मुंडमाल, रुद्राक्ष की मालाएं और अन्य आभूषण अर्पित किए गए। इसके साथ ही सुगंधित पुष्पों से निर्मित विशेष मालाओं से भी भगवान का श्रृंगार किया गया। मोगरा और गुलाब के फूलों की सुगंध से पूरा गर्भगृह महक उठा। भगवान महाकाल का यह राजसी स्वरूप श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना रहा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">श्रृंगार पूर्ण होने के बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढंककर भस्म अर्पित करने की प्रक्रिया शुरू की गई। महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को पवित्र भस्म अर्पित की गई। भस्म आरती महाकाल मंदिर की सबसे प्राचीन और विशेष परंपराओं में से एक मानी जाती है। यह परंपरा केवल उज्जैन के महाकाल मंदिर में ही देखने को मिलती है, जिसके कारण देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार भस्म अर्पित होने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। यही कारण है कि भस्म आरती को देखने और इसमें शामिल होने की श्रद्धालुओं में विशेष उत्सुकता रहती है। आरती के दौरान मंदिर परिसर में मौजूद भक्त पूरी श्रद्धा के साथ बाबा महाकाल के जयकारे लगाते नजर आए। कई श्रद्धालु इस पल को अपने जीवन का सौभाग्य मानते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भस्म आरती के पश्चात भगवान महाकाल को फल और मिष्ठान का भोग लगाया गया। मंदिर प्रशासन के अनुसार प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन के लिए पहुंचते हैं, लेकिन सोमवार और विशेष पर्वों पर यह संख्या कई गुना बढ़ जाती है। सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर मंदिर प्रशासन ने विशेष इंतजाम किए थे ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और इसकी धार्मिक मान्यता अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। यहां प्रतिदिन होने वाली भस्म आरती को देखने के लिए देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं। बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन को आध्यात्मिक और धार्मिक दृष्टि से विशेष स्थान प्राप्त है। सावन, महाशिवरात्रि और अन्य धार्मिक अवसरों पर यहां श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ता है। सोमवार की भस्म आरती में भी यही आस्था और भक्ति देखने को मिली। पंचामृत पूजन, रजत आभूषणों से सुसज्जित राजसी श्रृंगार और भस्म आरती के दिव्य दृश्य ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। बाबा महाकाल के दर्शन कर भक्तों ने अपने परिवार की सुख-समृद्धि और मंगल की कामना की। मंदिर परिसर में सुबह से ही भक्ति का माहौल बना रहा और श्रद्धालु महाकाल के जयघोष के साथ आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव करते रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 14:07:24 +0530</pubDate>
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