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                <title>Foreign Policy India - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Foreign Policy India RSS Feed</description>
                
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                <title>G7 सम्मेलन में पीएम मोदी बोले, भारतीय नाविकों की मौत चिंता का विषय</title>
                                    <description><![CDATA[समुद्री व्यापार सुरक्षा और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते तनाव पर जताई चिंता, अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद तीन भारतीयों की मौत का मुद्दा उठा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/pm-modi-said-in-g7-conference-that-death-of-indian/article-56154"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/pm-modi-g7-speech.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">फ्रांस के इवियन में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के दौरान मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक नेताओं के सामने समुद्री सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों की स्थिरता और हाल की घटनाओं में भारतीय नागरिकों की मौत का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया। इस बैठक में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप समेत कई प्रमुख देशों के नेता मौजूद थे। पीएम मोदी का यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ रहा है और समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्षों का असर सिर्फ क्षेत्रीय देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और व्यापार व्यवस्था पर पड़ रहा है। उन्होंने विशेष रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का जिक्र किया, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। पीएम ने कहा कि इस मार्ग से बड़ी मात्रा में तेल और वाणिज्यिक सामान दुनिया भर में भेजा जाता है और किसी भी तरह की बाधा वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित करती है।</p>
<p style="text-align:justify;">पीएम मोदी ने कहा, “इस संघर्ष में हमारे कई भारतीय नागरिकों ने भी अपनी जान गंवाई है।” उन्होंने आगे कहा कि समुद्री व्यापार को सुरक्षित और स्थिर बनाए रखना सभी देशों की साझा जिम्मेदारी है, क्योंकि हजारों नाविक रोजाना समुद्र के रास्ते देशों को जोड़ते हैं और वैश्विक अर्थव्यवस्था को गति देते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है ताकि वे बिना किसी डर के अपना काम कर सकें। पीएम मोदी का यह बयान हाल ही में सामने आई उन घटनाओं से जुड़ा माना जा रहा है, जिनमें अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के दौरान तीन भारतीय नागरिकों की मौत हुई थी। हालांकि प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में किसी देश या घटना का सीधा नाम नहीं लिया, लेकिन उनका संकेत उन्हीं घटनाओं की ओर माना जा रहा है, जिनमें अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में कई जहाजों पर कार्रवाई की गई थी। हाल के दिनों में अमेरिकी बलों ने ओमान की खाड़ी और आसपास के क्षेत्रों में कुछ विदेशी झंडे वाले तेल टैंकरों पर कार्रवाई की थी। इन जहाजों पर भारतीय चालक दल के सदस्य भी मौजूद थे। इनमें से एक घटना में तीन भारतीय नागरिकों की मौत की पुष्टि हुई थी, जबकि अन्य घटनाओं में कई नाविकों को सुरक्षित बचा लिया गया था। इन घटनाओं ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है और समुद्री सुरक्षा को लेकर बहस तेज कर दी है।</p>
<p style="text-align:justify;">इन घटनाओं के बाद भारत सरकार ने भी इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया है। विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी पक्ष के साथ बातचीत कर औपचारिक विरोध दर्ज कराया और कहा कि इस तरह की घटनाएं तुरंत रोकी जानी चाहिए। भारत ने स्पष्ट किया कि समुद्री मार्गों पर काम करने वाले नागरिकों की सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि भारत अपने समुद्री समुदाय के कल्याण और सुरक्षा को अत्यंत महत्व देता है। जब यह घटना हुई, तब भारत ने तुरंत अमेरिकी पक्ष के सामने अपनी गंभीर चिंता दर्ज कराई और कड़ा विरोध जताया। भारत ने अमेरिकी दूतावास के प्रतिनिधि को तलब कर अपनी स्थिति स्पष्ट की और कहा कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं होनी चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">इस पूरे मामले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा को जन्म दिया है क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे क्षेत्र वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। यहां से दुनिया का एक बड़ा हिस्सा तेल और व्यापारिक सामान गुजरता है। ऐसे में किसी भी प्रकार की सैन्य कार्रवाई या तनाव वैश्विक अर्थव्यवस्था को सीधे प्रभावित कर सकता है। पीएम मोदी का यह बयान भारत की उस नीति को दर्शाता है जिसमें वह अपने नागरिकों की सुरक्षा के साथ-साथ वैश्विक शांति और व्यापार स्थिरता पर भी जोर देता है। भारत लंबे समय से समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने की बात करता रहा है। G7 जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर यह मुद्दा उठना इस बात का संकेत है कि भारत अब वैश्विक मंचों पर अपने नागरिकों की सुरक्षा और समुद्री व्यापार के मुद्दों को अधिक मजबूती से रख रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 11:24:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भारत ने मर्चेंट शिपिंग पर हमलों की कड़ी निंदा की, UNSC में शांति का आह्वान</title>
                                    <description><![CDATA[UNSC में भारत ने कूटनीति, शांति और संयुक्त राष्ट्र सुधारों पर दिया जोर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/6a2a4066ac53f/article-55577"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/india-unsc-statement.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">ईरान और खाड़ी क्षेत्र में जारी तनाव के बीच भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में एक बार फिर साफ शब्दों में कहा है कि वह मर्चेंट शिपिंग यानी व्यापारिक जहाजों पर होने वाले हमलों का कड़ा विरोध करता है। भारत ने कहा कि इस पूरे क्षेत्र में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं और इसका सीधा असर न सिर्फ क्षेत्रीय शांति पर बल्कि वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरिष पर्नवथनेनी ने बुधवार को सुरक्षा परिषद की खुली बहस में हिस्सा लेते हुए कहा कि भारत इस संघर्ष को लेकर गहरी चिंता व्यक्त करता है, जिसकी शुरुआत रमज़ान के पवित्र महीने में हुई, जो और भी दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सभी पक्षों को संयम बरतना चाहिए और किसी भी तरह की स्थिति को और बिगड़ने से रोकना चाहिए। भारत ने खास तौर पर समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है। पर्नवथनेनी ने कहा कि भारत के कई नागरिक खाड़ी क्षेत्र में काम करते हैं और हालिया हमलों में कई भारतीयों की मौत हुई है या वे लापता हैं। ऐसे में व्यापारिक जहाजों और समुद्री संचार मार्गों पर हमले सीधे तौर पर मानव जीवन और वैश्विक सप्लाई चेन को प्रभावित कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने यह भी बताया कि लगभग एक करोड़ भारतीय नागरिक खाड़ी देशों में रहते और काम करते हैं, जिनकी सुरक्षा भारत के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में स्थिरता भारत की ऊर्जा जरूरतों और व्यापारिक हितों से भी सीधे जुड़ी हुई है, इसलिए किसी भी प्रकार की अस्थिरता का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ना तय है। इस बीच भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि वह सभी प्रकार के सैन्य हमलों, नागरिकों पर हमलों और समुद्री व्यापार बाधित करने वाली किसी भी कार्रवाई का विरोध करता है। भारत ने जोर देकर कहा कि सभी विवादों का समाधान केवल बातचीत और कूटनीति के जरिए ही संभव है, न कि सैन्य टकराव से।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत ने गाजा की स्थिति पर भी चिंता जताई और कहा कि वहां मानवीय संकट गहराता जा रहा है। भारत ने स्थायी युद्धविराम, मानवीय सहायता और दो-राज्य समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया, जिसमें एक स्वतंत्र और संप्रभु फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना शामिल हो। राजदूत ने यह भी कहा कि भारत संयुक्त राष्ट्र राहत एवं कार्य एजेंसी (UNRWA) को 2.5 मिलियन डॉलर की पहली किस्त देने जा रहा है, जो उसके वार्षिक पांच मिलियन डॉलर योगदान का हिस्सा है। भारत ने कहा कि यह कदम क्षेत्र में मानवीय सहायता को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">लेबनान संकट का जिक्र करते हुए भारत ने उसकी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने की अपील की और संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन में तैनात भारतीय सैनिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की बात कही। भारत ने कहा कि शांति सैनिकों को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए और उन पर हमले गंभीर चिंता का विषय हैं। इसके अलावा भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मौजूदा संरचना पर भी सवाल उठाए। भारत ने कहा कि मौजूदा ढांचा पुराना हो चुका है और बदलते वैश्विक हालात में इसमें सुधार जरूरी है। भारत ने स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों के विस्तार की मांग दोहराई ताकि परिषद अधिक प्रभावी और प्रतिनिधित्वपूर्ण बन सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 11:04:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पीएम मोदी की नीदरलैंड यात्रा में बड़ा कदम, दोनों देशों के बीच हुए सेमीकंडक्टर-ग्रीन एनर्जी समेत 17 बड़े समझौते</title>
                                    <description><![CDATA[पीएम मोदी की नीदरलैंड यात्रा में 17 बड़े समझौते हुए। सेमीकंडक्टर, ग्रीन हाइड्रोजन, शिक्षा और निवेश सहयोग से भारत-नीदरलैंड रिश्तों को नई मजबूती मिली।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/big-step-in-pm-modis-visit-to-netherlands-17-big/article-53607"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/india-netherlands-agreements.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">15<span lang="hi" xml:lang="hi"> से </span>17<span lang="hi" xml:lang="hi"> मई </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi"> तक की नीदरलैंड यात्रा ने भारत और नीदरलैंड के संबंधों में एक महत्वपूर्ण मोड़ लाया। हेग में हुई उच्चस्तरीय वार्ता के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटेन के बीच व्यापक चर्चा हुई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके नतीजे में दोनों देशों ने </span>17<span lang="hi" xml:lang="hi"> महत्वपूर्ण समझौतों और साझेदारियों पर सहमति जताई। बातचीत से यह स्पष्ट हुआ कि अब दोनों देश अपने रिश्तों को रणनीतिक साझेदारी के नए स्तर पर ले जाने की दिशा में बढ़ रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें तकनीक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निवेश</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऊर्जा और सुरक्षा जैसे प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं। यह दौरा काफी खास है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि लंबे समय से दोनों देशों के बीच सहयोग तो था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इस बार इसका दायरा और गहराई दोनों बढ़ी हैं। हेग में हुई बैठकों के बाद यह साफ दिखा कि आने वाले समय में सहयोग मात्र कागजों तक सीमित नहीं रहेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि इसका असर वास्तविकता में भी नजर आएगा।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">यात्रा के दौरान सबसे ज्यादा ध्यान सेमीकंडक्टर सेक्टर में हुए समझौते पर था</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ गुजरात के धोलेरा में सेमीकंडक्टर फैब को लेकर </span>Tata Electronics <span lang="hi" xml:lang="hi">और वैश्विक कंपनी </span>ASML <span lang="hi" xml:lang="hi">के बीच </span>MoU <span lang="hi" xml:lang="hi">पर सहमति बनी। इसे भारत की चिप मैन्युफैक्चरिंग क्षमता के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इसके अलावा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ग्रीन हाइड्रोजन और रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्रों में भी दोनों देशों ने मिलकर काम करने का निर्णय लिया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके लिए विशेष रोडमैप और जॉइंट वर्किंग ग्रुप बनाने पर चर्चा हुई। क्रिटिकल मिनरल्स</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जल प्रबंधन और गुजरात के महत्वाकांक्षी काल्पसर प्रोजेक्ट पर भी तकनीकी सहयोग के समझौते किए गए हैं। वहीं </span>Mobility and Migration <span lang="hi" xml:lang="hi">समझौते के जरिए छात्रों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पेशेवरों और कुशल कार्यकर्ताओं की आवाजाही को सुगम बनाने पर सहमति बनी है। सांस्कृतिक स्तर पर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऐतिहासिक चोल ताम्रपत्र भारत को लौटाने पर भी नीदरलैंड ने अपनी सहमति जताई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो दोनों देशों के सांस्कृतिक रिश्तों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शिक्षा और रिसर्च के क्षेत्र में भी कई समझौतों पर हस्ताक्षर हुए हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे कि </span>Nalanda University <span lang="hi" xml:lang="hi">और </span>University of Groningen <span lang="hi" xml:lang="hi">के बीच अकादमिक सहयोग</span>, Leiden University Libraries <span lang="hi" xml:lang="hi">और </span>Archaeological Survey of India <span lang="hi" xml:lang="hi">के बीच साझेदारी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और उच्च शिक्षा से जुड़ी कई </span>MoU <span lang="hi" xml:lang="hi">शामिल हैं। इसके अतिरिक्त</span>, Indian Council of Medical Research <span lang="hi" xml:lang="hi">और नीदरलैंड के </span>RIVM <span lang="hi" xml:lang="hi">के बीच स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग को नई दिशा दी गई है। सीमा शुल्क सहयोग को मजबूत करने के लिए भी एक महत्वपूर्ण समझौता किया गया है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इन सभी समझौतों के साथ</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">दोनों देशों ने </span>2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">से </span>2030 <span lang="hi" xml:lang="hi">के लिए </span>‘India–Netherlands Strategic Partnership Roadmap’ <span lang="hi" xml:lang="hi">या </span>‘<span lang="hi" xml:lang="hi">विजन </span>2030’ <span lang="hi" xml:lang="hi">को भी पेश किया है। इस रोडमैप में स्पष्ट किया गया है कि आने वाले समय में ध्यान केवल पारंपरिक व्यापार या कूटनीति तक सीमित नहीं रहेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नई तकनीक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साइबर सुरक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इंडो-पैसिफिक रणनीति और ऊर्जा परिवर्तन जैसे क्षेत्रों पर विशेष जोर दिया जाएगा। नीति आयोग और नीदरलैंड सरकार के बीच ऊर्जा परिवर्तन परियोजनाओं को लेकर भी एक संयुक्त सहमति बनी है। कृषि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डेयरी और हेल्थ सेक्टर में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए भी ठोस योजनाएँ बनाई गई हैं। कुल मिलाकर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ये समझौते भारत और नीदरलैंड के रिश्तों को एक नई तकनीकी और रणनीतिक दिशा देने के प्रयास के रूप में देखे जा रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ विकास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रोजगार और वैश्विक सप्लाई चेन में दोनों देशों की भूमिका को और मजबूत करने की आशा है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 17 May 2026 16:03:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सऊदी दौरे पर NSA अजीत डोभाल,  विदेश मंत्री से करेंगे ऊर्जा सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा पर अहम बातचीत</title>
                                    <description><![CDATA[NSA अजीत डोभाल के रियाद दौरे में भारत-सऊदी संबंध, ऊर्जा सहयोग और वैश्विक सुरक्षा मुद्दों पर अहम बातचीत हुई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/nsa-ajit-doval-will-hold-important-talks-with-the-foreign/article-51643"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/ajit-doval-saudi-visit-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने 19 अप्रैल को सऊदी अरब की राजधानी रियाद का आधिकारिक दौरा किया, जहां उन्होंने सऊदी नेतृत्व के साथ कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहन चर्चा की। इस दौरान द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने, ऊर्जा सहयोग को विस्तार देने और क्षेत्रीय सुरक्षा हालात पर विचार-विमर्श हुआ। अधिकारियों के अनुसार, यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब वैश्विक स्तर पर ऊर्जा और सुरक्षा से जुड़े मुद्दे तेजी से बदल रहे हैं, जिससे भारत और सऊदी अरब के बीच समन्वय और भी अहम हो गया है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">रियाद स्थित भारतीय दूतावास के मुताबिक, डोभाल ने सऊदी ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुल अज़ीज़ बिन सलमान, विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार डॉ. मूसाएद बिन मोहम्मद अल-ऐबान से अलग-अलग मुलाकात की। इन बैठकों में दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर जोर दिया गया।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">रणनीतिक साझेदारी पर फोकस</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">इन बैठकों में ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग को नई दिशा देने पर भी चर्चा हुई। सूत्रों के मुताबिक, दोनों पक्षों ने आपसी हितों से जुड़े मुद्दों और क्षेत्रीय स्थिरता पर विचार साझा किए। अधिकारियों के अनुसार, भारत और सऊदी अरब के बीच ऊर्जा सहयोग पहले से ही मजबूत रहा है, लेकिन बदलते वैश्विक परिदृश्य में इसे और व्यापक बनाने की जरूरत महसूस की जा रही है। इसी संदर्भ में इस दौरे को अहम माना जा रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">इससे पहले अजीत डोभाल ने 17 अप्रैल को यूक्रेन की राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा परिषद के सचिव रुस्तम उमेरोव से मुलाकात की थी। यह बैठक रूस-यूक्रेन युद्ध की पृष्ठभूमि में हुई, जिसमें सुरक्षा और रणनीतिक मुद्दों पर चर्चा की गई।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">वैश्विक संदर्भ में चर्चा</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">बैठक में रूस-यूक्रेन संघर्ष और उसके वैश्विक प्रभावों पर विचार हुआ। भारत ने एक बार फिर शांतिपूर्ण समाधान और कूटनीतिक प्रयासों पर जोर दिया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के अनुसार, दोनों देशों के बीच संवाद बनाए रखने और पूर्वी यूरोप की स्थिति पर निरंतर संपर्क पर सहमति बनी। भारत ने स्पष्ट किया कि वह संवाद और कूटनीति के जरिए विवादों का समाधान चाहता है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">पृष्ठभूमि में देखें तो रूस-यूक्रेन युद्ध का असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, खाद्य सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर पड़ा है। ऐसे में भारत की यह सक्रिय कूटनीति संतुलन बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">इस दौरे का प्रभाव केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत की पश्चिम एशिया में रणनीतिक स्थिति मजबूत होगी और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर दीर्घकालिक लाभ मिल सकता है।</span></p>
<p><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">आने वाले समय में भारत और सऊदी अरब के बीच उच्चस्तरीय संवाद और तेज होने की संभावना है। साथ ही, वैश्विक संकटों के बीच भारत की संतुलित विदेश नीति और सक्रिय भूमिका पर भी नजर बनी रहेगी।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 11:54:25 +0530</pubDate>
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