<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.dainikjagranmpcg.com/russia-ukraine-war/tag-10629" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>दैनिक जागरण RSS Feed Generator</generator>
                <title>Russia Ukraine War - दैनिक जागरण</title>
                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/tag/10629/rss</link>
                <description>Russia Ukraine War RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>रूस से जुड़े कारोबार पर EU की सख्ती, भारत समेत 6 देशों की कंपनियां निशाने पर</title>
                                    <description><![CDATA[यूक्रेन युद्ध के बीच यूरोपीय यूनियन ने रूस के खिलाफ 21वें प्रतिबंध पैकेज का प्रस्ताव रखा, भारत, चीन और यूएई सहित कई देशों की 50 कंपनियों पर एक्सपोर्ट बैन की तैयारी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/eus-strictness-on-business-related-to-russia-targets-companies-of/article-55511"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/eu-sanctions-on-russia.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यूक्रेन युद्ध को लेकर यूरोप और रूस के बीच जारी टकराव के बीच यूरोपीय यूनियन ने एक बार फिर बड़ा कदम उठाया है। यूरोपीय संघ ने रूस पर 21वें प्रतिबंध पैकेज का प्रस्ताव पेश किया है, जिसके तहत भारत, चीन, तुर्किये, संयुक्त अरब अमीरात, कजाकिस्तान और किर्गिस्तान की करीब 50 कंपनियां प्रतिबंधों के दायरे में आ सकती हैं। इन कंपनियों पर आरोप है कि वे रूस की सैन्य और औद्योगिक गतिविधियों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग प्रदान कर रही हैं। इस प्रस्ताव के सामने आने के बाद अंतरराष्ट्रीय व्यापार और कूटनीतिक हलकों में इसकी व्यापक चर्चा शुरू हो गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मंगलवार को यूरोपीय यूनियन की ओर से जारी जानकारी में कहा गया कि रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने और उसकी युद्ध क्षमता को कमजोर करने के उद्देश्य से यह नया प्रतिबंध पैकेज तैयार किया गया है। यूरोपीय अधिकारियों का मानना है कि रूस पर पहले से लागू प्रतिबंधों के बावजूद कई विदेशी कंपनियां विभिन्न माध्यमों से रूस को आवश्यक तकनीक, उपकरण और अन्य सामग्री उपलब्ध करा रही हैं। ऐसे में अब उन कंपनियों को भी निशाना बनाया जा रहा है जो सीधे रूस में नहीं हैं, लेकिन रूस की सैन्य जरूरतों से जुड़े नेटवर्क का हिस्सा मानी जा रही हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यूरोपीय संघ की विदेश मामलों और सुरक्षा नीति की उच्च प्रतिनिधि काजा कल्लास ने इस संबंध में कहा कि नए प्रतिबंधों का उद्देश्य केवल रूस को आर्थिक रूप से कमजोर करना नहीं है, बल्कि उन अंतरराष्ट्रीय नेटवर्कों को भी रोकना है जो रूस की युद्ध अर्थव्यवस्था को समर्थन दे रहे हैं। उनके अनुसार नई सूची में शामिल कंपनियों पर निर्यात नियंत्रण और अन्य व्यापारिक प्रतिबंध लागू किए जाएंगे। इससे रूस को उन्नत तकनीक और महत्वपूर्ण उपकरणों की आपूर्ति पर असर पड़ सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रस्तावित सूची में भारत और चीन की कई कंपनियां भी शामिल हैं। हालांकि यूरोपीय यूनियन की ओर से सभी कंपनियों के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, लेकिन संकेत दिए गए हैं कि ये संस्थाएं रूस के सैन्य-औद्योगिक ढांचे से जुड़ी गतिविधियों में सहयोग करने के आरोपों का सामना कर रही हैं। यदि प्रतिबंध लागू होते हैं तो इन कंपनियों के लिए यूरोपीय बाजारों तक पहुंच सीमित हो सकती है और कई प्रकार के व्यापारिक लेन-देन प्रभावित हो सकते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से यूरोपीय यूनियन रूस पर लगातार प्रतिबंध लगाता रहा है। बीते दो वर्षों में रूस के बैंकिंग, ऊर्जा, रक्षा, परिवहन और तकनीकी क्षेत्रों पर कई स्तरों पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए जा चुके हैं। इसके बावजूद यूरोपीय देशों का मानना है कि रूस ने वैकल्पिक व्यापारिक मार्गों और तीसरे देशों के माध्यम से कई आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति जारी रखी है। इसी वजह से अब प्रतिबंधों का दायरा रूस के बाहर मौजूद कंपनियों तक बढ़ाया जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस कदम का असर केवल रूस तक सीमित नहीं रहेगा। भारत, चीन और अन्य देशों की वे कंपनियां जो अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा हैं, उन्हें भी नई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। व्यापारिक विश्लेषकों के मुताबिक यदि निर्यात नियंत्रण सख्ती से लागू किए गए तो कई क्षेत्रों में कारोबारी गतिविधियों पर असर पड़ सकता है। खासकर तकनीकी उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और ड्रोन से जुड़े उद्योगों में इसका प्रभाव अधिक दिखाई दे सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">काजा कल्लास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि नई सूची में ड्रोन निर्माण और उससे जुड़े क्षेत्रों की 30 से अधिक संस्थाओं को भी शामिल किया जाएगा। उनका कहना है कि रूस की सैन्य क्षमताओं को बनाए रखने में इन क्षेत्रों की महत्वपूर्ण भूमिका है। यूरोपीय यूनियन अब ऐसे नेटवर्क को तोड़ने की कोशिश कर रहा है जो युद्ध संचालन के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अंतरराष्ट्रीय राजनीति के जानकारों का मानना है कि यह प्रतिबंध पैकेज यूरोप की अब तक की सबसे व्यापक कार्रवाई में से एक हो सकता है। ब्रुसेल्स पिछले दो वर्षों में रूस के खिलाफ सबसे बड़ी प्रतिबंध सूची तैयार करने की दिशा में काम कर रहा है। इसका उद्देश्य केवल वर्तमान युद्ध को प्रभावित करना नहीं बल्कि रूस की दीर्घकालिक आर्थिक और सैन्य क्षमता को भी सीमित करना है। प्रस्तावित प्रतिबंधों पर सदस्य देशों के बीच अंतिम सहमति बनना बाकी है। यदि इसे मंजूरी मिलती है तो भारत समेत कई देशों की कंपनियों को नई व्यापारिक और नियामकीय चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। वहीं रूस और यूरोपीय यूनियन के बीच आर्थिक टकराव का दायरा और बढ़ने की संभावना भी जताई जा रही है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/eus-strictness-on-business-related-to-russia-targets-companies-of/article-55511</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/eus-strictness-on-business-related-to-russia-targets-companies-of/article-55511</guid>
                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 14:21:41 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/eu-sanctions-on-russia.jpg"                         length="174622"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सऊदी दौरे पर NSA अजीत डोभाल,  विदेश मंत्री से करेंगे ऊर्जा सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा पर अहम बातचीत</title>
                                    <description><![CDATA[NSA अजीत डोभाल के रियाद दौरे में भारत-सऊदी संबंध, ऊर्जा सहयोग और वैश्विक सुरक्षा मुद्दों पर अहम बातचीत हुई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/nsa-ajit-doval-will-hold-important-talks-with-the-foreign/article-51643"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/ajit-doval-saudi-visit-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने 19 अप्रैल को सऊदी अरब की राजधानी रियाद का आधिकारिक दौरा किया, जहां उन्होंने सऊदी नेतृत्व के साथ कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहन चर्चा की। इस दौरान द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने, ऊर्जा सहयोग को विस्तार देने और क्षेत्रीय सुरक्षा हालात पर विचार-विमर्श हुआ। अधिकारियों के अनुसार, यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब वैश्विक स्तर पर ऊर्जा और सुरक्षा से जुड़े मुद्दे तेजी से बदल रहे हैं, जिससे भारत और सऊदी अरब के बीच समन्वय और भी अहम हो गया है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">रियाद स्थित भारतीय दूतावास के मुताबिक, डोभाल ने सऊदी ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुल अज़ीज़ बिन सलमान, विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार डॉ. मूसाएद बिन मोहम्मद अल-ऐबान से अलग-अलग मुलाकात की। इन बैठकों में दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर जोर दिया गया।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">रणनीतिक साझेदारी पर फोकस</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">इन बैठकों में ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग को नई दिशा देने पर भी चर्चा हुई। सूत्रों के मुताबिक, दोनों पक्षों ने आपसी हितों से जुड़े मुद्दों और क्षेत्रीय स्थिरता पर विचार साझा किए। अधिकारियों के अनुसार, भारत और सऊदी अरब के बीच ऊर्जा सहयोग पहले से ही मजबूत रहा है, लेकिन बदलते वैश्विक परिदृश्य में इसे और व्यापक बनाने की जरूरत महसूस की जा रही है। इसी संदर्भ में इस दौरे को अहम माना जा रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">इससे पहले अजीत डोभाल ने 17 अप्रैल को यूक्रेन की राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा परिषद के सचिव रुस्तम उमेरोव से मुलाकात की थी। यह बैठक रूस-यूक्रेन युद्ध की पृष्ठभूमि में हुई, जिसमें सुरक्षा और रणनीतिक मुद्दों पर चर्चा की गई।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">वैश्विक संदर्भ में चर्चा</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">बैठक में रूस-यूक्रेन संघर्ष और उसके वैश्विक प्रभावों पर विचार हुआ। भारत ने एक बार फिर शांतिपूर्ण समाधान और कूटनीतिक प्रयासों पर जोर दिया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के अनुसार, दोनों देशों के बीच संवाद बनाए रखने और पूर्वी यूरोप की स्थिति पर निरंतर संपर्क पर सहमति बनी। भारत ने स्पष्ट किया कि वह संवाद और कूटनीति के जरिए विवादों का समाधान चाहता है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">पृष्ठभूमि में देखें तो रूस-यूक्रेन युद्ध का असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, खाद्य सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर पड़ा है। ऐसे में भारत की यह सक्रिय कूटनीति संतुलन बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">इस दौरे का प्रभाव केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत की पश्चिम एशिया में रणनीतिक स्थिति मजबूत होगी और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर दीर्घकालिक लाभ मिल सकता है।</span></p>
<p><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">आने वाले समय में भारत और सऊदी अरब के बीच उच्चस्तरीय संवाद और तेज होने की संभावना है। साथ ही, वैश्विक संकटों के बीच भारत की संतुलित विदेश नीति और सक्रिय भूमिका पर भी नजर बनी रहेगी।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/nsa-ajit-doval-will-hold-important-talks-with-the-foreign/article-51643</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/nsa-ajit-doval-will-hold-important-talks-with-the-foreign/article-51643</guid>
                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 11:54:25 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-04/ajit-doval-saudi-visit-%281%29.jpg"                         length="113399"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        