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                <title>National Security - दैनिक जागरण</title>
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                <description>National Security RSS Feed</description>
                
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                <title>शोपियां एनकाउंटर में लश्कर कमांडर जाकिर अहमद ढेर, पांच दिन बाद मिली बड़ी सफलता</title>
                                    <description><![CDATA[पहलगाम आतंकी हमले के बाद जारी हिट लिस्ट में था शामिल, शोपियां के चनापोरा इलाके में सेना, पुलिस और CRPF का संयुक्त ऑपरेशन जारी, एक अन्य आतंकी की तलाश तेज।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/lashkar-commander-zakir-ahmed-killed-in-shopian-encounter-big-success/article-58166"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/shopian-encounter.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">जम्मू-कश्मीर के शोपियां जिले में आतंकवाद के खिलाफ चल रहे बड़े अभियान के बीच सुरक्षाबलों को अहम सफलता मिली है। पांच दिनों से लगातार चल रहे संयुक्त ऑपरेशन के दौरान लश्कर-ए-तैयबा के शीर्ष कमांडर जाकिर अहमद गनी को मार गिराया गया। बुधवार को चनापोरा इलाके से उसका शव बरामद किया गया। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, जाकिर उन 14 स्थानीय आतंकियों की सूची में शामिल था, जिसे पहलगाम आतंकी हमले के बाद तैयार किया गया था। इस कार्रवाई को दक्षिण कश्मीर में सक्रिय आतंकी नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कामयाबी माना जा रहा है। हालांकि ऑपरेशन अभी खत्म नहीं हुआ है, क्योंकि सुरक्षाबलों को आशंका है कि लश्कर का एक और आतंकी लतीफ भट अब भी इलाके में छिपा हो सकता है। इसी वजह से पूरे क्षेत्र में तलाशी अभियान लगातार जारी है और अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती भी की गई है। शनिवार शाम खुफिया एजेंसियों को सूचना मिली थी कि चनापोरा क्षेत्र में कुछ आतंकवादी छिपे हुए हैं। सूचना मिलते ही सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) और सीआरपीएफ की संयुक्त टीम ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर सर्च ऑपरेशन शुरू किया। शुरुआती दौर में आतंकियों की ओर से बीच-बीच में फायरिंग की गई, जिसके बाद ऑपरेशन को और व्यापक बनाया गया। घने जंगलों, बागानों और आसपास के पहाड़ी इलाकों में लगातार तलाशी चलती रही। सुरक्षाबलों ने संभावित भागने के सभी रास्तों पर अतिरिक्त जवान तैनात किए और रात के समय निगरानी के लिए विशेष उपकरणों तथा रोशनी की व्यवस्था भी की गई। कई दिनों की सघन तलाश के बाद बुधवार को जाकिर अहमद गनी का शव बरामद किया गया। अधिकारियों के अनुसार शव की पहचान और अन्य औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">संयुक्त अभियान में सेना की राष्ट्रीय राइफल्स की कई इकाइयों के अलावा स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप और सीआरपीएफ की बटालियनें शामिल रहीं। आतंकवाद विरोधी अभियानों में विशेषज्ञ मानी जाने वाली सेना की विक्टर फोर्स ने भी इस ऑपरेशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सुरक्षाबलों ने गांवों, बागानों और आसपास के इलाकों में लगातार तलाशी लेते हुए किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर नजर बनाए रखी। अधिकारियों के मुताबिक ऑपरेशन पूरी तरह खुफिया इनपुट के आधार पर संचालित किया गया और नागरिकों की सुरक्षा का भी विशेष ध्यान रखा गया। फिलहाल पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है ताकि कोई आतंकी बचकर निकल न सके। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार जाकिर अहमद गनी कुलगाम जिले के मतलहामा गांव का रहने वाला था। वह पिछले कुछ वर्षों से दक्षिण कश्मीर और पीर पंजाल क्षेत्र में सक्रिय था। जांच एजेंसियों का दावा है कि उसका संबंध पाकिस्तान समर्थित आतंकी नेटवर्क से भी रहा है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की ओर से पहले भी उसके खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी थी और अक्टूबर 2025 में अदालत के माध्यम से नोटिस जारी किया गया था। हाल के महीनों में उसका नाम पहलगाम आतंकी हमले की जांच के दौरान भी सामने आया था। यही कारण था कि पहलगाम हमले के बाद जिन 14 स्थानीय आतंकियों की सूची सुरक्षा एजेंसियों ने तैयार की थी, उनमें जाकिर का नाम प्रमुखता से शामिल था।</p>
<p style="text-align:justify;">अधिकारियों के मुताबिक जाकिर के मारे जाने से दक्षिण कश्मीर में लश्कर-ए-तैयबा के नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है। सुरक्षा रिकॉर्ड के अनुसार वह वर्ष 2024 से संगठन के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहा था। वहीं लतीफ भट पिछले वर्ष संगठन में शामिल हुआ था और उसके भी इलाके में छिपे होने की आशंका जताई जा रही है। इसी कारण सुरक्षाबल पूरे क्षेत्र में अभियान जारी रखे हुए हैं। पुलिस और सेना का कहना है कि जब तक क्षेत्र पूरी तरह सुरक्षित घोषित नहीं हो जाता, तब तक तलाशी अभियान जारी रहेगा। पहलगाम आतंकी हमले के बाद जम्मू-कश्मीर में आतंकियों के खिलाफ लगातार बड़े अभियान चलाए जा रहे हैं। पिछले एक वर्ष के दौरान विभिन्न अभियानों में कई शीर्ष आतंकवादी मारे गए हैं और उनके ठिकानों को ध्वस्त किया गया है। सुरक्षा एजेंसियां आतंकियों के साथ-साथ उनके सहयोगियों और लॉजिस्टिक नेटवर्क पर भी लगातार कार्रवाई कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि स्थानीय स्तर पर आतंकवाद को समर्थन देने वाले तंत्र को भी चिन्हित कर कानूनी कार्रवाई की जा रही है। यही वजह है कि कई इलाकों में आतंकियों के मददगारों के खिलाफ भी अभियान चलाए गए हैं। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि जाकिर अहमद गनी के मारे जाने के बाद पहलगाम हमले के बाद तैयार की गई 14 आतंकियों की सूची में शामिल अब तक नौ आतंकवादी ढेर किए जा चुके हैं। बाकी बचे आतंकियों की तलाश के लिए अभियान लगातार जारी है। अधिकारियों का कहना है कि आतंकवाद के खिलाफ यह कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी और किसी भी आतंकी संगठन को घाटी में दोबारा मजबूत होने का मौका नहीं दिया जाएगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 12:06:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>सरकारी आदेश के बाद ओटीटी से हटाई गई दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज', विवाद गहराया</title>
                                    <description><![CDATA[आईटी रूल 2021 के तहत कार्रवाई का हवाला, फिल्म हटने के बाद अभिव्यक्ति की आजादी, सेंसरशिप और पायरेसी को लेकर नई बहस तेज; अनुराग कश्यप समेत कई फिल्मी हस्तियों ने जताया समर्थन।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/bollywood/diljit-dosanjhs-film-satluj-removed-from-ott-after-government-order/article-58086"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/diljit-dosanjh1.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज' को ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटाए जाने के बाद विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। 2 जुलाई को रिलीज हुई यह फिल्म 5 जुलाई को अचानक प्लेटफॉर्म से हटा दी गई, जिसके बाद सोशल मीडिया से लेकर फिल्म इंडस्ट्री तक इस फैसले को लेकर बहस शुरू हो गई। फिल्म हटाए जाने के पीछे पहले कोई स्पष्ट वजह सामने नहीं आई थी, लेकिन अब सामने आई जानकारी के अनुसार यह कार्रवाई सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) नियम, 2021 के तहत सरकारी निर्देश के बाद की गई। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कंटेंट, सरकारी हस्तक्षेप, सेंसरशिप और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। फिल्म के हटने के बाद अभिनेता दिलजीत दोसांझ, निर्देशक हनी त्रेहान और फिल्म से जुड़े लोगों को कई कलाकारों का समर्थन मिल रहा है। वहीं दूसरी ओर सरकार से जुड़े सूत्रों का कहना है कि यह फैसला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को ध्यान में रखकर लिया गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मामले से जुड़े अधिकारियों के अनुसार फिल्म का निर्माण पहले 'पंजाब 95' नाम से किया गया था। वर्ष 2022 में इसके निर्माताओं ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के पास प्रमाणन के लिए आवेदन किया था। उस दौरान सेंसर बोर्ड ने फिल्म में कई बदलाव और कुल 127 कट लगाने की सिफारिश की थी। बताया जाता है कि निर्माता इन बदलावों के लिए तैयार नहीं हुए, जिसके बाद फिल्म को प्रमाणन नहीं मिल सका। बाद में फिल्म का नाम बदलकर 'सतलुज' रखा गया और इसे ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज किया गया। चूंकि ओटीटी प्लेटफॉर्म पर प्रदर्शित होने वाले कंटेंट का नियमन पारंपरिक फिल्म सेंसर प्रक्रिया के तहत नहीं होता, इसलिए मामला अलग कानूनी दायरे में पहुंच गया। सरकारी सूत्रों के अनुसार जब फिल्म सरकार के संज्ञान में आई तो आईटी रूल 2021 के प्रावधानों के तहत संबंधित ओटीटी प्लेटफॉर्म को इसे हटाने का निर्देश दिया गया।सरकार की ओर से यह भी कहा गया है कि कुछ सामग्री के संभावित दुरुपयोग को लेकर सुरक्षा एजेंसियों ने चिंता जताई थी। सूत्रों के मुताबिक आशंका थी कि फिल्म के कुछ हिस्सों का इस्तेमाल भारत विरोधी या खालिस्तान समर्थक तत्व अपने प्रचार के लिए कर सकते हैं। खासतौर पर पंजाब के राजनीतिक माहौल और आगामी चुनावी परिस्थितियों को देखते हुए इस विषय को संवेदनशील माना गया। हालांकि सरकार की ओर से कोई विस्तृत सार्वजनिक आदेश जारी नहीं किया गया है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में आवश्यक कदम उठाना प्राथमिक जिम्मेदारी होती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">फिल्म हटाए जाने के बाद निर्देशक और कलाकारों के समर्थन में फिल्म जगत के कई लोग सामने आए हैं। फिल्ममेकर अनुराग कश्यप ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए निर्देशक हनी त्रेहान की तुलना ईरान के चर्चित फिल्मकार जाफर पनाही से की। उन्होंने लिखा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि भारतीय फिल्मकारों को भी ऐसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ेगा, जैसी पनाही ने अपने देश में की थी। जाफर पनाही लंबे समय से सरकारी प्रतिबंधों और सेंसरशिप को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहे हैं। अनुराग कश्यप की इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर नई बहस शुरू हो गई। इस बीच अभिनेता दिलजीत दोसांझ ने भी फिल्म हटाए जाने पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उन्हें पहले से अंदाजा था कि फिल्म ज्यादा समय तक प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध नहीं रहेगी। उन्होंने यह भी कहा कि कई दर्शकों ने फिल्म पहले ही डाउनलोड कर ली है और वह चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा लोग इसे देखें। दिलजीत के इस बयान के बाद सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर फिल्म की अनधिकृत प्रतियां तेजी से साझा की जाने लगीं। कई यूजर्स ने फिल्म के लिंक और वीडियो क्लिप अपलोड किए, जिससे पायरेसी का मामला भी चर्चा में आ गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ओटीटी प्लेटफॉर्म की ओर से बाद में आधिकारिक बयान जारी कर दर्शकों से पायरेसी का समर्थन नहीं करने की अपील की गई। प्लेटफॉर्म ने कहा कि वह फिल्म को दोबारा उपलब्ध कराने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है, लेकिन किसी भी तरह की अवैध कॉपी साझा करना कानून का उल्लंघन है। डिजिटल कंटेंट उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामलों में पायरेसी सबसे बड़ी चुनौती बन जाती है, क्योंकि एक बार सामग्री इंटरनेट पर फैलने के बाद उसे पूरी तरह रोक पाना बेहद मुश्किल होता है। फिल्म 'सतलुज' पंजाब के मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित बताई जाती है। यह फिल्म पहले 'पंजाब 95' शीर्षक से तैयार हुई थी और अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में भी प्रदर्शित की गई थी। इसकी कहानी और दिलजीत दोसांझ के अभिनय की विदेशों में सराहना हुई थी। बाद में शीर्षक बदलने और अन्य विवादों के बीच इसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रिलीज किया गया। अब फिल्म हटाए जाने के बाद इसकी कहानी से अधिक उस पर हुई कार्रवाई चर्चा का विषय बन गई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बालीवुड</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 13:38:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>जनरल उपेंद्र द्विवेदी सेवानिवृत्त, जनरल धीरज सेठ बने भारतीय सेना के नए प्रमुख</title>
                                    <description><![CDATA[करीब चार दशक के सैन्य अनुभव वाले जनरल धीरज सेठ ने भारतीय सेना के 31वें प्रमुख के रूप में पदभार संभाला। सेवानिवृत्ति से पहले जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने सेना की उपलब्धियों और ऑपरेशन सिंदूर का विशेष उल्लेख किया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/general-upendra-dwivedi-retired-general-dheeraj-seth-becomes-the-new/article-57410"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/general-dheeraj-seth.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">भारतीय सेना में मंगलवार को नेतृत्व परिवर्तन का महत्वपूर्ण दिन रहा। जनरल उपेंद्र द्विवेदी अपने कार्यकाल को पूरा करने के बाद आर्मी चीफ के पद से सेवानिवृत्त हो गए। पद छोड़ने से पहले उन्होंने नई दिल्ली स्थित नेशनल वॉर मेमोरियल पहुंचकर देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले शहीद जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद उन्होंने सेना के अधिकारियों और जवानों को संबोधित करते हुए अपने कार्यकाल के अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में भारतीय सेना ने हर चुनौती का मजबूती, संतुलन और पूरी सतर्कता के साथ सामना किया। उनके अनुसार राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े सभी मोर्चों पर सेना ने अपनी जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से निर्वहन किया और बदलते सुरक्षा परिदृश्य के अनुरूप खुद को लगातार तैयार रखा। अपने विदाई संबोधन में जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने ऑपरेशन सिंदूर का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह अभियान भारतीय सेना की रणनीतिक तैयारी, समन्वय और त्वरित कार्रवाई का महत्वपूर्ण उदाहरण रहा है। उन्होंने कहा कि उत्तरी सीमाओं पर ऑपरेशन स्नो लेपर्ड के तहत सेना की तैनाती पूरी मजबूती के साथ जारी रही, जबकि पश्चिमी मोर्चे पर भी सैनिकों ने अनुशासन और संयम के साथ अपनी जिम्मेदारियां निभाईं। उनके मुताबिक वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर स्थिति फिलहाल स्थिर जरूर है, लेकिन संवेदनशील बनी हुई है। ऐसे में भारतीय सेना किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है और सीमा पर चौकसी में किसी तरह की कमी नहीं आने दी गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd">जनरल द्विवेदी ने अपने संबोधन में तीनों सेनाओं के बीच बढ़ते तालमेल को भी भारतीय सुरक्षा व्यवस्था की बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि थल सेना, नौसेना और वायुसेना ने साझा रणनीति, बेहतर समन्वय और आपसी विश्वास के साथ कई अहम जिम्मेदारियों को सफलतापूर्वक पूरा किया। उन्होंने इस दौरान जवानों, अधिकारियों और सैन्य नेतृत्व का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सेना की सफलता केवल नेतृत्व की नहीं बल्कि प्रत्येक सैनिक की निष्ठा, समर्पण और अनुशासन का परिणाम होती है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में भी भारतीय सेना इसी पेशेवर भावना के साथ देश की सुरक्षा करती रहेगी। सेवानिवृत्ति के साथ ही जनरल धीरज सेठ ने भारतीय सेना के 31वें प्रमुख के रूप में पदभार संभाल लिया। करीब चार दशक के सैन्य अनुभव वाले जनरल सेठ को भारतीय सेना का अनुभवी अधिकारी माना जाता है। उन्होंने दिसंबर 1986 में सेना में कमीशन प्राप्त किया था और अपने लंबे करियर के दौरान कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। आर्मी चीफ बनने से पहले वह उप सेना प्रमुख के पद पर भी कार्य कर चुके हैं। सैन्य रणनीति, सीमा प्रबंधन और नेतृत्व क्षमता के कारण उन्हें सेना के वरिष्ठ अधिकारियों में प्रमुख स्थान हासिल रहा है। उनके नेतृत्व में भारतीय सेना आधुनिक चुनौतियों के अनुरूप अपनी क्षमताओं को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ेगी, ऐसी उम्मीद की जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd">जनरल धीरज सेठ सैन्य परंपरा वाले परिवार से आते हैं। उनके पिता लेफ्टिनेंट जनरल कृष्ण मोहन सेठ भारतीय सेना में एडजुटेंट जनरल के पद से वर्ष 1997 में सेवानिवृत्त हुए थे। उन्होंने अपने सैन्य करियर में XXI स्ट्राइक कोर और III कोर जैसी महत्वपूर्ण सैन्य संरचनाओं की कमान भी संभाली थी। ऐसे माहौल में पले-बढ़े जनरल धीरज सेठ ने भी सेना में लंबी और सफल सेवा दी है। सैन्य जिम्मेदारियों के अलावा उन्हें खेलों में भी गहरी रुचि है। टेनिस और गोल्फ उनके पसंदीदा खेलों में शामिल हैं। उनकी पत्नी का नाम कोमल सेठ है और वे कई सामाजिक एवं सैन्य कल्याण गतिविधियों से भी जुड़ी रही हैं। जनरल धीरज सेठ ऐसे समय में सेना की कमान संभाल रहे हैं जब भारत की सीमाओं पर सुरक्षा चुनौतियां लगातार बदल रही हैं। उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं पर सतर्कता बनाए रखने के साथ-साथ आधुनिक तकनीक, साइबर सुरक्षा, ड्रोन युद्ध और संयुक्त सैन्य अभियानों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में नए सेना प्रमुख के सामने पारंपरिक सैन्य तैयारियों के साथ भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप सेना को और अधिक सक्षम बनाने की जिम्मेदारी होगी। जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने पद छोड़ते समय नए सेना प्रमुख के प्रति पूरा विश्वास व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जनरल धीरज सेठ एक अनुभवी सैनिक और सक्षम नेता हैं। उन्हें भरोसा है कि उनके नेतृत्व में भारतीय सेना अपनी गौरवशाली परंपराओं को आगे बढ़ाते हुए नई उपलब्धियां हासिल करेगी। नेतृत्व परिवर्तन की इस प्रक्रिया को भारतीय सेना की मजबूत संस्थागत व्यवस्था का हिस्सा माना जाता है, जहां अनुभव, अनुशासन और निरंतरता के साथ जिम्मेदारियों का हस्तांतरण किया जाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 14:17:19 +0530</pubDate>
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                <title>छत्तीसगढ़ में ISI से जुड़े संदिग्ध की गिरफ्तारी, जांच तेज</title>
                                    <description><![CDATA[जांजगीर-चांपा में किरायेदार सत्यापन के दौरान पकड़ा गया आरोपी, विदेशी नेटवर्क से संपर्क के आरोप]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/isi-related-suspect-arrested-in-chhattisgarh-investigation-intensified/article-56642"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/isi-suspect-arrest.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में सुरक्षा एजेंसियों ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से जुड़े होने के संदेह में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई 21 जून को अकलतरा थाना क्षेत्र में किरायेदार सत्यापन अभियान के दौरान की गई, जब पुलिस टीम संदिग्ध गतिविधियों की जांच के लिए एक मकान पर पहुंची थी। शुरुआती जांच के बाद मामले ने गंभीर मोड़ ले लिया और आरोपी के मोबाइल से विदेशी संपर्कों के संकेत मिलने का दावा किया गया है। फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क की तह तक जाने की कोशिश कर रही है और कई स्तरों पर जांच जारी है। पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार व्यक्ति की पहचान सेवक सिंह के रूप में हुई है, जो पंजाब के तरनतारन जिले के पट्टी इलाके का रहने वाला बताया जा रहा है। वह पिछले कुछ समय से जांजगीर-चांपा के अकलतरा क्षेत्र में किराए के मकान में रह रहा था। एसपी विजय कुमार पांडेय के निर्देश पर जिले में संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाई गई थी, इसी दौरान किरायेदारों के वेरिफिकेशन अभियान के तहत पुलिस को उसकी मौजूदगी की सूचना मिली। मौके पर पहुंची टीम ने जब उससे पूछताछ की तो उसके जवाबों में कई विरोधाभास सामने आए, जिसके बाद शक और गहरा गया।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस ने जब उसके मोबाइल फोन की जांच की तो उसमें पाकिस्तान, सऊदी अरब और कुछ अन्य देशों के नंबरों से लगातार संपर्क के संकेत मिले। इसके साथ ही वॉट्सएप, टेलीग्राम और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए संदिग्ध बातचीत के भी सबूत मिलने का दावा किया गया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी कुछ समय से विदेशी नेटवर्क से जुड़ा हुआ था और उससे छत्तीसगढ़ के संवेदनशील इलाकों, लोगों और वाहनों से जुड़ी जानकारियां साझा करने की आशंका है। हालांकि इन सभी बिंदुओं की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और जांच जारी है। मामले में सबसे गंभीर पहलू तब सामने आया जब पूछताछ में यह संकेत मिले कि आरोपी का संपर्क पाकिस्तान स्थित कुछ ISI समर्थित नेटवर्क से हो सकता है। पुलिस के मुताबिक उसके मोबाइल से कई वॉट्सएप चैट, कॉल रिकॉर्डिंग और वीडियो कॉल के निशान मिले हैं, जिन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह संपर्क किस स्तर का था और इसका उद्देश्य क्या था। पुलिस का कहना है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले तकनीकी रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में यह भी बात सामने आई है कि आरोपी ड्रोन के जरिए हथियार मिलने की योजना से जुड़ा हो सकता है, हालांकि पुलिस ने इसे अभी केवल आशंका बताया है। अधिकारियों के अनुसार यह दावा किया गया है कि यदि हथियार उपलब्ध कराए जाते तो उनका उपयोग किसी टारगेट किलिंग जैसी गतिविधि में किया जा सकता था, लेकिन इसकी पुष्टि फिलहाल नहीं की जा सकी है। सुरक्षा एजेंसियां इस पहलू को बेहद गंभीरता से जांच रही हैं और किसी भी संभावित खतरे को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">जिला पुलिस ने आरोपी के खिलाफ बीएनएस की धारा 152 और 61(2) के तहत मामला दर्ज किया है और उससे लगातार पूछताछ की जा रही है। साथ ही उसके मोबाइल और डिजिटल उपकरणों को जब्त कर साइबर विशेषज्ञों की टीम को जांच सौंपी गई है। पुलिस का कहना है कि पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने की कोशिश की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या यह मामला किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय मॉड्यूल से जुड़ा है या फिर यह केवल सीमित संपर्कों तक ही सीमित है।स्थानीय स्तर पर इस गिरफ्तारी के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सतर्कता बढ़ा दी गई है। पुलिस प्रशासन ने किरायेदार सत्यापन प्रक्रिया को और सख्त करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों का मानना है कि बाहरी राज्यों से आने वाले व्यक्तियों की निगरानी और समय पर वेरिफिकेशन बेहद जरूरी है, ताकि किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधि को शुरुआती स्तर पर ही रोका जा सके। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 14:09:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ होंगे देश के अगले आर्मी चीफ, 30 जून से संभालेंगे कमान</title>
                                    <description><![CDATA[केंद्र सरकार ने नियुक्ति को दी मंजूरी, मौजूदा सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी के सेवानिवृत्त होने के बाद संभालेंगे भारतीय सेना की जिम्मेदारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/lieutenant-general-dheeraj-seth-will-be-the-next-army-chief/article-55856"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/dhiraj-seth.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भारतीय सेना को जल्द ही नया नेतृत्व मिलने जा रहा है। केंद्र सरकार ने लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ को देश का अगला चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ नियुक्त करने की मंजूरी दे दी है। मौजूदा सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी का कार्यकाल 30 जून को समाप्त हो रहा है और उसी दिन लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ भारतीय सेना के 31वें प्रमुख के रूप में पदभार ग्रहण करेंगे। इस घोषणा के बाद सैन्य और रणनीतिक हलकों में उनकी नियुक्ति को लेकर चर्चा तेज हो गई है। धीरज सेठ फिलहाल उप सेना प्रमुख के पद पर कार्यरत हैं और उन्होंने इसी वर्ष 1 अप्रैल को यह जिम्मेदारी संभाली थी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भारतीय सेना में उप सेना प्रमुख का पद बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यह सेना प्रमुख के बाद दूसरा सबसे वरिष्ठ पद होता है। इस पद पर रहते हुए धीरज सेठ सेना के संचालन, रणनीतिक योजनाओं, सैन्य तैयारियों और आधुनिक तकनीकों को सेना में शामिल करने जैसे महत्वपूर्ण कार्यों की निगरानी कर रहे हैं। रक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में भारतीय सेना तेजी से आधुनिकीकरण की दिशा में आगे बढ़ी है और धीरज सेठ इस प्रक्रिया का हिस्सा रहे हैं। ऐसे में उनके नेतृत्व में सेना की कई मौजूदा योजनाओं को और गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ का सैन्य करियर लगभग 40 वर्षों का रहा है। उन्हें दिसंबर 1986 में आर्मर्ड कोर में कमीशन मिला था। इसके बाद उन्होंने देश के विभिन्न संवेदनशील और रणनीतिक क्षेत्रों में जिम्मेदारियां संभालीं। जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियानों से लेकर पश्चिमी सीमा और रेगिस्तानी इलाकों में सैन्य तैनाती तक, उन्होंने कई चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में काम किया है। लंबे अनुभव और विभिन्न परिचालन क्षेत्रों में नेतृत्व क्षमता के कारण उन्हें सेना के वरिष्ठ और अनुभवी अधिकारियों में गिना जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अपने करियर के दौरान धीरज सेठ ने दक्षिण-पश्चिमी कमान और दक्षिणी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के रूप में भी सेवाएं दी हैं। सेना के भीतर यह जिम्मेदारी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि इन कमानों के तहत बड़े सैन्य क्षेत्र और रणनीतिक संचालन आते हैं। वे उन चुनिंदा अधिकारियों में शामिल हैं जिन्होंने पश्चिमी मोर्चे से जुड़ी दो प्रमुख ऑपरेशनल कमानों का नेतृत्व किया है। इसके अलावा उन्होंने सेना मुख्यालय में कई अहम पदों पर कार्य किया और सेना की क्षमता वृद्धि तथा भविष्य की रणनीतिक जरूरतों से जुड़े कार्यक्रमों में भी योगदान दिया। धीरज सेठ का अनुभव केवल भारत तक सीमित नहीं रहा है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन के तहत अंगोला में भी सेवाएं दी हैं। अंतरराष्ट्रीय मिशन में काम करने का अनुभव किसी भी सैन्य अधिकारी के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इससे विभिन्न देशों की सेनाओं के साथ समन्वय और वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों को समझने का अवसर मिलता है। यही अनुभव उन्हें एक व्यापक दृष्टिकोण वाला सैन्य अधिकारी बनाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">शैक्षणिक दृष्टि से भी धीरज सेठ का रिकॉर्ड प्रभावशाली रहा है। उन्होंने पुणे के खड़कवासला स्थित नेशनल डिफेंस एकेडमी और देहरादून की इंडियन मिलिट्री एकेडमी से सैन्य शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने देश और विदेश के कई प्रतिष्ठित रक्षा संस्थानों में उच्च प्रशिक्षण हासिल किया। वेलिंगटन के डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज, महू के आर्मी वॉर कॉलेज और नई दिल्ली के नेशनल डिफेंस कॉलेज में उन्होंने अध्ययन किया। इसके अलावा फ्रांस के कॉलेज इंटरआर्मे डी डिफेंस में जनरल स्टाफ कोर्स और अमेरिका के नेवल पोस्टग्रेजुएट स्कूल में इंटरनेशनल डिफेंस एक्विजिशन मैनेजमेंट कोर्स भी पूरा किया। उनकी उपलब्धियों की सूची भी काफी लंबी है। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें कई बार उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया। यंग ऑफिसर्स कोर्स में उन्हें प्रतिष्ठित ‘सिल्वर सेंचुरियन’ सम्मान मिला था। जूनियर कमांड कोर्स सहित कई सैन्य प्रशिक्षण कार्यक्रमों में उन्होंने प्रथम स्थान प्राप्त किया। वर्ष 2006 में डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज में उन्हें अपने कोर्स का सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंड स्टूडेंट ऑफिसर मेडल भी प्रदान किया गया था। यह उपलब्धियां उनके पेशेवर कौशल और नेतृत्व क्षमता को दर्शाती हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">धीरज सेठ सेना की परंपरा वाले परिवार से आते हैं। उनके पिता लेफ्टिनेंट जनरल कृष्ण मोहन सेठ भारतीय सेना में एडजुटेंट जनरल के पद से वर्ष 1997 में सेवानिवृत्त हुए थे। उन्होंने सेना की दो प्रमुख और महत्वपूर्ण संरचनाओं XXI स्ट्राइक कोर तथा III कोर की कमान संभाली थी। ऐसे में सैन्य वातावरण और अनुशासन धीरज सेठ के जीवन का हिस्सा बचपन से ही रहा है। माना जाता है कि परिवार की इसी पृष्ठभूमि ने उन्हें सेना में करियर बनाने के लिए प्रेरित किया। सैन्य जिम्मेदारियों के अलावा धीरज सेठ खेलों में भी विशेष रुचि रखते हैं। उन्हें टेनिस और गोल्फ खेलना पसंद है। उनके सहयोगियों के अनुसार वे अनुशासित जीवनशैली और संतुलित नेतृत्व के लिए जाने जाते हैं। उनकी पत्नी कोमल सेठ विभिन्न सामाजिक और पारिवारिक कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका निभाती हैं। भारतीय सेना ऐसे समय में नए नेतृत्व का स्वागत करने जा रही है जब देश की सुरक्षा चुनौतियां लगातार बदल रही हैं। सीमा सुरक्षा, आधुनिक युद्ध तकनीक, साइबर सुरक्षा और सैन्य आधुनिकीकरण जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दे सेना के सामने हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 17:42:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पहलगाम आतंकी हमले की जांच में बड़ा खुलासा, आतंकियों के मोबाइल कराची और लाहौर तक पहुंचे</title>
                                    <description><![CDATA[एनआईए की जांच में सामने आए नए तथ्य, मोबाइल में बैसरन घाटी की लोकेशन और स्क्रीनशॉट मिले, सप्लाई चेन के जरिए पाकिस्तान पहुंचाए गए थे फोन]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/big-revelation-in-the-investigation-of-pahalgam-terrorist-attack-terrorists/article-54751"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/pahalgam-terror-attack.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पहलगाम आतंकी हमले की जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को मामले में एक महत्वपूर्ण सुराग मिला है। जांच के दौरान मारे गए आतंकियों के पास से बरामद मोबाइल फोन की फोरेंसिक जांच में कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। एजेंसी के अनुसार आतंकियों के कब्जे से मिले दोनों मोबाइल फोन चीन की एक कंपनी की सप्लाई चेन के माध्यम से पाकिस्तान पहुंचे थे और बाद में इन्हें कराची तथा लाहौर के पतों पर डिलीवर किया गया था। जांच एजेंसी का मानना है कि यह जानकारी हमले की पूरी साजिश और आतंकियों के नेटवर्क को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">एनआईए के अनुसार पहलगाम हमले में शामिल तीन आतंकियों को पिछले वर्ष जुलाई में सुरक्षा बलों ने एक मुठभेड़ में मार गिराया था। मुठभेड़ के बाद उनके पास से दो मोबाइल फोन बरामद किए गए थे। इनमें एक रेडमी 9टी और दूसरा रेडमी नोट 12 मॉडल का फोन था। जब इन उपकरणों की डिजिटल और फोरेंसिक जांच की गई तो इनके इस्तेमाल और वितरण से जुड़े कई तथ्य सामने आए। जांच में पता चला कि दोनों मोबाइल पाकिस्तान के कराची और लाहौर क्षेत्रों तक पहुंचाए गए थे। एजेंसी ने तकनीकी माध्यमों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध सूचनाओं के आधार पर इनकी सप्लाई चेन का पता लगाया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जांच के दौरान मोबाइल फोन में मौजूद डाटा ने भी कई महत्वपूर्ण संकेत दिए। अधिकारियों के मुताबिक मोबाइल के नेविगेशन एप में बैसरन घाटी की लोकेशन पहले से सेव थी। इसके अलावा बैसरन क्षेत्र के कई स्क्रीनशॉट भी फोन में मिले, जिन्हें हमले से कुछ दिन पहले लिया गया था। इससे यह संकेत मिलता है कि हमले की तैयारी पहले से की जा रही थी और लक्ष्य स्थल की रेकी तथा डिजिटल निगरानी भी की गई थी। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि हमले की योजना किस स्तर पर बनाई गई और इसमें किन लोगों की भूमिका रही। पहलगाम की बैसरन घाटी में हुए इस हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया था। हमले में पर्यटकों को निशाना बनाया गया था और बड़ी संख्या में लोगों की जान गई थी। जांच एजेंसियों के अनुसार यह एक सुनियोजित आतंकी हमला था, जिसमें आतंकियों ने पहले से तय रणनीति के तहत कार्रवाई की थी। फोरेंसिक रिपोर्ट और डिजिटल साक्ष्यों ने अब इस बात को और मजबूत किया है कि हमले की तैयारी कई दिन पहले शुरू हो चुकी थी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इससे पहले जांच एजेंसी ने एक अन्य खुलासा भी किया था, जिसमें बताया गया था कि आतंकियों के पास से एक हाई-टेक एक्शन कैमरा भी बरामद हुआ था। जांच में यह जानकारी सामने आई कि कैमरा अंतरराष्ट्रीय वितरण नेटवर्क के जरिए चीन पहुंचा और वहां से किसी माध्यम से आतंकियों तक पहुंचा। एजेंसी का मानना है कि ऐसे उपकरणों का उपयोग आतंकी घटनाओं की रिकॉर्डिंग, प्रचार और संगठनात्मक गतिविधियों के लिए किया जाता है। यही कारण है कि इन उपकरणों की सप्लाई और उपयोग से जुड़े पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है। जांच एजेंसियों के अनुसार जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकी संगठनों द्वारा आधुनिक तकनीक और डिजिटल उपकरणों के उपयोग में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। मोबाइल फोन, जीपीएस आधारित एप्लीकेशन, एक्शन कैमरे और एन्क्रिप्टेड संचार माध्यमों का इस्तेमाल अब आतंकवादी गतिविधियों का हिस्सा बन चुका है। इससे जांच एजेंसियों के सामने नई चुनौतियां भी पैदा हो रही हैं, हालांकि डिजिटल फोरेंसिक तकनीकों की मदद से कई महत्वपूर्ण सुराग भी प्राप्त हो रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">एनआईए द्वारा दाखिल चार्जशीट में यह भी उल्लेख किया गया है कि हमले का मास्टरमाइंड पाकिस्तान में बैठा एक आतंकी संचालक था, जो लगातार हमलावरों के संपर्क में था। जांच में यह दावा किया गया है कि हमले के दौरान आतंकियों को रियल टाइम निर्देश दिए जा रहे थे और लक्ष्य क्षेत्र की जानकारी भी पहले से साझा की गई थी। एजेंसी ने हमले से जुड़े कई डिजिटल और तकनीकी साक्ष्य एकत्र किए हैं, जिनका विश्लेषण अभी भी जारी है। जांच में दो स्थानीय टूरिस्ट गाइडों की भूमिका भी सामने आई थी। एजेंसी के अनुसार दोनों ने कुछ संदिग्ध गतिविधियां देखी थीं, लेकिन समय रहते इसकी जानकारी सुरक्षा एजेंसियों तक नहीं पहुंचाई। इस संबंध में कानूनी कार्रवाई की गई और दोनों को गिरफ्तार किया गया। जांचकर्ताओं का मानना है कि यदि समय पर सूचना मिल जाती तो संभव है कि हमले को रोका जा सकता था।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि इस मामले की जांच अभी भी जारी है और कई अंतरराष्ट्रीय कड़ियों की पड़ताल की जा रही है। मोबाइल फोन, डिजिटल रिकॉर्ड, संचार नेटवर्क और वित्तीय लेनदेन से जुड़े पहलुओं का विश्लेषण किया जा रहा है। जांच का उद्देश्य केवल हमले के दोषियों तक पहुंचना नहीं, बल्कि उन नेटवर्कों को भी उजागर करना है जो सीमा पार से आतंकी गतिविधियों को समर्थन और संसाधन उपलब्ध कराते हैं। एनआईए का मानना है कि डिजिटल साक्ष्यों से मिले नए सुराग इस मामले में आगे की जांच को नई दिशा देंगे। आने वाले समय में जांच के दौरान और भी महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं, जो इस पूरे आतंकी नेटवर्क और उसकी कार्यप्रणाली को समझने में मदद करेंगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 14:56:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>दिल्ली में आतंकी साजिश नाकाम, ISI से जुड़े 9 संदिग्ध गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[मंत्रालयों, धार्मिक स्थलों और सुरक्षा बलों को निशाना बनाने की थी तैयारी, हथियार और विस्फोटक बरामद]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/terror-plot-foiled-in-delhi-9-suspects-linked-to-isi/article-54582"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/delhi-terror-plot.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एक बड़े आतंकी हमले की साजिश को समय रहते नाकाम करने का दावा किया गया है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक बड़े ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI और अंडरवर्ल्ड नेटवर्क से जुड़े कथित आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ करते हुए 9 संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों के अनुसार आरोपियों के कब्जे से हथियार, हैंड ग्रेनेड, विस्फोटक सामग्री और अन्य संदिग्ध सामान बरामद किया गया है। इस कार्रवाई के बाद सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं और मामले की गहन जांच की जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार किए गए लोगों का नेटवर्क काफी समय से सक्रिय था और राजधानी में बड़ी वारदात को अंजाम देने की तैयारी कर रहा था। जांच एजेंसियों का मानना है कि इस मॉड्यूल का मकसद दिल्ली के संवेदनशील इलाकों, सरकारी प्रतिष्ठानों, सुरक्षा बलों के ठिकानों और प्रमुख धार्मिक स्थलों को निशाना बनाना था। अगर यह साजिश सफल हो जाती तो बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान हो सकता था।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सूत्रों के अनुसार सुरक्षा एजेंसियों को पिछले कुछ समय से संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी मिल रही थी। इसके बाद तकनीकी निगरानी और खुफिया सूचनाओं के आधार पर कई स्थानों पर नजर रखी गई। जांच के दौरान कुछ संदिग्ध संपर्कों और लेन-देन की जानकारी सामने आई, जिसके बाद स्पेशल सेल ने कार्रवाई तेज कर दी। कई दिनों तक चली निगरानी के बाद अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी कर आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अधिकारियों का कहना है कि बरामद हथियारों और विस्फोटक सामग्री की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि इनका इस्तेमाल किस प्रकार के हमले में किया जाना था। जांच एजेंसियां इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि आरोपियों को प्रशिक्षण कहां मिला और उन्हें किस स्तर पर निर्देश दिए जा रहे थे। शुरुआती जानकारी में कुछ विदेशी संपर्कों और संदिग्ध ऑनलाइन कम्युनिकेशन की बात भी सामने आई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय एजेंसियां भी जांच में शामिल हो गई हैं। जांच का एक बड़ा हिस्सा इस नेटवर्क के वित्तीय स्रोतों को लेकर भी है। एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि धन कहां से आ रहा था और उसका इस्तेमाल किस तरह किया जा रहा था। इसके अलावा डिजिटल उपकरणों, मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की जांच भी की जा रही है ताकि नेटवर्क की पूरी संरचना को समझा जा सके।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जांच से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि गिरफ्तार किए गए लोगों के संबंध कथित तौर पर पाकिस्तान समर्थित हैंडलर्स से जुड़े होने के संकेत मिले हैं। साथ ही कुछ संदिग्ध कड़ियां मुंबई अंडरवर्ल्ड नेटवर्क से भी जुड़ती दिखाई दे रही हैं। हालांकि इन पहलुओं की अभी विस्तृत जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दिल्ली जैसे संवेदनशील शहर में इस तरह की साजिश का सामने आना सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है। राजधानी में संसद, केंद्रीय मंत्रालय, विदेशी दूतावास, महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल और रणनीतिक प्रतिष्ठान मौजूद हैं। ऐसे में किसी भी संदिग्ध गतिविधि को गंभीरता से लिया जाता है। यही वजह है कि सुरक्षा एजेंसियां लगातार निगरानी और खुफिया नेटवर्क को मजबूत बनाने पर काम कर रही हैं।  पिछले कुछ वर्षों में तकनीक के इस्तेमाल ने आतंकवादी नेटवर्क की कार्यप्रणाली को बदल दिया है। अब सोशल मीडिया, एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म और डिजिटल फंडिंग के जरिए नेटवर्क संचालित करने की कोशिशें बढ़ी हैं। ऐसे में जांच एजेंसियों के लिए केवल जमीन पर ही नहीं बल्कि साइबर स्पेस में भी सतर्क रहना जरूरी हो गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">दिल्ली पुलिस की इस कार्रवाई को सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि जांच एजेंसियां अभी कई पहलुओं पर काम कर रही हैं और यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि क्या इस मॉड्यूल से जुड़े अन्य लोग भी देश के अलग-अलग हिस्सों में सक्रिय हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/terror-plot-foiled-in-delhi-9-suspects-linked-to-isi/article-54582</link>
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                <pubDate>Sat, 30 May 2026 16:42:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>MP के ISI से जुड़े 3 युवक गिरफ्तार, दिल्ली पुलिस का दावा- मंदिर, ढाबा और मिलिट्री कैंप थे निशाने पर</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली पुलिस ने मध्य प्रदेश के 3 युवकों को ISI से जुड़े आतंकी मॉड्यूल मामले में गिरफ्तार किया। मंदिर, ढाबा और सैन्य कैंप थे निशाने पर।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/3-youths-associated-with-mps-isi-arrested-delhi-police-claims/article-53076"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-10t172657.640.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने मध्य प्रदेश के तीन युवकों को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">ISI <span lang="hi" xml:lang="hi">से जुड़े आतंकी मॉड्यूल के मामले में गिरफ्तार किया है। पुलिस का दावा है कि आरोपी दिल्ली के एक ऐतिहासिक मंदिर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दिल्ली-सोनीपत हाईवे के एक मशहूर ढाबे और हरियाणा के सैन्य कैंप को निशाना बनाने की तैयारी में थे। गिरफ्तार किए गए युवकों की पहचान टीकमगढ़ जिले के नेगुवां गांव निवासी अनमोल राय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ग्वालियर के डबरा निवासी राजवीर और विवेक बंजारा के रूप में हुई है। तीनों को दिल्ली पुलिस की टीम गांव से अपने साथ लेकर गई। मामला सामने आने के बाद इलाके में हलचल बढ़ गई है और स्थानीय लोग भी हैरान हैं कि मजदूरी करने वाले युवक इतने बड़े नेटवर्क से कैसे जुड़ गए।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">प्रारंभिक जांच के मुताबिक तीनों आरोपी दिल्ली में मजदूरी का काम कर चुके हैं। इसी दौरान इनके संपर्क संदिग्ध लोगों से बने। एसीपी स्पेशल सेल पीएस कुशवाहा के अनुसार आरोपियों के मोबाइल फोन से कई संदिग्ध ई-मेल और सोशल मीडिया चैट मिली हैं। जांच में यह भी सामने आया कि कुछ खास जगहों की तस्वीरें और वीडियो पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स को भेजे गए थे। पुलिस का कहना है कि मोबाइल ऑडियो और वीडियो कॉल रिकॉर्ड में भी संदिग्ध विदेशी नंबरों से संपर्क के संकेत मिले हैं। फिलहाल एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि आरोपियों को इस काम के बदले पैसे या कोई और मदद दी गई थी या नहीं। बताया जा रहा है कि तीनों की गिरफ्तारी शुक्रवार को की गई थी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन सुरक्षा कारणों से इसकी जानकारी बाद में सामने आई।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने यह कार्रवाई </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">‘<span lang="hi" xml:lang="hi">गैंग बस्ट ऑपरेशन 2.0</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">के तहत की। इसी ऑपरेशन में अलग-अलग राज्यों से शाहजाद भट्टी मॉड्यूल से जुड़े 9 संदिग्ध ऑपरेटिव्स पकड़े गए थे। पूछताछ के दौरान पता चला कि मॉड्यूल दिल्ली के एक ऐतिहासिक मंदिर की रेकी करा चुका था। वहां तैनात पुलिस और अर्धसैनिक बलों को निशाना बनाने की योजना थी ताकि फायरिंग कर दहशत फैलाई जा सके। इसके अलावा दिल्ली-सोनीपत हाईवे पर स्थित एक बड़े ढाबे पर ग्रेनेड हमला करने का भी टास्क दिया गया था। जांच एजेंसियों का मानना है कि वहां हर दिन बड़ी संख्या में लोग आते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए हमला होने पर भारी नुकसान हो सकता था। हरियाणा के हिसार स्थित सैन्य कैंप की भी रेकी किए जाने की बात सामने आई है। आरोपियों ने कैंप और आसपास के वीडियो बनाकर पाकिस्तान भेजे थे। सूत्रों के मुताबिक उत्तर प्रदेश के कुछ थाने भी मॉड्यूल के निशाने पर थे। फिलहाल स्पेशल सेल पूरे नेटवर्क</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फंडिंग और सीमा पार कनेक्शन की जांच में जुटी हुई है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 May 2026 10:14:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत को मिला नया CDS, लेफ्टिनेंट जनरल एन एस राजा सुब्रमणि संभालेंगे जिम्मेदारी</title>
                                    <description><![CDATA[भारत सरकार ने लेफ्टिनेंट जनरल एन एस राजा सुब्रमणि को नया CDS नियुक्त किया। जानिए उनका सैन्य करियर और CDS पद की अहमियत।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/india-gets-new-cds-lieutenant-general-ns-raja-subramani-will/article-53012"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-09t175604.209.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">भारत सरकार ने लेफ्टिनेंट जनरल एन एस राजा सुब्रमणि (सेवानिवृत्त) को देश का नया </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;">CDS <span lang="hi" xml:lang="hi">यानी चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ नियुक्त किया है। केंद्र सरकार की ओर से जारी आदेश के मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह कार्यभार संभालने की तारीख से अगले आदेश तक सैन्य मामलों के विभाग के सचिव की जिम्मेदारी भी निभाएंगे। इस नियुक्ति के बाद रक्षा और रणनीतिक मामलों से जुड़े हलकों में उनकी भूमिका को काफी अहम माना जा रहा है। मौजूदा </span>CDS <span lang="hi" xml:lang="hi">जनरल अनिल चौहान का कार्यकाल 30 मई 2026 को खत्म हो रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके बाद एन एस राजा सुब्रमणि यह जिम्मेदारी संभालेंगे।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">लेफ्टिनेंट जनरल एन एस राजा सुब्रमणि लंबे समय से सेना में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम कर चुके हैं। फिलहाल वह 1 सितंबर 2025 से राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय में सैन्य सलाहकार के तौर पर तैनात हैं। इससे पहले उन्होंने सेना स्टाफ के उप प्रमुख के रूप में भी काम किया। जुलाई 2024 से जुलाई 2025 तक वह इस पद पर रहे। वहीं मार्च 2023 से जून 2024 तक उन्होंने केंद्रीय कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ की जिम्मेदारी संभाली थी। सेना के भीतर रणनीतिक योजना और ऑपरेशनल मामलों में उनका अनुभव काफी बड़ा माना जाता है। अधिकारियों के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल बनाने में उनका अनुभव अहम भूमिका निभा सकता है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;">CDS <span lang="hi" xml:lang="hi">का पद देश की सुरक्षा व्यवस्था में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यह अधिकारी थल सेना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वायु सेना और नौसेना के बीच समन्वय स्थापित करने का काम करता है। रक्षा मामलों में सरकार को सलाह देने के साथ-साथ संयुक्त सैन्य रणनीति तैयार करने में भी </span>CDS <span lang="hi" xml:lang="hi">की बड़ी भूमिका होती है। भारत में इस पद की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2019 में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर की थी। इसके बाद देश के पहले </span>CDS <span lang="hi" xml:lang="hi">जनरल बिपिन रावत बने थे। हालांकि दिसंबर 2021 में हेलिकॉप्टर हादसे में उनकी मौत हो गई थी। बाद में जनरल अनिल चौहान को यह जिम्मेदारी सौंपी गई।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;"> </span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">बताया जाता है कि कारगिल युद्ध के बाद ही इस पद की जरूरत सबसे ज्यादा महसूस की गई थी। उस दौरान तीनों सेनाओं के बीच समन्वय की कमी को लेकर कई सवाल उठे थे। इसके बाद रक्षा मामलों के जानकारों और समितियों ने सुझाव दिया था कि एक ऐसा सैन्य अधिकारी होना चाहिए जो तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल बनाए रख सके और बड़े फैसलों में एकीकृत दृष्टिकोण दे सके। इसी सोच के बाद </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;">CDS <span lang="hi" xml:lang="hi">का पद बनाया गया। अब लेफ्टिनेंट जनरल एन एस राजा सुब्रमणि के सामने भी यही बड़ी जिम्मेदारी होगी कि बदलते सुरक्षा हालात में तीनों सेनाओं के बीच तालमेल और मजबूत हो सके।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/india-gets-new-cds-lieutenant-general-ns-raja-subramani-will/article-53012</link>
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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 18:26:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सऊदी दौरे पर NSA अजीत डोभाल,  विदेश मंत्री से करेंगे ऊर्जा सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा पर अहम बातचीत</title>
                                    <description><![CDATA[NSA अजीत डोभाल के रियाद दौरे में भारत-सऊदी संबंध, ऊर्जा सहयोग और वैश्विक सुरक्षा मुद्दों पर अहम बातचीत हुई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/nsa-ajit-doval-will-hold-important-talks-with-the-foreign/article-51643"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/ajit-doval-saudi-visit-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने 19 अप्रैल को सऊदी अरब की राजधानी रियाद का आधिकारिक दौरा किया, जहां उन्होंने सऊदी नेतृत्व के साथ कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहन चर्चा की। इस दौरान द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने, ऊर्जा सहयोग को विस्तार देने और क्षेत्रीय सुरक्षा हालात पर विचार-विमर्श हुआ। अधिकारियों के अनुसार, यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब वैश्विक स्तर पर ऊर्जा और सुरक्षा से जुड़े मुद्दे तेजी से बदल रहे हैं, जिससे भारत और सऊदी अरब के बीच समन्वय और भी अहम हो गया है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">रियाद स्थित भारतीय दूतावास के मुताबिक, डोभाल ने सऊदी ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुल अज़ीज़ बिन सलमान, विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार डॉ. मूसाएद बिन मोहम्मद अल-ऐबान से अलग-अलग मुलाकात की। इन बैठकों में दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर जोर दिया गया।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">रणनीतिक साझेदारी पर फोकस</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">इन बैठकों में ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग को नई दिशा देने पर भी चर्चा हुई। सूत्रों के मुताबिक, दोनों पक्षों ने आपसी हितों से जुड़े मुद्दों और क्षेत्रीय स्थिरता पर विचार साझा किए। अधिकारियों के अनुसार, भारत और सऊदी अरब के बीच ऊर्जा सहयोग पहले से ही मजबूत रहा है, लेकिन बदलते वैश्विक परिदृश्य में इसे और व्यापक बनाने की जरूरत महसूस की जा रही है। इसी संदर्भ में इस दौरे को अहम माना जा रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">इससे पहले अजीत डोभाल ने 17 अप्रैल को यूक्रेन की राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा परिषद के सचिव रुस्तम उमेरोव से मुलाकात की थी। यह बैठक रूस-यूक्रेन युद्ध की पृष्ठभूमि में हुई, जिसमें सुरक्षा और रणनीतिक मुद्दों पर चर्चा की गई।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">वैश्विक संदर्भ में चर्चा</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">बैठक में रूस-यूक्रेन संघर्ष और उसके वैश्विक प्रभावों पर विचार हुआ। भारत ने एक बार फिर शांतिपूर्ण समाधान और कूटनीतिक प्रयासों पर जोर दिया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के अनुसार, दोनों देशों के बीच संवाद बनाए रखने और पूर्वी यूरोप की स्थिति पर निरंतर संपर्क पर सहमति बनी। भारत ने स्पष्ट किया कि वह संवाद और कूटनीति के जरिए विवादों का समाधान चाहता है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">पृष्ठभूमि में देखें तो रूस-यूक्रेन युद्ध का असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, खाद्य सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर पड़ा है। ऐसे में भारत की यह सक्रिय कूटनीति संतुलन बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">इस दौरे का प्रभाव केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत की पश्चिम एशिया में रणनीतिक स्थिति मजबूत होगी और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर दीर्घकालिक लाभ मिल सकता है।</span></p>
<p><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">आने वाले समय में भारत और सऊदी अरब के बीच उच्चस्तरीय संवाद और तेज होने की संभावना है। साथ ही, वैश्विक संकटों के बीच भारत की संतुलित विदेश नीति और सक्रिय भूमिका पर भी नजर बनी रहेगी।</span></p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 11:54:25 +0530</pubDate>
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