<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.dainikjagranmpcg.com/united-states/tag-10632" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>दैनिक जागरण RSS Feed Generator</generator>
                <title>United States - दैनिक जागरण</title>
                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/tag/10632/rss</link>
                <description>United States RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>ट्रम्प की नीतियों से भारत-अमेरिका रिश्तों पर असर, रो खन्ना का बड़ा दावा</title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद रो खन्ना ने कहा कि टैरिफ नीति और सहयोगी देशों से बिना सलाह लिए लिए गए फैसलों ने दोनों देशों के बीच भरोसे को कमजोर किया, जबकि अमेरिकी राजदूत ने मजबूत साझेदारी का भरोसा जताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/ro-khannas-big-claim-on-trumps-policies-affecting-india-us-relations/article-57414"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/indore-municipal-corporation-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">भारतीय मूल के अमेरिकी डेमोक्रेटिक सांसद रो खन्ना ने भारत और अमेरिका के संबंधों को लेकर बड़ा बयान दिया है। उनका कहना है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की नीतियों की वजह से दोनों देशों के रिश्ते पिछले करीब 30 वर्षों में सबसे चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रहे हैं। वॉशिंगटन में आयोजित यूएस-इंडिया स्ट्रेटजिक पार्टनरशिप फोरम (USISPF) लीडरशिप समिट 2026 में बोलते हुए खन्ना ने कहा कि ट्रम्प प्रशासन की टैरिफ नीति, सहयोगी देशों से बिना चर्चा किए लिए गए फैसले और ईरान को लेकर अपनाया गया रुख अमेरिका की विश्वसनीयता पर असर डाल रहा है। उन्होंने कहा कि भारत जैसे करीबी सहयोगी देशों के साथ विश्वास बनाए रखना किसी भी रणनीतिक साझेदारी की सबसे बड़ी जरूरत होती है, लेकिन हाल के वर्षों में इस भरोसे को नुकसान पहुंचा है। हालांकि, इसी कार्यक्रम में भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने दोनों देशों के रिश्तों को मजबूत बताते हुए कहा कि रणनीतिक साझेदारी लगातार आगे बढ़ रही है और एक महत्वपूर्ण व्यापार समझौता अंतिम चरण में पहुंच चुका है।</p>
<p class="isSelectedEnd">रो खन्ना ने अपने संबोधन में कहा कि अमेरिका ने कई महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय फैसलों में अपने पारंपरिक सहयोगी देशों से पर्याप्त सलाह-मशविरा नहीं किया। उनके मुताबिक, ईरान को लेकर हुई सैन्य कार्रवाई जैसे फैसलों में भारत, यूरोप और कनाडा जैसे देशों से पहले चर्चा नहीं की गई। उन्होंने कहा कि जब सहयोगी देशों को विश्वास में नहीं लिया जाता तो इससे लंबे समय में रिश्तों पर असर पड़ता है। खन्ना का कहना था कि किसी भी वैश्विक साझेदारी की मजबूती केवल आर्थिक या सैन्य सहयोग से नहीं बल्कि आपसी भरोसे और संवाद से तय होती है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि इस स्थिति को स्वीकार नहीं किया गया तो भविष्य में संबंधों को सामान्य बनाने की प्रक्रिया और कठिन हो सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd">अमेरिकी सांसद ने ट्रम्प प्रशासन की टैरिफ नीति की भी आलोचना की। उन्होंने दावा किया कि हाल ही में चीन की यात्रा के दौरान उनकी मुलाकात एक भारतीय राजनयिक से हुई थी। बातचीत के दौरान उस राजनयिक ने उनसे कहा कि अमेरिका की मौजूदा व्यापारिक नीतियों ने वर्षों से बना भरोसा कमजोर कर दिया है। खन्ना ने कहा कि व्यापारिक साझेदारी में अचानक लगाए गए टैरिफ और एकतरफा फैसले केवल आर्थिक प्रभाव नहीं डालते, बल्कि उनका असर कूटनीतिक संबंधों पर भी दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच पिछले तीन दशकों में जो विश्वास बना था, उसे बनाए रखना दोनों देशों के हित में है।</p>
<p class="isSelectedEnd">अपने संबोधन के दौरान रो खन्ना ने अमेरिकी घरेलू राजनीति का भी जिक्र किया। उन्होंने राष्ट्रपति ट्रम्प को "लेम डक" राष्ट्रपति बताते हुए दावा किया कि आने वाले मिड-टर्म चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी प्रतिनिधि सभा में बहुमत हासिल कर सकती है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पार्टी 2028 के राष्ट्रपति चुनाव में वापसी करेगी। खन्ना के मुताबिक, नई पीढ़ी के नेताओं के सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारी केवल अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मजबूत करना नहीं होगी, बल्कि दुनिया के प्रमुख सहयोगी देशों के साथ रिश्तों को फिर से मजबूत करना भी होगा। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट का उदाहरण देते हुए कहा कि उनकी विदेश नीति सहयोग और साझेदारी पर आधारित थी तथा उन्होंने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के प्रति भी सकारात्मक रुख दिखाया था।</p>
<p class="isSelectedEnd">हालांकि, कार्यक्रम में मौजूद भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने अलग तस्वीर पेश की। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के रिश्ते मजबूत हैं और दोनों देश कई अहम क्षेत्रों में मिलकर काम कर रहे हैं। उनके अनुसार, दोनों देशों के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौता अंतिम चरण में पहुंच चुका है और जल्द इस दिशा में सकारात्मक प्रगति देखने को मिल सकती है। गोर ने कहा कि अमेरिका भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका का सम्मान करता है और हिंद-प्रशांत क्षेत्र से लेकर प्रौद्योगिकी, रक्षा, ऊर्जा तथा निवेश जैसे क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले वर्षों में यह रणनीतिक साझेदारी और मजबूत होगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">सर्जियो गोर ने अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के व्यक्तिगत संबंधों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि कुछ महीने पहले मियामी में आयोजित एक यूएफसी कार्यक्रम के दौरान ट्रम्प ने अचानक प्रधानमंत्री मोदी को फोन करने की इच्छा जताई थी। गोर के अनुसार, जब उन्होंने ट्रम्प को बताया कि भारत में उस समय सुबह के करीब छह बजे हैं, तब भी ट्रम्प ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी शायद जाग चुके होंगे। हालांकि कार्यक्रम की व्यस्तता के कारण उस समय बातचीत नहीं हो सकी और बाद में दोनों नेताओं की बातचीत तय हुई। गोर ने इस घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि यह दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत विश्वास और सहज संवाद का उदाहरण है। उनके मुताबिक, जब दो नेताओं के बीच व्यक्तिगत स्तर पर मजबूत संबंध होते हैं तो उसका सकारात्मक प्रभाव दोनों देशों के व्यापक रिश्तों पर भी पड़ता है।</p>
<p>कार्यक्रम के दौरान गोर ने यह भी कहा कि भारत और अमेरिका दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतांत्रिक साझेदार हैं और दोनों देशों के संबंध किसी एक मुद्दे या एक सरकार तक सीमित नहीं हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि बदलते वैश्विक हालात के बावजूद दोनों देशों के बीच आर्थिक, रणनीतिक और तकनीकी सहयोग आगे भी जारी रहेगा। वहीं, रो खन्ना के बयान ने इस बात पर नई बहस जरूर छेड़ दी है कि वैश्विक राजनीति, व्यापारिक नीतियां और कूटनीतिक फैसले किस तरह लंबे समय से बने रिश्तों को प्रभावित कर सकते हैं। फिलहाल दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते और रणनीतिक सहयोग को लेकर बातचीत जारी है, जिससे आने वाले समय में संबंधों की दिशा और अधिक स्पष्ट होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/ro-khannas-big-claim-on-trumps-policies-affecting-india-us-relations/article-57414</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/ro-khannas-big-claim-on-trumps-policies-affecting-india-us-relations/article-57414</guid>
                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 14:17:58 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/indore-municipal-corporation-%281%29.jpg"                         length="129714"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ईरान ने NATO देशों पर लगाए गंभीर आरोप, होर्मुज में जहाज पर हमला</title>
                                    <description><![CDATA[तेहरान का दावा—अमेरिका-इजराइल के साथ कुछ NATO देशों ने दिया सैन्य समर्थन, होर्मुज स्ट्रेट में कॉमर्शियल जहाज पर हमला, ब्रिज को नुकसान]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/iran-makes-serious-allegations-against-nato-countries-attack-on-ship/article-57064"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/iran-nato-conflict.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर तेजी से बढ़ता नजर आ रहा है। Iran ने आरोप लगाया है कि अमेरिका और इजराइल के साथ मिलकर उसके खिलाफ की गई सैन्य कार्रवाई में कुछ NATO सदस्य देशों ने भी समर्थन दिया है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने सोशल मीडिया पर बयान जारी करते हुए कहा कि इस पूरे घटनाक्रम में NATO की भूमिका की गंभीर जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार देशों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है और एक बार फिर पश्चिमी देशों और ईरान के बीच तनाव की स्थिति बनती दिख रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ईरान की ओर से यह दावा ऐसे समय में आया है जब वैश्विक कूटनीतिक मंच पर पहले से ही कई मुद्दों को लेकर असहमति बनी हुई है। बघई ने अपने बयान में कहा कि NATO प्रमुख मार्क रूट ने खुद इस बात की ओर इशारा किया है कि इटली और रोमानिया ने ईरान के खिलाफ हुई सैन्य कार्रवाई में अमेरिका का समर्थन किया था। हालांकि इस दावे पर अभी तक स्वतंत्र रूप से किसी भी देश ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। ईरान ने सवाल उठाते हुए कहा है कि इन देशों को स्पष्ट करना चाहिए कि उन्होंने किस आधार पर और किस उद्देश्य से इस तरह के सैन्य सहयोग में हिस्सा लिया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ईरान के विदेश मंत्रालय का कहना है कि अगर किसी भी NATO देश ने इस प्रकार की कार्रवाई में भाग लिया है, तो यह अंतरराष्ट्रीय कानूनों का गंभीर उल्लंघन माना जाएगा। तेहरान ने यह भी मांग की है कि इन देशों को न केवल अपने नागरिकों को बल्कि पूरी दुनिया को जवाब देना चाहिए कि उन्होंने अमेरिका और इजराइल के साथ मिलकर इस तरह की कार्रवाई का समर्थन क्यों किया। ईरान ने इसे अपनी संप्रभुता पर हमला बताते हुए कड़े शब्दों में निंदा की है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसी बीच समुद्री सुरक्षा से जुड़ा एक और बड़ा मामला सामने आया है। Strait of Hormuz में एक कॉमर्शियल जहाज पर अज्ञात प्रोजेक्टाइल से हमला हुआ है। ब्रिटेन की यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने इस घटना की पुष्टि की है। जहाज ओमान के तट के पास था, जब अचानक एक प्रोजेक्टाइल आकर जहाज के दाहिने हिस्से से टकरा गया। इस हमले से जहाज के ब्रिज को नुकसान पहुंचा है, जहां से जहाज का संचालन किया जाता है। हालांकि राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी भी क्रू सदस्य को चोट नहीं आई है। घटना के बाद समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ गई है। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम तेल परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है और यहां किसी भी तरह की अस्थिरता का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं न केवल क्षेत्रीय तनाव को बढ़ाती हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल आपूर्ति श्रृंखला को भी प्रभावित कर सकती हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ईरान और पश्चिमी देशों के बीच पहले से ही कई मुद्दों पर तनाव बना हुआ है, और इस नए विवाद ने स्थिति को और जटिल कर दिया है। NATO की भूमिका को लेकर उठे सवालों ने कूटनीतिक हलकों में नई बहस शुरू कर दी है। हालांकि अभी तक NATO की ओर से इस मामले पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं अमेरिका और इजराइल की ओर से भी इन आरोपों पर चुप्पी बनी हुई है। ईरान का यह बयान अंतरराष्ट्रीय मंच पर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है, जबकि पश्चिमी देश इसे खारिज कर सकते हैं। लेकिन जिस तरह से होर्मुज क्षेत्र में हमला हुआ है, उसने एक बार फिर सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। इस पूरे घटनाक्रम पर अब वैश्विक समुदाय की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि इसका असर केवल कूटनीति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ऊर्जा और व्यापार बाजारों पर भी इसका बड़ा प्रभाव पड़ सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/iran-makes-serious-allegations-against-nato-countries-attack-on-ship/article-57064</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/iran-makes-serious-allegations-against-nato-countries-attack-on-ship/article-57064</guid>
                <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 17:08:22 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/iran-nato-conflict.jpg"                         length="230972"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सीजफायर के बावजूद लेबनान पर इजराइल का फिर हमला, 5 लोगों की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[दक्षिणी लेबनान में हवाई हमलों से बढ़ा तनाव, ईरान-अमेरिका वार्ता के लिए स्विट्जरलैंड पहुंचे प्रतिनिधि]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/despite-ceasefire-israel-attacks-lebanon-again-5-people-killed/article-56485"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/israel-lebanon-conflict-(1).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच संघर्ष विराम की घोषणा के महज एक दिन बाद ही मध्य पूर्व में हालात फिर तनावपूर्ण होते दिखाई दे रहे हैं। शुक्रवार को दोनों पक्षों के बीच सीजफायर पर सहमति बनने के बाद उम्मीद जताई जा रही थी कि लंबे समय से जारी हिंसा पर कुछ हद तक विराम लगेगा और सीमा क्षेत्रों में सामान्य स्थिति लौटने लगेगी। लेकिन शनिवार सुबह दक्षिणी लेबनान में हुए ताजा हवाई हमलों ने इन उम्मीदों को बड़ा झटका दिया है। रिपोर्टों के अनुसार इजराइल ने दक्षिणी लेबनान के कई इलाकों को निशाना बनाते हुए हवाई कार्रवाई की, जिसमें कम से कम पांच लोगों की मौत हो गई। कई अन्य लोगों के घायल होने की भी खबर है, हालांकि घायलों की संख्या को लेकर अलग-अलग जानकारियां सामने आ रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">लेबनान की सरकारी समाचार एजेंसी के मुताबिक नबातिएह क्षेत्र में सुबह से ही कई जगह धमाकों की आवाजें सुनी गईं। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि इजराइली लड़ाकू विमानों और ड्रोन ने कई ठिकानों पर हमले किए। इन हमलों की चपेट में रिहायशी इलाके भी आए, जिससे कई मकानों और इमारतों को भारी नुकसान पहुंचा है। कुछ घर पूरी तरह ध्वस्त हो गए जबकि कई इमारतों में दरारें आ गईं। हमलों के बाद प्रभावित इलाकों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और लोग सुरक्षित स्थानों की ओर भागते दिखाई दिए। बताया जा रहा है कि हवाई हमलों के साथ-साथ कुछ सीमावर्ती क्षेत्रों में तोपों से भी गोलाबारी की गई। इससे पहले से डरे हुए लोगों में और अधिक भय का माहौल बन गया। राहत और बचाव दलों को तत्काल प्रभावित क्षेत्रों में भेजा गया। मलबे में दबे लोगों की तलाश का काम शुरू किया गया और घायलों को अस्पतालों तक पहुंचाया गया। स्थानीय अधिकारियों ने नागरिकों से सतर्क रहने और सुरक्षा एजेंसियों के निर्देशों का पालन करने की अपील की है। यह हमला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि शुक्रवार को हुए संघर्ष विराम को क्षेत्र में शांति की दिशा में एक बड़ा कदम बताया जा रहा था। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने भी इस समझौते का स्वागत किया था। कई देशों ने उम्मीद जताई थी कि इससे सीमा क्षेत्रों में हिंसा कम होगी और आम लोगों को राहत मिलेगी। लेकिन ताजा घटनाक्रम ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या संघर्ष विराम वास्तव में प्रभावी तरीके से लागू हो पा रहा है या फिर क्षेत्र में अविश्वास और तनाव अभी भी बरकरार है।</p>
<p style="text-align:justify;">मध्य पूर्व में जारी इस तनाव के बीच कूटनीतिक मोर्चे पर भी गतिविधियां तेज हो गई हैं। अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में बने संवाद को आगे बढ़ाने के लिए अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ स्विट्जरलैंड रवाना हो गए हैं। माना जा रहा है कि वहां दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच आगे की शर्तों और संभावित समझौतों को लेकर चर्चा होगी। यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब पूरे क्षेत्र में स्थिरता को लेकर चिंताएं बढ़ी हुई हैं। मेरिका की ओर से इस वार्ता को काफी अहम माना जा रहा है। रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दामाद और पूर्व सलाहकार जेरेड कुशनर भी इस प्रक्रिया में किसी भूमिका में शामिल हो सकते हैं। हालांकि उनकी भागीदारी को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन मध्य पूर्व से जुड़े मामलों में उनके पिछले अनुभव को देखते हुए इस संभावना पर चर्चा हो रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची भी स्विट्जरलैंड पहुंच सकते हैं। माना जा रहा है कि बातचीत में क्षेत्रीय सुरक्षा, प्रतिबंधों से जुड़े मुद्दे, परमाणु कार्यक्रम और भविष्य के कूटनीतिक संबंधों जैसे विषयों पर चर्चा हो सकती है। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह वार्ता सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती है तो इसका असर पूरे मध्य पूर्व की राजनीति और सुरक्षा स्थिति पर पड़ सकता है। वर्तमान हालात काफी जटिल हैं। एक तरफ शांति और बातचीत के प्रयास जारी हैं, वहीं दूसरी तरफ जमीनी स्तर पर हिंसा और सैन्य कार्रवाई की घटनाएं सामने आ रही हैं। ऐसे में किसी भी समझौते को स्थायी रूप से लागू करना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। लेबनान में हुए ताजा हमले इस बात का संकेत हैं कि क्षेत्र में तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है और किसी भी समय स्थिति फिर गंभीर रूप ले सकती है।  संयुक्त राष्ट्र सहित कई वैश्विक संगठन लगातार संयम बरतने और संघर्ष विराम का सम्मान करने की अपील कर रहे हैं। वहीं लेबनान में प्रभावित इलाकों में राहत कार्य जारी है और स्थानीय प्रशासन नुकसान का आकलन कर रहा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/despite-ceasefire-israel-attacks-lebanon-again-5-people-killed/article-56485</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/despite-ceasefire-israel-attacks-lebanon-again-5-people-killed/article-56485</guid>
                <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 14:40:45 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/israel-lebanon-conflict-%281%29.jpg"                         length="143065"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ईरान युद्ध खत्म होने का ट्रंप का दावा, जल्द हो सकता है समझौता</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ शांति समझौता अंतिम चरण में है, सप्ताहांत तक यूरोप में हस्ताक्षर होने की उम्मीद]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/trumps-claim-of-ending-iran-war-may-reach-agreement-soon/article-55737"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/donald-trump-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य पूर्व में कई दिनों से जारी तनाव और युद्ध जैसी परिस्थितियों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा दावा किया है। ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ संघर्ष अब प्रभावी रूप से समाप्त हो चुका है और दोनों पक्षों के बीच एक व्यापक समझौता अंतिम चरण में पहुंच गया है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि इस समझौते पर यूरोप में सप्ताहांत तक हस्ताक्षर हो सकते हैं। ट्रंप के इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति के साथ-साथ वैश्विक बाजारों का भी ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। उनके अनुसार, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस संभावित समझौता समारोह में अमेरिका का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर उन्होंने कतर, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, बहरीन, कुवैत और पाकिस्तान सहित कई देशों के नेताओं से चर्चा की है। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान ने परमाणु हथियार हासिल करने की किसी भी कोशिश को स्थायी रूप से छोड़ने पर सहमति जताई है। उन्होंने कहा कि अमेरिका की सबसे बड़ी शर्त यही थी कि ईरान भविष्य में किसी भी रूप में परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा। ट्रंप के अनुसार, प्रस्तावित समझौते में इस विषय पर विस्तृत और स्पष्ट प्रावधान शामिल किए गए हैं। बाद में एक टेली-रैली को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने ईरान के साथ चल रहे युद्ध को समाप्त कर दिया है। उन्होंने अपने समर्थकों से कहा कि यह संघर्ष उसी उद्देश्य के लिए था जिसके तहत अमेरिका यह सुनिश्चित करना चाहता था कि ईरान कभी परमाणु हथियार न बना सके। ट्रंप ने कहा कि अब ईरान इस शर्त को स्वीकार कर चुका है और इसी कारण शांति की दिशा में तेजी से प्रगति हुई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दिलचस्प बात यह है कि ट्रंप का यह बयान उस समय आया है जब कुछ घंटे पहले तक उनका रुख काफी आक्रामक दिखाई दे रहा था। दिन में उन्होंने ईरान के खिलाफ कड़ी सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दी थी। यहां तक कि उन्होंने ईरान के प्रमुख तेल निर्यात केंद्र खार्ग द्वीप और अन्य ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की बात भी कही थी। लेकिन बाद में उन्होंने प्रस्तावित हमलों को रोकने की घोषणा कर दी और कहा कि बातचीत में सकारात्मक प्रगति होने के कारण सैन्य कार्रवाई फिलहाल टाल दी गई है। ट्रंप के इस अचानक बदले रुख के पीछे कूटनीतिक प्रयासों की बड़ी भूमिका हो सकती है। पिछले कुछ सप्ताहों से अमेरिका और ईरान के बीच विभिन्न माध्यमों से बातचीत जारी थी। कई बार यह संकेत मिले कि दोनों देश किसी समझौते के करीब पहुंच गए हैं, लेकिन अब तक कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई थी। ट्रंप का ताजा बयान इस दिशा में सबसे बड़ा संकेत माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि समझौता होने के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह सुरक्षित और सामान्य तरीके से संचालित किया जाएगा। यह जलमार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में गिना जाता है। हाल के तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अनिश्चितता बढ़ गई थी। ट्रंप के अनुसार, यदि समझौता सफलतापूर्वक लागू होता है तो अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल आपूर्ति पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। वित्तीय बाजारों में भी इस खबर का असर देखने को मिला। निवेशकों ने इसे क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में सकारात्मक कदम माना। लंबे समय से चल रही अनिश्चितता के कारण ऊर्जा कीमतों और शेयर बाजारों पर दबाव बना हुआ था। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि अंतिम समझौते के दस्तावेज सामने आने के बाद ही इसके वास्तविक प्रभाव का आकलन किया जा सकेगा। ईरान की ओर से अभी तक समझौते को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि विभिन्न कूटनीतिक सूत्रों का कहना है कि बातचीत के कई दौर सफल रहे हैं और दोनों पक्ष कुछ प्रमुख मुद्दों पर सहमति के करीब पहुंच चुके हैं। ऐसे में ट्रंप के बयान को वार्ता प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यदि यह समझौता सफल होता है तो यह केवल अमेरिका और ईरान के संबंधों को ही प्रभावित नहीं करेगा, बल्कि पूरे मध्य पूर्व की राजनीतिक और सुरक्षा व्यवस्था पर इसका असर पड़ेगा। लंबे समय से क्षेत्र में मौजूद तनाव, प्रतिबंधों और सैन्य टकराव की आशंकाओं के बीच किसी बड़े समझौते की संभावना को महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। आलोचकों का कहना है कि अंतिम दस्तावेज सार्वजनिक होने तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। उनका मानना है कि कई बार वार्ताएं अंतिम चरण तक पहुंचने के बाद भी बाधित हो जाती हैं। इसके बावजूद ट्रंप का आत्मविश्वास और उनके द्वारा दिए गए संकेत यह दर्शाते हैं कि दोनों देशों के बीच बातचीत निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। अब पूरी दुनिया की निगाहें संभावित समझौते पर टिकी हैं। यदि सप्ताहांत तक यूरोप में इस पर हस्ताक्षर होते हैं, तो यह हाल के वर्षों की सबसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक घटनाओं में से एक साबित हो सकता है। साथ ही यह भी तय करेगा कि अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनावपूर्ण रिश्ते किस दिशा में आगे बढ़ते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/trumps-claim-of-ending-iran-war-may-reach-agreement-soon/article-55737</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/trumps-claim-of-ending-iran-war-may-reach-agreement-soon/article-55737</guid>
                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 15:20:56 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/donald-trump-%281%29.jpg"                         length="111656"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ईरान का कुवैत-बहरीन में अमेरिकी ठिकानों पर हमला, अमेरिका ने जवाबी कार्रवाई की</title>
                                    <description><![CDATA[IRGC ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया, CENTCOM ने कहा- सभी हमले नाकाम रहे]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/iran-attacks-american-bases-in-kuwait-bahrain-america-retaliates/article-54816"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/iran-us-conflict-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। ईरान के अनुसार इन हमलों में अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े के मुख्यालय, सैन्य एयरबेस और हेलीकॉप्टर सुविधाओं को निशाना बनाया गया। हालांकि अमेरिका ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि ईरान द्वारा दागी गई सभी मिसाइलों और ड्रोन को निष्क्रिय कर दिया गया और किसी भी अमेरिकी सैन्य ठिकाने को नुकसान नहीं पहुंचा।</p>
<p class="isSelectedEnd">अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक ईरान ने क्षेत्र के विभिन्न देशों की दिशा में कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि कुवैत की ओर भेजी गई दो मिसाइलें अपने लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही नष्ट हो गईं या रास्ता भटक गईं। वहीं बहरीन की दिशा में छोड़ी गई तीन मिसाइलों को अमेरिकी और बहरीन की संयुक्त वायु रक्षा प्रणाली ने हवा में ही मार गिराया। अमेरिकी सेना का दावा है कि किसी भी सैन्य अड्डे पर प्रत्यक्ष हमला सफल नहीं हुआ और सभी कर्मी सुरक्षित हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">ईरान की ओर से किए गए इन दावों और अमेरिकी खंडन के बीच क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां तेज हो गई हैं। घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब पिछले कुछ सप्ताह से फारस की खाड़ी और होर्मुज स्ट्रेट के आसपास तनाव लगातार बढ़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि दोनों देशों के बीच प्रत्यक्ष टकराव की आशंका पहले की तुलना में अधिक बढ़ गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस बीच अमेरिका ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण केश्म आइलैंड पर मौजूद एक कम्युनिकेशन टावर को निशाना बनाया। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई आत्मरक्षा के तहत की गई। उनका कहना है कि उक्त संचार प्रणाली का उपयोग सैन्य गतिविधियों और समुद्री अभियानों के समन्वय में किया जा रहा था। अमेरिकी सेना का दावा है कि हमले का उद्देश्य संभावित खतरे को कम करना था।</p>
<p class="isSelectedEnd">स्थिति तब और गंभीर हो गई जब अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट के पास एक ऑयल टैंकर को भी निशाना बनाया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड द्वारा जारी ड्रोन फुटेज में एक टैंकर आग की लपटों में घिरा दिखाई दे रहा है। जानकारी के अनुसार बोत्सवाना के झंडे वाला यह जहाज होर्मुज स्ट्रेट से गुजरते हुए ईरान के खार्ग आइलैंड की दिशा में बढ़ रहा था। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई समुद्री नाकेबंदी के दौरान की गई, जबकि ईरानी पक्ष ने इसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों का उल्लंघन बताया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">पिछले 24 घंटों में घटनाओं की रफ्तार काफी तेज रही है। ईरान ने कुवैत और बहरीन में अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने का दावा किया, जबकि अमेरिका ने ईरानी सैन्य और समुद्री ढांचे पर जवाबी हमले किए। दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव ने पूरे खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। तेल आपूर्ति मार्गों पर संभावित असर को लेकर भी वैश्विक बाजारों की नजर इस घटनाक्रम पर बनी हुई है।</p>
<p class="isSelectedEnd">इसी दौरान क्षेत्रीय राजनीति में भी नई हलचल देखने को मिली। रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने लेबनान में जारी इजराइली सैन्य अभियानों को लेकर इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से बातचीत की। बताया गया है कि ट्रम्प ने लेबनान में बढ़ते हमलों पर नाराजगी जताई और क्षेत्रीय तनाव कम करने की जरूरत पर जोर दिया। हालांकि इस बातचीत को लेकर आधिकारिक स्तर पर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।</p>
<p class="isSelectedEnd">उधर लेबनान में भी हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। दक्षिणी लेबनान के कई इलाकों, खासकर नबातियेह क्षेत्र में इजराइली हवाई हमलों की खबरें सामने आई हैं। दूसरी तरफ हिजबुल्लाह की ओर से भी ड्रोन और मिसाइल हमले किए जाने के दावे किए गए हैं। दोनों पक्षों के बीच जारी सैन्य कार्रवाई ने सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ती सैन्य गतिविधियां केवल क्षेत्रीय ही नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर भी असर डाल सकती हैं। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में शामिल इस समुद्री क्षेत्र में किसी भी प्रकार की अस्थिरता का प्रभाव अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है। यही कारण है कि कई देश हालात पर करीबी नजर बनाए हुए हैं। अमेरिका और ईरान दोनों अपनी-अपनी स्थिति पर कायम हैं। जहां ईरान अपने हमलों को सफल बता रहा है, वहीं अमेरिका का कहना है कि उसकी रक्षा प्रणालियों ने सभी खतरों को निष्क्रिय कर दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/iran-attacks-american-bases-in-kuwait-bahrain-america-retaliates/article-54816</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/iran-attacks-american-bases-in-kuwait-bahrain-america-retaliates/article-54816</guid>
                <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 11:14:05 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/iran-us-conflict-%281%29.jpg"                         length="196932"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>होर्मुज खोलने पर बढ़ी उम्मीद, ईरान-अमेरिका में 30 दिन के समझौते की चर्चा तेज</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान और अमेरिका के बीच 30 दिन के अस्थायी समझौते पर बातचीत तेज हुई है। होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने को लेकर उम्मीद बढ़ी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/hopes-increased-on-opening-of-hormuz-discussion-on-30-day/article-52922"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-08t145257.493.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रहे तनाव के बीच अब हालात कुछ नरम पड़ते दिखाई दे रहे हैं। दोनों देशों के बीच एक अस्थायी समझौते को लेकर बातचीत तेज हो गई है और सबसे ज्यादा चर्चा </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">‘<span lang="hi" xml:lang="hi">स्ट्रेट ऑफ होर्मुज</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">को दोबारा खोलने को लेकर हो रही है। बताया जा रहा है कि शुरुआती स्तर पर ऐसा फ्रेमवर्क तैयार किया जा रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें करीब 30 दिनों तक सैन्य गतिविधियां रोकने और समुद्री व्यापार को सामान्य करने की कोशिश होगी। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस प्रस्ताव पर दोनों पक्षों के अधिकारियों के बीच लगातार संपर्क बना हुआ है। हाल के दिनों में खाड़ी क्षेत्र में बढ़े तनाव और तेल सप्लाई को लेकर बनी चिंता के बाद यह बातचीत काफी अहम मानी जा रही है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त तेल मार्गों में गिना जाता है और यहां किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि का असर सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार पर पड़ता है। ऐसे में अगर यह रास्ता पूरी तरह खुलता है तो तेल कारोबार और शिपिंग सेक्टर को राहत मिल सकती है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जानकारी के मुताबिक</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह समझौता अभी ड्राफ्ट स्तर पर है और कई शर्तों पर सहमति बनना बाकी है। अमेरिकी पक्ष चाहता है कि ईरान पहले अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर स्पष्ट भरोसा दे। सूत्रों के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अमेरिका की मांग है कि ईरान उच्च स्तर पर संवर्धित यूरेनियम का भंडार खत्म करे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कुछ परमाणु केंद्रों को बंद करे और लंबे समय तक यूरेनियम संवर्धन रोक दे। दूसरी तरफ तेहरान ने इसका वैकल्पिक प्रस्ताव दिया है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि उनका देश कुछ यूरेनियम को कम संवर्धित स्तर पर लाने और बाकी हिस्से को किसी तीसरे देश</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संभवतः रूस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">को सौंपने पर विचार कर सकता है। हालांकि ईरान अपने सभी परमाणु केंद्र बंद करने के पक्ष में फिलहाल नजर नहीं आ रहा। यही वजह है कि बातचीत आगे बढ़ने के बावजूद कई मुद्दों पर गतिरोध बना हुआ है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा नजर </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">‘<span lang="hi" xml:lang="hi">स्ट्रेट ऑफ होर्मुज</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">पर टिकी हुई है। बताया जा रहा है कि प्रस्तावित अंतरिम समझौते में ईरानी जहाजों और बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी पाबंदियों में ढील देने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही सामान्य करने और संघर्ष विराम लागू करने जैसे बिंदु शामिल हैं। हालात पिछले कुछ हफ्तों में अचानक बिगड़ गए थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब खाड़ी क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां बढ़ी और तेल टैंकरों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई गई। अब अगर 30 दिनों के लिए सैन्य कार्रवाई रुकती है तो इसे दोनों देशों के बीच भरोसा बहाल करने की शुरुआत माना जा सकता है। हालांकि जानकार यह भी कह रहे हैं कि यह कोई स्थायी समाधान नहीं होगा। बड़े मुद्दों पर अभी लंबी बातचीत बाकी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनमें आर्थिक प्रतिबंधों में राहत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विदेशों में फ्रीज ईरानी संपत्तियों की वापसी और परमाणु कार्यक्रम का भविष्य शामिल है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/hopes-increased-on-opening-of-hormuz-discussion-on-30-day/article-52922</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/hopes-increased-on-opening-of-hormuz-discussion-on-30-day/article-52922</guid>
                <pubDate>Fri, 08 May 2026 15:08:43 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-05/%E0%A4%86%E0%A4%9C-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B6%E0%A4%BF%E0%A4%AB%E0%A4%B2-5-%E0%A4%AE%E0%A4%88-2026-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%95%2C-%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9%2C-%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%82%E0%A4%AD-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%AD---2026-05-08t145257.493.jpg"                         length="141783"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिका ने ईरान को भेजा नया प्रस्ताव, ट्रंप बोले- समझौता नहीं हुआ तो फिर होगी बमबारी</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका ने ईरान को युद्ध खत्म करने का नया प्रस्ताव भेजा है। ट्रंप की चेतावनी के बीच परमाणु कार्यक्रम पर समझौता अब भी अटका हुआ है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/america-sent-a-new-proposal-to-iran-trump-said/article-52857"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-07t161820.521.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अमेरिका और ईरान के बीच करीब दो महीने से जारी तनाव अब एक नए मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन ने तेहरान को युद्ध खत्म करने के लिए नया प्रस्ताव भेजा है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसकी समीक्षा फिलहाल ईरान कर रहा है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक इस प्रस्ताव में होर्मुज जलडमरूमध्य को अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए दोबारा खोलने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कुछ अमेरिकी प्रतिबंधों में राहत और क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों को कम करने जैसे बिंदु शामिल हैं। हालांकि मामला अभी पूरी तरह सुलझा नहीं है। तेहरान ने साफ संकेत दिए हैं कि वह जल्दबाजी में किसी समझौते पर दस्तखत नहीं करेगा। इसी बीच ट्रंप ने सोशल मीडिया पर फिर चेतावनी दी कि अगर समझौता नहीं हुआ तो ईरान पर दोबारा बमबारी शुरू हो सकती है। इस बयान के बाद मिडिल ईस्ट में बेचैनी फिर बढ़ गई है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">गुरुवार सुबह से ही अंतरराष्ट्रीय बाजारों में हलचल देखने को मिली। कच्चे तेल की कीमतें कुछ समय के लिए स्थिर हुईं और निवेशकों में उम्मीद जगी कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य खुलता है तो तेल सप्लाई सामान्य हो सकती है। बताया जा रहा है कि पिछले कुछ हफ्तों में पर्सियन गल्फ से गुजरने वाले कई तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हुई थी। इसी वजह से ब्रेंट क्रूड लगातार ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। बुधवार देर रात अमेरिकी सेना और एक ईरानी तेल टैंकर के बीच ओमान की खाड़ी में तनाव की खबर भी सामने आई। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने दावा किया कि टैंकर अमेरिकी नाकेबंदी तोड़ने की कोशिश कर रहा था</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके बाद कार्रवाई की गई। हालांकि ईरान ने इसे उकसावे वाली कार्रवाई बताया है। हालात इतने तनावपूर्ण रहे कि कई अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों ने अस्थायी रूप से अपने रूट बदल दिए।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस पूरे युद्ध की सबसे बड़ी उलझन अब भी ईरान का परमाणु कार्यक्रम बना हुआ है। वॉशिंगटन चाहता है कि तेहरान यूरेनियम संवर्धन सीमित करे और परमाणु हथियारों की दिशा में कोई कदम न बढ़ाए। दूसरी तरफ ईरान इसे अपनी संप्रभुता और सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा बता रहा है। सूत्रों के मुताबिक दोनों देशों के बीच असली पेच यहीं फंसा है। अमेरिकी पक्ष चाहता है कि किसी भी समझौते में परमाणु गतिविधियों पर सख्त निगरानी शामिल हो</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि ईरान अपने कार्यक्रम को पूरी तरह रोकने के लिए तैयार नहीं दिख रहा। हालांकि अब यह भी कहा जा रहा है कि दोनों देश फिलहाल इस मुद्दे को अलग रखकर बाकी बिंदुओं पर सहमति बनाने की कोशिश कर सकते हैं ताकि युद्ध जैसी स्थिति खत्म हो सके। बाद में परमाणु वार्ता के लिए अलग दौर की बातचीत कराई जा सकती है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस संघर्ष की शुरुआत फरवरी के आखिर में हुई थी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान के सैन्य और रणनीतिक ठिकानों पर हमले शुरू किए। उसी दौरान ईरान के शीर्ष नेतृत्व को बड़ा नुकसान पहुंचा और इसके बाद तेहरान ने मिडिल ईस्ट में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। हालात तेजी से बिगड़े और होर्मुज जलडमरूमध्य पर असर पड़ने लगा। अप्रैल में संघर्षविराम की कोशिश हुई थी लेकिन बीच-बीच में दोनों पक्षों की तरफ से आरोप लगते रहे कि सीजफायर का उल्लंघन हुआ। पाकिस्तान की मध्यस्थता में भी बातचीत कराने की कोशिश हुई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मगर वह सफल नहीं हो पाई। अब ट्रंप प्रशासन दावा कर रहा है कि समझौता करीब है और एक छोटे मेमोरैंडम पर सहमति बन सकती है। लेकिन तेहरान अभी पूरी तरह भरोसा करने की स्थिति में नहीं दिख रहा।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/america-sent-a-new-proposal-to-iran-trump-said/article-52857</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/america-sent-a-new-proposal-to-iran-trump-said/article-52857</guid>
                <pubDate>Thu, 07 May 2026 16:25:17 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-05/%E0%A4%86%E0%A4%9C-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B6%E0%A4%BF%E0%A4%AB%E0%A4%B2-5-%E0%A4%AE%E0%A4%88-2026-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%95%2C-%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9%2C-%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%82%E0%A4%AD-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%AD---2026-05-07t161820.521.jpg"                         length="147039"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>48 घंटे में अरागची का तीसरा पाकिस्तान दौरा, क्या अमेरिका-ईरान डील करीब?</title>
                                    <description><![CDATA[अब्बास अरागची 48 घंटे में तीसरी बार पाकिस्तान पहुंचे। अमेरिका-ईरान डील, होर्मुज स्ट्रेट और परमाणु विवाद पर कूटनीति तेज हुई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/aragchis-third-visit-to-pakistan-in-48-hours-is-us-iran/article-52264"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/abbas-araghchi.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">इस्लामाबाद में अब्बास अरागची की लगातार आवाजाही ने पश्चिम एशिया की कूटनीति को अचानक तेज कर दिया है। 48 घंटे के भीतर तीसरी बार पाकिस्तान पहुंचे ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ऐसे समय इस्लामाबाद पहुंचे हैं, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने की कोशिशें निर्णायक मोड़ पर हैं। अरागची का यह दौरा सिर्फ द्विपक्षीय संपर्क नहीं, बल्कि एक व्यापक कूटनीतिक कवायद का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें पाकिस्तान बैक-चैनल मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। इससे पहले अरागची रूस और ओमान का दौरा कर चुके हैं। व्हाइट हाउस ने भी पुष्टि की है कि ईरान की ओर से एक नया प्रस्ताव मिला है, जिस पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के साथ चर्चा की है। हालांकि, दोनों पक्ष अब भी मूल मुद्दों पर सहमत नहीं दिख रहे। ऐसे में अरागची की पाकिस्तान यात्रा को संभावित अमेरिका-ईरान डील की जमीन तैयार करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">रिपोर्ट्स के अनुसार, अरागची इस्लामाबाद के जरिए वॉशिंगटन तक नया संदेश पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। पाकिस्तान इस पूरे गतिरोध में संदेशवाहक और मध्यस्थ, दोनों भूमिकाओं में उभरा है। सूत्रों के मुताबिक, अरागची अपने पिछले दौरे में एक “रेड लाइन</span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;" xml:lang="en-us">”</span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us"> </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">दस्तावेज पाकिस्तान को सौंप चुके हैं, जिसमें ईरान की शर्तें स्पष्ट की गई थीं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">इन शर्तों में सबसे अहम होर्मुज स्ट्रेट को लेकर सुरक्षा ढांचा, अमेरिकी नौसैनिक दबाव में ढील और युद्धविराम के बाद परमाणु वार्ता की रूपरेखा शामिल है। ईरान की प्राथमिकता फिलहाल सैन्य तनाव कम करना और खाड़ी क्षेत्र में समुद्री आवाजाही सामान्य करना है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">पाकिस्तान की भूमिका</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान की भूमिका अचानक केंद्रीय हो गई है। इस्लामाबाद ईरान और अमेरिका के बीच प्रत्यक्ष वार्ता का मंच नहीं, लेकिन भरोसेमंद संपर्क-चैनल के रूप में सामने आया है। अरागची की लगातार यात्राएं संकेत देती हैं कि तेहरान फिलहाल पाकिस्तान के जरिए ही अपनी शर्तें आगे बढ़ाना चाहता है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">पाकिस्तानी नेतृत्व पहले भी अमेरिका और ईरान के बीच सीमित संवाद को आगे बढ़ाने की कोशिश कर चुका है। मौजूदा दौर में उसकी भूमिका संदेशों के आदान-प्रदान, प्रस्तावों की भाषा और बातचीत के फ्रेमवर्क तक सीमित लेकिन अहम मानी जा रही है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">इससे पहले अरागची ने रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की। करीब 90 मिनट चली इस बैठक में अमेरिका-इजराइल से जुड़े संघर्ष, क्षेत्रीय सुरक्षा और ईरान-रूस रणनीतिक साझेदारी पर चर्चा हुई। ईरान ने संकेत दिया कि वह किसी भी संभावित समझौते से पहले रूस को अपने पक्ष में बनाए रखना चाहता है। पुतिन ने भी पश्चिम एशिया में शांति बहाली के प्रयासों का समर्थन करने की बात कही।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">व्हाइट हाउस के अनुसार, ईरान ने जो प्रस्ताव भेजा है, उसमें होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने और युद्ध समाप्ति की दिशा में आगे बढ़ने की बात है। लेकिन इस प्रस्ताव में परमाणु कार्यक्रम पर तत्काल चर्चा शामिल नहीं है। यही सबसे बड़ा अड़ंगा बना हुआ है। अमेरिकी प्रशासन चाहता है कि परमाणु मुद्दा किसी भी समझौते का शुरुआती हिस्सा हो, जबकि ईरान पहले युद्धविराम और समुद्री रास्तों पर सहमति चाहता है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">अटका हुआ समझौता</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">यही मतभेद फिलहाल किसी बड़े समझौते को रोक रहे हैं। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि परमाणु मुद्दे को टालना ईरान को रणनीतिक बढ़त देगा। दूसरी ओर, तेहरान का तर्क है कि युद्ध और नाकेबंदी के बीच परमाणु शर्तों पर दबाव में बातचीत स्वीकार्य नहीं होगी।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">इस गतिरोध का असर सिर्फ कूटनीति तक सीमित नहीं है। होर्मुज स्ट्रेट में अनिश्चितता से वैश्विक तेल आपूर्ति, ऊर्जा कीमतों और समुद्री व्यापार पर दबाव बना हुआ है। यही वजह है कि ओमान, रूस और पाकिस्तान जैसे देश सक्रिय रूप से इस प्रक्रिया में जुड़े हुए हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">फिलहाल तस्वीर साफ नहीं है, लेकिन अरागची की तेज कूटनीतिक सक्रियता यह संकेत जरूर देती है कि ईरान बातचीत का दरवाजा बंद नहीं करना चाहता। अब निगाहें इस बात पर हैं कि पाकिस्तान के जरिए भेजे गए ताजा प्रस्ताव पर वॉशिंगटन क्या रुख अपनाता है। अगर अमेरिका और ईरान शुरुआती शर्तों पर न्यूनतम सहमति बना लेते हैं, तो आने वाले दिनों में यह गतिरोध औपचारिक वार्ता में बदल सकता है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/aragchis-third-visit-to-pakistan-in-48-hours-is-us-iran/article-52264</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/aragchis-third-visit-to-pakistan-in-48-hours-is-us-iran/article-52264</guid>
                <pubDate>Tue, 28 Apr 2026 14:32:10 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-04/abbas-araghchi.jpg"                         length="117378"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ईरान-अमेरिका की दूसरी वार्ता पर सस्पेंस, पाकिस्तान कर रहा मनाने की कोशिश</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान-अमेरिका वार्ता अनिश्चित, पाकिस्तान मध्यस्थता में जुटा। नाकेबंदी हटाने की शर्त पर अड़ा ईरान, इस्लामाबाद बैठक पर संशय बरकरार।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/iran-americas-second-talks-stalled-pakistan-is-trying-to-persuade/article-51645"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/iran-us-talks-pakistan-mediation.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित दूसरे दौर की शांति वार्ता पर सस्पेंस बना हुआ है, जबकि पाकिस्तान दोनों पक्षों के बीच संवाद बहाल कराने के प्रयास तेज कर रहा है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने रविवार को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से फोन पर बातचीत कर क्षेत्रीय हालात और संभावित वार्ता पर चर्चा की। करीब 45 मिनट चली इस बातचीत में द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव पर भी विस्तार से विचार हुआ। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि उनका प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद पहुंचकर बातचीत करेगा, लेकिन ईरान ने इस पर अब तक सहमति नहीं दी है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, शहबाज शरीफ ने इस बातचीत के दौरान सऊदी अरब, कतर और तुर्किये के नेताओं के साथ हालिया संवाद की जानकारी भी साझा की। दोनों नेताओं ने क्षेत्र में शांति बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया। हालांकि, ईरान की सरकारी एजेंसी ने इस्लामाबाद में प्रस्तावित वार्ता को लेकर चल रही खबरों को खारिज कर दिया है, जिससे स्थिति और अस्पष्ट हो गई है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">ईरान की शर्त</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह तभी वार्ता में शामिल होगा जब अमेरिका उसके बंदरगाहों पर लगी नौसैनिक नाकेबंदी हटाएगा। अधिकारियों के अनुसार, यह शर्त ईरान की सुरक्षा और आर्थिक हितों से जुड़ी हुई है। ईरान को आशंका है कि बिना ठोस भरोसे के बातचीत में शामिल होना उसके लिए नुकसानदेह हो सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय और शीर्ष नेतृत्व लगातार ईरान को मनाने की कोशिश कर रहे हैं। इस मुद्दे पर ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल की बैठक भी हो चुकी है, जिसमें वार्ता की शर्तों और संभावित जोखिमों पर चर्चा की गई।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">पृष्ठभूमि और गतिरोध</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">इससे पहले 11 और 12 अप्रैल को इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच पहली बार सीधी बातचीत हुई थी। हालांकि, उस दौर में कोई ठोस नतीजा नहीं निकल पाया था। इसके बाद से ही दूसरे दौर की वार्ता को लेकर उम्मीद और अनिश्चितता दोनों बनी हुई हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">ईरान को यह भी संदेह है कि बातचीत के बाद भी उस पर लगे आर्थिक प्रतिबंध नहीं हटाए जाएंगे। साथ ही, पहले के अनुभवों को देखते हुए उसे यह डर भी है कि वार्ता के बावजूद तनाव बढ़ सकता है। यही कारण है कि तेहरान इस बार ज्यादा सतर्क रुख अपना रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">असर और आगे की स्थिति</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">विश्लेषकों के अनुसार, यदि यह वार्ता सफल होती है तो मध्य पूर्व में तनाव कम हो सकता है और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा। वहीं, बातचीत में देरी या विफलता क्षेत्रीय अस्थिरता को और बढ़ा सकती है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">फिलहाल 22 अप्रैल को समाप्त होने वाले दो सप्ताह के युद्धविराम को लेकर भी स्थिति अनिश्चित बनी हुई है। पाकिस्तान इस युद्धविराम को आगे बढ़ाने और वार्ता को सफल बनाने के लिए सक्रिय कूटनीतिक प्रयास कर रहा है।</span></p>
<p><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">आगे की स्थिति काफी हद तक ईरान के रुख और अमेरिका की ओर से संभावित रियायतों पर निर्भर करेगी। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर अब इस बात पर टिकी है कि क्या इस्लामाबाद में प्रस्तावित वार्ता वास्तव में हो पाएगी या नहीं।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/iran-americas-second-talks-stalled-pakistan-is-trying-to-persuade/article-51645</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/iran-americas-second-talks-stalled-pakistan-is-trying-to-persuade/article-51645</guid>
                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 11:54:19 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-04/iran-us-talks-pakistan-mediation.jpg"                         length="145727"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        