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                <title>Pakistan - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Pakistan RSS Feed</description>
                
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                <title>पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल फिर महंगे, नई कीमतें 11 जुलाई से लागू</title>
                                    <description><![CDATA[सरकार ने पेट्रोल पर 13.18 रुपये और हाई-स्पीड डीजल पर 13.80 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की। नई दरों के बाद पेट्रोल 310.71 और डीजल 323.30 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर हो गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/petrol-and-diesel-again-expensive-in-pakistan-new-prices-implemented/article-58480"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/pakistan-fuel-price.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">पाकिस्तान में आम लोगों को एक बार फिर महंगाई का झटका लगा है। सरकार ने पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल (एचएसडी) की कीमतों में बढ़ोतरी का ऐलान किया है, जिसके बाद 11 जुलाई से नई दरें लागू हो गई हैं। सरकारी अधिसूचना के अनुसार पेट्रोल की कीमत में 13.18 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर और हाई-स्पीड डीजल की कीमत में 13.80 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की गई है। इस बढ़ोतरी के बाद देश में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 310.71 पाकिस्तानी रुपये और हाई-स्पीड डीजल की कीमत 323.30 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर हो गई है। लगातार बढ़ती ईंधन कीमतों का असर आम लोगों के साथ-साथ परिवहन, कृषि, उद्योग और अन्य क्षेत्रों पर भी पड़ने की आशंका जताई जा रही है। पाकिस्तान पहले से ही महंगाई और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में ईंधन की कीमतों में नई बढ़ोतरी से रोजमर्रा की वस्तुओं और सेवाओं की लागत बढ़ने की संभावना भी बढ़ गई है। आर्थिक जानकारों का कहना है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बदलाव का सीधा असर माल ढुलाई, सार्वजनिक परिवहन और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर पड़ता है, जिससे महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालिया बढ़ोतरी के बावजूद पेट्रोल और डीजल की कीमतें अभी भी इस वर्ष के उच्चतम स्तर से नीचे बनी हुई हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 3 अप्रैल को हाई-स्पीड डीजल की कीमत 520.35 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई थी, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर माना जाता है। वहीं पेट्रोल की कीमत भी इसी अवधि में 458.41 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई थी। ईंधन की कीमतों में तेजी का सिलसिला फरवरी के आखिर से शुरू हुआ था। बताया जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक परिस्थितियों का इसका सीधा असर पड़ा। इसके बाद पाकिस्तान में ईंधन की कीमतों में लगातार बदलाव देखने को मिला। सरकार समय-समय पर अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति और आर्थिक आवश्यकताओं को देखते हुए ईंधन की नई कीमतें तय कर रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था काफी हद तक आयातित तेल पर निर्भर है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का असर घरेलू ईंधन दरों पर भी दिखाई देता है। इसके अलावा मुद्रा विनिमय दर में उतार-चढ़ाव भी ईंधन की लागत को प्रभावित करता है। यही वजह है कि पिछले कुछ महीनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कई बार संशोधन किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार की ओर से ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के साथ हुए समझौतों और कर ढांचे में बदलाव को भी एक प्रमुख कारण माना जा रहा है। सरकार ने 1 जुलाई से क्लाइमेट सपोर्ट लेवी को बढ़ाकर 5 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर कर दिया है। हालांकि इसके साथ पेट्रोलियम लेवी में कुछ समायोजन भी किया गया है। वर्तमान व्यवस्था के अनुसार हाई-स्पीड डीजल पर लगभग 80 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर पेट्रोलियम लेवी वसूली जा रही है, जबकि पेट्रोल पर 70 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर पेट्रोलियम लेवी के साथ 5 रुपये प्रति लीटर क्लाइमेट सपोर्ट लेवी अलग से लागू है। इसके अलावा कस्टम ड्यूटी और अन्य शुल्क भी ईंधन की अंतिम कीमत में शामिल हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार हाई-स्पीड डीजल पर कुल कर और शुल्क करीब 101 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर तक पहुंच जाता है, जबकि पेट्रोल पर यह आंकड़ा लगभग 95 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर है। इनमें कस्टम ड्यूटी, पेट्रोलियम लेवी, क्लाइमेट सपोर्ट लेवी और अन्य नियामकीय शुल्क शामिल हैं। इसके अतिरिक्त केरोसिन और लाइट डीजल ऑयल पर भी अलग-अलग दरों से पेट्रोलियम लेवी वसूली जा रही है। आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकार के लिए राजस्व बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं की शर्तों का पालन करने के बीच संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। दूसरी ओर आम उपभोक्ताओं को लगातार बढ़ती ईंधन कीमतों के कारण अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 13:27:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>लीबिया में मध्यस्थता की कोशिशों में पाकिस्तान की एंट्री, विरोधी गुटों के बीच संवाद बढ़ाने की पहल</title>
                                    <description><![CDATA[रिपोर्टों और सूत्रों के दावों के बीच कूटनीतिक हलचल तेज, अमेरिका और सऊदी अरब के समर्थन की भी चर्चा; लीबिया संकट के समाधान पर टिकी नजरें]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/pakistans-entry-in-mediation-efforts-in-libya-initiative-to-increase/article-58118"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/libya.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">उत्तर अफ्रीकी देश लीबिया में लंबे समय से जारी राजनीतिक अस्थिरता और गृहसंघर्ष के बीच एक बार फिर कूटनीतिक गतिविधियां तेज होती दिखाई दे रही हैं। पाकिस्तान विरोधी गुटों के बीच संवाद स्थापित कराने और समझौते की दिशा में मध्यस्थता की कोशिश कर रहा है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय पुष्टि सामने नहीं आई है, लेकिन इन दावों ने क्षेत्रीय और वैश्विक राजनीति में नई चर्चा शुरू कर दी है।</p>
<p style="text-align:justify;">बताया जा रहा है कि पाकिस्तान की कोशिश दोनों प्रमुख पक्षों के बीच बातचीत को आगे बढ़ाने और राजनीतिक समाधान का रास्ता तलाशने पर केंद्रित है। यदि यह पहल सफल होती है तो पाकिस्तान की कूटनीतिक भूमिका अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत हो सकती है। वहीं, विशेषज्ञों का मानना है कि लीबिया जैसा जटिल संकट केवल एक देश की पहल से हल नहीं होगा, बल्कि इसके लिए कई क्षेत्रीय और वैश्विक शक्तियों के बीच समन्वय आवश्यक होगा। अमेरिका और सऊदी अरब इस पूरी प्रक्रिया से अवगत हैं और पाकिस्तान की भूमिका को लेकर सकारात्मक रुख रखते हैं। हालांकि, इन दावों पर संबंधित देशों की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में इन सूचनाओं को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालना अभी जल्दबाजी होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">हाल के महीनों में पाकिस्तान ने खुद को क्षेत्रीय कूटनीति में अधिक सक्रिय दिखाने का प्रयास किया है। कुछ रिपोर्टों में यह भी उल्लेख किया गया कि अमेरिका और ईरान के बीच संवाद की प्रक्रिया में पाकिस्तान ने संपर्क सूत्र की भूमिका निभाई थी। इसी पृष्ठभूमि में अब लीबिया को लेकर उसकी सक्रियता को देखा जा रहा है। हालांकि, इस विषय पर भी अलग-अलग स्तर पर अलग-अलग दावे सामने आए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">लीबिया पिछले कई वर्षों से राजनीतिक विभाजन, सशस्त्र संघर्ष और सत्ता के लिए प्रतिस्पर्धा का सामना कर रहा है। देश में अलग-अलग क्षेत्रों पर विभिन्न गुटों का प्रभाव रहा है, जिससे स्थायी राजनीतिक व्यवस्था स्थापित करना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। संयुक्त राष्ट्र की पहल पर कई दौर की वार्ताएं भी हो चुकी हैं, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। लीबिया में किसी भी शांति समझौते की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सभी प्रमुख पक्ष एक साझा राजनीतिक ढांचे पर सहमत हों। इसके साथ ही चुनाव प्रक्रिया, सत्ता के बंटवारे, सुरक्षा व्यवस्था और तेल संसाधनों से होने वाली आय के निष्पक्ष वितरण जैसे मुद्दों पर भी व्यापक सहमति बनाना जरूरी होगा।</p>
<p style="text-align:justify;"> लीबिया केवल आंतरिक संघर्ष का मामला नहीं है, बल्कि इसमें कई बाहरी देशों के रणनीतिक हित भी जुड़े हुए हैं। यही कारण है कि वहां किसी भी नई पहल को सफल बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग और संतुलित दृष्टिकोण की आवश्यकता होगी। पाकिस्तान और लीबिया के बीच रक्षा क्षेत्र में भी संपर्क बढ़ा है। दोनों देशों के बीच सुरक्षा और सैन्य सहयोग को लेकर बातचीत होने की जानकारी पहले भी सामने आ चुकी है। ऐसे में माना जा रहा है कि दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद संबंध इस नई कूटनीतिक पहल में सहायक हो सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">यदि सभी संबंधित पक्ष बातचीत की प्रक्रिया को प्राथमिकता देते हैं तो लीबिया में स्थिरता की दिशा में सकारात्मक प्रगति संभव है। हालांकि, अतीत में कई बार वार्ता शुरू होने के बावजूद राजनीतिक मतभेद और क्षेत्रीय हितों के कारण समझौते आगे नहीं बढ़ पाए। इसलिए इस बार भी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सभी पक्ष कितनी गंभीरता से समाधान की दिशा में आगे बढ़ते हैं। लीबिया में स्थायी शांति केवल राजनीतिक समझौते से नहीं आएगी। इसके लिए सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना, सरकारी संस्थाओं को प्रभावी बनाना, आर्थिक पुनर्निर्माण और आम नागरिकों का भरोसा जीतना भी उतना ही आवश्यक होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 16:39:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गुजरात-एमपी से जैश-ए-मोहम्मद के 8 संदिग्ध आतंकी गिरफ्तार, ATS ने नेटवर्क का किया खुलासा</title>
                                    <description><![CDATA[गुजरात ATS का बड़ा ऑपरेशन, सोशल मीडिया के जरिए कथित भर्ती और पाकिस्तान स्थित हैंडलर से संपर्क की जांच तेज; कई जिलों में एक साथ कार्रवाई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/8-suspected-jaish-e-mohammed-terrorists-arrested-from-gujarat-mp-ats-reveals-network/article-57831"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/gujarat-ats.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">गुजरात आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS) ने प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से कथित रूप से जुड़े आठ संदिग्धों को गुजरात और मध्य प्रदेश से गिरफ्तार किया है। एजेंसी के मुताबिक यह कार्रवाई कई दिनों से चल रही खुफिया निगरानी और तकनीकी इनपुट के आधार पर की गई। गिरफ्तार किए गए सभी संदिग्धों से पूछताछ जारी है और जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि उनका नेटवर्क कितना व्यापक था और वे किन गतिविधियों में शामिल थे। अधिकारियों के अनुसार गिरफ्तार किए गए लोगों में दो युवकों की उम्र 18 और 19 वर्ष है। प्रारंभिक जांच में दावा किया गया है कि सभी गुजरात के रहने वाले हैं और राज्य में जैश-ए-मोहम्मद का एक सक्रिय नेटवर्क खड़ा करने की कोशिश कर रहे थे। एटीएस का कहना है कि यह नेटवर्क कथित तौर पर नए सदस्यों को जोड़ने, संगठन की विचारधारा फैलाने और भविष्य में आतंकी गतिविधियों के लिए आधार तैयार करने के उद्देश्य से काम कर रहा था। इसी सूचना के आधार पर एटीएस ने अलग-अलग टीमें बनाकर गुजरात के बनासकांठा, मेहसाणा, नवसारी और पाटण के अलावा मध्य प्रदेश के देवास जिले में एक साथ छापेमारी की। अभियान के दौरान सभी आठ संदिग्धों को हिरासत में लिया गया और बाद में उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया। अधिकारियों के अनुसार सभी से पूछताछ के साथ-साथ जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और अन्य दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">गुजरात एटीएस के डीआईजी सुनील जोशी ने बताया कि सबसे पहले दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया था। उनसे पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर छह अन्य लोगों तक जांच पहुंची और उन्हें भी अलग-अलग स्थानों से गिरफ्तार किया गया। अधिकारियों के मुताबिक आरोपियों के पास से कुछ साहित्य, झंडे और अन्य सामग्री बरामद हुई है, जिसकी जांच की जा रही है। इसके अलावा कई मोबाइल फोन भी जब्त किए गए हैं। एटीएस का कहना है कि इन मोबाइल फोन से महत्वपूर्ण डिजिटल जानकारी मिली है, जिसकी साइबर विशेषज्ञों की मदद से जांच जारी है। प्रारंभिक जांच के अनुसार सभी संदिग्ध सोशल मीडिया के जरिए पाकिस्तान में मौजूद एक कथित हैंडलर के संपर्क में थे, जिसकी पहचान 'अब्दुल्ला साहब' के नाम से हुई है। जांच एजेंसियों का दावा है कि इसी हैंडलर के निर्देश पर गुजरात में संगठन का नेटवर्क मजबूत करने की कोशिश की जा रही थी। अधिकारियों ने यह भी बताया कि आरोपियों तक कथित तौर पर तीन लाख रुपये की रकम भी पहुंचाई गई थी। फिलहाल एजेंसियां इस धनराशि के स्रोत, लेन-देन के तरीके और उससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही हैं। एटीएस के अनुसार गिरफ्तार किए गए कुछ संदिग्ध पाटण जिले के एक मदरसे में रह रहे थे। वहां से भी कुछ दस्तावेज और प्रचार सामग्री बरामद की गई है। हालांकि जांच एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि पूरे मामले की जांच जारी है और सभी तथ्यों की पुष्टि साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">जांच में यह भी सामने आया है कि संदिग्धों ने कथित तौर पर 'तंजीम' नाम से एक समूह बनाया था, जिसके जरिए नए सदस्यों को जोड़ने और उन्हें संगठन की विचारधारा से प्रभावित करने की कोशिश की जा रही थी। एटीएस का दावा है कि यह समूह स्थानीय स्तर पर युवाओं से संपर्क कर उनका ब्रेनवॉश करने की कोशिश कर रहा था। साथ ही प्रतिबंधित संगठन से जुड़े साहित्य का गुजराती भाषा में अनुवाद कर उसे स्थानीय स्तर पर प्रसारित करने की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इसमें और कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं। सुरक्षा एजेंसियां सोशल मीडिया अकाउंट, डिजिटल चैट, वित्तीय लेन-देन और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की भी पड़ताल कर रही हैं। जैश-ए-मोहम्मद पाकिस्तान आधारित प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन है, जिसकी स्थापना वर्ष 2000 में मसूद अजहर ने की थी। भारत में कई बड़े आतंकी हमलों में इस संगठन का नाम सामने आ चुका है और इसे लेकर सुरक्षा एजेंसियां लगातार सतर्क रहती हैं। उल्लेखनीय है कि इसी वर्ष अप्रैल में गुजरात एटीएस ने कथित तौर पर आईएसआईएस से जुड़े दो संदिग्धों को भी गिरफ्तार किया था। उस मामले में भी सोशल मीडिया के जरिए कट्टरपंथी विचारधारा फैलाने और नेटवर्क तैयार करने के आरोप लगाए गए थे। ताजा कार्रवाई के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने एक बार फिर लोगों से अपील की है कि यदि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिले तो तुरंत पुलिस या संबंधित एजेंसी को सूचित करें। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 11:51:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पाकिस्तान ने सिंधु जल संधि पर फिर दी चेतावनी, पानी रोकने पर भारत को धमकी</title>
                                    <description><![CDATA[पाकिस्तान ने सिंधु जल संधि पर भारत के फैसले का विरोध दोहराया, जल अधिकारों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आवाज तेज की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/pakistan-again-warns-on-indus-water-treaty-threatens-india-if/article-57359"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/pakistan-india.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">पाकिस्तानी जलवायु परिवर्तन मंत्री मुसादिक मलिक ने कहा कि पाकिस्तान के हिस्से का पानी रोकने की कोशिश हुई तो उसका जवाब दिया जाएगा। वहीं इस्लामाबाद ने दावा किया कि सिंधु जल संधि अब भी पूरी तरह प्रभावी है और भारत इसे एकतरफा समाप्त नहीं कर सकता। पाकिस्तान ने एक बार फिर सिंधु जल संधि को लेकर भारत के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। पाकिस्तान के जलवायु परिवर्तन मंत्री मुसादिक मलिक ने सोमवार को इस्लामाबाद में आयोजित संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि यदि किसी ने पाकिस्तान के हिस्से का पानी रोकने की कोशिश की तो उसका कड़ा जवाब दिया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत पाकिस्तान के हिस्से के पानी के प्रवाह को प्रभावित करना चाहता है। इस बयान के बाद दोनों देशों के बीच जल विवाद एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि भारत पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ ठोस कार्रवाई होने तक सिंधु जल संधि को बहाल करने का कोई निर्णय नहीं लिया जाएगा।<br /><img alt="9k="></img></p>
<p>प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार भी मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि सिंधु जल संधि अंतरराष्ट्रीय समझौता है और यह कानूनी रूप से अब भी लागू है। उनके अनुसार भारत इस संधि को न तो एकतरफा स्थगित कर सकता है, न समाप्त कर सकता है और न ही इसकी शर्तों में बदलाव कर सकता है। पाकिस्तानी मंत्रियों ने यह भी बताया कि मंगलवार को इस्लामाबाद में सिंधु जल संधि पर पहला अंतरराष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किया जाएगा। इसमें जल विशेषज्ञ, कानूनी विशेषज्ञ और विभिन्न देशों के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। सेमिनार में संधि के कानूनी, तकनीकी और अंतरराष्ट्रीय पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। पाकिस्तान सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत उसके जल अधिकार सुरक्षित हैं। अधिकारियों के मुताबिक प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर पहले भी कई बार कह चुके हैं कि पानी पाकिस्तान की जीवनरेखा है और इस मुद्दे पर कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। ऐसे में पाकिस्तान इस विषय को वैश्विक स्तर पर उठाने की भी तैयारी कर रहा है।<br /><br /></p>
<p>इससे पहले 21 जून को पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भी इसी मुद्दे पर भारत को चेतावनी दी थी। एक पाकिस्तानी टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि यदि पाकिस्तान को अपनी जल सुरक्षा पर खतरा महसूस हुआ तो स्थिति गंभीर हो सकती है। उन्होंने आरोप लगाया था कि भारत पानी को रणनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया था कि हाल के महीनों में इस मामले में हुए सभी घटनाक्रमों की उन्हें पूरी जानकारी नहीं है। भारत ने अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को निलंबित करने का फैसला लिया था। उस हमले में 26 लोगों की जान गई थी। इसके बाद भारत सरकार ने कहा था कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ ठोस और विश्वसनीय कार्रवाई नहीं करता, तब तक संधि को बहाल नहीं किया जाएगा। भारत का यह कदम दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ाने वाला माना गया।<br /><br /><img alt="Z"></img></p>
<p>सिंधु जल संधि वर्ष 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुई थी। इस समझौते पर तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान ने हस्ताक्षर किए थे। इस संधि के तहत सिंधु नदी प्रणाली की छह नदियों के जल के उपयोग को लेकर दोनों देशों के अधिकार तय किए गए थे। सिंधु, झेलम और चिनाब का अधिकांश जल पाकिस्तान को मिला, जबकि रावी, ब्यास और सतलुज का उपयोग भारत के हिस्से में आया। पिछले छह दशकों से अधिक समय तक यह संधि दोनों देशों के बीच जल बंटवारे का आधार बनी रही। पाकिस्तान की कृषि और अर्थव्यवस्था काफी हद तक सिंधु नदी प्रणाली पर निर्भर है। वहां की लगभग 90 प्रतिशत सिंचित कृषि भूमि को इसी नदी तंत्र से पानी मिलता है। कृषि क्षेत्र पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है और लाखों लोगों की आजीविका इससे जुड़ी हुई है। यदि पानी की उपलब्धता प्रभावित होती है तो इसका असर खेती, बिजली उत्पादन, उद्योग और ग्रामीण रोजगार पर भी पड़ सकता है। पाकिस्तान के प्रमुख जलाशय और जलविद्युत परियोजनाएं भी इसी नदी प्रणाली पर आधारित हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 11:09:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>पाकिस्तान का अफगानिस्तान में एयरस्ट्राइक दावा, 29 आतंकी ढेर</title>
                                    <description><![CDATA[कराची हमले के बाद पाकिस्तान का जवाबी ऑपरेशन, TTP और जमात-उल-अहरार के ठिकानों को निशाना बनाने का दावा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/pakistan-airstrike-in-afghanistan-claims-29-terrorists-killed/article-57256"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/pakistan-afghanistan-strike.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पाकिस्तान ने दावा किया है कि उसने अफगानिस्तान के भीतर तीन अलग-अलग ठिकानों पर एयरस्ट्राइक और जमीनी कार्रवाई की है, जिसमें कुल 29 आतंकियों के मारे जाने की बात कही गई है। यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब एक दिन पहले ही कराची में सिंध रेंजर्स के मुख्यालय पर बड़ा आतंकी हमला हुआ था, जिसमें चार जवानों की मौत हो गई थी और जवाबी कार्रवाई में छह हमलावरों को मार गिराया गया था। सुरक्षा हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं और दोनों देशों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर फिर तेज हो गया है। पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बयान जारी करते हुए कहा कि यह ऑपरेशन हाल के आतंकी हमलों के जवाब में किया गया है। शुरुआती कार्रवाई खैबर पख्तूनख्वा के बाजौर जिले में की गई, जहां खुफिया जानकारी के आधार पर एक जमीनी ऑपरेशन चलाया गया। इस ऑपरेशन में चार आतंकियों को मार गिराया गया, जिनमें तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) का एक कमांडर खान फरोश भी शामिल था। बताया गया कि इस इलाके में आतंकियों की गतिविधियों को लेकर लंबे समय से इनपुट मिल रहे थे और हालात अचानक बिगड़ते जा रहे थे। इसके बाद पाकिस्तान ने दावा किया कि उसने अफगानिस्तान के भीतर पक्तिया, पक्तिका और कुनार प्रांतों में स्थित तीन अलग-अलग आतंकी ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की। इन हमलों में 25 और आतंकियों के मारे जाने की बात कही गई है। इस तरह कुल मिलाकर 29 आतंकियों के ढेर होने का दावा किया गया है। साथ ही यह भी कहा गया कि इन ठिकानों पर मौजूद हथियारों और गोला-बारूद के बड़े जखीरे को भी पूरी तरह नष्ट कर दिया गया। हालांकि अफगानिस्तान की ओर से इन दावों पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, जिससे स्थिति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। कराची में इससे ठीक एक दिन पहले शनिवार रात करीब 8.30 बजे सिंध रेंजर्स के मुख्यालय पर आतंकी हमला हुआ था। हथियारों और विस्फोटकों से लैस आतंकियों ने अचानक परिसर में घुसकर अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी थी। इस हमले में चार रेंजर्स जवान शहीद हो गए थे। वहीं सुरक्षा बलों की जवाबी कार्रवाई में छह हमलावर भी मारे गए थे। इस हमले की जिम्मेदारी जमात-उल-अहरार ने ली थी, जो तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान से जुड़ा एक गुट माना जाता है। इस घटना ने पाकिस्तान के सुरक्षा तंत्र को एक बार फिर गंभीर चुनौती के सामने खड़ा कर दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;"><img alt="2Q=="></img></p>
<p style="text-align:justify;">कराची हमले के बाद ही सुरक्षा एजेंसियों ने सीमा पार मौजूद आतंकी नेटवर्क पर कड़ी कार्रवाई की योजना बनाई थी। खुफिया रिपोर्टों में यह संकेत मिला था कि अफगानिस्तान सीमा के अंदर कई ऐसे ठिकाने सक्रिय हैं, जहां से पाकिस्तान में हमलों की योजना बनाई जाती है। इसी आधार पर यह संयुक्त जमीनी और हवाई कार्रवाई की गई। बताया जा रहा है कि ऑपरेशन के दौरान कई स्थानों पर भारी विस्फोट हुए और इलाके में काफी देर तक तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। पाकिस्तान सरकार का कहना है कि देश में हाल के महीनों में आतंकी घटनाओं में बढ़ोतरी देखी गई है और इसके पीछे सीमा पार से संचालित नेटवर्क जिम्मेदार हैं। सूचना मंत्री तरार ने कहा कि पाकिस्तान अपनी नागरिक सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा और आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान लगातार क्षेत्रीय शांति और स्थिरता की कोशिश करता रहा है, लेकिन हालात उसे मजबूर कर रहे हैं कि वह कठोर कदम उठाए। पाकिस्तान और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के बीच संघर्ष कोई नया नहीं है। इसकी जड़ें 2001 के बाद शुरू हुए अफगानिस्तान युद्ध और पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा नीतियों से जुड़ी हुई हैं। समय के साथ टीटीपी ने पाकिस्तान के खिलाफ कई बड़े हमले किए हैं और उसका नेटवर्क खासकर खैबर पख्तूनख्वा और अफगान सीमा के पास सक्रिय माना जाता है। 2021 में अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता में आने के बाद से इस पूरे क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति और जटिल हो गई है। पाकिस्तान का आरोप है कि अफगान तालिबान टीटीपी को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सुरक्षित पनाहगाह उपलब्ध कराता है, जबकि अफगानिस्तान सरकार इन आरोपों को लगातार खारिज करती रही है। इसी विवाद के चलते दोनों देशों के बीच सीमा पर तनाव समय-समय पर बढ़ता रहता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 10:33:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अफगानिस्तान पर पाकिस्तानी मिसाइल हमला, 13 की मौत; दोनों देशों में बढ़ा तनाव</title>
                                    <description><![CDATA[तालिबान ने बच्चों और नागरिकों को निशाना बनाने का लगाया आरोप, पाकिस्तान बोला- 26 आतंकवादी मारे गए]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/pakistani-missile-attack-on-afghanistan-kills-13-tension-increases-between/article-55551"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/pakistan-afghanistan-conflict.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच लंबे समय से चल रहा तनाव एक बार फिर गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। मंगलवार देर रात पाकिस्तान की ओर से अफगानिस्तान के कई सीमावर्ती इलाकों में किए गए मिसाइल हमलों के बाद दोनों देशों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। अफगान तालिबान सरकार का दावा है कि इन हमलों में कम से कम 13 लोगों की मौत हुई है, जिनमें 11 बच्चे, एक महिला और एक बुजुर्ग शामिल हैं। इसके अलावा कई महिलाएं और अन्य नागरिक घायल हुए हैं। तालिबान प्रशासन का आरोप है कि हमले रिहायशी इलाकों पर किए गए, जबकि पाकिस्तान का कहना है कि उसकी कार्रवाई आतंकवादी ठिकानों के खिलाफ थी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के मुख्य प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने घटना के बाद पाकिस्तान की कार्रवाई की कड़ी आलोचना की। उनका कहना है कि पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों और मिसाइलों ने अफगानिस्तान की संप्रभुता का उल्लंघन किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुनार, खोस्त और पक्तिका प्रांतों में आम नागरिकों के घरों को निशाना बनाया गया। तालिबान ने हमले के बाद घायलों और मृतकों की तस्वीरें भी सार्वजनिक की हैं, जिनमें बच्चों के घायल होने और मारे जाने के दावे किए गए हैं। अफगान प्रशासन का कहना है कि सीमा पार इस तरह की सैन्य कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानूनों के खिलाफ है और इससे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूसरी तरफ पाकिस्तान ने तालिबान सरकार के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने कहा कि सुरक्षा एजेंसियों को विश्वसनीय खुफिया जानकारी मिली थी कि सीमावर्ती क्षेत्रों में आतंकवादी संगठन सक्रिय हैं और पाकिस्तान के खिलाफ हमलों की तैयारी कर रहे हैं। उनके मुताबिक सैन्य अभियान पूरी तरह लक्षित था और इसमें चार बड़े आतंकी ठिकानों को नष्ट किया गया। पाकिस्तान का दावा है कि इस कार्रवाई में 26 भारत समर्थित आतंकवादी मारे गए हैं। अधिकारियों के अनुसार जिन ठिकानों को निशाना बनाया गया उनमें प्रशिक्षण केंद्र, हथियारों के गोदाम और आतंकी कमांडरों के संचालन केंद्र शामिल थे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस हमले की पृष्ठभूमि में एक दिन पहले पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में हुई हिंसक घटना को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 9 जून को सीमा के पास एक चौकी पर हुए हमले में छह पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मियों की मौत हो गई थी। पाकिस्तान का आरोप है कि हमलावरों ने चौकी पर कब्जा करने की कोशिश की थी। जवाबी कार्रवाई में आठ आतंकवादियों के मारे जाने का दावा भी किया गया। इसके बाद से ही पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर थीं और सीमा क्षेत्रों में सैन्य गतिविधियां बढ़ा दी गई थीं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पाकिस्तान लंबे समय से तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान यानी टीटीपी को अपने लिए सबसे बड़ा सुरक्षा खतरा मानता रहा है। इस्लामाबाद का आरोप है कि टीटीपी के लड़ाके अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल कर पाकिस्तान में घुसपैठ और हमले करते हैं। पाकिस्तान कई बार तालिबान सरकार से इस मुद्दे पर कार्रवाई की मांग कर चुका है। हालांकि काबुल स्थित तालिबान प्रशासन लगातार इन आरोपों से इनकार करता रहा है। तालिबान का कहना है कि वह किसी भी विदेशी या क्षेत्रीय आतंकी संगठन को अपनी जमीन इस्तेमाल नहीं करने देता।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दोनों देशों के बीच तनाव पिछले कुछ महीनों से लगातार बढ़ता जा रहा है। फरवरी में पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के सीमावर्ती क्षेत्रों में एयरस्ट्राइक की थी। उस समय पाकिस्तान ने दावा किया था कि टीटीपी के कई ठिकानों को निशाना बनाया गया और बड़ी संख्या में लड़ाके मारे गए। इसके कुछ दिनों बाद अफगानिस्तान ने भी जवाबी कार्रवाई की थी। इसके बाद सीमा क्षेत्रों में कई बार गोलीबारी और सैन्य झड़पों की खबरें सामने आती रहीं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">तालिबान सरकार का दावा है कि मार्च 2026 में पाकिस्तान द्वारा किए गए एक बड़े हवाई हमले में सैकड़ों लोगों की जान चली गई थी। अफगान अधिकारियों के अनुसार काबुल में स्थित एक नशा मुक्ति केंद्र पर बमबारी के कारण भारी जनहानि हुई थी। उस समय भी दोनों देशों के बीच गंभीर विवाद पैदा हो गया था। हालांकि पाकिस्तान ने उस घटना में नागरिकों को निशाना बनाने के आरोपों को खारिज किया था और कहा था कि कार्रवाई केवल सैन्य और आतंकी ठिकानों के खिलाफ की गई थी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच मौजूदा तनाव केवल सीमा सुरक्षा तक सीमित नहीं है। इसके पीछे टीटीपी, क्षेत्रीय सुरक्षा, सीमा प्रबंधन और राजनीतिक अविश्वास जैसे कई मुद्दे जुड़े हुए हैं। 2021 में अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता में लौटने के बाद से पाकिस्तान को उम्मीद थी कि सीमा पार आतंकवादी गतिविधियों में कमी आएगी, लेकिन इसके उलट दोनों देशों के रिश्तों में लगातार तनाव बढ़ता गया। ताजा मिसाइल हमले के बाद क्षेत्रीय हालात पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है। दोनों देशों की ओर से अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं और वास्तविक स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता जताई जा रही है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 17:28:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>भारत के परमाणु हथियार बढ़े, SIPRI रिपोर्ट में बड़ा खुलासा</title>
                                    <description><![CDATA[SIPRI रिपोर्ट 2026 में दावा, भारत ने पहली बार 12 हथियार तैनात किए, वैश्विक परमाणु रेस तेज]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/indias-nuclear-weapons-increased-big-revelation-in-sipri-report/article-55368"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/india-nuclear-weapons.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">2026 की शुरुआत में वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य को लेकर सामने आई ताज़ा रिपोर्ट ने एक बार फिर परमाणु शक्ति संतुलन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">SIPRI</span></span> की नई इयरबुक में दावा किया गया है कि <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">भारत</span></span> ने पहली बार अपने परमाणु हथियारों में से 12 को ऑपरेशनल यानी मोर्चे पर तैनात किया है। यह वही हथियार हैं जिन्हें अब तक सिर्फ स्टॉक या भंडारण में रखा जाता था। रिपोर्ट के मुताबिक भारत का कुल परमाणु भंडार भी बढ़कर 180 से 190 तक पहुंच गया है, जिससे साफ संकेत मिलते हैं कि देश अब अपनी रणनीतिक क्षमता को एक नए स्तर पर ले जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह बदलाव अचानक नहीं है, बल्कि पिछले कुछ वर्षों से चल रही रणनीतिक तैयारी का हिस्सा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2025 की तुलना में 2026 में पहली बार वास्तविक तैनाती देखी गई है, जो क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों को बदल सकती है। दूसरी ओर <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">पाकिस्तान</span></span> के पास लगभग 170 परमाणु हथियार बताए गए हैं, हालांकि उनमें से कितने तैनात हैं, इस पर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है। वैश्विक स्तर पर कुल 9 देशों के पास 12,187 परमाणु हथियार मौजूद हैं, जिनमें से बड़ी संख्या अभी भी हाई अलर्ट स्थिति में रखी गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">दुनिया एक नए परमाणु प्रतिस्पर्धा के दौर में प्रवेश कर चुकी है, जहां बड़े देश अपने हथियारों को न सिर्फ बढ़ा रहे हैं बल्कि उन्हें आधुनिक भी बना रहे हैं। अमेरिका, रूस और चीन जैसी शक्तियां लगातार अपने डिलीवरी सिस्टम और मिसाइल टेक्नोलॉजी को अपग्रेड कर रही हैं। चीन का भंडार भी अब 600 से 620 हथियारों तक पहुंच चुका है, जिससे एशिया में शक्ति संतुलन और अधिक जटिल होता जा रहा है। इसी बीच भारत भी अपनी रणनीति को दो मोर्चों—पाकिस्तान और चीन—को ध्यान में रखकर आगे बढ़ा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत का रक्षा खर्च भी लगातार बढ़ता जा रहा है और रिपोर्ट के अनुसार यह 92.1 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जिससे भारत दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा सैन्य खर्च करने वाला देश बन गया है। इसके साथ ही भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा हथियार आयातक भी बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह खर्च केवल रक्षा खरीद तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें आधुनिक तकनीक, मिसाइल सिस्टम और परमाणु क्षमता के विस्तार की रणनीति भी शामिल है।</p>
<p style="text-align:justify;">रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि भारत अब मल्टीपल इंडिपेंडेन्टली टारगेटेबल रीएंट्री व्हीकल <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">MIRV technology</span></span> जैसी तकनीकों पर तेजी से काम कर रहा है। इस तकनीक के जरिए एक ही मिसाइल से कई लक्ष्यों पर हमला किया जा सकता है। साथ ही समुद्री क्षेत्र में भारत की ताकत भी बढ़ रही है, जहां परमाणु पनडुब्बियां जैसे <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">INS Arihant</span></span> और INS अरिघात देश की सेकेंड स्ट्राइक क्षमता का मजबूत आधार बन रही हैं। SIPRI का अनुमान है कि अब भारत सीमित संख्या में समुद्री प्लेटफॉर्म पर भी हथियार तैनात करने लगा है, जिससे किसी भी संभावित हमले के बाद जवाबी कार्रवाई की क्षमता बनी रहती है।</p>
<p style="text-align:justify;">मई 2025 के दौरान भारत-पाकिस्तान तनाव का भी जिक्र किया गया है, जिसे बाद में दोनों देशों ने नियंत्रित कर लिया था। इसी अवधि में साइबर और डिजिटल ऑपरेशन्स का भी उपयोग हुआ, जिसे एक नए प्रकार का सैन्य प्रयोग माना जा रहा है। इसी संदर्भ में <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Operation Sindoor</span></span> का उल्लेख भी किया गया है, जिसने आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति को सामने रखा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 11:13:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पहलगाम आतंकी हमले की जांच में बड़ा खुलासा, आतंकियों के मोबाइल कराची और लाहौर तक पहुंचे</title>
                                    <description><![CDATA[एनआईए की जांच में सामने आए नए तथ्य, मोबाइल में बैसरन घाटी की लोकेशन और स्क्रीनशॉट मिले, सप्लाई चेन के जरिए पाकिस्तान पहुंचाए गए थे फोन]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/big-revelation-in-the-investigation-of-pahalgam-terrorist-attack-terrorists/article-54751"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/pahalgam-terror-attack.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पहलगाम आतंकी हमले की जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को मामले में एक महत्वपूर्ण सुराग मिला है। जांच के दौरान मारे गए आतंकियों के पास से बरामद मोबाइल फोन की फोरेंसिक जांच में कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। एजेंसी के अनुसार आतंकियों के कब्जे से मिले दोनों मोबाइल फोन चीन की एक कंपनी की सप्लाई चेन के माध्यम से पाकिस्तान पहुंचे थे और बाद में इन्हें कराची तथा लाहौर के पतों पर डिलीवर किया गया था। जांच एजेंसी का मानना है कि यह जानकारी हमले की पूरी साजिश और आतंकियों के नेटवर्क को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">एनआईए के अनुसार पहलगाम हमले में शामिल तीन आतंकियों को पिछले वर्ष जुलाई में सुरक्षा बलों ने एक मुठभेड़ में मार गिराया था। मुठभेड़ के बाद उनके पास से दो मोबाइल फोन बरामद किए गए थे। इनमें एक रेडमी 9टी और दूसरा रेडमी नोट 12 मॉडल का फोन था। जब इन उपकरणों की डिजिटल और फोरेंसिक जांच की गई तो इनके इस्तेमाल और वितरण से जुड़े कई तथ्य सामने आए। जांच में पता चला कि दोनों मोबाइल पाकिस्तान के कराची और लाहौर क्षेत्रों तक पहुंचाए गए थे। एजेंसी ने तकनीकी माध्यमों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध सूचनाओं के आधार पर इनकी सप्लाई चेन का पता लगाया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जांच के दौरान मोबाइल फोन में मौजूद डाटा ने भी कई महत्वपूर्ण संकेत दिए। अधिकारियों के मुताबिक मोबाइल के नेविगेशन एप में बैसरन घाटी की लोकेशन पहले से सेव थी। इसके अलावा बैसरन क्षेत्र के कई स्क्रीनशॉट भी फोन में मिले, जिन्हें हमले से कुछ दिन पहले लिया गया था। इससे यह संकेत मिलता है कि हमले की तैयारी पहले से की जा रही थी और लक्ष्य स्थल की रेकी तथा डिजिटल निगरानी भी की गई थी। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि हमले की योजना किस स्तर पर बनाई गई और इसमें किन लोगों की भूमिका रही। पहलगाम की बैसरन घाटी में हुए इस हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया था। हमले में पर्यटकों को निशाना बनाया गया था और बड़ी संख्या में लोगों की जान गई थी। जांच एजेंसियों के अनुसार यह एक सुनियोजित आतंकी हमला था, जिसमें आतंकियों ने पहले से तय रणनीति के तहत कार्रवाई की थी। फोरेंसिक रिपोर्ट और डिजिटल साक्ष्यों ने अब इस बात को और मजबूत किया है कि हमले की तैयारी कई दिन पहले शुरू हो चुकी थी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इससे पहले जांच एजेंसी ने एक अन्य खुलासा भी किया था, जिसमें बताया गया था कि आतंकियों के पास से एक हाई-टेक एक्शन कैमरा भी बरामद हुआ था। जांच में यह जानकारी सामने आई कि कैमरा अंतरराष्ट्रीय वितरण नेटवर्क के जरिए चीन पहुंचा और वहां से किसी माध्यम से आतंकियों तक पहुंचा। एजेंसी का मानना है कि ऐसे उपकरणों का उपयोग आतंकी घटनाओं की रिकॉर्डिंग, प्रचार और संगठनात्मक गतिविधियों के लिए किया जाता है। यही कारण है कि इन उपकरणों की सप्लाई और उपयोग से जुड़े पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है। जांच एजेंसियों के अनुसार जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकी संगठनों द्वारा आधुनिक तकनीक और डिजिटल उपकरणों के उपयोग में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। मोबाइल फोन, जीपीएस आधारित एप्लीकेशन, एक्शन कैमरे और एन्क्रिप्टेड संचार माध्यमों का इस्तेमाल अब आतंकवादी गतिविधियों का हिस्सा बन चुका है। इससे जांच एजेंसियों के सामने नई चुनौतियां भी पैदा हो रही हैं, हालांकि डिजिटल फोरेंसिक तकनीकों की मदद से कई महत्वपूर्ण सुराग भी प्राप्त हो रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">एनआईए द्वारा दाखिल चार्जशीट में यह भी उल्लेख किया गया है कि हमले का मास्टरमाइंड पाकिस्तान में बैठा एक आतंकी संचालक था, जो लगातार हमलावरों के संपर्क में था। जांच में यह दावा किया गया है कि हमले के दौरान आतंकियों को रियल टाइम निर्देश दिए जा रहे थे और लक्ष्य क्षेत्र की जानकारी भी पहले से साझा की गई थी। एजेंसी ने हमले से जुड़े कई डिजिटल और तकनीकी साक्ष्य एकत्र किए हैं, जिनका विश्लेषण अभी भी जारी है। जांच में दो स्थानीय टूरिस्ट गाइडों की भूमिका भी सामने आई थी। एजेंसी के अनुसार दोनों ने कुछ संदिग्ध गतिविधियां देखी थीं, लेकिन समय रहते इसकी जानकारी सुरक्षा एजेंसियों तक नहीं पहुंचाई। इस संबंध में कानूनी कार्रवाई की गई और दोनों को गिरफ्तार किया गया। जांचकर्ताओं का मानना है कि यदि समय पर सूचना मिल जाती तो संभव है कि हमले को रोका जा सकता था।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि इस मामले की जांच अभी भी जारी है और कई अंतरराष्ट्रीय कड़ियों की पड़ताल की जा रही है। मोबाइल फोन, डिजिटल रिकॉर्ड, संचार नेटवर्क और वित्तीय लेनदेन से जुड़े पहलुओं का विश्लेषण किया जा रहा है। जांच का उद्देश्य केवल हमले के दोषियों तक पहुंचना नहीं, बल्कि उन नेटवर्कों को भी उजागर करना है जो सीमा पार से आतंकी गतिविधियों को समर्थन और संसाधन उपलब्ध कराते हैं। एनआईए का मानना है कि डिजिटल साक्ष्यों से मिले नए सुराग इस मामले में आगे की जांच को नई दिशा देंगे। आने वाले समय में जांच के दौरान और भी महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं, जो इस पूरे आतंकी नेटवर्क और उसकी कार्यप्रणाली को समझने में मदद करेंगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 14:56:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>बलूचिस्तान में ट्रेन के पास हुआ आत्मघाती धमाका, जाफर एक्सप्रेस हादसे में 30 की मौत, 82 लोग घायल</title>
                                    <description><![CDATA[पाकिस्तान के बलूचिस्तान में रेलवे ट्रैक के पास आत्मघाती हमला हुआ। जाफर एक्सप्रेस के कई डिब्बे पटरी से उतरे, 30 लोगों की मौत हुई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/suicide-attack-in-balochistan-30-killed-82-injured-in-jafar/article-54117"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/balochistan-pakistan-jaffar-express-suicide-attack.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">रविवार को पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में एक भयंकर आत्मघाती हमला हुआ। ये धमाका क्वेटा शहर के चमन फाटक के नजदीक रेलवे ट्रैक के पास हुआ</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें जाफर एक्सप्रेस ट्रेन शामिल थी। प्रारंभिक रिपोर्ट्स के मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस त्रासदी में कम से कम 30 लोगों की जान गई है और 82 से अधिक लोग घायल हुए हैं। धमाका इतना तेज था कि कई ट्रेन के डिब्बे पटरी से उतर गए और आसपास अफरा-तफरी मच गई।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">स्थानीय मीडिया के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">ये घटना तब हुई जब जाफर एक्सप्रेस क्वेटा कैंट की ओर बढ़ रही थी। धमाके के तुरंत बाद रेलवे ट्रैक के आस-पास आग लग गई। कुछ डिब्बे पलटे भी और कई को नुकसान हुआ। मौके पर मौजूद लोगों ने तेज आवाज के बाद चीखें सुनीं और धुएं का गुबार उठते देखा। सोशल मीडिया पर भी इस घटना के कई वीडियो सामने आए हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनमें ट्रेन के डिब्बों से आग और धुआं निकलते हुए नजर आ रहा है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">घटना के बाद पुलिस</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">फायर ब्रिगेड</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रेस्क्यू टीम और सुरक्षा बल वहां पहुंचे। घायलों को अस्पताल भेजा गया और राहत-बचाव कार्य शुरू किया गया। अधिकारियों ने बताया कि धमाके के कारण आसपास की इमारतों के शीशे तक टूट गए। सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे क्षेत्र को घेर लिया है और जांच चल रही है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जानकारी के अनुसार सभी सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है और लोगों से अपील की गई है कि वे घटना स्थल के आसपास भीड़ न लगाएं। इस हमले की कोई जिम्मेदारी अभी तक किसी संगठन ने नहीं ली है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन सुरक्षा एजेंसियां इसे आतंकी हमला मानते हुए जांच कर रही हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बताया गया है कि जाफर एक्सप्रेस पहले भी कई बार हमलों का शिकार हो चुकी है। यह ट्रेन बलूचिस्तान के संवेदनशील क्षेत्र से गुजरती है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां लंबे समय से अलगाववादी गतिविधियां और आतंकी हमले होते रहे हैं। इन क्षेत्रों में बलूच लिबरेशन आर्मी का प्रभाव है। पिछले साल भी इस ट्रेन को हाईजैक करने की घटना सामने आई थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें कई यात्रियों को बंधक बनाए जाने का दावा किया गया था।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बलूचिस्तान में अलगाववाद और हिंसा की घटनाएं लंबे समय से जारी हैं। यहां कई संगठन पाकिस्तान सरकार के खिलाफ सक्रिय हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">पिछले कुछ वर्षों में रेलवे ट्रैक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुरक्षा बलों और सरकारी ठिकानों पर लगातार हमले हुए हैं।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हाल ही में जारी ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स 2025 के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">पाकिस्तान को दुनिया का दूसरा सबसे आतंक प्रभावित देश बताया गया है। रिपोर्ट में बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा को सबसे संवेदनशील क्षेत्र माना गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां आतंकी घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी देखी गई है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 24 May 2026 13:50:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत के इस पडोसी देश में 6 रुपये सस्ता हुआ पेट्रोल, लगातार दूसरी बार घटे दाम</title>
                                    <description><![CDATA[पाकिस्तान सरकार ने पेट्रोल 6 रुपये और डीजल 6.80 रुपये प्रति लीटर सस्ता किया। लगातार दूसरी बार ईंधन कीमतों में राहत दी गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/petrol-becomes-cheaper-by-6-rupees-in-this-neighboring-country/article-54068"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/pakistan-petrol-price.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पाकिस्तान की सरकार ने फिर से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कटौती करने का ऐलान किया है। शुक्रवार रात जारी किए गए नए रेट के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">पेट्रोल की कीमत </span>6<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये प्रति लीटर और हाई-स्पीड डीजल (</span>HSD) <span lang="hi" xml:lang="hi">की कीमत </span>6.80<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये प्रति लीटर कम की गई है। अब पाकिस्तान में पेट्रोल </span>403.78<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये प्रति लीटर और डीजल </span>402.78<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। पिछले </span>15<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिनों में यह राहत की दूसरी बड़ी खबर है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि इससे पहले भी सरकार ने दोनों ईंधनों की कीमतें </span>5-5<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये घटाई थीं। इस तरह से</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लोगों को पेट्रोल पर </span>11<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये और डीजल पर लगभग </span>11.80<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये प्रति लीटर की राहत मिल चुकी है। बढ़ती महंगाई के बीच</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस फैसले को आम जनता के लिए सकारात्मक कदम माना जा रहा है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जानकारी के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">पाकिस्तान सरकार पिछले कुछ महीनों से हर शुक्रवार को ईंधन की कीमतों की समीक्षा कर रही है। फरवरी में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान-इजरायल-अमेरिका के बीच हालात के बिगड़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम तेजी से बढ़े थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसका असर पाकिस्तान समेत कई देशों पर पड़ा। मार्च की शुरुआत में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पेट्रोल और डीजल की कीमतें एक झटके में </span>55<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये प्रति लीटर तक बढ़ा दी गई थीं। इसके बाद वित्त मंत्री </span>Muhammad Aurangzeb <span lang="hi" xml:lang="hi">और पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने भी बढ़ोतरी का ऐलान किया। हालाँकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कुछ समय बाद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रधानमंत्री </span>Shehbaz Sharif <span lang="hi" xml:lang="hi">ने पेट्रोलियम लेवी को कम कर जनता को राहत दी। अब लगातार दो हफ्तों से कीमतों में गिरावट देखने को मिल रही है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमतों का सीधा असर मध्यम वर्ग और छोटे कारोबारियों पर पड़ता है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्यूंकि वहां बड़ी संख्या में लोग दोपहिया वाहन और रिक्शे का उपयोग करते हैं। वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डीजल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का प्रभाव ट्रांसपोर्ट और माल ढुलाई पर साफ-साफ दिखता है। दूसरी ओर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारत में हालात थोड़े अलग हैं। हाल के दिनों में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है। नई दिल्ली में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पेट्रोल की कीमत </span>99.51 <span lang="hi" xml:lang="hi">रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत </span>92.49 <span lang="hi" xml:lang="hi">रुपये प्रति लीटर हो गई है। तेल कंपनियों ने </span>15 <span lang="hi" xml:lang="hi">मई के बाद से तीसरी बार दाम बढ़ाए हैं। ऐसा माना जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और पश्चिम एशिया के तनाव का प्रभाव दोनों देशों में अलग-अलग तरीके से नजर आ रहा है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 May 2026 16:41:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राजौरी के जंगलों में सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच मुठभेड़ हुई शुरू, 2-3 आतंकियों के घिरे होने की आशंका</title>
                                    <description><![CDATA[जम्मू-कश्मीर के राजौरी में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ जारी है। दोरिमाल जंगल में 2-3 आतंकियों के फंसे होने की आशंका जताई गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/encounter-begins-between-security-forces-and-terrorists-in-the-forests/article-54059"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/rajouri-indian-army-jammu-&amp;-kashmir-encounter.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले से शुक्रवार दोपहर एक बड़ी खबर आई है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां दोरिमाल के जंगलों में सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच मुठभेड़ हो रही है। शुरुआती जानकारी के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इलाके में 2 से 3 आतंकियों के छिपे होने की संभावना जताई गई है। सुरक्षा एजेंसियों को संदिग्ध गतिविधियों के बारे में सूचना मिली थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके बाद सेना और अन्य सुरक्षाबलों ने इलाके में सर्च ऑपरेशन शुरू किया। खबर है कि तलाशी अभियान के दौरान जंगल में छिपे आतंकियों ने फायरिंग शुरू कर दी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे मुठभेड़ शुरू हो गई। देर शाम तक इलाके में गोलीबारी चलती रही। फिलहाल पूरे क्षेत्र को घेर लिया गया है और अतिरिक्त जवान भी तैनात किए गए हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अधिकारियों के मुताबिक</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">ये ऑपरेशन एक बेहद संवेदनशील इलाके में चल रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि जंगल और पहाड़ों की वजह से आतंकियों को छिपने में आसानी होती है। सुरक्षा बल लगातार ड्रोन और अन्य आधुनिक उपकरणों से इलाके की निगरानी कर रहे हैं। सूत्रों की मानें तो आतंकियों के एक छोटे समूह की सक्रियता की पहले से जानकारी थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसी आधार पर संयुक्त तलाशी अभियान शुरू किया गया। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अब तक किसी आतंकी के मारे जाने या किसी जवान के घायल होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। एहतियात के तौर पर स्थानीय लोगों को भी जंगल की तरफ जाने से रोका गया है। पूरे इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है और सुरक्षा एजेंसियां इस ऑपरेशन को बड़ी सतर्कता से चला रही हैं।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस साल फरवरी में </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">White Knight Corps <span lang="hi" xml:lang="hi">ने किश्तवाड़ में आतंकी नेटवर्क खत्म करने का दावा किया था। उस समय सेना ने कई आतंकियों को मार गिराने की जानकारी दी थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनमें जैश से जुड़े आतंकी सैफुल्लाह का नाम भी शामिल था। हाल के महीनों में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जम्मू-कश्मीर के कई इलाकों में सुरक्षाबलों ने आतंकवाद विरोधी अभियान तेज कर दिए हैं। पिछले सप्ताह</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सेना प्रमुख उपेंद्र द्विवेदी ने आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को कड़ा संदेश दिया था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह कहते हुए कि अगर आतंकवाद को समर्थन जारी रहा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उसके गंभीर परिणाम होंगे। इस समय राजौरी में चल रही मुठभेड़ पर पूरे इलाके की नजर बनी हुई है और सुरक्षा एजेंसियां ऑपरेशन खत्म होने तक लगातार जानकारी हासिल कर रही हैं।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 May 2026 16:20:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ऑपरेशन सिंदूर की बरसी पर पूर्व DGMO का दावा, पाकिस्तान ने खुद लगाई थी युद्ध रोकने की गुहार</title>
                                    <description><![CDATA[ऑपरेशन सिंदूर की बरसी पर पूर्व DGMO राजीव घई ने कहा कि पाकिस्तान ने कार्रवाई रोकने की गुहार लगाई थी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/special-news/on-the-anniversary-of-operation-sindoor-former-dgmo-claimed-that/article-52853"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-07t152330.898.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">‘<span lang="hi" xml:lang="hi">ऑपरेशन सिंदूर</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">की पहली बरसी पर पूर्व </span>DGMO <span lang="hi" xml:lang="hi">लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि इस सैन्य अभियान ने आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति और रणनीति दोनों को बदलकर रख दिया। उन्होंने दावा किया कि ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तान पूरी तरह दबाव में आ गया था और आखिर में उसी ने भारत से कार्रवाई रोकने की गुहार लगाई थी। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ जवाबी हमला नहीं था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि भारत की सैन्य क्षमता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समन्वय और तकनीकी ताकत का बड़ा प्रदर्शन था। बताया जा रहा है कि इस अभियान के दौरान पाकिस्तान के 11 एयरफील्ड और 9 बड़े आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया था। सेना की तरफ से दावा किया गया कि कार्रवाई इतनी सटीक थी कि भारतीय सेना के किसी बड़े सैन्य संसाधन को नुकसान नहीं पहुंचा। ऑपरेशन सिंदूर अब एक साल बाद भी सुरक्षा और रणनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पूर्व </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">DGMO <span lang="hi" xml:lang="hi">ने कहा कि इस पूरे अभियान में भारतीय सेना और वायुसेना ने मिलकर 9 स्टैंडऑफ प्रिसिजन स्ट्राइक की थीं। इनमें 7 कार्रवाई सेना और 2 एयरफोर्स की ओर से की गईं। उन्होंने खास तौर पर स्वदेशी रक्षा तकनीक का जिक्र किया और कहा कि ब्रह्मोस और आकाश जैसी मिसाइल प्रणालियों ने अहम भूमिका निभाई। साथ ही इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और निगरानी सिस्टम ने भी ऑपरेशन को सफल बनाने में मदद की। उनके मुताबिक यह पहली बार था जब जमीन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हवा और समुद्र तीनों मोर्चों पर इतनी समन्वित रणनीति देखने को मिली। उन्होंने कहा कि </span>‘<span lang="hi" xml:lang="hi">आत्मनिर्भर भारत</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">सिर्फ राजनीतिक नारा नहीं रहा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि युद्ध क्षमता का हिस्सा बन चुका है। अधिकारियों के अनुसार ऑपरेशन के दौरान खुफिया एजेंसियां</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साइबर यूनिट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सीमा सुरक्षा बल और दूसरे सुरक्षा संगठन लगातार एक-दूसरे के संपर्क में थे। इसी वजह से कार्रवाई तेज और सटीक बनी रही।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">लेफ्टिनेंट जनरल घई ने कहा कि पाकिस्तान की तरफ से उस दौरान ड्रोन</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">मिसाइल और भारी गोलाबारी की कोशिश हुई थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन भारतीय सेना ने तुरंत जवाब दिया। सूत्रों के मुताबिक जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान के कई रडार सिस्टम और सैन्य ठिकानों को भी नुकसान पहुंचा था। </span>‘<span lang="hi" xml:lang="hi">ऑपरेशन सिंदूर</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">में पाकिस्तान और </span>POK <span lang="hi" xml:lang="hi">में मौजूद लश्कर-ए-तैयबा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जैश-ए-मोहम्मद और हिज्बुल मुजाहिद्दीन के ठिकानों को निशाना बनाया गया था। दावा किया गया कि इस दौरान 100 से ज्यादा आतंकवादी मारे गए थे। पूर्व </span>DGMO <span lang="hi" xml:lang="hi">ने यह भी कहा कि 10 मई को पाकिस्तान के </span>DGMO <span lang="hi" xml:lang="hi">ने सीधे संपर्क कर संघर्ष खत्म करने की बात कही थी। उनके मुताबिक ऑपरेशन सिंदूर अब दुनिया में सैन्य और रणनीतिक योजना के एक </span>‘<span lang="hi" xml:lang="hi">गोल्ड स्टैंडर्ड</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">की तरह देखा जा रहा है। उन्होंने साफ कहा कि यह अभियान खत्म नहीं हुआ है और भारत भविष्य में भी अपनी सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए इसी तरह जवाब देता रहेगा।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 May 2026 16:25:34 +0530</pubDate>
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