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                <title>Hospital Negligence - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Hospital Negligence RSS Feed</description>
                
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                <title>रीवा के संजय गांधी अस्पताल में एक्सपायर दवा का आरोप, जांच शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[आईसीयू में भर्ती मरीज के परिजनों ने उठाए सवाल, अस्पताल अधीक्षक बोले- शिकायत गंभीर, दोषियों पर होगी कार्रवाई]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/vindhya-rewa/investigation-started-into-allegations-of-expired-medicine-in-rewas-sanjay/article-56381"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/rewa-sanjay-gandhi-hospital.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रीवा के संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय में मरीजों को एक्सपायर दवा और इंजेक्शन दिए जाने के आरोप सामने आने के बाद स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है। मामला उस समय उजागर हुआ जब अस्पताल के आईसीयू में भर्ती एक मरीज के परिजनों ने दावा किया कि उनके परिजन को उपयोग अवधि समाप्त हो चुकी दवा दी गई। शिकायत सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन ने मामले की जांच शुरू करने की बात कही है। हालांकि अस्पताल अधीक्षक का कहना है कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार ऐसी दवाओं से मरीज की जान को तत्काल कोई खतरा नहीं होता, फिर भी पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। विवेक त्रिपाठी ने अस्पताल प्रबंधन और सोशल मीडिया के माध्यम से शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि उनके पिता अस्पताल के गहन चिकित्सा कक्ष में भर्ती हैं। उनका कहना है कि 18 जून को इलाज के दौरान जो दवा और इंजेक्शन दिए गए, उनकी एक्सपायरी डेट समाप्त हो चुकी थी। परिजनों ने दवा के पैकेट और इंजेक्शन की तस्वीरें भी साझा की हैं। तस्वीरें सामने आने के बाद मरीजों और उनके परिवारों में चिंता बढ़ गई है। मामले के सार्वजनिक होते ही अस्पताल प्रशासन सक्रिय हो गया। संबंधित विभाग से जानकारी मांगी गई और दवाओं के स्टॉक की जांच शुरू की गई। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी अस्पताल में दवाओं की वैधता और गुणवत्ता की नियमित निगरानी बेहद जरूरी होती है। यदि एक्सपायर दवाओं के उपयोग की पुष्टि होती है तो यह गंभीर लापरवाही मानी जाएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">शिकायत केवल एक्सपायर दवाओं तक सीमित नहीं है। मरीजों और उनके परिजनों ने अस्पताल की व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में इलाज के लिए शुल्क लिया जाता है, लेकिन सुविधाएं अपेक्षित स्तर की नहीं हैं। कई मरीजों के परिजनों का कहना है कि उन्हें दवाइयां बाहर से खरीदनी पड़ रही हैं क्योंकि अस्पताल में जरूरी दवाओं का स्टॉक उपलब्ध नहीं है। बताया जा रहा है कि पैनटॉप इंजेक्शन सहित कई आवश्यक दवाइयों की कमी बनी हुई है। दिल के मरीजों को दी जाने वाली कुछ दवाएं भी अस्पताल में उपलब्ध नहीं हैं, जिसके चलते मरीजों के परिजनों को मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं। इससे आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है और अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल भी खड़े हो रहे हैं। अस्पताल की एक अन्य बड़ी समस्या वार्ड ब्वाय और सहायक स्टाफ की कमी को लेकर सामने आई है। परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन थिएटर से लेकर वार्ड तक मरीजों को ले जाने की जिम्मेदारी भी कई बार परिवार के सदस्यों को ही निभानी पड़ती है। हाल ही में कार्डियोलॉजी विभाग में भर्ती मरीजों के परिजन खुद स्ट्रेचर धकेलते दिखाई दिए। यही स्थिति न्यूरो और अन्य विभागों में भी देखने को मिली।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">हैरानी की बात यह है कि अस्पताल में 51 वार्ड ब्वाय तैनात होने की जानकारी दी जाती है, लेकिन मरीजों और परिजनों का कहना है कि जरूरत के समय वे दिखाई नहीं देते। कई लोगों का आरोप है कि वार्ड ब्वाय का उपयोग अन्य कार्यों में किया जा रहा है, जबकि मरीजों की मूलभूत जरूरतों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा। करीब 150 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किए गए इस सुपर स्पेशलिटी अस्पताल से लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की उम्मीद थी। अस्पताल की स्थापना का उद्देश्य रीवा और आसपास के जिलों के मरीजों को बड़े शहरों में जाने से राहत देना था। लेकिन हाल के आरोपों ने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि एक्सपायर दवा देने की शिकायत की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और यदि किसी स्तर पर लापरवाही हुई है तो उसके लिए कौन जिम्मेदार है। इस बीच मरीजों और उनके परिजनों की नजरें जांच के नतीजों पर टिकी हुई हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>विंध्य/रीवा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 14:08:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मऊगंज सिविल अस्पताल की बदहाल व्यवस्था उजागर, डॉक्टर गायब, कर्मचारी करते मिले इलाज</title>
                                    <description><![CDATA[वायरल वीडियो के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप, आउटसोर्स कर्मचारियों और निजी सहायकों द्वारा मरीजों को इंजेक्शन लगाने व दवाइयां देने के आरोप, अस्पताल की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/poor-arrangement-of-mauganj-civil-hospital-exposed-doctors-missing-staff/article-55718"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/mauganj-civil-hospital.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले के सिविल अस्पताल से सामने आई तस्वीरों ने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अस्पताल का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें डॉक्टरों की अनुपस्थिति के बीच आउटसोर्स कर्मचारियों और निजी सहायकों द्वारा मरीजों का इलाज किए जाने के आरोप सामने आए हैं। वीडियो सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है और पूरे मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बताया जा रहा है कि अस्पताल में इन दिनों मरीजों की संख्या लगातार बढ़ी हुई है। सुबह से लेकर दोपहर तक ओपीडी और वार्डों में मरीजों की लंबी कतारें लगी रहती हैं। लेकिन इसी बीच कई डॉक्टरों के ड्यूटी पर मौजूद नहीं रहने की शिकायतें भी सामने आई हैं। मरीजों और उनके परिजनों का आरोप है कि इलाज के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है, जबकि कई बार डॉक्टर अस्पताल में उपलब्ध ही नहीं होते। ऐसे हालात में अस्पताल की व्यवस्था अन्य कर्मचारियों के भरोसे चलती दिखाई देती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वायरल वीडियो में कुछ ऐसे दृश्य दिखाई दे रहे हैं, जिन्होंने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। वीडियो में कथित तौर पर डॉक्टर के निजी सहायक मरीजों को देखते हुए नजर आ रहे हैं। वहीं मल्टी स्किल्ड ग्रुप-डी के आउटसोर्स कर्मचारी मरीजों को दवाइयां देते और इंजेक्शन लगाते दिखाई दे रहे हैं। यह मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि चिकित्सा से जुड़े ऐसे कार्य केवल प्रशिक्षित और अधिकृत स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा किए जाने चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अस्पताल की स्थिति को लेकर एक और चिंताजनक पहलू सामने आया है। वार्डों में मरीजों की संख्या क्षमता से अधिक होने के कारण कई बेड पर दो-दो मरीजों को भर्ती किए जाने की बात कही जा रही है। भीषण गर्मी के बीच मरीजों को पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल पाने की शिकायत भी सामने आई है। कुछ परिजनों का कहना है कि स्ट्रेचर और अन्य बुनियादी संसाधनों की कमी के कारण उन्हें मरीजों को खुद उठाकर एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाना पड़ता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वीडियो में एक बुजुर्ग मरीज को कुर्सी पर बैठाकर इंजेक्शन लगाया जाता दिखाई देता है। आरोप है कि इंजेक्शन लगाने वाला व्यक्ति प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ का सदस्य नहीं था। वीडियो में कई बार सुई लगाने की कोशिश होती दिखती है, जिससे मरीज को असुविधा होती नजर आती है। इस दृश्य ने सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं और तेज कर दी हैं। कई लोगों ने इसे मरीजों की सुरक्षा के साथ गंभीर लापरवाही बताया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मरीजों के परिजनों का कहना है कि अस्पताल में पहले भी डॉक्टरों और स्टाफ की कमी की शिकायतें सामने आती रही हैं। उनका आरोप है कि समय पर विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध नहीं होने से मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कई लोगों का कहना है कि यदि प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ अपनी जिम्मेदारी पूरी तरह निभा रहा होता, तो गैर-चिकित्सकीय कर्मचारियों को इस तरह की भूमिका निभाने की जरूरत नहीं पड़ती। मरीजों को दवा देना, इंजेक्शन लगाना और उपचार से जुड़े अन्य कार्य अत्यंत संवेदनशील होते हैं। इन कार्यों के लिए उचित प्रशिक्षण और चिकित्सकीय योग्यता आवश्यक होती है। यदि इन प्रक्रियाओं में किसी प्रकार की चूक होती है तो मरीज के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है। यही वजह है कि अस्पतालों में जिम्मेदारियों का स्पष्ट निर्धारण किया जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने भी मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही अस्पताल में डॉक्टरों की नियमित उपस्थिति और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस पूरे घटनाक्रम ने सरकारी अस्पतालों में संसाधनों, मानवबल और जवाबदेही की स्थिति पर एक बार फिर बहस छेड़ दी है। ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए सरकारी अस्पताल ही इलाज का प्रमुख माध्यम होते हैं। ऐसे में यदि वहां भी आवश्यक चिकित्सा सेवाएं समय पर उपलब्ध नहीं हों तो मरीजों की मुश्किलें और बढ़ जाती हैं। वायरल वीडियो की जांच और तथ्यों की पुष्टि का इंतजार किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से मामले की समीक्षा किए जाने की बात कही जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 14:00:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title> रीवा के GMH अस्पताल के SNCU वार्ड में लगी आग, नवजातों को सुरक्षित निकाला गया</title>
                                    <description><![CDATA[शॉर्ट सर्किट से मची अफरा-तफरी, मेंटेनेंस बंद होने पर अस्पताल प्रबंधन पर उठे सवाल]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/vindhya-rewa/fire-broke-out-in-sncu-ward-of-gmh-hospital-rewa/article-54482"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/rewa-gmh-hospital-fire.jpg" alt=""></a><br /><p dir="ltr">रीवा के गांधी मेमोरियल हॉस्पिटल में गुरुवार देर रात उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई यानी SNCU वार्ड में अचानक आग लग गई। घटना रात के समय हुई, जब वार्ड में कई नवजात भर्ती थे। शुरुआती जानकारी के मुताबिक आग शॉर्ट सर्किट की वजह से लगी। जैसे ही धुआं उठना शुरू हुआ, वार्ड में मौजूद स्टाफ और परिजनों के बीच हड़कंप मच गया। हालांकि ड्यूटी पर मौजूद नर्सिंग स्टाफ और कर्मचारियों ने तेजी दिखाते हुए तत्काल अग्निशामक यंत्र का इस्तेमाल किया और कुछ ही देर में आग पर काबू पा लिया। समय रहते कार्रवाई होने से बड़ा हादसा टल गया।</p>
<p dir="ltr">आग लगने के बाद पूरे वार्ड में अफरा-तफरी जैसा माहौल बन गया था। कई नवजात इन्क्यूबेटर में भर्ती थे। स्टाफ ने बिना समय गंवाए बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालना शुरू किया। आनन-फानन में सभी नवजातों को दूसरे वार्ड में शिफ्ट किया गया। इस दौरान अस्पताल परिसर में मौजूद परिजन काफी घबराए हुए नजर आए। कुछ लोग अपने बच्चों को गोद में लेकर वार्ड के बाहर खड़े रहे, तो कई लोग रोते-बिलखते अस्पताल स्टाफ से जानकारी लेते दिखाई दिए।</p>
<p dir="ltr">बताया जा रहा है कि आग लगने के दौरान कुछ मिनटों तक पूरे वार्ड में धुआं फैल गया था। इससे वहां मौजूद लोगों में दहशत बढ़ गई। हालांकि अस्पताल के कर्मचारियों ने स्थिति को संभालने की कोशिश की और परिजनों को शांत कराया। मौके पर मौजूद कुछ लोगों का कहना था कि अगर आग थोड़ी और फैल जाती तो हालात बेहद गंभीर हो सकते थे। SNCU वार्ड में भर्ती बच्चों की हालत पहले से नाजुक रहती है, ऐसे में किसी भी तरह की तकनीकी गड़बड़ी बड़ा खतरा बन सकती थी।</p>
<p dir="ltr">घटना के बाद अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। सूत्रों के मुताबिक अस्पताल में बिजली व्यवस्था और उपकरणों के रखरखाव का काम लंबे समय से प्रभावित है। बताया जा रहा है कि मेडिकल कॉलेज प्रबंधन की ओर से भुगतान नहीं किए जाने के कारण संबंधित कंपनी ने मेंटेनेंस का काम बंद कर रखा है। इसी वजह से अस्पताल में आए दिन तकनीकी खामियां सामने आ रही हैं। कर्मचारियों का कहना है कि कई बार इस संबंध में अधिकारियों को जानकारी दी गई थी, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हुआ।</p>
<p dir="ltr">स्थानीय लोगों और मरीजों के परिजनों ने भी अस्पताल की व्यवस्थाओं पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर इस तरह की लापरवाही बेहद गंभीर है। खासकर SNCU जैसे वार्ड में, जहां समय से पहले जन्मे या गंभीर हालत वाले नवजातों का इलाज होता है, वहां सुरक्षा व्यवस्था और बिजली सिस्टम पूरी तरह दुरुस्त होना चाहिए। परिजनों का कहना था कि अगर स्टाफ समय पर सक्रिय नहीं होता तो बड़ा नुकसान हो सकता था।</p>
<p dir="ltr">यह पहली बार नहीं है जब GMH अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े हुए हों। इससे पहले भी अस्पताल में बिजली कटौती, उपकरण खराब होने और रखरखाव में लापरवाही की शिकायतें सामने आती रही हैं। कई बार मरीजों और उनके परिजनों ने सोशल मीडिया के जरिए भी समस्याएं उठाई थीं। बावजूद इसके व्यवस्थाओं में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। गुरुवार रात की घटना ने एक बार फिर अस्पताल प्रशासन की तैयारियों और सुरक्षा इंतजामों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।</p>
<p dir="ltr">आग ज्यादा बड़ी नहीं थी, लेकिन जिस जगह यह घटना हुई वह बेहद संवेदनशील वार्ड था। ऐसे में मामूली चूक भी गंभीर हादसे में बदल सकती थी। आग लगने की सूचना मिलते ही अस्पताल के वरिष्ठ अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। वार्ड की बिजली सप्लाई कुछ समय के लिए बंद कर दी गई थी। बाद में तकनीकी टीम ने पूरे सिस्टम की जांच शुरू की।</p>
<p dir="ltr">प्रारंभिक जांच में शॉर्ट सर्किट को आग लगने की वजह माना जा रहा है। हालांकि प्रशासन ने पूरे मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। यह भी देखा जाएगा कि मेंटेनेंस कार्य बंद होने के कारण कहीं सुरक्षा मानकों की अनदेखी तो नहीं की गई। अस्पताल प्रबंधन की तरफ से फिलहाल कोई विस्तृत बयान सामने नहीं आया है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि स्थिति अब पूरी तरह नियंत्रण में है और सभी नवजात सुरक्षित हैं। घटना के बाद अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों के बीच डर का माहौल बना हुआ है। कई लोग रातभर अस्पताल परिसर में मौजूद रहे। वहीं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने कहा है कि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>विंध्य/रीवा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 May 2026 14:00:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सागर BMC में प्रसूता की मौत के बाद बवाल, परिजनों ने स्टाफ पर लगाया गंभीर आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[सागर BMC प्रसूता मौत मामले में परिजनों ने लापरवाही और गलत इंजेक्शन का आरोप लगाया, जांच की मांग तेज हुई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/after-the-death-of-the-mother-in-sagar-bmc-the/article-51651"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/sagar-bmc-case-pregnant-woman-death.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">मध्य प्रदेश के सागर स्थित बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (BMC) में सोमवार सुबह एक 30 वर्षीय प्रसूता की मौत के बाद गंभीर विवाद खड़ा हो गया। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और स्टाफ पर इलाज में लापरवाही तथा गलत इंजेक्शन लगाने का आरोप लगाया है। घटना के बाद अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा हुआ, जिसे पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शांत कराया। परिवार का आरोप है कि महिला दो घंटे तक दर्द से तड़पती रही, लेकिन समय पर इलाज नहीं मिला। वहीं, अस्पताल प्रबंधन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इस पूरे मामले ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">परिजनों के अनुसार, मृतका संध्या अहिरवार (30) को प्रसव पीड़ा के चलते 17 अप्रैल को बंडा अस्पताल से रेफर कर सागर BMC लाया गया था। यहां भर्ती होने के बाद उसका इलाज चल रहा था। रविवार रात अचानक उसकी हालत बिगड़ने पर उसे लेबर रूम में शिफ्ट किया गया, जहां सोमवार सुबह उसकी मौत हो गई।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">परिवार के सदस्यों का कहना है कि महिला करीब दो घंटे तक दर्द से तड़पती रही, लेकिन किसी डॉक्टर ने समय पर ध्यान नहीं दिया। उनका आरोप है कि ड्यूटी पर मौजूद स्टाफ ने एक इंजेक्शन लगाया, जिसके बाद स्थिति और बिगड़ गई।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">इलाज पर सवाल</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">परिजनों ने आरोप लगाया कि इंजेक्शन लगाने के बाद महिला की हालत तेजी से खराब हुई और कुछ ही समय में उसकी मौत हो गई। उनका कहना है कि यदि समय पर सही इलाज मिलता, तो जान बचाई जा सकती थी।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">घटना के बाद परिजन आक्रोशित हो गए और अस्पताल परिसर में प्रदर्शन शुरू कर दिया। मौके पर मौजूद पुलिस ने समझाइश देकर स्थिति को नियंत्रित किया।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">चेहरा देखने से रोका</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि मौत के बाद अस्पताल प्रबंधन ने उन्हें मृतका का चेहरा तक नहीं देखने दिया। इस बात ने विवाद को और बढ़ा दिया।परिवार ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यह केवल एक परिवार का मामला नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">सागर BMC क्षेत्र का प्रमुख सरकारी मेडिकल संस्थान है, जहां आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। इससे पहले भी यहां इलाज में लापरवाही को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। हालांकि, कई मामलों में जांच के बाद स्पष्ट कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक नहीं हो पाई।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">आधिकारिक पक्ष</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">अधिकारियों के अनुसार, मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस और स्वास्थ्य विभाग को सूचित किया गया है। सूत्रों के मुताबिक, प्रशासन इस घटना की जांच कराने की तैयारी में है। हालांकि, अस्पताल प्रबंधन की ओर से अभी तक कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया गया है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">प्रभाव और विश्लेषण</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">यह घटना सरकारी अस्पतालों में संसाधनों की कमी, स्टाफ की जवाबदेही और आपातकालीन सेवाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठाती है। ऐसी घटनाएं मरीजों और उनके परिजनों का भरोसा कमजोर करती हैं, खासकर मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर।</span></p>
<p><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि प्रसूता से जुड़े मामलों में तत्काल और विशेषज्ञ देखभाल बेहद जरूरी होती है, जिसमें किसी भी तरह की देरी जानलेवा साबित हो सकती है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 13:03:05 +0530</pubDate>
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