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                <title>rupee - दैनिक जागरण</title>
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                <title>डॉलर के मुकाबले रुपये में मजबूती, 58 पैसे की तेज बढ़त</title>
                                    <description><![CDATA[कच्चे तेल में गिरावट और शेयर बाजार की मजबूती से रुपये ने शुरुआती कारोबार में 94.60 का स्तर छुआ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/rupee-strengthened-by-58-paise-against-dollar/article-55956"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/indian-rupee-news.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">15 जून 2026, सोमवार की सुबह विदेशी मुद्रा बाजार में भारतीय रुपये ने मजबूत शुरुआत की और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 58 पैसे की तेजी दर्ज की। शुरुआती कारोबार में रुपया 94.70 पर खुला और थोड़ी ही देर में बढ़त दिखाते हुए 94.60 के स्तर पर पहुंच गया। यह मजबूती पिछले कारोबारी सत्र के मुकाबले उल्लेखनीय मानी जा रही है और इसे वैश्विक बाजारों में बने सकारात्मक माहौल का परिणाम बताया जा रहा है। मुद्रा कारोबारियों के अनुसार, रुपये की इस तेजी के पीछे कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कारण एक साथ काम कर रहे हैं। सबसे बड़ा कारण कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज गिरावट मानी जा रही है, जो अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते के बाद देखने को मिली। लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष के खत्म होने की खबर ने वैश्विक बाजारों में स्थिरता लाई है, जिससे निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता बढ़ी है और उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं को फायदा मिला है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">घरेलू स्तर पर भी बाजार में सकारात्मक माहौल देखने को मिला। भारतीय शेयर बाजार में सेंसेक्स और निफ्टी ने मजबूत शुरुआत की, जिसका सीधा असर रुपये पर पड़ा। विदेशी निवेशकों की ओर से खरीदारी बढ़ने और फंड फ्लो में सुधार होने से डॉलर की मांग में थोड़ी कमी आई, जिससे भारतीय मुद्रा को सहारा मिला। बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर में खरीदारी के चलते बाजार में भरोसा बढ़ा और इसका असर मुद्रा बाजार पर भी दिखाई दिया। फॉरेक्स डीलरों का कहना है कि डॉलर इंडेक्स में कमजोरी भी रुपये की मजबूती का एक प्रमुख कारण है। वैश्विक स्तर पर अमेरिकी डॉलर पर दबाव देखा जा रहा है, क्योंकि भू-राजनीतिक तनाव में कमी आई है और सुरक्षित निवेश की मांग घट गई है। ऐसे में निवेशक जोखिम वाले बाजारों की ओर लौट रहे हैं, जिससे एशियाई मुद्राओं को मजबूती मिल रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भारत के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल की कीमतों में नरमी से आयात बिल कम होता है और चालू खाते के घाटे पर दबाव घटता है। इससे रुपये पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है और उसकी स्थिरता बढ़ती है। यही कारण है कि तेल बाजार में गिरावट के साथ रुपये में तेजी देखी जा रही है। आने वाले दिनों में रुपये की दिशा वैश्विक घटनाक्रमों पर निर्भर करेगी। यदि कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रण में रहती हैं और विदेशी निवेश का प्रवाह जारी रहता है, तो रुपये में और मजबूती देखी जा सकती है। हालांकि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति और वैश्विक आर्थिक संकेतक भी रुपये की चाल को प्रभावित कर सकते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मुद्रा बाजार में कारोबारियों का कहना है कि फिलहाल निवेशकों की भावना सकारात्मक बनी हुई है। वैश्विक शांति संकेतों के कारण जोखिम का माहौल कम हुआ है और उभरते बाजारों में पूंजी प्रवाह बढ़ा है। इससे रुपये को मजबूती मिल रही है और अल्पकालिक रूप से यह रुझान जारी रह सकता है। यह भी चेतावनी दे रहे हैं कि मुद्रा बाजार में अस्थिरता हमेशा बनी रहती है। किसी भी अप्रत्याशित अंतरराष्ट्रीय घटना या आर्थिक डेटा के कारण रुपये में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। इसलिए निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। 15 जून 2026 का दिन भारतीय रुपये के लिए सकारात्मक शुरुआत लेकर आया है। वैश्विक बाजारों में सुधार, कच्चे तेल की गिरती कीमतें और घरेलू शेयर बाजारों की मजबूती ने मिलकर रुपये को समर्थन दिया है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 11:41:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>ईरान तनाव के बीच भारतीय शेयर बाजार में तेजी, सेंसेक्स 400 अंक उछला</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने के बावजूद निवेशकों का भरोसा कायम, आईटी और एफएमसीजी शेयरों में खरीदारी से बाजार मजबूत; रुपया कमजोर हुआ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/sensex-rises-400-points-in-indian-stock-market-amid-iran/article-55497"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/indian-stock-market.jpg" alt=""></a><br /><p>भारतीय शेयर बाजार ने 10 जून 2026 को वैश्विक तनावों के बीच भी मजबूती दिखाई। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण दुनिया भर के वित्तीय बाजारों में सतर्कता का माहौल देखने को मिला, लेकिन भारतीय निवेशकों ने फिलहाल घबराहट नहीं दिखाई। बुधवार सुबह कारोबार शुरू होते ही सेंसेक्स करीब 400 अंकों की बढ़त के साथ 74,300 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी भी लगभग 100 अंक चढ़कर 23,350 के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। बाजार में सबसे ज्यादा खरीदारी आईटी और एफएमसीजी सेक्टर के शेयरों में देखने को मिली, जिससे प्रमुख सूचकांकों को सहारा मिला।</p>
<p>वैश्विक स्तर पर निवेशकों की नजर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव पर बनी हुई है। ताजा घटनाक्रम में अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे अमेरिकी हेलीकॉप्टर गिराए जाने की घटना के जवाब में उठाया गया कदम बताया। इस घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है। आमतौर पर ऐसे हालात में निवेशक जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाते हैं, लेकिन भारतीय बाजार में इसका असर सीमित दिखाई दिया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू निवेशकों की मजबूत भागीदारी और भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण ने बाजार को संभाले रखा।</p>
<p>तेल बाजार पर भी निवेशकों की नजर बनी हुई है। मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने के बावजूद कच्चे तेल की कीमतों में फिलहाल बड़ा उछाल नहीं देखा गया। वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड लगभग 91.40 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता रहा। तेल की कीमतों में स्थिरता भारतीय बाजार के लिए राहत की बात मानी जा रही है क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। यदि तेल की कीमतों में तेज उछाल आता तो इसका असर महंगाई और कॉर्पोरेट मुनाफे दोनों पर पड़ सकता था। फिलहाल तेल बाजार की स्थिरता ने निवेशकों को कुछ राहत दी है।</p>
<p>हालांकि एशियाई बाजारों का रुख भारतीय बाजार से अलग दिखाई दिया। दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक लगभग 3.77 प्रतिशत टूट गया, जबकि जापान का निक्केई और हांगकांग का हैंगसेंग भी लाल निशान में कारोबार करते नजर आए। एशियाई निवेशकों में भू-राजनीतिक तनाव को लेकर चिंता साफ दिखाई दी। इसके मुकाबले भारतीय बाजार में खरीदारी का माहौल यह संकेत देता है कि घरेलू निवेशक फिलहाल वैश्विक जोखिमों से ज्यादा स्थानीय आर्थिक संकेतकों पर ध्यान दे रहे हैं।</p>
<p>अमेरिकी शेयर बाजारों का प्रदर्शन भी मिश्रित रहा। डाउ जोंस में मामूली बढ़त दर्ज की गई, लेकिन नैस्डैक और एसएंडपी 500 सूचकांक दबाव में रहे। तकनीकी शेयरों में बिकवाली और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण अमेरिकी बाजारों में निवेशकों का रुख सतर्क बना हुआ है। इसके बावजूद भारतीय बाजार में सकारात्मक शुरुआत ने यह संकेत दिया कि निवेशकों का भरोसा अभी बरकरार है।</p>
<p>विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। 9 जून को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से 4,566 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी की। पिछले सात और तीस दिनों के आंकड़े भी विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली की ओर इशारा कर रहे हैं। इसके विपरीत घरेलू संस्थागत निवेशकों ने खरीदारी जारी रखी है। घरेलू निवेशकों की मजबूत हिस्सेदारी ही बाजार को गिरावट से बचाने में अहम भूमिका निभा रही है। जानकारों का कहना है कि यदि घरेलू निवेशकों का समर्थन इसी तरह बना रहा तो विदेशी बिकवाली का असर सीमित रह सकता है।</p>
<p>मुद्रा बाजार में हालांकि दबाव देखने को मिला। बुधवार सुबह शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 15 पैसे कमजोर होकर 95.56 के स्तर पर पहुंच गया। वैश्विक तनाव और विदेशी निवेशकों की निकासी का असर भारतीय मुद्रा पर दिखाई दिया। कमजोर रुपया आयात लागत बढ़ा सकता है, लेकिन निर्यातकों के लिए यह कुछ राहत भी लेकर आता है।</p>
<p>बाजार को मजबूती मिलने की एक वजह मंगलवार का सकारात्मक कारोबार भी माना जा रहा है। 9 जून को सेंसेक्स लगभग 395 अंक चढ़कर 73,918.76 पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 23,242.10 के स्तर पर पहुंच गया था। उस तेजी का असर बुधवार के कारोबार में भी दिखाई दिया। निवेशकों की नजर अमेरिका-ईरान घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर बनी रहेगी। यदि वैश्विक तनाव और नहीं बढ़ता है तो भारतीय बाजार अपनी मजबूती बनाए रख सकता है, हालांकि आने वाले दिनों में उतार-चढ़ाव से इनकार नहीं किया जा सकता।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 13:25:18 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>ईरान-इजरायल तनाव से शेयर बाजार में हड़कंप, सेंसेक्स 900 अंक टूटा</title>
                                    <description><![CDATA[मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव का असर वैश्विक बाजारों पर दिखा, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और विदेशी निवेशकों की बिकवाली से भारतीय बाजार दबाव]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/6a265aa8a5d71/article-55252"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/sensex-today-(2).jpg" alt=""></a><br /><p>भारतीय शेयर बाजार में सोमवार, 8 जून 2026 को कारोबार की शुरुआत भारी दबाव के साथ हुई। मध्य पूर्व में ईरान और इजरायल के बीच एक बार फिर बढ़े सैन्य तनाव ने दुनिया भर के निवेशकों की चिंता बढ़ा दी, जिसका सीधा असर भारतीय बाजार पर भी दिखाई दिया। सुबह बाजार खुलते ही सेंसेक्स करीब 900 अंक तक टूट गया, जबकि निफ्टी में भी लगभग एक प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। शुरुआती कारोबार में निफ्टी 23,113 के स्तर तक फिसल गया। हालांकि बाद में कुछ चुनिंदा शेयरों में खरीदारी लौटने से बाजार ने अपने नुकसान का एक हिस्सा कम किया, लेकिन पूरे दिन निवेशकों के बीच सतर्कता का माहौल बना रहा।</p>
<p>ईरान और इजरायल के बीच हालिया सैन्य कार्रवाई ने वैश्विक निवेशकों को जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाने के लिए मजबूर किया है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों और उसके जवाब में ईरान की मिसाइल कार्रवाई ने पहले से संवेदनशील वैश्विक माहौल को और तनावपूर्ण बना दिया। ऐसे हालात में निवेशक आमतौर पर सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं और शेयर बाजारों से पैसा निकालने लगते हैं। यही वजह रही कि भारतीय बाजार में भी बिकवाली का दबाव बढ़ गया।</p>
<p>सेंसेक्स में शामिल कई बड़ी कंपनियों के शेयरों में गिरावट देखी गई। टीसीएस, महिंद्रा एंड महिंद्रा, इंडिगो, बजाज फाइनेंस, एलएंडटी और इटरनल जैसे शेयर शुरुआती कारोबार में प्रमुख नुकसान झेलने वालों में शामिल रहे। आईटी, ऑटो, वित्तीय सेवाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर से जुड़े शेयरों पर दबाव अधिक दिखाई दिया। निवेशकों को डर है कि यदि मध्य पूर्व का संकट लंबा खिंचता है तो वैश्विक अर्थव्यवस्था और व्यापार पर इसका असर पड़ सकता है।</p>
<p>सेक्टोरल स्तर पर भी अधिकांश सूचकांक लाल निशान में कारोबार करते दिखाई दिए। रियल्टी सेक्टर में सबसे अधिक कमजोरी देखने को मिली और यह करीब दो प्रतिशत तक नीचे फिसल गया। इसके अलावा मेटल, ऑटो, आईटी और एफएमसीजी सेक्टरों में भी गिरावट दर्ज की गई। हालांकि फार्मा, हेल्थकेयर और पीएसयू बैंकिंग शेयरों में कुछ मजबूती देखने को मिली। बाजार जानकारों के अनुसार अनिश्चित परिस्थितियों में निवेशक अक्सर डिफेंसिव सेक्टरों की ओर रुख करते हैं, इसलिए स्वास्थ्य और दवा कंपनियों के शेयर अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन करते नजर आए।</p>
<p>इस बीच कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। मध्य पूर्व दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक क्षेत्रों में से एक माना जाता है और वहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव तेल आपूर्ति को प्रभावित कर सकता है। इसी आशंका के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमत में तेज उछाल दर्ज किया गया और यह 96 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया। वहीं वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 93 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चला गया। भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी महंगाई और व्यापार घाटे को प्रभावित कर सकती है, इसलिए बाजार ने इस खबर पर भी नकारात्मक प्रतिक्रिया दी।</p>
<p>भारतीय बाजार पर विदेशी निवेशकों की बिकवाली का असर भी साफ दिखाई दिया। हाल के कारोबारी सत्रों में विदेशी संस्थागत निवेशकों ने लगातार भारतीय शेयरों में बिकवाली की है। 5 जून को भी विदेशी निवेशकों ने हजारों करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी ने कुछ हद तक बाजार को सहारा देने का काम किया, लेकिन विदेशी पूंजी की निकासी का दबाव अभी भी बना हुआ है। जब तक वैश्विक स्तर पर स्थिति सामान्य नहीं होती, विदेशी निवेशकों का रुख सतर्क बना रह सकता है।</p>
<p>एशियाई बाजारों में भी कमजोरी का माहौल देखने को मिला। दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक चार प्रतिशत से अधिक टूट गया, जबकि जापान का निक्केई भी भारी गिरावट के साथ कारोबार करता दिखाई दिया। हांगकांग के हैंगसेंग सूचकांक में भी गिरावट दर्ज की गई। इससे पहले अमेरिकी बाजारों में भी सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन बड़ी गिरावट देखी गई थी। नैस्डैक, डॉव जोंस और एसएंडपी 500 जैसे प्रमुख सूचकांकों में कमजोरी ने वैश्विक निवेशकों की चिंता को और बढ़ा दिया है।</p>
<p>विदेशी मुद्रा बाजार में भी तनाव का असर दिखाई दिया। सोमवार सुबह रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 17 पैसे कमजोर होकर 95.35 के स्तर पर पहुंच गया। जानकारों के अनुसार कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और विदेशी निवेशकों की बिकवाली भारतीय मुद्रा पर दबाव बना रही हैं। आने वाले दिनों में यदि भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ता है तो रुपये में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। निवेशकों की नजर मध्य पूर्व से आने वाली खबरों और वैश्विक बाजारों के रुख पर बनी हुई है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है और निवेशकों को जल्दबाजी में बड़े फैसले लेने से बचना चाहिए। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 12:58:59 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>रुपया पहली बार 96 के पार पहुंचा, शेयर मार्केट में फिर आई गिरावट, सेंसेक्स 161 अंक टूटा</title>
                                    <description><![CDATA[रुपये में रिकॉर्ड गिरावट और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच शेयर बाजार कमजोर बंद हुआ। सेंसेक्स 161 अंक टूटा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/rupee-crossed-96-for-the-first-time-stock-market-fell/article-53438"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/rupee-crosses-96-sensex-declines.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;"><strong>Stock Market Update:</strong> <span lang="hi" xml:lang="hi">घरेलू शेयर बाजार में शुक्रवार को फिर से कमी देखी गई। दिन की शुरुआत थोड़ा सकारात्मक रही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन कारोबार के आखिरी घंटे में परिस्थितियां पूरी तरह बदल गईं। रुपये में लगातार गिरावट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और एशियाई बाजारों से मिले नकारात्मक संकेतों का असर भारतीय बाजार पर साफ नजर आया। बीएसई सेंसेक्स 160.73 अंक गिरकर 75,237.99 पर बंद हुआ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि एनएसई निफ्टी 46.10 अंक गिरकर 23,643.50 पर पहुंच गया। इस गिरावट के बीच सबसे ज्यादा चर्चा रुपये की रही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो पहली बार डॉलर के मुकाबले 96 के पार जा पहुंचा।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कारोबार के दौरान रुपया लगभग 50 पैसे गिरकर 96.14 प्रति डॉलर तक पहुंच गया</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो अब तक का सबसे न्यूनतम स्तर माना जा रहा है। विदेशी निवेशकों की बिक्री और डॉलर की मजबूती के चलते रुपये पर लगातार दबाव बढ़ता जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारत जैसे आयात पर निर्भर देश के लिए चिंता का विषय हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और इसका असर सीधे रुपये और बाजार दोनों पर पड़ता है। सुबह बैंकिंग और आईटी शेयरों में थोड़ी खरीदारी दिखी थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन बाद में निवेशकों ने मुनाफा स्क्रिप्ट करना शुरू कर दिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे बाजार की शुरुआती बढ़त स्थायी नहीं रह पाई।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">यह भी कहा जा रहा है कि वैश्विक बाजारों में भी हालात ज्यादा मजबूत नहीं थे। एशियाई बाजारों में गिरावट ने भारतीय निवेशकों के मनोबल पर असर डाला। इसी बीच</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">विदेशी संस्थागत निवेशक सतर्कता बरत रहे हैं। बाजार के जानकार मानते हैं कि अगर रुपये में गिरावट और कच्चे तेल की कीमतें ऊँची रहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो आने वाले दिनों में बाजार पर और दबाव पड़ सकता है। फिलहाल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निवेशकों की नजर अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और वैश्विक संकेतों पर टिकी हुई है। छोटे निवेशकों में भी थोड़ा घबराहट देखी गई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि बार-बार के उतार-चढ़ाव से बाजार का भरोसा कमजोर होता नजर आ रहा है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 15 May 2026 16:21:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सेंसेक्स-निफ्टी में चौथे दिन आई बड़ी गिरावट, निवेशकों के 11 लाख करोड़ डूबे</title>
                                    <description><![CDATA[शेयर बाजार में लगातार चौथे दिन गिरावट से निवेशकों के 11 लाख करोड़ रुपये डूबे। जानिए सेंसेक्स-निफ्टी टूटने की बड़ी वजहें।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/big-fall-in-sensex-nifty-for-the-fourth-day-investors-lost/article-53208"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-12t164202.544.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भारतीय शेयर मार्केट पर लगातार चौथे दिन भारी दबाव देखने को मिला। मंगलवार को सेंसेक्स लगभग 1100 अंक टूटकर 74,894 के स्तर तक पहुंच गया। वहीं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">निफ्टी 50 भी 23,500 से नीचे गिर गया। पिछले दो दिनों में सेंसेक्स में लगभग 2400 अंक और निफ्टी में करीब 600 अंक की गिरावट हो चुकी है। इस तेज गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। शुरुआती आंकड़ों के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सिर्फ चार ट्रेडिंग सेशंस में निवेशकों की पूंजी करीब 11 लाख करोड़ रुपये घट गई। सुबह से बैंकिंग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आईटी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मेटल और ऑटो शेयरों में बिकवाली का जोर रहा। दलाल स्ट्रीट पर माहौल कुछ दबाव वाला नजर आया और छोटे निवेशकों में घबराहट साफ झलक रही थी।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">माना जा रहा है कि बाजार की कमजोरी के पीछे कई कारण हैं। सबसे ज्यादा चर्चा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस अपील की हो रही है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें उन्होंने लोगों से ईंधन बचाने और सोना खरीदने में सतर्क रहने की बात कही थी। मार्केट ने इसे खपत में संभावित कमी के संकेत के रूप में लिया। इसके चलते ज्वेलरी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">होटल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एविएशन और लग्ज़री सेक्टर के शेयरों पर दबाव बढ़ गया। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकार ने इस पर कोई सीधा आर्थिक संकेत नहीं दिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन निवेशकों के बीच अनिश्चितता बढ़ी है। इसी बीच अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने ग्लोबल मार्केट का मूड भी खराब कर दिया। तेल सप्लाई को लेकर आशंकाएं बनी हुई हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो कच्चे तेल की कीमतों पर सीधे दिख रही हैं। ब्रेंट क्रूड लगातार 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो भारत जैसे आयातित देश के लिए चिंता का विषय है। जानकारों का कहना है कि अगर कच्चा तेल लंबे समय तक महंगा रहा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो महंगाई और चालू खाते के घाटे पर दबाव बढ़ सकता है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दूसरी ओर</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय रुपया भी कमजोर होता जा रहा है। मंगलवार को यह डॉलर के मुकाबले 95.63 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। साल की शुरुआत से अब तक इसमें 6 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई है। कमजोर रुपये के चलते विदेशी निवेशकों का भरोसा कम हो गया है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और मई में अब तक करीब 19,500 करोड़ रुपये की बिकवाली हो चुकी है। सूत्रों के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पिछले जुलाई से अब तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से करीब 4.5 लाख करोड़ रुपये निकाले हैं। इसका सीधा असर बाजार की धारणा पर पड़ रहा है। वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अमेरिकी डॉलर की मजबूती और वहां के 10 साल के बॉन्ड यील्ड में तेजी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उभरते बाजारों के लिए समस्याएँ पैदा कर रही हैं। अमेरिकी बॉंड यील्ड 4.42 फीसदी तक पहुंच गई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके कारण निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। इसका असर भारत समेत एशियाई बाजारों पर भी दिखाई दे रहा है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि फिलहाल बाजार में अस्थिरता बनी रहेगी। जब तक अमेरिका-ईरान का तनाव कम नहीं होता</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">कच्चे तेल में राहत नहीं मिलती और विदेशी बिकवाली धीमी नहीं पड़ती</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब तक शेयर बाजार में दबाव बना रह सकता है। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कुछ जानकार इसे बड़ी गिरावट नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि करेक्शन मानते हैं। उनका मत है कि लंबी अवधि के निवेशकों को घबराने की बजाय सावधानी से आगे बढ़ना चाहिए। फिलहाल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बाजार की नजर ग्लोबल संकेतों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रुपये की स्थिति और विदेशी निवेशकों के रुख पर टिकी हुई है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 May 2026 16:46:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शुरुआती तेजी के बाद बाजार फिसला, सेंसेक्स-निफ्टी लाल निशान में, निवेशकों की बढ़ी चिंता</title>
                                    <description><![CDATA[शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स-निफ्टी लाल निशान में। वैश्विक संकेतों और तेल कीमतों के असर से बाजार में उतार-चढ़ाव जारी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/after-the-initial-rise-the-market-slipped-sensex-nifty-in-red/article-51658"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/stock-market-today-india.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">वैश्विक संकेतों के बीच घरेलू शेयर बाजार में सोमवार को शुरुआती मजबूती ज्यादा देर टिक नहीं पाई और बाजार गिरावट के साथ लाल निशान में आ गया। सुबह करीब 9:44 बजे बीएसई सेंसेक्स 33 अंक टूटकर 78,460 के स्तर पर कारोबार करता दिखा, जबकि एनएसई निफ्टी 37 अंकों की गिरावट के साथ 24,315 के आसपास आ गया। इससे पहले शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 236 अंकों की तेजी के साथ 78,730 तक पहुंच गया था और निफ्टी भी 24,420 के स्तर तक गया था। बाजार में इस उतार-चढ़ाव ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है, खासकर तब जब वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता बनी हुई है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">दिन की शुरुआत में बैंकिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर शेयरों में खरीदारी देखने को मिली, जिससे बाजार में तेजी आई। आईसीआईसीआई बैंक, ट्रेंट, अदानी एंटरप्राइजेज और एलएंडटी जैसे शेयरों ने शुरुआती बढ़त में योगदान दिया।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">हालांकि, जल्द ही मुनाफावसूली और कमजोर वैश्विक संकेतों के कारण बाजार में गिरावट आ गई। जियो फाइनेंशियल, बजाज फाइनेंस, बजाज फिनसर्व, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और बजाज ऑटो जैसे शेयरों में दबाव देखने को मिला।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में अपेक्षाकृत मजबूती बनी रही। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स करीब 0.5% ऊपर रहा, जबकि स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.2% की बढ़त दर्ज की गई। सेक्टोरल स्तर पर पूंजीगत वस्तुएं, मीडिया, PSU बैंक और बिजली सेक्टर में हल्की तेजी देखने को मिली।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">वैश्विक संकेतों का असर</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">बाजार पर दबाव का प्रमुख कारण पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव रहा। रिपोर्ट्स के अनुसार, होर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर अनिश्चितता ने वैश्विक सप्लाई चेन पर असर डाला है। विशेषज्ञों का मानना है कि तेल की कीमतों में उछाल से महंगाई बढ़ने का जोखिम बढ़ता है, जिसका सीधा असर इक्विटी बाजारों पर पड़ता है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">रुपया और फॉरेक्स बाजार</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">सोमवार को भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले मजबूत हुआ। शुरुआती कारोबार में यह 13 पैसे की बढ़त के साथ 92.78 पर पहुंच गया। इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज में रुपया 92.73 पर खुला और 92.70 तक मजबूत हुआ।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">विश्लेषकों के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में हालिया नरमी और रिजर्व बैंक के कदमों से रुपये को समर्थन मिला है। हालांकि, विदेशी निवेशकों की सतर्कता और वैश्विक अनिश्चितता के चलते बड़ी तेजी की संभावना सीमित मानी जा रही है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">विशेषज्ञों की राय</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">बाजार विश्लेषकों के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी तनाव और संभावित भू-राजनीतिक घटनाक्रम बाजार की दिशा तय करेंगे। एक निवेश रणनीतिकार ने कहा कि संघर्ष-विराम की समयसीमा नजदीक आने के साथ बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है। सूत्रों के मुताबिक, निवेशक फिलहाल जोखिम से बचने की रणनीति अपना रहे हैं और बड़े फैसले लेने से पहले वैश्विक संकेतों का इंतजार कर रहे हैं।</span></p>
<p><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">आने वाले दिनों में बाजार की दिशा मुख्य रूप से वैश्विक घटनाओं, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर निर्भर करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि अल्पावधि में बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। निवेशकों को सतर्क रहने और सेक्टर-आधारित रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 13:31:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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