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                <title>oil prices - दैनिक जागरण</title>
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                <title>पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल फिर महंगे, नई कीमतें 11 जुलाई से लागू</title>
                                    <description><![CDATA[सरकार ने पेट्रोल पर 13.18 रुपये और हाई-स्पीड डीजल पर 13.80 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की। नई दरों के बाद पेट्रोल 310.71 और डीजल 323.30 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर हो गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/petrol-and-diesel-again-expensive-in-pakistan-new-prices-implemented/article-58480"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/pakistan-fuel-price.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">पाकिस्तान में आम लोगों को एक बार फिर महंगाई का झटका लगा है। सरकार ने पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल (एचएसडी) की कीमतों में बढ़ोतरी का ऐलान किया है, जिसके बाद 11 जुलाई से नई दरें लागू हो गई हैं। सरकारी अधिसूचना के अनुसार पेट्रोल की कीमत में 13.18 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर और हाई-स्पीड डीजल की कीमत में 13.80 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की गई है। इस बढ़ोतरी के बाद देश में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 310.71 पाकिस्तानी रुपये और हाई-स्पीड डीजल की कीमत 323.30 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर हो गई है। लगातार बढ़ती ईंधन कीमतों का असर आम लोगों के साथ-साथ परिवहन, कृषि, उद्योग और अन्य क्षेत्रों पर भी पड़ने की आशंका जताई जा रही है। पाकिस्तान पहले से ही महंगाई और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में ईंधन की कीमतों में नई बढ़ोतरी से रोजमर्रा की वस्तुओं और सेवाओं की लागत बढ़ने की संभावना भी बढ़ गई है। आर्थिक जानकारों का कहना है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बदलाव का सीधा असर माल ढुलाई, सार्वजनिक परिवहन और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर पड़ता है, जिससे महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालिया बढ़ोतरी के बावजूद पेट्रोल और डीजल की कीमतें अभी भी इस वर्ष के उच्चतम स्तर से नीचे बनी हुई हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 3 अप्रैल को हाई-स्पीड डीजल की कीमत 520.35 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई थी, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर माना जाता है। वहीं पेट्रोल की कीमत भी इसी अवधि में 458.41 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई थी। ईंधन की कीमतों में तेजी का सिलसिला फरवरी के आखिर से शुरू हुआ था। बताया जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक परिस्थितियों का इसका सीधा असर पड़ा। इसके बाद पाकिस्तान में ईंधन की कीमतों में लगातार बदलाव देखने को मिला। सरकार समय-समय पर अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति और आर्थिक आवश्यकताओं को देखते हुए ईंधन की नई कीमतें तय कर रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था काफी हद तक आयातित तेल पर निर्भर है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का असर घरेलू ईंधन दरों पर भी दिखाई देता है। इसके अलावा मुद्रा विनिमय दर में उतार-चढ़ाव भी ईंधन की लागत को प्रभावित करता है। यही वजह है कि पिछले कुछ महीनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कई बार संशोधन किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार की ओर से ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के साथ हुए समझौतों और कर ढांचे में बदलाव को भी एक प्रमुख कारण माना जा रहा है। सरकार ने 1 जुलाई से क्लाइमेट सपोर्ट लेवी को बढ़ाकर 5 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर कर दिया है। हालांकि इसके साथ पेट्रोलियम लेवी में कुछ समायोजन भी किया गया है। वर्तमान व्यवस्था के अनुसार हाई-स्पीड डीजल पर लगभग 80 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर पेट्रोलियम लेवी वसूली जा रही है, जबकि पेट्रोल पर 70 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर पेट्रोलियम लेवी के साथ 5 रुपये प्रति लीटर क्लाइमेट सपोर्ट लेवी अलग से लागू है। इसके अलावा कस्टम ड्यूटी और अन्य शुल्क भी ईंधन की अंतिम कीमत में शामिल हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार हाई-स्पीड डीजल पर कुल कर और शुल्क करीब 101 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर तक पहुंच जाता है, जबकि पेट्रोल पर यह आंकड़ा लगभग 95 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर है। इनमें कस्टम ड्यूटी, पेट्रोलियम लेवी, क्लाइमेट सपोर्ट लेवी और अन्य नियामकीय शुल्क शामिल हैं। इसके अतिरिक्त केरोसिन और लाइट डीजल ऑयल पर भी अलग-अलग दरों से पेट्रोलियम लेवी वसूली जा रही है। आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकार के लिए राजस्व बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं की शर्तों का पालन करने के बीच संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। दूसरी ओर आम उपभोक्ताओं को लगातार बढ़ती ईंधन कीमतों के कारण अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 13:27:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>ईरान तनाव के बीच भारतीय शेयर बाजार में तेजी, सेंसेक्स 400 अंक उछला</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने के बावजूद निवेशकों का भरोसा कायम, आईटी और एफएमसीजी शेयरों में खरीदारी से बाजार मजबूत; रुपया कमजोर हुआ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/sensex-rises-400-points-in-indian-stock-market-amid-iran/article-55497"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/indian-stock-market.jpg" alt=""></a><br /><p>भारतीय शेयर बाजार ने 10 जून 2026 को वैश्विक तनावों के बीच भी मजबूती दिखाई। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण दुनिया भर के वित्तीय बाजारों में सतर्कता का माहौल देखने को मिला, लेकिन भारतीय निवेशकों ने फिलहाल घबराहट नहीं दिखाई। बुधवार सुबह कारोबार शुरू होते ही सेंसेक्स करीब 400 अंकों की बढ़त के साथ 74,300 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी भी लगभग 100 अंक चढ़कर 23,350 के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। बाजार में सबसे ज्यादा खरीदारी आईटी और एफएमसीजी सेक्टर के शेयरों में देखने को मिली, जिससे प्रमुख सूचकांकों को सहारा मिला।</p>
<p>वैश्विक स्तर पर निवेशकों की नजर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव पर बनी हुई है। ताजा घटनाक्रम में अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे अमेरिकी हेलीकॉप्टर गिराए जाने की घटना के जवाब में उठाया गया कदम बताया। इस घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है। आमतौर पर ऐसे हालात में निवेशक जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाते हैं, लेकिन भारतीय बाजार में इसका असर सीमित दिखाई दिया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू निवेशकों की मजबूत भागीदारी और भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण ने बाजार को संभाले रखा।</p>
<p>तेल बाजार पर भी निवेशकों की नजर बनी हुई है। मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने के बावजूद कच्चे तेल की कीमतों में फिलहाल बड़ा उछाल नहीं देखा गया। वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड लगभग 91.40 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता रहा। तेल की कीमतों में स्थिरता भारतीय बाजार के लिए राहत की बात मानी जा रही है क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। यदि तेल की कीमतों में तेज उछाल आता तो इसका असर महंगाई और कॉर्पोरेट मुनाफे दोनों पर पड़ सकता था। फिलहाल तेल बाजार की स्थिरता ने निवेशकों को कुछ राहत दी है।</p>
<p>हालांकि एशियाई बाजारों का रुख भारतीय बाजार से अलग दिखाई दिया। दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक लगभग 3.77 प्रतिशत टूट गया, जबकि जापान का निक्केई और हांगकांग का हैंगसेंग भी लाल निशान में कारोबार करते नजर आए। एशियाई निवेशकों में भू-राजनीतिक तनाव को लेकर चिंता साफ दिखाई दी। इसके मुकाबले भारतीय बाजार में खरीदारी का माहौल यह संकेत देता है कि घरेलू निवेशक फिलहाल वैश्विक जोखिमों से ज्यादा स्थानीय आर्थिक संकेतकों पर ध्यान दे रहे हैं।</p>
<p>अमेरिकी शेयर बाजारों का प्रदर्शन भी मिश्रित रहा। डाउ जोंस में मामूली बढ़त दर्ज की गई, लेकिन नैस्डैक और एसएंडपी 500 सूचकांक दबाव में रहे। तकनीकी शेयरों में बिकवाली और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण अमेरिकी बाजारों में निवेशकों का रुख सतर्क बना हुआ है। इसके बावजूद भारतीय बाजार में सकारात्मक शुरुआत ने यह संकेत दिया कि निवेशकों का भरोसा अभी बरकरार है।</p>
<p>विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। 9 जून को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से 4,566 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी की। पिछले सात और तीस दिनों के आंकड़े भी विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली की ओर इशारा कर रहे हैं। इसके विपरीत घरेलू संस्थागत निवेशकों ने खरीदारी जारी रखी है। घरेलू निवेशकों की मजबूत हिस्सेदारी ही बाजार को गिरावट से बचाने में अहम भूमिका निभा रही है। जानकारों का कहना है कि यदि घरेलू निवेशकों का समर्थन इसी तरह बना रहा तो विदेशी बिकवाली का असर सीमित रह सकता है।</p>
<p>मुद्रा बाजार में हालांकि दबाव देखने को मिला। बुधवार सुबह शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 15 पैसे कमजोर होकर 95.56 के स्तर पर पहुंच गया। वैश्विक तनाव और विदेशी निवेशकों की निकासी का असर भारतीय मुद्रा पर दिखाई दिया। कमजोर रुपया आयात लागत बढ़ा सकता है, लेकिन निर्यातकों के लिए यह कुछ राहत भी लेकर आता है।</p>
<p>बाजार को मजबूती मिलने की एक वजह मंगलवार का सकारात्मक कारोबार भी माना जा रहा है। 9 जून को सेंसेक्स लगभग 395 अंक चढ़कर 73,918.76 पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 23,242.10 के स्तर पर पहुंच गया था। उस तेजी का असर बुधवार के कारोबार में भी दिखाई दिया। निवेशकों की नजर अमेरिका-ईरान घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर बनी रहेगी। यदि वैश्विक तनाव और नहीं बढ़ता है तो भारतीय बाजार अपनी मजबूती बनाए रख सकता है, हालांकि आने वाले दिनों में उतार-चढ़ाव से इनकार नहीं किया जा सकता।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 13:25:18 +0530</pubDate>
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                <title>होर्मुज स्ट्रेट के पास अमेरिकी अपाचे हेलिकॉप्टर क्रैश, पायलट सुरक्षित; ईरान-इजराइल तनाव के बीच बढ़ी चिंता</title>
                                    <description><![CDATA[समुद्री सुरक्षा मिशन के दौरान हुआ हादसा, अमेरिकी सेना ने शुरू की जांच; मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच घटना ने खींचा दुनिया का ध्यान]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/american-apache-helicopter-crashes-near-the-strait-of-hormuz-pilot/article-55453"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/us-helicopter-crash.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">मध्य पूर्व में लगातार बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अमेरिका का एक अपाचे हेलिकॉप्टर होर्मुज स्ट्रेट के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया। घटना सोमवार की बताई जा रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने न्यूयॉर्क में पत्रकारों से बातचीत के दौरान हेलिकॉप्टर क्रैश होने की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि हेलिकॉप्टर में मौजूद दोनों पायलट सुरक्षित हैं और उन्हें किसी तरह की गंभीर चोट नहीं आई है। हालांकि दुर्घटना के पीछे की वजह अभी साफ नहीं हो पाई है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक हेलिकॉप्टर समुद्री सुरक्षा अभियान में शामिल था और नियमित ऑपरेशन के दौरान हादसे का शिकार हुआ।</p>
<p class="isSelectedEnd">घटना ऐसे समय में हुई है जब होर्मुज स्ट्रेट और आसपास के समुद्री इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था बेहद संवेदनशील बनी हुई है। अमेरिका इस क्षेत्र में अपने सैन्य संसाधनों की तैनाती बढ़ा चुका है। अपाचे हेलिकॉप्टरों के अलावा MQ-9 रीपर ड्रोन, F/A-18 और F-35 जैसे आधुनिक लड़ाकू विमान भी लगातार निगरानी और सुरक्षा मिशन में लगे हुए हैं। बताया जा रहा है कि अपाचे हेलिकॉप्टरों का इस्तेमाल खासतौर पर छोटी हथियारबंद नौकाओं और ड्रोन खतरों को रोकने के लिए किया जाता है। ऐसे में इस हेलिकॉप्टर का दुर्घटनाग्रस्त होना सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय बन गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने घटना की जांच शुरू कर दी है। फिलहाल यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि हेलिकॉप्टर तकनीकी खराबी के कारण गिरा या फिर किसी बाहरी हमले का शिकार हुआ। हालांकि अभी तक किसी हमले की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। रक्षा अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी। घटना के बाद क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य इकाइयों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस बीच ईरान और इजराइल के बीच फिर से बढ़े तनाव ने पूरे क्षेत्र को अस्थिर बना दिया है। करीब दो महीने पहले हुए युद्धविराम के बाद हालात कुछ सामान्य होते दिखाई दे रहे थे, लेकिन पिछले 24 घंटों में घटनाक्रम तेजी से बदला है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान ने इजराइल की ओर करीब 30 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। इसके जवाब में इजराइली सेना ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों, एयर डिफेंस सिस्टम और पेट्रोकेमिकल प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया। दोनों देशों के बीच बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है।</p>
<p class="isSelectedEnd">तनाव बढ़ने के बाद भारत ने भी अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है। ईरान में मौजूद भारतीय नागरिकों से सतर्क रहने और आवश्यक होने पर जल्द देश छोड़ने की सलाह दी गई है। भारतीय दूतावास ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने को कहा है। क्षेत्र में हालात तेजी से बदल रहे हैं और सुरक्षा स्थिति को लेकर लगातार निगरानी रखी जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd">उधर यमन के हूती विद्रोहियों ने भी हालात को और जटिल बना दिया है। हूती समूह ने रेड सी में इजराइल से जुड़े जहाजों की नाकाबंदी का ऐलान किया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि इजराइल से जुड़े किसी भी जहाज को निशाना बनाया जा सकता है। इस घोषणा के बाद वैश्विक समुद्री व्यापार को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। कई अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियां पहले ही अपने रूट्स की समीक्षा कर रही हैं। यदि स्थिति और बिगड़ती है तो तेल और अन्य जरूरी वस्तुओं की सप्लाई प्रभावित हो सकती है। तेल बाजार पर भी इस तनाव का सीधा असर दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तीन प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ब्रेंट क्रूड और डब्ल्यूटीआई दोनों के दाम ऊंचे स्तर पर पहुंच गए हैं।  यदि होर्मुज स्ट्रेट में किसी तरह की बाधा उत्पन्न होती है तो वैश्विक ऊर्जा बाजार पर बड़ा असर पड़ सकता है। दुनिया के बड़े हिस्से का तेल व्यापार इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">इसी दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच मतभेदों की खबरें भी चर्चा में हैं। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ट्रम्प ने नेतन्याहू से ईरान के खिलाफ बड़े स्तर पर जवाबी कार्रवाई से बचने को कहा है। हालांकि दोनों देशों की ओर से इस पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ट्रम्प ने इतना जरूर कहा कि भविष्य में ईरान के साथ जो भी समझौता होगा, उसमें सभी पक्षों को सहयोग करना होगा। अमेरिकी हेलिकॉप्टर हादसे और ईरान-इजराइल तनाव ने पूरे मध्य पूर्व को एक बार फिर वैश्विक सुर्खियों में ला दिया है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 17:41:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>न्यूयॉर्क मेयर ममदानी ने ईरान युद्ध का विरोध किया, बोले- आम लोग कीमत चुका रहे</title>
                                    <description><![CDATA[सोशल मीडिया पोस्ट में युद्ध खत्म करने की मांग, कहा- बिना मंजूरी शुरू हुए संघर्ष ने हजारों परिवारों को प्रभावित किया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/new-york-mayor-mamdani-opposed-the-iran-war-and-said/article-54508"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/iran-war-news.jpg" alt=""></a><br /><p dir="ltr">न्यूयॉर्क सिटी के मेयर जोहरान ममदानी ने ईरान युद्ध को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने इस पूरे संघर्ष का खुलकर विरोध करते हुए कहा कि यह युद्ध अब खत्म होना चाहिए, क्योंकि इसकी सबसे ज्यादा कीमत आम लोग चुका रहे हैं। ममदानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक लंबी पोस्ट करते हुए कहा कि पिछले तीन महीनों में जिस तरह हालात बिगड़े हैं, उसने हजारों परिवारों को प्रभावित किया है। उन्होंने यह भी कहा कि इस युद्ध के लिए किसी आम नागरिक ने वोट नहीं किया था, लेकिन सबसे ज्यादा असर उन्हीं लोगों पर पड़ा जिनकी इसमें कोई सीधी भूमिका नहीं थी।</p>
<p dir="ltr">ममदानी ने अपनी पोस्ट में लिखा कि युद्ध के दौरान हजारों नागरिकों की जान जा चुकी है। उन्होंने दावा किया कि 13 अमेरिकी सैनिक भी इस संघर्ष में मारे गए हैं और वे अब कभी अपने परिवारों के पास वापस नहीं लौट पाएंगे। उन्होंने कहा कि युद्ध की असली मार हमेशा आम परिवारों पर पड़ती है, चाहे वह किसी भी देश के हों। उनके मुताबिक संघर्ष सिर्फ सीमा क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका असर दुनियाभर की अर्थव्यवस्था और लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर दिखाई देने लगता है।</p>
<p dir="ltr">मेयर ने कहा कि अमेरिका में भी इसका सीधा असर देखने को मिल रहा है। पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है और खाने-पीने की चीजें महंगी हो गई हैं। इससे मिडिल क्लास और वर्किंग क्लास परिवारों का बजट बिगड़ रहा है। उन्होंने कहा कि लोग पहले से महंगाई और आर्थिक दबाव झेल रहे थे, ऐसे में युद्ध ने हालात और मुश्किल बना दिए हैं। ममदानी के मुताबिक विदेश नीति के फैसलों का बोझ आखिरकार आम टैक्स देने वाले लोगों पर ही आता है।</p>
<p dir="ltr">उन्होंने आरोप लगाया कि यह संघर्ष अमेरिकी संसद यानी कांग्रेस की मंजूरी के बिना शुरू किया गया। ममदानी ने कहा कि विदेश में जाने वाली हर जान और अमेरिका के भीतर आम परिवारों पर पड़ने वाला हर आर्थिक बोझ एक लापरवाह फैसले की कीमत है। उनके इस बयान के बाद अमेरिकी राजनीति में भी नई बहस शुरू हो गई है। कई लोग उनके बयान का समर्थन कर रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे से जोड़कर आलोचना भी कर रहे हैं।</p>
<p dir="ltr">इस बीच ईरान और अमेरिका के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। पिछले 24 घंटों में कई बड़े घटनाक्रम सामने आए हैं, जिन्होंने हालात को और गंभीर बना दिया है। अमेरिका ने ओमान को चेतावनी दी है कि अगर उसने होर्मुज स्ट्रेट में ईरान की नई टोल वसूली व्यवस्था का समर्थन किया तो संबंधित देशों, कंपनियों और लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। माना जा रहा है कि यह चेतावनी तेल व्यापार और समुद्री मार्गों को लेकर बढ़ती चिंता के कारण दी गई है।</p>
<p dir="ltr">उधर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की ईरान नीति पर भी सवाल उठने लगे हैं। डेमोक्रेटिक सीनेटर क्रिस मर्फी ने कहा कि ट्रम्प प्रशासन लगातार गलत फैसले ले रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ओमान को दी गई धमकी यह दिखाती है कि ईरान युद्ध धीरे-धीरे नियंत्रण से बाहर जा रहा है। अमेरिकी विपक्ष का कहना है कि हालात संभालने के बजाय और ज्यादा तनाव पैदा किया जा रहा है।</p>
<p dir="ltr">ईरान की तरफ से भी लगातार तीखे बयान सामने आ रहे हैं। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला मुजतबा खामेनेई ने अमेरिका और इजराइल पर आरोप लगाया कि दोनों देश सैन्य मोर्चे पर नाकाम रहने के बाद अब ईरान को अंदर से कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विदेशी ताकतें ईरान के भीतर अस्थिरता पैदा करना चाहती हैं। खामेनेई के बयान के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।</p>
<p dir="ltr">दूसरी ओर अमेरिका ने ईरान की नई पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। अमेरिका का आरोप है कि ईरान होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों से टोल वसूलने की तैयारी कर रहा है और इसके जरिए क्षेत्रीय दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक माना जाता है और यहां किसी भी तरह का तनाव वैश्विक बाजार को प्रभावित कर सकता है।</p>
<p dir="ltr">इसी बीच ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड यानी IRGC ने दावा किया है कि उसने अमेरिकी एयरबेस पर मिसाइल हमला किया। ईरान के मुताबिक यह हमला बंदर अब्बास एयरपोर्ट के पास हुए अमेरिकी हमले के जवाब में किया गया। हालांकि अमेरिका की तरफ से इस दावे पर अभी आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन इन घटनाओं ने साफ कर दिया है कि दोनों देशों के बीच तनाव कम होने के बजाय लगातार बढ़ता जा रहा है।</p>
<p dir="ltr">दुनियाभर में अब इस युद्ध को लेकर चिंता बढ़ रही है। कई अंतरराष्ट्रीय संगठन और नेता लगातार शांति की अपील कर रहे हैं। न्यूयॉर्क मेयर जोहरान ममदानी का बयान भी ऐसे समय आया है जब आम लोग युद्ध के असर को सीधे महसूस कर रहे हैं। आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में जाएंगे, इस पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 May 2026 16:12:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>डॉलर के मुकाबले रुपया रिकॉर्ड 96.18 पर फिसला, क्रूड 110 डॉलर पार, शेयर बाजार में भारी दबाव</title>
                                    <description><![CDATA[डॉलर के मुकाबले रुपया रिकॉर्ड 96.18 पर पहुंचा, क्रूड 110 डॉलर पार। सेंसेक्स-निफ्टी दबाव में, FIIs की भारी बिकवाली जारी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/rupee-slips-to-record-9618-against-dollar-crude-crosses-110/article-53683"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/rupee-weakness-share-market-today-crude-oil-rates-update.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सोमवार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">18 मई को मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ग्लोबल मार्केट में अनिश्चितता के चलते भारतीय रुपये में भारी गिरावट आई। डॉलर के मुकाबले रु 96.18 तक पहुंच गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो अब तक का सबसे कमजोर स्तर माना जा रहा है। शुरुआती कारोबार में ही रुपये ने करीब 20 पैसे की गिरावट के साथ शुरुआत की और बाद में लगातार दबाव में रहा। वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कच्चे तेल की कीमतें भी तेजी से बढ़ी हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्रूड ऑयल 2 प्रतिशत से ज्यादा चढ़कर 110 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया। बाजार के जानकारों का कहना है कि मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव और सप्लाई की चिंता ने तेल की कीमतों को और बढ़ा दिया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे वैश्विक स्तर पर असर साफ दिख रहा है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इसी बीच</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय शेयर बाजार पर भी दबाव बना रहा। सेंसेक्स सुबह के सत्र में एक समय 1000 अंक से ज्यादा गिरकर 74,180 तक चला गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे निवेशकों में घबराहट बढ़ गई। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फिर कुछ रिकवरी देखने को मिली और अंत में सेंसेक्स करीब 250 अंक की गिरावट के साथ 75,000 के आसपास कारोबार करता नजर आया। निफ्टी भी दबाव में रहा और लगभग 90 अंक गिरकर 23,550 के पास आ गया। बाजार में उठापटक के बीच विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने चिंताएँ बढ़ा दी हैं। पिछले 30 दिनों में </span>FII <span lang="hi" xml:lang="hi">ने करीब 55 हजार करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि घरेलू संस्थागत निवेशक (</span>DII) <span lang="hi" xml:lang="hi">थोड़ी बहुत खरीदारी करते नजर आए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन वे दबाव को पूरा संभाल नहीं पाए।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">टेक्निकल एक्सपर्ट्स का कहना है कि बाजार अभी बेहद संवेदनशील स्थिति में है। सेंसेक्स फिलहाल 75,200 से 75,300 के बीच संघर्ष कर रहा है और अगर ऊपर की ओर ब्रेकआउट नहीं होता है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो दबाव बना रह सकता है। नीचे की ओर 74,500 से 74,200 का जोन मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है। निफ्टी के लिए 24,000 और 24,250 महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि नीचे 23,250 और 23,000 पर सपोर्ट देखा जा रहा है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस समय में कोई बड़ा ब्रेकआउट आने तक ट्रेडिंग में सावधानी बरतनी चाहिए और स्टॉप-लॉस का पालन करना बेहतर रणनीति होगी।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">उधर</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">ग्लोबल मार्केट से भी कमजोर संकेत मिले हैं। अमेरिकी बाजार शुक्रवार को गिरावट के साथ बंद हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां डाउ जोन्स</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नैस्डैक और </span>S&amp;P <span lang="hi" xml:lang="hi">500 सभी लाल निशान में रहे। एशियाई बाजारों में भी मिला-जुला रुख देखने को मिला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कहीं हल्की तेजी तो कहीं गिरावट नजर आई। क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल के पीछे मिडिल ईस्ट का तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ता विवाद भी एक बड़ा कारण माना जा रहा है। अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान के बाद भी बाजार में अस्थिरता बढ़ी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे निवेशक सतर्क हो गए हैं। डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने मिलकर बाजार पर दबाव बढ़ा दिया है। आने वाले दिनों में बाजार की दिशा पूरी तरह से ग्लोबल संकेतों और कच्चे तेल की गतिविधियों पर निर्भर रहने की संभावना है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 May 2026 14:39:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>क्या दोबारा लग सकता है लॉकडाउन? PM मोदी की अपील के बाद तेल मंत्री ने कही बड़ी बात</title>
                                    <description><![CDATA[PM मोदी की ईंधन बचाने की अपील के बाद लॉकडाउन की चर्चाओं पर तेल मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने स्थिति साफ की। जानिए पूरा मामला।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/can-lockdown-be-imposed-again-oil-minister-said-a-big/article-53214"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-12t171421.069.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पश्चिम एशिया में तनाव और युद्ध की स्थिति को देखते हुए</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारत में अचानक लॉकडाउन की चर्चा काफी बढ़ गई थी। सोशल मीडिया पर तरह-तरह के दावे किए जा रहे थे कि केंद्र सरकार जल्द बड़ा फैसला ले सकती है। इसको लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वह अपील सामने आई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें उन्होंने लोगों से ईंधन बचाने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विदेश यात्रा टालने और जरूरत पड़ने पर वर्क फ्रॉम होम की सलाह दी थी। इसी बीच</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मंगलवार को केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने स्पष्ट कर दिया कि देश में लॉकडाउन लगाने का कोई इरादा नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य लोगों को डराना नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उन्हें आने वाले वैश्विक आर्थिक दबावों के लिए तैयार करना है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दिल्ली में आयोजित </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">CII <span lang="hi" xml:lang="hi">वार्षिक बिजनेस समिट 2026 के दौरान हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि पश्चिम एशिया में हालात बदल रहे हैं और इसका असर दुनिया भर के तेल बाजार पर पड़ रहा है। अधिकारियों का कहना है कि भारत ने पहले से ही तैयारी शुरू कर दी है ताकि कोई भी ईंधन संकट पैदा न हो। मंत्री ने बताया कि </span>LPG <span lang="hi" xml:lang="hi">का उत्पादन बढ़ाकर प्रतिदिन लगभग 54 हजार टन कर दिया गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि पहले यह आंकड़ा लगभग 35 हजार टन था। सरकार लगातार तेल की आपूर्ति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डॉलर के खर्च और आयात बिल पर नजर बनाए हुए है। पिछले कुछ दिनों में सोशल मीडिया पर </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">भारत में फिर लॉकडाउन</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे शब्द तेजी से ट्रेंड कर रहे थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन मंत्री के बयान के बाद अब स्थिति काफी हद तक स्पष्ट हो गई है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में लोगों से बचत करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने के लिए मेट्रो</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">कार पूलिंग और इलेक्ट्रिक वाहनों का अधिक इस्तेमाल किया जाए। कंपनियों को भी यह सलाह दी गई है कि जहां संभव हो वहां कर्मचारियों को घर से काम करने की सुविधा दी जाए ताकि ईंधन की बचत हो सके। इसके साथ ही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सोने की खरीददारी और विदेशी यात्राओं को कुछ समय के लिए टालने की भी सलाह दी गई थी। सरकार का मानना है कि भारत बड़े पैमाने पर कच्चा तेल और सोना आयात करता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे विदेशी मुद्रा पर दबाव बढ़ता है। यदि वैश्विक हालात और बिगड़ते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो इसका आर्थिक असर सीधे देश पर पड़ सकता है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सूत्रों के मुताबिक</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकार अब आत्मनिर्भरता पर ज्यादा जोर दे रही है। इसमें प्राकृतिक खेती</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वदेशी उत्पादों और खाने के तेल की खपत कम करने जैसे मुद्दे शामिल हैं। पेट्रोलियम मंत्री ने कहा कि यह समय घबराने का नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि समझदारी से संसाधनों का उपयोग करने का है। उन्होंने दोहराया कि लॉकडाउन जैसी कोई स्थिति नहीं है और सरकार केवल एहतियाती कदम उठा रही है ताकि अंतरराष्ट्रीय संकट का असर भारत पर कम से कम पड़े। फिलहाल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">केंद्र की कोशिश यही है कि तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और डॉलर की मांग बढ़ने के बावजूद देश की अर्थव्यवस्था स्थिर बनी रहे।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 May 2026 17:32:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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                <title>तेल संकट के बीच बड़ी डील, होर्मुज मार्ग खोलने पर राजी हुए अमेरिका-ईरान</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर सहमति बनने की खबर, फंसे जहाजों को जल्द मिल सकती है निकलने की अनुमति।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/america-iran-agree-to-open-hormuz-passage-in-big-deal-amid/article-52854"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-07t154500.443.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव के बीच अब राहत की खबर सामने आ रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों देशों के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर एक अहम सहमति बनी है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके तहत अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी में धीरे-धीरे ढील दी जाएगी और बदले में ईरान रणनीतिक रूप से बेहद अहम </span>‘<span lang="hi" xml:lang="hi">स्ट्रेट ऑफ होर्मुज</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">को चरणबद्ध तरीके से फिर से खोलने पर राजी हुआ है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक आने वाले कुछ घंटों में वहां फंसे कई व्यापारिक जहाजों को निकलने की अनुमति मिल सकती है। पिछले कुछ दिनों से इस समुद्री मार्ग पर हालात काफी तनावपूर्ण बने हुए थे और दुनिया भर की नजरें इसी इलाके पर टिकी थीं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अरबी मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि दोनों पक्षों के बीच बैकचैनल बातचीत लगातार चल रही थी। बताया जा रहा है कि गुरुवार देर रात तक कई दौर की बातचीत के बाद स्थिति नरम पड़नी शुरू हुई। अमेरिका-ईरान संघर्ष तेज होने के बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया था। इसके बाद दुनिया के कई देशों की तेल और गैस सप्लाई प्रभावित होने लगी थी। हालात ऐसे हो गए थे कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अचानक उछाल देखने को मिला। कई शिपिंग कंपनियों ने अपने जहाजों के रूट बदल दिए थे जबकि कुछ जहाज इसी मार्ग में फंस गए थे। समुद्री व्यापार से जुड़े विशेषज्ञ लगातार चेतावनी दे रहे थे कि अगर यह संकट लंबा खिंचता है तो एशिया और यूरोप के कई देशों में ऊर्जा संकट गहरा सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में गिना जाता है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। ऐसे में इसके बंद होने का असर सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार पर पड़ा। शुरुआती रिपोर्ट्स में कहा गया था कि अमेरिकी नौसेना ने इलाके में अपनी निगरानी बढ़ा दी थी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि ईरान ने भी सैन्य गतिविधियां तेज कर दी थीं। इसी बीच अमेरिकी लड़ाकू विमान द्वारा ईरानी तेल टैंकर को निशाना बनाने की खबर ने तनाव को और बढ़ा दिया था। बताया गया कि हमले में टैंकर के रडर हिस्से को नुकसान पहुंचा था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे जहाज की दिशा नियंत्रित करने में दिक्कत आई। हालांकि इस घटना के बाद दोनों देशों के बीच बयानबाजी भी काफी तेज हो गई थी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने समझौता नहीं होने की स्थिति में ईरान पर बड़े हमले की चेतावनी दी थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं ईरान की तरफ से भी जवाबी कार्रवाई की बात कही गई थी।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अब जो संकेत सामने आ रहे हैं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनसे माना जा रहा है कि फिलहाल टकराव टालने की कोशिश की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार समुद्री मार्ग को पूरी तरह सामान्य होने में थोड़ा वक्त लग सकता है क्योंकि सुरक्षा जांच और जहाजों की आवाजाही को चरणबद्ध तरीके से बहाल किया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय बाजार भी इस खबर पर नजर बनाए हुए हैं। तेल कारोबारियों और शिपिंग कंपनियों को उम्मीद है कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से खुलता है तो कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता लौट सकती है। हालांकि अभी तक अमेरिका और ईरान की ओर से इस समझौते को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। ऐसे में दुनिया फिलहाल अगले कुछ घंटों का इंतजार कर रही है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 May 2026 16:25:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शेयर बाजार में गिरावट: सेंसेक्स 583 अंक टूटा, निफ्टी 23,998 पर</title>
                                    <description><![CDATA[शेयर बाजार में गिरावट के बीच आईटी शेयरों में खरीदारी, मेटल और बैंकिंग सेक्टर दबाव में वैश्विक संकेतों और जियोपॉलिटिकल तनाव ने बाजार की दिशा बदल दी है। तेल की कीमतों में उछाल और विदेशी बाजारों की कमजोरी ने निवेशकों को सतर्क किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/fall-in-stock-market-sensex-fell-by-583-points-nifty/article-52423"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/business---2026-04-30t171653.486.jpg" alt=""></a><br /><p>आज  भारतीय शेयर बाजार में गिरावट देखने को मिली है। जहां सेंसेक्स 583 अंक यानी 0.75% टूटकर 76,913 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी भी 180 अंकों की गिरावट के साथ 23,998 पर आ गया। दिनभर के कारोबार में बाजार पर दबाव बना रहा, हालांकि आईटी सेक्टर में कुछ खरीदारी देखने को मिली। मेटल और सरकारी बैंकिंग शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली दर्ज की गई, जिससे बाजार का संतुलन बिगड़ गया।</p>
<p>वैश्विक परिस्थितियों और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों के रुख को प्रभावित किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, निवेशक जोखिम से बचने के लिए सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर झुक रहे हैं, जिससे बाजार में गिरावट आई।</p>
<h5><strong>गिरावट के कारण</strong></h5>
<p>बाजार में गिरावट की मुख्य वजहों में पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव शामिल है। ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते टकराव से सप्लाई चेन बाधित होने की आशंका जताई जा रही है। इससे वैश्विक स्तर पर व्यापार और उत्पादन प्रभावित हो सकता है।</p>
<p>दूसरी बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में तेजी है। ब्रेंट क्रूड ऑयल 120 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है, जो 2022 के बाद पहली बार हुआ है। इससे भारत का आयात बिल बढ़ने और महंगाई पर दबाव बढ़ने की आशंका है।</p>
<p>तीसरी वजह अमेरिकी और एशियाई बाजारों में आई कमजोरी है। साउथ कोरिया का कोस्पी, जापान का निक्केई और हांगकांग का हैंगसेंग इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए। वहीं, अमेरिका में डाउ जोन्स और S&amp;P 500 में कमजोरी देखने को मिली, जिसका असर भारतीय बाजार पर पड़ा।</p>
<h5><strong>सेक्टर का हाल</strong></h5>
<p>आज के कारोबार में आईटी सेक्टर अपेक्षाकृत मजबूत रहा और इसमें खरीदारी देखने को मिली। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितता के दौर में आईटी कंपनियां अपेक्षाकृत स्थिर प्रदर्शन देती हैं, इसलिए निवेशक इस सेक्टर की ओर रुख करते हैं।</p>
<p>वहीं, मेटल और सरकारी बैंकिंग शेयरों में दबाव बना रहा। इन सेक्टर्स पर वैश्विक मांग में कमी और आर्थिक अनिश्चितता का असर देखने को मिला। एक दिन पहले यानी 29 अप्रैल को बाजार में तेजी रही थी। उस दिन सेंसेक्स 609 अंक चढ़कर 77,496 पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 24,178 के स्तर तक पहुंच गया था। हालांकि, यह तेजी टिक नहीं पाई और अगले ही दिन बाजार में गिरावट आ गई।</p>
<p>बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, मौजूदा समय में बाजार की दिशा काफी हद तक वैश्विक घटनाओं पर निर्भर है। विशेष रूप से कच्चे तेल की कीमतें और जियोपॉलिटिकल हालात निवेशकों के फैसलों को प्रभावित कर रहे हैं।इस गिरावट का असर निवेशकों के पोर्टफोलियो पर भी पड़ा है। छोटे निवेशकों में चिंता बढ़ी है, जबकि संस्थागत निवेशक सतर्क रणनीति अपना रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 17:17:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शुरुआती तेजी के बाद बाजार फिसला, सेंसेक्स-निफ्टी लाल निशान में, निवेशकों की बढ़ी चिंता</title>
                                    <description><![CDATA[शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स-निफ्टी लाल निशान में। वैश्विक संकेतों और तेल कीमतों के असर से बाजार में उतार-चढ़ाव जारी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/after-the-initial-rise-the-market-slipped-sensex-nifty-in-red/article-51658"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/stock-market-today-india.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">वैश्विक संकेतों के बीच घरेलू शेयर बाजार में सोमवार को शुरुआती मजबूती ज्यादा देर टिक नहीं पाई और बाजार गिरावट के साथ लाल निशान में आ गया। सुबह करीब 9:44 बजे बीएसई सेंसेक्स 33 अंक टूटकर 78,460 के स्तर पर कारोबार करता दिखा, जबकि एनएसई निफ्टी 37 अंकों की गिरावट के साथ 24,315 के आसपास आ गया। इससे पहले शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 236 अंकों की तेजी के साथ 78,730 तक पहुंच गया था और निफ्टी भी 24,420 के स्तर तक गया था। बाजार में इस उतार-चढ़ाव ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है, खासकर तब जब वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता बनी हुई है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">दिन की शुरुआत में बैंकिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर शेयरों में खरीदारी देखने को मिली, जिससे बाजार में तेजी आई। आईसीआईसीआई बैंक, ट्रेंट, अदानी एंटरप्राइजेज और एलएंडटी जैसे शेयरों ने शुरुआती बढ़त में योगदान दिया।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">हालांकि, जल्द ही मुनाफावसूली और कमजोर वैश्विक संकेतों के कारण बाजार में गिरावट आ गई। जियो फाइनेंशियल, बजाज फाइनेंस, बजाज फिनसर्व, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और बजाज ऑटो जैसे शेयरों में दबाव देखने को मिला।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में अपेक्षाकृत मजबूती बनी रही। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स करीब 0.5% ऊपर रहा, जबकि स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.2% की बढ़त दर्ज की गई। सेक्टोरल स्तर पर पूंजीगत वस्तुएं, मीडिया, PSU बैंक और बिजली सेक्टर में हल्की तेजी देखने को मिली।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">वैश्विक संकेतों का असर</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">बाजार पर दबाव का प्रमुख कारण पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव रहा। रिपोर्ट्स के अनुसार, होर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर अनिश्चितता ने वैश्विक सप्लाई चेन पर असर डाला है। विशेषज्ञों का मानना है कि तेल की कीमतों में उछाल से महंगाई बढ़ने का जोखिम बढ़ता है, जिसका सीधा असर इक्विटी बाजारों पर पड़ता है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">रुपया और फॉरेक्स बाजार</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">सोमवार को भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले मजबूत हुआ। शुरुआती कारोबार में यह 13 पैसे की बढ़त के साथ 92.78 पर पहुंच गया। इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज में रुपया 92.73 पर खुला और 92.70 तक मजबूत हुआ।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">विश्लेषकों के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में हालिया नरमी और रिजर्व बैंक के कदमों से रुपये को समर्थन मिला है। हालांकि, विदेशी निवेशकों की सतर्कता और वैश्विक अनिश्चितता के चलते बड़ी तेजी की संभावना सीमित मानी जा रही है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">विशेषज्ञों की राय</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">बाजार विश्लेषकों के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी तनाव और संभावित भू-राजनीतिक घटनाक्रम बाजार की दिशा तय करेंगे। एक निवेश रणनीतिकार ने कहा कि संघर्ष-विराम की समयसीमा नजदीक आने के साथ बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है। सूत्रों के मुताबिक, निवेशक फिलहाल जोखिम से बचने की रणनीति अपना रहे हैं और बड़े फैसले लेने से पहले वैश्विक संकेतों का इंतजार कर रहे हैं।</span></p>
<p><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">आने वाले दिनों में बाजार की दिशा मुख्य रूप से वैश्विक घटनाओं, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर निर्भर करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि अल्पावधि में बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। निवेशकों को सतर्क रहने और सेक्टर-आधारित रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 13:31:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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