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                <title>Bilateral Relations - दैनिक जागरण</title>
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                <title>ऑकलैंड में भावुक हुए पीएम मोदी, बोले- 25 साल पुराना मफलर आज भी संभालकर रखा है</title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए साझा की पुरानी यादें, भारत-न्यूजीलैंड साझेदारी, जनकल्याण और भविष्य के सहयोग पर दिया विशेष जोर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/pm-modi-became-emotional-in-auckland-and-said-i/article-58507"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/narendra-modi-(8).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने न्यूजीलैंड दौरे के अंतिम दिन ऑकलैंड में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए एक भावुक याद साझा की, जिसने वहां मौजूद लोगों को भावुक कर दिया। उन्होंने बताया कि करीब 25 से 30 वर्ष पहले, जब वे किसी सरकारी पद पर नहीं थे, तब पहली बार न्यूजीलैंड आने का अवसर मिला था। उसी यात्रा के दौरान उन्हें एक मफलर, एक कैप और दस्तानों का एक सेट उपहार में मिला था। प्रधानमंत्री ने कहा कि उन उपहारों में मिला मफलर आज भी उन्होंने संभालकर रखा है और इसी दौरे के दौरान वही मफलर पहनकर कार्यक्रम में पहुंचे हैं। उनके इस व्यक्तिगत अनुभव ने भारत और न्यूजीलैंड के बीच वर्षों पुराने आत्मीय संबंधों की झलक भी पेश की।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री ने कहा कि समय बदल सकता है, जिम्मेदारियां बदल सकती हैं, लेकिन लोगों से मिले स्नेह और सम्मान की यादें कभी पुरानी नहीं होतीं। उन्होंने कहा कि यह मफलर केवल एक वस्तु नहीं बल्कि दोनों देशों के बीच मित्रता और अपनत्व का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि उन्हें खुशी है कि वर्षों बाद फिर उसी देश में आने और भारतीय समुदाय से मिलने का अवसर मिला।</p>
<p style="text-align:justify;">अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय मूल के लोगों की भूमिका की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि हजारों किलोमीटर दूर रहने के बावजूद भारतीय समुदाय का दिल हमेशा भारत के साथ धड़कता है। उन्होंने कहा कि भले ही शरीर न्यूजीलैंड में हो, लेकिन मन भारत में ही रहता है। यही कारण है कि विदेशों में रहने वाले भारतीय देश की हर उपलब्धि पर गर्व महसूस करते हैं और उसे अपनी सफलता मानते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और न्यूजीलैंड के संबंध केवल कूटनीतिक नहीं हैं, बल्कि साझा मूल्यों, विश्वास और सहयोग पर आधारित हैं। उन्होंने कहा कि भारत के लिए किसी देश की जनसंख्या या आकार से अधिक महत्वपूर्ण उसकी जनकल्याण की भावना है। उन्होंने कहा कि न्यूजीलैंड ने कई ऐसे उदाहरण प्रस्तुत किए हैं, जिनसे भारत लगातार सीखता रहा है। उन्होंने विशेष रूप से इस बात का उल्लेख किया कि न्यूजीलैंड दुनिया का पहला देश था जिसने महिलाओं को मतदान का अधिकार दिया और यह लोकतांत्रिक मूल्यों की दिशा में ऐतिहासिक कदम था।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों देशों के भविष्य के सहयोग की संभावनाओं पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि आज का दौर प्रतिस्पर्धा से अधिक सहयोग का है। यदि सोशल मीडिया और डिजिटल दुनिया की भाषा में कहा जाए तो यह "कोलेबरेशन" का समय है। भारत और न्यूजीलैंड कई क्षेत्रों में मिलकर नई उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं। उन्होंने विशेष रूप से खेल, शिक्षा, कृषि, तकनीक और अंतरिक्ष विज्ञान जैसे क्षेत्रों का उल्लेख किया।</p>
<p style="text-align:justify;">खेलों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि न्यूजीलैंड की रग्बी टीम पूरी दुनिया में अपनी उत्कृष्टता के लिए जानी जाती है। भारत भी रग्बी के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहता है और इसके लिए न्यूजीलैंड के अनुभव तथा विशेषज्ञता का लाभ उठाना चाहता है। उन्होंने कहा कि यदि दोनों देश इस दिशा में साथ काम करें तो भारतीय खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर अवसर मिल सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री ने अंतरिक्ष क्षेत्र में दोनों देशों के सहयोग को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि जब भारत का चंद्रयान चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफलतापूर्वक उतरा था, तब न्यूजीलैंड में भी लोगों ने इस उपलब्धि का उत्साहपूर्वक स्वागत किया था। उन्होंने कहा कि यह केवल भारत की सफलता नहीं थी, बल्कि विज्ञान और मानवता की साझा उपलब्धि थी। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि न्यूजीलैंड की कई स्पेस कंपनियां भारत के साथ मिलकर काम कर चुकी हैं और आने वाले वर्षों में यह सहयोग और मजबूत होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के साथ द्विपक्षीय बैठक की। इस बैठक में दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने वाले 18 महत्वपूर्ण फैसलों और 10 समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। दोनों नेताओं ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर लगभग 35 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य भी निर्धारित किया। इसके अलावा निवेश, शिक्षा, कृषि, रक्षा, नवाचार और तकनीकी सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री मोदी के सम्मान में न्यूजीलैंड सरकार की ओर से गाला लंच का आयोजन किया गया, जिसमें दोनों देशों के उद्योगपतियों और प्रमुख प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस दौरान भारत और न्यूजीलैंड के कारोबारी सहयोग को बढ़ावा देने पर भी चर्चा हुई। प्रधानमंत्री का पारंपरिक माओरी शैली में स्वागत किया गया और उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया, जो दोनों देशों के मजबूत संबंधों का प्रतीक माना जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारतीय समुदाय के बीच अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि प्रवासी भारतीय भारत की सबसे बड़ी ताकतों में से एक हैं। उन्होंने विदेशों में रह रहे भारतीयों की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी मेहनत और प्रतिभा से दुनिया के हर कोने में भारत का नाम रोशन किया है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार हमेशा प्रवासी भारतीयों के साथ खड़ी है और उनके हितों की रक्षा के लिए लगातार प्रयास करती रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 17:50:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>प्रधानमंत्री मोदी अगले सप्ताह करेंगे न्यूजीलैंड की पहली आधिकारिक यात्रा, द्विपक्षीय संबंधों को मिलेगी नई गति</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले सप्ताह पहली बार आधिकारिक दौरे पर न्यूजीलैंड जाएंगे। यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के क्रियान्वयन और आर्थिक सहयोग को नई दिशा देने पर व्यापक चर्चा होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/prime-minister-modi-will-make-his-first-official-visit-to/article-57766"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/pm-modi-new-zealand-visit.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">भारत और न्यूजीलैंड के संबंधों में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले सप्ताह अपनी पहली आधिकारिक न्यूजीलैंड यात्रा पर जाएंगे। इस यात्रा की घोषणा न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने की है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का दौरा दोनों देशों के रणनीतिक, आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण साबित होगा। न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी बयान में प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा की पुष्टि करते हुए कहा कि उन्हें खुशी है कि भारतीय प्रधानमंत्री पहली बार आधिकारिक दौरे पर न्यूजीलैंड आ रहे हैं। उन्होंने इस यात्रा को दोनों देशों के बीच बढ़ते विश्वास और मजबूत होते सहयोग का प्रतीक बताया।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा अप्रैल 2026 में भारत और न्यूजीलैंड के बीच हुए ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement-FTA) के बाद पहला बड़ा उच्चस्तरीय दौरा होगी। इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, सेवा क्षेत्र, कृषि, शिक्षा, पर्यटन और तकनीकी सहयोग को नई दिशा देना है। दोनों देशों की सरकारों का मानना है कि इस समझौते से व्यापारिक बाधाएं कम होंगी और कंपनियों के लिए नए अवसर खुलेंगे। साथ ही निवेश बढ़ाने और आर्थिक गतिविधियों को गति मिलने की भी उम्मीद है।</p>
<p class="isSelectedEnd">न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और न्यूजीलैंड की आर्थिक समृद्धि के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण साझेदार है। उन्होंने कहा कि मुक्त व्यापार समझौते के लागू होने से न्यूजीलैंड के उत्पादों और सेवाओं को 1.4 अरब से अधिक आबादी वाले भारतीय बाजार तक बेहतर पहुंच मिलेगी। इससे निर्यात बढ़ेगा, नए रोजगार पैदा होंगे और न्यूजीलैंड की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">न्यूजीलैंड सरकार ने अगले 15 वर्षों में भारत में लगभग 20 अरब डॉलर तक का निवेश बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस निवेश को सुगम बनाने के लिए भारत सरकार ने न्यूजीलैंड के निवेशकों के लिए विशेष "सिंगल डेस्क" या "वन-स्टॉप सुविधा" स्थापित करने पर सहमति दी है। इस व्यवस्था के तहत निवेश से जुड़े अनुमोदनों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को तेज़ी से पूरा किया जाएगा, जिससे दोनों देशों के निवेशकों को आसानी होगी। न्यूजीलैंड के व्यापार एवं निवेश मंत्री टॉड मैक्ले ने पहले भी कहा था कि भारत में निवेश के लिए बेहतर माहौल तैयार हो रहा है और दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग आने वाले वर्षों में तेजी से बढ़ेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता केवल व्यापार तक सीमित नहीं है। इसमें कृषि उत्पादकता, निवेश, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (MSME), महिला उद्यमिता, खेल, पर्यटन, शिक्षा, कौशल विकास और प्रतिभा आदान-प्रदान जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों को शामिल किया गया है। इसके अलावा दोनों देश छात्रों, शोधकर्ताओं और कुशल पेशेवरों के लिए भी सहयोग बढ़ाने की दिशा में काम करेंगे। इससे दोनों देशों के युवाओं को शिक्षा और रोजगार के नए अवसर मिलने की संभावना है।</p>
<p class="isSelectedEnd">दोनों देशों के बीच होने वाला सहयोग कृषि क्षेत्र में नई तकनीकों के आदान-प्रदान को भी बढ़ावा देगा। न्यूजीलैंड डेयरी, पशुपालन और आधुनिक कृषि तकनीकों के लिए विश्वभर में जाना जाता है, जबकि भारत कृषि उत्पादन और विशाल उपभोक्ता बाजार के कारण एक महत्वपूर्ण साझेदार है। सेवा क्षेत्र, सूचना प्रौद्योगिकी, डिजिटल अर्थव्यवस्था, स्टार्टअप, पर्यटन और खेल सहयोग भी इस यात्रा के प्रमुख एजेंडों में शामिल रहने की संभावना है।</p>
<p class="isSelectedEnd">भारत और न्यूजीलैंड के बीच पिछले कुछ वर्षों में राजनीतिक और आर्थिक संबंध लगातार मजबूत हुए हैं। दोनों देश इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता, मुक्त व्यापार और वैश्विक आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दों पर भी साझा दृष्टिकोण रखते हैं। प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के दौरान दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच द्विपक्षीय बैठक, व्यापारिक प्रतिनिधिमंडलों के साथ चर्चा और कई महत्वपूर्ण समझौतों पर आगे की कार्ययोजना तय होने की उम्मीद है।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहली आधिकारिक न्यूजीलैंड यात्रा को दोनों देशों के रिश्तों में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। मुक्त व्यापार समझौते के बाद यह दौरा आर्थिक सहयोग, निवेश, व्यापार और लोगों के बीच संपर्क को नई गति देने का अवसर प्रदान करेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 12:30:21 +0530</pubDate>
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                <title>जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची भारत दौरे पर, मोदी संग शिखर वार्ता में कई अहम मुद्दों पर होगी चर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[तीन दिवसीय भारत यात्रा के दौरान व्यापार, निवेश, रक्षा, सेमीकंडक्टर, सप्लाई चेन और स्थानीय मुद्राओं में कारोबार जैसे विषयों पर दोनों देशों के बीच महत्वपूर्ण फैसलों की उम्मीद]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/many-important-issues-will-be-discussed-in-the-summit-with/article-57511"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/india-japan-summit.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">भारत और जापान के बीच रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को नई गति देने के उद्देश्य से जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची बुधवार को तीन दिवसीय भारत दौरे पर नई दिल्ली पहुंच रही हैं। प्रधानमंत्री बनने के बाद यह उनका पहला आधिकारिक भारत दौरा है, जिसे दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस यात्रा के दौरान वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगी। दोनों नेताओं के बीच होने वाली बैठक में व्यापार, निवेश, रक्षा, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, महत्वपूर्ण खनिज, सप्लाई चेन, समुद्री सुरक्षा और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग जैसे कई अहम मुद्दों पर विस्तृत चर्चा होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">विदेश मंत्रालय के अनुसार यह दौरा 1 से 3 जुलाई तक चलेगा। इस दौरान दोनों देशों के बीच चल रही विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। माना जा रहा है कि बैठक में आर्थिक सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ नई तकनीकों, औद्योगिक निवेश और रक्षा क्षेत्र में साझेदारी को लेकर भी सकारात्मक प्रगति हो सकती है। दोनों देशों के उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ भी प्रधानमंत्री स्तर पर मुलाकात का कार्यक्रम प्रस्तावित है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस यात्रा का एक महत्वपूर्ण पहलू भारत और जापान के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार की दिशा में आगे बढ़ने की तैयारी भी है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार दोनों देश ऐसी व्यवस्था विकसित करने पर काम कर रहे हैं, जिसके तहत व्यापारिक भुगतान सीधे भारतीय रुपये और जापानी येन में किया जा सकेगा। यदि यह व्यवस्था लागू होती है तो दोनों देशों के बीच पहली बार स्थानीय मुद्राओं में औपचारिक व्यापारिक भुगतान प्रणाली स्थापित होगी। इससे अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम होगी और व्यापारिक लेनदेन पहले की तुलना में अधिक आसान तथा किफायती बन सकेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रस्तावित व्यवस्था के तहत जापानी कंपनियां भारत के बैंकों में विशेष खाते खोलकर सीधे रुपये और येन में भुगतान कर सकेंगी। इससे विदेशी मुद्रा विनिमय की अतिरिक्त लागत कम होगी और भुगतान प्रक्रिया भी तेज होगी। व्यापारिक समुदाय का मानना है कि इससे दोनों देशों के बीच कारोबार करने वाली कंपनियों को समय और धन दोनों की बचत होगी। साथ ही छोटे और मध्यम उद्योगों को भी इसका लाभ मिल सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्थानीय मुद्राओं में व्यापार की यह पहल नई जरूर है, लेकिन इसकी नींव पहले ही रखी जा चुकी थी। अगस्त 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जापान यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अगले दस वर्षों के लिए साझा विजन दस्तावेज जारी किया था। उस समय भी भुगतान प्रणाली को सरल बनाने और स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने पर सहमति बनी थी। अब उसी दिशा में ठोस कदम उठाने की तैयारी की जा रही है। भारतीय रिजर्व बैंक पहले ही विशेष रुपया वोस्त्रो अकाउंट की व्यवस्था शुरू कर चुका है, जिसके माध्यम से कई देशों के साथ रुपये में व्यापार को बढ़ावा दिया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत सरकार के अनुसार वर्तमान में 30 देशों के 123 विदेशी बैंकों के लिए भारत के 26 बैंकों में 156 विशेष रुपया वोस्त्रो खाते खोले जा चुके हैं। इस व्यवस्था का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय व्यापार में मजबूत विदेशी मुद्राओं पर निर्भरता कम करना और भारतीय रुपये के वैश्विक उपयोग को बढ़ावा देना है। जापान भी एशियाई देशों के साथ स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने की दिशा में लगातार प्रयास कर रहा है और भारत के साथ यह सहयोग उसी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत और जापान के आर्थिक संबंध पिछले कुछ वर्षों में लगातार मजबूत हुए हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में दोनों देशों के बीच लगभग 27.5 अरब डॉलर का व्यापार दर्ज किया गया। इसी अवधि में जापान ने भारत में करीब 3.2 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष निवेश किया। जापान ने अगले दस वर्षों में भारत में 61 अरब डॉलर से अधिक निवेश करने का लक्ष्य भी तय किया है। वर्तमान में भारत में लगभग 1400 जापानी कंपनियां कार्यरत हैं, जिनमें बड़ी संख्या विनिर्माण क्षेत्र से जुड़ी हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">दोनों देशों के सहयोग का सबसे बड़ा उदाहरण मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना है, जिसमें जापान की शिनकानसेन तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। इसके अलावा सेमीकंडक्टर, क्लीन एनर्जी, ऑटोमोबाइल, डिजिटल टेक्नोलॉजी और महत्वपूर्ण खनिजों की सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए भी दोनों देश मिलकर काम कर रहे हैं। चीन पर वैश्विक निर्भरता कम करने की रणनीति के तहत भारत और जापान ने वर्ष 2025 में सेमीकंडक्टर और क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में विशेष रणनीतिक संवाद भी शुरू किया था। प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची का यह दौरा केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा, क्वाड सहयोग और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने जैसे विषयों पर भी महत्वपूर्ण संदेश देगा। ऐसे समय में जब वैश्विक अर्थव्यवस्था और भू-राजनीतिक परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं, भारत और जापान की रणनीतिक साझेदारी दोनों देशों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोल सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 13:44:02 +0530</pubDate>
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                <title>भारत-पाक की 117 हस्तियों ने पीएम मोदी और शहबाज शरीफ को लिखा पत्र</title>
                                    <description><![CDATA[दोनों देशों के प्रमुख लोगों ने संवाद, शांति और आपसी रिश्तों को मजबूत करने की अपील की, युवाओं के भविष्य और क्षेत्रीय विकास पर दिया जोर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/117-celebrities-from-india-and-pakistan-wrote-letters-to-pm/article-57509"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/india-pakistan-relations.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से जारी तनाव के बीच दोनों देशों की 117 प्रमुख हस्तियों ने एक संयुक्त पहल करते हुए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को पत्र लिखा है। इस पत्र में दोनों नेताओं से आपसी संवाद को आगे बढ़ाने, बातचीत का रास्ता अपनाने और दोनों देशों के रिश्तों को बेहतर बनाने की अपील की गई है। पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों का कहना है कि दक्षिण एशिया में स्थायी शांति और विकास तभी संभव है, जब भारत और पाकिस्तान के बीच संवाद की प्रक्रिया आगे बढ़े और दोनों देश आपसी मतभेदों को बातचीत के जरिए सुलझाने का प्रयास करें। इस संयुक्त पत्र में कहा गया है कि दोनों देशों के बीच लगातार बढ़ते तनाव का असर केवल सरकारों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका सबसे अधिक प्रभाव आम नागरिकों, विशेष रूप से युवाओं के भविष्य पर पड़ता है। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि लंबे समय से जारी तनाव के कारण विकास, व्यापार, शिक्षा, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और क्षेत्रीय सहयोग जैसी कई संभावनाएं प्रभावित हुई हैं। हस्ताक्षरकर्ताओं ने दोनों प्रधानमंत्रियों से आग्रह किया है कि वे भविष्य को ध्यान में रखते हुए ऐसे कदम उठाएं, जिनसे विश्वास का माहौल बने और दोनों देशों के बीच संवाद की नई शुरुआत हो सके।</p>
<p style="text-align:justify;">इस संयुक्त पहल में भारत और पाकिस्तान के कुल 117 प्रमुख लोगों ने भाग लिया है। इनमें पूर्व नौकरशाह, पूर्व राजनयिक, सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षाविद, राजनीतिक हस्तियां और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े वरिष्ठ लोग शामिल हैं। भारत की ओर से 61 लोगों ने इस पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। इनमें जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला, पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती, मीरवाइज उमर फारूक और राष्ट्रीय जनता दल के सांसद मनोज झा सहित कई प्रमुख नाम शामिल हैं। वहीं पाकिस्तान की ओर से 56 लोगों ने इस पहल का समर्थन किया है, जिनमें पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद महमूद कसूरी समेत कई पूर्व अधिकारी और सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोग शामिल हैं। पत्र में यह भी कहा गया है कि भारत और पाकिस्तान दोनों ही परमाणु शक्ति संपन्न देश हैं और ऐसे में किसी भी प्रकार का तनाव पूरे दक्षिण एशिया की स्थिरता को प्रभावित कर सकता है। हस्ताक्षरकर्ताओं का मानना है कि संवाद और कूटनीतिक संपर्क बनाए रखना किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती का हिस्सा होता है। उनका कहना है कि बातचीत का उद्देश्य मतभेदों को समाप्त करना नहीं, बल्कि उन्हें शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने का रास्ता तैयार करना होता है। पत्र में दोनों देशों के बीच लोगों के आपसी संपर्क बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है। इसमें सांस्कृतिक कार्यक्रमों, शैक्षणिक सहयोग, खेल प्रतियोगिताओं और नागरिक स्तर पर संवाद को बढ़ावा देने की बात कही गई है। हस्ताक्षरकर्ताओं का मानना है कि जब आम लोगों के बीच संपर्क बढ़ेगा तो आपसी विश्वास भी मजबूत होगा और लंबे समय से चली आ रही दूरियां कम करने में मदद मिलेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि इस पत्र पर अभी तक भारत या पाकिस्तान की सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। दोनों देशों के संबंध पिछले कुछ वर्षों से विभिन्न मुद्दों को लेकर चुनौतीपूर्ण रहे हैं। इसके बावजूद समय-समय पर अलग-अलग मंचों से शांति और संवाद की पहल की मांग उठती रही है। इस बार भी दोनों देशों की प्रमुख हस्तियों ने साझा रूप से यह संदेश देने की कोशिश की है कि क्षेत्र में स्थिरता और विकास के लिए संवाद का रास्ता खुला रहना जरूरी है। इस तरह की नागरिक पहलें सरकारों के बीच औपचारिक बातचीत का विकल्प नहीं होतीं, लेकिन वे सकारात्मक माहौल बनाने में अपनी भूमिका निभा सकती हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 13:43:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भारत-नेपाल के बीच UPI-NPS भुगतान लिंक लागू, डिजिटल और विकास सहयोग को मिली नई गति</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली में भारत और नेपाल के बीच अहम समझौतों पर सहमति, सीमा पार भुगतान, भूकंप पुनर्निर्माण और भाषा प्रौद्योगिकी सहयोग को मिला बढ़ावा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/6a2656db7bf6a/article-55251"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/india-nepal-upi-link.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भारत और नेपाल के बीच लंबे समय से प्रतीक्षित सीमा पार डिजिटल भुगतान व्यवस्था को आखिरकार अंतिम रूप दे दिया गया है। नई दिल्ली में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक के दौरान दोनों देशों ने राष्ट्रीय भुगतान प्रणालियों को जोड़ने पर सहमति जताई, जिससे अब भारत की यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) और नेपाल की नेशनल पेमेंट्स सिस्टम (NPS) के बीच सीधे लेनदेन का रास्ता साफ हो गया है। इस व्यवस्था के लागू होने के बाद दोनों देशों के नागरिकों के लिए सीमा पार धन भेजना और प्राप्त करना पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान हो जाएगा। अधिकारियों के अनुसार यह कदम आर्थिक संपर्क बढ़ाने के साथ-साथ आम लोगों की सुविधा को भी सीधे प्रभावित करेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">यह समझौता नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल और भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के बीच हुई प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के बाद सामने आया। बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने भारत-नेपाल संबंधों को विशेष और ऐतिहासिक बताते हुए भविष्य में सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। जयशंकर ने कहा कि दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक संबंध बेहद गहरे हैं और नई भुगतान व्यवस्था इन्हीं संबंधों को और मजबूत करेगी। बताया गया कि यह पहल जून 2023 में नेपाल क्लियरिंग हाउस लिमिटेड (NCHL) और एनपीसीआई इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड (NIPL) के बीच हुए समझौते पर आधारित है।</p>
<p style="text-align:justify;">सीमा पार भुगतान सुविधा को लेकर पिछले कुछ समय से तकनीकी और प्रक्रियागत स्तर पर काम चल रहा था। मार्च 2024 में भारत से नेपाल जाने वाले यात्रियों के लिए क्यूआर आधारित भुगतान सेवा शुरू कर दी गई थी, लेकिन नेपाल के नागरिकों को भारत में उसी तरह की सुविधा नहीं मिल पा रही थी। बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े सूत्रों के मुताबिक लेनदेन शुल्क, प्रोसेसिंग लागत और कुछ तकनीकी पहलुओं को लेकर चर्चा जारी थी। अब दोनों देशों के बीच सहमति बनने के बाद इन अड़चनों को दूर कर लिया गया है। इससे नेपाल के नागरिक भारत यात्रा के दौरान डिजिटल भुगतान कर सकेंगे और व्यक्तिगत स्तर पर सीमा पार धन हस्तांतरण भी अधिक सहज होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू नेपाल के भूकंप पुनर्निर्माण कार्यक्रम से जुड़ा रहा। भारत ने औपचारिक रूप से नेपाल को 72 स्वास्थ्य क्षेत्र की परियोजनियां और 12 सांस्कृतिक विरासत परियोजनियां सौंप दीं, जिन्हें 2015 के विनाशकारी भूकंप के बाद पुनर्निर्माण सहायता कार्यक्रम के तहत विकसित किया गया था। गौरतलब है कि भूकंप के बाद भारत ने नेपाल की सहायता के लिए एक अरब डॉलर की अनुदान और ऋण सहायता की घोषणा की थी। इन परियोजनाओं का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना और सांस्कृतिक धरोहरों को पुनर्जीवित करना था। अधिकारियों का कहना है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से स्थानीय समुदायों को सीधा लाभ मिलेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">इस दौरान दोनों देशों ने डिजिटल नवाचार के क्षेत्र में भी एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए। काठमांडू विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और भारत के एआई एवं डिजिटल इंडिया भाषा प्रभाग ‘भाषिणी’ के बीच एक समझौता ज्ञापन का आदान-प्रदान किया गया। इस साझेदारी का उद्देश्य नेपाल में डिजिटल सार्वजनिक ढांचे को मजबूत करना और एक ऐसी भाषा अनुवाद प्रणाली विकसित करना है जो आवाज आधारित सेवाओं को बढ़ावा दे सके। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे बहुभाषी संचार को आसान बनाने और तकनीक की पहुंच आम लोगों तक बढ़ाने में मदद मिलेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">वार्ता के दौरान दोनों पक्षों ने व्यापार, ऊर्जा, संपर्क, जल संसाधन, शिक्षा और लोगों के बीच संबंधों जैसे कई विषयों पर विस्तार से चर्चा की। नेपाल दूतावास की ओर से जारी जानकारी के अनुसार बैठक सकारात्मक और परिणामोन्मुख रही तथा दोनों देशों ने विकास सहयोग को और मजबूत बनाने पर सहमति व्यक्त की। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने भारत को अपने देश का सबसे महत्वपूर्ण साझेदार बताते हुए पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईंधन और उर्वरकों की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए नई दिल्ली का आभार व्यक्त किया। नेपाल अभी भी पेट्रोलियम उत्पादों के लिए बड़े पैमाने पर भारत पर निर्भर है।</p>
<p style="text-align:justify;">जयशंकर ने भी नेपाल के विकास में भारत के निरंतर सहयोग का भरोसा दिलाया और कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्टार्टअप, सूचना प्रौद्योगिकी तथा नवीकरणीय ऊर्जा जैसे नए क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर जोर दिया। दोनों देशों ने आपराधिक मामलों में पारस्परिक कानूनी सहायता समझौते को लागू करने के लिए आवश्यक प्रक्रियाओं के पूरा होने का भी स्वागत किया। माना जा रहा है कि इससे सीमा पार अपराधों की जांच और अभियोजन में सहयोग बढ़ेगा। नेपाल में नई सरकार के गठन के बाद विदेश मंत्री स्तर की यह पहली महत्वपूर्ण यात्रा थी। इस दौरे ने भारत की ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति को एक बार फिर मजबूती दी है और दोनों देशों के बीच पारंपरिक साझेदारी को नए दौर में आगे बढ़ाने का संकेत दिया है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 12:58:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>पीएम मोदी और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने की मुलाकात, रक्षा, व्यापार और तकनीक सहयोग बढ़ाने पर की बातचीत</title>
                                    <description><![CDATA[भारत-दक्षिण कोरिया बैठक में मोदी और ली जे-म्युंग ने व्यापार, रक्षा और तकनीकी सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया, संबंधों को नई दिशा मिली।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/pm-modi-and-south-korean-president-lee-jae-myung-met-and/article-51659"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/india-south-korea-meeting.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">नई दिल्ली में सोमवार को प्रधानमंत्री मोदी और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग के बीच हुई अहम बैठक ने द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने का संकेत दिया। राजधानी स्थित हैदराबाद हाउस में आयोजित इस बैठक में दोनों नेताओं ने रक्षा, व्यापार, प्रौद्योगिकी और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। इससे पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में ली जे-म्युंग का औपचारिक स्वागत किया, जहां पारंपरिक समारोह के जरिए दोनों देशों की मित्रता को रेखांकित किया गया। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब वैश्विक स्तर पर आपूर्ति श्रृंखला और क्षेत्रीय सुरक्षा प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने विशेष सामरिक साझेदारी को और मजबूत करने पर सहमति जताई। अधिकारियों के अनुसार, चर्चा में रक्षा उत्पादन, सेमीकंडक्टर, बैटरी निर्माण, साइबर सुरक्षा और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई। भारत और दक्षिण कोरिया के बीच बढ़ता आर्थिक सहयोग भी एजेंडे में प्रमुख रहा, जहां द्विपक्षीय व्यापार को और विस्तार देने पर जोर दिया गया।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">रणनीतिक सहयोग पर फोकस</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">दोनों देशों ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई। सूत्रों के मुताबिक, समुद्री सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने पर भी चर्चा हुई। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Randhir Jaiswal ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि भारत-दक्षिण कोरिया विशेष सामरिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए यह बैठक महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच गहरे और भरोसेमंद संबंधों को नई गति देने पर जोर दिया गया है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">आर्थिक रिश्तों की मजबूती</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">भारत दक्षिण कोरियाई कंपनियों के लिए तेजी से उभरता निवेश केंद्र बन रहा है। व्यापार और तकनीकी सहयोग को बढ़ाने पर विशेष सहमति बनी। देखा जाए तो भारत और दक्षिण कोरिया के बीच विशेष सामरिक साझेदारी की शुरुआत वर्ष 2010 में हुई थी। तब से दोनों देश रक्षा, व्यापार और उभरती तकनीकों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाते रहे हैं। वर्तमान में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 30 अरब डॉलर से अधिक का है, और इसे आगे बढ़ाने के लिए नए अवसर तलाशे जा रहे हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">इस यात्रा के दौरान उच्च-स्तरीय वार्ता में प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, रक्षा सहयोग और निवेश को बढ़ावा देने पर भी चर्चा होने की उम्मीद है। रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों देश सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रिक बैटरी सप्लाई चेन में साझेदारी मजबूत करने पर विशेष ध्यान दे रहे हैं, जो वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा का अहम हिस्सा बन चुका है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने भारत पहुंचने से पहले विमान से एक वीडियो संदेश भी साझा किया, जिसमें उन्होंने भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक बताया। उन्होंने दोनों देशों के साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और सहयोग की संभावनाओं पर जोर दिया।</span></p>
<p><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">विश्लेषकों का मानना है कि यह दौरा भारत-दक्षिण कोरिया संबंधों को नई ऊंचाई देने के साथ-साथ इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक संतुलन को भी प्रभावित कर सकता है। खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक सप्लाई चेन और तकनीकी प्रतिस्पर्धा तेज हो रही है, दोनों देशों की साझेदारी का महत्व और बढ़ जाता है आगे की बात करें तो इस दौरे के बाद कई द्विपक्षीय समझौतों और निवेश प्रस्तावों पर प्रगति देखने को मिल सकती है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 13:49:34 +0530</pubDate>
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