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                <title>Hyderabad House - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Hyderabad House RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>डॉ. जयशंकर और मार्क रुबियो के बीच हुई प्रेस वार्ता, भारत-अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी पर दिया जोर</title>
                                    <description><![CDATA[हैदराबाद हाउस में डॉ. एस जयशंकर और मार्को रुबियो की बैठक में भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी, वैश्विक मुद्दों और क्षेत्रीय सुरक्षा पर चर्चा हुई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/press-conference-between-dr-jaishankar-and-mark-rubio-laid-emphasis/article-54129"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/india-us-relations-s.-jaishankar-marco-rubio.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भारत और अमेरिका के बीच की रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए रविवार को नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस बैठक में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता हुई</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके बाद एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस भी आयोजित की गई। दोनों नेताओं ने वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा की और साफ तौर पर संकेत दिए कि भविष्य में दोनों देशों का सहयोग और भी बढ़ने वाला है। यह मार्को रुबियो का अमेरिका के विदेश मंत्री के रूप में भारत का पहला दौरा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिस पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नजरें टिकी हुई हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">संयुक्त प्रेस वार्ता के दौरान</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">विदेश मंत्री डॉ. जयशंकर ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच सिर्फ एक सामान्य रिश्ता नहीं है</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि यह एक व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी है। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच कई अहम मुद्दों पर सोच और हित एक समान हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसका असर दुनिया के अन्य क्षेत्रों पर भी होता है। जयशंकर ने यह भी कहा कि इस समय बहुत सारी चुनौतियाँ हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन एक मजबूत साझेदार के रूप में दोनों देश मिलकर आगे बढ़ेंगे। वार्ता में वेस्ट एशिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय उपमहाद्वीप और पूर्व एशिया के हालात पर भी चर्चा की गई।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जयशंकर ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मार्को रुबियो के बीच हुई मुलाकात में भी कई वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर बातचीत हुई। उन्होंने कहा कि यूक्रेन संघर्ष और खाड़ी क्षेत्र में तेज़ी से बदलती स्थितियों पर भी दोनों पक्षों ने गंभीरता से चर्चा की। विदेश मंत्री ने बताया कि भारत और अमेरिका के बीच लगातार संवाद बना हुआ है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">और इसी वजह से दोनों देश बड़े पैमाने पर सहयोग को आगे बढ़ा पा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि रुबियो के पदभार संभालने के पहले दिन से ही दोनों देशों के बीच निरंतर संपर्क बना हुआ है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी भारत को अमेरिका का एक अत्यंत महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार बताया। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">दुनिया की दो सबसे बड़ी लोकतांत्रिक व्यवस्थाएँ होने के नाते</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कई मामलों में एक-दूसरे के हितों से जुड़े हुए हैं। रुबियो ने कहा कि दोनों देशों का रिश्ता केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि यह वैश्विक स्तर पर कई मुद्दों के लिए साझेदारी को मजबूत कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक रणनीतिक साझेदारी का मतलब सिर्फ सहयोग नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि साझा चुनौतियों के समाधान करने के लिए मिलकर काम करना भी है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">उन्होंने यह भी कहा कि भारत का यह दौरा उनके लिए बहुत मायने रखता है। रुबियो ने माना कि दुनिया में बदलते हालात में भारत की भूमिका लगातार बढ़ रही है और अमेरिका भारत के साथ मिलकर कई वैश्विक चुनौतियों पर काम करना चाहता है। प्रेस वार्ता के दौरान</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">दोनों नेताओं ने रक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रौद्योगिकी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यापार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्षेत्रीय सुरक्षा और ऊर्जा जैसे विषयों पर सहयोग बढ़ाने के लिए चर्चा की।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दिल्ली में हुई इस बैठक को भारत-अमेरिका संबंधों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक हालात के मद्देनज़र</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">दोनों देशों का करीबी सहयोग आने वाले समय में इंडो-पैसिफिक और वैश्विक राजनीति पर असर डाल सकता है। फिलहाल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दोनों देशों ने संकेत दिए हैं कि आने वाले महीनों में कई और बड़े स्तर की बैठकों और समझौतों की संभावना बनी हुई है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 24 May 2026 15:57:21 +0530</pubDate>
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                <title>पीएम मोदी और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने की मुलाकात, रक्षा, व्यापार और तकनीक सहयोग बढ़ाने पर की बातचीत</title>
                                    <description><![CDATA[भारत-दक्षिण कोरिया बैठक में मोदी और ली जे-म्युंग ने व्यापार, रक्षा और तकनीकी सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया, संबंधों को नई दिशा मिली।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/pm-modi-and-south-korean-president-lee-jae-myung-met-and/article-51659"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/india-south-korea-meeting.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">नई दिल्ली में सोमवार को प्रधानमंत्री मोदी और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग के बीच हुई अहम बैठक ने द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने का संकेत दिया। राजधानी स्थित हैदराबाद हाउस में आयोजित इस बैठक में दोनों नेताओं ने रक्षा, व्यापार, प्रौद्योगिकी और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। इससे पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में ली जे-म्युंग का औपचारिक स्वागत किया, जहां पारंपरिक समारोह के जरिए दोनों देशों की मित्रता को रेखांकित किया गया। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब वैश्विक स्तर पर आपूर्ति श्रृंखला और क्षेत्रीय सुरक्षा प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने विशेष सामरिक साझेदारी को और मजबूत करने पर सहमति जताई। अधिकारियों के अनुसार, चर्चा में रक्षा उत्पादन, सेमीकंडक्टर, बैटरी निर्माण, साइबर सुरक्षा और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई। भारत और दक्षिण कोरिया के बीच बढ़ता आर्थिक सहयोग भी एजेंडे में प्रमुख रहा, जहां द्विपक्षीय व्यापार को और विस्तार देने पर जोर दिया गया।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">रणनीतिक सहयोग पर फोकस</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">दोनों देशों ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई। सूत्रों के मुताबिक, समुद्री सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने पर भी चर्चा हुई। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Randhir Jaiswal ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि भारत-दक्षिण कोरिया विशेष सामरिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए यह बैठक महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच गहरे और भरोसेमंद संबंधों को नई गति देने पर जोर दिया गया है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">आर्थिक रिश्तों की मजबूती</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">भारत दक्षिण कोरियाई कंपनियों के लिए तेजी से उभरता निवेश केंद्र बन रहा है। व्यापार और तकनीकी सहयोग को बढ़ाने पर विशेष सहमति बनी। देखा जाए तो भारत और दक्षिण कोरिया के बीच विशेष सामरिक साझेदारी की शुरुआत वर्ष 2010 में हुई थी। तब से दोनों देश रक्षा, व्यापार और उभरती तकनीकों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाते रहे हैं। वर्तमान में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 30 अरब डॉलर से अधिक का है, और इसे आगे बढ़ाने के लिए नए अवसर तलाशे जा रहे हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">इस यात्रा के दौरान उच्च-स्तरीय वार्ता में प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, रक्षा सहयोग और निवेश को बढ़ावा देने पर भी चर्चा होने की उम्मीद है। रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों देश सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रिक बैटरी सप्लाई चेन में साझेदारी मजबूत करने पर विशेष ध्यान दे रहे हैं, जो वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा का अहम हिस्सा बन चुका है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने भारत पहुंचने से पहले विमान से एक वीडियो संदेश भी साझा किया, जिसमें उन्होंने भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक बताया। उन्होंने दोनों देशों के साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और सहयोग की संभावनाओं पर जोर दिया।</span></p>
<p><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">विश्लेषकों का मानना है कि यह दौरा भारत-दक्षिण कोरिया संबंधों को नई ऊंचाई देने के साथ-साथ इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक संतुलन को भी प्रभावित कर सकता है। खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक सप्लाई चेन और तकनीकी प्रतिस्पर्धा तेज हो रही है, दोनों देशों की साझेदारी का महत्व और बढ़ जाता है आगे की बात करें तो इस दौरे के बाद कई द्विपक्षीय समझौतों और निवेश प्रस्तावों पर प्रगति देखने को मिल सकती है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 13:49:34 +0530</pubDate>
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