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                <title>Dhar News - दैनिक जागरण</title>
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                            <item>
                <title>भोजशाला विवाद पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, मुस्लिम पक्ष ने हाई कोर्ट के मंदिर वाले फैसले को दी चुनौती</title>
                                    <description><![CDATA[धार भोजशाला विवाद में मुस्लिम पक्ष ने हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhojshala-dispute-reaches-supreme-court-muslim-side-challenges-high-courts/article-54027"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/bhojshala-case-supreme-court.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मध्य प्रदेश के धार में भोजशाला विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। मुस्लिम पक्ष ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें विवादित भोजशाला परिसर को देवी सरस्वती का मंदिर बताया गया था। हाई कोर्ट के निर्णय के बाद इलाके का माहौल काफी संवेदनशील हो गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और प्रशासन लगातार नजर बनाए हुए है। सुरक्षा के लिहाज से धार में कदम उठाए गए हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भोजशाला को लेकर विवाद काफी समय से चल रहा है। हिंदू पक्ष इसे मां सरस्वती का प्राचीन मंदिर मानता है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि मुस्लिम समुदाय इसे कमाल मौला मस्जिद कहता है। यह विवादित परिसर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यानी </span>ASI <span lang="hi" xml:lang="hi">के संरक्षण में है। हाल ही में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने कहा था कि भोजशाला देवी सरस्वती का मंदिर है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और इसके प्रबंधन को लेकर केंद्र सरकार और </span>ASI <span lang="hi" xml:lang="hi">फैसला ले सकते हैं। कोर्ट ने </span>ASI <span lang="hi" xml:lang="hi">के 2003 के उस आदेश को भी रद्द कर दिया जिसमें मुस्लिम समुदाय को यहां हर शुक्रवार नमाज अदा करने की अनुमति दी गई थी।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अब इस फैसले के खिलाफ मस्जिद के कार्यवाहक काजी मोइनुद्दीन ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की है। दूसरी ओर</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">हिंदू पक्ष भी कानूनी तैयारी में जुटा हुआ है। याचिकाकर्ता जितेंद्र सिंह विशेन ने सुप्रीम कोर्ट में एक कैविएट दायर की है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें कहा गया है कि भोजशाला मामले में कोई भी आदेश पारित करने से पहले उनका पक्ष सुना जाए। कानूनी जानकारों का मानना है कि इससे साफ नजर आ रहा है कि दोनों पक्ष अब सुप्रीम कोर्ट में लंबी कानूनी लड़ाई के लिए तैयार हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हाई कोर्ट के फैसले के बाद धार में सुरक्षा व्यवस्था बहुत सख्त कर दी गई है। प्रशासन ने भोजशाला परिसर और आस-पास के इलाकों में करीब 1500 पुलिसकर्मियों की तैनाती की है। ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जा रही है। शुक्रवार को हाई कोर्ट के फैसले के बाद पहला जुम्मा होने की वजह से प्रशासन ज्यादा सतर्क नजर आ रहा है। सूत्रों का कहना है कि किसी भी तरह की अफवाह या तनाव से बचने के लिए पुलिस लगातार इलाके में गश्त कर रही है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस बीच</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">हिंदू संगठनों ने भोजशाला परिसर में बड़े स्तर पर पूजा का कार्यक्रम तय किया है। अलग-अलग संगठनों के लोग अखंड ज्योति मंदिर में जुटेंगे और सामूहिक पूजा करेंगे। मां वाग्देवी की विशेष आराधना का भी कार्यक्रम है। नए आदेश के बाद भोजशाला परिसर में अब नमाज की अनुमति नहीं रहेगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए इस बार का शुक्रवार पिछले से अलग माना जा रहा है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 May 2026 12:29:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>721 साल बाद भोजशाला में हुई पूजा, मां की जय-जयकार से गूंजा मंदिर</title>
                                    <description><![CDATA[धार भोजशाला में हाई कोर्ट फैसले के बाद पहली बार शुक्रवार को अखंड पूजा और महाआरती हुई। मुस्लिम पक्ष सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/after-721-years-worship-took-place-in-bhojshala-the-temple/article-54028"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/bhojshala-maha-aarti-friday-worship.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">धार के भोजशाला परिसर में इस बार शुक्रवार का दिन काफी खास रहा। हाई कोर्ट के फैसले के बाद पहली बार यहां अखंड पूजा और महाआरती का आयोजन हुआ। सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु परिसर में आने लगे थे। बुजुर्ग</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">महिलाएं और बच्चे हाथों में पूजा सामग्री लिए भोजशाला की ओर बढ़ते नज़र आए। दोपहर करीब 1 बजे गर्भगृह में महाआरती की गई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो उस समय होती थी जब यहां जुमे की नमाज होती थी। प्रशासन ने सुरक्षा बढ़ाते हुए कई जगह बैरिकेडिंग की थी। इस सबके बीच पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी सुबह से ही मौके पर तैनात थे।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भोजशाला परिसर के बाहर लगा वह बोर्ड भी हटा दिया गया</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिस पर पहले लिखा था कि शुक्रवार को हिंदुओं का प्रवेश वर्जित है। कहा जा रहा है कि करीब 721 सालों बाद ऐसा मौका आया है जब हिंदू पक्ष को शुक्रवार के दिन यहां प्रवेश मिला। गर्भगृह को फूलों से सजाया गया था और मां वाग्देवी की प्रतीकात्मक प्रतिमा के साथ पूजा की गई। परिसर के अंदर धार्मिक अनुष्ठानों की तैयारियां देर रात से ही चल रही थीं। श्रद्धालुओं में खास उत्साह दिखा। कई लोग इसे एक ऐतिहासिक पल मानते हैं। 95 साल के विमल गोधा छड़ी के सहारे भोजशाला पहुंचे। वे लंबे समय से भोजशाला आंदोलन से जुड़े हुए हैं और मीडिया से बातचीत में उन्होंने अपनी पुरानी यादें साझा की</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह बताते हुए कि वर्षों से इस दिन का इंतजार किया जा रहा था।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हालांकि</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस पूरे मामले में विवाद अब भी खत्म नहीं हुआ है। मुस्लिम पक्ष ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। काजी मोइनुद्दीन की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि हाई कोर्ट का फैसला पुरातात्विक तथ्यों और प्लेसेज़ ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 की भावना के खिलाफ है। जानकारी के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हाई कोर्ट ने हाल ही में अपने फैसले में भोजशाला परिसर को देवी वाग्देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर माना था और शुक्रवार की नमाज पर रोक लगाई थी। इसी फैसले के बाद शुक्रवार को पहली बार परिसर का माहौल बदला नजर आया। हिंदू पक्ष ने भी सुप्रीम कोर्ट में केविएट दाखिल की है ताकि बिना उनकी बात सुने कोई अंतरिम आदेश जारी न हो सके। फिलहाल धार शहर में पूरे घटनाक्रम के बारे में चर्चाएँ तेज हैं और प्रशासन लगातार हालात पर नजर रख रहा है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 May 2026 12:29:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ग्वालियर में 15 साल से रखी है भोजशाला की मां वाग्देवी प्रतिमा, अब बढ़ीं स्थापना की उम्मीदें</title>
                                    <description><![CDATA[भोजशाला पर कोर्ट फैसले के बाद ग्वालियर में रखी मां वाग्देवी की अष्टधातु प्रतिमा फिर चर्चा में है। 15 साल से स्थापना का इंतजार जारी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhojshalas-mother-vagdevi-statue-has-been-kept-in-gwalior-for/article-53814"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/bhojshala-dispute,-gwalior-dhar-goddess-vagdevi.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भोजशाला के बारे में आए कोर्ट के फैसले के बाद मध्य प्रदेश का धार्मिक और सांस्कृतिक माहौल अचानक बदल गया है। फैसले के बाद धार में श्रद्धालुओं की संख्या में इजाफा हुआ है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं ग्वालियर में एक ऐसा घर है जो पिछले 15 साल से मां वाग्देवी की अष्टधातु प्रतिमा को स्थापित करने की उम्मीद कर रहा है। यह वही प्रतिमा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे 2011 में भोजशाला के गर्भगृह में रखा जाना था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन विवाद और प्रशासनिक कारणों के चलते इसे धार नहीं ले जाया जा सका। अब जब कोर्ट ने भोजशाला को मंदिर मान कर पूजा-अर्चना की इजाजत दी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो ग्वालियर में इस प्रतिमा को लेकर चर्चा फिर से तेज हो गई है। खास बात यह है कि यह प्रतिमा लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम में रखी मूल मां वाग्देवी प्रतिमा की हूबहू नकल मानी जाती है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ग्वालियर के मशहूर मूर्तिकार प्रभात राय और उनकी टीम ने इसे तैयार किया था। उनके बेटे अनुज राय के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह प्रतिमा अष्टधातु से बनाई गई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसकी ऊंचाई लगभग 3.5 फीट है और वजन ढाई क्विंटल से अधिक बताया जा रहा है। इसे बनाने में 2011 में करीब ढाई से तीन लाख रुपए खर्च हुए थे। उस समय 26 कलाकारों ने लगभग 35 से 40 दिन लगातार काम करके इसे तैयार किया था। प्रतिमा की बनावट और नक्काशी इस तरह से की गई कि यह लंदन म्यूजियम में रखी मूल प्रतिमा से मेल खाती है। सूत्रों का कहना है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ नेता नवल किशोर ने इस मूर्ति के निर्माण का जिम्मा लिया था। मूर्ति बनकर तैयार थी और बसंत पंचमी पर धार भेजने की योजना थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन उसी समय भोजशाला के मामले में माहौल तनावपूर्ण हो गया। प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से मूर्ति को ग्वालियर में ही रोक दिया। हालात इतने संवेदनशील हो गए थे कि कुछ समय के लिए मूर्तिकार के घर पर पुलिस सुरक्षा भी लगानी पड़ी। अनुज बताते हैं कि 2011 से 2015 तक हर बसंत पंचमी पर पुलिस निगरानी में प्रतिमा को कुछ समय के लिए बाहर रखा जाता था।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अब कोर्ट के फैसले के बाद इस प्रतिमा को लेकर फिर से उम्मीदें जगी हैं। हालांकि</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रशासन या किसी संगठन ने अभी तक प्रतिमा को धार ले जाने के लिए आधिकारिक संपर्क नहीं किया है। ऐसा कहा जा रहा है कि सभी पक्ष कोर्ट के विस्तृत आदेश और कानूनी प्रक्रिया का इंतजार कर रहे हैं। वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">धार की भोजशाला में माहौल पूरी तरह उत्सव जैसा दिखाई दे रहा है। श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। मां वाग्देवी की आरती</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पूजा और अखंड ज्योति स्थापना के बाद परिसर में धार्मिक उल्लास फैल गया है। इंदौर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">झाबुआ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खरगोन और आसपास के जिलों से लोग परिवार के साथ भोजशाला पहुंच रहे हैं। इस बीच</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मूर्तिकार परिवार ने भी अपनी भावनाएं व्यक्त की हैं। अनुज राय ने कहा कि अगर भविष्य में कोई इस प्रतिमा को लेने नहीं आता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो वे इसे अपने पास सम्मान के साथ रखेंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि यह सिर्फ एक मूर्ति नहीं बल्कि भारतीय इतिहास और आस्था का प्रतीक है। ग्वालियर में रखी यह प्रतिमा एक बार फिर चर्चा में है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और आने वाले दिनों में इस पर बड़ा फैसला हो सकता है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 20 May 2026 11:05:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भोजशाला से फिर चर्चा में आई मां वाग्देवी की प्रतिमा, मुगल आक्रमण में हुई थी खंडित, 17 साल से ब्रिटिश म्यूजियम में रखी है मूल प्रतिमा</title>
                                    <description><![CDATA[धार भोजशाला को लेकर हाईकोर्ट के फैसले के बाद लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम में रखी मां वाग्देवी की प्रतिमा फिर चर्चा में आ गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/the-statue-of-maa-vagdevi-came-into-limelight-again-from/article-53549"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/bhojshala-mother-vagdevi-idol.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने धार के भोजशाला को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए इसे हिंदू मंदिर माना है। इस फैसले के दौरान कोर्ट ने पुरातात्विक साक्ष्यों</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">एएसआई की सर्वे रिपोर्ट और ऐतिहासिक तथ्यों का जिक्र किया। इसके बाद एक बार फिर भोजशाला और मां वाग्देवी की मूल प्रतिमा की चर्चा शुरू हो गई है। कहा जाता है कि यह वही प्रतिमा है जिसे हिंदू संगठन भोजशाला की आराध्य देवी मानते हैं। मुग़ल आक्रमण के दौरान यह प्रतिमा खंडित हो गई थी और बाद में इसे अंग्रेजों ने खुदाई में निकाला। अब यह प्रतिमा पिछले 117 साल से लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम के ग्रेट रसल स्ट्रीट में एक कांच के बॉक्स में सुरक्षित रखी गई है। धार से लगभग 7350 किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस प्रतिमा को भारत वापस लाने की मांग वर्षों से उठती रही है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">धार के कृष पाल</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो लंदन में रहते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ने ब्रिटिश म्यूजियम जाकर इस प्रतिमा को करीब से देखा। उन्होंने बताया कि बचपन से ही वे भोजशाला और मां वाग्देवी के बारे में सुनते आए थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए उन्हें इसे देखने की इच्छा थी। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहां पहुंचना आसान नहीं था। म्यूजियम में भारत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चीन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अफ्रीका और अन्य देशों की ऐतिहासिक धरोहरें रखी गई हैं। मां वाग्देवी की यह प्रतिमा एक बड़े कांच के बॉक्स में सुरक्षित रखी गई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे छूने की अनुमति नहीं है। प्रतिमा करीब चार से पांच फीट ऊंची है और इसकी दो भुजाएं टूटी हुई हैं। विवरण के अनुसार इसे जैन देवी अंबिका बताया गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि हिंदू संगठन इसे मां वाग्देवी की मूल प्रतिमा मानते हैं। जानकारी के मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह प्रतिमा 1909 में लंदन ले जाई गई थी।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ब्रिटिश म्यूजियम में भारत से लाकर रखी गई कई मूर्तियां हैं। मां वाग्देवी की प्रतिमा के पास देवी दुर्गा</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">गणेशजी और भगवान महावीर समेत अन्य जैन तीर्थंकरों की प्रतिमाएं भी रखी गई हैं। बताया जा रहा है कि इस सफेद पत्थर की प्रतिमा के नीचे 1034 ईस्वी का शिलालेख भी मौजूद है। भोजशाला से जुड़े लोग दावा करते हैं कि यह प्रतिमा राजा भोज की नगरी धार की विद्या की देवी की है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भोजशाला को लेकर वर्षों से विवाद और संघर्ष होते आए हैं। हिंदू पक्ष इसे मंदिर मानता है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं मुस्लिम पक्ष इसे मस्जिद मानता है। इतिहास में यहां कई बार संघर्ष और विरोध की घटनाएं देखी गई हैं। हिंदू संगठनों का कहना है कि 1952 से लगातार इस प्रतिमा को भारत वापस लाने की मांग की जा रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके लिए कई सरकारों और नेताओं को ज्ञापन भी दिए गए हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">समिति से जुड़े लोगों का कहना है कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">उमा भारती</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक से प्रतिमा लौटाने की मांग की जा चुकी है। 1961 में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इतिहासकार पद्मश्री डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर भी लंदन गए थे और उन्होंने यह साबित किया था कि यह धार की मां वाग्देवी की प्रतिमा है। अब हाईकोर्ट के फैसले के बाद भोजशाला और प्रतिमा की वापसी का मुद्दा फिर से गरमाने लगा है। धार और आसपास के क्षेत्र में इस फैसले के बाद धार्मिक और ऐतिहासिक चर्चाएं भी बढ़ गई हैं।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 16 May 2026 18:43:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भोजशाला विवाद पर दिग्विजय सिंह बोले- ASI रिपोर्ट में मूर्ति का जिक्र नहीं, सुप्रीम कोर्ट करेगा पूजा होगी या इबादत</title>
                                    <description><![CDATA[भोजशाला विवाद पर दिग्विजय सिंह ने सुप्रीम कोर्ट से फैसले की बात कही। ASI रिपोर्ट, पूजा-अर्चना और आर्थिक मुद्दों पर भी केंद्र को घेरा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/digvijay-singh-said-on-bhojshala-controversy-there-is-no/article-53513"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/bhojshala-dispute,-digvijaya-singh.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">धार के भोजशाला विवाद पर एक बार फिर सियासत गरमा गई है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के आदेश के बाद भोजशाला परिसर में पूजा शुरू होने की संभावनाएं बढ़ गई हैं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">और शनिवार सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु वहां पहुंचने लगे हैं। इसी बीच</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मामला अब एक संवेदनशील मोड़ पर है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट को लेना चाहिए। उन्होंने बताया कि भोजशाला एक </span>ASI <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रोटेक्टेड मॉन्यूमेंट है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए यह तय करना कि यहां पूजा होगी या इबादत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कोर्ट के दायरे में आता है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दिग्विजय सिंह ने बातचीत में कहा कि वे इस मामले का अध्ययन कर रहे हैं और जो भी निर्णय होगा</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">वो देश के कानून और नियमों के आधार पर ही होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे कई मामले पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे वाराणसी का ज्ञानवापी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संभल की मस्जिद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और मथुरा-वृंदावन से जुड़े विवाद। भोजशाला के बारे में उन्होंने दोहराया कि यह </span>ASI <span lang="hi" xml:lang="hi">द्वारा संरक्षित स्मारक है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए इसका उपयोग कैसे होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह अंततः सर्वोच्च न्यायालय ही तय करेगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में हिंदू-मुसलमान के नाम पर तनाव बढ़ाना उचित नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इससे समाज में और दूरी पैदा हो सकती है। उनके इस बयान के बाद स्थानीय राजनीति में भी हलचल देखने को मिली है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जब उनसे वाग्देवी की मूर्ति के बारे में सवाल किया गया</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो दिग्विजय सिंह ने कहा कि इस पर पहले भी प्रयास किए गए थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा के समय भी इस दिशा में कोशिशें हुई थीं। उन्होंने कहा कि मूर्ति का विषय भावनात्मक जरूर है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन </span>ASI <span lang="hi" xml:lang="hi">की रिपोर्ट में इसका स्पष्ट जिक्र नहीं है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 16 May 2026 13:54:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भोजशाला पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, धार की ऐतिहासिक इमारत को वाग्देवी मंदिर माना</title>
                                    <description><![CDATA[मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने धार भोजशाला को वाग्देवी मंदिर माना। ASI आदेश रद्द, नमाज की अनुमति खत्म, सुरक्षा बढ़ाई गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/big-decision-of-high-court-on-bhojshala-historical-building-of/article-53456"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/dhar-bhojshala-case-mp-high-court.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने शुक्रवार को धार की भोजशाला के बारे में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें इसे वाग्देवी अर्थात मां सरस्वती का मंदिर मान लिया गया है। कोर्ट के आदेश में कहा गया कि पुरातात्विक साक्ष्यों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऐतिहासिक दस्तावेजों और एएसआई की सर्वे रिपोर्ट से स्पष्ट होता है कि यह स्थल एक प्राचीन मंदिर और संस्कृत शिक्षा केंद्र रहा है। हाईकोर्ट ने अयोध्या मामले का भी जिक्र किया और कहा कि ऐतिहासिक और संरक्षित धार्मिक स्थलों की पहचान में पुरातात्विक तथ्यों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। इस फैसले के बाद धार शहर में सुरक्षा व्यवस्था को तुरंत सक्रिय कर दिया गया। भोजशाला के मुख्य गेट पर बैरिकेड्स लगा दिए गए और बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। शुक्रवार होने के कारण प्रशासन पहले से ही अलर्ट था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि इसी दिन यहां जुमे की नमाज अदा की जाती रही है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग यानी </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">ASI <span lang="hi" xml:lang="hi">के 2003 के उस आदेश को भी रद्द कर दिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें हिंदुओं को पूजा के सीमित अधिकार और मुस्लिम पक्ष को शुक्रवार को नमाज करने की अनुमति दी गई थी। अदालत ने कहा कि 1958 के प्राचीन स्मारक कानून के तहत भोजशाला का प्रबंधन </span>ASI <span lang="hi" xml:lang="hi">के पास रहेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन केंद्र सरकार और </span>ASI <span lang="hi" xml:lang="hi">को यह तय करना होगा कि मंदिर का संचालन और व्यवस्था कैसे होगी। मुस्लिम पक्ष</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो इसे पहले कमाल मौला मस्जिद बताता रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">को अदालत ने सलाह दी कि वो अलग मस्जिद के लिए सरकार से जमीन मांगें। फैसले के बाद शहर काजी वकार सादिक ने कहा कि वे हाईकोर्ट के आदेश का सम्मान करते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन फैसले की समीक्षा के बाद सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। बताया जा रहा है कि मुस्लिम पक्ष के वरिष्ठ वकील सलमान खुर्शीद और शोभा मेनन ने सुनवाई के दौरान </span>ASI <span lang="hi" xml:lang="hi">सर्वे रिपोर्ट पर सवाल उठाए थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनका कहना था कि भोजशाला में किसी स्थापित मूर्ति के प्रमाण नहीं हैं और धार्मिक स्वरूप तय करने का अधिकार सिविल कोर्ट को होना चाहिए।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दूसरी ओर</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">हिंदू पक्ष ने कोर्ट में दावा किया कि भोजशाला सदियों पुराना सरस्वती मंदिर है और यहां नियमित पूजा-अर्चना की परंपरा रही है। उन्होंने </span>ASI <span lang="hi" xml:lang="hi">सर्वे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिलालेख</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्थापत्य अवशेष और राजा भोज के समय के दस्तावेजों का हवाला दिया। जैन समाज ने भी सुनवाई में दावा किया कि यहां मिली प्रतिमा मां अंबिका की है और भोजशाला को जैन तीर्थ घोषित किया जाना चाहिए। करीब 98 दिन चले वैज्ञानिक सर्वे और लंबी सुनवाई के बाद आए इस फैसले को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। धार और इंदौर प्रशासन ने संवेदनशीलता को देखते हुए जिलेभर से करीब 1200 पुलिसकर्मियों को बुलाया है। रिजर्व पुलिस बल और रैपिड एक्शन फोर्स भी तैनात की गई है। शहर में फ्लैग मार्च निकाला गया और दोनों समुदायों से शांति बनाए रखने की अपील की गई। भोज उत्सव समिति ने भोजशाला के बाहर हनुमान चालीसा का पाठ भी कराया।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 15 May 2026 16:51:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>धार सड़क हादसा: पिकअप-स्कॉर्पियो टक्कर में 16 मजदूरों की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[धार सड़क हादसा में ओवरलोड पिकअप पलटकर स्कॉर्पियो से भिड़ी, 15 घायल; केंद्र और राज्य सरकार ने मुआवजे का ऐलान किया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/dhar-road-accident-16-laborers-killed-in-pickup-scorpio-collision/article-52384"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/mp-news-(72).jpg" alt=""></a><br /><p>एमपी के धार जिले में गुरुवार रात बड़ा दिल दहलाने वाला सड़क हादसा हो गया है  इंदौर-अहमदाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग पर मजदूरों से भरी एक पिकअप वाहन अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकराई और पलटने के बाद सामने से आ रही स्कॉर्पियो से जा भिड़ी। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 16 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 15 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। घायलों में कई की हालत गंभीर है, जिन्हें इंदौर रेफर किया गया है। सूत्रों के अनुसार, हादसा रात करीब 8:30 बजे चिकलिया स्थित एक पेट्रोल पंप के पास हुआ।</p>
<p>प्रत्यक्षदर्शियों और शुरुआती जांच के मुताबिक, पिकअप वाहन में क्षमता से अधिक करीब 50 मजदूर सवार थे। वाहन के असंतुलित होने के बाद वह कई बार पलटा और फिर दूसरी ओर जाकर स्कॉर्पियो से टकरा गया। टक्कर इतनी भीषण थी कि कई मजदूर वाहन के नीचे दब गए, जिससे मौके पर ही कई लोगों की जान चली गई।</p>
<h5><strong>कैसे हुआ हादसा</strong></h5>
<p>मजदूर खेत में काम करने के बाद लौट रहे थे। इसी दौरान तेज रफ्तार और ओवरलोडिंग के कारण चालक वाहन पर नियंत्रण खो बैठा।धार पुलिस के मुताबिक, पिकअप पहले डिवाइडर से टकराई, फिर पलटते हुए दूसरी लेन में पहुंची और स्कॉर्पियो से टकरा गई। हादसे के बाद हाईवे पर अफरा-तफरी मच गई और चीख-पुकार गूंजने लगी।स्थानीय लोगों और राहगीरों ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया और घायलों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया।</p>
<h5><strong>अस्पताल में हालात</strong></h5>
<p>इतनी बड़ी संख्या में घायलों के एक साथ पहुंचने से जिला अस्पताल में व्यवस्थाएं चरमरा गईं। कई घायलों को जमीन पर लिटाकर प्राथमिक उपचार देना पड़ा।गंभीर रूप से घायल 10 लोगों को इंदौर रेफर किया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। अस्पताल प्रशासन ने अतिरिक्त संसाधन जुटाकर स्थिति को संभालने की कोशिश की।</p>
<h5><strong>सरकार की प्रतिक्रिया</strong></h5>
<p>इस हादसे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा दुख जताया है। उन्होंने मृतकों के परिजनों के लिए प्रधानमंत्री राहत कोष से 2-2 लाख रुपये और घायलों के लिए 50-50 हजार रुपये की सहायता की घोषणा की।</p>
<p>वहीं, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी घटना को हृदयविदारक बताया। उन्होंने मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपये, गंभीर घायलों को 1-1 लाख और अन्य घायलों को 50-50 हजार रुपये देने के निर्देश दिए हैं।सूत्रों के मुताबिक, प्रशासन को घायलों के बेहतर इलाज और राहत कार्यों के लिए तत्काल निर्देश जारी किए गए हैं। प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 10:36:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
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                <title>MP में 18 महीने बंद रहेगा यह पुल, लोगों को लगाना पड़ेगा 5 किमी लंबा चक्कर</title>
                                    <description><![CDATA[चंबल नदी पुल बंद होने से 18 माह तक यातायात प्रभावित रहेगा। डायवर्सन से 5 किमी अतिरिक्त दूरी तय करनी होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/this-bridge-will-remain-closed-in-mp-for-18-months/article-51666"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/mp-chambal-river-bridge-closure.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">मध्य प्रदेश के धार जिले में चंबल नदी पर बना पुराना पुल अगले करीब डेढ़ साल तक बंद रहेगा। मप्र सड़क विकास निगम द्वारा इस पुल को तोड़कर नए फोरलेन ब्रिज का निर्माण कराया जाएगा, जिसकी प्रक्रिया जल्द शुरू होने वाली है। जैसे ही निर्माण कार्य शुरू होगा, घाटाबिल्लौद मार्ग से गुजरने वाले वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बंद कर दी जाएगी। इसका सीधा असर इंदौर से रतलाम, नीमच और मंदसौर जाने वाले प्रमुख यातायात मार्ग पर पड़ेगा। प्रशासन ने इसके लिए वैकल्पिक डायवर्सन प्लान तैयार किया है, जिसके तहत वाहनों को करीब 5 किलोमीटर लंबा अतिरिक्त चक्कर लगाना होगा। यह बदलाव आने वाले दिनों में क्षेत्रीय ट्रैफिक पैटर्न को प्रभावित करेगा और यात्रियों को अपनी यात्रा योजना में बदलाव करना पड़ेगा।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">सड़क विकास निगम के मुताबिक, वर्तमान पुल संकरा और पुराना है, जिसकी चौड़ाई लगभग 20 फीट है। बढ़ते यातायात और भारी वाहनों के दबाव को देखते हुए इसे अब अनुपयुक्त माना जा रहा है। नए पुल का निर्माण करीब 24 मीटर चौड़ाई के साथ फोरलेन स्वरूप में किया जाएगा। इस परियोजना पर लगभग 40 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है और निर्माण अवधि 18 महीने तय की गई है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">डायवर्सन प्लान के तहत वाहन चालकों को नेशनल हाईवे इंदौर-अहमदाबाद मार्ग का उपयोग करते हुए पानखेड़ी और लेबड़ होकर गुजरना होगा। प्रशासन से इस योजना को अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है, लेकिन मार्ग परिवर्तन से संबंधित संकेतक बोर्ड पहले ही लगा दिए गए हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">यह पुल उस समय बनाया गया था जब क्षेत्र में यातायात का दबाव काफी कम था। पिछले कुछ वर्षों में औद्योगिक गतिविधियों और भारी वाहनों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है। स्थिति यह रही कि बड़े वाहनों को निकालने के लिए पहले अस्थायी मार्ग का निर्माण करना पड़ा था। इसी कारण लंबे समय से नए और चौड़े पुल की मांग उठ रही थी।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">आधिकारिक बयान</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">सड़क विकास निगम, धार के एसडीओ प्रदीप चौहान के अनुसार, “फोरलेन ब्रिज निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। डायवर्सन प्लान को प्रशासन के पास स्वीकृति के लिए भेजा गया है। अनुमति मिलते ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा और इसे 18 महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।</span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;" xml:lang="en-us">”</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">यातायात पर असर</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">पुल बंद होने से इंदौर-रतलाम रूट पर दैनिक यात्रा करने वाले लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी होगी। वैकल्पिक मार्ग से गुजरने पर समय और ईंधन दोनों की खपत बढ़ेगी। इसके अलावा, पानखेड़ी और लेबड़ मार्ग पर ट्रैफिक दबाव बढ़ने की आशंका है, जिससे स्थानीय यातायात भी प्रभावित हो सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">बारिश बनेगी चुनौती</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान समय निर्माण कार्य शुरू करने के लिए अनुकूल है क्योंकि नदी सूखी हुई है। यदि जल्द काम शुरू होता है तो नींव का बड़ा हिस्सा बारिश से पहले पूरा किया जा सकता है। हालांकि मानसून के दौरान 2 से 3 महीने काम प्रभावित होने की संभावना जताई गई है, क्योंकि चंबल नदी में जलस्तर तेजी से बढ़ता है।</span></p>
<p><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">डायवर्सन प्लान को मंजूरी मिलते ही पुल को बंद कर निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। लक्ष्य है कि सिंहस्थ 2028 से पहले यह परियोजना पूरी हो जाए, जिससे क्षेत्र में यातायात सुगम हो सके। नए पुल के तैयार होने के बाद भारी और व्यावसायिक वाहनों को भी राहत मिलेगी, जिससे यह मार्ग क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के लिहाज से और मजबूत बनेगा।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 14:55:08 +0530</pubDate>
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