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                <title>Data Security - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Data Security RSS Feed</description>
                
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                <title>डेटा सुरक्षा भी सीमा सुरक्षा जितनी जरूरी, साइबर रिसर्च सेंटर बनेगा: मुख्यमंत्री मोहन यादव</title>
                                    <description><![CDATA[भोपाल में साइबर सुरक्षा कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा- डेटा आज की सबसे मूल्यवान संपत्ति, प्रदेश में साइबर सिक्योरिटी रिसर्च सेंटर स्थापित किया जाएगा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/6a2fecf36a849/article-56019"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/cyber-security-madhya-pradesh.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">डिजिटल युग में तेजी से बढ़ती तकनीक और साइबर खतरों के बीच मध्यप्रदेश सरकार ने डेटा सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को भोपाल स्थित कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित “राज्य डेटा के लिए साइबर सुरक्षा फ्रेमवर्क को सुदृढ़ बनाने” विषयक कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए कहा कि आज के दौर में डेटा सबसे मूल्यवान संपत्ति बन चुका है और इसकी सुरक्षा देश की सीमाओं की सुरक्षा जितनी ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने प्रदेश में साइबर सिक्योरिटी रिसर्च सेंटर स्थापित करने की घोषणा करते हुए साइबर अपराधों से निपटने के लिए मजबूत और आधुनिक व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में साइबर तकनीक और उससे जुड़ी चुनौतियों का स्वरूप तेजी से बदला है। हर दिन नए प्रकार के साइबर हमले और डिजिटल अपराध सामने आ रहे हैं। ऐसे में केवल तकनीकी विकास पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके साथ सुरक्षा तंत्र को भी मजबूत बनाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर जैसे अभियानों के दौरान आधुनिक तकनीकों और ड्रोन आधारित गतिविधियों ने सुरक्षा के नए आयाम सामने रखे हैं, जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि भविष्य की चुनौतियां पहले से कहीं अधिक जटिल होंगी। डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने समय रहते साइबर अपराध, डीपफेक और डिजिटल सुरक्षा जैसे विषयों को गंभीरता से लिया और देशभर में जागरूकता बढ़ाने के लिए कई पहल शुरू कीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ नागरिकों का भरोसा बनाए रखना सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है और इसके लिए मजबूत साइबर सुरक्षा ढांचा अनिवार्य है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने साइबर सिक्योरिटी रिसर्च सेंटर की स्थापना की घोषणा की। यह केंद्र महू स्थित मिलिट्री कॉलेज ऑफ टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग और अन्य शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से विकसित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह केंद्र साइबर सुरक्षा अनुसंधान, नवाचार, प्रशिक्षण और कौशल विकास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। साथ ही यह साइबर हमलों की पूर्व पहचान और निगरानी के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग करेगा, जिससे संभावित खतरों को समय रहते रोका जा सकेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश लगातार डिजिटल प्रशासन की दिशा में आगे बढ़ रहा है। विभिन्न योजनाओं और सेवाओं को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से नागरिकों तक पहुंचाया जा रहा है। जनधन खातों और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) व्यवस्था का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि डिजिटल भुगतान प्रणाली ने पारदर्शिता बढ़ाई है और लाभार्थियों तक योजनाओं का पूरा लाभ पहुंचाना संभव बनाया है। दुनिया आज भारत की यूपीआई भुगतान प्रणाली की सराहना कर रही है, लेकिन इसके साथ डिजिटल सुरक्षा की जिम्मेदारी भी बढ़ी है। उन्होंने कहा कि साइबर अपराध के मामले कई बार ऐसे होते हैं जिनमें लोगों की वर्षों की जमा पूंजी कुछ ही मिनटों में ठगी का शिकार हो जाती है। ऐसे अपराध दिखाई नहीं देते, लेकिन उनका प्रभाव बेहद गंभीर होता है। इसलिए साइबर अपराधों की रोकथाम, त्वरित कार्रवाई और जनजागरूकता को प्राथमिकता देना आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि डेटा ब्रीच जैसी घटनाओं में सरकार की जिम्मेदारी और जवाबदेही भी तय होती है, इसलिए डेटा सुरक्षा के मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कार्यशाला में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रमुख सचिव एम. सेल्वेन्द्रन ने बताया कि मध्यप्रदेश ई-गवर्नेंस के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। प्रदेश में नागरिकों को बड़ी संख्या में डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं और इन्हें सुरक्षित बनाए रखना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य, शिक्षा, भूमि और वित्तीय जानकारी जैसे संवेदनशील डेटा की सुरक्षा के लिए मजबूत नीतिगत और तकनीकी ढांचे की आवश्यकता है। एमपीएसईडीसी के प्रबंध संचालक आशीष वशिष्ठ ने बताया कि प्रदेश में 1700 से अधिक शासकीय सेवाएं डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि एमपी-सीईआरटी, स्टेट डेटा सेंटर और सुरक्षित स्टेट वाइड एरिया नेटवर्क जैसी व्यवस्थाएं साइबर सुरक्षा को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रही हैं। भविष्य में इन प्रणालियों को और उन्नत बनाने की दिशा में काम किया जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कार्यशाला में एडीजी ए. साई मनोहर ने बताया कि प्रदेश में साइबर अपराधों से निपटने के लिए लगातार क्षमता बढ़ाई जा रही है। वर्तमान में साइबर कमांडो की विशेष टीम कार्यरत है और आने वाले समय में इसकी संख्या बढ़ाई जाएगी। उन्होंने जानकारी दी कि सिंहस्थ-2028 से पहले 44 साइबर कमांडो तैयार किए जाएंगे। इसके अलावा करीब 3 हजार इंजीनियरिंग विद्यार्थियों और युवा स्वयंसेवकों को साइबर वॉरियर के रूप में प्रशिक्षित करने की योजना बनाई गई है। कार्यशाला के दौरान डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन अधिनियम, साइबर अपराध नियंत्रण, डिजिटल अवसंरचना सुरक्षा, सुरक्षित एआई तकनीक और डेटा संरक्षण जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने विस्तृत प्रस्तुति दी। विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने समूह चर्चाओं में भाग लेकर साइबर सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों और समाधान पर सुझाव भी साझा किए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 18:09:32 +0530</pubDate>
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                <title>जनगणना 2026 में ठगी का खतरा, अधिकारियों की चेतावनी- क्यूआर कोड स्कैन करने से करें परहेज</title>
                                    <description><![CDATA[जनगणना 2026 में फर्जीवाड़े से बचने अलर्ट जारी। क्यूआर कोड स्कैन न करें, 1 मई से घर-घर सर्वे शुरू होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/census-2026-alert-issued-to-avoid-fraud-never-scan-any/article-51669"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/census-2026-india,-census-fraud-alert.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">छत्तीसगढ़ में चल रही जनगणना प्रक्रिया के बीच प्रशासन ने संभावित फर्जीवाड़े को लेकर बड़ा अलर्ट जारी किया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि किसी भी अनधिकृत क्यूआर कोड को स्कैन करने से बचें और जानकारी साझा करने से पहले गणनाकर्मी की पहचान अवश्य जांचें। राज्य में 30 अप्रैल तक ऑनलाइन स्व-जनगणना का विकल्प खुला है, जबकि 1 मई से 30 मई के बीच गणनाकर्मी घर-घर जाकर परिवार और संपत्ति से जुड़ी जानकारी एकत्र करेंगे। इस दौरान साइबर ठगी या फर्जी पहचान के जरिए डेटा जुटाने की आशंका को देखते हुए यह चेतावनी जारी की गई है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">अधिकारियों के अनुसार, इस बार सभी गणनाकर्मियों को विशेष पहचान पत्र (आईडी) दिए गए हैं, जिन्हें दिखाना अनिवार्य होगा। नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे किसी भी व्यक्ति को जानकारी देने से पहले उसकी आधिकारिक पहचान की पुष्टि करें। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि जनगणना प्रक्रिया के दौरान किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">स्व-जनगणना प्रक्रिया</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">स्व-जनगणना को इस बार एक वैकल्पिक सुविधा के रूप में पेश किया गया है। नागरिक चाहें तो स्वयं पोर्टल पर जाकर अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं। यह प्रक्रिया पूरी तरह वैकल्पिक है और इसमें भाग लेना अनिवार्य नहीं है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">यदि कोई व्यक्ति स्व-जनगणना नहीं करता है, तो भी उसे किसी तरह की परेशानी या दंड का सामना नहीं करना पड़ेगा। ऐसे मामलों में गणनाकर्मी घर जाकर आवश्यक जानकारी एकत्र करेंगे।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">डेटा सुरक्षा भरोसा</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">डेटा सुरक्षा को लेकर भी प्रशासन ने भरोसा दिलाया है। अधिकारियों का कहना है कि जनगणना अधिनियम 1948 के तहत सभी जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है। यह डेटा एन्क्रिप्टेड सर्वर पर सुरक्षित रहता है और इसका उपयोग केवल सांख्यिकीय और विकास कार्यों के लिए किया जाता है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">मुख्य सचिव और वरिष्ठ अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि वे स्व-जनगणना सुविधा का अधिक से अधिक उपयोग करें, ताकि प्रक्रिया पारदर्शी और तेज़ हो सके। रिपोर्ट्स के अनुसार, कई वरिष्ठ अधिकारियों ने स्वयं भी इस सुविधा के माध्यम से अपनी जानकारी दर्ज की है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">जनगणना निदेशक कार्तिकेय गोयल ने कहा कि किसी भी प्रकार की अफवाह या फर्जी संदेश से सावधान रहना जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनगणना के नाम पर किसी प्रकार का क्यूआर कोड स्कैन करने या भुगतान करने की जरूरत नहीं है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य सटीक आंकड़े जुटाना है, जिससे सरकारी योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू किया जा सके। विशेषज्ञ मानते हैं कि सही डेटा के आधार पर ही शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी नीतियों को मजबूत किया जा सकता है।</span></p>
<p><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">आने वाले दिनों में जब घर-घर सर्वे शुरू होगा, तब प्रशासन की सबसे बड़ी चुनौती प्रक्रिया को सुरक्षित और विश्वसनीय बनाए रखना होगी। नागरिकों की सतर्कता और सहयोग से ही यह लक्ष्य हासिल किया जा सकेगा।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 14:55:01 +0530</pubDate>
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