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                <title>Rescue Operation - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Rescue Operation RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>स्पेन के जंगल में भीषण आग से 12 की मौत, 19 लापता; राहत अभियान जारी</title>
                                    <description><![CDATA[एंडालूसिया के लॉस गैलार्डोस क्षेत्र में लगी भीषण आग ने बड़े इलाके को अपनी चपेट में ले लिया। शुरुआती आशंका बिजली की गिरी हुई तार से आग लगने की है, हालांकि जांच अभी जारी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/12-killed-19-missing-in-massive-fire-in-spains-forest/article-58451"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/spain-wildfire.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">स्पेन के दक्षिणी हिस्से में स्थित एंडालूसिया क्षेत्र के लॉस गैलार्डोस में शुक्रवार को लगी भीषण जंगल की आग ने भारी तबाही मचा दी। इस हादसे में अब तक 12 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 19 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। स्थानीय प्रशासन के अनुसार आठ लोग घायल हुए हैं और इनमें से चार की हालत गंभीर बनी हुई है। आग इतनी तेजी से फैली कि कई लोगों को सुरक्षित निकलने का मौका तक नहीं मिला। राहत और बचाव दल लगातार प्रभावित इलाकों में तलाश अभियान चला रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि लापता लोगों की तलाश के लिए फायरफाइटर, पुलिस और सेना की इमरजेंसी यूनिट मिलकर काम कर रही है। भीषण गर्मी और तेज हवाओं के कारण आग पर पूरी तरह काबू पाने में मुश्किलें आ रही हैं। कई इलाकों से लोगों को पहले ही सुरक्षित स्थानों पर भेज दिया गया था, लेकिन कुछ लोग समय रहते बाहर नहीं निकल सके। स्थानीय अधिकारियों ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक सूचनाओं का पालन करने की अपील की है।</p>
<p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/andalusia-fire-(2).jpg" alt="Andalusia Fire" width="1366" height="749"></img></p>
<p style="text-align:justify;">प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक इस आग की शुरुआत बिजली की गिरी हुई तार से होने की आशंका जताई गई थी। एंडालूसिया की इमरजेंसी सर्विस ने शुरुआती कॉल के आधार पर यही संभावना व्यक्त की, लेकिन बिजली कंपनी एंडेसा ने इस दावे से इनकार किया है। कंपनी का कहना है कि जिस बिजली लाइन की बात सामने आ रही है, उसमें उस समय बिजली का प्रवाह नहीं था। ऐसे में आग लगने के वास्तविक कारणों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और जांच जारी है। हादसे के दौरान सामने आई कई घटनाओं ने स्थिति की गंभीरता को और बढ़ा दिया। अधिकारियों के मुताबिक एक कार में सवार चार लोग आग की चपेट में आने से जिंदा जल गए। वाहन का स्टीयरिंग दाईं ओर होने के कारण आशंका जताई जा रही है कि वे ब्रिटिश नागरिक हो सकते हैं। इसके अलावा सात अन्य लोग भी मृत पाए गए, जिन्होंने अपनी गाड़ियां छोड़कर दूसरे रास्ते से निकलने की कोशिश की थी। प्रशासन का कहना है कि इन लोगों ने निर्धारित निकासी मार्ग का इस्तेमाल नहीं किया, जिससे वे तेजी से फैलती आग के बीच फंस गए।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/andalusia-fire-(1).jpg" alt="Andalusia Fire" width="1366" height="749"></img></p>
<p style="text-align:justify;">अधिकारियों ने लोगों से आपातकालीन स्थिति में केवल प्रशासन द्वारा बताए गए सुरक्षित मार्गों का ही उपयोग करने की अपील की है। राहत दलों के सामने चुनौती यह भी है कि कई इलाकों में धुआं इतना घना है कि दृश्यता बेहद कम हो गई है, जिससे खोज अभियान प्रभावित हो रहा है। 12 लोगों की मौत के साथ यह आग वर्ष 2005 के बाद स्पेन की सबसे घातक जंगल की आग मानी जा रही है। वर्ष 2005 में ग्वाडालाहारा प्रांत में लगी आग में 11 फायरफाइटरों की मौत हुई थी, जिसके बाद स्पेन ने जंगल की आग से निपटने की रणनीति और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली में कई बड़े बदलाव किए थे। इसके बावजूद इस बार की आग ने एक बार फिर प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। आग बुझाने के लिए करीब 150 फायरफाइटर लगातार मोर्चे पर डटे हुए हैं और सेना की इमरजेंसी यूनिट भी राहत कार्य में शामिल है। एंडालूसिया के आपातकाल प्रमुख एंटोनियो सान्ज के अनुसार मृतकों में एक स्पेनिश नागरिक है, जबकि बाकी अधिकांश विदेशी नागरिक बताए जा रहे हैं। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ लोगों ने अधिकारियों की घरों के भीतर सुरक्षित रहने की सलाह का पालन नहीं किया और कारों से निकलने का प्रयास किया।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/andalusia-fire.jpg" alt="Andalusia Fire" width="1366" height="749"></img></p>
<p style="text-align:justify;">इसी दौरान वे आग की लपटों में घिर गए। लॉस गैलार्डोस के मेयर फ्रांसिस्को मिगुएल रेयेस ने इस घटना को अभूतपूर्व बताते हुए कहा कि उन्होंने अपने जीवन में इतना भयावह मंजर पहले कभी नहीं देखा। उनके अनुसार पूरा इलाका ऐसा दिखाई दे रहा है मानो किसी बड़े विस्फोट ने सब कुछ तबाह कर दिया हो। स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि यह हादसा पूरे देश के लिए बेहद दुखद है। यूरोपियन फॉरेस्ट फायर इंफॉर्मेशन सिस्टम के अनुसार इस वर्ष अब तक स्पेन में लगभग 57 हजार हेक्टेयर जंगल जल चुके हैं</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 00:01:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बृहस्पति कुंड में डूबे नर्सिंग छात्र का शव 36 घंटे बाद मिला, दो दिन चला रेस्क्यू ऑपरेशन</title>
                                    <description><![CDATA[सतना के निजी कॉलेज में पढ़ने वाला बिहार का छात्र दोस्तों के साथ घूमने आया था, नहाने के दौरान गहरे पानी और तेज बहाव में लापता हो गया था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/vindhya-rewa/the-body-of-a-nursing-student-who-drowned-in-brihaspati/article-58376"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/brihaspati-kund.jpg" alt=""></a><br /><p class="zlAe0W_TextBase zlAe0W_Text" style="text-align:justify;">सतना जिले के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल बृहस्पति कुंड में डूबे नर्सिंग छात्र का शव करीब 36 घंटे बाद गुरुवार को पानी में तैरता मिला। दो दिनों तक लगातार चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद शव दिखाई देने पर बरौंधा पुलिस और स्थानीय लोगों की मदद से उसे बाहर निकाला गया। पुलिस ने पंचनामा कार्रवाई पूरी करने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। इस घटना से छात्र के साथियों और कॉलेज के विद्यार्थियों में शोक का माहौल है। मृतक की पहचान 25 वर्षीय <span class="zlAe0W_TextBase zlAe0W_Text rFU14q_Emphasis">कुनाल ठाकुर</span> के रूप में हुई है, जो बिहार के समस्तीपुर जिले के नामपुर गांव का रहने वाला था। वह सतना के एक निजी नर्सिंग कॉलेज में पढ़ाई कर रहा था और किराए के मकान में रहकर अपनी पढ़ाई पूरी कर रहा था। बताया जा रहा है कि 7 जुलाई को वह अपने पांच दोस्तों के साथ बृहस्पति कुंड घूमने गया था। सभी दोस्त कुंड में नहाने के लिए उतरे थे। इसी दौरान कुनाल गहरे पानी की ओर चला गया। वहां तेज बहाव होने के कारण वह संतुलन नहीं बना सका और देखते ही देखते पानी में लापता हो गया। उसके दोस्तों ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन बहाव इतना तेज था कि वे सफल नहीं हो सके। घटना की सूचना तुरंत बरौंधा पुलिस और प्रशासन को दी गई। सूचना मिलते ही पुलिस, स्थानीय गोताखोर और रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची। देर शाम तक छात्र की तलाश की गई, लेकिन उसका कोई पता नहीं चला। अगले दिन सुबह फिर से सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया। रेस्क्यू टीम ने कुंड के अलग-अलग हिस्सों में खोजबीन की, जबकि स्थानीय ग्रामीण भी तलाश में जुटे रहे। लगातार करीब 36 घंटे तक चले अभियान के बाद गुरुवार सुबह पानी की सतह पर एक शव तैरता दिखाई दिया। पुलिस और स्थानीय लोगों ने मिलकर शव को बाहर निकाला। पहचान होने पर पुष्टि हुई कि वह कुनाल ठाकुर का ही शव है। शव मिलने की खबर मिलते ही उसके साथियों की आंखें नम हो गईं और कॉलेज के कई छात्र भी मौके पर पहुंच गए।</p>
<p class="zlAe0W_TextBase zlAe0W_Text" style="text-align:justify;">बरौंधा पुलिस ने मौके पर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की। पंचनामा कार्रवाई के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेजा गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद शव परिजनों को सौंपा जाएगा। पुलिस ने घटना की जांच शुरू कर दी है और हादसे की परिस्थितियों की जानकारी जुटाई जा रही है। बृहस्पति कुंड सतना जिले का एक प्रसिद्ध प्राकृतिक पर्यटन स्थल है, जहां हर वर्ष बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। बरसात के मौसम में यहां पानी का बहाव काफी तेज हो जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई जगहों पर पानी की गहराई अचानक बढ़ जाती है, जिससे अनजान पर्यटकों के लिए खतरा बढ़ जाता है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसे के समय भी कुंड में पानी का बहाव सामान्य दिनों की तुलना में अधिक था। कुनाल के दोस्तों ने बताया कि वह नहाते-नहाते थोड़ा आगे चला गया था। कुछ ही सेकंड में वह गहरे हिस्से में पहुंच गया और फिर नजरों से ओझल हो गया। घटना के बाद स्थानीय प्रशासन ने पर्यटकों से सावधानी बरतने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि बरसात के मौसम में जलप्रपातों और कुंडों में नहाने के दौरान विशेष सतर्कता जरूरी है। तेज बहाव और गहरे पानी का अनुमान लगाना कई बार मुश्किल होता है, जिससे दुर्घटनाएं हो सकती हैं। कुनाल ठाकुर के परिजनों को हादसे की सूचना दे दी गई है। परिवार के सदस्य बिहार से सतना के लिए रवाना हो चुके हैं। कॉलेज प्रशासन ने भी छात्र के निधन पर शोक व्यक्त किया है और कहा है कि संस्थान हर संभव सहायता परिवार को उपलब्ध कराएगा। कुनाल के साथ पढ़ने वाले छात्रों ने बताया कि वह पढ़ाई में मेहनती और मिलनसार स्वभाव का था। उसके अचानक चले जाने से पूरे कॉलेज परिसर में गहरा दुख है। कई छात्र उसे याद कर भावुक हो गए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>विंध्य/रीवा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 11:30:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मझगवां अस्पताल के डॉक्टर कक्ष में घुसा जहरीला सांप, वन विभाग ने रेस्क्यू कर टाला बड़ा हादसा</title>
                                    <description><![CDATA[सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सांप दिखते ही मरीजों और स्टाफ में मची अफरातफरी, वन विभाग की टीम ने सुरक्षित रेस्क्यू कर जंगल में छोड़ा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/vindhya-rewa/a-poisonous-snake-entered-the-doctors-room-of-majhgawan-hospital/article-58333"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/majhgawan-hospital.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">जिले के मझगवां स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में उस समय अफरातफरी का माहौल बन गया, जब अस्पताल के डॉक्टर कक्ष के भीतर एक जहरीला सांप दिखाई दिया। सांप को देखते ही अस्पताल में मौजूद मरीज, उनके परिजन और स्वास्थ्य कर्मियों में दहशत फैल गई। कुछ देर के लिए अस्पताल परिसर में हड़कंप जैसी स्थिति बन गई और लोग सुरक्षित स्थानों की ओर हटने लगे। सूचना मिलते ही वन विभाग की रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची और सावधानीपूर्वक सांप को पकड़कर सुरक्षित जंगल में छोड़ दिया। समय रहते की गई इस कार्रवाई से एक संभावित बड़ा हादसा टल गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सुबह अस्पताल की नियमित गतिविधियां चल रही थीं। मरीज उपचार के लिए अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे, जबकि डॉक्टर और अन्य स्वास्थ्य कर्मचारी अपने कार्य में व्यस्त थे। इसी दौरान डॉक्टर कक्ष में अचानक एक जहरीला सांप दिखाई दिया। जैसे ही इसकी जानकारी अस्पताल के कर्मचारियों को मिली, उन्होंने तत्काल कमरे को खाली कराया और मरीजों को भी सुरक्षित दूरी पर रहने की सलाह दी।</p>
<p style="text-align:justify;">कुछ ही मिनटों में यह खबर पूरे अस्पताल परिसर में फैल गई। कई मरीज और उनके परिजन घबराकर अस्पताल के बाहर निकल आए। हालांकि अस्पताल प्रशासन ने स्थिति को शांत बनाए रखने की कोशिश की और किसी भी प्रकार की अफवाह फैलने से रोका। इसके बाद तुरंत वन विभाग को सूचना दी गई। सूचना मिलने पर वन विभाग की रेस्क्यू टीम बिना देर किए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंची। टीम के सदस्य विनोद पाण्डेय और लखन यादव ने पूरे क्षेत्र का निरीक्षण किया और सांप की गतिविधियों पर नजर रखी। काफी सावधानी और अनुभव के साथ उन्होंने सांप को सुरक्षित तरीके से पकड़ लिया। रेस्क्यू के दौरान यह सुनिश्चित किया गया कि न तो किसी व्यक्ति को नुकसान पहुंचे और न ही सांप को किसी प्रकार की चोट आए।</p>
<p style="text-align:justify;">रेस्क्यू टीम ने बताया कि सांप जहरीली प्रजाति का था। यदि समय रहते उसे नहीं पकड़ा जाता तो अस्पताल में मौजूद लोगों के लिए खतरा बढ़ सकता था। सांप को पकड़ने के बाद उसे सुरक्षित कंटेनर में रखा गया और वन क्षेत्र में ले जाकर प्राकृतिक वातावरण में छोड़ दिया गया। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि बरसात के मौसम में इस तरह की घटनाएं बढ़ जाती हैं। लगातार बारिश के कारण बिलों और झाड़ियों में रहने वाले सांप सुरक्षित स्थानों की तलाश में आबादी वाले इलाकों, मकानों, स्कूलों और सरकारी भवनों तक पहुंच जाते हैं। अस्पताल, जहां हर समय बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहते हैं, वहां इस प्रकार की घटनाओं को गंभीरता से लेना जरूरी होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">अस्पताल प्रशासन ने वन विभाग की त्वरित कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि यदि रेस्क्यू टीम समय पर नहीं पहुंचती तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी। कर्मचारियों ने भी राहत की सांस ली कि बिना किसी नुकसान के पूरे घटनाक्रम का सफलतापूर्वक समाधान हो गया। घटना के बाद अस्पताल परिसर की साफ-सफाई और निरीक्षण भी कराया गया। अधिकारियों ने भवन के आसपास झाड़ियों और घास की सफाई कराने के निर्देश दिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की संभावना कम हो सके। साथ ही अस्पताल परिसर में मौजूद पुराने सामान और अनुपयोगी वस्तुओं को हटाने की भी योजना बनाई गई है, क्योंकि ऐसे स्थानों पर अक्सर सांप और अन्य जीव छिप जाते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>विंध्य/रीवा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 10:08:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>इतमा फॉल में डूबे युवक का शव दो दिन बाद बरामद, एसडीईआरएफ ने तेज बहाव के बीच चलाया कठिन रेस्क्यू अभियान</title>
                                    <description><![CDATA[रीवा के इतमा फॉल में दो दिन पहले डूबे चित्रकूट निवासी 21 वर्षीय युवक का शव तेज बहाव के बीच फंसा मिला, एसडीईआरएफ ने जोखिम उठाकर बाहर निकाला।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/vindhya-rewa/body-of-youth-drowned-in-itma-fall-recovered-after-two/article-57446"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/waterfall-accident.mp4" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रीवा जिले के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल इतमा फॉल में दो दिन पहले डूबे युवक का शव आखिरकार मंगलवार को बरामद कर लिया गया। तेज बहाव और चट्टानों के बीच फंसे शव तक पहुंचना बेहद मुश्किल माना जा रहा था, लेकिन राज्य आपदा आपातकालीन प्रतिक्रिया बल (SDERF) की टीम ने कई घंटे की मशक्कत और सावधानीपूर्वक रेस्क्यू अभियान चलाकर शव को बाहर निकाल लिया। इसके बाद शव को आवश्यक कानूनी कार्रवाई के लिए पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया। घटना के बाद मृतक के परिजनों में शोक का माहौल है, वहीं इलाके में भी इस हादसे की चर्चा बनी हुई है।  मृतक की पहचान सोनू खान (21 वर्ष) पिता बन्ने खान, निवासी बरगढ़, चित्रकूट (उत्तर प्रदेश) के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि सोनू अपने साथियों के साथ घूमने के लिए रीवा जिले के इतमा फॉल पहुंचा था। इसी दौरान वह पानी में उतर गया और अचानक तेज बहाव की चपेट में आ गया। मौके पर मौजूद लोगों ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन पानी का बहाव इतना तेज था कि कुछ ही पलों में वह आंखों से ओझल हो गया। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और प्रशासन मौके पर पहुंचा। शुरुआती स्तर पर स्थानीय लोगों की मदद से युवक की तलाश शुरू की गई, लेकिन तेज धारा और गहरे पानी के कारण सफलता नहीं मिल सकी। इसके बाद एसडीईआरएफ की विशेष टीम को बुलाया गया, जिसने आधुनिक रेस्क्यू उपकरणों और सुरक्षा संसाधनों के साथ खोज अभियान शुरू किया। लगातार दो दिनों तक चले सर्च ऑपरेशन के दौरान गोताखोरों ने फॉल के विभिन्न हिस्सों में तलाश की। पानी का स्तर अधिक होने और लगातार बहाव के कारण अभियान काफी चुनौतीपूर्ण बना रहा। कई स्थानों पर चट्टानों के बीच गहराई अधिक होने से गोताखोरों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ी। अधिकारियों के अनुसार रेस्क्यू टीम ने मौसम और जलधारा की स्थिति को देखते हुए चरणबद्ध तरीके से अभियान चलाया। मंगलवार को खोज अभियान के दौरान टीम को फॉल के बीचों-बीच चट्टानों के बीच एक शव फंसा हुआ दिखाई दिया। शव जिस स्थान पर था, वहां तक पहुंचना सामान्य परिस्थितियों में लगभग असंभव माना जा रहा था। तेज बहते पानी और फिसलन भरी चट्टानों के कारण किसी भी प्रकार की जल्दबाजी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती थी। इसके बावजूद एसडीईआरएफ के प्रशिक्षित जवानों ने रस्सियों, सुरक्षा बेल्ट और अन्य रेस्क्यू उपकरणों की मदद से धीरे-धीरे शव तक पहुंच बनाई।<br /><br /></p><video style="width:100%;height:auto;" src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/waterfall-accident.mp4" controls=""></video>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">काफी प्रयासों के बाद टीम ने शव को सुरक्षित बाहर निकाला। रेस्क्यू अभियान के दौरान पूरी सतर्कता बरती गई ताकि किसी भी जवान की जान जोखिम में न पड़े। शव बाहर लाने के बाद पुलिस ने मौके पर आवश्यक पंचनामा कार्रवाई पूरी की और उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। आगे की वैधानिक प्रक्रिया पुलिस द्वारा की जा रही है। स्थानीय लोगों ने एसडीईआरएफ की टीम के प्रयासों की सराहना की। उनका कहना था कि जिस स्थान पर शव फंसा हुआ था, वहां पहुंचना बेहद कठिन था। यदि प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम समय पर नहीं पहुंचती तो शव को निकालना और अधिक मुश्किल हो सकता था। लोगों ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में आपदा राहत बल की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। घटना के बाद मृतक के परिजन भी मौके पर पहुंचे। शव की पहचान होने के बाद परिवार का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। परिजनों ने प्रशासन से आवश्यक कार्रवाई जल्द पूरी करने की मांग की। आसपास मौजूद लोगों ने भी परिवार को सांत्वना दी। पूरे क्षेत्र में हादसे के बाद शोक का माहौल बना रहा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इतमा फॉल रीवा जिले का प्रमुख प्राकृतिक पर्यटन स्थल है, जहां बारिश के मौसम में बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। हालांकि मानसून के दौरान यहां पानी का बहाव काफी तेज हो जाता है। प्रशासन समय-समय पर लोगों से सावधानी बरतने और गहरे पानी में नहीं उतरने की अपील करता है। इसके बावजूद कई पर्यटक चेतावनी को नजरअंदाज कर जोखिम उठाते हैं, जिससे इस तरह की घटनाएं सामने आती रहती हैं। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के प्रयास किए जा रहे हैं। संवेदनशील स्थानों पर चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं और जरूरत पड़ने पर पुलिस व होमगार्ड की तैनाती भी की जाती है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि बारिश के मौसम में जलप्रपातों और नदी-नालों के पास विशेष सतर्कता बरतें तथा किसी भी स्थिति में तेज बहाव वाले पानी में प्रवेश न करें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>विंध्य/रीवा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 18:03:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>वेनेजुएला में फिर 5.6 तीव्रता का भूकंप, मौतों का आंकड़ा 1430 पहुंचा, हजारों अब भी लापता</title>
                                    <description><![CDATA[लगातार आ रहे झटकों से बढ़ी तबाही, राहत और बचाव अभियान जारी; भारत समेत कई देशों ने भेजी मदद]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/6a40c99786e64/article-57184"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/venezuela-earthquake-(4).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वेनेजुएला में भूकंप का संकट लगातार गहराता जा रहा है। रविवार को एक बार फिर 5.6 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया, जिससे पहले से तबाह इलाकों में दहशत और बढ़ गई। यूरो-मेडिटेरेनियन सीस्मोलॉजिकल सेंटर (EMSC) के मुताबिक, इस बार भूकंप का केंद्र अरागुआ तट के पास समुद्र में लगभग 30 किलोमीटर की गहराई में था। इससे पहले 24 जून को 7.2 और 7.5 तीव्रता के दो शक्तिशाली भूकंप आए थे, जबकि शनिवार को भी 4.9 तीव्रता का झटका महसूस किया गया था। लगातार आ रहे झटकों के कारण राहत कार्य प्रभावित हो रहे हैं और कई इमारतें, जो पहले से कमजोर हो चुकी थीं, अब पूरी तरह ढह गई हैं। अब तक इस आपदा में 1430 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 3300 से अधिक लोग घायल हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि भूकंप आने के 72 घंटे बाद भी करीब 68,900 लोग लापता हैं। बचाव दल लगातार मलबे में फंसे लोगों की तलाश कर रहे हैं, लेकिन समय बीतने के साथ उम्मीदें कम होती जा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी बड़े भूकंप के बाद शुरुआती 48 से 72 घंटे सबसे महत्वपूर्ण होते हैं, क्योंकि इसी दौरान जीवित लोगों को सुरक्षित निकालने की संभावना सबसे अधिक रहती है। कई प्रभावित इलाकों में हालात बेहद कठिन बने हुए हैं। राहत टीमों की संख्या जरूरत के मुकाबले कम पड़ रही है। ऐसे में स्थानीय लोग अपने परिजनों की तलाश खुद कर रहे हैं। कई जगहों पर परिवार हथौड़े, फावड़े और दूसरे साधारण औजारों की मदद से मलबा हटाते दिखाई दे रहे हैं। कहीं कोई अपने बेटे को ढूंढ रहा है तो कहीं कोई अपने माता-पिता के जिंदा मिलने की उम्मीद में लगातार मलबा हटाने में जुटा है। हालात ऐसे हैं कि लोग बिना थके घंटों तक राहत कार्य में लगे हुए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राजधानी कराकस सहित कई शहरों में सैकड़ों इमारतों को भारी नुकसान पहुंचा है। हजारों घर पूरी तरह तबाह हो चुके हैं, जबकि कई इमारतें रहने लायक नहीं बची हैं। बड़ी संख्या में लोग अपने घर छोड़कर सड़कों, पार्कों और खुले मैदानों में अस्थायी टेंट लगाकर रहने को मजबूर हैं। बिजली और पानी जैसी बुनियादी सेवाएं भी कई इलाकों में प्रभावित हैं। सरकारी बिजली कंपनी के कर्मचारी क्षतिग्रस्त बिजली लाइनों की मरम्मत में जुटे हुए हैं, लेकिन लगातार आफ्टरशॉक आने से काम में दिक्कतें आ रही हैं। वेनेजुएला सरकार का कहना है कि राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। अमेरिका, मेक्सिको, कोलंबिया, अल सल्वाडोर, स्विट्जरलैंड समेत कई देशों से बचावकर्मी मौके पर पहुंचे हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 861 से अधिक अंतरराष्ट्रीय बचावकर्मी प्रभावित क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र ने भी 25 अंतरराष्ट्रीय सर्च एंड रेस्क्यू टीमों के करीब 1000 आपातकालीन कर्मियों को भेजने की घोषणा की है। भारी मशीनें, दमकल विभाग की टीमें और मेडिकल स्टाफ लगातार प्रभावित इलाकों तक पहुंचाए जा रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भारत ने भी वेनेजुएला की मदद के लिए 'ऑपरेशन अमिस्ताद' शुरू किया है। स्पेनिश भाषा में 'अमिस्ताद' का अर्थ दोस्ती होता है। इस अभियान के तहत भारतीय वायुसेना के दो C-17 ग्लोबमास्टर विमानों से लगभग 35 टन राहत सामग्री भेजी गई है। इनमें आवश्यक दवाइयां, मेडिकल उपकरण और राहत सामग्री शामिल हैं। इसके साथ ही 60 पैरा फील्ड हॉस्पिटल यूनिट की 41 सदस्यीय मेडिकल टीम भी वेनेजुएला पहुंची है। डॉक्टरों और नर्सों की यह टीम घायलों का इलाज करेगी और जरूरत पड़ने पर अस्थायी अस्पताल भी स्थापित करेगी। राहत कार्यों के सामने सबसे बड़ी चुनौती देश के मुख्य एयरपोर्ट का क्षतिग्रस्त होना है। इंटरनेशनल रेस्क्यू कमेटी (IRC) की चीफ एलिनोर रेक्स ने बताया कि एयरपोर्ट को नुकसान पहुंचने के कारण बड़ी मात्रा में राहत सामग्री प्रभावित इलाकों तक पहुंचाने में काफी मुश्किलें आ रही हैं। उन्होंने कहा कि पड़ोसी देश कोलंबिया में पर्याप्त राहत सामग्री उपलब्ध है, लेकिन उसे वेनेजुएला तक पहुंचाने में परिवहन सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है। आने वाले दिनों में भोजन, स्वच्छ पेयजल, दवाइयां और अस्थायी आश्रय उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन फॉर माइग्रेशन (IOM) के अनुसार, इस भीषण भूकंप से करीब 67.6 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। इनमें लगभग 20 लाख लोग राजधानी कराकस में रहते हैं। हजारों परिवार बेघर हो चुके हैं और अस्थायी शिविरों में रहने को मजबूर हैं। स्कूल, अस्पताल और कई सरकारी इमारतें भी क्षतिग्रस्त हुई हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 14:10:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>शुभेंदु अधिकारी बोले बंगाल में UCC लागू करने का दावा</title>
                                    <description><![CDATA[कोलकाता में कार्यक्रम के दौरान बोले शुभेंदु अधिकारी, घुसपैठ, लव जिहाद और धर्मांतरण पर सख्त कानून लाने की बात]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/shubhendu-adhikari-claims-to-implement-ucc-in-bengal/article-57084"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/suvendu-adhikari.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">कोलकाता में रविवार को एक कार्यक्रम के दौरान पश्चिम बंगाल के नेता <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Suvendu Adhikari</span></span> ने बड़ा राजनीतिक बयान दिया। वंदे मातरम् के 150 साल पूरे होने पर रवींद्र सदन में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि अगर उनकी सरकार आती है तो राज्य में समान नागरिक संहिता यानी UCC लागू किया जाएगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि लव जिहाद, लैंड जिहाद और जबरन धर्मांतरण जैसी घटनाओं के खिलाफ सख्त कानून लाया जाएगा। मंच पर मौजूद लोग उनकी बातों को सुनते रहे, माहौल थोड़ा गंभीर भी रहा। उन्होंने अपने भाषण में अवैध घुसपैठ का मुद्दा भी उठाया। अधिकारी ने कहा कि जो लोग अवैध तरीके से भारत में आए हैं और देश की संस्कृति या सुरक्षा के खिलाफ गतिविधियों में शामिल पाए जाते हैं, उन्हें राज्य में रहने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों की पहचान की जाएगी और उन्हें वापस उनके देश भेजा जाएगा। इस दौरान उन्होंने सीमावर्ती जिलों का भी जिक्र किया और कहा कि वहां होल्डिंग सेंटर बनाए गए हैं ताकि घुसपैठियों की पहचान और प्रक्रिया को तेज किया जा सके। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि धार्मिक उत्पीड़न के कारण भारत आए हिंदू शरणार्थियों को घुसपैठिया नहीं माना जाएगा और उन्हें नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के तहत नागरिकता दी जाएगी।कार्यक्रम के दौरान उनका भाषण लगातार राजनीतिक और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर केंद्रित रहा। उन्होंने कहा कि सेना का अपमान किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। साथ ही उन्होंने उन लोगों की आलोचना की जो उनके अनुसार भारतीय सेना के खिलाफ टिप्पणी करते हैं या आतंकवाद से जुड़े मुद्दों पर चुप रहते हैं। इसी क्रम में उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर और पहलगाम आतंकी हमले का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं पर मौन रहना सही नहीं है। उनका कहना था कि राष्ट्रीय मुद्दों पर स्पष्ट रुख जरूरी है।</p>
<p>इसी मंच से उन्होंने श्यामा प्रसाद मुखर्जी के विचारों का भी जिक्र किया और कहा कि “एक देश, एक विधान, एक प्रधान, एक निशान” के सिद्धांत के प्रति उनकी सरकार प्रतिबद्ध रहेगी। उन्होंने यह भी कहा कि बंगाल की सांस्कृतिक पहचान और राष्ट्रीय चरित्र को कमजोर नहीं होने दिया जाएगा। भाषण के दौरान उन्होंने आपातकाल का विरोध करने वालों का भी उल्लेख किया और कहा कि ऐसे लोगों को 9 अगस्त को सम्मानित किया जाएगा। इसके लिए ‘लोकतंत्र सेनानी’ समन्वय समिति बनाने की बात भी कही गई। हालांकि कार्यक्रम सिर्फ राजनीतिक बयान तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने प्रशासनिक और विकास से जुड़े कुछ फैसलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए जमीन उपलब्ध कराई गई है और सीमा सुरक्षा बल (BSF) को 600 एकड़ जमीन देने की प्रक्रिया 45 दिनों में पूरी की जाएगी। उनका कहना था कि इससे सीमा से जुड़ा पुराना विवाद भी खत्म होगा। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में जनगणना से जुड़ी प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया गया है, जो लंबे समय से रुकी हुई थी।</p>
<p>अपने संबोधन में उन्होंने सरकारी योजनाओं और प्रशासनिक बदलावों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि आयुष्मान भारत योजना को लागू किया गया है, जिससे गरीब परिवारों को 5 लाख रुपये तक मुफ्त इलाज की सुविधा मिलेगी। साथ ही उन्होंने कहा कि सरकारी नौकरियों और शिक्षक भर्ती की तैयारी कर रहे युवाओं को उम्र सीमा में 5 साल की छूट दी जाएगी। IAS और IPS अधिकारियों को केंद्र सरकार के ट्रेनिंग प्रोग्राम में शामिल होने की अनुमति भी दी गई है। भाषण में उन्होंने यह भी कहा कि नए आपराधिक कानून लागू किए जाएंगे जो पुराने IPC और CrPC की जगह लेंगे। इसके अलावा 2021 की चुनावी हिंसा में मारे गए बीजेपी कार्यकर्ताओं के परिवारों को आर्थिक सहायता या सरकारी नौकरी देने की बात भी सामने आई। मदरसा विभाग से जुड़ी वित्तीय सहायता योजनाओं को बंद करने का फैसला भी उन्होंने उल्लेख किया।कार्यक्रम के बाद शुभेंदु अधिकारी ने भवानीपुर में भाजपा के नए कार्यालय का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि अब वह महीने में दो दिन वहां लोगों से मिलेंगे और उनकी समस्याएं सुनेंगे। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Jun 2026 11:52:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>वेनेजुएला में फिर भूकंप, 920 मौतें; राहत अभियान जारी</title>
                                    <description><![CDATA[4.9 तीव्रता के नए झटके से कराकास तक हिली धरती, हजारों बेघर और लापता, लोग खुद मलबे में तलाश रहे अपनों को]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/6a3f508c1708e/article-57081"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/venezuela-earthquake-(3).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">दक्षिण अमेरिकी देश <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Venezuela</span></span> में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। 25 जून को आए दो बड़े भूकंपों के बाद शनिवार को एक और झटका दर्ज किया गया, जिसकी तीव्रता 4.9 रिक्टर मापी गई। यह भूकंप देश के उत्तरी तट के पास आया और इसके झटके राजधानी कराकास से लेकर माराके तक महसूस किए गए। रॉयटर्स के मुताबिक, लोग अचानक आए इस झटके से एक बार फिर दहशत में आ गए और कई इलाकों में पहले से जर्जर इमारतें और कमजोर हो गईं। जमीन लगातार कांप रही है और लोगों में डर का माहौल अभी भी खत्म नहीं हुआ है। पिछले भूकंपों के बाद जो तबाही सामने आई थी, वह अब और गंभीर रूप लेती दिख रही है। शुरुआती रिपोर्टों में मरने वालों की संख्या बढ़कर 920 तक पहुंच चुकी है, जबकि 3360 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि करीब 51,700 लोग अब भी लापता हैं, जिनकी तलाश में राहत टीमें लगातार जुटी हैं। अधिकारियों के अनुसार अब तक 243 लोगों को मलबे से जिंदा निकाला गया है, लेकिन जैसे-जैसे समय बीत रहा है, उम्मीदें कमजोर होती जा रही हैं। कई जगहों पर मलबा हटाने का काम धीमा है और संसाधनों की कमी साफ दिखाई दे रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">राजधानी कराकास और उत्तरी तटीय इलाकों में हालात सबसे ज्यादा खराब बताए जा रहे हैं। कई इमारतें पूरी तरह ढह चुकी हैं, जबकि कुछ इमारतें इतनी कमजोर हो गई हैं कि उनमें रहना खतरे से खाली नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी राहत टीमें हर जगह नहीं पहुंच पा रही हैं, जिसकी वजह से लोग खुद ही अपने परिजनों की तलाश में जुटे हैं। कई परिवार हाथों में हथौड़े, फावड़े और दूसरे औजार लेकर मलबा हटाने में लगे हैं। यह दृश्य बेहद दर्दनाक है, जहां लोग अपने अपनों को खोजने के लिए टूटी हुई इमारतों के बीच दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। कहीं उम्मीद दिखती है तो कहीं निराशा का सन्नाटा पसरा है। ला गुआइरा और आसपास के इलाकों से जो तस्वीरें सामने आई हैं, वे पूरी स्थिति को और भयावह बना देती हैं। कहीं मलबे के नीचे दबे शव दिखाई दे रहे हैं, तो कहीं लोग अपने पालतू जानवरों को बचाते हुए नजर आए। एक तस्वीर में एक व्यक्ति मलबे से कुत्ते को बाहर निकालते हुए दिखा, जो इस आपदा के बीच इंसानियत की एक छोटी सी झलक देता है। लेकिन दूसरी तरफ टूटे घरों और बिखरी हुई जिंदगी ने लोगों को पूरी तरह झकझोर दिया है। कई लोग अपने घरों के सामने खड़े होकर सिर्फ मलबे को देखते रह जाते हैं, जैसे अब कुछ बचा ही न हो।</p>
<p style="text-align:justify;">स्थानीय प्रशासन के अनुसार, राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है, लेकिन भूकंप प्रभावित इलाकों का दायरा इतना बड़ा है कि हर जगह तुरंत पहुंचना मुश्किल हो रहा है। कुछ जगहों पर संचार व्यवस्था भी प्रभावित हुई है, जिससे समन्वय में दिक्कतें आ रही हैं। लगातार आ रहे झटकों के कारण और भी इमारतें गिरने का खतरा बना हुआ है। लोगों को खुले स्थानों पर रहने की सलाह दी जा रही है, लेकिन बड़ी संख्या में विस्थापित लोग अस्थायी शिविरों में मुश्किल हालात में रह रहे हैं।राहत शिविरों में भीड़ बढ़ती जा रही है और खाने-पीने की चीजों की कमी महसूस की जा रही है। कई परिवार अपने घरों से सबकुछ खोकर सिर्फ एक-दूसरे को बचाने की कोशिश में लगे हैं। बच्चों और बुजुर्गों की हालत सबसे ज्यादा चिंताजनक बताई जा रही है। कई जगहों पर मेडिकल टीमों को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे घायलों का इलाज समय पर नहीं हो पा रहा। मौसम और लगातार आफ्टरशॉक्स ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। लोग रातें खुले आसमान के नीचे बिता रहे हैं, और हर हल्की सी हलचल उन्हें फिर से डराने लगती है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Jun 2026 11:38:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>वेनेजुएला भूकंप में 235 से ज्यादा मौतें, मलबे में फंसे लोगों की तलाश जारी</title>
                                    <description><![CDATA[दोहरे भूकंप से सैकड़ों मौतें, हजारों घायल; राहत और बचाव अभियान में जुटी दुनिया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/more-than-235-dead-in-venezuela-earthquake-search-continues-for/article-56978"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/venezuela-earthquake-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="zlAe0W_TextBase zlAe0W_Text" style="text-align:justify;">वेनेजुएला में आए भीषण दोहरे भूकंप ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक इन भूकंपों में कम से कम 235 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि हजारों लोग घायल बताए जा रहे हैं। कई लोग अब भी लापता हैं और आशंका जताई जा रही है कि बड़ी संख्या में लोग मलबे के नीचे दबे हो सकते हैं। राहत और बचाव दल लगातार रात भर अभियान चला रहे हैं, लेकिन समय तेजी से निकलता जा रहा है और जीवित लोगों को तलाशने की उम्मीद धीरे-धीरे कम होती जा रही है। सबसे ज्यादा तबाही तटीय शहर ला ग्वाइरा, राजधानी कराकास और आसपास के इलाकों में देखने को मिली है। कई इमारतें पूरी तरह ढह गईं, सड़कें टूट गईं और हजारों परिवार बेघर हो गए। जिन लोगों के घर बच भी गए हैं, वे आफ्टरशॉक्स के डर से खुले मैदानों में रात गुजारने को मजबूर हैं। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार यह वेनेजुएला में एक सदी से भी अधिक समय में आए सबसे शक्तिशाली भूकंपों में से एक माना जा रहा है।</p>
<p class="zlAe0W_TextBase zlAe0W_Text" style="text-align:justify;">कराकास की रहने वाली ओरिआना वेलास्केज़ अपने पिता की तलाश में तटीय शहर काराबालेडा पहुंचीं। उन्होंने वहां के हालात को देखकर कहा कि पूरा इलाका किसी युद्ध क्षेत्र जैसा लग रहा था। उनके अनुसार उन्होंने रास्ते में कई शव देखे और जिस इमारत में उनके पिता रहते थे, वह पूरी तरह ढह चुकी थी। स्वयंसेवी बचावकर्मी मलबे में लोगों की तलाश करते दिखाई दिए। वेलास्केज़ ने कहा कि उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि उनके जीवन में ऐसा दिन आएगा। देर रात तक उन्हें अपने पिता का कोई पता नहीं चल पाया और उन्होंने अगले दिन भी खोज जारी रखने की बात कही। भूकंप के बाद अस्पतालों में भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। कई जगह डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की कमी की खबरें भी सामने आ रही हैं। घायल लोगों का इलाज अस्थायी शिविरों और खुले मैदानों में किया जा रहा है। बिजली और संचार सेवाएं भी कई इलाकों में प्रभावित हुई हैं, जिससे राहत कार्यों में मुश्किलें बढ़ गई हैं।</p>
<p class="zlAe0W_TextBase zlAe0W_Text" style="text-align:justify;">यह आपदा ऐसे समय में आई है जब वेनेजुएला पहले से ही आर्थिक और राजनीतिक संकट से जूझ रहा है। लंबे समय से जारी आर्थिक कठिनाइयों के कारण देश की बुनियादी सेवाएं दबाव में थीं और अब इस प्राकृतिक आपदा ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। कई विशेषज्ञों का कहना है कि पुनर्वास और पुनर्निर्माण का काम बेहद चुनौतीपूर्ण होगा। दुनिया भर से मदद पहुंचनी शुरू हो गई है। कई देशों ने राहत सामग्री, चिकित्सा सहायता और बचाव दल भेजने की घोषणा की है। अंतरराष्ट्रीय मानवीय संगठनों ने भी प्रभावित इलाकों में सहायता पहुंचाने की तैयारी तेज कर दी है। विदेशी सहायता के लिए वित्तीय मदद की घोषणाएं लगातार हो रही हैं, हालांकि विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि शुरुआती 72 घंटे सबसे महत्वपूर्ण होते हैं और इसी अवधि में अधिकतम लोगों को जीवित बचाया जा सकता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई इलाकों में अब भी भारी मशीनरी की जरूरत है क्योंकि हाथों से मलबा हटाने में बहुत समय लग रहा है। कई परिवार अपने प्रियजनों की तलाश में अस्पतालों, राहत शिविरों और ढही हुई इमारतों के आसपास भटकते नजर आ रहे हैं। कुछ लोग तस्वीरें लेकर घूम रहे हैं ताकि किसी तरह अपने रिश्तेदारों का पता चल सके। सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में आपातकालीन व्यवस्थाएं लागू कर दी हैं और सेना को भी राहत कार्यों में लगाया गया है। अधिकारियों ने लोगों से अफवाहों से बचने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है। साथ ही उन इलाकों से दूर रहने को कहा गया है जहां इमारतों के गिरने का खतरा बना हुआ है। भूकंप ने सिर्फ इमारतें नहीं गिराईं, बल्कि हजारों परिवारों की जिंदगी भी बदल दी है। जिन लोगों ने अपने घर, कारोबार या प्रियजन खो दिए हैं, उनके लिए आने वाले दिन बेहद कठिन होंगे। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 11:33:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>वेनेजुएला में 39 सेकेंड में दो बड़े भूकंप, 164 की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[7.5 और 7.2 तीव्रता के झटकों से 60 सेकेंड तक कांपी धरती, 971 घायल, देश में इमरजेंसी घोषित और रेस्क्यू ऑपरेशन जारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/two-major-earthquakes-in-39-seconds-in-venezuela-164-dead/article-56953"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/venezuela-earthquake.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला में बुधवार शाम महज 39 सेकेंड के अंतराल में आए दो शक्तिशाली भूकंपों ने भारी तबाही मचा दी है। पहले 7.2 तीव्रता का झटका और उसके ठीक एक मिनट के भीतर 7.5 तीव्रता का दूसरा बड़ा झटका दर्ज किया गया। इन दोनों झटकों के बाद करीब 60 सेकेंड तक धरती लगातार हिलती रही, जिससे लोगों में दहशत फैल गई और कई शहरों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे और अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इन भूकंपों का केंद्र पश्चिमी वेनेजुएला के तटीय इलाके के पास बताया जा रहा है, जो राजधानी कराकस से लगभग 290 किलोमीटर दूर है। झटकों की तीव्रता इतनी अधिक थी कि इसका असर राजधानी कराकस सहित कई बड़े शहरों तक महसूस किया गया। कई इमारतें या तो ढह गईं या गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गईं। कराकस एयरपोर्ट की छत का हिस्सा गिरने की भी पुष्टि हुई है, जिससे यात्रियों में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। अब तक की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक इस प्राकृतिक आपदा में 164 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 971 लोग घायल बताए जा रहे हैं। कई लोग अभी भी लापता हैं और आशंका जताई जा रही है कि मलबे के नीचे बड़ी संख्या में लोग फंसे हो सकते हैं। रेस्क्यू टीमें लगातार राहत और बचाव कार्य में जुटी हुई हैं, लेकिन कई इलाकों में सड़कें टूटने और मलबा जमा होने के कारण पहुंचने में कठिनाई हो रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भूकंप के बाद कम से कम 20 आफ्टरशॉक्स भी दर्ज किए गए हैं, जिससे लोगों में डर और बढ़ गया है। कई इलाकों में लोग घरों से बाहर निकलकर खुले मैदानों में रात बिताने को मजबूर हैं। स्थानीय प्रशासन ने नागरिकों से सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की है। यह भूकंप ऐसे समय में आया जब देश में राष्ट्रीय अवकाश था और लोग ऐतिहासिक स्वतंत्रता दिवस मना रहे थे। इसी कारण अधिकतर लोग अपने घरों में मौजूद थे, जिससे हताहतों की संख्या और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह झटके किसी सामान्य कार्य दिवस पर आते तो नुकसान और भी बड़ा हो सकता था।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अमेरिकी जियोलॉजिकल एजेंसी के अनुमान के अनुसार, इस भूकंप से बड़े पैमाने पर जनहानि की आशंका है। रिपोर्ट में कहा गया है कि लगभग 44 प्रतिशत संभावना है कि मृतकों की संख्या 10,000 से अधिक हो सकती है, जबकि 30 प्रतिशत संभावना यह भी जताई गई है कि यह आंकड़ा एक लाख तक पहुंच सकता है। हालांकि ये अनुमान प्रारंभिक हैं और स्थिति की गंभीरता पर लगातार अपडेट जारी किए जा रहे हैं। वेनेजुएला सरकार ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय आपातकाल घोषित कर दिया है। कार्यवाहक राष्ट्रपति ने सभी आपातकालीन सेवाओं को सक्रिय कर दिया है और सेना को राहत कार्यों में लगाया गया है। अस्पतालों में घायलों के इलाज के लिए अतिरिक्त इंतजाम किए जा रहे हैं और मेडिकल टीमों को प्रभावित क्षेत्रों में भेजा जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भूकंप का सबसे ज्यादा असर ला गुआइरा और आसपास के इलाकों में देखा गया है, जहां कई रिहायशी इमारतें गिर गई हैं। मलबे में लोगों के फंसे होने की आशंका के चलते बचाव कार्य तेज कर दिया गया है। स्थानीय लोगों के मुताबिक झटके इतने तेज थे कि कुछ ही सेकेंड में इमारतें हिलने लगीं और देखते ही देखते कई ढह गईं। कराकस एयरपोर्ट पर भी स्थिति गंभीर रही, जहां छत का हिस्सा गिरने के बाद यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया। धूल और मलबे के कारण एयरपोर्ट संचालन भी प्रभावित हुआ है। कई उड़ानों को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यह भूकंप पिछले कई दशकों में इस क्षेत्र का सबसे शक्तिशाली भूकंप माना जा रहा है। इससे पहले 1900 में 7.7 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था। 126 साल बाद आए इस भयानक झटके ने पूरे देश को झकझोर दिया है। भूकंप के बाद कई शहरों में बिजली और संचार व्यवस्था भी प्रभावित हुई है। राहत और बचाव दल लगातार मलबा हटाने और फंसे लोगों को निकालने में जुटे हुए हैं। हालांकि लगातार आफ्टरशॉक्स के कारण बचाव कार्यों में बाधा आ रही है। स्थानीय प्रशासन और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां मिलकर स्थिति को संभालने की कोशिश कर रही हैं। राहत शिविर लगाए जा रहे हैं और प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Jun 2026 17:48:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>असम के जोरहाट एयरबेस पर AN-32 विमान हादसे का शिकार, जांच के आदेश</title>
                                    <description><![CDATA[लैंडिंग के दौरान हुआ हादसा, वायुसेना ने गठित की कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी; नुकसान और हताहतों की जानकारी का इंतजार]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/investigation-ordered-into-the-victim-of-an-32-plane-crash-at/article-55823"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/an-32-crash.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">असम के जोरहाट स्थित भारतीय वायुसेना के एयरबेस पर शनिवार को एक बड़ा हादसा हो गया, जब भारतीय वायुसेना का AN-32 परिवहन विमान लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। घटना के तुरंत बाद पूरे एयरबेस को सील कर दिया गया और बचाव व राहत कार्य शुरू कर दिए गए। भारतीय वायुसेना ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के लिए कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी के गठन का आदेश दिया है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि हादसे में कोई जनहानि हुई है या नहीं। दुर्घटनाग्रस्त विमान AN-32 भारतीय वायुसेना की 43 स्क्वाड्रन का हिस्सा था और वह कार्गो लेकर उड़ान भर रहा था। हादसा उस समय हुआ जब विमान जोरहाट के रोरिया क्षेत्र स्थित वायुसेना स्टेशन पर उतरने की प्रक्रिया में था। लैंडिंग के दौरान अचानक कुछ गड़बड़ी हुई और विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। घटना के बाद एयरबेस परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और सुरक्षा एजेंसियों को तुरंत सक्रिय किया गया। भारतीय वायुसेना ने आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि AN-32 विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने की घटना की जांच के लिए कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी गठित की जा रही है। जांच का उद्देश्य हादसे के वास्तविक कारणों का पता लगाना और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक कदम सुझाना होगा। वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंच चुके हैं और स्थिति की लगातार निगरानी कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक दुर्घटना के समय एक तेज धमाके जैसी आवाज सुनाई दी थी। इसके कुछ ही क्षण बाद दुर्घटनास्थल के आसपास धुएं का बड़ा गुबार दिखाई देने लगा। स्थानीय लोगों ने बताया कि एयरबेस की दिशा से उठते धुएं को दूर से भी देखा जा सकता था। घटना की सूचना मिलते ही दमकल की गाड़ियां और एंबुलेंस मौके की ओर रवाना हुईं। वायुसेना की अग्निशमन टीमों ने तुरंत मोर्चा संभाल लिया और आग को नियंत्रित करने का प्रयास शुरू किया। रक्षा जनसंपर्क अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल एम. रावत ने भी घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि AN-32 विमान लैंडिंग के दौरान हादसे का शिकार हुआ है और नुकसान का आकलन किया जा रहा है। हालांकि देर शाम तक किसी आधिकारिक बयान में यह नहीं बताया गया कि विमान में मौजूद चालक दल या अन्य कर्मियों की स्थिति क्या है। यही वजह है कि पूरे घटनाक्रम को लेकर अभी कई सवाल बने हुए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">दुर्घटना के बाद एयरबेस की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। पूरे स्टेशन को अस्थायी रूप से सील कर दिया गया है और बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। जांच पूरी होने तक हादसे से जुड़ी जानकारी नियंत्रित तरीके से ही साझा की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि प्राथमिक जांच के बाद ही दुर्घटना के कारणों को लेकर कोई निष्कर्ष निकाला जा सकेगा। यह हादसा ऐसे समय में हुआ है जब कुछ महीने पहले ही असम में भारतीय वायुसेना का एक सुखोई Su-30MKI लड़ाकू विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। मार्च में हुए उस हादसे में दोनों पायलटों की मौत हो गई थी। वह विमान भी जोरहाट एयरफोर्स स्टेशन से नियमित उड़ान पर रवाना हुआ था और बाद में संपर्क टूटने के बाद करबी आंगलोंग जिले के पहाड़ी इलाके में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। लगातार दूसरी बड़ी घटना ने वायुसेना के विमानों की सुरक्षा और तकनीकी निगरानी को लेकर चर्चा तेज कर दी है।</p>
<p style="text-align:justify;">AN-32 विमान भारतीय वायुसेना के परिवहन बेड़े का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। सोवियत संघ में विकसित इस विमान को विशेष रूप से कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में संचालन के लिए तैयार किया गया था। यह विमान ऊंचाई वाले इलाकों, गर्म मौसम और सीमित रनवे वाली जगहों पर भी प्रभावी ढंग से काम कर सकता है। भारतीय वायुसेना लंबे समय से इस विमान का उपयोग सैनिकों की आवाजाही, रसद आपूर्ति और दूरदराज के क्षेत्रों तक सामग्री पहुंचाने के लिए करती रही है। तकनीकी रूप से AN-32 लगभग 7.5 टन तक का कार्गो ले जाने में सक्षम है। इसके अलावा इसमें करीब 50 यात्रियों या 42 पैराट्रूपर्स को भी ले जाया जा सकता है। यही कारण है कि यह विमान भारतीय सैन्य अभियानों और राहत कार्यों में अहम भूमिका निभाता रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस हादसे की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि दुर्घटना तकनीकी खराबी, मानवीय त्रुटि या किसी अन्य कारण से हुई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 14:11:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>रायपुर के एमजी रोड स्थित ऑटोमोबाइल शोरूम में भीषण आग, कई घंटे तक चला रेस्क्यू ऑपरेशन</title>
                                    <description><![CDATA[जया ऑटोमोबाइल की बिल्डिंग में लगी आग दूसरी और तीसरी मंजिल तक पहुंची, टायर-ट्यूब और ज्वलनशील सामान के कारण बढ़ी लपटें; आसपास की दुकानों को कराया गया खाली]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/massive-fire-in-the-automobile-showroom-located-on-mg-road/article-55617"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/raipur-fire-news-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राजधानी रायपुर के व्यस्त कारोबारी क्षेत्र एमजी रोड में गुरुवार सुबह उस समय अफरा-तफरी मच गई जब जया ऑटोमोबाइल नामक एक ऑटोमोबाइल शोरूम में भीषण आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैली कि देखते ही देखते पूरी इमारत धुएं और लपटों से घिर गई। घटना सुबह करीब 10 बजे की बताई जा रही है। सूचना मिलते ही दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने का अभियान शुरू किया गया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक आग पर पूरी तरह काबू नहीं पाया जा सका था।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मौदहापारा थाना क्षेत्र में स्थित इस शोरूम में आग लगने के बाद पूरे इलाके में हड़कंप की स्थिति बन गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार दुकान खुलने के कुछ समय बाद ही इमारत के भीतर से धुआं उठता दिखाई दिया। शुरुआत में कर्मचारियों और आसपास के लोगों ने आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन कुछ ही मिनटों में आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। इसके बाद तत्काल फायर ब्रिगेड को सूचना दी गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बताया जा रहा है कि शोरूम के भीतर बड़ी मात्रा में वाहन स्पेयर पार्ट्स, टायर, ट्यूब, प्लास्टिक सामग्री और लुब्रिकेंट्स रखे हुए थे। ये सभी सामग्री अत्यधिक ज्वलनशील मानी जाती हैं। इसी वजह से आग तेजी से फैलती चली गई और कुछ ही समय में इमारत की दूसरी मंजिल से होते हुए तीसरी मंजिल तक पहुंच गई। काले धुएं का गुबार दूर-दूर तक दिखाई देने लगा, जिससे आसपास के लोग भी चिंतित हो गए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">घटना के बाद प्रशासन और पुलिस ने तत्काल सुरक्षा व्यवस्था संभाली। आग के फैलने की आशंका को देखते हुए आसपास की कई दुकानों को एहतियातन बंद कराया गया। स्थानीय व्यापारियों और दुकानदारों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए कहा गया। कुछ समय के लिए इलाके में यातायात भी प्रभावित रहा, क्योंकि दमकल वाहनों और राहत टीमों को रास्ता देने के लिए पुलिस ने सड़क के कुछ हिस्सों को नियंत्रित किया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">फायर ब्रिगेड की पांच से अधिक गाड़ियां आग बुझाने में जुटी रहीं। दमकल कर्मियों को आग पर नियंत्रण पाने में काफी कठिनाई का सामना करना पड़ा। टायर और प्लास्टिक सामग्री के लगातार जलने से तापमान बढ़ता गया और धुआं भी अधिक मात्रा में निकलता रहा। आग बुझाने के लिए लगातार पानी की बौछार की गई, वहीं कुछ स्थानों पर विशेष अग्निशमन उपकरणों का भी उपयोग किया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अधिकारियों के मुताबिक सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि आग इमारत के अंदरूनी हिस्सों तक पहुंच चुकी थी। ऐसे में दमकलकर्मियों को सावधानी के साथ अंदर प्रवेश करना पड़ा। सुरक्षा के मद्देनजर बिजली आपूर्ति भी अस्थायी रूप से बंद कराई गई ताकि किसी प्रकार की अतिरिक्त दुर्घटना न हो।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">स्थानीय लोगों ने बताया कि आग लगने के बाद कुछ समय तक लगातार धमाके जैसी आवाजें भी सुनाई दीं। माना जा रहा है कि यह आवाजें आग की चपेट में आने वाले ऑटोमोबाइल पार्ट्स या अन्य सामग्री के कारण हुई होंगी। हालांकि अधिकारियों ने इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">घटना के दौरान बड़ी संख्या में लोग मौके पर जमा हो गए थे। पुलिस को भीड़ को नियंत्रित करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। लोगों को सुरक्षित दूरी बनाए रखने के निर्देश दिए गए। कई लोग अपने मोबाइल फोन से घटना के वीडियो और तस्वीरें बनाते नजर आए। सोशल मीडिया पर भी आग की तस्वीरें तेजी से वायरल होने लगीं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रारंभिक अनुमान के अनुसार आग से लाखों रुपए के नुकसान की आशंका जताई जा रही है। हालांकि वास्तविक नुकसान का आंकड़ा आग पूरी तरह बुझने और निरीक्षण के बाद ही सामने आ सकेगा। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि आग लगने की असली वजह क्या थी। शॉर्ट सर्किट, तकनीकी खराबी या अन्य किसी कारण की संभावना को ध्यान में रखकर जांच की जाएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दमकल विभाग के अधिकारियों का कहना है कि आग पर पूरी तरह नियंत्रण के बाद फॉरेंसिक और तकनीकी टीमों की मदद से कारणों की जांच की जाएगी। यदि आवश्यक हुआ तो विशेषज्ञों की टीम भी घटनास्थल का निरीक्षण करेगी। वहीं शोरूम प्रबंधन से भी आग सुरक्षा व्यवस्था और भवन में मौजूद सामग्री के संबंध में जानकारी जुटाई जाएगी। रायपुर के प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों में शामिल एमजी रोड पर हुई इस घटना ने व्यापारियों और स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है। आग ने एक बार फिर व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में अग्नि सुरक्षा उपायों की आवश्यकता को उजागर किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 14:54:11 +0530</pubDate>
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                <title>6 दिन बाद सिलपरा डैम से मिला सेना के जवान का शव</title>
                                    <description><![CDATA[रीवा के सिलपरा डैम में नहाते समय डूबे जवान गौरव द्विवेदी का शव एनडीआरएफ और एसडीईआरएफ की संयुक्त कार्रवाई में बरामद, नहर का पानी रोककर चलाया गया विशेष अभियान]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/vindhya-rewa/dead-body-of-army-soldier-found-from-silpara-dam-after/article-55420"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/gaurav-dwivedi.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">रीवा जिले के सिलपरा डैम में छह दिन पहले लापता हुए सेना के जवान गौरव द्विवेदी का शव आखिरकार मंगलवार सुबह बरामद कर लिया गया। पिछले कई दिनों से लगातार चल रहे सर्च ऑपरेशन के बाद एनडीआरएफ, एसडीईआरएफ और स्थानीय प्रशासन की टीमों को यह सफलता मिली। जवान के शव के मिलने के साथ ही परिवार और गांव के लोगों की उम्मीदें टूट गईं और पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल फैल गया। बताया जा रहा है कि 28 वर्षीय गौरव द्विवेदी पिछले सप्ताह अपने भाई-बहनों के साथ सिलपरा डैम घूमने गए थे, जहां नहाने के दौरान वह गहरे पानी में चले गए और देखते ही देखते लापता हो गए। घटना के बाद से लगातार उनकी तलाश की जा रही थी, लेकिन डैम की गहराई और पानी की स्थिति के कारण शुरुआती दिनों में सफलता नहीं मिल सकी।</p>
<p style="text-align:justify;">गौरव द्विवेदी रीवा जिले के बघवार गांव के रहने वाले थे और भारतीय सेना में अपनी सेवाएं दे रहे थे। परिवार के लोगों ने बताया कि वह छुट्टी पर घर आए हुए थे। बुधवार सुबह वह अपने भाई-बहनों और कुछ परिचितों के साथ सिलपरा डैम पहुंचे थे। मौसम सामान्य था और सभी लोग डैम के किनारे समय बिता रहे थे। इसी दौरान गौरव पानी में उतर गए। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक शुरुआत में सब कुछ सामान्य लग रहा था, लेकिन अचानक उनका संतुलन बिगड़ गया और वह गहरे हिस्से की ओर चले गए। आसपास मौजूद लोगों ने उन्हें बचाने की कोशिश भी की, लेकिन कुछ ही पलों में वह पानी में ओझल हो गए।</p>
<p style="text-align:justify;">घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और स्थानीय प्रशासन हरकत में आ गया। उसी दिन से जवान की तलाश के लिए रेस्क्यू अभियान शुरू कर दिया गया था। शुरुआती चरण में स्थानीय गोताखोरों और एसडीईआरएफ की टीम ने डैम में सर्च ऑपरेशन चलाया। कई घंटों तक पानी में खोजबीन की गई, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। इसके बाद बड़े स्तर पर अभियान शुरू किया गया और एनडीआरएफ की टीम को भी बुलाया गया। पिछले छह दिनों तक लगातार बोट, गोताखोरों और आधुनिक उपकरणों की मदद से तलाश जारी रही। बावजूद इसके जवान का कोई पता नहीं चल सका।</p>
<p style="text-align:justify;">अधिकारियों के अनुसार डैम में पानी की गहराई और तेज बहाव रेस्क्यू अभियान के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरे। कई बार गोताखोरों को प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। लगातार प्रयासों के बावजूद जब कोई सफलता नहीं मिली तो प्रशासन ने एक अलग रणनीति अपनाने का फैसला किया। मंगलवार को नहर का पानी पूरी तरह रोक दिया गया ताकि डैम में जलस्तर कम किया जा सके। बताया गया कि पानी की गहराई करीब 40 फीट तक कम होने के बाद खोज अभियान को नई दिशा मिली।</p>
<p style="text-align:justify;">मंगलवार सुबह करीब छह बजे एनडीआरएफ की आगरा स्थित स्पेशल टास्क फोर्स और एसडीईआरएफ की संयुक्त टीम ने एक बार फिर अभियान शुरू किया। इस दौरान डैम के उन हिस्सों पर विशेष ध्यान दिया गया जहां जवान के होने की संभावना जताई जा रही थी। कई घंटे तक लगातार चली खोजबीन के बाद सुबह करीब नौ बजे जवान का शव पानी के भीतर से बरामद कर लिया गया। शव मिलने की खबर मिलते ही मौके पर मौजूद परिजन भावुक हो गए। कई दिनों से चल रही तलाश का अंत तो हुआ, लेकिन परिणाम बेहद दुखद रहा।</p>
<p style="text-align:justify;">शव को बाहर निकालने के बाद पुलिस ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की और पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेज दिया। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की औपचारिक कार्रवाई की जाएगी। वहीं प्रशासन ने पूरे अभियान में शामिल रेस्क्यू टीमों के प्रयासों की सराहना की है। अधिकारियों का कहना है कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद टीमों ने लगातार मेहनत की और आखिरकार जवान को खोज निकालने में सफलता प्राप्त की।</p>
<p style="text-align:justify;">गौरव द्विवेदी की मौत की खबर से बघवार गांव में शोक की लहर दौड़ गई है। गांव के लोग उन्हें एक शांत स्वभाव और जिम्मेदार युवा के रूप में याद कर रहे हैं। सेना में उनकी सेवा को लेकर ग्रामीणों में गर्व था और उनके भविष्य को लेकर कई उम्मीदें थीं। परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल है। आसपास के गांवों से भी लोग परिजनों को सांत्वना देने पहुंच रहे हैं। यह घटना एक बार फिर जलाशयों और डैम क्षेत्रों में सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े करती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बरसात के मौसम से पहले और बाद में ऐसे स्थानों पर लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। प्रशासन भी समय-समय पर लोगों को गहरे पानी में न जाने और सुरक्षा नियमों का पालन करने की सलाह देता रहा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>विंध्य/रीवा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 16:13:57 +0530</pubDate>
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