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                <title>Xi Jinping - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Xi Jinping RSS Feed</description>
                
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                <title>चीन-उत्तर कोरिया रिश्तों में नया मोड़, पुतिन-किम नजदीकी से जिनपिंग चिंतित</title>
                                    <description><![CDATA[शी जिनपिंग 7 साल बाद प्योंगयांग दौरे पर, रूस-उत्तर कोरिया की बढ़ती साझेदारी से एशिया की भू-राजनीति में बदलाव के संकेत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/new-turn-in-china-north-korea-relations-jinping-worried-about-putin-kim/article-55142"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/xi-jinping-north-korea-visit.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">एशिया की भू-राजनीति में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग अगले हफ्ते उत्तर कोरिया के दौरे पर जा रहे हैं, जहां उनकी मुलाकात किम जोंग उन से होगी। यह यात्रा 8 से 9 जून के बीच प्रस्तावित है और करीब 7 साल बाद शी जिनपिंग प्योंगयांग पहुंचेंगे। यह दौरा ऐसे समय पर हो रहा है जब रूस, चीन और उत्तर कोरिया के बीच बदलते रिश्तों ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। कुछ साल पहले तक उत्तर कोरिया पर चीन का लगभग पूर्ण प्रभाव माना जाता था, लेकिन हाल के वर्षों में स्थिति तेजी से बदली है। यूक्रेन युद्ध के बाद रूस और उत्तर कोरिया के बीच सैन्य और आर्थिक सहयोग काफी बढ़ गया है। हथियारों की आपूर्ति, ऊर्जा सहायता और रणनीतिक समर्थन ने किम जोंग उन की स्थिति को पहले से कहीं मजबूत कर दिया है। अब उत्तर कोरिया केवल चीन पर निर्भर नहीं रहा, बल्कि रूस एक नए और प्रभावशाली साझेदार के रूप में उभरा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">चीन लंबे समय से उत्तर कोरिया का सबसे बड़ा आर्थिक और राजनीतिक सहयोगी रहा है। दोनों देशों के बीच 1400 किलोमीटर लंबी सीमा और एक विशेष रक्षा संधि भी है, जिसे बीजिंग की एकमात्र सक्रिय सैन्य संधि माना जाता है। इस समझौते के अनुसार यदि किसी एक देश पर हमला होता है तो दूसरा उसकी मदद करेगा। इस साल इस संधि के 65 वर्ष पूरे हो रहे हैं, जिससे इस दौरे का महत्व और बढ़ जाता है। हालांकि हालिया घटनाक्रम चीन के लिए चिंता का विषय बन गए हैं। रूस और उत्तर कोरिया के बीच बढ़ती नजदीकी ने बीजिंग की रणनीतिक स्थिति को चुनौती दी है। किम जोंग उन अब खुद को सिर्फ चीन पर निर्भर नेता के रूप में नहीं देखना चाहते। उनका झुकाव रूस की ओर बढ़ा है, जिससे उन्हें आर्थिक और सैन्य दोनों स्तरों पर अतिरिक्त लाभ मिला है। वहीं चीन इस स्थिति को अपने प्रभाव में कमी के रूप में देख रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">शी जिनपिंग का यह दौरा इसी संतुलन को दोबारा स्थापित करने की कोशिश माना जा रहा है। चीन चाहता है कि उत्तर कोरिया पर उसका प्रभाव बना रहे और वह क्षेत्रीय राजनीति में प्रमुख भूमिका में बना रहे। दूसरी ओर किम जोंग उन इस स्थिति का लाभ उठाकर चीन और रूस दोनों से अधिक रियायतें हासिल करने की कोशिश कर सकते हैं। यूक्रेन युद्ध ने उत्तर कोरिया की अंतरराष्ट्रीय स्थिति को भी बदल दिया है। रूस को हथियार और सैन्य सहयोग देने के बदले में उत्तर कोरिया को तेल, खाद्य सामग्री और तकनीकी सहायता मिल रही है। इस सहयोग ने किम जोंग उन को आर्थिक रूप से काफी राहत दी है। वहीं चीन इस बढ़ती साझेदारी को अपने प्रभाव के लिए चुनौती के रूप में देख रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">पिछले कुछ वर्षों में उत्तर कोरिया की परमाणु नीति पर भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है। रूस ने न केवल उत्तर कोरिया के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंधों पर नरम रुख अपनाया है, बल्कि कुछ मामलों में इन प्रतिबंधों को कमजोर भी किया है। चीन का रुख भी पहले की तुलना में अपेक्षाकृत नरम हुआ है और वह अब खुले तौर पर निंदा करने से बचता दिखाई देता है। इस पूरे घटनाक्रम में किम जोंग उन की स्थिति पहले से अधिक मजबूत नजर आती है। कोविड महामारी के बाद उत्तर कोरिया ने खुद को अलग-थलग रखा, लेकिन बाद में रूस के साथ साझेदारी ने उसकी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया। पर्यटन और सीमित व्यापार के माध्यम से भी उत्तर कोरिया नए राजस्व स्रोत तलाशने की कोशिश कर रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">दूसरी तरफ अमेरिका भी इस पूरे क्षेत्र पर नजर बनाए हुए है। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प कई बार किम जोंग उन से बातचीत की इच्छा जता चुके हैं, लेकिन परमाणु कार्यक्रम पर गतिरोध अभी भी बना हुआ है। किम जोंग उन स्पष्ट कर चुके हैं कि वे अपने परमाणु हथियारों को सुरक्षा की गारंटी मानते हैं और किसी भी बातचीत में उन्हें छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं। इस पूरी स्थिति ने एशिया में शक्ति संतुलन को बदल दिया है। चीन, रूस और उत्तर कोरिया के बीच बनते-बिगड़ते समीकरण आने वाले समय में वैश्विक राजनीति पर गहरा असर डाल सकते हैं। शी जिनपिंग का यह दौरा न केवल एक कूटनीतिक मुलाकात है, बल्कि यह चीन की रणनीतिक स्थिति को फिर से मजबूत करने की कोशिश भी मानी जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 17:14:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ट्रंप-शी जिनपिंग की बीजिंग में अहम मुलाकात, जानें क्या हुआ खास?</title>
                                    <description><![CDATA[बीजिंग में ट्रंप और शी जिनपिंग की अहम मुलाकात में व्यापार, सुरक्षा और वैश्विक स्थिरता पर चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/important-meeting-of-trump-xi-jinping-in-beijing-know-what-happened/article-53325"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-14t114448.121.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बीजिंग में गुरुवार को सभी की नजरें उस वक्त टिकी रहीं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग आमने-सामने बैठे। यह मुलाकात चीन की राजधानी के ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में हुई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां औपचारिक स्वागत और गार्द ऑफ ऑनर के साथ माहौल काफी गंभीर और राजनयिक था। बताया गया कि दोनों नेताओं ने एक-दूसरे से हाथ मिलाया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मुस्कुराए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और फिर अपने-अपने प्रतिनिधिमंडल का परिचय कराया। अमेरिकी पक्ष से कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और चीनी सेना की ओर से ऑनर गार्ड ने औपचारिक सलामी दी। यह दौरा ऐसे समय पर हुआ है जब अमेरिका और चीन के बीच व्यापार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तकनीक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और सुरक्षा के मुद्दे लगातार चर्चा में हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मुलाकात की शुरुआत में माहौल काफी गर्मजोशी भरा दिखाई दिया। ट्रंप ने शी जिनपिंग की तारीफ करते हुए उन्हें </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">“<span lang="hi" xml:lang="hi">मजबूत और प्रभावशाली नेता</span>” <span lang="hi" xml:lang="hi">बताया और भविष्य में दोनों देशों के रिश्तों को बेहतर बनाने की उम्मीद जताई। उन्होंने यह भी कहा कि कई बार मुश्किल हालात आए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन बातचीत के जरिए चीजें संभाली गईं। ट्रंप ने ये भी कहा कि उनके बीच लंबे समय से संवाद का इतिहास रहा है और व्यक्तिगत रिश्तों ने कई बार कूटनीतिक तनाव को कम करने में मदद की। वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शी जिनपिंग ने ट्रंप का स्वागत करते हुए कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में दोनों देशों के बीच स्थिर संबंध बेहद जरुरी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि चीन और अमेरिका को एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी की तरह नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि साझेदार की तरह आगे बढ़ना चाहिए।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बातचीत में वैश्विक अर्थव्यवस्था</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यापार संतुलन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और तकनीकी प्रतिस्पर्धा जैसे मुद्दों पर चर्चा भी हुई। जैसे-जैसे बैठक आगे बढ़ी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बातचीत ने रणनीतिक और गंभीर मुद्दों की दिशा लेने शुरू कर दी। शी जिनपिंग ने </span>“<span lang="hi" xml:lang="hi">थ्यूसीडाइड्स ट्रैप</span>” <span lang="hi" xml:lang="hi">का जिक्र करते हुए कहा कि बड़ी शक्तियों के बीच टकराव से बचने के लिए सहयोग की राह निकाली जानी चाहिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वरना वैश्विक अस्थिरता बढ़ सकती है। ट्रंप ने भी कहा कि अगर अमेरिका और चीन मिलकर काम करें तो दुनिया में स्थिरता और आर्थिक विकास को नई दिशा मिल सकती है। इस दौरान ताइवान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मानवाधिकार और तकनीकी प्रतिबंध जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भी दोनों देशों के बीच पुराने मतभेद भी अप्रत्यक्ष रूप से सामने आए। बीजिंग में इस मुलाकात के बाद एक राजकीय भोज का आयोजन भी हुआ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे दोनों देशों के रिश्तों में एक नए अध्याय की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 May 2026 11:50:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चीन में भ्रष्टाचार पर हुई बड़ी कार्रवाई, दो पूर्व रक्षा मंत्रियों को दी गई मौत की सजा</title>
                                    <description><![CDATA[चीन ने भ्रष्टाचार मामले में पूर्व रक्षा मंत्री वी फेंघे और ली शांगफू को मौत की सजा दी। राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने सख्त कार्रवाई की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/major-action-taken-against-corruption-in-china-two-former-defense/article-52920"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-08t143051.761.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">चीन ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपने सबसे सख्त फैसलों में से एक लेते हुए दो पूर्व रक्षा मंत्रियों वी फेंघे और ली शांगफू को मौत की सजा सुना दी है। इस फैसले के बाद चीन की राजनीति और सैन्य गलियारों में हलचल तेज हो गई है। चीन की सरकारी मीडिया के मुताबिक दोनों नेताओं को अलग-अलग मामलों में दोषी पाया गया था। बताया जा रहा है कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इस पूरे मामले पर खुद नजर रखी थी और भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">‘<span lang="hi" xml:lang="hi">जीरो टॉलरेंस</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">नीति के तहत कार्रवाई को मंजूरी दी गई। चीन में लंबे समय से सैन्य अधिकारियों और शीर्ष नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इतने बड़े स्तर पर पूर्व रक्षा मंत्रियों के खिलाफ यह कार्रवाई काफी अहम मानी जा रही है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जानकारी के मुताबिक वी फेंघे को रिश्वत लेने के मामले में अदालत ने दोषी ठहराया था। वहीं ली शांगफू पर रिश्वत लेने के साथ रिश्वत देने के भी आरोप साबित हुए। अदालत की सुनवाई के बाद दोनों को मौत की सजा सुनाई गई। ली शांगफू को कुछ समय पहले ही चीन की कम्युनिस्ट पार्टी से बाहर कर दिया गया था। वह 2024 में अचानक सार्वजनिक कार्यक्रमों से गायब हो गए थे</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके बाद उनके खिलाफ जांच की चर्चा शुरू हुई थी। बाद में उन पर आधिकारिक रूप से भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए। वी फेंघे इससे पहले 2018 से 2023 तक चीन के रक्षा मंत्री रहे थे। उनके बाद ली शांगफू को यह जिम्मेदारी दी गई थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन उनका कार्यकाल भी ज्यादा लंबा नहीं चल सका। दोनों नेताओं का संबंध चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की मिसाइल और रॉकेट फोर्स से रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे चीन की सैन्य ताकत का बेहद अहम हिस्सा माना जाता है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दिलचस्प बात यह भी है कि दोनों पूर्व रक्षा मंत्री कभी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बेहद करीबी माने जाते थे। दोनों केंद्रीय सैन्य आयोग में अहम भूमिका निभा चुके हैं। सूत्रों के अनुसार शी जिनपिंग ने खुद वी फेंघे को रक्षा मंत्री बनाने में बड़ी भूमिका निभाई थी। इसके बावजूद उन पर कार्रवाई से यह संकेत गया है कि चीन में भ्रष्टाचार के मामलों में अब शीर्ष पदों पर बैठे लोगों को भी राहत नहीं मिल रही। बीते कुछ वर्षों में चीन की सेना के कई बड़े अधिकारियों को हटाया गया है। कुछ मामलों में जांच अभी भी जारी बताई जा रही है। ऐसा कहा जा रहा है कि चीन की मिसाइल फोर्स के भीतर बड़े स्तर पर गड़बड़ियों और आर्थिक अनियमितताओं की शिकायतें मिली थीं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके बाद कार्रवाई तेज हुई।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">शी जिनपिंग ने 2012 में सत्ता संभालने के बाद से भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू किया था। अधिकारियों के अनुसार इस अभियान के तहत अब तक लाखों सरकारी अधिकारियों</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">सैन्य अफसरों और पार्टी नेताओं पर कार्रवाई हो चुकी है। चीन की सरकार इसे व्यवस्था सुधारने की कोशिश बता रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि कुछ राजनीतिक विश्लेषक इसे सत्ता पर पकड़ मजबूत करने की रणनीति भी मानते हैं। हालांकि चीन की तरफ से इस पूरे मामले पर यही कहा गया है कि कानून सभी के लिए बराबर है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 May 2026 14:47:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>होर्मुज स्ट्रेट को लेकर चीन की अपील, कहा- ऊर्जा संकट से बचने के लिए जहाजों की आवाजाही जारी रखें</title>
                                    <description><![CDATA[होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही बनाए रखने को लेकर चीन की अपील, वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर असर की चिंता बढ़ी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/chinas-appeal-regarding-hormuz-strait-said-movement-of-ships/article-51689"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/hormuz-strait-xi-jinping.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">मध्य-पूर्व में जारी तनाव के बीच चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की सामान्य आवाजाही बनाए रखने की अपील की है। रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस के साथ फोन पर बातचीत के दौरान यह मुद्दा उठाया। शी ने स्पष्ट किया कि यह समुद्री मार्ग वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है, इसलिए यहां किसी भी तरह की बाधा अंतरराष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर सकती है। उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने और तत्काल व्यापक सीजफायर की दिशा में कदम बढ़ाने की अपील भी की। चीन का यह बयान ऐसे समय आया है जब क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है और तेल आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">रणनीतिक महत्व</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक है। यहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है, जिससे इसकी रणनीतिक अहमियत और बढ़ जाती है। होर्मुज स्ट्रेट फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसियों के अनुमान के मुताबिक, दुनिया के कुल समुद्री तेल परिवहन का लगभग एक-तिहाई हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी प्रकार की बाधा से वैश्विक तेल कीमतों में तेजी आ सकती है और आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो सकती है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">पृष्ठभूमि की बात करें तो हाल के महीनों में मध्य-पूर्व में कई घटनाओं ने क्षेत्रीय अस्थिरता को बढ़ाया है। विभिन्न देशों के बीच बढ़ते तनाव और सैन्य गतिविधियों के कारण इस क्षेत्र में जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई जा रही है। इससे पहले भी कई बार होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों को निशाना बनाए जाने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय सतर्क है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">कूटनीतिक पहल</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">चीन ने बातचीत और राजनीतिक समाधान पर जोर दिया है। शी जिनपिंग ने सभी पक्षों से संवाद के जरिए आगे बढ़ने की अपील की। आधिकारिक बयान के मुताबिक, शी जिनपिंग ने कहा कि क्षेत्रीय विवादों का समाधान सैन्य टकराव से नहीं बल्कि राजनीतिक और कूटनीतिक माध्यमों से ही संभव है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि सभी पक्षों को शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए मिलकर काम करना चाहिए। सूत्रों के अनुसार, चीन लगातार मध्य-पूर्व में संतुलन बनाए रखने और ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने की कोशिश कर रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">प्रभाव और विश्लेषण की दृष्टि से देखा जाए तो चीन का यह रुख वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण संकेत देता है। यदि होर्मुज स्ट्रेट में किसी तरह की बाधा आती है, तो इसका असर सीधे तेल कीमतों, परिवहन लागत और विभिन्न देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। भारत जैसे ऊर्जा आयात पर निर्भर देशों के लिए भी यह स्थिति चिंताजनक हो सकती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह के बयान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव कम करने की दिशा में अहम भूमिका निभा सकते हैं।</span></p>
<p><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">आगे क्या की बात करें तो फिलहाल अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें मध्य-पूर्व की स्थिति पर टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में कूटनीतिक प्रयास तेज हो सकते हैं और प्रमुख देश इस मुद्दे पर बातचीत को आगे बढ़ा सकते हैं। होर्मुज स्ट्रेट में स्थिरता बनाए रखना न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक हितों के लिए जरूरी माना जा रहा है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/chinas-appeal-regarding-hormuz-strait-said-movement-of-ships/article-51689</link>
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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 17:56:08 +0530</pubDate>
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