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                <title>HPCL - दैनिक जागरण</title>
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                <title>कच्चा तेल छह महीने के निचले स्तर पर, फिर भी पेट्रोल-डीजल के दाम जस के तस</title>
                                    <description><![CDATA[कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट के बावजूद आम लोगों को राहत नहीं, रिपोर्ट के मुताबिक तेल कंपनियां पेट्रोल और डीजल पर प्रति लीटर मजबूत मार्जिन कमा रही हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/crude-oil-is-at-its-lowest-in-six-months-yet/article-58185"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/crude-oil-price-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है, लेकिन इसका फायदा अब तक देश के आम उपभोक्ताओं को नहीं मिल पाया है। अमेरिका-ईरान तनाव के दौरान रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचने वाला कच्चा तेल अब करीब छह महीने के निचले स्तर पर कारोबार कर रहा है। इंडियन बास्केट के अनुसार कच्चे तेल की कीमत घटकर 68.69 डॉलर प्रति बैरल तक आ गई है। यह युद्ध के दौरान बने करीब 157 डॉलर प्रति बैरल के उच्च स्तर से लगभग 56 प्रतिशत कम है। इसके बावजूद देश में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में किसी तरह की कमी नहीं की गई है। ऐसे में एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल सस्ता हो चुका है तो घरेलू बाजार में उपभोक्ताओं को राहत क्यों नहीं मिल रही।</p>
<p style="text-align:justify;">मौजूदा हालात में सरकारी तेल विपणन कंपनियां अच्छी स्थिति में हैं। डीएएम कैपिटल की एक रिपोर्ट के मुताबिक मौजूदा कच्चे तेल की कीमत पर तेल कंपनियां पेट्रोल पर करीब 10.5 रुपए और डीजल पर लगभग 11 रुपए प्रति लीटर तक का मार्जिन हासिल कर रही हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जब इंडियन बास्केट का कच्चा तेल 87 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहता है, तब कंपनियां लगभग ब्रेक ईवन की स्थिति में होती हैं, यानी न उन्हें विशेष लाभ होता है और न ही नुकसान। चूंकि 1 जून के बाद से कच्चे तेल की कीमत लगातार इस स्तर से नीचे बनी हुई है, इसलिए कंपनियां पिछले कई सप्ताह से मुनाफे में कारोबार कर रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के दौरान वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला था। हालांकि युद्धविराम की घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें धीरे-धीरे नीचे आने लगीं। शुरुआती युद्धविराम के बाद भी कच्चा तेल 115 डॉलर प्रति बैरल से नीचे बना रहा और अब यह 70 डॉलर के आसपास पहुंच गया है। इसके बावजूद भारत में सरकारी तेल कंपनियों ने खुदरा ईंधन की कीमतों में कोई राहत नहीं दी है। यही वजह है कि उपभोक्ताओं के बीच असंतोष भी देखने को मिल रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">अगर पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो साफ दिखाई देता है कि कच्चे तेल की कीमतों और पेट्रोल-डीजल के खुदरा दामों के बीच सीधा संबंध हमेशा नहीं रहा। वर्ष 2018 में जब कच्चा तेल करीब 80 डॉलर प्रति बैरल था, तब दिल्ली में पेट्रोल लगभग 72 रुपए और डीजल करीब 70 रुपए प्रति लीटर बिक रहा था। इसके बाद 2020 में कोरोना महामारी के दौरान कच्चे तेल की कीमत गिरकर करीब 43 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, लेकिन खुदरा कीमतों में वैसी राहत देखने को नहीं मिली जैसी उपभोक्ता उम्मीद कर रहे थे। बाद में 2022 में जब कच्चा तेल 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई। हालांकि जनवरी 2023 में कच्चे तेल के दाम फिर करीब 75 डॉलर तक आ गए, लेकिन उस समय भी खुदरा कीमतों में कोई खास बदलाव नहीं किया गया। तेल कंपनियों का तर्क था कि वे पहले हुए नुकसान की भरपाई कर रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">दिलचस्प बात यह भी है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों वाले दौर में भी तेल कंपनियों का वित्तीय प्रदर्शन मजबूत बना रहा। जनवरी से मार्च 2026 की चौथी तिमाही में देश की प्रमुख तेल कंपनियों के नतीजे सकारात्मक रहे। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार चार बड़ी तेल कंपनियों का संयुक्त मुनाफा पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि की तुलना में करीब 22 प्रतिशत तक बढ़ा। इसी अवधि में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 157 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा था और मार्च के दौरान इसका औसत भाव भी 125 डॉलर प्रति बैरल से अधिक रहा। इसके बावजूद कंपनियों के मुनाफे में कमी नहीं आई।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बीच निजी क्षेत्र की ईंधन कंपनी नायरा एनर्जी ने 1 जुलाई को अपने ग्राहकों को राहत देते हुए पेट्रोल की कीमत में 5 रुपए प्रति लीटर और डीजल में 3 रुपए प्रति लीटर की कटौती की थी। इस फैसले के बाद कई शहरों में नायरा के पंपों पर ईंधन सरकारी कंपनियों की तुलना में सस्ता मिलने लगा। भोपाल जैसे शहरों में भी नायरा के पेट्रोल और डीजल की कीमतों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई। हालांकि इसके बाद भी सरकारी तेल कंपनियों ने अपनी कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले मई महीने में सरकारी तेल कंपनियों ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में महंगे कच्चे तेल का हवाला देते हुए चरणबद्ध तरीके से पेट्रोल और डीजल दोनों की कीमतों में कुल 7.50 रुपए प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की थी। देशभर के अधिकांश पेट्रोल पंप इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के नियंत्रण में हैं, इसलिए इन कंपनियों के फैसलों का असर सीधे करोड़ों उपभोक्ताओं पर पड़ता है। फिलहाल कीमतों में कटौती नहीं होने से आम लोगों की जेब पर बोझ बना हुआ है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 13:55:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर फैसला 2-3 महीने बाद, महंगे कच्चे तेल के असर से सरकार ने जताई इंतजार की बात</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान संकट के दौरान खरीदे गए महंगे कच्चे तेल की प्रोसेसिंग जारी, सरकारी तेल कंपनियों को 74,781 करोड़ रुपये की अंडर-रिकवरी का सामना]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/decision-on-petrol-and-diesel-prices-will-be-taken-after/article-57712"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/petrol-diesel-price.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में राहत का इंतजार कर रहे लोगों को अभी कुछ समय और इंतजार करना पड़ सकता है। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने गुरुवार को दिल्ली में कहा कि पेट्रोल-डीजल के दाम घटेंगे या नहीं, इस पर कोई फैसला अगले दो से तीन महीनों में ही संभव होगा। फिलहाल सरकार या सरकारी तेल कंपनियां कीमतों में कटौती को लेकर कोई जल्दबाजी नहीं करना चाहतीं। मंत्री के अनुसार, हाल ही में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट जरूर आई है, लेकिन इसका असर घरेलू बाजार में तुरंत दिखाई नहीं देगा क्योंकि भारतीय रिफाइनरियां अभी भी उस महंगे कच्चे तेल को प्रोसेस कर रही हैं जिसे ईरान संकट के दौरान ऊंची कीमतों पर खरीदा गया था।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि जब ईरान से जुड़े तनाव और युद्ध जैसे हालात बने थे, तब वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़कर 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं। उस समय देश की तेल कंपनियों ने ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने के लिए ऊंचे दामों पर कच्चा तेल खरीदा था। अब वही स्टॉक रिफाइनरियों में प्रोसेस हो रहा है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें कम होने के बावजूद घरेलू स्तर पर तत्काल राहत देना आसान नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि आने वाले दो-तीन महीनों तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह नियंत्रित बनी रहती हैं, तब पेट्रोल और डीजल के दाम घटाने पर विचार किया जा सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">केंद्रीय मंत्री ने सरकारी तेल कंपनियों की वित्तीय स्थिति का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक लागत से कम कीमत पर पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस बेचने की वजह से सरकारी तेल कंपनियों पर भारी आर्थिक दबाव पड़ा है। 30 जून तक इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPCL) को कुल 74,781 करोड़ रुपये की अंडर-रिकवरी का सामना करना पड़ा है। उन्होंने कहा कि यह नुकसान केवल मौजूदा अवधि तक सीमित नहीं है, बल्कि पिछले महीनों की भरपाई का असर भी इसमें शामिल है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार अप्रैल से जून की तिमाही में केवल पेट्रोल पर लगभग 19,905 करोड़ रुपये की अंडर-रिकवरी दर्ज की गई। वहीं डीजल पर नुकसान का आंकड़ा और भी अधिक रहा। इसके अलावा घरेलू रसोई गैस यानी एलपीजी सिलेंडर की बिक्री पर भी कंपनियों को हजारों करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा। मंत्री ने कहा कि यदि पिछले वर्षों और पिछली तिमाहियों के एलपीजी नुकसान को भी इसमें जोड़ दिया जाए तो कुल अंडर-रिकवरी का आंकड़ा 2.1 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है। हालांकि विभिन्न वित्तीय समायोजनों के बाद मौजूदा कुल नुकसान 74,781 करोड़ रुपये बताया गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">गौरतलब है कि इसी वर्ष मई महीने में सरकारी तेल कंपनियों ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का हवाला देते हुए पेट्रोल और डीजल दोनों के दामों में चरणबद्ध तरीके से 7.50 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी। देश के एक लाख से अधिक पेट्रोल पंपों में से करीब 90 प्रतिशत पर इन्हीं तीन सरकारी कंपनियों का संचालन है। ऐसे में इनके द्वारा लिया गया कोई भी फैसला सीधे तौर पर करोड़ों उपभोक्ताओं को प्रभावित करता है। फिलहाल इन कंपनियों ने कीमतों में किसी तरह की कटौती की घोषणा नहीं की है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूसरी ओर निजी क्षेत्र की प्रमुख ईंधन विक्रेता कंपनी नायरा एनर्जी ने ग्राहकों को राहत देते हुए पेट्रोल और डीजल दोनों की कीमतों में कमी की है। कंपनी ने पेट्रोल पर 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 3 रुपये प्रति लीटर की कटौती की है। इसके बाद भोपाल में नायरा के पेट्रोल की कीमत 119.79 रुपये से घटकर 114.79 रुपये प्रति लीटर हो गई है, जबकि डीजल की कीमत 102.57 रुपये से घटकर 99.57 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई है। इससे यह संकेत मिला है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक नीचे बनी रहती हैं तो अन्य कंपनियां भी भविष्य में इसी दिशा में कदम उठा सकती हैं।पिछले कुछ दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें फिर से लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर लौट आई हैं। इससे ऊर्जा बाजार में कुछ स्थिरता आई है। हालांकि सरकारी तेल कंपनियां अभी भी पुराने महंगे स्टॉक के प्रभाव से बाहर नहीं निकली हैं। यही वजह है कि आम उपभोक्ताओं को तत्काल राहत मिलने की संभावना कम दिखाई दे रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 06:09:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>पेट्रोल-डीजल की थोक खरीद पर केंद्र की सख्ती, डीजल बिक्री पर नई सीमा लागू</title>
                                    <description><![CDATA[भू-राजनीतिक तनाव और ईंधन आपूर्ति पर बढ़ते दबाव के बीच सरकार ने औद्योगिक व व्यावसायिक उपभोक्ताओं की खुदरा पेट्रोल पंपों से खरीद पर रोक लगाई, डीजल खरीद 200 लीटर प्रतिदिन तक सीमित की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/centers-strictness-on-bulk-purchase-of-petrol-and-diesel-new/article-55707"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/petrol-diesel-restrictions.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">देशभर में पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता को बनाए रखने और संभावित जमाखोरी पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने औद्योगिक, व्यावसायिक और संस्थागत उपभोक्ताओं के लिए खुदरा पेट्रोल पंपों से पेट्रोल और डीजल खरीदने पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही डीजल की बिक्री को प्रति ग्राहक या वाहन प्रतिदिन अधिकतम 200 लीटर तक सीमित कर दिया गया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की ओर से जारी आदेश के अनुसार यह व्यवस्था शुरुआती तौर पर 90 दिनों तक लागू रहेगी। अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ रहे असर को देखते हुए यह कदम उठाना जरूरी हो गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">हाल के महीनों में देश के कई हिस्सों में डीजल की मांग अचानक बढ़ी थी। इसके पीछे एक बड़ी वजह खुदरा और थोक ईंधन कीमतों के बीच बढ़ता अंतर बताया जा रहा है। कई उद्योग, संस्थान और बड़े व्यावसायिक उपभोक्ता अपेक्षाकृत सस्ता ईंधन खरीदने के लिए सीधे पेट्रोल पंपों का रुख कर रहे थे। इससे उन खुदरा केंद्रों पर दबाव बढ़ने लगा जो आम उपभोक्ताओं की जरूरतों को पूरा करने के लिए बनाए गए हैं। सरकार का मानना है कि अगर यह स्थिति जारी रहती तो कुछ क्षेत्रों में ईंधन की कमी और आवश्यक सेवाओं पर असर पड़ सकता था। यही कारण है कि मोटर स्पिरिट और हाई स्पीड डीजल की आपूर्ति को नियंत्रित करने के लिए अस्थायी आदेश जारी किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">नए आदेश के तहत औद्योगिक, संस्थागत और व्यावसायिक उपभोक्ताओं को अब अपनी जरूरत का ईंधन निर्धारित थोक आपूर्ति केंद्रों या अपने अधिकृत उपभोक्ता पंपों से लेना होगा। खुदरा पेट्रोल पंपों से की जाने वाली बड़ी खरीदारी पर प्रभावी रूप से रोक लगा दी गई है। साथ ही डीजल केवल वाहनों के ईंधन टैंक या पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन (PESO) द्वारा स्वीकृत कंटेनरों में ही दिया जाएगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस तरह खरीदा गया डीजल दोबारा बेचा नहीं जा सकेगा। अधिकारियों के अनुसार इस कदम का उद्देश्य आम लोगों के लिए ईंधन की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करना है ताकि किसी भी तरह की कृत्रिम कमी पैदा न हो।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकारी आंकड़ों के अनुसार दिल्ली में खुदरा पेट्रोल पंपों पर डीजल की कीमत करीब 95.20 रुपये प्रति लीटर है, जबकि थोक ग्राहकों के लिए इसकी कीमत लगभग 134.50 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है। कीमतों में इस बड़े अंतर के कारण कई बड़े उपभोक्ता खुदरा बाजार से ईंधन खरीदने लगे थे। बताया जा रहा है कि टेलीकॉम टावर संचालक, निर्माण क्षेत्र से जुड़े संस्थान और कई औद्योगिक इकाइयां भी खुदरा पंपों से डीजल खरीद रही थीं। इससे सरकारी तेल कंपनियों के खुदरा बिक्री आंकड़ों में भी तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई। मई महीने में इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी कंपनियों की पेट्रोल बिक्री में 4.8 प्रतिशत और डीजल बिक्री में 6.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार ने अपने आदेश में मौजूदा वैश्विक हालात का भी उल्लेख किया है। मंत्रालय के अनुसार दुनिया के कुछ हिस्सों में जारी भू-राजनीतिक तनाव, विशेष रूप से पश्चिम एशिया क्षेत्र में बढ़ती अस्थिरता, अंतरराष्ट्रीय पेट्रोलियम आपूर्ति श्रृंखला और शिपिंग नेटवर्क को प्रभावित कर रही है। ऐसे हालात में ईंधन संसाधनों का सावधानीपूर्वक प्रबंधन आवश्यक हो गया है। सूत्रों का कहना है कि यदि वैश्विक आपूर्ति पर और दबाव बढ़ता है तो कई देशों को ऊर्जा संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">आदेश में राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे नियमों को प्रभावी ढंग से लागू करें। जमाखोरी, कालाबाजारी, अनधिकृत खरीद और ईंधन की अवैध बिक्री जैसी गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई करने को कहा गया है। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों और अधिकृत ईंधन विक्रेताओं को भी निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि विशेष परिस्थितियों में किसी उपभोक्ता, क्षेत्र या लेनदेन को इस आदेश से छूट दी जा सकती है। हालांकि इसके लिए अलग से विशेष आदेश जारी किया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 12:20:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>LPG सब्सिडी पर नया नियम, 7 दिन में जवाब नहीं दिया तो मिलना बंद जाएगा ये बड़ा फायदा</title>
                                    <description><![CDATA[सरकार ने LPG सब्सिडी नियम कड़े किए, आय जांच के बाद 7 दिन में जवाब नहीं देने पर सब्सिडी बंद होगी। जानें पूरा अपडेट।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/new-rule-on-lpg-subsidy-if-reply-is-not-given/article-53188"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-12t133605.638.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">LPG <span lang="hi" xml:lang="hi">सब्सिडी के लिए सरकार ने नया और सख्त नियम लागू करने की योजना बनाई है। बढ़ती अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कीमतों और सरकारी खजाने पर दबाव के चलते यह कदम काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अब उन उपभोक्ताओं की पहचान की जा रही है जो आर्थिक रूप से सक्षम हैं लेकिन फिर भी </span>LPG <span lang="hi" xml:lang="hi">सब्सिडी का फायदा उठा रहे हैं। इसके लिए इंडियन ऑयल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सरकारी तेल कंपनियां इनकम टैक्स विभाग के डेटा का सहारा ले रही हैं। कहा जा रहा है कि जिनकी सालाना आय करीब </span>10<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख रुपये या उससे अधिक है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्हें इस नियम के दायरे में लाया जा सकता है। सबसे अहम बात ये है कि अगर किसी ग्राहक को आपत्ति है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उसे केवल </span>7<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिन में जवाब देना होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नहीं तो सब्सिडी अपने आप बंद कर दी जाएगी। कई उपभोक्ताओं को मोबाइल से </span>SMS <span lang="hi" xml:lang="hi">भेजा जा रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे जाहिर है कि प्रक्रिया तेज़ी से आगे बढ़ रही है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सूत्रों के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">तेल कंपनियों ने उन ग्राहकों की सूची बनानी शुरू कर दी है जिनकी टैक्सेबल इनकम तय सीमा से ज्यादा पाई गई है। इन लोगों को मैसेज के जरिए बताया जा रहा है कि उनके रिकॉर्ड के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वे </span>LPG <span lang="hi" xml:lang="hi">सब्सिडी के लिए पात्र नहीं माने जा सकते। संदेश में ये भी लिखा जा रहा है कि यदि किसी का डेटा गलत है या उनकी आय की जानकारी ठीक नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो वे </span>7<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिनों के भीतर अपनी आपत्ति दर्ज करवा सकते हैं। ये शिकायत टोल-फ्री नंबर या आधिकारिक पोर्टल पर की जा सकती है। अगर तय समय में किसी का जवाब नहीं आता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो सब्सिडी स्थायी रूप से बंद कर दी जाएगी। कई उपभोक्ताओं में चिंता भी दिख रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खासकर उन लोगों में जिनके आय के रिकॉर्ड में कोई तकनीकी गलती हो सकती है या जिनके दस्तावेज अपडेट नहीं हैं। प्रशासन का कहना है कि ये कदम पूरी पारदर्शिता के साथ सही लाभार्थियों तक सहायता पहुंचाने के लिए उठाया गया है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सरकार के इस कदम के पीछे मुख्य कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ता दबाव बताया जा रहा है। लगातार सब्सिडी पर होने वाले खर्च से राजकोषीय घाटा भी बढ़ रहा है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे नियंत्रित करने के लिए ये सख्ती जरूरी मानी जा रही है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार अब सब्सिडी को सिर्फ जरूरतमंद वर्ग तक सीमित करना चाहती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि सार्वजनिक संसाधनों का सही उपयोग हो सके। इसके अलावा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भविष्य में ऊर्जा क्षेत्र में और भी बदलाव देखने की चर्चा हो रही है। कुछ रिपोर्ट्स में यह कहा गया है कि सरकार आयात खर्च कम करने के लिए सोने और इलेक्ट्रॉनिक सामानों पर भी निगरानी बढ़ा सकती है। कुल मिलाकर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह पूरा मामला देश की आर्थिक रणनीति से जुड़ा हुआ है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसका प्रभाव सीधे आम उपभोक्ताओं की जेब और रसोई पर पड़ सकता है.</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 May 2026 13:56:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>LPG सिलेंडर डिलीवरी सिस्टम में हुआ बड़ा बदलाव, गैस कंपनियों ने दिया नया अपडेट</title>
                                    <description><![CDATA[LPG सिलेंडर डिलीवरी में DAC सिस्टम लागू, HPCL, इंडेन और भारत गैस ने फर्जी मैसेज व साइबर फ्रॉड को लेकर उपभोक्ताओं को चेताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/big-change-in-lpg-cylinder-delivery-system-gas-companies-gave/article-53113"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-11t124704.812.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">LPG <span lang="hi" xml:lang="hi">सिलेंडर की डिलीवरी और सुरक्षा को लेकर बड़ी गैस कंपनियों जैसे इंडेन</span>, HPCL <span lang="hi" xml:lang="hi">और भारत गैस ने उपभोक्ताओं के लिए एक नया अपडेट जारी किया है। अब </span>LPG <span lang="hi" xml:lang="hi">सिलेंडर डिलीवरी पूरी तरह से </span>Delivery Authentication Code <span lang="hi" xml:lang="hi">यानी </span>DAC <span lang="hi" xml:lang="hi">सिस्टम पर निर्भर कर गई है। कंपनियों का कहना है कि इससे गलत डिलीवरी और गड़बड़ी में काफी कमी आई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इसी बीच साइबर फ्रॉड के नए मामले भी सामने आ रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ गई है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जानकारी के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, DAC <span lang="hi" xml:lang="hi">सिस्टम के तहत गैस सिलेंडर डिलीवर करते समय एक ओटीपी या कोड जनरेट होता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे डिलीवरी के समय ही कन्फर्म करना होता है। अधिकारियों का कहना है कि ये सुनिश्चित करता है कि सिलेंडर सही ग्राहक तक पहुंचे। लेकिन अब स्कैमर्स इस सिस्टम का फायदा उठाते हुए फर्जी मैसेज भेज रहे हैं और लोगों को ठगने की कोशिश कर रहे हैं। </span>HPCL <span lang="hi" xml:lang="hi">ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म </span>X <span lang="hi" xml:lang="hi">पर एक स्पष्ट चेतावनी जारी की है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें उपभोक्ताओं से कहा गया है कि वो किसी भी अनजान मैसेज या लिंक पर भरोसा न करें।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कंपनी ने बताया है कि असली </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">HP Gas <span lang="hi" xml:lang="hi">मैसेज हमेशा </span>“VM-HPGASc-S” <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे आधिकारिक सेंडर नाम से भेजे जाते हैं और उनमें केवल </span>4<span lang="hi" xml:lang="hi"> अंकों का </span>OTP <span lang="hi" xml:lang="hi">होता है। सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि ये </span>OTP <span lang="hi" xml:lang="hi">सिर्फ सिलेंडर डिलीवरी के समय मान्य होता है। </span>HPCL <span lang="hi" xml:lang="hi">ने ये भी स्पष्ट किया है कि कंपनी का कोई कर्मचारी फोन कॉल</span>, WhatsApp <span lang="hi" xml:lang="hi">या किसी लिंक के जरिए </span>OTP <span lang="hi" xml:lang="hi">नहीं मांगता है। यदि कोई मैसेज आपको जल्दी में या डराने की कोशिश करे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उसे तुरंत अनदेखा कर दें।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;"> </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भारत गैस ने भी उपभोक्ताओं को सतर्क रहने की सलाह दी है। कंपनी का कहना है कि </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">DAC <span lang="hi" xml:lang="hi">कोड को किसी भी हालत में पहले से शेयर नहीं किया जाना चाहिए। वहीं इंडेन ने उपभोक्ताओं के लिए साइबर एक्सपर्ट्स द्वारा अलग गाइडलाइंस जारी की हैं। उपेंद्र सिंह बताते हैं कि अगर बिना बुकिंग के कोई डिलीवरी मैसेज आता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उस पर ध्यान न दें। असली मैसेजों में </span>VK-INDANE <span lang="hi" xml:lang="hi">या </span>VM-INDANE <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे आधिकारिक सेंडर </span>ID <span lang="hi" xml:lang="hi">होते हैं और इनमें बुकिंग नंबर और </span>6<span lang="hi" xml:lang="hi"> अंकों का </span>DAC <span lang="hi" xml:lang="hi">कोड दिया जाता है। ये कोड केवल डिलीवरी बॉय के सामने ही शेयर करना चाहिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पहले नहीं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">LPG <span lang="hi" xml:lang="hi">सिलेंडर डिलीवरी को लेकर कंपनियों ने कहा है कि ये सिस्टम पूरी तरह सुरक्षित है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन उपभोक्ताओं की सतर्कता भी उतनी ही जरूरी है। एक छोटी सी लापरवाही से बड़ा नुकसान हो सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए संदिग्ध मैसेज पर तुरंत भरोसा न करने की सलाह दी गई है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">आज के </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">LPG <span lang="hi" xml:lang="hi">सिलेंडर रेट की बात करें तो विभिन्न शहरों में कीमतें अलग-अलग हैं। बेंगलुरु में घरेलू सिलेंडर </span></span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:'Times New Roman', serif;">₹</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">915.50 <span lang="hi" xml:lang="hi">और कमर्शियल </span></span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:'Times New Roman', serif;">₹</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">3152 <span lang="hi" xml:lang="hi">है। हैदराबाद में घरेलू </span></span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:'Times New Roman', serif;">₹</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">965 <span lang="hi" xml:lang="hi">और कमर्शियल </span></span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:'Times New Roman', serif;">₹</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">3315, <span lang="hi" xml:lang="hi">इंदौर में </span></span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:'Times New Roman', serif;">₹</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">941 <span lang="hi" xml:lang="hi">और </span></span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:'Times New Roman', serif;">₹</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">3176.5, <span lang="hi" xml:lang="hi">रायपुर में </span></span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:'Times New Roman', serif;">₹</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">984.5 <span lang="hi" xml:lang="hi">और </span></span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:'Times New Roman', serif;">₹</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">3294.5, <span lang="hi" xml:lang="hi">पटना में </span></span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:'Times New Roman', serif;">₹</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">1002.50 <span lang="hi" xml:lang="hi">और </span></span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:'Times New Roman', serif;">₹</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">3346.5 <span lang="hi" xml:lang="hi">तक पहुंच गई हैं। वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जयपुर में घरेलू सिलेंडर का दाम </span></span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:'Times New Roman', serif;">₹</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">916.5 <span lang="hi" xml:lang="hi">और कमर्शियल </span></span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:'Times New Roman', serif;">₹</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">3099 <span lang="hi" xml:lang="hi">है। देहरादून में ये कीमतें </span></span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:'Times New Roman', serif;">₹</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">932 <span lang="hi" xml:lang="hi">और </span></span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:'Times New Roman', serif;">₹</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">3129 <span lang="hi" xml:lang="hi">हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि अंडमान में घरेलू सिलेंडर </span></span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:'Times New Roman', serif;">₹</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">989 <span lang="hi" xml:lang="hi">और कमर्शियल </span></span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:'Times New Roman', serif;">₹</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">3490 <span lang="hi" xml:lang="hi">तक बिक रहा है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 May 2026 12:59:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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                <title>भोपाल गैस एजेंसी घोटाला: हजारों सिलेंडर गायब, FIR की तैयारी</title>
                                    <description><![CDATA[भोपाल गैस एजेंसी जांच में भारी गड़बड़ी उजागर, खाद्य विभाग की रिपोर्ट के बाद कार्रवाई तेज भोपाल में गैस एजेंसियों की जांच ने चौंकाने वाली सच्चाई सामने ला दी है। हजारों सिलेंडर गायब, फर्जी बिलिंग और उपभोक्ताओं से ठगी के आरोपों ने प्रशासन को सख्त कदम उठाने पर मजबूर कर दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal-gas-agency-scam-thousands-of-cylinders-missing-preparation-to/article-51823"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/mp-news-(55).jpg" alt=""></a><br /><p>मध्य प्रदेश की राजधानी <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">भोपाल</span></span> में गैस एजेंसियों से जुड़ा बड़ा घोटाला सामने आया है, जहां खाद्य विभाग की जांच में भारी अनियमितताएं उजागर हुई हैं। जेके रोड स्थित फीनिक्स एचपीसीएल और कोटरा सुल्तानाबाद की बीएस एचपी गैस एजेंसी में सिलेंडर स्टॉक, सप्लाई और बिलिंग में गंभीर गड़बड़ियां पाई गई हैं। जांच रिपोर्ट एडीएम प्रकाश नायक को सौंप दी गई है, जिसके बाद संबंधित एजेंसियों के खिलाफ FIR दर्ज करने की तैयारी शुरू हो गई है। रिपोर्ट के मुताबिक हजारों गैस सिलेंडर गायब पाए गए हैं और उपभोक्ताओं को बिना डिलीवरी के ही ‘डिलीवर्ड’ दिखाया गया। अधिकारियों के अनुसार यह मामला बड़े स्तर की वित्तीय अनियमितता और उपभोक्ता ठगी से जुड़ा हो सकता है।</p>
<p><strong>मुख्य विवरण</strong><br />जांच में सामने आया कि फीनिक्स एजेंसी से 350 घरेलू, 350 कमर्शियल और करीब 2 हजार छोटे सिलेंडर गायब हैं। वहीं बीएस एजेंसी के गोदाम से भी 254 भरे सिलेंडर कम पाए गए।रिपोर्ट्स के अनुसार कई उपभोक्ताओं ने ऑनलाइन गैस बुकिंग की, लेकिन उन्हें सिलेंडर कभी नहीं मिला। इसके बावजूद सिस्टम में डिलीवरी पूरी दिखा दी गई। जांच में यह भी पाया गया कि ऐसे सिलेंडर ज्यादा कीमत लेकर अन्य ग्राहकों को बेच दिए गए।</p>
<p><strong>मिड हेडिंग: फर्जी बिलिंग का खेल</strong><br />जांच में फर्जी बिलिंग और अतिरिक्त वसूली का मामला भी सामने आया है।एजेंसी द्वारा उपभोक्ताओं से होम डिलीवरी चार्ज लेने के बावजूद उन्हें खुद आकर सिलेंडर लेने पर मजबूर किया गया।बताया गया कि ‘कैश एंड कैरी’ के नाम पर हर महीने लाखों रुपए की अवैध वसूली की जा रही थी। इसके अलावा 238 रुपए का फर्जी ‘सुरक्षा निरीक्षण शुल्क’ लेकर करीब 10 लाख रुपए तक की वसूली का मामला भी उजागर हुआ है।</p>
<p>खाद्य विभाग को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि गैस सिलेंडर की सप्लाई में गड़बड़ी हो रही है। इसके बाद फूड कंट्रोलर ने टीम गठित कर जांच शुरू कराई।जांच के दौरान यह भी सामने आया कि दोनों एजेंसियों का साझा गोदाम करीब 36 हजार वर्गफुट क्षेत्र में बना है और संचालन में पारदर्शिता की कमी है। एक एजेंसी रिटायर्ड सहायक आपूर्ति अधिकारी और उनके रिश्तेदारों से जुड़ी बताई जा रही है।</p>
<p><strong>मिड हेडिंग: सप्लाई में हेरफेर</strong><br />ट्रांसपोर्ट और सप्लाई सिस्टम में भी गड़बड़ी मिली है।रिपोर्ट के अनुसार गैस सिलेंडर लेकर आने वाले ट्रक तय समय से कई घंटे देरी से पहुंचे, जिससे बीच में हेरफेर की आशंका जताई गई है।इसके अलावा एजेंसी द्वारा बताए गए 9 डिलीवरी वाहनों में से केवल 5 ही सक्रिय पाए गए, जिससे वितरण प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं।</p>
<p><strong>आधिकारिक बयान</strong><br />अधिकारियों के अनुसार यह मामला गंभीर है और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।सूत्रों के मुताबिक 10 से 12 मामलों की जांच रिपोर्ट प्रशासन को सौंपी गई है और जल्द ही FIR दर्ज हो सकती है।जिला प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि एजेंसियों का लाइसेंस निरस्त करने का प्रस्ताव भी भेजा जाएगा।</p>
<p><strong>प्रभाव / विश्लेषण</strong><br />इस मामले ने शहर के हजारों गैस उपभोक्ताओं को प्रभावित किया है।बिना डिलीवरी के भुगतान, फर्जी बिलिंग और अवैध वसूली जैसी गतिविधियों से लोगों को आर्थिक नुकसान हुआ है।विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला गैस वितरण प्रणाली में निगरानी की कमी को उजागर करता है और इससे पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े होते हैं।</p>
<p>प्रशासन अब इस मामले में सख्त कार्रवाई के मूड में है।FIR दर्ज होने के बाद संबंधित एजेंसियों के संचालकों पर कानूनी कार्रवाई, जुर्माना और लाइसेंस रद्द होने की संभावना है। आने वाले दिनों में अन्य गैस एजेंसियों की भी जांच तेज हो सकती है, ताकि इस तरह की अनियमितताओं पर रोक लगाई जा सके। </p>
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<h3> </h3>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 12:22:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पचपदरा रिफाइनरी की यूनिट में लगी भीषण आग, कल पीएम मोदी करने वाले थे लोकार्पण</title>
                                    <description><![CDATA[पचपदरा रिफाइनरी में आग की बड़ी घटना, पीएम मोदी के दौरे से पहले हड़कंप मचा। कारणों की जांच जारी, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/major-accident-before-pm-visit-24-hours-before-inauguration-massive/article-51693"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/_rajasthan-pachpadra-refinery-fire.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">राजस्थान के बालोतरा जिले स्थित पचपदरा रिफाइनरी में सोमवार दोपहर अचानक लगी भीषण आग ने पूरे परिसर में अफरा-तफरी मचा दी। यह घटना ऐसे समय हुई है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 21 अप्रैल को यहां प्रस्तावित लोकार्पण समारोह में शामिल होने वाले हैं। पचपदरा रिफाइनरी में आग लगते ही काले धुएं का घना गुबार आसमान में फैल गया, जिसे कई किलोमीटर दूर से देखा गया। मौके पर मौजूद सुरक्षा बलों, तकनीकी टीमों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच तुरंत हलचल तेज हो गई। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, आग रिफाइनरी की एक यूनिट में लगी, जहां से लपटें तेजी से उठीं। राहत की बात यह है कि अभी तक किसी जनहानि की सूचना नहीं है, लेकिन भारी आर्थिक नुकसान की आशंका जताई जा रही है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">अधिकारियों के अनुसार, दोपहर के समय एक यूनिट में अचानक स्पार्किंग या तकनीकी कारणों से आग भड़क उठी। पचपदरा रिफाइनरी में आग लगते ही इन-हाउस फायर सेफ्टी सिस्टम सक्रिय हो गया और तुरंत दमकल टीमों को अलर्ट किया गया।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">करीब दर्जनों फायर टेंडर और हाइड्रेंट सिस्टम के जरिए आग बुझाने का काम जारी है। स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए रिफाइनरी के संवेदनशील हिस्सों को खाली कराया गया और आसपास के इलाकों में एहतियात बढ़ा दी गई है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">पचपदरा रिफाइनरी देश की महत्वपूर्ण ऊर्जा परियोजनाओं में से एक मानी जाती है। प्रधानमंत्री के प्रस्तावित लोकार्पण को लेकर पिछले कई दिनों से यहां बड़े स्तर पर तैयारियां चल रही थीं। सूत्रों के मुताबिक, पूरे परिसर को हाई-सिक्योरिटी जोन में तब्दील किया गया था, जहां एसपीजी और राज्य पुलिस की तैनाती की गई थी। ऐसे में पचपदरा रिफाइनरी में आग की घटना ने सुरक्षा और तकनीकी व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">आधिकारिक बयान</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">जिला प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि आग पर काबू पाने के प्रयास तेजी से जारी हैं और विशेषज्ञ टीमों को मौके पर बुलाया गया है। एचपीसीएल और रिफाइनरी प्रबंधन के वरिष्ठ अधिकारी स्थिति की लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक, आग लगने के कारणों की जांच शुरू कर दी गई है और विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी।</span></p>
<p><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब देश-भर की नजरें इस लोकार्पण कार्यक्रम पर टिकी हैं। पचपदरा रिफाइनरी में आग ने सुरक्षा प्रोटोकॉल और तकनीकी तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की औद्योगिक इकाइयों में छोटी तकनीकी चूक भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। फिलहाल, इस घटना से कार्यक्रम की टाइमिंग या स्वरूप पर क्या असर पड़ेगा, इसे लेकर आधिकारिक स्थिति स्पष्ट नहीं है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 18:38:28 +0530</pubDate>
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