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                <title>Energy Sector - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Energy Sector RSS Feed</description>
                
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                <title>बिजली गोदाम हादसे का 66.57 करोड़ का बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ेगा</title>
                                    <description><![CDATA[छत्तीसगढ़ विद्युत नियामक आयोग ने वितरण कंपनी की मांग खारिज की, कहा- प्रशासनिक लापरवाही और जोखिम प्रबंधन की कमी का खर्च उपभोक्ताओं से नहीं वसूला जा सकता।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/the-burden-of-rs-6657-crore-due-to-electricity-warehouse/article-58074"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/cserc.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">छत्तीसगढ़ के बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग (CSERC) ने छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) की उस मांग को खारिज कर दिया है, जिसमें कंपनी ने आगजनी से हुए 66.57 करोड़ रुपये के नुकसान को बिजली टैरिफ में शामिल कर उपभोक्ताओं से वसूलने की अनुमति मांगी थी। आयोग ने स्पष्ट कहा कि यदि किसी वितरण कंपनी को प्रशासनिक लापरवाही, जोखिम प्रबंधन की कमी या संपत्तियों का पर्याप्त बीमा नहीं होने के कारण नुकसान हुआ है, तो उसका वित्तीय भार सीधे उपभोक्ताओं पर नहीं डाला जा सकता। आयोग के इस फैसले को राज्य के लाखों बिजली उपभोक्ताओं के हित में एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">मामला वित्तीय वर्ष 2026-27 के बिजली टैरिफ निर्धारण से जुड़ा है। इस दौरान CSPDCL ने आयोग के समक्ष कुल 658.32 करोड़ रुपये को असाधारण व्यय के रूप में मान्यता देने का अनुरोध किया था। इस राशि में अप्रैल 2024 में रायपुर के गुढ़ियारी स्थित क्षेत्रीय बिजली गोदाम में शॉर्ट सर्किट से लगी आग के कारण ट्रांसफार्मर, केबल और अन्य विद्युत उपकरणों को हुए नुकसान का दावा भी शामिल था। इसके अलावा भिलाई, रायगढ़ और कोरबा में हुई आगजनी की घटनाओं से हुए नुकसान को भी इसी दावे में जोड़ा गया था। कंपनी चाहती थी कि इन घटनाओं से हुए कुल 66.57 करोड़ रुपये के नुकसान की भरपाई बिजली दरों में बढ़ोतरी के माध्यम से उपभोक्ताओं से की जाए।</p>
<p class="isSelectedEnd">सुनवाई के दौरान आयोग ने कंपनी से कई महत्वपूर्ण सवाल पूछे। विशेष रूप से यह जानकारी मांगी गई कि जिन उपकरणों और सामग्रियों को आग से नुकसान पहुंचा, उनका बीमा कराया गया था या नहीं। आयोग के समक्ष प्रस्तुत दस्तावेजों की जांच के बाद यह पाया गया कि कंपनी पर्याप्त और संतोषजनक बीमा संबंधी प्रमाण उपलब्ध नहीं करा सकी। इसके बाद आयोग ने अपने आदेश में कहा कि वितरण कंपनी की संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और उनका समय पर बीमा कराना उसकी अपनी जिम्मेदारी है। यदि इस स्तर पर आवश्यक सावधानी नहीं बरती गई है तो उसका आर्थिक परिणाम बिजली उपभोक्ताओं पर नहीं थोपा जा सकता।</p>
<p class="isSelectedEnd">आयोग ने अपने फैसले में यह भी स्पष्ट किया कि बिजली उपभोक्ताओं से केवल उन्हीं खर्चों की वसूली की जा सकती है जो बिजली आपूर्ति व्यवस्था को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए आवश्यक और उचित हों। लेकिन प्रबंधन संबंधी कमियों, लापरवाही या जोखिम नियंत्रण में विफलता से उत्पन्न नुकसान को टैरिफ में जोड़ना उचित नहीं माना जा सकता। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भविष्य में बिजली वितरण कंपनियों को अपनी परिसंपत्तियों की सुरक्षा, रखरखाव और जोखिम प्रबंधन को लेकर अधिक जिम्मेदार बनाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">सुनवाई के दौरान कंपनी की ओर से रेलवे से जुड़े 591.75 करोड़ रुपये के एक अन्य दावे को भी टैरिफ में शामिल करने का अनुरोध किया गया था। हालांकि आयोग ने इस मांग को भी फिलहाल स्वीकार नहीं किया। आयोग ने कहा कि यह मामला अभी आर्बिट्रेशन की प्रक्रिया में लंबित है और अंतिम देयता तय नहीं हुई है। जब तक संबंधित विवाद का अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, तब तक इस राशि को बिजली दरों में शामिल करने का कोई औचित्य नहीं बनता। इसलिए इस दावे पर भी तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd">ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि नियामक आयोग का यह फैसला उपभोक्ता हितों की रक्षा के सिद्धांत को मजबूत करता है। बिजली वितरण कंपनियों को अपने संचालन के दौरान होने वाले जोखिमों का उचित प्रबंधन करना होता है। यदि किसी कारणवश संपत्तियों को नुकसान होता है तो उसके लिए बीमा और अन्य सुरक्षा उपाय पहले से सुनिश्चित किए जाने चाहिए। ऐसे मामलों में यदि पर्याप्त तैयारी नहीं की जाती, तो उसका खर्च सीधे उपभोक्ताओं पर डालना उचित नहीं माना जा सकता।</p>
<p class="isSelectedEnd">राज्य में हर वर्ष बिजली टैरिफ निर्धारण की प्रक्रिया के दौरान वितरण कंपनियां विभिन्न खर्चों को मान्यता देने का अनुरोध करती हैं। आयोग इन सभी दावों की तकनीकी, वित्तीय और कानूनी आधार पर समीक्षा करता है। इसके बाद ही यह तय किया जाता है कि कौन-सा व्यय बिजली दरों में शामिल किया जा सकता है और कौन-सा नहीं। इस बार भी आयोग ने उपलब्ध दस्तावेजों, साक्ष्यों और नियमों का परीक्षण करने के बाद ही यह निर्णय सुनाया।</p>
<p>आयोग के फैसले के बाद फिलहाल बिजली उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त 66.57 करोड़ रुपये का बोझ नहीं पड़ेगा। साथ ही रेलवे से जुड़े लंबित दावे को भी बिजली टैरिफ में शामिल नहीं किया गया है। माना जा रहा है कि इस निर्णय से भविष्य में बिजली वितरण कंपनियां अपनी परिसंपत्तियों के बीमा, सुरक्षा व्यवस्था और जोखिम प्रबंधन पर अधिक ध्यान देंगी। वहीं उपभोक्ताओं को भी यह भरोसा मिलेगा कि प्रशासनिक या प्रबंधन संबंधी कमियों का आर्थिक भार बिना उचित आधार के उन पर नहीं डाला जाएगा। फिलहाल इस फैसले को छत्तीसगढ़ के बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 12:54:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पेट्रोल-डीजल की थोक खरीद पर केंद्र की सख्ती, डीजल बिक्री पर नई सीमा लागू</title>
                                    <description><![CDATA[भू-राजनीतिक तनाव और ईंधन आपूर्ति पर बढ़ते दबाव के बीच सरकार ने औद्योगिक व व्यावसायिक उपभोक्ताओं की खुदरा पेट्रोल पंपों से खरीद पर रोक लगाई, डीजल खरीद 200 लीटर प्रतिदिन तक सीमित की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/centers-strictness-on-bulk-purchase-of-petrol-and-diesel-new/article-55707"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/petrol-diesel-restrictions.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">देशभर में पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता को बनाए रखने और संभावित जमाखोरी पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने औद्योगिक, व्यावसायिक और संस्थागत उपभोक्ताओं के लिए खुदरा पेट्रोल पंपों से पेट्रोल और डीजल खरीदने पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही डीजल की बिक्री को प्रति ग्राहक या वाहन प्रतिदिन अधिकतम 200 लीटर तक सीमित कर दिया गया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की ओर से जारी आदेश के अनुसार यह व्यवस्था शुरुआती तौर पर 90 दिनों तक लागू रहेगी। अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ रहे असर को देखते हुए यह कदम उठाना जरूरी हो गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">हाल के महीनों में देश के कई हिस्सों में डीजल की मांग अचानक बढ़ी थी। इसके पीछे एक बड़ी वजह खुदरा और थोक ईंधन कीमतों के बीच बढ़ता अंतर बताया जा रहा है। कई उद्योग, संस्थान और बड़े व्यावसायिक उपभोक्ता अपेक्षाकृत सस्ता ईंधन खरीदने के लिए सीधे पेट्रोल पंपों का रुख कर रहे थे। इससे उन खुदरा केंद्रों पर दबाव बढ़ने लगा जो आम उपभोक्ताओं की जरूरतों को पूरा करने के लिए बनाए गए हैं। सरकार का मानना है कि अगर यह स्थिति जारी रहती तो कुछ क्षेत्रों में ईंधन की कमी और आवश्यक सेवाओं पर असर पड़ सकता था। यही कारण है कि मोटर स्पिरिट और हाई स्पीड डीजल की आपूर्ति को नियंत्रित करने के लिए अस्थायी आदेश जारी किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">नए आदेश के तहत औद्योगिक, संस्थागत और व्यावसायिक उपभोक्ताओं को अब अपनी जरूरत का ईंधन निर्धारित थोक आपूर्ति केंद्रों या अपने अधिकृत उपभोक्ता पंपों से लेना होगा। खुदरा पेट्रोल पंपों से की जाने वाली बड़ी खरीदारी पर प्रभावी रूप से रोक लगा दी गई है। साथ ही डीजल केवल वाहनों के ईंधन टैंक या पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन (PESO) द्वारा स्वीकृत कंटेनरों में ही दिया जाएगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस तरह खरीदा गया डीजल दोबारा बेचा नहीं जा सकेगा। अधिकारियों के अनुसार इस कदम का उद्देश्य आम लोगों के लिए ईंधन की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करना है ताकि किसी भी तरह की कृत्रिम कमी पैदा न हो।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकारी आंकड़ों के अनुसार दिल्ली में खुदरा पेट्रोल पंपों पर डीजल की कीमत करीब 95.20 रुपये प्रति लीटर है, जबकि थोक ग्राहकों के लिए इसकी कीमत लगभग 134.50 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है। कीमतों में इस बड़े अंतर के कारण कई बड़े उपभोक्ता खुदरा बाजार से ईंधन खरीदने लगे थे। बताया जा रहा है कि टेलीकॉम टावर संचालक, निर्माण क्षेत्र से जुड़े संस्थान और कई औद्योगिक इकाइयां भी खुदरा पंपों से डीजल खरीद रही थीं। इससे सरकारी तेल कंपनियों के खुदरा बिक्री आंकड़ों में भी तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई। मई महीने में इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी कंपनियों की पेट्रोल बिक्री में 4.8 प्रतिशत और डीजल बिक्री में 6.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार ने अपने आदेश में मौजूदा वैश्विक हालात का भी उल्लेख किया है। मंत्रालय के अनुसार दुनिया के कुछ हिस्सों में जारी भू-राजनीतिक तनाव, विशेष रूप से पश्चिम एशिया क्षेत्र में बढ़ती अस्थिरता, अंतरराष्ट्रीय पेट्रोलियम आपूर्ति श्रृंखला और शिपिंग नेटवर्क को प्रभावित कर रही है। ऐसे हालात में ईंधन संसाधनों का सावधानीपूर्वक प्रबंधन आवश्यक हो गया है। सूत्रों का कहना है कि यदि वैश्विक आपूर्ति पर और दबाव बढ़ता है तो कई देशों को ऊर्जा संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">आदेश में राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे नियमों को प्रभावी ढंग से लागू करें। जमाखोरी, कालाबाजारी, अनधिकृत खरीद और ईंधन की अवैध बिक्री जैसी गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई करने को कहा गया है। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों और अधिकृत ईंधन विक्रेताओं को भी निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि विशेष परिस्थितियों में किसी उपभोक्ता, क्षेत्र या लेनदेन को इस आदेश से छूट दी जा सकती है। हालांकि इसके लिए अलग से विशेष आदेश जारी किया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 12:20:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अडाणी एनर्जी बनी देश की सबसे बड़ी स्मार्ट मीटर कंपनी, ₹3,050 करोड़ में इंटेलिस्मार्ट का अधिग्रहण</title>
                                    <description><![CDATA[इंटेलिस्मार्ट की 100% हिस्सेदारी खरीदने के बाद अडाणी एनर्जी सॉल्यूशंस के पास 4.7 करोड़ से अधिक स्मार्ट मीटर का पोर्टफोलियो होगा, बिजली वितरण क्षेत्र में बढ़ेगी कंपनी की पकड़।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/adani-energy-becomes-countrys-largest-smart-meter-company-acquires-intellismart/article-55498"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/adani-energy-solutions.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">देश के स्मार्ट मीटरिंग सेक्टर में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। अडाणी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड (AESL) ने इंटेलिस्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड का अधिग्रहण कर लिया है। करीब 3,050 करोड़ रुपए के इस सौदे के साथ ही कंपनी देश की सबसे बड़ी स्मार्ट मीटरिंग कंपनी बन गई है। इस अधिग्रहण के बाद अडाणी एनर्जी के पास कुल 4.7 करोड़ से अधिक स्मार्ट मीटर का पोर्टफोलियो हो जाएगा, जो भारतीय बिजली वितरण क्षेत्र में उसकी स्थिति को और मजबूत करेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">मंगलवार को सामने आई इस जानकारी के बाद ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में इसकी काफी चर्चा रही। इंटेलिस्मार्ट पहले से ही देश की प्रमुख स्मार्ट मीटरिंग कंपनियों में गिनी जाती है और इसके पास उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, बिहार तथा असम जैसे राज्यों में 2.2 करोड़ से ज्यादा स्मार्ट मीटरों का नेटवर्क मौजूद है। अब यह पूरा कारोबार अडाणी एनर्जी सॉल्यूशंस के नियंत्रण में आ जाएगा। कंपनी को इंटेलिस्मार्ट की 100 प्रतिशत इक्विटी हिस्सेदारी मिलेगी, जिसके साथ उससे जुड़ी वित्तीय देनदारियां भी शामिल होंगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">यह सौदा सिर्फ एक कारोबारी विस्तार नहीं बल्कि भारत के तेजी से बढ़ते स्मार्ट ऊर्जा बाजार में लंबी अवधि की रणनीति का हिस्सा है। केंद्र सरकार पिछले कुछ वर्षों से देशभर में पारंपरिक बिजली मीटरों की जगह स्मार्ट मीटर लगाने की योजना पर तेजी से काम कर रही है। इसका उद्देश्य बिजली वितरण कंपनियों की दक्षता बढ़ाना, लाइन लॉस कम करना और उपभोक्ताओं को पारदर्शी बिलिंग व्यवस्था उपलब्ध कराना है। ऐसे समय में अडाणी एनर्जी का यह अधिग्रहण काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">कंपनी के अनुसार अधिग्रहण से पहले AESL के पास 2.46 करोड़ से अधिक स्मार्ट मीटरों की ऑर्डर बुक थी। इंटेलिस्मार्ट के जुड़ने के बाद यह संख्या बढ़कर 4.7 करोड़ से ऊपर पहुंच जाएगी। इससे कंपनी न केवल स्मार्ट मीटरिंग के क्षेत्र में अग्रणी बनेगी बल्कि बड़े पैमाने पर संचालन की क्षमता भी हासिल करेगी। ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि इतने बड़े पोर्टफोलियो के साथ कंपनी देश के विभिन्न राज्यों में बिजली वितरण सुधार कार्यक्रमों में और अधिक सक्रिय भूमिका निभा सकेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">स्मार्ट मीटरों को बिजली क्षेत्र में तकनीकी क्रांति का हिस्सा माना जा रहा है। इनकी मदद से उपभोक्ताओं को अपनी बिजली खपत की रियल टाइम जानकारी मिलती है। साथ ही बिजली कंपनियों को भी खपत के आंकड़े तुरंत प्राप्त होते हैं, जिससे बिलिंग प्रक्रिया अधिक सटीक बनती है। बिजली चोरी रोकने, लाइन लॉस कम करने और उपभोक्ता शिकायतों को घटाने में भी इन मीटरों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। यही वजह है कि देशभर में इनके उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है स्मार्ट मीटरिंग बाजार आने वाले वर्षों में तेजी से बढ़ने वाला है। सरकार की योजनाओं और डिजिटलीकरण की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए इस क्षेत्र में निवेश लगातार बढ़ रहा है। अडाणी समूह का यह कदम भी उसी दिशा में एक बड़ा निवेश माना जा रहा है। इससे कंपनी को तकनीकी विशेषज्ञता, बड़े ग्राहक आधार और कई राज्यों में मौजूद परिचालन नेटवर्क का लाभ मिलेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">अडाणी एनर्जी सॉल्यूशंस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी कंदर्प पटेल ने कहा कि इंटेलिस्मार्ट का अधिग्रहण कंपनी की निष्पादन क्षमता और तकनीकी ताकत को और मजबूत करेगा। उनके मुताबिक इस सौदे से बिजली वितरण क्षेत्र के आधुनिकीकरण में तेजी आएगी और उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि बड़े स्तर पर संचालन से लागत कम होगी और दक्षता में सुधार देखने को मिलेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">बिजली उपभोक्ताओं के लिए भी यह अधिग्रहण कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्मार्ट मीटरों के विस्तार से गलत बिलिंग की शिकायतों में कमी आ सकती है। उपभोक्ता अपनी खपत पर बेहतर नियंत्रण रख सकेंगे और उन्हें समय पर सटीक बिल मिलने की संभावना बढ़ेगी। इसके अलावा बिजली वितरण कंपनियों के लिए भी राजस्व संग्रह में सुधार हो सकता है। 3,050 करोड़ रुपए का यह अधिग्रहण भारतीय ऊर्जा क्षेत्र में इस वर्ष के प्रमुख सौदों में शामिल हो गया है। स्मार्ट मीटरिंग बाजार में अडाणी एनर्जी सॉल्यूशंस की स्थिति अब पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो गई है और आने वाले समय में यह क्षेत्र कंपनी की विकास रणनीति का अहम आधार बन सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 13:25:10 +0530</pubDate>
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                <title>पचपदरा रिफाइनरी की यूनिट में लगी भीषण आग, कल पीएम मोदी करने वाले थे लोकार्पण</title>
                                    <description><![CDATA[पचपदरा रिफाइनरी में आग की बड़ी घटना, पीएम मोदी के दौरे से पहले हड़कंप मचा। कारणों की जांच जारी, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/major-accident-before-pm-visit-24-hours-before-inauguration-massive/article-51693"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/_rajasthan-pachpadra-refinery-fire.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">राजस्थान के बालोतरा जिले स्थित पचपदरा रिफाइनरी में सोमवार दोपहर अचानक लगी भीषण आग ने पूरे परिसर में अफरा-तफरी मचा दी। यह घटना ऐसे समय हुई है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 21 अप्रैल को यहां प्रस्तावित लोकार्पण समारोह में शामिल होने वाले हैं। पचपदरा रिफाइनरी में आग लगते ही काले धुएं का घना गुबार आसमान में फैल गया, जिसे कई किलोमीटर दूर से देखा गया। मौके पर मौजूद सुरक्षा बलों, तकनीकी टीमों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच तुरंत हलचल तेज हो गई। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, आग रिफाइनरी की एक यूनिट में लगी, जहां से लपटें तेजी से उठीं। राहत की बात यह है कि अभी तक किसी जनहानि की सूचना नहीं है, लेकिन भारी आर्थिक नुकसान की आशंका जताई जा रही है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">अधिकारियों के अनुसार, दोपहर के समय एक यूनिट में अचानक स्पार्किंग या तकनीकी कारणों से आग भड़क उठी। पचपदरा रिफाइनरी में आग लगते ही इन-हाउस फायर सेफ्टी सिस्टम सक्रिय हो गया और तुरंत दमकल टीमों को अलर्ट किया गया।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">करीब दर्जनों फायर टेंडर और हाइड्रेंट सिस्टम के जरिए आग बुझाने का काम जारी है। स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए रिफाइनरी के संवेदनशील हिस्सों को खाली कराया गया और आसपास के इलाकों में एहतियात बढ़ा दी गई है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">पचपदरा रिफाइनरी देश की महत्वपूर्ण ऊर्जा परियोजनाओं में से एक मानी जाती है। प्रधानमंत्री के प्रस्तावित लोकार्पण को लेकर पिछले कई दिनों से यहां बड़े स्तर पर तैयारियां चल रही थीं। सूत्रों के मुताबिक, पूरे परिसर को हाई-सिक्योरिटी जोन में तब्दील किया गया था, जहां एसपीजी और राज्य पुलिस की तैनाती की गई थी। ऐसे में पचपदरा रिफाइनरी में आग की घटना ने सुरक्षा और तकनीकी व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">आधिकारिक बयान</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">जिला प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि आग पर काबू पाने के प्रयास तेजी से जारी हैं और विशेषज्ञ टीमों को मौके पर बुलाया गया है। एचपीसीएल और रिफाइनरी प्रबंधन के वरिष्ठ अधिकारी स्थिति की लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक, आग लगने के कारणों की जांच शुरू कर दी गई है और विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी।</span></p>
<p><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब देश-भर की नजरें इस लोकार्पण कार्यक्रम पर टिकी हैं। पचपदरा रिफाइनरी में आग ने सुरक्षा प्रोटोकॉल और तकनीकी तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की औद्योगिक इकाइयों में छोटी तकनीकी चूक भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। फिलहाल, इस घटना से कार्यक्रम की टाइमिंग या स्वरूप पर क्या असर पड़ेगा, इसे लेकर आधिकारिक स्थिति स्पष्ट नहीं है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/major-accident-before-pm-visit-24-hours-before-inauguration-massive/article-51693</link>
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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 18:38:28 +0530</pubDate>
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