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                <title>Apple - दैनिक जागरण</title>
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                <title>ओपनएआई पर एप्पल का बड़ा मुकदमा, ट्रेड सीक्रेट चोरी का लगाया आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[एप्पल ने अमेरिका की अदालत में दायर याचिका में ओपनएआई, उसके हार्डवेयर सहयोगी और दो पूर्व कर्मचारियों पर गोपनीय तकनीकी जानकारी के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/apples-big-lawsuit-against-openai-accused-of-trade-secret-theft/article-58482"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/pakistan-fuel-price-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">एप्पल और ओपनएआई के बीच चल रही प्रतिस्पर्धा अब कानूनी लड़ाई तक पहुंच गई है। अमेरिकी टेक कंपनी एप्पल ने ओपनएआई, उसके सहयोगी संस्थानों और अपने दो पूर्व कर्मचारियों के खिलाफ अमेरिका के उत्तरी कैलिफोर्निया स्थित जिला न्यायालय में मुकदमा दायर किया है। कंपनी का आरोप है कि उसके पूर्व कर्मचारियों ने नौकरी छोड़ने से पहले एप्पल की गोपनीय और संवेदनशील तकनीकी जानकारी हासिल की और बाद में उसका इस्तेमाल ओपनएआई के उपभोक्ता हार्डवेयर प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाने में किया गया। एप्पल का कहना है कि यह केवल कर्मचारियों द्वारा जानकारी साथ ले जाने का मामला नहीं है, बल्कि कंपनी के व्यापारिक रहस्यों, उत्पाद विकास और सप्लाई चेन से जुड़ी रणनीतिक जानकारी के कथित दुरुपयोग का गंभीर मामला है। इस घटनाक्रम ने तकनीकी जगत में हलचल पैदा कर दी है, क्योंकि दोनों कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उपभोक्ता तकनीक के क्षेत्र में प्रमुख प्रतिस्पर्धी मानी जाती हैं। मुकदमे में एप्पल ने अदालत से मामले की विस्तृत जांच और गोपनीय जानकारी के कथित उपयोग पर रोक लगाने की मांग की है। दूसरी ओर, मुकदमा दायर किए जाने तक ओपनएआई की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।</p>
<p>एप्पल की शिकायत में पूर्व वरिष्ठ सिस्टम इलेक्ट्रिकल इंजीनियर चांग लियू और आईफोन तथा एप्पल वॉच के पूर्व उपाध्यक्ष (प्रोडक्ट डिजाइन) टैंग यू टैन का नाम शामिल किया गया है। कंपनी का आरोप है कि चांग लियू ने नौकरी छोड़ते समय कंपनी का आधिकारिक लैपटॉप वापस नहीं किया और बाद में एक प्रमाणीकरण संबंधी तकनीकी खामी का कथित फायदा उठाकर एप्पल के आंतरिक नेटवर्क तक पहुंच बनाई। शिकायत के अनुसार उन्होंने हार्डवेयर से जुड़ी कई गोपनीय फाइलें डाउनलोड कीं। वहीं टैंग यू टैन पर आरोप है कि उन्होंने नौकरी छोड़ने से पहले एप्पल के आपूर्तिकर्ताओं, निर्माण प्रक्रियाओं और उद्योग से जुड़ी आंतरिक जानकारी स्वयं को ईमेल की। एप्पल का यह भी दावा है कि उन्होंने कुछ कर्मचारियों को ओपनएआई में इंटरव्यू के दौरान कंपनी के हार्डवेयर या पुर्जे साथ लाने के लिए प्रेरित किया, ताकि उन्हें दिखाया जा सके। शिकायत में एक कथित घटना का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें एक उम्मीदवार ने कथित तौर पर कहा कि उसे यह पता ही नहीं था कि कार्यालय से ऐसे उपकरण बाहर ले जाए जा सकते हैं। एप्पल का कहना है कि इस तरह की गतिविधियां कंपनी के बौद्धिक संपदा अधिकारों और व्यापारिक गोपनीयता का उल्लंघन हैं। मुकदमे में ओपनएआई फाउंडेशन, ओपनएआई ग्रुप पीबीसी और आईओ प्रोडक्ट्स को भी प्रतिवादी बनाया गया है। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित पक्षों की ओर से तत्काल कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।</p>
<p>एप्पल ने अदालत में यह भी कहा है कि वर्तमान में ओपनएआई में उसके 400 से अधिक पूर्व कर्मचारी काम कर रहे हैं। कंपनी का कहना है कि केवल पूर्व कर्मचारियों की मौजूदगी किसी संगठन को एप्पल के व्यापारिक रहस्यों का उपयोग करने का अधिकार नहीं देती। शिकायत के अनुसार ओपनएआई के कुछ कर्मचारियों ने एप्पल के आपूर्तिकर्ताओं से भी गोपनीय तकनीकी जानकारी हासिल करने की कोशिश की। एप्पल का दावा है कि एक आपूर्तिकर्ता से कथित तौर पर ऐसी विशेष धातु फिनिशिंग तकनीक का उपयोग कराया गया, जिसे एप्पल अपनी गोपनीय निर्माण प्रक्रिया का हिस्सा मानता है। गौरतलब है कि पिछले वर्ष ओपनएआई ने पूर्व एप्पल डिजाइनर जॉनी आइव द्वारा स्थापित हार्डवेयर स्टार्टअप io Products का 6.5 अरब डॉलर में अधिग्रहण किया था। इस सौदे को ओपनएआई के सॉफ्टवेयर से आगे बढ़कर उपभोक्ता हार्डवेयर बाजार में प्रवेश की बड़ी रणनीति के रूप में देखा गया था। हालांकि जॉनी आइव का नाम इस मुकदमे में शामिल नहीं किया गया है। एप्पल और ओपनएआई के बीच तनाव पिछले कई महीनों से बढ़ रहा था। एप्पल का दावा है कि उसने फरवरी में ओपनएआई को पत्र लिखकर अपनी चिंताओं से अवगत कराया था और बातचीत की इच्छा जताई थी, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। दिलचस्प बात यह है कि दोनों कंपनियां हाल तक साझेदार भी रही हैं। वर्ष 2024 में एप्पल ने अपने "Apple Intelligence" फीचर के साथ ChatGPT को सिरी और अन्य सेवाओं में एकीकृत किया था, जिससे आईफोन उपयोगकर्ताओं को सीधे चैटजीपीटी की सुविधाएं मिलने लगी थीं। इसके बावजूद एआई तकनीक, प्रतिभाशाली कर्मचारियों की भर्ती और नए हार्डवेयर उत्पादों की होड़ ने दोनों कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा को तेज कर दिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 13:27:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>कच्चे तेल की कीमतें फिर 72 डॉलर पर, एपल प्रोडक्ट महंगे; टेक और बाजार में बड़े बदलाव</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान युद्ध से पहले वाले स्तर पर लौटा ब्रेंट क्रूड, भारत में आईपैड और मैकबुक की कीमतों में भारी बढ़ोतरी, माइक्रोन ने मार्केट कैप में मेटा और टेस्ला को पीछे छोड़ा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/crude-oil-prices-again-at-72-apple-products-expensive-tech/article-57087"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/crude-oil-price-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर बड़ी गिरावट देखने को मिली है। ईरान से जुड़े तनाव के बीच जो उछाल कच्चे तेल में आया था, वह अब लगभग खत्म हो चुका है। गुरुवार को वैश्विक बाजार में बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड ऑयल 72 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया। यह वही कीमत है जो युद्ध जैसे हालात बनने से पहले दर्ज की गई थी। ऊर्जा बाजार पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल सप्लाई को लेकर डर कम होने और बाजार में स्थिरता लौटने से कीमतों पर दबाव बना है। इसका असर आने वाले दिनों में कई देशों की अर्थव्यवस्था और ईंधन बाजार पर भी दिखाई दे सकता है। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ऐसे समय आई है जब दुनिया भर के निवेशक पश्चिम एशिया की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। कुछ सप्ताह पहले तक यह आशंका जताई जा रही थी कि यदि तनाव और बढ़ा तो तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है। इसी डर से कीमतों में तेजी देखने को मिली थी। लेकिन हालात फिलहाल नियंत्रण में रहने और सप्लाई चेन सामान्य रहने से बाजार का भरोसा वापस लौटा है। यही वजह है कि ब्रेंट क्रूड फिर से 72 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों के लिए यह राहत भरी खबर मानी जा रही है। देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से खरीदता है, इसलिए कच्चे तेल की कीमतों में कमी आने पर आयात बिल घट सकता है। इससे पेट्रोल और डीजल की लागत पर भी सकारात्मक असर पड़ने की उम्मीद रहती है। हालांकि खुदरा ईंधन की कीमतों में किसी बदलाव का फैसला तेल कंपनियां और सरकार बाजार की स्थिति को देखते हुए करती हैं। फिलहाल उपभोक्ताओं की नजर इस बात पर है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार की यह गिरावट घरेलू बाजार तक कब पहुंचती है। इधर टेक्नोलॉजी सेक्टर से भी बड़ी खबर सामने आई है। एपल ने अमेरिका में अपने कई लोकप्रिय प्रोडक्ट्स की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है। कंपनी ने आईपैड और मैकबुक के कुछ मॉडल 300 डॉलर तक महंगे कर दिए हैं। इसका असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिला है। भारत में इन डिवाइसों की कीमतों में लगभग एक लाख रुपये तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। नई कीमतें लागू होने के बाद प्रीमियम कैटेगरी के कई मॉडल पहले की तुलना में काफी महंगे हो गए हैं। कीमतों में यह बदलाव उत्पादन लागत, आयात शुल्क, वैश्विक सप्लाई चेन और मुद्रा विनिमय दर जैसे कई कारणों से जुड़ा हो सकता है। भारत में एपल के प्रोडक्ट पहले से ही प्रीमियम श्रेणी में आते हैं। ऐसे में नई कीमतें उन ग्राहकों पर सीधा असर डालेंगी जो नया आईपैड या मैकबुक खरीदने की योजना बना रहे हैं। कई रिटेल स्टोर्स पर नई कीमतों के अनुसार बिक्री शुरू हो चुकी है और ग्राहक भी इस बढ़ोतरी को लेकर चर्चा कर रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूसरी ओर शेयर बाजार और टेक इंडस्ट्री में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है। अमेरिकी चिप निर्माता माइक्रोन ने बाजार पूंजीकरण के मामले में बड़ी छलांग लगाई है। कंपनी का मार्केट कैप बढ़ने के बाद उसने दुनिया की दो बड़ी टेक कंपनियों मेटा और टेस्ला को पीछे छोड़ दिया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और हाई-परफॉर्मेंस मेमोरी चिप्स की बढ़ती मांग का सबसे बड़ा फायदा माइक्रोन को मिल रहा है। निवेशकों का भरोसा लगातार बढ़ने से कंपनी के शेयरों में तेजी आई और उसका मूल्यांकन भी मजबूत हुआ। एआई तकनीक के तेजी से विस्तार ने सेमीकंडक्टर कंपनियों की स्थिति बदल दी है। पहले जहां निवेशकों का अधिक ध्यान सोशल मीडिया और इलेक्ट्रिक व्हीकल कंपनियों पर था, वहीं अब चिप बनाने वाली कंपनियां भी बाजार की अगली बड़ी ताकत बनती दिखाई दे रही हैं। माइक्रोन की इस उपलब्धि को उसी बदलाव का संकेत माना जा रहा है। आने वाले समय में यदि एआई आधारित तकनीकों की मांग इसी तरह बढ़ती रही तो सेमीकंडक्टर उद्योग में और भी बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। एक ही दिन में सामने आई इन तीन खबरों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की अलग-अलग तस्वीर पेश की है। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ऊर्जा बाजार को राहत देती दिख रही है, वहीं एपल के महंगे प्रोडक्ट उपभोक्ताओं की जेब पर असर डाल सकते हैं। दूसरी तरफ माइक्रोन का तेजी से बढ़ता बाजार मूल्य यह संकेत देता है कि दुनिया की टेक इंडस्ट्री अब नई दिशा में आगे बढ़ रही है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Jun 2026 11:57:50 +0530</pubDate>
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                <title>होसुर की टाटा फैक्ट्री पर संकट, भूजल प्रदूषण विवाद से हजारों नौकरियों पर खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की चेतावनी के बाद बढ़ी चिंता, मुख्यमंत्री थलपति विजय के सामने पर्यावरण संरक्षण और रोजगार बचाने की दोहरी चुनौती]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/6a2e540588ff6/article-55879"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/tata-electronics.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">तमिलनाडु की औद्योगिक राजधानी माने जाने वाले होसुर में स्थित टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स की आईफोन कंपोनेंट्स निर्माण इकाई इन दिनों गंभीर विवादों में घिर गई है। फैक्ट्री पर आसपास के क्षेत्रों में भूजल प्रदूषण फैलाने के आरोप लगे हैं, जिसके बाद तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कंपनी से जवाब मांगा है। संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं मिलने की स्थिति में फैक्ट्री के संचालन पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। इस घटनाक्रम ने राज्य सरकार, स्थानीय प्रशासन, किसानों और हजारों कर्मचारियों की चिंताओं को बढ़ा दिया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जब तमिलनाडु में नई सरकार का गठन हुआ है और मुख्यमंत्री थलपति विजय राज्य के विकास और निवेश को लेकर कई बड़े फैसले लेने की तैयारी में हैं। ऐसे में राज्य की सबसे महत्वपूर्ण औद्योगिक इकाइयों में शामिल टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स की फैक्ट्री पर संकट खड़ा होना सरकार के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है। एक ओर पर्यावरण संरक्षण और किसानों के हितों की रक्षा का दबाव है, वहीं दूसरी ओर हजारों लोगों के रोजगार और विदेशी निवेश को बनाए रखने की जिम्मेदारी भी सरकार के सामने है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का आरोप है कि फैक्ट्री से निकलने वाले अपशिष्ट जल का असर आसपास के इलाकों के भूजल पर पड़ा है। स्थानीय स्तर पर कुछ किसानों ने भी शिकायत की है कि जल गुणवत्ता में बदलाव देखने को मिला है, जिससे कृषि गतिविधियों पर असर पड़ सकता है। इन शिकायतों के आधार पर जांच शुरू की गई और कंपनी से जवाब मांगा गया। अधिकारियों के अनुसार मामले की जांच अभी जारी है और अंतिम निर्णय जांच रिपोर्ट के आधार पर लिया जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स की यह इकाई केवल तमिलनाडु ही नहीं बल्कि भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। यहां आईफोन के बैक पैनल और अन्य महत्वपूर्ण पुर्जों का निर्माण किया जाता है। यह यूनिट एप्पल की वैश्विक सप्लाई चेन का अहम हिस्सा है और भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण का बड़ा केंद्र बनाने की रणनीति में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। यही वजह है कि इस फैक्ट्री से जुड़ा कोई भी निर्णय राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बताया जा रहा है कि इस यूनिट में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब 75 हजार लोग जुड़े हुए हैं। इनमें बड़ी संख्या स्थानीय युवाओं की है, जिन्हें पिछले कुछ वर्षों में रोजगार के अवसर मिले हैं। यदि किसी कारणवश फैक्ट्री का संचालन प्रभावित होता है या उत्पादन अस्थायी रूप से भी रुकता है, तो इसका असर हजारों परिवारों की आय पर पड़ सकता है। इसके अलावा क्षेत्र में छोटे व्यवसायों और सेवा क्षेत्र पर भी प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"> यह मामला केवल एक फैक्ट्री तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत की बढ़ती मैन्युफैक्चरिंग क्षमता और वैश्विक निवेशकों के विश्वास से भी जुड़ा हुआ है। हाल के वर्षों में एप्पल और उससे जुड़ी कंपनियों ने भारत में बड़े पैमाने पर निवेश बढ़ाया है। तमिलनाडु, कर्नाटक और अन्य राज्यों में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण इकाइयों का विस्तार हुआ है। ऐसे में यदि किसी बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट पर पर्यावरणीय विवाद गहराता है तो उसका असर भविष्य के निवेश निर्णयों पर भी पड़ सकता है। रिसर्च फर्म काउंटरपॉइंट की एक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2026 तक दुनिया में बनने वाले कुल आईफोन उत्पादन में भारत की हिस्सेदारी लगभग 26 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है। इस लक्ष्य को हासिल करने में तमिलनाडु की फैक्ट्रियों की भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है। इसलिए उद्योग जगत की नजरें भी इस पूरे मामले पर टिकी हुई हैं। कई विशेषज्ञों का कहना है कि पर्यावरणीय नियमों का पालन और औद्योगिक विकास दोनों साथ-साथ चलने चाहिए ताकि विकास और संरक्षण के बीच संतुलन बना रहे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूसरी ओर टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने अपने ऊपर लगे आरोपों को लेकर सफाई दी है। कंपनी का कहना है कि वह पर्यावरणीय मानकों और स्थानीय समुदायों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। कंपनी के अनुसार प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से नोटिस मिलने के बाद एक मान्यता प्राप्त स्वतंत्र प्रयोगशाला से परीक्षण कराया गया था। इस अध्ययन में सभी नियामक मानकों का पालन किए जाने की पुष्टि हुई है। कंपनी ने यह भी कहा है कि उसका जवाब समय पर संबंधित विभाग को सौंप दिया गया है और वह जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग कर रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 14 Jun 2026 13:18:24 +0530</pubDate>
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                <title>WWDC 2026 में Apple का बड़ा दांव, Siri AI और iOS 27 के साथ बदलेगा iPhone का अनुभव</title>
                                    <description><![CDATA[Apple ने WWDC 2026 में Siri AI, iOS 27 और Apple Intelligence से जुड़े कई बड़े फीचर्स पेश किए। नया अपडेट ईमेल-मैसेज लिखने से लेकर बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा और फोटो एडिटिंग तक कई बदलाव लेकर आया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/apples-big-bet-in-wwdc-2026-will-change-iphone-experience/article-55379"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/apple-wwdc-2026.jpg" alt=""></a><br /><p>WWDC 2026 के पहले दिन Apple ने अपने सबसे बड़े सॉफ्टवेयर अपडेट्स में से एक का ऐलान करते हुए Siri, iOS 27 और Apple Intelligence को नए रूप में पेश किया। कैलिफोर्निया स्थित Apple Park में आयोजित इस वार्षिक डेवलपर सम्मेलन के दौरान कंपनी ने साफ संकेत दिए कि वह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दौड़ में अब पहले से कहीं ज्यादा आक्रामक रणनीति के साथ आगे बढ़ना चाहती है। सबसे ज्यादा चर्चा नई Siri AI की रही, जिसे अब सिर्फ एक वॉयस असिस्टेंट नहीं बल्कि एक कॉन्टेक्स्ट समझने वाली डिजिटल सहायक के रूप में तैयार किया गया है। कंपनी के अनुसार Siri AI अब बिना किसी ऐप को बदले ईमेल ड्राफ्ट कर सकेगी, मैसेज तैयार करेगी और स्क्रीन पर मौजूद जानकारी के आधार पर जवाब भी दे सकेगी। Apple का दावा है कि यह अब तक का सबसे बड़ा Siri अपग्रेड है। साल 2011 में iPhone के साथ शुरू हुई Siri अब AI युग के हिसाब से पूरी तरह बदलती नजर आ रही है।</p>
<p>इवेंट के दौरान Apple ने Apple Intelligence प्लेटफॉर्म को भी और मजबूत बनाने की घोषणा की। कंपनी का कहना है कि नया सिस्टम अलग-अलग ऐप्स के बीच जानकारी को बेहतर तरीके से समझेगा। उदाहरण के तौर पर यदि कोई यूजर फोन कॉल पर बात कर रहा है तो डिवाइस संबंधित ईमेल, मैसेज या अन्य ऐप्स की जानकारी को समझकर उपयोगी सुझाव दे सकेगा। मैसेज ऐप में AI आधारित रिप्लाई सजेशन दिए जाएंगे जबकि Safari ब्राउजर में टैब मैनेजमेंट और पासवर्ड से जुड़े नए फीचर्स जोड़े गए हैं। Apple ने इस मौके पर एक बार फिर यूजर प्राइवेसी को अपनी प्राथमिकता बताया। कंपनी के अधिकारियों के अनुसार AI फीचर्स का इस्तेमाल करते समय यूजर डेटा केवल उसी अनुरोध को पूरा करने के लिए उपयोग किया जाएगा और इसकी स्वतंत्र रूप से जांच भी कराई जा सकेगी। Apple का यह रुख ऐसे समय में सामने आया है जब AI कंपनियों के बीच डेटा सुरक्षा को लेकर लगातार बहस जारी है।</p>
<p>iOS 27 को लेकर भी कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की गईं। Apple ने बताया कि iPhone 11 और उसके बाद लॉन्च हुए सभी मॉडल्स को यह अपडेट मिलेगा। कंपनी का दावा है कि नए ऑपरेटिंग सिस्टम के साथ परफॉर्मेंस में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलेगा। फोटो पहले की तुलना में अधिक तेजी से लोड होंगे, AirDrop ट्रांसफर की स्पीड बढ़ेगी और मल्टीटास्किंग अनुभव भी बेहतर होगा। इसके अलावा सिस्टम सर्च को पूरी तरह नया बनाया गया है। Spotlight, Mail और Photos में अब ज्यादा सटीक और तेज परिणाम मिलेंगे। कीबोर्ड में इन-बिल्ट AI डिक्टेशन फीचर भी जोड़ा गया है, जो बोलकर लिखे गए टेक्स्ट की स्पेलिंग, विराम चिह्न और फॉर्मेटिंग को अपने आप ठीक करेगा। बताया जा रहा है कि यह फीचर उन यूजर्स के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकता है जो लंबे संदेश या नोट्स वॉयस के जरिए तैयार करते हैं। Shortcuts ऐप में भी बदलाव किए गए हैं और अब सामान्य भाषा में कमांड लिखकर ऑटोमेशन तैयार किए जा सकेंगे।</p>
<p>बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा पर भी Apple ने खास ध्यान दिया है। कंपनी ने नए पेरेंटल कंट्रोल टूल्स की घोषणा करते हुए बताया कि 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए “Ask to Browse” और “Ask to Buy” जैसे फीचर्स डिफॉल्ट रूप से सक्रिय रहेंगे। इससे माता-पिता यह नियंत्रित कर सकेंगे कि बच्चा किन वेबसाइट्स पर जा सकता है और कौन से ऐप डाउनलोड कर सकता है। इसी के साथ Health ऐप में महिलाओं के लिए पेरिमेनोपॉज और मेनोपॉज सपोर्ट जोड़ा गया है। फोटो ऐप को भी AI की मदद से अधिक शक्तिशाली बनाया गया है। नया Reframe फीचर तस्वीर के एंगल को बदल सकता है जबकि Extend टूल इमेज का विस्तार करके दृश्य को बड़ा दिखाने में मदद करेगा। Cleanup टूल को भी अपग्रेड किया गया है जिससे फोटो से अनचाही वस्तुओं को अधिक प्राकृतिक तरीके से हटाया जा सकेगा। वहीं पिछले साल पेश किए गए Liquid Glass डिजाइन में भी कुछ बदलाव किए गए हैं ताकि यूजर्स अपने अनुसार इंटरफेस को कस्टमाइज कर सकें।</p>
<p>इस बार का WWDC एक और वजह से खास रहा। Apple के मुख्य कार्यकारी अधिकारी टिम कुक ने मंच से भावुक संदेश देते हुए कहा कि कंपनी का सबसे अच्छा दौर अभी आना बाकी है। उन्होंने कहा कि Apple का लक्ष्य हमेशा ऐसे उत्पाद बनाना रहा है जो लोगों के जीवन को बेहतर बना सकें। उद्योग जगत में पहले से चर्चा है कि 1 सितंबर से कंपनी की कमान हार्डवेयर इंजीनियरिंग प्रमुख जॉन टर्नस संभालेंगे। ऐसे में WWDC 2026 को टिम कुक के नेतृत्व वाले दौर के अंतिम बड़े आयोजनों में से एक माना जा रहा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 11:34:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>एप्पल CEO बदलाव: जॉन टर्नस संभालेंगे कमान, कुक चेयरमैन</title>
                                    <description><![CDATA[एप्पल CEO बदलाव के तहत 1 सितंबर 2026 से जॉन टर्नस बनेंगे नए CEO, टिम कुक एग्जीक्यूटिव चेयरमैन की भूमिका निभाएंगे एप्पल में 15 साल बाद बड़ा नेतृत्व परिवर्तन तय हुआ है।
नई जिम्मेदारी के साथ कंपनी के सामने कई रणनीतिक चुनौतियां भी होंगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/apple-ceo-change-john-ternes-will-take-command-as-cook/article-51701"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/business---2026-04-21t081652.576.jpg" alt=""></a><br /><p>दुनिया की सबसे मूल्यवान टेक कंपनियों में शामिल <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Apple</span></span> में बड़ा नेतृत्व बदलाव तय हो गया है। एप्पल CEO बदलाव के तहत मौजूदा सीईओ <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Tim Cook</span></span> की जगह अब <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">John Ternus</span></span> 1 सितंबर 2026 से कंपनी की कमान संभालेंगे। कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने इस ट्रांजिशन प्लान को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी है। कुक, जो 2011 से सीईओ पद पर थे, अब एग्जीक्यूटिव चेयरमैन की भूमिका में नजर आएंगे और रणनीतिक फैसलों में सक्रिय रहेंगे। करीब 15 साल बाद हो रहा यह बदलाव एप्पल के इतिहास में एक अहम मोड़ माना जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब टेक इंडस्ट्री तेजी से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ग्लोबल सप्लाई चेन के बदलावों से गुजर रही है।</p>
<p><span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Tim Cook</span></span> के नेतृत्व में एप्पल ने अभूतपूर्व वृद्धि हासिल की। कंपनी की मार्केट वैल्यू लगभग 350 बिलियन डॉलर से बढ़कर 4 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गई। इसी अवधि में एप्पल का सालाना राजस्व भी कई गुना बढ़ा और 2025 में 416 बिलियन डॉलर के पार पहुंच गया।कुक के कार्यकाल में एप्पल वॉच, एयरपॉड्स और विज़न प्रो जैसे प्रोडक्ट्स लॉन्च हुए, जिन्होंने कंपनी के इकोसिस्टम को मजबूत किया।</p>
<p><strong>नेतृत्व परिवर्तन</strong><br /><span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">John Ternus</span></span> पिछले 25 वर्षों से एप्पल से जुड़े हैं और वर्तमान में हार्डवेयर इंजीनियरिंग के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट हैं।उन्होंने आईफोन, आईपैड और मैकबुक जैसे प्रमुख प्रोडक्ट्स के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।</p>
<p><span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Apple</span></span> की स्थापना 1976 में <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Steve Jobs</span></span>, स्टीव वोज्नियाक और रोनाल्ड वेन ने की थी। पिछले 50 वर्षों में कंपनी में यह सातवां बड़ा नेतृत्व परिवर्तन होगा।</p>
<p><span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Tim Cook</span></span> ने 1998 में एप्पल जॉइन किया था और 2011 में सीईओ बने। उनके कार्यकाल में कंपनी ने वैश्विक विस्तार और प्रोडक्ट विविधता में बड़ी छलांग लगाई।</p>
<p><span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">John Ternus</span></span> ने कहा कि उन्हें एप्पल के मिशन को आगे बढ़ाने का अवसर मिलना गर्व की बात है और वे कंपनी की इनोवेशन परंपरा को मजबूत बनाए रखेंगे।</p>
<p>वहीं <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Tim Cook</span></span> ने टर्नस को “विजनरी लीडर” बताते हुए कहा कि उनका तकनीकी अनुभव और नेतृत्व क्षमता एप्पल को नए मुकाम तक ले जाएगी।</p>
<p>टेक इंडस्ट्री में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच एप्पल को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Google</span></span> और <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Microsoft</span></span> जैसी कंपनियों से मुकाबला करना होगा।साथ ही, अमेरिका और यूरोप में बढ़ती रेगुलेटरी जांच और सप्लाई चेन को चीन से भारत और वियतनाम जैसे देशों में शिफ्ट करना भी बड़ी चुनौती होगी।</p>
<p>एप्पल CEO बदलाव को इंडस्ट्री में एक रणनीतिक कदम के रूप में देखा जा रहा है।विशेषज्ञों के मुताबिक, टर्नस का तकनीकी बैकग्राउंड कंपनी को प्रोडक्ट इनोवेशन और हार्डवेयर विकास में नई दिशा दे सकता है।</p>
<p>अगले चार महीनों तक <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Tim Cook</span></span> और <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">John Ternus</span></span> साथ मिलकर काम करेंगे, ताकि ट्रांजिशन सुचारू रूप से हो सके।एप्पल CEO बदलाव के बाद कंपनी की रणनीति, खासकर AI और ग्लोबल विस्तार पर, बाजार की नजर बनी रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 08:17:32 +0530</pubDate>
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