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                <title>Market Analysis - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Market Analysis RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>शेयर बाजार में जोरदार उछाल, सेंसेक्स 700 अंक चढ़ा; आईटी और मेटल शेयरों में दिखी मजबूत खरीदारी</title>
                                    <description><![CDATA[टीसीएस के बेहतर तिमाही नतीजों से बाजार को मिला सहारा, निफ्टी 24,150 के पार पहुंचा; एशियाई बाजारों की तेजी और निवेशकों की खरीदारी से बढ़ा उत्साह]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/strong-surge-in-stock-market-sensex-rises-700-points-strong/article-58361"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/tcs-q1-results.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">भारतीय शेयर बाजार ने शुक्रवार को कारोबारी सप्ताह के अंतिम दिन मजबूत शुरुआत करते हुए निवेशकों का भरोसा फिर से मजबूत कर दिया। शुरुआती कारोबार में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स करीब 700 अंकों की बढ़त के साथ 77,500 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी भी लगभग 200 अंक चढ़कर 24,150 के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। बाजार में आई इस तेजी के पीछे आईटी और मेटल सेक्टर के शेयरों में जोरदार खरीदारी को प्रमुख कारण माना जा रहा है। कारोबार की शुरुआत से ही निवेशकों का रुझान सकारात्मक बना रहा। बड़ी कंपनियों के शेयरों में लगातार खरीदारी देखने को मिली, जिससे बाजार का माहौल उत्साहपूर्ण रहा। खासतौर पर आईटी कंपनियों ने बाजार को मजबूती देने में अहम भूमिका निभाई। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) के बेहतर तिमाही नतीजों के बाद उसके शेयरों में दो प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई। इसका असर पूरे आईटी सेक्टर पर दिखाई दिया और अन्य टेक्नोलॉजी कंपनियों के शेयरों में भी खरीदारी बढ़ी।</p>
<p style="text-align:justify;">टीसीएस ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के नतीजे जारी किए हैं, जिनमें कंपनी का शुद्ध लाभ पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में लगभग पांच प्रतिशत बढ़कर 13,349 करोड़ रुपये पहुंच गया। वहीं, कंपनी की आय भी सालाना आधार पर करीब 14 प्रतिशत बढ़कर 72,275 करोड़ रुपये दर्ज की गई। मजबूत वित्तीय प्रदर्शन के साथ कंपनी ने प्रति शेयर 12 रुपये के अंतरिम लाभांश (डिविडेंड) की भी घोषणा की है। इस घोषणा ने निवेशकों का भरोसा और मजबूत किया तथा शेयर में तेजी देखने को मिली। हालांकि पिछले छह महीनों में टीसीएस के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई थी और एक वर्ष के दौरान भी इसमें उल्लेखनीय कमजोरी रही, लेकिन ताजा नतीजों के बाद निवेशकों ने इसे सकारात्मक संकेत के रूप में लिया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाली तिमाहियों में भी कंपनी इसी तरह का प्रदर्शन बनाए रखती है तो आईटी सेक्टर में निवेशकों का विश्वास और बढ़ सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">आईटी के अलावा मेटल सेक्टर के शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली। वैश्विक स्तर पर धातुओं की मांग में सुधार और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सकारात्मक संकेतों के कारण इस क्षेत्र की कंपनियों के शेयरों में तेजी बनी रही। स्टील और धातु क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों में निवेशकों ने सक्रिय रुचि दिखाई, जिससे बाजार को अतिरिक्त मजबूती मिली। घरेलू बाजार को विदेशी संकेतों का भी समर्थन मिला। एशियाई शेयर बाजारों में शुक्रवार को अच्छी बढ़त दर्ज की गई। दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक चार प्रतिशत से अधिक उछला, जबकि जापान का निक्केई और हांगकांग का हैंगसेंग इंडेक्स भी मजबूत बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए। एशियाई बाजारों में इस सकारात्मक माहौल का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा और निवेशकों का मनोबल मजबूत हुआ।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी शेयर बाजारों से भी अच्छे संकेत मिले। पिछले कारोबारी सत्र में डाउ जोंस, नैस्डैक और एसएंडपी 500 तीनों प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ बंद हुए थे। विशेष रूप से टेक्नोलॉजी शेयरों में तेजी ने वैश्विक निवेशकों के बीच सकारात्मक माहौल बनाया, जिसका असर भारतीय आईटी शेयरों पर भी देखने को मिला। विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने पिछले कारोबारी सत्र में करीब 533 करोड़ रुपये के शेयरों की बिकवाली की थी, लेकिन घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 2,000 करोड़ रुपये से अधिक की खरीदारी कर बाजार को संतुलन प्रदान किया। पिछले एक महीने के आंकड़ों पर नजर डालें तो घरेलू निवेशकों की मजबूत भागीदारी भारतीय शेयर बाजार के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूत स्थिति, कंपनियों के बेहतर वित्तीय नतीजे और वैश्विक बाजारों से मिल रहे सकारात्मक संकेत फिलहाल भारतीय बाजार को समर्थन दे रहे हैं। हालांकि निवेशकों को आने वाले दिनों में महंगाई, ब्याज दरों और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों पर भी नजर बनाए रखनी होगी क्योंकि इनका असर बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण रहेगा। कॉरपोरेट आय के मौजूदा सीजन में यदि बड़ी कंपनियां उम्मीद से बेहतर नतीजे पेश करती हैं तो बाजार में तेजी का सिलसिला आगे भी जारी रह सकता है। इसके अलावा विदेशी निवेशकों की वापसी और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं में कमी भी बाजार के लिए सकारात्मक साबित हो सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 10:56:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>डॉलर के मुकाबले रुपया रिकॉर्ड 96.18 पर फिसला, क्रूड 110 डॉलर पार, शेयर बाजार में भारी दबाव</title>
                                    <description><![CDATA[डॉलर के मुकाबले रुपया रिकॉर्ड 96.18 पर पहुंचा, क्रूड 110 डॉलर पार। सेंसेक्स-निफ्टी दबाव में, FIIs की भारी बिकवाली जारी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/rupee-slips-to-record-9618-against-dollar-crude-crosses-110/article-53683"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/rupee-weakness-share-market-today-crude-oil-rates-update.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सोमवार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">18 मई को मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ग्लोबल मार्केट में अनिश्चितता के चलते भारतीय रुपये में भारी गिरावट आई। डॉलर के मुकाबले रु 96.18 तक पहुंच गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो अब तक का सबसे कमजोर स्तर माना जा रहा है। शुरुआती कारोबार में ही रुपये ने करीब 20 पैसे की गिरावट के साथ शुरुआत की और बाद में लगातार दबाव में रहा। वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कच्चे तेल की कीमतें भी तेजी से बढ़ी हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्रूड ऑयल 2 प्रतिशत से ज्यादा चढ़कर 110 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया। बाजार के जानकारों का कहना है कि मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव और सप्लाई की चिंता ने तेल की कीमतों को और बढ़ा दिया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे वैश्विक स्तर पर असर साफ दिख रहा है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इसी बीच</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय शेयर बाजार पर भी दबाव बना रहा। सेंसेक्स सुबह के सत्र में एक समय 1000 अंक से ज्यादा गिरकर 74,180 तक चला गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे निवेशकों में घबराहट बढ़ गई। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फिर कुछ रिकवरी देखने को मिली और अंत में सेंसेक्स करीब 250 अंक की गिरावट के साथ 75,000 के आसपास कारोबार करता नजर आया। निफ्टी भी दबाव में रहा और लगभग 90 अंक गिरकर 23,550 के पास आ गया। बाजार में उठापटक के बीच विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने चिंताएँ बढ़ा दी हैं। पिछले 30 दिनों में </span>FII <span lang="hi" xml:lang="hi">ने करीब 55 हजार करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि घरेलू संस्थागत निवेशक (</span>DII) <span lang="hi" xml:lang="hi">थोड़ी बहुत खरीदारी करते नजर आए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन वे दबाव को पूरा संभाल नहीं पाए।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">टेक्निकल एक्सपर्ट्स का कहना है कि बाजार अभी बेहद संवेदनशील स्थिति में है। सेंसेक्स फिलहाल 75,200 से 75,300 के बीच संघर्ष कर रहा है और अगर ऊपर की ओर ब्रेकआउट नहीं होता है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो दबाव बना रह सकता है। नीचे की ओर 74,500 से 74,200 का जोन मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है। निफ्टी के लिए 24,000 और 24,250 महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि नीचे 23,250 और 23,000 पर सपोर्ट देखा जा रहा है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस समय में कोई बड़ा ब्रेकआउट आने तक ट्रेडिंग में सावधानी बरतनी चाहिए और स्टॉप-लॉस का पालन करना बेहतर रणनीति होगी।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">उधर</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">ग्लोबल मार्केट से भी कमजोर संकेत मिले हैं। अमेरिकी बाजार शुक्रवार को गिरावट के साथ बंद हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां डाउ जोन्स</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नैस्डैक और </span>S&amp;P <span lang="hi" xml:lang="hi">500 सभी लाल निशान में रहे। एशियाई बाजारों में भी मिला-जुला रुख देखने को मिला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कहीं हल्की तेजी तो कहीं गिरावट नजर आई। क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल के पीछे मिडिल ईस्ट का तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ता विवाद भी एक बड़ा कारण माना जा रहा है। अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान के बाद भी बाजार में अस्थिरता बढ़ी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे निवेशक सतर्क हो गए हैं। डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने मिलकर बाजार पर दबाव बढ़ा दिया है। आने वाले दिनों में बाजार की दिशा पूरी तरह से ग्लोबल संकेतों और कच्चे तेल की गतिविधियों पर निर्भर रहने की संभावना है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 May 2026 14:39:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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                <title>ट्रम्प इनसाइडर ट्रेडिंग विवाद: ऐलान से पहले करोड़ों की कमाई पर सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[ट्रम्प इनसाइडर ट्रेडिंग विवाद में बड़े ऐलानों से पहले संदिग्ध ट्रेडिंग पैटर्न, निवेशकों के भरोसे पर असरबड़े फैसलों से पहले बाजार में असामान्य गतिविधि ने शक बढ़ाया है। विशेषज्ञों ने इसे संभावित इनसाइडर ट्रेडिंग से जोड़ा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/questions-on-earning-crores-of-rupees-before-trump-insider-trading/article-51703"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/business---2026-04-21t082432.568.jpg" alt=""></a><br /><p>अमेरिका में पूर्व राष्ट्रपति <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Donald Trump</span></span> के दूसरे कार्यकाल के दौरान ट्रम्प इनसाइडर ट्रेडिंग विवाद ने तूल पकड़ लिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, कई ट्रेडर्स ने बड़े सरकारी ऐलानों से ठीक पहले करोड़ों डॉलर के दांव लगाए और भारी मुनाफा कमाया। मीडिया विश्लेषण में सामने आया है कि ट्रम्प के प्रमुख बयानों और घोषणाओं से कुछ मिनट या घंटों पहले ही बाजार में असामान्य तेजी या गिरावट दर्ज की गई। इस पैटर्न ने यह आशंका पैदा की है कि कहीं गोपनीय जानकारी पहले ही कुछ चुनिंदा लोगों तक तो नहीं पहुंच रही थी। मामले ने निवेशकों के भरोसे और बाजार की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।</p>
<p>रिपोर्ट्स के मुताबिक, अलग-अलग वित्तीय बाजारों के डेटा में यह देखा गया कि महत्वपूर्ण राजनीतिक या आर्थिक घोषणाओं से पहले अचानक बड़े पैमाने पर ट्रेडिंग शुरू हो जाती थी।फरवरी 2026 में ईरान पर अमेरिकी कार्रवाई से पहले कुछ नए अकाउंट्स ने भारी दांव लगाए और घोषणा के बाद करोड़ों का मुनाफा कमाया। इसी तरह जनवरी 2026 में वेनेजुएला से जुड़े घटनाक्रम में भी एक अकाउंट ने सटीक अनुमान लगाकर बड़ी कमाई की और तुरंत निष्क्रिय हो गया।</p>
<p>विश्लेषण में पाया गया कि कई बार मिनटों के भीतर बाजार में बड़े उतार-चढ़ाव से पहले ट्रेडिंग वॉल्यूम असामान्य रूप से बढ़ जाता था।<br />मार्च 2026 में तेल की कीमतों में गिरावट से पहले शॉर्ट सेलिंग के जरिए भारी दांव लगाए गए, जिससे कुछ निवेशकों को करोड़ों का फायदा हुआ।</p>
<p>इनसाइडर ट्रेडिंग वह स्थिति होती है जब किसी व्यक्ति को गोपनीय जानकारी पहले से मिल जाती है और वह उसी आधार पर बाजार में निवेश करता है। अमेरिका में यह 1933 से गैरकानूनी है और समय-समय पर नियमों को और सख्त किया गया है।</p>
<p>नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Paul Krugman</span></span> ने आरोप लगाया कि ट्रम्प के करीबी लोगों ने अंदरूनी जानकारी का फायदा उठाकर कमोडिटी बाजार में लाभ कमाया हो सकता है।हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि सभी मामलों को सीधे इनसाइडर ट्रेडिंग नहीं कहा जा सकता, क्योंकि कुछ अनुभवी ट्रेडर्स राजनीतिक संकेतों को पहले से समझने में सक्षम होते हैं।</p>
<p>ट्रम्प इनसाइडर ट्रेडिंग विवाद ने वैश्विक निवेशकों के बीच चिंता बढ़ा दी है।अगर इन आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह वित्तीय बाजारों की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर असर डाल सकता है।</p>
<p>इस मामले में जांच की मांग तेज हो रही है और नियामक एजेंसियों की भूमिका अहम मानी जा रही है। ट्रम्प इनसाइडर ट्रेडिंग विवाद आने वाले समय में अमेरिकी बाजार और नीति पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 08:25:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
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