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                <title>Reservation Policy - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Reservation Policy RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>MPPSC मेंस परीक्षा से रोक हटी, अभ्यर्थियों को बड़ी राहत</title>
                                    <description><![CDATA[हाईकोर्ट ने दी परीक्षा कराने की अनुमति, लेकिन रिजर्वेशन और मेरिट विवाद पर अंतिम फैसला अभी बाकी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/ban-on-mppsc-mains-exam-lifted-big-relief-for-candidates/article-56376"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/mppsc-mains-exam-2026.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (Madhya Pradesh Public Service Commission) की राज्य सेवा मुख्य परीक्षा-2025 को लेकर लंबे समय से चल रहा कानूनी विवाद आखिरकार फिलहाल एक अहम मोड़ पर पहुंच गया है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने गुरुवार को इस परीक्षा पर लगी अंतरिम रोक को हटा दिया है, जिसके बाद अब परीक्षा आयोजित करने का रास्ता साफ हो गया है। करीब डेढ़ साल से अटकी इस प्रक्रिया से जुड़े हजारों अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है, जो लंबे समय से आगे की चयन प्रक्रिया का इंतजार कर रहे थे। यह फैसला हाईकोर्ट की युगलपीठ, कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की बेंच ने सुनाया। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह केवल मुख्य परीक्षा को लेकर अंतरिम राहत है और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े मूल कानूनी एवं संवैधानिक मुद्दों पर अंतिम निर्णय अभी बाकी है। मामले की अगली सुनवाई 17 जुलाई 2026 को तय की गई है, जिसमें इन विवादों पर विस्तृत विचार किया जाएगा। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से यह मांग की गई थी कि परीक्षा पर लगी रोक हटाई जाए ताकि अभ्यर्थियों का भविष्य अनिश्चितता में न रहे। दलील दी गई कि भर्ती प्रक्रिया पहले ही काफी लंबी हो चुकी है और इसे और रोके रखना उचित नहीं होगा। इसी आधार पर अदालत ने परीक्षा आगे बढ़ाने की अनुमति दे दी, लेकिन सभी कानूनी प्रश्नों को सुरक्षित रखा है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस पूरे विवाद की जड़ में प्रारंभिक परीक्षा 2025 से जुड़े कई अहम मुद्दे हैं। सबसे बड़ा सवाल वर्गवार कटऑफ सार्वजनिक न किए जाने को लेकर उठाया गया। अभ्यर्थियों का आरोप है कि मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग ने विस्तृत कटऑफ जारी नहीं किया, जिससे चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता पर सवाल खड़े हुए। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सीलबंद लिफाफे में प्रस्तुत कटऑफ को खोलकर याचिकाकर्ताओं को उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए थे। दूसरा बड़ा विवाद ओपन मेरिट सीटों को लेकर है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि ओबीसी, एससी, एसटी और ईडब्ल्यूएस वर्ग के वे अभ्यर्थी, जिन्होंने सामान्य वर्ग के बराबर या उससे अधिक अंक प्राप्त किए हैं, उन्हें अनारक्षित सीटों पर समायोजित किया जाना चाहिए। लेकिन आयोग की नीति को लेकर यह मुद्दा लगातार विवाद का कारण बना हुआ है। इसी तरह आयु सीमा में छूट पाने वाले अभ्यर्थियों के माइग्रेशन यानी सामान्य वर्ग में समायोजन के नियमों की संवैधानिक वैधता को भी चुनौती दी गई है। हाईकोर्ट ने इन्हीं सभी बिंदुओं को गंभीर मानते हुए पहले मुख्य परीक्षा पर रोक लगा दी थी। अब रोक हटने के बाद परीक्षा प्रक्रिया फिर से शुरू हो सकेगी, लेकिन अंतिम निर्णय पर सबकी नजर बनी हुई है। इस मामले में यह भी कहा गया कि चयन प्रक्रिया लगातार लंबी होती जा रही है, जिससे अभ्यर्थियों की तैयारी और करियर दोनों प्रभावित हो रहे हैं। पहले जहां चयन एक साल में पूरा हो जाता था, वहीं अब यह प्रक्रिया डेढ़ से दो साल तक खिंच रही है। यह भी उल्लेखनीय है कि राज्य सेवा परीक्षाओं के पिछले संस्करण भी कानूनी विवादों में फंसे रहे हैं। 2019 और 2023 की परीक्षाओं के मामले भी सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचे थे, जहां लंबी सुनवाई के बाद चयन प्रक्रिया आगे बढ़ पाई थी। इस बार भी वही स्थिति बनती दिख रही है, जहां एक तरफ परीक्षा प्रक्रिया शुरू होने जा रही है, वहीं दूसरी तरफ आरक्षण, मेरिट और माइग्रेशन जैसे मुद्दों पर अंतिम न्यायिक निर्णय का इंतजार जारी रहेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 14:08:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महिला आरक्षण पर सियासत तेज, भूपेश बघेल का तंज—CM बदलने की सलाह</title>
                                    <description><![CDATA[महिला आरक्षण बिल विवाद के बीच भूपेश बघेल का बयान, छत्तीसगढ़ में विशेष सत्र की तैयारी महिला आरक्षण पर जारी राजनीतिक टकराव ने नया मोड़ ले लिया है। बयानबाजी के बीच सियासत और तेज हो गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/politics-intensifies-bhupesh-baghels-taunt-on-womens-reservation-advice/article-51770"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/cg-news-(27).jpg" alt=""></a><br /><p>छत्तीसगढ़ में महिला आरक्षण बिल को लेकर सियासी घमासान तेज होता जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">भूपेश बघेल</span></span> ने राज्य सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने मुख्यमंत्री को संबोधित करते हुए तंज कसा कि अगर महिलाओं को लेकर इतनी चिंता है, तो “कौशल्या भाभी को मुख्यमंत्री बना दीजिए।” यह बयान ऐसे समय आया है जब केंद्र में महिला आरक्षण बिल पारित नहीं हो सका और राज्य में इस मुद्दे पर राजनीतिक गतिविधियां बढ़ गई हैं।</p>
<p>छत्तीसगढ़ में महिला आरक्षण बिल को लेकर सियासी घमासान तेज होता जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">भूपेश बघेल</span></span> ने राज्य सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने मुख्यमंत्री को संबोधित करते हुए तंज कसा कि अगर महिलाओं को लेकर इतनी चिंता है, तो “कौशल्या भाभी को मुख्यमंत्री बना दीजिए।” यह बयान ऐसे समय आया है जब केंद्र में महिला आरक्षण बिल पारित नहीं हो सका और राज्य में इस मुद्दे पर राजनीतिक गतिविधियां बढ़ गई हैं।</p>
<p>रायपुर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बघेल ने कहा कि महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने की दिशा में कांग्रेस ने हमेशा पहल की है। उन्होंने दावा किया कि 1989 में ही यह कानून लागू हो सकता था, लेकिन उस समय भाजपा ने विरोध किया। उनके मुताबिक पंचायत स्तर पर आरक्षण लागू होने के बाद बड़ी संख्या में महिलाएं राजनीति में आईं और नेतृत्व की भूमिका निभा रही हैं।</p>
<h5><strong>विशेष सत्र की तैयारी</strong></h5>
<p>राज्य सरकार इस मुद्दे पर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की तैयारी कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, कैबिनेट की मंजूरी के बाद प्रस्ताव राज्यपाल को भेजा जाएगा। सूत्रों के मुताबिक, इस सत्र में विपक्ष के खिलाफ निंदा प्रस्ताव भी लाया जा सकता है। मुख्यमंत्री <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">विष्णुदेव साय</span></span> ने पहले ही संकेत दिए हैं कि विपक्ष के रुख को लेकर सरकार सख्त रुख अपनाएगी।</p>
<h5><strong>राजनीतिक बयानबाजी तेज</strong></h5>
<p>बीजेपी ने महिला आरक्षण बिल के समर्थन में राज्यभर में प्रदर्शन शुरू कर दिया है। 20 अप्रैल से शुरू हुए इस अभियान के तहत महिला सम्मेलन और विरोध कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।सरकार का कहना है कि विपक्ष के कारण बिल पास नहीं हो सका, जबकि कांग्रेस इसे राजनीतिक आरोप बता रही है। बघेल ने आरोप लगाया कि भाजपा और उससे जुड़े संगठनों ने कभी महिलाओं को शीर्ष नेतृत्व में पर्याप्त अवसर नहीं दिया।</p>
<p>पृष्ठभूमि की बात करें तो संसद में महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन बिल आवश्यक बहुमत नहीं जुटा सका। रिपोर्ट्स के अनुसार, बिल के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि इसे पारित करने के लिए अधिक समर्थन की जरूरत थी।इस घटनाक्रम के बाद प्रधानमंत्री <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">नरेन्द्र मोदी</span></span> ने सार्वजनिक रूप से महिलाओं से माफी भी मांगी थी और विपक्ष पर निशाना साधा था।</p>
<h5><strong>असर और आगे की राह</strong></h5>
<p>राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महिला आरक्षण का मुद्दा आने वाले समय में चुनावी एजेंडा बन सकता है। इससे महिलाओं की भागीदारी और प्रतिनिधित्व को लेकर बहस और तेज होगी। जनता के बीच भी इस विषय पर चर्चा बढ़ रही है, खासकर ग्रामीण और स्थानीय निकाय स्तर पर, जहां पहले से आरक्षण लागू है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह मुद्दा “पब्लिक इंटरेस्ट स्टोरी” बन चुका है और राष्ट्रीय स्तर पर असर डाल सकता है।</p>
<p>आने वाले दिनों में विशेष सत्र और राजनीतिक प्रदर्शनों के जरिए यह स्पष्ट होगा कि यह विवाद किस दिशा में जाता है। फिलहाल, महिला आरक्षण बिल को लेकर जारी बयानबाजी और राजनीतिक रणनीतियां देश की आज की ताज़ा ख़बरें और ट्रेंडिंग न्यूज इंडिया में प्रमुख बनी हुई हैं।</p>
<p>में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बघेल ने कहा कि महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने की दिशा में कांग्रेस ने हमेशा पहल की है। उन्होंने दावा किया कि 1989 में ही यह कानून लागू हो सकता था, लेकिन उस समय भाजपा ने विरोध किया। उनके मुताबिक पंचायत स्तर पर आरक्षण लागू होने के बाद बड़ी संख्या में महिलाएं राजनीति में आईं और नेतृत्व की भूमिका निभा रही हैं।</p>
<h5><strong>विशेष सत्र की तैयारी</strong></h5>
<p>राज्य सरकार इस मुद्दे पर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की तैयारी कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, कैबिनेट की मंजूरी के बाद प्रस्ताव राज्यपाल को भेजा जाएगा। सूत्रों के मुताबिक, इस सत्र में विपक्ष के खिलाफ निंदा प्रस्ताव भी लाया जा सकता है। मुख्यमंत्री <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">विष्णुदेव साय</span></span> ने पहले ही संकेत दिए हैं कि विपक्ष के रुख को लेकर सरकार सख्त रुख अपनाएगी।</p>
<h5><strong>राजनीतिक बयानबाजी तेज</strong></h5>
<p>बीजेपी ने महिला आरक्षण बिल के समर्थन में राज्यभर में प्रदर्शन शुरू कर दिया है। 20 अप्रैल से शुरू हुए इस अभियान के तहत महिला सम्मेलन और विरोध कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।सरकार का कहना है कि विपक्ष के कारण बिल पास नहीं हो सका, जबकि कांग्रेस इसे राजनीतिक आरोप बता रही है। बघेल ने आरोप लगाया कि भाजपा और उससे जुड़े संगठनों ने कभी महिलाओं को शीर्ष नेतृत्व में पर्याप्त अवसर नहीं दिया।</p>
<p>पृष्ठभूमि की बात करें तो संसद में महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन बिल आवश्यक बहुमत नहीं जुटा सका। रिपोर्ट्स के अनुसार, बिल के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि इसे पारित करने के लिए अधिक समर्थन की जरूरत थी। इस घटनाक्रम के बाद प्रधानमंत्री <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">नरेन्द्र मोदी</span></span> ने सार्वजनिक रूप से महिलाओं से माफी भी मांगी थी और विपक्ष पर निशाना साधा था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महिला आरक्षण का मुद्दा आने वाले समय में चुनावी एजेंडा बन सकता है। इससे महिलाओं की भागीदारी और प्रतिनिधित्व को लेकर बहस और तेज होगी।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 14:44:03 +0530</pubDate>
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