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                <title>Religious Event - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Religious Event RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>रायपुर में 8 से 14 जुलाई तक देवकीनंदन ठाकुर की श्रीमद्भागवत कथा, ‘नो तिलक-नो एंट्री’ नियम रहेगा लागू</title>
                                    <description><![CDATA[बूढ़ापारा इंडोर स्टेडियम में सात दिवसीय धार्मिक आयोजन, प्रतिदिन दोपहर 3:30 बजे से कथा; कलश यात्रा, श्रीकृष्ण जन्मोत्सव, महारास सहित कई विशेष कार्यक्रम होंगे, आस्था चैनल और यूट्यूब पर होगा सीधा प्रसारण।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/devkinandan-thakurs-shrimad-bhagwat-katha-no-tilak-no-entry-rule-will/article-57949"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/devkinandan-thakur.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">राजधानी रायपुर एक बार फिर भक्ति, आध्यात्म और सनातन संस्कृति के रंग में रंगने जा रही है। शहर के बूढ़ापारा स्थित इंडोर स्टेडियम में 8 जुलाई से 14 जुलाई तक प्रसिद्ध कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर के श्रीमुख से श्रीमद्भागवत कथा का भव्य आयोजन किया जाएगा। यह सात दिवसीय धार्मिक आयोजन अंतरराष्ट्रीय वैश्य फेडरेशन के तत्वावधान में आयोजित होगा, जिसमें छत्तीसगढ़ सहित देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।</p>
<p style="text-align:justify;">आयोजकों के अनुसार कथा का शुभारंभ प्रतिदिन दोपहर 3:30 बजे होगा। सात दिनों तक श्रीमद्भागवत की विभिन्न लीलाओं, भगवान श्रीकृष्ण के जीवन प्रसंगों और सनातन धर्म के मूल सिद्धांतों पर आधारित प्रवचन होंगे। कथा के साथ भजन, संकीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों का भी आयोजन किया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बार आयोजन की सबसे विशेष बात ‘नो तिलक, नो एंट्री’ अभियान है। आयोजकों ने श्रद्धालुओं से आग्रह किया है कि कथा स्थल पर प्रवेश से पहले सभी अपने माथे पर तिलक अवश्य लगाकर आएं। उनका कहना है कि यह केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति के सम्मान और उसकी पहचान का प्रतीक है। इस पहल का उद्देश्य लोगों में अपनी धार्मिक परंपराओं के प्रति जागरूकता और गौरव की भावना विकसित करना है।</p>
<p style="text-align:justify;">आयोजन समिति का मानना है कि वर्तमान समय में भारतीय संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के लिए ऐसे प्रयास आवश्यक हैं। तिलक लगाने की परंपरा भारतीय संस्कृति में सदियों से चली आ रही है और इसे आध्यात्मिक ऊर्जा, सकारात्मकता तथा धार्मिक पहचान का प्रतीक माना जाता है। इसी संदेश को व्यापक स्तर पर पहुंचाने के लिए कथा स्थल पर इस नियम को लागू किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">कार्यक्रम की शुरुआत 8 जुलाई को भव्य कलश यात्रा और भागवत महात्म्य के साथ होगी। इस अवसर पर बड़ी संख्या में महिलाएं और श्रद्धालु पारंपरिक वेशभूषा में कलश यात्रा में शामिल होंगे। इसके बाद प्रतिदिन श्रीमद्भागवत के विभिन्न प्रसंगों का विस्तृत वर्णन किया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">9 जुलाई को भीष्म पितामह, माता कुंती के आगमन तथा पूतना वध की कथा सुनाई जाएगी। 10 जुलाई को गोवर्धन पूजा, अन्नकूट महोत्सव और छप्पन भोग का विशेष आयोजन रहेगा। श्रद्धालुओं को भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और गोवर्धन पर्वत की महिमा से जुड़े प्रसंग सुनने का अवसर मिलेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">11 जुलाई को वामन अवतार, भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन और श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का भव्य आयोजन किया जाएगा। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के दौरान आकर्षक झांकियां, भजन और विशेष सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आयोजित की जाएंगी, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">12 जुलाई को भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं, माखन चोरी, गोवर्धन पूजन और छप्पन भोग का आयोजन होगा। इसके बाद 13 जुलाई को महारास, सुदामा मिलन, रुक्मिणी विवाह और चिंतक विदाई जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक प्रसंगों का वर्णन किया जाएगा। इन आयोजनों में भक्ति संगीत और धार्मिक प्रस्तुतियां भी आकर्षण का केंद्र रहेंगी।</p>
<p style="text-align:justify;">सात दिवसीय कथा का समापन 14 जुलाई को सुदामा चरित्र, कंस वध और हवन-पूजन के साथ होगा। अंतिम दिन श्रद्धालु सामूहिक रूप से पूर्णाहुति में शामिल होंगे और धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से आयोजन का समापन किया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">आयोजन समिति ने बताया कि कथा में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएं की जा रही हैं। कथा स्थल पर बैठने, पेयजल, पार्किंग, सुरक्षा और चिकित्सा जैसी सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी। प्रशासन और स्वयंसेवकों की टीम आयोजन को व्यवस्थित और सुचारु रूप से संचालित करने में सहयोग करेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">जो श्रद्धालु किसी कारणवश रायपुर नहीं पहुंच पाएंगे, उनके लिए कथा का सीधा प्रसारण भी किया जाएगा। आयोजन का लाइव टेलीकास्ट आस्था चैनल और यूट्यूब के माध्यम से प्रसारित होगा, जिससे देश-विदेश में बैठे श्रद्धालु भी कथा का लाभ ले सकेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">आयोजन से पहले अंतरराष्ट्रीय वैश्य फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष योगेश अग्रवाल के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका से राजभवन में मुलाकात कर उन्हें कथा में शामिल होने का निमंत्रण दिया। प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश महामंत्री एवं प्रवक्ता राजकुमार राठी सहित कई पदाधिकारी उपस्थित रहे। राज्यपाल ने आयोजन के लिए शुभकामनाएं देते हुए निमंत्रण स्वीकार किया और धार्मिक आयोजनों के सामाजिक महत्व की सराहना की।</p>
<p style="text-align:justify;">आयोजन समिति का कहना है कि श्रीमद्भागवत कथा केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज में नैतिक मूल्यों, पारिवारिक संस्कारों और भारतीय संस्कृति के संरक्षण का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। देवकीनंदन ठाकुर अपने सहज, सरल और प्रेरणादायी प्रवचनों के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध हैं। उनके कथा कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं और सामाजिक समरसता, आध्यात्मिक जागरूकता तथा सांस्कृतिक मूल्यों को बढ़ावा मिलता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 17:23:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>उज्जैन रामघाट शिप्रा आरती में महिलाओं-पुजारियों में मारपीट</title>
                                    <description><![CDATA[दीपक बेचने को लेकर विवाद बढ़ा, पीतल की आरती से हमला; वीडियो वायरल के बाद पुलिस जांच में जुटी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/6a44a5ea468b6/article-57491"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/ujjain-shipra-aarti.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">उज्जैन के प्रसिद्ध रामघाट पर रोजाना होने वाली शिप्रा आरती रविवार शाम उस वक्त अचानक विवाद और हिंसा में बदल गई जब दीपक और पूजन सामग्री बेचने वाली महिलाओं और पुजारियों के बीच कहासुनी हाथापाई तक पहुंच गई। घटना के दौरान हालात कुछ ही मिनटों में बेकाबू हो गए और दोनों पक्षों के बीच लात-घूंसे चलने लगे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक आरती खत्म होने के बाद भी घाट पर भीड़ मौजूद थी और उसी दौरान छोटी सी बात ने बड़ा रूप ले लिया। शिप्रा नदी के तट पर हुआ यह विवाद देखते ही देखते पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया और सोशल मीडिया पर इसका वीडियो भी तेजी से वायरल हो गया, जिसमें मारपीट और धक्का-मुक्की साफ नजर आ रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">घटना के बाद माहौल काफी देर तक तनावपूर्ण रहा और श्रद्धालुओं में भी अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। बताया जा रहा है कि विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब पूजन सामग्री बेचने को लेकर दोनों पक्षों में कहासुनी हुई। इसी दौरान बात इतनी बढ़ गई कि पुजारियों और महिलाओं के बीच हाथापाई शुरू हो गई। आरोप है कि पुजारियों ने आरती में इस्तेमाल होने वाले पीतल के दीपक भी महिलाओं की ओर फेंके, जिससे स्थिति और बिगड़ गई। दूसरी तरफ महिलाओं ने भी विरोध में जवाब दिया और देखते ही देखते पूरा घाट एक तरह से झगड़े का मैदान बन गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सब कुछ अचानक हुआ और किसी को भी अंदाजा नहीं था कि धार्मिक आरती स्थल पर इस तरह की स्थिति पैदा हो जाएगी। कई श्रद्धालु बीच-बचाव करने की कोशिश करते रहे लेकिन तब तक मामला काफी आगे बढ़ चुका था। घटना के बाद मौके पर मौजूद लोगों ने वीडियो रिकॉर्ड कर लिया, जो बाद में वायरल हो गया और पुलिस तक भी पहुंच गया।</p>
<p style="text-align:justify;">महाकाल क्षेत्र से जुड़ी इस घटना के बाद पुलिस प्रशासन भी तुरंत सक्रिय हुआ। मामला <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Mahakal Police Station</span></span> पहुंचा जहां दोनों पक्षों की ओर से शिकायत दर्ज कराई गई। महिलाओं की ओर से आरोप लगाया गया कि उन्हें दीपक बेचने से रोका गया और विरोध करने पर उनके साथ मारपीट की गई। एक महिला ने यह भी आरोप लगाया कि पीतल की आरती उनके सिर पर मारी गई जिससे उन्हें चोट आई। वहीं दूसरी तरफ पुजारियों का कहना है कि महिलाओं ने पहले गाली-गलौज शुरू की और फिर हमला किया। उनका आरोप है कि धक्का-मुक्की के दौरान आरती का जलता हुआ दीपक उनके ऊपर गिर गया जिससे उन्हें भी चोटें आईं। इस पूरे मामले में दोनों पक्ष एक-दूसरे पर हिंसा का आरोप लगा रहे हैं और अपने-अपने दावे पेश कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस के मुताबिक घटना में तीन से चार लोगों को चोटें आई हैं, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई। फिलहाल पुलिस वायरल वीडियो और मौके पर मौजूद गवाहों के बयान के आधार पर पूरे मामले की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे उसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उधर, इस घटना के बाद घाट पर सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि शिप्रा आरती जैसे बड़े धार्मिक आयोजन में नियमित निगरानी और स्पष्ट व्यवस्था की जरूरत है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं न दोहराई जाएं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 11:29:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रायपुर में ऐतिहासिक आचार्य पदारोहण महोत्सव, 71 साल बाद मिला नया आचार्य</title>
                                    <description><![CDATA[खरतरगच्छ परंपरा में विनय कुशल मुनि को मिली आचार्य पदवी, देशभर से पहुंचे हजारों श्रद्धालु; ओम बिरला बोले- रायपुर आज आध्यात्म की धरती बन गया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/historic-acharya-padarohan-mahotsav-in-raipur-new-acharya-found-after/article-56296"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/raipur-acharya-padarohan-mahotsav.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">रायपुर में आयोजित जैन समाज के ऐतिहासिक आचार्य पदारोहण महोत्सव ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। बूढ़ापारा इंडोर स्टेडियम में आयोजित इस भव्य आयोजन में खरतरगच्छ परंपरा के प्रमुख संत विनय कुशल मुनि को आचार्य पदवी प्रदान की गई। विशेष बात यह रही कि इस परंपरा में करीब 71 वर्षों बाद किसी संत को आचार्य पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यही कारण है कि इस अवसर को जैन समाज के इतिहास में एक महत्वपूर्ण और गौरवपूर्ण अध्याय के रूप में देखा जा रहा है। इस ऐतिहासिक समारोह में देश के विभिन्न राज्यों से हजारों श्रद्धालु रायपुर पहुंचे। सुबह से ही आयोजन स्थल पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। धार्मिक जयघोष, मंगल पाठ, पूजा-अर्चना और विशेष विधानों के बीच पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। श्रद्धालुओं ने इसे अपने जीवन का सौभाग्यशाली अवसर बताया और बड़ी संख्या में कार्यक्रम में शामिल होकर नव आचार्य का आशीर्वाद प्राप्त किया। आचार्य पद जैन धर्म में अत्यंत सम्मान और जिम्मेदारी का प्रतीक माना जाता है। यह केवल एक धार्मिक पद नहीं, बल्कि तप, त्याग, अनुशासन, ज्ञान और समाज के मार्गदर्शन की सर्वोच्च भूमिका का प्रतिनिधित्व करता है। विनय कुशल मुनि को यह पद प्रदान किए जाने के साथ ही खरतरगच्छ परंपरा को नया नेतृत्व प्राप्त हुआ है। समाज के वरिष्ठजनों का मानना है कि उनके मार्गदर्शन में धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों को नई दिशा मिलेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">समारोह में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह सहित अनेक जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और धर्मप्रेमी नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने इस अवसर को ऐतिहासिक बताते हुए जैन धर्म की तपस्या, त्याग और अहिंसा की परंपरा को समाज के लिए प्रेरणादायक बताया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने अपने संबोधन में कहा कि आज रायपुर की धरती आध्यात्मिक चेतना से आलोकित हो गई है। उन्होंने कहा कि जैन संतों ने सदियों से तप, संयम और त्याग का मार्ग अपनाकर समाज को सही दिशा दिखाई है। उनके अनुसार आचार्य पद केवल सम्मान का विषय नहीं बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी और आध्यात्मिक नेतृत्व का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ने का कार्य करते हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि इतने बड़े संतों और महापुरुषों की उपस्थिति से पूरा छत्तीसगढ़ गौरवान्वित महसूस कर रहा है। उन्होंने कहा कि संत समाज का आशीर्वाद राज्य की प्रगति और जनकल्याण के लिए सदैव महत्वपूर्ण रहा है। मुख्यमंत्री ने नव आचार्य को शुभकामनाएं देते हुए उनके नेतृत्व में समाज की निरंतर उन्नति की कामना की।</p>
<p style="text-align:justify;">विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने भी इस अवसर को छत्तीसगढ़ के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताया। उन्होंने कहा कि संतों का जीवन त्याग, तपस्या और आत्मसंयम का अद्भुत उदाहरण होता है। उन्होंने जैन साधु-संतों की कठिन साधना और अनुशासित जीवनशैली की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आदर्श समाज को सकारात्मक दिशा प्रदान करते हैं। महोत्सव के दौरान एक और विशेष आकर्षण सहस्त्रावधान का प्रदर्शन रहा। कार्यक्रम के दूसरे दिन हंसभद्र मुनिजी ने अपनी असाधारण स्मरण शक्ति का परिचय देते हुए एक हजार शब्दों को याद रखकर उन्हें क्रमवार प्रस्तुत किया। इस अनूठी उपलब्धि को गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज किया गया है। इस प्रदर्शन ने उपस्थित श्रद्धालुओं और अतिथियों को आश्चर्यचकित कर दिया। लोगों ने इसे साधना, एकाग्रता और मानसिक क्षमता का अद्भुत उदाहरण बताया। तीन दिवसीय इस महोत्सव में 26 साधु और 16 साध्वियों की पावन निश्रा में विभिन्न धार्मिक आयोजन संपन्न हो रहे हैं। धर्मसभा, प्रवचन, पूजा-विधान और आध्यात्मिक कार्यक्रमों के माध्यम से श्रद्धालुओं को जैन धर्म के सिद्धांतों और जीवन मूल्यों से परिचित कराया जा रहा है। आयोजन स्थल पर अनुशासन, श्रद्धा और भक्ति का अनूठा वातावरण देखने को मिल रहा है। रायपुर में आयोजित यह आचार्य पदारोहण महोत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकता का प्रतीक बन गया है। 71 वर्षों बाद खरतरगच्छ परंपरा को नया आचार्य मिलने से जैन समाज में उत्साह और गौरव का माहौल है। हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति और संतों के मार्गदर्शन ने इस आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया है, जिसकी चर्चा लंबे समय तक होती रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 15:06:04 +0530</pubDate>
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                <title>गुरुवार भस्म आरती में महाकाल का दिव्य राजा स्वरूप श्रृंगार</title>
                                    <description><![CDATA[श्री महाकालेश्वर मंदिर में तड़के भस्म आरती के दौरान हुआ भव्य पूजन, पंचामृत और भस्म अर्पण से सजा भगवान का स्वरूप]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/6a3386bb71ac9/article-56257"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/mahakal-bhasma-aarti-(8).jpg" alt=""></a><br /><div class="text-base my-auto mx-auto [--thread-content-margin:var(--thread-content-margin-xs,calc(var(--spacing)*4))] @w-sm/main:[--thread-content-margin:var(--thread-content-margin-sm,calc(var(--spacing)*6))] @w-lg/main:[--thread-content-margin:var(--thread-content-margin-lg,calc(var(--spacing)*16))] px-(--thread-content-margin)">
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<p>गुरुवार तड़के उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती के दौरान एक बार फिर दिव्य और अलौकिक दृश्य देखने को मिला। सुबह करीब 4 बजे जैसे ही मंदिर के पट खोले गए, पूरे गर्भगृह में मंत्रोच्चार और घंटियों की आवाज गूंज उठी। भस्म आरती के इस विशेष अवसर पर भगवान महाकाल का विधि-विधान से अभिषेक और पूजन किया गया। मंदिर परिसर में उस समय श्रद्धा और आस्था का माहौल ऐसा था कि हर कोई बाबा महाकाल के दर्शन में लीन दिखाई दिया। पंडे-पुजारियों ने सबसे पहले गर्भगृह में विराजित सभी देव प्रतिमाओं का पूजन किया और इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक प्रारंभ हुआ। हरिओम जल से किए गए इस अभिषेक के दौरान वातावरण में एक अलग ही आध्यात्मिक ऊर्जा महसूस की गई। इसके बाद दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से बने पंचामृत से विधिवत पूजन और अभिषेक की प्रक्रिया संपन्न की गई। बताया जा रहा है कि यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और हर दिन भस्म आरती के समय इसी विधि का पालन किया जाता है।</p>
<p>इसके बाद प्रथम घंटाल के साथ ‘हरि ओम’ जल अर्पित किया गया और पूरे गर्भगृह में कपूर आरती की गूंज फैल गई। मंदिर में मौजूद श्रद्धालु इस क्षण को अपने मोबाइल और आंखों में कैद करने की कोशिश करते नजर आए, लेकिन व्यवस्था के चलते गर्भगृह के अंदर केवल सीमित लोग ही प्रवेश कर पाए। कपूर आरती के बाद भगवान महाकाल को भांग, चंदन, रजत चंद्र और गुलाब के पुष्प अर्पित किए गए। इसके बाद रजत मुकुट और त्रिपुंड से भगवान का विशेष श्रृंगार किया गया और उन्हें जटाधारी स्वरूप में सजाया गया। यह पूरा दृश्य अत्यंत मनमोहक था और ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे स्वयं कैलाश से भगवान भक्तों को दर्शन देने उतरे हों। श्रृंगार पूर्ण होने के बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से आच्छादित कर परंपरागत रूप से भस्म अर्पित की गई। यह वही क्षण होता है जिसका इंतजार देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु सबसे अधिक करते हैं। भस्म अर्पण के समय पूरा वातावरण शांत हो जाता है और केवल मंत्रोच्चार की ध्वनि सुनाई देती है। महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से इस भस्म को अर्पित करने की परंपरा निभाई गई, जिसे सदियों पुरानी धार्मिक आस्था का प्रतीक माना जाता है।</p>
<p>भस्म अर्पण के पश्चात भगवान महाकाल का स्वरूप पूरी तरह बदल गया और उन्हें राजा स्वरूप में श्रृंगारित किया गया। इस दौरान भांग, ड्रायफ्रूट, आभूषण और सुगंधित पुष्पों से उनका भव्य श्रृंगार किया गया। शेषनाग का रजत मुकुट, रजत मुंडमाल, रुद्राक्ष माला और गुलाब के विशेष हार से भगवान को सजाया गया, जिससे उनका स्वरूप अत्यंत दिव्य और आकर्षक दिखाई दे रहा था। इसके बाद भगवान को फल और मिष्ठान का भोग अर्पित किया गया। मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालु इस पूरे दृश्य को देखकर भावविभोर हो उठे और कई लोगों की आंखों में आस्था के आंसू भी नजर आए। सुबह से ही मंदिर परिसर में भारी भीड़ देखने को मिली और हर कोई बाबा महाकाल के दर्शन पाने के लिए उत्सुक दिखाई दिया। बताया जा रहा है कि भस्म आरती के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं, और यही मान्यता इस आरती को विशेष बनाती है। प्रशासन की ओर से सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के विशेष इंतजाम किए गए थे ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।</p>
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</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 11:37:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>महामृत्युंजय मंदिर में उमड़ी आस्था की भीड़, पुरुषोत्तम मास में शिवभक्तों ने किया जलाभिषेक</title>
                                    <description><![CDATA[पुरुषोत्तम मास के अवसर पर रीवा के ऐतिहासिक किला स्थित शिव मंदिर में सुबह से दर्शनार्थियों का तांता, विशेष पूजन और रुद्राभिषेक का आयोजन]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/vindhya-rewa/6a1fd72212c11/article-54840"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/purushottam-maas.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रीवा के ऐतिहासिक महामृत्युंजय किला स्थित शिव मंदिर में पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। बुधवार तड़के सुबह से ही मंदिर परिसर में भक्तों का आना शुरू हो गया था और सूर्योदय होते-होते दर्शनार्थियों की लंबी कतारें मंदिर के मुख्य द्वार से बाहर तक पहुंच गईं। हर-हर महादेव और महामृत्युंजय मंत्र के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और मंगलकामना की प्रार्थना कर रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पुरुषोत्तम मास को अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। इस दौरान किए गए जप, तप, दान और पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। यही कारण है कि रीवा शहर के अलावा आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु महामृत्युंजय मंदिर पहुंच रहे हैं। मंदिर परिसर में सुबह से ही पूजा-अर्चना का क्रम लगातार जारी है। भक्त भगवान शिव को जल, दूध, दही, शहद, गंगाजल और बेलपत्र अर्पित कर विधि-विधान से पूजा कर रहे हैं। मंदिर में विशेष रूप से रुद्राभिषेक और महामृत्युंजय मंत्र जाप का आयोजन किया जा रहा है। श्रद्धालु अलग-अलग समूहों में बैठकर मंत्रोच्चार कर रहे हैं। कई परिवार अपने बच्चों और बुजुर्गों के साथ मंदिर पहुंचे और सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना में शामिल हुए। मंदिर के गर्भगृह में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को निर्धारित कतारों से प्रवेश दिया जा रहा है ताकि व्यवस्था बनी रहे और किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मुख्य पुजारी वनस्पति प्रसाद ने बताया कि पुरुषोत्तम मास का धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व है। इस दौरान भगवान विष्णु और भगवान शिव दोनों की उपासना का विशेष फल प्राप्त होता है। उन्होंने बताया कि मंदिर में पूरे माह विशेष अनुष्ठान, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जाप और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। बड़ी संख्या में श्रद्धालु इन अनुष्ठानों में भाग लेकर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त कर रहे हैं। मंदिर में दर्शन करने पहुंचे श्रद्धालु अमित शुक्ला ने बताया कि वे पिछले कई वर्षों से पुरुषोत्तम मास के दौरान महामृत्युंजय मंदिर में जलाभिषेक करने आते हैं। उनका मानना है कि भगवान शिव की कृपा से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और जीवन की कठिनाइयों का सामना करने की शक्ति मिलती है। उन्होंने कहा कि इस पवित्र महीने में मंदिर का वातावरण सामान्य दिनों की तुलना में अधिक दिव्य और ऊर्जावान महसूस होता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">श्रद्धालु संगीता तिवारी ने बताया कि वे विशेष रूप से महामृत्युंजय मंत्र के जाप में शामिल होने के लिए मंदिर पहुंची हैं। उनके अनुसार मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है। उन्होंने कहा कि भगवान शिव के प्रति आस्था ही उन्हें हर वर्ष यहां खींच लाती है और इस बार भी वे पूरे परिवार के साथ पूजा-अर्चना करने पहुंची हैं। मंदिर परिसर में लगातार भजन-कीर्तन का आयोजन भी किया जा रहा है। स्थानीय भजन मंडलियां शिव भक्ति से जुड़े भजन प्रस्तुत कर रही हैं, जिससे श्रद्धालु भाव-विभोर हो रहे हैं। ढोल, मंजीरे और अन्य वाद्य यंत्रों की धुनों के बीच भक्त भगवान शिव की आराधना में लीन दिखाई दे रहे हैं। कई श्रद्धालु घंटों तक मंदिर परिसर में बैठकर भजन-कीर्तन का आनंद लेते रहे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बढ़ती भीड़ को देखते हुए मंदिर समिति और स्थानीय प्रशासन ने विशेष व्यवस्थाएं की हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पेयजल, प्राथमिक चिकित्सा और छाया की व्यवस्था की गई है। स्वयंसेवक लगातार कतारों को व्यवस्थित रखने में जुटे हुए हैं। सुरक्षा व्यवस्था के लिए मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में पुलिसकर्मियों की तैनाती भी की गई है ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। प्रसाद वितरण की व्यवस्था भी बड़े स्तर पर की गई है। मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया जा रहा है। कई सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने भी सेवा कार्यों में भाग लिया है। कुछ स्थानों पर श्रद्धालुओं के लिए शरबत और ठंडे पानी की व्यवस्था की गई है, जिससे गर्म मौसम में लोगों को राहत मिल रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुरुषोत्तम मास आत्मचिंतन, भक्ति और आध्यात्मिक उन्नति का विशेष अवसर माना जाता है। इस दौरान भगवान शिव और भगवान विष्णु की उपासना करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि इस पूरे महीने मंदिरों में भक्तों की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में काफी अधिक रहती है। रीवा का महामृत्युंजय किला स्थित शिव मंदिर लंबे समय से क्षेत्र की धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है। पुरुषोत्तम मास के अवसर पर यहां उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़ एक बार फिर इस बात का प्रमाण है कि लोगों की धार्मिक आस्था और परंपराओं के प्रति विश्वास आज भी उतना ही मजबूत है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>विंध्य/रीवा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 14:17:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>श्री सिद्ध चक्र महामंडल विधान में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, 128 अर्घ अर्पित कर मांगी सुख-शांति की कामना</title>
                                    <description><![CDATA[भोपाल के चौक स्थित धर्मशाला में चल रहे धार्मिक अनुष्ठान में बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालु, मुनि संभव सागर महाराज ने मन की स्थिरता को बताया शांति का आधार]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/6a1e6d6c8b772/article-54705"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/shri-siddha-chakra-mahamandal-vidhan.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भोपाल के चौक स्थित जैन धर्मशाला में आयोजित श्री सिद्ध चक्र महामंडल विधान इन दिनों श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बना हुआ है। आचार्य विद्यासमयसागर महाराज के शिष्य मुनि संभव सागर महाराज के ससंघ सानिध्य में चल रहे इस विशेष धार्मिक आयोजन में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं। सुबह से ही धर्मशाला परिसर में भक्तों की आवाजाही शुरू हो जाती है और पूजा-अर्चना, अभिषेक तथा धार्मिक अनुष्ठानों के बीच पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहता है। आयोजन में शामिल श्रद्धालु न केवल धार्मिक क्रियाओं में भाग ले रहे हैं, बल्कि आध्यात्मिक प्रवचनों का लाभ लेकर आत्मिक शांति का अनुभव भी कर रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विधान के दौरान इंद्रों द्वारा भगवान जिनेंद्र का विधि-विधान से अभिषेक किया गया। इसके पश्चात शांति धारा और विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन हुआ। धार्मिक परंपराओं के अनुरूप श्रद्धालुओं ने विधान मंडल पर 128 अर्घ अर्पित कर अपने परिवार, समाज और देश की सुख-समृद्धि तथा शांति की कामना की। पूरे आयोजन के दौरान भक्ति गीतों और मंत्रोच्चारों से वातावरण गूंजता रहा। उपस्थित श्रद्धालुओं ने बड़ी श्रद्धा और समर्पण के साथ धार्मिक क्रियाओं में भाग लिया। आयोजन स्थल पर अनुशासन और धार्मिक गरिमा का विशेष ध्यान रखा गया, जिससे श्रद्धालुओं को पूजा और साधना के लिए अनुकूल वातावरण प्राप्त हो सका।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि संभव सागर महाराज ने जीवन में मन की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संसार में अधिकांश दुखों का कारण मन की चंचलता और अस्थिरता है। व्यक्ति जब मोह, माया, क्रोध, लोभ और अहंकार जैसे भावों में उलझ जाता है, तब उसके जीवन में अशांति और तनाव बढ़ने लगता है। उन्होंने कहा कि बाहरी परिस्थितियों से अधिक महत्वपूर्ण मन की स्थिति होती है। यदि मन स्थिर और संयमित हो तो कठिन परिस्थितियों में भी व्यक्ति संतुलन बनाए रख सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मुनि श्री ने कहा कि आज का मनुष्य भौतिक उपलब्धियों के पीछे लगातार दौड़ रहा है, लेकिन वास्तविक सुख और संतोष आत्मिक शांति में निहित है। मन को धर्म, ध्यान और आत्मचिंतन के माध्यम से स्थिर किया जा सकता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे अपने दैनिक जीवन में कुछ समय आत्ममंथन और आध्यात्मिक साधना के लिए अवश्य निकालें। यही मार्ग व्यक्ति को आत्मा से जोड़ता है और आगे चलकर परमात्मा की अनुभूति तक पहुंचने में सहायक बनता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विधान के प्रवक्ता अंशुल जैन ने जानकारी देते हुए बताया कि इस धार्मिक अनुष्ठान के पुण्यार्जक परिवार के रूप में श्रीमती पांचूबाई, सुहागमल जैन तथा ऋषभ-मंजू जैन द्वारा विधान मंडल पर प्रमुख धार्मिक क्रियाएं संपन्न कराई गईं। उन्होंने बताया कि आयोजन के प्रति समाज के लोगों में विशेष उत्साह देखा जा रहा है और प्रतिदिन श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ रही है। विभिन्न आयु वर्ग के लोग परिवार सहित कार्यक्रम में पहुंच रहे हैं और धार्मिक गतिविधियों में भाग लेकर पुण्य लाभ अर्जित कर रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कार्यक्रम में कई श्रद्धालुओं ने विभिन्न पात्रों की जिम्मेदारी निभाई। प्रमुख पात्रों के रूप में सो धर्म इंद्र, प्रियंका, महेंद्र, कुबेर, आशा और विजेंद्र उपस्थित रहे। वहीं ध्वजारोहण का दायित्व विनोद और विपिन (एमपीटी) द्वारा निभाया गया। शांति धारा की महत्वपूर्ण धार्मिक क्रिया मनोज और प्रीति बांगा द्वारा संपन्न की गई। इसके अलावा महाज्ञानायक की भूमिका प्रतिभा और सचिन ने निभाई, जबकि यज्ञनायक के रूप में पूर्ति और शशांक ने विधान मंडल पर अर्घ अर्पित किए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">धार्मिक आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। कई परिवार सुबह से ही कार्यक्रम में शामिल होने के लिए पहुंच गए थे। महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों की सक्रिय भागीदारी ने आयोजन को और अधिक भव्य बना दिया। धार्मिक अनुष्ठान के साथ-साथ समाज में नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिक जागरूकता को बढ़ावा देने का संदेश भी दिया गया। श्रद्धालुओं का मानना है कि ऐसे आयोजन न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत करते हैं, बल्कि समाज को एकजुट करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">श्री सिद्ध चक्र महामंडल विधान का यह आयोजन लगातार श्रद्धालुओं को धर्म और अध्यात्म से जोड़ने का कार्य कर रहा है। मुनि संभव सागर महाराज के प्रेरक प्रवचन और धार्मिक अनुष्ठानों की गरिमा ने इस आयोजन को विशेष बना दिया है। आने वाले दिनों में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। आयोजन के माध्यम से समाज में शांति, सद्भाव और आध्यात्मिक चेतना का संदेश प्रसारित हो रहा है, जो वर्तमान समय की आवश्यकता भी माना जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 11:26:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>दिग्विजय सिंह बोले- धर्म जोड़ता है, राजनीति नहीं; गुना महायज्ञ में जुटे लाखों श्रद्धालु</title>
                                    <description><![CDATA[भैंसाना में श्रीराम महायज्ञ की पूर्णाहुति, आठ दिन में 30 लाख श्रद्धालुओं ने किए दर्शन]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/digvijay-singh-said-religion-unites-not-politics-lakhs-of/article-54491"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/_digvijaya-singh.jpg" alt=""></a><br /><p dir="ltr" style="text-align:justify;">गुना जिले के राघौगढ़ क्षेत्र के भैंसाना गांव में आयोजित आठ दिवसीय श्रीराम महायज्ञ का समापन गुरुवार को भव्य पूर्णाहुति के साथ हुआ। भीषण गर्मी के बावजूद यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। आयोजन समिति के मुताबिक आठ दिनों के दौरान करीब 30 लाख से ज्यादा लोगों ने महायज्ञ स्थल पहुंचकर दर्शन किए। समापन अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, विधायक जयवर्धन सिंह और पूर्व मंत्री पीसी शर्मा भी मौजूद रहे। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूर्णाहुति दी गई और पूरे पंडाल में “जय श्रीराम” के जयघोष गूंजते रहे।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">भैंसाना गांव पिछले कई दिनों से धार्मिक आस्था का बड़ा केंद्र बना हुआ था। दूर-दूर से श्रद्धालु यहां पहुंच रहे थे। आयोजन स्थल पर सुबह से लेकर देर रात तक भक्ति का माहौल बना रहा। रामायण पाठ, भागवत कथा और यज्ञ में शामिल होने के लिए लोगों की लंबी कतारें लग रही थीं। गुरुवार को पूर्णाहुति के दौरान भी भारी भीड़ उमड़ी। आयोजकों को व्यवस्था संभालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">इस दौरान आयोजन के मुख्य केंद्र रहे गुड्डा महाराज भी चर्चा में रहे। उन्होंने अपने संकल्प के अनुसार पूरे 27 साल बाद अन्न ग्रहण किया। जैसे ही उन्होंने भोजन ग्रहण किया, पूरा परिसर जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने इसे भावुक पल बताया। कई लोग मंच के सामने खड़े होकर मोबाइल से वीडियो बनाते नजर आए।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">समारोह को संबोधित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने धर्म और राजनीति को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि “हम लोगों ने हमेशा धर्म को आस्था का केंद्र माना है। हमने कभी धर्म को बेचा नहीं। धर्म को राजनीति में नहीं लाए।” उन्होंने कहा कि इस आयोजन में सभी को आमंत्रित किया गया था, चाहे किसी भी दल या विचारधारा से जुड़े लोग हों। मुख्यमंत्री मोहन यादव को भी व्यक्तिगत रूप से आमंत्रण दिया गया था।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">दिग्विजय सिंह ने कहा कि धर्म लोगों को जोड़ने का काम करता है, जबकि राजनीति अक्सर समाज को बांट देती है। उनके इस बयान के दौरान पंडाल में मौजूद लोगों ने तालियां बजाकर समर्थन जताया। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा के ऐसे आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा फैलाते हैं और लोगों को एक मंच पर लाते हैं।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">अपने संबोधन के दौरान उन्होंने राघौगढ़ किले के हनुमान मंदिर का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उनके परिवार का अस्तित्व हनुमान जी की कृपा से जुड़ा है। गुड्डा महाराज की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि जिस तरह से पूरे आयोजन की तैयारी की गई, वह अपने आप में अनोखी है। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि “इतने बड़े-बड़े इंजीनियर देखे, लेकिन आपके जैसा इंजीनियर नहीं देखा।” इस दौरान मंच पर मौजूद लोग भी मुस्कुराते नजर आए।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">दिग्विजय सिंह ने आयोजन स्थल की व्यवस्थाओं की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि इतनी भीषण गर्मी के बीच सूखी लकड़ियों से बना विशाल पंडाल सुरक्षित तरीके से चलाना आसान काम नहीं था। उन्होंने कहा कि सही मुहूर्त और योजना के कारण पूरा कार्यक्रम बिना किसी परेशानी के संपन्न हुआ। उन्होंने मजाक में कुंभराज वाले महाराज से अपनी कुंडली बनाने की भी बात कही। बोले कि “मुझे कुंडली पर कभी ज्यादा विश्वास नहीं रहा, क्योंकि हजारों लोगों ने कुंडली बनाई लेकिन किसी ने नहीं बताया कि मैं मुख्यमंत्री बनूंगा।”</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">गुड्डा महाराज ने भी मंच से दिग्विजय सिंह और जयवर्धन सिंह के साथ अपने संबंधों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह रिश्ता सिर्फ राजनीति का नहीं बल्कि आत्मीयता का है। उन्होंने दिग्विजय सिंह को आयोजन का संरक्षक बताया और कहा कि राजा के संरक्षण के बिना ऐसा बड़ा यज्ञ सफल नहीं हो सकता।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">विधायक जयवर्धन सिंह ने आयोजन को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह सिर्फ धार्मिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि समाज में संस्कार और सकारात्मक सोच फैलाने का माध्यम भी बना। उन्होंने कहा कि हजारों स्वयंसेवकों और सेवा समितियों ने दिन-रात मेहनत कर व्यवस्था संभाली। गर्मी के बावजूद लोगों में उत्साह कम नहीं हुआ।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">महायज्ञ स्थल पर सुरक्षा और यातायात व्यवस्था भी बड़ी चुनौती रही। प्रशासन की ओर से अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था। गांव की छोटी सड़कों पर लगातार वाहनों की आवाजाही बनी रही। स्थानीय लोगों का कहना है कि इतने बड़े स्तर पर धार्मिक आयोजन इस इलाके में पहली बार देखने को मिला। आसपास के गांवों में भी कई दिनों तक इसी आयोजन की चर्चा होती रही।</p>
<p dir="ltr" style="text-align:justify;">समापन के बाद भी श्रद्धालुओं की भीड़ देर शाम तक बनी रही। लोग यज्ञशाला और कथा स्थल के दर्शन करते रहे। पूरा भैंसाना गांव भक्ति और आस्था के माहौल में डूबा नजर आया। आयोजन खत्म होने के बाद भी यहां का माहौल लोगों को लंबे समय तक याद रहने वाला है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 May 2026 15:20:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भोपाल में शांतिपूर्ण ढंग से मनाई गई बकरीद, विशेष नमाज़ अदाकार और सौहार्द का दिया संदेश</title>
                                    <description><![CDATA[भोपाल में दाऊदी बोहरा समाज ने सादगी और अकीदत के साथ बकरीद मनाई। मस्जिदों में विशेष नमाज़ अदा कर अमन-चैन की दुआ मांगी गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bakrid-celebrated-peacefully-in-bhopal-special-namaz-and-message-of/article-54242"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/eid-al-adha-celebrated-peacefully-in-bhopal.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">राजधानी भोपाल में दाऊदी बोहरा समाज ने मंगलवार को ईद-उल-अधा यानी बकरीद का त्योहार पूरे धार्मिक उत्साह और सादगी के साथ मनाया। सुबह से ही शहर की बोहरा मस्जिदों में नमाज़ियों की आवाजाही शुरू हो गई थी। अलीगंज स्थित हैदरी मस्जिद समेत कई मस्जिदों में विशेष नमाज़ अदा की गई</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां समाज के लोगों ने देश में अमन-चैन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भाईचारे और खुशहाली की दुआ मांगी। त्योहार को लेकर बच्चों और युवाओं में खास उत्साह नजर आया। पारंपरिक लिबास में लोग परिवार के साथ मस्जिद पहुंचे। नमाज़ से पहले खुतबा पढ़ा गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें त्याग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इंसानियत और सामाजिक एकता का संदेश दिया गया। सुबह के समय मस्जिदों के बाहर हलचल और रौनक देखने लायक रही। सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासन भी अलर्ट नजर आया।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">नमाज़ खत्म होने के बाद समाज के लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर ईद की मुबारकबाद दी। कई इलाकों में परिवारों के बीच मेल-मिलाप का दौर चलता रहा। लोग रिश्तेदारों और परिचितों के घर पहुंचे और त्योहार की खुशियां साझा कीं। बताया जा रहा है कि इस बार समाज ने बकरीद को सादगी के साथ मनाने पर ज्यादा जोर दिया। मस्जिदों के आसपास सफाई और व्यवस्था को लेकर भी खास ध्यान रखा गया। दाऊदी बोहरा समाज के मीडिया समन्वयक इब्राहिम अली दाऊदी ने प्रशासन</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">पुलिस और नगर निगम के सहयोग के लिए आभार जताया। उन्होंने कहा कि सभी के सहयोग से पर्व शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ। साथ ही शहरवासियों को ईद की बधाई देते हुए आपसी सौहार्द और भाईचारे को मजबूत बनाए रखने की अपील भी की।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भोपाल में त्योहार के दौरान माहौल शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण बना रहा। सुबह से दोपहर तक मस्जिदों और आसपास के इलाकों में लोगों की आवाजाही बनी रही। समाज के बुजुर्गों का कहना था कि बकरीद सिर्फ कुर्बानी का त्योहार नहीं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि आपसी सहयोग और इंसानियत का भी संदेश देती है। कई परिवारों ने जरूरतमंदों के बीच मदद और भोजन वितरण भी किया। शहर में त्योहार को लेकर उत्साह जरूर दिखा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन पूरे आयोजन में सादगी साफ नजर आई।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 May 2026 15:50:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>बागेश्वर धाम में ऑनलाइन हनुमान चालीसा हवन, 4 लाख भक्त जुड़े</title>
                                    <description><![CDATA[बाबा धीरेंद्र शास्त्री ने ऑस्ट्रेलिया से लौटकर कराया आयोजन, घर-घर से श्रद्धालुओं ने दी आहुति ऑनलाइन माध्यम से लाखों लोगों की भागीदारी ने आयोजन को खास बना दिया। देश-विदेश के भक्तों ने एक साथ जुड़कर हवन में हिस्सा लिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/4-lakh-devotees-joined-online-hanuman-chalisa-havan-in-bageshwar/article-51776"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/bageshwar-dham-online-hawan.jpg" alt=""></a><br /><p>छतरपुर स्थित <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">बागेश्वर धाम</span></span> में एक बार फिर आस्था का बड़ा आयोजन देखने को मिला, जहां पंडित <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री</span></span> ने ऑनलाइन हनुमान चालीसा हवन का आयोजन कराया। 20 अप्रैल की रात आयोजित इस कार्यक्रम में देश ही नहीं, विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुड़े। यह हवन उन लोगों के लिए विशेष रूप से आयोजित किया गया था, जो किसी कारणवश धाम तक नहीं पहुंच पाते।</p>
<p>इस ऑनलाइन हवन में करीब 4 लाख श्रद्धालुओं ने डिजिटल माध्यम से भाग लिया और अपने-अपने घरों में हवन कर आहुति दी। आयोजन का सीधा प्रसारण यूट्यूब के जरिए किया गया, जिससे बड़ी संख्या में लोग एक साथ जुड़ सके। हवन के दौरान श्रद्धालुओं ने ‘नारियल उतारा’ जैसे विशेष धार्मिक उपाय भी किए, जिसे नकारात्मक ऊर्जा दूर करने का प्रतीक माना जाता है।</p>
<h3><strong>आध्यात्मिक पहल</strong></h3>
<p>बताया जा रहा है कि यह आयोजन पांचवें चरण का हिस्सा था। इससे पहले भी हर महीने एक-एक हवन आयोजित किया गया था। इस पहल का उद्देश्य घर-घर में हवन की परंपरा को फिर से जीवित करना और लोगों को आध्यात्मिक रूप से जोड़ना है। आयोजकों के अनुसार, इस तरह के कार्यक्रम से सामाजिक और मानसिक सकारात्मकता बढ़ती है।</p>
<h3><strong>वैश्विक भागीदारी</strong></h3>
<p>इस आयोजन की खास बात यह रही कि इसमें विदेशों में रह रहे भारतीयों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए जुड़े श्रद्धालुओं ने एक साथ हनुमान चालीसा का पाठ किया और हवन में भाग लिया। इससे एक तरह की वैश्विक आध्यात्मिक एकता देखने को मिली। पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि आज के समय में लोग फिर से वेदों और सनातन परंपराओं की ओर लौट रहे हैं। उनके अनुसार, इस तरह के हवन से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और नकारात्मकता दूर होती है।</p>
<p>आयोजन से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, अगला ऑनलाइन हनुमान चालीसा हवन 4 जून को आयोजित किया जाएगा। लगातार बढ़ती भागीदारी को देखते हुए इसे एक बड़े धार्मिक अभियान के रूप में देखा जा रहा है, जो डिजिटल युग में आस्था और परंपरा को जोड़ने का काम कर रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राशिफल</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 15:36:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
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