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                <title>Court Hearing - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Court Hearing RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान हंगामा, अभद्र व्यवहार पर याचिका खारिज</title>
                                    <description><![CDATA[सुनवाई के दौरान वकील ने कोर्ट की गरिमा का उल्लंघन किया, सुरक्षा कर्मियों ने बाहर निकाला; अदालत ने अवमानना की कार्रवाई से परहेज करते हुए याचिका खारिज की]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/uproar-during-hearing-in-supreme-court-petition-on-indecent-behavior/article-58413"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/supreme-court-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">देश की सर्वोच्च अदालत में शुक्रवार को एक सुनवाई के दौरान ऐसा घटनाक्रम देखने को मिला जिसने कुछ समय के लिए कोर्ट रूम का माहौल पूरी तरह बदल दिया। इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता वकील ने अदालत में अभद्र व्यवहार किया। सुनवाई के दौरान उन्होंने न केवल आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया बल्कि अदालत की कार्यवाही के बीच फाइल भी उछाल दी। स्थिति बिगड़ने पर सुरक्षा कर्मियों को हस्तक्षेप करना पड़ा और संबंधित वकील को कोर्ट रूम से बाहर ले जाया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">यह मामला सुप्रीम कोर्ट की उस पीठ के समक्ष आया जिसमें जस्टिस के. वी. विश्वनाथन और जस्टिस आलोक अराधे सुनवाई कर रहे थे। याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक फैसले के खिलाफ दायर की गई थी और याचिकाकर्ता स्वयं अधिवक्ता के रूप में अपना पक्ष रख रहे थे। शुरुआत से ही उनका रवैया आक्रामक बताया गया। अदालत की कार्यवाही के दौरान उन्होंने लगातार ऊंची आवाज में अपनी बात रखी और न्यायालय की प्रक्रिया पर असंतोष जताया। सुनवाई के दौरान स्थिति तब गंभीर हो गई जब उन्होंने अदालत में आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया और गुस्से में केस से जुड़े दस्तावेज हवा में उछाल दिए। इस अप्रत्याशित घटनाक्रम से कुछ क्षणों के लिए कोर्ट रूम में मौजूद सभी लोग स्तब्ध रह गए। न्यायिक कार्यवाही के दौरान इस तरह के व्यवहार को देखते हुए सुरक्षा कर्मी तुरंत सक्रिय हुए और संबंधित वकील को अदालत कक्ष से बाहर ले गए, जिससे आगे की कार्यवाही शांतिपूर्वक जारी रह सके।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, वकील ने सुनवाई के दौरान न्यायालय से एक विशेष आदेश जारी करने की मांग की थी। उन्होंने कथित रूप से कहा कि संबंधित पुलिस अधिकारी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया जाए। इस पर पीठ ने उनसे सवाल किया कि क्या वे अदालत को आदेश दे रहे हैं। इसके बाद माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया। वकील ने अपनी बात दोहराने के बाद दस्तावेज फेंक दिए और अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। घटना के दौरान कोर्ट रूम में मौजूद कई अधिवक्ता और अन्य लोग कुछ समय के लिए असहज हो गए। अचानक हुए इस घटनाक्रम के कारण कार्यवाही कुछ देर के लिए प्रभावित हुई, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था सक्रिय रहने से स्थिति जल्द सामान्य हो गई। अदालत ने शांति बनाए रखते हुए सुनवाई आगे बढ़ाई।</p>
<p style="text-align:justify;">घटना के बाद जस्टिस के. वी. विश्वनाथन ने कहा कि संबंधित व्यक्ति स्पष्ट रूप से मानसिक और भावनात्मक दबाव में दिखाई दे रहे थे। उन्होंने कहा कि अदालत को उनके प्रति सहानुभूति है और इस पूरे घटनाक्रम को हताशा के रूप में देखा जाना चाहिए। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि अदालत का उद्देश्य किसी व्यक्ति को अनावश्यक रूप से दंडित करना नहीं है, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया को निष्पक्ष और संतुलित बनाए रखना है। महत्वपूर्ण बात यह रही कि अदालत ने इस मामले में वकील के खिलाफ तत्काल अवमानना की कार्रवाई करने का निर्णय नहीं लिया। हालांकि, पीठ ने याचिका के गुण-दोष पर विचार करने के बाद स्पष्ट किया कि रिकॉर्ड का अवलोकन करने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई ठोस आधार नहीं पाया गया। इसी कारण विशेष अनुमति याचिका को खारिज कर दिया गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 16:32:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>राजा रघुवंशी हत्याकांड: सुप्रीम कोर्ट में सोनम का जवाबी हलफनामा, खुद को बताया बेगुनाह</title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से पहले सोनम रघुवंशी ने कहा- झूठे आरोपों में फंसाया गया, जांच और ट्रायल में लगातार कर रही हूं सहयोग।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/raja-raghuvanshi-murder-case-sonams-counter-affidavit-in-supreme-court/article-58261"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/raja-raghuvanshi-case.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">देशभर में चर्चा का विषय बने राजा रघुवंशी हत्याकांड में एक बार फिर कानूनी हलचल तेज हो गई है। मामले की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी ने सुप्रीम कोर्ट में जवाबी हलफनामा दाखिल करते हुए खुद को पूरी तरह बेगुनाह बताया है। उसने अदालत से कहा है कि उसे इस मामले में झूठे आरोपों के आधार पर फंसाया गया है और वह शुरुआत से ही जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग करती रही है। सोनम ने अपने हलफनामे में यह भी कहा कि वह ट्रायल की प्रक्रिया में भी पूरी तरह शामिल है और अदालत की हर शर्त का पालन कर रही है। इस बीच सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई को लेकर सभी की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि इस फैसले का असर आगे की कानूनी प्रक्रिया पर पड़ सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट में 9 जुलाई को इस मामले की अहम सुनवाई प्रस्तावित है। सुनवाई के दौरान मेघालय सरकार की ओर से दायर उस याचिका पर विचार किया जाएगा, जिसमें सोनम रघुवंशी को मिली जमानत को चुनौती दी गई है। अदालत के सामने यह सवाल भी रहेगा कि मौजूदा परिस्थितियों में सोनम की जमानत बरकरार रहेगी या नहीं। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इस सुनवाई को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पिछले कुछ महीनों से यह केस लगातार सुर्खियों में बना हुआ है और हर सुनवाई के साथ इसमें नए कानूनी पहलू सामने आ रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">सोनम रघुवंशी ने अपने जवाबी हलफनामे में दावा किया है कि उसके खिलाफ लगाए गए आरोप तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। उसने कहा कि जांच एजेंसियों ने उसे गलत तरीके से इस मामले में आरोपी बनाया है। हलफनामे में यह भी कहा गया है कि वह जांच अधिकारियों के बुलाने पर हर बार उपस्थित हुई है और अदालत की ओर से तय की गई सभी शर्तों का पालन कर रही है। उसके अनुसार वह किसी भी स्तर पर जांच में बाधा नहीं डाल रही और न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करते हुए पूरा सहयोग कर रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">पिछली सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि इस मामले में अभी 94 गवाहों के बयान दर्ज होने बाकी हैं। उन्होंने अदालत को जानकारी दी थी कि मुकदमा फिलहाल ट्रायल के महत्वपूर्ण चरण में है और बड़ी संख्या में गवाहों की गवाही शेष है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने भी जांच की प्रगति और ट्रायल की गति को लेकर कई सवाल पूछे थे। इसके बाद अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 9 जुलाई की तारीख तय की थी। माना जा रहा है कि इस बार अदालत मामले की प्रगति और जमानत से जुड़े पहलुओं पर विस्तार से विचार कर सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">मामले के अन्य आरोपियों की बात करें तो राज कुशवाह और उसके तीन साथी फिलहाल शिलांग जेल में बंद हैं। वहीं सोनम रघुवंशी को पहले ही सशर्त जमानत मिल चुकी है। इसके अलावा इस मामले में तीन अन्य आरोपियों और एक मकान मालिक को भी अदालत से जमानत मिली हुई है। हालांकि मुख्य साजिश और हत्या से जुड़े आरोपों की जांच और ट्रायल अभी जारी है। यही वजह है कि इस मामले में हर नई कानूनी कार्रवाई पर लोगों की नजर बनी हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह मामला पिछले वर्ष उस समय चर्चा में आया था जब इंदौर के ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी की शादी 11 मई 2025 को सोनम रघुवंशी से हुई थी। शादी के कुछ दिन बाद दोनों हनीमून मनाने के लिए मेघालय गए। 23 मई को दोनों के अचानक लापता होने की खबर सामने आई, जिसके बाद पुलिस ने बड़े स्तर पर तलाश अभियान शुरू किया। कई दिनों तक खोजबीन के बाद 3 जून 2025 को मेघालय की एक गहरी खाई से राजा रघुवंशी का शव बरामद किया गया। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था।</p>
<p style="text-align:justify;">शव मिलने के बाद जांच एजेंसियों ने घटनास्थल, मोबाइल रिकॉर्ड, कॉल डिटेल और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया। पुलिस के अनुसार जांच के दौरान कई ऐसे तथ्य सामने आए, जिनसे यह मामला सामान्य गुमशुदगी नहीं बल्कि सुनियोजित हत्या का प्रतीत हुआ। इसके बाद पुलिस ने कई लोगों को गिरफ्तार किया और पूछताछ के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर सोनम रघुवंशी को भी मुख्य आरोपी के रूप में गिरफ्तार किया गया था। बाद में अदालत से उसे सशर्त जमानत मिल गई थी, जबकि अन्य आरोपी अब भी न्यायिक हिरासत में हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले जून महीने में सोनम रघुवंशी ने मीडिया से बातचीत में उन आरोपों का भी खंडन किया था, जिनमें कहा गया था कि वह जमानत मिलने के बाद नेपाल भाग गई है। उसने स्पष्ट कहा था कि वह कहीं नहीं गई और शिलांग में ही मौजूद है। सोनम ने कहा था कि उसके बारे में झूठी अफवाहें फैलाई जा रही हैं और लोगों को ऐसी बातों पर भरोसा नहीं करना चाहिए। उसने यह भी दोहराया था कि वह जांच एजेंसियों और अदालत की कार्यवाही में लगातार सहयोग करती रही है और आगे भी करती रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 12:07:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>12 साल की बच्ची से दुष्कर्म मामले में हाईकोर्ट सख्त, काउंसिलिंग रिपोर्ट तलब; आरोपी जीजा गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[बैकुंठपुर की घटना में बच्चों की सुरक्षा और मानसिक स्थिति को बताया सर्वोपरि, अगली सुनवाई 2 जुलाई को]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/high-court-calls-for-strict-counseling-report-in-case-of/article-57527"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/sims-bilaspur-(1).jpg" alt=""></a><br /><div class="qMYqUG_convSearchResultHighlightRoot">
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<p style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले के बैकुंठपुर से सामने आए 12 वर्षीय बच्ची से कथित दुष्कर्म और बाल संरक्षण से जुड़े मामले में हाईकोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया है। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी कानूनी प्रक्रिया से पहले बच्चों की सुरक्षा, मानसिक स्थिति और भविष्य सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने दोनों बच्चों को फिलहाल चाइल्ड वेलफेयर की निगरानी में रखने के निर्देश दिए हैं और काउंसिलिंग रिपोर्ट बंद लिफाफे में प्रस्तुत करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 2 जुलाई को निर्धारित की गई है। यह मामला दो अनाथ भाई-बहन से जुड़ा है। 12 वर्षीय बच्ची और उसका 9 वर्षीय भाई बैकुंठपुर में अपनी मुंहबोली बहन के घर रह रहे थे। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक दोनों बच्चों को वहीं आश्रय दिया गया था, लेकिन बाद में उनके साथ शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना के आरोप सामने आए। बताया गया कि लगातार प्रताड़ना से परेशान होकर दोनों बच्चे वहां से निकलकर अपने एक परिचित के पास पहुंच गए। इसके बाद मामले की सूचना पुलिस और चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (सीडब्ल्यूसी) को दी गई।</p>
<p style="text-align:justify;">बच्चों को संरक्षण में लेने के बाद उनकी काउंसिलिंग कराई गई। इसी दौरान बच्ची ने कथित रूप से बताया कि उसकी मुंहबोली बहन के पति ने उसके साथ दुष्कर्म किया। शिकायत और काउंसिलिंग के आधार पर पुलिस ने संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। इस बीच मामले ने नया मोड़ तब लिया जब बच्चों की मुंहबोली बहन ने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर दावा किया कि दोनों बच्चों को अवैध रूप से चाइल्ड हेल्पलाइन में रखा गया है। हालांकि सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि रिकॉर्ड के अनुसार बच्ची को अंबिकापुर स्थित बालिका गृह तथा उसके भाई को बैकुंठपुर चाइल्ड वेलफेयर सेंटर में सुरक्षा के मद्देनजर रखा गया है। दोनों बच्चों को वैधानिक प्रक्रिया के तहत संरक्षण दिया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने राज्य के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिया था कि दोनों बच्चों को अदालत में प्रस्तुत किया जाए। इसके बाद संबंधित जिला प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी बच्चों को लेकर हाईकोर्ट पहुंचे और अदालत के समक्ष पूरी स्थिति रखी गई। सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि याचिका में कुछ तथ्यों को सही ढंग से प्रस्तुत नहीं किया गया। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में सबसे महत्वपूर्ण बच्चों का हित और उनका मानसिक स्वास्थ्य है। इसलिए किसी भी निर्णय से पहले उनकी स्वतंत्र काउंसिलिंग आवश्यक है, ताकि वास्तविक परिस्थितियों का आकलन किया जा सके।</p>
<p style="text-align:justify;">हाईकोर्ट के निर्देश पर बच्चों की काउंसिलिंग न्यायालय कक्ष के बजाय राज्य न्यायिक अकादमी में कराई गई। यह प्रक्रिया वरिष्ठ अधिवक्ता और संबंधित अधिकारियों की देखरेख में पूरी हुई। अदालत ने निर्देश दिया है कि काउंसिलिंग रिपोर्ट बंद लिफाफे में प्रस्तुत की जाए, ताकि बच्चों की निजता और पहचान पूरी तरह सुरक्षित रहे। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि रिपोर्ट के आधार पर आगे की सुनवाई में आवश्यक निर्णय लिया जाएगा।  ऐसे मामलों में पीड़ित बच्चों की पहचान और गोपनीयता की रक्षा करना अत्यंत आवश्यक होता है। इसके साथ ही मनोवैज्ञानिक सहायता, सुरक्षित वातावरण और कानूनी संरक्षण भी उतना ही महत्वपूर्ण है। कानून के अनुसार नाबालिग पीड़ितों से जुड़े मामलों में जांच और न्यायिक प्रक्रिया संवेदनशील तरीके से पूरी की जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आरोपी की गिरफ्तारी के बाद मामले की जांच विभिन्न पहलुओं से की जा रही है। मेडिकल रिपोर्ट, बच्चों के बयान, काउंसिलिंग रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं महिला एवं बाल विकास विभाग का कहना है कि दोनों बच्चों को फिलहाल सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया गया है और उनकी नियमित काउंसिलिंग जारी रहेगी। बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका का उद्देश्य किसी व्यक्ति की अवैध हिरासत की जांच करना होता है। लेकिन यदि किसी नाबालिग को कानून के अनुसार सुरक्षा और संरक्षण के लिए अधिकृत संस्था में रखा गया हो, तो अदालत उपलब्ध रिकॉर्ड और तथ्यों के आधार पर निर्णय लेती है। यही कारण है कि इस मामले में हाईकोर्ट ने बच्चों की वास्तविक स्थिति जानने के लिए विस्तृत रिपोर्ट और काउंसिलिंग को प्राथमिकता दी है। दोनों बच्चों को चाइल्ड वेलफेयर संस्थाओं की निगरानी में रखा गया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि अगली सुनवाई तक उनकी सुरक्षा और देखभाल सुनिश्चित की जाए। वहीं आरोपी के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले की जांच भी जारी रहेगी। </p>
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</div>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 15:13:48 +0530</pubDate>
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                <title>ट्विशा शर्मा केस में आज फिर सुनवाई, CBI ने आरोपियों की न्यायिक हिरासत बढ़ाने की मांग की</title>
                                    <description><![CDATA[अदालत में सीबीआई ने पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला की न्यायिक हिरासत 14 जुलाई तक बढ़ाने का अनुरोध किया, जांच अब भी जारी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/hearing-in-twisha-sharma-case-again-today-cbi-demanded-to/article-57400"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/twisha-sharma-case-(8).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बहुचर्चित ट्विशा शर्मा केस में मंगलवार को एक बार फिर अदालत में सुनवाई हुई, जहां केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने मामले में गिरफ्तार दोनों आरोपियों की न्यायिक हिरासत बढ़ाने की मांग की। यह सुनवाई न्यायिक मजिस्ट्रेट आरती आदित्य बांदिल की अदालत (कोर्ट जी-14) में हुई। सुनवाई के दौरान ट्विशा शर्मा के पिता और भाई भी अदालत पहुंचे और पूरी न्यायिक प्रक्रिया के दौरान मौजूद रहे। मामले को लेकर अदालत परिसर में भी हलचल बनी रही, क्योंकि इस केस पर लगातार लोगों की नजर बनी हुई है। सुनवाई के दौरान सीबीआई ने अदालत से आरोपी पति समर्थ सिंह और उनकी मां, सेवानिवृत्त न्यायाधीश गिरिबाला की न्यायिक हिरासत 14 जुलाई तक बढ़ाने का अनुरोध किया। एजेंसी ने अदालत को बताया कि मामले की जांच अभी अंतिम चरण में नहीं पहुंची है और कई महत्वपूर्ण पहलुओं की पड़ताल की जानी बाकी है। ऐसे में आरोपियों का न्यायिक अभिरक्षा में रहना जांच के हित में आवश्यक है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं, हालांकि समाचार लिखे जाने तक इस पर अंतिम आदेश जारी नहीं किया गया था।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सीबीआई ने अदालत को यह भी बताया कि मामले में कई गवाहों के बयान अभी दर्ज किए जाने हैं। जांच एजेंसी का कहना है कि अब तक जुटाए गए साक्ष्यों के अलावा कुछ नए तथ्यों की भी पुष्टि की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, जांच को पूरी तरह निष्पक्ष और वैज्ञानिक तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है ताकि किसी भी महत्वपूर्ण पहलू को नजरअंदाज न किया जाए। एजेंसी का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकेगी। मामले में डिजिटल साक्ष्यों की भूमिका भी काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सीबीआई ने अदालत को बताया कि आरोपियों से जब्त किए गए मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच अभी जारी है। इन उपकरणों से मिलने वाले डेटा का विश्लेषण किया जा रहा है, जिससे घटनाक्रम से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। एजेंसी का कहना है कि डिजिटल जांच पूरी होने में अभी कुछ और समय लगेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सुनवाई के दौरान सीबीआई ने समर्थ सिंह के लैपटॉप का मुद्दा भी अदालत के सामने रखा। एजेंसी के अनुसार जांच के लिए लैपटॉप में मौजूद डेटा तक पहुंच बेहद जरूरी है, लेकिन उसका पासवर्ड अब तक उपलब्ध नहीं हो सका है। जांच अधिकारियों ने अदालत को बताया कि पासवर्ड के बिना डिवाइस में मौजूद संभावित महत्वपूर्ण जानकारियों तक पहुंचना संभव नहीं हो पा रहा है। एजेंसी ने कहा कि फॉरेंसिक विशेषज्ञ तकनीकी स्तर पर भी इस दिशा में काम कर रहे हैं, लेकिन जांच को गति देने के लिए पासवर्ड की आवश्यकता बनी हुई है। सीबीआई ने यह भी संकेत दिया कि यदि जांच के दौरान जरूरत महसूस हुई तो दोनों आरोपियों की दोबारा पुलिस रिमांड भी मांगी जा सकती है। एजेंसी का कहना है कि जांच के दौरान सामने आने वाले नए तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी। फिलहाल न्यायिक हिरासत के दौरान भी जांच की प्रक्रिया लगातार जारी है और विभिन्न तकनीकी एवं दस्तावेजी साक्ष्यों का परीक्षण किया जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इससे पहले 16 जून को अदालत ने समर्थ सिंह और गिरिबाला को 30 जून तक न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया था। उसी आदेश की अवधि पूरी होने के बाद मंगलवार को दोनों आरोपियों को फिर अदालत में पेश किया गया। अब सीबीआई ने हिरासत की अवधि बढ़ाने का अनुरोध किया है ताकि लंबित जांच को पूरा किया जा सके। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत में सुनवाई के दौरान सुरक्षा व्यवस्था भी सामान्य दिनों की तुलना में अधिक सतर्क रखी गई। ट्विशा शर्मा केस लगातार चर्चा में बना हुआ है और हर सुनवाई पर पीड़ित पक्ष तथा आम लोगों की नजर बनी रहती है। परिवार की ओर से भी मामले की निष्पक्ष जांच और जल्द न्याय की उम्मीद जताई गई है। दूसरी ओर सीबीआई का कहना है कि जांच पूरी तरह तथ्यों, वैज्ञानिक साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है। एजेंसी किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी पहलुओं की गहराई से जांच करना चाहती है। अब पूरे मामले में अगला महत्वपूर्ण कदम अदालत के आदेश पर निर्भर करेगा। यदि अदालत सीबीआई की मांग स्वीकार कर लेती है तो दोनों आरोपी 14 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में रहेंगे और इस दौरान जांच एजेंसी डिजिटल साक्ष्यों, गवाहों के बयान और अन्य तकनीकी पहलुओं पर काम जारी रखेगी। वहीं यदि अदालत कोई अलग आदेश देती है तो उसके अनुसार आगे की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 12:59:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पुष्पा-2 भगदड़ मामले में अल्लू अर्जुन की सुनवाई स्थगित</title>
                                    <description><![CDATA[संध्या थिएटर हादसे में चार्जशीट दाखिल, अभिनेता को आरोपी नंबर 11 बनाया गया, अदालत ने वर्चुअल पेशी पर आगे की सुनवाई टाली]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/bollywood/allu-arjuns-hearing-postponed-in-pushpa-2-stampede-case/article-56688"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/pushpa-2-stampede-case.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">हैदराबाद के संध्या थिएटर में हुई ‘पुष्पा-2’ प्रीमियर भगदड़ मामले में अभिनेता अल्लू अर्जुन को लेकर चल रही कानूनी प्रक्रिया में नया मोड़ आया है। नामपल्ली कोर्ट ने सोमवार को इस मामले की सुनवाई स्थगित कर दी। अभिनेता को अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए समन जारी किया गया था, लेकिन वे वर्चुअल माध्यम से पेश हुए। उनकी लीगल टीम ने बताया कि वह फिलहाल मुंबई में फिल्म शूटिंग में व्यस्त हैं, इसलिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेशी की अनुमति दी गई। यह पूरा मामला 4 दिसंबर 2024 का है, जब हैदराबाद के संध्या थिएटर में फिल्म ‘पुष्पा-2’ के एक विशेष प्रीमियर शो के दौरान भारी भीड़ उमड़ पड़ी थी। शो के दौरान हालात अचानक बेकाबू हो गए और थिएटर परिसर में भगदड़ मच गई। इस दर्दनाक घटना में रेवती नाम की एक महिला की मौत हो गई थी, जबकि उनका बेटा गंभीर रूप से घायल हो गया था। घटना के बाद पूरे देश में फिल्मी इवेंट्स में भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बहस तेज हो गई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस की जांच रिपोर्ट और चार्जशीट के अनुसार इस मामले में कुल 23 लोगों को आरोपी बनाया गया है। इसमें थिएटर प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े कर्मचारी और इवेंट मैनेजमेंट टीम के सदस्य शामिल हैं। रिपोर्ट में अल्लू अर्जुन को आरोपी नंबर 11 (A11) के रूप में नामजद किया गया है। आरोप है कि कार्यक्रम के दौरान भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर लापरवाही बरती गई, जिससे यह हादसा हुआ। चार्जशीट में यह भी उल्लेख किया गया है कि घटना वाले दिन अल्लू अर्जुन थिएटर में मौजूद थे, जिससे उनके प्रशंसकों की भारी भीड़ एंट्री गेट की ओर उमड़ पड़ी। इसी दौरान दबाव बढ़ने से सुरक्षा व्यवस्था टूट गई और भगदड़ की स्थिति पैदा हो गई। पुलिस का कहना है कि यह स्थिति अचानक नहीं बल्कि भीड़ प्रबंधन में कमी और व्यवस्था की विफलता के कारण बनी।</p>
<p style="text-align:justify;">कोर्ट ने मामले में आगे बढ़ते हुए 19 आरोपियों को समन जारी किया था और उन्हें व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का निर्देश दिया गया था। हालांकि अल्लू अर्जुन की ओर से वर्चुअल पेशी की अनुमति मांगी गई, जिसे कोर्ट ने इस बार स्वीकार कर लिया लेकिन आगे की सुनवाई को स्थगित कर दिया गया। अब मामले की अगली सुनवाई पर सभी आरोपियों की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। इस घटना के बाद पुलिस ने अभिनेता को 13 दिसंबर 2024 को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद उन्हें स्थानीय अदालत में पेश किया गया और 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। बाद में तेलंगाना हाईकोर्ट से उन्हें अंतरिम जमानत मिल गई थी। इस दौरान वे करीब 18 घंटे तक हिरासत में रहे थे और बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">रिहाई के बाद अल्लू अर्जुन ने मीडिया से बातचीत में कहा था कि यह घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण थी और उनका इस हादसे से कोई सीधा संबंध नहीं था। उन्होंने कहा था कि वे पिछले कई वर्षों से इस थिएटर में जाते रहे हैं और पहले कभी ऐसी स्थिति नहीं बनी। उन्होंने पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना जताते हुए हर संभव मदद का आश्वासन भी दिया था। उन्होंने यह भी कहा था कि भीड़ में अचानक मची अफरा-तफरी किसी के नियंत्रण में नहीं थी और यह एक दुर्भाग्यपूर्ण हादसा था। अभिनेता ने घायल बच्चे के इलाज में आर्थिक और मेडिकल सहायता देने की बात भी कही थी। इस मामले में अदालत की निगरानी में आगे की प्रक्रिया चल रही है। पुलिस का कहना है कि सभी सबूतों और गवाहों के आधार पर यह तय किया जाएगा कि किसकी कितनी जिम्मेदारी बनती है। थिएटर प्रबंधन से लेकर इवेंट आयोजकों तक सभी की भूमिका की जांच की जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बालीवुड</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 18:57:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय और संगीता के तलाक मामले की सुनवाई टली, 7 अगस्त को अगली तारीख</title>
                                    <description><![CDATA[27 साल पुराने वैवाहिक रिश्ते को खत्म करने की प्रक्रिया जारी, चेंगलपट्टू महिला अदालत ने मामले की अगली सुनवाई अगस्त तक स्थगित की]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/bollywood/hearing-of-divorce-case-of-tamil-nadu-chief-minister-vijay/article-56015"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/vijay-divorce-case.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">तमिलनाडु की राजनीति और फिल्म जगत से जुड़े चर्चित चेहरे मुख्यमंत्री विजय और उनकी पत्नी संगीता सोर्नालिंगम के तलाक मामले में सोमवार को महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। चेंगलपट्टू महिला अदालत में सुबह करीब 10:30 बजे इस मामले पर सुनवाई की गई, जिसके बाद अदालत ने अगली सुनवाई की तारीख 7 अगस्त तय कर दी। इस तरह दोनों के बीच चल रही कानूनी प्रक्रिया फिलहाल जारी रहेगी और मामले का अंतिम फैसला आने में अभी समय लग सकता है। यह मामला तब सुर्खियों में आया था जब संगीता सोर्नालिंगम ने इसी साल फरवरी में अदालत में तलाक की याचिका दायर की थी। याचिका में उन्होंने अपने वैवाहिक जीवन से जुड़े कई गंभीर आरोप लगाए थे। अदालत ने पहले इस मामले की सुनवाई अप्रैल में निर्धारित की थी, लेकिन उस दौरान दोनों पक्षों की अनुपस्थिति के कारण सुनवाई आगे बढ़ा दी गई थी। बाद में अदालत ने दोनों को 15 जून को उपस्थित होने का निर्देश दिया था। सोमवार को हुई सुनवाई में मामले की प्रगति पर चर्चा हुई और अदालत ने अगली तारीख तय कर दी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">संगीता की ओर से दाखिल याचिका में दावा किया गया है कि उन्हें अपने पति के निजी जीवन से जुड़ी कुछ ऐसी जानकारियां मिली थीं, जिनके बाद वैवाहिक संबंधों में गंभीर तनाव पैदा हो गया। याचिका में कहा गया कि वर्ष 2021 में उन्हें कथित तौर पर एक महिला कलाकार के साथ विजय के संबंधों की जानकारी मिली थी। इसके बाद परिवार के भीतर कई बार बातचीत हुई, लेकिन हालात में अपेक्षित सुधार नहीं आया। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि बाद के वर्षों में दोनों के बीच दूरियां लगातार बढ़ती चली गईं। अदालत में दाखिल दस्तावेजों के अनुसार, संगीता ने दावा किया है कि इन परिस्थितियों का असर उनके पारिवारिक जीवन और बच्चों पर भी पड़ा। उन्होंने मानसिक तनाव और भावनात्मक कठिनाइयों का भी उल्लेख किया है। हालांकि मामले से जुड़े आरोपों पर अंतिम सत्यता अदालत की प्रक्रिया और जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल अदालत में दोनों पक्षों के दावों और कानूनी तर्कों पर विचार किया जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विजय और संगीता का विवाह वर्ष 1999 में हुआ था। करीब 27 वर्षों तक साथ रहने के बाद अब दोनों अपने वैवाहिक संबंध को कानूनी रूप से समाप्त करने की प्रक्रिया से गुजर रहे हैं। लंबे समय तक यह जोड़ी दक्षिण भारतीय मनोरंजन जगत की चर्चित जोड़ियों में गिनी जाती रही। सार्वजनिक कार्यक्रमों और पारिवारिक अवसरों पर दोनों को कई बार साथ देखा गया था। यही वजह है कि उनके अलगाव की खबर ने प्रशंसकों और राजनीतिक समर्थकों को भी हैरान किया था। इस बीच विजय का राजनीतिक सफर लगातार चर्चा में बना हुआ है। हाल ही में हुए तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया और राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला। चुनावी सफलता के बाद विजय ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। राजनीति में उनकी एंट्री को दक्षिण भारत की सबसे बड़ी राजनीतिक घटनाओं में से एक माना गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राजनीतिक जिम्मेदारियों के बीच व्यक्तिगत जीवन से जुड़ा यह मामला भी लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। निजी और सार्वजनिक जीवन के बीच संतुलन बनाए रखना किसी भी बड़े नेता के लिए चुनौतीपूर्ण होता है। हालांकि विजय ने इस पूरे मामले पर सार्वजनिक रूप से बहुत कम प्रतिक्रिया दी है और उनका ध्यान फिलहाल प्रशासनिक कार्यों तथा राजनीतिक गतिविधियों पर केंद्रित दिखाई देता है। फिल्मी करियर की बात करें तो विजय लंबे समय तक दक्षिण भारतीय सिनेमा के सबसे लोकप्रिय सितारों में शामिल रहे हैं। राजनीति में सक्रिय होने से पहले उन्होंने कई सफल फिल्मों में काम किया। उनकी अंतिम फिल्म ‘जन नायकन’ भी चर्चा में रही, हालांकि इसके रिलीज को लेकर विभिन्न स्तरों पर प्रक्रिया जारी बताई जा रही है। फिल्म और राजनीति दोनों क्षेत्रों में विजय का प्रभाव लगातार बना हुआ है। सोमवार की सुनवाई के बाद अदालत ने मामले को अगस्त तक के लिए स्थगित कर दिया है। अब सभी की नजरें 7 अगस्त पर टिकी हैं, जब इस बहुचर्चित मामले की अगली सुनवाई होगी।आने वाली सुनवाई में दोनों पक्षों की दलीलें और स्पष्ट रूप से सामने आ सकती हैं। फिलहाल अदालत की प्रक्रिया जारी है और मामले का अंतिम निष्कर्ष भविष्य की सुनवाई पर निर्भर करेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बालीवुड</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 17:49:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सबरीमाला केस: सुप्रीम कोर्ट ने पूछा, मूर्ति छूना अपमान कैसे</title>
                                    <description><![CDATA[सबरीमाला केस में धार्मिक परंपरा बनाम संवैधानिक अधिकार पर बहस तेज, फैसला जल्द संभव सुनवाई के दौरान कोर्ट की टिप्पणियों ने बहस को नया मोड़ दे दिया। देशभर में नजरें अब इस अहम फैसले पर टिकी हैं।

]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/sabarimala-case-supreme-court-asked-how-touching-the-idol-is/article-51778"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/sabarimala-case-supreme-court.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली में <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">सुप्रीम कोर्ट</span></span> में <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">सबरीमाला मंदिर</span></span> से जुड़े बहुचर्चित मामले की सुनवाई मंगलवार को निर्णायक चरण में पहुंचती दिखी। नौ जजों की संवैधानिक पीठ ने सुनवाई के दौरान अहम सवाल उठाते हुए पूछा कि किसी भक्त द्वारा मूर्ति को छूना ईश्वर का अपमान कैसे माना जा सकता है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति को केवल जन्म, लिंग या वंश के आधार पर देवता को छूने या मंदिर में प्रवेश से रोका जाता है, तो क्या संविधान उसकी रक्षा के लिए आगे नहीं आएगा। यह मामला महिलाओं के प्रवेश, धार्मिक स्वतंत्रता और समानता के अधिकार जैसे संवेदनशील मुद्दों से जुड़ा है और आज की ताज़ा ख़बरें व भारत समाचार अपडेट में प्रमुख बना हुआ है।</p>
<p>सुनवाई के दौरान पीठ ने इस बात पर भी जोर दिया कि आस्था और मौलिक अधिकारों के बीच संतुलन जरूरी है। जजों ने कहा कि आधुनिक समाज में बदलती सोच और संवैधानिक मूल्यों को ध्यान में रखते हुए धार्मिक प्रथाओं की समीक्षा जरूरी हो सकती है। कोर्ट ने संकेत दिया कि किसी भी परंपरा को अंतिम मानने से पहले यह देखना होगा कि वह संविधान के मूल सिद्धांतों के अनुरूप है या नहीं।</p>
<h3><strong>धार्मिक तर्क</strong></h3>
<p>मंदिर पक्ष की ओर से पेश वकीलों ने दलील दी कि हर मंदिर की अपनी विशिष्ट परंपराएं होती हैं, जो वहां के देवता की प्रकृति और मान्यताओं पर आधारित होती हैं। उनके अनुसार, भगवान अयप्पा को ‘नैष्ठिक ब्रह्मचारी’ माना जाता है, इसलिए सबरीमाला मंदिर में कुछ विशेष नियम लागू हैं। वकीलों ने कहा कि पूजा-पद्धति और धार्मिक अनुष्ठानों में हस्तक्षेप आस्था पर सीधा असर डाल सकता है, जिसे संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत संरक्षण प्राप्त है।</p>
<h3><strong>संवैधानिक बहस</strong></h3>
<p>सुनवाई के दौरान यह सवाल भी उठा कि क्या कोई आस्तिक व्यक्ति अपने ही धर्म की प्रथाओं को अदालत में चुनौती दे सकता है। जजों ने कहा कि यदि धार्मिक समुदाय के भीतर ही किसी प्रथा को लेकर मतभेद है, तो अदालत की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या आधुनिक शिक्षा और तकनीकी प्रगति के दौर में धार्मिक मान्यताओं की व्याख्या बदली जा सकती है।</p>
<p>इस मामले में कुल 66 याचिकाएं जुड़ी हुई हैं, जिनमें महिलाओं के प्रवेश पर रोक, धार्मिक स्वतंत्रता और समानता के अधिकार जैसे मुद्दे शामिल हैं। इससे पहले 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने 10 से 50 वर्ष की महिलाओं के प्रवेश पर लगे प्रतिबंध को हटाने का फैसला सुनाया था। इसके बाद कई पुनर्विचार याचिकाएं दाखिल की गईं, जिन पर अब सुनवाई जारी है।</p>
<p>अधिकारियों के अनुसार, इस संवेदनशील मामले में फैसला जल्द आ सकता है। इसका असर न केवल सबरीमाला मंदिर की परंपराओं पर पड़ेगा, बल्कि देशभर में धार्मिक प्रथाओं और संवैधानिक अधिकारों के बीच संतुलन को लेकर एक नई दिशा भी तय कर सकता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 15:54:43 +0530</pubDate>
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