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                <title>banking sector - दैनिक जागरण</title>
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                <title>शेयर बाजार में शानदार तेजी: सेंसेक्स 828 अंक उछला, निफ्टी 24,200 के पार; बैंकिंग और रियल्टी शेयरों ने भरी उड़ान</title>
                                    <description><![CDATA[टीसीएस के बेहतर तिमाही नतीजों और मजबूत निवेशक धारणा से बाजार में लौटी रौनक, बैंक, रियल्टी और आईटी शेयरों में जोरदार खरीदारी देखने को मिली।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/great-rise-in-the-stock-market-sensex-jumped-828-points/article-58422"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/today-sensex.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार ने निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया। घरेलू और वैश्विक सकारात्मक संकेतों के बीच बाजार में जोरदार खरीदारी देखने को मिली, जिससे प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी दोनों मजबूती के साथ बंद हुए। बैंकिंग, रियल्टी और आईटी सेक्टर के शेयरों में आई तेजी ने बाजार को नई ऊंचाई तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। कारोबार के अंत में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 828 अंक यानी 1.08 प्रतिशत की बढ़त के साथ 77,569 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 50 भी 244 अंक यानी 1.02 प्रतिशत चढ़कर 24,206 के स्तर पर पहुंच गया। दिनभर के कारोबार के दौरान निवेशकों का रुझान खासतौर पर बैंकिंग और रियल्टी सेक्टर की कंपनियों की ओर रहा। इन दोनों सेक्टरों में सबसे अधिक खरीदारी दर्ज की गई। इसके अलावा आईटी और चुनिंदा वित्तीय कंपनियों के शेयरों में भी अच्छी तेजी देखने को मिली। विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत कॉर्पोरेट नतीजों और वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों ने घरेलू बाजार की धारणा को मजबूत किया।</p>
<p style="text-align:justify;">आज के कारोबार में सबसे अधिक चर्चा देश की दिग्गज आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) के तिमाही नतीजों की रही। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के नतीजे उम्मीद से बेहतर रहने के बाद कंपनी के शेयर में करीब 0.90 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई और यह 2,068 रुपये पर बंद हुआ। हालांकि पिछले छह महीनों में टीसीएस के शेयर में लगभग 30 प्रतिशत और एक वर्ष में करीब 40 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली थी, लेकिन ताजा नतीजों ने निवेशकों का भरोसा एक बार फिर मजबूत किया। टीसीएस ने पहली तिमाही में शानदार वित्तीय प्रदर्शन दर्ज किया। कंपनी का शुद्ध लाभ (नेट प्रॉफिट) पिछले वर्ष की समान तिमाही के 12,760 करोड़ रुपये की तुलना में करीब 5 प्रतिशत बढ़कर 13,349 करोड़ रुपये हो गया। वहीं परिचालन से प्राप्त कुल राजस्व (रेवेन्यू) में भी सालाना आधार पर लगभग 14 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई और यह बढ़कर 72,275 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। मजबूत आय और कारोबार में वृद्धि ने निवेशकों को सकारात्मक संकेत दिए। कंपनी के निदेशक मंडल ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए प्रति शेयर 12 रुपये के अंतरिम लाभांश (इंटरिम डिविडेंड) को भी मंजूरी दी है। इसके लिए 15 जुलाई को रिकॉर्ड डेट निर्धारित की गई है। डिविडेंड की घोषणा के बाद निवेशकों की दिलचस्पी कंपनी के शेयरों में और बढ़ गई। घरेलू बाजार को मजबूती मिलने के पीछे वैश्विक बाजारों का सकारात्मक प्रदर्शन भी एक बड़ा कारण रहा। एशियाई बाजारों में शुक्रवार को अच्छी तेजी दर्ज की गई। दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स 2.52 प्रतिशत चढ़ा, जबकि जापान का निक्केई 1.20 प्रतिशत मजबूत हुआ। हांगकांग के हैंगसेंग इंडेक्स में भी करीब 0.60 प्रतिशत की बढ़त देखने को मिली। एशियाई बाजारों की मजबूती का सीधा असर भारतीय बाजारों पर भी दिखाई दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले गुरुवार को अमेरिकी शेयर बाजार भी बढ़त के साथ बंद हुए थे। डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज में 0.27 प्रतिशत, एसएंडपी 500 में 0.81 प्रतिशत और टेक्नोलॉजी शेयरों से जुड़े नैस्डैक इंडेक्स में 1.30 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई थी। अमेरिकी बाजारों में आई तेजी ने वैश्विक निवेशकों का भरोसा बढ़ाया, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी सकारात्मक रूप से दिखाई दिया। हालांकि विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने गुरुवार को भारतीय बाजार से 533 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की। इसके विपरीत घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने करीब 2,058 करोड़ रुपये के शेयर खरीदकर बाजार को मजबूती प्रदान की। पिछले सात दिनों में भी डीआईआई लगातार खरीदारी करते रहे हैं, जिससे बाजार में स्थिरता बनी हुई है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू निवेशकों की मजबूत भागीदारी विदेशी निवेशकों की बिकवाली के असर को काफी हद तक संतुलित कर रही है। गौरतलब है कि इससे पहले गुरुवार को सेंसेक्स 238 अंकों की बढ़त के साथ 76,742 के स्तर पर बंद हुआ था। शुक्रवार को लगातार दूसरे दिन आई तेज बढ़त ने निवेशकों का भरोसा और मजबूत किया है। बाजार जानकारों का मानना है कि यदि सकारात्मक माहौल बना रहा तो आने वाले सत्रों में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों नए रिकॉर्ड स्तर की ओर बढ़ सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 17:11:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>RBI MPC Meeting 2026: आज से शुरू हुई बैठक, रेपो रेट पर टिकी बाजार और कर्जदारों की नजर</title>
                                    <description><![CDATA[5 जून को आएगा फैसला, फिलहाल 5.25% पर कायम है रेपो रेट]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/rbi-mpc-meeting-2026-meeting-starts-from-today-eyes-of/article-54852"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/rbi-mpc-meeting-2026.jpg" alt=""></a><br /><p>भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की तीन दिवसीय बैठक आज 3 जून 2026 से शुरू हो गई है। यह बैठक 5 जून तक चलेगी, जिसके बाद आरबीआई गवर्नर की ओर से नीतिगत दरों और अर्थव्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों की घोषणा की जाएगी। इस बैठक पर बैंकिंग सेक्टर, उद्योग जगत, शेयर बाजार और आम कर्जदारों की खास नजर बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार रेपो रेट में किसी बड़े बदलाव की संभावना कम है और केंद्रीय बैंक फिलहाल मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए दरों को स्थिर रख सकता है। वर्तमान में रेपो रेट 5.25 प्रतिशत पर है। रेपो रेट वह दर होती है जिस पर वाणिज्यिक बैंक आरबीआई से अल्पकालिक कर्ज लेते हैं। इसी दर के आधार पर बैंकों के लोन और जमा योजनाओं की ब्याज दरें प्रभावित होती हैं। ऐसे में हर मॉनेटरी पॉलिसी बैठक का सीधा असर करोड़ों लोगों की जेब पर पड़ता है। गृह ऋण, वाहन ऋण, शिक्षा ऋण और व्यापारिक कर्ज लेने वाले लोग विशेष रूप से इस फैसले का इंतजार करते हैं।</p>
<p>पिछले कुछ महीनों में महंगाई दर नियंत्रित दायरे में बनी हुई है, लेकिन वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितताओं ने आरबीआई के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। पश्चिम एशिया में जारी तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक बाजारों में अस्थिरता जैसे कारक भारतीय अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में केंद्रीय बैंक किसी भी जल्दबाजी से बचते हुए संतुलित नीति अपनाने के पक्ष में दिखाई दे रहा है। बीते वर्ष 2025 में आरबीआई ने अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए कई बार ब्याज दरों में कटौती की थी। फरवरी 2025 में पहली बार करीब पांच साल बाद रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की कटौती की गई थी। इसके बाद अप्रैल, जून और दिसंबर में भी दरों में कमी की गई। कुल मिलाकर वर्ष 2025 में चार चरणों में 1.25 प्रतिशत की कटौती हुई और रेपो रेट 6.50 प्रतिशत से घटकर 5.25 प्रतिशत तक आ गया। इन फैसलों का असर यह हुआ कि कई बैंकों ने अपने लोन की ब्याज दरें कम कीं और उपभोक्ताओं को राहत मिली।</p>
<p>अब स्थिति पहले जैसी नहीं है। महंगाई भले ही नियंत्रण में है, लेकिन वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां लगातार बदल रही हैं। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि आरबीआई फिलहाल ब्याज दरों को यथावत रखकर आर्थिक संकेतकों पर नजर बनाए रखना चाहेगा। कई वित्तीय संस्थानों की रिपोर्ट में भी अनुमान जताया गया है कि इस बैठक में रेपो रेट में कटौती की संभावना बेहद सीमित है। आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी में कुल छह सदस्य होते हैं। इनमें तीन सदस्य रिजर्व बैंक के प्रतिनिधि होते हैं जबकि तीन सदस्य केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किए जाते हैं। समिति आर्थिक विकास, महंगाई, रोजगार, उपभोक्ता मांग और वैश्विक परिस्थितियों का आकलन करने के बाद नीतिगत फैसले लेती है। प्रत्येक सदस्य अपना मत देता है और बहुमत के आधार पर अंतिम निर्णय लिया जाता है।</p>
<p>रेपो रेट का आम लोगों के जीवन पर सीधा प्रभाव पड़ता है। जब आरबीआई ब्याज दरें बढ़ाता है तो बैंकों के लिए धन जुटाना महंगा हो जाता है। इसके बाद बैंक ग्राहकों को दिए जाने वाले लोन की ब्याज दरें भी बढ़ा देते हैं। इससे होम लोन, कार लोन और अन्य कर्ज महंगे हो जाते हैं। दूसरी ओर जब रेपो रेट घटाया जाता है तो बैंकों को सस्ता कर्ज मिलता है और वे ग्राहकों को भी कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध करा सकते हैं। मौजूदा समय में भारतीय अर्थव्यवस्था अपेक्षाकृत मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही है। विनिर्माण गतिविधियों में सुधार, सेवाक्षेत्र की मजबूती और सरकारी निवेश योजनाओं से विकास को समर्थन मिल रहा है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में जारी अस्थिरता और वैश्विक मांग में कमजोरी जैसी चुनौतियां भी मौजूद हैं। इसलिए आरबीआई को विकास और महंगाई के बीच संतुलन बनाए रखना होगा।</p>
<p>शेयर बाजार भी इस बैठक पर करीबी नजर बनाए हुए है। निवेशकों को उम्मीद है कि आरबीआई अर्थव्यवस्था को लेकर सकारात्मक संकेत देगा। यदि केंद्रीय बैंक विकास दर के अनुमान को बरकरार रखता है और महंगाई को नियंत्रित बताता है तो बाजार में सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है। वहीं किसी अप्रत्याशित फैसले का असर बाजार की चाल पर भी पड़ सकता है। 5 जून को होने वाली घोषणा के साथ यह साफ हो जाएगा कि आने वाले महीनों में ब्याज दरों की दिशा क्या रहने वाली है।आरबीआई इस बार रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर ही बनाए रख सकता है। हालांकि केंद्रीय बैंक के बयान और भविष्य के संकेत निवेशकों, उद्योगों और आम उपभोक्ताओं के लिए कहीं अधिक महत्वपूर्ण होंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 14:17:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>मिडिल ईस्ट संकट के बीच RBI का बड़ा फैसला, सरकार को मिलेगा रिकॉर्ड मुनाफा</title>
                                    <description><![CDATA[मिडिल ईस्ट संकट के बीच RBI सरकार को अब तक का सबसे बड़ा डिविडेंड देने की तैयारी में है, सरकारी खजाने को बड़ी राहत मिलेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/big-decision-of-rbi-amid-middle-east-crisis-government-will/article-53283"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-13t164953.547.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मिडिल ईस्ट में तनाव और वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता के बीच भारत के लिए एक राहत भरी खबर आई है। भारतीय रिजर्व बैंक</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे हम </span>RBI <span lang="hi" xml:lang="hi">कहते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस बार केंद्र सरकार को अब तक का सबसे बड़ा लाभांश देने की योजना बना रहा है। शुरुआती जानकारी के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस महीने होने वाली </span>RBI <span lang="hi" xml:lang="hi">बोर्ड की बैठक में इस पर अंतिम फैसला हो सकता है। ऐसा माना जा रहा है कि यह राशि पिछले साल के रिकॉर्ड को भी पार कर सकती है। जब दुनिया के कई देशों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब भारत के सरकारी खजाने में आने वाला ये पैसा एक बड़ी ताकत साबित हो सकता है। आर्थिक मामलों से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि इससे सरकार को खर्च बढ़ाने और विकास परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दरअसल</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, RBI <span lang="hi" xml:lang="hi">हर साल अपने सरप्लस फंड का एक हिस्सा केंद्र सरकार को ट्रांसफर करता है। यह प्रक्रिया </span>‘<span lang="hi" xml:lang="hi">इकोनॉमिक कैपिटल फ्रेमवर्क</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">यानी </span>ECF <span lang="hi" xml:lang="hi">के तहत होती है। इसके मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रिजर्व बैंक को अपनी बैलेंस शीट का एक हिस्सा जोखिम सुरक्षा फंड के तौर पर अलग रखना होता है। बाकी की राशि सरकार को दी जाती है। पिछले वित्त वर्ष में </span>RBI <span lang="hi" xml:lang="hi">ने सरकार को 2.69 लाख करोड़ रुपये का डिविडेंड दिया था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए थे। इससे पहले यह आंकड़ा 2.11 लाख करोड़ रुपये था। अब जो संकेत मिल रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनके अनुसार इस बार आंकड़ा और बढ़ सकता है। वित्त मंत्रालय से जुड़े सूत्रों का कहना है कि विदेशी मुद्रा भंडार से मिली कमाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बॉंड बाजार और ब्याज आय ने </span>RBI <span lang="hi" xml:lang="hi">की कमाई को मजबूत किया है। यही वजह है कि सरकार को इस बार ज्यादा लाभ मिलने की उम्मीद है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">वहीं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकारी बैंकों का प्रदर्शन भी सरकार के लिए राहत लेकर आया है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने लगातार चौथे साल अच्छा मुनाफा दर्ज किया है। वित्त वर्ष 2025-26 में इन बैंकों का कुल शुद्ध लाभ लगभग 1.98 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। खराब कर्ज में कमी और लोन ग्रोथ बढ़ने का असर अब साफ दिखाई दे रहा है। कई सरकारी बैंक अब रिकॉर्ड स्तर पर कमाई कर रहे हैं। इसी वजह से सरकार को </span>RBI <span lang="hi" xml:lang="hi">से ही नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि बैंकों से भी बड़ा लाभांश मिलने वाला है। बजट में सरकार ने </span>RBI <span lang="hi" xml:lang="hi">और सरकारी बैंकों से 3.16 लाख करोड़ रुपये मिलने का अनुमान लगाया था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन मौजूदा हालात के मद्देनजर यह आंकड़ा और बढ़ सकता है। आर्थिक जानकार मानते हैं कि अगर वैश्विक हालात और खराब होते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब भी भारत के पास खर्च करने के लिए पर्याप्त वित्तीय ताकत बनी रहेगी।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सरकार के लिए यह पैसा इसलिए भी महत्वपूर्ण है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि इससे बिना नए टैक्स लगाए इंफ्रास्ट्रक्चर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ग्रामीण योजनाओं और सामाजिक योजनाओं पर खर्च बढ़ाया जा सकता है। मिडिल ईस्ट संकट के चलते कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है और इसका असर दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ रहा है। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारत की स्थिति अभी संतुलित नजर आ रही है। टैक्स कलेक्शन में भी बढ़ोतरी हो रही है और गैर-कर राजस्व लगातार मजबूत हो रहा है। ऐसे में सरकार के पास विकास योजनाओं को जारी रखने का अतिरिक्त स्पेस बनता दिख रहा है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 May 2026 17:23:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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                <title>इंदौर में बैंक मैनेजर के यौन उत्पीड़न के आरोप, जांच की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[इंदौर बैंक मैनेजर यौन उत्पीड़न मामले में पूर्व एक्सिस बैंक मैनेजर ने वरिष्ठ अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं, कलेक्टर से जांच की मांग की गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/demand-for-investigation-into-allegations-of-sexual-harassment-of-bank/article-51784"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/indore-mp.jpg" alt=""></a><br /><p>इंदौर में एक निजी बैंक की पूर्व मैनेजर द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों ने कार्यस्थल की सुरक्षा और व्यवहार को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़िता ने वरिष्ठ अधिकारियों पर मानसिक, शारीरिक उत्पीड़न और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। मामला अब प्रशासनिक जांच के दायरे में आ गया है।</p>
<h5><strong>इंदौर में बैंक मैनेजर आरोप मामला</strong></h5>
<p>इंदौर में बैंकिंग सेक्टर से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें एक निजी बैंक की पूर्व ऑपरेशन हेड (बदला हुआ नाम निहारिका) ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों पर शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। इंदौर बैंक मैनेजर यौन उत्पीड़न मामले में पीड़िता ने मंगलवार को कलेक्टर जनसुनवाई में आवेदन देकर निष्पक्ष जांच की मांग की है। पीड़िता का आरोप है कि कार्यस्थल पर उन्हें लगातार अश्लील टिप्पणियों, अनुचित व्यवहार और मानसिक दबाव का सामना करना पड़ा। इसके साथ ही नौकरी छोड़ने के बाद भी उन्हें आर्थिक रूप से परेशान किए जाने का दावा किया गया है।</p>
<h5><strong>कार्यस्थल पर गंभीर आरोप</strong></h5>
<p>पीड़िता के अनुसार, फरवरी 2023 से मई 2025 के बीच उनके कार्यकाल में कई बार वरिष्ठ अधिकारियों ने उन्हें केबिन में बुलाकर अश्लील इशारे किए और डबल मीनिंग बातें कही गईं।आरोप यह भी है कि मासिक धर्म के दौरान भी उन्हें लंबे समय तक खड़े रहकर मीटिंग में शामिल होना पड़ा और बैठने की अनुमति नहीं दी गई। साथ ही बैंक की अनिवार्य छुट्टियों का भी पालन नहीं होने दिया गया। इंदौर बैंक मैनेजर यौन उत्पीड़न मामले में यह भी दावा किया गया है कि उनके अच्छे प्रदर्शन के बावजूद कार्यस्थल पर दबाव का माहौल लगातार बना रहा।</p>
<h5><strong>इस्तीफे के बाद विवाद</strong></h5>
<p>पीड़िता ने बताया कि लगातार दबाव और मानसिक उत्पीड़न के कारण उन्होंने नौकरी से इस्तीफा दे दिया। हालांकि, नोटिस पीरियड पूरा करने के बावजूद उन्हें कथित रूप से बकाया बोनस और अन्य भुगतान नहीं दिए गए।आरोप है कि बोनस मांगने पर क्षेत्रीय और जोनल अधिकारियों ने भुगतान रोक दिया और उन्हें विभिन्न स्तरों पर शिकायत करने के बावजूद राहत नहीं मिली।इंदौर बैंक मैनेजर यौन उत्पीड़न मामला नौकरी छोड़ने के बाद भी जारी दबाव और धमकियों के आरोपों के कारण और गंभीर हो गया है।</p>
<h5><strong>धमकी और शिकायतें</strong></h5>
<p>पीड़िता का कहना है कि शिकायत दर्ज कराने के बाद उन्हें कथित रूप से धमकी दी गई कि उनका करियर बर्बाद कर दिया जाएगा। इसके अलावा विभिन्न कार्यालयों के चक्कर लगवाकर मानसिक रूप से परेशान करने का भी आरोप है। उन्होंने ‘शी-बॉक्स पोर्टल’ और सरकारी लेबर विभाग में भी शिकायत दर्ज कराई है, लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई नहीं होने का दावा किया गया है।</p>
<h5><strong>बैंक का पक्ष और जांच की मांग</strong></h5>
<p>मामले में बैंक के डिप्टी एचआर अधिकारी ने कहा है कि उनके पास यौन उत्पीड़न से जुड़ी कोई औपचारिक शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। हालांकि, बोनस भुगतान को लेकर एक अलग शिकायत मिलने की बात स्वीकार की गई है, जिसे बैंक नीति के अनुसार निपटाया गया। पीड़िता ने कलेक्टर से निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की अपील की है।</p>
<p>यह मामला अब प्रशासनिक जांच की दिशा में बढ़ रहा है। इंदौर बैंक मैनेजर यौन उत्पीड़न से जुड़ी इस शिकायत ने कार्यस्थल सुरक्षा और कॉरपोरेट जवाबदेही पर नई बहस को जन्म दिया है। आने वाले दिनों में जांच के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/demand-for-investigation-into-allegations-of-sexual-harassment-of-bank/article-51784</link>
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                <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 16:27:49 +0530</pubDate>
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