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                <title>Banking Rules - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Banking Rules RSS Feed</description>
                
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                <title>फोनपे वॉलेट पर नया नियम, इनएक्टिव यूजर्स से ₹100 फीस</title>
                                    <description><![CDATA[365 दिन इस्तेमाल न करने पर वॉलेट से हर तिमाही कटेंगे ₹100]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/new-rule-on-phonepe-wallet-%E2%82%B9100-fee-from-inactive-users/article-56439"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/phonepe-wallet-charges.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म फोनपे एक बार फिर चर्चा में है, लेकिन इस बार वजह यूजर्स के लिए राहत वाली नहीं बल्कि चिंता बढ़ाने वाली है। कंपनी के नए नियमों के मुताबिक अगर किसी यूजर का PhonePe वॉलेट लगातार 365 दिनों तक इस्तेमाल नहीं होता है तो उसे इनएक्टिव यानी ‘डॉर्मेंट’ मान लिया जाएगा। ऐसे वॉलेट पर हर तीन महीने में ₹100 का मेंटेनेंस चार्ज लगाया जाएगा। कंपनी की ओर से कहा गया है कि इस बदलाव से पहले यूजर्स को 15 दिन का नोटिस भेजा जाएगा और लगातार अलर्ट भी दिए जाएंगे। इस फैसले के बाद सोशल मीडिया पर काफी नाराजगी देखने को मिल रही है। X (पहले ट्विटर) और Reddit जैसे प्लेटफॉर्म पर कई यूजर्स ने स्क्रीनशॉट शेयर कर दावा किया है कि उन्हें पहले से ही वॉलेट एक्टिव रखने के मैसेज आने लगे हैं। लोगों का कहना है कि यह नियम खासकर उन यूजर्स के लिए परेशानी पैदा करेगा जो वॉलेट में छोटी रकम रखकर लंबे समय तक इस्तेमाल नहीं करते। कई लोगों ने इसे “छुपा हुआ चार्ज” और “अनचाहा पेनल्टी सिस्टम” बताया है। कंपनी के नियमों के अनुसार अगर नोटिस पीरियड के बाद भी वॉलेट एक्टिव नहीं किया गया तो चार्ज सीधे बैलेंस से काट लिया जाएगा। अगर वॉलेट में ₹100 से कम राशि होगी तो पूरी रकम खत्म कर दी जाएगी और बैलेंस को जीरो कर दिया जाएगा। कंपनी के पास यह अधिकार भी रहेगा कि वह समय-समय पर अपनी फीस पॉलिसी में बदलाव कर सके और नए चार्ज लागू कर सके। यह बात भी यूजर्स की नाराजगी की एक बड़ी वजह बन रही है क्योंकि इससे पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">डिजिटल पेमेंट सेक्टर में यह पहली बार नहीं है जब किसी वॉलेट ने इनएक्टिविटी चार्ज लागू किया हो। इससे पहले मोबिक्विक ने भी अपने इनएक्टिव यूजर्स से सालाना मेंटेनेंस फीस लेने की घोषणा की थी। वहीं एयरटेल पेमेंट्स बैंक भी अपनी पॉलिसी में इनएक्टिव अकाउंट्स पर चार्ज का प्रावधान रखता है। हालांकि फोनपे का बड़ा यूजर बेस और तिमाही आधार पर ₹100 की कटौती को लेकर मामला ज्यादा चर्चा में आ गया है। पिछले कुछ वर्षों में भारत में UPI ट्रांजैक्शन तेजी से बढ़े हैं, जिससे डिजिटल वॉलेट का उपयोग काफी कम हो गया है। अब लोग छोटे और बड़े भुगतान सीधे UPI के जरिए करते हैं, जबकि वॉलेट में पैसे लंबे समय तक पड़े रह जाते हैं। ऐसे में कंपनियों का तर्क है कि वॉलेट को सुरक्षित और ऑपरेशनल बनाए रखने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर, सिक्योरिटी और कंप्लायंस पर लगातार खर्च होता है, जिसे पूरा करने के लिए यह चार्ज जरूरी हो जाता है। हालांकि यूजर्स का कहना है कि इस तरह के चार्ज उन लोगों पर बोझ डालते हैं जो वॉलेट का नियमित इस्तेमाल नहीं करते लेकिन उसमें थोड़ी रकम सुरक्षित रखने के लिए छोड़ देते हैं। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने यह भी सवाल उठाया है कि क्या डिजिटल वॉलेट अब धीरे-धीरे बैंक जैसी फीस स्ट्रक्चर की ओर बढ़ रहे हैं। फिलहाल कंपनी की ओर से साफ किया गया है कि यह नियम केवल लंबे समय तक निष्क्रिय वॉलेट पर लागू होगा और एक्टिव यूजर्स पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।आने वाले समय में डिजिटल पेमेंट कंपनियां अपने रेवेन्यू मॉडल को मजबूत करने के लिए इस तरह की पॉलिसी और सख्त कर सकती हैं। UPI के दबदबे के बीच वॉलेट कंपनियों के लिए यह एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है, जहां उन्हें सर्विस और कमाई के बीच संतुलन बनाना होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 11:24:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>RBI के नए प्रस्ताव से बढ़ी चिंता, अब लोन नहीं चुकाया तो नहीं कर पाएंगे मोबाइल का इस्तेमाल!</title>
                                    <description><![CDATA[RBI के प्रस्ताव के मुताबिक मोबाइल लोन की EMI नहीं चुकाने पर बैंक फोन की कुछ सुविधाएं बंद कर सकता है। नए नियमों पर चर्चा तेज।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/concern-increased-due-to-new-proposal-of-rbi-now-if/article-53875"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/rbi-mobile-loans-new-rules.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मोबाइल फोन लोन पर खरीदारी करने वाले करोड़ों ग्राहकों के बीच भारतीय रिजर्व बैंक का नया प्रस्ताव चर्चा का विषय बना हुआ है। </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">RBI <span lang="hi" xml:lang="hi">ने लोन रिकवरी से जुड़े नियमों में बदलाव का एक ड्राफ्ट जारी किया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें कहा गया है कि अगर कोई ग्राहक लंबे समय तक मोबाइल लोन की ईएमआई नहीं चुकाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो बैंक उसके स्मार्टफोन की कुछ सुविधाओं को सीमित कर सकता है। जैसे ही यह खबर सामने आई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं भी आनी शुरू हो गईं। कुछ इसे सख्त कदम मानते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि कुछ का कहना है कि इससे लोन रिकवरी प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी। हालांकि </span>RBI <span lang="hi" xml:lang="hi">ने स्पष्ट किया है कि यह नियम सिर्फ उन डिवाइस पर लागू होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिन्हें सीधे बैंक या फाइनेंस कंपनी के लोन से खरीदा गया हो।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">प्रस्तावित नियमों के मुताबिक</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">यदि कोई ग्राहक 90 दिन तक लगातार </span>EMI <span lang="hi" xml:lang="hi">नहीं भरता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो बैंक कार्रवाई कर सकता है। लेकिन इससे पहले ग्राहक को एक नोटिस देना जरूरी होगा। नोटिस मिलने के बाद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बैंक फोन की कुछ सुविधाएं बंद या सीमित कर सकेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन फोन को पूरी तरह से बंद नहीं किया जा सकेगा। </span>RBI <span lang="hi" xml:lang="hi">ने आश्वासन दिया है कि इंटरनेट एक्सेस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इनकमिंग कॉल</span>, SOS <span lang="hi" xml:lang="hi">फीचर और सरकारी इमरजेंसी अलर्ट जैसी जरूरी सेवाएं चालू रहेंगी। इसका मतलब यह है कि ग्राहक पूरी तरह से संपर्क से बाहर नहीं होगा। बताया गया है कि इस सिस्टम को तकनीकी तौर पर लागू करने के लिए बैंकों और मोबाइल कंपनियों के बीच समन्वय की आवश्यकता पड़ेगी। फिलहाल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह सिर्फ प्रस्ताव के स्तर पर है और इस पर सुझाव मांगे गए हैं।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">RBI <span lang="hi" xml:lang="hi">ने रिकवरी एजेंट्स के व्यवहार को लेकर भी सख्त रुख दिखाई है। नए प्रस्ताव में कहा गया है कि एजेंट ग्राहकों को परेशान नहीं कर सकेंगे और न ही गाली-गलौज कर सकेंगे या सोशल मीडिया पर कोई जानकारी साझा कर सकेंगे। जरूरत से ज्यादा कॉल और मैसेज भेजना भी नियमों का उल्लंघन माना जाएगा। इसके अलावा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बैंकों को रिकवरी से जुड़ी हर कॉल का रिकॉर्ड रखना होगा। कब कॉल की गई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कितनी बार की गई और बातचीत में क्या कहा गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसका पूरा डेटा सुरक्षित रखना जरूरी होगा। एक और अहम बात यह है कि अगर ग्राहक बकाया </span>EMI <span lang="hi" xml:lang="hi">चुका देता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो बैंक को एक घंटे के भीतर फोन की बंद की गई सुविधाएं दोबारा शुरू करनी होंगी। ऐसा नहीं करने पर बैंक को हर घंटे के हिसाब से मुआवजा देना पड़ सकता है। </span>RBI <span lang="hi" xml:lang="hi">ने इन प्रस्तावों पर 31 मई तक लोगों और संस्थाओं से सुझाव मांगे हैं। माना जा रहा है कि नए नियम अक्टूबर 2026 से लागू किए जा सकते हैं।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 May 2026 13:21:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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                <title>विदेशी ऑटो पेमेंट पर RBI सख्त, 24 घंटे पहले मिलेगा अलर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[ ई-मेंडेट नियम बदले, यूजर को मिलेगा ज्यादा कंट्रोल अब विदेशी ऐप्स के ऑटोमैटिक पेमेंट पर यूजर्स की पकड़ मजबूत होगी। पेमेंट से पहले नोटिफिकेशन और रोकने का विकल्प, डिजिटल सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/rbi-strict-on-foreign-auto-payment-alert-will-be-received/article-51799"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/business---2026-04-22t085607.026.jpg" alt=""></a><br /><p>भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने विदेशी कंपनियों को किए जाने वाले ऑटोमैटिक पेमेंट (ई-मेंडेट) से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है। नए नियमों के तहत अब यूजर्स को किसी भी विदेशी सर्विस—जैसे ओटीटी प्लेटफॉर्म या ऐप सब्सक्रिप्शन—के लिए होने वाले ऑटो-डेबिट से 24 घंटे पहले अनिवार्य रूप से नोटिफिकेशन मिलेगा। यह कदम डिजिटल ट्रांजैक्शन में पारदर्शिता बढ़ाने और यूजर्स को धोखाधड़ी से बचाने के उद्देश्य से उठाया गया है।</p>
<p>RBI के इस सरकारी अपडेट के अनुसार, अब हर ऑटो-पेमेंट से पहले एडिशनल फैक्टर ऑथेंटिकेशन (AFA) यानी OTP आधारित वेरिफिकेशन अनिवार्य होगा। इससे यूजर्स को यह सुविधा मिलेगी कि वे चाहें तो भुगतान को समय रहते रोक सकें। यह नियम खासतौर पर विदेशी मर्चेंट्स पर लागू होगा, जहां पहले ऐसी पारदर्शिता नहीं थी।</p>
<h5><span><strong>नए नियम और लिमिट</strong></span></h5>
<p>RBI ने ई-मेंडेट ट्रांजैक्शन के लिए स्पष्ट सीमा तय की है।<br />₹15,000 तक के ट्रांजैक्शन बिना अतिरिक्त ऑथेंटिकेशन के हो सकेंगे, जबकि विशेष श्रेणियों के लिए लिमिट बढ़ाई गई है।</p>
<p>क्रेडिट कार्ड बिल, बीमा प्रीमियम और म्यूचुअल फंड भुगतान के लिए यह सीमा ₹1 लाख तक रखी गई है। इससे अधिक राशि के लिए हर बार अतिरिक्त सत्यापन जरूरी होगा। साथ ही, ग्राहक अपनी अधिकतम भुगतान सीमा भी तय कर सकेंगे, जिससे अनियंत्रित कटौती की संभावना कम होगी।</p>
<h5><span><strong>फ्रॉड सुरक्षा और रिफंड</strong></span></h5>
<p>RBI ने गलत ट्रांजैक्शन की स्थिति में ग्राहकों के अधिकार भी स्पष्ट किए हैं।<br />अगर ग्राहक 3 कार्य दिवस के भीतर शिकायत दर्ज कराता है, तो उसे पूरी राशि वापस मिल सकती है।</p>
<p>अधिकारियों के अनुसार, बैंक की गलती होने पर यूजर की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी (जीरो लायबिलिटी)। वहीं 4 से 7 दिन के भीतर रिपोर्ट करने पर सीमित जिम्मेदारी लागू होगी। 7 दिन के बाद मामला बैंक की नीति के अनुसार तय किया जाएगा।</p>
<p>पिछले कुछ वर्षों में विदेशी डिजिटल सेवाओं—जैसे वीडियो स्ट्रीमिंग और ऑनलाइन सब्सक्रिप्शन—का उपयोग तेजी से बढ़ा है।<br />रिपोर्ट्स के अनुसार, कई मामलों में बिना जानकारी के ऑटो-डेबिट होने या फ्रॉड की शिकायतें सामने आई थीं, जिसके बाद RBI ने नियमों को सख्त करने का फैसला लिया।</p>
<p>इन नए नियमों से यूजर्स को अपने डिजिटल खर्च पर बेहतर नियंत्रण मिलेगा।विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाएगा, जिससे उपभोक्ता विश्वास भी बढ़ेगा।साथ ही, बैंक अब ई-मेंडेट सुविधा के लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं ले सकेंगे, जिससे ग्राहकों को सीधा लाभ मिलेगा।RBI के निर्देशों के बाद सभी बैंकों और पेमेंट प्लेटफॉर्म्स को इन नियमों को लागू करना होगा।आने वाले समय में डिजिटल पेमेंट सिस्टम में और सख्ती देखने को मिल सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 08:58:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
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